नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में नाबालिग से बलात्कार के बाद जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक नासिक में एक नाबालिग से तीन लड़कों ने बलात्कार किया। इसके बाद उन्होंने किशोरी को जिंदा जलाने के मकसद से उस पर केरोसिन छिड़ककर आग लगा दी।
घटना में पीडिता 95 फीसदी झुलस गई। उसे नासिक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना को अंजाम देने वाले तीनों लड़कों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसी किशोरी से दो महीने पहले भी बलात्कार हुआ था। किशोरी के घरवालों को आरोप है कि बलात्कार के आरोप में जेल गए लड़कों ने छूटते ही फिर से उनकी बेटी से बलात्कार किया है।
Wednesday, August 31, 2011
सलमान की बहन के साथ प्यार की पींग बढ़ा रहे हैं युवराज सिंह
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री किम शर्मा और दीपिका पादुकोण से ब्रेक अप के बाद क्रिकेटर युवराज सिंह कि जिंदगी में एक नया दोस्त आ गया है। पुरानी बातों को भुलाकर युवी एक बार फिर प्यार के मैदान में उतर चुके हैं। और इस बार इस खेल में उनका साथ दे रहीं बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की छोटी बहन अर्पिता।
सत्रों के मुताबिक इन दिनों युवराज और अर्पिता को काफी साथ-साथ देखा जा रहा है। दोनों को हाल ही में दिल्ली के चाणक्यपुरी में फाइव स्टार हॉटल में साथ देखा गया। हालांकि युवी ने इस बात से सरासर इनकार कर दिया है। लेकिन अर्पिता के क रीबी दोस्तों का कहना है कि युवी और अर्पिता एक-दूसरे को काफी समय से जानते हैं। वे काफी अच्छे दोस्त हैं। रविवार को दक्षिण दिल्ली के एक पांच सितारा हॉटल में साथ थे।
उल्लेखनीय है कि क्रिकेटर और बॉलीवुड अभिनेत्रियों के अफेयर की परंपरा पर चलते हुए युवी ने किम शर्मा, दीपिका, मॉडल आंचल कुमार, अमीषा पटेल और नेहा धूपिया के साथ डेटिंग कर चुके हैं। वहीं अर्पिता का नाम भी बोनी कपूर के बेटे अर्जुन से जुड़ चुका है।
अरुंधति रॉय ने फिर उगला जहर , अन्ना को बताया खाली बर्तन
नई दिल्ली. अरुंधति रॉय ने अन्ना हजारे के आंदोलन पर हमला बोलते हुए राष्ट्रगीत वंदे मातरम और राष्ट्रीय झंडे को सांप्रदायिक और बांटने वाला करार दिया है। रवींद्र नाथ टैगोर का हवाला देते हुए रॉय ने कहा, '1937 में टैगोर ने कहा था कि यह अनुचित राष्ट्रगीत है, यह बांटता है। अरुंधति के मुताबिक वंदे मातरम का लंबा सांप्रदायिक इतिहास रहा है। ऐसे में भीड़ जब यह नारा लगाती है तो इसका क्या मतलब है? जब आप उपनिवेश के खिलाफ नारे लगाते समय हाथ में राष्ट्रीय झंडा उठाते हैं तो इसका एक मतलब है लेकिन जब आप एक तरह से आज़ाद हैं, तो आप लोगों को बांटते हैं, जोड़ते नहीं हैं।'
एक टीवी चैनल से बातचीत में अन्ना पर निशाना साधते हुए मशहूर लेखिका ने कहा, 'अन्ना का आंदोलन इसलिए अहिंसक था क्योंकि पुलिस डरी हुई थी और उसने लाठियां नहीं उठाईं। इस आंदोलन के पहले दौर में मंच की पृष्ठभूमि में भारत माता की तस्वीर लगी थी लेकिन दूसरे चरण में इसकी जगह गांधी जी की फोटो ने ले ली। वहां पर इस तरह की कई चीजें थीं, जो बेहद खतरनाक हैं। इसके अलावा क्या आप यह सोच सकते हैं कि गांधी जी किसी अनशन के बाद एक निजी अस्पताल में इलाज करवाते? एक ऐसा निजी अस्पताल जो राज्य सत्ता द्वारा गरीबों के इलाज के हक को छीन लेने का प्रतीक है।'
बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की जमकर आलोचना की है। अरुंधति ने जनलोकपाल बिल को भी बेहद खतरनाक कानून करार दिया है जिसकी मांग अन्ना हजारे और उनकी टीम कर रही है। लेखिका ने अन्ना को ‘खाली बर्तन’ कहकर उनका मजाक भी उड़ाया।
रॉय ने कहा कि जनलोकपाल बिल में भी काफी कमियां है, लेकिन इसे जबरदस्ती थोपा नहीं जा सकता है, ऐसा नहीं है कि सरकारी लोकपाल बिल भी पूरी तरह से सही है, लेकिन इस मसले को आम राय से संसद में सुलझाना होगा न कि भीड़ इकट्ठा करने के बाद अनशन करके।
अरुंधति ने कहा, ‘जनलोकपाल पर संसद में सहमति बनने पर सभी खुश हैं और लोग इसे जीत करार दे रहे हैं। मैं भी इस पर खुश हूं क्योंकि मुझे लगता है कि जनलोकपाल बिल अपने मौजूदा स्वरुप में संसद से पास नहीं हो सकता। इसकी कई वजहें भी हैं। सबसे पहला तो यह कि यह कानून मेरे मुताबिक बेहद खतरनाक है।’
अरुंधति ने कहा, ‘मेरा मानना है कि अन्ना हजारे खाली बर्तन की तरह हैं जिसमें आप अपनी मर्जी के मुताबिक पानी भर सकते हैं। वह गांधी की तरह नहीं हैं जो सार्वजनिक जीवन में अपने आप में एक खासी शख्सियत थे। अन्ना हजारे अपने गांव के लिए खास हो सकते हैं लेकिन अभी हाल में जो कुछ हुआ उसमें उनका कोई योगदान नहीं था।'
अरुंधति ने कहा कि अन्ना कौन हैं, उनका किन लोगों से जुड़ाव रहा है और उन्होंने पहले क्या किया है, उसे लोग जानते हैं।’
इससे पहले एक अखबार में लिखे लेख में रॉय ने लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जुट करने के लिए अन्ना के तरीके और अभियान को गलत बताया था।
उन्होंने अन्ना पर सवाल उठाते हुए कहा कि हजारे अपने गृहराज्य महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या पर मौन क्यों हैं? रॉय ने लिखा कि अन्ना के तरीके भले ही गांधीवादी हों, लेकिन मांगें सही नहीं हैं। उनके अनशन का मकसद सिर्फ नया लोकपाल बिल पारित करवाना है।
‘अरुंधति रॉय कहती हैं कि फोर्ड फाउंडेशन ने अन्ना हजारे को आर्थिक मदद की। मैं यह जानना चाहता हूं कि लोगों की हत्या करने के लिए गिलानी को कौन पैसे देता है जिसकी वो समर्थक हैं।’ - अशोक पंडित, फिल्मकार
एक टीवी चैनल से बातचीत में अन्ना पर निशाना साधते हुए मशहूर लेखिका ने कहा, 'अन्ना का आंदोलन इसलिए अहिंसक था क्योंकि पुलिस डरी हुई थी और उसने लाठियां नहीं उठाईं। इस आंदोलन के पहले दौर में मंच की पृष्ठभूमि में भारत माता की तस्वीर लगी थी लेकिन दूसरे चरण में इसकी जगह गांधी जी की फोटो ने ले ली। वहां पर इस तरह की कई चीजें थीं, जो बेहद खतरनाक हैं। इसके अलावा क्या आप यह सोच सकते हैं कि गांधी जी किसी अनशन के बाद एक निजी अस्पताल में इलाज करवाते? एक ऐसा निजी अस्पताल जो राज्य सत्ता द्वारा गरीबों के इलाज के हक को छीन लेने का प्रतीक है।'
बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की जमकर आलोचना की है। अरुंधति ने जनलोकपाल बिल को भी बेहद खतरनाक कानून करार दिया है जिसकी मांग अन्ना हजारे और उनकी टीम कर रही है। लेखिका ने अन्ना को ‘खाली बर्तन’ कहकर उनका मजाक भी उड़ाया।
रॉय ने कहा कि जनलोकपाल बिल में भी काफी कमियां है, लेकिन इसे जबरदस्ती थोपा नहीं जा सकता है, ऐसा नहीं है कि सरकारी लोकपाल बिल भी पूरी तरह से सही है, लेकिन इस मसले को आम राय से संसद में सुलझाना होगा न कि भीड़ इकट्ठा करने के बाद अनशन करके।
अरुंधति ने कहा, ‘जनलोकपाल पर संसद में सहमति बनने पर सभी खुश हैं और लोग इसे जीत करार दे रहे हैं। मैं भी इस पर खुश हूं क्योंकि मुझे लगता है कि जनलोकपाल बिल अपने मौजूदा स्वरुप में संसद से पास नहीं हो सकता। इसकी कई वजहें भी हैं। सबसे पहला तो यह कि यह कानून मेरे मुताबिक बेहद खतरनाक है।’
अरुंधति ने कहा, ‘मेरा मानना है कि अन्ना हजारे खाली बर्तन की तरह हैं जिसमें आप अपनी मर्जी के मुताबिक पानी भर सकते हैं। वह गांधी की तरह नहीं हैं जो सार्वजनिक जीवन में अपने आप में एक खासी शख्सियत थे। अन्ना हजारे अपने गांव के लिए खास हो सकते हैं लेकिन अभी हाल में जो कुछ हुआ उसमें उनका कोई योगदान नहीं था।'
अरुंधति ने कहा कि अन्ना कौन हैं, उनका किन लोगों से जुड़ाव रहा है और उन्होंने पहले क्या किया है, उसे लोग जानते हैं।’
इससे पहले एक अखबार में लिखे लेख में रॉय ने लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जुट करने के लिए अन्ना के तरीके और अभियान को गलत बताया था।
उन्होंने अन्ना पर सवाल उठाते हुए कहा कि हजारे अपने गृहराज्य महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या पर मौन क्यों हैं? रॉय ने लिखा कि अन्ना के तरीके भले ही गांधीवादी हों, लेकिन मांगें सही नहीं हैं। उनके अनशन का मकसद सिर्फ नया लोकपाल बिल पारित करवाना है।
‘अरुंधति रॉय कहती हैं कि फोर्ड फाउंडेशन ने अन्ना हजारे को आर्थिक मदद की। मैं यह जानना चाहता हूं कि लोगों की हत्या करने के लिए गिलानी को कौन पैसे देता है जिसकी वो समर्थक हैं।’ - अशोक पंडित, फिल्मकार
मुंबई. अन्ना के अगले हफ्ते अपने गांव पहुंचने की संभावना को लेकर महाराष्ट्र सरकार के पसीने अभी से छूटने लगे हैं। अन्ना को मिल रहे जबर्दस्त समर्थन को देखते हुए महाराष्ट्र की कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार ने वरिष्ठ नौकरशाहों की एक सूची तैयार करने का फैसला किया है जो अन्ना से संपर्क में रहने के अलावा उनकी गतिविधियों पर नज़र रखेंगे ताकि अहमदनगर जिले का रालेगण सिद्धि गांव दूसरा रामलीला मैदान न बन जाए। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना का इंतजार कर रहे हैं और ऐसा माना जा रहा है कि लोकपाल बिल को लेकर अन्ना गांव में बैठक वगैरह कर सकते हैं।
राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर राजस्व मंत्री बालासाहब थोराट और कृषि मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल को अन्ना से लगातार संपर्क में रहने की जिम्मेदारी देने की तैयारी है। इन दोनों मंत्रियों से अन्ना की पुरानी जान पहचान है। राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह ने बताया, 'हजारे के महाराष्ट्र से लौटने के तुरंत बाद कांग्रेस और एनसीपी के वरिष्ठ मंत्री अन्ना का हालचाल लेंगे। मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार अन्ना के साथ किसी किस्म का टकराव नहीं चाहते हैं।'
राज्य सरकार को इस बात का भी डर है कि विपक्षी पार्टियां शिवसेना और बीजेपी हजारे को राज्य में मौजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए उकसा सकते हैं, जो दिसंबर में होने वाले स्थानीय निकाय के चुनाव से पहले काफी अहम हो सकता है। यही वजह है कि सरकार की तरफ से कांग्रेस और एनसीपी के मंत्रियों को हिदायत दे दी गई है कि वे प्रशासनिक खामियों से जुड़ी शिकायतों का टालने के बजाय तुरंत निपटारा करें।
सुरक्षा बढ़ाने की मांग
जन लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर केंद्र सरकार को झुकाने वाले समाजसेवक अन्ना हजारे की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई है। अन्ना के वकील मिलिंद पवार ने इस संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और गृहमंत्री आरआर पाटील को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि 12 दिन के अनशन के दौरान अन्ना और उनके सहयोगियों ने अपने भाषण में सरकार व कुछ लोगों के खिलाफ तीखी टिप्पणी की थी। इससे कुछ लोगों में अन्ना के प्रति आक्रोश है और उनकी जान को खतरा है।
अप्रैल में भी पवार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अन्ना की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की थी लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। पवार का कहना है कि पूरा देश जानता है कि महात्मा गांधी के साथ क्या हुआ, लिहाजा सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि अन्ना को मजबूत सुरक्षा घेरे में रखा जाए।
अखबार पढ़ने से अन्ना का तौबा
उधर, गुड़गांव (हरियाणा) के मेदांता मेडिसिटी में स्वास्थ्य लाभ कर रहे अन्ना हजारे का कहना है कि वह अखबार इसलिए नहीं पढ़ रहे क्योंकि अपने बारे में लिखी बातें पढ़ कर उनके अंदर अभिमान आ सकता है।
74 वर्षीय अन्ना की देखभाल कर रहे मेदांता मेडिसिटी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. नरेश त्रेहन ने बुधवार को बताया कि अन्ना हजारे की तबियत में सुधार आ रहा है। उन्होंने बताया कि अब उनका वजन भी बढ़ रहा है। अन्ना का ब्लड प्रेशर 140/90 और पल्स रेट 80 प्रति मिनट है। उनके शरीर का तापमान सामान्य है। मंगलवार से उन्होंने हल्का खाना शुरू कर दिया है। अन्ना ने हल्के आहार के तौर पर पोहा खाया है।
टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी भी अन्ना हजारे से मिलने अस्पताल पहुंचीं। बेदी के मुताबिक अन्ना की तबियत में तेजी से सुधार हो रहा है। आंदोलन के वक्त लोगों के बीच अन्ना को कमजोरी का अहसास नहीं हुआ लेकिन अब उन्हें पता चल है कि 12 दिन तक अनशन का स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।
अन्ना अस्पताल के जिस फ्लोर पर भर्ती हैं वहां की सुरक्षा बेहद कड़ी है। वहां आम लोगों को जाने की मनाही तो है ही, अस्पताल के कर्मचारियों को भी फटकने नहीं दिया जा रहा है। केवल चार सीनियर डॉक्टरों को अन्ना के कमरे में जाने की इजाजत है। उस फ्लोर पर भर्ती अन्य मरीजों और उनके तीमारदारों के खिलाफ खास किस्म के पास जारी किए गए हैं।
12 दिन के अनशन के बाद अन्ना को बीते रविवार को अस्पताल ले जाया गया था। उनकी हालत लगातार सुधर रही है, लेकिन अभी तीन-चार दिन डॉक्टर उन्हें अपनी निगरानी में रखना चाहते हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना के जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए शुभकामनाएं भेजीं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि मनमोहन सिंह ने अन्ना को फूलों के गुलदस्ते के साथ शुभकामनाएं भेजीं। उन्होंने अपने एक अधिकारी के जरिए यह गुलदस्ता भेजा।
नई दिल्ली. अन्ना हजारे को बुरा-भला कहकर बाद में माफी मांगने वाले कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने लोकपाल बिल पर विचार करने वाली स्थायी संसदीय समिति से खुद को अलग रखने का फैसला किया है। लुधियाना से सांसद मनीष तिवारी ने पत्रकारों से कहा, ‘मैंने खुद को पैनल से अलग रखने का फैसला किया है। मैं मजबूत लोकपाल बिल के पक्ष में हूं।’
टीम अन्ना ने कांग्रेस नेता और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी के इस समिति में होने पर ऐतराज जताया था। तिवारी ने अन्ना हजारे को खुले आम भ्रष्ट बताया था और 'तुम' कह कर संबोधित किया था। हालांकि उन्होंने करीब 10 दिन बाद इसके लिए माफी मांग ली थी। मनीष तिवारी स्पेक्ट्रम मामले में बनी साझा संसदीय समिति के भी सदस्य हैं।
बुधवार को इस 31 सदस्यीय समिति का कार्यकाल खत्म हो रहा है। समिति के पास विचार के लिए लोकपाल बिल के 9 मसौदे आए हैं। इन पर विचार कर उसे अपनी सिफारिशें अक्टूबर तक सौंपनी है। इसके मद्देनजर समिति के पुनर्गठन की अहमियत बढ़ गई है।
सूत्र बताते हैं कि समिति के जो सांसद जन लोकपाल बिल के खिलाफ राय रखते हैं, उन्हें आगे समिति में जगह नहीं मिले, इसके लिए लॉबीइंग भी की गई है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व सपा नेता अमर सिंह भी इन्हीं सांसदों में से हैं।
समिति के सदस्य का नाम पार्टियां ही तय करती हैं। ऐसे में राजद अध्यक्ष खुद को समिति में रखते हैं या किसी और का नाम देते हैं, इस पर नजर रहेगी। लालू के खिलाफ अदालत ने चारा घोटाले में चार्जशीट दाखिल करने की इजाजत दे रखी है। ऐसे में अगर वह खुद को समिति के लिए नामित करते हैं, तो इसका विरोध भी हो सकता है।
अमर सिंह अब सपा में नहीं हैं। 'कैश फॉर वोट' मामले में दिल्ली पुलिस ने हाल में अमर सहित 6 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया है। सपा उन्हें संसदीय समिति से बाहर करने की मांग करती रही है। ऐसे में अमर सिंह का समिति में बने रहना शायद ही संभव हो।
टीम अन्ना भी लालू और अमर सिंह के संसदीय समिति में होने पर सवाल उठाती रही है। अन्ना हजारे के करीबी सहयोगी अरविंद केजरीवाल तो उनके समिति में होने का मजाक उड़ाते हुए कहते रहे हैं कि लालू और अमर जैसे नेता भ्रष्टाचार रोकने वाले लोकपाल बिल के भविष्य का फैसला करेंगे। ऐसे में इन दोनों नेताओं की समिति में मौजूदगी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
उम्मीद है कि कानून और न्याय मामलों की इस स्थायी संसदीय समिति की अध्यक्षता कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के पास ही रहेगी। सूत्र बताते हैं कि पार्टियां संसदीय समिति में अपने उन्हीं नेता को रखना चाहेंगी जो अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद लोकपाल पर पार्टी का रुख मजबूती से रख सकें और सिविल सोसाइटी के दबाव का भी बखूबी सामना कर सकें।
टीम अन्ना ने कांग्रेस नेता और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी के इस समिति में होने पर ऐतराज जताया था। तिवारी ने अन्ना हजारे को खुले आम भ्रष्ट बताया था और 'तुम' कह कर संबोधित किया था। हालांकि उन्होंने करीब 10 दिन बाद इसके लिए माफी मांग ली थी। मनीष तिवारी स्पेक्ट्रम मामले में बनी साझा संसदीय समिति के भी सदस्य हैं।
बुधवार को इस 31 सदस्यीय समिति का कार्यकाल खत्म हो रहा है। समिति के पास विचार के लिए लोकपाल बिल के 9 मसौदे आए हैं। इन पर विचार कर उसे अपनी सिफारिशें अक्टूबर तक सौंपनी है। इसके मद्देनजर समिति के पुनर्गठन की अहमियत बढ़ गई है।
सूत्र बताते हैं कि समिति के जो सांसद जन लोकपाल बिल के खिलाफ राय रखते हैं, उन्हें आगे समिति में जगह नहीं मिले, इसके लिए लॉबीइंग भी की गई है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व सपा नेता अमर सिंह भी इन्हीं सांसदों में से हैं।
समिति के सदस्य का नाम पार्टियां ही तय करती हैं। ऐसे में राजद अध्यक्ष खुद को समिति में रखते हैं या किसी और का नाम देते हैं, इस पर नजर रहेगी। लालू के खिलाफ अदालत ने चारा घोटाले में चार्जशीट दाखिल करने की इजाजत दे रखी है। ऐसे में अगर वह खुद को समिति के लिए नामित करते हैं, तो इसका विरोध भी हो सकता है।
अमर सिंह अब सपा में नहीं हैं। 'कैश फॉर वोट' मामले में दिल्ली पुलिस ने हाल में अमर सहित 6 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया है। सपा उन्हें संसदीय समिति से बाहर करने की मांग करती रही है। ऐसे में अमर सिंह का समिति में बने रहना शायद ही संभव हो।
टीम अन्ना भी लालू और अमर सिंह के संसदीय समिति में होने पर सवाल उठाती रही है। अन्ना हजारे के करीबी सहयोगी अरविंद केजरीवाल तो उनके समिति में होने का मजाक उड़ाते हुए कहते रहे हैं कि लालू और अमर जैसे नेता भ्रष्टाचार रोकने वाले लोकपाल बिल के भविष्य का फैसला करेंगे। ऐसे में इन दोनों नेताओं की समिति में मौजूदगी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
उम्मीद है कि कानून और न्याय मामलों की इस स्थायी संसदीय समिति की अध्यक्षता कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के पास ही रहेगी। सूत्र बताते हैं कि पार्टियां संसदीय समिति में अपने उन्हीं नेता को रखना चाहेंगी जो अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद लोकपाल पर पार्टी का रुख मजबूती से रख सकें और सिविल सोसाइटी के दबाव का भी बखूबी सामना कर सकें।
गोविंदा ने की बहनोई की पिटाई , खार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज
- मुकेश कुमार मासूम
मुंबई। फिल्म अभिनेता गोविंदा पर जान से धमकी देने का आरोप लगा है। यह आरोप उनके ही जीजा प्रवीण खन्ना ने लगाया है। प्रवीण ने इस संबंध में खार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। खन्ना ने आरोप लगाया है कि गोविंदा ने 24 अगस्त को उनसे मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
प्रवीण खन्ना टीवी एक्ट्रेस रागिनी खन्ना के पिता हैं। एक निजी चैनल के मुताबिक गोविंदा और उनके जीजा के बीच किसी फिल्म को लेकर तनातनी चल रही थी। खन्ना ने किसी फिल्म के लिए गोविंदा को 4 करोड़ में साइन किया था। 25 लाख रूपए एडवांस में भी दे दिए थे। पैसा मिलने के बावजूद गोविंदा शूटिंग के लिए नहीं आए। इसी वजह से दोनों में हाथापाई हो गई। ज्ञात हूँ की प्रवीण खन्ना की बेटी रागिनी खन्ना ससुराल गेंदा फूल सीरियल में मुख्य भूमिका निभा रही है. उनका बेटा कृष्णा भी हास्य कार्यक्रम में खूब लोकप्रिय है. लेकिन प्रवीण खन्ना अपनी पत्नी कामिनी जो की प्रसिद्द ज्योतिष भी हैं के साथ नहीं रहते.कामिनी उनसे अलग रहती हैं और अपने पति प्रवीण के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा रखी है. प्रवीण खन्ना १९९४ में बेटा हो तो ऐसा नामक फिल्म का निर्माण भी कर चुके हैं. कुछ साल पहले प्रवीण खन्ना ने गोविंदा और मनीषा कोइराला को लेकर दिल लगाके देखो नामक फिल्म की घोषणा की थी. प्रवीण खन्ना का आरोप है की इस फिल्म की शूटिंग के लिए गोविंदा उन्हें डेट नहे डे रहे .अपनी और कामिनी के बीच विवाद की जड भी वे गोविंदा को ही मानते हैं. मगर कामिनी इससे इनकार करती हैं. उनका कहना है की गोविंदा बहुत ही अच्छे इंसान हैं और हमेशा उनकी मदद करते हैं. गोविंदा के करीबी सूत्रों ने बताया की प्रवीण को शराब पीने की आदत है. वे घर में भी अक्सर लड़ाई झगडा करते हैं इसी कारण कामिनी उनसे अलग रह रही है. सूत्रों के मुताबिक़ प्रवीण जानते हैं की गोविंदा एक नामचीन हस्ती हैं इसलिए वे उनके साथ विवाद जोड़कर सस्ता प्रचार पाना चाहते हैं, सूत्रों का कहना है की उनके फिल्म की शूटिंग गोविंदा की वजह से नहीं बल्कि उनके फाइनेंसर के कारण लटक रही है. फिलहाल इस फैमिली ड्रामे की जांच पुलिस कर रही है. तभी सच्चाई का पता चल पायेगा .
Tuesday, August 30, 2011
डबल मुश्किल में अग्निवेश , लोगों ने फूंका पुतला, कोर्ट ने दिया गिरफ्तारी का आदेश
हिसार (हांसी). स्वामी अग्निवेश के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। यहां उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अश्वनी कुमार मेहता की कोर्ट ने डीएसपी अमरीक सिंह को निर्देश दिए हैं कि वह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में नामजद स्वामी अग्निवेश को 19 सितंबर तक गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करें।
कोर्ट ने शुक्रवार को ही मामले की सुनवाई के दौरान अग्निवेश को पेश करने के लिए कहा था। सोमवार को कोर्ट में मामले के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर दलबीर ने कहा कि वह दो बार अग्निवेश के जंतर-मंतर (दिल्ली) स्थित कार्यालय पर जाने के बावजूद वह वहां नहीं मिले। इस पर कोर्ट ने कहा कि डीएसपी खुद अग्निवेश को गिरफ्तार कर 19 सितंबर तक कोर्ट में पेश करें।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीन तायल ने 23 मई, 2011 को कोर्ट में इस्तगासा दायर कर स्वामी अग्निवेश के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज करने की अपील की थी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर सिटी पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने कई बार अग्निवेश को नोटिस भेजा लेकिन वह न तो पुलिस तफ्तीश में शामिल हुए और न ही कोर्ट में पेश हुए। अग्निवेश की तरफ से उनके वकील ने जरूर पुलिस को बयान दिया था कि वह अन्ना हजारे के साथ हैं इसलिए जांच में शामिल नहीं हो सकते। इस बयान को काफी नहीं माना गया। इसके बाद कोर्ट ने अग्निवेश के वारंट जारी किए लेकिन वह शुक्रवार को भी पेशी पर नहीं पहुंचे।
उधर, कथित रूप से किसी कपिल से टीम अन्ना के खिलाफ बातें करते अग्निवेश का वीडियो सामने आने के बाद जनता भी उनसे नाराज हो गई है। सोमवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद सहित देश के कई शहरों में अग्निवेश के पुतले फूंके गए और उनके विरोध में नारे लगाए गए।
इस बीच, टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से यह साफ कर दिया है कि अग्निवेश अब टीम के सदस्य नहीं रह गए हैं। वह टीम अन्ना की कोर कमेटी में शामिल थे, लेकिन वीडियो के जरिए उनकी कथित 'दगाबाजी' सामने आने के बाद केजरीवाल ने उनके टीम का सदस्य नहीं रहने की बात सार्वजनिक रूप से बता दी है।
कोर्ट ने शुक्रवार को ही मामले की सुनवाई के दौरान अग्निवेश को पेश करने के लिए कहा था। सोमवार को कोर्ट में मामले के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर दलबीर ने कहा कि वह दो बार अग्निवेश के जंतर-मंतर (दिल्ली) स्थित कार्यालय पर जाने के बावजूद वह वहां नहीं मिले। इस पर कोर्ट ने कहा कि डीएसपी खुद अग्निवेश को गिरफ्तार कर 19 सितंबर तक कोर्ट में पेश करें।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीन तायल ने 23 मई, 2011 को कोर्ट में इस्तगासा दायर कर स्वामी अग्निवेश के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज करने की अपील की थी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर सिटी पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने कई बार अग्निवेश को नोटिस भेजा लेकिन वह न तो पुलिस तफ्तीश में शामिल हुए और न ही कोर्ट में पेश हुए। अग्निवेश की तरफ से उनके वकील ने जरूर पुलिस को बयान दिया था कि वह अन्ना हजारे के साथ हैं इसलिए जांच में शामिल नहीं हो सकते। इस बयान को काफी नहीं माना गया। इसके बाद कोर्ट ने अग्निवेश के वारंट जारी किए लेकिन वह शुक्रवार को भी पेशी पर नहीं पहुंचे।
उधर, कथित रूप से किसी कपिल से टीम अन्ना के खिलाफ बातें करते अग्निवेश का वीडियो सामने आने के बाद जनता भी उनसे नाराज हो गई है। सोमवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद सहित देश के कई शहरों में अग्निवेश के पुतले फूंके गए और उनके विरोध में नारे लगाए गए।
इस बीच, टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से यह साफ कर दिया है कि अग्निवेश अब टीम के सदस्य नहीं रह गए हैं। वह टीम अन्ना की कोर कमेटी में शामिल थे, लेकिन वीडियो के जरिए उनकी कथित 'दगाबाजी' सामने आने के बाद केजरीवाल ने उनके टीम का सदस्य नहीं रहने की बात सार्वजनिक रूप से बता दी है।
राजीव के हत्यारों को आठ हफ्ते का जीवनदान
मद्रास हाई कोर्ट ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी की सजा देने पर फिलहाल रोक लगा दी है. अदालत ने तीनों दोषियों को आठ हफ्ते की अंतरिम राहत दी है. केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस.
मद्रास हाई कोर्ट ने माना कि हत्यारों की क्षमा याचिका पर विचार करने में काफी लंबा वक्त लगाया गया. अदालत ने केंद्र सरकार, तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु पुलिस के लिए नोटिस भी जारी किया. अदालत ने पूछा कि दोषियों की क्षमा याचिका पर फैसला करने में 11 साल क्यों लगे.
जस्टिस सी नागप्पन और एम सत्यनारायणन की बेंच ने मामले को कानून के सामने एक प्रश्न बताया. तीनों दोषी जेल में 20 साल की सजा काट चुके हैं. सवाल यह है कि इतनी सजा काटने के बाद भी क्या फांसी देना जायज है. वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी फांसी की सजा का विरोध कर रहे हैं.
राजीव गांधी की हत्या के तीन दोषियों मुरगन, संथन और पेरारीवलन ने फांसी के खिलाफ भारतीय राष्ट्रपति से क्षमा की याचिका की. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसी महीने दोषियों की याचिका ठुकरा दी. इसके बाद तीनों को फांसी देने के लिए नौ सितंबर की तारीख तय की गई. लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद तीनों को करीब दो महीनों की राहत मिली है.
राजनीतिक मुद्दा बनी सजा
अदालत का फैसला आने के बाद लोग चेन्नई में कोर्ट के बाहर जश्न मनाते दिखे. तमिलनाडु में इस मुद्दे पर राजनीति हो रही है. डीएमके नेता वाइको ने फांसी की सजा का विरोध किया है. मंगलवार को अदालती कार्रवाई के दौरान वह भी कोर्ट में मौजूद रहे. अन्य पार्टियां भी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदले जाने की मांग कर रही हैं. मानवाधिकार संगठनों की भी ऐसी ही दलील है.
इस बीच तमिलनाडु सरकार ने सजा को लेकर विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया है. प्रस्ताव में राष्ट्रपति से सजा पर पुर्नविचार की अपील की गई है. लेकिन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का कहना है कि तमिलनाडु विधानसभा का प्रस्ताव का प्रस्ताव किसी के लिए बाध्यकारी नहीं है.
राजीव गांधी हत्याकांड
21 मई 1991 को लिट्टे ने एक आत्मघाती दस्ते की मदद से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी. तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदूर में एक रैली के दौरान लिट्टे की महिला आत्मघाती हमलावर धानु राजीव के पैर छुने के लिए बढ़ी और झुकते ही उसने खुद को उड़ा दिया. राजीव गांधी समेत 15 लोग मौके पर मारे गए. महिला आत्मघाती हमलावर का पता एक फोटो से चला. धमाके में कैमरामैन भी मारा गया लेकिन ब्लास्ट से ठीक पहले उसके द्वारा ली गईं तस्वीरों से अहम सुराग मिले.
अदालती कार्रवाई
मामले की सुनवाई के लिए चेन्नई में टाडा की विशेष अदालत लगाई गई. टाडा कोर्ट ने 26 लोगों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई. अदालती कार्रवाई पर कानून के विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने आपत्ति जताई. अदालत पर निष्पक्ष सुनवाई न करने के आरोप लगे. फांसी की सजा पाने वालों में एक 17 साल का किशोरी भी थी. नियमों के तहत दोषियों को टाडा कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने की अनुमति नहीं थी. टाडा कोर्ट ने पुलिस में दर्ज बयानों को सबूत माना.
हालांकि बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट गया. अधिकतर आरोपियों ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि पुलिस ने दबाव डाल कर उनसे बयान उगलवाए. सुप्रीम कोर्ट ने 26 में सिर्फ चार दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी. अन्य को अलग अगल किस्म की जेल की सजा सुनाई गई. भारत की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई कभी यह साफ नहीं कर सकी कि राजीव गांधी की हत्या की साजिश कब रची गई.
मद्रास हाई कोर्ट ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी की सजा देने पर फिलहाल रोक लगा दी है. अदालत ने तीनों दोषियों को आठ हफ्ते की अंतरिम राहत दी है. केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस.
मद्रास हाई कोर्ट ने माना कि हत्यारों की क्षमा याचिका पर विचार करने में काफी लंबा वक्त लगाया गया. अदालत ने केंद्र सरकार, तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु पुलिस के लिए नोटिस भी जारी किया. अदालत ने पूछा कि दोषियों की क्षमा याचिका पर फैसला करने में 11 साल क्यों लगे.
जस्टिस सी नागप्पन और एम सत्यनारायणन की बेंच ने मामले को कानून के सामने एक प्रश्न बताया. तीनों दोषी जेल में 20 साल की सजा काट चुके हैं. सवाल यह है कि इतनी सजा काटने के बाद भी क्या फांसी देना जायज है. वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी फांसी की सजा का विरोध कर रहे हैं.
राजीव गांधी की हत्या के तीन दोषियों मुरगन, संथन और पेरारीवलन ने फांसी के खिलाफ भारतीय राष्ट्रपति से क्षमा की याचिका की. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसी महीने दोषियों की याचिका ठुकरा दी. इसके बाद तीनों को फांसी देने के लिए नौ सितंबर की तारीख तय की गई. लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद तीनों को करीब दो महीनों की राहत मिली है.
राजनीतिक मुद्दा बनी सजा
अदालत का फैसला आने के बाद लोग चेन्नई में कोर्ट के बाहर जश्न मनाते दिखे. तमिलनाडु में इस मुद्दे पर राजनीति हो रही है. डीएमके नेता वाइको ने फांसी की सजा का विरोध किया है. मंगलवार को अदालती कार्रवाई के दौरान वह भी कोर्ट में मौजूद रहे. अन्य पार्टियां भी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदले जाने की मांग कर रही हैं. मानवाधिकार संगठनों की भी ऐसी ही दलील है.
इस बीच तमिलनाडु सरकार ने सजा को लेकर विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया है. प्रस्ताव में राष्ट्रपति से सजा पर पुर्नविचार की अपील की गई है. लेकिन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का कहना है कि तमिलनाडु विधानसभा का प्रस्ताव का प्रस्ताव किसी के लिए बाध्यकारी नहीं है.
राजीव गांधी हत्याकांड
21 मई 1991 को लिट्टे ने एक आत्मघाती दस्ते की मदद से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी. तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदूर में एक रैली के दौरान लिट्टे की महिला आत्मघाती हमलावर धानु राजीव के पैर छुने के लिए बढ़ी और झुकते ही उसने खुद को उड़ा दिया. राजीव गांधी समेत 15 लोग मौके पर मारे गए. महिला आत्मघाती हमलावर का पता एक फोटो से चला. धमाके में कैमरामैन भी मारा गया लेकिन ब्लास्ट से ठीक पहले उसके द्वारा ली गईं तस्वीरों से अहम सुराग मिले.
अदालती कार्रवाई
मामले की सुनवाई के लिए चेन्नई में टाडा की विशेष अदालत लगाई गई. टाडा कोर्ट ने 26 लोगों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई. अदालती कार्रवाई पर कानून के विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने आपत्ति जताई. अदालत पर निष्पक्ष सुनवाई न करने के आरोप लगे. फांसी की सजा पाने वालों में एक 17 साल का किशोरी भी थी. नियमों के तहत दोषियों को टाडा कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने की अनुमति नहीं थी. टाडा कोर्ट ने पुलिस में दर्ज बयानों को सबूत माना.
हालांकि बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट गया. अधिकतर आरोपियों ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि पुलिस ने दबाव डाल कर उनसे बयान उगलवाए. सुप्रीम कोर्ट ने 26 में सिर्फ चार दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी. अन्य को अलग अगल किस्म की जेल की सजा सुनाई गई. भारत की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई कभी यह साफ नहीं कर सकी कि राजीव गांधी की हत्या की साजिश कब रची गई.
चाचा गिरफ्तार,नहीं छुड़वाया ओबामा ने
वॉशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के चाचा ओनयांगो ओबामा को पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया। 67 वर्षीय ओनयांगो राष्ट्रपति के पिता के सौतेले भाई हैं और लम्बे समय से लापता थे।
बोस्टन के निकट फ्रेंमिंघम में गिरफ्तारी के बाद जब ओमयांगो ने व्हाइट हाउस फोन कर जमानत की व्यवस्था की बात कही तो पुलिस अधिकारी हैरान थे। बाद में पता चला कि वे राष्ट्रपति ओबामा के चाचा हैं। हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार ओमयांगों को 24 अगस्त को गिरफ्तार किया गया तब उन्होंने व्हाइट हाउस फोन लगाने की बात कही थी। बाद में अमरीका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग की ओर से जांच के दौरान पता चला कि ओनयांगो अमरीका में अवैध रूप से रह रहे थे। जिनके लिए पूर्व में भी निर्वासन के निर्देश जारी किए गए थे, जो सामान्यत: अमरीका में अवैध रूप से रहने वाले लोगों के लिए जारी किए जाते हैं।
टीम अन्ना पर शिकंजा भूषन की सीडी असली निकली
नई दिल्ली।। खबर है कि दिल्ली पुलिस ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि वकील शांति भूषण की मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह से हुई बातचीत संबंधी विवादित सीडी फर्जी नहीं बल्कि असली है। पुलिस का कहना है कि यह सीडी नकली नहीं है। हालांकि इस सीडी पर नकली होने का आरोप लगाया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया जांच अधिकारी शांति भूषण के सीडी में हेरफेर करने संबंधी आरोप की जांच करने के बाद जल्द क्लोजर रिपोर्ट दायर करेंगे। गौरतलब है कि इस मामले में अप्रैल में आईपीसी की धारा 469 के तहत एक केस दर्ज किया गया था।
सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह ने पुलिस को बताया कि टेप में उनकी आवाज असली है और इसमें 'किसी प्रकार की छेड़छाड़' नहीं की गई है। इस सीडी को अप्रैल में अन्ना हजारे द्वारा सशक्त लोकपाल लाने के लिए अनशन करने के बाद
मीडिया में जारी किया गया था। अनशन के बाद भूषण को लोकपाल मसौदा तैयार करने के लिए बनाई गई ड्राफ्टिंग कमिटी का सह-अध्यक्ष बनाया गया था। भूषण ने आरोप लगाया था कि समाज में उनको बदनाम करने के लिए इस नकली सीडी को तैयार किया गया है।
सीडी में शांति भूषण, मुलायम सिंह और अमर सिंह से कह रहे हैं कि उनका बेटा और वकील प्रशांत भूषण 'जजों को उनके पाले में ला' सकता है। इस बारे में प्रशांत भूषण ने कहा है कि मालूम होता है कि कुछ पुलिस अधिकारी, कुछ फॉरेंसिक एजेंसी के अधिकारी और सरकार के कुछ लोग उनके खिलाफ आपराधिक षडयंत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल) के बारे में वे क्या बोलेंगे?'
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली स्थित सीएफएसएल में फॉरेंसिक जांच करने के बाद भूषण के आरोप को गलत बताया था। इसके बाद कुछ लोगों ने उनसे लोकपाल मसौदा तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति से इस्तीफा देने की मांग की थी। हालांकि पुलिस ने सीएफएसएल, चंडीगढ़ में की गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। भूषण ने हैदराबाद स्थित एक प्राइवेट लैब में सीडी की हुई जांच के बाद दावा किया था कि सीडी से 'छेड़छाड़ ' की गई है।
सूत्रों ने बताया जांच अधिकारी शांति भूषण के सीडी में हेरफेर करने संबंधी आरोप की जांच करने के बाद जल्द क्लोजर रिपोर्ट दायर करेंगे। गौरतलब है कि इस मामले में अप्रैल में आईपीसी की धारा 469 के तहत एक केस दर्ज किया गया था।
सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह ने पुलिस को बताया कि टेप में उनकी आवाज असली है और इसमें 'किसी प्रकार की छेड़छाड़' नहीं की गई है। इस सीडी को अप्रैल में अन्ना हजारे द्वारा सशक्त लोकपाल लाने के लिए अनशन करने के बाद
मीडिया में जारी किया गया था। अनशन के बाद भूषण को लोकपाल मसौदा तैयार करने के लिए बनाई गई ड्राफ्टिंग कमिटी का सह-अध्यक्ष बनाया गया था। भूषण ने आरोप लगाया था कि समाज में उनको बदनाम करने के लिए इस नकली सीडी को तैयार किया गया है।
सीडी में शांति भूषण, मुलायम सिंह और अमर सिंह से कह रहे हैं कि उनका बेटा और वकील प्रशांत भूषण 'जजों को उनके पाले में ला' सकता है। इस बारे में प्रशांत भूषण ने कहा है कि मालूम होता है कि कुछ पुलिस अधिकारी, कुछ फॉरेंसिक एजेंसी के अधिकारी और सरकार के कुछ लोग उनके खिलाफ आपराधिक षडयंत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल) के बारे में वे क्या बोलेंगे?'
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली स्थित सीएफएसएल में फॉरेंसिक जांच करने के बाद भूषण के आरोप को गलत बताया था। इसके बाद कुछ लोगों ने उनसे लोकपाल मसौदा तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति से इस्तीफा देने की मांग की थी। हालांकि पुलिस ने सीएफएसएल, चंडीगढ़ में की गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। भूषण ने हैदराबाद स्थित एक प्राइवेट लैब में सीडी की हुई जांच के बाद दावा किया था कि सीडी से 'छेड़छाड़ ' की गई है।
आश्रम में सेक्स रैकेट
फर्रुखाबाद. उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में विश्वविद्यालय चलाने के नाम पर मानव तस्करी का गोरखधंधा चलाने का मामला सामने आया है। आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम पर चल रहे इस संस्थान से 60 युवतियों को बरामद किया गया है। संस्थान के संचालक बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हालांकि वह फरार है।
कई लोगों की शिकायत मिलने के बाद रविवार देर रात यहां के आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय में पुलिस ने छापा मारा तो बीते 23 अगस्त से लापता बांदा जिले की रहने वाली 16 साल की किशोरी भी यहां से बरामद की गई। पुलिस ने सोमवार को संचालक वीरेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
कोतवाली शहर प्रभारी कालू राम दोहरे ने बताया, ‘किशोरी ने किसी तरह अपने माता-पिता को ठिकाने के बारे में सूचित कर दिया, जिसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में छापेमारी कर लापता किशोरी को बरामद कर लिया गिया। छापेमारी के दौरान वहां कुछ और लड़कियां मिली हैं। इस बात की जांच की जा रही है कि संस्थान का संचालक कहीं सेक्स रैकेट या मानव तस्करी के धंधे में तो लिप्त नहीं था। इस संस्थान की प्रामाणिकता की भी जांच की जा रही है।’
सिक्तरबाग इलाके में स्थित इस संस्थान से बरामद लड़कियों की उम्र चार से 17 साल के बीच है। इन्हें छोटे, अंधेरे और गंदे कमरों में रहने को मजबूर किया जा रहा था। महिलाओं के अधिकार से जुड़े संगठन ‘गुलाबी गैंग’ की सदस्य अंजलि यादव ने कहा, ‘बेसमेंट में इन कमरों की छतें काफी नीचे हैं। इनमें ठीक से खड़ा होना मुश्किल है। आश्रम के नियम के मुताबिक यहां पुरुषों के प्रवेश पर मनाही है लेकिन संस्थान के सभी मैनेजर पुरुष हैं और यहां रह रही लड़कियां गरीब परिवारों से ताल्लुक रखती हैं।’
अंजलि ने बताया कि संस्थान में कई छोटे टीवी सेट और कम्प्यूटर हैं। यहां से हजारों सीडी बरामद की गई है। ऐसे में आशंका है कि यहां कुछ गड़बड़ चल रहा था। उन्होंने बताया कि इस संस्थान के कमरे इतने छोटे हैं कि इनमें रहना मुश्किल है। दीक्षित के देश और विदेशों में ऐसे 250 आश्रम हैं। इनमें अधिकतर अमेरिका और यूरोप में हैं।
फर्रुखाबाद के डीएसपी वी के सिंह ने कहा, ‘दिलचस्प यह है कि अधिकतर लड़कियां आश्रम में ही रहना चाहती थीं। हालांकि हमें उन्हें आश्वासन दिया है कि यदि वो हकीकत बताएंगी तो उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी।’
दीक्षित के एक करीबी ने बताया कि 64 साल का दीक्षित अपने को ‘कामी देवता’ कहता है और खुद को भगवान कृष्ण का अवतार बताता है। करीबी के मुताबिक, ‘हमने दीक्षित की लड़कियों के साथ आपत्तिजनक हालत में वीडियो क्लिप देखी है। वह नई लड़कियों को भी यह दिखाता और ऐसा करने को कहता।’
बांदा कोतवाली के दरोगा डीके सैनी ने यहां आकर किशोरी का देर शाम लोहिया अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया। डॉ. पूनम शर्मा ने बताया कि स्लाइड व एक्सरे रिपोर्ट आने पर ही वह कुछ बता सकेंगी।
ज्ञातव्य है कि सिकत्तरबाग स्थित आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय से बांदा की एक किशोरी बरामद होने के मामले में शहर कोतवाली पुलिस ने सोमवार को दूसरे दिन ही पल्ला झाड़ लिया। कोतवाली में दर्ज मुकदमा तफ्तीश के लिए बांदा स्थानांतरित किया जायेगा। विदित है कि आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय का प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं है।
मालूम हो कि बीते दिन बांदा कोतवाली के मोहल्ला अलीगंज निवासी राकेश कुमार सिंह ने शहर कोतवाली में सिकत्तरबाग स्थित आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्थापक वीरेन्द्र दीक्षित व उनके अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ अपहरण की धारा 364, 342 आईपीसी का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में राकेश कुमार सिंह ने अपनी पुत्री का अपहरण 23 अगस्त को बांदा से करने के बाद यहां आश्रम में रखने का आरोप लगाया था। बांदा कोतवाली में तैनात कांस्टेबिल रवीन्द्र कुमार कटियार भी किशोरी के पिता के साथ था। उसी के बाद पुलिस ने आश्रम में छापा मारकर अपहृत किशोरी को बरामद कर लिया।
बांदा कोतवाली के दरोगा डीके सैनी के आने पर उन्होंने बताया कि उनके यहां आध्यात्मिक केंद्र की बांदा शाखा के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ धारा 363, 364 आईपीसी का मुकदमा दर्ज है। पुलिस किशोरी को मेडिकल परीक्षण के लिए लोहिया अस्पताल ले गयी। देर शाम उसका मेडिकल हो सका। डॉ. पूनम शर्मा ने बताया कि स्लाइड व एक्सरे रिपोर्ट आने पर ही वह कुछ बता सकेंगी। उधर कोतवाली पुलिस ने नामजद आश्रम संस्थापक व उनके अज्ञात सहयोगियों की गिरफ्तारी का प्रयास करने से पल्ला झाड़ लिया।
प्रभारी निरीक्षक कालूराम दोहरे ने बताया कि घटनास्थल बांदा कोतवाली का है। वह अपहरण का मुकदमा विवेचना के लिए बांदा स्थानांतरित कर रहे हैं। तफ्तीश बांदा पुलिस ही करेगी। बांदा पुलिस रात में यहीं रुकेगी| महिला थानाध्यक्ष सुभद्रा वर्मा ने बताया कि किशोरी के माता-पिता ने कक्षा तीन की एक टीसी पेश की है, उसमें किशोरी का जन्म 1994 का लिखा है।
Monday, August 29, 2011
11 साल से अनशन पर, पानी नहीं पीती और रूई से करती हैं दांत साफ...
इंफाल (मणिपुर).शहर का जवाहरलाल नेहरू अस्पताल। एक कॉरिडोर के चैनल पर ताला लगा है। यह जेल में तब्दील है। भीतर छोटे से वार्ड में हैं 34 वर्षीय इरोम चानू शर्मिला। 11 बरस बीत गए। पानी की एक बूंद तक गले से नहीं उतरी। नाक में लगी फीडिंग टच्यूब के जरिये तरल भोजन पर जिंदा यह औरत हड्डियों के ढांचे में ही बची है।
इरोम एकदम अकेली हैं। किसी से मिल तक नहीं सकतीं। घरवालों और साथी आंदोलनकारियों से भी नहीं। उनकी मांग एक ही है- आम्र्ड फोर्स (स्पेशल पॉवर्स) एक्ट 1958 खत्म हो। इसके उलट सरकार ने खुदकशी की कोशिश (आईपीसी की धारा 309) के आरोप में उन्हें कैद कर रखा है। अन्ना ने अपने आंदोलन में इरोम को भी बुलावा भेजा। इरोम ने जवाब भेजा- मैं इस वक्त कैद में हूं। निकल नहीं सकती। यहीं से समर्थन दूंगी।
इरोम कॉरिडोर में धीरे-धीरे टहल रही हैं। चैनल की तरफ देखा। मुस्कराईं। वापस मुड़ गईं। पुलिस हर 14 दिन में हिरासत बढ़ाने के लिए अदालत ले जाती है। एक साल से ज्यादा जेल में कैद नहीं रख सकते, इसलिए पुलिस बीच-बीच में दो-तीन दिन के लिए छोड़ने की रस्म भी बदस्तूर निभाती रही है। इस दौरान भी वे आधा किलोमीटर दूर स्थित घर नहीं जातीं। वहीं एक टेंट में रहती हैं। बांस की खपच्चियों और टीन का बना टेंट उनके समर्थकों का ठिकाना है।
दो-तीन दिन बाद पुलिस उन्हें फिर जेल में डाल देती है। वह भले ही मकसद में अन्ना जैसी कामयाब न हो पाई हों लेकिन दो वर्ल्ड रिकॉर्ड जरूर बन गए हैं - सबसे लंबी भूख हड़ताल का और सबसे ज्यादा बार जेल जाकर रिहा होने का। वह पढ़ने की शौकीन हैं। कविताएं लिखती हैं। योग करती हैं।
पानी पीती नहीं इसलिए ब्रश की जगह सूखी रूई से दांत साफ करती हैं। कमरे में एक ही खिड़की है, घंटों वहां बैठ बाहर ताकती हैं। चार घंटे सोती हैं। बाकी समय किताबें। मां ने बताया-उसका प्रण है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, घर में दाखिल नहीं होऊंगी। भाई सिंघाजीत को एग्रीकल्चर अधिकारी की नौकरी छोड़नी पड़ी। मां ने भी फैसला किया है भूख हड़ताल खत्म होने तक वह बेटी से नहीं मिलेंगी ताकि, उसका जज्बा कमजोर न हो।
इसलिए अनशन पर
सुरक्षा बलों द्वारा 10 लोगों की हत्या की प्रत्यक्षदर्शी शर्मिला की मांग है कि आम्र्ड फोर्स (स्पेशल पॉवर्स) एक्ट 1958 को हटाया जाए, क्योंकि यह कानून सुरक्षा बलों को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के गोली मारने का अधिकार देता है।
अन्ना ----------------- शर्मिला
अनशन के दिन - 10 दिन - दस साल 9 महीने
समर्थन - लाखों की भीड़ - मुट्ठी भर लोग
खास समर्थक - देश के युवा - कुछ बूढ़ी महिलाएं
अनशन कैसा - पानी पीकर - बिना पानी पिए
प्रचार - टोपी, पोस्टर, बैनर - चुनिंदा पोस्टर
इरोम के नाम दो वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं-
एक सबसे लंबी भूख हड़ताल
दूसरा सबसे ज्यादा बार जेल से रिहा होने और मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने।
नालायक' कहे जाने पर गुस्साए सांसद , ओमपुरी के समर्थन में अनुपम खेर
नई दिल्ली. रामलीला मैदान स्थित अन्ना हजारे के मंच से नेताओं पर की गई कथित 'आपत्तिजनक' टिप्पणी के मामले में अभिनेता ओम पुरी और हजारे की सहयोगी किरण बेदी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इनके खिलाफ संसद के दोनों सदनों के सदस्यों ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सोमवार को नोटिस मिलने की पुष्टि की।
ओम पुरी ने तो अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली है, लेकिन किरण बेदी ने नेताओं पर की गई अपनी टिप्पणी को जायज ठहराते हुए कहा कि उनकी इस टिप्पणी से ही जनलोकपाल का मसला सुलझा है।
ओमपुरी ने एक समाचार चैनल से कहा कि नेताओं को ‘नालायक’ और ‘गंवार’ कहने पर उन्हें अफसोस है। उन्हें ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। ओमपुरी ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने रामलीला मैदान के मंच से जब ऐसी टिप्पणी की थी उस वक्त उन्होंने शराब पी रखी थी। ओमपुरी ने कहा, ‘मैं सांसदों से मिलकर अपनी बात रखना पंसद करुंगा। यदि वो गुस्से में हैं तो मैं उनसे माफी मांगूंगा। अन्ना की सेहत हम सभी के लिए बेहद चिंता की बात थी। इस वजह से मैं भावना में बह गया और मेरे मुंह से ऐसी बातें निकल गईं।’
माफी मांग लेने के बावजूद ओम पुरी के खिलाफ कई सांसदों ने सोमवार को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। लेकिन फिल्म अभिनेता अनुपम खेर खुले आम पुरी के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने सोशल साइट ट्विटर पर लिखा, 'मैं ओमपुरी के साथ हूं। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उसी बात को कहा है जो करोड़ों घरों में हर रोज कही जाती है।'
उधर, बेदी ने एक समाचार चैनल से कहा कि उनकी टिप्पणी से उन्हें काफी फायदा हुआ। उनके रवैये के चलते बीजेपी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने उन्हें फोन किया और जिसके बाद मामला सुलझ गया। किरण बेदी ने कहा कि इस तरह के कमेंट से पूरा खेल बदल गया। गौरतलब है कि रामलीला मैदान में बेदी ने बीते शुक्रवार को एक कपड़े से घूंघट बनाकर नेताओं को दोमुंहा कहा था और कहा था कि वे हमेशा मुखौटा ओढ़े रहते हैं। बेदी ने कहा था कि नेता अलग-अलग मौकों पर मुखौटे बदल कर अलग-अलग बात बोलते हैं। उन्होंने कहा था कि एक मुलाकात में नेताओं ने कुछ कहा, जबकि दूसरी मुलाकात में कुछ और कहा।
किरण बेदी ने कहा कि रामलीला मैदान में आए लोगों ने वहां आए कुछ सांसदों के विरोध में आवाज उठाई। इसका असर आडवाणी जी पर पड़ा। बेदी ने कहा, 'शाम को आडवाणी जी ने मुझे फोन किया। मैंने कहा कि हम तो अकेले छोड़ दिए गए। आपने अभी तक संसद में हमारी आवाज नहीं उठाई। हमारी आवाज कौन सुनेगा। इसके बाद उन्होंने कहा- बेटी, यह कल संसद में होगा।' उन्होंने कहा, 'अगले दिन आडवाणी जी ने संसद में कहा कि अन्ना हजारे का स्वास्थ्य हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता है। शाम को वह प्रधानमंत्री कार्यालय गए।'
किरन बेदी के मुताबिक अगर ऐसा करने से कुछ बदलाव हुआ, तो वैसा करने में कुछ गलत नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी शिक्षा नहीं मिली है, लेकिन वह जनता की आवाज थी। किसी को दुखी करने का उनका मकसद नहीं था और वह संसद का सम्मान करती हैं।
नोटिस पर विचार कर रही है संसद
लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने आज कहा कि सांसद पीएम पुनिया, जगदंबिका पाल, रमाशंकर राजभर, लाल चंद कटारिया, मिर्जा असलम बेग, प्रवीण ऐरन और शैलेन्द्र कुमार की ओर से भेजे गए नोटिस उन्हें मिले हैं। इस मामले पर स्पीकर विचार कर रही हैं। स्पीकर ने बेदी और पुरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस विशेषाधिकार समिति को भेज दिया है।
सपा और बसपा की अगुवाई में संसद सदस्यों के बार बार अनुरोध के बाद मीरा कुमार ने यह बात कही। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा और बसपा के सदस्यों ने सांसदों के खिलाफ टिप्पणी को गंभीर मसला बताते हुए इस पर स्पीकर की राय मांगने लगे। सपा के शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि उन्होंने विशेषाधिकार हनन का नोटिस 27 अगस्त को ही दिया था और इस मामले पर तत्काल विचार किया जाए। बसपा के सदस्य भी सपा सांसदों के समर्थन में आ गए और सदन में हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा उनके पास करीब दजर्न भर नोटिस आए हैं और वह इस मुद्दे पर विचार कर रही हैं।
राज्यसभा में सपा सांसद राम गोपाल यादव और निर्दलीय सांसद मोहम्मद अदीब ने सांसदों पर टिप्पणी करने पर बेदी और पुरी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किया। राज्यसभा में आज शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए यादव ने कहा कि फिल्म अभिनेता ने बीते 26 अगस्त को अन्ना हजारे के मंच से सांसदों को ‘चोर’ और ‘नालायक’ कहा है। उन्होंने कहा कि अभिनेता की ओर से की गई इस तरह की टिप्पणी सांसदों के विशेषाधिकार का हनन है। सदन के उपसभापति के रहमान खान ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि सांसदों की ओर से दिए गए नोटिस सभापति के विचारार्थ हैं। सभी पार्टियों के सदस्यों ने मेजें थपथपाईं और यादव ने इस बीच नोटिस को विशेषाधिकार समिति को रिफर किए जाने का अनुरोध किया।
आपकी बात
क्या ओमपुरी के माफी मांग लेने के बाद सांसदों को यह बात खत्म कर देनी चाहिए? और, बेदी की इस बात में आपको कितना दम लगता है कि नेताओं पर उनकी टिप्पणी का मसला सुलझने में सकारात्मक असर रहा? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।
ओम पुरी ने तो अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली है, लेकिन किरण बेदी ने नेताओं पर की गई अपनी टिप्पणी को जायज ठहराते हुए कहा कि उनकी इस टिप्पणी से ही जनलोकपाल का मसला सुलझा है।
ओमपुरी ने एक समाचार चैनल से कहा कि नेताओं को ‘नालायक’ और ‘गंवार’ कहने पर उन्हें अफसोस है। उन्हें ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। ओमपुरी ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने रामलीला मैदान के मंच से जब ऐसी टिप्पणी की थी उस वक्त उन्होंने शराब पी रखी थी। ओमपुरी ने कहा, ‘मैं सांसदों से मिलकर अपनी बात रखना पंसद करुंगा। यदि वो गुस्से में हैं तो मैं उनसे माफी मांगूंगा। अन्ना की सेहत हम सभी के लिए बेहद चिंता की बात थी। इस वजह से मैं भावना में बह गया और मेरे मुंह से ऐसी बातें निकल गईं।’
माफी मांग लेने के बावजूद ओम पुरी के खिलाफ कई सांसदों ने सोमवार को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। लेकिन फिल्म अभिनेता अनुपम खेर खुले आम पुरी के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने सोशल साइट ट्विटर पर लिखा, 'मैं ओमपुरी के साथ हूं। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उसी बात को कहा है जो करोड़ों घरों में हर रोज कही जाती है।'
उधर, बेदी ने एक समाचार चैनल से कहा कि उनकी टिप्पणी से उन्हें काफी फायदा हुआ। उनके रवैये के चलते बीजेपी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने उन्हें फोन किया और जिसके बाद मामला सुलझ गया। किरण बेदी ने कहा कि इस तरह के कमेंट से पूरा खेल बदल गया। गौरतलब है कि रामलीला मैदान में बेदी ने बीते शुक्रवार को एक कपड़े से घूंघट बनाकर नेताओं को दोमुंहा कहा था और कहा था कि वे हमेशा मुखौटा ओढ़े रहते हैं। बेदी ने कहा था कि नेता अलग-अलग मौकों पर मुखौटे बदल कर अलग-अलग बात बोलते हैं। उन्होंने कहा था कि एक मुलाकात में नेताओं ने कुछ कहा, जबकि दूसरी मुलाकात में कुछ और कहा।
किरण बेदी ने कहा कि रामलीला मैदान में आए लोगों ने वहां आए कुछ सांसदों के विरोध में आवाज उठाई। इसका असर आडवाणी जी पर पड़ा। बेदी ने कहा, 'शाम को आडवाणी जी ने मुझे फोन किया। मैंने कहा कि हम तो अकेले छोड़ दिए गए। आपने अभी तक संसद में हमारी आवाज नहीं उठाई। हमारी आवाज कौन सुनेगा। इसके बाद उन्होंने कहा- बेटी, यह कल संसद में होगा।' उन्होंने कहा, 'अगले दिन आडवाणी जी ने संसद में कहा कि अन्ना हजारे का स्वास्थ्य हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता है। शाम को वह प्रधानमंत्री कार्यालय गए।'
किरन बेदी के मुताबिक अगर ऐसा करने से कुछ बदलाव हुआ, तो वैसा करने में कुछ गलत नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी शिक्षा नहीं मिली है, लेकिन वह जनता की आवाज थी। किसी को दुखी करने का उनका मकसद नहीं था और वह संसद का सम्मान करती हैं।
नोटिस पर विचार कर रही है संसद
लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने आज कहा कि सांसद पीएम पुनिया, जगदंबिका पाल, रमाशंकर राजभर, लाल चंद कटारिया, मिर्जा असलम बेग, प्रवीण ऐरन और शैलेन्द्र कुमार की ओर से भेजे गए नोटिस उन्हें मिले हैं। इस मामले पर स्पीकर विचार कर रही हैं। स्पीकर ने बेदी और पुरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस विशेषाधिकार समिति को भेज दिया है।
सपा और बसपा की अगुवाई में संसद सदस्यों के बार बार अनुरोध के बाद मीरा कुमार ने यह बात कही। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा और बसपा के सदस्यों ने सांसदों के खिलाफ टिप्पणी को गंभीर मसला बताते हुए इस पर स्पीकर की राय मांगने लगे। सपा के शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि उन्होंने विशेषाधिकार हनन का नोटिस 27 अगस्त को ही दिया था और इस मामले पर तत्काल विचार किया जाए। बसपा के सदस्य भी सपा सांसदों के समर्थन में आ गए और सदन में हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा उनके पास करीब दजर्न भर नोटिस आए हैं और वह इस मुद्दे पर विचार कर रही हैं।
राज्यसभा में सपा सांसद राम गोपाल यादव और निर्दलीय सांसद मोहम्मद अदीब ने सांसदों पर टिप्पणी करने पर बेदी और पुरी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किया। राज्यसभा में आज शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए यादव ने कहा कि फिल्म अभिनेता ने बीते 26 अगस्त को अन्ना हजारे के मंच से सांसदों को ‘चोर’ और ‘नालायक’ कहा है। उन्होंने कहा कि अभिनेता की ओर से की गई इस तरह की टिप्पणी सांसदों के विशेषाधिकार का हनन है। सदन के उपसभापति के रहमान खान ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि सांसदों की ओर से दिए गए नोटिस सभापति के विचारार्थ हैं। सभी पार्टियों के सदस्यों ने मेजें थपथपाईं और यादव ने इस बीच नोटिस को विशेषाधिकार समिति को रिफर किए जाने का अनुरोध किया।
आपकी बात
क्या ओमपुरी के माफी मांग लेने के बाद सांसदों को यह बात खत्म कर देनी चाहिए? और, बेदी की इस बात में आपको कितना दम लगता है कि नेताओं पर उनकी टिप्पणी का मसला सुलझने में सकारात्मक असर रहा? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।
देश में रहते हुए अर्जुन अवॉर्ड लेने नहीं आए जहीर खान
नई दिल्ली।। पिछले साल कॉमनवेल्थ गेम्स में चार गोल्ड मेडल जीतने वाले शूटर गगन नारंग को राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने खेलों के सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, ध्यानचंद, राष्ट्रीय साहस पुरस्कार और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए गए।
अगले साल होने वाले लंदन ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने वाले पहले भारतीय निशानेबाज नारंग पिछले साल खेल रत्न नहीं दिए जाने से खफा थे। उन्होंने हालांकि पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा, ' मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरी उपलब्धियों को पहचान मिली। मेरे लिए यह यादगार पल है और इसके लिए मैंने बहुत मेहनत की है। '
अर्जुन पुरस्कारों की सूची में भारत के फास्ट बोलर जहीर खान भी शामिल थे। महेंद्र सिंह धोनी और हरभजन सिंह के 2009 में पद्म पुरस्कार समारोह से गायब रहने के बाद जहीर के अर्जुन पुरस्कार समारोह में नहीं शामिल होने से नया विवाद पैदा हो गया है। जहीर इंग्लैंड दौरे पर घायल होने के बाद भारत में ही हैं। उनके अलावा टेनिस स्टार सोमदेव देववर्मन, जिम्नास्ट आशीष कुमार और चक्काफेंक खिलाड़ी विकास गौड़ा भी टूर्नामेंटों में व्यस्त होने के कारण समारोह में मौजूद नहीं थे।
अर्जुन पुरस्कार पाने वाले स्टार खिलाडि़यों में बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा, भारत की पहली विश्व चैंपियन महिला निशानेबाज तेजस्विनी सावंत, हॉकी कप्तान राजपाल सिंह, बॉक्सर सुरंजय सिंह, फुटबाल खिलाड़ी सुनील छेत्री शामिल है। इनके अलावा राहुल बनर्जी ( तीरंदाजी ) , प्रीजा श्रीधरन( ऐथलेटिक्स), विकास गौड़ा ( ऐथलेटिक्स), वीरधवल खाड़े ( तैराकी ) , आशीष कुमार (जिम्नास्टिक), रवि कुमार ( भारोत्तोलन ) , रविंदर सिंह (कुश्ती), संध्या रानी (वुशू), प्रशांत करमाकर ( तैराकी ) , संजय कुमार ( वॉलीबॉल ) , राकेश कुमार ( कबड्डी ) और तेजस्विनी (कबड्डी) को भी पिछले तीन साल में उनके प्रदर्शन के आधार पर अर्जुन पुरस्कार दिया गया।
आम तौर पर एक कैलेंडर वर्ष में 15 से अधिक अर्जुन पुरस्कार नहीं दिए जाते हैं लेकिन पिछले साल कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलिंपिक को ध्यान में रखते हुए इस बार खेल मंत्रालय ने 19 खिलाडि़यों को अर्जुन पुरस्कार दिए।
जहीर 2009 में गौतम गंभीर के बाद क्रिकेट में अर्जुन पुरस्कार पाने वाले पहले पुरूष खिलाड़ी हैं जिन्होंने 271 टेस्ट विकेट और 273 वनडे विकेट लिए हैं। सोमदेव ने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि फ्लायवेट मुक्केबाज सुरंजय सिंह ने लगातार 7 गोल्ड मेडल जीते।
देश में सर्वश्रेष्ठ कोचों को दिए जाने वाले द्राणाचार्य पुरस्कार से इनुकुर्ती वेंकटेश्वरराव ( बॉक्सिंग ) , देवेंद्र कुमार राठौर ( जिम्नास्टिक ) , रामफल (कुश्ती), कुंतल राय ( ऐथलेटिक्स ) और राजिंदर सिंह ( हॉकी) को नवाजा गया। अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार में विजेताओं को प्रतिमाएं, स्मृति पत्र और पांच लाख रुपये नकद पुरस्कार दिए गए। खेलों में आजीवन योगदान के लिए ध्यानचंद पुरस्कार शब्बीर अली ( फुटबाल ) , सुशील कोहली (तैराकी) और राजकुमार ( कुश्ती ) को दिए गए। इन्हें भी एक प्रतिमा, स्मृतिपत्र और पांच लाख रुपए दिए गए।
अन्ना के समर्थन में आत्मदाह करने वाले दिनेश की मौत
दिल्ली।। अन्ना हजारे के आंदोलन के समर्थन में आत्मदाह करने वाले दिनेश यादव को बचाया नहीं जा सका। दिनेश की मौत दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल में हुई।
इस बात की आलोचना की जा रही है कि एक तरफ जहां अन्ना के अनशन तोड़ने के बाद उन्हें फाइव स्टार हॉस्पिटल में रखा जा रहा है तो दूसरी तरफ अन्ना के समर्थन में आत्मदाह करने वाले दिनेश को एक सरकारी हॉस्पिटल में। इसके अलावा 90 फीसदी झुलसे होने के बावजूद दिनेश की सुध लेने हॉस्पिटल भी कोई नहीं पहुंचा।
पटना के दिनेश ने 23 अगस्त को राजघाट के पास अपने ऊपर पेट्रोल डाल कर आग लगा ली थी। दिनेश को एलएनजेपी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उसे करीब 90 फीसदी झुलसा बताया था। इतना झुलसने की वजह से डॉक्टरों को दिनेश के बचने की उम्मीद कम थी।
दिनेश यादव पटना के सरफुद्दीनपुर में गांव दुलहिन बाजार का रहने वाला था। वह 21 अगस्त को अन्ना के आंदोलन में शरीक होने के लिए पटना से दिल्ली आया था। मंगलवार तीसरे पहर करीब सवा चार बजे वह बोतल में पेट्रोल लेकर राजघाट के पास पहुंचा और अचानक अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। आसपास तैनात पुलिस कर्मियों ने लोगों की मदद से आग बुझाई और आनन फानन में हॉस्पिटल ले गए।
पूर्व मंत्री हरेन्द्र पंड्या हत्याकांड , १२ आरोपी बारी
अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने हरेन पाण्डया हत्याकांड मामले में सभी 12 अभियुक्तों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया। 26 मार्च 2003 को हुए इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी असगर अली को भी सबूतों अभाव में हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया। हालांकि कोर्ट ने इन सभी को हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश रचने के आरोपों में दोषी पाया है। न्यायाधीश डी.एच.वाघेला और न्यायाधीश जे.सी.उपाध्याय की खंडपीठ ने अभियुक्तों की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया।
वर्ष 2007 में पोटा की विशेष अदालत ने इस मामले में इन अभियुक्तों को हत्या के आरोप में भी दोषी ठहराया था। पाण्ड्या की हत्या के मामले में कुल 19 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था, जिसमें 15 की ही गिरफ्तारी हो पाई। 4 अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से 9 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में 2 अन्य दोषियों को 7 साल और 1 को 5 साल की सजा सुनाई गई थी। ये फैसला पोटा अदालत ने सुनाया था और सुनवाई पोटा कोर्ट की जज सोनिया गोकानी ने की थी। उल्लेखनीय है कि 26 मार्च 2003 को गुजरात के पूर्व गृहमंत्री पाण्डया की यहां ला गार्डन के निकट उस समय गोली मारकर हत्या कर दी थी जब वह सुबह की सैर पर निकले हुए थे।
हरेन के पिता ने मोदी पर लगाया था आरोप
प्रॉसिक्यूशन ने आरोप लगाया कि मुख्य अभियुक्त ने मुसलमान युवकों को गोधरा दंगा का बदला लेने के लिए भड़काया। यही नहीं, उसने राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने के लिए मुसलमानों को उकसाया, ताकि हिन्दुओं से बदला लिया जा सके। हालांकि हरेन पांड्या के पिता विटल भाई ने दावा किया कि उनके बेटे की हत्या राजनीति से प्रेरित थी और इसके पीछे मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथ था।
Sunday, August 28, 2011
ड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती अन्ना, घड़कन 94
गुड़गांव। प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर 13वें दिन अन्ना ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। अन्ना इस समय गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। अन्ना हजारे की जांच कर रहे डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि अन्ना पूरी तरह स्वस्थ हैं।
गौरतलब है कि रामलीला मैदान पर अनशन तोड़ने के बाद अन्ना को चिकित्सीय जांच के लिए गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। त्रेहन ने बताया कि अन्ना के शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंग ठीक से काम कर रहे हैं। उनका रक्तचाप 120/70 है। उनकी धड़कन 94 है, हालांकि यह 80 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अन्ना को इस समय नारियल पानी और शहद दिया जा रहा है ताकि उनका शरीर इसके अनुकूल हो सके। उन्होंने कहा कि इस समय अन्ना के शरीर में पानी की कमी है और थकान भी है। उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद ही उन्हें छुट्टी मिलेगी। कम से कम दो-तीन दिन तो लग जाएंगे।
गुड़गांव। प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर 13वें दिन अन्ना ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। अन्ना इस समय गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। अन्ना हजारे की जांच कर रहे डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि अन्ना पूरी तरह स्वस्थ हैं।
गौरतलब है कि रामलीला मैदान पर अनशन तोड़ने के बाद अन्ना को चिकित्सीय जांच के लिए गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। त्रेहन ने बताया कि अन्ना के शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंग ठीक से काम कर रहे हैं। उनका रक्तचाप 120/70 है। उनकी धड़कन 94 है, हालांकि यह 80 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अन्ना को इस समय नारियल पानी और शहद दिया जा रहा है ताकि उनका शरीर इसके अनुकूल हो सके। उन्होंने कहा कि इस समय अन्ना के शरीर में पानी की कमी है और थकान भी है। उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद ही उन्हें छुट्टी मिलेगी। कम से कम दो-तीन दिन तो लग जाएंगे।
अन्ना पर बोलीवुड भी फ़िदा , बताया तूफ़ान
पूरा देश इस समय जन लोकपाल के लिए अनशन पर बैठे अन्ना हजारे और उनकी टीम की जीत के जश्न में डूबा है। सब आपस में बधाइयां दे रहे हैं। ऐसे में सिलेब्रिटीज कैसे पीछे रहते! ट्विटर पर बॉलिवुड और अन्य फील्ड्स की सिलेब्रिटीज ने जन लोकपाल पर मिली जीत पर देश भर को दी बधाइयां।
बिपाशा बसु
अन्ना हजारे के मजबूत शब्द मेरे साथ हैं : अपने विचारों और कर्म में पवित्र बनो ! गलत चीज के खिलाफ विरोध करो लेकिन शांति से !
अभिषेक बच्चन
एक व्यक्ति ने पूरे देश को बांधा। शांति से।
रितिक रोशन
अपमान सहने की शक्ति असली शक्ति है। आप में कितनी शक्ति है ? - अन्ना हजारे। देश के लोगों को मेरी ओर से मुबारकबाद और सम्मान।
महेश भट्ट
अन्ना को मुबारकबाद। खून से सने हाथों की वजह से ही सरकार इस आंदोलन को रोकने का साहस नहीं दिखा सकी।
लारा दत्ता
अन्ना की लड़ाई हर घर में चली है। यह आने वाले सालों में हम सब पर असर डालेगी। मैं आशा करती हूं कि अपनी ओर से मैं भी इसे जिन्दा रख सकूंगी।
अनुपम खेर
थैंक यू अन्ना। थैंक यू जन लोकपाल टीम। और सबसे ज्यादा धन्यवाद महान देश के लोगों को उनके साहस और विश्वास के लिए। जय हो JAI HO.:)
करण जौहर
लोगों के इस हरिकेन ने सरकार को हिला दिया है। अन्ना हजारे एक तूफान हैं, जिनके साथ हर कोई जुड़ गया। RESPECT!!
भाग्यश्री
जय हो @ जन लोकपाल। क्या जीत है!
नील नितिन मुकेश
महान लोगों ने चरम छू लिया और बनाए रखा। यह सब अचानक से हासिल नहीं किया गया।
श्री श्री रविशंकर
भारत के आम आदमी के लिए यह एक बहुत बढ़िया दिन है।
नरेंद्र मोदी
अतीत और वर्तमान ने यह साबित कर दिया है कि अहिंसा भारतीयों के DNA में है।
किरन बेदी
इतिहास का एक बड़ा अध्याय लिख दिया गया है। जो इसका हिस्सा थे या इसके गवाह बने, उन्हें खुद को बहुत भाग्यशाली मानना चाहिए।
बिपाशा बसु
अन्ना हजारे के मजबूत शब्द मेरे साथ हैं : अपने विचारों और कर्म में पवित्र बनो ! गलत चीज के खिलाफ विरोध करो लेकिन शांति से !
अभिषेक बच्चन
एक व्यक्ति ने पूरे देश को बांधा। शांति से।
रितिक रोशन
अपमान सहने की शक्ति असली शक्ति है। आप में कितनी शक्ति है ? - अन्ना हजारे। देश के लोगों को मेरी ओर से मुबारकबाद और सम्मान।
महेश भट्ट
अन्ना को मुबारकबाद। खून से सने हाथों की वजह से ही सरकार इस आंदोलन को रोकने का साहस नहीं दिखा सकी।
लारा दत्ता
अन्ना की लड़ाई हर घर में चली है। यह आने वाले सालों में हम सब पर असर डालेगी। मैं आशा करती हूं कि अपनी ओर से मैं भी इसे जिन्दा रख सकूंगी।
अनुपम खेर
थैंक यू अन्ना। थैंक यू जन लोकपाल टीम। और सबसे ज्यादा धन्यवाद महान देश के लोगों को उनके साहस और विश्वास के लिए। जय हो JAI HO.:)
करण जौहर
लोगों के इस हरिकेन ने सरकार को हिला दिया है। अन्ना हजारे एक तूफान हैं, जिनके साथ हर कोई जुड़ गया। RESPECT!!
भाग्यश्री
जय हो @ जन लोकपाल। क्या जीत है!
नील नितिन मुकेश
महान लोगों ने चरम छू लिया और बनाए रखा। यह सब अचानक से हासिल नहीं किया गया।
श्री श्री रविशंकर
भारत के आम आदमी के लिए यह एक बहुत बढ़िया दिन है।
नरेंद्र मोदी
अतीत और वर्तमान ने यह साबित कर दिया है कि अहिंसा भारतीयों के DNA में है।
किरन बेदी
इतिहास का एक बड़ा अध्याय लिख दिया गया है। जो इसका हिस्सा थे या इसके गवाह बने, उन्हें खुद को बहुत भाग्यशाली मानना चाहिए।
देश भर में जश्न, लता का सलाम
नई दिल्ली। सशक्त लोकपाल की लड़ाई में अन्ना हजारे को मिली जीत पर देश भर में जश्न का माहौल है। संसद में जनलोकपाल बिल की तीन मांगो पर सहमति के बाद लोगों ने एक-दूसरे को बधाई देते हुए अन्ना से अनशन खत्म करनेकी अपील की। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने भी इस जीत पर अन्ना को बधाई दी है।
सूत्रों के मुताबिक लता ने अन्ना के जज्बे को सलाम करते हुए भ्रष्टाचार को खत्म करने की इस लड़ाई के लिए शुक्रिया कहा है। इससे पहले लता ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट टि्वटर पर टिवट किया था कि "नमस्कार, मुझे राजनीति ना समझमें आती है न ही उसमें कोई दिलचस्पी है, परंतु भ्र्रष्टाचार से हमारा देश मुक्त होना बहुत जरूरी है, इसलिए मैं अन्ना हजारे जी के इस भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का समर्थन करती हूं।... जय हिंद।
बतादें की
संसद में अपनी 3 मांगों वाला प्रस्ताव पास होने के बाद अन्ना हजारे ने रविवार सुबह सवा दस बजे 13वें दिन 288 घंटे लंबा अपना अनशन खत्म कर दिया। पश्चिमी दिल्ली के सुंदर नगर की 5 साल की सिमरन और इकरा ने नारियल पानी पिलाकर अन्ना का अनशन खत्म करवाया।
इस ऐतिहासिक मौके पर हजारों लोग रामलीला ग्राउंड में मौजूद थे। टीम अन्ना के अरविंद केजरीवाल ने बताया कि अन्ना हजारे को गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया है। वह वहां 3 से 4 दिन रहेंगे। उन्होंने लोगों से इस जीत का जश्न मनाने के लिए शाम 6 बजे इंडिया गेट पर इकट्ठा होने की अपील की।
उधर, अन्ना का अनशन खत्म होने के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है। रामलीला ग्राउंड से लेकर अन्ना के गांव रालेगणसिद्धि तक लोग खुशी से झूम रहे हैं।
रामलीला मैदान में रविवार सुबह अन्ना हजारे जैसे ही अपना अनशन तोड़ने के लिए मंच पर आए , जश्न में डूबे जनसैलाब ने उन्हें बधाई दी। सफेद धोती - कुर्ता और गांधी टोपी पहने अन्ना अपने टैंट से निकलकर सुबह नौ बजकर 30 मिनट पर मंच पर आए और समूचा वातावरण ' भारत माता की जय ' तथा ' वंदेमातरम ' के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
उन्होंने कहा , ' यह लड़ाई बदलाव की है। यह लड़ाई की शुरुआत भर है। जब तक पूरा परिवर्तन नहीं आ जाता , तब तक हमें यह मशाल जलाए रखनी होगी। ' हजारे ने अपने समर्थकों से कहा , ' सिर्फ अन्ना की टोपी पहन लेने से आप गांधीवादी नहीं बन जाएंगे। आपको शुद्ध आचरण और निष्कलंक जीवन बनाए रखना होगा। '
हजारे ने कहा , ' हमें देश में परिवर्तन संविधान के मुताबिक करना है। अमीर - गरीब के अंतर को खत्म करना है। सत्ता मंत्रालयों में सिमट गई है। हमें इसका विकेंद्रीकरण करना है। ग्राम सभाओं को मजबूत करना होगा। '
उन्होंने कहा , ' इस आंदोलन से स्पष्ट हो गया है कि जनता की संसद बड़ी है। जनसंसद के आदेश पर दिल्ली की संसद ने फैसला किया है। इस आंदोलन ने भरोसा दिलाया है कि हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण कर पाएंगे और बाबा अंबेडकर के संविधान पर अमल कर सकेंगे। '
हजारे ने कहा , ' उनके अनशन और आंदोलन का समर्थन करने के लिए मैं सभी लोगों खासकर युवाओं का समर्थन करता हूं। मैं जन लोकपाल तैयार करने वाले सिविल सोसायटी के सदस्यों , तिरंगा लेकर नारेबाजी करने वालों और स्वयंसेवियों का आभार व्यक्त करता हूं। '
सबसे पहले मंच को टीम अन्ना के अरविंद केजरीवाल ने संबोधित किया। उन्होंने अन्ना की 3 शर्तों को मानने के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया। साथ ही उन्होंने सांसदों और राजनीतिक दलों का भी आभार जताया। केजरीवाल ने अन्ना के स्वास्थ्य पर नजर रख रहे डॉक्टर नरेश त्रेहान का भी खास तौर पर शुक्रिया अदा किया। उन्होंने आंदोलन से जुड़े सभी लोगों को धन्यवाद दिया। जानकारी मुताबिक टीम अन्ना आज रामलीला ग्राउंड भी खाली कर देगी। अन्ना के अनशन तोड़ने के बाद टीम अन्ना की कोर कमिटी की बैठक होगी, जिसमें यह फैसला लिया जाएगा।
आसमान में आतिशबाजी , जमीन पर जलतीं मोमबत्तियां तो हवा में लहराते सैकड़ों तिरंगे झंडे। रातभर यह नजारा था रामलीला मैदान का। मैदान में देर रात तक लोगों का आना - जाना जारी रहा और आने वाले लोगों के चेहरों पर जीत के भाव साफ झलक रहे थे। ज्यादातर स्वयंसेवक रात होते ही चलते बने , जिस कारण उत्साही भीड़ कई बार बेकाबू हो उठी। प्रदर्शनकारियों ने ढोल - नगाड़े के साथ जीत के नारे लगाए , हालांकि कुछ लोगों के मन में सरकार के इस फैसले पर अभी भी संशय बना हुआ था।
अन्ना के गांव में खुशी की लहर
उधर अन्ना के गांव रालेगणसिद्धि में अन्ना के आज अनशन तोड़ने को लेकर उत्सव सा माहौल है। हजारे के एक करीब सहयोगी दत्ता अवारी ने बताया , ' हम अन्ना की जीत पर खुशियां मना रहे हैं। हम जानते हैं वह अपना जो लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं , वह उसे हासिल कर ही रहेंगे। ' हजारे की निकट रिश्तेदार कांताबाई ने कहा , ' वह हमेशा ही अटल रहे हैं और कोई उनका दिमाग नहीं बदल सकता। '
सिरफिरे ने किया पूरे परिवार का खात्मा
टोंक। राजस्थान के टोंक जिले के देवली कस्बे में पत्नी से विवाद के चलते रविवार को एक शख्स ने पत्नी समेत ससुराल पक्ष के चार जनों की हत्या कर पुलिस और मीडिया समेत सैंकड़ों लोगों के सामने खुद को गोली मार ली। गोली से घायल ससुर को कोटा रैफर कर दिया गया।
टोंक के पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र साहू ने बताया कि कोटा निवासी प्रदीप सिंहल का पत्नी सुमन के साथ विवाद चल रहा था। प्रदीप रविवार सुबह ससुराल देवली आया। गुस्से में उसने रिवाल्वर से पत्नी सुमन, ससुर प्रकाश चंद जैन, साले संजय तथा उसकी पत्नी किरन, दूसरे साले लोकेश की पत्नी अंकिता को गोली मार दी। जिसमें संजय, किरन व अंकिता की मौके पर मौत हो गई। सुमन ने देवली चिकित्सालय में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। ससुर प्रकाश चंद हालत गम्भीर होने पर चिकित्सकों ने कोटा रैफर कर दिया।
घटना के बाद प्रदीप पास के एक मकान की चौथी मंजिल पर बॉलकनी में रिवाल्वर लेकर खड़ा हो गया। जहां वह चिल्ला-चिल्लाकर पत्नी और ससुरालवालों पर उसे बर्बाद करने का आरोप लगा रहा था। मौके पर पहुंचे पत्रकारों को प्रदीप ने अपनी व्यथा बता स्वयं के गोली मार ली। जिससे उसकी भी मौके पर मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक साहू ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। प्रारम्भिक तौर पर अभियुक्त और उसकी पत्नी के बीच विवाद सामने आया है।
अग्निवेश कर रहे थे अन्ना से गद्दारी!
नई दिल्ली। सरकार से वार्ता के लिए खुद को नहीं भेजा जाना शायद स्वामी अग्निवेश को रास नहीं आया। गुस्से में उन्होंने खुद को टीम अन्ना से अलग कर लिया। अब पता चला है कि स्वामी अग्निवेश अन्ना की पीठ में छुरा घोंपने का काम कर रहे थे। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्वामी अग्निवेश ने केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से फोन पर बातचीत के दौरान अन्ना को पागल हाथी करार दिया। सिब्बल से अग्निवेश की बातचीत के वीडियो में कई चौंकानी वाली बातें सामने आई है।
फोन पर कपिल सिब्बल से बातचीत के दौरान अग्निवेश कह रहे हैं कि "बहुत जरूरी है कपिल जी, नहीं तो ये पागल होते जा रहे हैं जैसे हाथी। सरकार जितना इनके सामने झुक रही है उतना ही ये लोग सिर पर चढ़ रहे हैं। जब पूरी संसद खड़े होकर अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील कर रही थी तब ही अन्ना को अनशन तोड़ देना चाहिए था। इस बात से बहुत शर्मिदा महसूस कर रहा हूं कि हमारी सरकार आखिर इतनी कमजोर क्यों दिखाई पड़ रही है। सरकार को आगे से कड़ा रूख अपनाना चाहिए।
गौरतलब है कि जब सरकार ने अन्ना को वार्ता का प्रस्ताव भेजा था तब अन्ना ने सरकार से वार्ता के लिए किरण बेदी और केजरीवाल को भेजा था। इससे अग्विनेश काफी नाराज हो गए थे। लोकसभा की अनशन तोड़ने की अपील के बाद भी जब अन्ना ने अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया तो स्वामी अग्निवेश और भड़क गए और टीम अन्ना से अलग हो गए। उन्होंने किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल पर अन्ना हजारे को बहकाने का आरोप लगाया था।
अब राइट टू रिकॉल की लड़ाई लड़ेंगे अन्ना
जंग अभी बाकी है मेरे दोस्त
नई दिल्ली। सशक्त लोकपाल के लिए रामलीला मैदान में 288 घंटेतक अनशन करने वाले अन्ना के इरादे अब भी पस्त नहीं हुए हैं। उन्होंने अगली लड़ाई का ऎलान कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद अन्न ने मंच से लोगों को कहा कि उन्होंने अनशन अभी छोड़ा नहीं है। यह केवल स्थगित हुआ है। अब वे राइट टू रिकॉल की लड़ाई लडेंगे।
उन्होंने कहा कि देश के चुनाव तंत्र में बदलाव होना चाहिए। जनता को "राइट टू रिजेक्ट" मिलना चाहिए। उसे उम्मीदवार को वापस बुलाने का अधिकार मिलना चाहिए। नापसंदगी के विकल्प पर सबसे ज्यादा वोट आने पर दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए। साथ ही लोगों को चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का हक मिलना चाहिए।
सत्ता का विकेद्रीकरण हो
समर्थकों से खचाखच भरे रामलीला मैदान के मंच से उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने विश्वास दिलाया है कि देश से भ्रष्टाचार खत्म होगा और डॉ. अंबेडकर द्वारा बनाए संविधान पर चलने के लिए प्रेरणा दी है। सत्ता केंद्रित होने के कारण देश में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। सत्ता का विकेंद्रीकरण होने पर देश में असली लोकशाही आएगी। लोकसभा, विधानसभा की तर्ज पर ग्राम सभा को भी मजबूत करना होगा।
माल खाए मदारी और नाच करे बंदर
किसानों की हालत वे बोले कि कृषि प्रधान भारत में माल खाए मदारी और नाच करे बंदर वाली बात नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा मजदूरों की हालत सुधारनी होगी। शिक्षा के नाम पर अपनी दुकाने चलाने वाले लोगों को हटाकर इस रवैये में बदलाव लाना होगा।
टोपी से नहीं बनते "अन्ना"
अन्ना ने कहा कि सिर पर मैं अन्ना की टोपी पहनने से कोई अन्ना नहीं बन जाता। असली अन्ना बनने के लिए सभी को कथनी और करनी में समानता रखनी होगी। उन्होंने कहा कि शुद्ध आचार विचार रखने के साथ खुद में त्याग की भावाना लाओ। अपना अपमान पीना सीखो।
इंडिया गेट पर जीत का जश्न
इससे पहले टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने जनलोकपाल बिल की प्रमुख मांगो को संसद में सहमति मिलने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का शुक्रि या अदा किया। केजरीवाल ने कहा कि देश आज त्योंहार मना रहा है। उन्होंने रविवार शाम छह बजे लोगों से इंडिया गेट पर पहुंचने का आह्वान कर जनतंत्र का जश्न बनाने के लिए आमंत्रित किया।
केजरीवाल ने इसके लिए वे देश की संसद और सांसदों और सबसे ज्यादा अन्ना के समर्थकों के धन्यवाद करते हैं जिनकी बदौलत आज यह दिन देखने को मिला है। केजरीवाल ने देश की संसद के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि हर कानून बनाने से पहले जनता की राय ली जानी चाहिए। जनतंत्र में जन से बड़ा कोई नहीं है। उन्होंने लोगों से घूस नहीं लेने और देने की अपील की।
जंग अभी बाकी है मेरे दोस्त
नई दिल्ली। सशक्त लोकपाल के लिए रामलीला मैदान में 288 घंटेतक अनशन करने वाले अन्ना के इरादे अब भी पस्त नहीं हुए हैं। उन्होंने अगली लड़ाई का ऎलान कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद अन्न ने मंच से लोगों को कहा कि उन्होंने अनशन अभी छोड़ा नहीं है। यह केवल स्थगित हुआ है। अब वे राइट टू रिकॉल की लड़ाई लडेंगे।
उन्होंने कहा कि देश के चुनाव तंत्र में बदलाव होना चाहिए। जनता को "राइट टू रिजेक्ट" मिलना चाहिए। उसे उम्मीदवार को वापस बुलाने का अधिकार मिलना चाहिए। नापसंदगी के विकल्प पर सबसे ज्यादा वोट आने पर दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए। साथ ही लोगों को चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का हक मिलना चाहिए।
सत्ता का विकेद्रीकरण हो
समर्थकों से खचाखच भरे रामलीला मैदान के मंच से उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने विश्वास दिलाया है कि देश से भ्रष्टाचार खत्म होगा और डॉ. अंबेडकर द्वारा बनाए संविधान पर चलने के लिए प्रेरणा दी है। सत्ता केंद्रित होने के कारण देश में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। सत्ता का विकेंद्रीकरण होने पर देश में असली लोकशाही आएगी। लोकसभा, विधानसभा की तर्ज पर ग्राम सभा को भी मजबूत करना होगा।
माल खाए मदारी और नाच करे बंदर
किसानों की हालत वे बोले कि कृषि प्रधान भारत में माल खाए मदारी और नाच करे बंदर वाली बात नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा मजदूरों की हालत सुधारनी होगी। शिक्षा के नाम पर अपनी दुकाने चलाने वाले लोगों को हटाकर इस रवैये में बदलाव लाना होगा।
टोपी से नहीं बनते "अन्ना"
अन्ना ने कहा कि सिर पर मैं अन्ना की टोपी पहनने से कोई अन्ना नहीं बन जाता। असली अन्ना बनने के लिए सभी को कथनी और करनी में समानता रखनी होगी। उन्होंने कहा कि शुद्ध आचार विचार रखने के साथ खुद में त्याग की भावाना लाओ। अपना अपमान पीना सीखो।
इंडिया गेट पर जीत का जश्न
इससे पहले टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने जनलोकपाल बिल की प्रमुख मांगो को संसद में सहमति मिलने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का शुक्रि या अदा किया। केजरीवाल ने कहा कि देश आज त्योंहार मना रहा है। उन्होंने रविवार शाम छह बजे लोगों से इंडिया गेट पर पहुंचने का आह्वान कर जनतंत्र का जश्न बनाने के लिए आमंत्रित किया।
केजरीवाल ने इसके लिए वे देश की संसद और सांसदों और सबसे ज्यादा अन्ना के समर्थकों के धन्यवाद करते हैं जिनकी बदौलत आज यह दिन देखने को मिला है। केजरीवाल ने देश की संसद के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि हर कानून बनाने से पहले जनता की राय ली जानी चाहिए। जनतंत्र में जन से बड़ा कोई नहीं है। उन्होंने लोगों से घूस नहीं लेने और देने की अपील की।
अन्ना का अनशन: प्रारंभ से अंत तक एक नज़र
सरकार में बैठे लोगों को डर था कि रामलीला मैदान की भीड़ से उठकर कोई अन्ना उनकी सत्ता न हथिया ले। विपक्ष भयभीत था कि संसद या कतरे-ब्योंते मंचों पर जनता की बात कहने का उनका मुखौटा न छिन जाए।इसलिए दोनों एक हो गए।
अन्ना की शर्तो को प्रस्ताव बनाकर पारित कर दिया। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। ये बात और है कि ज्यादातर सांसद इस आंदोलन को संसद की संप्रभुता पर हमला बताते रहे लेकिन सही मायनों में यही जनतंत्र की मजबूती है।
बातचीत के दौर
23 अगस्त : पहली बार सरकार से सीधी बात।
नतीजा : गतिरोध कायम।
24 अगस्त : कोई वादा करने से सरकार का इनकार। सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने अनशन खत्म करने की अपील की। विलासराव देशमुख ने अन्ना से बातचीत की।
नतीजा : टीम अन्ना ने कहा हमारे साथ धोखा हुआ है। कल तक हमें सुन रहे थे। आज वे हमें डांट रहे हैं।
25 अगस्त: अन्ना की प्रधानमंत्री को चिट्ठी तीन मुद्दों पर संसद में चर्चा हो तो अनशन खत्म करने का वादा।
नतीजा : सरकार ने लोकपाल से जुड़े चार विधेयकों पर चर्चा का आश्वासन दिया।
क्या हुए षड्यंत्र?
>घर से निकलते ही अन्ना गिरफ्तार।
>तिहाड़ जेल भेजा।
>अनशन करने पर दसियों शर्ते।
>नौ दिन तक बातचीत नहीं।
>सरकार ने बार-बार स्टैंड बदला।
>पहले मांगों पर सहमति जताई, फिर मुकर गई।
>कई मसौदे मंगाए ताकि अन्ना का प्रस्ताव कमजोर हो।
>टीम अन्ना में कई बार फूट डालने की कोशिश।
>टीम अन्ना की राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
कैसे टूटा गतिरोध?
>विपक्ष के अन्ना के समर्थन में खड़े होने से सरकार बातचीत के लिए दबाव में आई।
>खुद के भ्रष्टाचार समर्थक साबित होने का डर।
>शनिवार को आपात संसद सत्र बुलाकर चर्चा।
क्यों डरी सरकार?
>प्रधानमंत्री, सांसदों के घरों का घेराव हो रहा था
>संसद तक अन्ना समर्थक पहुंच गए
>30 तारीख से जेल भरो आंदोलन का डर
क्यों माना संसद पर हमला?
>कानून बनाने का हक केवल सांसदों का, कोई दूसरा दबाव डालकर कैसे मनचाहा कानून बनवा सकता है।
>जनसमर्थन से अन्ना हजारे और टीम के चुनकर संसद में आने की संभावना ।
पूरी जीत होना बाकी है: अन्ना हजारे
"यह जनलोकपाल की आधी जीत है। पूरी जीत बाकी है। ..और यह जो आधी जीत है वह देशभर के भाइयों, बहनों, युवाओं, बच्चों और बच्चियों की जीत है। प्रस्ताव पारित करने के लिए संसद का धन्यवाद। सांसदों का धन्यवाद। मैं अपना अनशन सुबह 10 बजे तोडूंगा। आप सब जश्न मनाएं लेकिन शांति से।"
20 साल से आंदोलन ही आंदोलन
>1991 में भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन की शुरुआत रालेगांव सिद्धि में।
>9 अगस्त 2003 से 17 अगस्त 2003 तक कांग्रेस-एनसीपी सरकार के मंत्रियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल की। मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने जांच समिति बनाई, जिसकी रिपोर्ट पर चार मंत्रियों की कुर्सी गई।
>महाराष्ट्र में सूचना का अधिकार कानून लागू करने के लिए आंदोलन छेड़ा, जिसे बाद में केंद्र सरकार ने 2005 में अपनाया।
>9 अगस्त 2006 को सूचना का अधिकार कानून में संशोधन के खिलाफ भूख हड़ताल की, जो 19 अगस्त 2006 में खत्म हुई। सरकार ने संशोधन रद्द कर दिया।
>अनाज से बनी शराब पर प्रतिबंध के लिए शिरडी में 5 दिन की भूख हड़ताल। सरकार ने 20 अगस्त 2009 को सरकार ने प्रतिबंध लगाया।
अन्ना की शर्तो को प्रस्ताव बनाकर पारित कर दिया। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। ये बात और है कि ज्यादातर सांसद इस आंदोलन को संसद की संप्रभुता पर हमला बताते रहे लेकिन सही मायनों में यही जनतंत्र की मजबूती है।
बातचीत के दौर
23 अगस्त : पहली बार सरकार से सीधी बात।
नतीजा : गतिरोध कायम।
24 अगस्त : कोई वादा करने से सरकार का इनकार। सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने अनशन खत्म करने की अपील की। विलासराव देशमुख ने अन्ना से बातचीत की।
नतीजा : टीम अन्ना ने कहा हमारे साथ धोखा हुआ है। कल तक हमें सुन रहे थे। आज वे हमें डांट रहे हैं।
25 अगस्त: अन्ना की प्रधानमंत्री को चिट्ठी तीन मुद्दों पर संसद में चर्चा हो तो अनशन खत्म करने का वादा।
नतीजा : सरकार ने लोकपाल से जुड़े चार विधेयकों पर चर्चा का आश्वासन दिया।
क्या हुए षड्यंत्र?
>घर से निकलते ही अन्ना गिरफ्तार।
>तिहाड़ जेल भेजा।
>अनशन करने पर दसियों शर्ते।
>नौ दिन तक बातचीत नहीं।
>सरकार ने बार-बार स्टैंड बदला।
>पहले मांगों पर सहमति जताई, फिर मुकर गई।
>कई मसौदे मंगाए ताकि अन्ना का प्रस्ताव कमजोर हो।
>टीम अन्ना में कई बार फूट डालने की कोशिश।
>टीम अन्ना की राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
कैसे टूटा गतिरोध?
>विपक्ष के अन्ना के समर्थन में खड़े होने से सरकार बातचीत के लिए दबाव में आई।
>खुद के भ्रष्टाचार समर्थक साबित होने का डर।
>शनिवार को आपात संसद सत्र बुलाकर चर्चा।
क्यों डरी सरकार?
>प्रधानमंत्री, सांसदों के घरों का घेराव हो रहा था
>संसद तक अन्ना समर्थक पहुंच गए
>30 तारीख से जेल भरो आंदोलन का डर
क्यों माना संसद पर हमला?
>कानून बनाने का हक केवल सांसदों का, कोई दूसरा दबाव डालकर कैसे मनचाहा कानून बनवा सकता है।
>जनसमर्थन से अन्ना हजारे और टीम के चुनकर संसद में आने की संभावना ।
पूरी जीत होना बाकी है: अन्ना हजारे
"यह जनलोकपाल की आधी जीत है। पूरी जीत बाकी है। ..और यह जो आधी जीत है वह देशभर के भाइयों, बहनों, युवाओं, बच्चों और बच्चियों की जीत है। प्रस्ताव पारित करने के लिए संसद का धन्यवाद। सांसदों का धन्यवाद। मैं अपना अनशन सुबह 10 बजे तोडूंगा। आप सब जश्न मनाएं लेकिन शांति से।"
20 साल से आंदोलन ही आंदोलन
>1991 में भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन की शुरुआत रालेगांव सिद्धि में।
>9 अगस्त 2003 से 17 अगस्त 2003 तक कांग्रेस-एनसीपी सरकार के मंत्रियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल की। मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने जांच समिति बनाई, जिसकी रिपोर्ट पर चार मंत्रियों की कुर्सी गई।
>महाराष्ट्र में सूचना का अधिकार कानून लागू करने के लिए आंदोलन छेड़ा, जिसे बाद में केंद्र सरकार ने 2005 में अपनाया।
>9 अगस्त 2006 को सूचना का अधिकार कानून में संशोधन के खिलाफ भूख हड़ताल की, जो 19 अगस्त 2006 में खत्म हुई। सरकार ने संशोधन रद्द कर दिया।
>अनाज से बनी शराब पर प्रतिबंध के लिए शिरडी में 5 दिन की भूख हड़ताल। सरकार ने 20 अगस्त 2009 को सरकार ने प्रतिबंध लगाया।
Saturday, August 27, 2011
नई दिल्ली। राज्यसभा और लोकसभा में अन्ना की मांगों पर सरकार और विपक्षी दलों में बनी सहमति तथा प्रस्ताव लाने तथा उस पर वोटिंग कराए जाने की खबर मिलने ही रामलीला मैदान में खुशी की लहर दौड़ गई। रामलीला मैदान में लोगों का हुजूम उमड़ने लगा है। अब सभी को अन्ना के अनशन तोड़े जाने का बेसब्री से इंतजार है। सूत्रों के अनुसार संसद में प्रस्ताव पारित होने पर केन्द्रीय मंत्री विलासराव देशमुख प्रस्ताव की प्रति लेकर रात आठ बजे तक अन्ना के पास रामलीला मैदान पहुंचेंगे। खबर है कि प्रस्ताव पास हो जाता है तो अन्ना रविवार सुबह 10 बजे अनशन तोड़ेंगे।
बीते 12 दिन से अशनरत अन्ना का वजन 7.5 किलो से भी कम हो चुका हैं। उनकी मांसपेशियां कमजोर पड़ने से डाक्टर चिंतित है। डॉ. नरेश त्रेहन ने शनिवार को अन्ना की स्वास्थ्य जांच के बाद बताया कि कमजोरी के कारण अन्ना को बोलने से मना किया गया है। चिकित्सकों ने उन्हें अधिक से अधिक आराम और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी। चिकित्सक अन्ना के स्वास्थ्य पर बराबर निगरानी रखे हुए हैं। अन्ना की प्रत्येक दो घंटे में स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
किरण बेदी ने कहा, यह ऎतिहासिक दिन
टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने रामलीला मैदान में उपस्थित लोगों को कहा कि आज का दिन ऎतिहासिक है जब संसद एक हो गई है। उन्होंने जल्दी ही खुशखबरी की उम्मीद जताई। इसके बाद वहां उपस्थित लोगों ने हर्षध्वनि की और देश प्रेम के नारों का उदघोष किया।
अन्ना ने आईपैड पर देखी संसद की बहस
अनशन स्थल ऎतिहासिक रामलीला मैदान में अन्ना ने संसद में जन लोकपाल विधेयक पर चल रही बहस को अपने छोटे से आईपैड पर देखा और उनकी पहली प्रतिक्रिया थी "बहुत अच्छा है"।
एक बारगी उलझ गया था मसला
इससे पहले सरकार और टीम अन्ना के बीच आज अन्ना हजारे के अनशन को खत्म कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों को उस समय एक बार फिर झटका लगा था। जब सरकार ने इस मसले पर प्रस्ताव लाने तथा उस पर वोटिंग से इनकार कर दिया था। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के साथ टीम अन्ना की बैठक में भी बेनतीजा रही। टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण ने खुर्शीद के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार हमको फिर गुमराह कर रही है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने वोटिंग का भरोसा दिलाया था लेकिन वह एक बार फिर मुकर गई है। सरकार सरासर धोखा दे रही है। चार दिन में सरकार 3 बार मुकर चुकी है।
भूषण ने कहा कि सरकार की ओर से कल रात हमें भरोसा दिलाया गया था कि जन लोकपाल विधेयक पर संसद में प्रस्ताव पारित किया जाएगा और उस पर मतदान भी कराया जाएगा। भूषण ने कहा कि सरकार अब कह रही है कि नियम 193 के तहत केवल चर्चा कराई जा सकती है और मतदान कराए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी विषय पर नियम 184 के तहत भी नोटिस दिया गया था, जिसमें चर्चा के बाद मतदान का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जन लोकपाल विधेयक पर मतदान नहीं कराया जाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मतदान से यह स्पष्ट हो जाता कि संसद में कौन सी पार्टी और कौन सांसद भ्रष्टाचार के खिलाफ जन लोकपाल विधेयक के पक्ष में है और कौन नहीं और जनता को इसे जानने का पूरा अधिकार है।
भूषण ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पारित हुए बिना अन्ना का अनशन नहीं खत्म होगा। अन्ना के निकट सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने फिर धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जन लोकपाल विधेयक के प्रति यदि गंभीर है तो वह संसद में प्रस्ताव लाकर इस पर मतदान कराए।
बीते 12 दिन से अशनरत अन्ना का वजन 7.5 किलो से भी कम हो चुका हैं। उनकी मांसपेशियां कमजोर पड़ने से डाक्टर चिंतित है। डॉ. नरेश त्रेहन ने शनिवार को अन्ना की स्वास्थ्य जांच के बाद बताया कि कमजोरी के कारण अन्ना को बोलने से मना किया गया है। चिकित्सकों ने उन्हें अधिक से अधिक आराम और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी। चिकित्सक अन्ना के स्वास्थ्य पर बराबर निगरानी रखे हुए हैं। अन्ना की प्रत्येक दो घंटे में स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
किरण बेदी ने कहा, यह ऎतिहासिक दिन
टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने रामलीला मैदान में उपस्थित लोगों को कहा कि आज का दिन ऎतिहासिक है जब संसद एक हो गई है। उन्होंने जल्दी ही खुशखबरी की उम्मीद जताई। इसके बाद वहां उपस्थित लोगों ने हर्षध्वनि की और देश प्रेम के नारों का उदघोष किया।
अन्ना ने आईपैड पर देखी संसद की बहस
अनशन स्थल ऎतिहासिक रामलीला मैदान में अन्ना ने संसद में जन लोकपाल विधेयक पर चल रही बहस को अपने छोटे से आईपैड पर देखा और उनकी पहली प्रतिक्रिया थी "बहुत अच्छा है"।
एक बारगी उलझ गया था मसला
इससे पहले सरकार और टीम अन्ना के बीच आज अन्ना हजारे के अनशन को खत्म कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों को उस समय एक बार फिर झटका लगा था। जब सरकार ने इस मसले पर प्रस्ताव लाने तथा उस पर वोटिंग से इनकार कर दिया था। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के साथ टीम अन्ना की बैठक में भी बेनतीजा रही। टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण ने खुर्शीद के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार हमको फिर गुमराह कर रही है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने वोटिंग का भरोसा दिलाया था लेकिन वह एक बार फिर मुकर गई है। सरकार सरासर धोखा दे रही है। चार दिन में सरकार 3 बार मुकर चुकी है।
भूषण ने कहा कि सरकार की ओर से कल रात हमें भरोसा दिलाया गया था कि जन लोकपाल विधेयक पर संसद में प्रस्ताव पारित किया जाएगा और उस पर मतदान भी कराया जाएगा। भूषण ने कहा कि सरकार अब कह रही है कि नियम 193 के तहत केवल चर्चा कराई जा सकती है और मतदान कराए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी विषय पर नियम 184 के तहत भी नोटिस दिया गया था, जिसमें चर्चा के बाद मतदान का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जन लोकपाल विधेयक पर मतदान नहीं कराया जाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मतदान से यह स्पष्ट हो जाता कि संसद में कौन सी पार्टी और कौन सांसद भ्रष्टाचार के खिलाफ जन लोकपाल विधेयक के पक्ष में है और कौन नहीं और जनता को इसे जानने का पूरा अधिकार है।
भूषण ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पारित हुए बिना अन्ना का अनशन नहीं खत्म होगा। अन्ना के निकट सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने फिर धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जन लोकपाल विधेयक के प्रति यदि गंभीर है तो वह संसद में प्रस्ताव लाकर इस पर मतदान कराए।
आमिर बोले मैं नहीं अन्ना हैं असली हीरो
मुंबई/नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 12 दिनों से अनशन कर रहे समाजसेवी अन्ना हजारे को बॉलीवुड एक्टर आमिर खान भरपूर समर्थन मिल रहा है। शनिवार को आमिर ने रामलीला मैदान पहुंचकर उनके जज्बे को सलाम करते हुए उनसे अनशन खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं नहीं असली हीरो तो अन्ना हैं।
सूत्रों के अनुसार आमिर ने रामलीला मैदान में अन्ना और उनके साथियों के साथ आंदोलन में हिस्सा लिया और अन्ना के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। आमिर के साथ फिल्म निर्देशक राजकुमार हीरानी भी रामलीला मैदान में जनता को संबोधित किया। गौरतलब है कि आमिर ने ही अन्ना और उनके साथियों को सांसदों के घरों के बाहर धरना देने व उनसे सवाल पूछने के लिए समर्थकों का आह्वान करने का आइडिया दिया था। अन्ना ने आमिर के सुझाव पर अमल करते हुए समर्थको से अपील की थी वो अपने-अपने इलाके में सांसदों के घरों के बाहर धरना दें और उनके पूछे कि जन लोकपाल बिक पर उनकी क्या राय है। अन्ना की इस अपील का व्यापक असर हुआ था। अन्ना के समर्थकों ने देश भर में सांसदों के घरों के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था, जिससे सरकार काफी मुश्किल में फंस गई।
मुंबई/नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 12 दिनों से अनशन कर रहे समाजसेवी अन्ना हजारे को बॉलीवुड एक्टर आमिर खान भरपूर समर्थन मिल रहा है। शनिवार को आमिर ने रामलीला मैदान पहुंचकर उनके जज्बे को सलाम करते हुए उनसे अनशन खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं नहीं असली हीरो तो अन्ना हैं।
सूत्रों के अनुसार आमिर ने रामलीला मैदान में अन्ना और उनके साथियों के साथ आंदोलन में हिस्सा लिया और अन्ना के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। आमिर के साथ फिल्म निर्देशक राजकुमार हीरानी भी रामलीला मैदान में जनता को संबोधित किया। गौरतलब है कि आमिर ने ही अन्ना और उनके साथियों को सांसदों के घरों के बाहर धरना देने व उनसे सवाल पूछने के लिए समर्थकों का आह्वान करने का आइडिया दिया था। अन्ना ने आमिर के सुझाव पर अमल करते हुए समर्थको से अपील की थी वो अपने-अपने इलाके में सांसदों के घरों के बाहर धरना दें और उनके पूछे कि जन लोकपाल बिक पर उनकी क्या राय है। अन्ना की इस अपील का व्यापक असर हुआ था। अन्ना के समर्थकों ने देश भर में सांसदों के घरों के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था, जिससे सरकार काफी मुश्किल में फंस गई।
42 साल से लटका है लोकपाल विधेयकः सुषमा
नई दिल्ली। प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की अपील करते हुए शनिवार को लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने लोकपाल के मसले पर चर्चा की शुरुआत की। अन्ना हजारे ने अनशन समाप्त करने के लिए इसके विभिन्न पहलुओं पर संसद में प्रस्ताव पारित करने को कहा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने शनिवार को कहा कि लोकपाल विधेयक पिछले 42 वर्षो से लटका हुआ है। स्वराज ने कहा कि अब समय आ गया है, जब सदन को प्रभावी लोकपाल विधेयक पारित कर इतिहास रचना चाहिए।
स्वराज ने सदन में लोकपाल विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा, "पहली बार लोकपाल विधेयक संसद में नहीं पेश हुआ है। इसके पहले आठ बार लोकपाल विधेयक सदन में पेश हो चुका है। लेकिन किसी न किसी कारण से अब तक लटकता रहा है। अब 9वीं बार लोकपाल विधेयक सदन में पेश किया गया है।"
स्वराज ने कहा, "इसके पहले जब भी विधेयक पेश किया गया, किसी बुद्धिजीवी की ओर से आया। लेकिन आज यह विधेयक आंदोलन बन गया है। अन्ना हजारे ने देश की जनता तक इस विधेयक को पहुंचा दिया है। लोग इसके पक्ष में सड़कों पर उतर रहे हैं। स्थिति जटिल है। जनता संसद की ओर देख रही है। आज संसद की जिम्मेदारी है कि वह भ्रष्टाचार से निपटने के लिए जनता को एक प्रभावी लोकपाल दे।"
स्वराज ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के अनशन का जिक्र करते हुए कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता के अनशन के कारण उपजी समस्या से निपटने के लिए सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। लेकिन बैठक में जो प्रस्ताव पारित हुआ, सरकार उस दिशा में आगे नहीं बढ़ी।
मालूम हो कि प्रभावी लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर यहां रामलीला मैदान में जारी अन्ना हजारे का अनशन शनिवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया है।
नई दिल्ली। प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की अपील करते हुए शनिवार को लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने लोकपाल के मसले पर चर्चा की शुरुआत की। अन्ना हजारे ने अनशन समाप्त करने के लिए इसके विभिन्न पहलुओं पर संसद में प्रस्ताव पारित करने को कहा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने शनिवार को कहा कि लोकपाल विधेयक पिछले 42 वर्षो से लटका हुआ है। स्वराज ने कहा कि अब समय आ गया है, जब सदन को प्रभावी लोकपाल विधेयक पारित कर इतिहास रचना चाहिए।
स्वराज ने सदन में लोकपाल विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा, "पहली बार लोकपाल विधेयक संसद में नहीं पेश हुआ है। इसके पहले आठ बार लोकपाल विधेयक सदन में पेश हो चुका है। लेकिन किसी न किसी कारण से अब तक लटकता रहा है। अब 9वीं बार लोकपाल विधेयक सदन में पेश किया गया है।"
स्वराज ने कहा, "इसके पहले जब भी विधेयक पेश किया गया, किसी बुद्धिजीवी की ओर से आया। लेकिन आज यह विधेयक आंदोलन बन गया है। अन्ना हजारे ने देश की जनता तक इस विधेयक को पहुंचा दिया है। लोग इसके पक्ष में सड़कों पर उतर रहे हैं। स्थिति जटिल है। जनता संसद की ओर देख रही है। आज संसद की जिम्मेदारी है कि वह भ्रष्टाचार से निपटने के लिए जनता को एक प्रभावी लोकपाल दे।"
स्वराज ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के अनशन का जिक्र करते हुए कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता के अनशन के कारण उपजी समस्या से निपटने के लिए सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। लेकिन बैठक में जो प्रस्ताव पारित हुआ, सरकार उस दिशा में आगे नहीं बढ़ी।
मालूम हो कि प्रभावी लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर यहां रामलीला मैदान में जारी अन्ना हजारे का अनशन शनिवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया है।
शरद यादव ने ओम पुरी, किरण बेदी पर साधा निशाना
नई दिल्ली. जेडीयू के सांसद शरद यादव ने सिविल सोसाइटी पर हमला बोला है। शरद यादव ने किरण बेदी पर निशाना साधते हुए कहा , 'वह हमें क्या राजनीति सिखाएंगी। हम गांवों और कस्बों से लोगों की सेवा करते हुए संसद तक पहुंचे हैं। हम अन्ना हजारे और उनके आंदोलन की इज्जत करते हैं उन्हें सलाम करते हैं। लेकिन यह सलाम एकतरफा नहीं चलेगा। बोली आप भी ठीक रखिए और हम भी ठीक रखेंगे। हमारी सहनशीलता का इम्तिहान न लें। मैं सदन के घेराव को सही नहीं मानता हूं। आंदोलनकारियों ने एक सांसद को ट्रेन से नीचे उतार दिया गया। क्या ऐसा आचरण सही है?'
शरद यादव ने ओम पुरी पर निजी टिप्पणी करते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने उसे शराब पीने की वजह से छोड़ दिया। मधेपुरा संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य ने मीडिया को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि टीवी चैनलों पर किसी गंभीर मुद्दे पर तुरंत राय नहीं मांगी जानी चाहिए। मधेपुरा संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य यादव ने मीडिया को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा, ये डिब्बा (टीवी चैनल) किसी गंभीर मुद्दे पर तुरंत राय मांगी जाती है। यह गलत है। उन्होंने अन्ना के आंदोलन पर भी अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोलते हुए कहा, 'इस देश के 80 फीसदी लोगों को दिन भर में एक समय का भोजन नहीं मिलता है। अन्ना जी 12 दिन से भूखे हैं। लेकिन इस देश में कई लोग भूखे रहते हैं। इसमें दलित और पिछड़े लोग हैं। रामलीला मैदान में जुटने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग आइसक्रीम खाते थे, वही रामलीला मैदान पहुंच गए।' उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में महात्मा फुले और आंबेडकर का नाम न लिए जाने पर निराशा जाहिर की।
किरण बेदी ने शुक्रवार को रामलीला मैदान में मंच पर चेहरा ढंक कर अभिनय कर बताया था कि नेता मुखड़ा ओढ़े रहते हैं, जबकि ओम पुरी ने सांसदों को अनपढ़-गवार और नालायक कहा था। शरद यादव ने शनिवार को सदन में इसका करार जवाब दिया। लेकिन रामलीला मैदान में अन्ना हजारे ने शनिवार को एक बार फिर मंच से नेताओं पर तीखा प्रहार किया है।
रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि इस समय संसद में मौजूद १५० से अधिक सदस्यों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। देश की जनता को यह ध्यान रखना होगा कि अगली बार इस तरह के बेकार लोग संसद में न पहुंच पाएं।
आज दूसरी बार लोगों को संबोधित करते हुए अन्ना ने कहा कि देश की जनता को सांसदों से बहुत उम्मीद होती है लेकिन सांसद इन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाते। अन्ना ने यह भी कहा कि वो देश का दौर करके लोगों से यह अपील करेंगे कि वो ऐसे बेकार लोगों को संसद में न भेजे जिन पर आपराधिक मामले चल रहे है। अन्ना ने कहा कि आज संसद में १५० से अधिक सांसदों पर मामले दर्ज हैं। हमारी उनसे कुछ उम्मीदें हैं। लेकिन वो हमारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना है कि अगली बार सदन में ऐसे लोग ने आएं।
अन्ना हजारे ने कहा कि मैं देश का दौरा करूंगा और लोगों से यह अपील करूंगा की इस तरह के बेकार सांसदों को दोबारा न चुने। अन्ना ने कहा कि आम आदमी मालिक हैं और सांसद उनके नौकर। यह मालिकों का कर्तव्य है कि वो अपने नौकरों पर नजर रखे।
शरद यादव ने ओम पुरी पर निजी टिप्पणी करते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने उसे शराब पीने की वजह से छोड़ दिया। मधेपुरा संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य ने मीडिया को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि टीवी चैनलों पर किसी गंभीर मुद्दे पर तुरंत राय नहीं मांगी जानी चाहिए। मधेपुरा संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य यादव ने मीडिया को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा, ये डिब्बा (टीवी चैनल) किसी गंभीर मुद्दे पर तुरंत राय मांगी जाती है। यह गलत है। उन्होंने अन्ना के आंदोलन पर भी अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोलते हुए कहा, 'इस देश के 80 फीसदी लोगों को दिन भर में एक समय का भोजन नहीं मिलता है। अन्ना जी 12 दिन से भूखे हैं। लेकिन इस देश में कई लोग भूखे रहते हैं। इसमें दलित और पिछड़े लोग हैं। रामलीला मैदान में जुटने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग आइसक्रीम खाते थे, वही रामलीला मैदान पहुंच गए।' उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में महात्मा फुले और आंबेडकर का नाम न लिए जाने पर निराशा जाहिर की।
किरण बेदी ने शुक्रवार को रामलीला मैदान में मंच पर चेहरा ढंक कर अभिनय कर बताया था कि नेता मुखड़ा ओढ़े रहते हैं, जबकि ओम पुरी ने सांसदों को अनपढ़-गवार और नालायक कहा था। शरद यादव ने शनिवार को सदन में इसका करार जवाब दिया। लेकिन रामलीला मैदान में अन्ना हजारे ने शनिवार को एक बार फिर मंच से नेताओं पर तीखा प्रहार किया है।
रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि इस समय संसद में मौजूद १५० से अधिक सदस्यों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। देश की जनता को यह ध्यान रखना होगा कि अगली बार इस तरह के बेकार लोग संसद में न पहुंच पाएं।
आज दूसरी बार लोगों को संबोधित करते हुए अन्ना ने कहा कि देश की जनता को सांसदों से बहुत उम्मीद होती है लेकिन सांसद इन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाते। अन्ना ने यह भी कहा कि वो देश का दौर करके लोगों से यह अपील करेंगे कि वो ऐसे बेकार लोगों को संसद में न भेजे जिन पर आपराधिक मामले चल रहे है। अन्ना ने कहा कि आज संसद में १५० से अधिक सांसदों पर मामले दर्ज हैं। हमारी उनसे कुछ उम्मीदें हैं। लेकिन वो हमारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना है कि अगली बार सदन में ऐसे लोग ने आएं।
अन्ना हजारे ने कहा कि मैं देश का दौरा करूंगा और लोगों से यह अपील करूंगा की इस तरह के बेकार सांसदों को दोबारा न चुने। अन्ना ने कहा कि आम आदमी मालिक हैं और सांसद उनके नौकर। यह मालिकों का कर्तव्य है कि वो अपने नौकरों पर नजर रखे।
जीना यहा मरना यहा..
Aug 26, 11:00 pm
बताएं
मुकेश सगीत की दुनिया के उन चुनिदा गायकों में शामिल हैं जिनके गाए गीत आज भी लोगों की जुबा पर हैं। आज उनकी 35वीं पुण्यतिथि के मौके पर उन्हें हमारी श्रद्धाजलि..
गायक मुकेश का जन्म 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में जोरावरचद माथुर और माता चादरानी के की छठी सतान के रूप में हुआ था। उनका पूरा नाम था मुकेश चद माथुर। बचपन से ही उन्हें सगीत का शौक था।
सन 1940 में मुकेश ने बबई का रुख किया। थोड़ी भागदौड़ के बाद उन्हें फिल्म मिली 'निर्दोष', जो 1941 में रिलीज हुई। इसमें अभिनय के साथ-साथ उनका गाया गीत 'दिल ही हो बुझा हुआ तो फसले बहार क्या..' भी था। पर अफसोस फिल्म को कामयाबी नहीं मिली। बतौर अभिनेता मुकेश ने दो और फिल्में 'दुख सुख' और 'आदाब अर्ज' कीं, ये भी असफल हुईं। शायद अभिनेता के रूप में ख्याति पाना उनकी किस्मत में नहीं लिखा था। सन 1945 में एक फिल्म आई 'पहली नजर'। इसके गीत 'दिल जलता है तो जलने दे..' से मुकेश लोगों की पसद बन गए। हालाकि यह गीत सुनते हुए अहसास होता है कि इसे कुंदनलाल सहगल ने गाया है।
इसके कुछ समय बाद रंजीत मूवीटोन के मालिक सेठ चदूलाल शाह ने मुकेश को दो गीत 'ऐ कातिबे तकदीर मुझे इतना बता दे..' और 'नैन हीन को राह दिखा प्रभु..' गाने को दिए, मुकेश ने ये गीत बखूबी गाए। इनमें भी वही बात थी, जो 'दिल जलता है..' में थी। सुनकर लगता था कि ये मुकेश के नहीं बल्कि सहगल के गाये गीत हैं। जब इन गीतों को खुद सहगल ने सुना, तो वे चौंक गए कि इन गीतों को मैंने कब गाया?
बतौर अभिनेता मुकेश की दो और फिल्में 'माशूका' (1953) और अनुराग' (1956) आईं, लेकिन अभिनेता के रूप में वह पसद नहीं किए गए। इन दोनों में से 'अनुराग' (1956) के निर्माता मुकेश ही थे। इससे पहले एक और फिल्म 'मल्हार' (1951) का निर्माण भी उन्होंने ही किया था, लेकिन यहा भी कामयाबी उनके हाथ नहीं लगी। हा, वह गायक के रूप में इंडस्ट्री में छा गए। फिल्म मेला (1948) में उन्होंने गीत गाया गीत गाये जा गीत मिलन के..'। इस गीत ने उन्हें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के बीच भी खास बना दिया।
राजकपूर ने जब अपनी पहली फिल्म 'आग' 1948 में शुरू की, तो उसमें सभी गीत मुकेश और लता मगेशकर की आवाज में थे। राजकपूर की सलाह पाकर मुकेश सहगल की छाप से मुक्त हो गए और बन गए अपनी अनोखी शैली वाले गायक। बतौर गायक मुकेश के गीतों की सख्या करीब एक हजार है, जिनमें से 970 गीत उन्होंने फिल्मों में गाये हैं। शेष गीत प्राइवेट, क्षेत्रीय गीत या भक्ति गीत के रूप में रिकॉर्ड हुए।
राजकपूर हमेशा कहते थे कि मुकेश मेरी आत्मा हैं। मुकेश जब तक जिंदा रहे, राजकपूर ने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा। उनकी फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' (1978) के लिए मुकेश ने अपना अंतिम गीत 'चचल शीतल निर्मल कोमल सगीत की देवी स्वर सजनी..' गाया। इस फिल्म के गीत दो साल पहले रिकॉर्ड हो गए थे।
सब कुछ सीखा हमने, न सीखी होशियारी..', सबसे बड़ा नादान वही है..', जय बोलो बेईमान की..' और कभी कभी मेरे दिल में..' के लिए मुकेश को फिल्म फेयर अवार्ड और 'कई बार यूं ही देखा है..' के लिए नेशनल अवार्ड मिला। उनके गाये कुछ बेहतरीन गीतों में शामिल हैं 'जाने कहा गए वो दिन..', 'जीना यहा मरना यहा..', 'सजन रे झूठ मत बोलो..', 'सजनवा बैरी हो गए हमार..', 'रमइया वस्तावइया..', 'मेरा जूता है जापानी..', 'ओहरे ताल मिले नदी के जल में..', 'मैं पल दो पल का शायर हूं..' इत्यादि गीत।
मुकेश के अंतिम समय में पुत्र नितिन मुकेश और उनकी प्रिय मुंहबोली बहन लता मगेशकर साथ थीं। अमेरिका के मिशिगन, डेट्रायट में लता और मुकेश का शो था। शो शुरू होने से पहले ही उनके सीने में दर्द उठा और 27 अगस्त 1976 को मुकेश की खूबसूरत आवाज सदा के लिए शात हो गई। कुछ शेष रह गया, तो वे हैं मुकेश की यादें और उनके गाए मधुर गीत।
Friday, August 26, 2011
9 सितंबर को फांसी पर लटकाएं जाएंगे राजीव के हत्यारे
चेन्नई। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी की सजा माफ करने की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने उनकी दया याचिका निरस्त किए जाने के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। साथ ही फांसी की तारीख भी तय कर दी गई। राजीव के हत्यारों को 9 सितंबर को फांसी पर लटका दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस सिलसिले में वेल्लोर केंद्रीय कारागार को पत्र भेज दिया है। केंद्र सरकार ने तीनों दोषियों को फांसी की सजा बरकरार रखने का आदेश दे दिया है। तीनों दोषी मुरूगन, संथन और पेरारिवलन पिछले 20 वर्षों से जेल में बंद हैं।
9 सितंबर को फांसी पर लटकाएं जाएंगे राजीव के हत्यारे
नियम के मुताबिक अधिसूचना जारी होने के सात दिन के भीतर दोषियों को फांसी दे दी जाती है। इन दोषियों की दया याचिका खारिज होने की सूचना उन्हें औपचारिक रूप से दी जाएगी। और फिर 9 सितंबर को फांसी पर लटका दिया जाएगा।
चेन्नई। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी की सजा माफ करने की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने उनकी दया याचिका निरस्त किए जाने के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। साथ ही फांसी की तारीख भी तय कर दी गई। राजीव के हत्यारों को 9 सितंबर को फांसी पर लटका दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस सिलसिले में वेल्लोर केंद्रीय कारागार को पत्र भेज दिया है। केंद्र सरकार ने तीनों दोषियों को फांसी की सजा बरकरार रखने का आदेश दे दिया है। तीनों दोषी मुरूगन, संथन और पेरारिवलन पिछले 20 वर्षों से जेल में बंद हैं।
9 सितंबर को फांसी पर लटकाएं जाएंगे राजीव के हत्यारे
नियम के मुताबिक अधिसूचना जारी होने के सात दिन के भीतर दोषियों को फांसी दे दी जाती है। इन दोषियों की दया याचिका खारिज होने की सूचना उन्हें औपचारिक रूप से दी जाएगी। और फिर 9 सितंबर को फांसी पर लटका दिया जाएगा।
पेज - १ टॉप
आज टूट सकता है अन्ना हजारे का अनशन
नई दिल्ली , क्रांतिवीर अन्ना हजारे आज अपना अनशन तोड़ सकते हैं. सरकार उनकी मांगें मान सकती है. कल अन्ना हजारे और सरकार के बीच बात बनते−बनते रह गईथी. और इसमें नया पेंच फंस गया ह। सरकार चाहती है कि अन्ना हजारे संसद में जनलोकपाल बिल पर चर्चा शुरू होते ही अनशन तोड़ने का लिखित आश्वासन दें।
दूसरी तरफ, टीम अन्ना का कहना है कि इस मुद्दे पर जब तक संसद से प्रस्ताव पारित नहीं होता, वह अनशन नहीं तोड़ेंगे। वहीं किरण बेदी ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती, तब तक अनशन नहीं टूटेगा।
उधर, अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने लिखा है कि मेरी अंतरात्मा ये कहती है कि अगर संसद में तीनों प्रस्ताव पर रिजोल्यूशन पास हो जाता है, तो मैं अनशन तोड़ दूंगा, लेकिन जनलोकपाल पास होने तक रामलीला मैदान में धरना चलता रहेगा. समझा जाता है की अब दोनों पक्षों में सहमति बन गयी है. हांलाकि यह मसला ऐसा है की कभी भी कुछ भी हो सकता है. निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता .
नई दिल्ली , क्रांतिवीर अन्ना हजारे आज अपना अनशन तोड़ सकते हैं. सरकार उनकी मांगें मान सकती है. कल अन्ना हजारे और सरकार के बीच बात बनते−बनते रह गईथी. और इसमें नया पेंच फंस गया ह। सरकार चाहती है कि अन्ना हजारे संसद में जनलोकपाल बिल पर चर्चा शुरू होते ही अनशन तोड़ने का लिखित आश्वासन दें।
दूसरी तरफ, टीम अन्ना का कहना है कि इस मुद्दे पर जब तक संसद से प्रस्ताव पारित नहीं होता, वह अनशन नहीं तोड़ेंगे। वहीं किरण बेदी ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती, तब तक अनशन नहीं टूटेगा।
उधर, अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने लिखा है कि मेरी अंतरात्मा ये कहती है कि अगर संसद में तीनों प्रस्ताव पर रिजोल्यूशन पास हो जाता है, तो मैं अनशन तोड़ दूंगा, लेकिन जनलोकपाल पास होने तक रामलीला मैदान में धरना चलता रहेगा. समझा जाता है की अब दोनों पक्षों में सहमति बन गयी है. हांलाकि यह मसला ऐसा है की कभी भी कुछ भी हो सकता है. निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता .
संसद परिसर में अन्ना समर्थक का हंगामा, राहुल के घर के बाहर से कई हिरासत में
नई दिल्ली. अन्ना हजारे के आंदोलन पर सरकार की निष्किय्रता के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क रहा है। अन्ना हजारे के एक समर्थक ने आज संसद भवन परिसर में घुस कर अन्ना के समर्थन में नारेबाजी की। हरियाणा के रोहतक जिले का मंजीत सिंह ग्रेवाल दर्शक दीर्घा के प्रवेश पत्र पर संसद भवन में आया था। जब वह संसद भवन के मुख्य द्वार पर पहुंचा, उसने अपनी शर्ट उतार दी। वह इंकलाब जिंदाबाद..., वंदे मातरम... के नारे लगाने लगा। उसकी बनियान पर अन्ना हजारे का फोटो छपा था और उसपर ‘आई एम अन्ना’ लिखा हुआ था। नारेबाजी सुनते ही संसद के सुरक्षा कर्मियों ने उसे दबोच लिया लेकिन वह नारे लगाते रहा। नारे लगाने से रोकने के लिए सुरक्षा कर्मी उसका मुंह भींच रहे थे। उससे पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार वह आंध्र प्रदेश से कांग्रेस सांसद अनंत वेकट रामा रेड्डी की सिफारिश पर जारी प्रवेश पत्र पर संसद भवन आया था।
अन्ना समर्थकों ने राहुल गांधी के घर का भी घेराव किया। वे संसद में राहुल के दिए गए बयान से नाराज थे। उनका घर घेरने पहुंचे कई अन्ना समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस ने राहुल गांधी के घर के बाहर पूरी तरह से बैरिकेडिंग कर दी। राहुल से किसी को मिलने की इजाजत भी नहीं दी गई। फिर भी उनके घर के पास कई प्रदर्शनकारी डेरा डाले रहे। उधर, दिल्ली पुलिस ने टीम अन्ना को रामलीला मैदान के बाहर पुलिस से मारपीट करने की घटना को लेकर नोटिस भेजा है .
अन्ना हजारे के अनशन को 11 बीत गए हैं, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है। इसे देखते हुए शुक्रवार को अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फिर से चिट्ठी लिखी। यह चिट्ठी केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख के जरिये पीएम को भेजी गई। टीम अन्ना को उनके जवाब का इंतजार है।
नग्न होकर मोडल ने किया अन्ना का समर्थन
मुंबई में रहने वाली मराठी एक्ट्रेस योगिता दांडेकर ने अन्ना हजारे का समर्थन करने के लिए अपने कपड़े उतार फेंके हैं| योगिता ने अपने शरीर को पेंटकर कैमरे के सामने न्यूड पोज दिए हैं|इस बोल्ड एक्ट्रेस ने यह भी कहा है कि संसद में जनलोकपाल बिल पास हो जाने के बाद वह टॉपलेस होकर दौड़ भी लगाएंगी|
योगिता ने न्यूड होने के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि अन्ना के आंदोलन के आड़ में कई नई अभिनेत्रियां न्यूड होने की बात कर सस्ती लोकप्रियता तो बटोर रही है मगर किसी में ऐसा करने की हिम्मत नजर नहीं आई|मैं ऐसा कर यह संदेश देना चाहती हूं कि मैं सच में अन्ना का समर्थन करती हूं और न्यूड होकर सिर्फ पब्लिसिटी बटोरना मेरा इरादा नहीं है|
मैंने ऐसी कई मॉडल्स के बारे में सुना जिन्होंने अन्ना के आन्दोलन का समर्थन करने के लिए न्यूड होने की बात कही और अन्ना के संघर्ष का मजाक उड़ाया|मैं पहले भारतीय हूं और अन्ना का पिछले 10 सालों से अनुसरण कर रही हूं|मैंने उनके कई कैम्पेन में हिस्सा भी लिया है|
इस वजह से मैंनेजन लोकपाल बिल के समर्थन में न्यूड होकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाली सभी संभावनाओं पर ही विराम लगा दिया है| योगिता आगे कहती हैं,इतना ही नहीं,मैंने यह प्रण किया है कि इस बिल के पास होने के बाद मैं टॉपलेस होकर दौड़ लगाऊंगी|मैं पूनम पाण्डेय की तरह नहीं हूं जो न्यूड होने के वादे तो करती हैं मगर आज तक ऐसा कर न सकीं|योगिता ने मधुर भंडारकर की फिल्म ट्रैफिक सिग्नल के अलावा सुखांत,गामत एका रात्री ची,रद्दा रॉक्स जैसी मराठी फिल्मों में भी अभिनय किया है|
राहुल का वार , अन्ना की हुंकार
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नई दिल्ली. लोकपाल बिल के मुद्दे पर कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने शुक्रवार को पहली बार अपनी राय सार्वजनिक तौर पर जाहिर की। लोकसभा में शून्य काल में इस मुद्दे पर बोलते हुए राहुल ने जहां अन्ना के आंदोलन पर निशाना साधा, वहीं निजी तौर पर अन्ना की तारीफ की। राहुल ने कहा, 'अन्ना जी का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने आम लोगों की आवाज उठाई है। मैंने भी देश भर की यात्रा की है और सभी तरह के लोगों की भावनाएं और उनकी समस्याएं जानता हूं। भ्रष्टाचार से लड़ना आसान नहीं है। प्रभावी लोकपाल भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सिर्फ एक हथियार भर है। सिर्फ इसी कानून से भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा। मैं चाहता हूं कि चुनाव आयोग की तरह लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाया जाए। मेरे खयाल से लोकपाल भी भ्रष्ट हो सकता है।मैं चाहता हूं कि भ्रष्टाचार पर बहस का स्तर और ऊपर उठा दिया जाए।'
अन्ना के आंदोलन पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस के महासचिव ने कहा कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन से खतरनाक परंपरा की शुरुआत होगी जो हमारी संसदीय प्रणाली को कमजोर करेगा। उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि भ्रष्टाचार हर जगह है। इससे लड़ना गरीबी हटाने का मुख्य हथियार है। नरेगा या भूमि अधिग्रहण ऐसे ही कानून हैं। भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए नियम कानून जरूरी हैं। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति भी जरूरी है।' राहुल के बयान के बीच में लोकसभा में जमकर हो हल्ला हुआ। विपक्ष का कहना था कि किस नियम के तहत राहुल गांधी को शून्य काल में बोलने की इजाजत दी गई। इस पर सदन में करीब पांच मिनट तक जमकर हंगामा हुआ। लोकसभा से निकलने के बाद संसद परिसर में जब राहुल गांधी से पूछा गया कि आप इतने दिन इस मुद्दे पर क्यों चुप थे? तो उन्होंने जवाब दिया कि मैं सोच समझकर बोलता हूं।
राहुल को सुनने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेसी सांसद जुटे थे। उनकी बहन प्रियंका भी वहां मौजूद थी। राहुल जिस समय सदन में बोल रहे थे, ठीक उसी समय अन्ना हजारे भी रामलीला मैदान में मंच पर आए और 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' की हुंकार के साथ समर्थकों का उत्साह बढ़ाया।
अन्ना 11 दिन से अनशन पर हैं। सरकार अब किसी भी तरह उनका अनशन तुड़वाना चाहती है। इस मकसद से लोकसभा में अन्ना की शर्तों पर आज बहस कराने की तैयारी थी। नियम 193 के तहत (जिसमें वोटिंग की व्यवस्था नहीं है) दोपहर ढाई बजे से शुरू होनी थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही साढ़े तीन बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष ने हंगामा इसलिए किया क्योंकि उसकी ओर से नियम 184 के तहत जन लोकपाल पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तब भी हंगामा जारी रहा और सरकार ने साफ कर दिया कि ऐसे में अब बहस शनिवार को ही होगी।
राखी सावंत हुईं बेलगाम , केजरीवाल रावण अन्ना राम
फोटो
मुंबई। अपने काम से ज्यादा विवादित बयानों और हरकतों से चर्चाओं में रहने वाली आइटम गर्ल राखी सावंत एक बार फिर अन्ना के जरिये सुर्खियों मे आने की कोशिश में है। अन्ना हजारे को एक मात्र मर्द बताने वाली राखी ने इस बार अन्ना की टीम पर निशाना साधा है। टीम अन्ना के लिए राखी ने कहा कि इस टीम में अन्ना राम हैं और अरविंद केजरीवाल रावण हैं।
सूत्रों के मुताबिक राखी ने टीम अन्ना में प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी की तिगड़ी ने काम बिगाड़ा कर दिया है। केजरीवाल को रावण कहते हुए उन्होंने कहा कि वे अन्ना का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे इन सब चीजों से राजनीति में आने की कोशिश में हैं। जबकि अन्ना कलयुग के राम हैं।
खा पी के लड़ो अन्ना
अन्ना की सेहत पर चिंता जताते हुए राखी ने अन्ना से खा-पी के लड़ाई लड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे इंसान हैं उन्होंने खुदा बनाने की कोशिश न करें।
मुंबई। अपने काम से ज्यादा विवादित बयानों और हरकतों से चर्चाओं में रहने वाली आइटम गर्ल राखी सावंत एक बार फिर अन्ना के जरिये सुर्खियों मे आने की कोशिश में है। अन्ना हजारे को एक मात्र मर्द बताने वाली राखी ने इस बार अन्ना की टीम पर निशाना साधा है। टीम अन्ना के लिए राखी ने कहा कि इस टीम में अन्ना राम हैं और अरविंद केजरीवाल रावण हैं।
सूत्रों के मुताबिक राखी ने टीम अन्ना में प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी की तिगड़ी ने काम बिगाड़ा कर दिया है। केजरीवाल को रावण कहते हुए उन्होंने कहा कि वे अन्ना का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे इन सब चीजों से राजनीति में आने की कोशिश में हैं। जबकि अन्ना कलयुग के राम हैं।
खा पी के लड़ो अन्ना
अन्ना की सेहत पर चिंता जताते हुए राखी ने अन्ना से खा-पी के लड़ाई लड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे इंसान हैं उन्होंने खुदा बनाने की कोशिश न करें।
Thursday, August 25, 2011
भ्रष्ट नहीं हूं, संपत्ति की जांच करा लो"
नई दिल्ली। भ्रष्टाचार में व्यक्तिगत रप से लिप्त होने के आरोपों से आहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष को उनकी संपत्ति की जांच कराने की चुनौती दी है। प्रधानमंत्री ने गुरूवार को लोकसभा में कहा कि उन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने तथा मंत्रियों के साथ सांठ गांठ कर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए गए हैं जिससे वह बहुत आहत हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष की नेता चाहे तो उनकी और उनके परिवार की संपत्ति की जांच करा ले। अगर यह साबित हो जाए कि मैंने अपने पद का दुरूपयोग कर संपत्ति जुटाई है तो कोई भी सजा के लिए तैयार हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि मैंने जानबूझ कर कुछ मंत्रियों के साथ सांठ-गांठ कर भ्रष्टाचार किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन में इस तरह के व्यक्तिगत आक्षेप लगाने की जगह नहीं है और न ही उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में कभी भी इस तरह की भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि यह हो सकता है कि प्रधानमंत्री के रूप में उनके सात साल के कार्यकाल के दौरान उनसे गलतियां हुई हो लेकिन उनपर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप सही नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 45 वर्ष तक देश की सेवा की है और वह 20 वर्ष तक संसद में भी रहे हैं और उन्होंने यथा संभव देश की सेवा की है और उन पर जो आरोप लगाए गए हैं उससे उन्हें दुख पहुंचा है।
नई दिल्ली। भ्रष्टाचार में व्यक्तिगत रप से लिप्त होने के आरोपों से आहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष को उनकी संपत्ति की जांच कराने की चुनौती दी है। प्रधानमंत्री ने गुरूवार को लोकसभा में कहा कि उन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने तथा मंत्रियों के साथ सांठ गांठ कर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए गए हैं जिससे वह बहुत आहत हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष की नेता चाहे तो उनकी और उनके परिवार की संपत्ति की जांच करा ले। अगर यह साबित हो जाए कि मैंने अपने पद का दुरूपयोग कर संपत्ति जुटाई है तो कोई भी सजा के लिए तैयार हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि मैंने जानबूझ कर कुछ मंत्रियों के साथ सांठ-गांठ कर भ्रष्टाचार किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन में इस तरह के व्यक्तिगत आक्षेप लगाने की जगह नहीं है और न ही उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में कभी भी इस तरह की भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि यह हो सकता है कि प्रधानमंत्री के रूप में उनके सात साल के कार्यकाल के दौरान उनसे गलतियां हुई हो लेकिन उनपर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप सही नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 45 वर्ष तक देश की सेवा की है और वह 20 वर्ष तक संसद में भी रहे हैं और उन्होंने यथा संभव देश की सेवा की है और उन पर जो आरोप लगाए गए हैं उससे उन्हें दुख पहुंचा है।
नई दिल्ली।। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यू-टर्न लेते हुए समाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से माफी मांगी है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि राजनीतिक बहस में काफी कुछ कहा जाता है, अगर इससे किसी को चोट पहुंची है, तो मुझे खेद है। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे के गिरते स्वास्थ्य को लेकर वह चिंतित हैं।
तिवारी ने कहा, 'मैं जानता हूं कि मेरी कुछ टिप्पणियों ने हजारे को आहत किया है। मैं इसके लिए खेद जताता हूं और देश के नागरिक के रूप में उनसे अनशन तोड़ने की अपील करना चाहूंगा।'
गौरतलब है कि 14 अगस्त को कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अन्ना हजारे पर सीधा निशाना साधा था और उन्हें करप्ट बताया था। उन्होंने उनके लिए तू-तड़ाक वाली भाषा इस्तेमाल की थी। उन्होने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बाबू किशन राव उर्फ अन्ना तुम सिर से पांव तक भ्रष्टाचार तक डूबे हो। उन्होंने जस्टिस पी.वी. सावंत की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि अन्ना के हिंद स्वराज ट्रस्ट में 2.20 लाख रुपये का अनियमितता पाई गई थी। उनके इस बयान पर काफी बवाल मचा था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था, ' टीम अन्ना में फासिस्ट, सक्रिय माओवादी, अराजकतावादी
शामिल हैं जिन्हें छुपे हुए डोनर्स की ओर से फंड मिलता है।'
तिवारी ने कहा, 'मैं जानता हूं कि मेरी कुछ टिप्पणियों ने हजारे को आहत किया है। मैं इसके लिए खेद जताता हूं और देश के नागरिक के रूप में उनसे अनशन तोड़ने की अपील करना चाहूंगा।'
गौरतलब है कि 14 अगस्त को कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अन्ना हजारे पर सीधा निशाना साधा था और उन्हें करप्ट बताया था। उन्होंने उनके लिए तू-तड़ाक वाली भाषा इस्तेमाल की थी। उन्होने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बाबू किशन राव उर्फ अन्ना तुम सिर से पांव तक भ्रष्टाचार तक डूबे हो। उन्होंने जस्टिस पी.वी. सावंत की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि अन्ना के हिंद स्वराज ट्रस्ट में 2.20 लाख रुपये का अनियमितता पाई गई थी। उनके इस बयान पर काफी बवाल मचा था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था, ' टीम अन्ना में फासिस्ट, सक्रिय माओवादी, अराजकतावादी
शामिल हैं जिन्हें छुपे हुए डोनर्स की ओर से फंड मिलता है।'
अन्ना अनशन तोड़ने को तैयार, लिखित आश्वासन का इंतजार
नई दिल्ली। 10वें दिन ही सही लेकिन अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए केंद्र सरकार और कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। शुरुआत सरकार ने की। उसके बाद संसद और फिर कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर एक के बाद एक पहल करते हुए अन्ना हजारे को मनाने की कोशिश की। सरकार की कोशिशों का असर भी हुआ और टीम अन्ना ने अपना रुख थोड़ा नरम किया है। अन्ना हजारे ने अनशन तोड़ने के लिए शर्त रखी है कि सरकार ये लिखित आश्वासन दे कि सिटिजन चार्टर, राज्यों में लोकायुक्त और निचले अफसरों को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर वो संसद में बहस कराएगी।
आज सुबह लोकसभा में भ्रष्टाचार पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऐलान किया कि सरकार अन्ना हजारे के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है और उनके जनलोकपाल, अरुणा राय के लोकपाल व जयप्रकाश नारायण संस्थान द्वारा सुझाए गए लोकपाल बिल पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। इसके बाद विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने अन्ना से अनशन समाप्त करने की अपील की और खुद लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने संसद के सभी सदस्यों की ओर से अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील की। सरकार और संसद के बाद कांग्रेस पार्टी हरकत में आई।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अपने उस बयान के लिए अन्ना हजारे से माफी मांगी जिसमें उन्होंने अन्ना को भ्रष्ट बताया था। तिवारी ने कहा कि अपने उस बयान के लिए उन्हें दुख और पश्चाताप है। तिवारी के बाद खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अमेरिका से अन्ना हजारे से अपील की कि वे अपना अनशन तोड़ दें।
इसके बाद अन्ना हजारे से बातचीत करने के लिए केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख रामलीला मैदान पहुंचे। देशमुख अन्ना हजारे से भलीभांति परिचित हैं और मराठी भाषी होने की वजह से वे अन्ना को पीएम की अपील और संसद की कार्यवाही के बारे में उन्हीं की भाषा में समझा सकते हैं। यही वजह है कि सरकार के उन्हें ही अन्ना से मुलाकात करने की जिम्मेदारी दी। अन्ना ने विलासराव से कहा कि सरकार की तरफ से लिखित आश्वासन मिलने पर ही वे अनशन तोड़ेंगे।
श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि अन्ना सिर्फ यही चाहते हैं कि सरकार लोकपाल बिल के दायरे में निचले अफसरों को लाने, सिटिजन चार्टर और राज्यों में लोकायुक्त के मसले पर संसद में बहस कराने का लिखित आश्वासन दे। साथ ही रविशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री के निवास पर आज शाम 5 बजे होने वाले प्रदर्शन को टाल दिया गया है। अन्ना के इस प्रस्ताव पर पीएम ने शाम पांच बजे अपने निवास पर बैठक बुलाई है। इसी बैठक में निर्णय लिया जाएगा कि अन्ना को लिखित आश्वासन दिया जाए या नहीं।
आज सुबह लोकसभा में भ्रष्टाचार पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऐलान किया कि सरकार अन्ना हजारे के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है और उनके जनलोकपाल, अरुणा राय के लोकपाल व जयप्रकाश नारायण संस्थान द्वारा सुझाए गए लोकपाल बिल पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। इसके बाद विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने अन्ना से अनशन समाप्त करने की अपील की और खुद लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने संसद के सभी सदस्यों की ओर से अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील की। सरकार और संसद के बाद कांग्रेस पार्टी हरकत में आई।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अपने उस बयान के लिए अन्ना हजारे से माफी मांगी जिसमें उन्होंने अन्ना को भ्रष्ट बताया था। तिवारी ने कहा कि अपने उस बयान के लिए उन्हें दुख और पश्चाताप है। तिवारी के बाद खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अमेरिका से अन्ना हजारे से अपील की कि वे अपना अनशन तोड़ दें।
इसके बाद अन्ना हजारे से बातचीत करने के लिए केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख रामलीला मैदान पहुंचे। देशमुख अन्ना हजारे से भलीभांति परिचित हैं और मराठी भाषी होने की वजह से वे अन्ना को पीएम की अपील और संसद की कार्यवाही के बारे में उन्हीं की भाषा में समझा सकते हैं। यही वजह है कि सरकार के उन्हें ही अन्ना से मुलाकात करने की जिम्मेदारी दी। अन्ना ने विलासराव से कहा कि सरकार की तरफ से लिखित आश्वासन मिलने पर ही वे अनशन तोड़ेंगे।
श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि अन्ना सिर्फ यही चाहते हैं कि सरकार लोकपाल बिल के दायरे में निचले अफसरों को लाने, सिटिजन चार्टर और राज्यों में लोकायुक्त के मसले पर संसद में बहस कराने का लिखित आश्वासन दे। साथ ही रविशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री के निवास पर आज शाम 5 बजे होने वाले प्रदर्शन को टाल दिया गया है। अन्ना के इस प्रस्ताव पर पीएम ने शाम पांच बजे अपने निवास पर बैठक बुलाई है। इसी बैठक में निर्णय लिया जाएगा कि अन्ना को लिखित आश्वासन दिया जाए या नहीं।
प्रधानमंत्री का अन्ना को सलाम
अन्ना हजारे के अनशन के 10वें दिन उनके जीवन को कहीं अधिक मूल्यवान बताते हुए लोकसभा ने सर्वसम्मति से उनसे उपवास समाप्त करने का आग्रह किया। साथ ही आश्वासन दिया कि संसद उनके जन लोकपाल विधेयक पर चर्चा करेगी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करके अपनी बात रख दी है। यह बात हमारे संज्ञान में आ चुकी है। मैं उनके आदर्शों का सम्मान करता हूं। एक व्यक्ति के रूप में मैं उनका सम्मान करता हूं। मैं उन्हें सलाम करता हूं। मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वह अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन कहीं अधिक मूल्यवान है।
सिंह ने कहा, मैं सदन के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे मेरे साथ मिलकर श्री अन्ना हजारे से अपील करें कि उन्होंने अपनी बात का अहसास करा दिया है...उनका जीवन अमूल्य है और इसलिए मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वे अपना अनशन समाप्त कर दें। सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार जन लोकपाल विधेयक सहित लोकपाल को लेकर सभी राय पर खुले मन से विचार करने को तैयार है।
अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की प्रधानमंत्री की अपील का विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने समर्थन करते हुए कहा, प्रधानमंत्री की हजारे जी से अनशन त्यागने की अपील अगर सारे सदन की अपील बन जाए, तो कहीं ज्यादा अच्छा होगा। मैं विपक्ष की ओर से स्वयं को सम्बद्ध करते हुए यह अपील करना चाहूंगी कि श्री अन्ना हजारे अपना अनशन त्याग दें।
मजबूत लोकपाल विधेयक लाने के प्रधानमंत्री के आाश्वासन से सुर से सुर मिलाते हुए सुषमा ने कहा, हजारे जी की प्रभावी और सशक्त लोकपाल विधेयक लाने की जो मांग है, मैं यहां से कहना चाहती हूं कि देश एक प्रभावी और सशक्त लोकपाल लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम सब जो यहां बैठे हुए हैं, बहुत प्रभावी लोकपाल बिल लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम ऐसा बिल लाएंगे।
उन्होंने कहा, हम इस सदन से उन्हें आश्वासन देते हैं कि हमें कितने भी संशोधन करने पड़ें, हम इस सदन से एक प्रभावी और सशक्त लोकपाल बिल निकालकर लाएंगे। यह सदन आपसे अपील करता है कि आपका जीवन अमूल्य है, इसलिए आप अपना अनशन त्याग दें।
इस पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि अभी प्रधानमंत्री और विपक्ष की नेता की ओर से जो अपील आई है मैं भी चाहूंगी कि पूरे सदन की ओर से यह एक आवाज अन्ना हजारे जी के पास जाए कि वह हम सब की अपील पर अपना अनशन समाप्त करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि संसद भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए बहुत ही प्रभावी कदम उठाएगी। अध्यक्ष की इस अपील का सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने मेजें थप-थपाकर समर्थन किया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करके अपनी बात रख दी है। यह बात हमारे संज्ञान में आ चुकी है। मैं उनके आदर्शों का सम्मान करता हूं। एक व्यक्ति के रूप में मैं उनका सम्मान करता हूं। मैं उन्हें सलाम करता हूं। मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वह अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन कहीं अधिक मूल्यवान है।
सिंह ने कहा, मैं सदन के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे मेरे साथ मिलकर श्री अन्ना हजारे से अपील करें कि उन्होंने अपनी बात का अहसास करा दिया है...उनका जीवन अमूल्य है और इसलिए मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वे अपना अनशन समाप्त कर दें। सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार जन लोकपाल विधेयक सहित लोकपाल को लेकर सभी राय पर खुले मन से विचार करने को तैयार है।
अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की प्रधानमंत्री की अपील का विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने समर्थन करते हुए कहा, प्रधानमंत्री की हजारे जी से अनशन त्यागने की अपील अगर सारे सदन की अपील बन जाए, तो कहीं ज्यादा अच्छा होगा। मैं विपक्ष की ओर से स्वयं को सम्बद्ध करते हुए यह अपील करना चाहूंगी कि श्री अन्ना हजारे अपना अनशन त्याग दें।
मजबूत लोकपाल विधेयक लाने के प्रधानमंत्री के आाश्वासन से सुर से सुर मिलाते हुए सुषमा ने कहा, हजारे जी की प्रभावी और सशक्त लोकपाल विधेयक लाने की जो मांग है, मैं यहां से कहना चाहती हूं कि देश एक प्रभावी और सशक्त लोकपाल लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम सब जो यहां बैठे हुए हैं, बहुत प्रभावी लोकपाल बिल लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम ऐसा बिल लाएंगे।
उन्होंने कहा, हम इस सदन से उन्हें आश्वासन देते हैं कि हमें कितने भी संशोधन करने पड़ें, हम इस सदन से एक प्रभावी और सशक्त लोकपाल बिल निकालकर लाएंगे। यह सदन आपसे अपील करता है कि आपका जीवन अमूल्य है, इसलिए आप अपना अनशन त्याग दें।
इस पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि अभी प्रधानमंत्री और विपक्ष की नेता की ओर से जो अपील आई है मैं भी चाहूंगी कि पूरे सदन की ओर से यह एक आवाज अन्ना हजारे जी के पास जाए कि वह हम सब की अपील पर अपना अनशन समाप्त करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि संसद भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए बहुत ही प्रभावी कदम उठाएगी। अध्यक्ष की इस अपील का सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने मेजें थप-थपाकर समर्थन किया।
संसद में होगी अन्ना के जनलोकपाल पर बहस
शुक्रवार को संसद में जनलोकपाल बिल पर बहस होगी। इस आशय की जानकारी केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख ने अन्ना को दी। उन्होंने बताया कि जनलोकपाल समेत अन्य सभी प्रारूपों पर संसद में चर्चा होगी।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता विलासराव देशमुख ने शाम को अन्ना हजारे से रामलीला मैदान पर बात की थी। उसके बाद वह वहां से अन्ना का संदेश लेकर प्रधानमंत्री के पास गए थे। प्रधानमंत्री और कैबिनेट के वरिष्ठ सहयोगियों से बात के बाद विलासराव देशमुख ने अन्ना को सूचना दी कि संसद में जनलोकपाल बिल पेश कर उस पर शुक्रवार से चर्चा आरंभ कर दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देखमुख ने आज यहां रामलीला मैदान में गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे से मुलाकात की और उनसे अनशन खत्म करने का अनुरोध किया था।
देशमुख करीब तीन बजे रामलीला मैदान पहुंचे थे। उन्होंने यहां अनशनस्थल पर आराम कर रहे हजारे से करीब 10 मिनट तक बातचीत की।
बताया जाता है कि देशमुख ने ‘निजी रूप से’ हजारे से फौरन अनशन खत्म कर देने की गुजारिश की।
सूत्रों ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि देशमुख को क्या सरकार ने हजारे पक्ष से औपचारिक वार्ता के लिए रामलीला मैदान भेजा था। अहमदनगर से भाजपा सांसद दिलीप गांधी, और शिरडी से शिवसेना सांसद भाउ साहब बाकचौरे, शिरूर से शिवसेना के ही शिवाजी ए पाटिल ने आंदोलन को समर्थन जताया।
फिल्मकार अशोक पंडित और 95 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी सोमनाथ भी आंदोलन में शामिल हुए। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में सैकड़ों किसान रामलीला मैदान पहुंचे
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता विलासराव देशमुख ने शाम को अन्ना हजारे से रामलीला मैदान पर बात की थी। उसके बाद वह वहां से अन्ना का संदेश लेकर प्रधानमंत्री के पास गए थे। प्रधानमंत्री और कैबिनेट के वरिष्ठ सहयोगियों से बात के बाद विलासराव देशमुख ने अन्ना को सूचना दी कि संसद में जनलोकपाल बिल पेश कर उस पर शुक्रवार से चर्चा आरंभ कर दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देखमुख ने आज यहां रामलीला मैदान में गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे से मुलाकात की और उनसे अनशन खत्म करने का अनुरोध किया था।
देशमुख करीब तीन बजे रामलीला मैदान पहुंचे थे। उन्होंने यहां अनशनस्थल पर आराम कर रहे हजारे से करीब 10 मिनट तक बातचीत की।
बताया जाता है कि देशमुख ने ‘निजी रूप से’ हजारे से फौरन अनशन खत्म कर देने की गुजारिश की।
सूत्रों ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि देशमुख को क्या सरकार ने हजारे पक्ष से औपचारिक वार्ता के लिए रामलीला मैदान भेजा था। अहमदनगर से भाजपा सांसद दिलीप गांधी, और शिरडी से शिवसेना सांसद भाउ साहब बाकचौरे, शिरूर से शिवसेना के ही शिवाजी ए पाटिल ने आंदोलन को समर्थन जताया।
फिल्मकार अशोक पंडित और 95 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी सोमनाथ भी आंदोलन में शामिल हुए। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में सैकड़ों किसान रामलीला मैदान पहुंचे
publice notice
this is to inform by legal notice that regarding to flat no. c-102 , maa vidhya vasinidham, chs ltd, kasturi park, navghar road, bhayander (east)dis. thane-401105, two agreement of abobe flat, 1st agreement dated 04th june 1991 between m/s vindhya vasini builder the vendor and sattar m. yakub the purchaser and 2nd agreement dated 9th march 1995 between sattar m. yakub the vendor and smt vindhya suresh sarode the purchaser were not duly stamped and registered with the jurisdiation sale register, related to abobe agreements if any claim or objection by anyone , kindly concat me within seven days from the date establish the abobe legal notice .contact , prabhat gupta , advocate , mobile- 9757262769
Wednesday, August 24, 2011
नई दिल्ली।। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास 7 रेसकोर्स रोड पर बेहद अहम सर्वदलीय बैठक खत्म हो गई है। बैठक में टीम अन्ना के जन लोकपाल बिल के ड्राफ्ट पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर दल जन लोकपाल के ड्राफ्ट पर सहमत नहीं हुए। टीम अन्ना की सभी यह नया ड्राफ्ट आज सुबह कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और टीम अन्ना ने मिलकर बनाया है। बैठक में सभी पार्टियों ने अन्ना से तुरंत अनशन खत्म करने की अपील की।
सर्वदलीय बैठक में सबसे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जन लोकपाल बिल पर सहमति बनाने के लिए सरकार की तरफ से की गई पहल का पूरा ब्योरा दिया। पीएम ने बताया कि सरकार भी एक मजूबत लोकपाल बिल चाहती है। हालांकि, पीएम ने अपने इस संबोधन में टीम अन्ना को कोई नया ऑफर नहीं दिया है।
पीएम ने बताईं टीम अन्ना की शर्तें
उन्होंने टीम अन्ना की सभी शर्तों को भी बैठक में रखा। उन्होंने बताया कि टीम अन्ना चाहती है
1- जन लोकपाल बिल को 4 दिन के अंदर संसद में पेश किया जाए
2- मौजूदा लोकपाल बिल को स्टैंडिंग कमिटी से वापस लिया जाए। जन लोकपाल बिल को स्टैंडिंग कमिटी में न भेजा जाए।
3- जन लोकपाल बिल को इसी सत्र में बिल पारित किया जाए, भले ही इसके लिए सत्र बढ़ाना पड़े
प्रणव ने दी ड्राफ्ट की जानकारी
प्रधानमंत्री के बाद प्रणव ने सर्वदलीय बैठक में जन लोकपाल बिल के ड्राफ्ट के बारे में सभी दलों को जानकारी दी। सभी दलों को ड्राफ्ट की कॉपी बांटी गई।
अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील
सर्वदलीय बैठक में शामिल सभी पार्टियों ने पिछले 9 दिन से अनशन पर बैठे अन्ना हजारे के स्वास्थ्य पर चिंता जताई और उनसे अनशन खत्म करने की अपील की।
क्या है पार्टियों का स्टैंड?
आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव जन लोकपाल बिल के समर्थन में नहीं
बीजेपी को टीम अन्ना का जन लोकपाल बिल जैसा का तैसा मंजूर नहीं। एक इंटरव्यू में अरुण जेटली ने कहा की पीएम को राष्ट्रीय सुरक्षा को छोड़कर जन लोकपाल बिल के दायरे से बाहर रखने का कोई तुक नहीं।
सीपीएम को भी टीम अन्ना का पूरा जन लोकपाल बिल मंजूर नहीं
सोनिया गांधी की पूरी नजर
उधर, सूत्रों के मुताबिक यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की पूरे घटनाक्रम पर नजर है। गौरतलब है कि सोनिया गांधी सर्जरी कराने के बाद अभी अमेरिका में ही हैं।
नई दिल्ली. अमर सिंह के खिलाफ नोट फॉर वोट मामले में शिकंजा कसता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता के खिलाफ इस मामले में जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। अमर सिंह पर 2008 में बीजेपी के तीन सांसदों को घूस देने के आरोप है। इसके मुताबिक तीनों सांसदों को एक करोड़ रुपये दिए गए थे।
मीडिया में सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक सिर्फ अमर सिंह के खिलाफ ही नहीं बल्कि सुधींद्र कुलकर्णी के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है। 2008 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी पर इस पूरे ऑपरेशन के जरिए तत्कालीन यूपीए सरकार की बहुमत जुटाने की कोशिश को उजागर करने का आरोप है। कुलकर्णी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के आसार हैं। इसमें उकसाने का आरोप भी लग सकता है।
बीजेपी के तीन सांसद-अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा- नोट लेकर लोकसभा में पहुंच गए थे और वहां नोट लहराए थे। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अमर सिंह ने एक बिचौलिये के जरिए सांसदों को घूस देने की कोशिश की थी। उस समय अमर सिंह समाजवादी पार्टी के नेता थे और पार्टी ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया था।
मीडिया में सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक सिर्फ अमर सिंह के खिलाफ ही नहीं बल्कि सुधींद्र कुलकर्णी के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है। 2008 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी पर इस पूरे ऑपरेशन के जरिए तत्कालीन यूपीए सरकार की बहुमत जुटाने की कोशिश को उजागर करने का आरोप है। कुलकर्णी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के आसार हैं। इसमें उकसाने का आरोप भी लग सकता है।
बीजेपी के तीन सांसद-अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा- नोट लेकर लोकसभा में पहुंच गए थे और वहां नोट लहराए थे। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अमर सिंह ने एक बिचौलिये के जरिए सांसदों को घूस देने की कोशिश की थी। उस समय अमर सिंह समाजवादी पार्टी के नेता थे और पार्टी ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया था।
नई दिल्ली। कैश फॉर वोट कांड में दिल्ली पुलिस ने अमर सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस ने पूर्व सपा सांसद अमर सिंह को भी आरोपी माना है।इस मामले में उनके सहित सात अन्य लोगों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की है। अमर सिंह पर करप्शन और षड़यंत्र रचने का चार्ज लगाया गया है।
चार्जशीट में सुहैल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना का भी नाम शामिल है। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के दायर चार्जशीट में तीन भाजपा के सांसदों के नाम भी शामिल है। इसमें प्रमुख रूप से अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलिस्ते और महावीर भगोरा के नाम भी हैं। इसके अलावा सुधींदर कुलकर्णी के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने नोट के बदले वोट प्रकरण में कारवाई न करने पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सुहैल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना को गिरफ्तार किया था। । इस मामले को लेकर अमर सिंह से भी पूछताछ की गई थी।
गौरतलब है कि 2008 में परमाणु समझौते के कारण वामपंथ ने यूपीए सरकार से समर्थन ले लिया था। जिससे सरकार अल्पमत में आ गई थी। उस वक्त सरकार को बहुमत में लाने के लिए बीजेपी के सांसद को पैसे देकर वोट खरीदने का आरोप लगा था। जिसे लेकर संसद में काफी हंगामा मचा
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