कुंवारी सुहागिन - 25
महिला- औकात में आ गए मियां ? अभी- अभी तो कह रहे थे की कौन सी लड़की , कैसी लड़की , कैसी नाथ उतराई, अब मिमियाने लगे. मैंने तो लड़की का नाम भी नहीं बताया था , खुद ही
अपने मुंह से लड़की का नाम बोल गए. इसको कहते हैं चोर की दाढी में तिनका.
पूजन- आपको क्या उपहार चाहिए , मैं देने के लिए तैयार हूँ लेकिन अमृता किस हॉस्पिटल में है मुझे बता दीजिए.
महिला- ठीक है. बता दूंगी लेकिन उसके लिए तुम्हें रात को ठीक दस बजे आना होगा , कहाँ आना है , इसकी जानकारी तुम्हें तुम्हारे मोबाइल पर मिल जायेगी. अगर चालाकी करने की कोशिश की
तो ध्यान रखना, बहुत बुरा हो जाएगा. समझ रहे हो न .
पूजन- तुम क्या जानती हो मेरे बारे में ? शायद तुम्हें पता नहीं की मैं पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ भी उठता-बैठता हूँ. अगर मैंने एक फोन भी कर दिया तो लेने के देने पद जायेंगे . हफ्ता
वसूली के आरोप में जेल में सडोगी . यह नसीहत मैं इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि आप महिला हैं और महिलाओं के प्रति मेरे मन में सोफ्ट कोना है.
महिला- अभी-अभी तुम्हारे घर से जों इन्स्पेक्टर गया है न , वह बड़ा ईमानदार किस्म का है, अगर उसे तुम्हारा कच्चा चिटठा पता चला तो सब याराना भूलकर तुम्हारी खाल में भूसा भर देगा .
पूजन- आखिर मैंने तुम्हारा क्या बिगाडा है ? मेरे साथ इतनी बेरुखी से पेश क्यों आ रही हो ?
महिला- उसके लिए तुम्हें रात होने का इन्तजार करना होगा, तब तक के लिए तुम्हारी शिकार लड़की की हिफाजत मैं करूंगी .
पूजन- मैं तुम पर कैसे यकीन करूं, अपना नाम , नंबर कुछ तो बताओ . ताकि जरूरत पड़ने पर मैं भी तुम्हें फोन कर सकूं.
महिला- बड़े अधीर हुए जा रहे हो न, उस वक्त तुमने ज़रा भी नहीं सोचा जब एक मासूम लड़की की इज्जत को तार-तार कर दिया, खुद भी शराब पी और उसे भी पिलाई, इसके बाद तुमने उस कच्ची
कली को फूल बना डाला, तुम्हें उस पर ज़रा भी रहम नहीं आया ?
पूजन- रहम आया तभी तो उसके साथ सम्बन्ध बन गए, और उसीकी सजा तुम मुझे दे रही हो, नहीं तो आप जैसे चाहें जांच करलें, मेरी गलती नहीं पाएंगी . मैं उस लड़की के घर पर नहीं गया था
बल्कि वह मेरे घर पर आई थी और बहुत परेशान थी, अगर मैं उसके तन की अग्नि को शांत नहीं करता तो वह राह भटक जाती .
महिला- तो अब कौन सा तुमने उसे धर्म-कर्म के रास्ते पर डाल दिया है , अब भी तो वही हाल है. अब तो तुमने उसे नदी से निकालकर समुन्दर में डाल दिया है.
पूजन- कहावत ऐसे नहीं है, कहा तो ऐसे जाता है की कुएं से गिरे तो भाड़ में गिरे.
महिला- कहावत को मारो गोली और ठीक दस बजे का इन्तजार करो. पहचान-वह्चान के चक्कर में मत पड़ना और सुनो, मेरी बात पर भरोसा करने के सिवाय तुम्हारे पास और कोई चारा भी नहीं है. समझे.
इतना कहने के बाद फोन डिस्कनेक्ट हो गया. पूजन थर थर काँप रहा था, थोड़ी देर पहले उसने अमृता के साथ उसके यौवन के जिस अमृत का पान किया था , अब उसे वह जहर नजर आ रहा था.
होता भी यही है. एक बार तो इंसान खैर गिर जाता है, उस वक्त उसे उसका एहसास भी नहीं होता.. मगर जब एहसास होता है तो बहुत देर हो चुकी होती है. उसका नैतिक पतन हो चुका होता है.
कहते हैं की जों इंसान अपनी ही नजर में गिर गया वह दूसरों की नजर में फिर कभी नहीं उठ पाता . उसने जोश में आकर एक बोतल और खोली , एक लार्ज पैग बनाया और एक ही सांस में उसे पी
गया. इसके बाद उसने एक सिगरेट भी सुलगाई . थोड़ा सुरूर बनते ही उसने राहत की सांस ली, अब वह अपने आपको थोड़ा सा हल्का महसूस कर रहा था. वह उस अजनबी आवाज के बारे में सोचा जा रहा
था, वह कौन हो सकती है और उसे यह सब कैसे मालूम ? अमृता ने जब उसके साथ सेक्स किया तो उस वक्त तक वह बिलकुल ठीक थी. अगर उसकी तबियत बिगडनी होती तो पहले ही बिगड जाती .
तो फिर वह अचानक रस्सी की मदद से क्यों भाग गयी ? कहीं ऐसा तो नहीं की उसे किसीने जबरदस्ती उतारा हो ? मगर किसने ? वह कौन हो सकता है ? क्या घबराहट में आकर या नशे की झोंक में
आकर अमृता ने सचमुच लोगों को कुछ बता दिया है या फिर वह वास्तब में बेहोश हो गयी है ? या फिर कोई तीसरा व्यक्ति उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए था ? उसके जेहन में सवाल बहुत थे
और उनका सही जवाब एक भी नहीं था. उसकी समझ में यह बात तो आ गयी की वह किसी ब्लेकमेलर की निगाह में चढ चुका है . वह बार-बार घड़ी की तरफ देख रहा था. जैसे ही सुइयों ने दस बजने का
संकेत दिया , उसके फोन की घंटी घनघना उठी. उसने फोन उठाया तो सामने पर उसी महिला की सेक्सी आवाज सुनाई दी. वह कह रही थी-
- क्या कर रहे हो कवी महोदय ? अमृता के बारे में सोच रहे हो ?
पूजन- मुझे ये बताओ की तुम मुझसे चाहती क्या हो ?
महिला- जों कुछ तुमने अमृता के साथ किया है, मेरे साथ भी अगर वही करते हो तो तुम्हें माफी मिल सकती है. मेरे तन में भी आग लगी है, इसे बुझाना है. तुम ये काम कर सकते हो .
Sunday, March 27, 2011
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