उधर मुंबई में चन्दा जीवन से जद्दोजहद कर रही थी, उसके पास ज्यादा रुपये तो थे नहीं, जो थोड़े बहुत बचे थे वे सब खर्च हो गए, चन्दा स्वाभिमानी थी, जब उसे लगा कि अब बैठकर नहीं खाया जा सकता तो उसने काम करने की ठानी , इस उम्र में उसे कौन काम देता ? किसी ने उसे बतया कि मुंबई के बार में लड़कियां डांस करती हैं तो उसने भी एक लेडीज बार में नृत्य करना शुरू कर दिया. कठिन परिश्रम करके वह जीवन यापन करने लगी. अजय का चेहरा उसके दिलो दिमाग से उतरने का नाम ही नहीं ले रहा था. अजय की माँ की बातें , अजय का भोलापन , सब उसे याद आने लगे, उसे अजय का प्रेम प्रस्ताव याद आ रहा था . उसकी बातों में वजन था. भले ही उसकी उम्र छोटी थी लेकिन उसका वजूद भारी था. वह परिपक्व नजर आ रहा था. उसे हंसी आने लगी. उम्र के किस मोड परआकर अजय ने उसे प्रेम का प्रस्ताव रखा . काश कुछ साल पहले आता, उसके सामने प्रेम का प्रस्ताव रखता तो शायद उस वक्त वह हाँ भी कर देती. अब क्या कहे वो ? पहले तो वह माँ की सेवा करने की खातिर शादी नहीं कर पाई, और जब माँ भी दुनिया से चल बसी तो किसी ने, किसी ने भी उसे प्रपोज नहीं किया, क्यों ? क्यों वह अब तक कुंवारी रही ? उसने क्यों नहीं खुद किसी से बात नहीं चलाई . उसकी किशोरावस्था में भी तो एक लड़के ने उस
से प्यार करने का एलान किया था, मगर ठुकरा दिया था उसने . उसको भी फिर से ट्राई किया जा सकता था.
लेकिन अब क्या किया जा सकता है ? जो गुजर गया सो गया , वक्त किसीका इन्तजार नहीं करता . एक बार हाथ से निकला तो निकल गया. चन्दा को वे क्षण भी अच्छी तरह याद थे जब अजय ने उसके गालों को छुआ था, उसके होठों को स्पर्श किया था और फिर वो पल भी आया जब उसने अपने तपते हुए होठ उसके अधरों से सटा दिए थे. ऐसा लगता है जैसे वह जन्मों -जन्मों का प्यासा था, और खुद वह भी तो ऐसी ही प्यास महसूस कर रही थी. उसे कितना आनंद आया था उस वक्त. जीवन की भागदौड में वह असली सुख ही भूल गयी थी , सारा जीवन उसने किसी न किसी के लिए त्याग करके ही गुजार दिया. मगर कभी भी अपनी जिंदगी अपने तरीके से नहीं जी. उसने कितना स्वर्णिम मौक़ा गँवा दिया था. आखिर उसने अजय को इस बार इनकार क्यों कर दिया ? अजय उसे दिलो जान से चाहता था . फिर उसने क्यों ऐसा किया कि बेवजह अजय को ठुकरा दिया , इतना ही नहीं खुद उसने जुबान पर तआला भी लगा दिया, उससे घर , गाँव छोड़ने को कहा तो उसके लिए भी राजी हो गयी, इतना बड़ा जुल्म उसने सहन कैसे कर लिया .
उसे अजय जैसे प्यार करने वाले को इस तरह ठुकराना नहीं चाहिए थे. भले ही ठुकराया नहीं मगर उसने हाँ भी तो नहीं किया . उसने अजय जैसे खूबसूरत, टूट-टूटकर चाहने वाले अजय को इस तरह निराश नहीं करना चाहिए था , आखिर वह किस्से घबरा गयी ? जब अजय ही किसीसे नहीं डरता तो वह क्यों डर गयी ? उसे भी अजय का साथ देना चाहिए था . लेकिन अब क्या हो सकता है ? पछताए क्या हॉट है , जब चिड़िया चुग गयी खेत ?आह.... वह एक लंबी आह भरके रह गयी . अब न जाने अजय कहाँ होगा ? उसका क्या हाल होगा ? उसे एक बात पर क्जरूर संतोष था कि जब अजय उससे प्यार कर रहा था तो उसने उसे रोका नहीं , टोका नहीं. अगर रोक-टोक करती तो अब बहुत पछताना पड़ता.