कुंवारी सुहागिन , भाग--11
पूजन- आत्म हिंसा करने से बच जाउंगा. मैंने सूना है की जों भी मन में आये वैसा कर लेना चाहिए वरना जिंदगी निरर्थक हो जाती है.
अमृता- आप बड़े वो हैं, किसी न किसी तरह से मुझे पटाने में लगे हैं.
पूजन- अगर बातें खत्म हुई हों तो अब आकर बैड पर आराम से लेट जाइए , मैं मालिश करने का हुनर भी रखता हूँ, पहले तुम्हें रिलेक्स दिलाऊंगा, अच्छी तारह से मालिश करूँगा . उसके बाद बातें करेंगे.
, मेरे ऊपर वाली मंजिल पर कोई नहीं आता. वहां पर आराम से बातें करते हैं.
अमृता- मुझे अपनी बातों के जाल में उलझाना चाहते हैं. अगर वहां लेजाकर मेरी मालिश करोगे तो क्या मुझे छोड़ दोगे ?जों तुम्हारा हथियार बार -बार ऊपर की तरफ उठ रहा है, इससे मेरी हालत खराब कर डालोगे ,
मैं कहीं की नहीं रहूंगी. तुम मर्द लोगों को अब मैं भी जान गयी हूँ, भाभी के आशिक को अपनी आँखों से देखा है. तुम लोग पहले तो हमारी खुशामद करते हो और बाद में अपनी शर्तों पर नचवाते हो .
पूजन- इसको पूरा थोड़े ही डालूँगा, मैं पागल हूँ क्या ? इसे तो आहिस्ता-आहिस्ता करना पड़ता है.
अमृता- मगर भाभी के आशिक ने तो उन्हें बहुत परेशां किया हुआ था , तुम कैसे मान जाओगे ?मौक़ा मिलते ही चोका लगाओगे .
पूजन- नहीं यार, मुझे क्या दरिंदा समझा है. मैं बड़े कोमल मन का हूँ, किसी का दर्द मुझे बर्दाश्त नहीं होता. अगर कभी भूल से भी कोई चींटी मेरे क़दमों तले आ गयी तो मैं दिन भर अफ़सोस करता रहता हूँ.
मेरा भरोसा करो, मैं जरा भी तकलीफ नहीं दूंगा, जितना तुम चाहो उतना ही लेना. मुझे अपनी फ़िक्र कम है , तुम्हारी ज्यादा है. मुझे तो प्रसाद मिलता ही रहता है. जब हम दूसरे शहर में काव्य पाठ करने जाते हैं
तो अपने साथ किसी न किसी महिला को ले ही जाते हैं, हमारे पास कितनी ही ऐसी महिलायें आती हैं जों हमारे साथ सोने के लिए तैयार होती हैं बशर्ते की उन्हें मौक़ा मिल जाए . और मौक़ा हमारी मुट्ठी में होता है .
इसलिए मैं तो सुरक्षापूर्वक मौज मस्ती करता रहता हूँ.मुझे चिंता तुम्हारी हो रही है. तुम अपनी आँखों से अपनी भाभी को सेक्स करते हुए देख चुकी हो. इसलिए तुम्हारे तन -मन में भी सेक्स की आग लग चुकी हो .
भले ही तुम इनकार करती रहो लेकिन सच तो यही है की तुम भी इस आनंद को भोगना चाहती हो. तुम्हारी जवानी का रस पीना चाहती हो. तुम्हें भी यही खेल खेलने की इच्छा है. बस थोड़ी सी झिझक हो रही है .
मैं इस झिजहक को बहुत बेहतरीन तरीके से निकाल सकता हूँ.
अमृता- तुम मेरी कामेच्छाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हो .
पूजन- बिलकुल नहीं, ऐसा कतई नहीं है. मैं तुम्हारे पास एक अच्छे विकल्प के रूप में हूँ. पहली बात तो ये की मैं इस काम में निपुण हूँ. अच्छे -बुरे का अच्छी तरह से ज्ञान है. मैं जानता हूँ की कौन सा उपाय करेंगे
तो बाद में कोई तकलीफ नहीं होगी, मैं जान ता हूँ की किस तरह से शोट मारूंगा तो तुम उसे इंजॉय करोगी . किस तरह से तुम्हारे होठों को चूमुंगी तो तुम्हें अथाह सुख की प्राप्ति होगी ? इस तरह देखा जाए तो
मैं तुम्हें सम्पूर्ण सुख दे सकता हूँ. जबकि दूसरे लोग तुम्हारे जिस्म के साथ-साथ तुम्हारे जज्बातों से भी खेलेंगे . मैं तुम्हें यह भी नहीं कहूँगा की अगली बार भी मेरे साथ मौज मस्ती करना . अगर तुम्हारी
खुद की इच्छा हो तो करो वरना कोई बात नहीं है.
अमृता- मैं तुम पर कैसे भरोसा कैसे करूं ?
पूजन- जैसे भी करना चाहो, मेरी आँखों में डूबकर देख सकती हो. यहाँ पर तुम्हें प्यार ही प्यार दिखाई देगा .
अमृता- सुना है शातिर लोग अपने आपको ऐसे सांचे में ढाल लेते हैं जहाँ असली-नकली का आसानी से पता नहीं चल पाता.
पूजन- मेरे करीब आओ. मेरी धडकनों से अपनी साँसों को मिलने दो, फिर महसूस करो .
अमृता- तुम कवी हो, शब्दों का जाल बुनना जानते हो.
पूजन- और तुम जादूगरनी हो, मर्दों को अपने वश में करने का मन्त्र जानती हो.
अमृता- मैं अब जाना चाहती हूँ, प्लीज मुझे जाने दीजिए.
पूजन- इनकार किसने किया है , बुलावा भी किसने दिया था ?
अमृता- मैं सचमुच चली जाउंगी, फिर अकेले में बैठकर इसे मसलते रहना.
पूजन- यह तो अब सही जगह पर जाकर ही दम लेगा. मुझसे ज्यादा इसकी जरूरत आपको ही है.
Saturday, March 12, 2011
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