Monday, March 21, 2011

झाड़ू लगाने की सैलरी 77 हजार !

इंदौर। झाड़ू लगाने की पगार 77 हजार रूपए महीना। यह सुनकर आप भले ही चौंक जाएं लेकिन नगर निगम में ऎसा हुआ है। यहां एक सफाईकर्मी को पिछले सात महीने से कमिश्नर से ज्यादा वेतन मिल रहा है। गड़बड़ी उजागर होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर आंखें मूंदकर बैठे हैं। मामला उजागर होने के बाद अफसर लीपापोती में जुट गए हैं। जिस सफाईकर्मी को भारी-भरकम पगार दी गई, उससे अब अतिरिक्त वेतन की वसूली की तैयारी की जा रही है।

नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में मंजीत पिता रामदास स्थायी सफाईकर्मी है, जिसका वेतन 5,900 रूपए था। जुलाई 2010 में वेतनवृद्धि लगी और उसके कोड 228916 पर वेतन 6,100 की जगह 61 हजार रूपए बेसिक और अन्य खर्च मिलाकर 77 हजार रूपए हो गया। गड़बड़ी की ओर न तो दस्तखत करने वाले अफसर का ध्यान गया और न ही वेतन पत्रक बनाने वाले अरविंद कल्याणे और धीरज नागर का। इसके चलते मंजीत को हर महीने 77 हजार रूपए पगार मिलती रही। उसने भी इसकी जानकारी किसी को नहीं दी। मंजीत ने सात महीने में 5.40 लाख से ज्यादा रूपए हासिल कर लिए। भांडा फूटा और रिकवरी निकाली तो उसने करीब 2 लाख रूपए जमा भी करा दिए। बाकी वसूली की तैयारी की जा रही है।

ऎसे उजागर हुई गड़बड़ी

निगम का कम्प्यूटराइजेशन देख रही एलबिज कंपनी ने शिकायत मिलने पर कर्मचारियों के वेतन का प्री ऑडिट किया। छानबीन में पता चला स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और जोन पर सीएचओ की लापरवाही से मंजीत को हर महीने 77 हजार रूपए वेतन जा रहा है। एलबिज ने आपत्ति ली और बैंक खाता चेक कराया। इसमें महज 18 हजार रूपए मिले, क्योंकि मंजीत वेतन डलते ही पूरा पैसा निकाल लेता था। एलबिज ने अफसरों को चिट्ठी लिखकर राशि वसूल करने के लिए कहा।

बाले-बाले निपटा दिया मामला

इतनी बड़ी गड़बड़ी होने के बाद भी मामला बाले-बाले निपटा दिया गया। दोषी कर्मचारियों ने अफसरों से मिलकर पूरा मामला एलबीज के माथे मढ़ दिया। लापरवाहों का कहना है गड़बड़ी प्री आडिट में ही पकड़ी जाना थी।

वेतन पत्रक जांचने वाला कोई नहीं

निगम के कर्मचारियों का वेतन पत्रक पहले एलबिज बनाती थी, लेकिन तीन साल पहले उसने यह काम निगम को ही सौंप दिया। तबसे वेतन पत्रक विभागों में ही बनने लगा। पत्रक चेक करने वाला कोई अफसर नहीं है, जिसकी वजह से यह भारी गड़बड़ हुई और छोटी-मोटी तो आम है।

अब भी पता नहीं
मामले की जानकारी नहीं है। पता लगाकर दिखवाया जाएगा। ऎसी गलती हुई है, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉ. डीसी गर्ग, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी

उत्तम राठौर

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