Wednesday, June 30, 2010

प्यार , भाग-५२

कम्मो- ठीक है, डिनर नहीं कहीं नाश्ता करेंगे और शाम जल्दी ही आप मुझे छोड़ देंगे .

बोस -वादा रहा. मैं जानता हूँ आज का दिन तुम अपने खास लोगों के साथ सेलिब्रेट करना चाहोगी ?

कम्मो- ऐसा ही कुछ है.

थोड़ी देर के बाद वे एक शानदार होटल में पहुच गए . नाश्ते का आदेश दे दिया गया. अब बारी कम्मो के सवाल पूछने की थी . उसने शुरुआत भी करदी-

-क्या आप बता सकते हैं कि पुरुष आमतौर पर महिलाओं में क्या पसंद करते हैं . मेरा मतलब है कि ऐसी कौन-सी चीजें हैं जो पुरूषों को खुश रखती हैं। इन रहस्यों को जानकर वे अपने पुरूष साथियों को खुश रखने का प्रयास भी करती हैं।

बोस- ओह, अच्छा सवाल है. संबंधों को बेहतर बनाए रखने के लिए खुश और नाखुश रखने वाले कारकों को जानना बहुत जरूरी हो जाता है। यदि इन्हें एक बार जान लिया जाए तो यह भविष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकता है। यहां ऐसे ही कुछ रहस्य बताए जा रहे हैं जो पुरूषों को खुश रखतें हैं और उन्हें जानना महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है, मैं मेरे दिमाग से बताता हूँ. किसी महिला का आकर्षक व्यक्तित्व पुरूषों को अच्छा लगता है। उनका यही आकर्षण पुरूषों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। उनका यही आकर्षण पुरूषों को अनेक समस्याओं से उबार सकता है। जो महिलाएं अधिक खूबसूरत नहीं होती, पुरूषों को लुभाने के लिए उनका आकर्षक होना जरूरी हो जाता है। महिलाओं के इसी आकर्षण से पुरूष खिंचे चले आते हैं और उनका साथ पाकर खुश रहते हैं। पुरूषों को महिलाओं का दुरूस्त फिगर और भरा पूरा शरीर काफी पसंद आता है। जब पुरूष किसी महिला मित्र के साथ घूमने जाते हैं तो चाहते हैं कि लोग उनकी महिला मित्र को देखकर चकित रह जाएं। पुरूष चाहते हैं कि लोग उनके खूबसूरत फिगर को देखें और उनकी तारीफ करें। महिलाओं का खूबसूरत चेहरा पुरूषों के लिए कातिलाना हो सकता है। पुरूष उनकी चेहरे की खूबसूरती से ही सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। चेहरा ही आपको ऐसी महिला चुनने को प्रेरित करता है। महिलाओं का खूबसूरत चेहरा आंखों को सुकून देता है। महिलाओं के खूबसूरत चेहर को पुरूष बार-बार देखना चाहते हैं। हालांकि कहा जाता है कि खूबसूरती देखने वाले की आंखों में होती है। इसलिए जरूरी नहीं है कि जो आपको खूबसूरत लगे वह दूसरों को भी ऐसी ही लगे। रिश्तों का बुनियाद ईमानदारी और भरोसे पर ही टिकी होती है। इसलिए पुरूष ऐसी महिलाओं को पसंद करते हैं जो उनके प्रति ईमानदार और उनके भरोसे पर खरी उतरती हों। अच्छे कामों में पुरूषों को पीठ थपथपाने और बुर कामों में सही रास्ता बताने वाली महिलाएं साथ प्रुरूषों को भाता है।पुरूषों का अपना सम्मान करने वाली महिलाएं पसंद आती हैं। साथ ही सकारात्मक आलोचना करने वाली महिलाएं भी पुरूष पसंद करते हैं। उनके द्वारा की गई सकारात्मक आलोचना पुरूषों को बेहतर इंसान, पिता, प्रेमी, भाई आदि बनाती हैं। यह पुरूषों को खुश रखने की प्राथमिकता के क्रम में काफी ऊपर है। दिनभर मेहनत करने के बाद पुरूष चाहते हैं कि कोई उनके चेहर पर मुस्कान ले आए। हल्का फुल्का मजाक करके पुरूषों को आनंदित करने वाली महिलाएं पुरूषों को पसंद आती हैं। हंसी को स्वास्थ्य का टॉनिक माना जाता है और यह टॉनिक देने वाली महिलाओं को पुरूष पसंद करते हैं। पुरूषों को दब्बू और बेवकूफ महिलाएं पसंद नहीं होती। बुद्धिमान और आत्मविव्श्रास से भरी महिलाएं उन्हें पसंद आती हैं। हालांकि अपने से बुद्धिमान महिलाओं से उन्हें खतरा भी महसूस होता है। बुद्धिमान महिलाएं उनकी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं। साथ की पुरूष जो काम उनसे करवाना चाहते हैं, उसे भी बेहतर तरीके से अंजाम दे सकती हैं। नादान नहीं, परिप` महिलाओं में उनकी अधिक दिलचस्पी होती है और वही उनको खुश रख सकती हैं।बहुत सी महिलाएं स्वार्थी होती हैं और वह हमेशा कुचक्र ही रचती रहती हैं। पुरूष ऐसी महिलाओं से दूर ही रहते हैं। पुरूष ऐसी महिलाओं का साथ पसंद करते हैं जो कोमल हृदया हों। निष्कपट, हृदय की साफ और मानवीय संवेदना से भरी महिलाएं रिश्तों को लंबे समय तक निभाती हैं और ऐसी महिलाएं ही पुरूष पसंद करते हैं। प्रेम मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने और उसे खुश रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए जो महिलाएं प्रेम लुटाएं या उन्हें प्रेम से सराबोर रखें, वह पुरूषों द्वारा पसंद की जाती हैं। प्रेम पर टिके संबंध भी दीर्घगामी होते हैं।मगर मैं ये स्पष्ट करदूं कि मुझे सिर्फ और सिर्फ तुम पसंद हो . इसका मतलब ये नहीं कि तुम भी मुझे हर हालत में चाहो

कम्मो- शुक्रिया , मगर मैं इस लायक नहीं हूँ. ये अच्छा है कि आप सामने वाले की राय को भी तवज्जो देते हैं .


Tuesday, June 29, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-५१

करती हो कम्मो , मेरा मतलब कामिनी . शिल्पा ने मुझे तुम्हारा यह उपनाम बताया था . मुझे अभी तक इसलिए याद है क्योंकि बहुत तारीफ कर रही थी तुम्हारी. कहती थी कि बड़ी ऊंची चीज है.
कम्मो- अच्छा ऐसी बात है क्या ?शिल्पा खुद ही नेक और भली लड़की है , और जो लोग खुद अच्छे होते हैं , वे दूसरों को भी अपने जैसा ही भला समझते हैं. सच कहूँ तो मुझे अपने अंदर कोई खास बात नजर नहीं आती.
बोस- ऐसे मैं मानने वाला नहीं हूँ. कोई ऐसे ही किसीकी तारीफ़ नहीं करता . खासकर लड़कियां. लड़कियां तो बस अपनी प्रशंसा में ही मगन रहती हैं.
कम्मो- थेंक यू सर . आपने मेरी सराहना की , इसके लिए मैं आभारी हूँ. मैं जानना चाहती हूँ कि मुझे क्या काम करना होगा , और कबसे ज्वाइन करना है ?
बोस- मैंने कहा न, उसकी फ़िक्र मत करो. तुमने जिस पद के लिए एप्लाई किया है , उसी पर रखा जाएगा . पी आर मैनेजर का काम भी दिलचस्प होता है. मगर चुनौतीपूर्ण भी . तुम्हें मेरी सेक्रेटरी सब कुछ समझा देंगी . आज हम लोग बातें कर लेते हैं , बाद में शायद इतना समय नहीं मिल पायेगा. मैं चाहता हूँ कि आज ही हम लोग एक दूसरे को ठीक तरह से जान ले. बाई दबे , आज रात क्या कर रही हो ? क्या हम हम लोग कहीं कैंडल डिनर करें ?
कम्मो- माफ कीजिये , मैं इसमें किसी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं रखती. आप चाहें तो मुझसे यहीं पर सवाल कर सकते हैं. मैं जवाब दूंगी . कोशिश करूंगी तुम्हें संतुष्ट करने के लिए .
बोस- संतुष्ट ? इतनी दूर से कैसे संतुष्ट कर पाओगी ? ज़रा और करीब आओ तो बात बनें.मुझे तुम ऊपर से सुखी और अंदर से दुखी दिखाई देती हो , यह गलत है . अगर मेरी मानो तो

खुश रहिए,खुशी बांटिए-आदमी के मस्तिष्क में हमेशा कमतर और बेहतर के मध्य ल़डाई चलती रहती है और जीवन की सभी प्राथमिकताएं इन्ही दोनों के द्वंद्व के मध्य निर्धारित होती है। खुशी सकारात्मकता की ओर बढ़ाती है। यदि हमें खुशी और संतोष का अनुभव नहीं हो रहा है तो इसका मतलब हम गलत दिशा में बढ़ रहे हैं। खुशी प्राप्त करने के लिए ही व्यक्ति अमीर बनना चाहता है, सम्मान प्राप्त करना चाहता है। अरस्तु ने खुशी को भावना से अधिक क्रिया माना है। "युडेमोनिया" एक अवस्था है जिसे मनुष्य न सिर्फ प्राप्त करना चाहता है बल्कि उसे स्थायी बनाए रखने की कोशिश भी करता है। खुशी आत्मा को निर्मल बनाती है। मुस्कुराते और खिलखिलाते हुए चेहरे हरेक युग की मानवजाति में बिल्कुल एक जैसे रहे है, फिर चाहे वजहें कितनी ही अलग क्यों न हो।

एक जैव वैज्ञानिक ने अपनी पुस्तक में इस विचार को विस्तार से समझाने का प्रयास किया है। उन्होने इस भावना को समय के साथ जो़डते हुए इसे भूत, वर्तमान और भविष्य से प्रभावित बताया है। जो खुशी बीते हुए कल से जु़डी होती है, उसमे संतोष,गर्व और शाति का एहसास अधिक होता है। जो खुशी भविष्य से जु़डी होती है उसमें आशावाद,सकारात्मकता और विश्वास जैसी भावनाएं प्रबल होती है। वर्तमान से जु़डी खुशीयों को "सुख और संतुष्टि" दो भागों में बांटा जा सकता है। सुख क्षणिक होता है और शारिरिक होता है। संतोष द्वारा प्राप्त होने वाली खुशी में जु़डाव,बंधन,प्रवाह और आत्म-चेतना होती है और भावनाओं का एहसास भी लंबे समय तक बना रहता है। इस तरह हम खुशी के स्तर को वक्त के अनुसार माप सकते है।
कम्मो - ठीक है सर . मैं आइन्दा से हमेशा खुश रहने का प्रयास करूंगी . ऊपर से भी और अंदर से भी. मेरा वादा है.
बोस- ठीक है , एक आख़िरी सवाल और ? थोड़ा पर्सनल है, मगर जरूरी है .
कम्मो- पूछिए न सर ?
बोस- क्यों न हम लोग कहीं बाहर घूमने चलें. जहां तुम्हारी इच्छा करे . तब बातें करते हैं.






























Monday, June 28, 2010

भाग-५०

सहसा तभी उसे बोस की आवाज सुनाई दे -
-हर बात से क्या मतलब है ? अगर मैं सेक्स करने को बोलूँ तो क्या तुम उसके लिए भी राजी हो जाओगी ?
कम्मो- जी नहीं, मैंने काम की बात कही है . कंपनी से सम्बंधित किसी भी काम के बारे में . सेक्स मेरा पर्सनल मामला है . यह कम्पनी से नहीं जुडा है.
बोस - इस कंपनी , आप और मेरी बात छोडिये सेक्स तो जिंदगी से भी जुड़ा है , यह जीवन में खुशहाली लाता है , इसे सजाता और सवारता है . इसको और भी जीने लायक बनाता है .

सुखमय सेक्‍स संबंध खुशहाल जिंदगी के लिए एक आवश्‍यक तत्‍व है। इसके आभाव में व्‍यक्ति अनेक तरह के तनाव और अशांत माहौल से ग्रसित हो जाते हैं। आमतौर पर पुरुष और स्‍त्री सेक्‍स से शारीरिक और मानसिक खुशी पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन सेक्‍स से अरुचि अनेक तरह के मानसिक और मनोवैज्ञनिक समस्‍याओं को जन्‍म देती है। यह बात साबित हुआ है कि सुखद सेक्‍स जीवन न केवल जीवन प्रत्‍याशा को बढ़ाता है वरन स्‍वास्‍थ सहित अनेक समस्‍याओं से निजात दिलाने में भी सहायक सिद्ध होता है , जो लोग सप्ताह में दो या इससे अधिक बार सेक्‍स करते हैं, उनके जीवन दर में 50 फीसदी से भी ज्‍यादा की बढ़ोत्‍तरी पाई गई है। यह बात किसी से छिपा नहीं है कि बढ़ते उम्र के साथ सेक्‍स करने की चाहत में भी क्रमश: कमी आती जाती है। इस स्थिति से निबटने के लिए परफेक्स जैसी दवाईयों का इस्‍तेमाल बढ़ गया है। दूसरे शब्‍दों में कहा जाए तो परफेक्स जैसी दवाईयों की सफलता इस ओर इशारा करती है कि बढ़ती उम्र में सेक्‍स के प्रति उदासीनता किस हद तक बढ़ रही है। इसका अर्थ यह भी है कि लोगों में सेक्‍स के प्रति उत्‍कंठा ने ही इसकी लोकप्रियता को बढ़ाया है। लेकिन यह खासकर पुरुषों पर ही केंद्रित है।मगर तुम तो अपवाद हो. णा तो तुम लड़का हो और णा ही उम्रदराज . अगर तुम्हारा बायोडाटा सही है तो तुम्हारी उम्र २० से ज्यादा नहीं है.

कम्मो- आप शायद भूल रहे हैं सर. हम यहाँ पर नौकरी के सम्बन्ध में बात करने के लिए इकट्ठा हुए हीं.

बोस- ओह सोरी थिस. बट , इस हार्मोन की सामान्‍य मात्रा एक अच्‍छे और सुखद दांपत्‍य जीवन का परिचायक होता है। यह पुरुष और स्त्रियों में सेक्‍स संबंधी इच्‍छाओं को जागृत करने में भी सहायता प्रदान करता है। लेकिन उम्र के साथ-साथ इसमें कमी के कारण अनेक तरह की समस्‍याओं का जन्‍म होता है। सेक्‍स के प्रति उदासीनता के अलावा अवसाद, थकान, वसा की अधिकता, मांसपेशियों में कसावट का अभाव और कमजोर हड्डी आदि समस्‍याएं भी सर उठाने लगती हैं।पुरुषों में आमतौर पर इस हार्मोन की कमी 30 वर्ष की उम्र के बाद से शुरू हो जाती है। जबकि महिलाओं में यह प्रक्रिया मेनोपाउज के बाद या इसके दौरान शुरू हो जाती है। यह भी कहा गया है कि अधिकांश स्त्रियां सेक्‍स जीवन का भरपूर आनंद उठाते हैं।यह एक प्रा‍कृतिक उत्‍पाद है, जो मानव शरीर से उत्‍पन्‍न होती है। दवाईयों या अन्‍य माध्‍यमों से इसकी मात्रा को बढ़ाने में असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाती है, जो बाद की जिंदगी को प्रभावित करता है। आमतौर पर लोग इसकी मात्रा को बढ़ाने के लिए टेस्‍टोस्‍टेरोन रिप्‍लेसमेंट थेरेपी का प्रयोग भी करते हैं। इसका शरीर पर गलत प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण इस हार्मोन के स्राव में अनियमितता की स्थिति पैदा हो जाती है। साथ ही प्राकृतिक रूप से व्‍यक्ति इसको उत्‍पादित करने की क्षमता भी खो देता है। सौभग्‍य से एंड्रोस्‍टेनेडियोन , जो टेस्‍टोस्‍टेरोन की भांति ही एक प्राकृतिक अवयव है, इन परेशानियों में राहत देता है। एएसडी अधिवृक्‍क ग्रंथि के द्वारा प्राकृतिक रूप से उत्‍पादित होता है। अध्‍ययनों के अनुसार यह पुरुष और महिलाओं में टेस्‍टोस्‍टेरोन की मात्रा को समान रूप से बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है। मेरे कहने का मतलब समझ रही हो तुम ? हमारी कंपनी में कई डॉक्टर्स का पैनल है. अगर चाहो तो वे तुम्हारी इस उदासीनता को दूर कर सकते हैं. नौकरी तो अपनी पक्की समझो . शिल्पा कहे और हम न करदें इतनी तो हैसियत नहीं है हमारी . बाकी ये है कि हम तो आपके स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हो रहे थे . आखिर तुम इतनी खूबसूरत जो हो. और सुन्दर चीजों की हिफाजत होनी चाहिए कि नहीं ?

कम्मो- थेंक यू सर. अब मैं चलूँ ? या कोई आदेश है मेरे लिए ? मेरा मतलब अपोइंट मेंट लेटर ?

बोस- फिकर क्यों


Sunday, June 27, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-४९

कम्मो- एक बात तो बताओ. कंडोम का प्रयोग कैसे किया जाता है ? वैसे तो कभी ऐसा होगा नहीं , मगर कभी ऐसा हो गया कि कंडोम लगाना पड़े तो इसके बारे में कुछ जानकारी है ? अगर है तो बताओ . सब कुछ जानना चाहती हूँ.
शिल्पा-

कंडोम विभिन्न लंबाई, चौड़ाई तथा मोटाई में उपलब्‍ध है। लेकिन इसके बारे में दो बाते महत्वपूर्ण है। पहला, वह प्लास्टिक का बना हुआ है या जंतुओं के रेशों से। दूसरा, वह इस आकार में हो कि उसका प्रयोग करने में आसानी हो। कंडोम के पैकेट पर एक्सपाईरी डेट लिखा होता है। अगर यह एक्सपायर हो चुका है या सूखकर कड़ा हो चुका तो इसका प्रयोग न करें। इसको जांचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि आप उसके एक भाग को हाथ में लेकर छुएं।कंडोम को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए इसे ठंडे और सूखे स्थान में रखना चाहिए। इसके पैकेट को एक ओर से खोलकर, सावधानी से निकालना चाहिए। इसे दांत या ब्‍लेड से नहीं काटना चाहिए। इससे कंडोम के क्षतिग्रस्त होने का खतरा होता है। तैलीय कंडोम का प्रयोग करना चाहिए। अगर कंडोम सुखा हुआ हो तो, पानी से बने तैलीय पदार्थ इस पर लगाना चाहिए। इससे कंडोम सुरक्षित रहता है। पेट्रोलियम पदार्थों से बने तैलीय पदार्थों या वेस्लीन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे कंडोम के बकार होने का डर होता है।कंडोम का प्रयोग किसी अन्य दवाई के साथ करना चाहिए , इससे कंडोम के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में भी अनचाहे गर्भ या यौन संबंधी रोगों से बचाव होता है। कुछ लोगों को किसी खास दवाई से एलर्जी होती है। इसलिए इन दवाईयों का प्रयोग परीक्षण करके ही करना चाहिए। कंडोम का प्रयोग यौन क्रिया आरंभ करने से पहले करना चाहिए। सेक्स से पहले इसे पुरुष के खास अंग पर अच्छी तरह लगाना चाहिए। यौन क्रिया के तुरंत बाद इसे निकाल कर फेंक देना चाहिए।मगर यार , ये बताओ कि ये सवाल आज तुम क्यों कर रही हो ?

कम्मो- चलो रास्ते में बातें करेंगे , टाइम हो गया है. मैं बिलकुल तैयार हूँ.

शिल्पा और कम्मो जल्दी से होटल के कमरे से निकल गयीं. आज कम्मो बहुत खुश थी. कहाँ तो वह बेचारी मुंबई भागकर आयी थी, उसको कोई रास्ता नजर ही नहीं आता था और कहाँ अब उसकी सारी खुशियाँ मिल गयीं. एक झटके में ऐसी महिला साथी मिल गयी जो उसको पुरुषों जैसा सुख देती थी, उसकी नौकरी दिलाने ले जा रही थी और उसको मुंबई में फ्लेट दिलाने का भी वादा कर चुकी थी. वह ऐसी दोस्त थी जिससे वह कुछ भी शेयर कर सकती थी. वो भी जिसे कोई पत्नी अपने पति से नहीं करना चाहती . रास्ते में उन दोनों ने खूब गप-शाप की, शिल्पा का ज्यादा दूर नहीं था. मुश्किल से पौना घंटे के सफर के बाद वे दोनों वहां पहुच गयीं. उसके ऑफिस का रंग -ढंग देखकर कम्मो चकित रह गयी. बहुत विशाल और सजा हुआ ऑफिस था. बेहद मंहगा कालीन था , जिस पर पैर रखकर वह शिल्पा के केबिन तक पहुची . उसका बोस दिखने में आकर्षक था और अपनी असली उम्र से काफी कम का दिखाई देता था. जब शिल्पा कम्मो को उसके पास लेकर गयी तो पहले तो उसने उसे बिलकुल नजरअंदाज ही कर दिया मगर थोड़ी देर के बाद जब बोस ने कम्मो को अकेले अपने ऑफिस में बुलाया तो कहने लगा-

-गुड, तुम्हारा बायोडाटा तो काफी प्रभावशाली है, दिखने में भी सुन्दर हो मगर हार्ड वर्क जरूरी है, समर्पण जरूरी है , वो सब कर पाओगी क्या ? देर रात तक रुकना पड सकता है. काम के सिलसिले में बाहर भी जाना पडता है . कभी दुसरे राज्यों में तो कभी दुसरे देशों में . ये सब कर पाओगी ?

कम्मो- हाँ सर , एक बार अगर चांस मिला तो निश्चित रूप से मैं खुद को सिद्ध कर दूंगी . मैं खूब मेहनत करूंगी . आपको शिकायत का कोई मौक़ा नहीं दूंगी . हर बात मानूंगी , हर बात .

यह बात उसने इस अंदाज से कही कि बोस के मन में गुदगुदी सी होने लगी . वह समझ गया जो इशारा कम्मो चाहती थी. खेला खाया खिलाड़ी थी. उसकी कंपनी वार्ड लेबल की थी और इण्डिया का पूरा काम वही देखता था . वह काबिल और मेहनती के अलावा प्रतिभाशाली भी था मगर खूबसूरत लड़कियां उसकी कमजोरी थीं. सुन्दर लड़की देखते ही उसके मन में लड्डू फूटने लगते थे.

Saturday, June 26, 2010

भाग -४८

कम्मो - बस यू समझो कि आंधी तूफ़ान की तरह तैयार होकर आती हूँ.

शिल्पा- क्या देख रही थी सपने में ? और बता न . ऐसा लगता है रात भर सपनो कि दुनिया में ही खोई रही है .

कम्मो- धुंधली सी तस्बीर थी किसी कि. कोई भाषण दे रहा था. कहता था कि अगर किसीको अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कुछ ही महीना या साल हुआ है। तो यह हो सकता है कि उसको उसे सेक्स से संबंधित कुछ बातों के बारे में बताना पड़े। इसके कई कारण हो सकते हैं। वह इस बारे में जानना ही नहीं चाहती हो या अगर आप उसे इसके बारे में बताना भी चाहेंगे तो वह यह सब सुनकर हैरान हो जाए। वह यह भी बोल सकती है कि शायद आप यह जान नहीं पाते है कि वह सेक्स करने के मूड में है या नहीं। इसका कोई भी कारण हो सकता है जिसकी वजह से वह आपसे बात करने में संकोच करती हो।अगर वह नहीं चाहती इसका सामना कीजिए। इसका कारण हो सकता है कि आप उसे सेक्स के बारे में बताना तो चाहते हैं, लेकिन वह जानना ही नहीं चाहती हो। वह जानती है कि आप उससे क्या चाहते हैं? साथ ही वह ऐसी कौन सी बात है जिससे वह यह तयकरती है कि वह आपके हुक्म को मानेगी या नहीं। वैसे भी अगर आप उनसे एक ही बार कहेगें तो क्या वह आपकी बात मानेगी? इसके लिए यह जरूरी है कि आप संयम रखे। यदि आप ऐसा नहीं करते है तो यह आपके लिए ही नुकसानदेह हो सकता है।अगर आप अन्य युगल की तरह सप्‍ताह में एक बार भी सेक्स करते है तो यह सम्भव है कि वह आपमें कुछ दिलचस्पी ले। इसके साथ-ही-साथ आप उन्हें प्यार भरे सदेंश भेज सकते है या कोई रोमांटिक फिल्म दिखा सकते हैं। तब आप यह महसूस करेंगे कि वह आपके कुछ और अधिक नजदीक आ रही है। जब वह आपको समझे इसके बाद यह जरूरी है कि इसके लिए आप उनका धन्यवाद करें। प्राय: कुछ महिलाएं यह सोचती है कि जो महिलाएं सेक्स के बारे में बात करती है, उनके बारे में उनका साथी अपने मन में गलत सोच बना लेते हैं।अगर आप इस तरह की कोई सोच रखती हैं तो विश्‍वास कीजिए आपका ब्‍वायफ्रेंड आपके बारे में गलत सोच सकता है। अगर आप चाहती हैं कि आपका ब्‍वायफ्रेंड आपके बारे में इस तरह की गलत सोच न रखे तो आप अपनी सोच में बदलाव लाने की कोशिश करें। आप सेक्स के बारे में क्या सोच रखती है? इस बारे में अपने ब्‍वायफ्रेंड से खुलकर बात करें इससे उसे भी आपको समझने में आसानी होगी। अगर आप इन बातों पर अमल करेंगी तो आपके प्‍यार की रेल तेज रफ्तार से दौड़ेगी।

शिल्पा-तुमने अपने बारे में कुछ खास नहीं पुछा ?जब ख़्वाबों में सुन रही थीं तो कुछ पूछ नहीं रहीं थीं क्या ?

कम्मो- हाँ , पुछा था . मैंने पूछा था कि सेक्स की अवधि क्या होनी चाहिए ?

शिल्पा- तब क्या बताया उन्होंने ?

कम्मो - सर्वेक्षण के बारे में बात कर रहे थे. पूरा अक्षरश तो याद नहीं है. मगर एक सर्वेक्षण के मुताबिक़


बेस्ट सेक्शुअल इंटरकोर्स 7 से 13 मिनट का होता है। आम तौर पर तीन मिनट का सेक्स पर्याप्त होता है। इस अध्ययन में खासकर यह जानने के लिए की गई कि पेनिट्रेटिव सेक्स के लिए आदर्श समय के बारे में एक्सपर्ट्स की क्या राय है। यह बात सामने आई कि सेक्स के लिए 7 से 13 मिनट का समय सबसे अधिक डिजायरेबल होता है।
यह पता चला कि इंटरकोर्स 3 से 7 मिनट के दौरान खत्म होता है और यह समय सेक्स के खयाल से पर्याप्त होता है। पर , सेक्स के लिए इससे कम समय को ' काफी कम ' बताया गया और 13 मिनट से अधिक समय को ' काफी लंबा ' बताया गया।
'पुरुषों के केस में फैंटसी के दौरान जननांग कठोर और बड़ा होता है और पूरी रात सेक्शुअल ऐक्टिविटी के लिए तैयार रह सकता है।' उन्होंने बताया कि इस स्टडी के रिजल्ट से लोगों को सेक्स से जुड़ी भ्रांतियों और असुरक्षा की भावना से मदद मिल सकती है।विशेषज्ञों ने कहा है कि ज्यादातर ऑस्ट्रेलियाई पुरुष, सेक्स के लिए लंबा अंतराल चाहते हैं, जबकि अधिकतर महिलाओं को इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह जल्दी खत्म होता है या देर में। और भी न जाने क्या -कया कहा था , मेरी समझ में तो बस इतना ही आया कि बेस्ट सेक्स टाइम ७ से १३ मिनिट के बीच होता है , जबकि शिल्पा, तुम जानती हो कि हम लोग तो आधा से एक घंटे में संतुष्ट हो पाते हैं.
शिल्पा- हाँ, मगर तुम जो बता रही हो वह पुरुष और महिला के बीच सम्बन्ध के विषय में है ना कि महिला से महिला के सम्बन्ध के बारे में. आगे चलकर इस विषय में हम लोग अध्ययन करेंगे


Friday, June 25, 2010

bhaag -47

कम्मो नींद में ही ये सब कर रही थी. सपने में तो इससे भी बड़े-बड़े द्रश्य देखने को मिल जाते हैं . मच्छर अचानक हमला करने लगे तो कम्मो की एक बार नींद खुल गयी. चादर तानकर दुबारा सोई तो वह एक सेक्स स्पेशलिस्ट के पास बैठी थी , वह व्याख्यान दे रहा था कि अगर आपको अपने पाटर्नर के साथ सेक्स संतुष्टि नहीं मिल रही है तो क्या आप उसे प्यार करना ही छोड़ देंगे? क्या बात इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी कि आप दूसरी शादी कर लेंगे? अगर कुछ दिनों बाद आपको दूसरी शादी से भी संतुष्टि न मिले तो फिर आप क्या करेंगे? जीवन के ऐसे दोराहे पर खड़े होकर आप क्या करेंगे?एक सीधी-साधी शादीशुदा जिंदगी बिताने के लिए आज कितने तौर-तरीके सामने आने लगे हैं। लव मैरिज, लिव इन रिलेशनशिप, कॉन्ट्रेक्ट मैरिज, न्यूक्लियर फैमिली और न जाने क्या- क्या? नए जमाने के इन टाइटल्स से कई तरह की परेशनियां भी सामने आने लगी हैं। खासतौर पर उन शादीशुदा जोडों के सामने, जिनकी शादी को महज एक-दो साल ही हुए हैं। उच्‍च शिक्षा से जन्मी फैसले लेने की ताकत का इस्तेमाल अपने मन मुताबिक करना इनके लिए सहज होता है।यदि किसी पुरूष पर तनाव इतना अधिक हावी हो चुका है कि वह आत्महत्या करने की ठान चुका है तो इसका कारण है प्यार और सेक्स, जिसके बीच वह बैलेंस रखना चाहता है। शादी के शुरूआती दिनों में तो सब कुछ सामान्य रहता है। लेकिन कुछ समय बाद ही पति पत्‍नी में अनबन होने लगती है। और कई बार तो बात इतनी अधिक बढ़ जाती है कि पति सेक्स से असंतुष्ट होकर इसके अन्य विकल्प तलाशने लगता है। इसका एक कारण यह भी है कि वह इस समस्या के बारे में अपनी पत्‍नी से खुलकर बात नहीं कर पाता है। उनकी जिन्दगी से सेक्स के साथ-साथ प्यार और रोमांस भी गायब हो जाता है।यदि पति सेक्स के प्रति दिलचस्पी रखता है, लेकिन पत्‍नी की तरफ से कोई उत्सुकता नहीं दिखती तो ऐसी स्थिति पुरूष का किसी दूसरी स्त्री की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है। जहां उसे सेक्स के प्रति संतुष्‍िट प्राप्‍त हो। अगर कोई पुरूष दूसरी शादी कर भी लेता है, लेकिन उसके कुछ समय बाद सेक्स सीक्वेंस में वह पहले जैसी नहीं रही तो आप क्या करेंगे?इस बात में कोई शक नहीं है कि सेक्स जिन्दगी में महत्वपूर्ण है, लेकिन प्यार को मारकर..बिल्कुल भी नहीं। आज के समय में सेक्स की खातिर रिश्ते नातों को ताक पर रख अपने मन की बात करने की प्रवृति बढ़ रही है, जो सही नहीं है.सपने में कम्मो अब अचानक न जाने क्या -क्या बडबडाने लगी. शिल्पा ने उसको झकझोरकर जगा दिया . कम्मो अचानक उठी तो देखा कि शिल्पा तो तैयार भी हो चुकी थी. वह फ़ौरन वाश बेसिन की तरफ दौडी , अपने मुंह पर पानी के छीटे मारते हुए बोली--सोरी यार , आज ना जाने कैसे कैसे सपनों में अटक गयी .शिल्पा- मालूम है. मैं नाश्ते का ऑर्डर देती हूँ, जब तक तैयार होता है तब तक फ्रेश होकर तुम इधर आ जाओ , अरे क्या बडबडा रही थीं. कभी साथ नहीं छोडूंगी ? किस्से कह रही थीं ?

कम्मो- क्या बताऊँ जान , कुछ पूछो मत . अब तो तुम सपने में भी आने लगी हो. रात भर जगाती परेशान करती हो , मैं तुमसे कभी सम्बन्ध नहीं तोडूंगी , ऐसे कह रही थी. कुछ ऐसा ही अजीब सा सब्जेक्ट चल रहा था. हाँ, सेक्स से संतुष्ट न होने पर साथी द्वारा रिश्ता तोड़ लेने का मामला चल रहा था.

शिल्पा- ओह, तुम भी न , अब चलो ... तैयारी शुरू कर लों. आज की रात यादगार रात रहने वाली है. ऐसा जश्न मनाया जाएगा, खूब मजा आएगा.

Wednesday, June 23, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-४५

शिल्पा की बात से कम्मो भी सहमत हो गयी. कुछ देर में ही वे गहरी नींद के आगोश में सो रही थीं.शिल्पा ने कम्मो को अपने बॉस के बारे में बातें बताई थीं. उसके अवचेतन में भी वही बातें घूमने लगीं. सपने में शिल्पा का बोस उसे काम क्रिया के बारे में जानकारी दे रहा था. बदलते जमाने में आपसी संबंध के मायने और उसे जताने के तरीके भी बदलते गए हैं। इससे सेक्‍स संबंध भी अछूता नहीं रहा है। कई लोग ऐसे होते हैं जो सेक्‍स संबंधों को लंबे समय के रूप में देखता है तो कोई क्षणिक दैहिक सुख के रूप में। कोई मानता है कि काम क्रिया से चरम सुख की प्राप्ति होती है तो कोई इसको नरक का द्वार मानता है। बहरहाल, सेक्‍स संबंध एक शाश्‍वत क्रिया है जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। हां इतना जरूर है कि किसी भी क्रिया की अति हानिकारक होती है। काम क्रिया का मनोवैज्ञानिक तौर पर सकारात्‍मक असर पड़ता है। खासकर यह उस वक्‍त और भी प्रभावी सिद्ध होता है जब खुले दिमाग या बिना किसी अतिरिक्‍त दबाव के किया जाए।जानकारों ने पहले भाग में ऐसे सेक्‍स संबंध को रखा है जिसमें दैहिक सुख प्रधान है। जबकि दूसरे भाग में कमिटेड सेक्‍स संबंध को रखा गया है, जो न केवल दीर्घकाल के लिए होता है वरन प्रेममयी भी होता है। तो क्‍या यह माना जाए कि प्रेमपुर्ण संबंध सिर्फ दैहिक सुख के लिए बनाए गए संबंध से बेहतर होता है? इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि सौहार्दपूर्ण माहौल में किया गया सेक्‍स स्‍वास्‍थ और सुखमय जीवन के लिए महत्‍वपुर्ण होता है। किसी भी तरह की वचनवद्धता से परे। इसका अर्थ यह हुआ कि सेक्‍स संबंध मे किसी भी तरह के वादे या समर्पण से बचना। इसका मतलब यह बिल्‍कुल नहीं है कि इस तरह के सेक्‍स संबंध के दौरान लापरवाही बरती जाए या इसमें एक दूसरे के ऊपर किसी तरह की जिम्‍मेदारी नहीं होती है। बल्कि इसको दूसरे नजरिए से देखना चाहिए। यौन संबंध के दौरान वर्तमान परिस्थिति का पूरा-पूरा ध्‍यान रखना होता है। जैसे आप किसी सार्वजनिक स्‍थान पर या ऐसे जगह पर जहां आप दोनों में से किसी के भी निजता के भंग होने का खतरा हो, वहां काम क्रिया नहीं करना चाहिए। इस संबंध में आप इस तरह के विचार से परे होते हैं कि आपका साथी आपके बारे में क्‍या सोच रहा है या आप अपने साथी के बारे में क्‍या विचार बना रहे हैं। इसके अलावा किसी भी तरह के भावनात्‍मक संबंधों से दूर आप सिर्फ और सिर्फ शारीरिक संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं।बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अपरिचित लोगों के साथ यौन संबंध बनाने में रुचि लेते हैं। कई लोग इनलोगों के साथ सेक्‍स करने में रोमांच का अनुभव करते हैं क्‍योंकि जिन लोगों के साथ आप संबंध बना रहे हैं, जरूरी नहीं की वह आपको भविष्‍य में दोबारा मिले। हालांकि इसमें इंकार की गुंजाइश भी रहती है। जोखिम केजुअल सेक्‍स का एक भाग है। क्‍योंकि कई लोग इसके लिए सार्वजनिक स्‍थानों का चयन भी करते हैं या आपका साथी सीमा से बाहर जाने की कोशिश करता है। स्‍वाभाविक है कि ऐसे में थोड़ा खतरा तो रहता ही है।बहुत से बच्‍चों को शुरू से ही यह बात बताई जाती है कि नैमित्तिक यौन संबंध बुरा होता है। इससे उनके अंदर एक प्रकार का रोमांच पैदा होता है कि आखिर इसमें क्‍या होता है। परिणामस्‍वरूप केजुअल सेक्‍स के प्रति लोगों में रुचि बनी रहती है। किसी भी खतरे या भय के माहौल में मानव का तंत्रिका तंत्र सामान्‍य से ज्‍यादा सक्रिय हो जाता है। सांसों की गति तेज हो जाती है, रक्‍तचाप बढ़ जाता है। इसके फलस्‍वरूप शरीर में स्‍फूर्ति का संचार होता है। इन परिस्थितियों में हमारा शरीर सेक्‍स के लिए अनुकूल रहता है। जब आप प्‍यार में होते हैं तो उस दौरान (समर्पण) जैवरासायन सक्रिय हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार जोड़ों में इसका परिणाम आशा से ज्‍यादा सकारात्‍मक रहा है। इनका आगे कहना है कि दोनों लोग हर उस अवसर को भुनाने की कोशिश करते हैं, जिससे यह साबित हो सके की उनके बीच प्रेममयी माहौल है। साथ ही वे एक दूसरे के करीब आने की पूरी कोशिश करते हैं। इस दौरान सेक्‍स का अनुभव काफी रोमांचकारी रहता है। केजुअल सेक्‍स के दौरान जहां जोखिम और रहस्‍य दोनों की संभावना रहती है, वहीं प्रेममयी माहौल में किया गया सेक्‍स संबंध इन सब से ऊपर होता है। दूसरे शब्‍दों में यह कहा जा सकता है कि मधुर संबंध के बीच बनाया गया यौन संबंध अपेक्षाकृत ज्‍यादा संतोषप्रद होता है। इस तरह के संबंध में न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्‍मक संबल भी प्राप्‍त होता है। दैहिक सुख के अलावा आत्मिक प्रसन्‍नता भी जीवन की गाड़ी को चलाने के लिए आवश्‍यक है। ऐसे माहौल में प्रेम सेक्‍स संबंधों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।


Tuesday, June 22, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-४४

कम्मो- आपके तर्क में दम है मेरी जान , मगर

सवाल यह भी उठता है कि क्‍या यौन शिक्षा से बच्‍चे उन बातों के प्रति जागरूक होंगे या यौन संबंधी मामलों के प्रति और अधिक उन्‍मुख होंगे? यह सवाल अपने आप में काफी गंभीर है तथा कई और सवालों को खुद में समेटे हुए भी है। इसके विपरीत सेक्‍स शिक्षा के तहत इन बातों का भी ध्‍यान रखा जाता है कि समय से पहले शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए जिसका परिणाम अपरिपक्‍व उम्र में मां-बाप बनने के साथ ही अनेक अनपेक्षित परिणाम सामने आते हैं। अगर उनको इन परिस्थितियों में उचित सलाह या सूचना मुहैया नहीं कराई जाएगी तो इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरि के आसार हैं। यह तभी संभव है जब यौन शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया जाए। इससे युवावर्ग सही फैसले करने में खुद को समर्थ पाएंगे।आज हम जिस माहौल में हैं उसमें यौन शिक्षा के बढ़ते हुए महत्‍व से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। यौन शिक्षा से न केवल बच्‍चों का दिमागी विकास होता है वरन उनमें विश्‍वास का संचार भी होता है। आम तौर पर युवावस्‍था की दहलीज पर पहुंचने के बाद उनमें यौन संबंधी अनेक धारणाएं घर कर लेती हैं। यही वह पड़ाव भी होता है जब कई तरह की शा‍रीरिक परिवर्तनें भी दिखने लगती है। इससे बच्‍चों में डर और भ्रम की सी स्थिति पैदा हो जाती है। अत: सही समय पर सही जानकारी मुहैया नहीं कराई जाएगी तो बच्‍चों में द्विविधा की स्थिति बनी रहेगी तथा उनके गलत संगत में पड़ जाने की आशंका भी रहती है। इसलिए यह जरूरी है कि यौन शिक्षा की प्रारंभिक शुरूआत घर में ही की जाए। बच्‍चों को इस संदर्भ में बात करने से हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए की वे क्‍या बात करने जा रहे हैं। एक दोस्‍ताना माहौल में स्‍वस्‍थ यौन शिक्षा आज की जरूरत बन गई है। अगर हमलोग इसको शुरू करने में अभी भी हिचकिचाते हैं तो इसका मतलब है कि हम अनेक रोगों को दावत दे रहे हैं।बाबा रामदेव यौन शिक्षा का खुलकर विरोध कर चुके हैं.उनका कहना है कि स्कूलों में यौन की नहीं, योग की शिक्षा दी जाए। सरकार जिस तरह की शिक्षा देने की बात कर रही है उससे शिक्षा के मंदिर सेक्स के मंदिर बन जाएंगे जो समाज का सबसे बड़ा पतन होगा।इसी तरह शंकराचार्य जी मानते हैं कि कम उम्र में यौन शिक्षा देने की सोच ही मूलत: भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इस उम्र में यौन के बजाय ब्रह्मचर्य के पालन की शिक्षा देना अधिक महत्वपूर्ण है ताकि इस दौरान विधाअध्ययन और कठिन परिश्रम के जरिये उनका स्वस्थ विकास हो और युवावस्था में वे सुखी गृहस्थाश्रम को अपना सकें

शिल्पा- लेकिन ब्रह्मचर्य के बारे में तो विस्तार से बताना ही पडेगा . जब हम बच्चों से कहेंगे कि उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तब वे पूछेंगे नहीं कि यह ब्रह्मचर्य आखिर है क्या बाला ? वे इसके नफ़ा नुक्सान के बारे में सवाल करने से नहीं हिचकिचाएंगे , और उनका जवाब देना हमारी मजबूरी होगी. इस सवाल का विस्तृत और संभलकर जवाब देना ही यौन शिक्षा है. मेरा व्यक्तिगत विचार है कि यौन शिक्षा का प्रारूप ऐसा हो जिससे बच्चे सेक्स की तरफ उन्मुख न होने के बजाय सद्चरित्र की तरफ बढ़ें. तब तो इसका कोई मतलब है. वरना बेकार है.

कम्मो- हाँ, मगर हर चीज के दो पहलू होते हैं.जैसे कि गोला -बारूद और बम भले ही नुकसानदेह हों मगर मानव हित के लिए वो भी जरूरी हैं. कुल मिलाकर मैं भी यहाँ तक पहुँची हूँ कि यौन शिक्षा अगर लागू की जाती है तो इस बात का विशेष ख़याल रखा जाये कि इससे किसी पर नकारात्मक प्रभाव न पड़ने पाए. और हो सके तो आगे चलकर सम्लेंगिक संबंधों के विषय में भी सही जानकारी दी जानी चाहिए .

शिल्पा- मेरे ख़याल से अब हमको सो जाना चाहिए , जो काम सरकार का है, नेताओं का है , उसे उन्हीं पर छोड़ दो .










Monday, June 21, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-४३

कम्मो- तब तो वह झल्ला गया होगा , उसके होश फाख्ता हो गए होंगे . अच्छा , क्या तुम पर शराब का असर नहीं हो रहा था ? क्योंकि भले ही छोटे पैग सही मगर शराब तो तुम भी पी रही थीं. इसलिए नशा तो तुम्हें भी होगा ?
शिल्पा- हुआ था न, नशा क्यों नहीं होगा . मगर मुझे पीने और सहन करने की आदत पड चुकी है. बोस की हालत खस्ता हो चुकी थी, वे समझ गए कि मैं उनके चंगुल में आसानी से आने वाली नहीं हूँ. वे भी एक लड़की पर इतना टाइम वेस्ट् करने वालों में से नहीं हैं. उन्हें पता है कि कितनी ही लड़की उनके एक इशारे पर उनके नीचे बिछने के लिए तैयार रहती हैं, कौन लड़की नहीं चाहती कि उसके बोस के साथ उसके ताल्लुक अच्छे रहें.. कोई एकाध मेरे जैसी होती है जिसका तेवर अलग होता है, मिजाज अलग होता है. दरअसल यहाँ से पहले की स्टोरी तुम्हें सूना ही चुकी हूँ. जब बचपन में मेरे साथ कई दिनों तक गेंगरेप किया गया तो तभी से मेरे मन में मर्दों के लिए नफरत भर गयी है. यह घ्रणा तभी होती है जब सेक्स का माला सामने आता है . वरना साथ में काम करने में कोई बुराई नहीं है. हँसने -बोलने , या दोस्ती करने में कोई हर्ज नहीं है.
कम्मो- हाँ, वो तो है . वैसे हम लड़कियों को ज्यादा तकलीफें तब आती हैं जब हमें अंदरूनी रिश्तों के बारे में जानकारियाँ नहीं दी जातीं. अगर बता दिया जाये तो ज्यादा बेहतर होता है. कई बार स्कूलों में भी सेक्स शिक्षा लागू करने की बात सामने आई है मगर हर बार कोई न कोई रगडा खडा हो जाता है.
शिल्पा - जब कभी यौन शिक्षा की बात होती है तब इसपर अनेकों तरह के सवाल उठाए जाते हैं। हमलोग इस बात को स्‍वीकार करने में खुद को असमर्थ पाते हैं कि आखिर सेक्‍स शिक्षा उम्र के किस पड़ाव पर दिया जाए। दिया जाए या नहीं भी जैसा कि कई संगठनों और लोगों का मानना है। इसके संदर्भ में सबसे बड़ा प्रश्‍न यह उठता है कि अगर यह शिक्षा दी भी जाए तो कब? कहीं ऐसा तो नहीं है कि हम जिस तरह के शिक्षा देने की कोशिश कर रहे हैं उसका उल्‍टा असर होगा? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि यौन शिक्षा बच्‍चे की किस तरह से मदद कर सकता है?आनेवाले कुछ वर्षों में इन सवालों की संख्‍या बढ़ने के आसार हैं। लेकिन इससे यौन शिक्षा को रोक दिया जाएगा ऐसा भी नहीं है। तात्‍पर्य यह कि सेक्‍स शिक्षा की उपयोगिता बनी रहेगी। दूसरी तरफ यह बहस खत्‍म नहीं हो सकता है क्‍योंकि इससे संबंधित कई ऐसी बीमारियां हैं जो अपना पांव पसारते ही जा रही है। वर्तमान विवाद इस मुद्दे पर भी चल रहा है कि बच्‍चों के लिए यौन शिक्षा क्‍यों जरूरी बनता जा रहा है? कई लोगों का यह मानना है कि सेक्‍स एक प्राकृतिक क्रिया है जो उम्र के साथ-साथ व्‍यक्ति खुद ही इसके अभ्‍यस्‍त हो जाते हैं। इसके लिए सेक्‍स शिक्षा आवश्‍यक नहीं है। बहरहाल, यौन शिक्षा का मूल उद्देश्‍य बच्‍चों को उन महत्‍वपुर्ण सूचनाओं से अवगत कराना है जो उनको उम्र के साथ-साथ परेशान करती हैं।
कम्मो- मेरे विचार से सेक्‍स शिक्षा देने का सबसे उपयुक्‍त वक्‍त वह होता है जब बच्‍चे अपने युवावस्‍था की ओर अग्रसर होते हैं। इसका उद्देश्‍य सिर्फ यौवन जीवन ठीक से बिताने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि उन्‍हें आधारभूत मूल्‍यों से भी अवगत कराना चाहिए। क्‍योंकि यह जीवन का वह पड़ाव होता है जब गलत कदम उठाने की आशंका ज्‍यादा होती हैं।

शिल्पा- अनेक पश्चिमी देशों के स्‍कूलों में यौन शिक्षा को पाठ्यक्रम में लागू कर दिया गया है। लेकिन भारत में अभी भी इसपर बहस जारी है। सरकार इसके लिए उत्‍सुक दिखती है। लेकिन जबतक इसपर आम राय नहीं बन जाए इसको नियमित पाठ्यक्रम में लागू करने से हिचकिचा रही है। आम तौर पर हमारे देश में यौन शिक्षा को सीधे-सीधे शारीरिक संबंधों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन यह दृष्टिकोण इस विषय को संकीर्ण रूप में देखना है। जबकि इसका दायरा इससे कहीं बढ़कर है। एक ओर जहां यह उम्र के हरएक पड़ाव को समझने में हमारी मदद करता है वहीं दूसरी ओर भावनाओं, अंगों में परिवर्तन, व्‍यवहार, आपसी संबंधों सहित कई अन्‍य तरह की भ्रांतियों को तोड़ने में भी सहायक सिद्ध होता है। कई सर्वेक्षणों और अध्‍ययनों से भी इस बात की पुष्टि हो चुकि है कि इस उम्र में अनेक तरह की गलत धारणाओं का निर्माण होता है जो शारीरिक और मानसिक तौर पर कई विकृतियों का कारण बनता है। इसके तहत युवाओं को स्‍वस्‍थ और कुशल जीवन जीने की प्रेरणा दी जाती है

Sunday, June 20, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-४२

ऐसा नहीं है कि वह शिल्पा की बात का मर्म नहीं समझा था , वह जान गया था कि शिल्पा उसे बलात्कार की धमकी दे रही है . मगर इसलिए चुप रहा क्योंकि उसे लव गुरु ने डेट पर जाने से पहले समझाया था कि जब भी डेट पर जाओ तो यह ध्यान रखो कि
अच्छी तरह तैयार होकर बाहर जाने से आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। इसलिए डेट पर जाने से पहले ध्यान रखें कि अगर आप पूरे दिन की भागदौड़ से थक गए हैं, तो सिर्फ दस मिनट की एक झपकी मार लें। इससे आप तरोताजा महसूस करेंगे। और अगर आपको भूख लगी है, तो हल्के-फुल्के स्नैक्स जरूर खाकर जाएं। वरना आपका दिमाग डेट की बजाय खाने में ही लगा रहेगा।
वॉर्म अप के लिए थोड़ी-थोड़ी बातें करना अच्छा होता है, लेकिन रूटीन बातचीत को मजेदार बनाने के लिए बीच-बीच में कुछ सवाल-जवाब भी करते रहें। ध्यान रखें कि अपने साथी के सवालों के जवाब 'हां या ना' में न टालकर हाजिर जवाब बनें।
डेटिंग प्लेस का महंगा होना जरूरी नहीं, बल्कि वहां का खाना और आस-पास का माहौल अच्छा होना चाहिए। अगर आपको किसी जगह साथ बैठकर अच्छा लगता है, तो इसका मतलब आपका चुनाव सही है।
आप अपनी गर्लफ्रेंड या वाइफ के साथ कहीं बाहर जा रहे हैं, तो उस जगह के पार्किंग स्पेस और दूसरी काम की चीजों के बारे में पूरी जानकारी रखें। इससे आपको बिना वजह की टेंशन नहीं लेनी पड़ेगी
अगर डेट के दौरान चीजें आपकी उम्मीद के मुताबिक न हों, तो भी उस आउटिंग को जाया न होने दें। कुछ क्रिएटिव डिस्कशन करें और अपना सेंस ऑफ ह्यूमर इस्तेमाल करें। इस तरह आपकी प्रॉब्लम भी दूर हो जाएगी और आपकी डेट पार्टनर को आपके बारे में ज्यादा जानने का मौका भी मिल जाएगा।
एक खूबसूरत मुस्कान आप दोनों के बीच कंफर्ट लेवल बनाने का काम करती है। दरअसल, यह डेट आप दोनों की ही है। ध्यान रहे कि इसे किसी अपने पार्टनर का इम्तिहान मानकर न चलें। इसलिए न तो किसी चीज को लेकर ज्यादा जोश दिखाएं और न ही निराश हों।
जल्दी आना आपकी बेचैनी और देर से आना आपके पार्टनर के गुस्से का सबब बन सकता है। इसलिए आपको तैयार होने, डेटिंग प्लेस पर पहुंचने और पार्किंग में जितना भी समय लगे, उसका पहले ही हिसाब लगा लें। बावजूद इसके अगर आप ट्रैफिक में फंस गए हैं और दस मिनट से ज्यादा लेट हैं, तो डेट पार्टनर को कॉल करके इनफॉर्म जरूर करें।
हर किसी का अपना पास्ट होता है। लेकिन डेट पार्टनर के सामने एक्स बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के बारे में बात करने से उसे लगता है कि आप उसे अहमियत नहीं दे रहे, इसलिए ऐसा करने से बचें। बावजूद इसके अगर आप गलती से कुछ कह देते हैं या फिर कुछ बताना चाहते हैं, तो उसका रेफरेंस जरूर बताएं। जैसे आप दोनों कहां मिले और दोस्ती के दौरान आपने एक-दूसरे से क्या-क्या सीखा।
इसका मतलब यह नहीं कि आप सामने वाले की तारीफों के पुल बांध दें, लेकिन अपनी डेट पार्टनर को यह जरूर बताएं कि वह कितनी खूबसूरत लग रही है। वहीं लड़कियां बॉयफ्रेंड को कॉम्प्लीमेंट देना न भूलें कि उसने अच्छी जगह का चुनाव किया।
अगर आप लंबे समय से रिलेशनशिप में हैं, तो जाहिर है कि आपकी लाइफ काफी रूटीन हो गई होगी। ऐसे में रिश्ते को फ्रेश रखने के लिए अपनी पुरानी यादों को ताजा करें। उन्हें याद दिलाएं कि पहली डेट पर आप उनकी किस बात पर फिदा हुए थे। एक-दूसरे को नई-नई चीजें करने के लिए प्रोत्साहित करें। हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर नाइट आउटिंग करें। मगर सब कुछ बेकार गया. गुरु का ज्ञान भी धारा रह गया. शिल्पा किसी भी तरह उसके चंगुल में फंसने को तैयार ही नहीं थी .








































ऐसा नहीं है कि वह शिल्पा की बात का मर्म नहीं समझा था , वह जान गया था कि शिल्पा उसे बलात्कार की धमकी दे रही है . मगर इसलिए चुप रहा क्योंकि उसे लव गुरु ने डेट पर जाने से पहले समझाया था कि जब भी डेट पर जाओ तो यह ध्यान रखो कि
अच्छी तरह तैयार होकर बाहर जाने से आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। इसलिए डेट पर जाने से पहले ध्यान रखें कि अगर आप पूरे दिन की भागदौड़ से थक गए हैं, तो सिर्फ दस मिनट की एक झपकी मार लें। इससे आप तरोताजा महसूस करेंगे। और अगर आपको भूख लगी है, तो हल्के-फुल्के स्नैक्स जरूर खाकर जाएं। वरना आपका दिमाग डेट की बजाय खाने में ही लगा रहेगा।
वॉर्म अप के लिए थोड़ी-थोड़ी बातें करना अच्छा होता है, लेकिन रूटीन बातचीत को मजेदार बनाने के लिए बीच-बीच में कुछ सवाल-जवाब भी करते रहें। ध्यान रखें कि अपने साथी के सवालों के जवाब 'हां या ना' में न टालकर हाजिर जवाब बनें।
डेटिंग प्लेस का महंगा होना जरूरी नहीं, बल्कि वहां का खाना और आस-पास का माहौल अच्छा होना चाहिए। अगर आपको किसी जगह साथ बैठकर अच्छा लगता है, तो इसका मतलब आपका चुनाव सही है।
आप अपनी गर्लफ्रेंड या वाइफ के साथ कहीं बाहर जा रहे हैं, तो उस जगह के पार्किंग स्पेस और दूसरी काम की चीजों के बारे में पूरी जानकारी रखें। इससे आपको बिना वजह की टेंशन नहीं लेनी पड़ेगी
अगर डेट के दौरान चीजें आपकी उम्मीद के मुताबिक न हों, तो भी उस आउटिंग को जाया न होने दें। कुछ क्रिएटिव डिस्कशन करें और अपना सेंस ऑफ ह्यूमर इस्तेमाल करें। इस तरह आपकी प्रॉब्लम भी दूर हो जाएगी और आपकी डेट पार्टनर को आपके बारे में ज्यादा जानने का मौका भी मिल जाएगा।
एक खूबसूरत मुस्कान आप दोनों के बीच कंफर्ट लेवल बनाने का काम करती है। दरअसल, यह डेट आप दोनों की ही है। ध्यान रहे कि इसे किसी अपने पार्टनर का इम्तिहान मानकर न चलें। इसलिए न तो किसी चीज को लेकर ज्यादा जोश दिखाएं और न ही निराश हों।
जल्दी आना आपकी बेचैनी और देर से आना आपके पार्टनर के गुस्से का सबब बन सकता है। इसलिए आपको तैयार होने, डेटिंग प्लेस पर पहुंचने और पार्किंग में जितना भी समय लगे, उसका पहले ही हिसाब लगा लें। बावजूद इसके अगर आप ट्रैफिक में फंस गए हैं और दस मिनट से ज्यादा लेट हैं, तो डेट पार्टनर को कॉल करके इनफॉर्म जरूर करें।
हर किसी का अपना पास्ट होता है। लेकिन डेट पार्टनर के सामने एक्स बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के बारे में बात करने से उसे लगता है कि आप उसे अहमियत नहीं दे रहे, इसलिए ऐसा करने से बचें। बावजूद इसके अगर आप गलती से कुछ कह देते हैं या फिर कुछ बताना चाहते हैं, तो उसका रेफरेंस जरूर बताएं। जैसे आप दोनों कहां मिले और दोस्ती के दौरान आपने एक-दूसरे से क्या-क्या सीखा।
इसका मतलब यह नहीं कि आप सामने वाले की तारीफों के पुल बांध दें, लेकिन अपनी डेट पार्टनर को यह जरूर बताएं कि वह कितनी खूबसूरत लग रही है। वहीं लड़कियां बॉयफ्रेंड को कॉम्प्लीमेंट देना न भूलें कि उसने अच्छी जगह का चुनाव किया।
अगर आप लंबे समय से रिलेशनशिप में हैं, तो जाहिर है कि आपकी लाइफ काफी रूटीन हो गई होगी। ऐसे में रिश्ते को फ्रेश रखने के लिए अपनी पुरानी यादों को ताजा करें। उन्हें याद दिलाएं कि पहली डेट पर आप उनकी किस बात पर फिदा हुए थे। एक-दूसरे को नई-नई चीजें करने के लिए प्रोत्साहित करें। हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर नाइट आउटिंग करें। इस तरह आप अपनी डेट को मजेदार बना सकते हैं

Saturday, June 19, 2010

११ साल की बेटी से ५ साल तक बलात्कार





















आस्ट्रेलिया में अपनी नाबालिग सौतेली बेटी के रेप के आरोपी एक अरबपति व्यापारी ने जेल से बचने के लिए कोर्ट परिसर में ही चूहे मारने की दवा खा ली।

इस 60 वर्षीय व्यापारी ने अपनी 11 साल की सौतेली बेटी का पांच साल तक रेप किया था। उसने सजा का अंदेशा होने पर अप्रैल में ही जहर खरीद लिया था।

जब उसे कोर्ट में सजा सुनाई गई तो उसने मामले की सुनवाई कर रहे जजों के चले जाने का इंतेजार किया और फिर शोर मचा दिया कि उसने जहर खा लिया है। यह सुनते ही अधिकारियों ने उसे आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया।

हालांकि वो जहर खाने की घटना को जेल से बचने का स्टंट मानने से इंकार करता रहा। उसके वकील ने सिडनी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को बताया कि उसके मुवक्किल का नैतिक पतन हुआ है, वो कामयाबी की ऊंचाई से नीचे गिरा है और काफी हद तक बर्बाद हो चुका है। अब इस व्यापारी को अधिकतम 25 साल तक की सजा हो सकती है।

'द आस्ट्रेलियन' की एक खबर के मुताबिक लड़की ने कोर्ट में दिए अपने लिखित बयान में कहा कि उसके सौतेले पिता ने जब वो 11 साल की थी तबसे रेप करना शुरु किया। वो पांच साल तक चुप रही। वो हर दिन परेशान रहती थी और कई बार इस व्यक्ति को पत्र लिखकर शोषण रोकने की गुहार लगाई लेकिन वो नहीं माना.आखिरकार उस लड़की ने अपने ऊपर हो रहे जुल्मो सितम की शिकायत दर्ज करा दी, जांच -पड़ताल के बाद उस नराधम को गिरफ्तार कर लिया गया. उस पर मुकदमा चला और फैसले की घड़ी में उसने जहर खा लिया.

Friday, June 18, 2010

प्यार से प्यारा, भाग-४०

तुम मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत मोती हो शिल्पा, तुम सम्लेंगिक संबंधों में विश्वाश रखती तो रखती रहो, मुझे कोई ऐतराज नहीं है। मगर इनके बदले आप प्राकृतिक संबंधों को नहीं नकार सकतीं। ये गलत होगा । औरत और पुरुष के सम्बन्ध क्यों क्जरूरी हैं, मैं समझाता हूँ , योग और सेक्स दोनों के ही बारे में

योग सेक्‍स जीवन को समृद्ध बनाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बात पहले ही सिद्ध है कि सुखद जिंदगी के लिए स्‍वस्‍थ सेक्‍स संबंध एक अनिवार्य तत्‍व है। योग भी इस तथ्‍य को स्‍वीकार करता है। योगशास्‍त्र में सफल सेक्‍स जीवन के लिए मध्‍य मार्ग अपनाने का सलाह दिया जाता है। इसके अनुसार काम क्रिया एक प्राकृतिक भावना है। यह जाति, धर्म, संप्रदाय आदि से ऊपर है तथा यह सबमें समान रूप से विद्यमान है। योग के अनुसार संतुलित सेक्‍स लाभकारी है लेकिन इसकी अधिकता से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।


योग के अनुसार सेक्‍स जीवन का एक महत्‍वपूर्ण पहलू है। यह शरीर को न केवल शक्ति प्रदान करता है वरन पोषक तत्‍वों को केंद्रित करने में भी सहायता प्रदान करता है। शारीरिक शक्ति के क्षय होने की स्थिति में रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी जबर्दस्‍त ह्रास होने की संभावना रहती है। इसके अलावा योग नियंत्रित और बेहतर सेक्‍स जीवन में भी कारगर सिद्ध होता है। योग के विभिन्‍न मुद्राओं को अपनाने से काम क्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है। योग शाखा में कुण्‍डलीनि योग काम क्रिया को समर्पित है। यह शाखा काम शक्ति को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है। इस तरह यह कहा जा सकता है कि योग सेक्‍स संबंधों को बनाए रखने में भी सहायता प्रदान करता है।


जब तक मस्तिष्‍क और शरीर सही अवस्‍था में नहीं होगा तबतक सेक्‍स जीवन का पूरा लुत्‍फ नहीं उठाया जा सकता है। शारीरिक संतुलन के लिए विविध आसन और श्‍वसन संबंधी व्‍यायाम काफी कारगर सिद्ध होते हैं। वह व्‍यक्ति जो शारीरिक तौर पर असमर्थ है, योग के माध्‍यम से अपनी खोई हुई शक्ति और क्षमता को प्राप्‍त कर सकता है। अनेक व्‍यक्ति जो नर्वस माइंड के साथ सेक्‍स करते हैं, वे पूर्ण सेक्‍स का आनंद नहीं ले पाते हैं। ऐसे में योगाभ्‍यास (श्‍वांस संबंधी अभ्‍यास) इन परिस्थितियों से उबरने में सहायता प्रदान करता है। जो व्‍यक्ति नियमित रूप से योग का अभ्‍यास करते हैं, ऐसा पाया गया है कि अन्‍य लोगों के अपेक्षाकृत अधिक स्‍वस्‍थ रहते हैं।


योग शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी शांत रखने में सहायक होता है। सुखद सेक्‍स जीवन के लिए आराम की स्थिति में रहना एक आवश्‍यक शर्त है। अन्‍यमनस्‍क लोग कभी भी अपने सेक्‍स जीवन से संतुष्‍ट नहीं हो पाते हैं। यह स्थिति न केवल स्‍वस्‍थ सेक्‍स संबंध के लिए वरन सामान्‍य जीवन के लिए भी हानिकारक होता है। ऐसे में योग न केवल आराम प्रदान करता है बल्कि आम जीवन में शांति का प्रवाह भी करता है। विवाहित महिलाओं पर किए गए एक सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि योग करने से सेक्‍स जीवन सहित आपसी संबंधों में भी जबर्दस्‍त बदलाव आता है।

शिल्पा- अगर मैं ये कहूँ कि मुझे योग और सेक्स के बारे में सब जानकारी है , तब क्या कहेंगे आप ?मेरा पीछा छोड़ देंगे ? असल में मैंने भी ये सब अबतें पढ़ीं हैं। आजकल ये सब बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाता है । मगर इसके बावजूद मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। सचमुच , बिलकुल नहीं है।
- ओह। मैं कैसे समझाऊँ, अच्छा ठीक है। अगर तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारा पीछा कर रहा हूँ, मेरा मतलब कि परेशान कर रहा हूँ तो ठीक है । आज से अलावा मैं कभी आपसे कुछ नहीं कहूँगा मगर ? मगर एक बार फिर से अपने फैसले पर विचार कार्लो , यह मेरी जिंदगी का सवाल है यार।
शिल्पा- ठीक है, चलो हम लोग कुछ देर आराम से बैठकर बातें करते हैं ?
-हाँ-हाँ क्यों नहीं ? हम बैठकर कोफी पी सकते हैं, डिनर साथ ले सकते हैं।
शिल्पा- शराब क्यों नहीं पी सकते ? किसी डिस्को में क्यों नहीं चल सकते ?












Thursday, June 17, 2010

प्यार से प्यारा , भाग-३९

आप जानते ही हैं सर। मुझे जो अच्छा लगता है , मैं वही करती हूँ अगर आपको मेरा इस कंपनी में काम करनापसंद नहीं है , तो मैं इस जॉब को छोड़ने के लिए सोच सकती हूँ। क्या ख़याल है आपका ?
- यह तुम क्या कहती हो शिल्पा। मैं प्यार करने लगा हूँ तुमसे इस कंपनी को अपनी ही समझिए अगर सेक्सनहीं तो आलिंगन ही सही, कम से कम मुझे चुम्बन का तो परमीशन दीजिए ,
आमतौर पर लोगों की मानसिकता होती है कि आलिंगन यानी फोर सेक्‍स से कहीं अधिक आनंददायक संभोग होता है। लेकिन जानती हो , अब यह विचारधारा बदल रही है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक लोग अब संभोग्‍ से ज्‍यादा चुंबन और आलिंगन को महत्‍व देने लगे हैं।
सर्वेक्षण के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा लोगों का मानना है कि वह यौन संबंधों की बजाय वे चुंबन और आलिंगन को तवज्जो देते हैं। यह बात एक सर्वेक्षण में सामने आई है। एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि एक सफल संबंध में प्रतिबद्धता, सहचर्य और हंसी-मजाक के बाद यौन संबंधों की बारी आती है।सर्वेक्षण में यह भी जानने की कोशिश की गई कि पुरुषों व महिलाओं को सेक्‍स किस स्‍थान पर पसंद है। इसमें पाया गया कि पुरुष बेडरूम के बजाय सोफे पर चुंबन व संभोग में खुशी महसूस करते हैं। जबकि महिलाओं को बेडरूम में ज्‍यादा आनंद आता है।
सर्वेक्षण के मुताबिक 60 महिलाओं में पचास प्रतिशत से अधिक का कंडोम के इस्‍तेमाल पर ज्‍यादा अच्‍छा लगता है। महिलाओं का कहना है कि कंडोम के इस्‍तेमाल से यह तनाव नहीं होता, कि कहीं गर्भधारण न हो जाए। लिहाजा पूरा ध्‍यान प्रेम करने में रहता है।इसीलिए कहता हूँ कि इससे न तो तुम्हें नुक्सान होगा और न मुझे ही , मिल जुलकर प्यार कर लेते हैं।
शिल्पा- प्लीज सर, मुझे माफ कीजिये , प्यार- व्यार के चक्कर में मत उल्झाइये , मुझे बहुत डर लगता है।
- देखो ,मैं वासना का पुजारी नहीं , प्रेम का साधक हूँ। तुम आराम से इधर बैठो , मैं समझाता हूँ , ध्यान से सुनो

बदलते जमाने में आपसी संबंध के मायने और उसे जताने के तरीके भी बदलते गए हैं। इससे सेक्‍स संबंध भी अछूता नहीं रहा है। कई लोग ऐसे होते हैं जो सेक्‍स संबंधों को लंबे समय के रूप में देखता है तो कोई क्षणिक दैहिक सुख के रूप में। इस संदर्भ में कई दार्शनिकों ने अलग-अलग मत रखे हैं। किसी के अनुसार काम क्रिया से चरम सुख की प्राप्ति होती है तो कोई इसको नरक का द्वार मानता है। बहरहाल, सेक्‍स संबंध एक शाश्‍वत क्रिया है जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। हां इतना जरूर है कि किसी भी क्रिया की अति हानिकारक होती है। आधुनिक विशेषज्ञों की मानें तो काम क्रिया का मनोवैज्ञानिक तौर पर सकारात्‍मक असर पड़ता है। खासकर यह उस वक्‍त और भी प्रभावी सिद्ध होता है जब खुले दिमाग या बिना किसी अतिरिक्‍त दबाव के किया जाए ।




मनोविज्ञानियों ने काम क्रिया को दो भागों में विभाजित करके देखा है। पहले भाग में ऐसे सेक्‍स संबंध को रखा है जिसमें दैहिक सुख प्रधान है। जबकि दूसरे भाग में कमिटेड सेक्‍स संबंध को रखा गया है, जो न केवल दीर्घकाल के लिए होता है वरन प्रेममयी भी होता है। तो क्‍या यह माना जाए कि प्रेमपुर्ण संबंध सिर्फ दैहिक सुख के लिए बनाए गए संबंध से बेहतर होता है? कई शोधों से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि सौहार्दपूर्ण माहौल में किया गया सेक्‍स स्‍वास्‍थ और सुखमय जीवन के लिए महत्‍वपुर्ण होता है इसलिए तो मैं कहता हूँ । समझने की कोशिश करो , मैं एक ऐसा रिश्ता कायम करना चाहता हूँ जो हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाए।

शिल्पा- लेकिन जिस रिश्ते से मुझे खुशी का अनुभव ही नहीं होता हो, ऐसे रिश्ते का क्या अर्थ है ?

-ओफ्फोह , तुम नहीं समझोगी। मैंने कितने उदाहरण दिए हैं।क्या मैं ये सोच लूं और मान लूं कि मैंने किसी पत्थर दिल से दिल लगाकर बहुत बड़ी भूल कर दी है ? और यह भी कि मैं इस दुनिया का सबसे अभागा हूँ, बड़े-बड़े घर, बड़ी कंपनी, बड़ी -बड़ी गाडियां ,बड़ा बेंक बैलेंस होने के बावजूद मेरे पास कुछ नहीं है । आह ....

शिल्पा- ये क्या कह रहे हैं आप ? मेरी समझ में ये नहीं आता कि आपको मेरे जिस्म में क्या दिखाई देता है ? मैं एक सामान्य , बल्कि सामान्य से भी कम सुन्दर हूँ। मेरे पास आपको देने के लिए है ही क्या ? आप बेवजह दुखी होते हैं ?

-तुम क्या जानो शिल्पा, कि तुम क्या हो । हीरा अपनी परख खुद नहीं कर् ता , जौहरी उसकी कीमत जानता है,
















Wednesday, June 16, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३८

तुम ये न समझना कि मै वासना के वशीभूत होकर तुम्हें प्रपोजल दे रहा हूँ. मेरे दिल की गहराइयों से यह आवाज आ रही है. जबसे तुमने यह ऑफिस ज्वाइन किया है तब से मेरे दिल में कुछ -कुछ होने लगा है. जब तुम स्वीकार कार कर चुकी हो कि सिर्फ महिलाओं के साथ ही सम्बन्ध बनाते हो तो मेरे साथ भी रिश्ता कायम करने में क्या बुराई है ? मैं तो तुम्हें इतनी खुशियाँ दूंगा कि तुम्हारा दामन भी छोटा पड जाएगा.जानती हो , मैं रात-रात भर जागता रहता हूँ. क्यों मालूम है ? सोचता रहता हूँ तुम्हारे बारे में. ना नींद आती है , ना ख़्वाब आते हैं. और जब तुम अगले दिन इन आँखों के सामने आती हो तो तुम्हें बांहों में भरने का जी कर्ता है. तुम्हारे इन रसीले होठों को चूमने का जी करता है . हमेशा -हमेशा के लिए तुम्हारे यौवन के सागर में डूबने का जी चाहता है.
कम्मो- वोव... तुम्हारा बोस इतना रोमांटिक है ? मजा आएगा उससे मुलाक़ात करके , आपने इतना तडपाया है तो मैं भी उसको थोडा बहुत परेशान कर लूंगी . लड़कों को तरसाने में मुझे बहुत सुख मिलेगा.
शिल्पा- बड़ा शातिर है, ज़रा सा मौक़ा मिलते ही फंसा लेगा तुम्हें. तुम समझ भी नहीं पाओगी और वह तुम्हें इश्क के जाल में उलझा डालेगा , और फिर ज़रा सा मौक़ा मिलते ही चौका लगा डालेगा .
कम्मो- मैं इस बात का ख़याल रखूंगी , आगे की बोलो न, फिर तुमने उसे क्या जवाब दिया था.
शिल्पा- मैंने उसको समझाते हुए कहा कि मर्दों के साथ सम्बन्ध बनने में मुझे कोई रूचि नहीं है. अगर जबरदस्ती करके या भावनात्मक ब्लेक करके तुम चाहते हो कि मुझे हासिल कर लोगे तो यह तुम्हारी गलतफहमी है . तुम्हें कुछ हासिल नहीं होगा , क्योंकि यह ऐसा रिश्ता होता है जो दोनों की मर्जी से कायम किया जाए तभी सुख मिलता है वरना दुःख के अलावा कुछ नहीं मिल पाता.ज़रा सोचिये कि किसी लाश के साथ सम्बन्ध बनाने से तुम्हें क्या मिलेगा ? सिर्फ निराशा, उदासी और अनमना मनोरंजन.
कम्मो- गुड ... तब क्या बोला वो ? चारों खाने चित्त गिर गया होगा , बोलती बंद हो गयी होगी उसकी ?
शिल्पा- अरे ऐसा कुछ नहीं हुआ. वह अपनी आँखों में आंसूं भर लाया और बोला-
- मेरे जीवन में तुम पहली लड़की हो जिस पर मेरा मन आया है और जिसे मैंने प्रपोज किया है . अगर तुमने हाँ, नहीं की तो ये आंसू जीवन भर के लिए मेरा मुकद्दर बन जायेंगे . मेरे पास किसी चीज की कोई कमी नहीं है. सिर्फ प्यार की कमी है . मेरी पत्नी को मेरी कोई फ़िक्र नहीं है . वह अपने ही कामों में उलझी रहती है. अपने आप में ही मस्त रहती है. मुझे एक ऐसी हम्दार्द लड़की की तलाश थी जो मेरा ख़याल रख सके, जो मुझे सच्चा प्यार दे सके. जो सुलझे हुए विचारों की हो . ये सभी गुण मुझे तुम्हारे में नजर आते हैं. अगर तुम किसी और से प्यार कर रही होतीं तो बात अलग थी , मगर तुम तो खाली हो . तुम अगर चाहो तो मुझसे दोस्ती कर सकती हो , प्यार कर सकती हो . इससे तुम्हें फायदा ही होगा . मेरी अरबों की दौलत आखिर किस काम आयेगी. इसे छाती पर रखकर तो ले नहीं जाउंगा. यह मुंबई शहर है , यहाँ पर ऐसे अवसर बार-बार नहीं मिलते. उसका कारण ये है कि इस शहर में सबसे सस्ता अगर कुछ है तो वो मोहब्बत ही है. यहाँ कुछ हजार खर्च करके हीरोइन , मोडल , छात्रा , गृहिणी , एयर होस्टेस सब उपलब्ध हो जाती हैं. चाहो तो उनके साथ डांस करो, चाहो तो उन्हें अपने साथ विदेश ले जाओ, देश के किसी भी हिस्से में ले जाओ. वे अच्छी सर्विस देने को तैयार होती हैं. उन्हें मजा भी मिलता है और दौलत भी.
मगर तुम उन सबसे अलग हो . ये सब बताने का मकसद ये है कि मैं तुम्हें यह यकीन दिला सकूं कि सिर्फ वासना की पूर्ती करना ही मेरा उद्देश्य नहीं है . बल्कि मैं तुम्हें अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहता हूँ. तुम्हारे लिए अलग फ्लेट की व्यस्वस्था कर दी जायेगी. तुम्हारी जो तकलीफें हैं, उन सबको मैं दूर करने के लिए तैयार हूँ. बस एक बार हाँ करदो .
शिल्पा- साफ़ क्यों नहीं कहते कि मुझे रखैल बनाना चाहते हो . यह जानते हुए भी कि मैं आजाद पंछी हूँ. किसिस भी पिंजरे में कैद होना मेरा स्वभाव नहीं है. इसी कंपनी में मुझसे ज्यादा सुन्दर और सुलझी हुयी लड़कियां मौजूद है. आप वहाँ तराई क्यों नहीं करते ?

























Tuesday, June 15, 2010

प्यार से प्यारा , भाग-३७

जब ये इश्क का रोग लगता है तो सब इसकी धारा में बहने लगते हैं। पहले मेरी भी ऐसी ही हालत होती थी, बिलकुल तुम्हारी तरह । मैं भी जिस खूबसूरत लड़की को देखती थी उस पर फिसल जाती थी।सोचने लगती थी कि काश / अभी और इसी वक्त मैं उसको अपनी बांहों में भींच लूं और उसके होठों को चूसने लागूं। असल बात ये है कि उस वक्त मैं बेहद सेक्सी थी। मेरे सर्कल में जिततनी भी थीं वे मुझे इसी नाम से जानती थीं। उस वक्त तो मुझे इसके सिवाय और कुछ भाता ही नहीं था। तुम यकीं नहीं मानोगी ऐसा कोई दिन नहीं जाता था जब मैं मजा न लेती हौऊ।
कम्मो- आह। काश / तुम मुझे उस समय मिलीं होतीं, तब मैं भी तुम्हें उतना ही मजा देती।
शिल्पा- तब नहीं तो अब सही, तुम क्यों टेंशन लेती हो ? मैं क्या थक गयी हूँ या बूढ़ी हो गयी हूँ। जब तक बोलोगी तुम्हारा साथ निभाऊंगी , ये न सोचना कि बस हो गया । आज भी सारी-सारी रात जगाने की कुव्वत रखती हूँ।
कम्मो- नहीं । आज के लिए तो बहुत हो गया, अब हमें कल की जोरदार तैयारियां करनी चाहिए
शिल्पा- उसकी तो फ़िक्र ही मत करो, धमाल मचा देंगे हम लोग ।तुम क्या समझती हो,क्या सिर्फ हम लोग ही रहने वाले हैं ? नहीं यार । शुभा होगी और भी कई लड़कियां ऐसी होंगी जो कि इस खेल की माहिर खिलाड़ी हैं। जो सेक्स करना भी जानती हैं और कैसे किया जाए इसकी भी बहुत जानकारी रखती हैं। वे तुम्हें ख़ास गुर सिखाएंगी। मजा आ जाएगा , तुम भी कहोगी कि वाह क्या मस्ती हासिल हूई है।
कम्मो- ठीक है , मगर फिलहाल मैं सोना चाहती हूँ, जिसमें रात मैं ठीक से सो नहीं पाती, उस सुबह मैं बीमार जैसी हो जाती हूँ। अगर कल जमकर मस्ती करनी है तो मुझे आज रात खूब जी भरके सोना होगा।
शिल्पा- कल पहले तुम्हें मेरे साथ ऑफिस चलना है । तुम्हारी नौकरी की बात पक्की होने के बाद हम आगे का प्लान करेंगे , क्योंकि पहले वो जरूरी है । मेरे ख्याल से बोस तुम्हें देखते ही खुश हो जाएगा , मेरे यहाँ वैसे भी कई पद खाली हैं। बाकी जानकारी तुम्हें पहले ही दे चुकी हूँ। फ्लर्ट टायप का व्यक्ति है। सुन्दर लड़की देखते ही लार टपकाने लगता है । उसे हासिल करने की कोशिश करने लगता है ।
कम्मो- वो सब तुम मेरे पे छोड़ दो। ऐसी घुमौंगी कि बच्चू सब भूल जाएगा। एक बार नौकरी तो पक्की हो जाए , फिर मैं भी तुम्हारी तरह उसको साफ़-साफ़ बता दूंगी कि मेरे को लड़कों में नहीं, लड़कियों में दिलचस्पी है।
शिल्पा- इतनी आसानी से मान जाए तो बेहतर है , वरना मेरे मामले में तो उसने बहुत नाटक किया था। रोने -धोने पर उतर आया था। कहता था-
- ऐसा मत कहो प्लीज, मेरा दिल टूट जाएगा । इस नाजुक दिल को तोड़कर तुम्हें क्या मिलेगा । तुम्हें फर्क भी क्या पड़ता है , जैसे लड़कियों के साथ रिश्ता बनाती हो वैसे ही मेरे साथ बनाती हो । ये बस पांच मिनिट की ही तो बात है। ५ मिनिट में मैं तुम्हें इतना सुख दूंगा कि सारी दुनिया भूल जाओगी।

मैं सिर्फ प्यार का भूखा हूँ , अगर तुमने मेरा यह प्रस्ताव ठुकरा दिया .तो याद रखिये कि मैं ज़िंदा नहीं रह पाउँगा , अब इनकार मत करना। अगर मना किया तो बहुत पछताओगी , मेरा दिल आ गया है तुम पर । यह मेरा सच्चा प्यार है।










Monday, June 14, 2010

प्यार से प्यारा , भाग-३६

कम्मो- तब तो खूब आनंद आएगा। क्या विदेश में ऐसा कोई खिलोना मौजूद है जो सेक्स सम्बन्ध जैसा सुख दे सकता है ? में नहीं मानती। मुझे लगता है ये सब किताबी बातें हैं, या फिर ब्लू फिल्म में दिखाई देती होंगी ।
शिल्पा- लेकिन कहीं भी दिखेंगी तो तभी न जब उनका अस्तित्व होगा। फिल्म का मतलब ये है कि अगर कुछ होगा , तभी न दिखाई देगा। बिना हुए कुछ नहीं दिखता ।
कम्मो- लेकिन कोई खिलौना इंसान जैसा सुख कैसे दे सकता है ?
शिल्पा- हाँ, सोच तो मई भी यही रही हूँ, अगर कहो तो उससे कहूँ कि हमारे लिए भी एसी एक मशीन बनादे , जिसकी मदद से हम मनचाहा सेक्स कर सकें। उससे इतना तो फायदा हो ही जाएगा कि जब भी जी चाहेगा तब मजा ले लिया करेंगे , और अगर ऐसा नहीं भी हुआ तो कम से कम एक बार तो पता चल ही जाएगा कि वह होता कैसा है , और उससे थोड़ा बहुत सुख मिलता भी है या नहीं ।
कम्मो- तुम्हारी उत्सुकता में समझ सकती हूँ। देखा जाए तो मुझे भी इसी तरह का एहसास हो रहा है । में भी जल्द
से जल्द उस मशीन से मजा लेने की इच्छुक हूँ। लेकिन यह पता नहीं कि शुभा ने वह मशीन अभी मंगवाई है कि नहीं । अगर तुम चाहो तो कल हम दोनों उनके यहाँ चल सकते हैं। वहां मुलाक़ात भी हो जायेगी और मालूमात भी।
कम्मो - में शुभा के साथ सम्बन्ध बनने के लिए बेताब हो रही हूँ । तुमने उसकी इतनी तारीफ़ की है कि मैंने अपने मन में उसकी एक खास छवि बना ली है। सोच रही हूँ कि अगर वह मिल जाए तो उसे ऐसे प्यार करूंगी , वैसे प्यार करूंगी , तुमने जो ग्रुप सेक्स का जिक्र किया था, उसको भी भोगने का अवसर मिल जाएगा । क्या शुभा इस आनंद से अवगत है ? क्या वह भी तुम्हारे साथ मजा ले चुकी है ?
शिल्पा- ग्रुप सेक्स की बात कर रही हो , समझ गयी । मैंने उसके साथ कई बार आनंद लिया है। असल में देखा जाए तो शुभा ने ही हमें इससे अवगत कराया कि ऐसे भी मजा लिया जा सकता है। हम कई लड़कियां मिलकर इसका सुख भोग सकती हैं। इससे आपस में प्रेम भी बढ़ता है और ज़रा टेस्ट भी चेंज हो जाता है, सबसे असली बात ये है कि इस बहाने हम कई सहेलिया मिल बैठती हैं। अगर किसीको कोई दिक्कत है तो उसका समाधान हो जाता है।
कम्मो- फिलहाल मेरी समस्या का तो समाधान करो मैं ग्रुप सेक्स का आनंद भोगना चाहती हूँ, यह सोचने मात्र से ही मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं। जिस्म में ज्वाला सी दहक रही है। मन में लड्डू फूट रहे हैं। सोचती हूँ कि जम हम कई महिलायें वहाँ इकट्ठी होंगी तो कितना मजा आएगा। आह। अभी से मेरा ये हाल है तो उस वक्त ना जाने क्या होगा ?
शिल्पा- तुम्हारा उतावलापन मैं समझ सकती हूँ। ऐसा ही होता है जब दिल में इश्क की आग दहकने लगती है। मन बावला हो जाता है । आँखों के सामने बस एक ही चीज दिखाई देती है - वो है प्यार , प्यार और प्यार ।
कम्मो- सच ऐसा ही होता है । अब मुझे लड़कों से नफरत और हर लड़की से मोहब्बत होने का एहसास होने लगा है।
शिल्पा- जब तुमने इस तरह के इश्क का मजा चखा होगा तो तुम्हारी भी हालत ऐसी ही रही होगी ?
शिल्पा- मैं दुनिया से अलग थोड़े ही हूँ। सबकी हालत ऐसी ही होती है ।

Sunday, June 13, 2010

प्यार से प्यारा , भाग -३५

शिल्पा-ठीक है यार, कोशिश तो करती ही थी , अब तुमने कहा है तो और ज्यादा कर लूंगी , में जो भी लिखूंगी वह सेक्स और समाज के विषय में ही होगा। मेरी इच्छा है कि लोगों को सिखाया जाये, समझाया जाए, जो भी भ्रांतियां हैं , उनके निदान के लिए कोशिश की जाए।
शुभा - अच्छा विचार है, मुझे कोई ऐतराज नहीं है। जो भी लिखोगी, उसे पब्लिश करने की जिम्मेदारी मेरी है। अगर इसके लिए दो चार केस भी जाते हैं तो गम नहीं ।
शिल्पा- केस ? में समझी नहीं लिखने पर भला केस कैसे हो सकते हैं ? मेरा मतलब है कि में तो समाझ को सुधारने वाली बातें लिखूंगी। इसके लिए तो मुझे पुरस्कार मिलना मिलना चाहिए ।
शुभा - तुम्हारी बात अपनी जगह सही है मगर यहाँ उलटी गंगा बहती है। कुछ ऐसे सनकी लोग हैं जो आश्लीलता का बहाना बनाकर केस कर देते हैं। समाजसेवा शाखा के लोगों को पैसा चाहिए, अखबार वाले दे नहीं सकते इसलिए खीझकर केस कर डालते हैं। इससे होता कुछ नहीं, बस थोड़ा सा समय बर्बाद होता है । हम लोग इसके लिए तैयार रहते हैं। वकीलों की फ़ौज रहती हैअपने साथ। ऐसे मामले कोर्ट में ज़रा भी नहीं ठहरते । कई बार तो आई ओ को कोर्ट की फटकार भी सहनी पडी है, मगर आदत से मजबूर लोग क्या करें । वे अपना काम करते हैं और हम अपने काम में लगे रहते हैं।
कम्मो - तो क्या आपने उनके अखबार में लेख लिखे ?
शिल्पा- हा, शुरुआत में तो मैंने दो -चार लेख लिखे मगर फिर फुर्सत ही नहीं मिली। हांलाकि उनका रिस्पोंस बहुत अच्छा मिला था। हान, शुभा जरूर मिलती रही , सुख लेती-देती रही। अब भी आ जाति है कभी-कभी । अब वह मुझसे भी ज्यादा स्मार्ट हो गयी है और अभी तक उसने शादी भी नहीं की। कहती है कि इस खेल में जो मजा है , वह कहीं नहीं है ।
कम्मो- अच्छा , इतने बड़े घर की लड़की होकर भी शादी नहीं करती। उसके माँ- बाप उस पर दवाब नहीं डालते ?
शिल्पा- नहीं यार , जवान बच्चों पर से माँ- बाप का नियंत्रण हट चुका होता है । वे लोग अपनी इज्जत बचाने के लिए हा -हा करते रहते हैं। उसने अपनी माँ को बता भी दिया है कि पुरुषों से शारीरिक सम्बन्ध बनाने से बहतर वह
किसी लड़की के साथ रिश्ता बनाना पसंद करती है। इसीमे उसे खुशी मिलती हैं। घरवाले सोचते हैं कि जिसमे औलाद की खुशी , उसमे उनकी खुशी । आखिरकार बगावत करने से फायदा भी क्या मिलता है ?
कम्मो- हां -हां , बच्चे भी माँ- बाप की इस कमजोरी का नाजायज फायदा उठाते हैं।
शिल्पा- हां, और यह सबके साथ होता है । जब हम बड़े होते हैं तो हमारे बच्चे भी हमको आँख दिखाने लगते हैं। वे समझते हैं कि उन्हें जीवन का लंबा अनुभव है इसलिए वे ज्यादा जानते हैं आर उनके बच्चे समझते हैं कि यह नया दौर है और इसमें बूढ़े लोगों को तंग नहीं अड़ा नी चाहिए ।
कम्मो- हां, तो ठीक है बुलाओ किसी दिन शुभा को । हम भी एक रात उसके नाम करना चाहेंगे ।
शिल्पा- तुम्हारी जीभ लार डालने लगी है क्या ? वैसे वो चीज भी ऐसी है । जब सम्बन्ध बनाओगी तब जानोगी , उसने तो बाकायदा अपने दिमाग से कई स्टायल भी ईजाद करली हैं। जब वह उनका इस्तेमाल करती है तो बहुत मजा आता है । मुझसे कह रही थी कि बाहर से ऐसा यंत्र बनाने वाली है जिसकी मदद से अकेले भी सुख भोगा जा सकता है। विदेशों में ऐसे खिलौने खूब बिक रहे हैं और लोकप्रिय हो रहे हैं.

Saturday, June 12, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३४

हर समय खुश रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है नकारात्मक सोच को दूर करके सकारात्मक विचारों को अपने पास रखें। सकारात्मक विचारों से हमें एनर्जी मिलती है। इससे हम अपनी समस्याओं से निपट सकते हैं और जब समस्याएं नहीं होंगी तो खुशियां आएंगी।

जीवन इससे बहुत खुशी मिलती है .

शुभा - खुशी से मुझे कुछ ऐसी बातें याद आ रही हैं जो मैंने अलग-अलग जगह से संग्रहित की हैं. इन्हें आजमाकर कोई भी अपनी लाइफ को सुखमय बना सकता है .

शिल्पा- नेकी और पूछ-पूछ . तो बताओ न. देरी किसकी ? क्या हमने मुहूर्त निकलवाना है ?

शुभा - जीवन में खुश रहने के लिए जरूरी है कि हम अपने जीवन से नीरस रंगों को दूर करके उसमें उजले रंग भरें। सुबह जल्दी उठकर सूरज की किरणों का आनंद लेना चाहिए। ताजी हवा के झोकों व सूरज की किरणों से मन की उदासी दूर होती है। सूर्य की किरणें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। सुबह-सुबह ताजी हवा में अपनी अच्छी यादों को दोहराएं। इससे आपके मन में उत्साह और खुशी आएगी। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि उजले रंग हमारे जीवन में खुशियां लाते हैं। इसलिए हमें उजले रंगों का प्रयोग करना चाहिए।

समान विचार वाले लोगों से दोस्ती करने, उनसे वार्तालाप करने से आप काफी अच्छा महसूस करेंगे। इससे आपके मन में नए उत्साह और उमंग का संचार होगा। याद रखें दोस्ती किसी भी उम्र वाले व्यक्ति के साथ की जा सकती है। अधिक उम्र वाले लोगों के पास अनुभव भी अधिक होता है। आपको उनसे बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। अत: सकारात्मक सोच वाले लोगों से दोस्ती करें और मिलनसार बनकर अपने जीवन में खुशियां लाएं।
हम दूसरों से अधिकाधिक अपेक्षाएं रखते हैं और चाहते हैं कि वह हमारी अपेक्षाऔं पर खरा उतरे। आप अपने बच्चों, माता-पिता और पत्नी से भी काफी अपेक्षाएं रखते हैं और पूरी न होने पर दुखी हो जाते हैं। यदि आप दूसरों से अपेक्षा न रखने की आदत को अपनाएंगे तो खुशियां पाएंगे। अपेक्षाएं खुशियों की दुश्मन होती हैं।
आप हर पल में खुशियों को ढूंढने की कोशिश करें और उसको जियो। जिंदगी के हर पल को सेलिब्रेट करें। हम जिंदगी की बडी खुशियों के चक्कर मे छोटी- छोटी खुशियों को खो देते हैं। इन छोटी-छोटी खुशियों में ही जीवन का आनंद छुपा है। खुशियां हमारे अंदर ही होती हैं जरूरत है तो बस उन्हें ढूंढने की।
जब भी आप उदास हों तो थोडी देर शान्त रहकर आंखे बंद करें और अपना मनपसंद संगीत सुने। आपका मन थोडी देर बाद खुशी से भर जाएगा। संगीत हमारे मन को ताजगी से भर देता है। संगीत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाइए। खाली समय में खुद भी गुनगुनाइए और खुशी का आनंद लिजिए।
छोटी-छोटी समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए। खुश व मस्त रहना सीखें। समस्याओं से घबराने की जगह उनका समाधान खोजने का प्रयास करें। खाली समय को व्यर्थ बरबाद न करें । खाली समय में रचनात्मक कार्य करें। अपने जीवन में खुशियों के छोटे-छोटे पल खोजकर उन्हें सहेज के रखें।

शिल्पा- बहुत खूब. में इन सबको ध्यान में रखूंगी , अगर हो सके तो मुझे वो कटिंग्स उपलब्ध कराना , जहां से तुमने इन्हें पढ़ा है . अपने न्यूजपेपर में ऐसी सलाहों को भी स्थान दिया करो .

शुभा- तुम चाहो तो में तुम्हारे लिए भी एक कोलम की शुरुआत कर सकती हूँ. सम्लेंगिक संबंधों के बारे में तुम्हें वैसे भी बहुत कुछ जानकारी है और इस मुद्दे पर लोग चर्चा करने से कतराते हैं . हांलाकि देखा जाए तो ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो ऐसे रिश्तों में विश्वाश करते हैं और ज्यादा से ज्यादा जानकारी पाना चाहते हैं.

शिल्पा- सच कहूँ तो में इस काबिल नहीं हूँ. हान, चाहो तो महीने में एकाध बार लेख वगैरह लिख सकती हूँ, वो भी उलटा सीधा. तुम्हें एडिट करना पड़ेगा .

शुबहा - तुम उसकी फ़िक्र मत करो. लिखना तो शुरू करो, आरम्भ में तकलीफ होती है , बाद में सब ठीक हो जाता है.






Friday, June 11, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३४

- नहीं , नहीं बिलकुल झिझक नहीं. जब तुमने मुझसे अपनी सारी बातें शेयर की हैं तो मै भी बताउंगी तुम्हें . सब कुछ बताउंगी . मैंने किस-किसके साथ और कब-कब सेक्स किया वो सब बताउंगी . पहले सेक्स के बारे में चर्चा करते हैं. मेरा नाम शुभा है . मैंने कही पढ़ा था कि

शरीर के कौन से अंग ऊर्जा के केन्द्र वाले है,इसकी खोज करना आसान है। यदि आप पति हैं तो पत्नी को घ्यान से देखें, जो अंग आंखो को अच्छे लगें और मन को सुकून दें तथा भडकाएं भी, वहां हाथ फेरना शुरू कर दें। इससे आपकी पत्नी कामोत्तेजित हो उठेगी और वह खुद सेक्स के लिए पहल करना भी आरंभ कर देगी। अंगो की पहचान पति-पत्नी दोनों को ही होनी चाहिए।
सेक्स को तरीके से और सलीके से किया जाए तो संतुष्टि मिलती है और प्यार की भूख संतुष्टि मिलने के बाद ही खत्म होती है। सेक्स संबंघ बनाते हुए भी कई दंपत्ति अतृप्त ही होते हैं क्योंकि उन्हे सेक्स को करना नहीं आता है। अघिकतर दंपत्ति तो सेक्स में देर तक न टिके रहने की समस्या से ग्रस्त रहते हैं। जब पति के साथ यह समस्या होती है तो पत्नी को सेक्स में कोई आनंद नहीं मिल पाता है। बार-बार इस क्रिया में भाग लेने के बाद भी वह आनंद से वंचित ही रहती है। सेक्स में पत्नी को भी आनंद जरूर मिलना चाहिए। सेक्स पत्नी के लिए भी होता है। पति को हर हाल में इस हकीकत का ज्ञान होना चाहिए। सेक्स में सर्वाघिक आनंद को महसूस करने की क्षमता कुदरत ने उसे ही दी है। पति को आनंद की अनुभूति तभी हो पाती है जब पत्नी को आनंद मिलता है। अघिकांश पति इस मर्म को नहीं समझते हैं और सेक्स सिर्फ स्वय के आनंद के लिए करते हैं। पति जब खुद के लिए यौन-संबंघ बनाता है या ऎसी मानसिकता रखता है तब सेक्स दुखदायक को जाता है। सेक्स में पत्नी के आनंद का भी मूल्य है,संबंघ बनाते समय बस पति को इतना ही घ्यान रखना है,फिर कोई शक नहीं कि उसे भी आनंद मिलेगा और पत्नी को तो मिलेगा ही।

शिल्पा- वोव . क्या बात है यार ? और क्या नाम है ? बहुत सुन्दर . दिल को भला लगने वाला . बातें भी काम की हैं . इनको हम भी तो इस्तेमाल कर सकते हैं. ये तो ऐसे टिप्स हैं कि पति-पत्नी के अलावा हम दोनों भी अगर इसको फोलो करें तो मजा आ सकता है. सचमुच काम की बातें हैं.

शुभा- तो फिर कल की बात पक्की करते हैं. कल हम यही टिप्स आजमाएंगे .

शिल्पा- अगली मुलाक़ात की फ़िक्र न करो पूरी तैयारी के साथ आयेंगे . मेरे पास सीडी रहेंगी , बस आपके पास कंप्यूटर या फिर टीवी, वीसीडी साईट होना चाहिए . इसके बाद देखो हम दोनों मिलकर क्या धमाल करते हैं. मन के सारे अरमान निकालेंगे , ऐसा धमाल मचायंगे कि आप भी खुश और हम भी खुश . लेकिन कल मिल पाएंगी या नहीं , ये कहना मुश्किल है. फोन पर एक बार बात कर लेंगे .जानती हो यदि सेक्स से पूर्व आप तन और मन दोनो से पूर्णत: समर्पित हैं तो आप को चरमसुख की प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता। एक संतुष्ट सेक्स दोनो पार्टनर के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करता है। एक संतुष्ट सेक्स ताजगी भरा एहसास, आत्मिक संतुष्टि एंव ऊर्जा प्रदान करता है, जो आपके सौंदर्य को कई गुना बढ़ा देता है।

सेक्स से पूर्व फोरप्ले एवं कल्पनाशीलता सेक्स को और भी उत्तेजक बनाता है। सेक्स में स्पर्श तथा नएनए आसन पति-पत्नी में प्यार व निकटता को बढ़ाते हैं। एक संतुष्ट सेक्स संबंधो को मधुर बनाता है और तन एवं मन को खूबसूरत होने का एहसास दिलाता है।
सेक्स को सफल बनाने के लिए संसर्ग के दौरान अपने साथी के मुँह, होंठो गर्दन इत्यादि शारीरिक अंगो की तारीफ करनी चाहिए। और हमारे लिए तो फॉर प्ले और सेक्स एक ही बात है . इसलिए हमको प्राथमिक चीज पर ही ज्यादा जोर देना होगा












Thursday, June 10, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३३

शिल्पा- ओह, दुःख क्यों लग रहा है ? मंजिल पर पहुंचने की स्थिति में तो सुख का बहस होना चाहिए और तुम हो कि दुःख की बात करती हो . ऐसा मै पहली बार सुन रही हूँ,
- मै उस वाले दुःख की बात नहीं करती, इसक दुःख की बात कर रही हूँ, जिस दुःख में भी सुख मिला हुआ है. आनंद ही आनंद है , लेकिन थोड़ा सा दुःख का एहसास तो होना स्वभाविक है. आखिर इतनी देर से और इतनी जोर से तुम इसे रगड जो रही हो.
शिल्पा- अगर ऐसा न करून तो ये जो सी-सी करके सुख ले रही हो यह कहाँ मिलने वाला है. यह सुख कोई पुरुष नहीं दे सकता , मेरा दावा है. यह बिलकुल हकीकत है. मै जो बात कहती हूँ पूरे अनुभव के साथ कहती हूँ.
- क्या उनके साथ भी ऐसा सुख लूट चुकी हो ?
शिल्पा- मैन झूठ नहीं बोलती, मेरी लाइफ दो तरह की नहीं है, कहना कुछ और करना कुछ और नहीं होता, दुसरी बात, मै बनावट में विश्वाश नहीं रखती . मुझे दोहरी जिंदगी जीनी नहीं आती. अगर मै शराब पीते हूँ तो पीती हूँ. सिगरेट पसंद करती हूँ तो करती हूँ, इसे मै छिपाने की कोशिश नहीं करती. आखिर क्यों और किसके लिए ये सबी करना . मै जैसी हूँ बस हूँ, अगर सामने वाले को ये बात अच्छी लगे तो ठीक और अगर बुरी लगे तो उसकी प्रोब्लम . जैसे तुमने पूछा कि पुरुषों के साथ भी सम्बन्ध बना चुकी हो तो मैंने इसका जवाब हान में दिया , क्योंकि मै झूठ नहीं बोल सकती . अगर मै उनके साथ हमबिस्तर नहीं होती तो मुझे पटा कैसे चलता . और मै उनसे नफरत क्यों करती ? सम्बन्ध तो आपने भी बनाए होंगे मगर आप ऊंची हस्ती हैं, इसलिए आप मुझ जैसी साधारण लड़की के साथ अपनी निजी बातें शेयर नहीं कर सकती . यही सच है न
कम्मो-तब तो बोलती बंद हो गयी होगी उसकी ? क्या कहा उसने ?
शिल्पा- नहीं यार , उलटा वो खुश हो गयी , स्वीकारते हुए बोली-
-हान, तुम ठीक कहती हो मैंने पुरुषों के साथ भी स्वाद चखा है मगर वे लोग इतना मजा नहीं दे पाते . ज़रा सी देर में ही फीस हो जाते हैं, कमरा बुक कराओ , रिस्क लों . इसके बाद जब वह बिस्तर पर आता है, तो ज़रा सी देर में ही ढेर होकर आहें खर्राटे भरने लगता है. मुझे ऐसे लोगों से सख्त नफ़रत है जो अपने बेड पार्टनर की भावनाओं को नहीं समझते. और कोई एक हो तो बात अलग है. ज्यादातार लड़के अब ऐसे ही हो गए हैं.
शिल्पा- अच्छा ,इतना बुरा अनुभव रहा तुम्हारा ? इसका इलाज तो था मेरे पास. अगर तुम अपने पार्टनर को आर ई पी एल का विगोरा हाई पावर नामाक दवा पीला देतीं तो चूहे की तरह खर्राटे भरने पार्टनर भी शेर की तरह जोश में रात भर तुम्हारी सेवा करते.
- क्या बात कर रही हो ? ऐसा कैसे हो सकता है ? क्या उस दवा में इतनी शक्ति है ? कुछ साइड इफेक्ट हो गया तो ?
शिल्पा - नहीं यार , यह होम्योपथिक दवा है. नामर्दों के लिए कलियुग का सबसे बड़ा वरदान. हमेशा के लिए समस्या का समाधान हो जाता है.
-आह. जोर से. बहुत मजा आ रहा है . अच्छा , ठीक है. आइन्दा मै विगोरा हाई पावर का ध्यान रखूंगी , तुम तो यार जानकारियों की खान हो . हर विषय की पूरी जानकारी रखती हो. तुम दोस्ती के लायक हो. मै तुमसे हमेशा के लिए जुडना चाहती हूँ. हांलाकि मै ये भी क्लियर करती चलूँ कि मुझे किसी पुरुष से ही शादी करनी है, मगर तब तक मै तुम्हारे साथ कुछ रातें शेयर कर सकती हूँ. ज्यादा से ज्यादा समय बिता सकती हूँ. हर संभव और हर समय तुम्हारी मदद भी करना चाहूंगी . मुझे तुम्हारी सेवायें लेकर खुशी होगी.
शिल्पा- कभी कहती हो धीरे करो, कभी कहती हो जोर -जोर से करो, आखिर इरादा क्या है मेरी जान .
- मजा सा आ गया था यार . हाय. अब जान में जान आयी है बस यार, अब मै मंजिल पर पहुच चुकी हूँ.
शिल्पा- सच , मै भी बस अभी -अभी यहाँ तक पहुची हूँ, इससे ये अर्थ निकलता है कि हम दोनों के विचार भी मिलते हैं और शारीरिक डिमांड भी हम दोनों की एक जैसी ही है.
- तुम बहुत प्यारी हो, तुम्हारी बातें भी प्यारी हैं. अब हमारी अगली मुलाक़ात कब , कैसे और कहाँ होगी ?
शिल्पा- जब चाहोगे मिल ,लेंगे , मै अपना कार्ड दिए देती हूँ. वैसे तुम्हारे क्षेत्र में भी हमारे ग्रुप की कई सदस्य रहती हैं. अगर कभी इच्छा हो तो बोल देना, मै कोई ना कोई उपलब्ध करा दूंगी. इसमें शर्म या झिझक जैसी कोई बात नहीं है.











Wednesday, June 9, 2010

भाग-३२

-तुम्हारी बातों में दम तो है. मुझे कुछ और समझाओ न, मै जानना चाहती हूँ.

शिल्पा- आप अखबार में लिखती हैं, वो भी इतने नामचीन अखबार में, मै क्या बता पाउंगी.

- मै सिर्फ लिखती नहीं हूँ, मालिक भी हूँ उस अखबार की.

शिल्पा - इसके बावजूद भी ?

-हाँ. तब क्या हुआ ? मै कोई भी पेट से सीखकर थोड़े ही आता है, सबको यही इसी तरह से जानना होता है. मै देख रही हूँ कि तुम्हारी जीभ पर साक्षात विद्या का वास है , अनुभाव का पिटारा रखती हो तुम .

शिल्प- मेरे ख़याल से समय सबसे मूल्यवान है। जो समय की कद्र नहीं करता समय उसकी कद्र नहीं करता। अपने सभी कार्यो का एक समय निश्चित करें। हर कार्य निश्चित समय पर करना चाहिए। समय पर सोना और उठना चाहिए। ऎसा करने से आपकी जीवनशैली स्वस्थ रहेगी और आपके पास समय भी बचेगा जिसे आप अपनी इच्छानुसार व्यतीत कर सकेंगे। बचे हुए समय में अपनी पसंद के कार्य करने से आपको खुशी मिलेगी।

वैसे यह छोटा मुंह बड़ी बात होगी मगर हर समय खुश रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है नकारात्मक सोच को दूर करके सकारात्मक विचारों को अपने पास रखें। सकारात्मक विचारों से हमें एनर्जी मिलती है। इससे हम अपनी समस्याओं से निपट सकते हैं और जब समस्याएं नहीं होंगी तो खुशियां आएंगी।

- आह , मजा आ रहा है , ऐसे क्यों कहती हो शिल्पा. अपनी बात जारी रखो प्लीज .

शिल्पा- जीवन में खुश रहने के लिए जरूरी है कि हम अपने जीवन से नीरस रंगों को दूर करके उसमें उजले रंग भरें। सुबह जल्दी उठकर सूरज की किरणों का आनंद लेना चाहिए। ताजी हवा के झोकों व सूरज की किरणों से मन की उदासी दूर होती है। सूर्य की किरणें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। सुबह-सुबह ताजी हवा में अपनी अच्छी यादों को दोहराएं। इससे आपके मन में उत्साह और खुशी आएगी। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि उजले रंग हमारे जीवन में खुशियां लाते हैं। इसलिए हमें उजले रंगों का प्रयोग करना चाहिए।
समान विचार वाले लोगों से दोस्ती करने, उनसे वार्तालाप करने से आप काफी अच्छा महसूस करेंगे। इससे आपके मन में नए उत्साह और उमंग का संचार होगा। याद रखें दोस्ती किसी भी उम्र वाले व्यक्ति के साथ की जा सकती है। अधिक उम्र वाले लोगों के पास अनुभव भी अधिक होता है। आपको उनसे बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। अत: सकारात्मक सोच वाले लोगों से दोस्ती करें और मिलनसार बनकर अपने जीवन में खुशियां लाएं।
हम दूसरों से अधिकाधिक अपेक्षाएं रखते हैं और चाहते हैं कि वह हमारी अपेक्षाऔं पर खरा उतरे। आप अपने बच्चों, माता-पिता और पत्नी से भी काफी अपेक्षाएं रखते हैं और पूरी न होने पर दुखी हो जाते हैं। यदि आप दूसरों से अपेक्षा न रखने की आदत को अपनाएंगे तो खुशियां पाएंगे। अपेक्षाएं खुशियों की दुश्मन होती हैं।
आप हर पल में खुशियों को ढूंढने की कोशिश करें और उसको जियो। जिंदगी के हर पल को सेलिब्रेट करें। हम जिंदगी की बडी खुशियों के चक्कर मे छोटी- छोटी खुशियों को खो देते हैं। इन छोटी-छोटी खुशियों में ही जीवन का आनंद छुपा है। खुशियां हमारे अंदर ही होती हैं जरूरत है तो बस उन्हें ढूंढने की।
जब भी आप उदास हों तो थोडी देर शान्त रहकर आंखे बंद करें और अपना मनपसंद संगीत सुने। आपका मन थोडी देर बाद खुशी से भर जाएगा। संगीत हमारे मन को ताजगी से भर देता है। संगीत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाइए। खाली समय में खुद भी गुनगुनाइए और खुशी का आनंद लिजिए। छोटी-छोटी समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए। खुश व मस्त रहना सीखें। समस्याओं से घबराने की जगह उनका समाधान खोजने का प्रयास करें। खाली समय को व्यर्थ बरबाद न करें । खाली समय में रचनात्मक कार्य करें। अपने जीवन में खुशियों के छोटे-छोटे पल खोजकर उन्हें सहेज कर रखें ।

-ओके , तुम्हारे दिमाग से सबसे बड़ा रचनात्मक कार्य क्या होता है ?

शिल्पा- सच कहूँ, सच ही कहूँगी . मुझे तो सेक्स सबसे बढ़िया और रचनात्मक कार्य लगता है, तुम्हारा क्या ख्याल है ? शर्त ये है कि साथी अगर दिलदार और प्यार करने वाला मिल जाए.

-मतलब , तुम्हारे जैसा, मै भी इस सच को तुम्हारे सामने स्वीकार करती हूँ कि मुझे तुम्हारे जैसा बेड पार्टनर आज तक नहीं मिल पाया , यही कारण है कि मै इस खेल में पीछे रही , अब तुम मिल ही गयी तो आसानी से छोड़ने वाली नहीं हूँ. अब तो मै इस उख को बार -बार भोगना चाहूंगी.

शिल्पा- मै इस नेक और पुन्य काम में मदद करूंगी तुम्हारी , लेकिन अब इसके खिलाफ मत लिखना .

-नहीं यार , अब खिलाफ नहीं लिखूंगी , हां, अगर तुमने मुझे मजा देने से कभी इनकार किया तो नहीं छोडूंगी , तब जरूर खिलाफ लिखना पडेगा , समझी ?

शिल्पा- समझ गयी , अब क्या चाहिए , तुम शायद संतुष्ट होने के कगार पर हो .

- ठान, मगर अब आहिस्ता-आहिस्ता करो, दुःख सा लग रहा है. मै बस मंजिल पर पहुँचने ही वाली हूँ.