कुंवारी सुहागिन , भाग--4
इसी कारण नींद गायब हो गयी होगी और टीवी देख रही होंगी. मगर मेरा यह अनुमान गलत निकला . क्योंकि इस बार जों आवाज मेरे कानों में पडी यह भाभी की सेक्सी और बहकी हुई आवाज थी . वह कह रही थी-
- तुम्हारे साथ सेक्स का जों आनंद मिलता है वह अपने आपमें में अदभुत है. मेरा पति तो बुद्धू है. वह कुछ नहीं कर पाता. अगर तुम नहीं आते तो मैं तो यहाँ पर शादीशुदा होकर भी कुंवारा जीवन गुजार रही होती .
पूजन- क्या बात कर रही हो ? क्या वह जोर-जोर से बोल रही थी ?
अमृता- हाँ, रात में तो वैसे भी थोड़ी आवाज भी ज्यादा सुनाई देती है. मैं उसकी आवाज को स्पष्ट सुन सकती थी, मैंने ऊपर वाले कमरे में जाने का मन बना लिया. सधे क़दमों से मैं वहाँ तक पहुँच गयी जहाँ भाभी उस व्यक्ति
की बांहों में बिलकुल नग्न अवस्था में पडी हुई थी. वे दोनों नशे में धुत थे और ऐसी अवस्था में थे की जिसे याद करते ही मैं उत्तेजक हो जाती हूँ.
अच्छा , मुझे भी तो बताओ . मैं भी उत्तेजक होना चाहता हूब ताकि तुमने जों आनंद छिप-छिपकर लिया था मैं भी उसे प्राप्त कर सकूं. विस्तारपूर्वक बताओ उस रात तुमने क्या देखा ?
अमृता- बता तो रही हूँ, भाभी बिलकुल नग्न अवस्था में थी, एक व्यक्ति अपनी जीभ से भाभी की जाँघों के बीच में चाट रहा था, मुझे बड़ा बुरा लगा . मै साढ़े क़दमों से ऐसी जगह पर खड़ी हो गयी जहां से सब कुछ साफ़ देख
सकती थी, हांलाकि मै उनमे से किसीको नहीं दिख रही थी. इशक की आग में वे दोनों इस कदर ताप रहे थे की उन्हें दरवाजा बंद करने का भी ध्यान नहीं रहा रहा. उस व्यक्ति ने एक भाभी के यौवन उभारों को भी अपने हाथों से दबा
रखा था. भाभी की सिसकारियाँ निकल रही थीं. वह जोर-जोर से ऐसी आवाजें. निकाल रही थीं जिससे मेरे भी रोंगटे खड़े हो गयी. वासना की जोरदार आंधी चल रही थी. मैंने अपने यौवन की घाटी में उँगलियाँ फिरानी शुरू करदी ,
उन लोगों के साथ-साथ मैं भी कामोत्तेजक हो रही थी. मैंने अपने उभारों को अपने ही हाथों से दबाने लगी मगर उतना सुख नहीं मिल पा राह था. मै बेचैन होने लगी थी. मैं कल्पना करने लगी की वह व्यक्ति भाभी की बजाय
मेरे यौवन की घाटी को चूम रहा है. मैं कामुक हो चुकी थी.
पूजन- तो मुझे याद किया होता. मेरे रहते अगर तुम अपनेइन यौवन उभारों को सहलाओगी तो मेरे ये हाथ फिर क्या करेंगे ?
अमृता- ओह, आप मेरी बेचैनी को समझ नहीं सकते. उस समय मेरे से क्या बीत रही थी ?
पूजन- मेरा ख़याल है की इस वक्त भी तुम कुछ कम बेचैन नहीं हो, यहाँ तक की मेरा हथियार भी कड़क होकर फुँकारने लगा है.
अमृता- अपनी भावनाओं को काबू में रखो गुरु जी. आप मेरे टीचर हैं. आप सिर्फ सिखा सकते हैं, प्रयोग नहीं कर सकते.
पूजन- मैं इस वक्त तुम्हारा साथी , तुम्हारा दोस्त हूँ, इसके सिवाय और कुछ नहीं. एक अच्छा साथी ही किसी दूसरे का दर्द समझ सकता है. तुम्हारी बेचैनी को मैं अच्छी तरह से महसूस कर सकता हूँ . और मेरी क्या इच्छा
है, यह सम्जहने में तुम्हें भी देर नहीं लगेगी. मुझे उम्मीद है की हम दोनों एक दूसरे की तकलीफ को समझने लगे हैं.
अमृता- जी नहीं, अभी नहीं. हमें अभी काफी वक्त लगेगा. इतनी जल्दी कोई कैसे किसीके दिल की बात समझ सकता है ?
पूजन- वो हुनर हमने अपने आप में विकसित कर लिया अमृता, तुम बची हो और हम सिखाने की कोशिश भी कर रहे हैं.
अमृता- मै आपसे कविता के गुर सीखना चाहती हूँ.
पूजन- जब तक दो दिल न मिलें, जों जिस्म न मिलें तब तक शब्दों का मिलना अधूरा ही रहता है.
अमृता- पहले ये बताइये की महिलायें अक्सर अपने से बड़े पुरुष के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना क्यों पसंद करती हैं ?
पूजन- क्योंकि ज्यादा उम्र के पुरुष अनुभवी होते हैं, उन्हें काम क्रीडा का भी अच्छा खासा ज्ञान होता है. वे अपनी महिला पार्टनर के साथ अच्छा बर्ताव करते हैं और जिम्मेदारी के साथ सम्बन्ध बनाते हैं. जबकि नए लड़के
इसके विपरीत काम करते हैं, नए लड़के अनाड़ी होते हैं और उनके प्यार में गंभीरता कम , छिछोरापन ज्यादा होता है.
अमृता - मेरी भाभी कल रात उस अधेड के साथ जिस्मानी सम्बन्ध क्यों बना रही थी ?
पूजन- इसमें दो बातें हो सकती हैं, एक तो ये की तुम्हारी भाभी तुम्हारे भाई से संतुष्ट नहीं हो रही होगी . जिस जोश और सुख की चाहत भाभी को होगी, उस पर तुम्हारे भाई खरे नहीं उतर रहे होंगे .
या फिर दूसरा एक कारण ये भी हो सकता है की तुम्हारे भाई भद्र पुरुष होंगे मगर भाभी को बिस्तर पर ज्यादा रंगीनियाँ पसंद होंगी , ज्यादा से मतलब ये है की जिस प्रकार से तुमने उस व्यक्ति को भाभी के यौवन
द्वार को चाटते हुए देखा, उसी साफ़ होता है की तुम्हारे भाई से भी वह इसी तरह की उम्मीद रखती होगी, उम्मीद पूरी न होने पर उसने अपने पूर्व प्रेमी को बुला लिया होगा.
अमृता- तुम लव गुरु हो या सेक्स गुरु ? या फिर किसी और तरह के गुरु हो ?
Saturday, March 5, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment