Tuesday, March 22, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग -20
जिस्म का प्रत्येक अंग एकाग्रचित्त होकर सिर्फ जिस्मानी सुख भोगने की तरफ अग्रसर हो जाता है. इससे बहुत ऊर्जा मिलती है .
अमृता- तुम तो सच्ची के गुरु हो. सब कुछ जानते हो. बहुत कुछ सीखना होगा. मेरे ख़याल से यह बाबा भी इतना नहीं जानता होगा जितना की सेक्स के बारे में तुम जानते हो .
पूजन- अब तुम मुझे चने के झाड पर चढ़ा रही हो . आजकल के लोग सब कुछ समय से पहले ही जान जाते हैं, मेरा ख़याल है की तुम्हें भी इस सबका ज्ञान होगा ही.
अमृता - नहीं यार , मैं तो सीख रही हूँ, मुझे अपनी शिष्य बना लीजिए, ताकि मैं भी ज्ञान प्राप्त कर सकूं.
पूजन- मेरी जान, मैं तो तुम्हें हमेशा-हमेशा के लिए अपनी बनाना चाहता हूँ और तुम सिर्फ शिष्या बनना चाहती हो ? ऐसा गज़ब क्यूँ करना चाहती हो मेरी जान. आज का दिन ये प्रतिज्ञा करने का है की
हम कभी एक दूसरे से जुदा नहीं होंगे. कभी भी हम दोनों को जुदा नहीं कर पायेगा .
अमृता- तुम्हारे शब्द -शब्द से काम वासना का तूफ़ान उठने लगता है, जब भी बोलते हो, जिस्म में आग सी लगने लगती है, ज्वालामुखी जैसी लपटें उठने लगती हैं, शरीर का रोम-रोम रोमांचित हो उठता है.
पूजन- आह, ये तो मेरे मन की बात है अमृता . जब भी तुम्हें देखता हूँ तुम्हारी आँखों से कामोत्तेजना का सागर हिलोरें मारता प्रतीत होता है, इस इश्क के सागर में मुझे डूब जाने दो. मेरी मोहब्बत के आगोश
में आ जाओ . अब हम नकली नशा नहीं बल्कि कुदरती और असली नशे के आनंद उठाएंगे. जिस तरह यह अभिनेत्री इस बाबा के यौवनांग को चूस रही है, तुम भी शुरू हो जाओ. इसी तरह प्यार करना है.
अमृता- शायद मैं अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाई हूँ, इसके लिए शायद मुझे और भी कुछ समय लेने की जरूरत है.
पूजन- इस अभिनेत्री को तुम पहचान रही होंगी ? फेमस है ये. अगर यह कुछ गलत बात होती तो यह ऐसा क्यों करती ?
अमृता- ठीक है, आइये . मैं भी इस सुख को लूट लेती हूँ, लेकिन थोड़ी सी शर्म आ रही है.
पूजन- बड़ी हैरत की बात है. तुम तीन पैग पी चुकी हो, इसके बावजूद भी कहती हो की शर्म आ रही है. इतना पीने के बाद तो मेरा भी नग्न होने का जी चाहने लगता है. इसका मतलब अभी तुम पूरी तरह
से होश में हो, अगर होश में रहकर मजा लोगी तो हमेशा याद भी रहेगा. यह ऐसा अमिट चित्र होगा जों तुम्हारे ह्रदय से कभी भी लुप्त नहीं हो पायेगा .
अब इसे पूजन की कन्वेंसिंग पावर कहें या फिर शराब का असर ,मौके की नजाकत कहें या फिर जवानी का जलवा , बहरहाल जों भी हो अमृता के अंदर जोश का तूफ़ान उठ खड़ा हुआ था. अब वह
भीपूजन के रंग में सराबोर दिख रही थी. पूजन का हथियार और भी सख्त हो गया था. अमृता उसकी तरफ झुकी , उसे अपने हाथ में लेकर निहारा और फिर उससे अपने होठ सटा दियी . आगे का काम
पूजन ने कर डाला, उसने अपना हाथ अमृता की गर्दन पर रखा हुआ था ताकि वह उसे अपनी तरफ दबा सके. कुछ देर तक वह नवयौवना उसके यौवनांग से प्यार करती रही. पूजन बोला-
-बस...... अब रहने दो. इतना ज्यादा प्यार भी मत करो की मंजिल से पहले ही गिर पडूं और इस काबिल भी न रह पाऊँ की उठकर चल भी सकूं .
पूजन ने और भी कई वाक्य कहे मगर अमृता सुन नहीं पाई, वह तो आनंद लूटने में लगी थी, जब वह वहां से हटी तो पूजन ने उसके होठों से अपने होठ सटा दिए . वे दोनों ऐसे जहां में खो गए
सिर्फ इश्क होता है, उल्लास होता है, आनंद होता है, सुख होता है .... इसके अलावा और कुछ नहीं होता . पूजन ने अमृता को अपनी बांहों में कसकर जकड लिया और उस पर हावी होते हुए अपना यौवनांग
उसकी यौवन की घटी में प्रवेश कर दिया. थोड़ी सी असुविधा हुई थी अमृता को मगर जब उसने उसे अपनी तरफ भींचकर जोरदार प्रहार किया तो कोई नहीं रोक पाया. न तो अमृता की चीख और ना ही द्वार
का छोटापन, अब वे दोनों दो जिस्म एक जान बन चुके थे. छोटी सी कली अब फूल बनने की तरफ अग्रसर थी. उसके मुख से चीखें सुनाई दे रही थीं, वह आहें भर रही थी और अपने आपको पूजन
की सख्त पकड़ से छुडाने का प्रयास कर रही थी लेकिन पूजन भी होशियार था, उसने पहले से ही सब तैयारियां कर ली थीं. अमृता और वे दोनों जब तक आपस में कामक्रीड़ा करने लगे तब तक की उनके
जिस्म की गर्मी शांत न हो गयी. जब काम वासना का तूफ़ान रुका तो अमृता जोर -जोर से साँसें ले रही थी. पूजन ढीला पड़ गया तो बोला=
- कैसा महसूस कर रही हो मेरी जान ?
अमृता- बहुत तकलीफ हो रही है. ऐसा लगता है जैसे की किसी ने मिर्च डाल दी हो.
पूजन- शुरुआत में थोड़ी सी तकलीफ तो होती ही है. मगर बाद में ये सब ठीक हो जाएगा . अनुभव कैसा रहा ?
अमृता- अब तो खुद को तुम्हारे हवाले कर दिया है. जों होगा सो देखा जाएगा .
पूजन- दिन में ही संपन्न हुई हमारी ये सुहागरात आपको मुबारक हो मेरी जान.

No comments: