Friday, March 4, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग--3
पूजन- उन्हें हँसने दो, हमें अपना काम करने दो. मेरे करीब आ जाओ, मेरी बांहों में समा जाओ. प्यार का ऐसा मजा चखाउंगा की सारा डर निकल जाएगा .
पूजन ने झपट्टा मारकर अमृता को अपने बाहुपाश में कास लिया. अमृता का दिल सचमुच धड़क रहा था. उसके सीने के उभार जब ऊपर-नीचे होते तो पूजन की आँखों में वासना की चमक बढ़ जाती थी. उसने
अमृता के उन उभारों पर अपने दोनों हाथ रख दिए और उन्हें आहिस्ता-आहिस्ता दबाने लगा . अमृता की साँसें मानो थम गयीं. उसने अपनी आँखें बंद करलीं और अपने आपको ढीला छोड़ दिया/. उसकी चुप्पी देखकर
पूजन का हौसला और भी बढ़ गया. उसने अमृता के सुख होठों पर अपने होठ रख दिए और उसके मुख में अपनी जीभ घुमाने लगा . अमृता कुंवारी थी, उसने हाल में यौवन कीसीढ़ी पर कदम रखे थे, पूजन के हाथो
का दवाब अपने सीने पर पाकर वह बेहद उत्तेजित होने लगी. उसके मुख से सिकारियां निकलने लगीं, उसे सर्दी में भी गर्मी का एहसास हो रहा था. वह कसमसा रही थी और झूठे ही सही मगर अपने आपको छुडाने
का प्रयास भी कर रही थी. पूजन मुस्करा रहा था . काफी देर के बाद अमृता बोली-
- अब छोड़ भी दीजिए की जान लेने का इरादा है ? मै किस तरह मछली की तरह मचल रही देख नहीं रहे हो क्या ? अगर किसी ने हम दोनों को देख लिया तो पहाड़ टूट पडेगा .
पूजन- जों देखेगा , क्या उसने कभी किसी कली को फूल नहीं बनाया होगा ? क्या उसने कभी भी किसी कली का रस नहीं चूसा होगा. जों मर्द होता है वो तो अपने समय में भंवरा बंटा ही है . और अगर कोई देख भी
लेटा है तो तुम्हें टेंशन लेने की कोई बात नहीं है. ऐसा करो तुम मेरे पास ट्यूशन लगालो. मै तुम्हें अग्रेजी भी पढाता रहूंगा और कविता भी सिखा दूंगा . इसके साथ- साथ असली पाठ प्रेम का होता है, उसे भी सिखा
ही दूंगा. और तुम खुद भी तो वही चाहती हो न , वही सीखने के लिए बेताब हो . सच बोलो अगर झूठ बोलता हूँ तो.
अमृता- मुझे कहने में लाज आती है.
पूजन- अरे दुनिया को तो करने में भी लाज नहीं आती और तुम कहने भर से हिचकिचाती हो . ये क्या कमाल कर रही हो. दुनिया में अपन्ना कुछ नहीं सिवाय मौज मस्ती के . आज अगर कुछ नहीं किया तो बुढापे
में पछताना पडेगा. अच्छा ये बताओ लों अभी तक किसी लड़के के साथ तुम्हारा टांका भिडा है की नहीं ?
अमृता- नहीं, कभी नहीं. वैसे कई लड़के पटाने की कोशिश तो करते हैं, मगर मैं किसीको भाव ही नहीं देती.
पूजन- वैसे तुम्हारे मन में उमंग तो उठ रही हैं, शायद तुम भी इस जावानी के रसगुल्ले को चखना चाहती हो . हाँ या ना कहो सिर्फ.
अमृता= मुझे शर्म आती है , ऐसी बातें करना मुझे अच्छा नहीं लगता .
पूजन- इसका मतलब ये हुआ की अभी तक तुम्हे किसीके साथ भी काम क्रीडा का आनंद नहीं लिया है ?
अमृता- नहीं, कभी किसीसे नहीं . अभी तक मैं पूरी तरह से कुंवारी हूँ , अनछुई हूँ.
पूजन- तो आपने किसीको यह खेल खेलते हुए तो देखा ही होगा ?
अमृता- हाँ, इसी रात की तो बात है, मैंने अपनी भाभी को एक आदमी के साथ सेक्स करते हुए देख लिया था.
पूजन- क्या बात करती हो ? तुम्हारा भाई भी तो हट्टा-कट्टा है, क्या वह तुम्हारी भाभी को संतुष्ट नहीं कर पाता ? उसके रहते तुम्हारी भाभी दूसरे मर्द के साथ सेक्स कैसे कर सकती है ?
अमृता- मैंने अपनी आँखों से एक व्यक्ति को देखा , वह ४५ से कम उम्र का नहीं था. उसने अपने बालों पर काली मेहंदी लगाई हुई थी. तुम्हें तो मालूम ही है, भाई की शादी को अभी एक महीना ही हुआ है . भाई बिजनेस के सिलसिले में
शहर गया हुआ है. मम्मी-पापा एक शादी में गए हैं. बड़े घर में भाभी और मै अकेली ही थी. भाभी अपने कमरे में जल्दी सोने का बहाना करके सो गयी, तो मुझे भी नींद आ गयी . उसने मुझे नीची ही सुला दिया और खुद
ऊपर सोने चली गयी थी. रात के लगभग १२ बजे कुछ खुसर-फुसर सुनाई दी तो मेरी आँख खुल गयी. मैंने भाभी के कमरे से किसी मर्द की आवाज सुनी. पहली बार तो मुझे लगा की भाभी को शायद भैया की याद आ रही होगी
इसी कारण नींद गायब हो गयी होगी और टीवी देख रही होंगी. मगर मेरा यह अनुमान गलत निकला . क्योंकि इस बार जों आवाज मेरे कानों में पडी यह भाभी की सेक्सी और बहकी हुई आवाज थी . वह कह रही थी-
- तुम्हारे साथ सेक्स का जों आनंद मिलता है वह अपने आपमें में अदभुत है. मेरा पति तो बुद्धू है. वह कुछ नहीं कर पाता. अगर तुम नहीं आते तो मैं तो यहाँ पर शादीशुदा होकर भी कुंवारा जीवन गुजार रही होती .
पूजन- क्या बात कर रही हो ? क्या वह जोर-जोर से बोल रही थी ?
अमृता- हाँ, रात में तो वैसे भी थोड़ी आवाज भी ज्यादा सुनाई देती है. मैं उसकी आवाज को स्पष्ट सुन सकती थी, मैंने ऊपर वाले कमरे में जाने का मन बना लिया. सधे क़दमों से मैं वहाँ तक पहुँच गयी जहाँ भाभी उस व्यक्ति
की बांहों में बिलकुल नग्न अवस्था में पडी हुई थी. वे दोनों नशे में धुत थे और ऐसी अवस्था में थे की जिसे याद करते ही मैं उत्तेजक हो जाती हूँ.

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