- जापान में आए भीषण भूकंप से चार इंच खिसकी धरती
- सूनामी से अमेरिका में एक की मौत, जापान में परमाणु रिएक्टर में विस्फोट
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- 1700 से ज्यादा लोगों की मौत,88 हजार लापता
टोक्यो. फुकुशिमा डायची परमाणु संयंत्र के पहले रिएक्टर में धमाके के बाद, रविवार को एक और रिएक्टर में भीषण विस्फोट हुआ है। इसके अलावा एक तीसरे रिएक्टर में भी दबाव बढ़ता जा रहा है, जिसमें कभी भी विस्फोट हो सकता है। जापान सरकार ने इस रिएक्टर को विस्फोट से बचाने के युद्ध स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। अब तक 23 लोग रेडिएशन की चपेट में आ गए हैं। इसी बीच जापान में एक और बड़े भूकंप की चेतावनी दी गई है।
इसी बीच मरने वालों की संख्या बढ़कर करीब 2000 हो गई है। लेकिन जापान के उत्तर पूर्वी दिशा में स्थित मियागी अकेले में ही मौत की संख्या 10,000 के पार जाने की आशंका है। यहां के पुलिस प्रवक्ता गो सुगावरा ने कहा कि हालांकि अभी तक केवल 379 लाशें बरामद हुई हैं, लेकिन यह संख्या निश्चित ही काफी ज्यादा है। जापान में पानी, बिजली की भी जबर्दस्त समस्या पैदा हो गई है और यह कब तक हल होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। हालांकि जापान में सभी भारतीय सुरक्षित हैं, लेकिन करीब 25,000 भारतीय अभी भी वहां फंसे हुए हैं। जापान में आया भूकंप इतना तेज था कि इसने पृथ्वी को अपनी धुरी पर चार इंच खिसका दिया है। इसके साथ ही इस भूकम्प के कारण जापान का एक द्वीप भी अपने मूल स्थान से खिसक गया।
जापान में शनिवार को फुकुशिमा डायची परमाणु संयंत्र में धमाका हो गया था। इसके बाद सरकार ने फुकुशिमा प्लांट से रेडिएशन लीक की पुष्टि की है। जापान की क्योडो न्यूज ऐजेंसी ने बताया है कि वातावरण में रेडियो विकरण की मात्रा बीस गुना बढ़ गई है। धमाके के बाद प्लांट की दीवार और छत गिर गई है। इसी के साथ फुकुशिमा डाइची यूनिट 1 ऐटमी प्लांट के दो दूसरे रिएक्टरों में भी दबाव बढ़ रगया था। और आज इसमें से एक में विस्फोट हो गया। प्लांट के कर्मचारी तीसरे रिएक्टर को ठंडा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आपातकालीन कूलिंग सिस्टम फेल होने से यह संभव नहीं दिखाई दे रहा है। प्लांट के ऑपरेटर ने भी कहा कि रिएक्टर में दबाव काफी बढ़ गया है और यहां भी विस्फोट का खतरा है। प्रशासन ने यहां से करीब 1.70 लाख लोगों को हटा दिया है।
जापान ने देश में परमाणु आपातकाल घोषित कर दिया है। सरकार ने माना है कि हवा के कारण रेडियोएक्टिव पदार्थ वातावरण में फैल सकते हैं और नागरिकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
क्यों हुआ विस्फोट
रिएक्टर के विस्फोट होने में बढ़ रहा दवाब को मुख्य कारण है ही, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस के मिश्रण से भी धमाका होने की संभावना बढ़ रही है। रिएक्टर को ठंडा करने के लिए पानी डाला जा रहा है जिससे हाइड्रोजन गैस बन रही है। रिएक्टर के अंदर से दबाव कम करने के लिए ऑक्सीजन गैस रिलीज की जा रही है। और दोनों के मिलने पर विस्फोट हुआ।
कई स्थानों पर अभी नहीं पहुंची राहत
जापान में भूकंप और सुनामी के दो दिनों के बाद भी उत्तर-पूर्वी तट के कई छोटे समुदाय देश से कटे हुए हैं. कई इलाकों पर लोग छतों पर अटके हुए हैं और सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। मरने वालों में ज़्यादातर वो लोग हैं जिन्हें सुनामी की लहरें बहाकर ले गईं. कई गाँव तो पूरे के पूरे बह गए। बंदरगाह के पास बसे मिनामीसानरिकू कस्बे में 10 हज़ार लोगों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। 25 हज़ार से ज़्यादा की आबादी वाले रिकुज़ेनतकाडा कस्बा लगभग पूरी तरह तबाह हो गया है. वहाँ से 400 शव बरामद हुए हैं।
बिजली पानी व्यवस्था सामान्य नहीं
जापान में अभी बिजली, पानी की व्यवस्था सामान्य नहीं हुई है। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (टेप्को) ने कहा है कि यह समस्या कब तक जारी रहेगी, कहना मुश्किल है। उन्होंने पूरे देश में ब्लैक ऑउट का भी खतरा बताया है। टेप्को ही फुकुशिमा पावर प्लांट की देखरेख करता है। टेप्को के अधिकारियों ने माना कि बढ़ते दबाव को कम करने के लिए वॉल्व खोले गए, जिससे रेडियोएक्टिव वाष्प भी बाहर निकलीं। देश में जल आपूर्ति भी अभी सामान्य नहीं हो सकी है।
जापान फिर डोला भूकंप से
टोक्यो के पास पूर्वी तट पर आए तगड़े भूकंप से जापान एक बार फिर हिल गया। भूंकप से राजधानी की इमारतें हिलने लगीं। अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि भूकंप की तीव्रता 6.2 थी और आज सुबह यह 10 बजकर 26 मिनट (स्थानीय समयानुसार) पर आया। यह टोक्यो से 179 किलोमीटर पूर्व में 24.5 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। जापान का उत्तर-पूर्वी तट शुक्रवार को 8.9 की तीव्रता वाले भूकंप से दहल उठा था, जो जापान में रेकॉर्ड भूकंप में सबसे बड़ा था। इसके बाद आई सूनामी ने तटीय इलाकों में भयंकर तबाही मचाई। जापान में शुक्रवार को आए भयानक भूकंप के बाद 150 से ज्यादा झटके महसूस किए जा चुके ह
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