Tuesday, March 22, 2011


जालंधर। केएमवी की प्रिंसिपल ऋता बावा समेत चार लोगों की हत्या में दोषी ठहराए गए मो. कद्दूस, मो.रहमान और रमनदीप को हर हत्या के लिए अलग-अलग 4 बार उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। तीनों को आईपीसी की धारा 412 (माल की बरामदगी) के मामले में भी छह साल कैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही पांच हजार रुपये जुर्माना किया है। तीनों अभियुक्तों को सुनाई गई उम्रकैद (20 साल) की सजा एक के बाद एक चलेगी। एक अन्य दोषी भुट्टो यादव को आईपीसी की धारा 412 में छह साल की कैद सुनाई। उस पर हत्या के आरोप साबित नहीं हुए। जुर्माना न देने पर एक-एक साल की अतिरिक्त कैद होगी।जालंधर के सनसनीखेज केएमवी चौहरे हत्याकांड के आरोपियों को सजा होने से जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अफसर खुश हैं। इस बहुचर्चित हत्याकांड का खुलासा लुधियाना पुलिस ने किया था। हत्याकांड का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। पुलिस ने पूरे साइंटिफिक तरीके से इस केस की जांच की और हत्यारों की हर हरकत के तथ्य जुटाए।

लुधियाना सीआईए स्टाफ के पूर्व इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरबंस सिंह व उनकी टीम ने सुलझाया था। गुरबंस सिंह इन दिनों खन्ना के थाना सदर में बतौर एसएचओ तैनात हैं। गुरबंस सिंह के अनुसार हैबोवाल में हुई डकैती के मामले की छानबीन के लिए वह जुलाई 2008 में बिहार के मुरली गंज क्षेत्र में गए हुए थे।

यहां स्थित नीलकमल एंटरप्राइजेज के संचालक ने उन्हें बताया कि उससे सिम लेने वाले कुछ लोग जालंधर में किसी कालेज की प्रिंसिपल की हत्या को अंजाम देकर भी न पकड़े जाने की बात कर रहे थे। अब वह लोग नई वारदात को अंजाम देने के लिए पंजाब जाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने उक्त लोगों के मोबाइल फोन नंबर पता किए। कुछ और तथ्य जुटाने के बाद उन्होंने लुधियाना के एसएसपी से बातचीत की। एसएसपी ने डीजीपी से बात की। डीजीपी ने इस मामले की छानबीन लुधियाना पुलिस को सौंप दी। इससे पहले जालंधर पुलिस सात महीने से केस की छानबीन कर रही थी, लेकिन उसे कोई सुराग हासिल नहीं हुआ था।

चुनौती की तरह लिया केस
इंस्पेक्टर गुरबंस सिंह बैंस के अनुसार चूंकि यह केस डीजीपी ने सीधा लुधियाना पुलिस को सौंपा था लिहाजा वह इसे चुनौती की तरह ले रहे थे। समस्या यह थी कि इस केस में कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। पुलिस को साइंटिफिक ढंग से केस की छानबीन करके तथ्य जुटाने थे। छानबीन में आरोपियों के पास से प्रिंसिपल ऋता बावा का मोबाइल फोन, कुछ गहने व उसके हाथ से लिखे कागजात भी मिल गए थे। हत्यारों ने कुछ दिन ऋतु बावा का मोबाइल फोन इस्तेमाल किया और फिर इस मोबाइल में नया सिम भी डाल कर बरता। पुलिस ने जांच में हत्यारों के जालंधर पहुंचने, वहां के प्रिंस होटल में ठहरने, कालेज परिसर में घुसने और हथियार छिपाने तक के सारे सबूत जुटा लिए। इस केस में करीब 43 गवाह शामिल किए। इनमें बिहार का मोबाइल कारोबारी भी गवाह था। होटल स्टाफ ने भी हत्यारों को पहचान लिया था।

हवाई मार्ग से बिहार पहुंची थी फाइल
केस में लीड मिलने पर जालंधर पुलिस से केस की पूरी फाइल लेकर तुरंत डीएसपी साहनेवाल बलराज गिल को हवाई मार्ग से बिहार भेजा गया। फाइल मिलते ही लुधियाना पुलिस टीम ने बिहार पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। छानबीन में आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्हें लुधियाना लाया गया।



एडिशनल सेशन जज बीएस संधू की अदालत में क्वांटम ऑफ सेंटेंस पर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच बहस शुरू हुई। प्रॉसीक्यूशन की तरफ से डिप्टी डीए सुखदेव सिंह ने इस हत्याकांड को घृणित बताया। जवाब में बचाव पक्ष ने दलीलें दीं कि यह अपराध घृणित नहीं है, क्योंकि अभियुक्त पेशेवर कातिल नहीं हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यह अपराध रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस में नहीं आता। इसलिए आरोपियों को सजा-ए-मौत नहीं दी जा सकती। फिर आरोपियों को अदालत के अंदर बुलाया गया।


अदालत ने मोहम्मद कद्दूस, मोहम्मद रहमान और रमनदीप को हत्या में चार उम्रकैद, पांच-पांच हजार रुपए जुर्माना और आईपीसी की धारा 412 में छह साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना किया। इस केस में नामजद सचिन यादव, रामकुमार, मनोज कुमार और गणोश को अदालत ने पहले ही भगोड़ा करार दे दिया है। इनमें से सचिन यादव को हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया गया है

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