कुंवारी सुहागिन , भाग--6
आशिक- कुछ नहीं होगा, तुम डरती बहुत हो. आज तक कुछ हुआ क्या जों अब हो जाएगा.
भाभी- तो फिर कोई रास्ता तो बताओ, चलो मैं तुम्हारी ही बात मान लेती हूँ, अगर मुझे तुम्हारी योजना पसंद आई तो उस पर अमल करने का प्रयास करूंगी .
आशिक- उसे थोड़ी सी शराब पिलादों, उसके विचार बहकने लगेंगे , फिर उसे अपने पास सुलालो और जी भरके शराब पिलादों, इसके बाद तुम कोई अश्लील फिल्म चला देना. जब उसकी भावनाएं भडकने
लगें तो उसकी सहमति से मुझे बुला लेना. मैं थोड़ी ही देर के बाद इस कमरे में आ जाउंगा. इस तारह मजा आ सकता है.
भाभी रहने दो एयर, कच्चा प्लान है, बात बनेगी नहीं. ऐसा करो, मेरे साथ ही एक बार ज्यादा आनंद ले लों .देखती हूँ तुम्हारे अंदर कितनी गर्मी है, सारी गर्मी को शांत करने का मौक़ा देती हूँ. इस बच्ची को
भूल जाओ, यह क्या मजा दे पायेगी, तुम्हारा हथियार वैसे ही इतना खतरनाक है की इसे देखकर ही बिदक जायेगी. अगर जबरदस्ती की तो इसे सीधे अस्पताल ले जाना पडेगा . बात का बतंगड बन सकता है.
आशिक- तुम्हें डरने की बहुत गंदी आदत है. जब देखो तभी डरती रहती हो , मुझे भी डराती हो. अआखिर होते-होते क्या हो जाएगा ? कोई हमारा क्या कर लेगा ?
भाभी- अमृता अभी बच्ची है, नाबालिग है, बलात्कार के आरोप में ऐसे पकडे जाओगे की फिर जमानत के चांस भी नहीं मिलेंगे .
आशिक- दिल की तमन्ना तो पूरी होनी चाहिए , फिर अगर फांसी भी हो जाए तो क्या फर्क पड़ता है ? और फिर ये भी तो सोचो की मैं अकेला ही मजा नहीं लूंगा , उसे भी तो पूरा आनंद दूंगा . जिस तरह तुम शादी
होने के बाद भी अपने पति द्वारा संतुष्ट नहीं हो पातीं, उसी तरह व आह भी अपनी शादी के बाद सुहागरात के लिए मुझे बुलाया करोगी . तुम्हारे साथ भी तो मैंने तभी समबन्ध बनाया था जब तुम नाबालिग थीं , तुम्हें
भी तो शुरुआत में बड़ा बुरा लगता था . फिर बाद में क्या हुआ ? तुम तो दीवानी बन चुकी हो.
भाभी- तुम्हारे प्यार के बिना मेरा ये जीवन बेकार है.
आशिक- सोचो , अगर तुम्हारी ननद भी इस आनंद को प्राप्त नहीं कर सकी तो उसके साथ कितना अन्याय होगा .
भाभी- मेरे रहते मै तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगी, औरत कुछ भी बाँट सकती है मगर अपना प्यार नहीं बाँट सकती .
आशिक- अब तुम स्वार्थी हो रही, अपनी ननद का भला सोचना भी आपका फर्ज बनता है.
भाभी- अभी मेरी नई-नई शादी हुई है, इसके बावजूद भी अगर मैंने तुमको यहाँ बुलाया है तो समाजः सकते हो की कितना बड़ा रिस्क लिया है. मैं तुम्हें दूसरी जगह पर डाइवर्ट नहीं होने दूंगी .
आशिक- तुम तो जान हो मेरी, मुझ पर जान छिडकती हो, फिर भी मेरा इतना सा काम नहीं कर सकती, केक काम करो, मैं तुम्हें एक गोली देता हूँ, उसे दूध या पानी में मिलाकर उसे पिआला दो. इसे पीते ही
वह बेहोश जायेगी, इतनी ज्यादा बेहोश भी नहीं की कुछ सोच ही नहीं पाए, सब कुछ सोचेगी, सब कुछ समझेगी और देखेगी भी मगर वह विरोध नहीं कर पायेगी , क्योंकि इस दवा में कामोत्तेजना बढाने की ताकत
है, इसे खाते ही वह खुद अपनी जवानी की आग को बुझवाने का प्रयास करेगी , उस वक्त पर अगर तुम और हम मिलकर भी उसे ऐसा करने से मना करते हैं तो वह नहीं मानेगी . तुम्हारे पास भी कहने के लिए
यह रहेगा की तुमने तो पहले ही बहुत मना किया था, समझ गयी न , और जब वह तुम्हारे सामने मेरे साथ काम क्रीडा करेगी तो आगे से उसकी मौजूदगी में भी हम दोनों ऐश कर सकते हैं. एक बार उसको भीमजा
दे दिया करेंगे, वह किसीसे हमारी शिकायत नहीं करेगी .
भाभी- तुम बहुत खतरनाक आदमी हो चतुर. तुम्हारा नाम भी चतुर है और चतुराई से काम भी करते हो. कहीं ऐसा तो नहीं की तुमने मुझे भी ऐसी दवा खिलादी है, जिसके खाने से जिस्म उत्तेजित हो उठता है ?
आशिक- नहीं यार , तुम तो बिना दवा के भी इतनी सेक्सी हो की दवा की जरूरत ही नहीं पड़ती .
भाभी- लेकिन जब मैं नाबालिग थी, उस समय तुमने जरूर मुझे दवा खिलाई होगी , क्योंकि मैं जसी जगह पर शादी में गयी थी , वहीं पर तुमने मुझे नाचते हुए देखा था , जबकि मैं तुम्हें जानती भी नहीं
थी, फिर मैं अचानक तुम्हारे साथ सेक्स कैसे कर सकती थी /
आशिक- जाने दो यार , बहुत पुरानी बातें हैं, उस वक्त तुम्हें दवा तो खिलाई गयी थी, मगर वह मैंने नहीं उसी दुल्हन ने तुम्हें खिलाई थी जिसके शादी में शामिल होने के लिए तुम गयी थीं,
भाभी- मैं समझी नहीं, दुल्हन तो मेरे मामा की लड़की ही थी, वह मुझे दवा क्यों खिलाती ?
आशिक- क्यों नहीं खिला सकती ? वह भी तो मेरी महबूबा थी, उसे मैं बहुत दिनों से यूज कर रहा था, मेरे पास उसकी अश्लील फिल्म भी थी, मैंने उसके सामने तुम्हें पटाने की शर्त रखी , उसने तुम्हें सेट
कर दिया और बदले में मैंने उसे उसकी फिल्म लौटादी .
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