Monday, May 31, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२४
शिल्पा- अब क्या लेकिन ? फिर से कोई सवाल मन में उमड़ने लगा है क्या ? तुम कम्मो कम और सवालों की मशीन ज्यादा लग रही हो . क्या बा है बोलो न , मै बताने की कोशिश करूंगी .
कम्मो- सोचती हूँ कि चलो लड़की तो गोद ले लेंगे मगर उसके भविष्य का क्या होगा , मेरा अर्थ ये है कि जब वो लड़की बड़ी हुई तो उसका क्या होगा ? क्या हम लोग उसकी शादी करेंगे या ?
शिल्पा- अच्छा , मै जानती थी कि तुम्हारे दिमाग में ऐसा ही कोई सवाल पनप रहा होगा इसीलिए मैंने हल भी पहले सोच लिया था , मेरा मानना है कि यह इच्छा पर आधारित होना चाहिए , जैसे कि अगर मै किसी लड़के से शादी करना चाहूँ तो निश्चित रूप से मुझे उसी से करनी चाहिए और अगर मै तुम्हारे साथ रहने में खुश हूँ तो किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह मुझसे इस अधिकार को छीने , क्या कहती हो ...
कम्मो- समझ गयी. अगर वह चाहेगी कि किसी अपने साथी लड़के से शादी करे तो स्वागत है , लेकिन उस लड़के के परिजन जानना चाहेंगे कि हमारा रिश्ता क्या है ? तब क्या कहेंगे ?
शिल्पा- मुझे माफ कर मेरी नानी, मत छेड़ इतनी लंबी कहानी. बर्दाश्त नहीं कर पाउंगी , अब कुछ भविष्य पर भी छोड़ दे , या फिर मरने तक के सारे प्लान आज ही कर डालेगी .
कम्मो- ठीक है, अगर ऐसी कोई बात है तो कोई प्रोब्लम नहीं है .
शिल्पा- अब क्या करोगी ? तुम मौज ले चुकी हो, मै भी खुश हूँ. अब नहाने के बाद सोना है याफिर किसी क्लब में चलोगी ?
कम्मो- क्लब में जाती हैं ? चलो , चलकर देखती हूँ वहाँ पर कितना सुख मिलता है . वहां का टेस्ट चख लेती हूँ.
शिल्पा- दरसल हमको नयी -नयी सहेलियां वहीँ पर मिलती हैं. बातचीत , हाव भाव से पता चल जाता है . वहीँ दोस्ती होती है और फिर यह सिलसिला आगे बढ़ता रहता है. क्या तुम्हें पीने -पिलाने का शौक है ?
कम्मो- कभी नहीं, शराब नहीं पीती. हाँ कभी कभार जब बहुत टेंशन होती है तो सिगरेट में सुट्टा मार लेती हूँ.
शिल्पा- क्या गज़ब ढाती हो मेरी जान . ऐसा क्यों करती हो . अरे सिगरेट तो शराब से ज्यादा खतरनाक होती है . इससे मुंह का कैंसर हो जाता है और फिर जिंदगी एक तरह से नर्क बन जाती है. भले ही आज हमारे पास कैंसर का इलाज मौजूद है , मगरमरीज को ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है कि उसे जीवन भी मौत लगने लगती है, इसे छोड़ दो यार , आज तुम कभी-कभी सुट्टा लगाने की बात कहती हो . कल को इसकी पूरी तरह से आदत लग जायेगी , तब क्या होगा ? कैंसर जैसा भयानक रोग हुआ तो क्या करोगी ? अल्कोहल लेना भी कोई अच्छी बात नहीं है मगर उसकी तुलना में सिगरेट को मै ज्यादा खतरनाक मानती हूँ.
कम्मो-ओफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ , क्या करूँ फिर ? अब क्या हो सकता है ?
शिल्पा- अभी क्या नहीं हो सकता ? सब कुछ अपने हाथ में हैं. आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है. आज से ही प्रतिज्ञा करो कि कभी बीडी , सिगरेट , गुटका से हाथ नहीं लगाओगी .
कम्मो- चलो वादा किया , आज से सब भूल जाउंगी , तुम कहो तो जीना भी छोड़ दूं मेरी जान.
शिल्पा- शुक्रिया. मुझे नाज है तुम्हारी दोस्ती पर . तुम बहुत अच्छी हो कम्मो. मेरी हर बात मान जाती हो .
कम्मो- जब जीवन साथ-साथ बिताना ही है तो हमें एक दूसरे की बात भी माननी पड़ेगी और फिर तुम मेरे हित की बात ही कहोगी , तुम क्यों मुझे दुखी देखना चाहोगी ?
शिल्पा- हाँ, सच कहती हो , मै हर समय तुम्हारे उज्जवल भविष्य की कामना करती रहती हूँ. मै चाहती हूँ कि तुम्हें कभी कोई दुःख न हो, तकलीफ न हो . तुम सदा इसी तरह चिडिया की तरह चहकती रहो, फूलों की तरह अपनी खुशबु बिखेरती रहो .
कम्मो- मै भी तुम्हारी भलाई के लिए कामना करती रहती हूँ. आई लव यु शिल्पा. लव यु सो मच.
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Sunday, May 30, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२३
कम्मो- ऐसी क्यों कहते हो , ऐसी कोई बात नहीं होती , आपने किसका बुरा किया है यार ? एक सवाल मन में घूमने लगा है, यह अभी-अभी उभरा है और परेशान करने लगा है . सोच रही हूँ कि तुम क्या इसीलिए मर्दों से नफरत करने लगी हो ?
शिल्पा- हाँ भी कह सकती हूँ और ना भी , क्योंकि मै ठीक अतारः से नहीं कह सकती. हो सकता है कि भूमिका वहीं से बननी शुरू हो गयी हो . या शायद किसी और वजह से भी यह सब हुआ हो .
कम्मो- और वो दिल्ली वाला गुप्त रोगों वाला डॉक्टर ? सुरेश ? उसका क्या हाल है ? मुलाक़ात होती है ?
शिल्पा- हाँ, होती रहती है , उससे मुझे सीखने को बहुत कुछ मिला है. वह होशियार डॉक्टर है. अपने काम की सम्पूर्ण जानकारी रखने वाला . उससे गुप्त रोगों और इंसानी स्वभाव के बारे में जानने की सीख ली है मैंने .
कम्मो- क्युआ उसने कभी शादी करने का प्रस्ताव नहीं रखा ?
शिल्पा- वो क्या प्रस्ताव रखेगा ? पहले से ही उसकी दो-दो बीवियां मौजूद हैं. वह अपनी ऑपरेटर को भी नहीं छोड़ता , हर महीने में लड़की बदल देता है. बहुत आशिक मिजाज है .
कम्मो- तुम भी तो कम सेक्सी नहीं हो. तुम्हें भी तो ऐसा ही मर्द चाहिए , जो तुम्हें दिन में कई बार संतुष्ट कर सके.
शिल्पा- सच बात तो यही है , कि मै मर्द से अब शादी ही नहीं कर सकती . मुझे तो तुम जैसी कली से ही प्यार है, लगाव है . अगर तुम साथ हो तो लड़के की जरूरत क्या है ?
कम्मो- और औलाद ? मेरा मतलब है संतान ? चलो ठीक है जिस्मानी सुख तो हम दोनों भोग लेंगी मगर संतान सुख कैसे भोगने को मिलेगा ? क्या तुम ऐसा कोई तरीका जानती हो , जिसमे मर्दों के सहयोग के बिना ही बच्चा पैदा किया जा सके ? मेरे ख़याल से अभी तक ऐसी कोई तकनीक ईजाद नहीं हुई है. उसके लिए तो कुदरत ने हमें उसीका मोहताज बनाकर छोड़ा है .
शिल्पा- हाँ , वो तो है लेकिन हम लोग क्या करेंगे संतान का ? हम एक दूसरे का जीवन भर सहारा बनेंगे .
कम्मो- लेकिन ये जरूरी तो नहीं कि हम साथ-साथ जियेंगे तो मरेंगे भी साथ-साथ . कोई आगे अम्रेगी तो कोई पीछे , उस स्थिति में अकेली क्या करेगी ?
शिल्पा- जिनके बच्चे हैं, वे लोग भी कौन से खुशहाल हैं, मैंने तो उनको भी बदहाल देखा है. जिन लोगों ने अपने कई -कई बेटा -बेटियों को पाल पोसकर बड़ा कर दिया , अब वही बच्चे अकेले माता -पिता को नहीं संभाल सकते .
कम्मो- बात संभालने की नहीं होती, और भी कई बातें होती हैं. जब कोई अपना है तो अपनत्व से कुछ कह भी सकता है , उसका क्या बुरा मानना ?
शिल्पा- मैंने देखा है कि बेटा अपनी पत्नी और बच्चों के लेकर विदेश में सैटल हो जाते हैं और बूढ़ी माँ या पिता को किसी वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं, बस उनके खर्चे भेजकर अपने फर्ज को निभा देते हैं.
कम्मो- हम किसी -किसी की बात कर रहे हैं. सब लोग ऐसे नहीं होते . यहाँ पर श्रवण कुमार जैसे लोगों की भी कमी नहीं, जिसने माता-पिता को कन्धों पर बिठाकर भ्रमण कराया था .
शिल्पा- अरे यार एक तो देश में वैसे ही जनसंख्या बढ़ रही है , तुम और उसे बढाने की बात कर रही हो , हम जैसी लड़कियां कम से कम इस मामले में तो देश की सेवा कर ही रही हैं. और फिर भी अगर तुम बुढापे की लाठी में भरोसा कर ही रही हो और इतना कर रही हो तो एक बात मेरे दिमाग में आयी है . हम लोग चाहें तो किसी बच्चे को गोद भी ले सकती हैं, उसमे क्या बुराई है . किसी अनाथ को सहारा मिल जाएगा . और हम लोगों को बुढापे का आसरा . हम उसके सहारे समय भी व्यतीत कर सकते हैं.
कम्मो- हाँ , ये आइडिया भी बुरा नहीं है . कोई सुंदर सी लड़की गोद भी ले सकते हैं, मगर सेटल होने के बाद . जब हम इस शहर में अपना घर कर लें, अपनी गाड़ी और इतने पैसे कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा सकें .
शिल्पा- बात में दम है मेरी जान.
Saturday, May 29, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२२
कम्मो- वावव... बहुत मजा आ रहा होगा और इंटरनेट की कम रफ़्तार ने सब गुड गोबर कर दिया . तब क्या हुआ ? क्या इंटरनेट का नेटवर्क ठीक हुआ या वार्ता अधूरी ही छूट गयी ? क्या हुआ ?
शिल्प- ओह, कनेक्शन कट चूका था . फिर आगे बात नहीं हो पाईं, मगर जितनी भी बातें हुई , वो हमेशा याद रखने लायक थीं, तभी तो मै उन बातों का ऐसे वर्णन कर रही हूँ, जैसे कि सब कुछ अभी- अभी ही घटा हो. सब कुछ दिल के कमरे में कैद हो गया है . अच्छा ही तो है . मै किसीको भी बता सकती हूँ और बताते वक्त भी उसे इंजॉय दे सकती हूँ. न जाने क्यों कम्मो, मगर अब मेरी कुछ ऐसी आदत हो गयी है कि छोटे से छोटा पल भी बेकार नहीं जाने देती. उसमे भी कोई न कोई आनंद का बहाना खोज ही लेती हूँ.
कम्मो- एक बात कहूँ शिल्पा, बहुत सेक्सी हो तुम ? क्यों ऐसा मेरी जान ? मैंने सुना है कि बचपन में जब कोई बलात्कार की शिकार हो जाती है या फिर जिसको बचपन में सेक्स का मजा लूटने की लत लग जाती है वह आगे चलकर खूब सेक्सी हो जाती है . अगर तुमने शादी की होती तो एक मर्द के बस में नहीं था तुम्हें संतुष्ट करना ... सच कघ्ती हूँ.
शिल्पा- मुझे सेक्सी कहलाना पसंद है मेरी जान. मै चाहती हूँ कि लोग मुझे इस नाम से पुकारें, मै चाहती हूँ कि तुम भी मेरी तरह सेक्सी बनो. और हाँ, तुम्हारा कहना सहीए है या नहीं ये तो पता नहीं मगर मेरे साथ जरूर ऐसा हुआ था. जब मै छोटी सी उम्र की थी तभी मुझे कुछ लोगों ने उठा लिया था और सात दिनों तक चार लोगों ने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया था.
कम्मो- चार लोगों ने और सात दिनों तक ? कुछ हुआ तो नहीं ?
शिल्पा- हुआ था, तकलीफ बहुत हुई थी मगर वे लोग बहुत संभाल-संभालकर करते थे . मेरे अंग पर कुछ खास करें भी लगाते थे और कुछ भी करने से पहले वे मुझे एक पैग शराब पिलाते थे . तीन लोग मुझे अच्छी तरह से पकड़कर रखते थे और एक मेरे पूरे जिस्म को चाटता था.इसके बाद जब वह पूरी तरह तैयार हो जाता तब बहुत सावधानी बरतते हुए वह सम्बन्ध बनाता था . इसके बाद वे मुझे आराम करने देते और फिर इसके एक घंटे के बाद दुसरा व्यक्ति इसी तरह सम्बन्ध बनाता था . एक दिन -रात में वे एक -एक बार ही सम्बन्ध बनाते थे . उनमे से एक डॉक्टर भी था . जब वे मेरे जिस्म से अच्छी तरह खेल चुके होते तब वे उनमे से एक डॉक्टर मेरा चेक अप करता था और दर्द न हो इसके लिए कुछ दवाएं भी देता था.
कम्मो- कमाल है , ऐसे-ऐसे लोग भी होते हैं . कौन थे वे लोग ?
शिल्पा- पता नहीं, मगर दिखने में वे ठीक-ठाक लगते थे , हाँ शराब बहुत पीते थे. मैन उनसे कोई फरमाइश करती तो तुरंत पूरी कर दिया करते थे, उन्हें मेरे जिस्म से खेलने में बहुत मजा आता था. उनमे कई बार आपस में भी झगडा हुआ, मेरे ऊपर. वह डॉक्टर चाहता था कि मै सिर्फ उसकी अकेले की संपत्ति बनकर रहूँ, जब अन्य लोग चाहते थे कि जिस तरह वे चाह्रों मुझे अप्रहत करके लाये थे, उसी तरह वे चारों ही मेरे साथ मौज मस्ती करें.
कम्मो- तो क्या वे कोई अपराधी थे ? और उन्होंने तुम्हें रखा कहाँ था ?
शिल्पा- उन्होंने मुझे एक विशाल बंगले में कैद करके रखा था, हांलाकि वहां सभी सुख सुविधाएँ थीं मगर वहां से भागने का कोई रास्ता नहीं था .
कम्मो- तो तुम कैसे कामयाब हुई आने में ? और कुछ अनुमान लगाया वो लोग के बारे में ?
शिल्पा- शायद वे लोग कोई बिजनेस करते थे साथ में उनका वैश्या व्यवसाय का भी काम रहा होगा . ऐसा लग रहा था , वे मुझे भी शायद जिस्म की मंदी में उतारने के लिए ही लाये थे और शायद इसी कारण मुझे उसी काम की ट्रेनिंग दे रहे थे ताकि मै कोई आनाकानी न करू और आराम से ग्राहक के साथ सो सकूँ , मगर ...
कम्मो- मगर क्या मेरी जान ?
कम्मो मगर मैन वहां से भाग आयी, तुम यह जानने के लिए उत्सुक हो कि मैंने उन्हें चकमा कैसे दिया ? बताती हूँ, वो जो डॉक्टर था, वह मुझे चाहने लगा था उसीने अपने सथोयों से गद्दारी की और मुझे वहां से भगा दिया.
कम्मो- तो क्या फिर कभी मुलाक़ात हुई उस डॉक्टर से ?
Friday, May 28, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२१
शिल्पा- वाह प्रोफ़ेसर , कमाल कर दिया आपने तो . ऐसा आनंद दिया है कि जैसे हम दोनों एक बिस्तर पर ले रहे हों.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम यकीन करोगी अगर मै ये कहूँ कि मै सम्पूर्ण सुख भोग चूका हूँ . मै संतुष्ट हो चूका हूँ.
शिल्पा- क्या बात है प्रफेसर , मै भी बस यही कहने वाली थी . हम लोग दोनों ही संतुष्ट हो चुके हैं लगता है दोनों की संतुष्टि का समय भी वही है . यानि एक ही टाइम पर दोनों ने चरम सुख प्राप्त किया है.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम्हारा ऑनलाइन होने का यही समय होता है ? या किसी और टाइम भी आती हो ?
शिल्पा- बस यही . रात को ही मुझे समय मिल पाता है, ऑफिस में तो इस तरह की पर्सनल बातें कर नहीं सकते इसलिए अपने कमरे में ही करती हूँ. अब मै आराम से सो सकती हूँ .
प्रोफ़ेसर- ओह, यहाँ पर सुबह का समय है , आज का दिन शायद मेरे लिए अच्छा रहेगा क्योंकि शुरुआत अच्छी हुई है और एक इन्डियन कहावत ही है कि 'अंत भला तो सब भला ' . आज मै बहुत खुश हूँ. और हाँ, क्या तुम अन्य दोस्तों से भी इस तरह की सेक्स चैत्निग करती हो ?
शिल्पा- हां, मुझे मजा आता है, और ज्यादातर ऑरकुट फ्रेंड भी मुझसे यही उम्मीद करते हैं. वे मुझसे सेक्स चैटिंग ही करना चाहते हैं, जब शुरुआत में बात करते हैं तो बहुत धर्मात्मा बनते हैं लेकिन जब फिसलते हैं तो थमने का नाम भी नहीं लेते . गिरते चले जाते हैं.
प्रोफ़ेसर- हाँ, बहुत लोग होते हैं ऐसे .क्या तुम मेरे सामने मर्दों को दुत्कारना चाहती हो ? करो करो , जो करना है वो करो , बस इतना जानलो कि लड़कियां भी कुछ कम नहीं होतीं, मै ऐसी कई लड़कियों को जानता हूँ जो रोज मुझसे सेक्स चैटिंग करने का आग्रह करती हैं और मै बहुतों का आग्रह ठुकराता भी हूँ. क्योंकि अपने लेबल के पार्टनर के साथ ही आप १५ से २० मिनट गुजार सकते हैं. वैसे इस तरीके के बारे में तुम्हारी क्या राय है ? जहां तक मेरी अपनी बात है , मुझे खूब आनंद आता है . इसमें बुराई क्या है ? न तो किसी बीमारी का डर और ना ही कोई दूसरा खर्चा. जिस खर्च से इंटरनेट चल रहा है , वही तो है .
शिल्पा- मुझे भी यह आधुनिक तरीका पसंद आ रहा है . हम लोग वीडियो की मदद से एक दूसरे को आसानी से देख पा रहे हैं. बात कर रहे हैं, और क्या चाहिए . मुझे आप बहुत पसंद हैं प्रोफ़ेसर . अगर आप इंडिया आते हैं, तो मुझसे मिलिए , तुम्हें अपने पास पाकर मुझे खुशी होगी.
प्रोफ़ेसर- जी, शुक्रिया. तो क्या वहाँ आने पर भी हम लोग इस खेल को खेल पायेंगे , करीब से ?
शिल्पा- शायद, क्योंकि पास आने पर विचार बदल भी सकते हैं, बिस्तर पर सुख भले ही नहीं दे सकूँ मगर वैसे आपके साथ ही रहूंगी, हम लोग खूब बातें करेंगे , घूमेंगे , फिरेंगे , मौज मस्ती करेंगे . मेरी रिलेटिव कला बड़ा घर है , रहने -सहने , खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं होगी . सब मेरी तरफ से रहेगा , यहाँ तक कि घूमना -फिरना भी.
प्रोफ़ेसर- इसके लिए शुक्रिया. मै भी इंडिया आना चाहता हूँ, मेरी भी बहुत हसरत है कि एक बार वहाँ जरूर आऊ.
शिल्पा- आपका स्वागत है प्रफेसर . मेरे घर में आपका स्वागत है .
प्रोफ़ेसर- अच्छा होता तुम मुझे बिस्तर के प्यार के लिए भी आश्वश्त करती , शायद तब मै और ज्यादा उत्साहित होता. वैसे आपका भी यहाँ स्वागत है. आप आ सकती हैं मेरे अपने घर में रह सकती हैं मेरी गाड़ी में सिर कर सकती हो , किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी .
शिल्पा- थेंक यूं . क्या कर सकती हूँ आपकी गाड़ी में , सिर ?
प्रफेसर- ओह सोरी , मै सफर लिखने वाला था और सिर लिख गया.
शिल्पा- अब क्या करेंगे आप ? पेट के नीचे की भूख तो शांत हो गयी , अब ?
प्रोफ़ेसर- अब जाऊंगा कोलेज . वहीं पर दोपहर का भोजन करता हूँ. मै इस घर में अकेला रहता हूँ. अभी शादी भी नहीं की. मेरी खाना बनाने वाली सिर्फ शाम के समय आती है. दोपहर का खाना हमेशा कैंटीन में ही खाता हूँ.
शिल्प- सोरी प्रोफ़ेसर , मेरा नेटवर्क बहुत कमजोर हो रहा है. कुछ प्रोब्लम है .
Thursday, May 27, 2010
जान से प्यारा यार हमारा , भाग-२०
शिल्पा- तुम्हें भी हवा लग चुकी है मेरी जान. आज खूब आनंद उठाया है, कल इससे भी ज्यादा सुख दूंगी , तुम्हें बाते था न ग्रुप सेक्स के बारे में . हमारे यहाँ पर भी अब इसका चलन जोर पकड़ने लगा है .
कम्मो- हाँ, शायद किसी देश में एक प्रोफ़ेसर भी ग्रुप सेक्स के लिए पार्टियां आयोजित करने के जुर्म में पकड़ा गया था,उसे कुछ साल की कैद भी हुई थी, मजा है तो सजा भी है , उसे कौन भुगतेगा ? वैसे उसने दलील दी थी कि उसने व्यसक लोगों को उनकी इच्छा से सेक्स के लिए आमंत्रित किया था , मगर आखिरकार उसे सजा हुई . शायद उसने अगली अदालत में सजा के खिलाफ अपील भी की है. हार मानने वाला नहीं है प्रोफ़ेसर .
शिल्पा- ये लोग इतनी सेक्स पावर कहाँ से लाते हैं , जो एक रात में कई -कई साथियों को संतुष्ट कर देते हैं?
कम्मो- परफेक्स है न. परफेक्स कैप्सूल खा-खाकर ताकत पैदा करते हैं. इससे जोश बढ़ जाता है और जूनून भी. सेक्स करने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है . यह भारत की दवा है मगर अब धीरे -धीरे इसकी दीवानी पूरी दुनिया हो रही है.
शिल्पा- तुम्हें कैसे पता चला ये राज ? क्या तुम भी उसके संपर्क में हो ?
कम्मो- हाँ, तो क्या हुआ ? आजकल ऑरकुट , फेसबुक , ट्विटर से पूरे वर्ड के लोगों से आसानी से दोस्ती बनाई जा सकती है. हम लोग अक्सर चैट करते थे , प्रोफ़ेसर मुझे ग्रुप सेक्स के अपने अनुभव सुनाया करता था. यहाँ तक कई बार हम चैटिंग के द्वारा सेक्स का मजा भी लिया करते थे, वह मैसेज भेजता था -
-फील करो कि मै तुम्हारे कपडे उतार रहा हूँ,आहिस्ता- आहिस्ता तुम नग्न होती जा रही हो. इसके बाद अब ये महसूस करो कि तुम भी जोश में आ गयी हो तुमने मेरे कपडे उतारने शुरू कर दिए हैं. धीरे -धीरे हम दोनों वस्त्रहीन हो रहे हैं. हम दोनों अब करीब आने लगे हैं, तुम मेरे खास अंग को निहार रही हो , तुम उसे सहलाने के लिए बेताब हो , मैंने तुम्हारे यौवन द्वार तक अपनी एक उंगली पहुचा दी है . तुम आह कह उठी हो . तुम्हारे अरमान मचलने लगे हैं, मेरी बांहों में आकार तुम बस बिछ जाना चाहती हो . तुम बेताब हो रही हो ...
शिल्पा- हा, और तुम भी महसूस करो कि मैंने तुम्हारे विशेष अंग को चूम लिया है, इससे वह काले नाग की तरह फडफडाने लगा है . मेरी बेताबी की तरह तुम भी बेताब हो रहे हो. समा जाना चाहते हो मुझमे.
प्रफेसर- आह. अब देखो, तुम मेरे होठों का किस कर रही हो, यह दीर्घ चुम्बन है . बेहद दीर्घ . हम दोनों प्यार के सागर में गोते लगाने के लिए बेचैन हैं.महसूस करो , मेरी साँसे , मेरी धडकन, ये सिर्फ तुम्हारे लिए धड़क रही हैं.
शिल्पा- अब हम दोनों नग्न हो चुके हैं, तुम हो न मेरे साथ ? सुनो, अब हम नग्न हैं. हम दोनों का जिस्म एक दूसरे के जिस्म से सटा हुआ है. हम प्यार करना चाहते हैं. इश्क की इस नगरी में हमारे साथ कुछ मीठी यादें भी हैं वे यादें जो हमें पिछली बार के सम्बन्ध से मिली थीं.
प्रोफ़ेसर. मैन ट्रांसलेटर की मदद ले रहा हूँ, इसलिए जवाब देने में देरी हो रही है. वैसे मैन तुम्हारे साथ हूँ, तुमसे जुडा हुआ हूँ .आखिर आज हमारी सुहागरात जो है. यह शायद पहली बार हो रहा है कि तुम जैसी खूबसूरत और समझदार पार्टनर मेरी बांहों में है. मै कबसे तरस रहा था, तुम जैसी साथी के लिए , ऐसे तो तुमसे पहले मैंने बहुत सी कुंवारी लड़कियों के साथ रात बिताई हैं, मगर तुम्हारे साथ जो खास अनुभव है, उसकी कोई मिसाल नहीं/. यह सबसे न्बेह्त्रीन अनुभव है . लगता है जैसे मै हवा में उड़ रहा हूँ.
शिल्पा- अच्छा, मै भी ट्रांसलेटर की मदद ले रही हूँ. क्योंकि मैन भी आपकी भाषा नहीं जानती .
प्रोफ़ेसर- जब आपस में प्यार हो तो भाषा कलोई मायने नहीं रखती , दिल अपने आप कोई न कोई राह निकाल ही लेता है शिल्पा- मेरा दिल तो कैद हो गया है तुम्हारी बांहों में . बहुत सुन्दर हो तुम भी.
Tuesday, May 25, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१८
शिल्पा - चलो अच्छा हुआ , अब मुझे तसल्ली हुई कि मैन ऐसी विद्वान महिला की साथी बन्ने जा रही हूँ , जो निष्पक्ष भाव से सोचती है. लड़का हो या लड़की कोई भेदभाव नहीं रखती हो . दूसरों से भी सावधान रहने की अपील करती हो और अपनों से भी . यह अच्छा ही हुआ मेरी जान. देखा, अब मुझे जान कहने की आदत भी लगती जा रही है, बिलकुल तुम्हारी तरह.
कम्मो - ये क्या कह रही ही, यह तो मेरी वाली आदत है और आप इसे किसी और का नाम कह रही हैं.
शिल्पा- तुम्हारे और मेरे बीच में अब फर्क ही क्या रहा है ? तुम भी मेरी अपनी ही हो चुकी हो . हम दोनों के शरीर एक हो चुके हैं. हमारी आत्मा एक हो चुकी हैं. अब हमें फर्क क्या पड़ता है ? कौन कहेगा कि हम दोनों अलग- अलग हैं ? और अगर कहेगा भी तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला , क्योंकि जब आत्माओं का मिलन हो जाता है तो जिस्म बहुत पीछे छूट जाता है . सच कहती हूँ, मेरी जान. ये आध्यात्मिक बातें हैं. अब अगर तुम्हें कोई तकलीफ होगी तो मैन समझूंगी कि दर्द मुझे हो रहा है . और जब मै यह फील करूंगी तो ऐसा हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है .
कम्मो- वाह, तुम्हारे शब्दों में अथाह शक्ति है शिल्पा. इस शक्ति से भी मेरा साक्षात्कार कराओ न.
शिल्पा -आहिस्ता -आहिस्ता सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा , सब जान जाओगी . अब मेरे बिकुल करीब आ जाओ . इतने करीब कि फिर कोई दूरी ही न रह जाए , बदन में बड़ी अगन सी लगी है .
कम्मो - मै भी बेताब हूँ , बेकरारी ने मेरे जिस्म को अकड लिया है . अब समझ में नहीं आता कि इसे इस तरह कैसे मजा आएगा ? मै तुम्हे कैसे इतना आनंद दे पाउंगी जैसा कि तुम मुझे दिया करता करती थी ... क्योंकि तुमने जब शुरुआत की थी तो बड़ा मजा आया था . इतना मजा मै दे पाउंगी कि नहीं ?
शिल्पा - तुम शुरुआत तो करो मेरी जान, इसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा . ऐसा सुख मिलेगा कि सब रिकार्ड टूट जायेंगे , किसी तरह की कोई दिक्कत मत रखो . उलझन मत रखो, एक राज की बात ये भी है कि इस तरह जो लोग उलझन के शिकार होते हैं , उन्हें सफलता भी कुछ देरी से मिलती है . उलझा-उलझकर . समझी तुम ? इसलिए अभी से इस बात को गांठ बाँध लो और अपने काम में लग जाओ . अपना कर्तव्य पूरा करो .
कम्मो को जोश आ गया. शिल्पा के कहने का तरीका ही ऐसा होता था कि मुर्दे में भी जान आ जाती थी. कम्मो ने सेक्स के कुछ गुण उस फिल्म से भी सीख लिए थे , उसने अब वही तरीके इस्तेमाल करने शुरू कर दिए . वह कम्मो की जीभ का भी चुम्बन ले रही थी. शिल्प उसका भरपूर साथ दे रही थी. दोनों के जिस्म कुछ ही देर में अंगारे की तरह दहक रहे थे . कम्मो पहल करती जा रही थी और शिल्पा उकस समर्थन कर रही थी . और जब उनकी जवानी ज्वालामुखी के तरह दहकने लगी तो शिल्पा बावरी सी हो उठी वह कम्मो की गोलाइयों को जोर -जोर से चूमने लगी . उसकी उँगलियाँ कम्मो के यौवन द्वार पर दस्तक दे रही थीं. सेक्सी आह का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया , और तब तक चलता रहा जब तक उन दोनों सहेलियों के शरीर की गर्मी पूरी तरह शांत नहीं हो गयी, एसी कमरे में भी वे दोनों पसीने से लथपथ थीं. जैसे कोई बहुत बड़ी जंग लड़ रही हों, देखा जाए तो ये जंग थी भई. एक लड़की कुदरत के चुनौती देकर दुसरी लड़की की जिस्मानी भूख को शांत कर रही थी. और इस समय वे दोनों खुश भी दिखाई दे रही थीं. यह सफलता की मुस्कराहट थी. इस खुशी में उन दोनों की हालत ऐसी हो गयी , जैसे सचमुच किसी पति-पत्नी के जोड़े की होती है. शिल्पा ने बाकायदा कम्मो के गालों का चुम्बन लिया और फिर उसके मस्तिष्क को चूमते हुए बोली-
- बहुत मजा आया. तबियत खुश हो गयी यार . तुम अपनी कहो , तुम्हें सुख मिला कि नहीं ?
कम्मो- तुम खुश तो मै खुश , वैसे , जब तुम प्रणय क्रीडा की पहल करती हो तब मुझे सबसे ज्यादा खुशी होती है .
शिल्पा- कोई बात नहीं , अब जब कल मौज मस्ती करेंगे तो उसका नेतृत्व मै करूंगी अब तो खुश हो? काउंटर पर फोन करने दो गिलाश जूस का ऑर्डर दे दो.जितनी ऊर्जा खत्म हुई है, उसकी आधी तो कम से कम मिलनी ही चीहिए .
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Monday, May 24, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१६
Sunday, May 23, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१५
Saturday, May 22, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१४
Friday, May 21, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१३
Thursday, May 20, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१२
नई दिल्ली। यूपीए सरकार आम आदमी को एक और झटका देने जा रही है। पहले ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों को अब बिजली के लिए भी ज्यादा पैसे चुकाने होंगे।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील शिंदे ने कहा है कि बिजली 1 रुपए प्रति यूनिट की दर से महंगी होगी। शिंदे के मुताबिक गैस के दाम बढ़ने के चलते बिजली की दरें बढ़ाई जा रही हैं।
गौरतलब है कि ये वो बिजली है जो नेचुरल गैस से बनती है। देश के कई राज्यों में नेचुरल गैस से बिजली की सप्लाई होती है। यानि अब उन राज्यों के लोगों को बिजली के लिए एक रुपए प्रति यूनिट की दर से ज्यादा देना होगा।
मालूम हो कि देश की तकरीबन 30 फीसदी बिजली सप्लाई नेचुरल गैस से होती है। दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार के कुछ हिस्से और और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में नेचुरल गैस से बिजली की सप्लाई होती है। इसके अलावा देश के कई और राज्य हैं जिनमें थोड़ा बहुत नेचुरल गैस के बिजली का इस्तेमाल होता है। अब इन राज्यों में बिजली के दाम एक रुपए बढ़ जाएंगे। दूसरी ओर जहां पर भी बिजली की सप्लाई कोयले और हाईडिल से होती है वहां बिजली के दामों पर कोई असर नहीं होगा।
Tuesday, May 18, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१०
Monday, May 17, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-९
प्रेमी की भावना होती है कि तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, पर किसी गैर को चाहोगी तो मुश्किल होगी। अबे मजनूँ मियाँ जब वो तुमको ही नहीं चाहती तो टेंशन काहे को लेते हों। प्यार और चाह में फर्क करना सीखो। प्यार स्वतंत्रता का पक्षधर है और चाहत तुम्हारे दिमागी दिवालिएपन की सूचना। जरा प्यार करके तो देखो। थोड़ा-सा प्यार हुआ नहीं कि अधिकार जताने लग जाते हो। जैसे बस अब ये मेरी है। मेरी के लिए जीना भी तो सीखो, मरने की झूठी कसमें मत खाओ।
आमतौर पर पुरुष का चित्त खानाबदोश होता है। घर बनाना या बसाना तो स्त्री ने सिखाया है वरना यूँ ही जिंदगी मारी-मारी फिरती थी। तब समझो इस मनोविज्ञान को कि प्रेमिका की भावना क्या होती होगी। प्रेमिका हर चीज में स्थायित्व ढूँढती है। प्रेमी की हर हरकत पर वह नजर रखती है कि कहीं बदल न जाए सनम।
इसीलिए तोड़ दो वे सारे बंधन जिसमें प्रेम नहीं। निश्चत तौर पर ऐसा कहना बहुत आसान है लेकिन ऐसी सोच सभी की हो जाएगी तो 99 प्रतिशत संबंध टूट जाएँगे। आजकल की लड़कियाँ सोच-समझकर प्रेम करने लगी हैं। पहले तो बगैर सोचे-समझे प्रेम हो जाता था। आँख मिली नहीं कि प्रेम हुआ, पहले का माहौल भी साफ-सुथरा और विश्वास योग्य था, आजकल जिसने बगैर सोचे भरोसा किया तो समझे लॉटरी जैसा काम है खुल गई तो लाख की वरना जिंदगी खाक तो है ही।अब सवाल यह उठता है कि प्रेम या विवाह क्या बंधन है? ओशो मानते हैं कि यदि प्रेम नहीं है तो फिर बंधन ही होगा, क्योंकि आपस में प्रेम होना अर्थात स्वतंत्रता और आनंद का होना है किंतु यदि झूठ-मूठ का प्रेम है दिखावे का प्रेम है तो फिर वह प्रेम कैसे हो सकता है, महज आकर्षण, चाहत या समझौता। और यह ज्यादा समय तक नहीं चलता, बहुत जल्द धराशायी हो जाता है। यदि धराशायी नहीं होगा तो जिंदगी एक घुटन के सिवाय कुछ नहीं।
Sunday, May 16, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-८
उनके बालों को प्यार से सहलाएँ, इससे उसे सुकून मिलेगा। कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भरा खेल भी खेलें, जैसे गुदगुदाना, गोद में उठाना, कुश्ती करना।पार्क लेकर घूमने जाएँ और अपने दिल की बातें कहें। हँसाने के लिए जोक्स सुनाएँ।
आधी रात को उनकी खिड़की के नीचे छोटे से पत्थर का टुकड़ा फेंकें और उन्हें बताएँ कि आप उन्हें कितना 'मिस' कर रही हैं। सोते वक्त उनके नीचे गिरते हाथों को अपने हाथों में ले लें।अपने नामों को पेड़ पर लिखकर घेरें। जब वह आप में पूरी तरह खो जाए तो उसे प्यार से चूमें। उन्हें कभी-कभी अपने कंधों पर उठाएँ। उनके लिए फूलों का तोहफा ले जाएँ।
अपने दोस्तों के बीच भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप अकेले में करते हैं।उनकी आँखों में देखकर मुस्कराएँ।
Saturday, May 15, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-७
Friday, May 14, 2010
प्यार से प्यारा यार , भाग-६
Thursday, May 13, 2010
Wednesday, May 12, 2010
प्यार से प्यारा यार , भाग-४
Tuesday, May 11, 2010
pyaar se pyara ... bhag-3
, भाग-३
जब वह शुरू-शुरू में डेटिंग कर रहा था तो आपकी आदतों से उसे कोई समस्या नहीं थी। लेकिन जब से आपने शादी का संकेत दिया है तब से वह आप में खामियाँ निकालने लगा है। इसका भी सीधा अर्थ यह है कि वह अभी शादी करने के मूड में नहीं है। डेटिंग के दौरान वह अपना अधिकतर खाली समय आपके साथ गुजारना पसंद करता था लेकिन जब से आपने शादी का जिक्र छेड़ा है तब से वह अपने दोस्तों के साथ अधिक समय गुजारना पसंद करता है।
डेट की रातों को दोस्तों की महफिलों में तब्दील करने का मतलब यह है कि वह आपको बतलाना चाह रहा है कि अब आप उसकी वरीयता सूची पर नहीं हैं और वह आपसे शादी नहीं करना चाहता।
इन सुझावों से आपको अंदाजा हो गया होगा कि आपका ब्वॉयफ्रेंड शादी करने के लिए तैयार है या नहीं? अगर वह शादीशुदा जीवन में प्रवेश करना चाहता है, तो उसके डर को किस तरह से निकाला जाए और आप उसे किस तरह से सहयोग करें कि आपका जीवन खुशहाल हो सके।
कम्मो -जानती हो लड़के क्या सोचते हैं ? रमेश नाम का एक लड़का अपने साथियों को टिप्स देते हुए कह रहा था -
-अगर आप भी अपनी गर्लफ्रेंड के होंठों पर मुस्कान देखना चाहते हैं तो हम बताते हैं उसके लिए कुछ टिप्स, जिससे आपकी वो खुश हो जाएँगी और उनकी खुशी से बढ़कर आपको और क्या चाहिए? तो लीजिए- उनसे कहें कि वह खूबसूरत है कभी भी उन्हें हॉट या सेक्सी न कहें। उनका हाथ कुछ सेकंड के लिए जरूर थामें। प्यार से उनके सिर को चूमें नींद से जगाने के लिए उनकी ही रिकॉर्ड आवाज को उन्हें सुनाएँ। उन्हें बराबर यह बात कहते रहें कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं।
अगर वह परेशान है तो उन्हें गले लगाकर इस बात का एहसास दिलाएँ कि वह आपके लिए कितना मायने रखती है। उनकी छोटी-छोटी बातों का भी ख्याल रखें, क्योंकि यह प्यार का बहुत जरूरी हिस्सा होता है।
कभी-कभी उनके पसंदीदा गाने भी उन्हें सुनाएँ, चाहे आपकी आवाज कितनी भी खराब क्यों न हो। उनके दोस्तों के सभी कुछ समय बिताएँ।उनके नोट्स आप तैयार कर दें। अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से भी उन्हें मिलाएँ, इससे आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।
उनके बालों को प्यार से सहलाएँ, इससे उन्हें सुकून मिलेगा। कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भरा खेल भी खेलें, जैसे गुदगुदाना, गोद में उठाना, कुश्ती करना।पार्क लेकर घूमने जाएँ और अपने दिल की बातें कहें। हँसाने के लिए जोक्स सुनाएँ।
आधी रात को उनकी खिड़की के नीचे छोटे से पत्थर का टुकड़ा फेंकें और उन्हें बताएँ कि आप उन्हें कितना 'मिस' कर रहे हैं। सोते वक्त उनके नीचे गिरते हाथों को अपने हाथों में ले लें।
अपने नामों को पेड़ पर लिखकर घेरें। जब वह आप में पूरी तरह खो जाए तो उसे प्यार से चूमें। उन्हें कभी-कभी अपने कंधों पर उठाएँ। उनके लिए फूलों का तोहफा ले जाएँ।
अपने दोस्तों के बीच भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप अकेले में करते हैं।उनकी आँखों में देखकर मुस्कराएँ।
आपकी जो तस्वीर उन्हें पसंद हो उन्हें जरूर दें।उनके साथ डांस करें, अगर म्यूजिक न हो तो भी।बारिश में उन्हें चूमें। हमेशा अपने प्यार का इजहार करते रहें।और हाँ , कभी- कभी जीवन का असली आनंद उठाने से भी नहीं चूकें. लेकिन हिफाजत के साथ. मेरी तो यही राय है, जीवन अनमोल है , एक बार ही मानव देह मिलती है , इसका जमकर फायदा उठाना चाहिए. अगर साथी बिस्तर पर कमजोर हो तो उसे परफेक्स कैप्सूल खिलाने चाहिए . प्रणय क्रिया से पहले ही परफेक्स तेल की शीशी ले लेनी चाहिए . तब देखना किसी यादगार रात गुजरती है. मजा आ जाएगा . सामने वाला भी खुश और अपन भी. धायं यही रहे कि मांस खाओ मगर हड्डियां कभी भी गले से मत लटकाओ .
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