Monday, May 31, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२४

कम्मो- जी , कहीं ऐसा न हो कि हम जिस बच्चे को गोद लेंगे उसका ठीक से पालन पोषण न कर पायें और बेवजह वह परेशान हो, ईश्वर भी हमें नहीं बख्शेगा . लेकिन ?
शिल्पा- अब क्या लेकिन ? फिर से कोई सवाल मन में उमड़ने लगा है क्या ? तुम कम्मो कम और सवालों की मशीन ज्यादा लग रही हो . क्या बा है बोलो न , मै बताने की कोशिश करूंगी .
कम्मो- सोचती हूँ कि चलो लड़की तो गोद ले लेंगे मगर उसके भविष्य का क्या होगा , मेरा अर्थ ये है कि जब वो लड़की बड़ी हुई तो उसका क्या होगा ? क्या हम लोग उसकी शादी करेंगे या ?
शिल्पा- अच्छा , मै जानती थी कि तुम्हारे दिमाग में ऐसा ही कोई सवाल पनप रहा होगा इसीलिए मैंने हल भी पहले सोच लिया था , मेरा मानना है कि यह इच्छा पर आधारित होना चाहिए , जैसे कि अगर मै किसी लड़के से शादी करना चाहूँ तो निश्चित रूप से मुझे उसी से करनी चाहिए और अगर मै तुम्हारे साथ रहने में खुश हूँ तो किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह मुझसे इस अधिकार को छीने , क्या कहती हो ...
कम्मो- समझ गयी. अगर वह चाहेगी कि किसी अपने साथी लड़के से शादी करे तो स्वागत है , लेकिन उस लड़के के परिजन जानना चाहेंगे कि हमारा रिश्ता क्या है ? तब क्या कहेंगे ?
शिल्पा- मुझे माफ कर मेरी नानी, मत छेड़ इतनी लंबी कहानी. बर्दाश्त नहीं कर पाउंगी , अब कुछ भविष्य पर भी छोड़ दे , या फिर मरने तक के सारे प्लान आज ही कर डालेगी .
कम्मो- ठीक है, अगर ऐसी कोई बात है तो कोई प्रोब्लम नहीं है .
शिल्पा- अब क्या करोगी ? तुम मौज ले चुकी हो, मै भी खुश हूँ. अब नहाने के बाद सोना है याफिर किसी क्लब में चलोगी ?
कम्मो- क्लब में जाती हैं ? चलो , चलकर देखती हूँ वहाँ पर कितना सुख मिलता है . वहां का टेस्ट चख लेती हूँ.
शिल्पा- दरसल हमको नयी -नयी सहेलियां वहीँ पर मिलती हैं. बातचीत , हाव भाव से पता चल जाता है . वहीँ दोस्ती होती है और फिर यह सिलसिला आगे बढ़ता रहता है. क्या तुम्हें पीने -पिलाने का शौक है ?
कम्मो- कभी नहीं, शराब नहीं पीती. हाँ कभी कभार जब बहुत टेंशन होती है तो सिगरेट में सुट्टा मार लेती हूँ.
शिल्पा- क्या गज़ब ढाती हो मेरी जान . ऐसा क्यों करती हो . अरे सिगरेट तो शराब से ज्यादा खतरनाक होती है . इससे मुंह का कैंसर हो जाता है और फिर जिंदगी एक तरह से नर्क बन जाती है. भले ही आज हमारे पास कैंसर का इलाज मौजूद है , मगरमरीज को ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है कि उसे जीवन भी मौत लगने लगती है, इसे छोड़ दो यार , आज तुम कभी-कभी सुट्टा लगाने की बात कहती हो . कल को इसकी पूरी तरह से आदत लग जायेगी , तब क्या होगा ? कैंसर जैसा भयानक रोग हुआ तो क्या करोगी ? अल्कोहल लेना भी कोई अच्छी बात नहीं है मगर उसकी तुलना में सिगरेट को मै ज्यादा खतरनाक मानती हूँ.
कम्मो-ओफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ , क्या करूँ फिर ? अब क्या हो सकता है ?
शिल्पा- अभी क्या नहीं हो सकता ? सब कुछ अपने हाथ में हैं. आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है. आज से ही प्रतिज्ञा करो कि कभी बीडी , सिगरेट , गुटका से हाथ नहीं लगाओगी .
कम्मो- चलो वादा किया , आज से सब भूल जाउंगी , तुम कहो तो जीना भी छोड़ दूं मेरी जान.
शिल्पा- शुक्रिया. मुझे नाज है तुम्हारी दोस्ती पर . तुम बहुत अच्छी हो कम्मो. मेरी हर बात मान जाती हो .
कम्मो- जब जीवन साथ-साथ बिताना ही है तो हमें एक दूसरे की बात भी माननी पड़ेगी और फिर तुम मेरे हित की बात ही कहोगी , तुम क्यों मुझे दुखी देखना चाहोगी ?
शिल्पा- हाँ, सच कहती हो , मै हर समय तुम्हारे उज्जवल भविष्य की कामना करती रहती हूँ. मै चाहती हूँ कि तुम्हें कभी कोई दुःख न हो, तकलीफ न हो . तुम सदा इसी तरह चिडिया की तरह चहकती रहो, फूलों की तरह अपनी खुशबु बिखेरती रहो .
कम्मो- मै भी तुम्हारी भलाई के लिए कामना करती रहती हूँ. आई लव यु शिल्पा. लव यु सो मच.














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Sunday, May 30, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२३

शिल्पा - नहीं , कभी नहीं. पता नहीं , शायद मर गिर गया होगा . भले ही उसने भी मेरा अपहरण किया, मेरे साथ बलात्कार किया , मगर वह मेरा मददगार था . उसीकी वजह से मै उन दुष्टों के चंगुल से बाहर निकल पाई , मै सोचती हूँ कि भले ही वह मेरा अपहरण नहीं करता तो बाकी के लोग करते . मगर बचाने वाला तो वह डॉक्टर था , अगर वह नहीं बचाता तो शायद मै किसी कोठे पर पडी सड़ रही होती और ग्राहक मेरा मांस नोच-नोचकर गिद्धों की तरह खा रहे होते .
कम्मो- ऐसी क्यों कहते हो , ऐसी कोई बात नहीं होती , आपने किसका बुरा किया है यार ? एक सवाल मन में घूमने लगा है, यह अभी-अभी उभरा है और परेशान करने लगा है . सोच रही हूँ कि तुम क्या इसीलिए मर्दों से नफरत करने लगी हो ?
शिल्पा- हाँ भी कह सकती हूँ और ना भी , क्योंकि मै ठीक अतारः से नहीं कह सकती. हो सकता है कि भूमिका वहीं से बननी शुरू हो गयी हो . या शायद किसी और वजह से भी यह सब हुआ हो .
कम्मो- और वो दिल्ली वाला गुप्त रोगों वाला डॉक्टर ? सुरेश ? उसका क्या हाल है ? मुलाक़ात होती है ?
शिल्पा- हाँ, होती रहती है , उससे मुझे सीखने को बहुत कुछ मिला है. वह होशियार डॉक्टर है. अपने काम की सम्पूर्ण जानकारी रखने वाला . उससे गुप्त रोगों और इंसानी स्वभाव के बारे में जानने की सीख ली है मैंने .
कम्मो- क्युआ उसने कभी शादी करने का प्रस्ताव नहीं रखा ?
शिल्पा- वो क्या प्रस्ताव रखेगा ? पहले से ही उसकी दो-दो बीवियां मौजूद हैं. वह अपनी ऑपरेटर को भी नहीं छोड़ता , हर महीने में लड़की बदल देता है. बहुत आशिक मिजाज है .
कम्मो- तुम भी तो कम सेक्सी नहीं हो. तुम्हें भी तो ऐसा ही मर्द चाहिए , जो तुम्हें दिन में कई बार संतुष्ट कर सके.
शिल्पा- सच बात तो यही है , कि मै मर्द से अब शादी ही नहीं कर सकती . मुझे तो तुम जैसी कली से ही प्यार है, लगाव है . अगर तुम साथ हो तो लड़के की जरूरत क्या है ?
कम्मो- और औलाद ? मेरा मतलब है संतान ? चलो ठीक है जिस्मानी सुख तो हम दोनों भोग लेंगी मगर संतान सुख कैसे भोगने को मिलेगा ? क्या तुम ऐसा कोई तरीका जानती हो , जिसमे मर्दों के सहयोग के बिना ही बच्चा पैदा किया जा सके ? मेरे ख़याल से अभी तक ऐसी कोई तकनीक ईजाद नहीं हुई है. उसके लिए तो कुदरत ने हमें उसीका मोहताज बनाकर छोड़ा है .
शिल्पा- हाँ , वो तो है लेकिन हम लोग क्या करेंगे संतान का ? हम एक दूसरे का जीवन भर सहारा बनेंगे .
कम्मो- लेकिन ये जरूरी तो नहीं कि हम साथ-साथ जियेंगे तो मरेंगे भी साथ-साथ . कोई आगे अम्रेगी तो कोई पीछे , उस स्थिति में अकेली क्या करेगी ?
शिल्पा- जिनके बच्चे हैं, वे लोग भी कौन से खुशहाल हैं, मैंने तो उनको भी बदहाल देखा है. जिन लोगों ने अपने कई -कई बेटा -बेटियों को पाल पोसकर बड़ा कर दिया , अब वही बच्चे अकेले माता -पिता को नहीं संभाल सकते .
कम्मो- बात संभालने की नहीं होती, और भी कई बातें होती हैं. जब कोई अपना है तो अपनत्व से कुछ कह भी सकता है , उसका क्या बुरा मानना ?
शिल्पा- मैंने देखा है कि बेटा अपनी पत्नी और बच्चों के लेकर विदेश में सैटल हो जाते हैं और बूढ़ी माँ या पिता को किसी वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं, बस उनके खर्चे भेजकर अपने फर्ज को निभा देते हैं.
कम्मो- हम किसी -किसी की बात कर रहे हैं. सब लोग ऐसे नहीं होते . यहाँ पर श्रवण कुमार जैसे लोगों की भी कमी नहीं, जिसने माता-पिता को कन्धों पर बिठाकर भ्रमण कराया था .
शिल्पा- अरे यार एक तो देश में वैसे ही जनसंख्या बढ़ रही है , तुम और उसे बढाने की बात कर रही हो , हम जैसी लड़कियां कम से कम इस मामले में तो देश की सेवा कर ही रही हैं. और फिर भी अगर तुम बुढापे की लाठी में भरोसा कर ही रही हो और इतना कर रही हो तो एक बात मेरे दिमाग में आयी है . हम लोग चाहें तो किसी बच्चे को गोद भी ले सकती हैं, उसमे क्या बुराई है . किसी अनाथ को सहारा मिल जाएगा . और हम लोगों को बुढापे का आसरा . हम उसके सहारे समय भी व्यतीत कर सकते हैं.
कम्मो- हाँ , ये आइडिया भी बुरा नहीं है . कोई सुंदर सी लड़की गोद भी ले सकते हैं, मगर सेटल होने के बाद . जब हम इस शहर में अपना घर कर लें, अपनी गाड़ी और इतने पैसे कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा सकें .
शिल्पा- बात में दम है मेरी जान.

Saturday, May 29, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२२

प्रफेसर- हे ... क्या हुआ ? आपका आन्स्वर नहीं आ रहा है ... हेय ....
कम्मो- वावव... बहुत मजा आ रहा होगा और इंटरनेट की कम रफ़्तार ने सब गुड गोबर कर दिया . तब क्या हुआ ? क्या इंटरनेट का नेटवर्क ठीक हुआ या वार्ता अधूरी ही छूट गयी ? क्या हुआ ?
शिल्प- ओह, कनेक्शन कट चूका था . फिर आगे बात नहीं हो पाईं, मगर जितनी भी बातें हुई , वो हमेशा याद रखने लायक थीं, तभी तो मै उन बातों का ऐसे वर्णन कर रही हूँ, जैसे कि सब कुछ अभी- अभी ही घटा हो. सब कुछ दिल के कमरे में कैद हो गया है . अच्छा ही तो है . मै किसीको भी बता सकती हूँ और बताते वक्त भी उसे इंजॉय दे सकती हूँ. न जाने क्यों कम्मो, मगर अब मेरी कुछ ऐसी आदत हो गयी है कि छोटे से छोटा पल भी बेकार नहीं जाने देती. उसमे भी कोई न कोई आनंद का बहाना खोज ही लेती हूँ.
कम्मो- एक बात कहूँ शिल्पा, बहुत सेक्सी हो तुम ? क्यों ऐसा मेरी जान ? मैंने सुना है कि बचपन में जब कोई बलात्कार की शिकार हो जाती है या फिर जिसको बचपन में सेक्स का मजा लूटने की लत लग जाती है वह आगे चलकर खूब सेक्सी हो जाती है . अगर तुमने शादी की होती तो एक मर्द के बस में नहीं था तुम्हें संतुष्ट करना ... सच कघ्ती हूँ.
शिल्पा- मुझे सेक्सी कहलाना पसंद है मेरी जान. मै चाहती हूँ कि लोग मुझे इस नाम से पुकारें, मै चाहती हूँ कि तुम भी मेरी तरह सेक्सी बनो. और हाँ, तुम्हारा कहना सहीए है या नहीं ये तो पता नहीं मगर मेरे साथ जरूर ऐसा हुआ था. जब मै छोटी सी उम्र की थी तभी मुझे कुछ लोगों ने उठा लिया था और सात दिनों तक चार लोगों ने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया था.
कम्मो- चार लोगों ने और सात दिनों तक ? कुछ हुआ तो नहीं ?
शिल्पा- हुआ था, तकलीफ बहुत हुई थी मगर वे लोग बहुत संभाल-संभालकर करते थे . मेरे अंग पर कुछ खास करें भी लगाते थे और कुछ भी करने से पहले वे मुझे एक पैग शराब पिलाते थे . तीन लोग मुझे अच्छी तरह से पकड़कर रखते थे और एक मेरे पूरे जिस्म को चाटता था.इसके बाद जब वह पूरी तरह तैयार हो जाता तब बहुत सावधानी बरतते हुए वह सम्बन्ध बनाता था . इसके बाद वे मुझे आराम करने देते और फिर इसके एक घंटे के बाद दुसरा व्यक्ति इसी तरह सम्बन्ध बनाता था . एक दिन -रात में वे एक -एक बार ही सम्बन्ध बनाते थे . उनमे से एक डॉक्टर भी था . जब वे मेरे जिस्म से अच्छी तरह खेल चुके होते तब वे उनमे से एक डॉक्टर मेरा चेक अप करता था और दर्द न हो इसके लिए कुछ दवाएं भी देता था.
कम्मो- कमाल है , ऐसे-ऐसे लोग भी होते हैं . कौन थे वे लोग ?
शिल्पा- पता नहीं, मगर दिखने में वे ठीक-ठाक लगते थे , हाँ शराब बहुत पीते थे. मैन उनसे कोई फरमाइश करती तो तुरंत पूरी कर दिया करते थे, उन्हें मेरे जिस्म से खेलने में बहुत मजा आता था. उनमे कई बार आपस में भी झगडा हुआ, मेरे ऊपर. वह डॉक्टर चाहता था कि मै सिर्फ उसकी अकेले की संपत्ति बनकर रहूँ, जब अन्य लोग चाहते थे कि जिस तरह वे चाह्रों मुझे अप्रहत करके लाये थे, उसी तरह वे चारों ही मेरे साथ मौज मस्ती करें.
कम्मो- तो क्या वे कोई अपराधी थे ? और उन्होंने तुम्हें रखा कहाँ था ?
शिल्पा- उन्होंने मुझे एक विशाल बंगले में कैद करके रखा था, हांलाकि वहां सभी सुख सुविधाएँ थीं मगर वहां से भागने का कोई रास्ता नहीं था .
कम्मो- तो तुम कैसे कामयाब हुई आने में ? और कुछ अनुमान लगाया वो लोग के बारे में ?
शिल्पा- शायद वे लोग कोई बिजनेस करते थे साथ में उनका वैश्या व्यवसाय का भी काम रहा होगा . ऐसा लग रहा था , वे मुझे भी शायद जिस्म की मंदी में उतारने के लिए ही लाये थे और शायद इसी कारण मुझे उसी काम की ट्रेनिंग दे रहे थे ताकि मै कोई आनाकानी न करू और आराम से ग्राहक के साथ सो सकूँ , मगर ...
कम्मो- मगर क्या मेरी जान ?
कम्मो मगर मैन वहां से भाग आयी, तुम यह जानने के लिए उत्सुक हो कि मैंने उन्हें चकमा कैसे दिया ? बताती हूँ, वो जो डॉक्टर था, वह मुझे चाहने लगा था उसीने अपने सथोयों से गद्दारी की और मुझे वहां से भगा दिया.
कम्मो- तो क्या फिर कभी मुलाक़ात हुई उस डॉक्टर से ?

Friday, May 28, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२१

प्रोफ़ेसर -सच ? अरे वाह अब तुम्हारे साथ-साथ मै भी गर्म हो रहा हूँ. हम दोनों के होठ आपस में मिले हुए है. तुम फील कर रही हो न. फील करो कि मै अपने एक हाथ से तुम्हारी गोरी चिकनी जाँघों को सहला रहा हूँ और तुम इस काले नाग को स्पर्श कर रही हो. फील करो कि तुम काम वासना के जाल में आहिस्ता-आहिस्ता पूरी तरह उलझने के लिए तैयार हो .अब हम लोग आपस में प्यार करने की तैयारी कर रहे हैं.
शिल्पा- वाह प्रोफ़ेसर , कमाल कर दिया आपने तो . ऐसा आनंद दिया है कि जैसे हम दोनों एक बिस्तर पर ले रहे हों.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम यकीन करोगी अगर मै ये कहूँ कि मै सम्पूर्ण सुख भोग चूका हूँ . मै संतुष्ट हो चूका हूँ.
शिल्पा- क्या बात है प्रफेसर , मै भी बस यही कहने वाली थी . हम लोग दोनों ही संतुष्ट हो चुके हैं लगता है दोनों की संतुष्टि का समय भी वही है . यानि एक ही टाइम पर दोनों ने चरम सुख प्राप्त किया है.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम्हारा ऑनलाइन होने का यही समय होता है ? या किसी और टाइम भी आती हो ?
शिल्पा- बस यही . रात को ही मुझे समय मिल पाता है, ऑफिस में तो इस तरह की पर्सनल बातें कर नहीं सकते इसलिए अपने कमरे में ही करती हूँ. अब मै आराम से सो सकती हूँ .
प्रोफ़ेसर- ओह, यहाँ पर सुबह का समय है , आज का दिन शायद मेरे लिए अच्छा रहेगा क्योंकि शुरुआत अच्छी हुई है और एक इन्डियन कहावत ही है कि 'अंत भला तो सब भला ' . आज मै बहुत खुश हूँ. और हाँ, क्या तुम अन्य दोस्तों से भी इस तरह की सेक्स चैत्निग करती हो ?
शिल्पा- हां, मुझे मजा आता है, और ज्यादातर ऑरकुट फ्रेंड भी मुझसे यही उम्मीद करते हैं. वे मुझसे सेक्स चैटिंग ही करना चाहते हैं, जब शुरुआत में बात करते हैं तो बहुत धर्मात्मा बनते हैं लेकिन जब फिसलते हैं तो थमने का नाम भी नहीं लेते . गिरते चले जाते हैं.
प्रोफ़ेसर- हाँ, बहुत लोग होते हैं ऐसे .क्या तुम मेरे सामने मर्दों को दुत्कारना चाहती हो ? करो करो , जो करना है वो करो , बस इतना जानलो कि लड़कियां भी कुछ कम नहीं होतीं, मै ऐसी कई लड़कियों को जानता हूँ जो रोज मुझसे सेक्स चैटिंग करने का आग्रह करती हैं और मै बहुतों का आग्रह ठुकराता भी हूँ. क्योंकि अपने लेबल के पार्टनर के साथ ही आप १५ से २० मिनट गुजार सकते हैं. वैसे इस तरीके के बारे में तुम्हारी क्या राय है ? जहां तक मेरी अपनी बात है , मुझे खूब आनंद आता है . इसमें बुराई क्या है ? न तो किसी बीमारी का डर और ना ही कोई दूसरा खर्चा. जिस खर्च से इंटरनेट चल रहा है , वही तो है .
शिल्पा- मुझे भी यह आधुनिक तरीका पसंद आ रहा है . हम लोग वीडियो की मदद से एक दूसरे को आसानी से देख पा रहे हैं. बात कर रहे हैं, और क्या चाहिए . मुझे आप बहुत पसंद हैं प्रोफ़ेसर . अगर आप इंडिया आते हैं, तो मुझसे मिलिए , तुम्हें अपने पास पाकर मुझे खुशी होगी.
प्रोफ़ेसर- जी, शुक्रिया. तो क्या वहाँ आने पर भी हम लोग इस खेल को खेल पायेंगे , करीब से ?
शिल्पा- शायद, क्योंकि पास आने पर विचार बदल भी सकते हैं, बिस्तर पर सुख भले ही नहीं दे सकूँ मगर वैसे आपके साथ ही रहूंगी, हम लोग खूब बातें करेंगे , घूमेंगे , फिरेंगे , मौज मस्ती करेंगे . मेरी रिलेटिव कला बड़ा घर है , रहने -सहने , खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं होगी . सब मेरी तरफ से रहेगा , यहाँ तक कि घूमना -फिरना भी.
प्रोफ़ेसर- इसके लिए शुक्रिया. मै भी इंडिया आना चाहता हूँ, मेरी भी बहुत हसरत है कि एक बार वहाँ जरूर आऊ.
शिल्पा- आपका स्वागत है प्रफेसर . मेरे घर में आपका स्वागत है .
प्रोफ़ेसर- अच्छा होता तुम मुझे बिस्तर के प्यार के लिए भी आश्वश्त करती , शायद तब मै और ज्यादा उत्साहित होता. वैसे आपका भी यहाँ स्वागत है. आप आ सकती हैं मेरे अपने घर में रह सकती हैं मेरी गाड़ी में सिर कर सकती हो , किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी .
शिल्पा- थेंक यूं . क्या कर सकती हूँ आपकी गाड़ी में , सिर ?
प्रफेसर- ओह सोरी , मै सफर लिखने वाला था और सिर लिख गया.
शिल्पा- अब क्या करेंगे आप ? पेट के नीचे की भूख तो शांत हो गयी , अब ?
प्रोफ़ेसर- अब जाऊंगा कोलेज . वहीं पर दोपहर का भोजन करता हूँ. मै इस घर में अकेला रहता हूँ. अभी शादी भी नहीं की. मेरी खाना बनाने वाली सिर्फ शाम के समय आती है. दोपहर का खाना हमेशा कैंटीन में ही खाता हूँ.
शिल्प- सोरी प्रोफ़ेसर , मेरा नेटवर्क बहुत कमजोर हो रहा है. कुछ प्रोब्लम है .

Thursday, May 27, 2010

जान से प्यारा यार हमारा , भाग-२०

कम्मो- तुम्हारे साथ रहूंगी तो समझदानी क्या बहुत कुछ बड़ा हो जाएगा .
शिल्पा- तुम्हें भी हवा लग चुकी है मेरी जान. आज खूब आनंद उठाया है, कल इससे भी ज्यादा सुख दूंगी , तुम्हें बाते था न ग्रुप सेक्स के बारे में . हमारे यहाँ पर भी अब इसका चलन जोर पकड़ने लगा है .
कम्मो- हाँ, शायद किसी देश में एक प्रोफ़ेसर भी ग्रुप सेक्स के लिए पार्टियां आयोजित करने के जुर्म में पकड़ा गया था,उसे कुछ साल की कैद भी हुई थी, मजा है तो सजा भी है , उसे कौन भुगतेगा ? वैसे उसने दलील दी थी कि उसने व्यसक लोगों को उनकी इच्छा से सेक्स के लिए आमंत्रित किया था , मगर आखिरकार उसे सजा हुई . शायद उसने अगली अदालत में सजा के खिलाफ अपील भी की है. हार मानने वाला नहीं है प्रोफ़ेसर .
शिल्पा- ये लोग इतनी सेक्स पावर कहाँ से लाते हैं , जो एक रात में कई -कई साथियों को संतुष्ट कर देते हैं?
कम्मो- परफेक्स है न. परफेक्स कैप्सूल खा-खाकर ताकत पैदा करते हैं. इससे जोश बढ़ जाता है और जूनून भी. सेक्स करने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है . यह भारत की दवा है मगर अब धीरे -धीरे इसकी दीवानी पूरी दुनिया हो रही है.
शिल्पा- तुम्हें कैसे पता चला ये राज ? क्या तुम भी उसके संपर्क में हो ?
कम्मो- हाँ, तो क्या हुआ ? आजकल ऑरकुट , फेसबुक , ट्विटर से पूरे वर्ड के लोगों से आसानी से दोस्ती बनाई जा सकती है. हम लोग अक्सर चैट करते थे , प्रोफ़ेसर मुझे ग्रुप सेक्स के अपने अनुभव सुनाया करता था. यहाँ तक कई बार हम चैटिंग के द्वारा सेक्स का मजा भी लिया करते थे, वह मैसेज भेजता था -
-फील करो कि मै तुम्हारे कपडे उतार रहा हूँ,आहिस्ता- आहिस्ता तुम नग्न होती जा रही हो. इसके बाद अब ये महसूस करो कि तुम भी जोश में आ गयी हो तुमने मेरे कपडे उतारने शुरू कर दिए हैं. धीरे -धीरे हम दोनों वस्त्रहीन हो रहे हैं. हम दोनों अब करीब आने लगे हैं, तुम मेरे खास अंग को निहार रही हो , तुम उसे सहलाने के लिए बेताब हो , मैंने तुम्हारे यौवन द्वार तक अपनी एक उंगली पहुचा दी है . तुम आह कह उठी हो . तुम्हारे अरमान मचलने लगे हैं, मेरी बांहों में आकार तुम बस बिछ जाना चाहती हो . तुम बेताब हो रही हो ...
शिल्पा- हा, और तुम भी महसूस करो कि मैंने तुम्हारे विशेष अंग को चूम लिया है, इससे वह काले नाग की तरह फडफडाने लगा है . मेरी बेताबी की तरह तुम भी बेताब हो रहे हो. समा जाना चाहते हो मुझमे.
प्रफेसर- आह. अब देखो, तुम मेरे होठों का किस कर रही हो, यह दीर्घ चुम्बन है . बेहद दीर्घ . हम दोनों प्यार के सागर में गोते लगाने के लिए बेचैन हैं.महसूस करो , मेरी साँसे , मेरी धडकन, ये सिर्फ तुम्हारे लिए धड़क रही हैं.
शिल्पा- अब हम दोनों नग्न हो चुके हैं, तुम हो न मेरे साथ ? सुनो, अब हम नग्न हैं. हम दोनों का जिस्म एक दूसरे के जिस्म से सटा हुआ है. हम प्यार करना चाहते हैं. इश्क की इस नगरी में हमारे साथ कुछ मीठी यादें भी हैं वे यादें जो हमें पिछली बार के सम्बन्ध से मिली थीं.
प्रोफ़ेसर. मैन ट्रांसलेटर की मदद ले रहा हूँ, इसलिए जवाब देने में देरी हो रही है. वैसे मैन तुम्हारे साथ हूँ, तुमसे जुडा हुआ हूँ .आखिर आज हमारी सुहागरात जो है. यह शायद पहली बार हो रहा है कि तुम जैसी खूबसूरत और समझदार पार्टनर मेरी बांहों में है. मै कबसे तरस रहा था, तुम जैसी साथी के लिए , ऐसे तो तुमसे पहले मैंने बहुत सी कुंवारी लड़कियों के साथ रात बिताई हैं, मगर तुम्हारे साथ जो खास अनुभव है, उसकी कोई मिसाल नहीं/. यह सबसे न्बेह्त्रीन अनुभव है . लगता है जैसे मै हवा में उड़ रहा हूँ.
शिल्पा- अच्छा, मै भी ट्रांसलेटर की मदद ले रही हूँ. क्योंकि मैन भी आपकी भाषा नहीं जानती .
प्रोफ़ेसर- जब आपस में प्यार हो तो भाषा कलोई मायने नहीं रखती , दिल अपने आप कोई न कोई राह निकाल ही लेता है शिल्पा- मेरा दिल तो कैद हो गया है तुम्हारी बांहों में . बहुत सुन्दर हो तुम भी.

Tuesday, May 25, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१८

कम्मो- हाँ , समझने की कोशिश कर रही हूं, आपके साथ रहूंगी तो सब कुछ जान भी जाउंगी . थोड़ा -थोडा तो समझ ही रही हूँ, बड़े पते की बात कह रही हो , इस एंगल से भी तो सोचना जरूरी है . अच्छा किया आपने जो समझा दिया.
शिल्पा - चलो अच्छा हुआ , अब मुझे तसल्ली हुई कि मैन ऐसी विद्वान महिला की साथी बन्ने जा रही हूँ , जो निष्पक्ष भाव से सोचती है. लड़का हो या लड़की कोई भेदभाव नहीं रखती हो . दूसरों से भी सावधान रहने की अपील करती हो और अपनों से भी . यह अच्छा ही हुआ मेरी जान. देखा, अब मुझे जान कहने की आदत भी लगती जा रही है, बिलकुल तुम्हारी तरह.
कम्मो - ये क्या कह रही ही, यह तो मेरी वाली आदत है और आप इसे किसी और का नाम कह रही हैं.
शिल्पा- तुम्हारे और मेरे बीच में अब फर्क ही क्या रहा है ? तुम भी मेरी अपनी ही हो चुकी हो . हम दोनों के शरीर एक हो चुके हैं. हमारी आत्मा एक हो चुकी हैं. अब हमें फर्क क्या पड़ता है ? कौन कहेगा कि हम दोनों अलग- अलग हैं ? और अगर कहेगा भी तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला , क्योंकि जब आत्माओं का मिलन हो जाता है तो जिस्म बहुत पीछे छूट जाता है . सच कहती हूँ, मेरी जान. ये आध्यात्मिक बातें हैं. अब अगर तुम्हें कोई तकलीफ होगी तो मैन समझूंगी कि दर्द मुझे हो रहा है . और जब मै यह फील करूंगी तो ऐसा हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है .
कम्मो- वाह, तुम्हारे शब्दों में अथाह शक्ति है शिल्पा. इस शक्ति से भी मेरा साक्षात्कार कराओ न.
शिल्पा -आहिस्ता -आहिस्ता सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा , सब जान जाओगी . अब मेरे बिकुल करीब आ जाओ . इतने करीब कि फिर कोई दूरी ही न रह जाए , बदन में बड़ी अगन सी लगी है .
कम्मो - मै भी बेताब हूँ , बेकरारी ने मेरे जिस्म को अकड लिया है . अब समझ में नहीं आता कि इसे इस तरह कैसे मजा आएगा ? मै तुम्हे कैसे इतना आनंद दे पाउंगी जैसा कि तुम मुझे दिया करता करती थी ... क्योंकि तुमने जब शुरुआत की थी तो बड़ा मजा आया था . इतना मजा मै दे पाउंगी कि नहीं ?
शिल्पा - तुम शुरुआत तो करो मेरी जान, इसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा . ऐसा सुख मिलेगा कि सब रिकार्ड टूट जायेंगे , किसी तरह की कोई दिक्कत मत रखो . उलझन मत रखो, एक राज की बात ये भी है कि इस तरह जो लोग उलझन के शिकार होते हैं , उन्हें सफलता भी कुछ देरी से मिलती है . उलझा-उलझकर . समझी तुम ? इसलिए अभी से इस बात को गांठ बाँध लो और अपने काम में लग जाओ . अपना कर्तव्य पूरा करो .
कम्मो को जोश आ गया. शिल्पा के कहने का तरीका ही ऐसा होता था कि मुर्दे में भी जान आ जाती थी. कम्मो ने सेक्स के कुछ गुण उस फिल्म से भी सीख लिए थे , उसने अब वही तरीके इस्तेमाल करने शुरू कर दिए . वह कम्मो की जीभ का भी चुम्बन ले रही थी. शिल्प उसका भरपूर साथ दे रही थी. दोनों के जिस्म कुछ ही देर में अंगारे की तरह दहक रहे थे . कम्मो पहल करती जा रही थी और शिल्पा उकस समर्थन कर रही थी . और जब उनकी जवानी ज्वालामुखी के तरह दहकने लगी तो शिल्पा बावरी सी हो उठी वह कम्मो की गोलाइयों को जोर -जोर से चूमने लगी . उसकी उँगलियाँ कम्मो के यौवन द्वार पर दस्तक दे रही थीं. सेक्सी आह का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया , और तब तक चलता रहा जब तक उन दोनों सहेलियों के शरीर की गर्मी पूरी तरह शांत नहीं हो गयी, एसी कमरे में भी वे दोनों पसीने से लथपथ थीं. जैसे कोई बहुत बड़ी जंग लड़ रही हों, देखा जाए तो ये जंग थी भई. एक लड़की कुदरत के चुनौती देकर दुसरी लड़की की जिस्मानी भूख को शांत कर रही थी. और इस समय वे दोनों खुश भी दिखाई दे रही थीं. यह सफलता की मुस्कराहट थी. इस खुशी में उन दोनों की हालत ऐसी हो गयी , जैसे सचमुच किसी पति-पत्नी के जोड़े की होती है. शिल्पा ने बाकायदा कम्मो के गालों का चुम्बन लिया और फिर उसके मस्तिष्क को चूमते हुए बोली-
- बहुत मजा आया. तबियत खुश हो गयी यार . तुम अपनी कहो , तुम्हें सुख मिला कि नहीं ?
कम्मो- तुम खुश तो मै खुश , वैसे , जब तुम प्रणय क्रीडा की पहल करती हो तब मुझे सबसे ज्यादा खुशी होती है .
शिल्पा- कोई बात नहीं , अब जब कल मौज मस्ती करेंगे तो उसका नेतृत्व मै करूंगी अब तो खुश हो? काउंटर पर फोन करने दो गिलाश जूस का ऑर्डर दे दो.जितनी ऊर्जा खत्म हुई है, उसकी आधी तो कम से कम मिलनी ही चीहिए .











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Monday, May 24, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१६

तभी शिल्पा ने कहा-
-कुदरत का सबसे अनमोल तोहफा प्यार है। यह बाँटने से और बढ़ता है तथा अपनी भीनी-भीनी महक को प्रकृति में चारों ओर बिखेर देता है। यूँ तो प्यार के प्रेम, इश्क, लव रोमांस, चाहत, मोहब्बत जैसे कई प्यारे नाम हैं पर प्यार की खूबसूरती पर इन नामों का कोई असर नहीं होता है। लोग बदल जाते हैं, पर प्यार कभी नहीं बदलता है। यह तो ऐसा संक्रामक रोग है जो देखने से भी फैलता है और कभी भी, कहीं भी, किसी को भी हो सकता है।
कम्मो- हां, कुछ लोग कहते हैं कि प्यार किया नहीं जाता, बस हो जाता है। पर प्यार देखकर, समझकर तो किया ही जा सकता है। प्यार क्या है, किससे करें, कब करें ऐसे कई अनसुलझे सवाल हैं कि अगर जानबूझकर इन्हें नजरअंदाज किया जाए तो अंत में निराशा तथा दिल के टूटने की आहट ही सुनाई देती है। कई बार जिएँगे तो साथ-मरेंगे तो साथ ऐसी कसमें खाकर उसे निभाने के वादे तो लोग कर लेते हैं लेकिन प्रेम में परवान चढ़ते-चढ़ते जब जिंदगी की हकीकत से सामना होता है तो सारे सपने उनके कदमों तले टूटकर बिखर जाते हैं और कुछ दिनों का इश्क जीवनभर के अश्क बन जाता है।
यह स्थिति स्वाभाविक भी है क्योंकि जब कोई किसी से सच्चा प्रेम करता है एवं केवल सामने वाले के रूप-रंग से आकर्षित नहीं होता बल्कि उसकी सीख से प्रेम करता है तो वह कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं करता है कि वह जिसके इश्क में गिरफ्तार है कई आशिकों की गाड़ी जब प्यार के प्लेटफार्म से गुजरकर शादी के स्टेशन पर रुकती है तो बिना टिकट के यात्री की तरह इनकी सचाई भी सामने आने लगती है। ऐसे में समझदार माँ-पिता केवल प्यार के नाम पर ही बेटे-बेटी की शादी उस लड़के-लड़की से करने को तैयार नहीं होते हैं जो केवल प्यार का दम भरता है। ऐसे मामलों में अगर कभी शादी हो भी जाए तो लोग कुछ दिनों तक तो मदद करते हैं, फिर तो दोस्त भी कन्नी काट लेते हैं।
शिल्पा- यूँ तो प्यार में चोट देने वाला, पहचान के बाद भी चोट दे सकता है। पर फिर भी थोड़ी खोजबीन जरूरी है। आपने देखा भी होगा कि कोई आपको प्यार तो बहुत करता है पर कह नहीं पाता या फिर हमेशा ही जताता रहता है। ऐसी स्थिति में कभी-कभी आप बड़ी उलझनों में भी घिर जाते हैं। इन समस्याओं से बचने और अपने प्यार को परखने के लिए कुछ सामान्य से उपाय करके देखिए, अगर सामने वाला चाहता है और आपके लिए कुछ भी करने को तैयार है परंतु इस बात को अहसान बताकर याद दिलाता रहता है तो समझ लेना चाहिए कि वह आपसे प्यार नहीं करता है और आपको अपने अहसानों तले दबाकर रखना चाहता है।
अगर आपको पसंद करने वाला आपकी सभी बातों का समर्थन करे। चाहे गलत हो या सही, तो मानना चाहिए कि सामने वाला आपको पाने के मकसद से ही आपकी गलतियों को छिपा रहा है। ऐसा वह किसी और स्थिति में भी कर सकता है। अगर आपको पसंद करने वाला आपकी सभी बातों का समर्थन करे, चाहे गलत हो या सही, तो मानना चाहिए कि सामने वाला आपको पाने के मकसद से ही आपकी गलतियों को छिपा रहा है। ऐसा वह किसी और स्थिति में भी कर सकता है,यदि कोई लम्बे समय तक आपसे मिलता रहे, प्यार जताता रहे परंतु शादी की बात बिना किसी बड़े कारण के टालता रहे तो निश्चित ही वह आपसे शादी नहीं करना चाहता है। केवल टाइमपास बना रखा है। ऐसे में तत्काल निर्णय लेना चाहिए। शादी से पहले ही अगर साथी का व्यवहार एवं माँगें अनुचित हों तथा तरह-तरह के प्रलोभन देकर वह केवल अपनी बात ही मनवाना चाहे तो स्वयं फैसला कीजिए कि ऐसा साथी जीवन के सफर में आप से कितनी वफा निभा सकेगा।जानती हो येबातें मै तुम्हें क्यों बता रही हूँ ?
कम्मो- क्यों ?
शिल्पा- क्योंकि जिस तरह लड़के बदमाश होते हैं, वैसे ही लड़कियां भी कम नहीं रहतीं. तो सामने वालों से हमको सावधान रहना चाहिए . समझ रही हो कि नहीं ?








Sunday, May 23, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१५

अगर कोई सेक्स के बीच में आता है तो जल्लाद जैसा लगता है . चाहे वे बातें हों कि इंसान , कुछ फर्क नहीं पड़ता .
कम्मो- तो तुम्हारा इशारा मेरी बातों की तरफ है . विषय की तरफ है . समझ गयी .
शिल्पा- जी हाँ, बिलकुल . थोड़ी देर पहले तो गर्म हो गयी थीं, अंगारे की तरह दाहक रही थीं , फिर अब अचानक क्या हो गया ? ऐसा क्या हुआ कि एकदम नीरस बातें करने लगीं, मुझे भी पहले ध्यान नहीं आया , मगर जब लगा कि मेरा करंट भी धीमा पड़ने लगा है तब जाकर मैंने तुम्हें चेताया ..
कम्मो- हाँ, यार . अच्छा हुआ बता दिया तुमने ,सचमुच मैन भी बहक गयी थी . बात ऐसे बदली कि फिर आगे बढ़ती चली गयी, ये मेरा पहला दिन है , मुझे प्रणय क्रीडा का लंबा एक्सपीरियंस तो है नहीं . मैंने सोचा कि आराम से करेंगे तो मजा भी लंबा खिचता जाएगा , लेकिन इसका उलटा ही हुआ . बजाय फायदे के नुक्सान हो गया.
शिल्पा- अब बातें कम और काम ज्यादा करना होगा . चलो मेरे सीने को आहिस्ता -आहिस्ता सहलाना शुरू करो . इसके बाद फिर इन चिकनी जाँघों को सहलाना, जब मुझे आनंद आने लगेगा तब मै तुम्हें सुख दूंगी .
कम्मो- आह, अब ठीक रहेगा , मै इसके लिए भी तैयार हूँ. कोशिश करती हूँ कि तुम्हें कितना आनंद दे पाती हूँ.
शिल्पा- तुम अगर करोगी तो अच्छा ही करोगी , धमाल करने में माहिर हो तुम.
कम्मो- इतना विश्वाश करती हो , तो यकीं मानो इस भरोसे को कभी कम नही होने दूंगी.
शिल्पा उसे देखती रह गयी, उसके आत्म्विश्वाश से भरे शब्दों ने शिल्पा को खूब सुकून बक्शा . इस वक्त वे दोनों नग्न अवस्था में थीं, दोनों के जिस्म में कामवासना की गर्मी दौड रही थी. कम्मो अब शिल्पा के मजबूत उभारों को सहला रही थी , उसकी रग -रग में मस्ती का संचार होने लगा . शिल्पा अपनी पलक बंद करते हुए बोली-
- वाह , कितना सुख मिल रहा है . कैसे बताऊँ, सच कहूँ तो इसे मापने का कोई पैमाना ही नहीं है . जी चाहता है कि प्रेम की यह यात्रा ऐसे ही चलती रहे , बस इसी तरह सुख के समुंदर में गोते लगाती रहूँ.
कम्मो- मैंने तो ऊपरवाले से तुम्हें पहले ही मांग लिया है . अब तो जीना -मरना साथ -साथ ही होगा .
शिल्पा ने लंबी आह भरी . हाथ ऊपर किये , एक कातिल अंगड़ाई ली और कम्मो के होठ चूम लिए , यहाँ से शुरुआत करने के बाद वह रुकी नहीं , अच्छी तरह से लबों का रसपान करने के बाद वह उसकी गोलाइयों को रगड़ने लगी , इस बार उसके हाथ का दवाब कुछ ज्यादा था , तभी तो कम्मो ने उसका विरिध करना चा , लेकिन शिल्पा की अदा कुछ ऐसी थी कि वह कुछ नहीं कह पाई कुछ पलों के बाद उसने शिल्प के रंग में रंगना चालू कर दिया. उसने भी शिल्पा के सीने की पर्वत चोटियों पर अपनी पकड़ मजबूत बनादी . अब दोनों एक ही रफ़्तार से आगे बढ़ रही थीं, उनके मुख से जो कामोत्तेजक आहें निकल रही थीं, उन आहों ने होटल के कमरे का तापमान भी बढ़ा दिया था . ऐसा लगता था जैसे सदियों पुराने बिछडा युगल मिल गया हो और अपनी वर्षों के प्यास बुझाने के लिए जद्दो जहद कर रहा हो . कम्मो सोच रही थी कि उसने कभी सपने में भी यह उम्मीद नहीं की थी कि ऐसा भी हो सकता है. कोई महिला ही दुसरी महिला को बिस्तर पर सुख संतुष्टि प्रदान कर सकती है. यह तो एकदम नया प्रयोग था. अब उसे किसी मर्द से दोस्ती करने की जरूरत नहीं थी , अब वह मर्दों के सहयोग के बिना भी अपना कैरियर बना सकती थी, और सबसे बड़ी बात कि बिना किसी झंझट के मस्ती भरे दिन गुजार सकती थी. ना तो गर्भवती होने की दिक्कत और ना ही कोई बदनामी वाली बात . अगर कोई जवान लड़की किसी लड़के के साथ घूमती फिरती है तो बिना कुछ किये धरे ही बदनाम हो जाति है . आजकल के कुछ लड़के ऐसे बदमाश हो गए हैं कि पहले तो लड़की का शारीरिक शोषण करते हैं और फिर उसको ब्लेकमेल करने लगते हैं. लड़कियों के साथ रहने में ऐसी कोई समस्या नहीं है . खूब मजा लेने के बाद भी कोई शक नहीं करता . किसी का नुक्सान भी नहीं होता और मौज मस्ती भी पूरी मिल जाती है .

























Saturday, May 22, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१४

कम्मो कुछ ज्यादा ही जोश का प्रदर्शन कर रही थी , शिल्पा तो खेली खाई खिलाड़ी थी जबकि कम्मो का यह पहला अवसर था , वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी कि फिर कुछ होश ही नहीं रहा, वह शिल्पा के जिस्म से ही खिलवाड करती रही , इस बीच शिल्पा उसको उकसाती रही , अश्लील बातें करती रही ताकि वह उसको खूब उत्तेजित कर सके. कम्मो भी उसका सही जवाब दे रही थी. कम्मो के मन में वासना का तूफ़ान उठने लगा . वह जल्द से जल्द मंजिल पर पंहुचने के लिए बेताब होने लगा. शिल्पा के होठ भी थरथराने लगे . बोली-
-कम्मो रानी, अब तो तुम भी एटम बम बन चुकी हो. बहुत बढ़िया साथ दे रही हो, सोचा नहीं था मैंने कि इतना आनंद आएगा , इतनी जल्दी तुम प्रणय क्रीडा करना सीख जाओगी .
शिल्पा- हां, सोचा तो मैंने भी नहीं था मगर करते-करते सब कुछ हो गया. अब ये बताओ कि ये तड़प हमें कब तक सहनी होगी ? बदन जल रहा है . कुछ -कुछ होने लगा है. इस बार शुरुआत तुमको करनी होगी, मैन उसका समापन करूंगी. जब प्यार करने के नुस्खे सीख गेई हो तो इन्हें अमल में भी लाओ ...
कम्मो- हुक्म की तामील की जायगे , मगर , मगर सच तो ये है कि इस खेल में जो मजा है उसकी जितनी तारीफ़ की जाए वो कम है. मंजिल पर पहुच जाने पर तो सुख की अनुभूति होती ही है , लेकिन राहों में चलने पर जितना आनंद आता है, वह असीम होता है . थोड़ी देर तक हम दोनो इसी सुख को भोगंगे , इसके बाद चरम सुख की प्राप्ति करेंगे .
शिल्पा - वाह कम्मो, मजेदार बात कहदी है तुमने . बड़े पते की बात कहदी है, सच यही है मेरी जान. मजा तो इसीमे हैं, बाकी हर चीज भूल सकते हैं मगर इस प्रणय क्रीडा को कभी नहीं भूला जा सकता.
कम्मो- हां, धीरे -धीरे सीख रही हूँ तुमसे , इसी तरह मैन तुम्हें फोलो करती रहूंगी . अब आप आ जाएँ मेरे ऊपर .
शिल्पा- आप जैसा शब्द बड़ा औपचारिक लगता है कम्मो. तुम कहकर ही पुकारा करो , वही अच्छा लगता है.
कम्मो - हाँ कभी-कभी मुंह से निकल जाता है , मेरे मन में एक जिज्ञासा पनप रही है , कहो तो पूछूं?
शिल्पा- बिंदास यार , जो चाहो सवाल कर सकती हो, तुम्हें इजाजत लेने के जरूरत नहीं है .
कम्मो- मै ये जानना चाहती थी कि ये समलैंगिक सम्बन्ध सेहत के लिए नुकसानदायक तो नहीं होते ?
शिल्पा- वैसे अभी तक नुक्सान दायक होने के बात तो सामने नहीं आई है. कम से कम वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से तो ये बात कभी साबित नहीं ही. अचानक ये सवाल क्यों ?
कम्मो- बस ऐसे ही पूछ बैठी, क्योंकि अगर हमारे पूर्वजों ने पुरुष और महिला के विवाह संबंधों को मान्यता दी है, सदियों से लोग ऐसा करते आ रहे हैं तो जरूर इसके पीछे कोई सकारात्मक द्रष्टिकोण हो सकता है.
शिल्पा- इतना सोचना ठीक नहीं होता. मन को जो अच्छा लगे वो करना चाहिए , वही अच्छा होता है.
कम्मो- हाँ मगर कभी -कभी मन ऐसी चीजों को चाहने लगता है जो कि शरीर के लिए हानिकारक होती हैं, उदाहरण के लिए ताली हुई चीजों को देखकर मुंह में पानी आ जाता है , मगर उसके ज्यादा खाने से गैस और अपच हो है. मोटापा बढ़ने लगता है . और हम जानकर भी उसका सेवन करते रहते हैं.
शिल्पा- तुम्हें नहीं लगता कि हम लोग सब्जेक्ट से भटक रहे हैं. ऐसे रंगीन क्षणों में नीरस बातों का कोई महत्त्व नहीं होना चाहिए , सिर्फ प्यार भरी बातें करो ठीक उसी तरह जैसे मयखाने में बैठकर मयकश लोग बोलते हैं -'ला पिलादे साकिया पैमाना पैमाने के बाद , होश की बातें करेंगे होश में आने के बाद . तो पीने के बाद भी वे इतने होश में होते हैं कि होश की बातें होश में आने के बाद कहने की बात करते हैं. तो काम की क्वालिटी ऐसी होनी चाहिए प्यार तो प्यार और सेक्स तो सेक्स.












Friday, May 21, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१३

कम्मो- बहुत खूब शिल्पा. ये बहुत सही जानकारियाँ मिली हैं . न जाने कैसे इतना याद कर लेती हो , तुम्हारी जुबान पर साक्षात लक्ष्मी का वास है. मुझे भी इस स्मरण शक्ति राज बतादो.
शिल्पा- खुश रहो, जो भी कहो या सुनो उसे ध्यान से दिल लगाकर करो, और अपने मन को , दिमाग को ये समझा दो कि जो कुछ तुम सुन रही हो , वह तुम्हें याद हो गया है . जब अपने दिल को आत्मविश्वाश के साथ कहोगी तो वहाँ से भी सकारात्मक प्रतिक्रीया आएगी, ये निश्चित है .
कम्मो- शिल्पा- तुम मनोविज्ञानियों जैसी बात करती हो , तुम्हारी बातें शुरुआत में थोड़ी सी कठिन लगती थीं मगर अब सब कुछ सामान्य हो गया है. अब बातें ध्यान में आने लगी हैं.
शिल्पा- चलो , अच्छा हुआ , कम समय में इतना तो सीखा, मैंने भी तुमसे फोलो करने का तरीका ठीक तरह से सीख लिया है . अब और भी आगे सीखते रहने का इरादा है . होटल में कम आनंद आता है . अपना घर लेकर रहेंगे .
कम्मो- क्या ऐसा संभव है ? अभी तो मेरो नौकरी बी ही नहीं लग पायी है .
शिल्पा- सिर्फ छ महीने में सब कुछ ठीक हो जाएगा . कल के कल नौकरी पक्की समझो . इसके बाद तुम्हारा बेंक खाता खुलवा दिया जाएगा . छ माह के बाद तुम्हारे और मेरे नाम से आसानी से होम लोन हो जाएगा , मै ऐसे कई एजेंटों को जानती हूँ जो दो से तीन पर्सेनेट लेकर फ़टाफ़ट लोन उपलब्ध करा देते हैं, पेन कार्ड , आईटी रिटर्न सब कुछ हो जाएगा .
कम्मो- इसका मतलब आल् राउंडर हो शिल्पा , सब कुछ जानती हो ...
शिल्पा- नहीं यार , सब कुछ जानती हूँ, वहां ये नहीं पालती, हाँ काम चलाऊ तो सब जानना ही पड़ता है न. तुम खुद भी जान जाओगी , मुझे एक जोक याद आ गया, एक युवती जब गर्भवती हुई तो उसने अपनी सास से कहा कि जब उसको बच्चा पैदा हो तो बता देना, इस पर सास बोली कि फ़िक्र मत कर , जब तुझे बच्चा पैदा होने वाला होगा तो तो तू खुद ही चिल्ला-चिल्लाकर सारे मोहल्ले को जगा डालेगी . तेरे साथ भी ऐसा ही होने वाला है . तू भी इस मुंबई नगरिया में कुछ साल रहने के बाद सयानी हो जायेगी .
वे दोनों एक दुसरे के जिस्म से सटकर आनंद भी ले रही थीं और बातचीत भी करती जा रही थीं.जब शिल्पा ने महसूस किया कि कम्मो कुछ ज्यादा ही कमजोर पड़ती जा रही है उसने उसे गर्म करना शुरू कर दिया, वैसे तो शिल्पा की स्टायल ये थी कि वह आहिस्ता-आहिस्ता प्रेम समबन्ध बनाती थी , धीरे -धीरे गर्म करने के बाद वह एक साथ हमला बोल दिया करती थी . मगर काफी देर से वह कम्मो के बदन में ऐसी गर्मी नहीं देख पा रही थी, तभी तो उसने कम्मो की कामेच्छा को गर्म करना शुरू कर दिया . उसके होठों का दीर्घ चुम्बन लेने के बाद बोली-
- आह ... बहुत आनंद आ रहा है . तू बड़ी नमकीन है कम्मो, तेरी खामोशी इस तरह अच्छी नहीं लगती .
शिल्पा- तुम भी कम नहीं हो , काफी देर मै तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी. सोचती थी कि पहल तुम करो तभी जवाब दिया जाए . क्योंकि फिलहाल तो मै तुमको हेई फोलो कर रही हूँ ना.
इसके बाद कम्मो ने शिल्पा के नाभिस्थल पर दांत गड़ा दिए , एकदम हलके से. इतना कि मजा भी आ जाए और दुःख भी न हो . और सचमुच शिल्पा को मजा आ गाया था . वह उसकी नरम , मुलायम जाँघों को सहलाने लगी .

कम्मो इतने जोश में आ गयी को उसने शिल्पा को अपनी बांहों में मजबूती के साथ कैद कर लिया और उसके ऊपर आ गयी . इस बार वह शिल्पा का अपनी जवाने के जलवे दिखाना चाहती थी . फिल्म खत्म हो गयी , मगर उसके कामोत्तेजक सीन कम्मो और शिल्पा के जेहन में घूमने लगे . शिल्पा अब कम्मो की गोलाइयों को आहिस्ता-आहिस्ता दबा रही थी. दोनों ही सुख के सागर में गोते लगाने के लिए बेताब थीं . दोनों रेगिस्तान में प्यासे मुसाफिर की तरह तड़प रही थीं.










Thursday, May 20, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१२

तुम्हारे रहते भी अगर फ़िक्र की जाए तो तुम्हारा मतलब ही क्या रह जाएगा ?
शिल्पा - आज तो तुमने मेरे मुंह की बात छीन ली , अगर मै कहती तो यही कहती. मेरे और तुम्हारे विचार भी अब मेल खाने लगे हैं, तुमने कम समय में ही इतना सिखा दिया है कि अब तमाम जीवन इसीसे गुजर की जा सकती है
कम्मो- मजाक उड़ा रही हो मेरा . ये बात मुझे कहनी चाहिए , मैंने सीखा है तुमसे , यह मेरा नया जन्म है और इसकी शिल्पकार तुम हो , तुमने ही मुझे एक नई विचारधारा से अवगत कराया है .
शिल्प- हां , लेकिन जिस तरह से तुमने इसे आत्मसात किया वह अपने आपमें एक रिकार्ड है . उससे तो लोगों को सीख लेनी चाहिए , कल तक तुम इतनी सेक्सी कहाँ थीं , सच तो ये है कि सेक्स की तरफ तुम्हारा कोई रुझान ही नहीं था, तुम हताश , परेशान और उलझी हुई जिंदगी जी रही थीं. अब बेफिक्र हो , किसी तरह की कोई चिंता नहीं है तुम्हें, अब तुम आराम से हंसी- खुशी अपना जीवन गुजार सकती हो . मजे लेलेकर ... यह सब तुम्हारी मेहनत की वजह से हुआ, तुमने मुझ पर भरोसा किया, मेरा कहा माना और अपने विशेष अंदाज से तुमने सब कुछ बहुत कम समय में ही अपना लिया. तुम एक अच्छी दोस्त , अच्छी हमदम और अच्छी शिष्या हो .
कम्मो- और आप भी तो किसी महान शिक्षिका से कम नहीं हैं. आपने भी तो कमाल कर दिया है. ऐसा सिखाया है कि कोई और नहीं सिकह सकता , जब तक सिखाने वाला अच्छा न हो , तब तक सीखने वाला कुछ नहीं कर सकता.
शिल्पा- मेरी गुरु हमेशा मुझसे कहती थी कि लंबे समय तक किसी शिकायत को पालने वाला या महज कल्पना लोक में जीने वाला व्यक्ति जब एक के बाद दूसरे प्रणय संबंधों को किसी को आघात पहुँचाने वाली जीत की प्राप्ति का साधन बना लेता है तब मनोविज्ञान इसे उसकी अस्वस्थ प्रवृत्ति का लक्षण मानता है।यह अस्वस्थ तत्व उस व्यक्ति में मौजूद होता है जो बचकाने ढंग से दूसरों पर आश्रित है। अपनी इस निर्भरता को बनाए रखने के लिए वह दूसरों को अपने प्रति प्रेमासक्त बनाने की चाल चलता है। दूसरे शब्दों में वह अपने प्रेमी पर उसी प्रकार प्रभुत्व जमाना चाहता है जैसे दूसरे उस पर शासन करते हैं। इसी प्रकार जब एक स्त्री, स्त्रीत्व की भूमिका निभाने की अपनी क्षमता में संदेह होने के कारण एक प्रेम संबंध छोड़कर दूसरे की ओर बढ़ती है या एक पुरूष ऐसा करता है तब दोनों में अस्वस्थ तत्व दिखता है। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी प्रेम संबंध को तभी स्वस्थ कहा जा सकता है जब वह पूर्णत: पवित्र और मानवीय दुर्बलताओं से रहित हो। ऐसी पूर्णता मानव के लिए संभव ही नहीं है। लेकिन मनोवैज्ञानिकों की इतनी तो दृढ़ मान्यता है कि वहाँ कोई अस्वस्थ मनोवृत्ति काम कर रही है जहाँ कोई व्यक्ति प्रेम की उत्तेजना के माध्यम से अपनी आंतरिक समस्याओं से मुक्ति या राहत पाना चाहता है। मनोवैज्ञानिक हॉर्नी स्वस्थ प्रेम को संयुक्त रूप से जिम्मेदारियाँ वहन करने और साथ-साथ कार्य करने का अवसर बताते हैं। उनके अनुसार प्रेम में निष्कपटता और दिल की गहराई बहुत जरूरी है।मैस्लो ने स्वस्थ प्रेम के जिन लक्षणों की चर्चा की है वे गंभीर और प्रभावी है। वे कहते हैं सच्चा प्यार करने वालों में ईमानदारी से पेश आने की प्रवृत्ति होती है। वे अपने को खुलकर प्रकट कर सकते हैं। वे बचाव, बहाना, छुपाना या ध्यानाकर्षण जैसे शब्दों से दूर रहते हैं। मैस्लो ने कहा है स्वस्थ प्रेम करने वाले एक-दूसरे की निजता स्वीकार करते हैं। आर्थिक या शैक्षणिक कमियों, शारीरिक या बाह्य कमियों की उन्हें चिन्ता नहीं होती जितनी व्यावहारिक गुणों की।

शिंदे के मुताबिक गैस के दाम बढ़ने के चलते बिजली की दरें बढ़ाई जा  रही हैं।

शिंदे के मुताबिक गैस के दाम बढ़ने के चलते बिजली की दरें बढ़ाई जा रही हैं।

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नई दिल्ली। यूपीए सरकार आम आदमी को एक और झटका देने जा रही है। पहले ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों को अब बिजली के लिए भी ज्यादा पैसे चुकाने होंगे।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील शिंदे ने कहा है कि बिजली 1 रुपए प्रति यूनिट की दर से महंगी होगी। शिंदे के मुताबिक गैस के दाम बढ़ने के चलते बिजली की दरें बढ़ाई जा रही हैं।

गौरतलब है कि ये वो बिजली है जो नेचुरल गैस से बनती है। देश के कई राज्यों में नेचुरल गैस से बिजली की सप्लाई होती है। यानि अब उन राज्यों के लोगों को बिजली के लिए एक रुपए प्रति यूनिट की दर से ज्यादा देना होगा।

मालूम हो कि देश की तकरीबन 30 फीसदी बिजली सप्लाई नेचुरल गैस से होती है। दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार के कुछ हिस्से और और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में नेचुरल गैस से बिजली की सप्लाई होती है। इसके अलावा देश के कई और राज्य हैं जिनमें थोड़ा बहुत नेचुरल गैस के बिजली का इस्तेमाल होता है। अब इन राज्यों में बिजली के दाम एक रुपए बढ़ जाएंगे। दूसरी ओर जहां पर भी बिजली की सप्लाई कोयले और हाईडिल से होती है वहां बिजली के दामों पर कोई असर नहीं होगा।

Tuesday, May 18, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१०

शिल्पा ने ये बातें इतने जोश में कहीं कि कम्मो के रौंगटे खड़े हो गए. उसने भी उसी अदा में कहा-
- ठीक है मेरी जान , मैन आज से ही गुलामी के बंधन को तोड़ डालती हूँ, अब मैन जीऊँगी भी तुम्हारे लिए और मरुंगी भी तुम्हारे लिए. मैन तुम्हें अपना पति मानती हूँ, यह जानते हुए भी कि तुम लड़की हो, मै लड़की हूँ, तो भी आज से और अभी से मई तुम्हें अपना सब कुछ मानती हूँ, यह स्वीकार करती हूँ कि तुम्हारी पत्नी बनकर रहूंगी , कभी किसी मर्द के साथ बिस्तर पर नहीं जाउंगी . किसी मर्द के जिस्म के साथ मई अपने इस बदन को कभी अपवित्र नहीं होने दूंगी . यह मेरा वादा है . मै मोहब्बत के लिए जीऊँगी , मोहब्बत के लिए मरुंगी और कभी इस बात का मुझे मलाल नहीं होगा. मै और भी लड़कियों को इस बारे में समझाऊँगी , यस मेरा वादा है .
शिल्पा ने नग्न कम्मो को फिर से अपनी बांहों में भर लीया और उसके मुख को चूमने लगी. इस अपनत्व का नशा इतना ज्यादा था कि वे दोनों फिर से जिस्मानी खेल खेलने की कोशिश करने लगीं. दोनों के होठ आपस में मिले थे और दोनों के हाथ एक दूसरी की गोलाइयों को रगड़ने लगे , काम वासना की आंधी जोर -जोर से चल रही थी. आनंद कि कोई सीमा नहीं थी , वे दोनों एक बार फिर से चरम सुख पाने की कोशिश करने लगीं. यह एक ऐसा आनंद था जिसके लिए वे किसी भी हद तक जा सकती थीं. शिल्पा ने उसे इसका ऐसा चस्का लगाया कि वह अपना सब कुछ भूलकर उसीकी आगोश में समाने के लिए बेताब होने लगी. जब एक दूसरी को चूमते -चूमते उनका जी नहीं भरा तो शिल्पा ने कम्मो को अपनी बांहों में कैद कर लिया और उसको अपनी तरफ खींचने लगी. यह आनंद की ऐसी अनुभूति थी जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता. थोडा रूककर कम्मो बोली-
- मैंने तो सोचा भी नहीं था कि इस खेल में इतना मजा आ सकता है , अब तक तो मेरी भी यही सोच थी कि हम सब किसी न किसी रूप में मर्दों के ऊपर ही निर्भर हैं, मगर अब जाना कि ये होता क्या है ? यहाँ तो हम आपस में भी पूरा मजा ले सकती हैं. खूब सुख भोग सकती हैं.
शिल्पा- हाँ कम्मो, बेशक यही हो सकता है . तुम बहुत प्यारी हो , बहुत अच्छी लगती हो , अब मै कभी भी तुम्हारी प्यारी सूरत को भुला नहीं सकती . हमेशा मुझे याद आती रहेगी तुम्हारी ... हर घड़ी , घर पल...अच्छा , ये तो बताओ कि तुम इतनी जल्दी मेरी बात कैसे मान गयी ? मुझेसे मिलकर तुम्हें कैसा लगा ? क्यों इतना प्यार करने लगी मुझे ? खुद मुझे भी आश्चर्य हो रहा है . तुम गाँव से आयी हुई सीधी -सादी लड़की हो . मगर इस वक्त तुम्हारे विचार बहुत डेंजर हो चुके हैं, तुम परिपक्व हो चुकी हो . एकदम परफेक्ट .
कम्मो- क्योंकि तुम्हें देखते ही प्यार आने लगता है . तुम बहुत प्यारी और अच्छी बात करती हो. तुम्हारा हर शब्द सत्य से साक्षात्कार कराता है . मैंने दिल से तुम्हें अपना मान लिया है .
शिल्पा- मै बहुत खुश हूँ कम्मो . अब हम लोग जल्द ही इस होटल को छोड़ देंगे और फिर कोई छोटा सा फ्लेट खरीद कर वहीं पर रहने लगेंगे , वाहन पर खर्चा कम हो जाएगा . कल मै तुम्हारी नौकरी भी लगवाने की कोशिश करूंगी , दोनों मिलकर आराम से घर की किश्त दे सकते हैं . जबकि अकेली मैन घर नहीं खरीद सकती थी, और ना ही तुम. खरीदने को अगर खरीद भी लेती तो इतना हौसला कहाँ से लाती ? क्या करती घर पर ? अब , जबकि तुम हो तो कोई दिक्कत ही नहीं है .
कम्मो- हाँ, सुना है कुदरत का सबसे अनमोल तोहफा प्यार है। यह बाँटने से और बढ़ता है तथा अपनी भीनी-भीनी महक को प्रकृति में चारों ओर बिखेर देता है। यूँ तो प्यार के प्रेम, इश्क, लव रोमांस, चाहत, मोहब्बत जैसे कई प्यारे नाम हैं पर प्यार की खूबसूरती पर इन नामों का कोई असर नहीं होता है। लोग बदल जाते हैं, पर प्यार कभी नहीं बदलता है। यह तो ऐसा संक्रामक रोग है जो देखने से भी फैलता है और कभी भी, कहीं भी, किसी को भी हो सकता है। कुछ लोग कहते हैं कि प्यार किया नहीं जाता, बस हो जाता है। पर प्यार देखकर, समझकर तो किया ही जा सकता है।












Monday, May 17, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-९

कम्मो- वोव... तुम तो कमाल हो शिल्पा , तुमने वास्तव में कमाल ही कर दिया . ऐसा वर्णन किया जैसे कि मेरी गर्ल फ्रेंड मेरे सामने हे बैठी हो , और मैन उसके साथ सब कुछ कर रही हूँ. बहुत करीब का ज्ञान है तुम्हें , कैसे ?
शिल्पा- हाँ यार ... जब मैन कहती हूँ तो लोग ऐसा ही कुछ कहते हैं, सब जानते हैं कि ये सब आसान नहीं है मगर मेरे पास कोई आये तो मैन समझाऊँ कि मानव स्वभाव को पहचानना बिलकुल मुश्किल नहीं है. समझो कि यह एक कला है , इस कला को समझे बिना कुछ होने वाला नहीं है. मैन तुम्हें हर बात में ट्रेंड कर दूंगी . एक बार तुम्हें शारीरिक सुख दे ही चुकी हूँ, खून सुख मिला होगा. बताया भी तुमने , मगर अब जो अगली बार सुख दने वाली हूँ , उसे भोगकर तुम उस असीम सुख को शब्दों में बयान नहीं कर सकती. सचमुच , ये मेरा दावा है.
कम्मो- मेरी उत्सुकता को इस तरह मत बढाइये , वरना मैन और भी ज्यादा बेचैन हो जाउंगी, प्लीज , जो कुछ करना वो बिना बताए ही करना. मै अब उस सुख को जल्द से जल्द भोगना चाहती हूँ.आओ न , एक बार और इस समनुदर में खो जाते हैं. मै अब इन्तजार नहीं कर सकती .
शिल्पा- इतनी बेसब्री न बनो मेरी जान कम्मो . जिस्म का सुख बड़े हिसाब से भोगना चाहिए , कुछ दिन तक उस खास लम्हों का इन्तजार करना ही होगा , बाद में हम बात करेंगे. फिलहाल चलो, कहीं घूमकर आते हैं, मूड फ्रेश हो जाएगा . बाथरूम में चलो , मई भी आती हूँ, आज दोनों साथ में स्नान करेंगे . ठीक है .शादी के बारे में मुझसे में एक सहेली ने बहुत खास बात कही थी-मानते आ रहे हैं कि प्यार या शादी एक बंधन है। प्यारा-सा बंधन। अजीब बात है कि बंधन भी प्यारा-सा होता है अर्थात हथकड़ी भी प्यारी-सी होती है। अरे नहीं मेरी जान , ये वो बंधन नहीं, ये जरा अलग किस्म का बंधन होता है।
अच्‍छा तो अब बंधन भी अलग-अलग किस्म के होने लगे हैं। सब बेवकूफ बनाने के काम हैं। हथकड़ियाँ चाहे हाथों में लगी हों या पल्लू में, हथकड़ियाँ चाहे लोहे की हों या सोने की, कंगन जैसी हों या गले में मंगलसूत्र जैसी या न मालूम कैसी-कैसी। खुद लगा ली हो हथकड़ियाँ या किसी के प्यार में पड़कर उसी से कहा कि लगा दो हथकड़ियाँ...प्लीज।
प्रेमी की भावना होती है कि तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, पर किसी गैर को चाहोगी तो मुश्किल होगी। अबे मजनूँ मियाँ जब वो तुमको ही नहीं चाहती तो टेंशन काहे को लेते हों। प्यार और चाह में फर्क करना सीखो। प्यार स्वतंत्रता का पक्षधर है और चाहत तुम्हारे दिमागी दिवालिएपन की सूचना। जरा प्यार करके तो देखो। थोड़ा-सा प्यार हुआ नहीं कि अधिकार जताने लग जाते हो। जैसे बस अब ये मेरी है। मेरी के लिए जीना भी तो सीखो, मरने की झूठी कसमें मत खाओ।
आमतौर पर पुरुष का चित्त खानाबदोश होता है। घर बनाना या बसाना तो स्त्री ने सिखाया है वरना यूँ ही जिंदगी मारी-मारी फिरती थी। तब समझो इस मनोविज्ञान को कि प्रेमिका की भावना क्या होती होगी। प्रेमिका हर चीज में स्थायित्व ढूँढती है। प्रेमी की हर हरकत पर वह नजर रखती है कि कहीं बदल न जाए सनम।
इसीलिए तोड़ दो वे सारे बंधन जिसमें प्रेम नहीं। निश्चत तौर पर ऐसा कहना बहुत आसान है लेकिन ऐसी सोच सभी की हो जाएगी तो 99 प्रतिशत संबंध टूट जाएँगे। आजकल की लड़कियाँ सोच-समझकर प्रेम करने लगी हैं। पहले तो बगैर सोचे-समझे प्रेम हो जाता था। आँख मिली नहीं ‍कि प्रेम हुआ, पहले का माहौल भी साफ-सुथरा और विश्वास योग्य था, आजकल जिसने बगैर सोचे भरोसा किया तो समझे लॉटरी जैसा काम है खुल गई तो लाख की वरना जिंदगी खाक तो है ही।
अब सवाल यह उठता है कि प्रेम या विवाह क्या बंधन है? ओशो मानते हैं कि यदि प्रेम नहीं है तो फिर बंधन ही होगा, क्योंकि आपस में प्रेम होना अर्थात स्वतंत्रता और आनंद का होना है किंतु यदि झूठ-मूठ का प्रेम है दिखावे का प्रेम है तो फिर वह प्रेम कैसे हो सकता है, महज आकर्षण, चाहत या समझौता। और यह ज्यादा समय तक नहीं चलता, बहुत जल्द धराशायी हो जाता है। यदि धराशायी नहीं होगा तो जिंदगी एक घुटन के सिवाय कुछ नहीं।

Sunday, May 16, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-८

शिल्पा ने अचानक स्टाइल चेंज कर दी . वह अपना मुंह कम्मो के पांवों की तरफ ले आयी थी. च्पूमते -चूमते उसके होठ कम्मो के यौवन द्वार तक आ गए , जब उसने वहाँ का स्वाद चखा तो दोनों ही बावली हो उठीं. आह ... आह्ह.... की आवाज जोर -जोर से आने लगीं. कम्मो को अथाह सुख मिल रहा था , शिल्पा भी खुशी से सराबोर हो गए, उसनी चिकोटी काटकर कम्मो को भी हरकत में आने को कहा, और फिर सब कुछ ठीक हो गया. वे दोनों कुछ देर बाद ही एक दूसरी में समा गयीं,यह कम्मो का पहला अनुभव था मगर था बहुत बेहतरीन. इतना ज्यादा कि कम्मो तो काम खत्म होने के कई मनित बाद भी उसीसे लिपटी रही . शिल्पा ने पूछा-
-कैसा लग रहा है कम्मो ? शरीर हल्का हुआ कि नहीं ?
कम्मो- सचमुच स्वर्ग जैसा आनंद मिल रहा है . तुमने हमेशा के लिए मुझे जीत लिया है शिल्पा . बहुत-बहुत मजा आया. आज तक जीवन में मुझे कभी इतना सुख नसीब नहीं हुआ. तुमने तो कमाल कर दिया. जादू जैसा कर दिया .
शिल्पा- अब इतनी तारीफ़ भी मत करो , अभी तो शुरुआत है . कल से द्केहना कैसा मजा आता है. अगर तुम चाहो तो ग्रुप में भी इस आनंद को लूट सकती हो. मैन किसी दिन तुमको कुछ खास लड़कियों से मिलवाउंगी , उनमे से कुछ एयर होस्टेस हैं, कुछ मैनेजर रैंक की हैं, आई ए एस भी हैं और बिजनेस करने वाली भी . छोटा -मोटा नहीं बड़ा बिजनेस करती हैं मगर उन्हें रात को मर्द की नहीं बल्कि अपनी जैसी औरतों की ही तलब होती है .
कम्मो- क्यों , उन्हें क्या कमी हैं ? वे चाहें तो अपने लिए अच्छे -अच्छे लड़के भी नौकरी पर रख सकती हैं , वे चाहें तो कुछ भी कर सकती हैं, तो वे क्यों ऐसा कर रही हैं ?
शिल्पा- इस सुख के समुन्दर में जो एक बार डूब गया समझो डूब गया. फिर वह कभी यहाँ से लौटकर कभी नहीं गया. मेरा दावा है कि आज मुझसे सम्बन्ध बनाने के बाद तुम इन पलों को कभी नहीं भूल पाओगी .अब तुम्हें भी इस तरह कछु लड़कियां तैयार करनी होंगी , जो तुम्हारी गर्लफ्रेंड बनेंगी अगर आप भी अपनी गर्लफ्रेंड के होंठों पर मुस्कान देखना चाहती हैं तो फिर पेशे खिदमत हैं उसके लिए कुछ टिप्स, जिससे आपकी वो खुश हो जाएँगी और उनकी खुशी से बढ़कर आपको और क्या चाहिए? उनसे कहें कि वह खूबसूरत है कभी भी उन्हें हॉट या सेक्सी न कहें। उनका हाथ कुछ सेकंड के लिए जरूर थामें। प्यार से उनके सिर को चूमें नींद से जगाने के लिए उनकी ही रिकॉर्ड आवाज को उन्हें सुनाएँ। उन्हें बराबर यह बात कहते रहें कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं।अगर वह परेशान है तो उन्हें गले लगाकर इस बात का एहसास दिलाएँ कि वह आपके लिए कितना मायने रखती है। उनकी छोटी-छोटी बातों का भी ख्याल रखें, क्योंकि यह प्यार का बहुत जरूरी हिस्सा होता है।
कभी-कभी उनके पसंदीदा गाने भी उन्हें सुनाएँ, चाहे आपकी आवाज कितनी भी खराब क्यों न हो। उनके दोस्तों के सभी कुछ समय बिताएँ।उनके नोट्स आप तैयार कर दें। अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से भी उन्हें मिलाएँ, इससे आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।
उनके बालों को प्यार से सहलाएँ, इससे उसे सुकून मिलेगा। कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भरा खेल भी खेलें, जैसे गुदगुदाना, गोद में उठाना, कुश्ती करना।पार्क लेकर घूमने जाएँ और अपने दिल की बातें कहें। हँसाने के लिए जोक्स सुनाएँ।
आधी रात को उनकी खिड़की के नीचे छोटे से पत्थर का टुकड़ा फेंकें और उन्हें बताएँ कि आप उन्हें कितना 'मिस' कर रही हैं। सोते वक्त उनके नीचे गिरते हाथों को अपने हाथों में ले लें।अपने नामों को पेड़ पर लिखकर घेरें। जब वह आप में पूरी तरह खो जाए तो उसे प्यार से चूमें। उन्हें कभी-कभी अपने कंधों पर उठाएँ। उनके लिए फूलों का तोहफा ले जाएँ।
अपने दोस्तों के बीच भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप अकेले में करते हैं।उनकी आँखों में देखकर मुस्कराएँ।

Saturday, May 15, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-७

कम्मो- ये तो मेरे लिए बिलकुल नेई बात है, लड़के लोग भी लड़कियों से शादी नहीं करना चाहते , वो किस तरह के लड़के होते हैं और और क्या ऐसा कर रहे हैं ? आपने बाते कि कुछ लड़कियां तो लड़कों की गुलामी से हमेशा बचने के लिए ऐसा करना चाहती हैं मगर लड़कों के सामने क्या मजबूरी है ?
शिल्पा- बहुत से लड़के भी ऐसे हैं जो लड़कियों के नखरे बर्दाश्त नहीं करते , नहीं चाहते कि कोई जीवन पर उन पर हुक्म चलाये , या वे जीवन भर इस उलझन में फंसें . इसलिए अपना अलग रास्ता चुन लेते हैं. उन्हें गे कहा जाता है . ऐसे लोग बीवी -बच्चों या परिवार के चक्कर में न पड़कर सिर्फ अपने दुःख -सुख देखते हैं.
कम्मो- कमाल है, आपको तो इतना सब पटा है , मैन इन सबसे बिलकुल अनजान हूँ,
शिल्पा- अनजान हो नहीं, थीं, अब तो मैन तुम्हें सब कुछ सिखा दूंगी , काफी कुछ बता भी दिया है , मैंने इस सब पर बहुत लंबा रिसर्च किया है , उसके बाद जान पाई हूँ और अब उस ज्ञान को तुम सब में बाँट रही हूँ. हमारा एक सामाजिक संगठन है , उसका नाम है- 'नारी शक्ति ' . जो लड़कियां हमसे जुड़ती हैं, हम उनको अपने संगठन का सदस्य बनाते हैं और उन्हें अपने विचारों से अवगत कराते हैं, जब वे सीख जाती हैं तो इस विचारधारा को और भी आगे फैलाती हैं.जैसे आज मै तुम्हें शारीरिक सुख दे रही हूँ, साथ में बात भी कर रही हूँ , और इससे आगे तुम्हें सम्पूर्ण सुख दूंगी , खुद भी सुख भोगुन्गी , इसी तरह मामला आगे चलता रहेगा , तुम्हें भी कुछ लड़कियों को ट्रेंड
करना पड़ेगा ताकि वे बिना मर्दों का सहयोग लिए भी सम्पूर्ण सुख संतुष्टि प्राप्त कर सकें
इसके बाद शिल्पा ने लेस्बियन फिल्म की आवाज और बधादी, अब पूरे कमरे में सुस्कारियां गूंजने लगीं. कम्मो का जिस्म अकड़ने लगा. जाँघों के ऊपर खुजली जैसी होने लगी. शिल्पा खुश थी , वह जान गयी कि कम्मो का बदन अब सुलगने लगा है. वासना की आग उसे तपा रही है , तभी तो वह अंदर ही अंदर खुश थी, वे दोनों ही नग्न थीं, कम्मो का जिस्म बहुए सुन्दर था , शिल्पा तीरीफ करते हुए बोली-
- कम्मो, तुम बहुत सुन्दर हो मेरी जान, और ये जो सीने के पर्वत हैं, लगता है हिमालय की चोटियों से भी ऊंचे हैं, इन्हें देखकर मुंह में पानी आ रहा है , इन्हें होठों से स्पर्श करने का दिल कर रहा है , अगर तुम्हें अच्छा लगे तो मेरे साथ भी तुम ऐसा ही कर सकती हो .
कम्मो- सच शिल्पा, काफी देर से मेरी बड़ी इच्छा हो रही थी , मगर मैंने कुछ कहा इसलिए नहीं क्योंको मुझे हिचक लग रही थी.
शिल्पा- तुम बड़ी भोली हो कम्मो, मेरी जान मुझसे लाज -शर्म किसी , तुम भी मेरे जैसी, मैन भी तुम्हारे जैसी. मेरा यह शरीर अब तुम्हारी अमानत है. जैसे चाहो इसको उपभोग कर सकती हो , जिस्म ही क्यों , ये जान भी तुम्हारी है , पैसा भी तुम्हारा है. मैन क्या करूंगी दौलत का ? तुम्हें किसी बात की चिंता करनी की जरूरत नहीं है बस मौज करो . होटल का किराया चुकाने के लिए , किसी और भी खर्चे के लिए मैन बैठी हूँ.
कम्मो- ऐसे ठीक नहीं रहेगा , आप मेरी भी नौकरी लगवा दीजिए . तब मजा आएगा .
शिल्पा- मैंने तो तुम्हें आज भी बुलाया था लेकिन तुम आई ही नहीं , बताओ मै क्या कर सकती हूँ ?
कम्मो- हाँ बात सही है तुम्हारी . लेकिन मई भी क्या करती , आज रात के बारे में तुमने इतनी तारीफ़ एके थी तुमने कि मुझे लालच आ गया, सोचने लगी कि आज यहाँ का काम कर लूं, तुम खुश हो जाओगे , फिर आराम से रत भर ऐश करेंगे .
शिल्पा- चलो कोई बात नहीं , मजा लो भी और दो भी . अब थोड़ी देर के लिए बातें बंद करते हैं और काम शुरू ..
कम्मो ने शिल्पा की गोलाइयों को पहले तो आहिस्ता से सहलाया , फिर उस पर अपने होठ रख दिए , वह आम की तरह मजे ले रही थी. शिल्पा ने भी वही सब किया मगर बहुत ही कलात्मक तरीके से , कम्मो इतनी खुश हुई कि जोर -जोर से शिल्पा को दबाने लगी . काम वासना का तूफ़ान आने को था. दो युवा लड़कियां अपने -अपने अरमान निकालने की कोशिश में थीं.










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Friday, May 14, 2010

प्यार से प्यारा यार , भाग-६

फिल्म का नाम था -लेस्बियन ... दो प्यार करने वाली युवतियों के अन्तरंग दृश्यों को बेहद ख़ूबसूरती के साथ फिल्माया गया था. कम्मो तो उसे अपलक निहारने लगी . शिल्पा उसके उरोजों को आहिस्ता-अहिस्ता दबाने लगी, उसके मन में आग दहकने लगी थी . शिल्पा का का भी कम बुरा हाल नहीं था . वह थर-थर काँप रही थी , साथ ही पूछने लगी-
-कैसा लग रहा है मेरी जान को ? आनंद आ रहा है या नहीं ? फिल्म भी लाजवाब है न ?तुम्हारे मुह से पानी आने लगा ? मैंने कहा था न बहुत मजा दूंगी तुम्हें , ये तो अभी शुरुआत है , आगे -आगे देखो होता है क्या ? तेल देखो, तेल की धार देखो, मैन इन बेवफा मर्दों से तंग आ चुकी हूँ, बड़ा शोषण करते हैं. संगदिल होते हैं एक नंबर के. कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं. ये ऐसे लोग है जो अपने फायदे के लिए तो तलवे चाटेंगे और काम निकल गया तो पहचानना भी भूल जायेंगे ,हमको गुलाम समझेंगे , जीवन भर गुलामी से बेहतर है कि मैन एक मिनिट ही सही मगर आजाद जिंदगी जिउ , भई, गुलामी का जीवन भी कोई जीवन है. स्वर्ग का चपरासी बन्ने से नर्क का राजा बनना मुझे मंजूर है.
कम्मो- तुम ठीक कहती हो शिल्पा. मेरी आँखें खोल दी हैं तुमने बिलकुल सही कहा. मैन अब तुम्हारे विचारों को ठीक से जानने -समझने लगी हूँ.
शिल्पा - मुझे तुमसे यही उम्मीद थी. जानती थी , जल्द ही सब समझ जाओगी . वादा करो कि तुम कभी किसी मर्द से शादी नहीं करोगी , किसीके प्यार के चक्कर में भी नहीं पडोगी. आजाद पैदा हुई हो और आजाद ही इस दुनिया से जाओगी , वादा करो कि गुलामी की इन जंजीरों को तोड़ डालोगी , अब मर्दों की दादा गीरी हम लोग नहीं चलने देंगे
हां, रही बात सुख की, संतुष्टि की, यकीं मानो उसे मैन पूरा करूंगी , तुम्हें सिखाऊँगी भी . और इसके लिए तडपना भी नहीं पडेगा. अब हमारे ग्रुप में हम जैसी बहुत सी लड़कियां जुड चुकी हैं. जिस खूबसूरत लड़की के साथ रात गुजारना चाहो, गुजार सकती हो. यहाँ दोनों को सामान सुख मिलता है. किसीको हीन भावना का शिकार नहीं होना पड़ता . किसियो किसीके सामने झुकना नहीं पड़ता. सब लोग अपनी मर्जी के मुताबिक़ मजे लूटते हैं.
कम्मो- अच्छा , क्या आप लोगों ने ग्रुप बना रखे हैं ?
शिल्पा- हाँ, बहुत ग्रुप हैं. टेंशन मत लो. हमारे ग्रुप में हर शहर में लड़कियां हैं. जहां जाओगी , तुम्हें मिल जायेंगी. हमारा एक ही मिशन है, मर्दों की गुक्लामी से मुक्ति और मनचाही संतुष्टि. हम अपने हाथ जगन्नाथ बनाने में विश्वाश रखते हैं, ऐसा करना कानूनी गुनाह भी नहीं है. हम ना तो अश्लील हरकतें करते हैं और ना ही किसी की इच्छा के विरुद्ध कुछ किया जाता है. इससे हमें अपने कैरियर बनाने में , उसे ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद मिलती है. हम पूरी तरह से इंडीपेंडेंट हो जाते हैं, हमको किसी तरह का कोई तनाव नहीं होता अगर तुम मेरी पत्नी बननी स्वीकार करती हो तो घर पर हम दोनों मिलकर काम करेंगी, झाडू, चौका -बर्तन, कपडे धोना सब कुछ साथ
मिलकर करेंगे. तो हम दोनों को भी कभी ये एहसास नहीं होगा कि हम् में से कोई एक छोटा है और कोई बड़ा .
कम्मो- यहाँ मैन आपको ज़रा रोकना चाहूंगी , समलैंगिक रिश्तों को अभी तक हमारे समाज में तो जगह नहीं मिली है. सब लोग इसे घटिया और गिरी हुई नजरों से देखते हैं. उसका क्या ?
शिल्पा- उसका क्या कुछ नहीं ... जब कोई हमारी परवाह नहीं करता तो हम किसी की परवाह क्यों करें ?
कम्मो- हाँ, ये भी बात सच है. तब तो इसे कानूनी मान्यता मिली हुई होगी , कि वो भी नहीं ..
शिल्पा - कई बार माननीय अदालत ने सम्लैंग्की संबंधों के पक्ष में दलीलें दी हैं, वैसे भी जो लोग विरोध करते हैं उन्हें भी इस काम को करने में कोताही नहीं होती , सिर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी ऐसे कम नहीं जो आपस में ही सम्बन्ध बनाकर खुश है. वे लोग लड़कियों से शादी करना ही नहीं चाहते ..










Thursday, May 13, 2010

कम्मो- लेकिन हम दोनों तो लड़कियां हैं, फिर ये कैसा मिलन ? असली मिलन तो अभी भी बाकी ही रह जाएगा .
शिल्पा- नहीं मेरी जान कम्मो, ऐसा नहीं है , मैन तुम्हें वही तो बताने और समझानी की कोशिश कर रही हूँ कि ऐसा बिलकुल नहीं होगा , जब कुदरत ने हमको लड़कियों के जिस्म में भेजा है तो हमारा फर्ज है कि हम इसे इंजॉय करें, कभी कुदरत को चेलेंज नहीं करना चाहिए . कुदरत चाहती हैं कि हम लोग पिछले किसी जन्म में नहीं मिल पाए तो इस जन्म में मिल जाएँ. इससे कुदरत भी खुश होगी और हमारी अतृप्त आत्माओं को भी सुकून होगा. तृप्ति मिल जायेगी. मैन करूंगी हर कमी को पूरा. तुमको एहसास ही नहीं होगा कि तुम किसी लड़का के साथ नहीं बल्कि लड़की के साथ हमबिस्तर हो रही हो.
कम्मो उसकी बातों को बड़े ध्यानस इ सुन रही थी, यही वजह थी कि उसकी उत्सुकता निरंतर बढ़ती जा रही थी. उसे शिल्पा का प्रस्ताव भी अच्छा लग रहा था , और उसकी बातें भी . हर शब्द से शहद टपक रहा था , वह जानती थी कि लड़के के साथ सम्बन्ध बनाने में जितनी परेशानिया हैं, उससे ज्यादा सम्बन्ध बनाने के बाद की टेंशन होती है, लड़की के साथ ऐसा कोई नुक्सान नहीं होता . वह जानती थी उन दोनों को कोई गलत नजर से देखने वाला भी नहीं है. कोई शक नहीं करेगा , जबकि किसी लड़के के साथ अगर वह अकेली रहती है, एक ही कमरे में सोती है तो कोई भी इंसान उनको गलत निगाहों से देखेगा , बदनाम कर डालेगा. और फिर उस लड़के का भी क्या भरोसा ? बहुत से लड़के पहले तो लड़कियों को अपने जाल में फंसते हैं और जब लड़की उस पर भरोसा करले तो वह उसकी इज्जत लूट लेते हैं और आगे चलकर ब्लेकमेल तक कर डालते हैं. ऐसे कितने ही केस उसने अखबारों में पढ़ रखे थे , तभी तो उसे शिल्पा की बातों में दम नजर आ रहा था . उस समय तो उसने अपनी अति उत्सुकता शिल्पा पर जाहिर नहीं होने दी , मगर बेसब्री से शिल्पा के लौटने का इन्तजार करने लगी, शिल्पा उसे अपनी कंपनी ले जाना चाहती थी ताकि उसे कोई जॉब दिलवाई जा सके मगर कम्मो ने जाने से इनकार कर दिया. अब उसे कोई फ़िक्र भी नहीं थी. शिल्पा ने उसे हर तरह का भरोसा दिला दिया था. खाने का, रहने का और तरह का खर्चा वाहन करने कि इच्छा जताई थी. यहाँ तक कि नौकरी दिलवाने का भी पक्का वादा. इसलिए कम्मो दिन में सो गयी और रात होने का इन्तजार करने लगी . उसने शिल्पा के सभी कपडे पाने हाथों से साफ़ कर दिए थे और होटल के उस कमरे को अपनी तरह से विशेष रूप से साफ़ कर दिया था. उसने कमरे में एयर फ्रेशर भी छिड़क दिया ताकि खुशबु पूरे कमरे में महक सके.
आखिर वही हुआ जिसका उसे अंदाजा था . शिल्पा ने कमरे में जैसे ही कदम रखा उसकी तबियत खुश हो गयी. आते ही उसने कम्मो को अपनी बांहों में पकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगी . कम्मो के बदन में करंट सा दौड़ने लगा. काफी देर तक वह उससे प्यार करती रही फिर उसे एक डीवीडी दिखाते हुए बोली- -
- मैन आज तुम्हारे लिए यह गिफ्ट लाई हूँ. इस डीवीडी को लगाओ , फिर देखना तुम जैसे हवा में उड़ने लगोगी , थोड़ी देर के बाद कब कम्मो उस डीवीडी को चालू करने में कामयाब हो गयी तो सचमुच उसने खुद को हवा में उड़ते हुये पाया. एक लड़की पूरी तरह निर्वस्त्र लेटी हुई थी, फिर एक दूसरी लड़की आई , उसने पहली वाली लड़की के होठों को किस करना शुरू कर दिया, कुछ ही पलों में उन् दोनों ने कामोत्तेजन आहें भरनी शुरू करदीं कम्मो हिल गयी , वह सावधानीपूर्वक बैठ गयी. शिल्पा ने फोन कर होटल के मैनेजर को बता दिया आता कि उन्हें किसी भी हालात में डिस्टर्ब न किया जाए. कम्मो ने शिल्पा की निगाहों में अपनी निगाहें डाल दीन, पलक झपकते ही शिल्पा उसके होठों को अपनी जीभ से चाह्टने लगी. उत्तेजना की जोरदार आंधी चलनी शुरू हो गयी.











Wednesday, May 12, 2010

प्यार से प्यारा यार , भाग-४

कम्मो को शिल्पा की बातें बहित अच्छी लगने लगीं. वह बोली-
- तुम मेरी पक्की सहेली बन चुकी हो, क्यों न हम दोनों इसी कमरे में सो जाया करें, इससे हम खूब सारी बातें भी कर सकेंगे और एक साथ सो भी सकते हैं. इससे होटल के इस कमरे का किराया भी कम हो जाएगा. हम दोनों बाँट लेंगे आपस में , बोलो क्या बोलती हो ? यहाँ पर हम दोनों साथ रहेंगे तो कहीं ठीक सी जॉब भी ढूंढ सकते हैं.
शिल्पा - सच कम्मो, तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली यार . मुझे तुम बहुत पसंद हो, मैन भी मुंबई में अकेली ही रहती हूँ, यहाँ जिस रिश्तेदार के पास रहती हूँ उसकी पत्नी रोजाना टांय-टांय करती रहती है . इससे अच्छा तो यही होगा कि हम दोनों यहीं पर रहने लगें. काम की चिंता तुम बिलकुल न करो. तुम इतनी सुन्दर हो कि तुम्हें काम मिलने में समय नहीं लगेगा. बस बचना पड़ेगा यहाँ के दिलफेंक लड़कों से...
कम्मो-लड़कों से तो मुझे सख्त नफरत है, मै किसी लड़के का स्पर्श भी पसंद नहीं करती , अगर लड़कों से मजबूरी में हाथ भी मिलाना पड़े तो दिल में टूट -फूट सी होने लगती है. पता नहीं क्यों लड़के लोग से मेरा मन घ्रणा से भर उठता है . मेरा बस चले तो इन लड़कों से जिंदगी भर कोई रिश्ता नहीं रखूँ.
शिल्पा - सच कह रही हो तुम ? और मेरा स्पर्श कैसा लगता है ? आज रात जब मैंने तुम्हारी सीने की पहाडियों को टच किया तो कैसा लगा ?
कम्मो- आह, बहुत अच्छा , ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे मुंह माँगी मुराद दे दी हो. बड़ा आनंद आ रहा था.
शिल्पा- सच , मैन क्या जानती थी, वरना तुम्हें सम्पूर्ण सुख संतुष्टि देने का इंतजाम करती . मैन हर कला जानती हूँ , बिस्तर पर ऐसा सुख दूंगी कि सारी दुनिया को भूल जायोगी और जीवन कभी शादी करने का ख़याल भी मन में नहीं लाओगी . मुझे भी इन मर्दों से सख्त नफरत है . समाज के हर तबके के लोग महिलाओं की कोख से जन्म लेते हैं और महिलाओं का ही हर जगह शोषण करते हैं. मेरी एक सहेली थी , वह एक लड़के के प्यार के चक्कर में फंस गयी. लड़के ने भोला बनकर पहले उसका विश्वाश लूटा और फिर सब कुछ लूट लिया , जब इससे भी मन नहीं भरा तो उसने मेरी सहेली को ब्लेकमेल करना शुरू कर दिया . उसका एम् एम् एस बनाकर लोगों में बाँट दिया . जानती हो आखिर क्या हुआ ? मेरी सहेली को आत्महत्या करनी पडी. तबसे मुझे इन मर्दों से और भी ज्यादा नफरत हो गयी . सच कहूँ तो मैन इनकी छाया भी बर्दाश्त नहीं करती. ये प्यार और शादी के नाम पर हम लड़कियों को अपना गुलाम बना डालते हैं. ये एक सुख के सिवाय हमें और क्या देते हैं? इनके पास कुदरत ने एक चीज ही तो खास दी है , तो हम भी तो ऐसे हे नहीं हमें भी तो कुदरत ने कुछ दिया ही है . हम भी इन्हें अपने इशारों पर नाचा सकती हैं. ये लोग समझते हैं कि हम इनके बिना प्यार का सुख नहीं ले सकतीं, कबकी इनकी यह भूल है. हम अगर चाहें तो मनचाहा आनंद उठा सकती हैं. आज रात मैन तुम्हें इसका फल भी चखा दूंगी . मेरी गारंटी है कम्मो. मजा आया जाएगा , मैन तो आज रात डर रही थी, कुछ नींद भी आ रही थी वरना ... खैर, कोई बात नहीं पूरी जिंदगी पडी है , हम लोग सारे जीवन भर इस सुख को लूट सकते हैं. इस आनंद के सागर में गोते लगा सकते हैं.
कम्मो-तुमने तो रात के सुख का वर्णन ऐसे किया है कि मेरी इच्छाएं काबू में नहीं आ रही , सोचती हूँ कि जल्दी से रात हो जाए और जसा तुमने बताया है , उस आनंद को भोगा जाए, क्या इस सुख को मैन अकेली भोगुन्गी या तुम भी इसमें शामिल हो सकती हो ?
शिल्पा - अरे पगली मैन कहाँ चली जाउंगी , मैन खुद भी मजा लूंगी , युम फ़िक्र मत कर . और इतनी उतावली भी मत हो , अब तो मैन रोजाना तुम्हारे साथ रहूंगी. आज तुम चाहो तो मेरे ऑफिस चल सकती हो , मैन तुम्हारे लोइए काम की शिफारिश करती हूँ, अगर वाहन काम लग गया तो हम दोनों को वाहन भी साथ रहने का मौक़ा मिल जाएगा. मेरी आँखों के सहारे ही रहोगी . सच कहूँ तो तुम्हें देखते ही मुझे कुछ-कुछ हो गया था , मेरा दिल कहता है कि तुम किसी पूर्व जन्म की बिछड़ी हुई साथी हो . शायद तुम पिछले जन्म में मेरी प्रेयसी रही होंगी , हम दोनों मिल नहीं पाए होंगे , और इस जन्म में मुलाक़ात हो गयी.











Tuesday, May 11, 2010

pyaar se pyara ... bhag-3

, भाग-३

हर लड़का समय-समय पर इस बात के संकेत अवश्य देता है कि वह अपने स्वतंत्र जीवन को छोड़ने के लिए तैयार है या नहीं? मसलन, आप उसे अपनी सहेली की शादी में शिरकत करने के लिए आमंत्रित करती हैं, लेकिन वह कोई न कोई बहाना बनाकर उस शादी में शामिल नहीं होता। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि अभी वह स्वयं शादी के लिए तैयार नहीं है। उसकी इच्छा को जानने के और भी तरीके हैं।
जब वह शुरू-शुरू में डेटिंग कर रहा था तो आपकी आदतों से उसे कोई समस्या नहीं थी। लेकिन जब से आपने शादी का संकेत दिया है तब से वह आप में खामियाँ निकालने लगा है। इसका भी सीधा अर्थ यह है कि वह अभी शादी करने के मूड में नहीं है। डेटिंग के दौरान वह अपना अधिकतर खाली समय आपके साथ गुजारना पसंद करता था लेकिन जब से आपने शादी का जिक्र छेड़ा है तब से वह अपने दोस्तों के साथ अधिक समय गुजारना पसंद करता है।
डेट की रातों को दोस्तों की महफिलों में तब्दील करने का मतलब यह है कि वह आपको बतलाना चाह रहा है कि अब आप उसकी वरीयता सूची पर नहीं हैं और वह आपसे शादी नहीं करना चाहता।
इन सुझावों से आपको अंदाजा हो गया होगा कि आपका ब्वॉयफ्रेंड शादी करने के लिए तैयार है या नहीं? अगर वह शादीशुदा जीवन में प्रवेश करना चाहता है, तो उसके डर को किस तरह से निकाला जाए और आप उसे किस तरह से सहयोग करें कि आपका जीवन खुशहाल हो सके।
कम्मो -जानती हो लड़के क्या सोचते हैं ? रमेश नाम का एक लड़का अपने साथियों को टिप्स देते हुए कह रहा था -
-अगर आप भी अपनी गर्लफ्रेंड के होंठों पर मुस्कान देखना चाहते हैं तो हम बताते हैं उसके लिए कुछ टिप्स, जिससे आपकी वो खुश हो जाएँगी और उनकी खुशी से बढ़कर आपको और क्या चाहिए? तो लीजिए- उनसे कहें कि वह खूबसूरत है कभी भी उन्हें हॉट या सेक्सी न कहें। उनका हाथ कुछ सेकंड के लिए जरूर थामें। प्यार से उनके सिर को चूमें नींद से जगाने के लिए उनकी ही रिकॉर्ड आवाज को उन्हें सुनाएँ। उन्हें बराबर यह बात कहते रहें कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं।
अगर वह परेशान है तो उन्हें गले लगाकर इस बात का एहसास दिलाएँ कि वह आपके लिए कितना मायने रखती है। उनकी छोटी-छोटी बातों का भी ख्याल रखें, क्योंकि यह प्यार का बहुत जरूरी हिस्सा होता है।
कभी-कभी उनके पसंदीदा गाने भी उन्हें सुनाएँ, चाहे आपकी आवाज कितनी भी खराब क्यों न हो। उनके दोस्तों के सभी कुछ समय बिताएँ।उनके नोट्स आप तैयार कर दें। अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से भी उन्हें मिलाएँ, इससे आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।
उनके बालों को प्यार से सहलाएँ, इससे उन्हें सुकून मिलेगा। कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भरा खेल भी खेलें, जैसे गुदगुदाना, गोद में उठाना, कुश्ती करना।पार्क लेकर घूमने जाएँ और अपने दिल की बातें कहें। हँसाने के लिए जोक्स सुनाएँ।
आधी रात को उनकी खिड़की के नीचे छोटे से पत्थर का टुकड़ा फेंकें और उन्हें बताएँ कि आप उन्हें कितना 'मिस' कर रहे हैं। सोते वक्त उनके नीचे गिरते हाथों को अपने हाथों में ले लें।
अपने नामों को पेड़ पर लिखकर घेरें। जब वह आप में पूरी तरह खो जाए तो उसे प्यार से चूमें। उन्हें कभी-कभी अपने कंधों पर उठाएँ। उनके लिए फूलों का तोहफा ले जाएँ।
अपने दोस्तों के बीच भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप अकेले में करते हैं।उनकी आँखों में देखकर मुस्कराएँ।
आपकी जो तस्वीर उन्हें पसंद हो उन्हें जरूर दें।उनके साथ डांस करें, अगर म्यूजिक न हो तो भी।बारिश में उन्हें चूमें। हमेशा अपने प्यार का इजहार करते रहें।और हाँ , कभी- कभी जीवन का असली आनंद उठाने से भी नहीं चूकें. लेकिन हिफाजत के साथ. मेरी तो यही राय है, जीवन अनमोल है , एक बार ही मानव देह मिलती है , इसका जमकर फायदा उठाना चाहिए. अगर साथी बिस्तर पर कमजोर हो तो उसे परफेक्स कैप्सूल खिलाने चाहिए . प्रणय क्रिया से पहले ही परफेक्स तेल की शीशी ले लेनी चाहिए . तब देखना किसी यादगार रात गुजरती है. मजा आ जाएगा . सामने वाला भी खुश और अपन भी. धायं यही रहे कि मांस खाओ मगर हड्डियां कभी भी गले से मत लटकाओ .
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