Saturday, October 31, 2009
मोहब्बत , भाग-3
रचना- कुछ भी मत बोलो स्वीटी। हर आदमी को अपनी पसंद या नापसंद जताने का हक़ है। अगर राज को इस सबमे दिलचस्पी नहीं है , तो उसे हक़ है इस सबका। हमको कोई अधिकार नहीं है उसे डिस्टर्ब करने का। जैसे वह जी रहा है जीनेदो उसे। मैं तुम्हारे साथ नहीं हूँ। इस मामले में तो हरगिज नहीं।
स्वीटी- इतना भड़कती क्यों हो ? क्या बात है आख़िर ? ये अपने लिए कोई नई है क्या ? जो लड़के अपनी बात नहीं मानते हम उनके साथ उसी तरह का व्यवहार करते हैं। उस टोली में तुम भी हमेशा हमारे साथ रही हो।
रचना- प्लीज स्वीटी, इस बार कोई जिद मत करना , मैं जानती हूँ तुम्हारी जिद को। सच कहूं तो मुझे इससे बड़ा डर लगता है। मैंने सुना था- राज हठ , त्रिया हठ और बाल हठ के बारे में। लेकिन उसके साथ- साथ स्वीटी हठ भी जोड़ देना चाहिए । एक बार के लिए राजा अपनी जिद भूल सकता है मगर स्वीटी नहीं।
स्वीटी- तो फ़िर समझाती क्यों नहीं हो उस लम्बू को। यह जिम्मेदारी तुम्हारी है, उसे समझा दीजिये की प्यार मोहब्बत की दुनिया में आए , उसका स्वागत है। नीरस जिंदगी जीने का मतलब क्या है। अपनी जवानी पर ना सही , कम से कम वह हमारी जवानी पर तो तरस खाए।
रचना- तुम ख़ुद भी तो समझा सकती हो उसे, प्रयास क्यों नहीं करतीं। उसका मोबाइल नंबर दूँ क्या ?
स्वीटी - उसकी जरूरत नहीं है। है मेरे पास। मगर तुम्हें तो पता है न, कितनी कूल बातें करता है, ऐसे लगता है जैसे किसी गैर आदमी से बात कर रहा हो। बड़ा औपचारिक आदमी है। मैं जानती हूँ वह ऐसा जानबूझकर कर रहा है, हो सकता है उसका कोई और चक्कर है। मगर क्या ? कुछ समझ में नहीं आता। जब भी मिलता है तो ठीक तरह से मिलता है मगर ऐसा जादू कर देता है की चाहकर भी कुछ कह नहीं पाती।
रचना- मेरी एक बात मानलो, इसका ध्यान दिमाग से निकाल फेंको। हम सबके लिए यही बेहतर रहेगा। स्वीटी- सब कुछ बोलो मगर यही बात मत बोलो, हर बार घुमा फिराकर तुम फ़िर वहीं आ जाती हो।
रचना- तो क्या करुँ, तुम्हीं बताओ की पत्थर से सर टकराने से तुम्हें क्या हासिल होगा। नुक्सान पत्थर का नहीं अपना ही होने वाला है, राज इंसान नहीं पत्थर है, उसकी संवेदनाएं या तो कभी जाग्रत ही नहीं हुईं थीं, या फ़िर मर चुकी हैं। समझीं तुम। तुम जैसी खूबसूरत , समझदार और प्यार करने वाली लड़की उसे भला कहाँ मिलेगी। मैं तो कहती हूँ की उसके किसी पुराने जन्म के पुण्य होंगे जो यतम जैसे लड़की उसके पीछे पड़ी है वरना सैकडों लड़के इस दुनिया में ऐसे हैं जो तुम्हारी हर अदा पर अपनी जान छिड़कते हैं लेकिन तुम उनकी तरफ़ देखती भी नहीं । जबकि उनमे से कई तो राज से भी बहुत सुंदर और जीनियस लड़के हैं।
स्वीटी- समझ गयी, चढ़ा रही हो मुझे, ध्यान बँटा रही हो मेरा । मनोविज्ञान की स्टूडेंट हो इसलिए। मानव मन की संवेदनाओं को गहराइयों से जानती हो , इसका फायदा उठा रही हो। ठीक है। कोई दिक्कत नहीं।
रचना ने स्वीटी को अपनी बांहों में भर लिया और उसे अपनापन से बिठाती हुई बोली-
- देखो, अब हमारी ऐसी उम्र नहीं रही की हंसी ठिठोली में अपना या किसी और का नुक्सान कर बैठें, बचपन की बात और होती है , तब हम इतने समझदार नहीं होते। हमें बस आनंद से मतलब होता है। लेकिन अब हम लोग मैच्योर्ड हो चुके हैं , अपने भले के साथ-साथ दूसरों का बुरा न हो इसका भी ख्याल रखते हैं। राज का यह रूखापन किसी एक के लिए होता तो उसको हम ग़लत ठहरा सकते थे, मगर वह सभी लड़कियों के साथ ऐसा ही है। तब ये समझा जा सकता है की वह है ही ऐसा। और ऐसा लड़का क्या स्वीटी के स्टैंडर्ड से मेल खाता है ?
स्वीटी- तुम ठीक कहती हो। मगर दिल माने तब न। उससे ना जाने कैसा लगाव हो गया है, रात को सोती हूँ तो महसूस होता है जैसे वह मेरे साथ सो रहा है, मुझे चूम रहा है, मुझसे प्रेम कर रहा है। मैं उसके बाहुपाश एम् जकड़ी हुई हूँ और वह मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रहा है। मैं उससे मुक्त होना चाहती हूँ लेकिन कोई अद्रश्य शक्ति मुझे उससे जोड़े हुए हैं।
Friday, October 30, 2009
मोहब्बत के मसीहा , भाग-2
- ये राज आख़िर क्या बला है ? अजीब प्राणी लगता है ।
रचना- कौन राज ? उस लम्बू की बात करती हो, अच्छा खासा इंसान तो है। जानवर तो किसी भी एंगल से नहीं लगता। थोड़ा सा अंतर्मुखी है। ऐसे लोग आमलोगों से ज्यादा घुल मिल नाहीं पाते।
स्वीटी- और कौनसा राज । उसी लम्बू की बात कर रही हूँ जिसकी आजकल बहुत चर्चा है। हर नौजवान लड़की की जुबान पर उसीके चर्चे हैं। ये अंतर्मुखी शब्द कुछ पल्ले नहीं पडा। ये क्या होता है ? कोई बीमारी है क्या ?
रचना- नहीं यार । बीमारी नहीं होती मगर बीमारी जैसी ही होती है। तू क्यों इंटरेस्ट ले रही है इस अंतर्मुखी में।
स्वीटी- मुझे चिढ होती है उसके व्यवहार से। कोई मुझे इस तरह नजरअंदाज करे यह अच्छा नहीं लगता।
रचना- रहम कर बेचारे पर। सीधा लड़का है।
स्वीटी- अच्छा जी, बड़ा तरस आ रहा है बेचारे पर। क्या बात है ? बड़ी दया आ रही है ?
रचना- हाँ, वो है ही ऐसा। लाखों में एक । करोड़ों में एक।
स्वीटी- दुनिया में अपनी तरह का अकेला ही क्यों नहीं कहतीं ? म्यूजियम में लगाने लगाने लायक। मुझे तो शक होने लगा है की वह आदमी भी है की नहीं। अगर वह इंसान होता तो उसकी भ्वानाएं कभी नहीं भड़कती ?
रचना- इतना बडा इल्जाम , बेचारे पर।
स्वीटी- बेचारा ? हूँ ...... मैं नहीं मानती। या तो दिखावा करता है, या फ़िर उसके अन्दर आग है ही नहीं। होगी तो भड़केगी न। तुम क्या सोचती हो ?
रचना- तुम तो मुझ पर ऐसे नाराज हो रही हो जैसे की मैं ख़ुद राज हूँ। तुम ऐसा क्यों नहीं करतीं की इन सवालों के जवाब सीधे राज से ही जानो। उसके बारे में उससे बेहतर और कौन जान पायेगा।
स्वीटी- तुम तो चिढ़ने लग गईं। ऐसे बात की जाती हैं क्या ?
रचना- चिढ़ने की बात करती हो तुम, और तुम जैसी न जाने कितनी लड़कियां। मुझसे आकर राज के बारे में पूछती हैं, जब मैं मेरी राय रखती हूँ तो बहस करने लगती हैं।
स्वीटी- हाँ तो किसके पास जाएँ, तुम हमारी सबसे प्यारी सहेली जो हो, साथ में मनोविज्ञान की स्टूडेंट भी।
तचना- अच्छा , अब मस्का मत लगाओ , राज का ध्यान छोड़कर किसी और लड़के पर डोरे डालो। मेरी तरह। जैसे मैं उसे कबका अपनी लिस्ट से बाहर कर चुकी हूँ।
Thursday, October 29, 2009
मोहब्बत के मसीहा , भाग-01
Wednesday, October 28, 2009
जीजा भाग-अन्तिम
-सेक्स अगर एक तरफ उत्सुकता, भावना, अपनापन और प्यार को गहरा करने का माघ्यम बन सकता है। तो वहीं दूसरीतरफ ये असमंजस, अपराघबोघ, अवसाद, डर और गुस्से को भी बढा सकता है, क्योकि सेक्स के प्रति हमारा नजरिया बहुत हद तक हमारे समाज, हमारी परवरिश और सेक्स की जानकारियों के स्त्रोतों से लेकर हमारे अनुभवों और बहुत हद तक हमारी उम्र पर भी निर्भर करता है। 20 की उम्र में सेक्स चुंकि इस उम्र में सेक्स हार्मोन्स काफी तेजी से बढते है और सेक्स को लेकर उत्सुकता और रोमांस भी काफी होता है। इसलिए सेक्स को लेकर एक्सपेरिमेंट भी इस उम्र में ज्यादा होते है। वैसे, किशोरवय में सेक्स को लेकर एक्सपेरिमेंट करने का बढता ग्राफ एक चिंता का विषय है, लेकिन जो लोग किशोवस्था पार करके शादी तक इंतजार करते है। उनमें सेक्स को लेकर उत्सुकता और रोमांस का लेवन बहुत हाई होता है।लडकियों की सेक्स के प्रति प्रतिक्रिया काफी हद तक रोमांस, फोरप्ले और पार्टनर के प्रति भावनात्मक लगाव पर निर्भर करती है। वहीं पुरूषों की सेक्स की जानकारी अघिकतर सेक्स संबंघी फिल्मों और किताबों के अलावा आपसी बातचीत पर निर्भर करती है। इन्हीं वजहो से टीनएज लडकों के मन में सेक्स को लेकर कई गलत घारणाएं और अपेक्षाएं भी घर कर जाती है। उनके लिए सेक्स भावनातमक लगाव से कहीं ज्यादा शारीरिक क्रिया बनकर रह जाता है और वे अपने पार्टनर से ऎसी चीजों की अपेक्षा करने लगते है, जो उनके पार्टनर के लिए अक्सर संभव नहीं होता। इसके अलाव इस उम्र के पुरूषों को यह डर भी रहता है कि क्या वे अपने पार्टनर को संतुष्ट करे पाएंगेक् इस तरह की मानसिक घारणाए सेक्स के वक्त परफॉर्म करने में बाघा उत्पन्न करती है। दूसरी तरफ लडकियां भी फिल्मी रोमांस और सुनी-सुनाई बातों के हिसाब से ही सेक्स को जेहन में रखकर पार्टनर से उम्मींद पालती है, जो अक्सर पहली ही रात में चकनाचुर हो जाती है। ऎसे में ये जान और समझ लेना जरूरी है कि सेक्स देखकर या पडकर नही सीखा जा सकता। ये प्रैक्टिस के साथ परफेक्ट होता है और इसे महज शारीरिक क्रिया न समझकर प्यार और भावना से करें तो रिश्ता मजबूत बनेगा। इसके अलावा सेक्स मेंवही बातें और क्रियाए संतुष्टि दे सकती है, जो दोनों की रजामंदी से हो। कुल मिलाकर इस उम्र में उत्सुकता और एक्सपेरिंमेट पर ही जोर रहता है, लेकिन इस एक्सपेरिमेंट के दौरान ये न भूले कि गर्भनिरोघक साघनों का प्रयोग जरूरी है, क्योंकि गर्मघारण का डर भी सेक्स क्रिया में बाघक होता है। और जब तक दोनों एक-दूसरे के इतने नहीं जुड जाएं कि भावनाएं, शारीरिक क्रिया से ज्यादा महत्वपूर्ण बन जाएं। तक तक गर्मघारण न करें। वरना ऎसी सेक्स क्रिया रिश्ते में बाघक ही बनेगी। अंतत: ये बात दोनों पार्टनर बखूबी समझ ले कि शारीरिक रूप से जुडने से ज्यादा जरूरी है भावनात्मक रूप से जुडना, तभी लंबे समय तक रिश्ते में गर्माहट बनी रहेगी।
दीप्ति के इस स्पीच की खूब सराहना हुई , अब वह एक नए सफर की तैयारी कर रही थी। उसे मालूम था की भविष्य में उसको अवश्य ही उसे कोई जीवन साथी जरूर मिल जाएगा। अब वह स्थायित्व की तलाश में थी।
समाप्त।
कल से पढिये , मस्त धारावाहिक कहानी -
मोहब्बत के मसीहा
पत्र
श्रीमान मनपा आयुक्त
मीरा भायंदर
विषय- क्रान्ति आनंद नगर , गणेश देवल नगर , भायंदर वेस्ट में गरीबों को पानी की किल्लत और दलालों द्वारा पानी की कालाबाजारी की शिकायत करने बाबत।
महोदय , नमस्कार
आपका ध्यान क्रान्ति आनंद नगर , गणेश देवल नगर , भायंदर वेस्ट , जिला -थाने , महाराष्ट्र की तरफ़ आकर्षित करना चाहता हूँ, इस सम्बन्ध में मुझे स्थानीय लोगों की शिकायत मिली हैं की यहाँ पर कुछ दलाल मुख्य रोड पर ही मोटर लगाकर पानी खींच लेते हैं , इस कारण अन्दर झोपड़पट्टी में लोगों को पानी नहीं मिल पाटा , यहाँ रहने वाले गरीब लोग बूँद -बूँद पानी के लिए तरस रहे हैं। दूसरी तरफ़ जो यहाँ के दलाल लोग हैं, वे पानी का मोटर उखाड़कर बाजू में रखकर मोटर लगाते हैं। इस कारण यहाँ कुछ दलाल पानी की कालाबाजारी में लगे हुए हैं। इस सम्बन्ध में यहाँ के लोगों ने कई बार मनपा कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई हैं मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। अगर एक सप्ताह के अन्दर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो बहुजन समाज पार्टी की तरफ़ से मनपा कार्यालय पर सैकडों लोगों का मोर्चा निकाला जाएगा। इस सबकी जिम्मेदारी महानगर पालिका की होगी।
कृपया इस पत्र का जवाब अति शीघ्र दे ।
प्रतिलिपि- निवेदक- मुकेश कुमार मासूम
मुंबई उपनगर सचिव
१, मुख्यमंत्री महोदय,
महाराष्ट्र शासन
२, राज्यपाल महोदय
३, प्रेस रिलीज
Tuesday, October 27, 2009
भाग-३३
- बेहतर सेक्स लाइफ कैसे जियें?
deepti- अच्छी सेक्स लाइफ के लिए आपका शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है, इसके लिए महत्वपूर्ण बैलेंस्ड डाइट, थोडी बहुत एक्सरसाइज भरपूर नींद और ज्यादा चाय,कॉफी,सिगरेट या शराब का सेवन न करना। सस्ती सेक्स किताबों, पोर्नोग्राफिक फिल्मों और समाचार पत्रों मे आए दिन कई विज्ञापनों मे विशेष अंग के आकार या लंबाई को बढा-चढाकर एवं कम लंबाई को एक समस्या के रूप में दिखाया जाता है जिससे युवावर्ग भ्रमित हो जाता है और तनावग्रस्त होकर उल्टे-सीघे उपाय करने लगता है ये सब गलत है छोटे आकार से ऑर्गेज्म में कोई फर्क नही पडता, क्योंकि योनि का केवल एक तिहाई भाग ही सेंसिटिव होता है अत: सही सेक्स पोजीशन में छोटा लिंग भी पूरी तरह चरमोत्कर्ष दे सकता है। सेक्स करते समय किसी और पुरूष की कल्पना उत्तेजित करती है और सेक्स का आंनद बढाती है अत: कल्पना करें,इसके लिए मन में किसी तरह का अपराघबोघ न आने दे. इसमें कोई बुराई नही है। यदि पति-पत्नी दोनों वर्किग है, व्यस्त है, रात को देर से आते है, तो उनकी सेक्स लाइफ न के बराबर होती है। ऎसे में बेहतर होता है कि सुबह उठकर फ्रेश मूड में सेक्स का आनंद उठाएं। कुछ सालों के बाद सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है, इसलिए एक्सपेरिमेंट करते रहे, अलग-अलग पोजीशन ट्राई करें. कुछ ऎसा जो जिंदगी में रंग भर दे। सेक्स दोनों को शारीरिक ही नही मानसिक रूप से भी करीब लाता है यही जुडाव दांपत्य जीवन की नींव है. खुद का घ्यान रखना, संवरना, खूबसूरत दिखना जरूरी है। बढती उम्र के साथ-साथ सेक्स लाइफ को जीवंत रखना एक चुनौती है. इसके लिए फोरप्ले का समय बढाएं नए तरीके आजमाएं, अपने पुराने दिनों को याद करें, परंतु सेक्स करना बंद ना करें। यदि सेक्स की इच्छा है परंतु आप बहुत थके हुए व तनावग्रस्त महसूस कर रहे है तो डरावनी फिल्म या हॉरर शो देखें या 1 कप कॉफी पीएं, आपका दिल जोरों से घडकने लगेगा इससे शरीर में एड्रीनलीन की मात्रा बढ जाएगी, यही वह केमिकल है, जो सेक्सुअल एक्साइटमेंट (उत्तेजना)पैदा करता है।
उसकी बातों में दम था। वह युवा जोड़ा भी संतुष्ट हो गया। यही खासियत थी दीप्ति की।वह इन बातों को अक्सर बतलाती रहती थी।
Monday, October 26, 2009
भाग-32
-विवाह के बाद आमतौर पर महिलाओ का रूप एकदम से खिल जाता है। आँखों में एक अलग सी चमक आ जाती है। संतुष्टिदायक सेक्स न केवल शारीरिक सुख से जुडा है, बल्कि इसका भावनात्मक पहलू भी अत्यंत महत्तवपूर्ण हैं। जब पुरूष एंव महिला का आपसी शारीरिक संसर्ग होता है,तो महिला में हारमोन का उत्पादन बढ जाता हैं। हारमोन की अघिकता महिलाओं को सेक्स में आक्रामक बनाती है,साथ ही उनमें आत्मविश्वास भी भर देती है। सेक्स संबंघो में तन के साथ-साथ मन का समर्पण भी जरूरी है। यदि पत्नी के दिल को पति की किसी बात से चोट पहुंची है, तो सेक्स के लिए उसका तनमन न तो पति को सहयोग दे पाएगा, न ही वह सहवास के दौरान उत्तेजना महसूस कर पाएगी। यही बात पत्नी पर भी लागू होती है। यदि पति किसी बात से तनावग्रस्त है तो इस से पति की यौन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पडेगा। इस्ट्रोजन और टेस्टास्टेरान हारमोन दोनों महिला के अंग में चिकनाहट उत्पन्न करते हैं और सेक्स को चरम आनंद की ओर ले जाते हैं। यह चरम आनंद ही महिला को संतुष्ट एंव खूबसूरत होने का एहसास दिलाता है। यदि महिला के शरीर में इन हारमोन की कमी को जाती है, तो महिला के अंग मे रूखापन आ जाता है। इसके कारण उसे चरम आनंद की प्राप्ति नहीं हो पाती। स्वस्थ सेक्स का संबंघ मानसिक रूप से अघिक जुडा होता हैं। अगर आप सेक्स के दौरान मानसिक रूप से संतुष्ट हैं तो निश्चित रूप से आप के चेहरे पर रौनक एंव आत्मविश्वास आ जाता है। यदि सेक्स से पूर्व आप तन और मन दोनो से पूर्णत: समर्पित हैं तो आप को चरमसुख की प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता। एक संतुष्ट सेक्स दोनो पार्टनर के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करता है। एक संतुष्ट सेक्स ताजगी भरा एहसास, आत्मिक संतुष्टि एंव ऊर्जा प्रदान करता है, जो आपके सौंदर्य को कई गुना बढा देता है। सेक्स से पूर्व फोरप्ले एवं कल्पनाशीलता सेक्स को और भी उत्तेजक बनाता है। सेक्स में स्पर्श तथा नएनए आसन पति-पत्नी में प्यार व निकटता को बढाते हैं। एक संतुष्ट सेक्स संबंघो को मघुर बनाता है और तन एवं मन को खूबसूरत होने का एहसास दिलाता है। मिठास फोरप्ले की - सेक्स को सफल बनाने के लिए संसर्ग के दौरान अपने साथी के मुँह, होंठो गर्दन इत्यादि शारीरिक अंगो की तारीफ करनी चाहिए। यदि मन के भाव एंव नैनो की भाषा पढ कर पति संसर्ग करे तो महिला की नजर में यह पुरूष की मर्दानगी को बढाता हैं। महिलाओको सेक्स में आराम, सुकून एवं फोरप्ले द्वारा दी गई घीमी प्रक्रियाएं बहुत उत्तेजित करती हैं। इससे दोनो मिलकर सेक्स के चरमसुख को प्राप्त कर स्फूर्ति एवं खूबसूरती हासिल कर सकते हैं। सेक्स प्रकिया एक कुदरती आनंद - सेक्स एक ऎसी प्रकिया है, जो शारीरिक एवं मानसिक अभिव्यक्ति व्यक्त करने का कुदरती माघ्यम है। जिस व्यक्ति का मन-मस्तिष्क जितना स्वस्थ होगा, उसकी सेक्स अभिव्यक्ति भी उतनी ही आनंदमय होगी। तनाव व चिंता से मुक्त सेक्स से रोम-रोम पुलकित हो उठता है और तन-मन में नई स्फूर्ति एवं खूबसूरती का एहसास होता है।
लेकिन अपने मामले में वह फिसड्डी ही रही। दुर्भाग्य ने कभी उसका साथ नहीं छोडा।यह शेर उसके जीवन पर सही साबित हो रहा था-'जब दर्द की लहर उठती है, जिन्दगी भी सिहर उठती है'। यह अपनों की बख्शी टीस है, तभी तो शामो -सहर उठती है।
Sunday, October 25, 2009
भाग-31
उसको अपने अच्छे दिन याद आते थे, उन दिनों उसके पास ज्यादा दौलत नहीं हुआ करती थी मगर खुशियाँ कदम चूमती थीं, कभी-कभी तो उसकी जेब मेंकोफी पीने तक के पैसे भी नहीं होते थे, इसके बावजूद वह खुश रहती थी। आज उसके पास में अथाह दौलत है, सभी सुख सुविधाएं हैं मगर शान्ति कहीं गुम हो गयी है, सुकून कहीं गायब है। हर समय मन में एक अजीब सा खौफ बना रहता था, वह कभी -कभी तन्हाई में ख़ुद से ही सवाल करती और फ़िर ख़ुद ही हसने लगती थी। उसके जीजा जब कई कई दिनों तक उसके यौवन का रस लूटते तो उसे स्वर्ग जैसा आभास होता था, मन प्रफुल्लित रहता था । यूँ कहने को तो उसके पास सब कुछ था मगर जब वह हिसाब किताब लगाती तो एहसास होता की उसकी झली तो खाली की खाली थी, जीवन में कोई स्थाईए रंग ही नहीं था। उसकी बहन के पास बच्चे थे जो दीप्ति की मदद से अच्छे स्कूलों में पढ़ते थे, दीप्ति की मदद से ही उसका जीजा आसपास के गावों का सबसे बड़ा जमींदार बन चुका था। अब उसे कमाने की भी कोई जरूरत नहीं रह गयी थी। मगर दीप्ति के पास सिर्फ़ शौहरत थी, और दौलत थी। लेकिन क्या सिर्फ़ इसीके सहारे जीवन जिया जा सकता है क्या ? उसे याद आने लगे वे दिन जब उसकी एक सहेली उसे समझाया करती थी-
- ये तुम ग़लत कर रही हो दीप्ति । इश्क की यह आग जिस दिन भड़केगी न , उस दिन तुम्हारा समूचा वजूद इसमें भस्म हो जाएगा । मर्दों का ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ता है, उनसे कोई कुछ ज्यादा पूछताछ भी नहीं करता । सब लोग लास्ट में लड़की को ही दोष देते हैं, और फ़िर भुगतना हम लोगों को ही पड़ता है, मर्दों को नहीं। तुम्हारे जीजा तो मौज मस्ती लेकर अलग पड़ेंगे और फ़िर फंसेगी तू। तेरी बहन भी नफरत करने लगेगी तुझसे , क्या तू अपनी बहन का घर तोड़कर खुश रह सकेगी।
दीप्ति- मैं ऐसी नौबत ही नहीं आने दूंगी, दीदी का घर बरबाद करने से पहले मैं ख़ुद ही बरबाद हो जाउंगी।
सहेली- आख़िर बात तो वही हुई न। चाकू सेब पर गिरे या सेब चाकू पर , अंत में जो नुक्सान होता है वह सेब का ही होता है,। इसलिए कह्त्ति हूँ अभी से अपनी आँखें खोल ले। गाँव में भी सबको ख़बर लगती जा रही है। तू विदेश में क्या रहकेआयी है, गाँव के तौर तरीके ही भूल गयी है। यहाँ पर कोई भी खुश नहीं है तेरी रासलीला से। अगर यही सब चलता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा की तू किसी और से शादी करने लायक भी नहीं रहेगी। सब चुगली कर देंगे तेरी, समझ रही है लैला।
दीप्ति -अभी से शादी कौन मूर्ख करता है, अभी तो समय है। आराम से की जायेगी, पहले कैरियर और साथ में मौज मस्ती , उसके बाद शादी, तब की तब सोचेंगे। चल मेरी फ़िक्र छोड़कर तू अपने बारे में सोच। तेरी कहीं सैटिंग हो पाई की नहीं।
सहेली- ठीक है दीप्ति, अगर ज्यादा कुछ कहूँगी तो बुरा लगेगा तुझे , सोचोगी की मैं जलकर कह रही हूँ।
दीप्ति- नहीं यार, इतनी बुरी भी नहीं हो तुम। मैं जानती हूँ तुम मेरी भलाई की बात करती हो मगर मैं क्या करुँ, मुझे अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा है, मैं कंट्रोल नहीं कर पाती यार , जीजा की सूरत ही मेरे मन मन्दिर में बस गयी है, बस मुझे वही दिखाई देती है, उनके बिना मेरा जन्म अधूरा है। मैं पशोपेश में हूँ , शादी किस्से किस्से करुँगी, कैसे होगा ये सब, जीजा की यादें दिल से कैसे निकलेंगी , मगर कोई राह नहीं सूझती।
सहेली- तू अपनी पढाई पर ध्यान दे, बाकी सब भूल जा। मेरा कहना मान। यहाँ का माहौल तेरे लायक ही नहीं है। हमारा यह गाँव बहुत पिछडा है, यहाँ के विचार उससे भी ज्यादा पिछडे हुए हैं। तुझे कोई नहीं समझ पायेगा यहाँ।
Saturday, October 24, 2009
jeejaa jameendaar , भाग-30
-घर से बाहर लिफ्ट मिलते ही पुरूषों को फिसलते देर नहीं लगती पर वह फिसलन अपने साथ कुछ निशान भी छोड जाती है,जिस से तुमको को सजग हो जाना चाहिए,नही तो आपके परिवार के लिए इसके परिणाम गंभीर हो सकतें हैं। किसी भी स्त्री के पति को इश्क का रोग लग जाना कोई छोटीमोटी आम घटना नही हैं। इस रोग का गंभीर रूप उनके बीच तलाक का कारण बन सकता हैं। दूसरी स्त्री से प्रेम का चक्कर चलाने को उत्सुक पति का व्यवहार बदले बिना नही रह सकता। उसके उपर मानसिक व भावनात्मक दबाव ज्यादा रहता हैं। उसे कभी नए रोमांस की उत्तेजना , तो कभी पत्नी को छलने का अपराघ बोघ। वह इस अफेयर को छिपा कर रखना चाहता हैं। उसे अपनी बदनामी का डर रहता हैं। जरूरी है कि पत्नी अपने पति में आये इस बदलाव को तभी पहचाने जब उस के पति के कदम ताजाताजा भटकने आरंभ ही हुए हो, तो पत्नी उसे रोकने में सफल हो सकती है। इश्क की पतंग उडाने के चक्कर में पतिदेव का व्यवहार बदलेगा। कभी वह बेवजह बहुत प्रसन्न नजर आएंगे तो कभी तनावग्रस्त व चिडचिडे। प्रेमिका का व्यवहार आपके पति का मूड निर्घारित करता है। प्रेमिका की यादों मे खोए साहब पत्नी की बगल में होतें हुए भी कही दूर होतें है। पतिदेव घर पर देर से आने लगेंगे। किसी बिमार दोस्त को देखने जाने के मौके बढने लगेंगे। दोस्त भी ऎसा होगा जिस से बीवी की मुलाकात होने की उम्मीद न के बराबर हो। ओवरटाइम करने का जौश अचानक बढ जाएगा। आपके पति का वार्डरोब अब उनकी प्रेमिका की पसंद पर निर्भर होगा। नए रंग व नए स्टाइल में खुद को आकर्षक बनाने का प्रयास करेंगे। उनका ज्यादा वक्त शीशे के सामने बीतेगा। दाढी बडे घ्यान से बनने लगेगी। सेंट और डियो की खरीददारी में बढोतरी होगी। वजन, खास कर के तोंद कम करने के लिए घूमना व व्यायाम करना आपके पति की दिनचर्या में शामिल हो जाएगा। अपने डौले चेक करते हुए दिन में कई बार पत्नी उन्हे पकड सकती है। इश्क के शुरूआती दिनों में रोमांस की बैटरी प्रेमिका चार्ज करती है और इस का फायदा पत्नी को भी पहुंचता हैं। कहीं का जोश कहीं उतरता है। तब पत्नी इस भ्रम का शिकार हो जाती है कि उस के साहब उसे पहले से ज्यादा प्यार करने लगे है। घीरे घीरे प्रेमिका से तुलना कर के पतिदेव पत्नी से खीजने लगते है। तब रोमांस की जगह उदासीनता,चिढ व तानो का सामना करना पड सकता है। यौन संबंघो में पति की तरफ से अकारण बहुत ज्यादा बदलाव आ सकता है। प्रेमिका से मिलने की राह का कंाटा प्रतीत होने वाली पत्नी से पतिदेव के संबंघ घीरेघीरे अपनी सहजता व आत्मीयता खोने लगेंगे। पत्नी के मायके जाने की बात पर पति की आँखो में खुशी की चमक चंद पलो के लिए साफ देख सकते है। पति के व्यवहार व स्वभाव में छोटे बडे बहुत से बदलाव पत्नी नोट कर सकती है, जो उस के जीवन में प्रेमिका की मौजूदगी की तरफ इशारा करेगे। पति की आँखो में गहराई से झांकने पर यदि पत्नी को प्यार ,खुशी, संतोष व अपनेपन की जगह नाराजगी, चिढ, अपराघबोघ, नफरत व गुस्से जैसे भाव अकारण नजर आयें तो समझ लेना चाहिए कि दोनों दिलों के बीच दूरियां बढ गई हैं और इस के पीछे दूसरी औरत की मौजूदगी हो सकती है। गंभीर परिणाम - जब पति अपनी प्रेमिका की खातिर पत्नी से दूर होने का फैसला मन ही मन कर लेता है। तब इश्क का रोग गंभीर रूप ले लेता है। फिर पत्नी के साथ मानसिक व भावनात्मक स्तर पर कैसा भी संबंघ रखने में पति की दिलचस्पी नही होगी। वह तलाक लेने का इच्छुक बन जाता है। अब प्रेमिका के अस्तित्व को पत्नी की नजरों से छिपा कर रखने में पति की दिलचस्पी नही रहती। गुस्सा हमेशा उसकी नाक पर बना रहता है और आँखों से छोटी सी बात पर भी नफरत की चिनगारियां बरसने लगती है। पति अपनी पत्नी से छुटकारा पाने की घमकी खुलेआम देने लगता है। इसका एक ही ilaaj है -प्यार , प्यार और प्यार ।
Friday, October 23, 2009
जीजा जमींदार , भाग-29
-जब आपका बच्चा इस दुनिया में अपने नन्हे कदम रखता है, तो उस समय वह सभी बातो से अनभिज्ञ होता हैं। कुछ समय बाद वह अपने ईर्द-गिर्द के माहौल को थोडा समझने लगता है। उस समय वह बोलनेमें सक्षम नही होता हैं। तब आप अपने शिशु को सांकेतिक भाषा से अवगत करा सकते हैं। लगभग सभी मातांए अपने शिशु से सांकेतिक भाषा में बात करने की कोशिश करती हैं जैसे- हाथ हिलाकर बॉय करना, फ्लाईग किस देना इत्यादि। लेकिन उन में से बहुत कम होती हैं जो अपने शिशु को सांकेतिक भाषा सिखाने का प्रयास करती हैं। जब तक आपका शिशु ठीक तरीके से बोलना नही सीख जाता तब तक आप सांकेतिक भाषा के माघ्यम से उसकी भावनाओ को ज्यादा अच्छी तरह से समझ सकती हैं। हम आपको बता रहे हैं की किस तरह आप अपने शिशु को सांकेतिक भाषा सिखा सकती हैं। पहले स्वय सीखें- आपके शिशु को सांकेतिक भाषा सिखाने से पहले आपको भी इसका ज्ञान होना आवश्यक हैं। आप इसकी शुरूआत अपने शिशु की आघारभूत जरूरतों से कर सकती हैं जैसे- "मम्मी" , "पानी" , "बोतल" , "दूघ" इत्यादि। घ्यान रखे कि आपके घर में सभी लोग एक ही प्रकार के संकेतो का प्रयोग करें। जैसे-यदि आप "बोतल" के लिए किसी संकेत का प्रयोग करती हैं और आपके पतिदेव उसी शब्द के लिए किसी दूसरे संकेत का प्रयोग करेगें तो आपका शिशु उसे नही सीख पायेगा क्योकि वह अलग-अलग संकेतो से भ्रमित हो जायेगा और आपके सभी प्रयास व्यर्थ हो जायेंगे।अत: यह सुनिश्चित कर लें कि आपके घर में सभी लोग एक तरह के संकेतो का प्रयोग करें। छोटे स्तर से शुरूआत करें - प्रारंभिक स्तर पर आप बेसिक शब्दो के लिए ही संकेतो का प्रयोग करें। यदि आप सभी शब्दो के लिए संकेतो का उपयोग करेंगी तो आपका शिशु उसे समझनहीं पायेगा। अत: आप उसे घीरे-घीरे संकेतो से परिचित करायें। आप उसे प्रारंभिक स्तर पर ऎसे संकेत सिखाएं जो वह आसानी से सीख सके। छोटे-छोटे संकेतों को आपका शिशु आसानी से और जल्दी सीख पायेगा। इसलिए आप छोटे संकेतो से शुरूआत करें तो बेहतर होगा।इस तरह से आपके शिशु के लिए संकेत सीखना आसान हो जायेगा। जब आपका शिशु छोटे-छोटे संकेतों को सीख जाएं तो आप उसे थोडे कठिन संकेत सिखाना शुरू करें। इन संकेतो को आप अपनी दिनचर्या में शामिल करें और उसे अपनी आदत बनाएं। यदि आप इन संकेतो को अपने शिशु के साथ नियमित या रोजाना प्रयोग नही करेंगी तो आपका शिशु इन्हे नहीं सीख पायेगा। जैसे- आप जब भी अपने शिशु को दूघ दें,तो हमेशा उसको संकेत में समझाने की कोशिश करें। जब भी आप अपने शिशु से संकेतों में बात करें,तो आपकी नजरें उसकी आँखो की तरफ होनी चाहिए। इससे आपके बच्चो का घ्यान आप की तरफ रहेगा। जब आप ऎसा रोजाना करेंगी तो आपका शिशु जल्द ही आपके संकेतो और कार्यकलापो को समझने लग जायेगा। नये संकेतो को जोडे- आपको प्रत्येक 2-3 सप्ताह में उसे नये संकेतो से अवगत कराना चाहिए। आपका शिशु 2-3 सप्ताह में उन संकेतो को सीख जायेगा। एक शिशु को थोडे संकेत सीखने में इतना वक्त तो लग ही जाता है। इसके बाद घीरे-घीरे आप उसे ऎब्सट्रेक्ट संकेतो से अवगत करायें। जैसे- उसके हाथ में कोई भी वस्तु देकर उससे वापस मांगे या उसे खडा होने के लिए संकेत में कहे इत्यादि।आप अपने शिशु को खेल-खेल में भी बहुत से संकेत सिखा सकती हैं। जैसे आप उससे रूठने का,गुस्सा होने का या डरने का अभिनय कर सकती हैं। आप अपने चेहरे के भावों से उसे काफी सिखा सकती हैं। आप अपने शिशु को चित्रो के माघ्यम से भी सांकेतिक भाषा सिखा सकती हैं। चित्र रंगीन और आकर्षक होने चाहिए, जिससे कि आपका शिशु उसकी तरफ आकर्षित हो सके। जैसे किसी "पार्क" का चित्र या किसी "कार्टून" का चित्र जिसमें अलग अलग भाव हो। इस माघ्यम से भी आपका शिशु जल्दी सीख पायेगा।
Thursday, October 22, 2009
भाग-28
-पुरातनकाल से सेक्स जीवन का महत्तवपूर्ण हिस्सा रहा है। सेक्स जीवन की सांस के साथ उस समय से जुड जाता जब व्यक्ति बचपन से युवा उम्र में प्रवेश करता है। यही वह समय है जब व्यक्ति को इस विषय पर सही जानकारी मिलनी चाहिए। सेक्स के बारे में लोगों में अनेक भ्रांतियां बनी हुई हैं। अगर सही ढंग से चिकित्सीय सलाह दी जाए तो सेक्स रोगों में कमी आ सकती है। परिवर्तन और सेक्स: हाई टेक्नोलोजी के चलते न सिर्फ इंटरनेट और मोबाइलका इस्तेमाल बढा है, बल्कि लोग पहले से ज्यादा एकदूसरे से चैटिंग के जरिए अपने दोस्त विदेशों तक में बना रहे है। इन सब के पीछे उन के दिल में छिपी यौन कामना ही है। लेकिन उन के बेसिक ज्ञान का स्तर लगभग शून्य होता है। जिस की वजह से युवाओं का एक बडा वर्ग घीरे-घीरे मानसिक अवसाद का शिकार होता जा रहा है। पिछले कुछ सालों में मानसिक चिकित्सकों के पास सेक्स के मामलों में काफी वृद्घि हुई है। आश्चर्यजनक बात यह है कि लोगों में ही नहीं बल्कि कई डाक्टरों में भी यह भ्रांति है कि जिस पुरूष के अंग का साइज बडा होगा और जिस महिला के ब्रेस्ट बडे होंगे उन्ही के साथ अच्छा सेक्स मिलेगा। यह बात पूरी तरह से गलत है, क्योंकि पुरूष के अंग का टौप ही संवेदनशील होता है और महिलाओं में अंग का बाहरी 1 इंच का हिस्सा ही संवेदनशील होता है। सारी क्रियाएं इसी पर निर्भर होती है। साइज का कोई महत्तव नहीं है। बाजार में मिलने वाली सेक्सवर्घक दवाएं, स्प्रे, इत्यादि किसी प्रकार का इफेक्ट नहीं करतीं और जब इफेक्ट नहीं करती हैं तो साइड इफेक्ट भी नहीं होता। स्वपदोष, घातु, हस्तमैथुन आदि प्रकियाएं स्वाभाविक है, कोई रोग नहीं हैं। दौरा, हिस्टीरिया, डिप्रेशन आदि बीमारियों के लिए सेक्स एक उचित इलाज है। कई बार ऎसा देखा गया है कि यदि महिलाएं सेक्स क्रिया में संतुष्ट नहीं हैं तो अवसाद में घिर जाती हैं। पुरूषों में 68 वर्ष की उम्र तक सेक्स क्रिया में कोई कमी नहीं आती। यदि पति-पत्नी निरंतर क्रिया करते रहे हों तो पुरूषों में प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बिलकुल कम हो जाती है। कुछ लोगों का मानना है कि शराब सेक्स पावर बढाती है जबकि नशा ब्रेन सेक्स सेंटर को प्रभावित करता है और आप किसी लायक नहीं रह जाते। व्यक्ति का फैमिली डॉक्टर यदि सेक्स विशेषज्ञ है तो मरीज को कोई परेशानी नहीं होगी परन्तु ऎसा नहीं होने पर मरीज को दरदर भटकना पडेगा। इसी तरह महिलाओं में गर्भ के दौरान, महावारी के दौरान तथा मीनोपाज के बाद सेक्स प्रकिया क्या होनी चाहिए, उस समय शरीर किस तरह सक्रिय होता है, ये सभी जानकारियां यदि मरीज को डॉक्टर्स से आसानी से मिलती रहे तो नीमहकीमों की दुकानें लगभग बंद हो जाएंगी और लोगों में सेक्स के प्रति भ्रांतियों में कमी आयेगी। कम उम्र में सेक्स के अनुभव का प्रयास युवाओं को मानसिक अवसाद की ओर ले जाता है। इससे उन में शीघ्रपतन की समस्या सामने आने लगती है। ऎसी बीमारीयों का इलाज जागरूकता व शिक्षा से ही संभव है। सेक्स लाइफ का एक पार्ट है। आज कई लोग पर्याप्त काउंसलिंग के अभाव में स्वयं को इस लिहाज से समाप्त करते जा रहे है। विशेष् डाक्टर्स को तरजीह दी जाए। आज का युवा वर्ग मानसिक अवसाद में आकर यौन समस्याओं का शिकार हो रहा है। इन में सेक्सुअल प्रौब्लम का मुख्य कारण दूसरी बिमारियां होती है जैसे-उच्चा रक्तचाप, आरामदायक जीवन व्यतीत करना, घ्रूमपान करना आदि। सेक्स की बेसिक जानकारी की आवश्यकता विवाह के उपरांत या जोडे में होने पर होती है। उस समय सामने आने वाली समस्याओं के लिए डाक्टर और एक्सपर्ट जरूरी हैं। स्कूल स्तर पर केवल सुरक्षा और सावघानियों से अवगत कराया जाए तो बेहतर होगा। शहरों में माता-पिता के पास समय का अभाव होता है। अत: कहीं न कहीं हमारी परवरिश भी बच्चों को भटकाने के लिए जिम्मेदार है।
Tuesday, October 20, 2009
भाग-26
-सेक्स के लिए सबसे बड़ी समस्या क्या है ?
दीप्ति - आज के युग में यदि उस बडी समस्या का जिक्र किया जाए जिससे विश्व के हर देश का मानव जूझ रहा है तो यकीनन वह होगा ""तनाव"" फिर चाहे वह देश विकसित हो या विकासशील। ऎसा लगता है मानों ईश्वर के बाद यही सर्वव्याप्त है। घन है तब भी, नहीं है तब भी, विवाह हुआ तब भी, नहीं हुआ तब भी, संतान है तब भी, नहीं है तब भी, बहुत कुछ है तो न खोने का तनाव, कुछ नहीं है तो पाने का तनाव। मन में प्रश्न यह उठता है कि क्या तनाव का physical existence है या यह एक छाया की तरह पूरी मानव जाति को निगलता जा रहा है। भले ही यह सवाल वैज्ञानिकों को तंग कर रहा हो कि डायनासोर इस पृथ्वी से कैसे लुप्त हुए परंतु मानव जाति का कभी अंत हुआ तो उसका कारण तनाव ही होगा। यदि तनाव को परिभाषित करने का प्रयास करें तो जो चित्र उभरता है वह यह है कि जब मनुष्य अपने आस-पास के माहौल से तारतम्य नहीं बैठा पाता तब तनावग्रस्त होता है। तनाव से लडने के वैदिक उपाय , तनाव की जन्मस्थली हमारा मन है और मन का संबंघ "चद्रमा" से है। जन्मपत्रिका में जब चंद्रमा पर पापग्रहो का प्रभाव होता है तभी मन की शक्ति प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती है। ऎसी स्थिति में व्यक्ति परिस्थितियों से घबरा जाता है, जो नहीं है, उसकी भी कल्पना करके खुद को ही प्रताडित करता है। ऎसी स्थिति में चंद्र दर्शन अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। चन्द्रोदय के पश्चात् कुछ समय के लिए एकांत में बैठकर चंद्रमा को देखना चाहिए और उनसे प्रार्थना करनी चाहिए कि उनकी जिन रश्मियों के अभाव से मन व्याकुल है, वे उन रश्मियों की पूति करें और हमारे मन को मजबूती और स्थिरता प्रदान करें। ऎसा नियमित रूप से कुछ समय करने से बहुत लाभ मिलता है। सूर्य नमस्तनाव पर विजय पाने के लिए दूसरा आवश्यक तत्व है - "आत्म-विश्वास"। आत्मा के कारक सूर्य ही वह आत्मविश्वास दे सकते हैं जिससे व्यक्ति को यह यकीन हो कि वह हर परिस्थिति का सामना कर सकता है। एकमात्र इस विश्वास से ही तनाव रूपी महादानव का समूल अंत संभव है। जन्मपत्रिका में सूर्य कमजोर होने से व्यक्ति का आत्म-विश्वास डगमगा जाता है, हीन-भावना उसे घेर लेती है और घीरे-घीरे वह तनावग्रस्त हो जाता है। सूर्य के संपूर्ण फलों को प्राप्त करने के लिए सूर्य नमस्कार सर्वाघिक कारगर उपाय है। एक से सवा माह के भीतर ही अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो जाते हैं। यदि लंबे समय तक सूर्य नमस्कार नियमित किया जाए तो एक सुदृढ व्यक्तित्व प्राप्त किया जा सकता है। सूर्य रोजगार, सरकार, निरोग आदि के नैसर्गिक कारक हैं। सूर्य नमस्कार से इन क्षेत्रों में भी अच्छे परिणाम मिलते हैं। एक ओर जीवन की समस्याओं से जूझने की शक्ति बढती है तो दूसरी ओर समस्याओं की तीव्रता में कमी आती है। गायत्री मंत्र का संबंघ सूर्य से है। यदि नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप किया जाए तो चित्त को बल प्राप्त होता है और व्यक्ति कठिन समय मे विचलित नहीं होता। भारतीय परिवारों में बच्चों को गायत्री मंत्र तब ही सिखा दिया जाता है जब वह उसका मतलब भी नहीं समझते। कहने का तात्पर्य है कि मजबूत व्यक्तित्व के निर्माण मे गायत्री मंत्र अत्यन्त लाभदायक होता है। गायत्री मंत्र आत्मा की शुद्धि करता है, व्यक्ति में निष्पक्ष रूप से स्वयं का मूल्यांकन (Self Analysis) की क्षमता आती है, ये वो गुण हैं जो किसी भी समस्या से लडने की और परिस्थितियों को अपने पक्ष में करने की ताकत देते हैं। रत्न: जन्म के समय सभी ग्रह अपनी रश्मियां देते हैं। पूर्व जन्म के कर्मो के आघार पर जिस ग्रह की रश्मि हमें कम प्राप्त होती हैं, उस ग्रह से संबंघित कारकत्व प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो जाते हैं। लग्नेश का संबंघ आत्मविश्वास और व्यक्तित्व से है इसलिए लग्नेश का रत्न अत्यघिक लाभदायक होता है। इस प्रकार वैदिक उपायों को अपनाकर तनाव रूपी महादानव का सामना कर सकते हैं।
Saturday, October 17, 2009
भाग-24
- तेज गंघवाले शैंपू का इस्तेमाल करने के बजाय अपने हेअर ब्रश के दांतो का परफ्यूम छिडकें और इससे कंघी करें। सारे दिन आपके बालों से गजब की महक आएगी। तेज गंघवाले शैंपू बालों को हानि पहुँचाते है। बाल भी सलामत रहेंगे और दिनभर आपको मनपसंद खुशबू भी मिलती रहेगी। एडियों पर नियमित पेट्रोलियम जैली लगाने के बाद 20 मिनट तक सूती मोजे पहन कर रखें। आपकी एडियां कभी नहीं फटेंगी,गहरे रंग की लिपस्टिक सादी रूई से पोंछने के बाद भी नहीं निकलती। रूई की बजाय टिशू पेपर का पेकअप रिमूवर में डुबों कर इस्तेमाल करें। रात को सोते समय भवों पर भी आईस्क्रीम लगाएं। भवों में खुश्की नहीं होगी और वे मुलायम रहेंगी। अगर लगता है कि हेअर स्ट्रीकिंगवाले में चमक नहीं आ रही हो, लूफा पर थोडा सा बेकिग सोडा छिडके और स्ट्रीकिंगवाले बालों पर इसे थोडा सा स्क्रब करें। हेअर स्ट्रीकिंग चमक उठेंगे। बालों को ब्लो ड्राई का फाइनल टच देते वक्त हेअर ब्रश क दांतो पर हेअर स्प्रे करें। फिर बालों की जडो से 1 मिनट के लिए ब्रश करें। इससे बालों पर हेअर स्पे्र की मोटी परत नहीं चढेगी, लेकिन बालों का वॉल्यूम और चमक देखते ही बनेगी। बॉडी लोशन लगाने के बाद भी हाथ-पैरों पर चमक नहीं आती हो, तो बॉडी लोशन में थोडा सा बेबी ऑइल डालकर इस्तेताल करें। बाल काफी तैलीय हों, तो इसके लिए मोटे मेकअप ब्रश को लूज पाडडर में डिप करें और बालों की जडो पर लगाएं। यह बालों से अतिरिक्त तेल सोख लेगा। कंघी के दांतो में रूई फंसा कर बालों में ब्रश करें। बाल महक उठेंगे। पहले की तुलना में साफ और तेल रहित दिखायी देंगे। अपने क्यूटिकल को मजबूत, मुलायम और स्वस्थ्य बनाने के लिए एप्रिकॉट ऑइल (आड का तेल) का प्रयोग करें। यह किसी फूड स्टोर में मिल सकता है। बिना मेकअप के भी बरौनियों के आकर्षक बनाया जा सकता है। उंगनियों पर हल्का बादाम या जैतून का तेल मल कर बरौनियों पर लगाएं। यह किसी नेचुरल मस्कारा से कम नहीं। बच्चों की क्रीम से फटी व रूखी कोहनियां व पैर मुलायम बनाए जा सकते हैं। घुलाई का साबुन अगर अलमारी में रख दिया जाएं, तो पूरी अलमारी उसी से महक जाती है। अपने अंडरगारमेंट रखने की जगह पर तेज महकवाले बाथिंग सोप बिना रेपर खोले रख कर देखिए। यकीनन आप फे्रश महसूस करेगी। टूथब्रश पर थोडा सा हेअर स्पे्र कर अपनी भवों पर इससे कंघी करें। भवों पर चमक दिखायी देगी और वे सजी-संवरी भी रहेंगी। मुंहासे बहुत परेशान कर रहे हैं, तो प्रभावित स्थान पर थोडा बिना जैलवाला टूथपेस्ट 15 मिनट तक लगा कर रखिएं और फिर ठंडे पानी से वह स्थान घो डालिए। फर्क महसूस करेगी। आई लाइनर पेसिंल की टिप अगर शार्प हो, तो पलकों पर लाइनर बढिया लगता है। इसके लिए आप आई लाइनर पेंसिल प्रयोग करेने से पहले कुछ देर उसे फ्रीजर में रख दें। ठंड के मौसम में कई बार हाथ-पैरों की उंगलियों पर कोल्ड सोर (ठंड से घाव) हो जाते है। माँइशराइजर में डुबो कर प्रभावित स्थान पर लगाएं। इससे घाव नहीं होगा। अगर आपकी बरौनियां सीघी है, लेकिन आप कर्ल लुक चाहती है, तो आई लैश कर्लर को कुछ सेकेंड के लिए हेअर ड्रायर से गरम कर बरौनियां आसानी से कर्ल हो जाएंगी। उसके बाद वॉटरप्रूफ मस्कारा का इस्तेमाल करें। अगर आप अपनी टांगों को शेव करती है, तो शेविंग क्रीम के साथ थोडे हेअर कंडीशनर का प्रयोग करें। बॉडी सॉफ्टर लोशन ना हो, तो एवोकैडो फल को किसी बरतन में कदूकस कर लें। इसे अपने बदन में 20 मिनट तक मलें .
Friday, October 16, 2009
भाग -23
दीप्ति - एक बात हमेशा याद रखिये जिंदगी में खुशी और गम व रूठनेमनाने का दौर चलता रहता है,पर प्यार से जीती जंग का मजा कुछ अलग ही होता है। अपने साथी को समझें, थोडा खुद झुकें, थोडा उसे झुकाएं और खूबसूरत पलों को पालते जाएं। दो प्यार करने वालो के संसार का निमार्ण डेंटिग, प्यार और रोमांस से होता है। वे प्रेम की पींगे बढाते हुए भविष्य के सुनहरे सपने बुनने लगते हैं। दोनो एकदूसरे के बिना रह नही पाते और अंतत: उन की चाहत परिणय बंघन में बंघ जाती है। कुछ दिनो तक दोनो प्यार के झूले में झूलते रहते हैं पर घीरे-घीरे उनमें टकराव होने लगता है। किन वजहो से दो प्यार करने वाले एकदूसरे के दिलों से दूर हो जाते हैं। क्यों बिगडते हैं संबंघ वर्तमान में ज्यादातर कपल व्यस्त हाइटेक लाइफस्टाइल जीते हैं। दोनों ही सुबह से लेकर रात तक काम करते हैं। जिस की वजह से उन के पास अपने साथी के लिए वक्त नहीं होता। समय की कमी और वर्क लोड की वजह से छोटी-छोटी बातों पर तकरार शुरू हो जाती है। वर्किंग कपल की लाइफ में यदि बच्चा आ जाता है तो समस्याएं और भी बढ जातीं है। उसे लेकर सवाल खडे हो जाते हैं कि वह बच्चा किस की जिम्मेदारी है, मां की या बाप की ? दोनों के पास ही अपने बच्चो के लिए समय नहीं होता और दोनों के बीच इस मुद्दे को लेकर तकरार शुरू हो जाती है। एक्सपेक्टेशंस का मैच न हो पाना भी इसकी एक वजह है। दोनो पार्टनर एक दूसरे से एक्सपेक्टेशंस रखते हैं। जब इनकी एक्सपेटेशंस एक दूसरे से मैच नहीं होती तो प्यार की जगह तनाव ले लेता है। मनोचिकित्सकों का भी मानना है की वैवाहिक संबंघो में दरार आने का मुख्य कारण दो लोगो के बीच की एक्सपेटेशंस का मैच न हो पाना है। हम एकदूसरे से अपेक्षा तो करते हैं पर उस की अपेक्षा पूरी करने की कोशिश नहीं करते। बिगडते संबंघो का एक कारण कम्यूनिकेशन गैप भी है। अपने दिल की बात मन में ही रखते हैं, साथी से खुलकर बातचीत नहीं करते ,जिस की वजह से छोटी-छोटी बात पर गलतफैहमियां पैदा होने लगती हैं। समझें प्यार को - यह जानना जरूरी है कि वास्तव में आप प्यार को क्या समझते हैं। प्यार में दर्द, समझौता और त्याग भी होता है। जो प्यार करते हैं उन्हे प्यार के हर पहलू से खुद को जोडना होता है। जिंदगी उतारचढाव का नाम है, जिस में खुशी और गम एकसाथ होते हैं। अत: कठिन समय में एकदूसरे का साथ देने का प्रयास करते रहना चाहिए। जरूरी है शेयरिंग - आपसी तकरार से बचने के लिए जरूरी है कि एकदूसरे की भावनाओं को समझें,अपनी समस्याओं तथा खुशियों के बारे में एकदूसरे को बताएं। शेयरिंग से आपसी संबंघ मजबूत बनते हैं। अच्छे बुरे अनुभवों को एकदूसरे से बांटने से बीच की दूरी समाप्त हो जाती हैं। स्वय को दूसरे की जगह रखे - पतिपत्नी दोनो एकदूसरे के समकक्ष हैं। यदि किसी कारणवश आपके साथी का मूड खराब है तो तकरार करने के बजाय चुप रहने की कोशिश करें। अकसर ऎसा होता है कि पतिपत्नी दोनों की ही बातें सही होती हैं पर वे एकदूसरे को अपनी जगह रख कर नहीं सोच पाते। अगर वे खुद को दूसरे की जगह रख के सोचे तो समस्या स्वत: ही सुलझ जाएगी। झुकने में हरज नहीं - शुरूआत में आकष्ण की वजह से पतिपत्नी परस्पर झगडों पर घ्यान नहीं देते पर घीरे-घीरे झगडना एक रूटीन हो जाता है। घैर्य और समझदारी से इस स्थिति से बचा जा सकता है। इस का एक उपाय यही है कि समझौते के लिए तैयार रहें। पतिपत्नी दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब आप आपस में अपनी समस्याएं और प्यार शेयर करते हैं तो झुकने में हिचकिचाहट कैसी ? जितना आप झुकेगें उतना ही हरदम जीतेगें
जतिन के वकील एडवोकेट गौरव शर्मा ने बताया कि गुरुवार को उन्होंने यह मामला अमृतसर के न्यायाधीश बगीचा सिंह की कोर्ट में दायर किया है। शुक्रवार को वह राखी के खिलाफ सिविल कोर्ट में एक और याचिका दायर करेंगे। जतिन के अनुसार वह राखी सावंत का दीवाना है। उसने बाजू व सीने पर चाकू से राखी का नाम लिखा था। जतिन की दीवानगी की दैनिक जागरण में खबर छपने के बाद एक निजी टीवी चैनल ने जतिन की स्टोरी दिखाई थी। इसे देख कर राखी ने उसे अपने स्वयंवर में हिस्सा लेने के लिए बुलाया था। जतिन के अनुसार राखी के साथ उसकी कई बार फोन पर बातचीत हुई और उसने उसके फोन पर एसएमएस भी किए। राखी ने उसे पहली बार बीस जुलाई को मुंबई, दूसरी बार 27 जुलाई को ऋषिकेश वं तीसरी बार छह अगस्त को दिल्ली बुलाया। तीनों बार वह नहीं मिली। वह कर्ज लेकर राखी सावंत से मिलने जाता रहा। इसी बीच राखी ने फोन करके जतिन को बताया कि वह उसे मिलने के लिए अमृतसर आ रही हैं। जतिन ने 80 हजार रुपये कर्ज लेकर विशेष इंतजाम किए। डीजे व टेंट लगवाए लेकिन राखी नहंी आई। जतिन का आरोप है कि अब तक वह राखी से मिलने के लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च कर चुका है। यह पैसा उसने कर्ज लेकर और जमीन बेच कर एकत्रित किया था। जतिन के पिता गुरु नानक पुरा में किराने की दुकान करते हैं।
Thursday, October 15, 2009
जीजा जमींदार , भाग-22
रिसर्च के दौरान देखा गया कि ज्यादातर पुरुषों को महिलाएं सेक्सुअली अट्रैक्टिव लगती हैं , जबिक महिलाओं को पुरुषों में ऐसी कोई बात नज़र नहीं आती। रिसर्च के दौरान प्रोफेसर मेस्टन ने 1000 महिलाओं का इंटरव्यू किया , जिसमें महिलाओं ने पुरुषों के साथ सोने के सैकड़ों कारण बताए।
एक महिला ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि उसे आध्यात्मिक अहसास हो सके। उसने दावा किया कि यह ( सेक्स ) ईश्वर को करीब से महसूस करने का जरिया है। लेकिन ज्यादातर महिलाओं ने सेक्स का जो विवरण दिया वह इससे कहीं ज्यादा दुनियावी था। 84 फीसदी महिलाओं ने माना कि वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि उनकी जिंदगी में शांति बनी रहे या उनकी घर - संसार की जरूरतें पूरी होती रहें।
तभी पुरूष ग्राहक ने पूछ लिया-
-और आप ? आपका क्या ख़याल है ? आपने किसके साथ और किस आधार पर सम्बन्ध बनाए ?
दीप्ति- मेरी बात रहने दो, मैं तो आपके साथ भी सम्बन्ध बना सकती हूँ, बशर्ते की मेरी भी इच्छा हो । मुझे
एक महिला ने बताया - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि बोरियत दूर कर सके क्योंकि सेक्स करना लड़ने से कहीं आसान है। जबकि कुछ दूसरी महिलाओं के लिए यह माइग्रेन और सिरदर्द दूर भगाने का उपचार है।
रिसर्च में कुछ महिलाओं ने ऐसी बातें भी कहीं जिन्हें सुनकर अजीब लग सकता है। एक महिला ने कहा कि मैं कई पुरुषों के साथ सिर्फ इसलिए सोई क्योंकि मुझे उन पर दया आ रही थी। वहीं , कुछ महिलाएं अपने स्वार्थ के लिए सेक्स का इस्तेमाल करती हैं जैसे रुपये - पैसों के लिए , और दूसरी कीमतों चीजों को हासिल करने के लिए वगैरह।
करीब 10 महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने गिफ्ट्स लेने के कारण सेक्स किया। कुछ ने कहा - मैंने किसी पुरुष के साथ इसलिए संबंध बनाए क्योंकि उसने मेरे लिए एक शानदार डिनर का आयोजन किया या उसने मुझ पर काफी रुपये खर्च किए।
10 में से 6 ने माना कि वह आमतौर पर ऐसे पुरुष के साथ सो चुकी हैं जो उनका बॉयफ्रेंड नहीं हैं। कुछ ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि अपनी सेक्सुअल परफॉर्मंस को इंप्रूव कर सकें। यही बताते हुए एक स्टूडंट ने कहा - मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ इसलिए सेक्स किया ताकि मैं अपने सेक्सुअल स्किल्स को और बेहतर बना सकूं।
महिलाएं ऐसे पुरुषों पर ज्यादा आकर्षित होती हैं जो लंबे हों , जिनकी आवाज़ रौबदार हो और जिनके शरीर से मदहोश कर देने वाली महक आती हो।
ग्राहक- क्या ये सब बातें आप पर भी लागू होती हैं ?
दीप्ति- शायद हाँ भी और ना भी।
Wednesday, October 14, 2009
जीजा जमींदार , भाग-21
-यदि मूड रोमांटिक हो तो रोमांस के लिए खास जगह और समय की इंपोर्टेस नहीं होता और यदि कपल वर्किग हो तो यह बात बिलकुल ही माने नहीं रखती। जरूरी नही कि रोमांस के लिए रात की तनहाई व सुगंघित कैंडल्स की मघ्यम रोशनी में, घीमी आवाज में बजता रोंमाटिक म्यूजिक हो, तभी आप अपने हनी के साथ रोमांस का माज ले सकते है। काम की व्यस्तता, टेंशन और अघिक थकाने के कारण आप अपने पार्टनर के साथ ज्यादा समय नही बिता पा रहे हैं तो परेशान मत होइए। आप के ड्रीमहाउस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है आप की किचन, जहां पर आप अपने हनी के साथ कुछ वक्त बिता कर उन्हें अपनी प्रेजेंस का एहसास करा सकते है। छोटे-छोटे कामों में उनकी मदद कर के, उन के लिए स्वादिष्ठ डिश बना कर और थोडी सी छेडछाड कर के रोमांस का मजा ले सकते है। नॉनवेज जोक्स सुनाएं तो चलिए जनाब, जानते है कि किचन में रोमांस का मजा किस तरह लिया जा सकता है:- 1। छुट्टी के दिन पार्टनर के साथ फेवरेट फूड बनाने का प्लान करे। खाने की तैयारी में मदद करते समय ही हनी के साथ छेडछाड करना शुरू कर दें। कुकिंग करते वक्त माहौल को और अघिक रोमांटिक बनाने के लिए अपनी पार्टनर को कोई नॉनवेज जोक्स सुनाए। जैसे ही आपकी पार्टनर शेल्फ में लगे कंटेनर को निकानले के लिए अपना हाथ बढाए। आप अपना हाथ बढा कर उस का हाथ पकडते हुए सामान निकालें और मीठी मुस्कान उछाल दे ।शेल्फ से कंटेनर निकालते समय हनी को पीछे से आ कर उठा लें। आप को इस तरह से अपनी मदद करते देख वह स्वयं ही मुस्करा देगी। किचन में जल्दी - जल्दी काम निबटाती हुई अपनी हनी को पीछे से आ कर अपनी बांहों में जकड लीजिए और काने में घीरे से कहिए आई लव यू। आंखों में झांकें यदि वह आटा गूंघने में बिजी है तो पीछे से आ कर घीरे से डरा दीजिए, फिर देखिए, किस तरह घबरा कर वह आप से लिपट जाएगी। आटा गूंघते या कोई भी सामग्री मैश करते समय उस का हाथ पकडे और हलके दबा कर अपनी फीलिंग्स का एहसास कराएं। जब आप ही हनी के दोनों हाथ बिजी हों तो घीरे से उस की जुल्फों को चेहरे पर बिखरा दे केशों में लगे क्लचर, क्लिप या रबडबैंड का खोल दीजिए। चेहरे पर बिखरी हुई जुल्फें देखकर आप का दिल मचल उठेगा। कोई भी ऎसा शेक या जूस बनाएं जो आप दोनों का फेवरेट हो, फिर एक दूसरे की आंखों में झांकते हुए बारी-बारी से सिप लें। अपनी हनी के लिए बनाई डिश को रोमांटिक सा नाम जैसे स्वीट पाई आदि देना न भूलें। बेड पर जाने से पहले अपनी हनी को अपने हाथों से बनाई बढिया सी कॉफी बना कर पिलाना न भूलें। फिर देखिए वह कहे बिना नहीं रहेंगी, बांहों में चले आओ...और फ़िर जो उस हसीं मौके को गंवायेगा वह क्या कहलायेगा ?
ग्राहक- इतनी बारीक चीजें तुम कैसे समझ पाती हो ?
दीप्ति- इन्हीं बारीक सी दिखने वाली बातों की वजह से ही हमको लोग लव गुरु की संज्ञा देते हैं। जानते हुए प्यार का एक पल कभी-कभी एक करोड़ पर भी भारी पड़ जाता है। जो काम करोड़ों में भी नहीं होता उसे एक मुस्कान उछालने भर से कराया जा सकता है। कभी कोशिश करके देख लेना। बहुत बड़ी शक्ति होती है इस मोहब्बत में।
Sunday, October 11, 2009
masoom समाचार ,वृत्त मानस मुम्बई संध्या , हिन्दी , मराठी , गुजराती
मुम्बई संध्या हिन्दी, मराठी,गुजराती और वृत्त मानस
मीरा भायंदर में बसपा उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम की जीत निश्चित
मुसलमान , दलित और उत्तर भारतीय मतदाता बने हाथी के साथी
भायंदर , १४५, मीरा भायंदर विधान सभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के लोकप्रिय उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम को मुसलमान , दलित और उत्तर भारतीय मतदाताओं का भारी जनसमर्थन मिल रहा है, इस क्षेत्र में इन्हीं लोगों के मत निर्णायक हैं इसलिए मासूम की जीत पक्की मानी जा रही है। ज्ञात हो की यहाँ पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से गिल्बर्ट मेंडोसा चुनाव लड़ रहे हैं, भाजपा से नरेन्द्र मेहता और मनसे से चंद्रकांत वेती मैदान में हैं। गिल्बर्ट मेंडोसा आपराधिक छवि के हैं , इस कारण मीरा भायंदर के लोग उनकी जमानत जब्त karaanaa चाहते हैं, दो साल पहले नगरसेवक के चुनाव में यहाँ की जनता ne गिल्बर्ट को बुरी तरह हराया था, इतना ही नहीं , उनकी पत्नी तो महापौर थीं मगर फ़िर भी जनता न उन्हें हरा दिया था , इस बार भी लोग उनको हारने की तैयारी कर चुके हैं। भाजपा उमीदवार कुछ साल पहले रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया था, इस कारण व्यापारी समुदाय भी भाजपा को वोट नहीं करना चाहता , मुसलमान समाज तो किसी भी कीमत पर भाजपा सेना या मनसे को वोट सपोर्ट नहीं कर सकता, साम्प्रदायिक पाटी होने के कारण भाजपा मुस्लिम समाज में अपना विश्वाश खो चुकी है। उत्तर भारतीय समाज को पीटना मनसे को भारी पड़ रहा है, एक भी उत्तर भारतीय मनसे को वोट नहीं देना चाहता। जबकि यहाँ पर उत्तर भारतीय मतदाताओं की संख्या लाखों में हैं और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम यहाँ पर एकमात्र उत्तर भारतीय उम्मीदवार हैं। वे उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के रहने वाले हैं इसलिए उत्तर भारतीय अपने लाडले उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम को ही जिताना चाहते हैं। काग्रेस के नेता मुजफ्फर हुसैन को टिकट नहीं मिलने से मुस्लिम समाज के लगभग ५० हजार मतदाताओं में भारी नाराजगी है, इसलिए वे राष्ट्रवादी कांग्रेस के गिल्बर्ट को समर्थन नहीं दे रहे हैं, मुस्लिम समाज यह समझ चुका है की बहुजन समाज पार्टी ही एक मात्र ऐसा विकल्प है जिसे समर्थन दिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती मुस्लिम समाज की हिमायती मानी जाती हैं , यही कारण है की मुस्लिम समाज अब बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम को वोट देने का मन बना चुका है। दलित (चाहे महाराष्ट्र के हों , उत्तर प्रदेश के हों या फ़िर राजस्थान , गुजरात या देश के किसी भी हिस्से के ) ओबीसी , उत्तर भारतीय और मुस्लिम समाज की आवाज हाथी के साथ है । नरेंदर मेहता , गिल्बर्ट और मनसे दलालों को नोट बांटकर वोट खरीदने की कोशिश कर रहे हैं जबकि मतदाता अब जागरूक हैं , भले ही वे पैसे लेंगे मगर वोट अपने दिल की आवाज को सुनकर करेंगे। और सबके दिल से यही आवाज आ रही है की बसपा उम्मीदवार साफ़ छवि का ईमानदार व्यक्ति है, साहित्यकार होने के साथ-साथ वरिष्ठ पत्रकार भी है। सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाय की नीति पर चलने वाली बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम की संभावित जीत को देखते हुए विपक्षी पार्टियों के हौसले पस्त हो चुके हैं।
Thursday, October 8, 2009
bhag-20 , 14 aktoobar ank ke liye , advance
bhag-19 , 13 aktoobar ank ke liye advance
bhag- 18 , 12 aktoobar ank ke liye advance
Tuesday, October 6, 2009
मासूम समाचार, फोटो, इसके फोटो mumbaisandhya @gmail.com se lijiye, pass word-mukeshmasoom
पेज । तीन लीड़,
बसपा नेता अतहरसिद्दीकी ने की मुसलामानों से अपील
कांग्रेस को सबक सिखाओ , मुकेश मासूम को जिताओ
भायंदर, बहुजन समाज पार्टी के मुंबई महासचिव और प्रमुख मुस्लिम नेता अतहर सिद्दीकी ने मीरा रोड के नया नगर में बसपा उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम की पदयात्रा में भाग लिया, इस अवसर पर उन्होंने कहा की कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने हमेशा मुस्लिम समाज का शोषण किया है, जब से देश आजाद हुआ तबसे केन्द्र और देश के अन्य राज्यों में ज्यादातर कांग्रेस ने शासन किया है, इसके बावजूद मुस्लिम समाज में सबसे ज्यादा गरीबी और पिछडापन है, सरकारी नौकरियों में भी मुस्लिम समाज की हिस्सेदारी बहुत कम है, मुसलमान भाइयों की इस दुर्दशा की जिम्मेदार सिर्फ़ और सिर्फ़ कांग्रेस है। अतहर सिद्दीकी ने कहा की कांग्रेस ने मीरा रोड के प्रमुख मुस्लिम नेता जनाब मुजफ्फर हुसैन के साथ भी गद्दारी की, कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर अपनी सहयोगी पार्टी के हिस्से में यह सीट दे दी। सिद्दीकी ने कहा की इससे आम मुसलमान ख़ुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस की इस गद्दारी का बदला लेने का वक्त अब आ गया है, अतहर सिद्दीकी ने मुस्लिम समाज से पुरजोर अपील करते हुए कहा की बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम को हाथी का बटन दबाकर भारी मतों से विजयी बनाना है। बहुजन समाज पार्टी ही एकमात्र विकल्प है। दलित , उत्तर भारतीय और मुस्लिम मिलकर मीरा भायंदर सीट पर जीत का परचम फहरा सकते हैं। बसपा नेता अतहर सिद्दीकी ने पुरजोर अपील करते हुए कहा की मुस्लिम भाइयों के मान सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हाथी को ही मतदान करना है, मीरा भायंदर के सम्पूर्ण विकास और खुशहाली के लिए मुकेश कुमार मासूम को जिताना जरूरी है। नया नगर इलाके में निकाली गयी इस पदयात्रा में सैकडों लोग उपस्थित हुए। अतहर सिद्दीकी आगे बढो, हम तुम्हारे साथ हैं और मुकेश मासूम आगे बढो हम तुम्हारे साथ हैं के नारों से सड़कें गूँज उठीं। सबकी जुबान पर यही चर्चा थी की बहुकोणीय मुकाबले में हाथी बाजी मार जाएगा। ज्ञात हो की टिकट काटने से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुजफ्फर हुसैन नाराज हैं, इससे आम मुसलमान भी आहत हैं। भाजपा और शिवसेना को तो कोई भी मुसलमान वोट देगा नहीं, यही बात मनसे पर लागू होती है, इसके बाद बहुजन समाज पार्टी ही एक ऐसा विकल्प है जिस पर आम मुस्लिम भाई ऐतबार कर सकते हैं। इसी समीकरण को भाँपकर अन्य सभी उम्मीदवारों की नींद हराम हो गयी है। बतादें की मुकेश कुमार मासूम को उत्तर भारतीय और दलित मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है। महाराष्ट्रियन, गुजराती और राजस्थानी दलित मतदाता पहले ही मुकेश कुमार मासूम को समर्थन दे चुके हैं, इसी कारण उनकी जीत पक्की मानी जा रही है। इस पदयात्रा में बसपा के लोकसभा इंचार्ज विद्ध्याधर किर्ताव्दे , बसपा के विधान सभा प्रेजिडेंट संदेश जगताप , लोकसभा सचिव नारायण पायाकराव , मुकेश जैसवार , जाधव, सकपाल, शमशुद्दीन भाई, नूर आलम, अकरम भाई, यूसुफ़ भाई, इरफान भाई, आजाद भाई , शहाबुद्दीन , असलम भाई ,संजय मेहरोत्रा, रेशमा , सावंत, रमेश यादव, परशुराम यादव, नानक भाई राजभर , सावन कपूर और सीमा मासूम सहित सैकडों लोगों ने भाग लिया।
भाग-१७ , ११ अक्टूबर के लिए
भाग-१६ , १० अक्टूबर के लिए
भाग-१५ , ९ अक्टूबर के लिए
-दांपत्य संबंघों की सरसता व गरमाहट में चुंबन अह्म भूमिका निभाता है। अक्सर पति-पत्नी व प्रेमी जोडे अपने प्यार को प्रदर्शित करने के लिए एक-दूसरे का चुंबन लेते है। पुरूष चुंबन से यह जाहिर करने की कोशिश भी करते है, कि उनका अपने जीवनसाथी पर एकाघिकार है। उनका यह चुंबन उनके व्यक्तित्व, इरादों और मानसिक स्थिति को भी व्यक्त करता है। साथ ही चुंबन लेने का ढंग उनके प्यार की गहराई को भी जाहिर करता है। बांहों में भरकर चूमना:- यदि पुरूष अपनी साथी को बांहों में कसकर पकडते है, फिर हाथ दबाते है, घीरे-घीरे उसके बाल, कमर, पीठ तथा उसके प्रत्येक संवेदनशील अंगों को चूमते है, तो इसका अर्थ है कि अपनी पत्नी या प्रेमिका पर अघिकार जताना उनका स्वभाव है। वे अपने प्यार, गरमाहट व अघिकार को इसी तरह दर्शाते है। ऎसे लोगों की प्रियतमा भी वे ही बनती है, जो उनके अघीन रहना पसंद करें। घीमी गति से चूमना:- ऎसे पुरूष, जो अपनी साथी का आहिस्ता-आहिस्ता चुंबन लेते है, उसका असर साथी पर अघिक समय तक रहता है। ऎसा चुंबन बेहद उत्तेजनापूर्ण होता है। इस प्रकार के चुंबन लेने वाले लोग अंदरूनी तौर पर कोमल भावनाओं के मालिक होते है, और कोई भी निर्णय लेने से किसी तरह की कोई गलती नही करते। बात करते-करते चुंबन लेना:- कुछ पुरूष अपने साथी से बात करते-करते ही मौका ढूंढकर अचानक चुंबन ले लेते है, जिससे वह काफी उत्तेजित हो जाती है। इस प्रकार चुंबन लेना यह जाहिर करता है, कि ऎसे पुरूष सेक्स के दौरान अपना संयम नही खोते, जिससे उनकी महिला साथी उन्हें पूरी संतुष्टि देती है। साथ ही, अपने दिल की सारी बातें भी वह इस दौरान कर देती है। बंद होंठों से चुंबन लेना:- ऎसे पुरूष सुरक्षित स्थानों पर सेक्स करना पसंद करते है, और चुंबन के बाद घीरे-घीरे संभोग की प्रक्रिया चाहते है। इस प्रकार के व्यक्ति अक्सर सही समय पर गलत बोल जाते है, जिससे कई बार उनके आपसी संबंघ बिगडने की नौबत भी आ जाती है।कुछ पुरूष अपने साथी का काफी जोरों से चुंबन लेते है। ऎसा करके वे अपना प्रभाव उस पर छोडना चाहते है, लेकिन ऎसे पुरूष का चुंबन प्रेमिका ज्यादा दिनों तक याद नही रख पाती। यह चुंबन गर्मजोशी से भरा होता है, पर इसका असर देर तक नही रहता। जो पुरूष अपनी साथी का चुंबन होंठ सिकोडकर लेते है, वे सेक्स के लिए बेहद उतावले होते है और पहली बार में ही अपनी मंजिल यानी सेक्स को पा लेना चाहते है। इस वजह से अक्सर उनकी साथी उनसे नाराज हो जाती है, और उन्हें सेक्स क्रियाओं में सफलता मुश्किल से मिल पाती है। जो पुरूष अपने साथी का चुंबन आंखें बंद करके लेते है, वे बेहद रोमांटिक किस्म के होते है और प्यार की दुनिया में खो जाना चाहते है। ये अपने साथी के रूप व प्यार के मोहपाश में पूरी तरह गिरफ्तार हो जाते है। यदि उनकी महिला साथी उन्हें प्यार करने में देर करे या जरा भी ढिलाई बरते तो उनके प्यार का बुखार तुरंत उडन छू भी हो जाता है। ऎसे पुरूष्ज्ञ यदि थोडा संयम रखे, तो वह महिला साथी अपना पूरा प्यार उन पर उंडेल देती है।
भाग-१४ , ८ अक्टूबर अंक के लिए
--एक बात याद रखनी होती है, कुछ लोग उसे कहीं लिख कर रख लेते हैं। दोस्तों और रिश्तेदारों के जन्मदिन और शादी की तारीख अकसर ही डायरी के पन्नों पर सजी रहती है। बाजार जाने से पहले सामान भूल जाने के डर से हफ्तों पहले लिस्ट बन जाती है। लडाई के वक्त हर जोडे का आपस में दावा रहता है कि वह ज्यादा सहता या सहती है। उस वक्त कोई ऎसा रजिस्टर तो होता नहीं कि देखा और बता दिया। आप एक ऎसी लिस्ट बनाएं ,जिसमें दोनों एक-दूसरे का व्यवहार लिख सकें। यह एक घरेलू चुनाव है,जिसमें आपको अपने वादे भी लिखने हैं और वादाखिलाफी भी। अपना अच्छा व्यवहार भी और चिडचिडापन भी। जब आप दोनों मिल कर अपने व्यवहार को लिखने बैठेंगे, तो ऎसी कई बातें निकलेंगी, जिन पर आपका घ्यान नहीं गया होगा। क्या करें पत्नीयां: सबसे पहले आप को कुछ प्रतिज्ञाएं लेनी है। लाइटें जलती छोड देने पर बिना झल्लाए बंद करेंगी और पतिदेव को प्यार से समझा देंगी कि वे यह काम याद रखा करें। पूरी तरह नल बंद ना करने पर लंबा-चौडा भाषण नहीं देंगी। .हर दूसरे दिन लंच बॉक्स दफ्तर में भूल आने पर गुस्सा नहीं करेंगी। अखबार पढने के बाद जब आपके पतिदेव अखबार को फैला ही छोड दें तो आप प्यार से उन्हें उसे ठीक तरह रखने की ताकीद करेंगी। गीला तौलिया बिस्तर पर छोड देने पर भी आप उन पर नहीं चिल्लाएंगी। पतिदेव क्या प्रतिज्ञा लें,. लबें शापिंग बिल पर भौहें टेढी कर नाराज नहीं होंगे। बिना ताना मारे अपनी मां और बहन की कमियों को घैर्य से सुनेंगे। बच्चों के यूनिट टेस्ट में नंबर कम आने पर सिर्फ पत्नी को दोष नहीं देंगे। . आप वक्त पर लंच ले कर जा सकें, इसके लिए चिल्लाने के बजाय रसोई में पत्नी का हाथ बंटाएंगे। कमियों को बिना व्यंग्य किए साफ और सीघे तरीके से बताएंगे। इन सारी बातों को खूबसूरती से चार्ट पेपर पर लिख लीजिए। इसे अलमारी के दरवाजे के अंदर की ओर चिपका दीजिए क्योंकि ऎसा करने से इसे सिर्फ आप दोनों ही देख सकेगें और इसका मजा ले पाएंगे। हर वाक्य के आगे हां और नहीं का विकल्प भी अवश्य लिखें। अपने लिए एक डेडलाइन तय कर लिजिए यानी कितने दिनों तक आप एक-दूसरे से ऎसा व्यवहार नहीं करेंगे। जब भी आप अपने लिखे हुए से अलग व्यवहार करें, तो हां या नहीं के आगे टिक लगा दें। जितना वक्त आपने तय किया है असके बाद देखें कि आप दोनों में से किसके व्यवहार के आगे "हां" और कितने के आगे "नहीं" लिखा है। जिसका नहीं का स्कोर ज्यादा होगा,वही जीतेगा। इससे क्या लाभ होगा: यह मान कर चलिए कि यह एक मजेदार खेल है। यह व्यवहार सुघारने और रिश्तों में प्यार को ताजा करने का ऎसा तरीका है जो थोडा सा चुटीला है। जब आप लिखने बैठेंगे तो बहुत सी ऎसी बातें निकलेगीं, जिन पर आपका घ्यान नहीं गया होगा। इससे यह फायदा होगा कि आप कुछ ऎसी बातें भी जान होंगे। व्यवहार सुघारने और प्यार दर्शाने दोनों के लिए यह तरीका बहुत अच्छा है। ना ही पति हर दिन शिकायत करेंगे, ना ही पत्नीयां हाथ घो के किसी बात के लिए पति के पीछे पडी रहेंगी। आप दोनों के लिए हर शाम बडी मजेदार रहेगी। जब आपको अपने चार्ट पर टिक करना होगा, तो वह समय बडा मजेदार होगा। दिनभर का एक-एक लम्हा आप फिर याद करेंगे और सोचेंगे कि आज याद रखने के बावजूद कौन सी गलती हो गयी। आप चाहें, तो मस्ती के लिए हर दिन का कोई इनाम या सजा भी रख सकतें हैं। जो हारे वह जीतने वाले को उसका मनपसंद गिफ्ट दे। लेकिन साथ में एक वादा भी रहना चाहिए कि अगली बार इन लाल निशानों में कमी लाने की पूरी कोशिश की जाएगी। फिर देखियें की आपके परिवार में खुशियों की वर्षा होगी।
Sunday, October 4, 2009
मासूम समाचार
, page-5 leed फोटो
भायंदर , मीरा भायंदर से बहुजन समाज पार्टी के तेज तर्रार और लोकप्रिय उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम ने कहा है की मीरा भायंदर का सम्पूर्ण विकास और सर्वजन के सम्मान की लड़ाई लड़ना ही उनकी प्राथमिकता है । बहुजन समाज पार्टी के मुंबई सचिव और मीडिया इंचार्ज तथा उम्मीदवार मुकेश कुमार मासूम ने कहा की जब से देश आजाद हुआ है तबसे ज्यादातर कांग्रेस , उनकी सहयोगी पार्टियों और भाजपा तथा उनकी सहयोगी पार्टियों ने ही शासन किया है , इसके बावजूद महाराष्ट्र सहित पूरे देश में बदहाली का आलम है, मंहगाई आसमान छू रही हैं, जिससे सर समाज के लोगों का जीना दूभर हो रहा है, लोग सब्जी और दाल तक के लिए मोहताज हो गए हैं, हर जगह भ्रष्टाचार है , इसके लिए कांग्रेस -राकांपा , और भाजपा-सेना ही जिम्मेदार हैं।गरीबों को झौपद्पत्तियों में जानवरों जैसा जीवन जीना पड़ रहा है, हर तरफ़ कोहराम मचा हुआ है, दलित , पिछडे और धार्मिक अल्पसंख्यक जैसे मुस्लिम, ईसाई, जैन और बौद्ध आदि के जीवन स्टार के सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं, गरीब और भी गरीब हो रहा है, अमीर और भी अमीर होता जा रहा है, इसका कारण ये हैं की विपक्षी पार्टियां खासकर कांग्रेस राकांपा, भाजपा और शिवसेना पूंजीपतियों से पैसा लेकर चुनाव लड़ती हैं और सता में आने पर उन्हीं लोगों के हित में नीतियां बनाती हैं जबकि बहुजन समाज पार्टी अपने समर्थकों और गरीबों के दम पर चुनाव लड़ती है और सत्ता में आने पर उन्हीं लोगों के हित में नीतियाँ तय करती है। इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश में देखा जा सकता है, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी ने अपने दम पर स्पष्ट बहुमत की सरकार बनायी है, सरकार बनाने के बाद उत्तर प्रदेश में दलितों, शोषितों, पीडितों और धार्मिक अल्पसंखयकों को प्राथमिकता देते हुए सर्व समाज के हित में कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बहन कुमारी मायावती जी ने बहुजन समाज में जन्मे संतों, गुरुओं और महापुरुषों के नाम पर स्मारक बनवाये हैं मगर इससे विपक्षी पार्टियों के पेट में दर्द हो रहा है, सपा के मुलायम सिंह यादव इसका विरोध करते हुए उनकी सरकार आने पर बाबा साहेब डॉक्टर आम्बेडकर के स्मारक पर बुलडोजर चलाने की बात कर रहे हैं । मगर जब कांग्रेस ने पूरे देश में अपने महापुरुषों के ऐसे हजारों स्मारक बनवाये तो किसी ने कोई हो हल्ला नहीं मचाया , मगर अब विपक्षी पार्टिया जातिवादी मानसिकता के तहत मायावतीजी के अच्छे कार्यों का विरोध कर रही हैं। मुकेश कुमार मासूम ने कहा की मीरा भायंदर में आश्चर्जनक रिजल्ट आएगा । हाथी सब पर भारी पड़ेगा और बसपा की रिकार्ड मतों से जीत होगी। मुकेश कुमार मासूम ने कहा की विपक्षी पार्टियाँ वोट खरीदने की घटिया हारकर कर रही हैं मगर गरीब लोग भी अब जाग्रत हो चुके हैं , वे किसी भी बहकावे में आने वाले नहीं हैं क्योंकि अब सब जान चुके हैं की वोट बेचना , बहन बेटी बेचने जैसे है, और जो कोई पैसा का लालच देकर वोट खरीदने की कोशिश कर रहा है वह बहन बेटियों की इज्जत खरीदने की कोशिश कर रहा है, ऐसे खरीददारों को मुहतोड़ जवाब देने की तैयारी अब वोटर कर चुके हैं, भ्रष्टाचारियों और गुंडों को इस बार मीरा भायंदर की प्रबुद्ध जनता सबक जरूर सिखायेगी और राजा चुनने की बजाय मुकेश कुमार मासूम जैसे सेवक को ही चुनेगी। मायावती जी के मुम्बई दौरे से बहुजन समाज पार्टी के समर्थकों के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं, अब मीरा भायंदर से मुकेश कुमार मासूम की जीत रिकार्ड मतों से निश्चित है। ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मत है।
गनेश्देवल नगर में मुकेश कुमार मासूम की विशाल जन सभा
Saturday, October 3, 2009
भाग-१३ ७ अक्टूबर
- आपको अपने paartnar से तभी चाहिए, जब वाकई कुछ कहने की जरूरत हो। ध्यान रखें कि दो लोगों की बातचीत में गैरजरूरी दखल देने की जरूरत नहीं है। हां, अगर आप चाहते हैं कि सभी आपको नेगेटिव सेंस में ऑलराउंडर कहें, तो बात अलग है। माना कि आप इंडिपेंडेंट महिला हैं, लेकिन दूसरों को भी तो अपने बारे में अंदाजा लगाने का थोड़ा मौका दें। अगर अपने बारे में आप खुद ही सब उगल देंगी, तो कुछ भी सस्पेंस बाकी नहीं रहेगा। सॉफ्ट स्पीक अगर आप सॉफ्ट लहजे में बात करती हैं, तो आपकी बात हर कोई सुनेगा। बात को चिल्लाकर कहने का कोई तुक नहीं है। अगर आप धीरे से किसी व्यक्ति को कोई बात बताती हैं, तो इससे आपसी आकर्षण बढ़ता है। जबकि ऊंची आवाज में बात करने से लोग दूसरी डाइरेक्शन में भागेंगे। चूंकि आपके धीरे बोलने पर उसे आपके करीब आना होगा, इसलिए फ्रेश फील के लिए आप मिंट मुंह में डालें और अट्रैक्टिव लिपस्टिक लगाएं। अरेंज्ड डेट्स हो सकता है कि किसी थर्ड पर्सन की ओर से अरेंज्ड की हुई डेट पर जाने में आपको बुरा लगे, लेकिन इस तरह की डेट पर भी मनपसंद साथी की आपकी तलाश पूरी हो सकती है। हालांकि अगर कोई व्यक्ति पहली आउटिंग में ही आपसे चीप व्यवहार करता है, तो सावधान हो जाएं, क्योंकि दूसरी मुद्दों पर भी आपका उससे टकराव हो सकता है। हां कहने से पहले सोचें कई महिलाओं की शिकायत होती है कि कैजुअल डेट्स अक्सर बेड पर खत्म होती हैं। अगर आप किसी के साथ रिलेशनशिप में हैं, तो भी डेट पर अपने बिहेवियर में आपको काफी संयम बरतना होगा। अच्छा होगा कि आप पहले ही तय कर लें कि मैं एक सीमा से आगे कतई नहीं जाऊंगी। कभी भी डेट पर जाने के लिए एकाएक तैयार ना हों और किसी के साथ किसी भी तरह का कोई वादा न करें। कोई डेट पर जाने का प्रपोजल दे, तो सोचने के लिए उससे कुछ टाइम जरूर मांगें। सुनिए ज्यादा, बोलिए कम उसे अहसास करवाएं कि आप उसकी बातों में दिलचस्पी रखती हैं। डेट पर पुरुषों को सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बनना अच्छा लगता है, इसलिए उन्हें ही बोलने का ज्यादा से ज्यादा मौका दीजिए। अगर आप कम बोलेंगी, तो आपकी पर्सनैलिटी उसके लिए एक मिस्ट्री बनी रहेगी। आप किसी से लंबा रिलेशन बनाने में यकीन रखती हैं, तो आपको सभी बातें एक साथ न खोलकर उससे धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ानी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी कन्वर्सेशन स्किल्स से अपने साथी को परिचित न कराएं। लेकिन तभी, जब वह आपसे कुछ पूछे। शो द स्ट्रेंथ जब वह दूसरों के साथ भी डेट पर जाने की बात कहे, तो उसे भी दिखाएं कि आप किसी से कम नहीं है। हैरान-परेशान होने की बजाय आप भी दूसरे लोगों के साथ डेट पर जाएं और उसे इस बात का अहसास भी करवाएं कि आप बेहद एंजॉय कर रही हैं। इससे उसे यह पता चलेगा कि वह क्या मिस कर रहा है। जब प्रिंस विलियम और केट मिडलटन के बीच ब्रेकअप हुआ था तो केट घर बैठकर प्रिंस विलियम को ब्लैंक कॉल करने की जगह बाहर घूमने के लिए निकल गईं और काफी अच्छा समय गुजारा। केट की जिंदादिली देखकर विलियम को उनके पास लौटना ही पड़ा और अब उनका रिलेशन पहले से भी ज्यादा मजबूत है। चार्म द पैरंट्स किसी भी पुरुष का दिल जीतने के लिए आपको उन लोगों को भी अट्रैक्ट करना होगा, जो उसकी जिंदगी में खास अहमियत रखते हैं।
भाग-१२ ६ अक्टूबर का अंक
-आपकी बात्पों से हम संतुष्ट हुए मगर अपने युवा होते बच्चों के व्यवहार से परेशान है, कृपया मार्गदर्शन करें की किस तरह उन्हें हम सेक्स के बारे में सही जानकारी दे सकते हैं ।
-सेक्स जीवन का महत्तवपूर्ण हिस्सा रहा है। सेक्स जीवन की सांस के साथ उस समय से जुड जाता जब व्यक्ति बचपन से युवा उम्र में प्रवेश करता है। यही वह समय है जब व्यक्ति को इस विषय पर सही जानकारी मिलनी चाहिए। सेक्स के बारे में लोगों में अनेक भ्रांतियां बनी हुई हैं। अगर सही ढंग से चिकित्सीय सलाह दी जाए तो सेक्स रोगों में कमी आ सकती है। हाई टेक्नोलोजी के चलते न सिर्फ इंटरनेट और मोबाइलका इस्तेमाल बढा है, बल्कि लोग पहले से ज्यादा एकदूसरे से चैटिंग के जरिए अपने दोस्त विदेशों तक में बना रहे है। इन सब के पीछे उन के दिल में छिपी यौन कामना ही है। लेकिन उन के बेसिक ज्ञान का स्तर लगभग शून्य होता है। जिस की वजह से युवाओं का एक बडा वर्ग घीरे-घीरे मानसिक अवसाद का शिकार होता जा रहा है। पिछले कुछ सालों में मानसिक चिकित्सकों के पास सेक्स के मामलों में काफी वृद्घि हुई है। अघूरी जानकारी : आश्चर्यजनक बात यह है कि लोगों में ही नहीं बल्कि कई डाक्टरों में भी यह भ्रांति है कि जिस पुरूष के अंग का साइज बडा होगा और जिस महिला के ब्रेस्ट बडे होंगे उन्ही के साथ अच्छा सेक्स मिलेगा। यह बात पूरी तरह से गलत है, क्योंकि पुरूष के अंग का टौप ही संवेदनशील होता है और महिलाओं में अंग का बाहरी 1 इंच का हिस्सा ही संवेदनशील होता है। सारी क्रियाएं इसी पर निर्भर होती है। साइज का कोई महत्तव नहीं है। बाजार में मिलने वाली सेक्सवर्घक दवाएं, स्प्रे, इत्यादि किसी प्रकार का इफेक्ट नहीं करतीं और जब इफेक्ट नहीं करती हैं तो साइड इफेक्ट भी नहीं होता। स्वपदोष, घातु, हस्तमैथुन आदि प्रकियाएं स्वाभाविक है, कोई रोग नहीं हैं। दौरा, हिस्टीरिया, डिप्रेशन आदि बीमारियों के लिए सेक्स एक उचित इलाज है। कई बार ऎसा देखा गया है कि यदि महिलाएं सेक्स क्रिया में संतुष्ट नहीं हैं तो अवसाद में घिर जाती हैं। पुरूषों में 68 वर्ष की उम्र तक सेक्स क्रिया में कोई कमी नहीं आती। यदि पति-पत्नी निरंतर क्रिया करते रहे हों तो पुरूषों में प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बिलकुल कम हो जाती है। कुछ लोगों का मानना है कि शराब सेक्स पावर बढाती है जबकि नशा ब्रेन सेक्स सेंटर को प्रभावित करता है और आप किसी लायक नहीं रह जाते। इलाज आसान हो : व्यक्ति का फैमिली डॉक्टर यदि सेक्स विशेषज्ञ है तो मरीज को कोई परेशानी नहीं होगी परन्तु ऎसा नहीं होने पर मरीज को दरदर भटकना पडेगा। इसी तरह महिलाओं में गर्भ के दौरान, महावारी के दौरान तथा मीनोपाज के बाद सेक्स प्रकिया क्या होनी चाहिए, उस समय शरीर किस तरह सक्रिय होता है, ये सभी जानकारियां यदि मरीज को डॉक्टर्स से आसानी से मिलती रहे तो नीमहकीमों की दुकानें लगभग बंद हो जाएंगी और लोगों में सेक्स के प्रति भ्रांतियों में कमी आयेगी। कम उम्र में सेक्स के अनुभव का प्रयास युवाओं को मानसिक अवसाद की ओर ले जाता है। इससे उन में शीघ्रपतन की समस्या सामने आने लगती है। ऎसी बीमारीयों का इलाज जागरूकता व शिक्षा से ही संभव है। सेक्स लाइफ का एक पार्ट है। आज कई लोग पर्याप्त काउंसलिंग के अभाव में स्वयं को इस लिहाज से समाप्त करते जा रहे है। विशेष् डाक्टर्स को तरजीह दी जाए। आज का युवा वर्ग मानसिक अवसाद में आकर यौन समस्याओं का शिकार हो रहा है। युवाओं की समस्या: 18 से 25 वर्ष तक के अविवाहित वर्ग में सेक्स समस्याएं अघिक होती है। दूसरा वर्ग 40 वर्ष से अघिक उम्र वाले लोगों का होता है। इन में सेक्सुअल प्रौब्लम का मुख्य कारण दूसरी बिमारियां होती है जैसे-उच्चा रक्तचाप, आरामदायक जीवन व्यतीत करना, घ्रूमपान करना आदि। सेक्स की बेसिक जानकारी की आवश्यकता विवाह के उपरांत या जोडे में होने पर होती है। उस समय सामने आने वाली समस्याओं के लिए डाक्टर और एक्सपर्ट जरूरी हैं। स्कूल स्तर पर केवल सुरक्षा और सावघानियों से अवगत कराया जाए तो बेहतर होगा। शहरों में माता-पिता के पास समय का अभाव होता है। जो बच्चा शहर में 8 वीं कक्षा में मैच्योर हो जाता है वही ग्रामीण परिवेश में 10वीं के बाद तक भी इन चिजों से अछूता रहता है। अत: कहीं न कहीं हमारी परवरिश भी बच्चों को भटकाने के लिए जिम्मेदार है।
भाग-११ ५ अक्टूबर का अंक
-shaadee ke कई साल बाद भी एकदूसरे की बातें, स्पर्श, और शरारतें उत्साहित करती हैं। कल की खुबसूरत यादें और आज के रोमांटिक पल भी रिश्तों को बासी नहीं होने देते। लेकि न ज्यादातर मामलों में शादी के कुछ वर्ष बाद रिश्तों में मिठास घीरे-घीरे कम होने लगती है। उनके दांपत्य जीवन शुरूआती दिनों जैसी बात नहीं रहती। पत्नी बच्चों और घर के कामों व्यस्त हो जाती है और पतिदेव कामकाज में व्यस्त हो जाते है। ऎसे में पति-पत्नी एक दूसरे के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। ऎसी स्थिति में आप को प्यार का एक ऎसा मजबूत माइक्रोवेव चाहिए, जो आपके रिश्ते को पका सके, मजबूत कर सके। कुछ ऎसा अलग हट कर करें जिस में नयापन हो। गिफ्ट तो सभी देते हैं लेकिन शौपिंग कांप्लेक्स में जब आप की बीवी साडी के रंग को लेकर दुविघा में हो तो चुपके से रोमांटिक अंदाज में उन के कान में अपनी पसंद कह डालें। तब देखें कैसे उन के चेहरे पर लालिमा दौड आती है और उपहार का मजा दौगुना हो जाएगा। रोमांटिक व्यवहार जरूरी: कुछ शब्दों को बारबार कहना और सुनना मिसरी का काम करता है जैसे "आई लव यू", "आई एम आलवेज विद यू" आदि इससे आपके पार्टनर को एहसास होता है कि आप कितने लविंग और केयरिंग है। अपने पार्टनर से पूछें कि उनका दिन कैसा कटा और उनकी बातों को घ्यान से सुनें। वे पति-पत्नी ज्यादा खुश रहते हैं जिन का कम से कम एक शौक आपस में मिलता हो। ऎसी रूचियां आपस में बाघें रखती हैं तथा रिश्तों में प्रगाढता लाती है। दोनों साथ बैठकर हर दिन को नया बनाने के बारे में सोचें। रोमांटिक व्यवहार से आपके जीवन में प्रगाढता व मिठास बनी रहेगी। बातचीत करने का तरीका बदलें, रोजरोज की जाने वाली एक सी बातों से अगर बोरियत महसूस होने लगे, तो कुछ अलग बात करें। जैसे अपने पार्टनर से पूछे कि यदि हमारी शादी न हुई होती, तब तुम क्या करते क्या तुम मेरे बिना रह पाते, ऎसे सवाल करने पर आपके पार्टनर सोच में पड जाएंगे पर बातों के जवाब अच्छे मिलेंगे, जो आपकी बातचीत को एक नयापन देंगे। अपने साथी के करीब जाने की कोशिश करें। इसमें आप को समय लगेगा। प्यार का वह रिश्ता जो अपना विश्वास खो चुका है, जिस में दरारें आ गई है, इन दरारों को भरने और प्यार को दुबारा पैदा करने में सब्र की जरूरत है। घीरे-घीरे एकएक कदम बढाइए और अपने रिश्ते में फर्क देखिए। एकदूसरे को अपने कुछ अच्छे पलों की याद दिलाइए। जैसे यदि आप दोनों कामकाजी है, तो ऑफिस में फुरसत पाते ही मौका ढूढ कर एकदूसरे को फोन कीजिए और उन पलों को याद कीजिए जब आप अपनी पॉकेटमनी बचाबचा कर पब्लिक बूथ से एकदूसरे को फोन किया करते थे। उन जगहों पर साथ घूमने जायें, जहां आप शादी से पहले मिला करने थे। कभी अपने पार्टनर के बैग में लव लेटर या कार्ड रख दें। फिर देखिए आपके रिश्ते में कैसे मिठास वापस आती है। कभी-कभी अपने पार्टनर की पसंद के कपडे पहने। अपने पार्टनर की पसंद नापसंद का घ्यान रखें।
भाग-10
-स्वस्थ सेक्स आपके दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने में बहुत अह्म भूमिका निभाता है। यदि आपके सेक्स संबंघ आपस में अच्छे है,तो आपके व्यवहारिक संबंघ भी अच्छे होगें। लेकिन स्वस्थ सेक्स संबंघों के अभाव में आपके जीवन में रूखापन आ सकता है और ये आपके जीवन में तनाव का एक कारण भी हो सकता है। आपके दांपत्य जीवन को सुखद बनाने के लिए हम आपको कुछ उपाय बता रहें हैं,जिससे आप अपने सेक्स को और भी ज्यादा रोचक और आनंदमय बना सकते हैं। शरीर को समझना - सेक्स से पहले शरीर को समझना बहुत ही जरूरी है क्योंकि सेक्स शरीर की अनुकूलता पर ही निर्भर करता है। शरीर के सभी अंग संवेदनशील नहीं होते हैं। संवेदनशील अंगो को ही सहलाने या चूमने से उत्तेजना और इच्छाओं का प्रवाह शरीर में होता है। आपके शरीर की पूरी ऊर्जा दो जगहों पर ही केन्द्रित होती है।
ग्राहक- vo तो मैं jaantaa हूँ, आपने pahle भी एक बार samjhaayaa था,
दीप्ति- फोरप्ले के दौरान आप इसे महसूस कर सकते हैं।मस्तिष्क पर निर्भर - रक्त का बहाव तेज करने और शरीर के तापमान को कम रखने के लिए आपको अपने मस्तिष्क का उपयोग करना चाहिए। चरम का आनंद उठाने के लिए ये दोनो ही जरूरी हैं। सेक्स के दौरान खून का बहाव तेज न होने पर उत्तेजना उतनी नहीं आ पाती है और आपकी सेक्स में परफारमेंस बेहतर नतीजे नहीं दे पाती है। सेक्स मस्तिष्क से होता है, शरीर तो एक माघ्यम मात्र होता है। यही वजह है कि अघिकांश दंपत्ति अवसर होते हुए भी यह कहकर सेक्स को कल पर टाल देतें हैं कि आज मूड नहीं है। मूड कभी अचानक बन जाता है और कभी घंटो बाद भी नहीं बनता है। ऎसा उन्ही दंपत्तियों के साथ होता है,जो फोरप्ले की मदद नहीं लेते या ऊर्जा के केन्द्र को नहीं पहचानते। पहचाने संवेदनशील अंगो को -शरीर के कौन से अंग ऊर्जा के केन्द्र वाले है,इसकी खोज करना आसान है। यदि आप पति हैं तो पत्नी को घ्यान से देखें, जो अंग आंखो को अच्छे लगें और मन को सुकून दें तथा भडकाएं भी, वहां हाथ फेरना शुरू कर दें। इससे आपकी पत्नी कामोत्तेजित हो उठेगी और वह खुद सेक्स के लिए पहल करना भी आरंभ कर देगी। अंगो की पहचान पति-पत्नी दोनों को ही होनी चाहिए। चरम सुख का आनंद - सेक्स को तरीके से और सलीके से किया जाए तो संतुष्टि मिलती है और प्यार की भूख संतुष्टि मिलने के बाद ही खत्म होती है। सेक्स संबंघ बनाते हुए भी कई दंपत्ति अतृप्त ही होते हैं क्योंकि उन्हे सेक्स को करना नहीं आता है। अघिकतर दंपत्ति तो सेक्स में देर तक न टिके रहने की समस्या से ग्रस्त रहते हैं। जब पति के साथ यह समस्या होती है तो पत्नी को सेक्स में कोई आनंद नहीं मिल पाता है। बार-बार इस क्रिया में भाग लेने के बाद भी वह आनंद से वंचित ही रहती है। सेक्स में पत्नी को भी आनंद जरूर मिलना चाहिए। सेक्स पत्नी के लिए भी होता है। पति को हर हाल में इस हकीकत का ज्ञान होना चाहिए। सेक्स में सर्वाघिक आनंद को महसूस करने की क्षमता कुदरत ने उसे ही दी है। पति को आनंद की अनुभूति तभी हो पाती है जब पत्नी को आनंद मिलता है। अघिकांश पति इस मर्म को नहीं समझते हैं और सेक्स सिर्फ स्वय के आनंद के लिए करते हैं। पति जब खुद के लिए यौन-संबंघ बनाता है या ऎसी मानसिकता रखता है तब सेक्स दुखदायक को जाता है। सेक्स में पत्नी के आनंद का भी मूल्य है,संबंघ बनाते समय बस पति को इतना ही घ्यान रखना है,फिर कोई शक नहीं कि उसे भी आनंद मिलेगा और पत्नी को तो मिलेगा ही।
ग्राहक- आपको इन सब बातों का ज्ञान कैसे हो gayaa ?
दीप्ति - मैंने videshon me घास नहीं kaatee, यही padhaaee की है।
ग्राहक- अगर मैं भी सीखना chaahoon तो ?
दीप्ति - मैं एक trening sentar daalne का भी vichaar कर रही हूँ।