Saturday, March 26, 2011

कुंवारी सुहागिन - २४
पूजन को सर्दी में भी पसीना आ गया. उसकी सोच सन्न हो गयी. वह तेजी से सोचने लगा. फिर उसको एक टंकी दिखाई दी. उस पर रस्सी बंधी थी जों नीचे की तरफ गयी
हुई थी. विजय की समजह में सारा माजरा आ गया. इसका मतलब अमृता रस्सी के सहारे निकल गयी थी. इतना बड़ा रिस्क लेकर अमृता कहाँ गयी होगी ? उसको चोट तो नहीं आयी होगी . वह उस पल
को कोसने लगा जब उसने अमृता के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाने की बात सोची थी. काश वह उसके साथ ऐसी बात नहीं सोचता तो आज इस मुसीबत में नहीं फंसता . अगर उतरते समय उसे कुछ
हुआ होगा या उसे किसीने देख लिया होगा तब क्या होगा . वह इन्हीं विचारों में मगन था की उसे फिर से दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनाई दी. शुरुआत में तो उसे भ्रम सा लगा मगर चिर -परिचित
आवाज को सुनकर वह चौंक पड़ा . उसने समूची ताकत से आवाज दी-
- कौन ? कौन है उधर ? दरवाजा कौन बजा रहा है ?
पूजन के दिल का रहस्य और भी गहरा हो गया. उसने सोचा की शायद वह दरवाजा खुला छोड़ आया था, अगर ऐसा है तो फिर कौन आवाज लगा रहा है, वह जल्दी -जल्दी नीचे आया तो देखा की
वही पुलिस अधिकारी दरवाजे पर खडा था, वह अपने हाथ में एक पर्ची लिए था, उस पर तारीख और वार लिखा हुआ था, कवी सम्मलेन की तारीख देने ही वह आया था, तकलीफ की माफी मांगकर वह तो
चला गया मगर पूजन अपने आपसे सवाल करने लगा की आखिर वह इतना हडबडा क्यों रहा है ? दिन में ही अमृता के साथ शराब पीकर और उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के कारण ही ऐसा हो रहा
था, उसे अम्राता की चिंता भी सता रही थी, वह तो अभी नाजुक कली थी , उसीने उसे फूल बनाया था, वरना वह बेचारी तो शराब या शबाब के बारे में कुछ जानती बनही नहीं थी. जिस तरह वह छत से
रस्सी के सहारे गयी थी, उससे उसकी चिंताएं और बढ़ गयीं थीं, उसके सर में थोड़ा सा दर्द भी था. सबसे पहले उसने निचला दरवाजा ठीक से बंद किया और अपने बेडरूम में चला गया . मोबाइल
ओन करने के साथ ही उसने अपना टेलीफोन भी ठीक तरह से रख दिया . अभी वह ऐसा करके हटा ही था की फोन की घंटी घना घना उठी. वह सोच भी नहीं पाया था की यह सब हो गया .
पहले तो पूजन ने सोचा की अजरंदाज कर दिया जाए, लेकिन फिर कुछ सोचते हुए फोन उठा लिया , सामान से किसी महिला की मगर बेहद सेक्सी आवाज उभरी -
- हेल्लो....... कैसे हो कवी जी ? बेचैन हो क्या ?
पूजन- कौन हैं आप ? और किससे बात करना चाहती हैं ?
महिला- इस वक्त उस तरफ आप हैं और इस तरफ हम हैं. तो जाहिर सी बात है की बात करने का इरादा भी आप ही के साथ है.
पूजन- कहिये मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ ? आपसे कभी हम मिले हैं क्या ?
महिला- एक ही बार में दो-दो सवाल दागे जा रहे हैं, जुबान भी लडखडा रही है, इसका मतलब सुन्दरी के साथ-साथ सुरा का भी आनंद लिया गया है, अच्छा है.
पूजन- देखिये , आप कौन बोल रही हैं और मुझसे क्या चाहती हैं , ये ठीक ठीक बताइये वरना मैं फोन रख दूंगा .
महिला- नहीं सरकार , ऐसी गलती कभी मत करियेगा , करनी भी नहीं चाहिए . वरना जीवन भर पछताना पडेगा . मैं क्या चाहती हूँ जानते हो, बस नाथ उतराई चाहिए मुझे . मैं जानती हूँ की
आपने अभी-अभी एक कल को फूल बनाया है, उसकी नथ उतारी है,. मैं उसके लिए उपहार की अधिकारी हूँ, मुझे सिर्फ उपहार दे दीजिए. मेरा मुंह बंद हो जाएगा .
पूजन- कैसी कली ? कैसी नाथ ? मैं कुछ समझा नहीं ?
महिला- जिस नाबालिग लड़की के साथ तुमने बलात्कार किया है , इस वक्त वह होस्पीटल में है और बेहोश है. जब उसे होश आएगा तो टीवी वालों को सब कुछ बतला देगी , सबूत के साथ .
पूजन- कौन हैं आप ? और ये कैसी बातें कर रही हैं ? अमृता इस वक्त कौन से हॉस्पिटल में है ?
महिला- औकात में आ गए मियां ? अभी- अभी तो कह रहे थे की कौन सी लड़की , कैसी लड़की , कैसी नाथ उतराई, अब मिमियाने लगे. मैंने तो लड़की का नाम भी नहीं बताया था , खुद ही
अपने मुंह से लड़की का नाम बोल गए. इसको कहते हैं चोर की दाढी में तिनका.
पूजन- आपको क्या उपहार चाहिए , मैं देने के लिए तैयार हूँ लेकिन अमृता किस हॉस्पिटल में है मुझे बता दीजिए.
महिला- ठीक है. बता दूंगी लेकिन उसके लिए तुम्हें रात को ठीक दस बजे आना होगा , कहाँ आना है , इसकी जानकारी तुम्हें तुम्हारे मोबाइल पर मिल जायेगी. अगर चालाकी करने की कोशिश की
तो ध्यान रखना, बहुत बुरा हो जाएगा.

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