Wednesday, March 9, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग--8
आशिक- तुम कहना क्या चाहती हो ?
भाभी- तुम भरोसे के आदमी नहीं लगते . तुमने तो मेरी भी अश्लील फिल्म बनाई ही होगी ?
आशिक- ये काम तो पहले ही हो जाता है, तुम हसीनाओं का भी कोई भरोसा नहीं किया जा सकता .
भाभी- उस्ताद हो, अब तो तुमने मेरी पूरी जवानी ही लूट ली है, अब तो रहम करो ,. मेरी फ़िल्में मुझे वापस दे दो.
आशिक- अब हम बराबर हो चुके हैं मेरी जान, तुमने मेरी फिल्म बनाई है. बात खत्म हो गयी. वैसे तो मुझे भी ध्यान नहीं है की तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाते हुए मैंने तुम्हारी फिल्म कब निकाली थी .
भाभी- इसका मतलब तुम मुझे भी अपने जैसा ही मानते हो, क्या तुम भी ऐसा सोचते हो की मैं इस वक्त तुम्हारी फिल्म निकाल रही हूँ ?
आशिक- हाँ, इसका आधार भी है मेरे पास, ये बात मैं सिर्फ हवा में ही नहीं कह रहा हूँ. मैंने हम दोनों के आलावा भी यहाँ पर किसीकी उपस्थिति महसूस की है. लगता है जैसे कोई हमें वाच कर रहा है,
भाभी - कौन हो सकता है ? कुछ आहट सी तो मुझे भी लगी है, मैंने किसी तरह की कोई हरकत नहीं की है, मैंने किसीको फिल्म बनाने के लिए नहीं लगाया है. कहीं कुछ गडबड है.
आशिक- तो फिर क्या करें, ऐसा न हो की तुम भी बदनाम हो जाओ और मैं भी किसी मुसीबत में फंस जाऊं, मुझे यहाँ से किसी तरह निकालो .
मैं ये सब सुन ही रही थी, मैं भी हडबडा गयी, जल्दबाजी में मेरा पाँव छत पर रखे गिलास से टकरा गया. गिलास घूमता हुआ न जाने किससे टकराया की फिर से जोर दार आवाज हुई. अब तो भाभी
और उनके आशिक को पक्का यकीन हो गया की जरूर मामला गडबड है.
पूजन- वाव, फिर क्या हुआ ? तुम्हारी धडकनें भी थम गयी होंगी ?
अमृता- हाँ, मैंने देख की भाभी का आशिक कपडे पहनकर पीछे से भाग रहा था और भाभी जल्दी से किवाड़ बंद कर सोने का नाटक करने लगीं, मैं आराम से अपनी चारपाई पर आ गयी, मगर उसके बाद मुझे नींद
नहीं आयी, मैंने आज तुम्हारे घर के पास से कई चक्कर लगाए हैं, मैंने सुना है की आप भी सेक्स से समबन्धित राय मशबिरा देते रहते हैं. मुझे भी उचित सलाह दीजिए न,.
पूजन- तुमने भी सूना है, मतलब मैं क्या सेक्स गुरु हूँ या लवगुरु हूँ ?
अमृता- तुम क्या हो ये मै अच्छी तरह से जानती हूँ, अगर नहीं जानती तो यहाँ पर नहीं आती . ये न जानो की समुन्दर लुट जाएगा और लहरों को खबर ही नहीं होगी ?
पूजन- वाह बड़ा सुन्दर डायलोग है, किस फिल्म का है. ज़रा मैं तो जानू , साथ में यह भी जानता चलूँ की आखिर मैं सेक्स और र्पोमांस के विषय में किसको राय मशबिरा दे रहा हूँ.
अमृता- प्राची को गर्भवती बनाने वाला कौन है ? तुमने उसे झांसा देकर गर्भवती बना दिया और फिर उसका अबोर्शन भी करा दिया . तुमने सोचा होगा की यह बात किसीको पता नहीं चलेगी .
पूजन- अच्छा जी, तो उसने तुम्हें बताया है ?
अमृता- जी नहीं, उसने नहीं बल्कि उस डॉक्टर ने मुझे बताया है, जसिके यहाँ तुमने गर्भपात कराया था .
पूजनं- मगर वह ऐसा कैसे कर सकता है ? उसका काम तप अपने ग्राहकों की बातें सीक्रेट रखने का है.
अमृता- हाँ वो तो है. मगर वह मुज पर लाइन मार रहा था. मेरे कुंवारेपन की कीमत लगा रहा था. मुझे एक मंहगी गाड़ी तोहफे में देना चाहता था, मैंने मना किया तो उसने मेरी सहली प्राची का उदाहरण दिया
, जब मैंने विश्वाश नहीं किया तो वह सब कुछ बताता चला गया.
पूजन- सच तो यह है की प्राची के पेट में पल रहा गर्भ मेरा था ही नहीं, उसने तो बेवजह डॉक्टर से ऐसा कह दिया, कह तो मुझसे भी रही थी, क्योंकि ये भी सच है की मैंने उसकी फरमाइश पर उसके साथ कई
बार शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किये थे. मैंने जब उसके साथ पहली बार सम्बन्ध बनाए मै तभी समजह गया था की मेरे पास आने से पहले ही उसका कुंवारापन उतर चुकाथा. यानि की मेरे साथ सम्बन्ध बनाने का
उसका कोई पहला अवसर नहीं था. किसी और से भी उसके सम्बन्ध थे.
अमृता- आपको ऐसा कैसे महसूस हुआ ?
पूजन- आखिर मैं भी कुछ कुवारी हसीनों की नथनी उतार चुका हूँ. मुझे लगता है अब तुम्हारी तरफ से भी प्रस्ताव मिलने ही वाला है.
अमृता- इतनी जल्दी इस खुशफहमी में मत रहिये.

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