Tuesday, May 31, 2011
Monday, May 30, 2011
स्क्रिप्ट
तड़प... यह कहानी नहीं, जज्बातों के तारों से बुनी हुई दो धड़कते दिलों की दर्द भरी दास्ताँन है. जिसकी सच्चाई की महक आज भी फिजाओं में बिखरी हुई है और जब तक दुनिया में प्यार का वजूद रहेगा तब तक लोग इसकी खुशबू को महसूस करेंगे . इसकी शुरुआत होती है राज से... राज ... , जो युवा है, प्रतिभाशाली है, सुरों का जादूगर है. जिसके लफ्जों में सम्मोहन है. उसकी मुलाक़ात होती है खूबसूरत रागिनी से. रागिनी आकर्षक व्यक्तित्व की मलिका है. जब राज और रागिनी की निगाह आपस में टकराती हैं तो दो युवा दिल बगावत पर उतर जाते हैं. रागिनी चंचल स्वभाव की खुश मिजाज लड़की है. वह खुले आसमान में उड़ने में भरोसा करती है.. एक खूंटे से बंधे रहने वाले वफादार पशु के मुकाबले उसे ऐसे पंछी पसंद हैं जो अपनी मर्जी से अनंत आकाश में कहीं भी विचरण कर सकते हैं. उससे जो भी मिलता है वह उसीका होकर रह जाता है. राज भी भी उसकी हसीं मुस्कान का शिकार हो जाता है. रागिनी की दिलकश अदाएं उसे इतनी भाती हैं की वह अपना दिल रागिनी को दे बैठता है. उसके सौंदर्य का रसपान करते हुए कहता है-
-१. ---- मेरे मन को तुम तो इतना भा गए हो. प्यार बनकर यार दिल पर छा गए हो.
लेकिन रागिनी का स्वच्छंद व्यवहार राज को अखरने लगता है. जब रागिनी अपने दोस्त या रिश्तेदारों के साथ हँसती बोलती है तो राज का मन कसमसा उठता है. वह उसे ताना मारते हुए गाता है-
२, --- जबसे मेरे नैनों में तुम बस गए रे , हम तो तुमसे प्यार करके फंस गए रे ...
एक मौक़ा ऐसा भी आता है जब वे दोनों एक महफ़िल में आमने –सामने मिल जाते हैं. राज के साथ उसके दोस्त लोग हैं और रागिनी अपनी सहेलियों की टोली के साथ है. दोनों तरफ से गीत युद्ध छिड़ जाता है. राज उलाहना देता है-
३. -जादू सा चला देते हैं, सीने में बसा लेते हैं. ये हुस्न के मालिक देखो ,दिल लेके दगा देते हैं.
रागिनी भी कम नहीं है . उसका जवाब देते हुए कहती है-
- सपना सा दिखा देते हैं, अपना सा बना लेते हैं. ये जिस्म के आशिक देखो, दिल लेके दगा देते हैं .
- राज मन ही मन रागिनी से मोहब्बत करता है और जब उसे किसी दुसरे लड़के के साथ देखता है तो तड़प उठता है. अपनी तड़प को शब्दों में ढालते हुए कहता है-
- ४,---यूँ नमक न छिड़को जख्मों पर बेदर्द सनम बेदर्दी से , हमें मौत ही दे दो ए मालिक जीने की इस सरदर्दी से....
शिकायतों का यह सिलसिला यहीं पर नहीं थमता . वह मन ही मन रागिनी को बेवफा समझ लेता है और शराब –सिगरेट पीने लगता है. गलत सोहबत में पड़ जाता है. उसके मन में नेगेटिव विचार आने लगते हैं. वह आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है . नशे की हालत में वह अपनी पीड़ा को कागज़ पर उतारता है. लेपटोप पर लिखता है-
-५,- तुम चिता सजादो ए लोगो, मुझे अग्नि वही लगाएंगे . उन्हें देर लगेगी आने में , वो चोरी –छिपके आयेंगे .
उधर रागिनी के परिजन उसकी सगाई किसी दुसरे लड़के के साथ तय कर देते हैं. जब यह खबर राज को लगती है तो वह टूट जाता है. उसके अरमान धू –धू कर सुलग उठते हैं. उसको अपने प्यार की दुनिया उजडती नजर आती है. वह रागिनी के सगाई समारोह में गीत गाता है-
६,- साजन के शहर में जाके , खुश हो गयी दौलत पाके . बस इतना बतादो बैरन ,क्या मिला मुझे ठुकराके ...
रागिनी उसके तानो की गंभीरता और उसके प्यार की हकीकत को समझ जाती है. उसके मन में भी राज के प्रति जो प्यार का पौधा पल्लवित हो रहा था, वह विशाल वट वृक्ष का रूप धारण कर लेता है. वह अपनी संवेदनाओं को व्यक्त करते हुए गाती है.-
-७,- साजन के शहर में आके, रोती हूँ दौलत पाके . तू क्या समझेगा बैरी , ज़िंदा हूँ जहर मैं खाके ...
अब रागिनी पूरी तरह से राज की हो चुकी है, राज की दशा देखकर वह दुखी हो जाती है और उसे सुधारने के लिए गाती है-
-८,- दारु सिगरेट छोड़ दे सैया ....
राज उसकी बात मान लेता है. नशे की लत को छोड़ देता है. अब राज और रागिनी मिलकर दुनिया को सुधारने निकले हैं, समझाने निकले हैं की जिंदगी बहुत खूबसूरत है, मानव जीवन सिर्फ एक बार ही मिलता है, इसे व्यर्थ में नहीं गंवाना चाहिए .वे बताते हैं की किसी भी हालत में आत्महत्या नहीं करनी चाहिए वे गाते हैं-
खुदकुशी न करो ...
भाग-२७
सलमा- कुछ लगने के लिए ज़िंदा रहूंगी तब न बता पाउंगी . मेरी जान निकल जायेगी. कभी मजाक में भी दूर जाने की बात न करना और अगर मेरी मौत प्यारी हो तो जो चाहो कहना, कोई दिक्कत नहीं है.
जुनैब- कितने कम समय में ही तुम मुझसे कितनी मोहब्बत करने लगी हो. जब पहली बार मिलीं तो मुंह फूला हुआ था और अब देखिये की अब तो जान देने के लिए भी तैयार हैं. सही कहते हैं की समय बड़ा बलवान होता है. अगर समय सही हो तो कुछ भी किया जा सकता है.
सलमा- मोहब्बत सबसे बड़ी चीज है . अगर मोहब्बत में जादू नहीं होता तो आज मैं तुम्हारी बांहों में इस तरह नगन नहीं झूल रही होती. मैं जानती हूँ की तुम मेरी इज्जत करते हो, मेरा ख़याल रखते हो . इसलिए मुझे कभी भी दुखी नहीं देखना चाहोगे. इसिलए तो यह सम्पूर्ण समर्पण है. अब तुम्हारे ऊपर सब कुछ छोड़ दिया है, जैसा चाहे करना, मैं कोई ऐतराज नहीं उठाऊँगी . मुझे कुछ भी नहीं चाहिए , सिवाय तुम्हारे प्यार के. मुझे तुम्हारा प्यार मिल जाए , वही मेरे लिए सब कुछ है. मैंने तो आज तक अपने मन में किसी लड़के की छवि भी नहीं बसाई थी, कभी किसीके बारे में सोचा भी नहीं था, तुम अकेले वो लड़के हो, जिसने पल भर में मेरे ऊपर जादू कर दिया. मुझ जैसी पत्थर को भी मोम बना दिया. मैं तो अपने आपको पत्थर से भी कठोर समझती थी. अक्सर लोग कहते थे थे की ये लड़की पता नहीं कहाँ रहेगी , इंसानों की दुनिया से तो ये बिलकुल अलग है. कोई इसे अच्छा ही नहीं लगता है. अब मैं उन लोगों को दिखाउंगी की देखो , मैं भी अब इंसानों की दुनिया में रहने के लायक हो गयी हूँ. अब मैं भी किसी लड़के के साथ निबाह सकती हूँ, उसका ख्याल रख सकती हूँ, उससे प्यार कर सकती हूँ, उसके प्रति अपने आपको समर्पित कर सकती हूँ और यहाँ तक की अपनी जान भी न्यौछावर कर सकती हूँ.
जुनैब- और मैं भी बड़े फख्र के साथ कह सकता हूँ की मुझ पर मर मिटने वाली भी इस दुनिया में मौजूद है. हम दोनों मिलकर कुछ अच्छा काम करने की कोशिश करेंगे. हम लोग राजनीति में आयी गिरावट को कम करने की दिशा में प्रयास करेंगे . ऐसा काम हम दोनों बड़े आराम से कर सकते हैं. पिताजी तो राजनीति में हैं ही, जब हम अभी से लोगों के बीच में जायेंगे , उनके दुःख-सुख सुनेंगे तो सहज रूप से वे हमसे जुड जायेंगे . हम अपने क्षेत्र और प्रदेश तथा देश के बारे में अभी से स्टडी करेंगे , पहले उसे छोटे स्तर पर सुधारेंगे और फिर बड़े लेबल पर सेवा करेंगे . हम लोगों में ये भरोसा दिलाने का प्रयास करेंगे की राजनीति में भी अच्छे और सच्चे लोग काम कर सकते हैं.
सलमा- ये बड़ा कठिन काम है. सुनते हैं यह काजल की कोठरी है, जो इसमें एक बार गया तो दाग लगना लाजिमी है. ना चाहते हुए भी किसी न किसी तरह से दाग लग ही जाता है. अगर कोई नेता सच्चा होता भी है तो उसकी पार्टी उसे नेक नहीं रहने देती. पार्टी उसे बिगाड़ देती है. पार्टी को चन्दा चाहिए वरना वह आपको टिकट नहीं देगी. और अगर बड़ी पार्टी का टिकट चाहिए तो बड़ा चन्दा चाहिए अजुर बड़े चन्दा देने के लिए बड़ा भ्रस्टाचार करना होगा. या फिर छोटे-छोटे , गरीब लोगों का गला काटना =होगा.
जुनैब- हाँ, ये तो है, मगर हमको इसीमे से कोई बीच का रास्ता निकालना होगा. और कोशिश करने पर ये हो भी सकता है. जब हम दोनों मिलकर इस कार्य को हाथ में लेंगे तो असंभव कुछ भी नहीं है. हाँ, मुश्किलें बहुत आयेंगी मगर सही नीयत है तो काम हो ही जाएगा .
सलमा- मैं तो परछाई बनकर चलूंगी. जो चाहोगे वैसा करूंगी . हर काम सहयोग करूंगी. मुझे न तो दौलत की हवस है और ना ही शौहरत का लालच है. मुझे तो अपना जुनैब चाहिए, जुनैब की मोहब्बत चाहिए. मेरे लिए तो तुम ही सब कुछ हो. तुम्हारी एक मुस्कान पर ही मैं अपनी जान दे सकती हूँ.
जुनैब- यह मोहब्बत का पर्व है, इतनी सुहानी मुलाक़ात में मरने -गिरने की अशुभ बातें क्यों करती हो. आज इस मिलन को इतना यादगार बनादो की आने वाली पीढ़ी के लोग भी हमारा उदाहरण दे सकें. यह कह सकें की जुनैब और सलमा जैसा सच्चा और सार्थक प्यार होना चाहिए .
सलमा- इतना भी जान लो तो यह काम सिर्फ हम ही कर सकते हैं की सुहागरात के पावन अवसर पर भी समाज और देश की सेवा करने का व्रत ले रहे हैं, वरना हमारी जगह पर कोई और होता तो उसे वासना के अलावा कुछ याद ही नहीं रहता .
जुनैब- हाँ, कोई और होता तो अब तक दो बार सेक्स कर चुका होता और मुंह मोड़कर अब तक बिस्तर पर भी सो भी चुका होता. और हो सकता है वही कल किसी दूसरी हसीना की बांहों में रात गुजार रहा होता .
सलमा- मैं तो पहले ही कह चुकी हूँ की लड़के बहुत बेवफा होते हैं.
जुनैब- हा हा हा... अच्छा ... मेरा हथियार मुझ पर ही चला रही हो. कोई बात नहीं, तुम्हें सात खून माफ हैं.
Sunday, May 29, 2011
Saturday, May 28, 2011
उत्तर प्रदेश के झांसी में लोगों से भरी नाव के नदी में पलटने से छह लड़कियों की मौत हो गई.
झांसी जिले के एरच क्षेत्र में बेतवा नदी पार कर एक मजार पर चादर चढ़ाने जा रहे लोगों से भरी नाव मझधार में पलट गई जिससे छह लड़कियों की मौत हो गई.
पुलिस उपमहानिरीक्षक एंटनी देव कुमार ने बताया कि मध्य प्रदेश के दतिया जिले के इंदरगढ़ गांव के 10 लोग झांसी के एरच क्षेत्र में स्थित मीरा शाह मजार पर चादर चढ़ाने के लिये नाव से बेतवा नदी पार कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि तेज बहाव के चलते नाव नदी में पलट गई. इस हादसे में रुखसार (18), खुशबू (17), करिश्मा (16), सोनम (16), अतिया (छह) और करीब 10 वर्षीय एक अज्ञात लड़की की डूबने से मौत हो गई.
कुमार ने बताया कि चार अन्य लोगों को नदी से निकालकर गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस दुर्घटना से क्षेत्र में मातम का माहौल है. स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर आक्रोस है की सरकार ने पीद्तिओं के परिवारों की सुध भी नहीं ली है.
कैथल। हरियाणा के कैथल से एक महिला को अगवा कर चलती गाड़ी में रेप किया गया है। उसके बाद आरोपियों ने महिला के हाथ पैर बांधकर यमुनानगर की नहर में फेंक दिया। महिला को लोगों ने बचाया। फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
दरअसल, आज सुबह होने पर यमुनानगर नहर में लोगों को एक महिला दिखाई दी। लोगों ने जब उसे बाहर निकाला तो उसके हाथ-पैर बंधे हुए पाए गए। आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में जब महिला को होश आया तो उसने अपनी आपबीती सुनाई।

राजधानी की सड़कें दिन ढलते ही महिलाओं के लिए कितनी अनसेफ हैं, अंदाजा लगाया जा सकता है कि घर से निकलते ही शुक्रवार रात करीब सवा आठ बजे 23 साल की एक लड़की को एक कार में खींच कर गैंग रेप किया गया। घटना नॉर्थ वेस्ट दिल्ली की बताई जा रही है। लड़की किसी काम के लिए घर से निकली थी। कुछ दूरी पर ही राह चलते उसे एक चलती कार में खींच लिया गया। कार में तीन लड़के सवार बताए जा रहे हैं।
तीनों ने चलती कार में ही लड़की के साथ रेप किया। उसके बाद उसे नॉर्थ दिल्ली के रूपनगर इलाके में कार से फेंककर फरार हो गए। लड़की रोड किनारे पड़ी मिली। किसी राहगीर ने इसकी पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस उसे बाबू जगजीवन राम अस्पताल लेकर गई। वारदात के इलाके को लेकर पहले नॉर्थ दिल्ली और नॉर्थ वेस्ट दिल्ली पुलिस आपस में उलझी रही। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप पर मामले को सुलझाया गया।
नॉर्थ वेस्ट इलाके में केस को दर्ज किया गया है। इलाके के पुलिस अधिकारियों के अनुसार लड़की को मेडिकल के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां पर उसका आधा मेडिकल भी हो चुका था। लेकिन उसके बाद लड़की अस्पताल से लापता हो गई। अधिकारियों के यह बयान संदेह के घेरे में हैं। गैंग रेप की 100 नंबर पर कॉल के बाद पुलिस स्टेशन पहुंची लड़की का मेडिकल करवाने के दौरान अस्पताल से भाग जाना पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।
पुलिस ने बताया कि बच्ची की हत्या धारदार हथियार से गला काट कर की गयी है। बच्ची के माथे पर सिंदूर लगा हुआ था तथा शव के आसपास अड़हुल के फूल, अगरबत्ती व एक प्लास्टिक का बोरा मिला। इसमें खून के धब्बे लगे हुए थे।
पुलिस संग पहुंचे विधायक
घटना को सूचना मिलते ही बोरियो विधायक लोबिन हेंब्रम पुलिस के साथ पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए राजमहल अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया। हालांकि, पुलिस ने मधु कर्मकार के बयान पर अज्ञात के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
बलि देने के आरोप में पहले भी जा चुका है जेल
पुलिस ने बताया कि नरबलि देने के आरोप में खुदू कर्मकार पहले एक बार जेल भी जा चुका है। वर्ष 2002 में राधानगर थाना क्षेत्र के आतापुर में फेंकू साह की 12 वर्षीया पुत्री को बलि देने के आरोप में जेल गया था। निचली अदालत ने उसे सजा-ए-मौत दी थी लेकिन उच्च न्यायालय ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया
Friday, May 27, 2011
Thursday, May 26, 2011
Wednesday, May 25, 2011
सलमा- ऐसी बात है तो चलो इस होटल के टेरेस पर चलते हैं. वेटर बता रहा था कि वहाँ पर प्यार भरे गीत सुनाये जा रहे हैं. चलो वहाँ चलते हैं. पहले गीत सुनते हैं. उसके बाद दोनों लोग छत से कूदते हैं. अगर हम दोनों एक दुसरे से प्यार करते हैं और यह प्यार सच्चा है तो इस सच्चाई के लिए हमें जान देने के लिए तैयार रहना होगा.
जुनैब- ठीक है, मुझे तुम्हारी हर बात मंजूर है, जिस तरह और जब भी चाहो मुझे आजमा सकती हो, मैं तुम्हारी खातिर सब कुछ करने के लिए तैयार हूँ.
सलमा- फिर देर क्यों करते हो, चलो टेरेस पर चढ़ते हैं.फिर देखते हैं किसमे कितना प्यार है और कौन कितना वफादार है ? मैं आज मोहब्बत का इम्तिहान लेना चाहती हूँ, आइये मेरे साथ .
नशे की हालत में इंसान आधा पागल हो जाता है, इस बात का सबूत भी वहां देखने को मिल रहा था. जल्दी-जल्दी कपडे पहनकर वे दोनों छत पर जाने के लिए तैयार हो गए. कुछ देर पहले तो वे चाहते थे कि सब कुछ छोड़कर जिस्मानी प्यास बुझा ली जाए और देखिये नशे में क्या तुनक्बाजी हो गयी कि अब वे टेरेस पर मरने की बात सोचने लगे . यही होता है जब इंसान की बुद्धि खराब हो जाती है. टेरेस का माहौल बहुत ही प्यारा था, उससे भी प्यारा वहाँ का मौसम था. ठंडी-ठंडी हवा बह रही थी और उस ठंडी हवा में मधुर संगीत बज रहा था. ऐसा कातिलाना मौसम सलमा ने पहली बार देखा था. एक बुजुर्ग व्यक्ति कोई वेदना वाला गीत गा रहा था. एक लड़की उस पर थिरक रही थी. बेहद हसीं नजारा था. सलमा ने जुनैब से कहा -
- जनेब , देखो कितना मस्त मौसम है, मेरा तो नाचने का मन हो रहा है. अगर तुम साथ दो तो यह रस्म भी पूरी कर ली जाए. मगर यही है कि मैं तुम्हारे बिना नहीं नाच सकती .
जुनैब- मुझे नाचने का अनुभव नहीं है. हाथ-पाँव मारूंगा तो बेढंगा लगूंगा . तुम नाचना चाहो तो स्वागत है, तुम्हारी हौसला अफजाई के लिए मैं दूर से ही नाच लूंगा. एकाध ठुमका लगाने की कोशिश करूँगा लेकिन यहीं से . अपनी जुल्फों को खोलकर बिखेर दो. टेरेस से कूदने का प्रोग्राम पहले स्थगित करते हैं बाद में जब समय आएगा तो देखेंगे , पहले इस संगीत का लुत्फ़ उठाते हैं. मेरी इच्छा भी यही है. मरना कैंसल. मस्ती की शुरुआत . मैं दो पैग का ऑर्डर दे देता हूँ. सिर्फ दो मिनिट तक ही नाचना, उसके बाद दोनों जाम छलकायेंगे . अब देखते हैं मौज मस्तियाँ कैसे हमसे दूर भागती हैं ?
सलमा - ओहो, मेरे दिल की बात छीन ली है.
Tuesday, May 24, 2011
Monday, May 23, 2011
Sunday, May 22, 2011
भाग-१९
इसका कारण ये है की वह मानती है की उसने मुझे बचपन से गोद में खिलाया है इसलिए वह मेरे साथ हमबिस्तर नहीं हो सकती . मैंने एक बार उससे कहा था-
- आप इस कुत्ते के साथ क्या सुख ले पाओगी , मैं हूँ न , मेरे साथ भी मजे ले सकती हो .मेरा भी बहुत मन करता है. तुम्हें देखकर मेरा काला नाग सख्त हो जाता है. देखो कैसा फडफडा रहा है. पेंट फाडकर बाहर निकलने के लिए बेताब है.
सलमा- ओह, तब वह क्या बोली ? जैसा की तुमने उसके बारे में बताया है, वह तो तुरंत तैयार हो गयी होगी ?
जुनैब- नहीं यार . उसने साफ़ मना कर दिया. वह बोली -
- नहीं रे जुनैबं . तू अच्छा लड़का है. तेरे साथ मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी जिससे तेरी आदत खराब हो जाए . ये काम अच्छे नहीं हैं, इनसे लोगों का जीना हराम हो जाता है. एक बार अगर कम उम्र में किसीको इश्क का चस्का लग गया तो फिर इसे छुडाना मुश्किल हो जाता है.
सलमा- अच्छा,उसने ऐसा बोला क्या ? अगर ऐसा है तो वह तुम्हारे सामने ऐसा कार्य क्यों कर रही थी ? वह भी कुत्ते के साथ . क्या उसे ये सब करने के लिए कोई इंसान नहीं मिला था ?
जुनैब- मैंने भी उससे यही सवाल किया था. तब वह बोली -
- नहीं रे जुनैब . अभी तू सिर्फ देख रहा है, और देख रहा है तो यह मेरी कमी नहीं है. मैंने तो तुम्हें आमंत्रित नहीं किया था कि तुम आओ और मेरा ये खेल देखो. तुम पहले चोरी छिपके देखा करते थे लेकिन एक दिन जब मैंने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ लिया तो तुमने वादा किया कि कभी यह बात किसीको नहीं बताओगे, और इसी शर्त पर मैंने तुमको इजाजत भी दे दी कि चलो अगर देखने भर से ही तुम्हारी इच्छा पूरी होती है तो यह काम भी कर लिया जाए . तब से तुम यह सब देखने आते रहे हो.
सलीम- लेकिन यह सब देखकर मेरी भी इच्छा जाग्रत होती है, उसका मैं क्या करू?
- तुम्हें सब्र करना होगा . बड़ा होकर किसी अच्छी लड़की से शादी कर लेना , सब कुछ ठीक हो जाएगा. उसके बाद पूरी ताकत के साथ सेक्स करना, रात -रात भर सुहागरात मनाना , कौन मना करता है ?
सलीम- क्या भरोसा कि मेरी होने वाली मेरे प्रति वफादार होगी, कहीं ऐसा न हो कि वह भी तुम्हारी तरह अपनी जवानी किसी कुत्ते पर लुटाती रहे ?
- तुम मुझ पर इल्जाम लगा रहे हो, मैंने कभी भी मर्दों को इग्नोर नहीं किया और ये भी सुनलो कि तुम मर्दों की नहीं, बच्चों की गिनती में आते हो. समझे ? जो भी अच्छा मर्द मिला तो मैंने उसे कभी निराश नहीं किया. हमेशा यही चाहा है कि सब कुछ ठीक तरह से हो जाए . मैंने पहले अपने पति से सम्पूर्ण संतुष्टि चाही, लेकिन जब वहाँ भी संतुष्टि नहीं मिल पाई तो आखिरकार मैंने बाहर सुख तलाशना शुरू कर दिया. तुमने तो छिप-छिपकर अच्छी तरह से देखा भी है कि एक ही बार में मैंने तीन -तीन हट्टे कट्टे मर्दों को धुल चटाई है. जब मर्द भी मेरी जिस्मानी भूख को शांत नहीं कर आप्टे तो इस कुत्ते के साथ मन बहला लेती हूँ. मेरा एक एनआरआई दोस्त है, उसने यह खास नस्ल का कुत्ता लाकर दिया है. विदेशों में जो तनहा महिलायें होती हैं वे ऐसे ही खास नस्ल के कुत्तों से काम चलाती हैं.
सलीम- क्या बात कर रही हैं, इसका मतलब ये हुआ कि यह शौक सिर्फ आपको ही नहीं है बल्कि और भी ऐसे बहुत से महान लोग हैं जो इस तरह के कुत्तों का सहारा लेते हैं. इसकी कीमत तो बहुत होती होगी .
- हाँ, मंहगे तो होंगे ही. उसका कारण ये है कि इन कुत्तों को विशेष तरह से ट्रेंड किया जाता है. तब जाकर ये सेक्स करने के काबिल बनते हैं. तुम देख रहे हो ,इसका स्वभाव बिलकुल इंसानों जैसा हो गया है. अब इसको आदत भी पड़ गयी है. लेकिन तकलीफ ये है कि इसके साथ सम्बन्ध बनाने के बाद कम से कम एक घंटा तक इन्तजार करना पड़ता है. उतनी देर में अगर कोई आ गाया तो बड़ी तकलीफ हो जाती है. तेरी वजह से मुझे बहुत अफय्दा होता है. अगर कोई आये तो तू उसे पहले से ही वापस कर देता है. कोई न कोई बहाना कर देता है. मेरा हसबेंड तो ऐसे समय आ ही नहीं सकता. वह भाजी की दूकान पर ही बैठा रहता है. उसे मालूम है कि मेरे मौज मस्ती का टाइम हो गया है.
सलीम- तो क्या आप इसके साथ रोजाना सम्बन्ध बानाती हैं.
- नहीं रे पागल है क्या ? ऐसी कोई बात नहीं है. जब मूड हो तभी कर लेती हूँ. अगर मैं रोजाना करती तो तुमको पता नहीं चलता क्या ?
सलीम- नहीं , बिलकुल नहीं. मुझे क्या पाटा चलेगा ? मैं यहाँ पर हमेशा थोड़े ही रहता हूँ.
- हफ्ते में एक या दो बार, बस. इससे ज्यादा कभी नहीं किया . बीच -बीच में तो मर्द ही मिलते रहते हैं. कुछ चुनिन्दा लोगों के साथ ही समबन्ध बनाती हूँ, एड्स का डर लगा रहता है.