कुंवारी सुहागिन - 28
तुम्हें मेरे घर की हर गतिविधि भी मालूम है, इससे साफ जाहिर होता है की तुम यहीं कहीं आसपास की हो और मेरे आसपास में ऐसी कोई नहीं जिसका इतिहास -भूगाल मैं नहीं जानता ,
बहुत जल्दी मैं गिरफ्तार होने वाला नहीं हूँ, तुम्हारे कहने से भी कुछ होने वाला नहीं है. जब तक लड़की खुद बयां नहीं करती की उसके साथ किसने क्या किया है ?
महिला- अगर मैं ये कहूँ की लड़की बयां दे चुकी है, और वह बयां तुम्हारे खिलाफ है तो ?
पूजन - तो साफ़ हो जाता है की फिर कोई तीसरा व्यक्ति जैसे की आप कुछ कर ही नहीं सकते, एक बार उसने बयां दे दिया तो दे दिया. फिर मैं तुम्हारी धौंस क्यों सहूँ. जों होगा सो होगा , लेकिन
ध्यान रखना अरमान तुम्हारे भी जलेंगे . सुख से तुम भी नहीं रह पाओगी.
महिला- अच्छा, चींटी के पर निकल आये हैं . धमकी दे रहे हो मुझे ? अपने आप से भी मोहब्बत नहीं है क्या ? मैंने तो सुना है की कवि लोग बड़े भावुक होते हैं, मगर तुम्हें देखकर ऐसा लगता है.
तुम्हारी बातों से तो बगावत की बू आ रही है. मैं तुम्हारी मर्दानगी की दीवानी हूँ इसलिए माफ किये देती हूँ . अब आप घर से निकलिए . उस होटल की तरफ बढिए जहाँ के लिए मैंने बताया है.
पूजन- मेरी इतनी जुर्रत की मैं अपनी चाहने वाली से बगावत करूं, मैं तो सोचता हूँ की काश , आपके दर्शन हो जाएँ तो अपनी काम कला से परिचित कराऊँ, मैं सोचता हूँ की जिस अमृता की
आप बार-बार दुहाई देती हैं, उससे भी ज्यादा बेहतरीन तरीके से आपके साथ सेक्स करूँगा. जब तुम मेरी बांहों में होंगी तो मैं तुम्हारे सुर्ख होठों को चूमूंगा , तुम्हारी जीभ से अपनी जीभ स्पर्श करूँगा
, तुम्हारे यौवन के उभारों को सहलाऊंगा , अपनी जीभ से उन्हें चाटूँगा . वह स्थिति जितनी कामुक, जितनी दिलचस्प और जितनी यादगार होगी , उसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकती.
महिला- आह, जितने सेक्सी तुम हो, तुमसे ज्यादा तुम्हारी बातें हैं.
पूजन- हाँ, ये सच है की मैं बेहद रोमांटिक हूँ, यह बात तभी समझ पाओगी , जब तुम मेरे करीब आओगी.
महिला- मैं तो खुद ही तुम्हारी बांहों में समाना चाहती हूँ, मगर इस वक्त नहीं, अभी तो तुम्हें एक इम्तिहान से गुजरना है . मैंने तुम्हारे लिए जिस महिला को तैयार किया है वह भी कम दिलचस्प
नहीं है.वो भी मस्त लड़की है. तुम्हें मनचाहा मजा देगी, तुम जिस तरह चाहो उसका इस्तेमाल कर सकते हो. चाहो तो ऊपर से और चाहो तो नीचे से. उसे कोई ऐतराज नहीं होगा. बस उसे तो
संतुष्टि चाहिए. अगर तुम उसे सम्पूर्ण सुख -संतुष्टि देते हो तो मैं तुम्हारे साथ रात गुजारने पर विचार करूंगी.
पूजन- ऐसा क्या है उस महिला में , जिस पर तुम अपने चाहने वाला का इम्तिहान लेने पर उतारू हो ?
महिला- वो गज़ब की सेक्सी है. एक साथ दो मर्दों को झेल सकती है. अगर वो मुझसे कहती है की तुमने उसे मनमाफिक संतुष्टि दी है तो मैं मान जाउंगी , और खुद ही तुम्हारे आगे आकर
बिछ जाउंगी, अपने आपको समर्पित कर दूंगी.
पूजन- यह परिक्षा तुम खुद क्यों नहीं लेती हो ? अगर मैं फेल हुआ तो गोली से उड़ा देना कोई शिकायत नहीं करूँगा.
महिला- इतना दम है ? इतना भरोसा है अपने आप पर ?
पूजन- नहीं, बस अपने इस नन्हे से परमाणु बम पर. यह हथियार इतना सुन्दर है की तुम्हारी तबियत मचल जायेगी, इसे चूमने को करेगा तुम्हारा दिल.
महिला- धत्त. बड़े वो हो तुम. कैसी बातें करते हो. शर्म-वर्म कुछ है की नहीं ?
पूजन- उसे बेचकर ही तो कविता पाठ करना शुरू किया है. अगर शर्म होती तो वो प्यार कहाँ से मिलता जों इस वक्त तुमसे मिल रहा है.
महिला- जिसे तुम प्यार समझ बैठे हो यह मेरी सलाह भर है. मैं तो तुम्हें वार्निंग दे रही थी.
पूजन- जिस मोहब्बत के साथ तुम बोल रही हो, ऐसे में तो अगर कोई क़त्ल भी कर डाले तो ऐतराज नहीं. अपना पता बताइये मैं खुद चलकर आता हूँ, आपके क़दमों में अपना सर रख दूंगा , फिर चाहो
जैसा करना सर को कलम करना या माथा चूम लेना. अगर उड़ा दिया तो मोहब्बत का मसीहा बन जाउंगा और उठा लिया तो मुकद्दर का सिकंदर. दोनों ही परिस्थितियों में फायदा सिर्फ और सिर्फ मेरा
ही होने वाला हूँ. मेरे लिए एक अदद हसीना का इंतजाम कर ही दिया है तो यह एहसान और दीजिए, अपना पता दीजिए , मैं चला आउंगा . अभी और इसी वक्त.
महिला- बहुत मीठी बात करते हो ?
पूजन- हम लोग इनको प्यारी बातें कहते हैं. तुम खुद इतनी प्यारी हो की प्यारी बातें भी अपने आप निकल आती हैं.
No comments:
Post a Comment