कुंवारी सुहागिन , भाग--10
पूजन- जिस एंगल से तुम्हारी जवां भाभी और अधेड आशिक की जोड़ी जमती है. सिर्फ उम्र ही महात्वपूर्ण नहीं होती , और भी बहुत कुछ देखाजाता है.
अमृता- वो तो अपनी अतृप्त जिस्मानी जिज्ञासा को शांत करने के लिए ऐसा कर रही थीं,
पूजन- तुम कहीं भी देखना , फिल्मों में भी देख सकती हो . समझदार और कामयाब लडकियां अनुभवी व्यक्ति सेशादी करती हैं. मैं तुम्हारी भाभी के आशिक से भी ज्यादा बड़ा, सुन्दर और कड़क
मुन्ना रखता हूँ. एक बार देखलो, दीवानी हो जाओगी.
अमृता- छी, फिर से गंदी बात शुरू करदी. अभी तो मैं बच्ची हूँ, अभी से अगर बुरी नजर डालोगे तो आगे -आगे क्या करोगे ? मुझे आपके साथ लंबा सफर तय करना है . मुझे बड़ी कवयित्री बनना है.
पूजन- इस दुनिया में कोई किसीकी मदद क्यों करना चाहेगा अमृता ? जाहिर सी बात है उसे भी बदले में कुछ न कुछ चाहिए . मैं अगर तुमको कुछ बनाने में सहायता करता हूँ तो मुझे क्या फायदा होगा ?
अमृता- आपका नाम होगा, मैं जीवन भर आपका सम्मान करूंगी , और भला क्या चाहिए ? कुछ उम्मीद रखते हो तो खुलकर कहो.
पूजन- और अब क्या खुलवाने पर आमादा हो ? मैंने कह दिया की मुफ्त में यहाँ कोई किसीकी मदद नहीं करता, आगे तुम समझदार हो. खुद ही पेशकश करो की क्या देना चाहती हो ?
अमृता- आप खुद बोलिए, बात अगर सौदेबाजी की है तो ठीक है, मैं भी बार्गेनिंग करूंगी.
पूजन- अपने इस गदराए हुए यौवन का रस चखने दो, मुझे इस जिस्म के तूफन में डूब जाने दो. खुद भी लुत्फ़ उठाओ और मुझे भी उठाने दो. आखिरकार अब तुम जवानी की दहलीज पर कदम रख रही हो और इस जवानी
का चार तो पड़ता नहीं है. यह मौज मस्ती के लिए ही काम आती है. जिसने इस उम्र में मजा ले लिया , सो ले लिया. आगे चलकर तो तमाम दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. कैरियर की चिंता , फिर शादी -ब्याह
का चक्कर और इसके बाद फिर बच्चों का झंझट. फिर आदमी रिवर्स होने लगता है. यानि की अपने बच्चों कि९ पढ़ाना- लिखाना , उनका कैरियर और उनकी ब्याह -शादी, उसके बाद विदाई. जीवन का ड्रामा
हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है.
अमृता- आप तो प्यार -मोहब्बत और सेक्स की बातें करते-करते अचानक जीवन दर्शन पर आ गए.
पूजन- जब तुमको ट्रेंड करना ही है तो सब कुछ सिखाऊँगा. सेक्स का भरपूर लुत्फ़ कैसे उठाया जाता है यह भी बताउंगा .
अमृता- इन चीजों के स्कूल नहीं होते हैं गुरूजी , इसके लिए मुझे ट्यूशन लगाने की जरूरत नहीं है.
पूजन- तुम मुझसे इतनी दूर क्यों खड़ी हो, ऐसे दूर-दूर रहोगी तो हमारी क्या हालत होगी ? दिल पर ऐसे सितम न ढाओ , शर्मो -हया छोड़कर मेरे करीब आ जाओ.
अमृता- वाह, कितनी बढ़िया लाइन बनाई है. इसी पर तो मैं फ़िदा हूँ.
पूजन- इस वक्त मैं लाइन बना नहीं रहा बल्कि लाइन मार रहा हूँ. तुम्हारे सीने के जों उभार हैं, इन पर हाथ फिराना चाहता हूँ, तुम्हारे संवेदनशील अंगों को स्पर्श करना चाहता हूँ.
अमृता- ऐसा करने से क्या अमृत मिल जाएगा
पूजन- पता नहीं क्या मिलेगा , लेकिन इतना तय है की एक गुनाह करने से बच जाउंगा .
अमृता- कैसा गुनाह ? अब आप फिलोसफी करने लगे ? कोई देख लेगा तो क्या होगा , मुझे चलना चाहिए.
पूजन- अगर तुम्हें सचमुच जाना होता तो कबकी चली गयी होती. सच तो ये है की तुम भी आज मूड में हो और अपने यौवन का मर्दन कराने के मूड में हो.
अमृता- आपने ये नहीं बताया की किस तरह के गुनाह का जिक्र कर रहे हो ?
पूजन- आत्म हिंसा करने से बच जाउंगा. मैंने सूना है की जों भी मन में आये वैसा कर लेना चाहिए वरना जिंदगी निरर्थक हो जाती है.
अमृता- आप बड़े वो हैं, किसी न किसी तरह से मुझे पटाने में लगे हैं.
पूजन- अगर बातें खत्म हुई हों तो अब आकर बैड पर आराम से लेट जाइए , मैं मालिश करने का हुनर भी रखता हूँ, पहले तुम्हें रिलेक्स दिलाऊंगा, अच्छी तारह से मालिश करूँगा . उसके बाद बातें करेंगे.
, मेरे ऊपर वाली मंजिल पर कोई नहीं आता. वहां पर आराम से बातें करते हैं.
अमृता- मुझे अपनी बातों के जाल में उलझाना चाहते हैं. अगर वहां लेजाकर मेरी मालिश करोगे तो क्या मुझे छोड़ दोगे ?
Friday, March 11, 2011
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