Monday, August 31, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-38

मगर अब क्या हो सकता था जब चिडिया चुग गयी खेत ? वह फरहा के ऊपर बहुत दौलत खर्च कर चुका था... हांलाकि तनख्वाह के अलावा भी वह अच्छा खासा कमा लेता था मगर फरहा पर वह बहुत पैसे खर्च कर चुका था... सलीम अब राजू को लेकर उसी बार में पहुच गया था , उसने उस लड़की की बुकिंग भी करवा दी... इसके लिए स्पेशल लोग भी बुक कर दिया गया... सलीम ने एक बात अपने डॉट राजू से भी छिपाई , उसने बुक किए कमरे में एक ऑटोमैटिक और छिपा हुआ कैमरा लगा दिया था, ताकि वह अन्दर की गतिविधियों को हूबहू देख सके, उस कैमरे को उसने अपने बाजू वाले कमरे में , लैपटॉप से जोड़ दिया... मगर अफ़सोस , उनकी सारी मेहनत पर पानी फ़िर गया, जब लड़की को साथ ले जाने का वक्त आया तो उसे बताया गया की उस मोडल की तबियत ख़राब है... राजू को अपने तर्क पर भरोसा हुआ ...उसने कहा भी-
- कहो सलीम... मैंने कहा था ना , ये लोग उल्लू बना रहे हैं... नामचीन लोगों या खूबसूरत लोगों के फोटो दिखाकर ये पैसे पागल लोग दो प्यार करने वालों के दिलों में नफरत घोल देते हैं....
सलीम- हाँ यार... अब तो कहते हैं की दूसरी लड़की पसंद कर लो... एक से बढ़कर एक लड़की है... काहलो छोडो अब घर चलते हैं... आज पीने का मूड भी नहीं हो रहा... ऐसी टेंशन में कैसे कुछ अच्छा लगेगा ?
राजू- ठीक है, मेरी मानो तो घर जाओ और फरहा के साथ खूब जी भरके मस्ती करो... वरना शक के चक्कर में आनंद से भी हाथ धू बैठोगे... समझ रहे हो....
सलीम- तेरी बात सही है... कल देखते हैं, क्या करना है ? फिलहाल यहांसे चलना ही ठीक है...
राजू अपने घर चला गया और थके हारे क़दमों से सलीम भी घर आ गया... उसे फरहा फ्लेट के सामने ही मिली... उन दोनों की निगाहें मिलीं तो फरहा शरारत से मुस्क्रादी , मन में अनेकों अभिलाषाएं थीं, जो उसके चेहरे से पढ़ी जा सकतीं , गिले शिकवे थे जिन्हें आंखों से देखा जा सकता था... वह आराम से घर के अन्दर घुस गया... फरहा उसके पीछे -पीछे थी... वह पानी लेकर आयी, सलीम ने पानी पिया तो वह उसके जूते के फीते खोलने लगी, फरहा के इस अपनत्व भरे व्यवहार से सलीम के मन से सारी कड़वाहट घुल गयी, उसने उसे गले से लगा लिया... फरहा ने दरवाजा बंद कर दिया , पूछने लगी-
- आजकल खोये -खोये से लगते हो, क्या बात है ... कोई परेशानी हो तो बताओ हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं... सूना है की अपनों से अपना गम कह देने से वह हल्का हो जाता है...
सलीम- कुछ ख़ास नहीं यार, बात इतनी सी है की कुछ लोगों पर मेरे पैसे बकाया थे अब मुझे जरूरत पडी है तो कोई भी देने को तैयार नहीं है, बहुत परेशानी हो रही है... सामने वाले को पेमेंट देनी है...
फरहा- तो इसमें कौनसी बड़ी बात है... उन लोगों से प्यार से बात करो , अगर नहीं मानते हैं तो कानूनी नोटिस दिलवाओ... फ़िर देखो वे कैसे आगे -आगे पैसे देते हैं...
सलीम- लेकिन कानूनी नोटिस सम्भव नहीं है, अपने को पैसे भी निकालने हैं और उनसे आगे के लिए काम भी लेना है , वे लोग बे ईमान नहीं हैं.... बस टाइम पर अपना पैसा नहीं मिल पा रहा है...
फरहा- तो थोडा सा सब्र करो , सब्र का फल हमेशा मीठा होता है... जिनका पेमेंट करना है कर दीजिये मैं किसी से उधार मांगकर दे देती हूँ... अपने पापा से मांग लुंगी... टेंशन की कोई बात नहीं है...
सलीम - नहीं यार , मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं देना चाहता... इसीलिए तो तुम्हें बता नहीं रहा था...
फरहा- मुझे क्या इतना गैर समझते हो, मुसीबत के समय अपने ही तो काम आते हैं... बल्कि अपने और पराये की पहचान मुसीबत के दौरान ही होती है...
सलीम ने फरहा को अपनी बांहों में भर लिया और उसके रसीले होठों को चूमने लगा... फरहा के जिस्म में सनसनी सी दौड़ने लगी... वह गर्म आह भरने लगी ... सलीम कह रहा था-
- जब मैं तुम्हारे साथ होता हूँ तो कोई गम नहीं होता, कोई फ़िक्र नहीं होती, कोई थकान नहीं होती... तुम्हारे प्यार में सब कुछ भूल जाता हूँ...
फरहा- तब भी मुझे छोड़कर न जाने कहाँ -कहाँ भटकते रहते हो,
सलीम- जाना कौन कमबख्त चाहता है मगर क्या करें उलझनें ही इतनी हैं की निकलना ही पड़ता है...

Sunday, August 30, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-37

राजू- तू इतना टेंशन मत ले सलीम, मैं भी तेरे साथ रह रहकर होशियार हो गया हूँ... सब कुछ संभाल लूंगा यार... मैं इस हिसाब से काम करूँगा की फरहा को ज़रा भी भनक नहीं लग पाएगी, लेकिन तुम्हें पूरा भरोसा है की वह फरहा ही है ? कहीं तुम्हें इस तरह न पछताना पड़े जैसे कुत्ता मारकर बंजारा पछताया था...
सलीम - पक्की जांच पड़ताल के लिए ही तो यह सब किया जा रहा है, अगर पता चल जाता तो मैं इतनी मेहनत क्यों करता ? जिस तरह से मैंने अपनी आंखों से देखा , उससे तो यही लग रहा है की बात सच्ची है...
राजू- अच्छा ये बताओ , उस समय तुमने कितनी पी थी ? नशे की हालत में किसी और का फोटो तो नहीं देख लिया ? मैंने सुना है ये बार वाले भी उस्ताद होते हैं, किसी भी मोडल का फोटो दिखाकर ग्राहक के सामने अपना भरोसा बनाते हैं, बाद कोई दूसरी लड़की भेज देते हैं, बहाने बहुत होते हैं... वो लड़की बाहर है... बीमार है... शूटिंग में बिजी है...और भी ऐसे बहुत से कारण.... ग्राहक सोचता है ये नहीं तो दूसरी सही, फ़िर वह किसी और से काम निकाल लेता है... तो हो सकता है यह मामला भी ऐसा हो...
सलीम- फ़िर फोटो ? वो कैसे आए उसके पास ?
राजू- यह सब तो आजकल बहुत आसान है... इंटरनेट से कितनी ही मोडल के फोटो लिए जा सकते हैं...
सलीम - चल ठीक है ... यह बात होगी तो भी सामने आ जायेगी, लेकिन ये बता की कुटी को मारकर बंजारा कैसे रोया था? मुझे ध्यान आ रहा है की मैंने इस कहानी को कहीं न कहीं सुना है... शायद बचपन में किसीसे सुनी थी...थोड़ा सा ध्यान दिला यार ... कैसे है ये कहानी ?
राजू- एक बंजारे के पास एक वफादार कुत्ता था, गरीबी आने पर उसने उसे बेच दिया... कुत्ते को बहुत दुःख हुआ लेकिन वह भारी मन से अपने नए मालिक के पास चला गया... नए मालिक ने उसे एक महत्वपूर्ण पत्र लेकर बंजारेके पास भेजा , अपने कुत्ते को अपने पास देखकर बंजारे ने फौरी तौर पर समझा की कुत्ता नए मालिक के घर से भाग आया है, इसको अपनी तौहीन समझकर उसने गुस्से में आकर कुत्ते की ह्त्या कर दी... बाद में जब उसने कुत्ते के गले में चिट्ठी देखि और पढी तब सारा मामला समझ में आया... मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी... कुत्ता उस दुनिया में पहुच चुका था, जहाँ से कभी लौटकर नहीं आया जा सकता... इसलिए कहता हूँ सलीम,,, जान और भरोसा दोनों एक जैसे होते हैं... अगर एक बार इन दोनों का कत्ल हो गया तो फ़िर ये कभी वापस नहीं आते... इसलिए इस बारे में बहुत सोच विचारकर फ़ैसला करना चाहिए...
सलीम- हाँ यार... बात तो ठीक कह रहा है... लेकिन उसके भरोसे का कत्ल तो जब हुआ ना जब की मेरा संदेह ग़लत साबित हो और उसे भी पता चल जाए की मैं उस पर इस तरह का संदेह कर उसकी जासूसी करा रहा था...यह बात सिर्फ़ तुम्हारे और मी बीच में है... इसके अलावा और किसीको कुछ ख़बर नहीं है... इसलिए बिंदास होकर वैसा करो जैसा मैं कहता हूँ....
राजू- ठीक है... मैं भी इस बात को कभी किसे नहीं कहूंगा,,, साथ ही मालिक से प्रार्थना करूँगा की तेरा संदेह बिल्कुल झूठा साबित हो... बड़ी मुश्किल से तो तुझे तेरा प्यार मिला है, कभी तूने किसी लड़की से इतने करीबी सम्बन्ध नहीं बनाए जितने इससे बन गए हैं... मेरी यही दुआ है की तेरा प्यार सलामत रहे... मेरा दिल जोरों से धड़क रहा है... अब तू तयारी कर ... मैं तुझे जैसे ही एस एम् एस करूँगा तू होटल से नीचे उतरना... तेरे पास पहले से ही कोई निजी कार रहेगी ... जब हम दोनों नीचे उतरें तो तू मुझे मत पहचानना , मैं भी तुझे नहीं पह्चानुगा... फ़िर तू उसे लेकर चले जाना...
सलीम- ठीक है राजू.... मैं तेरा यह एहसान कभी नहीं भूल पाऊंगा,,,
राजू- बस क्या सलीम , पहले इज्जत देता है और फ़िर गाली से बात करता है ... मुझे अपना काम करने दे....
सलीम की निगाहों में चंचल, शोख हसीना फरहा का चेहरा घ्प्प्मने लगा ... उसने कितनी क़समें खाईं थीं, कितने वायदे किए थे... वह उन सबको भूल गयी... जिसे उसने देवी समझा था, वह इतनी गिरी हुई निकली... काश , वह अगर पहले ही उस बार में गया होता तो यह नौबत नहीं आती... उसने लाखों खर्च करके फरहा को सुख सुविधाएं मुहैया कराई थीं.... अगर इसका एक हिस्सा भी वह अपने बीवी बच्चों के लिए करता तो वे बहुत खुश होते....









Saturday, August 29, 2009

दिलफेंक पडोसन, भः-36

इसलिए रंगे हाथों पकड़ने का ख्याल मन से निकालना होगा, तो फ़िर उसके पास एक दूसरा रास्ता यह बचता था की मैं अपने किसी ख़ास दोस्त के लिए उसे बार में जाकर बुक कराऊँ और फ़िर अपनी आंखों से उसे देखूं, मगर दोस्त के साथ सम्बन्ध बनाते हुए नहीं, अचानक उसके सामने आकर... बाकी कहानी तो ख़ुद दोस्त बता ही देगा... उसने एक फुल प्रूफ़ योजना तियार की और घर से निकल गया, अपने एक जिगरी यार को उसने तैयार भी कर लिया, उसका दोस्त एक नंबर का शराबी था लेकिन चरित्रहीन नहीं... उसका नाम राजू था, सलीम उससे अपनी हर बात कर लिया करता था... वे दोनों न तो एक जिले प्रदेश के थे और न ही एक जाती- धर्म के, इसके बावजूद उन दोनों की aapas में khoob बनती थी... राजू ने उसको यकीन दिलाया-
- तू फ़िक्र मत कर मेरे यार... मैं सारी बात समझ गया हूँ ... अब मैं फरहा को अपने साथ लेकर तो जरूर जाऊँगा मगर उसका हाथ भी टाच नहीं करूँगा... तेरी मोहब्बत की इज्जत तो करनी ही पड़ेगी ....और सुन , मरते दम तक यह राज सिर्फ़ मेरे सीने में ही रहेगा, और फ़िर मेरे साथ ही दफ़न हो जाएगा... कोई नहीं जान पायेगा की कैसे क्या हुआ ? अब यह बात भी बताने की जरूरत नहीं की मुझ पर भरोसा करो...
सलीम- बस क्या यार , मेरा दोस्त होकर भी ऐसी हलकी बात करता है... अब तू दाढी मुच काटकर बिल्कुल हीरो बनजा , तियार होकर मेरी साथ मयूरी बार चल ... यह सैटिंग वहीं से होगी...
सलीम और राजू मयूरी बार में आ गए... शाम होते ही वहाँ महफ़िल सजा करती थी, जब वे दोनों पहुचे तो महफ़िल अपने पूरे शबाब पर थी... हर तरफ़ रंगीनियाँ थीं... सलीम आकर उसी जगह पर बैठ गया जहाँ पर वह कल बैठा था... वेटर की मदद से उसने कल वाली महिला वेटर को खोज लिया और उसे टिप्स दी, वह फ़ौरन पहचान गयी ... सलीम की तरफ़ शरारत से आँखें तरेरते हुए बोली-
-कहिये जनाब , रात मजा आया की नहीं ?
सलीम - मजे की छोडो ... उसका बाप भी आ गया...खूब मस्ती में बीती रात ... तुम नहीं जातीं क्या कभी बाहर ?
वेटर- मैं नहीं जा पाती... यहीं पर तुम सब को देख लेती हूँ... जो नसीब में होता है, यहीं पर मिल जाता है...
सलीम - कल वाली जिस मोडल का फोटो आपने दिखाया था, वह आज रात के लिए मिल सकती है क्या ?
वेटर- हाँ, हाँ क्यों नहीं.... कहो तो महीने भर की बुकिंग कर्वादूं, सच बता रही हूँ, बहुत गज़ब की चीज है... मिर्ची की तरह तीखी है... पहले उसकी बहुत डिमांड थी मगर अब उसके नखरे हो गए हैं...अगर उसके नखरे झेल सकते हो तो स्वागत है, मगर बाद में ये ना कहना की बताया नहीं था...
सलीम- कोई नहीं यार... तुहें कुछ नहीं कहेंगे...तुम तो अब दोस्त हो गयी हो हमारी ... उस नकचढी को संभालने की जिम्मेदारी हमारी है... तुम बुलाओ उसको...
सलीम ने अपने मोबाइल को स्विच ऑफ़ कर दिया ताकि जब उसको फरहा का फोन आए तो वह उसके बात ही न कर सके... इसके ठीक १० मिनिट के बाद महिला वेटर ने उस मोडल की स्वीकृति की जानकारी दी... उसने फरहा का नाम अनु बताया, सलीम समझ गया की उसने अलग -अलग जगह पर अपने अलग -अलग नाम बता रखे होंगे, वरना वह यहं पर अनु क्यों बताती...रात की कीमत तय कर ली गयी, इसके बाद होटल भी बुक कर लिया गया... सलीम ने साफ़ कर दिया की वह बार के लोगिंग रूम में नहीं रुक सकते... इसके बाद पीने का दौ शुरू हो गया... राजू ने पैग पीते हुए कहा-
- यार मैं कुछ नर्वस हूँ, मैंने कभी ऐसे जासूसी का काम नहीं किया ...
सलीम- तू भी कमाल करता है... दोस्ती के लिए लोग जान की बाजी तक लगा देते हैं और तू इतने से काम के लिए बहक रहा है... जब अभी से तेरा ये हाल है तो आगे क्या होगा ? तू मामले को बिगाड़ मत देना....
राजू- इतना एडा भी नहीं हूँ.... बस थोड़ी सी झिझक हो रही है लेकिन इनकार कब कर रहा हूँ...
सलीम- मेरा कमरा भी तेरे कमरे के बाजू में ही होगा, जब तू उसे अपने कमरे में लेजाये तो खाना बोल देना ... खाना खाने के बाद अचानक तबियत ख़राब होने का बहाना करना और फ़िर वहाँ से चल देना... तुझे उसको पूरी तरह से विश्वाश में लेना होगा... उसे पूरी फीस देनी होगी ...
राजू- फ़िर क्या करुँ उसके बाद ?
सलीम- इसके बाद होटल से बाहर निकलना , उससे ठीक पहले मुझे एक एस एम् एस करना... इस एस एम् एस को अभी से ही टाइप करके सेव कर लो... ताकि तुंरत अपने काम को अंजाम दे सको...

Friday, August 28, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-35

सलीम को बार की महिला ने जिस काल गर्ल का फोटो दिखाया था, वह किसी और का नहीं बल्कि फरहा का ही था... उसका पेशा भी मोडलिंग बताया गया था...तभी से उसके मन में जबरदस्त खटका लग गया... लेकिन रात में वह बहुत ज्यादा शराब पी गया था , इस कारण उसने रात में जो भी बातें सुनी थीं , वे दिमाग में गडमड हो रही थीं... वह समझ ही नहीं पा रहा था की उसने क्या कहा और क्या सुना ? सब कुछ सपने जैसी बातें लग रही थीं...... फरहा का मूड रोमांटिक था, वह अपने हुस्न के जलवे दिखाने लगी... सलीम का नाजुक अंग भी सख्त होने लगा... बदन सुलगने के लिए तैयार होने लगा... फरहा बहक रही थी, कह रही थी-
- तुमसे दूर रहकर पता चलता है की अब दिल में कितना प्यार उमड़ आया है... मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करने लगी हूँ... अब मुझसे कभी दूर मत जाना ... मैं जी नहीं पाउंगी.... तुम नाराज हो मुझसे ?
सलीम- कमाल है, नाराज होकर ख़ुद चली गयीं थीं और पूछ मुझसे रही हो...
फरहा- चली गयी थी तो क्या ? तुमने तो नहीं मनाया ना... लेकिन मैं रात भर पछताती रही, मुझे माफ़ करदो सलीम, मैं तुम्हारे बिना जिन्दा नहीं रह सकती... मुझे अपने दिल में कैद कर लो और फ़िर इस फरहा को कभी मत भूलना... मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी हूँ... तुम्हारे लिए ही कुदरत ने मुझे इस धरती पर उतरा है...
सलीम- ओह फरहा ... कितनी अच्छी हो तुम... मिंज तुमसे कभी नाराज नहीं हो सकता... नदी अपने पानी से कभी नाराज हो सकती है ? सुगंध कभी अपनी खुशबू से नाराज हो सकती है? सवाल ही नहीं उठता ...
फरहा- तो फ़िर नाश्ता कर लो... मैं भी चलती हूँ , कम्प्यूटर पर कुछ कम करना है, कुछ जगह पर फोटोग्राफ भेजने हैं, एक बड़ी फ़िल्म शुरू होने जा रही है... मैंइसीमें काम पाने की कोशिश कर रही हूँ...
सलीम - ठीक है फरहा... तुम काम देखलो ,मैं नाश्ता कर लेता हूँ ... मुझे भी एक जगह जाना है... खाना बाहर ही खाऊंगा... बोरीवली में ट्यूशन पढ़ना चाहता है एक छात्र ... कई दिनों से पीछे पडा है... आज जाकर बात कर लेता हूँ... मेरे ख़ास दोस्त ने उसकी शिफारिश की है... वह भी किसी बड़े गायक का बेटा है...
फरहा- ठीक है... मगर खाना खाकर जीएते तो अच्छा होता ... आज मैंने मटन बिरियानी बानाने की तैयारी की है... चाहो तो थोड़ा सा खाकर जाओ...
सलीम- बिल्कुल भी भूख नहीं है... रात को पार्टी में कुछ ज्यादा ही खा लिया था... देखो न अभी से ही कितना बुरा हाल हो रहा है... मैं अगर नीबू नमक का पानी नहीं पीता तो यह नाश्ता भी नहीं कर पाता....
फरहा- ठीक है , जैसी तुम्हारी इच्छा ... मगर रात के खाने की पसंद तो बतादो... शाम को क्या बनाऊं....?
सलीम- शाम की शाम को देखेंगे... अगर आ गया तो तुम लोगों की इच्छा का खाना ही खा लूंगा... अगर नहीं आया तो कोई बात ही नहीं है... तुम तो जानती ही हो की हम लोग कितनी उलझन में रहते हैं... मेरा साइड बिजनिस भी है... उसीके सिलसिले में रात -दिन घूमना पड़ता है...
फरहा- हाँ , वो तो है... काम भी जरूरी है....फोन जरूर करना , जैसे भी हो बता देना...
सलीम- जी , बिल्कुल... अब हमेशा थोड़े ही मोबाइल में गड़बड़ रहेगी....
इसके बाद फरहा चली गयी... सलीम ने राहत की साँस ली, उसकी उपस्थिति में वह घुटन सी महसूस कर रहा था... उसकी समझ में यह बात नहीं आ रही थी की आख़िर वह फरहा से ऐसा व्यवहार करे... फरहा की बातचीत संदेह स्पस्द जरूर थीं लेकिन कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था की फरहा पेशेवर वैश्या है... वह इस बात की पूरी तसल्ली कर लेना चाहता था... इसीलिए उसने अपने मन ही मन एक योजना तियार की... उसी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए वह घर से बाहर जा रहा था... उसके लिए यह एक नया अनुभव था, हांलाकि उसने सुन रखा था की कालेज की लड़कियां तथा बड़े घर की लड़कियां भी मौजमस्ती करने और जेब खर्च के लिए ग़लत रास्ता अख्तियार कर लेती हैं... मगर इतने बड़े पैमाने पर यह होता होगा इसकी कल्पना भी उसने नहीं की थी... सलीम यह भी जानता था की अगर फरहा को उसने रेंज हाथ पकड़ लिया तो वह उसके जिस्म का उपभोग भी नहीं कर पायेगा और उसने अब तक उस पर जितना भी खर्च किया , वह सब बेकार जाएगा...

मोगा जिले की पुलिस ने रिश्वत लेने के लिए एक जिंदा महिला को मरा हुआ दिखा दिया।

मोगा जिले की पुलिस ने रिश्वत लेने के लिए एक जिंदा महिला को मरा हुआ दिखा दिया।

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चंडीगढ़। पंजाब पुलिस का एक नया कारनामा सामने आया है। मोगा जिले की पुलिस ने रिश्वत लेने के लिए एक जिंदा महिला को मरा हुआ दिखा दिया। इतना ही नहीं उसकी हत्या के आरोप में पुलिस ने उसी के पति को गिरफ्तार कर लिया। पुलिसवालों के लालच की पोल उस वक्त खुली जब ये महिला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पेश हुई।

दरअसल पुलिस की फाइलों में चरणजीत कौर मर चुकी है। हत्या का आरोप इसी के पति चमकौर सिंह के सिर पर है। मगर आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि पंजाब पुलिस ने पैसों के लिए इस जिंदा महिला को मरा हुआ साबित कर दिया। और इसके बेगुनाह पति को जेल में डाल दिया। पुलिस के इस लालच की पोल तब खुली जब चरणजीत कौर शिकायत लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंची।

ये पूरा मामला पति-पत्नी के झगड़े से जुड़ा है। चरणजीत कौर इस महीने की चार तारीख को अपने पति से झगड़ा कर किसी को बताए बगैर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर चली गई। बेटी के गायब होने के बाद उसके पिता की शिकायत पर पुलिस ने 13 अगस्त को चमकौर सिंह के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया। उन्होंने लाख दलीलें दी मगर पुलिस की आंखों में लालच तैर रहा था।

आरोप है कि पुलिस ने चमकौर सिंह से मामला रफा-दफा करने के लिए 4 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। जब वो पैसे नहीं दे पाया तो पुलिस उसे उठा ले गई। पुलिस ने एक लाश का भी इंतजाम कर लिया जिसे उसने चरणजीत कौर का बताया। मगर चमकौर सिंह के पिता अपनी बहू को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए तो सारा मामला सामने आ गया।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के गृह सचिव मोगा के एसएसपी समेत धर्मकोट पुलिस स्टेशन के एसएचओ से जवाब तलब किया है। चरणजीत कौर के जिंदा मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिस महिला की लाश को पुलिस ने चरणजीत का बताया था वो किसकी थ

मायावती को तीसरी बार बसपा की कमान

Aug 28, 02:01 am

लखनऊ। बसपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में मायावती को सर्वसम्मति से लगातार तीसरी बार पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। उन्होंने विभिन्न राज्यों में महंगाई के खिलाफ आंदोलन चलाने की घोषणा करते हुए पार्टी सदस्यता शुल्क की राशि बढ़ाकर 40 रुपये करने, हर वर्ष 1 जनवरी से 31 मार्च तक विशेष सदस्यता अभियान चलाने, अपने जन्मदिन पर लिया जाने वाला चंदे अगले वर्ष से समाप्त करने का एलान किया।

अपने आवास पर आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं अधिवेशन की अध्यक्षता खुद करते हुए मायावती ने कहा कि 18 सितंबर 2003 को उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी ने कई अभूतपूर्व सफलताएं हासिल की, जिसमें उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाना भी शामिल है। ऐसी ही सफलता अब महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों में मिल सकती है, इसलिए दोनों राज्यों के पार्टी नेता इन चुनाव में जी-जान से जुट जाएं। मायावती ने प्रदेश के पार्टी कोऑर्डिनेटरों को अपने काम में सुधार लाने को कहा। प्रदेश में गत दिनों हुए उप चुनावों में तीन सीटों पर मिली जीत के लिए उन्होंने नेताओं की सराहना की। मोरना सीट पर बसपा की हार पर उन्होंने कहा कि उस सीट पर तीन-तीन मुस्लिम प्रत्याशी खड़े होने से वोटों का बंटवारा हुआ। ऐसा न हुआ होता तो बसपा यह चौथी सीट भी जीत लेती। उन्होंने बसपा की सफलताओं के लिए कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' की नीति पूरे देश में जागृत करने की आवश्यकता जतायी।

Thursday, August 27, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-34

सलीम को रोजी की कोई भी बात ग़लत नहीं लग रही थी, उलटा वह तो और भी ज्यादा खुश था... उसको इतनी समझदार लड़की के साथ रात बिताने का मौका मिला , इसे सोचकर खुश हो रहा था... उस रात सलीम ने रोजी को भी खूब मजा दिया, वह आक्रामक होने में नहीं बल्कि प्यार से सम्बन्ध बनाने में विश्वाश करता था, रोजी ने महसूस किया की सलीम उसके साथ बेहद अपनत्व भरा व्यवहार कर रहा था... उसने रोजी के फीस भी चुकाई और एक हजार की टिप्स भी दी... रोजी जान गयी की उसकी मुलाक़ात जल्दी ही सलीम से होने वाली है... दोनों जब विदा हुए तो सुबह के ४ बज चुके थे... सलीम ने कालबेल की बैट्री निकाल दी और दरवाजा बंद कर चुपचाप अपने फ्लेट में सो गया... दोपहर ठीक १२ बजे उसकी नींद खुली... उसने दरवाजा खोला तो दूध का पैकेट और अखबार दिखाई दिया... फरहा उसके ठीक सामने यानी की अपने फ्लेट के दरवाजे पर खादी उसे एकटक निहार रही थी... सलीम ने उसकी कोई परवाह नहीं की, लेकिन अपना दरवाजा भी बंद नहीं किया ... दूध और पेपर लेकर वह अन्दर आ गया... फरहा भी उसके पीछे -पीछे आ रही थी, उसने धडाम से दरवाजा बंद कर अपने गुस्से का इजहार किया और बोली-
- क्या मैं जान सकती हूँ की रात भर कहाँ रहे जनाब ?
सलीम- मैं यहीं था, सो रहा था... बेल ख़राब है इसलिए आवाज नहीं आयी होगी....
फरहा- मुझे झूठ पसंद नहीं है... मैं जानती हूँ की गेट पर २ बजे तक लोक लगा था... मैं भी नहीं सोयी थी तब तक... रात में दो बार जाग जागकर भी देखा है... समझे ... सच सच बताओ कहाँ थे ? क्या आज स्कूल नहीं जाना है ?
सलीम- मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है... फ्रेश होने के बाद करें तो कैसा रहेगा ?
फरहा- आराम से फ्रेश हो जाओ... मैं सर दबा दूंगी, दवा लाने जा रही हूँ...नाश्ता भी तैयार करती हूँ मगर ये न समझो की सवाल जवाब से बच जाओगे... जवाब देना ही होगा...
फरहा गुस्से में पाँव पटकती हुयी बाहर निकल गयी और सलीम को सोचों के भंवर में छोड़ गयी... सलीम ने सबसे पहले एक गिलास नींबू पानी पानी पिया, एक हाजमे की गोली खाई और नित्यकर्म से फारिग हो गया... फरहा गर्मागर्म नाश्ता तैयार करके ले आई ... अब तक उसके सर का दर्द काफी हद तक कम हो चुका था... फ़िर भी फरहा ने एक पत्नी की तरह अधिकार दिखाते हुए उसका सर दबाना शुरू कर दिया... सलीम अब तक कहानी गढ़ने में ही लगा था... उसके मन में कई कहानिया उभरीं फ़िर एक सुनाने लगा-
- क्या बताऊँ यार .... बस ऐसा ही मामला है... एक दोस्त मिल गया... काफी दिनों के बाद मिला था, उसीने पार्टी दी, खुशी -खुशी में मैं इतनी पी गया की उसीके घर सो गया.... सुबह आँख खुली ततो भागा...
फरहा- मगर सूचना तो देनी थी, फोन तो उठाना था , मैं यहाँ परेशान हो रही थी...
सलीम- मेरे खयाल से साइलेंस पर रखा था मोबाईल...
फरहा ने एक आह भरते हुए यह जताने की कोशिश की की वह उसकी बात से संतुष्ट है... फ़िर उसने सलीम को अपनी बांहों में भरते हुए कहा-
- तुम क्या जानो मेरे दिल की हालत ... मर्द हो ना इसीलिए इतने बेदर्द हो... मेरे दिल में कितनी कसक हो रही थी... अब तो मैं तुमसे एक पल के लिए भी अलग नहीं हो सकती... यह इश्क बिल्कुल आसान नहीं होता... लोग पहले कहते थे अब जाकर समझ पाई हूँ मैं... सुनो... एक बात बताओगे ?
सलीम- अरे जान, बेवजह घबरा रही हो... ऐसा कुछ नहीं है... मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करता हूँ...
फरहा- तुम्हारे बिना इस दुनिया में अब मेरा कौन है... आइन्दा अगर ऐसा कभी किया तो मुझसे बुरा नहीं होगा... कहीं ऐसा तो नहीं की आज की रात मेरी किसी सौतन के साथ बिताकर आए हो... देखो, छिपाना मत... बता देना... मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा... तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी है... मुझसे खूबसूरत कोई दूसरी लड़की तो नहीं मिल गयी... तुम्हें पता है फिट रहने के लिए मैंने एक जिम में पूछ ताछ की है...मैं तुम्हें लुभाने के लिए अब और भी ज्यादा स्मार्ट बन्ना चाहती हूँ... कहो तो बन जाऊं मेंबर ?
सलीम- ये भी कोई पूछने की बात है ? बेफिक्र होकर बनो मेंबर... कितना क्या है मुझे बता देना ...
फरहा ने सलीम के होठों का एक जोरदार चुम्बन लिया, सलीम की भावनाएं भड़कने लगीं... मन में उत्साह पैदा हो गया... उसने फरहा को अपनी तरफ़ खींचकर उसकी गोलाइयों को रगड़ना शुरू कर दिया... फरहा खुश थी... सलीम का मूड भी फ्रेश हो रहा था... वह रात को बीती हुई घटनाओं को याद करने की कोशिश कर रहा था...

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लालकिले पर जताया मालिकाना हक

मुरादाबाद। आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के पोते मिर्जा जमशेद बुखत के बेटे मिर्जा मोहम्मद बेदार बुखत की बीवी सुल्ताना बेगम ने लाल किले पर अपना हक जताया है। उन्होंने ऎलान किया है कि इसे हासिल करने के लिए वे ईद के बाद हुमायूं के मकबरे पर बेमियादी धरना शुरू करेंगी। वे देश भर के मुस्लिम तुर्को को एक मंच पर लाने की भी ख्वाहिश रखती हैं।

लखनऊ में पहली जनवरी 1950 को जन्मी सुल्ताना बेगम कहती हैं कि 15 अगस्त 1965 को उनका निकाह मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के पौत्र मिर्जा जमशेद बुखत के बेटे मिर्जा मोहम्मद बेदार बुखत से हुआ। उनके शौहर का इंतकाल 22 मई 1980 को हो गया था।

उन्होंने कहा कि मुगल बादशाह तुर्क बिरादरी से थे। मुगल शासन तक हिंदुस्तान में तुर्को की स्थिति बेहतर थी। आजादी के बाद स्थिति लगातार बिगड़ी। उन्हें आखिरी मुगल बादशाह के देश भर में फैले विभिन्न मकबरों व अन्य संपत्ति पर भी उन्हें हक चाहिए। बेगम ने केंद्र सरकार की 400 रूपए प्रति माह मिलने वाली पेंशन को नाकाफी बताया और कहा कि इस पैसे से पेट नहीं भरता फिर भी यह उनका हक ह
Agency Thursday, August 27, 2009 03:46 [IST]

Topless लॉस एंजिल्स. अमेरिका के लॉस एंजिल्स सहित 7 शहरों में टॉपलेस घूमने-फिरने के अधिकार की मांग को लेकर हजारों महिलाएं सड़कों पर टॉपलेस निकल पड़ी। महिलाओं का कहना था कि जिस तरह पुरुषों के लिए शरीर के ऊपरी हिस्से को ढंकना कानूनन अनिवार्य नहीं है, उसी तरह उन्हें भी सार्वजनिक जगहों पर टॉपलेस घूमने-फिरने का अधिकार दिया जाए।



अमेरिका में यह आंदोलन कई सालों से चल रहा है और कई शहरों में महिलाओं को ऐसे अधिकार मिले हैं। आंदोलन की आधिकारिक वेबसाइट http://gotopless.org के मुताबिक ड्रिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में 1986 और न्यूयॉर्क में 1992 में ही महिलाओं को पब्लिक प्लेस पर पुरुषों के समान टॉपलेस होने का अधिकार मिल गया।



आंदोलन को शुरू करने वाले स्प्रिचुअल लीडर एम. रेयल का कहना है कि जब पुरुष टॉपलेस रह सकते हैं तो संवैधानिक रूप से महिलाओं को भी समानता का यह अधिकार मिलना चाहिए या पुरुषों को भी सीना ढंकने के लिए बाध्य करना चाहिए।



यह मांग महिला-पुरुष समानता के अधिकार से जुड़ी हुई है, इसलिए हर साल अगस्त माह में इस मांग को लेकर प्रदर्शन का प्रतीकात्मक महत्व है। अमेरिका में 26 अगस्त 1920 को महिलाओं को वोटिंग का अधिकार मिला था, इसलिए यह दिन यहां महिला समानता दिवस के रूप में मनाया जाता ह

लेटर

सेवा में ,
श्रीमान मैनेजर
मुंबई मराठी पत्रकार संघ
आजाद मैदान , मुंबई ।

विषय- १ सितम्बर को वार्ताहर कक्ष बुक कराने बाबत ।

नमस्कार, महोदय कृपया ०१, ०९, २००९ को दोपहर ०३ बजे से वार्ताहर कक्ष की बुकिंग करने की कृपा करें। बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव , मुंबई -कोकण-ठाणे के प्रभारी श्री प्रोफे़सर सुरेश माने जी उपरोक्त दिनांक को एक प्रेस कोंफ्रेंस को संबोधित करेंगे ।
इस पत्र के साथ फीस भी भेज रहा हूँ।
धन्यवाद

आपका-

मुकेश कुमार मासूम
सचिव
मुंबई उपनगर , बहुजन समाज पार्टी
9322880599

Wednesday, August 26, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-33

सलीम- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मैं तो कुछ अलग ही सोच रहा था... मैं ये जानना चाहता था की महीने भर में तुम्हारे पढाई का कुल खर्च कितना आता है ?
रोजी- आता तो ज्यादा है , मगर किसी भी हालत में कम से दस हजार की जरूरत होती है...
सलीम- यानी की अगर तुम्हारे पास महीने में दस हजार रुपये आ जाएँ तो तुम ये काम छोड़ सकती हो ?
रोजी- छोड़ सकती हूँ , मतलब ? अरे मैं कोई पेशेवर वैश्या थोड़े ही हूँ... जब तक जरूरत है तभी तक ये सब करना है , उसके बाद तो किसीकी तरफ़ नजर उठाकर भी नहीं देखना... मैं एक डॉक्टर की बेटी हूँ ... काश वे आज हमारे साथ होते ... या फ़िर उन्होंने दूसरीshaadee नहीं की होती.... काश......... लेकिन अब क्या हो सकता है ?
सलीम विचारों में गम हो गया... वह अपने बच्चों के बारे में सोचने लगा... अगर वह फरहा से दूसरी शादी कर लेता है तो उसकी बेटी की हालत भी रोजी जैसी हो सकती है... वह दुखी हो गया... उसका सर चकराने लगा...उसे अपने एक सीनियर मित्र की बातें याद आने लगीं... उसका मित्र तो अपनी एक शादी से भी परेशान था... वह हमेशा कहता था की होशियार आदमी को कभी भी भी शादी नहीं करनी चाहिए, इसके बदले मनपसंद लड़की के साथ सिर्फ़ समझौता करना चाहिए, खाओ-पीओ अपनी फीस लो और अपने घर जाओ... मगर शादी के बाद अच्छा भला आदमी भी औरत का गुलाम बन जाता है... लेकिन सलीम इन विचारों से सहमत नहीं था... वह जिम्मेदारी को भुई महत्वपूर्ण समझता था... आज उसकी समझ में आया की उसका दोस्त कितना सवः बोलता था... अब उसने फरहा के साथ शादी करने का विचार त्याग दिया और रोजी के साथ एक समझौते की उम्मीद करने लगा...

उसने बाकायदा रोजी से पूछ भी लिया-

- क्या मेरे साथ जुड़ना चाहोगी ? ऐसे रोजाना रात-रात भर जागने से तुम्हारी सेहत पर भी असर पड़ता होगा और पढाई पर भी... मेरे एक दोस्त कहते थे की शादी से अच्छा समझौता होता है... समझौते से तुम आराम से सो सकोगी... तुम्हें हर महीने दस हजार रुपये मैं दूंगा... बोलो मंजूर है ?

रोजी- मुझे सोचने का वक्त दीजिये ... अपनी शर्तें भी बता दीजिये ... यानी की मुझे आप दस हजार रुपये महीने क्यों देना चाहते हैं ? जबकि अआप तो एक टीचर हैं और मैं जानती हूँ की टीचर की पेमेंट इतनी ज्यादा नहीं होती...

सलीम- मैं भी तुम्हारे साथ हमबिस्तर होने की कीमत ही दे रहा हूँ... फर्क इतना है की मैं तुम्हारी मर्जी के मुताबिक ही सम्बन्ध बनाऊंगा, जब तुम्हारे पास टाइम नहीं होगा तो जिद नहीं करूंगा... एक तरह से तुम मेरी पत्नी ही रहोगी मगर शर्तों के साथ... जब भी तुम चाहो अपनी पसंद की शादी कर सकती हो मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा...

रोजी - ठीक है , मैं इन शर्तों पर विचार करती हूँ... मगर ये मैं जान चुकी हूँ की तुम बहुत दयालु हो... तुम जैसे नेकदिल इंसान से दोस्ती करके मुझे खुशी और गर्व का अनुभव होगा॥

सलीम- बाकी महिलायें तो मर्दों की सताई हुई होती हैं मगर ,मैं मेरी महिलाओं का सताया हुआ हूँ...मैं जब उसके साथ हमबिस्तर होता हूँ तो मेरी पत्नी का मूड बदलता रहता है, वह मुझे खुश नहीं कर पाती...

roji - सेक्स के मामले में अगर आप अपनी पार्टनर के बदलते मूड से कंफ्यूज हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके पीछे क
ई कारण हो सकते है... . जानते हैं, क्या हैं ,पुरुषों का मानना है कि महिलाएं बेहद राजदार होती हैंउनकी सेक्स ड्राइव को लेकर भी वे कुछ ऐसा ही सोचतेहैं...कई बार वे उन्हें सिडक्टिव लगती हैं, तो ऐसे मौके भी आते हैं जब वे क्लोज आने में दिलचस्पी नहीं दिखातीं। दरअसल, इसके पीछे कई कारण होते हैं और अपनी परेशानी दूर करने के लिए आपको उन कारणों को दूर करना ही होगा। मूड न होना हायपोएक्टिव सेक्सुअल डिजायर डिसऑर्डर के केसेज महिलाओं में बहुत ज्यादा देखने में आते हैं। यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में 18 से 59 साल की महिलाओं पर की गई एक स्टडी से साबित हुई। इस डिसऑर्डर से ग्रस्त व्यक्ति को सेक्स में ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती। इस डिसऑर्डर की प्राइमरी स्टेज में महिला को सेक्स की इच्छा ही नहीं होती, जबकि सेकंडरी स्टेज में उसकी पहली वाली दिलचस्पी खत्म हो जाती है। कंडिशन के बिगड़ने पर वह सेक्स से दूर भागने लगती है। इस डिसऑर्डर की वजहें कम्यूनिकेशन प्रॉब्लम, लड़ाई, प्यार का न मिलना, अकेलापन वगैरह हो सकती है...अब इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है की मैं तुम पर आरोप लगा रही हूँ... यह सामने वाली महिला की समझ पर भी निर्भर करता है...

Tuesday, August 25, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-32

कई बार बच्चे के जन्म को आसान बनाने के लिए डिलिवरी के वक्त एप्सिटॉमी नाम की छोटी सी सर्जरी की जाती है... यह एक छोटा सा ऑपरेशन है, जिसके तहत बच्चे को आसानी से बाहर निकालने के लिए वैजाइना को थोड़ा बड़ा किया जाता है.... कई बार इस ऑपरेशन की वजह से इंटरकोर्स करते वक्त परेशानी या दर्द होता है... हालांकि अगर आप सावधानी बरतें, तो 6 से 8 हफ्ते में इस सर्जरी का असर खत्म हो जाता है और वैजाइना अपनी पुरानी शेप में लौट आती है,

सलीम- सच , अरे यार तुम तो डॉक्टर लगती हो... क्या तुम्हें ये ज्ञान ऐसे ही हो गया या फ़िर पढने -लिखने से ?
रोजी- मेरे पिता डॉक्टर थे... उनकी मौत हो गयी... मेरी सौतेली माँ ने सब संपत्ति अपने नाम करली... इसी कारण मुझे इस लाइन में आना पडा... अब मैं पढ़ती हूँ, और अपना खर्च निकालने के लिए कभी कभार किसीके साथ रात गुजार लेती हूँ... और तुमने सही पहचाना , मैं डॉक्टरी की पढाई कर रही हूँ...
सलीम- ओह , मैं तुम्हारी नोलेज पहचान गया था, जीवन जीने के लिए हम लोगों को कितने समझौते करने पड़ते हैं... मैं तुमसे बार- बार मिलना चाहूँगा...
रोजी- ठीक है मगर मेरा कांट्रेक्ट इसी बार के साथ है, इसलिए मैं इसी माध्यम से मिल सकती हूँ... पूरा सुख देने की गारंटी मेरी है और इस बात को गुप्त रखने की जिम्मेदारी आपकी भी है...
सलीम- मैं जबान का सच्चा हूँ और इस बात में यकीन करता हूँ की की हाथ का सच्चा और लंगोटी का पक्का आदमी कभी मार नहीं खा सकता... पहले मैं भी लंगोटी का खूब पक्का था , मेरे साथी मेरा उदाहरण दिया करते थे मगर सब गुड गोबर हो गया... अब तो यही है की जहाँ पर भी तुम जैसी कमसिन हसीना देखता हूँ वहीं पर फिसल जाता हूँ, मेरी बड़ी अजीब हालत हो गयी है... बेवजह इस बार में चला आया...
रोजी- ऐसी हरकतें अचानक से नहीं आ सकतीं... जरूर इसके पीछे कोई बड़ा कारण रहा होगा ...
सलीम- क्या बताऊँ यार... है भी और नहीं भी... क्या बताऊँ , क्या छिपाऊँ .... कुछ समझ में नहीं आता...
रोजी- जब कभी ऐसी स्थिति से गुजरो तो थोडी देर के लिए खामोश हो जाना चाहिए... वरना... नुक्सान अपने को ही होता है...
सलीम- तुम तो अन्तर्यामी लगती हो... एक पैग पीते हैं, ज़रा मैं ठीक से समझने लगूंगा...
रोजी- क्षमा चाहती हूँ , मैं शराब नहीं पीती... मुझे तो रोटी का ही बहुत नशा हो जाता है... आज तक मैंने कभी नहीं पी... हाँ, अगर तुम पीना चाहो तो मुझे कोई ऐतराज भी नहीं है... मैं खूब प्यार से सर्व करुँगी...
सलीम- तुम बहुत अच्छी हो, होशियार भी... तुम्हारी मुस्कान बड़ी कातिल है... अंग -प्रत्यंग हसीं है...
रोजी- तुम शायद बहक रहे हो, इसलिए इस जिस्म और हुस्न की तारीफ़ कर रहे हो, हमारे पास तुम्हें कभी असली सुख नहीं मिलेगा... सुकून तो पत्नी के पास ही मिलता है, वहाँ पर अगर इससे आधा प्यार भी न्यौछावर करोगे तो कई हजार गुना सुख पाओगे... खूब संतुष्टि मिलेगी...
रोजी की बातें उसे बहुत अच्छी लग रही थीं... हकीकत तो वह भी जानता था, उसने भी सुन रखा था की वैश्या के घर जाने से कभी किसीकी मुश्किल आसान नहीं हो सकतीं... इससे तो उलटा नाश होता है... उसने बहुत लोगों से सुन रखा था की शबाब और शराब ने अच्छों अच्छों की आसमान से समुन्दर में लाकर पटक दिया ,, मगर जिसको इश्क नचाये यार , फ़िर वो नाचे बीच बाजार ... वह रोजी को हैरत भरी नजरों से देख रहा था, उसको अपनी पडोसन और प्रेमिका फरहा से नफरत हो रही थी... रोजी ने उसको टोका-
- मेरी बात अच्छी नहीं लग रहीं ? मैं जानती थी... मेरे साथ यही होता है... जब मैं अपने ग्राहक को अच्छी सलाह देती हूँ तो उसे बहुत बुरा लगता है... कितनी बार तो मुझे टिप्स से भी हाथ धोना पडा है, अगली बार वह ग्राहक फ़िर मेरे पास नहीं आता... तुम भी आने वाले नहीं हो...

Monday, August 24, 2009

2

Form 26
(See rule 4A)
Affidavit to be furnished by the candidate before the returning officer for election to -----
-------------- ------------------------(name of the House) from -------------------------------------
constituency(name of the constituency)
I, ----------------------, son/daughter/wife of ------------------------------- aged about -
-------------------------years, resident of ----------------------------------------------------
candidate at the above election, do hereby solemnly affirm/state on oath as under:-
1. I am/am not accused of any offence(s) punishable with imprisonment for
two years or more in a pending case(s) in which a charge(s) has/have been
framed by the court(s) of competent jurisdiction.
If the deponent is accused of any such offence(s) he shall furnish the following
information :
(i) Case/First information report No./Nos. ……………………………..
(ii) Police station(s) ……………District (s) …………….State(s)……..
(iii) Section(s) of the concerned Act(s) and short description of the offence(s)
for which the candidate has been charged …………………………….
(iv) Court(s) which framed the charge(s) ……………………………………
(v) Date(s) on which the charge(s) was/were framed ……………………..
(vi) Whether all or any of the proceeding(s) have been stayed by any court(s)
of competent jurisdiction ……………………………………………….
…………………………………………………………………………..
2. I have been/have not been convicted of an offence(s) [other than any offence(s)
referred to in sub-section (1) or sub-section (2), or covered in sub-section (3), of section 8
of the Representation of the People Act, 1951 (43 of 1951)] and sentenced to
imprisonment for one year or more.
If the deponent is convicted and punished as aforesaid, he shall furnish the
following information:
(i) Case/First information report No./Nos. ………………………………….
(ii) Court(s) which punished …………………………………………………
(iii) Police station(s) ………………District (s) … ………State(s)…………..
(iv) Section(s) of the concerned Act(s) and short description of the offence(s)
for which the candidate has ever been charged ………………………..
(v) Date(s) on which the sentence (s) was/were pronounced …………………
(vi) Whether the sentence(s) has/have been stayed by any court(s) of
competent jurisdiction …………………………………………………
Place Signature of
deponent
Date:
------------------------------------------------------------------------------------------------------------
VERIFICATION
I, the above-named deponent, do hereby verify and declare that the contents of
this affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief, no part of it is
false and nothing material has been concealed therein.
Verified at -------------------------this ----------- --day of -------------,20—
Signature of deponent
Note: The columns in this Form which are not applicable to the deponent may be struck
off.”

3

10
Affidavit to be furnished by candidate alongwith nomination paper
Before the Returning Officer
for election to _________________________ (name of the House)
from ___________________________ constituency
( name of the constituency )
I, ___________________________, son/daughter/wife of ________________________
aged _____ years, resident of ____________________________________________,
candidate at the above election, do hereby solemnly affirm and state on oath as under:-
(Strike out whichever not applicable)
(1) The following case(s) is/are pending against me in which cognizance has been
taken by the court:-
(i) Section of the Act and description of the offence for which cognizance
taken :
(ii) The Court which has taken cognizance :
(iii) Case No. :
(iv) Date of order of the Court taking cognizance :
(v) Details of appeal(s) / application(s) for revision, etc., if any, filed against
above order taking cognizance :
11
(2) That I give hereinbelow the details of the assets (immovable, movable, bank
balance, etc.) of myself, my spouse and dependents*:
A. Details of movable assets.
(Assets in joint name indicating the extent of joint ownership will also have to be given)
S.
No.
Description Self Spouse(s)
Name(s):
Dependent-1
Name:
Dependent-2
Name:
Dependent-3,
etc.
Name:
(i) Cash
(ii) Deposits in
Banks,
Financial
Institutions and
Non-Banking
Financial
Companies
(iii) Bonds,
Debentures and
Shares in
companies
(iv) Other Financial
instruments
NSS, Postal
Savings, LIC,
Policies, etc.
(v) Motor Vehicles
(details of
make, etc.)
(vi) Jewellery
(give details of
weight and
value)
(vii) Other assets,
such as values
of claims /
interests
Note : Value of Bonds / Shares / Debentures as per the latest market value in Stock Exchange in respect
of listed companies and as per books in the case of non listed companies should be given.
*Dependent here means a person substantially dependents on the income of the candidate.
12
B. Details of Immovable assets
[Note : Properties in joint ownership indicating the extent of joint ownership will also have to
be indicated]
S.
No.
Description Self Spouse(s)
Name(s):
Dependent-1
Name:
Dependent-2
Name:
Dependent-3,
etc.
Name:
(i) Agricultural Land
- Location(s)
- Survey number(s)
- Extent (Total measurement)
- current market value
(ii) Non-Agricultural Land
- Location(s)
- Survey number(s)
- Extent (Total measurement)
- current market value
(iii) Buildings (commercial and
residential)
- Location(s)
- Survey / door number(s)
- Extent (Total measurement)
- current market value
(iv) Houses / Apartments, etc.
- Location(s)
- Survey / door number(s)
- Extent (Total measurement)
- current market value
(v) Others
(such as interest in property)
13
(3) I give hereinbelow the details of my liabilities / overdues to public financial
institutions and government dues :-
[Note : Please give separate details for each item]
S.No. Description Name and address of Bank /
Financial Institution(s) /
Department(s)
Amount outstanding
as on ……………….
(a) (i) Loans from Banks
(ii) Loans from financial
institutions
(iii) Government dues (other than
income tax and wealth tax)
(No Due Certificate to be
enclosed in case holding or
having held any public office)
(b) (i) Income Tax including
surcharge [Also indicate the
assessment year upto which
Income Tax Return filed.
Give also Permanent Account
Number (PAN)]
(ii) Wealth Tax [Also indicate the
assessment year upto which
Wealth Tax return filed.]
(iii) Sales Tax [Only in case of
proprietary business]
(iv) Property Tax
14
(4) My educational qualifications are as under :-
(GIVE DETAILS OF SCHOOL AND UNIVERSITY EDUCATION)
(Name of School / University and the year in which the course was completed should
also be given.)
DEPONENT
VERIFICATION
I, the deponent abovenamed, do hereby verify and declare that the contents of this
affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief; no part of it is false
and nothing material has been concealed therefrom.
Verified at ____________ this the _________ day of _______, 200__.
DEPONENT
-----------------------------------------------------------------------------------------------------------
Form 26
(See rule 4A)
Affidavit to be furnished by the candidate before the returning officer for election to -----
-------------- ------------------------(name of the House) from -------------------------------------
constituency(name of the constituency)
I, ----------------------, son/daughter/wife of ------------------------------- aged about -
-------------------------years, resident of ----------------------------------------------------
candidate at the above election, do hereby solemnly affirm/state on oath as under:-
1. I am/am not accused of any offence(s) punishable with imprisonment for
two years or more in a pending case(s) in which a charge(s) has/have been
framed by the court(s) of competent jurisdiction.
If the deponent is accused of any such offence(s) he shall furnish the following
information :
(i) Case/First information report No./Nos. ……………………………..
(ii) Police station(s) ……………District (s) …………….State(s)……..
(iii) Section(s) of the concerned Act(s) and short description of the offence(s)
for which the candidate has been charged …………………………….
(iv) Court(s) which framed the charge(s) ……………………………………
(v) Date(s) on which the charge(s) was/were framed ……………………..
(vi) Whether all or any of the proceeding(s) have been stayed by any court(s)
of competent jurisdiction ……………………………………………….
…………………………………………………………………………..
2. I have been/have not been convicted of an offence(s) [other than any offence(s)
referred to in sub-section (1) or sub-section (2), or covered in sub-section (3), of section 8
of the Representation of the People Act, 1951 (43 of 1951)] and sentenced to
imprisonment for one year or more.
If the deponent is convicted and punished as aforesaid, he shall furnish the
following information:
(i) Case/First information report No./Nos. ………………………………….
(ii) Court(s) which punished …………………………………………………
(iii) Police station(s) ………………District (s) … ………State(s)…………..
(iv) Section(s) of the concerned Act(s) and short description of the offence(s)
for which the candidate has ever been charged ………………………..
(v) Date(s) on which the sentence (s) was/were pronounced …………………
(vi) Whether the sentence(s) has/have been stayed by any court(s) of
competent jurisdiction …………………………………………………
Place Signature of
deponent
Date:
------------------------------------------------------------------------------------------------------------
VERIFICATION
I, the above-named deponent, do hereby verify and declare that the contents of
this affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief, no part of it is
false and nothing material has been concealed therein.
Verified at -------------------------this ----------- --day of -------------,20—
Signature of deponent
Note: The columns in this Form which are not applicable to the deponent may be struck
off.”

1

FORM 2B
(See rule 4)
NOMINATION PAPER
Election to the Legislative Assembly of...................................................State.
STRIKE OFF PART I OR PART II BELOW WHICHEVER IS NOT APPLICABLE
PART I
(To be used by candidate set up by recognis ed political party)
I nominate as a candidate for Election to the Legislative Assembly from the
.......................................................................................Assembly Constituency. Candidate's name.........
...................…..…………[Father's/mother's/husband's name] ........................................................ His postal
address................................…………………………………………………. His name is entered at S.
No............. .....in Part No. ...................... of the electoral roll for ..................................................... Assembly
constituency. My name is ................................…………….. and it is entered at S. No.................. in Part
No. ............................. of the electoral roll for the ................................…………… Assembly constituency.
Date ....................................... (Signature or proposer).
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
PART II
(To be used by candidate NOT set up by recognised political party)
We hereby nominate as candidate for election to the Legislative Assembly from
the..................................……………..Assembly Constituency.
Candidate's name ............................................................................………….. Father's / mother's / husband's
name.............................................…..His postal address.........................…………...............................………
His name is entered at Sl. No...............................in Part No............................of the electoral roll
for.....................………………………… Assembly Constituency.
We declare that we are electors of this Assembly Constituency and our names are entered in the electoral
roll for this Assembly Constituency as indicated below and we append our signatures below in token of
subscribing to this nomination:_
Particulars of the proposers and their signatures.
Electoral Roll No.
of proposer
Sl. No.
Part No. of
electoral Roll
Constituency
Sl. No. in that
part Full name Signature Date
1. 2. 3. 4. 5. 6.
1.
2.
3.
4.
5.
6.
7.
8.
9.
10.
________________________________________________________________
N.B.:_ There should be ten electors of constituency as proposers.
PART III
I, the candidate mentioned in Part I/Part II (Strike out which is not applicable) assent to this nomination and
hereby declare_
(a) that I have completed..............................................years of age;
[STRIKE OUT b(i) OR b(ii) BELOW WHICHEVER IS NOT APPLICABLE]
(b) (i) that I am set up at this election by the................................................party, which is recognised
National Party/State Party in this State and that the symbol reserved for the above party be
allotted to me.
(ii) that I am set up at this election by the......................................party, which is a
registered-unrecognised political party/that I am contesting this election as an independent
candidate (Strike out which is not applicable) and that the symbols I have chosen, in order of
preference, are:-
(i). ........................................…...(ii)…......................................................(iii)..….............................................
(c) that my name and my father's/mother's/husband's name have been correctly spelt out above
in............................... (name of the language)
(d) that to the best of my knowledge and belief, I am qualified and not also disqualified for being
chosen to fill the seat in the Legislative Assembly of this State.
*I further declare that I am a member of the............................**Caste/tribe which is a scheduled
***caste/tribe of the State of....................……….in relation to …….…………………..(area) in that State.
I also declare that I have not been, and shall not be, ****nominated as a candidate at the present general
election /the bye-elections being held simultaneously, to the Legislative Assembly of ………………….
(State) from more than two Assembly Constituencies.
Date....................... (Signature of Candidate)
______________________________________________________________________________________
*Score out this paragraph, if not applicable.
**Score out the Words not applicable.
N.B._A "recognised political party" means a political party recognised by the Election Commission under
the Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 in the State concerned.
______________________________________________________________________________________
PART III A
(To be filled by the candidate)
Whether the Candidate –
(i) has been convicted –
(a) of any offence(s) under sub-section (1); or
(b) for contravention of any law specified in sub- YES/NO
section (2), of section 8 of the Representation of the People
Act, 1951 (43 of 1951); or
(ii) has been convicted for any other offence(s) for which he has been
sentenced to imprisonment for two years or more.
If the answer is “Yes”, the candidate shall furnish the following information:
(i) Case/First information report No./Nos…………………………………………..
(ii) Police station (s) …………..District(s) ………………State(s) ………………..
(iii) Section(s) of the concerned Act(s) and brief description of the offence(s) for
which he has been convicted ……………………………………………………….
(iv) Date(s) of conviction(s)…………………………………………………………….
(v) Court(s) which convicted the candidate ……………………………………………
(vi) Punishment(s) imposed [indicate period of imprisonment(s) and/or quantum of
fine(s)]………………………………………………………………………………
(vii) Date(s) of release from prison………………………………………………………
(viii) Was/were any appeal(s)/revision(s) filed against above conviction(s)…Yes/No
(ix) Date and particulars of appeal(s)/application(s) for revision filed ……………….
(x) Name of the court(s) before which the appeal(s) /application (s) for revision filed
………………………………………………………………………………………
(xi) Whether the said appeal(s) / application (s) for revision has/have been disposed of
or is/are pending ……………………………………………………………………
(xii) If the said appeal(s)/application(s) for revision has/have been disposed of -
(a) Date(s) of disposal ………………………..
(b) Nature of order(s) passed …………………
Place :
Date : (Signature of the candidate);
PART IV
(To be filled by the Returning Officer)
Serial No. of nomination paper......................................................................
This nomination was delivered to me at my office at.............................(hour)
on........................(date) by the *candidate/proposer.
Date....................... .Returning Officer
________________________________________________________________
*Score out the word not applicable.
________________________________________________________________
PART V
Decision of Returning Officer Accepting or Rejecting the Nomination Paper
I have examined this nomination paper in accordance with section 36 of the
Representation of the People Act, 1951 and decide as follows:
Date....................................... Returning Officer
(Perforation).............................................................................................................
PART VI
Receipt for Nomination Paper and Notice of Scrutiny
(To be handed over to the person presenting the Nomination Paper)
Serial No. of nomination paper......................................................................
The nomination paper of..................................………………a candidate for election from
the ...........................................Assembly constancy was delivered to me at my office
at......................................................(hour) on......................................... (date) by the
*candidate/proposer.
All nomination papers will be taken up for scrutiny at................................... (hour)
on...................................................(date) at..........................................(Place.)
Date.............................................- Returning Officer
.....................................................................................................
_______________________________________________________________
*Score out the word not applicable.]

मीरा भायंदर

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ऑवला माजिवादा

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दिलफेंक पडोसन, भाग-31

सावली - अरे इतनी भी जल्दी क्या है ? थोड़ा सब्र भी करना चाहिए...
सलीम- थोड़ा सब्र तो चलेगा मगर तुम तो मुझे कबसे बहका रही हो...
सावली - अरे यार उसको लाना पड़ेगा ढूंढकर... किसी कस्टमर के साथ होगी....
इसके बाद जब सावली ने उसे एक कालगर्ल मोडल का फोटो सलीम को दिखाया तो उसके होश उड़ गए, उसका सारा नशा हिरन हो चुका था... सलीम ने उसको रिजेक्ट कर दिया... किसी दूसरी को लाने को कहा... सावली ने उसे कई तस्बीर दिखाईं, जिनमें से उसने एक पसंद भी करली... अब वह एक लोज में आ गया, यह बार वालों का ही लोज था जिसको काफी अन्दर बनाया गया था , जिससे की किसीको कुछ पता ना चले, और अगर पुलिस आती भी है तो उसे आने से पहले ही वहां के लोगों को भगाया जा सके... सावली ने जैसा बताया कालगर्ल भी उसी तरह की थी... उसने सलीम को खूब सुख दिया ... एक बार शारीरिक सुख उठाने के बाद रोजी नाम की कार्लगर्ल ने पुछा -
- घर में पत्नी होने के बावजूद तुम मर्द लोग हमारा सहारा क्यों लेते हो ?
सलीम- दरअसल जब बीवी को बच्चे हो जाते हैं वह बेहद ढीली हो जाती है , कुछ वक्त बाद तक तो सभी कपल्स की सेक्स लाइफ जबर्दस्त रहती है, लेकिन ऐसे जोड़ियां कम ही होती हैं, जिनके रिलेशन में बेबी होने के

बाद भी उतनी ही गर्मी बरकरार रहती है... जाहिर सी बात है कि बच्चा होने के बाद पैरंट्स को अपना काफी वक्त उसकी देखभाल में खर्च करना पड़ता है.... बच्चा रात को देर से सोता है और सुबह को जल्दी उठ जाता है.... मम्मी उसे ब्रेस्ट फीडिंग कराने, नैपी चेंज करने, नहलाने-धुलाने और मालिश में बिजी रहती है.... ऐसे में थकान के साथ-साथ हसबेंड-वाइफ को एक-दूसरे के लिए वक्त मिलना वाकई कम हो जाता है.... कई बार प्रेग्नंसी के बाद कुछ वक्त के लिए महिलाओं की सेक्स में रुचि कम हो जाती है...
रोजी - लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बच्चे की वजह से अपनी सेक्स लाइफ पर रोक लगा दे.... थोड़ी सावधानी बरत कर आप बच्चे के जन्म की वजह से पटरी से उतर गई अपनी सेक्स लाइफ को दोबारा ट्रैक पर ला सकते हैं.....
सलीम- हाँ यूँ तो मेरे एक दोस्त भी कहते हैं, क्या नाम हैं उनका ? हाँ,

सेक्सोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. राजन भोंसले कहते हैं, 'किसी भी महिला के लिए प्रेग्नंट होना बिल्कुल अलग अहसास होता है। बच्चा उसके अपने ही शरीर का एक हिस्सा होता है, इसलिए मां और बच्चे में काफी इमोशनल जुड़ाव होता है। ऐसे में कई बार बच्चे की वजह से सेक्सुअल रिलेशन लो प्रायारिटी पर आ जाते हैं... मां बनने के बाद बच्चे की सेहत का ख्याल रखना किसी भी मां की पहली प्रायारिटी होती है... रिलेशनवाइज भी देखा जाए, तो मां बनने के बाद महिला की जिम्मेदारियों में बढ़ोतरी हो जाती है... इसलिए ज्यादातर मांएं अपनी एनर्जी को पूरी तरह बच्चे का ध्यान रखने में लगाती है। यही वजह है कि वे सेक्स लाइफ पर इतना ध्यान नहीं दे पाती....

हालांकि जब बच्चा कुछ महीने का हो जाता है, जो महिलाएं







दोबारा से प्रेग्नंसी से पहले वाली कंडिशन में आ हैं... उन्हें दोबारा से मासिक धर्म होने लगता है और उनके भीतर सेक्स करने की इच्छा दोबारा से जोर मारने लगती है... यह अपनी सेक्स लाइफ को दोबारा से एक्टिव करने का बिल्कुल सही समय है... डॉ. भोंसले बताते हैं, 'कई बार महिलाओं को लगने लगता है कि सेक्स का परपज सिर्फ पेग्नंट होना है, वे भूल जाती हैं कि इसका मेन परपज शादीशुदा कपल के संबंधों में ताजगी बनाए रखना है.... कई बार हसबेंड भी बच्चे के जन्म के तुरंत बाद अपनी वाइफ पर सेक्स करने के लिए प्रेशर डालने लगते हैं.... उन्हें भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इससे न सिर्फ महिला को परेशानी हो सकती है, बल्कि उसे सेक्स के प्रति अरुचि भी हो सकती है....
सावली- मगर मेरा मानना है की

सिर्फ फिजिकल होने की बजाय इमोशनल, स्प्रिचुअल, साइकॉलजिकल भी होना चाहिए.... इससे कपल्स को प्रेग्नंसी जैसे वक्त में अपने रिश्तों की गर्मी बरकरार रखने में मदद मिलती है... रचना कहती हैं, 'माना कि बच्चा होने के बाद पैरंट्स की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, लेकिन बावजूद इसके उन्हें साथ में कुछ क्वॉलिटी टाइम बिताने की कोशिश करनी चाहिए.... बच्चे की बर्थ के तुरंत बाद आप बिना रिलेशन बनाए सिर्फ फोरप्ले से ही अपने सेक्स रिलेशन जवां बनाए रख सकते हैं.... चाहें तो बैडरूम में म्यूजिक चलाकर और फ्लावर लगाकर रोमांटिक माहौल बना सकते हैं.... इस तरह थोड़े वक्त बाद जब आपकी वाइफ के हॉर्मोन में चेंज आएगा, तो आपकी सेक्स लाइफ आसानी से पटरी पर लौट आयेगी...' बच्चे के जन्म के बाद कई महिलाओं को वैजाइना में ढीलेपन की शिकायत हो जाती है... ऐसे में एक्सरसाइज या योगा की मदद से आप अपनी मसल्स को दोबारा से चुस्त कर सकती हैं... कुछ हफ्तों की एक्सरसाइज या योगा प्रैक्टिस के बाद आपकी सेक्स लाइफ में दोबारा से बहार लौट आयेगी.....

कई बार बच्चे के जन्म को आसान बनाने के लिए डिलिवरी के वक्त एप्सिटॉमी नाम की छोटी सी सर्जरी की जाती है... यह एक छोटा सा ऑपरेशन है, जिसके तहत बच्चे को आसानी से बाहर निकालने के लिए वैजाइना को थोड़ा बड़ा किया जाता है.... कई बार इस ऑपरेशन की वजह से इंटरकोर्स करते वक्त परेशानी या दर्द होता है... हालांकि अगर आप सावधानी बरतें, तो 6 से 8 हफ्ते में इस सर्जरी का असर खत्म हो जाता है और वैजाइना अपनी पुरानी शेप में लौट आती है,

सलीम- सच , अरे यार तुम तो डॉक्टर लगती हो... क्या तुम्हें ये ज्ञान ऐसे ही हो गया या फ़िर पढने -लिखने से ?
रोजी- मेरे पिता डॉक्टर थे... उनकी मौत हो गयी... मेरी सौतेली माँ ने सब संपत्ति अपने नाम करली... इसी कारण मुझे इस लाइन में आना पडा... अब मैं पढ़ती हूँ, और अपना खर्च निकालने के लिए कभी कभार किसीके साथ रात गुजार लेती हूँ... और तुमने सही पहचाना , मैं डॉक्टरी की पढाई कर रही हूँ...
सलीम- ओह , मैं तुम्हारी नोलेज पहचान गया था, जीवन जीने के लिए हम लोगों को कितने समझौते करने पड़ते हैं... मैं तुमसे बार- बार मिलना चाहूँगा...
रोजी- ठीक है मगर मेरा कोंत्रेक्त इसी बार के साथ है, इसलिए मैं इसी माध्यम से मिल सकती हूँ... पूरा सुख देने की गारंटी मेरी है और इस बात को गुप्त रखने की जिम्मेदारी आपकी भी है...

Saturday, August 22, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-30

आख़िर बुराई भी क्या थी, इससे फरहा की समझ में भी यह बात आ जायेगी की वह सिर्फ़ उसीका गुलाम नहीं है... फरहा शायद इस गलतफहमी की शिकार है की उसके बिना वह सचमुच एक पल भी नहीं रह पायेगा... इसी बहाने वह अपने सब्र और फरहा के प्रेम की परिक्षा भी ले लेगा... वह सावली के आने का इन्तजार करने लगा... मगर जब वह काफी देर तक भी नहीं आयी तो आखिरकार उसने पीने का और ऑर्डर दे दिया ... एक तो वह पहले भी पिया हुआ था , इसके बाद पीने से उसको चक्कर से आने लगे... वह सोचने लगा की सावली को अगर देर हो रही है तो वह किसी और भी हसीना को किराए पर ले सकता है, वहां तो हुस्न का बाजार सजा हुआ था, वहां किस बात की कमी थी... और फ़िर अवही हुआ जिसकी उसे आशा थी, सावले कमर मटकाती हुयी, कातिल अदाएं दिखाती हुई सामने से चली आ रही थी...उसे खुशी हुई, सावली जब उसके करीब आकर बैठी तो उसने कहा-
-अचानक कहाँ चली गयी थीं, गयीं क्या तुम तो गायब ही हो गयीं... मेरा मन नहीं लग रहा था...
सावली- अच्छा , अगर ये बात थीं तो पहले बताया होता मैं कहीं भी नहीं जाती... तुम्हारे पास ही बैठी रहती...
सलीम- लेकिन कहाँ चली गयीं थीं इतनी देर क ऐ लिए ? सब कुछ सूना -सूना लग रहा था...
सावली- कस्टमर को अटेंड करने गयी थी, पुराना कस्टमर है... जिस दिन ज्यादा पी लेता है, उस दिन बहुत धमाल करता है... यहाँ स्टाफ को भी गाली -गलौच करता है, यहाँ तक की सब सामान को उलट-पुलट करने लगता है तब मुझे जाना पड़ता है , उसे संभालने के लिए... मेरी बात मान लेता है...लेकिन मैं यहाँ से सबको लेकर थोड़े ही गयी थी, बाकी सब लोग तो यहाँ पर मौजूद थे ही, देखो कितनी नयी -नयी और खूबसूरत लड़कियां हैं... किसीको भी बुला सकते थे... वो देखो लाल कपडों वाली तुम्हें देखकर कैसी मुस्करा रही है...
सलीम- सारे जहाँ को मुस्कराने दो , क्या फर्क पड़ता है... जब तक तुम नहीं मुस्कराओगी, इस दिल का सूनापन दूर नहीं होगा, सच तो ये है की मैं आज तुमसे जी भरके बात करना चाहता हूँ...रात भर देखते रहना चाहता हूँ इस चाँद से सुंदर चेहरे को... बोलो, मंजूर है ?
सावली- अगर चाँद इतना ही सुंदर है तो आराम से छत पर बैठकर देखते रहो चाँद... इसका कोई खर्च भी नहीं आएगा और तुम्हारा दिल भी बहल जाएगा, मुझे ऐसा लगता है जैसे की हसीना की तिरछी निगाहों के मारे हुए हो, वह नाराज हो गयी है या उसने किसी और से शादी करली है ?
सलीम- इन दोनों बातों में से कुछ भी सच नहीं है, सच बस इतना है की हमें आपसे मोहब्बत हो गयी है और हम एक रात आपके साथ बिताना चाहते हैं, अगर मंजूर है तो दाम बताओ और नहीं तो हम कुछ और सोचें...
सावली- मैं आज तुम्हारा साथ नहीं दे पाउंगी, किसी और से बात करा सकती हूँ... इनमे से जो भी खूबसूरत लड़की दिख रही है , उसीको भेज दूंगी तुम्हारे साथ, लेकिन मैं आज मजबूर हूँ... चार दिन के बाद आना तब मैं इस लायक हो जाउंगी, समझ गए की नहीं ... निरे बुद्धू नजर आते हो...
सलीम- कोई अच्छी सी लड़की यहाँ नजर ही नहीं आती, यहाँ तो सब फालतू दिख रही हैं...
सावली- क्या बजट है तुम्हारा ?फ़िर मैं तुम्हें इसी तरह की लड़की दिखाउंगी... अरे ऐसा माल दिखाउंगी की तुम्हारी तबियत खुश हो जायेगी... एकदम कोरा मॉल चाहिए तो वो भी मिलेगा...
सलीम- एकदम कोरे की क्या गारंटी है ? कितना माल चाहिए उसके लिए ?
सावली- माल की गारंटी मैं लेती हूँ... दाम की तुम लो, मैं नहीं जानती की तुम्हारा बजट क्या है ? मुझे बस इतना पता है की तुम एक अदद हसीना के साथ रात रंगीन करना चाहते हो...
सलीम- दो हजार तक खर्च कर सकता हूँ ... माल दिखाइये...
सावली- इतने रुपये तो उसे देखने में ही लग जायेंगे ... अरे मस्त मोडल से मुलाक़ात कराउंगी.... फ़िल्म की हीरों इन उसके सामने चिंदी लगेगी समझे... एक रात के बीस हजार लेगी... एक बार करना हो तो पाँच हजार , सिर्फ़ आधे घंटे के लिए... थ्री स्टार होटल से नीचे बुक मत कराना , वैसे तो वह फाइव स्टार होटल में ही जाती है, मेरे कहने से थ्री में जा सकती है....
सलीम- कहाँ है वो ? क्या मैं अभी उससे मिल सकता हूँ ?

Friday, August 21, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग- २९

सलीम के जिस्म में जोरदार झुरझुरी सी दौड़ गयी... सावली का नाम ही न जाने किसने ऐसा लिख दिया था मगर वह थी रूप की रानी... उसके यौवन उभार दूर से देखने पर भी मन में उत्साह जगाते थे, उसकी आँखें बहुत मोटी- मोटी थीं, जब वह खिलखिलाकर हंसती तोसंगीत सा बजने लगता था, मन का मयूर नृत्य करने लगता था... उस बार का नाम भी मयूर था, संगीत तेजी के साथ बजाया जा रहा था... कई हसीनाएं थिरक रही थीं, एकउनमें ऐसी थी जिसने काली ड्रेस पहन राखी थी...वह बहुत गज़ब ढा रही थी... कई आशिक उस पर नोटों की बारिस कर रहे थे, नोटों के हार पहनाये जा रहे थे , पाँच सौ -हजार के नोट हवा में उडाये जा रहे थे, वह सबको देख रहा था, महफ़िल पूरे शबाब पर थी... बहुत शोर गुल था... तेज आवाज कानों को परेशान कर रही थीं, मगर इस सबके बावजूद भी सब लोग अपनी -अपनी दुनिया में मस्त थे, शायद क्षण भर की मस्ती में सब कुछ भूल जाने के लिए वहां पर लोग इकट्ठे हुए थे... वह सोचने लगा की अगर उसकी प्रेमिका फरहा उसके साथ तंगदिली से पेश नहीं आती तो वह इस स्वर्ग के नजारे को कभी नहीं देख पाटा... फ़िर उसने ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते हुए सावली से कहा-
- यहाँ पर सब लोग मगन हैं, किसीको किसीकी फ़िक्र ही नहीं है... यहाँ रोजाना ऐसे हे मेला लगता है या किसी विशेष अवसर पर ?
सावली- यहाँ तो रोज दीवाली , रोज ईद का माहौल होता है, मगर तुम ऐसे -कैसे पूछ रहे हो ? पहली बार आए हो क्या ? तुम्हारे चेहरे से तो इतने शरीफ नहीं लगते ... पहुचे हुए फ़कीर लगते हो... खूब खेले खाए हो गुरु, मुझे बना रहे हो, मैं ही मिली हूँ क्या ?
सलीम- पहली बार तो नहीं दूसरी बार आ रहा हूँ... मगर जब एक बार में पहली बार गया तो वहाँ इतनी रौनक नहीं थी... इतनी भीड़ भी नहीं थी,,, वैसे भी मैं बहुत कम टाइम रुका था... काफी दिन भी हो गए... तबसे अब तक दुनिया बहुत बदली हुई नजर आती है... मैं दोपहर के समय पर एक बार में गया था...
सावली- अच्छा , तभी तो मैं कहूं... दोपहर के वक्त ज्यादा भीड़ नहीं रहती है... हसीनों का मेला तो शाम को ९ बजे के बाद ही लगता है... सुबह ५ बजे तक हमारा बार बेरोक टोक चलता है... और आप सुनाएँ ,मुझसे मिलने कितने बजे आया करोगे... अब मैं आपका रोजाना इन्तजार किया करुँगी... चैन नहीं मिलेगा मुझे...
सलीम- क्या तुम सच कह रही हो ? तुम्हारे शब्द कितने मीठे हैं, मैंने तुम्हें पढ़ना इसीलिए स्वीकार किया है ताकि मैं रोजाना तुम्हारी कोयल जैसी मीठी आवाज सुन सकूं...
सावली- तुम भी कुछ कम नहीं हो, हूर परी लगती हो...मुझे तुम जैसा विद्वान् आदमी अब तक मिला होता तो मैं ना जाने कबकी दुबई में जाकर सैटल हो गयी होती...
सलीम- ऐसी कोई बात नहीं है, मैं भी तो किसीसे सीखा ही हूँ... तुहें अरबी , उर्दू और अंग्रेजी पढाकर मुझ्र अपार खुशी होगी... लेकिन प्लीज अभी से कहीं जाने की बात मत करो... बड़ी मुश्किल से तो मिली हो अगर अब भी चली गईं तो मेरा क्या होगा॥ पूरे जीवन भर से तुम जैसे अच्छी लड़की की तलाश में था...
सावली- सच ? चलो फ़िर तो हम दोनों की तलाश पूरी हो गयी ... इसी बात पर बोहनी कराओ, आज मैं बोहनी भी नहीं कर पाई हूँ... तुम मिले तो सारी दुनिया मिल गयी है...
सलीम ने जेब से निकालकर हजार का एक नोट उसकी उच्चाल दिया , सावली ने बड़ी स्टाइल से किस करने के बाद रुपये स्वीकार लिए , सलीम ने उसकी कमर में हाथ दाल दिए , सावली ने कोई ऐतराज दर्ज नहीं कराया , बल्कि वह तो खुश हो रही थी, ठीक तभी वेटर ने आकर उसके कान में कुछ कहा और वह सलीम से माफी मांगते हुए यह कहकर चली गयी की थोड़ी देर में फ़िर वापस लौटेगी... वह पीटा रहा और अपनी लाइफ के बारे में सोचने लगा, फरहा के बारे में सोचने लगा, जो एक पल भी दूर नहीं रहने का वादा करती थी उसने कई घंटे के बाद भी उसे फोन नहीं किया था, वह भी उसे तब तक फोन नहीं करेगा जब तक की ख़ुद फरहा उस्ससे माफी नहीं मागती , उसने सोचा की क्यों न आज की रात सावली के साथ बिताई जाए, उसे यह विचार जमा...








Thursday, August 20, 2009

दिलफेंक पडोसन , भाग-२८

लेकिन फरहा का मिजाज तो उससे बिल्कुल जुदा लग रहा था, वह तो जरा सी बात पर तुनककर चली गयी थी... अब तो उससे माफी मांगने का सवाल ही नही उठता था... अगर उसने ऐसा किया तो फ़िर उसे आदत लग जायेगी और बेवजह जीवन भर उसको झुककर रहना पड़ेगा... इस प्रकार वह बहुत बड़ी उलझन का शिकार हो गया... उसने अपने फ्लेट का दरवाजा बंद किया और फ़िर चुपचाप सोसाइटी से बाहर निकल आया,, वाच्में उसको ऐसे देख रहा था जैसे किसी अनजान व्यक्ति को देख रहा हो... आज उसे ऐसा महसूस होने लगा जैसे हर आदमी सिर्फ़ उसीको घूर रहा है और उसकी बेबसी पर हंस रहा था... अब तक सलीम एक बार में चला आया... वैसे तो वह कभी कभार शराब का स्वाद चख लिया करता था मगर आदी नहीं था... एकाध बार वह लेडीज बार में भी गया था मगर बहुत कम समय के लिए , तभी तो आज उसने लेडीज बार का रुख किया... खूब भीड़ लगी थी वह भी जाकर एक कोने में बैठ गया... एक उम्रदराज महिला गिलास और पानी लेकर आ गयी... वेटर ऑर्डर लेने आया, इसके बाद उसकी निगाह हुस्न की मूरतो पर पडी कई लड़कियां नृत्य कर रही थीं और कई सजधजकर खादी-खादी अपनी अदाओं के जलवे दिखा रही थीं... उसने महसूस किया की एक लड़की उसको बार -बार देख रही हहै, उसने उसकी तरफ़ इशारा कर दिया... वह तुंरत सलीम के पास आकर बैठ गयी,, सलीम ने पूछा -
-तुम्हारा नाम क्या है, इस लिवास में क्या गजब लग रही हो...
लड़की- पहले कुछ ऑर्डर तो दो...आराम से पूछते रहना, ज़रा सी देर तो बीतने दो...
सलीम - ठीक है, लिखकर दे दो... जो भी चाहोगी वेटर लेकर आएगा ... मैं जब तक तुम्हारा यह सुंदर चेहरा निहार लूँ, एक मुफ्त की सलाह देना चाहता हूँ, इतना हसीं व्यक्तित्व लेकर ऐसे ही मत आया करो, छोटा सा काला टीका भी लगा लिया करो... बुरी नजर नहीं लगेगी...
लडकी- मेरा नाम ही सांवली है, तुम जैसे ना जाने कितने सावरिया यहाँ पर रोजाना आते -जाते रहते हैं... मुझे नजर का सवालही नहीं उठता... मैंने अब तुम्हारी आंखों में भी अपने लिए मोहब्बत देखि है... तुम भी यहाँ पर रोक्जाना आने लगोगे तो मेरी सारी टेंशन ख़त्म... फ़िर मुझे किसीकी नजर नहीं नहीं लग पाएगी...
सलीम- वास्तब में सबसे सुंदर नाम है, एकदम हटकर... वाह... सावली... कितनी कशिश है इस नाम में... अब तो मैं यहाँ आने के बारे में विचार करूंगा ही... वरना फ़िर हम जियेंगे कैसे ?
सावली- बातें तो बहुत मीठी करते हो , कोई नेता हो क्या ?
सलीम- जी नहीं, मालिक बचाए इन नेताओं को... मैं तो टीचर हूँ... सरकारी स्कूल में पढाता हूँ...
सावली- अरे वाह ,,, यह तो बहुत खुशी की बात है, किसी दिन हमें भी पढाओ ना... हमारी भी बड़ी इच्छा है,,,
सलीम -ठीक है, कहो तो अभी से शुरू करदूं... वैसे मुझे लगता है की तू ख़ुद ही मुझे पढाने की क्षमता रखती हो...
सावली- अभी नहीं, मेरे घर पर आओ न पढाने के लिए, अरे मैं फीस दूंगी... चिंता मत करना... मैं ऐसे ही कोई काम नहीं कराती हूँ... आपको कितनी फीस चाहिए ? बस मुझे फरातेदार अंग्रेजी सीखनी है... और अपने घर पर ही सीख पाउंगी... ऐसे तो बाजार में सिखाने वाले बहुत सारे लोग हैं मगर अपने को ऐसे नहीं जमता है...
सलीम- अगर तुम सचमुच सीखना चाहती हो तो मुझे मंजूर है... बोलो कहाँ रहती हो , तुम्हारे लिए मैं किसी भी हालत में टाइम निकालूँगा... टाइम भी सेट कर ही लिया जाएगा , वो भी कोई दिक्कत नहीं है... अगर तुम मेहनत करोगी तो यकीन मानो ६ माह में अच्छी तरह से बोलने लगोगी...
सावली- मुझे दुबई जाना है , मैंने सुना है की बार गर्ल को वहाँ पर अच्छा खासा पगार मिलता है... अगर इंग्लिश सीख गयी तो वहाँ पहुचने में आसानी होगी...
sअलीम -तो इंग्लिश के साथ- साथ मैंतुम्हें उर्दू और अरबी भी सिखा सकता हूँ , वहाँ पर अरबी भाषा खूब चलती है... मैं भी ये भाषाएँ जानता हूँ...
सावली - अरे वाह , क्या बात है ... तुम तो कमाल के आदमी लगते हो... चलो मिलाओ इसी बात पर हाथ... आज मैं भी तुम्हारे साथ एक पैग पी लेती हूँ...
सलीम- सिर्फ़ एक पैग ही क्यों , जिय्ना चाहो उतना पीओ ... मैं भी आज तुमसे मिलने की खुशी में जमकर पीना चाहता हूँ... आह से अब मैंने यह तय कर लिया है की तुम्हें जी भ्जर्के छुदाऊंगा...
सावली- तुम तो बहुत भावुक हो रहे हो... कहीं ऐसा तो नहीं की तुम पीकर बहक गए हो...पीने के बाद ख़ुद को टीचर बता रहे हो...
सलीम ने उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसको चूमने लगा... सावली ने जल्दी से उसके होठों पर चुम्बन अंकित कर दिया...

Tuesday, August 18, 2009

दिलफेंक पडोसन , भाग-26

उसके फरहा चली गयी, जाने से पहले उसने जी भरके प्यार का इजहार किया... सलीम अपने आपको दुनिया का सबसे किस्मतवाला इंसान समझ रहा था... उसकी रग-रग में फरहा बस चुकी थी...वह उसके प्यार में इतना पागल हो गया की उसने अपना हर पल फरहा के नाम करने की ठान ली... फरहा की बातों ने भी उसका दिल जीत लिया था, उसकी खुशी की खातिर तो वह अपने आपको रखैल भी बनने को तैयार थी, ऐसी त्याग की मूर्ती महबूबा आज के जमाने में भला कहाँ मिलती है ? वह इन्हीं ख्यालों में खोकर सो गया... सुबह उसके जागने से पहले ही फरहा नाश्ता लेकर मौजूद थी... सलीम मुंबई में अकेला ही रहा था, इस कारण उसको हर काम ख़ुद ही करना पड़ता था... फरहा की सेवा से वह निहाल हो गया... उसके जीवन में पत्नी की जो खाली जगह थी उसको फरहा के प्यार ने भर दिया था... अब वह हर समय उसीके ख्यालों में खोया रहता था... उसके सूने जीवन में अचानक बहारें आ गयीं थीं.... जब वह अपने स्कूल के साथी टीचर्स के साथ बात करता तो सब लोग उसकी खुशी का राज पूछते थे...वह क्या कहता बस हंसी में ताल जाया करता था... लेकिन इश्क और कभी छिपाए नहीं छिपते... लोगों को ख़बर मिल ही जाती है... उसकी पूरी सोसाइटी में हंगामा मच चुका था... कुछ मनचले किस्म के लोग अपना हाथ मलते रह गए तो कीया ऐसे भी थे जिन्होंने अभी तक उम्मीद का दामन नहीं छोडा था... इसी सोसाइटी में एक बार में काम करने वाला मेनेजर भी रहता था , वह सोचता था की अगर फरहा बार में डांसर का काम करने लगे तो खूब कमाएगी...वह इसी बहाने उसके उत्तेजक उभारों को मसलने का, उसके साथ हमबिस्तर होने का खवाब देख रहा था... मगर फरहा तो किसी और ही मिट्टी की बनी थी... वह नदी की धारा की तरह प्रवाहित होने में विश्वाश करती थी... उसको ठहरा हुआ पानी अच्छा नहीं लगता था... एक और सज्जन थे , जो सलीम से अपनी तुलना करते थे... उनका मलाल ये था की सलीम से शक्ल -अक्ल , ओहदा और यहाँ तक की पैसे में भी अव्वल होने के बावजूद फरहा ने उनको तवज्जो नहीं दी,, अब सलीम की किस्मत से जलने के अलावा कोई चारा भी नहीं था... अपनी किस्मत कोसते थे और इस जोड़ी को हूर के साथ लंगूर की जोड़ी कहते थे... सलीम और फरहा को दुनिअदारी से कोई मतलब नहीं था... वह इतनी ज्यादा खूबसूरत थी की दूर-दूर के लड़के भी उसकी एक झलक पाने को बेताब रहते थे, कुछ लोग तो उसके घर पर उसके नाना -नानी से मिलने , उनका हाल चाल पूछने सिर्फ़ इसीलिए आने लगे थे क्योंकि वहाँ आने पर उन्हें फरहा के दीदार अच्छी तरह से हो सकते थे... फरहा भी भी इस स्थिति का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना नहीं भूलती थी... एक फल का व्यापारी जब उसके घर के चक्कर लगाने लगा तो ग्फर्हा ने उसको रोजाना दो किलो सेब लगाने का अदद काम सौंप दिया... यह गिफ्ट लाकर भी वह व्यापारी बड़ा खुश रहता था...एक था सब्जी बेचने वाले का लड़का... उसीकी उम्र का था.... वह जब दूर के किसी रिश्ते का हवाला देकर फरहा के घर आने लगा तो उसको भी रोजाना ताजा -ताजा सब्जी लाने की जिम्मेदारी सौंप दी गयी... उसका एक ही सिद्धांत था- जो जितना पैसा खर्च करेगा वह उसके उतने ही समीप आएगी... यही वजह थी की सलीम के अलावा सबको निराशा ही मिली थी, हांलाकि बाहर के इलाकों में यह हाल नहीं था... जब भी उसका जी चाहता वह तभी रंगरेलियां मनाने के लिए अपने दोस्तों के साथ दूर निकल जाती थी... सलीम को यह पसंद नहीं था की वह और लोगों से मिले जुले लेकिन फरहा तो खुले आसमान में उड़ने वाले पक्षी की तरह थी, उसने पहले भी अपनी ये आदतें सलीम को बतादें थीं... मगर दिल तो आख़िर दिल होता है, सलीम उसको जीजान से चाहने लगा था... वह चाहता था की हर फूल पर मंडराने वाली तितली उसके घर में परदे में रहे , वह सिर्फ़ उसीको चाहे , उसीको सराहे ... ऐसा कहीं होता है क्या? क्या फूल अपनी सुगंध त्याग सकता है ?क्या चंदन अपनी शीतलता छोड़ सकता है क्या ? कभी नहीं... जिसका जो स्वभाव है वह उसे हरगिज नहीं बदल सकता... फ़िर फरहा भला कैसे कुछ बदल सकती थी ... एक दिन सलीम ने अपने मन की बात फरहा से कहदी-
- मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करता हूँ, अब ये नहीं चाहता की कोई दूसरा तुम्हें देख भी पाये... बस अपने दिल में बसाकर रखना चाहता हूँ... मैं चाहता हूँ की हवा भी तुम्हें स्पर्श न कर पाये, जब लोग तुमसे मिलते जुलते हैं तो मुझे अच्छा नहीं लगता ...दिल को बड़ी ठेस सी लगती है...
फरहा- यह प्यार नहीं वहम होता है सरकार... प्यार में तो इंसान किसी भी हद से गुजर सकता है... मेरा स्वभाव ही ऐसा है की मैं घर में कैदी की तरह नहीं रह सकती... कभी नहीं....ये बात तुम्हें मैं पहले भी बता चुकी हूँ...

Monday, August 17, 2009

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Saturday, August 15, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-24

फरहा की बात सुनकर सलीम सुन्न रह गया ... उसको या तो पता चल ही गया था की फरहा बेहद मॉडर्न विचारों की लड़की है

, लेकिन वह इतनी ज्यादा खुलकर बात करेगी इस बारे में उसे कल्पना भी नहीं थी... सलीम उसके चरित्र के बारे में विचार करने लगा... उसकी हर बात पर विचार करने लगा... उसने कहा था की वह उसके लिए अपनी सहेली को भी उसके बिस्तर पर लिटा सकती है साथ ही ख़ुद भी उसकी सहेली के कहने पर सहेली के पति के साथ सो सकती है... इसका मतलब वह उससे सच्चा प्यार करने लगी है... फरहा ने उसकी शंका को कुरेदते हुए कहा-
- ऐसे क्या सोच रहे हो , जब मैं अपनी सहेली राजो को तुम्हारे साथ सुलाने की बात कर रही थी तब तो तुम बहुत खुश हो रहे थे, होठो पर मुस्कान नाच रही थी... मगर जब सहेली मुझसे कुछ मांगेगी तो मैं इनकार कैसे कर सकती हूँ... यह भी तो सोचिये की मुझे उस पर कितना बड़ा बड़ा भरोसा है की वह मेरे कहने पर तुम्हारे साथ हमबिस्तर हो सकती है ... क्या तुम्हारी बीवी तुम्हारे कहने से किसी पराये मर्द के साथ चाहे वह तुम्हारा दोस्त ही क्यों ना हो, हमबिस्तर हो सकती है क्या ?
सलीम- सवाल ही नहीं उठता , भले ही मेरे बिना कहे वह कुछ भी क्यों ना करती हो मगर मेरे कहने से इतना नहीं कर सकती... इसकी छोडिये, मेरे कहने पर वह मेरा सर तो दबा ही नहीं सकती है...
फरहा- इसकी फ़िक्र मत करो... मैं तो इशारे भर से ही सर तो क्या गला भी दबा दूंगी... हा हा हा ....मजाक कर रही हूँ यार... तुम भी ऐसी बात करते हो पुराने जमाने की सी ... अब ये कहो की जब मेरे पाँव दुखने लगें तो तुम क्या करोगे ? क्या मुझे दर्द से कराहता हुआ छोड़ दोगे...
सलीम- नहीं... पहले मैं ख़ुद पैर दबाऊंगा... फ़िर डॉक्टर के पास ले जाऊँगा... एलोपैथिक दवा देने से पहले मैं चाहूँगा की तुम ऐसे ही सेवा पानी से ठीक हो जाओ... क्योकि ज्यादा दर्दनिवारक दवाएं सीधा किडनी पर असर करती हैं...
फरहा- और ऐसा तुम किसलिए करोगे ? इसीलिए ना क्योंकि मुझसे मोहब्बत करते हो... अगर हम लोगों के बीच प्यार नहीं रहेगा तो समझो कोई किसीके बारे में नहीं सोचेगा... सब लोग प्यार में ही अपना सब कुछ लुटाने के लिए टायर रहते हैं... मैं भी सोच रहा हूँ की तुम्हारे लिए एक फ्लेट बुक करवा डालूँ... अगर इस घर पर वह हक़ जताने लगी तो हम दोनों उस पर रह तो सकते हैं... कोई टेंशन तो नहीं रहेगी... किसी दिन चलना मेरे साथ नई बिल्डिंग बन रही है , भाव भी फिलहाल अच्छा ही है... मेरी जान पहचान के लोग भी हैं...तुम्हारे और मेरे नाम से बुक करा देंगे॥ दोनों का नाम रहेगा तो अच्छा है...
फरहा- मैं चाहती हूँ की फ्लेट तुम अपने नाम से ही खरीदो... लेकिन यह भी तो तुम्हारे नाम से ही होगा...तुमने इस पर लोन भी लिया होगा... लोन लिया होगा तो डिपार्टमेंट से सब्सिडी भी मिलती होगी... अगर दूसरा फ्लेट भी लोन से खरीदोगे तो तकलीफ नहीं होगी... सब्सिडी का लफडा नहीं होगा क्या ?
सलीम- हाँ यार... मैंने तो कभी यह सोचा ही नहीं था... तो ठीक है... अब ऐसा करते हैं की तुम्हारे नाम से ही बुक कर देते हैं...यही ठीक रहेगा...कल का कल ये काम करा देंगे...
फरहा- मेरे इन्कमटेक्स के पेपर नहीं हैं, मुझे कौन देगा लोन ? कुछ भी फैसला करने से पहले यह भी तो सोचो...
सलीम- ये पेपर बनवाने कोई बड़ी बात नहीं है... थोड़ी देर में ही यह सब हो जाएगा... चार दिन में सब हो जाता है मुंबई में... मैं एक सी ऐ को जानता हूँ... तुम इस बात की ज़रा भी फ़िक्र मत करो....
फरहा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा... जो वह सोच रही थी वह तो सलीम पहले से ही सोचकर बैठा था...उसके दिल में आया की झूम झूमकर खूब नाचे... उसे सलीम जैसे आशिक की कबसे तलाश थी... यह सोसायटी उसके लिए कितनी लकी है,, कदम रखते ही उसको मनमाफिक यार मिल गया था... खाने -पीने की रोजाना की टेंशन ख़त्म, कपड़े की दिक्कत नहीं... लाईट, फोन की परेशानी नही... और क्या चाहिए इंसान को जिन्दगी में ? फ्लेट का वादा हो ही गया... सोने के गहने भी बन गए... अब उसे सलीम की अगली पगार का इन्तजार करना चाहिए , ऐसा ना हो की उकता जाए और उससे विमुख हो जाए, अपना हर्ष छिपाने के लिए वह सलीम से लिपटकर मोहब्बत का इजहार करने लगी... धीरे -धीरे दो जिस्म आपस में मिलकर गरमी पैदा करने लगे... उन दोनों ने उत्तेजना के सागर को पार करते हुए मन के हर मनसूबे को पूरा किया... दोनों ही खुश थे... सलीम को जवान जिस्म की चाहत थी और फरहा को दौलत की चमक अच्छी लगती थी... अपने -अपने हिसाब से उन दोनों को ही इच्छित चीजें मिल गयी थीं...

दिलफेंक पडोसन, भाग-23

सलीम- मुझे लगता है , तुम्हारी सहेली भी कोई गज़ब की चीज रही होगी... जब उसकी चर्चा सुनने से ही उससे मिलने का मन कर रहा है तो सामने आएगी तब क्या हाल होगा? कभी बुलाइए , हमें मिलवाइए उस महान हस्ती से...सच कहता हूँ ऐसे लोगों से मिलकर खूब आनंद आता है, कुछ अपनी कहते हैं और बहुत कुछ उसकी सुनते हैं...
फरहा- सुनाने में तो वह खूब माहिर है... जमकर सुनती है... और तो और कुछ झूठ का तड़का भी लगाती है, एक बार अगर उसकी जुबान खुली तो फ़िर रुकने का नाम नहीं लेती... अगर तुम उसके साथ सोना भी चाहो तो उसे कोई आपत्ति नहीं , बस मेरी सहमती होनी चाहिए... अगर मैंने इतना भर कह दिया की चलो जाओ , इस्नके साथ हमबिस्तर हो जाओ... बहुत मरता है तुम पर... वरना बेचारे का दिल टूट जाएगा , तो इतनी सी बात पर भावुक हो जायेगी और तुम्हें खूब सुख देगी...
सलीम- मेरे लिए तो तुम ही काफी हो, मुझे शारीरिक सुख की क्या कमी है ? सिर्फ़ जिस्न्मानी सम्बन्ध ही मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखते , मेरे ख़याल में इसके लिए आपसी मोहब्बत भी जरूरी है... अगर प्यार नहीं तो शारीरिक सम्बन्ध बोझ बन जाते हैं, अभिशाप बन जाते हैं... वह सम्बन्ध बलात्कार की तरह होता है... प्यार एक जूनून है, बीमारी है सेक्स सकी दवा... इस बात को कई विदेशी हस्तियों ने भी साबित किया है...डॉक्टरों ने मान लिया है कि प्यार एक बीमारी
है और इसका इलाज सेक्स है...यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल की डॉ. लेसेल डॉसन ने एक रिसर्च के आधार पर यह नतीजा निकाला है...उनका कहना है कि प्यार नामक यह बीमारी तब ज़्यादा महसूस होती है जब लोगों को अपना प्यार ज़ाहिर करने का मौका नहीं miltaa ... इसकी वजह से गुस्सा, फ्रस्ट्रेशन और यहां तक कि मानसिक रोग भी हो सकते हैं...डॉ. डॉसन के मुताबिक एक अमीर आदमी को एक नौकर से प्यार हो गया, लेकिन उन्हें यह प्यार ज़ाहिर करने की इजाज़त नहीं थी, तो लव सिकनेस साफ नज़र ...डॉ. डॉसन के नतीजे एक किताब में छपे हैं, जिसका नाम है - लव सिकनेस ऐंड जेंडर इन अर्ली मॉडर्न इंग्लिश ....डॉ. डॉसन ने कहा कि सेक्स के ज़रिए प्यार करने वालों के शरीर से नुकसानदायक तत्व बाहर निकल जाते हैं यही नुकसानदायक तत्व बीमारियों की वजह बनते हैं...
फरहा- तुहें ये सब बातें कहाँ से सीखने को मिलती हैं... ये सब तथ्यपरक बातें होती हैं...
सलीम- अखबार और मैगजीन में ये सब बात लिखी हुई होती हैं... मैं गौर करता रहता हूँ... वैसे भी टीचर हूँ तो जानकारी के हिसाब से भी ध्यान रखना पड़ता है... तो कब मिलवा रही हो राजो से ?
फरहा- जब चाहो तब, वह भी यहीं रहती है, मगर सोच लेना उसका पति पहलवान है...
सलीम- पहलवान ? तो क्या हुआ ? मुझे थोड़े ही उससे कुश्ती लड़नी है ? राजो से मिलेंगे और बस , वह अपने घर... हम अपने घर... क्या उसका पति हर आदमी से लड़ता रहता है...
फरहा- हर आदमी से तो नहीं लेकिन अगर उसे पता चला की राजो और तुम कुछ अलग ही गुल खिला रहे हो तो तुम दोनों की ही खैर नहीं... बहुत ताकतवर है... मैंने उसे कुश्ती करते हुए देखा है...
सलीम- ठीक है, फ़िर मुझे डरा समझो... मैंने नहीं मिलना ... पहले जान उसके बाद जहाँ,... ठीक है ?
फरहा- अरे वाह ... डरपोक कहीं के... इतनी जल्दी हवा खुश्क हो गयी... मैं तो ऐसे ही कह रही थी... चलो मिलवा देती हूँ किसी दिन... लेकिन ऐसा ना हो की उससे मिलकर तुम मुझे ही भूल जाओ...
सलीम- नहीं यार... ऐसा कैसे हो सकता है... तुम तो मेरी जान हो, जिन्दगी हो ... जीने का मकसद हो... तुम हो तो सब कुछ है और तुम नहीं तो कुछ भी नहीं... ऐसी ना जाने कितनी फरहा ई और आएँगी मगर तुम्हारा स्थान कोई नहीं ले सकती... तुम स्पेशल हो यार... आओ॥ पहले मैं तुम्हें थोडा सा प्यार देदूं... बहुत देर से तरस रही हो ...
फरहा- सिर्फ़ मैं ही नहीं तड़प तो तुम भी रहे हो... तुम्हारी आंखों में जो लाल -लाल डोरे तैर रहे हैं... वे सारी कहानी बयान कर रहे हैंं... इनको लोग वासना के धागे बोलते हैं ... ये एक तरह से मर्दों की उत्तेजना को मापने वाले मीटर होते हैं... इनसे फ़ौरन पता चल जाता है की आपके मन में क्या -क्या चल रहा है ?
सलीम- अच्छा जी... लगता है तुम्हारी सहेली राजो ने तुम्हें बहुत कुछ ट्रेनिंग दे दी है...कभी मिलेंगे तो हम भी उसे अपना गुरु बनायेंगे, हम भी कुछ टिप्स सीखना चाहेंगे...
फरहा- कुछ क्यों , सब कुछ सीखिए ना... मना किसने किया है ? मैं चिढ़ने वाली या डरने वाली नहीं हूँ... अगर तुम्हारी इच्छा हो रही है तो कल उसे यहाँ बुला लुंगी... फ़िर भले ही रात भर उसके साथ मौज लेना मुझे कोई एतराज नहीं... और हाँ, वह भी मेरा कहना मान जायेगी...
सलीम- अगर इसके बदले वह तुहें भी अपने पति के साथ सुलाने लगी तो ?
फरहा- तो क्या ? सो जाउंगी मैं भी...क्या फर्ज पड़ता है ? वह मेरी ख़ास दोस्त है... जब वह मेरे लिए इतना कर सकती है तो मैं क्यों नहीं कर सकती?

Friday, August 14, 2009

दिलफेंक पडोसन, , भाग-22

तुम्हारा दिमाग भन्ना जाएगा... सच कहती हूँ... क्या तुम सुनना चाहोगे ?
सलीम- नेकी और पूछ-पूछ ,जल्दी से कहो मैं तो उतावला हो रहा हूँ... बहुत देर से तो मैं ही बक-बक कर रहा था ... अब तुम कुछ कहने की इच्छा जताई है तो फ़टाफ़ट कहो मेरी जान... तुम्हारे शब्द मेरे कानों में रस सा घोलते हैं॥
फरहा- एक बार मैंने एक लड़के को एक बकरी से लिपटते हुए देखा था... यह दो साल पहले की बात है... बकरी जब जोर -जोर से चिल्लाने लगी तो उसने उसका मुह बंद कर लिया... मैं हैरत में थी...
सलीम- कहाँ का किस्सा है ये ? तुम कहाँ थीं उस वक्त ?
फरहा- मैं गाँव गयी थी, गरमी का समय था... मैं अपनी एक सहेली के साथ घर से दूर खेतों की तरफ़ जा रही थी... मेरी सहेली कह रही थी की वहां पेड़ की छाया मिलेगी , हवा भी चल रही होगी इसलिए गरमी से छुटकारा मिल जाएगा...मैं उसके साथ चलदी...मौसम बहुत गर्म था और लू चल रही थीं... जब हम खेतों पर पहुचे वहां एक हेंडपंप पर रुके , मेरी सहेली राजो थी, वह हेंडपंप चलने लगी मैं पीने लगी... बहुत प्यास लगी थी , होठों से हवा ऐसे टकरा रही थी जैसे जंग के दौरान सीने से गोलियाँ आर-पार निकलती हैं...
सलीम- अच्छा... फ़िर क्या हुआ ? क्या वह महाशय वहीं पर मौजूद था ?
फरहा- हाँ यार, मेरी निगाह सामने वाली झौपडी पर गयी... उसमे दरवाजा नहीं था... वहाँ से एक बकरी के चिल्लाने की आवाज आ रही थी... मैंने उत्सुकता वश उस तरफ़ देख लिया... फ़िर तो समझो गज़ब हो गया... एक लड़का बकरी को अपने कब्जे में कर उस पर हावी हो रहा था, वह पसीने से तरबतर था, बकरी खूब शोर मचाने लगी तो उसने उसके मुख पर अपनी हथेली रखदी... मैंने राजो से उस तरफ देखने को कहा... हम दोनों इस द्रश्य को देखकर उत्तेजक हो रही थीं... राजो ने मैंने सीने पर चिकोटी काटली , यह पहला स्पर्श था...
सलीम- आह...तब तो खूब मजा आया होगा... मैं होता तो और भी आनंद आता ... मैं रह गया उस सुख से...
फरहा- हाँ तब तो जिस सुहागरात का आनंद हम यहाँ उठा रहे हैं , वह बहुत पहले ही जंगल में मना ली गयी होती... उस दिन मैंने पहली बार किसी मर्द को एक जानवर के साथ सम्बन्ध बनते हुए देखा था...
सलीम- हाँ यार यह तो बहुत डेंजर बात है, हैरत वाली बात है... मैंने ऐसा कभी सोचा भी नहीं था...
फरहा- हाँ ,,, और उस समय एक स्थिति ऐसी भी आयी की बकरी गिर पडी लेकिन उसने बकरी तो तभी छोड़ा जब वह संतुष्ट हो गया... इसके बाद उसने अपना निचला वस्त्र पहना और लाठी लेकर चला गया... मैं उसका चेहरा ठीक से नहीं देख पायी थी... जब वह निकला तो हम दोनों एक पेड़ के पीछे छिप गए थे , इसलिए उसकी नजर हम पर नहीं पडी... जब वह चला गया तो मैंने रजो से कहा-
-यह बकरी के साथ क्या कर रहा था ? बहुत चिल्ला रही थी बेचारी ...दुःख हो रहा होगा ना ?
राजो- हाँ, दुःख तो होगा ही... कहाँ वह इतना मजबूत लड़का और कहाँ यह बकरी ? तू तो ऐसे पूछ रही है जैसे तू कुछ जानती ही ना हो... यह वाही कर रहा था जो लड़की रात को लड़की के साथ करता है...
फरहा- मैं क्या जानूं री... मैं क्या रोज देखती हूँ ? आज न जाने कैसे यह सीन देखने को मिल गया...
राजो- हम तो अक्सर देखते रहते हैं... कितनी ही ऐसी लड़किया हैं जो अपने यार के साथ जंगल में मंगल मनाने के लिए आती हैं...जो ज्यादा सती सावित्री बनतीं हैं उन्हीं के रंग ज्यादा दीखते हैं...
फरहा- ठीक कहती हो, मगर मुझे तो बहुत डर लगता है, किसी लड़के से बात भी करने की इच्छा नहीं होती... कुछ हो गया तो ? लेने के देने पड़जायेंगे , बदनामी होगी वह अलग...
राजो- बात में दम है... मगर मन का क्या करोगी, इस सीन को देखकर मेरे बदन में आग लगी हुई है... देखो ना यह सीना कितना धक्-धक् कर रहा है... सच कहती हूँ अगर मेरा वश चले तो तुझसे लिपट जाऊं...इससे क्या होगा की एक तो कुछ होने का डर नहीं और किसी तरह की कोई बदनामी भी नहीं...
फरहा- तो सहेली है मेरी... तुझे लिपटने से किसने रोका है, आ ना तेरे मन में जो भी हसरत पल रही हैंउन्हें पूरी तरह से निकाल ले... हो सकता है मेरे तरसते मन को भी इससे कुछ तसल्ली मिल जाए...
राजो- कुछ की बात करती है, इससे तो खुश हो जायेगी, तेरा गाँव में दिल नहीं लग रहा ना, फ़िर तो तू शहर में जाने का नाम भी नहीं लेगी... तुझे इतना मजा आ जायेगा...