कुंवारी सुहागिन - 29
पूजन- जिस मोहब्बत के साथ तुम बोल रही हो, ऐसे में तो अगर कोई क़त्ल भी कर डाले तो ऐतराज नहीं. अपना पता बताइये मैं खुद चलकर आता हूँ, आपके क़दमों में अपना सर रख दूंगा , फिर चाहो
जैसा करना सर को कलम करना या माथा चूम लेना. अगर उड़ा दिया तो मोहब्बत का मसीहा बन जाउंगा और उठा लिया तो मुकद्दर का सिकंदर. दोनों ही परिस्थितियों में फायदा सिर्फ और सिर्फ मेरा
ही होने वाला हूँ. मेरे लिए एक अदद हसीना का इंतजाम कर ही दिया है तो यह एहसान और दीजिए, अपना पता दीजिए , मैं चला आउंगा . अभी और इसी वक्त.
महिला- बहुत मीठी बात करते हो ?
पूजन- हम लोग इनको प्यारी बातें कहते हैं. तुम खुद इतनी प्यारी हो की प्यारी बातें भी अपने आप निकल आती हैं. अब तुम्हारे मन में यह सवाल उठेगा की मैंने कैसे समझ लिया की तुम प्यारी हो
भी की नहीं ? तुम सोचोगी की मैं ऐसे ही तुक्का मार रहा हूँ, मगर ऐसी कोई बात नहीं है. तुम्हारी तस्बीर मेरे दिल में बन चुकी है. बस उसमें रंग भरना बाकी है.
महिला- मजाक कर रहे हो तुम. न तो मैंने कभी तुम्हें देखा है और न ही तुमने मुझे देखा है, फिर तस्बीर कैसे बना सकते हो.
पूजन- तुम्हारी आवाज की खनक ने मेरा दिल प्रफुल्लित कर दिया है. मन का मयूर नृत्य करने लगा है. लेकिन आवाज की स्कैनिंग करने से पता लगा है की इस मधुर आवाज को मैं पहले भी सुन चुका
हूँ, पहले भी इस मस्त स्वर को सुन चुका हूँ. आप कितनी भी सफाई दें मगर मुझसे छिप नहीं सकतीं.
महिला- आप मुझे परेशान करने की नीयत से बात कर रहे हैं, यह भूलकर की मैं तुम्हें कितनी तकलीफ दे सकती हूँ. अगर मैं यह भूल जाऊं की मैं तुम्हारी मर्दानगी की दीवानी ह्हों तो जेल में चक्की पीसोगे .
पूजन- अब जेल से डर नहीं लगता . मैंने सुना है की बरसने वाले बादल कभी गरजते नहीं और जों गरजते हैं वे बरसते नहीं.
महिला- मैंने तुम्हें समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन तुम समझ नहीं पाए. अब तुम्हारा भगवान ही मालिक है. मैं समझती हूँ की आप होटल आने के लिए तैयार नहीं है. मुझे माफ करना , मैं चाहती
तो नहीं थी मगर मेरी मजबूरी है की अब पुलिस स्टेशन में फोन करना ही होगा,
पूजन- मेरी बात सुनिए . फोन मत काटिए , मैं आ रहा हूँ. तुम जिस भी लड़की के साथ सेक्स करने को बोलोगी , मैं कर लूंगा . मगर एक धाई -मिचक्का खेलने की क्या जरूरत है. मुझसे अपनी पहचान
क्यों छिपाना चाहती हैं ? उस स्थिति में जबकि मैं सब कुछ जान चुका हूँ, यहाँ तक की तुम्हारे कुछ राज भी समजह गया हूँ.
महिला- क्या बक रहे हो ? मेरे भला क्या राज हो सकते हैं ? मैं एक इज्जतदार खानदान की लड़की हूँ.
पूजन- यह भी जानता हूँ, साथ में ये भी जान गया हूँ की ये इज्जतदार घर की लड़की सम्मानित परिवार की बहू भी है. और ये भी की आपको अभी तक आपका पति बिस्तर पर संतुष्ट नहीं कर पाया.
आज भी आपकी जिस्मानी भूख को मिटाने के लिए आपका पुराना यार आपके घर आता है. जब भी आपके परिवार के लोग घर से बाहर होते हैं आप अपने यार की बांहों में होती हैं, क्योंकि आप बेहद
सेक्सी हैं, आपका पति आपको सम्पूर्ण संतुष्टि नहीं दे सकता.
महिला- इन बातों को आप कैसे जानते हैं ? किसने बताया ये सब ?
पूजन- हम भी हर जगह नजर रखते हैं, हर खबर की खबर रखनी पड़ती है. इसका मतलब आप ये मान गयीं की की आप अमृता की भाभी हैं ?
महिला- जब जान ही गए हो ते ये भी जानलो की आज तुम्हें मेरे साथ ही सेक्स करना था न की किसी गैर लड़की के साथ.
प्पूजन- ये अम्रता के अस्पताल में होने का क्या राज है ?
महिला- अस्पताल में तो है,मगर ?
पूजन- रुक क्यों गयीं ? बोलिए . सच तो बोलना ही होगा, अगर सत्य बात नहीं कहोगी तो मैं भी तुम्हें बदनामी के उस समुन्दर में धकेल दूंगा जहाँ से लौटने का कोई रास्ता नहीं है.
महिला- लेकिन अब तुम भी नंगे हो , मैं भी नंगी हूँ तब दोनों को मिलकर चलना चाहिए. दोस्ती करेंगे तो फायदे में रहेंगे वरना......
पूजन- धमकाने का काम तुमने शुरू किया है , अब इसे खत्म मैं करूँगा. मुझे अम्रता का पता दीजिए, मैं उससे मिलाना चाहता हूँ. क्या उसने मेरी शिकायत की है ?
महिला- नहीं, मगर जों बात मैं आगे बताने जा रही हूँ, उसे सुनकर तुम्हारे रौंगटे खड़े हो जायेंगे .
पूजन- पहेलियाँ मत बुझाइए, फ़ौरन बताइये.
महिला- आप पिता बनने वाले हैं. . अम्रता की जांच में यह बात सिद्ध हो चुकी है.
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