बेवफा -६७
किरण- नहीं सूरज- यह सच्चाई है ?जानते हो न सच्चाई कड़वी होती है और यह कड़वा सच है की.... खैर जाने दो....
सूरज- कहते-कहते रुक क्यों रहे हो ? बताओ न ... क्या कोई दिक्कत है ?
किरण- बताने में भी मुश्किल है और छिपाने में भी...
सूरज- प्यार में न कुछ बताने के लिए होता है , और न कुछ छिपाने के लिए ... ऐसी क्या बात है जिसे अपने महबूब से छिपाना चाहती हो ?
किरण- मैं ज़िंदा नहीं हूँ सूरज , मैं मर चुकी हूँ. मुझे मरे हुए भी काफी समय हो चुका है, कहिये की एक जमाना बीत चुका है. यह सुनकर आप चौंक सकते हैं. मगर............
सूरज- मगर क्या किराण ? जों कुछ बाकी है उसे भी बोल दो, कहदो की तुम मर चुकी हो, भूत बन चुकी हो . और इस समय तुम सिर्फ एक आत्मा हो... यही न की कुछ और ? मै कई बार सुन चूका हूँ ,
वैसे भी अभी अप्रैल महीन में समय बाकी है. तब तुम अप्रैल फूल बना चुकी हो.
किरण- इस बार जोक नहीं है, सच है. मैंने पहले तुम्हें यह बात बताई तो थी लेकिन मजाक में उडादी , यह सोचकर की तुम बड़े दुखी हो रहे थे .. और तुम्हारा दुःख मुझसे देखा नहीं जा रहा था .
सूरज- तब और अब में कितना अंतर आ गया ? क्या अब मै यह सुनकर खुश हो जाउंगा ? क्या अब हंसी के ठहाके लगाउंगा ? पहले मेरे बारे में इतना ख़याल था अब अचानक विचार कैसे बदल गए ?
किरण- सोच रही हूँ की बाद में जब तुमको यह सब कुछ पता चलेगा तो शायद सहन नहीं कर पाओगे ? हा हा हा .......
सूरज - तुम्हारे साथ समय बिताकर अब मैं भी मजबूत बन गया हूँ. मैं भी अब सच्चाई और मजाक में अंतर महसूस कर चूका हूँ. गिन भी रही हो की हम लोग कितनी बार सुहागरात मना चुके हैं.
किरण - अच्छी तरह से. अब यह हमारा सातवाँ नंबर है और मै संतुष्टि के कगार पर हूँ मैंने पहली बार इतना प्यार पाया है. इतना सुख मिला है की कभी भूल नहीं पाउंगी. मैं जहां भी रहूंगी , तुम्हारी यादों को अपने
सीने से चिपकाकर रहूंगी, एक बार फिर कहूंगी की तुम आम इंसानों से अलग हो, सबसे हटकर हो और सबसे श्रेष्ठ हो.
सूरज- तुम तो मेरे साथ बचा हुआ जीवन बिताना चाह रही थीं, मुझे अपने यहाँ नौकरी देने वाली थीं, उन इरादों का क्या हुआ ? उन वादों का क्या हुआ जों तुमने किये थे .
किरण- तुम नौकर के लायक नहीं , मालिक के लायक हो. मेरे जैसी सैकड़ों नौकरानी तुम्हारी साथ काम करने के लिए तैयार हो जायेंगी . मैं यह सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ. पदम सिंह नाम का मेरा एक मैएंजर है ,
तुमेहन उससे मिलना होगा, वह आगे की सारी बातें तुम्हें समझा देगा. मेरा यह होटल, जायदाद सब तुम्हारा है. इसे अच्छी तरह से चलाना. गरीबों की मदद करना और कभी किसी लड़की को जिस्मफरोशी के जाल में
मत धकेलना . अगर कहीं यह देखो की कोई मजबूर महिला है तो उसकी यथा संभव मदद करना.
सूरज- तुम तो गंभीर हो रही हो किरण. कहदो की तुमने अपने बारे में जों बताया है, वह सब झूठ है, मजाक है. कहदो की मुझे डराने के , मजा लेने के लिए ऐसा सब कह रही हो.
किरण- नहीं सूरज, अब मैं और झूठ नहीं बोल सकती , मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ था. मैं जिस तरह अभिप्रिय और ब्रिज के जाल में फंसी मैंने भी कई लड़कियों को फिर उसी जाल में फंसा लिया था . मै वैश्या
तो बन गयी , मगर उस दल दल से निकल नहीं पायी. आखिरकार मैंने भी अपना धंधा शुरू कर दिया और बहुत दौलत कमाई, लेकिन मजबूर लड़कियों की आहों ने मेरा सत्यानाश कर दिया . एक गरीब फ़कीर की
शिष्या के साथ भी मैंने यही किया. वह मेरे पास चन्दा लेने आयी थी , मैंने उसे वैश्या बना डला. उस फ़कीर ने मुझे श्राप दिया. कहा की मैं तड़प-तडपकर मरुंगी , लेकिन फिर नही संतुष्टि नहीं मिल पायेगी .
मै भटकती ही रहूंगी. मुझे कहीं भी जगह नहीं मिलेगी. न तो म्रतुलोक में और न ही स्वर्ग लोक में. तब से मै भटक रही थी. मुझे बताया गया की अगर कोई मर्द मुझे एक रात में सात बार जिस्मानी सुख दे पायेगा
तभी मुझे मुक्ति मिलगी . और देखो . बरसों के इन्तजार के बाद तुम मुझे मिल ही गए. अब मै इस झंझट से मुक्त हो जाउंगी , सदा सदा के लिए मुझे छुटकारा मिल जाएगा .
सूरज- इसका मतलब , तुमने मुझसे प्यार नहीं किया, बल्कि मेरा इस्तेमाल किया. तुमने अपने फायदे के लिए मेरे साथ सम्बन्ध बनाए /
किरण- मुझे माफ करना सूरज.
सूरज- इसका मतलब तुमने जों प्यार के वादे किये थे, वे सब के सब झूठे थे ? तुम तो आखिर में बेवफा निकलीं किरण ? क्यों किया तुमने ऐसा ?
किरण- मैं मजबूर थी सूरज. मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं बचा था. ध्यान रहे , अगर तुम सात बार पूरा नहीं कर पाते तो तुम्हारी मौत हो जाती. मेरे कारण इस होटल में हर रात कोई न कोई मौत होती
ही रहती है, तुम इतने प्यारे हो की मै नहीं चाहती थी की तुम भी बेमौत मारे जाओ, इसलिए मै प्यार से तुम्हें सहयोग दे रही थी, तुम्हारी भावनाओं को उत्तेजित कर रही थी. गुड बाय सूरज...
सूरज की आँखों के सामने अन्धेरा छा गया, आँखें खुलीं तो अपने आपको अस्पताल में पाया. घर के लोग आ चुके थे, उसे लोगों ने बतया की मोटर साइकिल से वह गिर गया था, बड़ी मुश्किल से जान बची है.
लोग बता रहे थे की उस खंडहर के पास रोजाना कोई न कोई कॉल के गाल में समाजाता है. सूरज को यकीन नहीं हो रहा था की खंडहर वाली बेवफा की कहानी सच थी या झूठी ?
------ कल से पढ़ें धारावाहिक कहानी ' कुंवारी सुहागिन '
Tuesday, March 1, 2011
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