प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार को सुरेश, उसकी पत्नी और उसकी डेढ साल की बच्ची वंशिका एक कमरे में सो रहे थे, जबकि घर के दूसरे कमरे में सुरेश का सबसे छोटा भाई सन्नी व उसकी बीवी गीता सो रही थी। सन्नी ने देर रात लगभग एक बजे दोनों कमरो के बाहर से ताला लगाकर आग लगा दी। आग देखकर पडोसियो ने कमरो के ताले तोडे, लेकिन जब तक सुरेश के कमरे का ताला तोडा तब तक सुरेश, उसकी पत्नी और बच्ची बुरी तरह झुलस चुके थे।
तीनों को पास ही के अस्पताल में ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड दिया। बताया गया है कि इन तीनों भाईयों में संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। परिजनों ने आरोप लगाया है कि संपत्ति के लिए संजय ने इस वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस फरार सन्नी की तलाश कर रही है और मामले की छानबीन कर रही है।

भिवानी. भैणी जाटान में वकील साहब वजीर सिंह गोयत के जिस घर में लोग कभी अपनी दिक्कतें सुलझवाने आते थे, उसी घर में सोमवार को तमाशबीनों की भीड़ लगी थी। हर कोई दंग था कि क्यों एक भाई ने अपने ही अपाहिज भाई, उसकी पत्नी और एक साल की मासूम बेटी को जिंदा जला दिया। भला हो पड़ोसन बिमला गोयत का जिसकी नींद टूटी तो वकील साहब की पत्नी, भाभी और छोटे बेटे और बहू की जान बचा ली गई।
धमाका सुनकर मेरी नींद टूटी तो बाहर वकील साहब का घर जल रहा था
रविवार रात एक बजे होंगे। अचानक धमाके से मेरी आंख खुली। बाहर झांका तो वकील साहब के घर से धुआं निकल रहा था। मैं बिना कुछ सोचे-समझे अपने मकान से निकल आई। पड़ोस के मकान से आग की लपटंे उठती दिख रही थीं। मैं वहां आ गई। मैंने देखा कि अकेले अपने बस की कुछ नहीं है। तो बचाओ-बचाओ चिल्लाना शुरू कर दिया।
मुझे एक कमरे से नन्ही और खजानी की आवाज आई। उन्हें बचाना चाहा मगर बाहर से उनके कमरे की कुंडी पर रस्सी बंधी थी। इसे खोलकर उन्हें बाहर निकाला। तभी गांव के कई लोग वहां आ गए। इनमें सुरेंद्र, सतीश, रामकुमार और आजाद सिंह गोयत आदि थे। उन्होंने पहले सन्नी के कमरे का ताला तोड़ने की कोशिश की। वह नहीं टूटा तो कुंडी उखाड़कर उसे पत्नी गीता सहित बाहर निकाला। मगर दूसरी ओर सुरेश के कमरे के बाहर लगी आग बढ़ चुकी थी।
यह देखकर हम सबने पहले आग पर काबू पाने का प्रयास किया। हम मिलकर आग पर पानी डालने लगे तो वह और भड़कने लगी। इस पर हमने रेत से आग बुझानी शुरू कर दी। जब लपटें कम हुई तो सुरेश के कमरे का ताला तोड़ने का प्रयास किया। वह भी नहीं टूटा तो उसे आरी से काटकर सुरेश, उसकी पत्नी पिंकी और बेटी वंशिका को बाहर निकाला गया। मगर सुरेश और वंशिका पूरी तरह जलने के कारण दम तोड़ चुके थे। हे भगवान! ऐसी अनहोनी कोई किसी को न दिखाए।
हे! भगवान मैंने क्या पाप किए थे
मनैं के बेरा था जिस बेटे नै मैं सब तैं ज्यादा खुवाया करदी वो ए बेटा मेरे दूसरे बेटे की जान ले लेगा। इसतै आच्छा तो भगवान संजय नै मेरी कोख म्हैं ए मार देंदा।
बहू बेटे और पोती की मौत की खबर अम्मा नन्हीं देवी को सोमवार उस समय तक नहीं थी जब तक उनकी लाश को पोस्टमार्टम के बाद गांव लाया गया। मगर जब तीन लाशों को एक साथ देखा तो नन्ही देवी दहाड़े मारकर रो रही थी। उन्हें समझाने के लिए आए रिश्तेदारों का भी रोकर बुरा हाल था। गांव के लोगों ने हिम्मत दिखाई और उन्होंने आनन-फानन में सुरेश और उसकी पत्नी का दाह संस्कार किया वहीं उनकी मासूम बेटी को दफनाया।दिन में अम्मा को यहीं बताया गया था कि बच्चे जले जरूर हंै मगर ठीक हो जाएंगे। दोपहर में उन्होंने भास्कर संवाददाता को अपनी कहानी कुछ इस तरह सुनाई :
1995 में वकील साहब (पति) की मौत हो गई। चार साल बाद जेठ जुलकैण सिंह भी चल बसे। जेठानी खजानी देवी भी अपनी इकलौती बेटी संतोष के साथ साथ रहने लगी। हमने अपनी बेटियों की शादी कर दी थी। बड़ा बेटा सुरेश पोलियो के कारण अपाहिज हो गया। वह शादी नहीं कराना चाहता था। यह देखकर 12 साल पहले मंझले संजय की शादी बुढाखेड़ा की सजनी से करा दी। सुरेश ने देवा मुकलान में तीन साल पहले बालाजी ब्रिक्स कंपनी के ईंट भट्ठे में हिस्सा मिलाया। इसके लिए उसने पैतृक जमीन पर करीब साढ़े पांच लाख रुपए का लोन लिया था।
29 मार्च 2009 को सुरेश और छोटे बेटे सन्नी की शादी जींद के गांव धर्मखेड़ी निवासी दरिया सिंह खरब की बेटी पिंकी और गीता से हुई। इसके एक साल बाद नौ जनवरी को सुरेश की पत्नी ने बेटी अंशिका को जन्म दिया। पिछले साल अप्रैल में तीनों भाई अलग हो गए। सुरेश और सन्नी को अलग मकान मिला था। संजय को दो कमरों वाला मकान दिया गया। मगर संजय ने अपने मकान को ताला लगाकर सुरेश और सन्नी के मकान पर बने चौबारे में रहना शुरू कर दिया।
वह धमकाता था-जब तक उसकी जमीन पर लिया लोन नहीं भरा जाएगा वह यहीं रहेगा। सुरेश ने पिछले दिनों लोन के चार लाख रुपए जमा भी करा दिए। बाकी डेढ़ लाख उसने अप्रैल में देने का वादा किया था।मैं हमेशा संजय नै ज्यादा खुवाया प्याया करदी। वो मेरा लाडला था। पर मनैं कोनी बेरा था योए बेटा न्यूं कुणबा घाणी करण की सोचैगा। यह कहकर अम्मा बिलखने लगी।
घर फूकने के लिए दस दिन पहले लाया था मिट्टी का तेल और ताले
भिवानी. लगता है संजय अपने अपाहिज भाई सुरेश, भाभी पिंकी और एक साल की भतीजी अंशिका ही नहीं, घर के बाकी लोगों को भी जिंदा जला देना चाहता था। संजय करीब 10 दिन पहले 40 लीटर केरोसिन खरीद कर लाया था। भाई सुरेश और सन्नी के कमरों के बाहर ताला लगाने के लिए पहले नये ताले भी खरीद लिए थे। अपने दो बच्चों को पिछले हफ्ते ननिहाल भेज आया था। रविवार सुबह बीवी को भी मायके भेज दिया।
रविवार आधी रात में जब सब सो गए तो वह चौबारे से उतरा होगा। एक ओर अपनी मां और ताई के कमरे के दरवाजे को रस्सी से बांधा, तो दूसरी ओर सपरिवार सो रहे भाइयों सुरेश और सन्नी के कमरे के बाहर ताला लगाकर वह चौबारे पर गया होगा। यहां से बिजली फिटिंग वाली जगह से गैस पाइप डालकर छोटे भाई सन्नी के कमरे में गैस छोड़ी।
बाद में नीचे उतर सुरेश के कमरे के दरवाजे नीचे से गैस पाइप डालकर गैस छोड़ी। फिर सुरेश के कमरे में, दरवाजे पर और बरामदे में मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगाई होगी। छोटे भाई सन्नी के कमरे में खिड़की नहीं थी इस कारण वह उसके कमरे में केरोसिन नहीं डाल सका। शायद तभी वह खुद भी आग की चपेट में आया तो खेतों की ओर भागा। उसकी चप्पल एक नाली में रह गई। गली में ही मोबाइल गिर गया। उसे जलते हुए भागते गांव के लोगों ने देखा भी था। मगर किसने सोचा था कि यह अपना ही कुनबा जला कर भाग रहा है।
फायर ब्रिगेड के फोन नहीं उठे
लोगों ने हांसी और बवानी खेड़ा फायर ब्रिगेड केंद्रों पर फोन किए थे, मगर फोन नहीं उठे। उन्होंने कहा कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर आ जाती तो शायद एकाध जान बच जाती।
मधुबन से बुलाई फॉरेंसिक टीम
एसपी अश्विन शैणवी ने गांव का दौरा करने के बाद बताया कि पुलिस ने संजय के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। मधुबन से एसएफएल टीम को भी बुलाया है।
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