बेवफा खंडहर वाली , भाग-8
अभिप्रिय - जी नहीं, आपको देखने का शौक है. मैं तुम्हें देखने के लियी ही बार-बार ट्रेवल कर रहा हूँ. आपसे वहाँ तो मन की बात कह नहीं पाया. सोचा यहाँ तो मिलोगी . इसलिए पीछा करता -करता यहाँ चला आया .
क्या मेरे साथ खाना खाना चाहोगी ? मेरी लाइफ ही चेंज हो जायेगी .
किरण- ठीक है. यह मेरा भी सौभाग्य है. मगर आज यह संभव नहीं हो पायेगा . डिनर कर चुकी हूँ.
अभिप्रिय- कोई बात नहीं. एक मग कोफी तो पी सकती हैं न , मेरा भी कहने का आज मूड नहीं है. डिनर फिर किसी दिन , आज सिर्फ कोफी से काम चला लेंगे .
किरण- अभी मेरी गाड़ी आने वाली होगी, मेरा शिड्यूल गडबड हुआ तो तकलीफ हो जायेगी , मैं गुडगाँव रहती हूँ.
अभिप्रिय - कोई दिक्कत नहीं, मैं आपको इज्जत से घर तक छोडूंगा, यह प्रेशर नहीं प्रार्थना है. आगे आपकी इच्छा . फिर कोई दिन भी मिलना चाहती हैं तो वैसा भी कर सकते हैं. बस ये है कि बड़ी तकलीफ हो जायेगी ,
जब तक मिल नहीं लूंगा तब तक चैन नहीं आएगा , नींद नहीं आयेगी . मैं तब तक खा नहीं पाउँगा , कुछ पी नहीं पाउँगा .
किरण- तुमने जब इतनी मासूमियत से प्रार्थना कर ही दी है तो ऐसा करते हैं कि चलो मुलाक़ात कर ही लेते हैं. आप खाना खा लेना और मैं कुछ सलाद वगैरह ले लूंगी .
सूरज- बन्दा खुश हो गया होगा, उसकी खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा होगा ? आखिर उसे मुंह मांगी मुराद जों मिल गयी .
किरण- हाँ, अरे खुश की बात कहते हो, पट्ठा की बांछें खिल गयी, बीच रोड पर नाचने लगा था. मैं उसके भोलेपन पर फ़िदा हो गयी. यह पहली बार था जब मेरा सीना गर्व से फूल उठा. मै जानती थी कि सुन्दर हूँ, बहुत सारे
साथी भी अक्सर मेरे हुस्न की तारीफ़ करते रहते थे लेकिन यह पहली बार हुआ जब कोई लड़का मेरी सुंदरता के सामने नतमस्तक हो रहा है. [प्राकृतिक तौर पर हम महिलाओं का स्वभाव कुछ घमंडी जैसा होता है. और इस पर
हमारे पास अगर कोई विशेष योग्यता हो तो यह और भी बढ़ जाता है. मेरा हाल भी कुछ ऐसा ही हुआ. मैं अपने सामने सबको बौना समझने लगी. लगा जैसे कि दुनिया में सब मेरे पीछे हैं और मैं सबसे आगे हूँ. लगा जैसे
शान से खड़े हुए पद अचानक दौड़ने लगे हैं. खेतों में चार रही मूक भेड बकरियां सहसा बात करने लगी हैं. वे इंसानों की जुबान बोल रही हैं. मन में तरह -तरह के विचार आने लगे. मैं चुम्बक की तरह उसकी तरफ खिचती
चली गयी. उसकी गाड़ी पार्किंग में खड़ी थी मगर मैं वहीं पर खड़ी रही,गाड़ी ड्राइव करते हुए वह खुद आया . बहुत मंहगी गाड़ी थी. वह देश के चुनिदा लोगों के ही पास थी, उसके बारे में मैंने एक अखबार में पढ़ रखा था.
उस लड़के के साथ मैंने पहली बार सहवास किया. और बहुत मजा भी आया .
सूरज- क्या कहती हो ? उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध ? खैर, कैसे हुआ यह सब ?
उसने गाड़ी एक फैव स्टार होटल में ली. हमने वहाँ पर एक -एक कोफी पी. मगर मैंने महसूस किया कि मेरा सिर भारी होने लगा था. मेरा बदन अकड रहा था. कुछ ही देर में मैं उत्तेजक होने लगी. मतलब कि कोफी में कुछ मिलाया
गया था. यह सब मादक पदार्थ मिलाए जाने के कारण हो रहा था. मेरी सीना धड़कने लगा . ममें अंगड़ाई लेने लगी. उसने मेरे अंगों की तारीफ करनी शुरू की -
- तुम्हारी ये गोलाइयां बड़ी कातिल हैं, इन्हें स्पर्श करने को जी चाहता है.
किरण- तुम्हें शर्म नहीं आती ? कैसी गंदी बातें करते हो ? क्या मुझे यहाँ पर इसीलिए बुलाया था ?
अभिप्रिय-इसमें झिझक या शर्मो हया जैसी कोई बात ही नहीं है. बल्कि यह तो प्यार वाली बात है. मैं तुमसे प्यार करता हूँ , तभी तो तुम्हरा प्रत्येक अंग मुझे अपनी तरफ खींचता है. ये गुलाबी होठ, ये नशीली आँखें , ये घटाओं जैसे बाल
ये सबके सब मेरा मन मोहते हैं. जब तुम हँसने के लिए अपना मुंह खोलती हो तो सुन्दर दांत दिखाई देते हैं. ये मनमोहक दांत मन की गहराइयों को सुहाते हैं.
किरण- तुम मुझे शर्मिन्दा कर रहे हो ? मैं अकेली नहीं हूँ दुनिया में ऐसी लाखों -करोड़ों हैं.
अभिप्रिय- होंगी , मगर मेरी पहुँच से बाहर हैं. मैंने तो आज तक तुम जैसी खूबसूरत हसीना को नहीं देखा.
किरण- अब मैं चलना चाहूंगी , मुझे गुडगाँव छोड़ दीजिए.
अभिप्रिय- क्या सचमुच जाना चाहोगी ? या उससे पहले मेरे साथ डांस करना पसंद करोगी ? सब लोग डिस्को में थिरक रहे हैं. थोड़ी देर हम भी इंजॉय करलें तो भूख भी लगने लगेगी, नाचना तो सेहत के लिए लाभदायक रहता है .
किरण- मुझे कुछ होगा तो नहीं न ?
अभिप्रिय- कुछ क्या होगा ? हुआ तो लड़का ही होगा या फिर लड़की . इन दोनों के अलावा और कुछ नहीं.
किरण- तुम बहुत वो हो . शरारती कहींके... हटिये , मैं चली.
अभिप्रिय- ऐसे कैसे जाओगी मेरी जान. तुम खुद भी मेरे साथ मौज मस्ती करने का मन जों बना चुकी हो. ऐसे में जा नहीं पाओगी .
Friday, December 31, 2010
Story Update : Friday, December 31, 2010 2:20 PM
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भारी हिमपात के कारण सड़क मार्ग बंद होने से वहां 100 से ज्यादा पर्यटक फंसे हुए हैं। ज्यादातर पर्यटक पश्चिम बंगाल के हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सभी पर्यटक बेहतर स्थिति में हैं लेकिन वहां भोजन व जरूरत के अन्य सामान की कमी हो गई है। जिला मुख्यालय रीकोंग पियो में कार्यरत एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारी हिमपात के कारण ज्यादातर सड़क मार्गों के बंद हो जाने से कल (गुरुवार) से ही काल्पा शहर में करीब 100 पर्यटक फंसे हुए हैं।
ऊंचाई तक बर्फ की तह जमी
उन्होंने बताया कि इस इलाके में बीते दो दिनों में इतना ज्यादा हिमपात हुआ है कि वहां पांच फुट की ऊंचाई तक बर्फ की तह जम गई है। उन्होंने कहा कि वहां भोजन की कमी हो गई है। वहां बिजली भी नहीं है और संचार तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। काल्पा राजधानी शिमला से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और वहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जिले की सांग्ला घाटी में भी भारी हिमपात के कारण करीब 20 पर्यटक फंसे हुए हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि रीकोंग पियो और शिमला को जोड़ने वाला सड़क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है इसलिए पर्यटकों को अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचने में एक या दो दिन का समय लग सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि किन्नौर, लाहौल एवं स्पीति, कुल्लू और चम्बा जिले में गुरुवार सुबह से ही भारी हिमपात हो रहा ह
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ऊंचाई तक बर्फ की तह जमी
उन्होंने बताया कि इस इलाके में बीते दो दिनों में इतना ज्यादा हिमपात हुआ है कि वहां पांच फुट की ऊंचाई तक बर्फ की तह जम गई है। उन्होंने कहा कि वहां भोजन की कमी हो गई है। वहां बिजली भी नहीं है और संचार तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। काल्पा राजधानी शिमला से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और वहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जिले की सांग्ला घाटी में भी भारी हिमपात के कारण करीब 20 पर्यटक फंसे हुए हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि रीकोंग पियो और शिमला को जोड़ने वाला सड़क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है इसलिए पर्यटकों को अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचने में एक या दो दिन का समय लग सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि किन्नौर, लाहौल एवं स्पीति, कुल्लू और चम्बा जिले में गुरुवार सुबह से ही भारी हिमपात हो रहा ह
Thursday, December 30, 2010
बेवफा खंडहर वाली , भाग-7
किरण- सच, सच बताओ अब कितनी कलियों को मसलकर फूल बना चुके हो ?कितनी हसीनो के साथ सुहागरात मना चुकी हो ?
सूरज- सच तो ये है कि तुम्हारे सिवाय कभी किसी हसीना की तरफ निगाह भरके देखा भी नहीं, मगर अपने बारे तो कहो. जब मैंने यहाँ प्रवेश किया तो तुमने कहा था कि तुम एक रात की कीमत ५ लाख वसूलती हो . जरा बताओ न कि अब
तक कितने लोगों तक सेवा पहुंचा चुकी हो /
किरण- क्या सुनोगे , और क्या सुनाऊँ ? बड़ी लंबी कहानी है .
सूरज- कोई बात नहीं , मैं सुनने के लिए तैयार हूँ. मगर जों भी कहना सच कहना .
किरण - यह सुनने के लिए कलेजा थामना पडेगा . मैंने तय किया है कि तुमको सच-सच बतलाऊंगी . क्योंकि मेहमानों को गुमराह करना मेरी आदत में शामिल नहीं है.जों कहूंगी सच कहूंगी और सच के सिवाय भी बहुत कुछ कहूंगी .
सूरज- ठीक है. मेरा दिल भी बेताब हो रहा है सुनने के लिए . एक तरफ तो तुम्हारी जवानी का नशा, दूसरा इस कातिल बदन का नशा और तीसरा इस शराब का नशा तो है ही. आज क्या इरादा है ? क्या मार डालना चाहती हो ?
किरण- मर तो तुम बहुत पहले ही गए थे. अब तो सिर्फ औपचारिकता भरा जीवन रह गया है सूरज.
सूरज क क क्या ? ये आपने क्या कह दिया ? ऐसा कहाँ होता है भला ? कि मेहमान की खातिर करने के बजाय उसे श्राप दे दिया जाता है. मरने से क्या मतलब है तुम्हारा ?
किरण- मेरा मतलब था कि मुझे देखते ही तुम मुझ पर मर मिटे थे, मगर झिझक रहे थे बुद्धू . सच कहो मुझे कनखियों से नहीं देखा करते थे , जैसे ही मेरी नजर हटती तो मुझसे नजर हटाकर तुम मुझे चोरी-चोरी देख लिया करते थे.
सूरज- हाँ, सो तो है. मैं क्या करता कोई जान न पहचान .अगर तुम्हें बुरा लगता तो ?
किरण- तो क्या होता ? कम से कम ये तो सोचना चाहिए था कि रात को अगर काउंटर पर कोई लड़की सज-धजकर बैठी है तो उसके क्या इरादे होंगे .
सूरज- असली बात ये है कि मैंने कभी किसी होटल में इस तरह का व्यवहार होते नहीं देखा, यहाँ तक कि मैं कभी कभार यानि जिंदगी में चार छः बार ही होटल में रुका हूँ. वो भी अकेला नहीं बल्कि लोगों के साथ होता था.
किरण- मैं पहले एअर होस्टेस हुआ करती थी. ठीक है ? सुनाऊ. न कहानी ?
सूरज- हाँ बिलकुल वही सुनने के लिए तो दिल बेकरार है. जानना चाहता हूँ कि इस मुलायम सीने में तुम कितनी खुशी या दर्द छिपाए बैठी हो ?
किरण- ठीक है सुनो, एक दिन जब मैं फ्लाईट पर ड्यूटी कर रही थी तो मैंने महसूस किया कि एक लड़का मुझे हद से ज्यादा घूर रहा था. वह बार-बार किसी न किसी बहाने से मुझे पाने पास बुलाता और छूने की कोशिश करता . यह मुंबई
से दिल्ली की फ्लाईट थी. वापसी में भी मेरी ड्यूटी लगी थी .मैं यह देखकर दंग रह गयी कि वापसी में भी वह लड़का बैठा हुआ था. यह सिलसिला यहीं पर नहीं रुका . वह अक्सर उस फ्लाईट में सफर करने लगा जिसमे मैं हुआ करती
एक दिन दिल्ली एअर पोर्ट पर ड्यूटी के बाद मैं कंपनी की गाड़ी का इन्तजार कर रही थी कि तभी वह लड़का मुस्कराता हुआ दिखा. वह मेरी तरफ ही देख रहा था.
सूरज- आप तो डर गयी होंगी लड़के को देखकर ?
किरण- मेरी जूती डरेगी , मैं क्यों डरती . मैंने भी मुस्कराते हुए उसको फोलो किया-
-लगता है मैंने आपको पहले भी कहीं देखा है ?
लड़का- जी हाँ, हम फ्लाईट में कई बार साथ-साथ सफर कर चुके हैं . मेरा नाम अभीप्रिय है . तुम सिर्फ अभी या प्रिय भी कह सकती हो. मेरे फादर यहाँ सांसद हैं. सत्ताधारी पार्टी के लीडर हैं. नाम तो आपने सूना ही होगा . प्रमोद चोहान
नाम है. अक्सर टीवी पर दिखाई देते हैं .
किरण- ओ हाँ, बहुत अच्छा बोलते हैं, तुम उनके बेटे हो ? कहाँ आते -जाते हो इतनी बार ? क्या फ्लाईट में बैठने का सहाक है ?
अभिप्रिय - जी नहीं, आपको देखने का सहाक है. मैं तुम्हें ददेखने के लियी ही बार-बार ट्रेवल कर रहा हूँ. आपसे वहाँ तो मन की बात कह नहीं पाया. सोचा यहाँ तो मिलोगी . इसलिए पीछा करता -करता यहाँ चला आया .
क्या मेरे साथ खाना खाना चाहोगी ? मेरी लाइफ ही चेंज हो जायेगी .
किरण- ठीक है. यह मेरा भी सौभाग्य है. मगर आज यह संभव नहीं हो पायेगा . डिनर कर चुकी हूँ.
अभिप्रिय- कोई बात नहीं. एक मग कोफी तो पी सकती हैं न , मेरा भी कहने का आज मूड नहीं है. डिनर फिर किसी दिन , आज सिर्फ कोफी से काम चला लेंगे .
किरण- अभी मेरी गाड़ी आने वाली होगी, मेरा शिड्यूल गडबड हुआ तो तकलीफ हो जायेगी , मैं गुडगाँव रहती हूँ.
अभिप्रिय - कोई दिक्कत नहीं, मैं आपको इज्जत से घर तक छोडूंगा.
किरण- सच, सच बताओ अब कितनी कलियों को मसलकर फूल बना चुके हो ?कितनी हसीनो के साथ सुहागरात मना चुकी हो ?
सूरज- सच तो ये है कि तुम्हारे सिवाय कभी किसी हसीना की तरफ निगाह भरके देखा भी नहीं, मगर अपने बारे तो कहो. जब मैंने यहाँ प्रवेश किया तो तुमने कहा था कि तुम एक रात की कीमत ५ लाख वसूलती हो . जरा बताओ न कि अब
तक कितने लोगों तक सेवा पहुंचा चुकी हो /
किरण- क्या सुनोगे , और क्या सुनाऊँ ? बड़ी लंबी कहानी है .
सूरज- कोई बात नहीं , मैं सुनने के लिए तैयार हूँ. मगर जों भी कहना सच कहना .
किरण - यह सुनने के लिए कलेजा थामना पडेगा . मैंने तय किया है कि तुमको सच-सच बतलाऊंगी . क्योंकि मेहमानों को गुमराह करना मेरी आदत में शामिल नहीं है.जों कहूंगी सच कहूंगी और सच के सिवाय भी बहुत कुछ कहूंगी .
सूरज- ठीक है. मेरा दिल भी बेताब हो रहा है सुनने के लिए . एक तरफ तो तुम्हारी जवानी का नशा, दूसरा इस कातिल बदन का नशा और तीसरा इस शराब का नशा तो है ही. आज क्या इरादा है ? क्या मार डालना चाहती हो ?
किरण- मर तो तुम बहुत पहले ही गए थे. अब तो सिर्फ औपचारिकता भरा जीवन रह गया है सूरज.
सूरज क क क्या ? ये आपने क्या कह दिया ? ऐसा कहाँ होता है भला ? कि मेहमान की खातिर करने के बजाय उसे श्राप दे दिया जाता है. मरने से क्या मतलब है तुम्हारा ?
किरण- मेरा मतलब था कि मुझे देखते ही तुम मुझ पर मर मिटे थे, मगर झिझक रहे थे बुद्धू . सच कहो मुझे कनखियों से नहीं देखा करते थे , जैसे ही मेरी नजर हटती तो मुझसे नजर हटाकर तुम मुझे चोरी-चोरी देख लिया करते थे.
सूरज- हाँ, सो तो है. मैं क्या करता कोई जान न पहचान .अगर तुम्हें बुरा लगता तो ?
किरण- तो क्या होता ? कम से कम ये तो सोचना चाहिए था कि रात को अगर काउंटर पर कोई लड़की सज-धजकर बैठी है तो उसके क्या इरादे होंगे .
सूरज- असली बात ये है कि मैंने कभी किसी होटल में इस तरह का व्यवहार होते नहीं देखा, यहाँ तक कि मैं कभी कभार यानि जिंदगी में चार छः बार ही होटल में रुका हूँ. वो भी अकेला नहीं बल्कि लोगों के साथ होता था.
किरण- मैं पहले एअर होस्टेस हुआ करती थी. ठीक है ? सुनाऊ. न कहानी ?
सूरज- हाँ बिलकुल वही सुनने के लिए तो दिल बेकरार है. जानना चाहता हूँ कि इस मुलायम सीने में तुम कितनी खुशी या दर्द छिपाए बैठी हो ?
किरण- ठीक है सुनो, एक दिन जब मैं फ्लाईट पर ड्यूटी कर रही थी तो मैंने महसूस किया कि एक लड़का मुझे हद से ज्यादा घूर रहा था. वह बार-बार किसी न किसी बहाने से मुझे पाने पास बुलाता और छूने की कोशिश करता . यह मुंबई
से दिल्ली की फ्लाईट थी. वापसी में भी मेरी ड्यूटी लगी थी .मैं यह देखकर दंग रह गयी कि वापसी में भी वह लड़का बैठा हुआ था. यह सिलसिला यहीं पर नहीं रुका . वह अक्सर उस फ्लाईट में सफर करने लगा जिसमे मैं हुआ करती
एक दिन दिल्ली एअर पोर्ट पर ड्यूटी के बाद मैं कंपनी की गाड़ी का इन्तजार कर रही थी कि तभी वह लड़का मुस्कराता हुआ दिखा. वह मेरी तरफ ही देख रहा था.
सूरज- आप तो डर गयी होंगी लड़के को देखकर ?
किरण- मेरी जूती डरेगी , मैं क्यों डरती . मैंने भी मुस्कराते हुए उसको फोलो किया-
-लगता है मैंने आपको पहले भी कहीं देखा है ?
लड़का- जी हाँ, हम फ्लाईट में कई बार साथ-साथ सफर कर चुके हैं . मेरा नाम अभीप्रिय है . तुम सिर्फ अभी या प्रिय भी कह सकती हो. मेरे फादर यहाँ सांसद हैं. सत्ताधारी पार्टी के लीडर हैं. नाम तो आपने सूना ही होगा . प्रमोद चोहान
नाम है. अक्सर टीवी पर दिखाई देते हैं .
किरण- ओ हाँ, बहुत अच्छा बोलते हैं, तुम उनके बेटे हो ? कहाँ आते -जाते हो इतनी बार ? क्या फ्लाईट में बैठने का सहाक है ?
अभिप्रिय - जी नहीं, आपको देखने का सहाक है. मैं तुम्हें ददेखने के लियी ही बार-बार ट्रेवल कर रहा हूँ. आपसे वहाँ तो मन की बात कह नहीं पाया. सोचा यहाँ तो मिलोगी . इसलिए पीछा करता -करता यहाँ चला आया .
क्या मेरे साथ खाना खाना चाहोगी ? मेरी लाइफ ही चेंज हो जायेगी .
किरण- ठीक है. यह मेरा भी सौभाग्य है. मगर आज यह संभव नहीं हो पायेगा . डिनर कर चुकी हूँ.
अभिप्रिय- कोई बात नहीं. एक मग कोफी तो पी सकती हैं न , मेरा भी कहने का आज मूड नहीं है. डिनर फिर किसी दिन , आज सिर्फ कोफी से काम चला लेंगे .
किरण- अभी मेरी गाड़ी आने वाली होगी, मेरा शिड्यूल गडबड हुआ तो तकलीफ हो जायेगी , मैं गुडगाँव रहती हूँ.
अभिप्रिय - कोई दिक्कत नहीं, मैं आपको इज्जत से घर तक छोडूंगा.
Tuesday, December 28, 2010
बेवफा खंडहर वाली , भाग-6
सूरज- आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ, अपनी जान भी दे सकता हूँ.
किरण- तो फिर दिखाओ ये ताबीज, मेरे हाथ पर रखो, मैं देखना चाहती हूँ कि कहीं किसीने आपको ऐसे ही तो नहीं बहका दिया हो.
सूरज-मुझे पक्का भरोसा है इस पर .
किरण- और मुझ पर ?
सूरज- जान से भी ज्यादा . अपने आप से भी ज्यादा .
किरण- कहीं मुझे भी तो आपने भूत नहीं समझ लिया ?
सूरज- क्या आप मुझे इतना नादाँ समझती हैं ? अब भी ये कहेगी कि मैं भी इंसान नहीं भूत हो गया हूँ और मैं मान भी लूंगा . कहीं ऐसा होता है क्या ?
किरण- तो इसमें बुरा क्या है ? सच तो आखिर सच होता है. तुम भी भूत हो और मैं भी भूत हूँ . अगर मेरी बात को मान सकते हो तो मानलो. नहीं मान सकते तो भी स्वागत है. कहिये किसी रही सूरज जी ?
सूरज- मजाक करने के लिए मैं ही मिला हूँ क्या ? सुबह से कोई और नहीं मिल पाया क्या ? हा हा हा . मजा आ गया, इसका अर्थ ये हुआ कि तुम एक नंबर की कोमेडियन हो . घर जाउंगा तो सब लोगों को बताउंगा .
फिर मेरे यार दोस्त भी इसका खूब लुत्फ़ उठाएंगे . तुम्हें तो फिल्मों में होना चाहिए , कम से कम किसी कोमेडी शो में ही सही. कहो तो मैं जुगाड लगवा सकता हूँ. मेरी डायरेक्ट पहचान तो नहीं है , मगर वाया -वाया अच्छा
खासा जुगाड है. मेरी दूर की रिश्तेदारी है. उनका लड़का बहुत नाम कमा रहा है. सतेन्द्र कुमार का नाम सूना होगा . मैं उसीका जिक्र कर रहा हूँ.
किरण- ठीक है, वहाँ पर बाद में चली जाउंगी . पहले काम से कम यह पैग तो शुरू करो. यह जाम तुम्हारे तन-मन में मस्ती भर देगा. चलो चीअर्स.
सूरज ने भी जाम छलका दिया . दोनों ने अपने-अपने गिलास खाली कर दिए . सूरज ने महसूस किया कि शराब का असर कुछ ज्यादा ही होने लगा है. पहला ही पैग उसके सिर पर भारी होकर गुजरा था. उसने एक फुर-फुरी सी लेकर
चखने का आनंद लेना शुरू कर दिया. यह मजा कुछ अलग ही था. दूसरे पैग में तो सूरज की जुबान भी लडखडाने लगी थी. किरण और सूरज इस वक्त दोनों ही निर्वस्त्र थे, किरण ने उसके होठों का एक दीर्घ चुम्बन लिया और कहा-
-आज तुम बहुत हॉट लग रहे हो. तुम्हें तो कच्चा चबाने का जी चाहता है. बोलो कहाँ से शुरू करूं ? सिर की तरफ से या फिर इन पैरों की तरफ से ?
सूरज- तुम मेरी आगोश में हो और मैं तुम्हारी शरण में हूँ, जहाँ से चाहो शुरू करो और जहां इच्छा हो खत्म कर डालो. हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है. क्योंकि तुम्हें अपना समझ लिया है और अपने आपको पूरी तरह से समर्पित कर दिया है.
किरण- वाह, ऐसा बोलकर तुमने मेरी तबियत खुश करदी है. लों, यह जवानी मैं तुम्हें अर्पित करती हूँ. तुम्हीं पर सब कुछ समर्पित है. जैसे चाहो इसका इस्तेमाल कर सकते हो .
सूरज- तुम्हारे सीने की ये गोलाईयां बड़ी कातिल हैं, इन्हें चूमने को दिल चाहता है. ऐसा लगता है जैसे कि मैंने पहले भी इसको चूमा है, प्यार किया है. क्या ऐसा हो सकता है क्या ?
किरण- हाँ, -हाँ क्यों नहीं हो सकता . आखिर आप रंगीन मिजाज जों ठहरे. न जाने कितने होटलों में ठहरे होंगे और मुझ जैसी कितनी ही लड़कियों के साथ रोमान्स और सेक्स किया होगा .
सूरज- तुम्हारे नग्न बादन को छूने के लिए मुझे कितनी म्हणत करनी पड रही है , इसका अनुमान सिर्फ मैं लगा सकता हूँ, अब सोचिये कि मेरे जैसा बहादुर भला क्या और कितना कर पायेगा ?
किरण- तुम जैसे मर्दों को मैं अच्छी तरह से समझती हूँ. अंदर से कुछ और होते हो और बाहर से कुछ और. लड़कियां देखते ही ऐसे फिसल जाते हैं जैसे कि मक्खन पर फिसलते हैं. और फिर मजनू की तरह मंडराने लगते हैं.
सूरज - और लड़कियों की नहीं कहोगी, वे क्या कम होती है. वे भी तो लैला जैसी बनकर हमें मजनू जैसा बना डालती हैं. , हमारे दीवाने बनने के पीछे अगर कोई शै है तो वह है लीलाओं के नखरे .
किरण- यही तो है आप लोगों की कलाकारी. जुल्म भी हम पर करते हैं और फिर सजा भी हमको ही सुनाई जाती है.
सूरज- इस बात पर मुझे एक पुराना मगर मशहूर शेर याद आ रहा है. -'हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम , वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता.
किरण- सच, सच बताओ अब कितनी कलियों को मसलकर फूल बना चुके हो ?कितनी हसीनो के साथ सुहागरात मना चुकी हो ?
सूरज- सच तो ये है कि तुम्हारे सिवाय कभी किसी हसीना की तरफ निगाह भरके देखा भी नहीं, मगर अपने बारे तो कहो. जब मैंने यहाँ प्रवेश किया तो तुमने कहा था कि तुम एक रात की कीमत ५ लाख वसूलती हो . जरा बताओ न कि अब
तक कितने लोगों तक सेवा पहुंचा चुकी हो /
किरण- क्या सुनोगे , और क्या सुनाऊँ ? बड़ी लंबी कहानी है .
सूरज- कोई बात नहीं , मैं सुनने के लिए तैयार हूँ. मगर जों भी कहना सच कहना .
किरण - यह सुनने के लिए कलेजा थामना पडेगा .
Monday, December 27, 2010
बेवफा खंडहर वाली , भाग-5
सूरज ने जोश में आकर किरण के वस्त्र अलग कर दिए , अब वह उसकी पेंटी निकाल रहा था, किरण मस्ती में ऐसी इठला रही थी जैसे कि उसे अलीबाबा चालीस चोर का खजाना मिल गया हो. सूरज की सांसें जोर-जोर से चल रही थीं.
उसने पहले कभी किसी लड़की के साथ रोमांस भी नहीं किया था, सेक्स की तो बात ही अलग है. इसलिए उसकी सांस फूल रही थीं, जबकि किरण इत्मीनान से उसकी हालत देख रही थी. उसे समझाते हुए वह बोली -
-ऐसे प्यार कैसे कर पाओगे सूरज, पहले अपनी भावनाओं को तो काबू में रखो. जब तुम इतनी उत्तेजना में रहोगे तो सफल प्रेंम क्रीडा नहीं कर पाओगे .
सूरज- क्या करूं, अब कुछ भी काबू में नहीं है , न दिल और न ही दिमाग . अब तो बस ... तुम ही तुम दिखाई देती हो.
किरण- पहले अपने जज्बातों को काबू में रखो. मैं अभी एक पैग बनाए देती हूँ. एक पैग पियो , बातें करो और साथ में प्यार भी , तब मजा आएगा
सूरज- शराब से ज्यादा नशा तो मुझे अभी हो रहा है. आगे क्या हाल होगा ? कहीं ऐसा तो नहीं कि यहीं पर हमेशा के लिए ढेर हो जाऊं ? देखो , अब तो किसी तरह का कोई गम भी नहीं है. निश्चित तौर पर मुझे लगता है कि अब मैं
अपनी पूरी लाइफ जी चुका हूँ. तुमसे स्पर्श करने, तुम्हें प्यार करने और यहाँ तक कि तुम्हारा चुम्बन लेने के बाद अब और जीने की तमन्ना भी किसे है ?
किरण- ये क्या कह रहे हो सूरज, यह प्यार -मोहब्बत और मौज मस्ती करने का समय हिया और ऐसे समय अशुभ बातें करते हो ? आज के बाद फिर कभी ऐसा मत कहना .
सूरज - अच्छा ये बताओ कि मेरी ही तरह क्या तुम भी मुझसे पहली बार ही प्यार कर रही हो ? या इससे पहले बभी तुम किसीसे प्रेम कर चुकी हो ?
किरण- कभी किसीसे नहीं, हाँ जहां , प्रेम नहीं हो पाया . यही एक काम है जों चाहकर भी कभी नहीं कर पाई . शायद इसका कारण यह भी हो सकता है कि तुम्हारे जैसा कोई मिला ही नहीं , और जब कोई दिल को पसंद नहीं आता
तो जाहिर सी बात है कि दिल उसे गहराइयों में नहीं बसा पाता. तुम्हारी बात अलग है , तुम तो आये और आते ही छा गए . दिल में बसने की कौन कहे , तुमने तो दिल पर कब्जा ही जमा लिया है . मैं तुम्हारी हो चुकी हूँ. अब तो
कुछ करना भी चाहूँ तो परमीशन भी तुमसे ही लेनी होगी .
सूरज- ओह, किरण . किरण . यह क्या कह दिया ? क्या वाकई मैं तुम्हें इतना भा गया हूँ ? प्यार के बारे में तो आपने बता दिया अब ये भी बताएं कि कभी किसी प्रिय के साथ प्रणय क्रीडा के सम्बन्ध तो बने ही होंगे ?
किरण- उन बातों को फिर कभी बताएँगे , अभी तक तो इतना ही जानलो कि तुम मिले हो तो ऐसा लगता है जैसे कि सारा जहाँ मिल गया है. वैसे मैं आपके हर सवाल का जवाब देने वाली हूँ.
सूरज- मेरे दिल का एक वहम और निकालना होगा , मुझे ऐसा क्यों लगता है कि यहाँ पर सब कुछ अपने आप हो रहा है ?ऐसा महसूस होता है जैसे यहाँ पर कोई भुतहा आवाजाही हो ?
किरण - हा हा हा , ये क्या कह दिया आपने ? क्या हसीना भी अब आपको भूत नजर आने लगी हैं ?
सूरज- आप हंस रही हैं, मेरी जान पर बीत रही है. मैंने इसलिए शक जाहिर किया क्योंकि यहाँ पर सब लोग खामोश हैं, अगर वेटर भी आता है तो चुपचाप लौटजाता है. सिर झुकाकर आने -जाने का भला क्या मतलब है /
किरण- हा हा हा , अरे यार . यह सब आदर के कारण हो रहा है . आप यहाँ के स्पेशल मेहमान हो न इसलिए सब लोग आपके सम्मान में खामोश हैं. कोई भी खुलकर कुछ कहना नहीं चाहता . सबको डर लग रहा है कि कहीं
ऐसा न हो जाए कि आपको उनकी कोई बात बुरी लग जाए और बेवजह उसको नौकरी से हाथ धोना पद जाए . क्यों बेचारों की नौकरी लेने पर तुले हो . चलो ऐश करते हैं. हम लोग भी न जाने किन बातों में उलझ गए हैं .
सूरज- मैं इस जवाब से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हूँ. वैसे मैंने एक एहतियात तो बरती है.
किरण- वो भला क्या ?किसी एहतियात ?
सूरज- मेरे एक रिश्तेदार बहुत बड़े भगत हैं.उन्होंने मुझे यह ताबीज बनाकर दिया है. इसके रहते कोई भी भूत-प्रेत झाँक भी नहीं सकता. मैं इसे हमेशा अपने पास ही रखता हूँ .
किरण-अच्छा , ज़रा देखूं तो सही . एक मेरे लिए भी ऐसा ही बनवाओगे न ?
सूरज- आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ, अपनी जान भी दे सकता हूँ.
किरण- तो फिर दिखाओ ये ताबीज, मेरे हाथ पर रखो, मैं देखना चाहती हूँ कि कहीं किसीने आपको ऐसे ही तो नहीं बहका दिया हो.
सूरज-मुझे पक्का भरोसा है इस पर .
किरण- और मुझ पर ?
सूरज- जान से भी ज्यादा . अपने आप से भी ज्यादा .
किरण- कहीं मुझे भी तो आपने भूत नहीं समझ लिया ?
सूरज- क्या आप मुझे इतना नादाँ समझती हैं ?
बेवफा खंडहर वाली , भाग-4
किरण- और सूरज के अस्तित्व से किरण का अस्तित्व जुडा हुआ है. है न ,यह भी सत्य है. मैं कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रही थी. तुम्हारे जैसा गबरू जवान मैंने भी आज तक नहीं देखा. तुम्हें देखा तो दिल को सुकून मिल गया.
सूरज- सच कहती हो ? आओ . मेरी बांहों में समा जाओ. शराब जब आयेगी तब आयेगी, फिलहाल कुछ जाम तुम्हारी इन मदभरी आँखों से पिए जाएँ.
किरण- तुम बहुत रोमांटिक इंसान हो . ऐसी बातें कहते हो जों सीधे दिल में उतर जाती हैं.
सूरज- और तुम बेहद सेक्सी. तुम्हें देखते ही फना होने को जी चाहता है. तुम पर मर मिटने की तमन्ना उमड़ने लगती है. इन कपड़ों को उतारकर एक तरफ फेंक दो और मेरे पहलू में समा जाओ . आओ तुम्हें प्यार का पाठ पढ़ाऊं .
किरण- इसके लिए तो पूरी रात पडी है. इन आँखों के मयखाने कम पड जायेंगे.
सूरज- मैं तुम्हारी जवानी का रस चखना चाहता हूँ, मुझे उम्मीद है कि जों मजा इसमें आएगा वह व्हिस्की नहीं दे पायेगी .
किरण- जब व्हिस्की और जवानी का सुरूर चढेगा तो उसका आनंद ही कुछ और आएगा .
सूरज- अगर तुम कहती हो तो जरूर आएगा , वैसे मैंने कभी इसका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया . तुम्हारे साथ प्रणय क्रीडा करने का अवसर मिलता है तो यह मेरा पहला अनुभव होगा. इसको यादगार और मधुर बना पाता हूँ या नहीं, यह
वक्त पर निर्भर करता है. वैसे यह बताना चाहता हूँ कि मैंने आप के जैसी खूबसूरत महिला आज तक नहीं देखी , ऐसा लगता है जैसे कि आप हूर परी हैं और स्वर्ग से उतरकर यहाँ पर आ गयी हैं. सिर्फ मेरे लिए .
किरण- मुझे भी यही लगता है जैसे कि तुम कामदेव के प्रतिनिधि के तौर पर मेरे सामने चले आये हो. तुम्हें देखते ही मेरे दिल में घंटियाँ सी बजने लगी थीं. दिल में ऐसा बवंडर तो मैंने पहले कभी नहीं देखा. तुम ऐसे अकेले मर्द हो
जिसे देखने के बाद मेरे मन में कामक्रीड़ा करने की चाह जाग्रत हो गयी है. ये शब्द कहते समय मुझे शर्म आती है मगर क्या कहूँ, मैंने अपने आपको रोक नहीं पा रही हूँ. जिस तरह से तुम मेरे दिल पर छाये हो उसकी सहज कल्पना
नहीं की जा सकती . मुझे लगता है जैसे तुम कोई जादूगर हो .
सूरज- जादूगरनी तो तुम हो मेरी जान. पहली ही नजर में दीवाना बना दिया. ऐसा कहीं होता है क्या ? सिर्फ फिल्मों में ही देखा सूना है. इसके अलावा और कहीं कभी नहीं देखा -सूना .
किरण- दरवाजे पर दस्तक हो रही है. वेटर सामान लेकर आ गया है. तुम यहीं पर रुको , मैं लेकर अभी आती हूँ. अभी गयी , अभी आई.
तब तक तुम अपने कपडे चेंज कर सकते हो. आज की रात तुम मेरे मेहमान हो. सोचती हूँ कि तुमसे कोई भी चार्ज न लूं. इसका बदला तुम ऐसे चुका सकते हो कि जब कभी तुम्हारा दिल हो, तब तुम मुझे अपने घर बुला सकते हो ,
उस समय का सारा खर्च तुम्हारा होगा और इस समय का खर्च मैं वहन करूंगी. प्लीज आप कुछ मत बोलना . मेहमानदारी करने का यह पुनीत मौक़ा पहली बार मिल रहा है.
सूरज- ऐसे तो ठीक नहीं होगा. यह अच्छी बात नहीं है. इस तरह आप मुझे शर्मिन्दा कर रही है. आपने जों वादा पहले किया था वह तो निभाया नहीं है. उसे निभाओ न , यानि मुझे कुछ चार्ज तो भरने दो.
जब तक सूरज ने अपना वाक्य पूरा किया तब तक किरण सामान लेकर आ चुकी थी. कुछ सामान लेने उसे दुबारा जाना पड़ा था. तब तक सूरज ने बरमूडा और ती शर्त पहनल ली थी. वह गाँव का गबरू जवान लग रहा था. उसकी
दाढी-मूंछ अभी जल्दी में ही निकली थीं, इसलिए उनका रंग सुनहरा था जों उसके गोरे रंग पर और भी ज्यादा फब रहा था . किरण ने उसके नजदीक बैठकर उसके होठों को चूम लिया . अब सूरज अपने आपे से बाहर होने लगा था .
उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह प्यार कि शुरुआत कहाँ से करे , किरण भी उसकी दिक्कत समझ गयी , बोली-
-क्या सोच रहे हो सूरज ?
सूरज- यही कि प्यार कहाँ से शुरू करूं ? तुम इतनी खूबसूरत हो कि समझ में ही नहीं आ रहा है कि देखूं कि प्यार करूं.
किरण- ये पूरा बदन तुम्हारा है. मैं तुम्हारी हूँ जैसे चाहो वैसे इसका इस्तेमाल कर सकते हो.
सूरज ने जोश में आकर किरण के वस्त्र अलग कर दिए , अब वह उसकी पेंटी निकाल रहा था, किरण मस्ती में ऐसी इठला रही थी जैसे कि उसे अलीबाबा चालीस चोर का खजाना मिल गया हो. सूरज की सांसें जोर-जोर से चल रही थीं.
उसने पहले कभी किसी लड़की के साथ रोमांस भी नहीं किया था, सेक्स की तो बात ही अलग है. इसलिए उसकी सांस फूल रही थीं, जबकि किरण इत्मीनान से उसकी हालत देख रही थी. उसे समझाते हुए वह बोली -
-ऐसे प्यार कैसे कर पाओगे सूरज, पहले अपनी भावनाओं को तो काबू में रखो. जब तुम इतनी उत्तेजना में रहोगे तो सफल प्रेंम क्रीडा नहीं कर पाओगे .
सूरज- क्या करूं, अब कुछ भी काबू में नहीं है , न दिल और न ही दिमाग . अब तो बस ... तुम ही तुम दिखाई देती हो.
किरण- पहले अपने जज्बातों को काबू में रखो. मैं अभी एक पैग बनाए देती हूँ. एक पैग पियो , बातें करो और साथ में प्यार भी , तब मजा आएगा .
सूरज- शराब से ज्यादा नशा तो मुझे अभी हो रहा है. आगे क्या हाल होगा ?
Sunday, December 26, 2010
बेवफा खंडहर वाली , भाग-3
लड़की- अरे रे .. . घबराते क्यों हो ? तुम ५०० ही दे देना . कोई बात नहीं , पहली ही नजर में तुम मुझे पसंद आ गए हो इसलिए यह छोट दे रही हूँ , बताया इसलिए क्योंकि तुम्हारे दिमाग में इससे सम्बंधित सवाल घूम रहे थे .
अब समझ में आया कि मैं क्वार्टर या अद्धा के बारे में क्यों पूछ रही थी ? क्योंकि तुम्हारी रूम पार्टनर को भी तो मदहोशी की जरूरत पड़ेगी ही न .
सूरज- समझ गया.तो ऐसा करो, एक बोतल पूरी मंगा लेते हैं , अगर बच गयी तो मेरी तरफ से आप रख लेना इमरजेंसी मी किसीके काम आ जायेगी .
लड़की- रात के दौरान और क्या -क्या पसंद करेंगे आप ? अगर डांस के शौक़ीन हैं तो फिर उस तरह की मफ्फिल सजाई जाए. और अगर कोई और शौक रखते हैं तो वो किया जाए.
सूरज- तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हारे रहते किसी और चीज की जरूरत ही नहीं है. सच कहता हूँ. तुम खुद ही परियों की रानी नजर आती हो.
लड़की- तारीफ़ के लिए शुक्रिया और अगर आपको यह नाचीज पसंद आ ही गयी है तो फिर आज आपको हम खुद नृत्य दिखाते हैं. आप आजके हमारे खास मेहमान हैं. आज न जाने ऐसा क्या हुआ है कि ग्राहकी बिलकुल जीरो हो गयी है . सुबह से
शाम हो गयी मगर कोई आया ही नहीं, इसलिए स्टाफ के अन्य लोगों से मैंने कहा था कि अगर कोई पुरुष ग्राहक आया तो उसकी कहास खिदमत मैं खुद करूंगी . सौभाग्य से देखो कि तुम आ गए . एकदम हीरो जैसे मस्त नाम - , स्टाइलिश और गबरू जवान .
मेरी जगह पर अगर कोई और भी होती तो तुम्हारी खिदमत करके खुशी का अनुभव करती .
सूरज- ओह, थेंक यू वैरी मच. तो क्या आप भी व्हिस्की से काम चला लेंगी ? या आपके लिए कुछ और मंगाना होगा ?
लड़की- हाँ , क्यों नहीं ? व्हिस्की के अलावा भी अगर कुछ चाहिए तो बाद में मंगा लिया जाएगा . मगर मैं उसीको ज्यादा पसंद करूंगी , जिसे तुम तवज्जो दोगे ?
सूरज- क्या आप सचमुच एक रात के ५ लाख ही लेती हैं या शेखी मारने के लिए ऐसे ही कह रही हो ? क्योंकि यह रकम बहुत ज्यादा होती है. वैसे अगर मेरे पास इतने रुपये होते तो यकीन मानिए कि मैं तुम पर एक घंटे के लिए भी न्यौछावर कर देता.
क्योंकि तुम्हारे जैसी सुन्दर लड़की मैंने आज तक नहीं देखी. फिल्मों की हीरोइन भी आपके सामने पानी मांगती है. ऐसा फिगर तो बेबो का भी नहीं होगा. जी चाहता है कि तुम्हें सिर्फ और सिर्फ देखता ही रहूँ. तुम्हें देखने के बाद अब और कुछ देखना ही नहीं चाहता .
लड़की - ठीक है आशिक महाशय . देखते रहना . जी भरके. पहले आपको कमरे के चाभी दे देती हूँ. लड़का आपको कमरे तक छोड़ आएगा . यह छोटी सी फोर्मेलिटी है. इसे पूरी करके यहाँ पर साइन कर दीजिए .
सूरज ने रजिस्टर पर नाम ,पता लिखने के बाद उस पर हस्ताक्षर कर दिया . एक लड़का चाभी लेकर उसके आगे-आगे चल दिया. उसने कमरा खोल दिया . सूरज ने देखा कि जंगल में भी बड़ा आलीशान होटल था . अगर वह फाइव स्टार नहीं था तो
इससे कम भी नहीं था. वहां के माहौल में गजब की सुगंध थी. बिलकुल जादुई माहौल था. उसने जब अपना कमरा देखा तो मारे खुशी से उछल पड़ा. दिल को मोहने वाला कमरा था. एकदम साफ़ -सुथरा . उसने वेटर को दस का नोट टिप्स में दिया और फ्रेश
होने लगा. जब वह तैयार होकर बाहर निकला तो कमरे में वही काउंटर वाली लड़की को बैठे पाया . मस्ती भरी मुस्कान बिखेरते हुए सूरज बोला-
- जब से तुम्हें देखा है एक पल के लिए भी ध्यान हटा नहीं पाया हूँ. बस तुम्हारा ही चेहरा आँखों के सामने दिखाई देता है. यूं देखने के लिए तो आपके इस होटल में अनगिनत नज़ारे हैं लेकिन दिल किसीको कबूल करे तब न .
लड़की- बड़ी तारीफ़ कर रहे हो ? हम तो पहले से ही इम्प्रेस हैं, ज्यादा बोलबचन करने की भला क्या जरूरत है ?
सूरज- ओफ्फोह, मैं भी बड़ा अनाड़ी हूँ, देखो न , अभी तक यह भी नहीं जान पाया कि आपका नाम क्या है ? चलिए यह शुभ काम कर लेता हूँ . आपका नाम क्या है जी ?
लड़की- किरण. बहुत पुराना सा नाम है. यह लोगों को पसंद नहीं आता.
सूरज- वाह , क्या बात है. मैं सूरज हूँ और तुम किरण. क्या संयोग है ? कौन कहता है यह पुराना नाम है. जब तक सूरज है तब तक किरण है , और सूरज है तभी इस दुनिया का अस्तित्व है.
किरण- और सूरज के अस्तित्व से किरण का अस्तित्व जुडा हुआ है. है न ,यह भी सत्य है. मैं कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रही थी. तुम्हारे जैसा गबरू जवान मैंने भी आज तक नहीं देखा. तुम्हें देखा तो दिल को सुकून मिल गया.
सूरज- सच कहती हो ? आओ . मेरी बांहों में समा जाओ. शराब जब आयेगी तब आयेगी, फिलहाल कुछ जाम तुम्हारी इन मदभरी आँखों से पिए जाएँ.
किरण- तुम बहुत रोमांटिक इंसान हो . ऐसी बातें कहते हो जों सीधे दिल में उतर जाती हैं.
सूरज- और तुम बेहद सेक्सी. तुम्हें देखते ही फना होने को जी चाहता है. तुम पर मर मिटने की तमन्ना उमड़ने लगती है. इन कपड़ों को उतारकर एक तरफ फेंक दो और मेरे पहलू में समा जाओ . आओ तुम्हें प्यार का पाठ पढ़ाऊं .
किरण- इसके लिए तो पूरी रात पडी है. इन आँखों के मयखाने कम पड जायेंगे.
सूरज- मैं तुम्हारी जवानी का रस चखना चाहता हूँ, मुझे उम्मीद है कि जों मजा इसमें आएगा वह व्हिस्की नहीं दे पायेगी .
किरण- जब व्हिस्की और जवानी का सुरूर चढेगा तो उसका आनंद ही कुछ और आएगा .
सूरज- अगर तुम कहती हो तो जरूर आएगा , वैसे मैंने कभी इसका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया . तुम्हारे साथ प्रणय क्रीडा करने का अवसर मिलता है तो यह मेरा पहला अनुभव होगा.
Saturday, December 25, 2010
बेवफा खंडहर वाली , भाग-२
सूरज- जी, सो तो ठीक है. दरअसल मैं पड़ोस के गाँव से आ रहा हूँ, अचानक मेरी बाइक खराब हो गयी और अब नजदीक कोई गैरेज भी दिखाई नहीं दे रहा है तो सोचा कि आज रात यहीं विश्राम करलूं . आप क्रेडिट कार्ड से पेमेंट
स्वीकार करते हैं क्या ? क्योंकि मैं कैश नहीं ला पाया. अगर आसपास कोई एटीएम हो तो भी काम चल सकता है,
लड़की - तुम पेमेंट की फ़िक्र क्यों करते हो ? वो तो हम ले ही लेंगे, हमारा ध्यान पेमेंट पर कम और सेवा पर ज्यादा होता है.
सूरज- शुक्रिया, ये तो अच्छी बात है मगर माफ कीजिये , इसके बावजूद आपके यहाँ उतने ग्राहक दिखाई नहीं देते. मैंने देखा कि यहाँ पर एक भी गाड़ी पार्क नहीं की गयी है .
लड़की - हाँ बात आपकी भी सही है . देखो, मौत और ग्राहक का कोई भरोसा नहीं होता. कौन कब आ जाए ?
सूरज - जी ... मौत ? ग्राहक ?
लड़की - हाँ, मेरा मतलब था कि कभी -कभी ऐसा हाल होता है कि ग्राहक शिकायत करते हैं कि उनकी गाड़ी पार्क करने के लिए जगह उपलब्ध नहीं है और कभीकभी ये हाल है कि आप शिकायत करते हैं कि गाडियां ही नहीं हैं.
खैर, ये गीले -शिकवे छोडिये और हुक्म करिये, बोलो क्या पसंद करोगे ? सर्दी जैसा माहौल हो गया है. कुछ स्पेशल पीना पसंद करेंगे. इसलिए पूछ रही हूँ कि होटल में शराब नआत हीं परोसी जाती, पड़ोस के गाँव से मंगाई जाती है .
अगर इच्छा हो तो ऑर्डर दिए देती हूँ, लड़का साइकिल लेकर जाएगा और कुछ ही देर में लेकर आ जाएगा , अगर और ज्यादा हुई तो लड़का जाने में आनाकानी करेगा . पैसों की फ़िक्र न करें, मैं दिए देती हूँ. हिसाब में लग जायेंगे
और वैसे भी ये तो कहानी-पीनी चीज है , खाइए -पीजिए , ऐश कीजिये. एश करो,
सूरज- रहने दीजिए , मुझे सुबह जल्दी निकलना होगा. अगर आँख नहीं खुली तो काम बिगड जाएगा. मुझे अर्जेंट काम से जाना है.
लड़की- सोचलो, जहां तक जगाने का सवाल है तो हम आपको जग्वा देंगे , अलार्म की व्यस्वस्था भी करा देंगे , मगर अपने गाँव जाकर हामारे होटल का नाम बदनाम मत करना. ये न कहना कि ठीक से खातिरदारी नहीं की,
सूरज - अगर ऐसी बात है तो एक क्वार्टर व्हिस्की मंगवा लीजिए . देखते हैं काम-धाम बाद में हो जाएगा.
लड़की- क्या एक क्वार्टर से ही काम चल जाएगा ? और जरूरत नहीं पड़ेगी ?
सूरज- बस मेरा इतना ही कोटा है, इससे ज्यादा तो मैं पी भी नहीं पाता हूँ. अरे पी खाके ड्रामा करना है कि आराम से सोना है.
लड़की- इस तन्हाई में , वीरान जंगल के होटल में पीने के बा अकेले सो पाओगे क्या ? क्या किसी साथी की जरूरत महसूस नहीं होगी ? मुझे नहीं लगता कि तुम इतने ज्यादा सीधे हो . खैर, जैसा चाहो. हम तो सिर्फ सेवा कर सकते हैं .
सूरज- तो क्या यहाँ पर ये सुविधा भी उपलब्ध है ? उसके लिए तो हार्ड किस ही देने होंगे न ?
लड़की - यहाँ न सही मगर दुनिया में हर चीज उपलब्ध है. आप सिर्फ आदेश करिये, उसे मुहैया कराने की जिम्मेदारी हमारी है. हम आसपास के इलाकों से खूबसूरत कन्या का बंदोबस्त करा देंगे. उसकी फीस आपके बिल में लगा लेंगे .
सूरज- वैसे कितनी फीस लेती होगी लड़की ? एक आइडिया रहेगा तो अच्छा होगा.
लड़की - तुम्हारे बजट में ही रहेगी बाबा. क्यों टेंशन लेते हो ? ५०० से लेकर ५ लाख तक का माल है. मगर ५ लाख वाली के भी तुम्हें ५०० ही देने होंगे. तुम आदमीज़रा अच्छे लगे , इसके लिए ये रियायत दे रही हूँ.
सूरज- ५ लाख ? सिर्फ एक रात के ? भला वे कौन सी लडकियां होती हैं ? क्या वे सोने से जड़ी होती हैं ?
लड़की- सोने से नहीं हीरों से कहो, उनकी देह के सामने सोना -चांदी तो क्या हीरों की चमक भी फीकी पद जाती है. ५ लाख एक रात के मांगने वाली लड़की आपके सामने बैठी है , और आप चाहें तो आपके लिए अवैलेवल है.
सूरज- कक्क्क क्या.......क्या कह रही हैं आप / आप भला ऐसा काम क्यों करेंगी ? आप तो ५ लाख ?????
लड़की- अरे रे .. . घबराते क्यों हो ? तुम ५०० ही दे देना . कोई बात नहीं , पहली ही नजर में तुम मुझे पसंद आ गए हो इसलिए यह छोट दे रही हूँ , बताया इसलिए क्योंकि तुम्हारे दिमाग में इससे सम्बंधित सवाल घूम रहे थे .
अब समझ में आया कि मैं क्वार्टर या अद्धा के बारे में क्यों पूछ रही थी ? क्योंकि तुम्हारी रूम पार्टनर को भी तो मदहोशी की जरूरत पड़ेगी ही न .
सूरज- समझ गया.तो ऐसा करो, एक बोतल पूरी मंगा लेते हैं , अगर बच गयी तो मेरी तरफ से आप रख लेना इमरजेंसी मी किसीके काम आ जायेगी .
लड़की- रात के दौरान और क्या -क्या पसंद करेंगे आप ? अगर डांस के शौक़ीन हैं तो फिर उस तरह की मफ्फिल सजाई जाए. और अगर कोई और शौक रखते हैं तो वो किया जाए.
सूरज- तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हारे रहते किसी और चीज की जरूरत ही नहीं है. सच कहता हूँ. तुम खुद ही परियों की रानी नजर आती हो.
लड़की- तारीफ़ के लिए शुक्रिया और अगर आपको यह नाचीज पसंद आ ही गयी है तो फिर आज आपको हम खुद नृत्य दिखाते हैं. आप आजके हमारे खास मेहमान हैं.
Friday, December 24, 2010
बेवफा खंडहर वाली
सूरज ने बहुत कोशिश की थी कि सूरज ढलने से पहले ही घर पहुँच जाए लेकिन खटारा मोटरसाइकिल ने साथ ही नहीं दिया. सूरज को अक्सर वह धोखा देती रहती थी लेकिन उसने उसे बदलने की कभी कोशिश
नहीं की, कभी सोचा भी नहीं , क्योंकि वह बाइक उसके लिए बड़ी लकी भी थी . जब भी वह गाँव से शहर जाता , रास्ते में उसे किसी न किसी महिला को लिफ्ट देने का मोका मिल ही जाता था. वह उससे सटकर
असीम सुख की अनुभूति प्राप्त किया करता था . सूरज अभी तक कुंवारा था और कोरा भी . बहुत प्रयास करने पर भी वह ऐसी एक भी लड़की को नहीं पटा पाया था जों उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बाना सके या फिर
उसके काँधे पर सिर रखकर प्यार का इजहार कर सके. रोमांटिक फ़िल्में देख-देखकर ही वह अपने मन को तसल्ली दे लिया करता था . उसके एक साथी ने उसे एक ऐसी किताब लाकर दी थी , जिसमे महिला और पुरुषों
के आपत्तिजनक रंगीन फोटो थे. कुछ तस्बीरों में महिला को कई -कई पुरुषों के साथ अवैध सम्बन्ध बनाते हुए दर्शाया गया था . उसका जी चाहता कि काश , उसे भी कोई ऐसी हसीना मिल जाए जों ज्यादा हसीन न हो
तब भी चलेगा , मगर उसे चाहने वाली हो, उससे प्यार करने वाली हो . ज़रा रंगीन मिजाज की हो जों उसकी रंगीनमिजाजी को सहन कर सके, उसके साथ ऐसे सम्बन्ध बना सके जैसे तस्बीरों में दर्शाये गए थी. जब उसे
कोई काम नहीं होता तब भी वह अक्सर अपनी बाइक लेकर रास्ते में निकल जाता था , और शहर से अक्सर शाम के समय लौटता ताकि सब वाहन बंद हो जाएँ और इसका फ़ायदा उठाकर वह किसी महिला को लिफ्ट दे सके.
कभी -कभी उसका तुक्का फिट भी बैठ जाता था मगर बात आगे बढ़ नहीं पाती थी. वह चाहकर भी कोई चाहने वाली लड़की की तलाश नहीं कर पाया था. आज सुबह ही वह घर से सौ किलोमीटर दूर एक रिश्तेदारी में गया था,
वैसे तो वह उसकी दूर की रिश्तेदारी थी मगर सुन रखा था कि उस घर में कई जवान लड़कियां हैं. दरअसल वह अपने मामा के लड़के की ससुराल गया हुआ था. रिश्ते के लिहाज से वहाँ पर उसकी भी ससुराल थी इसलिए
लड़कियों से मजाक करना गाँव के लिहाज से उसका हक बनता था मगर वहाँ जाकर भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ. वह जिस घर गया था उस घर की सभी लडकियां कहीं दूर शादी में गयी हुई थीं, उसने शाम तक इतजार भी किया मगर
कोई फायदा नहीं हुआ. पटा चला कि घर के सदस्य कुछ दिन बाद ही लौटकर आने वाले थक हारकर उसने निर्णय लिया कि घर से शाम के समय निकलेगा ताकि कोई आने वाला होगा तो शाम तक आ आज्येगा और अगर कोई नहीं
भी आया तो रास्ते में उसे किसी महिला के मिलने की उम्मीद थी. हांलाकि इससे पहले सुबह से ही वह अपने मन को ,मनाने की कोशिश कर रहा था. मगर कुछ हुआ नहीं. वह हार गया . मन कहता था कि घर से जल्दी
निकालना चाहिए ताकि शाम होने से पहले घर तक पहुंचा जा सके , लेकिन दिल माने तब न. मन में विचार आते कि रात के समय चोर उचक्के मिल सकते हैं. वह सोचता कि अगर मिल भी गए तो उसका क्या बिगाड़ लेंगे ,
उसके पास न तो कोई गहना है और ना ज्यादा रुपये . ज्यादा से ज्यादा उसकी बाइक छीन लेंगे , तो क्या फर्क पड़ता है. उसकी बाइक का बीमा था. इस तारह वह ना चाहते हुए भी शाम के समय उस घर से निकला . धीरे-
धीरे सूर्य की किरणें विदा हो रही थी. सूरज की बाइक चलने का नाम ही नहीं ले रही थी. किसी तारह स्टार्ट होकर वह उसे आगे बढाता भी तो दो चार किलोमीटर चलकर वह फिर रुक जाती थी. इसी तरह उसे रात हो गयी . उस
सड़क पर नीम अन्धेरा था, वह सड़क भी बड़ी ऊबड़ -खाबड थी, उस पर मोटी -मोटी पथरी पडी हुई थी, शायद उसे बनाने की धीमी सी कोशिश चल रही थी. मौसम का मिजाज भी बिगडा हुआ था. सड़क पूरी तरह से सुनसान थी
.हाँ, कभी कभार कोई वाहन आता भी तो बिना रुके निकल जाता था. बिजली कडकने लगी थी. बिजली की चमक में उसे एक विशाल महल दिखाई दिया . उसे लगा , जरूर कोई होटल होगा, उसने मुश्किल से बाइक को धकेला
और उसकी तरफ बढ़ने लगा . जब दूसरे बार बिजली चमकी तब उसे ज्ञात हुआ कि वह गलत दिशा की तारफ चल रहा था. रोशनी के कारण उसने सही राह पकड़ी. उसे बाइक खींचते हुए पसीने आ गए थी. जैसे -तैसे करके गेट तक पहुंचा .
पार्किंग में और कोई गाड़ी नहीं थी. उसने अपनी बाइक पार्क करदी और और दरबान पर एक निगाह घुमाते हुए अंदर प्रवेश कर गया. काउंटर पर एक महिला बैठी थी. उसे देखकर वह चौंका , क्यंकि रात के समय रास्ते के किनारे चलने वाले
होटलों में उसने कभी भी महिला नहीं देखी थी. उसने सवाल किया -
-यहाँ रात गुजारने को कमरा किराए पर मिल सकता है क्या ?
लड़की- हाँ, क्यों नहीं ? आप चाहें तो दिन भी गुजार सकते हैं. हमें तो सिर्फ किराए से मतलब होता है.
सूरज- जी, सो तो ठीक है. दरअसल मैं पड़ोस के गाँव से आ रहा हूँ, अचानक मेरी बाइक खराब हो गयी और अब नजदीक कोई गैरेज भी दिखाई नहीं दे रहा है तो सोचा कि आज रात यहीं विश्राम करलूं . आप क्रेडिट कार्ड से पेमेंट
स्वीकार करते हैं क्या ? क्योंकि मैं कैश नहीं ला पाया. अगर आसपास कोई एटीएम हो तो भी काम चल सकता है,
लड़की - तुम पेमेंट की फ़िक्र क्यों करते हो ? वो तो हम ले ही लेंगे, हमारा ध्यान पेमेंट पर कम और सेवा पर ज्यादा होता है.
सूरज- शुक्रिया, ये तो अच्छी बात है मगर माफ कीजिये , इसके बावजूद आपके यहाँ उतने ग्राहक दिखाई नहीं देते. मैंने देखा कि यहाँ पर एक भी गाड़ी पार्क नहीं की गयी है .
लड़की - हाँ बात आपकी भी सही है . देखो, मौत और ग्राहक का कोई भरोसा नहीं होता. कौन कब आ जाए ?
सूरज - जी ... मौत ? ग्राहक ?
लड़की - हाँ, मेरा मतलब था कि कभी -कभी ऐसा हाल होता है कि ग्राहक शिकायत करते हैं कि उनकी गाड़ी पार्क करने के लिए जगह उपलब्ध नहीं है और कभीकभी ये हाल है कि आप शिकायत करते हैं कि गाडियां ही नहीं हैं.
Thursday, December 23, 2010
तन्हाई -20
सलीम- तुम्हारे मामले में कैसे बदल गया ? तुम भी तो कुदरत के क़ानून के खिलाफ ही इस शरीर में जीवित हो ?
शालिनी- यह बदला नहीं गया बल्कि कुदरत ने अपने क़ानून में थोड़ा सा संसोधन कर दिया है. मेरे सच्चे प्यार को देखते हुए मुझे कुछ शर्तों के साथ यह रियायत दी गयी है. अब तो यही तरीका है कि जब कभी फिर से हम इंसान बनेंगे तो
मुलाक़ात होगी . मैं भी इस मिलन के लिए प्रार्थना करूंगी और अगर तुम्हें मेरा साथ अच्छा लगा हो तो तुम भी कर सकते हो.
सलीम- यह क्या कह रही हो ? ऐसा न कहो प्लीज, मैं प्यार करता हूँ तुमसे. हमारी -तुम्हारी यह मोहब्बात हाल -फिलहाल की तो है नहीं .
शालिनी- बस सलीम . और अब मुझे कुछ नहीं चाहिए.
सलीम- मैं भी धन्य हो गया हूँ तुमसे प्यार करके, तुम्हारा सानिध्य पाकर देवता भी खुशी का अनुभव करेंगे .
शालिनी- मैं सिर्फ इतना समझती हूँ कि मेरा जों कुछ भी है वह तुम ही हो.मेरा अस्तित्व तुमसे हैं, मेरा यह छोटा सा जीवन भी तुम्हीं से है . जब तुम्हारी इच्छा ऐसी है कि तुम धरती पर जाकर अपने अन्य सगे सम्बन्धियों के साथ रहो तो इसमें मैं क्या कर
सकती हूँ, मुझे तो सम्मान करना होगा तुम्हारी हर इच्छा का. जैसा भी चाहोगे मैं तो साथ ही देने वाली हूँ. हाँ ही करने वाली हूँ . और सुनो, मुझे अपने प्यार भी बेहद भरोसा है. मैं जानती हूँ कि एक न एक दिन ऐसा अवश्य
आएगा जब तुम और हम साथ-साथ जीवन बसर करेंगे . चाहे प्रथ्वी पर करें या किसी और गृह पर. हाँ, इसमें भी आपकी राजी का सवाल उठता है . अगर तुम्हें भी मुझसे सच्चा प्रेम होगा तभी हमारा यह मिशन पूरा हो पायेगा .
कहा भी गया है कि दो सच्चा प्यार करने वालों को सारी कायनात मिलाने में लग जाती है. तो हम भी इसका अपवाद नहीं रहेंगे .
सलीम- बिलकुल शालिनी. जरूर ऐसा ही होगा. मैं जानता हूँ कि ऊपर वाले को हमारे प्यार और इन्तजार पर जरूर तरस आएगा. भले ही मैं धरती पर आकर तुम्हारे प्रेम को भूल गया था शालिनी , लेकिन अब मुझे सब कुछ
याद आ गया है. मैं भी तुम्हारी खातिर इतना ही तरसा हूँ जितनी कि मेरे लिए तुम परेशान हुई हो. मगर आखिर में जीत तो आपकी ही हुई ना. सब नियम-क़ानून धरे रह गए. प्यार की शक्ति एक तरफ और बाकी सब शक्तियां
एक तरफ .
सलीम -तुम धन्य हो शालिनी. तुमने प्यार का झंडा अकेली ही बुलंद करके रखा.
शालिनी - इसके लिए भी धन्यवाद का पात्र अगर कोई है तो वो तुम हो. तुम्हारे प्रेम में ऐसी कशिश है है जों मुझे अभी तक तुमसे जोड़े रखी , वरना मेरी अकेली की ऐसी ताकत नहीं थी जों मैं अब तक तुम्हारी राह ताक पाती .
कुछ ऐसा कहास आकर्षण , कोई ऐसा जादू तुम्हारे व्यक्तित्व में है जों तुम्हें सबसे अलग और खास बनाता है.
सलीम- तुम जितनी प्यारी हो , बातें उससे भी प्यारी-प्यारी करती हो. काश, हम -तुम एक जैसे हो पाते . अब या तो तुम शरीर में आ जाओ और या फिर मुझे भी जिस्म से जुदा करके अपने आप से जोड़ लों.
शालिनी- नहीं सलीम. ऐसा कुछ नहीं हो पायेगा. सब कुछ हमारे हाथ में नहीं होता . इन दोनों में से कुछ भी संभव नहीं है. न तो मुझे यह शरीर ज्यादा समय के लिए मिल सकता है और ना ही मैं तुमसे तुम्हारा
यह प्यारा शरीर ही छीन सकती हूँ. आखिर प्यार किया है , कोई मजाक नहीं. अपने स्वार्थ के लिए मैं तुमसे तुम्हारा प्रथ्वी का शानदार जीवन नहीं छीन सकती हूँ.
सलीम- मगर मैं अब किसी भी हदतक जा सकता हूँ. एक नहीं ऐसे हजारों जिस्म तुम पट न्यौछावर कर सकता हूँ. ताकि तुम्हारे प्यार का थोड़ा सा क़र्ज़ उतार सकूं.
शालिनी- ऐसा कभी मत कहना सलीम. मैंने तुमसे प्यार किया इसमें कोई खास बात नहीं है. एहसान जैसा तो कुछ भी नहीं. मुझे तुम अच्छे लगे और तुम्हारा साथ ज्यादा अच्छा लगा तो अपने स्वार्थ के लिए मैं अब तक
मरकर भी मर नहीं पाई. इसमें कौन सी बड़ी बात है.
सलीम- मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता शालिनी/ एक पल भी तनहा नहीं रह सकता.
शालिनी- अब तुम्हें तन्हाइयों की आदत डालनी होगी सलीम, तुम्हारे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद अब मेरी जिस्मानी प्यास बुझ चुकी हैं. जब तुमने भी प्यार का इजहार कर दिया तो आत्मिक भूख भी मिट चुकी
है. अब मुझे कोई आरज़ू नहीं रही. तुमसे मिलन हुआ तो सब कुछ ठीक हो गया.
सलीम- तो क्या मुझे छोड़कर चली जाओगी ?
शालिनी- नहीं, बिलकुल नहीं. भला मैं तुम्हें कैसे छोड़ सकती हूँ. जहा भी रहूंगी, तुम्हें याद करती रहूंगी .
सलीम- ऐसा मत कहो शालिनी. मैं शायद मर जाउंगा . जी नहीं पाउँगा तुम्हारे बिना.
शालिनी- बाय , बाय मेरे सलीम. विदा....
सलीम को जोर का झटका लगा . उसने अपने आपको जमीं पर पाया . कहीं पर कोई महल नहीं था. शालिनी भी नहीं था. वह तनहा खडा था .
-------समाप्त ...........
कल से पढ़ें एक और मजेदार धारावाहिक कहानी
Wednesday, December 22, 2010
तन्हाई -19
शालिनी- बड़ा उपकार होगा , अगर ऐसा हो जाए तो मेरा आत्मा का भटकाव ही रुक जाए. बड़ी मुश्किल से ये सफर चल रहा है.
सलीम- मेरी आत्मा मुझे वापस करदो शालिनी, मेरे लिए नहीं, अपने हित के लिए,. अपने सम्पूर्ण सुख और संतुष्टि के लिए . ताकि मैं तुम्हें आनंद के सागर से परिचित करा सकूं.
शालिनी- हाँ, मैं ऐसा ही करूंगी. थोड़ा सा सुख और आने दो, तब मैं तुम्हें तुम्हारी आत्मा लौटा दूंगी . आह, मजा आ रहा है. ज़रा जोर-जोर से हमले करने शुरू करदो.
सलीम- चिंता मत करो, मैं ऐसे प्रहार करूँगा कि हमेशा के लिए तुम्हारी तकलीफ का अंत हो जाएगा . मगर एक वादा करो मेरी जान .
इस महान सुख को लूटने के बाद तुम मेरी आत्मा के साथ-साथ उस लड़की के जिस्म को भी मुक्त कर दोगी .
शालिनी - हाँ, मगर तुम्हें तकलीफ हो जायेगी . जब उस लड़की की मौत हुई तो अंतिम समय तुम्हें उसके साथ थे, पुलिस समझेगी कि तुम्हीने उसका क़त्ल किया है.
सलीम - मैं खुद अपने आपको पुलिस के हवाले कर दूंगा . आखिर जीत तो सच्चाई की ही होती है.मैं जानता हूँ मुझे कुछ नहीं होगा. सब कुछ ठीक हो जाएगा , मैं कह दूंगा किए एक भटकती हुई आत्मा ने इस जिस्म में प्रवेश कर गयी
थी, यह भी बतला दूंगा कि इस लड़की का आख़िरी वक्त आ गया था, तभी आत्मा ने इसको इस्तेमाल किया.
शालिनी- वैरी गुड. और तुम्हें लगता है कि पुलिस आसानी से आत्मा वाली बात पर यकीन कर लेगी ? उसका पोस्टमार्टम नहीं करायेगी ? और जब रिपोर्ट आयेगी तो क्या पुलिस तुम्हें छोड़ देगी ? क्योंकि अंतिम समय में तुम ही उस लड़की
के साथ थे. क्योंकि हकीकत में उसकी मौत का जों कारण आएगा वह सिर में चोट लगना आएगा . हुआ भी यही था. तुमने ध्यान नहीं दिया. वह दीवार से बुरी तरह टकराई थी. उसका सिर फूट गया , वह मर गयी . उस वक्त मेरी आत्मा
भी वहीं थी क्यंकि मैं तुम्हारे आगे पीछे ही घूमा करती थी. तुम सबसे मिलते लेकिन किसी लड़की से नहीं मिलते थे, किसीसे प्रेम नहीं करते थे. तभी मेरा विश्वाश बढ़ गया कि जरूर तुम मेरे लिए ही बने हो. तुम सिर्फ और सिर्फ मेरे हो
मैंने उसी वक्त का फायदा उठाया , फ़ौरन उस लड़की का जिस्म धारण कर लिया , तुमने समझा कि मैं शालिनी हूँ. और मेरे साथ कहीं भी चलने के लिए रैडी हो गए. लेकिन शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय तुम मेरे उसी के साथ थे. और
तभी मुझे अवसर भी मिला था. मुझे जों अतिरिक्त शक्ति मिली है उसके मुताबिक़ मैं तभी किसी लड़की के शरीर में प्रवेश कर सकती थी , जब वह आपके साथ सहवास सुख भोग रही हो और उसी वक्त उसका कॉल आ जाए . मगर मैं किसी लड़की
को कोई तकलीफ नहीं पहुंचा सकती थी. तुम्हें उसके साथ जिस्मानी सम्बन्ध बानाते देखकर मैं भी बहुत उत्तेजित हो गयी थी, जी तो चाहा कि वहीं पर तुम्हारे साथ बदन की प्यास बुझाऊं , लेकिन फिर यह सोचकर चुप रह गयी कि अगर ऐसा किया तो
कुछ भी गडबड हो सकती थी. वहाँ पर कोई आ सकता था. तब मैंने तुम्हें अपने इस खास महल में लाना उचित समझा .
सलीम- ओह, अब समझ में आया सारा मामला. तो अब मुझे क्या करना चाहिए ? इसका आइडिया भी तुम ही दो.
शालिनी- मेरे ख़याल से यहीं पर तुम विधिपूर्वक शालिनी के मृत जिस्म का अंतिम संस्कार कर सकते हो. लेकिन यह तुम तब कर पाओगे जब मैं इसके जिस्म को मुक्त कर दूंगी. और इसे मुक्त करने के बाद फिर मैं हमेशा के लिए अद्रश्य
हो जाउंगी. फिर मेरा रोल खत्म हो जाएगा . लेकिन अब मुझे उसकी परवाह नहीं है. तुम्हारे साथ जी भरके बातें कर चुकी हूँ. शालिनी के जिस्म एके बदौलत ही सही तुम्हारे साथ जिस्मानी सुख भी भोग चुकी हूँ. बस ये समझलो कि मेरी अंदरूनी
हसरतें अब फना हो चुकी हैं. अब मुझे कोई तमन्ना नहीं रही.
सलीम- क्या कोई और रास्ता नहीं है , जों तुम्हें और हमें आम इंसान की तारह रख सके. ?
शालिनी- फिलहाल तो संभव नहीं है. कुदरत के बनाए क़ानून को बदला नहीं जा सकता.
सलीम- तुम्हारे मामले में कैसे बदल गया ? तुम भी तो कुदरत के क़ानून के खिलाफ ही इस शरीर में जीवित हो ?
शालिनी- यह बदला नहीं गया बल्कि कुदरत ने अपने क़ानून में थोड़ा सा संसोधन कर दिया है. मेरे सच्चे प्यार को देखते हुए मुझे कुछ शर्तों के साथ यह रियायत दी गयी है. अब तो यही तरीका है कि जब कभी फिर से हम इंसान बनेंगे तो
मुलाक़ात होगी . मैं भी इस मिलन के लिए प्रार्थना करूंगी और अगर तुम्हें मेरा साथ अच्छा लगा हो तो तुम भी कर सकते हो.
सलीम- यह क्या कह रही हो ? ऐसा न कहो प्लीज, मैं प्यार करता हूँ तुमसे. हमारी -तुम्हारी यह मोहब्बात हाल -फिलहाल की तो है नहीं .
शालिनी- बस सलीम . और अब मुझे कुछ नहीं चाहिए.
सलीम- मैं भी धन्य हो गया हूँ तुमसे प्यार करके, तुम्हारा सानिध्य पाकर देवता भी खुशी का अनुभव करेंगे .
शालिनी- मैं सिर्फ इतना समझती हूँ कि मेरा जों कुछ भी है वह तुम ही हो.
Tuesday, December 21, 2010
तन्हाई -१८
शालिनी- हां सलीम, तुम्हारी आवाज को मालिक सुन रहा है. मालिक अपने हर बच्चे की हर जरूरत को पूरा करता है, हमें भी निराशा नहीं देगा .
सलीम- तुम जैसी भी हो मेरी अपनी हो शालिनी. इस वक्त तुम जसी लड़की के बदन में हो, उसे भी मुक्ति चाहिए . इस तरह ज्यादा दिनों तक उसके शरीर का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है. अगर तुम चाहो तो इसके लिए मैं
उप्लाब्ध हूँ, तुम मेरा जिस्म लेकर अपनी बची हुई लाइफ पूरी कर सकती हो. मैं तुम्हें इस इस जिस्म को समर्पित करता हूँ.
शालिनी- तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है सलीम, तुम कल भी अच्छे इंसान थे , शायद कल भी अच्छे भी रहोगे .
सलीम- आई लव यू शालिनी.
शालिनी- ओह मेरे सलीम, इन्हीं शब्दों को सुनने के लिए कबसे मेरे कान तरस रहे थे. रेगिस्तान में तपती दोपहरी में अगर कोई नंगे पाँव दौड रहा हो और उसे ठंडी छाँव में बिठाकर शीतल जल दे दिया जाए उसके पांवों की प्यार के
साथ बर्फ से मालिश कर दी जाए. अब तक तो इस दिल को तन्हाई की आग जला रही थी, विरह का तूफ़ान मेरे अस्तित्व को तितर -बितर कर रहा था लेकिन अब सब कुछ ठीक ठाक हो गया है. तुम मेरे लिए संजीवन बूटी बनकर
आये हो, आते ही भोले दिल पर बादलों की तरह छाये हो.
सलीम- वाह, वाह क्या कातिलाना अंदाज़ है. क्या बात है, खूब शायरी की है. क्या उस जमाने में भी शायर हुआ करते थे ? अरे भूल गया. उसी दौर में तो शायरी ज्यादा होती थी.
सलीम की आँखों में वासना की सुर्खी साफ़ झलकने लगी थी. उसका खास अंग भी सख्त होकर नाग की तरह फन फैलाने लगा. जिस्म से अंगड़ाई उठने लगी. शालिनी उसके शरीर के विशेष अंग को आहिस्ता -आहिस्ता सहला
रही थी , कभी-कभी वह उसे चूम भी लेती थी. यही अवसर ऐसा होता था जब सलीम बिलकुल पागल जैसा हो जाया करता था. उसकी इच्छा होती कि शालिनी के ऊपर हावी हो जाए , मगर कुछ सोचकर फिर ढीला पद जाया
करता था. शालिनी उसको उकसा रही थी मगर सलीम के मन में जैसे ही यह ख़याल आता कि शालिनी जीवित लड़की का नाम नहीं है बल्कि वह किसी मृत लड़की के जिस्म में समाई हुई है, सलीम के इरादे कमजोर हो जाते थे.
शालिनी भी उसकी झिझक से अपरिचित नहीं थी. वह जानती थी कि सलीम के मन में कुछ उलझन हो रही है. तभी उसने खुद पहल करते हुए कहा-
-क्या सोच रहे हो सलीम ? मोहब्बत सिर्फ जिस्म से ही नहीं होती, इसका ताल्लुकात आत्मा से भी होता है.
सलीम- बहुत सी बातें ऐसी हैं जों आपसे सीखने को मिल रही हैं.प्यार की परिभाषा भी ठीक से से सीख पा रहा हूँ, अगर तुमसे मुलाक़ात नहीं होती तो मेरा जीवन अनुभव भी अधूरा ही रह जाता .
शालिनी- और मेरा तो जीवन ही अधूरा था. अब शायद कोई गिला -शिकवा नहीं रह पायेगा . मुझे तडपाना बंद कर दीजिए . मैं अब सहन नहीं कर पा रही हूँ. आओ न मेरे करीब आ जाओ , इतने करीब कि फिर कोई दूरी ही न रहे.
सलीम अब उसके आमंत्रण को समझ चूका था. उसने शालिनी के सीने की गोलाइयों को दबाना शुरू कर दिया, वह हंस रही थी. उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. अब वह भी अपने मन की भड़ास निकालने लगी थी .वह सलीम
समूचे जिस्म से प्रेम करने लगी. दोनों ही निर्वस्त्र थे. सलीम ने हिम्मत करके उसे अपने आगोश में ले लिया और अपना विशेष अंग उसके यौवन द्वार से सटा दिया. कुछ देर बाद ही वे दोनों कामोत्तेजक सिउस्कियां भर रहे थे. सलीम ने
प्रहार करना शुरू कर दिया था. शालिनी पर वासना का नशा छा चुका था. सलीम ने पूछा-
-कैसा महसूस कर रही हो मेरी जान ?
शालिनी- अदभुत, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी. ऐसा लगता है जैसे सारी दुनिया का सुख सिर्फ मुझे ही नसीब हो रहा है. शायद मैं तृप्त हो रही हूँ.
सलीम- मैं तुम्हारी आत्मा को हमेशा के लिए सुख और संतुष्टि से भर देना चाहता हूँ, ताकि कोई ख्वाहिश बाकी ही नहीं रह पाए.
शालिनी- बड़ा उपकार होगा , अगर ऐसा हो जाए तो मेरा आत्मा का भटकाव ही रुक जाए. बड़ी मुश्किल से ये सफर चल रहा है.
सलीम- मेरी आत्मा मुझे वापस करदो शालिनी, मेरे लिए नहीं, अपने हित के लिए,. अपने सम्पूर्ण सुख और संतुष्टि के लिए . ताकि मैं तुम्हें आनंद के सागर से परिचित करा सकूं.
शालिनी- हाँ, मैं ऐसा ही करूंगी. थोड़ा सा सुख और आने दो, तब मैं तुम्हें तुम्हारी आत्मा लौटा दूंगी . आह, मजा आ रहा है. ज़रा जोर-जोर से हमले करने शुरू करदो.
सलीम- चिंता मत करो, मैं ऐसे प्रहार करूँगा कि हमेशा के लिए तुम्हारी तकलीफ का अंत हो जाएगा . मगर एक वादा करो मेरी जान .
इस महान सुख को लूटने के बाद तुम मेरी आत्मा के साथ-साथ उस लड़की के जिस्म को भी मुक्त कर दोगी .
शालिनी - हाँ, मगर तुम्हें तकलीफ हो जायेगी . जब उस लड़की की मौत हुई तो अंतिम समय तुम्हें उसके साथ थे, पुलिस समझेगी कि तुम्हीने उसका क़त्ल किया है.
सलीम - मैं खुद अपने आपको पुलिस के हवाले कर दूंगा . आखिर जीत तो सच्चाई की ही होती है.
Sunday, December 19, 2010
तन्हाई , भाग-१6
मगर तभी वो अनहोनी हुई जिसने मेरी जिंदगी को नर्क से भी बदतर बना दिया ,
सलीम- ऐसा क्या हुआ था शालिनी ?
शालिनी- जासूसों ने तुम्हें मुझसे मिलते हुए देख लिया था. वे जान चुके थे कि तुम महिला नहीं पुरुष हो और वही हो जिस पर राजा ने बहुत बड़ा इनाम रखा था . पद और इनाम के लालच में जासूसों ने सैनिको तक यह सूचना
पहुंचा दी और तुम्हें मेरी आँखों के सामने क़त्ल कर दिया गया. एक साथ कई तलवारें चमकी जों तुम्हारे जिस्म को चीरती चली गयीं. मैं हक्का-बका थी. मुझे कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला था. फिर भी मैंने वो कटार एक सैनिक
के गली में घुसेड दी , जों लास्ट तक तुम्हारे पेट में तलवार भोंके हुए था. वह तुम्हारे पेट से तलवार निकालने के लिए कोशिश कर रहा था मगर वह शायद बुरी तरह फंस गयी थी . वह कराहता हुआ वहीं पर ढेर हो गया . मेरी सुरक्षा
में जों महिला सैनिक तैनात थीं, मैंने उनसे अपने सैनिकों से लड़ने का हम दिया . वे भीड़ गयी और जीतीं भीं. वाहन पर जितने भी सैनिकों ने तुम पर हमला किया था मैंने उन सबको मौत के घाट उतार दिया था . तुमको लेकर
मैं वैध के पास गयी मगर तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ चुके थे , मैंने भी उसी पल ऐसा फैसला लिया जों बहुत कम लड़किया लेती हैं. मैं तुम्हारे बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती थी. क्योंकि जब बचपन में हम दोनों खेला करते
थे उसी समय हम लोगों ने यह फैसला कर लिया था कि जियेंगे तो साथ -साथ और यदि मरना पड़ा तो भी साथ-साथ. तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ते देख मेरे होश गुम हो गए. मैंने तलवार उठाली और तुम पर हमला करने वाले जों सैनिक
धरती पर पड़े मौत की राह देख रहे थे उसके टुकड़े करने शुरू कर दिए . मैं पगला चुकी थी , मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. ठीक तभी मैंने अपने ही हाथों तलवार से अपनी गर्दन काट डाली, यह प्रहार बहुत खतरनाक था. इतना ज्यादा
कि थोड़ी देर तडपने के बाद मेरी सांस थम गयी. मगर मेरी रूह नहीं निकल पाई. तभी से मेरी आत्मा भटक रही है. मैंने और तुमने साथ-साथ यह वादा किया था कि इस जन्म में नहीं मिल पाए तो फिर किसी जन्म में मिलेंगे , मैंने
तुम्हारे लिए बहुत तपस्याएँ की थी , शायद इसी कारण मुझे कुछ शक्तियां दे दी गयीं हैं. इस शर्त के साथ कि मैं किसीका अहित नहीं करूंगी , यह सच है कि अभिषेक की शादी में तुम जिस लड़की से मिले थे वह कोई दूसरी लड़की थी
लेकिन यह भी मानिए कि मैंने उसका कोई अहित नहीं किया , उसका समय पूरा हो चूका था . मैंने सिर्फ उसका रूप धारण किया है,क्योंकि वह लड़की तुम्हें उसी रूप में पसंद थी और दुर्भाग्य से मेरे पास अपना कोई आकार नहीं है .
सलीम- ओह, मेरे कारण तुमने उस जन्म में इतने दुःख उठाये , अपनी जान की बाजी भी लगादी . मैं हैरत में हूँ.
शालिनी -मैंने तो जान की बाज़ी बाद में लगाई , पहले तो तुम ही अपनी जान को हथेली पर रखकर लाये थे .
सलीम- कोई बात नहीं शालिनी, वह तब की बात थी. तुम तो जानती हो कि मेरा इस जन्म का भरा पूरा परिवार है, जब वे लोग मुझे अपने बीच नहीं पायेंगे तो उनको बड़ी तकलीफ होगी , मुझे न जाने कितने जन्मों के बाद
यह इंसान का जन्म मिला है , इसको इस तरह बर्बाद मत होने दो. जब मेरी भी धरती पर से रवानगी होने को हो तब अपने पास बुला लेना.
शालिनी- मुझे निराश मत करो सलीम, मैं बहुत तडपी हूँ तुम्हारा प्यार पाने के लिए .
सलीम- हम और तुम अपने स्वार्थ के लिए किसी और का नुक्सान नहीं कर सकते , तुम्हें भी इसी शर्त के साथ कुछ शक्तियां दी गयी हैं कि तुम किसीका अहित नहीं करोगी .
शालिनी -इसीलिए तो मैं निवेदन कर रही हूँ तुमसे. चाहती हूँ कि तुम अपनी स्वेच्छा से मेरे साथ रहना कबूल करो . तुम्हारे बिना मैं बड़ी बेचैन हूँ.
सलीम- ठीक है , मगर उससे पहले मुझे कुछ जरूरी काम करने होंगे, मेरी कुछ जिम्मेदारियां हैं, उनको निभा लेने दो. फिर मैं खुद चला आउंगा .
शालिनी- वादा रहा ? क्या मैं इसे अपने सलीम का वादा समझूं ?
सलीम- जी हाँ, जब मैं उस जन्म में तुम पर अपनी जान कुर्बान सकता हूँ तो इस जन्म में सौ जान भी कुर्बान कर सकता हूँ.
शालिनी ने उसे बांहों में भरकर चूम लिया , सलीम ने उसके होठों का रसास्वादन करना शुरू कर दिया. वे दोनों प्यार की पींगें बढ़ाने लगे , सलीम को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि वे दोनों सदियों के बिछड़े हुए प्रेमी हैं और
एक बार फिर सदियों के लिए दूर होने वाले हैं. सलीम ने शालिनी के अंग से एक -एक करके सारे वस्त्र उतार दिए और उसके अंग -प्रत्यंग को चूमने लगा .शालिनी बोली-
- शायद इसी तड़प को दूर करने के लिए अब तक मैं भटक रही हूँ.
सलीम- हद से ज्यादा कुछ भी चीज ठीक नहीं होती मेरी जान, मेरे ख़याल से हम दोनों इतनी ज्यादा मोहबब्त करते थे , जितनी कोई किसीसे नहीं करता. तभी हम लोगों का यह हाल हुआ है. तुम्हें ज्यादा तकलीफ हुई है .
शालिनी- हाँ, और एक बात यह भी ध्यान रखो कि यह मेरा और तुम्हारा पहला संगम है. इससे पहले तुमने जिसके साथ शारीरिक सुख भोगा था वह दूसरे लड़की थी.
सलीम- शायद हमारे इस संगम के बाद तुम्हें कुछ शान्ति मिले, कुछ तृप्ति मिले.
शालिनी- हाँ, मेरी जान, अब भी बहुत अच्छा लग रहा है , जब हमारा प्यार चरम पर पहुंचेगा तब क्या हालत होगी ?
Saturday, December 18, 2010
तन्हाई , भाग-१5
साथ में खेलते थे , एक दूसरे को काफी पसंद करते थे. बचपन में ही हम दोनों ने तय कर लिया था कि बड़े होकर हम साथ-साथ जीवन बिताएंगे . मगर दुर्भाग्य से हमारे परिवारों के बीच आपसी तनाव हो गया . इस तनाव ने जल्दी ही शत्रुता
का रूप धारण कर लिया. तुम मुझे चाहते थे औरकिसी भी कीमत पर मुझे पाना चाहते थे. तुम अपने पिता .अपने देश से बढ़कर मुझसे प्यार करते थे. मैं भी तुम्हें उतनी ही शिद्दत से चाहती थी लेकिन हमारा मिलन नहीं हो पाया .
सलीम- यह सब मुझे यादद क्यों नहीं आ रहा ?
शालिनी- क्योंकि तुम याद करना नहीं चाहते, तुम्हें तो बस संदेह से ही फुर्सत नहीं है.
सलीम- फिर उसके बाद क्या हुआ था ?
शालिनी- एक दिन तुमने बगावत कर दी . अपने परिवार से बगावत पर उतारू हो गए और ... और फिर वो हो गया जिसकी किसीने उम्मीद भी नहीं की थी ... तुम भी कुछ दिमाग पर जोर डालोगे या फिर मैं ही बकती रहूंगी .
सलीम- मैं कह चुका हूँ कि मुझे स्पष्ट कुछ याद नहीं आ रहा . भले ही मेरे जिस्म के अंदर तुम्हारी आत्मा वास कर चुकी है मगर दिल और दिमाग तो मेरा अपना ही है न. मैं अच्छी तरह सोच और समझ सकता हूँ.
शालिनी- इससे यह साबित होता है कि मै तुम्हें कोई तकलीफ नहीं पहुंचाना चाहती , बल्कि तुमसे मोहब्बत करती हूँ और जी जान से मरती हूँ. मुझे अगर सइरफ तुम्हारे जिस्म से हे लगाव होता तो तुम्हें पुरानी बातें भुलाकर ही
हासिल कर सकती थी. मगर ऐसा बिलकुल नहीं है. मैं हवासी नहीं हूँ. जों हवस के पुजारी होते हैं वे अपनी कामोत्तेजना को शांत करने के लिए किसी भी हद तक गुजर जाते हैं. वे लोग अपने चाहने वालों की हाव्नाओं का ख्याल नहीं रखते.
सलीम- तो आपके पास ऐसी शक्तियां मौजूधें, जिनके बल पर कुछ भी किया जा सकता है ?
शालिनी- सब कुछ तो नहीं लेकिन हाँ, आहूत कुछ किया जा सकता है.
सलीम- तो , आप तो जिसको चाहें यहाँ बुला सकती हैं. मैं तो एक नाचीज हूँ, ज्यादा सुन्दर भी नहीं, ताकतवर भी नहीं . आप किसी और को यहाँ क्यों नहीं बुला लेतीं , मुझे मेरी दुनिया में भेज दीजिए प्लीज. मैं यहाँ पर नहीं रहना चाहता.
शालिनी- क्योंकि हम पुराने प्रेमी हैं. हमने वादा किया था कि किसी न किसी जन्म में सही मगर हम मिलेंगे जरूर . आ हमारे मिलने का वक्त आ गया है. तुम मुझे बडी मुश्किल से मिले हो. मैं तुम्हें कैसे नजरअंदाज कर सकता हूँ ?
सलीम- मुझे उस जन्म की पूरी कहानी बताइये , उस समय मैंने ऐसा क्या किया था जों अप्रत्याशित था ?
शालिनी- तुमने मेरी मोहब्बत की खातिर अपने देश के साथ गद्दारी कर डाली. तुमने अपने राजा पिता के आदेश का उल्लंघन किया और हमारे देश चले आये. तुम्हारा यह कदम इसलिए आत्मघाती था क्योंकि तुम्हारे अपने देश की सीमा
को पार करना भी खतरनाक और था और हमारे देश की सीमा में घुसना उससे भी ज्यादा खतरनाक .
सलीम- क्या इसलिए क्योंकि तुम्हारे और मेरे पिता के बीच दुश्मनी हो चुकी थी ?
शालिनी- जी हाँ, और तुम्हारे देश की सीमा पर बहुत से सैनिक तैनात कर दिए गए थे. सख्त चैकिंग की जा रही थी. तुम्हारे परिवार के किसी भी सदस्य को मौत के घाट उतारने पर इनाम घोषित किये जा रहे थे . इसके बावजूद
तुम अपनी जान हथेली पर रखकर अपने देश की सीमा को पार कर गए . कहीं भेष बदलकर तो कहीं पर लड़कर तुम हमारे राजमहल तक पहुँच गए. पूरे एक महीने तक तुम भिखारियों की तरह रहे और मुझसे मिलने का इन्तजार करने
लगे , आखिरकार एक दिन जब मैं इस बगीचे में आई तो तुम महिला के भेष में मालिन बनकर मुझसे मिले.
सलीम- ओह, क्या ता मैं तुमसे इतना प्यार करता था ?और तुम ?
शालिनी- हाँ, मैं भी तुम्हारे एक इशारे पर अपनी जान छिडकने के लिए तैयार रहती थी. तुम्हारे वियोग में मैंने खाना-पीना तक छोड़ दिया था. मैं बीमार हो गयी और डॉक्टर भी इलाज करते-करते थक गए मगर कोई फायदा नहीं हुआ.
तुम्हें देखकर मैं फिर से जी उठी थी. मुझे मेरा खोया हुआ प्यार मिल चुका तह. मैं तुमसे बहुत सी बातें करना चाहती थी .मगर तभी वो अनहोनी हुई जिसने मेरी जिंदगी को नर्क से भी बदतर बना दिया ,
सलीम- ऐसा क्या हुआ था शालिनी ?
शालिनी- जासूसों ने तुम्हें मुझसे मिलते हुए देख लिया था. वे जान चुके थे कि तुम महिला नहीं पुरुष हो और वही हो जिस पर राजा ने बहुत बड़ा इनाम रखा था . पद और इनाम के लालच में जासूसों ने सैनिको तक यह सूचना
पहुंचा दी और तुम्हें मेरी आँखों के सामने क़त्ल कर दिया गया. एक साथ कई तलवारें चमकी जों तुम्हारे जिस्म को चीरती चली गयीं. मैं हक्का-बका थी. मुझे कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला था. फिर भी मैंने वो कटार एक सैनिक
के गली में घुसेड दी , जों लास्ट तक तुम्हारे पेट में तलवार भोंके हुए था. वह तुम्हारे पेट से तलवार निकालने के लिए कोशिश कर रहा था मगर वह शायद बुरी तरह फंस गयी थी . वह कराहता हुआ वहीं पर ढेर हो गया . मेरी सुरक्षा
में जों महिला सैनिक तैनात थीं, मैंने उनसे अपने सैनिकों से लड़ने का हम दिया . वे भीड़ गयी और जीतीं भीं. वाहन पर जितने भी सैनिकों ने तुम पर हमला किया था मैंने उन सबको मौत के घाट उतार दिया था . तुमको लेकर
मैं वैध के पास गयी मगर तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ चुके थे , मैंने भी उसी पल ऐसा फैसला लिया ...
Friday, December 17, 2010
तन्हाई , भाग-१४
सलीम- कैसा वादा मेरी जां. ? हुक्म तो करो.
शालिनी - अब तुम मुझे छोड़कर यहाँ से कभी नहीं जाओगे .
सलीम- यहाँ से मतलब ? इस महल से कि इस दुनिया से ?
शालिनी- यह महल भी अपने आप में एक दुनिया है सलीम साहब. इस दुनिया को समझने की कोशिश करो. यह दुनिया बड़ी हसीन है. और इस दुनिया के मालिक तुम हो . मैं चाहती हूँ कि तुम और हम यहाँ ऐश करें .
सलीम- मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता यह सच है शालिनी. तुम मेरा प्यार हो, मेरी जिंदगी हो , मेरी , मेरी आत्मा हो .... ओह , यह क्या हो रहा है मुझे , मेरी आत्मा में ये कोई दूसरा कैसे बैठ सकता है ?
शालिनी- अब समझे ? ये मैं हूँ. मैंने तुमसे इजाजत माँगी थी तुम्हारी आत्मा में बसने की और तुम हाँ कर चुके हो. एक बार नहीं पूरे तीन बार.भूल गए क्या मेरी जान .कुछ तो याद करो.
सलीम- तो क्या मैं अब मैं नहीं रहा ? क्या अब मैं सलीम नहीं रहा ? क्या कोई दूसरे आत्मा मेरे जिस्म में समा चुकी है ? और क्या मैं ये मान लूं कि अब मैं भी ज़िंदा नहीं हूँ, मेरी भी मौत हो चुकी है ?
शालिनी- मुझे तडपाके आखिर तुम्हें क्या मिलेगा ? तुम मेरे हो सलीम , तुम मुझसे डरो मत. मैं तुम्हारी अपनी हूँ. बिछड़ी हुई प्रेमिका. अभी-अभी तो तुम याद करने की कोशिश कर रहे थे. तुमने थोड़ी देर पहले तुमने मेरे
साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये थे, तुमने ही कहा था कि यह हमारी सुहागरात है, तुमने ही तो मुझसे प्यार का इजहार किया था, मैं मना कर रही थी , तुम मेरे पीछे पड़े थे और मैं इनकार रही थी. अब मुझसे इस तरह दामन छुडा रहे हो .
मैं उस वक्त तुम्हें पहचान नहीं पाई थी और जब , अब मैंने पहचान लिया है तो तुम ठोकर मार रहे हो.
सलीम - तुमने अभी जिन कलाकारों का नाम लिया है वे धरती पर नहीं हैं, मर चुके हैं, आपने यहाँ पर उनकी महफ़िल सजा रखी है, इसका अर्थ मैं क्या निकालू / यहाँ का माहौल भी बड़ा अजीब लग रहा है , यहाँ कोई बात ही
नहीं करता , सब लोग खामोश हैं. मुर्दानी सी छाई है, मैं अंदर तक दहल रहा हूँ. यह सपना है या हकीकत . यह मौत का संसार है या जिंदगी का, मैं कुछ फैसला नहीं कर पा रहा हूँ. मैंने जिस लड़की से प्यार का वादा किया था
वह शर्मीली सी एक लड़की थी और तुम उससे बिलकुल अलग लग रही हो. भले ही शरीर वही है मगर बातें बिलकुल बदल चुकी हैं. विचार बदल चुके हैं.मैं कन्फ्यूज हूँ.
शालिनी- बातें, विचार या शरीर बदलने से कुछ नहीं होता सलीम. जों होता है , वो दिल से होता है. मेरे दिल में तुम्हारे प्रति अथाह मोहब्बत है. अगर सच्चे दिल से तुम भी अपने दिल की तलाशी लोगे तो पाओगे कि मैं भी उसीमे बसी
हुई हूँ. मेरे सिवाय तुम किसी और लड़की से प्यार कर ही नहीं सकते. तुम्हारा और हमारा प्रेम अमर है.
सलीम- कोई आत्मा किसीसे इंसान से कैसे प्यार कर सकती है ? उसके लिए या तो मुझे मरना पडेगा या फिर आत्मा को किसी जिस्म में प्रवेश करना पडेगा .
शालिनी- तुम्हारे लिए मैं वो भी कर चुकी हूँ सलीम. जिस लड़की से तुम अभिषेक की शादी में मिले थे, उसका धरती का समय पूरा हो चूका था, मैं उसीके जिस्म में प्रवेश कर चुकी हूँ. तुम मेरा भरोसा करो , तुम्हें कोई तकलीफ नहीं
हुई है. चाहने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी चाहत के साथ नाइंसाफी नहीं कर सकता. मैं ऐसा कोई काम कैसे कर सकती हूँ जिससे कि आपको कोई परेशानी न हो. मैं दीवानी हूँ. तुम्हारी .
सलीम- हे मालिक. तो क्या आपने उस बेगुनाह ;लड़की को मार डाला ?
शालिनी- छी.. किसी बातें करते हो सलीम . मैं भला ऐसा क्यों करूंगी ? मैं किसीकी जान क्यों लूंगी ? वो तो उसका वक्त खत्म हो चुका था. मैंने उसकी कोई नुक्सान नहीं पहुंचाया, सिर्फ उसका बदन इस्तेमाल किया है. बदन का क्या है
यह तो वैसे भी मिट्टी का बना होता हो. इसी मिट्टी में मिलना होता है अगर मैंने उस मिट्टी का इस्तेमाल अपने खोये प्यार को पाने के लिए कर लिया तो इसमें गुनाह क्या है ?
सलीम- मैं आपका खोया हुआ प्यार कैसे हूँ , क्या मैं इतना जान सकता हूँ ?
शालिनी- वही समझाने के लिए , याद दिलाने के लिए तो मैं तुम्हें इस बाग में लेकर आयी थी. तुम एक राजकुमार थे , मैं दूसरे देश की राजकुमारी थी. जब हम छोटे थे तो हम दोनों के घारानों में काफी घनिष्ठता थी. हम लोग मिलते थे
साथ में खेलते थे , एक दूसरे को काफी पसंद करते थे. बचपन में ही हम दोनों ने तय कर लिया था कि बड़े होकर हम साथ-साथ जीवन बिताएंगे . मगर दुर्भाग्य से हमारे परिवारों के बीच आपसी तनाव हो गया . इस तनाव ने जल्दी ही शत्रुता
का रूप धारण कर लिया. तुम मुझे चाहते थे औरकिसी भी कीमत पर मुझे पाना चाहते थे. तुम अपने पिता .अपने देश से बढ़कर मुझसे प्यार करते थे. मैं भी तुम्हें उतनी ही शिद्दत से चाहती थी लेकिन हमारा मिलन नहीं हो पाया .
सलीम- यह सब मुझे यादद क्यों नहीं आ रहा ?
शालिनी- क्योंकि तुम याद करना नहीं चाहते, तुम्हें तो बस संदेह से ही फुर्सत नहीं है.
सलीम- फिर उसके बाद क्या हुआ था ?
शालिनी- एक दिन तुमने बगावत कर दी . अपने परिवार से बगावत पर उतारू हो गए और ... और फिर वो हो गया जिसकी किसीने उम्मीद भी नहीं की थी .
Thursday, December 16, 2010
तन्हाई - भाग-१३
सलीम ने भी शालिनी को कसकर पकड़ लिया और नरम मुलायम घास पर उसे नीचे गिरा लिया. शालिनी खूब हंस रही थी और उसकी आवाज
सलीम की आत्मा तक को आंदोलित करने लगी. एक जानी पहचानी हंसी थी . उसने शालिनी के सीने के उभारों को आहिस्ता -आहिस्ता दबाना शुरू कर दिया , शालिनी ने पूछा-
-अब ध्यान आया कि इसी तारह तुम मुझसे प्यार किया करते थे , एकांत के क्षणों में तुम इन्हीं गोलाइयों से खेला करते थे .
सलीम- और शारीरिक सम्बन्ध कैसे बनाते थे, यह भी तो बताओ.
शालिनी- अभी तक भी तुम पुरानी वाली शरारत को नहीं भूल पाए हो , ठीक यही अंदाज होता था जब तुम्हारा मन करता था, अगर मैं बीमार होती और मेरा मूड तुम्हारे साथ सोने के लिए नहीं करता तो तुम इसी तरह की
कामोत्तेजक बातें किया करते थे, यहाँ तक कि मुझे टोकना पड़ता था, मैं कहती थी कि गंदी बातें मत करो. तुम्हें तो बिलकुल शर्म नहीं रही. लाज-शर्म को बाजार में बेच आये हो क्या , याद करो कुछ याद आया /
सलीम- मैं सोचने -समझने की कोशिश तो कर रहा हूँ मगर कुछ ध्यान नहीं आ रहा कि ऐसा क्या हुआ होगा ? क्या मैं जां सकता हूँ कि तुम कौन से जमाने की बात कर रही हो /
शालिनी- ओफ , सब कुछ भूल गए, इतनी जल्दी ? मुश्किल से तीन सौ बरस पुरानी ही तो बातें हैं. तुम्हारे पांच जन्म पीछे की.
सलीम की हड्डियों में सिहरन सी दौड गयी, शालिनी उससे पांच जन्म पुरानी बातें पूछ रही थी , उसे थोड़ा सा डर तब महसूस हुआ जब शालिनी ने कहा कि -
- और तबी से मैं तलाश रही हूँ तुम्हें , कभी किसी के शादी के मंडप में तो कभी किसी मयखाने में . मैं जानती हूँ कि तुम्हें उस समय यही दो शौक बहुत गहरे थे . एक तो शादियों में डांस करना और दूसरे मयखाने में जाकर
संगीत सुनना और महफ़िलें सजाना. ये जों महल के बीक हो बीच जों तुम महफ़िल सजी देख रहे थे , यह तुम्हारे लिए ही तो है. मैंने कितने कलाकार बुलाकर रखे हैं. तुमने जगत रानी का डांस नहीं देखा न , जिस पर आज कल
सारी दुनिया लट्टू है, तुम्हारी खातिर मैंने उसको यहीं पर बुला लिया है .
सलीम- क्या बात कर रही हो. तुम फिल्म एक्ट्रेस जगत रानी की बात कर रही हो. उसका तो दो साल पहले मर्डर हो गया था . किसी अंदर वर्ड के गुंडे ने दिन दहाड़े उसकी ह्त्या की थी .
शालिनी - न न , उसे मर्डर नहीं कहते , नवीनीकरण कहते हैं. रिन्यूवल. उसका रिन्यूवल हुआ है. वह नए सिरे से अपना कैरियर शुरू कर रही है. यहाँ बड़े मजे से है. गाना शुरू होता है तो वह नृत्य करने लगती है . बड़े-बड़े राजा -
महाराजा उसके दिलकश नृत्य का आनंद उठाते हैं. मैं जानती थी कि एक न एक दिन तुम मुझे जरूर मिलोगे और अच्छी नर्तकी की मांग करोगे तो मैं क्या कहूंगी , पहले ही बिछुड चुके थे , अब नहीं बिछुड़ने दूंगी , तुम क्या जानो
कि तन्हाइयों का दर्द क्या होता है . यह जीना भी मौत सा नजर आने लगता है , तभी तो मैंने फैसला किया है कि मैं तुम्हें अपने आप से एक पल भी दूर नहीं होने दूंगी . तुम्हारी हर छोटी से छोटी इच्छा का पूरा -पूरा ख़याल
रखूंगी , अगर तुम चाहते हो कि शराब पीओ तो मैं खुद अपने हाथों से पैग बनाकर दूंगी . मैं खुद भी पीउंगी तुम्हारे साथ और फिर तुम्हें ऐसा लगा कि डांस की महफ़िल जमनी चाहिए तो जरूर जमेगी , क्यों नहीं जमेगी ?
मैं खुद भी नाचूंगी तुम्हारे लिए , जैसे चाहोगे ठुमके लगाउगी . इसके लिए तो मैंने बहुत बड़ा डांसर भी रख लिया है. डांस गुरु. जों रोजाना मुझे डांस की प्रेक्टिस कराता है . जानते हो कौन ?
सलीम- नहीं, किसको रखा है /
शालिनी- जिसने सौ से ज्यादा हिट फिल्मों की कोरियोग्राफी की है. शेख अतहर . मैंने उन्हीको आजकल अपना डांस गुरु बनाया हुआ है .
सलीम- हे मालिक , मैं ये क्या सुन रहा हूँ. उसकी तो प्लेन क्रेश में मौत हो चुकी है. सारे अखबार और टीवी में उसकी मौत की ख़बरें देखी सूनी थीं. और यह बहुत ज्यादा पुरानी बात भी नहीं है . मेरे ख़याल से महीने भर पहले
ही जब वे शूटिंग करके लौट रहे थे तो विमान हादसे में उनकी मौत हो गयी. मुझे डर लगने लगा है शालिनी . कहदो कि तुम मजाक कररही हो.
शालिनी - अच्छा ठीक है ., चलो समझो कि मजाक ही किया , मगर एक वादा करो.
सलीम- कैसा वादा मेरी जां. ? हुक्म तो करो.
शालिनी - अब तुम मुझे छोड़कर यहाँ से कभी नहीं जाओगे .
सलीम- यहाँ से मतलब ? इस महल से कि इस दुनिया से ?
शालिनी- यह महल भी अपने आप में एक दुनिया है सलीम साहब. इस दुनिया को समझने की कोशिश करो. यह दुनिया बड़ी हसीन है. और इस दुनिया के मालिक तुम हो . मैं चाहती हूँ कि तुम और हम यहाँ ऐश करें .
सलीम- मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता यह सच है शालिनी. तुम मेरा प्यार हो, मेरी जिंदगी हो , मेरी , मेरी आत्मा हो .... ओह , यह क्या हो रहा है मुझे , मेरी आत्मा में ये कोई दूसरा कैसे बैठ सकता है ?
शालिनी- अब समझे ? ये मैं हूँ. मैंने तुमसे इजाजत माँगी थी तुम्हारी आत्मा में बसने की और तुम हाँ कर चुके हो. एक बार नहीं पूरे तीन बार.
Wednesday, December 15, 2010
तन्हाई -१२
सलीम- वहाँ क्या है ? कुछ तकलीफ है क्या ?
शालिनी- हाँ, मैंने सूना है कि वहाँ पर बुरी आत्माएं रहती हैं. वे नुक्सान पहुंचा सकती हैं. मेरी हद जहां तक है, वहाँ कोई ताकत मेरे सलीम को टच भी नहीं कर सकती .
सलीम- ठीक है, मैं कभी उस दिशा में नहीं जाउंगा .
शालिनी- ऐसे नहीं मानूंगी, मेरे सिर पर रखकर हाथ , तब कसम खाओ कि कभी उस तरफ नहीं जाओगे .
सलीम- हाँ, बाबा नहीं जाउंगा. तुम तो बेवजह डर रही हो. मुझे कोई बुरी आत्मा से डर नहीं लगता है. तुम्हारे रहते मेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता.
शालिनी- मुझ पर इतना भरोसा करने लगे हो सलीम ?
सलीम- हाँ , और इससे भी ज्यादा प्रेम करने लगा हूँ.
शालिनी- ये गिलास खत्म करो, दूसरा पैग बनवाओ फिर हम दोनों प्यार के समुन्दर में गोते लगाएंगे . आज जी भरके पीने और जी भरके जीने की तमन्ना है. अगर तुम मेरे दिल में झाँक सको , मेरी भावनाओं को समझ सको
सलीम- मैं सपना सा देख रहा हूँ, मुझे विश्वाश ही नहीं होता है कि आप के जैसी स्वर्ग की हूर परी से भी सुन्दर हसीना मुझे इतना चाह सकती है. मेरा शक भी ऐसे ही नहीं है. मेरे मोहल्ले की सभी लड़कियां मुझसे बात तो करती
हैं लेकिन वे दोस्ती दूसरे लड़कों से करती हैं,. कभी किसी लड़की ने मेरे प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. कभी नहीं. इसलिए मेरे साथी अक्सर मेरा मजाक भी उड़ाते रहे हैं , मगर तुम ... मेरा मतलब है कि आप...
शालिनी- ये आप-आप तुम -तुम क्या लगा रखी है. मेरा नाम बोलो न, और सिर्फ तुम कहके पुकारो. आप से अजनबी जैसा महसूस होने लगता है. और ये सपने वाली बात भी दिमाग से निकाल दो. हम दोनों होश में हैं और जाग रहे हैं.
यहाँ तुम्हारे लिए नया माहौल है, इसलिए कुछ फील हो रहा होगा. अगर चाहो तो तुम थोड़ी देर सैर करके आ सकते हो. तुम्हारे साथ सुरक्षा गार्ड रहेंगे . जब तक तुम मेरे मेहमान हो तब तक तुम्हें बहुत अच्छा ट्रीटमेंट मिलेगा.
ठीक वैसा ही जैसे एक राजा के यहाँ दूसरे राजा को मिलता है. तुम भी तो आखिर राजकुमार ही हो ना. ध्यान करो वो तुम्हारा हमारा प्यार. जब हम बागों की सैर करने जाते थे , मैं थक गयी तो तुम मुझे अपने कंधों पर उठा लिया
करते थे. मैं चिल्लाती तो कभी-कभार तुम मुझे थप्पड़ भी जड़ दिया करते थे. कुछ याद आया ?
सलीम- बिलकुल नहीं, कोशिश तो कर रहा हूँ लेकिन याद नहीं आ रहा. दिमाग में कुछ हलचल सी हो रही है.
शालिनी- इस हलचल को तेज करो. चलो मेरे साथ , तुम्हें वो बगीचा दिखाती हूँ जहाँ पर हम प्यार भरी बात किया करते थे , वो पलंग भी दिखा न , इसी पर हमने पहली बार शारीरिक सम्बन्ध बनाये थे .
सलीम- पलंग , ये पलंग कहाँ था ? जब हम पार्क में थे तो वहाँ पर तो हम लोग खड़े हुए थे. खड़े होकर ही हमने सुहागरात मनाई थी.
शालिनी- ओह, तो तुम थोड़ी देर पहले की बात कर रहे हो .यह हमारी पहली सुहागरात नहीं है. इससे पहले तो हम कई बार जिस्मानी सुख वसूल चुके हैं. भूल गए ज्या ?
सलीम- मुझे कुछ याद नहीं आ रहा है. ऐसा लगता है जैसे दिमाग में कुछ टकरा रहा है. जैसे हम कहीं मिले हैं, जैसे कभी हम दोनों एक ही थे , जैसे कभी सतह-साथ हम लोगों ने समय बिताया है.
शालिनी- हाँ, याद करो, मैं न कहती थी कि कोशिश करोगे तो सब कुछ याद आ जाएगा , आ गया न याद ?
सलीम- हाँ , मगर कुछ स्पष्ट ध्यान नहीं आता ? हम लोग कहाँ मिलते थे ? वहां -पर चलकर देखते हैं, शायद वहाँ कुछ याद आ जाए .
शालिनी बहुत खुश थी, वह उसका हाथ थामे दौडती -दौडती बगीचे तक आ गयी. वहाँ पर तरह-तरह के फूलों की सुगंध थी, बहुत मीठा संगीत बज रहा था, कुछ ऐसा जैसे कि तितलियाँ गा रही हों. कोयल अलाप ले रही हो .
सलीम उस सबको हक्का बका होकर देखें लगा,. जेहन पर जोर डालकर याद करने लगा. कभी वह शालिनी के चेहरे को देखता था तो कभी अपने आपको . उसकी मुस्कान उसे जानी पहचानी लगती थी , लगता था जैसे वह उसकी
पुरानी करीबी है , मगर अगले ही पल उसकी चेतना को ऐसा महसूस होता जैसे कि वह जों कुछ सोच रहा है, शराब के नशे में ही सोच रहा है. और फिर इसी उधेड़बुन में वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाता था.
शालिनी उसको ध्यान दिलाने की कोशिश करती थी, उसे छूकर अपनापन का एहसास कराती थी और जब भी उसे ध्यान नहीं आया तो शालिनी ने उसके होठों से अपने दहकते हुए सुर्ख होठ सटा दिए. सलीम मर्द था और किसी भी
हालत में कोई भी मर्द महिलाओं के चेलेंज को स्वीकारने में समय बर्बाद नहीं करता . सलीम ने भी शालिनी को कसकर पकड़ लिया और नरम मुलायम घास पर उसे नीचे गिरा लिया. शालिनी खूब हंस रही थी और उसकी आवाज
सलीम की आत्मा तक को आंदोलित करने लगी. एक जानी पहचानी हंसी थी . उसने शालिनी के सीने के उभारों को आहिस्ता -आहिस्ता दबाना शुरू कर दिया , शालिनी ने पूछा-
-अब ध्यान आया कि इसी तारह तुम मुझसे प्यार किया करते थे , एकांत के क्षणों में तुम इन्हीं गोलाइयों से खेला करते थे .
सलीम- और शारीरिक सम्बन्ध कैसे बनाते थे, यह भी तो बताओ.
शालिनी- अभी तक भी तुम पुरानी वाली शरारत को नहीं भूल पाए हो
Tuesday, December 14, 2010
1...
मेरे मन को तुम तो इतना भा गए हो
प्यार बनकर यार दिल पर छा गए हो
जब कभी यादों के पंछी गुनगुनाएं
चीरती दिल को चलें जब ये हवाएं
ऐसा लगता जैसे की तुम आ गए हो
........
मैं तुम्हें मेरी जान इतना प्यार दूंगा
तेरे सदके अपना जीवन वार दूंगा
सुनकर दिल की बात क्यों शरमा गए हो
........
हर घड़ी हर हर दम तुम्हीं को देखती हूँ
मन के मन्दिर में तुम्हें ही पूजती हूँ
ऐसा जादू तुम कहाँ से पा गए हो
......
- मुकेश कुमार मासूम
.... 2...
ख़ुदकुशी न करो
जिंदगी से कभी बेरुखी न करो
फिक्रो गम से कभी दोस्ती न करो
खूबसूरत है ये जिंदगी दोस्तों
ख़ुदकुशी न करो ख़ुदकुशी न करो
खुद से होते नहीं इस तरहा से खफा
भूल जा उसको तू जो हुआ बेवफा
दिल से गम को कहो अलविदा -अलविदा
अश्क बहने न दो खुश रहो तुम सदा
बेबसी से कभी आशिकी न करो
...
आज सूखी फसल , या तो टूटा है हल
कर्ज की मार से दिल उठा है दहल
बैल प्यासे खड़े , या तो रूठा है नल
हौसला तो दिखा , तू ही होगा सफल
हर घड़ी इस कदर दिल दुखी न करो
..........
फेल हो, पास हो , इसका गम न करो
अपने विशवास को , यार कम न करों
ये जों मुस्कान है इसको गुम न करो
हँसते गाते रहो , आँख नम न करो
रोना -धोना सनम हर घड़ी न करो
.............
- मुकेश कुमार मासूम
......
3.......
जादू सा चला देते हैं , सीने में बसा लेते हैं
ये हुस्न के मालिक देखो , दिल लेके दगा देते हैं
पहले जब मिलते हैं तो ऐसे मुस्काएं
सीने से उछलता दिल ये ऐसे शर्मायें
कातिल हैं अदा ऐसी साधू भी फिसल जाएँ
इक बार मिला जो भी मुश्किल है संभल पायें
पल भर में हंसा देते हैं, पल भर में रुला देते हैं
कोए की तरह मजनू , गलियों में मंडराते
हीरो की तरह सज्कार इठलाते बलखाते
दिख जाए अगर लड़की तो भोले बन जाते
जितनी भी हसीना हों ये सबपे फिसल जाते
पहली को हटा देते हैं , दूजी को पटा लेते हैं.
.....
सपना सा दिखा देते हैं , अपना सा बना लेते हैं
ये जिस्म के आशिक देखो , दिल लेके दगा देते हैं....
.........4..........
दारु , सिगरेट छोड़ दे सैया ,
जोडू हाथ पडू तेरे पैया
कहना मान दीवानी का,
ले सुट्टा मार जवानी का
भांग धतूरा सुल्फा गांजा , इनसे हाथ लगाओ न
तड़प रहा मेरा प्यासा यौवन इसकी प्यास बुझाओ न
कैप्सूल परफेक्स मिले तो लूटे मजा जवानी का
हुक्का बीडी चरस हेरोइन तम्बाकू या खैनी
तन मन धन का नाश करें ये देते है बेचैनी
कर्क रोग से बचले राजा , शौक़ है ये नादानी का
सबसे प्यारा जगसे न्यारा प्यार हमारा है यारा
नशा करूँगा सिर्फ प्यार का माना मैंने दिलदारा
अपने हाथों नाश करू ना प्यारी सी जिंदगानी का
आ सुट्टा मार जवानी का .............
.............5.........
साजन के शहर में जाके ,खुश हो गयी दौलत पाके
बस इतना बतादो बैरन , क्या मिला मुझे ठुकराके
सोया नहीं अब तक , रोया तेरी खातिर
पाया नहीं कुछ भी , खोया तेरी खातिर
जिया में आग लगाके , नैनों में नीर बहाके
बस इतना.....
काँधे पे सर रखना , दुल्हन सा शरमाना
कैसे भुलाऊँ मैं , वो प्यार का अफ़साना
वादे और कसम भुलाके , दिल तोड़ गयी मुस्काके
बस इतना ...
ये जहर जुदाई का ,अब पी ना पाऊंगा
तेरे बिना जालिम , जी ना पाऊंगा
जख्मों पर नमक लगाके , क्यों छोड़ दिया तदडपाके
....................
पहले तो चाहत की देवी मुझे बोला
फिर प्यार को मेरे दौलत में क्यों तोला
चाहत के खाब दिखाके , काँटों की सेज सजाके
...
अरमान रोते हैं, जज्बात रोते हैं
तेरी याद में मेरी जां दिनरात रोते हैं
दीवाना मुझे बनाके जख्मो पर नमक लगाके
...
मासूम के दिल का तूने मोल न जाना
ऐ मौत आ तू भी अब डोल न जाना
मुफ्लिश की हंसी उडाके , रोओगे हमें रुलाके
तन्हाई , भाग-११
जिसको थियेटर में नहीं देख पाता उसे सीडी लाकर घर पर देख लेता हूँ, जासूसी उपन्यास पढ़ने का भी शौक़ीन हूँ.
शालिनी- कुछ न कहिये , मैं समझ गयी. इसी कारण ऐसा हो रहा है. तुम्हारे दिमाग में भूत प्रेत बसे हुए हैं. मेरे करीब आओ , मेरे होठों पर अपने ये गर्म होठ रख दो . तब बताओ कि क्या भूत-प्रेतों से ऐसे प्यार किया जाता है .
जहाँ तक खुलने का सवाल अहि तो उसकी बात ये है कि जब पहली बार तुमसे मिली तो इतनी खुली हुई नहीं थी. मुझे बातचीत करने में झिझक हो रही थी , मगर जब यह जाना कि तुम मेरे बिछड़े हुए प्रेमी हो तो फ़ौरन मान
तुमसे प्रेम करने लगी. तुम्हें अपने दिल में बसा यहाँ तक कि इस आत्मा में बसा लिया. मुझे तुम्हारी आत्मा में जगह मिलेगी न ?
सलीम- मेरे पास जों कुछ भी है, वह तुम्हारा ही है . दिल , दिमाग और आत्मा सब कुछ तुम्हारा ही है .
शालिनी -तो ठीक है , मैं तुम्हारी आत्मा में अपना घर बसा लेती हूँ. अगर मैं तुम्हारी आत्मा पर अपना कब्जा जमा लूं तो कोई ऐतराज तो नहीं होगा न ?
सलीम- कैसी बातें करते हो ? मैं क्यों मना करूँगा. अगर मेरे खून का एक -एक कतरा भी तुम्हें खुश करने में लग जाए तो इसे मैं अपना सौभाग्य ही समझूंगा. ये लों आत्मा तुम्हारी हुई. मैं भी तुम्हारा हुआ .
शालिनी ने जोरदार अट्टाहस किया, वह हां हां कर हंस रही थी. सलीम के अंदर जोरदार परिवर्तन हो रहा था. उसके वस्त्र बदल चुके थे. स्वतः ही उसके बदन पर मंहगे जेवर चमकने लगे. अब वह पुराने जमाने के कोई शहंशाह लग
रहा था. उसके अंदर गज़ब का आत्मविश्वाश झलकने लगा, उस पर सुरूर जैसा छा गया . अब वह सपने और हकीकत में फर्क महसूस करने की स्थिति में नहीं था. शालिनी ने उसका मुझ चूम लिया . इशारा करते ही सलीम के सामने
एक स्वर्ण जडित टेबल लग गयी. कई महिलायें अदब से सिर झुकाए हुए सेवा में हाजिर थीं, सलीम ने ऐसे ही एक सुराही की तरह इशारा कर दिया. हीरा जड़ी कई सुराहियाँ शराब के साथ मौजूद थीं. सेविकाएं मुस्कराते हुए अपने काम जुट
गईं, उसने महसूस किया कि सब लोग वहाँ मौन थे , और अपने काम में व्यस्त थे, कोई बोल नहीं रहा था. उसने सोचा कि हो सकता है संगीत कार्यक्रम चलने के कारण सब लोग खामोशी से अपना काम कर रहे होंगे. शालिनी ने
टेबल से गिलास उठाकर उसकी तारफ बढ़ा दिया और एक गिलास अपने हाथ में लेकर उसके गिलास से टकराया . जाम छलक गए. दोनों की निगाहें मिलीं और वे दोनों शराब का लुत्फ़ उठाने लगे. एक घूँट पीने के बाद शालिनी बोली-
- तुम हैरत में होंगे न ?
सलीम- किस बात की हैरत ? मैं तो खुश हूँ,. परिवर्तन संसार का नियम है. पल-पल बदलाव होते रहते हैं और होते रहेंगे .
शालिनी- इसीलिए पूछ रही थी. ये सब सेविकाएं हैं तुम्हारी. हर समय तुम्हारी सेवा में रहेंगी , मुझे राज काज निबटाने होते हैं, इसलिए मैं अक्सर बाहर रहती हूँ, मगर तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी , यहाँ पर तुम्हारे मनोरंजन के सभी साधन
उपलब्ध हैं,. जब चाहो गाने सुन सकते हो, संगीत सुन सकते हो , नृत्य कर सकते हो. शराब का आनंद चख सकते हो और हाँ, अगर किसी नर्तकी पर दिल आ जाए तो उसके साथ रोमांस भी कर सकते हो, मगर ध्यान दो, सिर्फ रोमांस
की इजाजत दे रही हूँ, सेक्स मत कर बैठना . अगर मुझे पटा चला कि तुमने मेरे अलावा किसीके साथ सेक्स किया है तो मुझसे बुरा कोई नहीं .
सलीम- मैं क्यों किसी महिला के साथ सेक्स करने लगा, इस दुनिया में तुमसे ज्यादा सुन्दर कोई नहीं है. तुम सबसे हसीन हो, तब मैं क्यों किसीकी तरफ देखने लगा ?
शालिनी- देखने का कोई मलाल नहीं, रोमांस करने की भी पूरी छूट है, बस उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध मत बनाना. मुझसे सहा नहीं जाएगा . तुम सिर्फ मेरे हो .
सलीम- यहाँ का माहौल बहुत उत्तेजक है. और शांतिप्रिय भी . मगर मैं यहाँ घूम नहीं पाया , इसीका दुःख रहेगा .
शालिनी- इसमें दुःख की क्या बात है, आप कहीं भी घूम सकते हैं. जिस तारफ चाहेंगे चले जायेंगे . यहाँ की सेविकाएं आपका मार्गदर्शन करेंगी. हर दिशा जाना मगर पूर्व दिशा में मत जाना .
सलीम- वहाँ क्या है ? कुछ तकलीफ है क्या ?
शालिनी- हाँ, मैंने सूना है कि वहाँ पर बुरी आत्माएं रहती हैं. वे नुक्सान पहुंचा सकती हैं. मेरी हद जहां तक है, वहाँ कोई ताकत मेरे सलीम को टच भी नहीं कर सकती .
सलीम- ठीक है, मैं कभी उस दिशा में नहीं जाउंगा .
शालिनी- ऐसे नहीं मानूंगी, मेरे सिर पर रखकर हाथ , तब कसम खाओ कि कभी उस तरफ नहीं जाओगे .
सलीम- हाँ, बाबा नहीं जाउंगा. तुम तो बेवजह डर रही हो. मुझे कोई बुरी आत्मा से डर नहीं लगता है. तुम्हारे रहते मेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता.
शालिनी- मुझ पर इतना भरोसा करने लगे हो सलीम ?
सलीम- हाँ , और इससे भी ज्यादा प्रेम करने लगा हूँ.
शालिनी- ये गिलास खत्म करो, दूसरा पैग बनवाओ फिर हम दोनों प्यार के समुन्दर में गोते लगाएंगे .
Monday, December 13, 2010
तन्हाई -10
शालिनी- तो ? मै इससे कब मुकर रही हूँ. ?
सलीम- त त तुमने मेरा हाथ पकड़ा है और अब इतने लोगों के बीच मुझे लिए चली जा रही हो ?
शालिनी- हाँ, यह हमारा महल है, यहाँ पर हमारा भाई नहीं आएगा . सिर्फ तुम और हम यहाँ रहेंगे . तुम्हारे स्वागत के लिए ही यह सब इंतजाम किया गया है. कैसा लगा ? यहाँ पर चाहो तो तुम अपनी पसंद का कोई गीत सुन
सकते हो. अपनी पसंद की किसी धुन पर थिरक सकते हो. किसी भी दरबारी से कोई भी हुक्म कर सकते हो, फ़ौरन तामील होगी. कुछ भी जरूरत हो तो इशारा भर करने की देर है.
सलीम- यहाँ इत्तना बड़ा शाही महल आपकाहै ? मेरा मतलब है कि बहुत मंहगा होगा. इसका खर्च तो राजा-महाराजा ही सहन कर सकते हैं. क्या आप भी महारानी हैं ?
शालिनी- अगर तुम सिर्फ रानी कहो वो भी अपने दिल की , तब भी चलेगा, यह सब अब आपका है सलीम...यह जिस्म, यह दिल , दिमाग घर या महल जों भी है, सब कुछ आपका ही है. इसे जिस तरह और जैसे चाहो भोग सकते हो .
सलीम- मुझे इस बात की हैरत है कि आज का जमाने में भी इस तरह के पुराने राजा -महाराजाओं के महल हैं. यह अजीब दुनिया नजर आती है. इस तरह का नजारा तो मैंने कभी पहले नहीं देखा है. ये हम कहाँ आ गए हैं ?
शालिनी- फ़िक्र न करो मेरी जान . यह मोहब्बत की ही दुनिया है. यह हमारा अपना महल है सलीम. मैं राजकुमारी हूँ और तुम राजकुमार . अंदर चलकर तुम्हारे कपडे बदलवाये जायेंगे . तुम्हारी वेश भूचा चेंज होते ही तुम भी राजा-महाराजा
बन जाओगे , ऐसा है कि तुम सबसे अलग हो, मेरे खोये हुए प्यार हो . मैं न जाने कबसे तालाश रही थी तुमको .
सलीम- लगता तो मुझे भी ऐसा ही है, मैं और तुम किसी जन्म में प्रेमी -प्रेमिका रहे होंगे , किसी तरह से हम उस जन्म में नहीं मिल पाए तो इस जन्म में हमारा मिलना हो गया . क्या अब हमें वापस नहीं लौटना चाहिए ?
शालिनी- अब अभिषेक और बरात को भूल जाइए , वहाँ कुछ नहीं रखा है. यह देखिये हमारा कमरा . इसको रंग महल कह सकते हैं. कुंवारी लड़कियों के लिए हमारे यहाँ यह महल नहीं बनाया जाता है मगर मैं जानती थी कि तुम जरूर
आओगे और बहुत जल्द आओगे तभी तो मैंने जिद करके यह रंग महल बनवाया था . इसमें आपको सभी सुविधाएँ मिलेंगी. यहाँ पीने के लिए सोमरस की व्यवस्था है यानि की शराब यहाँ पर अच्छी किस्म की मिल सकती है. खाने में भी
छत्तीस प्रकार के भोजन का आनंद उठाया जा सकता है.
सलीम का दिमाग तेजी के साथ घूम रहा था. शालिनी कामुक अदा से मुस्करा रही थी. उसका बदन पहले से भी ज्यादा उतीजक लग रहा था. वह उसका हाथ पकडे रंगमहल में प्रवेश कर गया . उसने फ्रेश होने की इच्छा प्रकट की तो
उसके साथ-साथ शालिनी भी बाथरूम में चली आई . सलीम ने अपने कपडे उतारे तो शालिनी ने भी उसका अनुसरण किया. दोनों जब बिलकुल नग्न हो गए तो हरकतों पर भी उअतर आये. सलीम उसके यौवन उभारों को आहिस्ता
-आहिस्ता सहला रहा था . शालिनी हंस रही थी. अपने आप फौवारा चलना शुरू हो गया. सलीम ने ध्यान दिया कि वहा पर सब कुछ अपने आप घटीत हो रहा था. अपने आप दरवाजे खुल जाते और फिर बंद भी हो जाया करते थे . इसी
तरह अपने आप लाईट भी जल या बुझ जाया करती थीं,. यह सब कुछ इतनी तेजी के साथ हो रहा था कि सलीम को सोचने विचारने का अवसर ही नहीं मिल रहा था. सलीन ने सवाल किया-
- यहाँ पर सब कुछ स्वचलित कैसे है ? ऐसा लगता है जैसे कि पहले से ही सब कुछ आदेशित कर दिया गया हो.
शालिनी- आप यहाँ के स्वामी जों ठहरी, इसी कारण यहाँ की हर वस्तु आपकी इच्छाओं का आदर करते हुए अपने आप सक्रीय हो जाती है , जों भी विचार तुम्हारे मन में उभरेगा यहाँ ठीक वैसा ही हो जाएगा , जैसे कि यदि तुम सोचते हो कि
ये लाइटें ऑफ हो जाएँ तो तुरंत आदेश का पालन होगा, इसी तारह से अगर आप सोचते हैं कि खाना होना चाहिए तो कुछ देर में ही मन पसंद का भोजन तैयार होकर टेबल पर सज जाएगा .
सलीम- यह जादू कैसे हो रहा है मेरी जान ? आ लिया ,
शालिनी- यह सब धीरे-धीरे जान जाओगे , फ़िलहाल यहाँ की मेहमान नवाजी का आनंद उठाइये , इतना ही समझ लीजिए कि हम लोग टेक्नीकली बड़े स्ट्रोंग हैं.
सलीम -कुछ देर पहले जब आप मिली थीं तब दिखने में बिलकुल साधारण थीं, आपके चेहरे पर हया के भाव थे, मगर अब बिलकुल इसके विरुद्ध लग रही हो. आपका स्वभाव भी बदला- बदला सा लग रहा है. इतना बड़ा परिवर्तन देखने
के बाद हैरत में भी हूँ और दहशत में भी. ऐसा इसलिए भी क्योंकि मैंने ये सब मंज़र देखा नहीं है. मैं भूत -प्रेतों की फ़िल्में भी बहुत देखता हूँ , मैंने रामसे ब्रदर्स और राम गोपाल वर्मा की कोई भी डरावनी फिल्म नहीं छोड़ी है.
जिसको थियेटर में नहीं देख पाता उसे सीडी लाकर घर पर देख लेता हूँ, जासूसी उपन्यास पढ़ने का भी शौक़ीन हूँ.
शालिनी- कुछ न कहिये , मैं समझ गयी. इसी कारण ऐसा हो रहा है. तुम्हारे दिमाग में भूत प्रेत बसे हुए हैं. मेरे करीब आओ , मेरे होठों पर अपने ये गर्म होठ रख दो . तब बताओ कि क्या भूत-प्रेतों से ऐसे प्यार किया जाता है .
जहाँ तक खुलने का सवाल अहि तो उसकी बात ये है कि जब पहली बार तुमसे मिली तो इतनी खुली हुई नहीं थी. मुझे बातचीत करने में झिझक हो रही थी , मगर जब यह जाना कि तुम मेरे बिछड़े हुए प्रेमी हो तो फ़ौरन मान
तुमसे प्रेम कर्न्मे लगी. तुम्हें अपने दिल में बसा यहाँ तक कि इस आत्मा में बसा लिया. मुझे तुम्हारी आत्मा में जगह मिलेगी न ?
सलीम- मेरे पास जों कुछ भी है, वह तुम्हारा ही है . दिल , दिमाग और आत्मा सब कुछ तुम्हारा ही है .
Sunday, December 12, 2010
तन्हाई -9
सलीम- मेरा मतलब है कि जनमासा. आजकल कोई इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करता न , इसलिए बरात स्थल बोल दिया .
शालिनी- जानते हो मैं तुम्हारा कबसे इन्तजार कर रही थी ?
सलीम- जी नहीं, बिलकुल नहीं जानता. हमारी और आपकी मुलाक़ात तो थोड़ी देर पहले ही हुई है, फिर आप मेरा इन्तजार कैसे कर रही थी, ज़रा बताइये तो सही , मैं भी जानना चाहता हूँ.
शालिनी- क्योंकि हम सिर्फ इस जन्म के चाहने वाले नहीं हैं, हमारी मोहब्बत वर्षों से है.
सलीम- अच्छा, लेकिन थोड़ी देर पहले ही आप मेरे प्यार से ही इनकार कर रही थीं . अब इतनी जल्दी आपके प्यार की ज्योति प्रकट हो गयी ?प्यार की सातवी ग्रंथि इतनी पावरफुल है आपकी ?
शालिनी -प्यार जब परवान चढता है तो तो वक्त नहीं देखता . तुम बहुत हॉट हो सलीम. तुम्हारा जैसा हेंडसम देखकर तो किसी भी लड़की का दिल डोल सकता है.
सलीम- क्या अब हम डांस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे क्या / अभी-अभी आप कह रही थी न ?
शालिनी- जब प्यार हो, रोमांस हो, काम क्रीडा हो और तुम्हारे जैसा पार्टनर हो तो सिर्फ डांस में किसका मन लगेगा ? जी चाहता है कि हमेशा ऐसे ही तुम्हारे सीने से लगी रहूँ . सलीम, तुम बहुत
स्मार्ट तो हो ही ताकतवर भी हो. आज मजा आ गाया. हम दोनों ने सुहागरात का जमकर आनंद उठाया है. पता नहीं तुम कैसा महसूस करते हो ?
सलीम- मैं खुश हूँ, बहुत ज्यादा खुश , लेकिन इससे आगे प्यार की गाड़ी नहीं दौड़ा सकता. अब मैं थक चुका हूँ. पस्त हो चुका हूँ. यह तो हमारी पहली मुलाक़ात है , इसके बाद तो रोजाना ऐसी मुलाकातें होंगी , प्यार
की बातें होंगी. तुमसे ज्यादा तो मैं एक्साइटेड हूँ. मगर अब सर्दी भी पड़ने लगी है. इसे भी ध्यान में रखना है, क्योंकि मुझे जुकाम की तकलीफ बहुत जल्दी हो जाती है.
शालिनी- धत तेरे की, थोड़ी देर पहले तो प्यार में दुनिया से टकराने की बात कर रहे थे, कहते थे कि प्यार सबसे बड़ा होता अहि और अब मामूली सी सर्दी से डर गए, दुःख की बात तो ये है कि जवान हसीना की मौजूदगी
में सर्दी की शिकायत कर रहे हैं. ऐसा करना तो मेरा अपमान है , इस मादक जिस्म का, इस जवानी का घोर अपमान है.
सलीम-नहीं, नहीं मेरा मतलब अपमान से नहीं है. मेरे कहने का अर्थ ये है कि अब समय ज्यादा हो गया है. मेरे दोस्त लोग भी मुझे ढूंढ रहे होंगे. आपकी सहेलियां भी आपके इन्तजार में होंगे .
शालिनी- बहाने मत बनाओ सलीम, अगर तुम्हारी बात सच होती तो अब तक तुम्हारे सेल पर किसीका फोन नहीं आता ? बरात का मतलब ही होता है मौज मस्ती करना. सब लोग अपनी-अपनी मस्ती
में गुम होंगे. खा पी रहे होंगे . और हम यहाँ ऐसे ही सूखा-सूखा प्रेम करने में लगे हैं.
सलीम-इस कोने में और क्या किया जा सकता है ? जितना कर रहे हैं, यही काफी है. इसी पार्क के दूसरे छोर पर सैकड़ों लोग जमा हैं और हम यहाँ पर रंगरेलियां मना रहे हैं.
शालिनी- आप हुक्म तो करें, बहुत कुछ किया जा सकता है. आइये मेरे साथ. इस दीवार को फांदना है. अब हम इसके बाद आराम से प्रेम करेंगे , यहाँ खड़े-कहदे उतना सुख नहीं मिल पा रहा है .
सलीम कुछ नहीं बोल पाया. शालिनी ने उसका हाथ पकड़ा और पार्क की उस दीवार से छलांग लगादी जिस पार्क में सलीम के दोस्त अभिषेक की बरात आयी थी. सलीम को अब शालिनी रहस्मयी नजर आने लगी थी. मगर
वह चाहकर भी उसका विरोध नहीं कर पा रहा था. उसको सब कुछ अजीब सा लग रहा था. जैसे कि किसी कल्पनालोक में आ गया हो. सचमुच यह एक कल्पालोक ही था. चांदनी रात थी और शालिनी उसे जिस जगह पर लेकर
आयी वहाँ पर एक भव्य महल था. महल के बीचोबीच चबूतरे पर महफ़िल सजी थी. नर्तकियाँ नृत्य कर रही थीं और गाने वाले न जाने कौन सा राग गा रहे थे. चारों तरफ खुशबु बिखरी हुई थी. शालिनी ने सलीम का हाथ पकड़ रखा
था. वह राजकुमारी की तरह शान से चल रही थी और दरबारी उसके सम्मान में झुक रहे थे. बड़ा मनमोहक द्रश्य था. सलीम के दिमाग में सवाल उभरा तो होठों पर भी आ गया . बोला-
-तुम तो कह रही थीं कि तुम्हारा भाई बड़ा खतरनाक है, अगर मेरे और तुम्हारे संबंधों के बारे में जानेगा तो हम दोनों को ज़िंदा नहीं छोडेगा .
शालिनी- तो ? मै इससे कब मुकर रही हूँ. ?
सलीम- त त तुमने मेरा हाथ पकड़ा है और अब इतने लोगों के बीच मुझे लिए चली जा रही हो ?
शालिनी- हाँ, यह हमारा महल है, यहाँ पर हमारा भाई नहीं आएगा . सिर्फ तुम और हम यहाँ रहेंगे . तुम्हारे स्वागत के लिए ही यह सब इंतजाम किया गया है. कैसा लगा ? यहाँ पर चाहो तो तुम अपनी पसंद का कोई गीत सुन
सकते हो. अपनी पसंद की किसी धुन पर थिरक सकते हो. किसी भी दरबारी से कोई भी हुक्म कर सकते हो, फ़ौरन तामील होगी. कुछ भी जरूरत हो तो इशारा भर करने की देर है.
सलीम- यहाँ इत्तना बड़ा शाही महल आपकाहै ? मेरा मतलब है कि बहुत मंहगा होगा. इसका खर्च तो राजा-महाराजा ही सहन कर सकते हैं. क्या आप भी महारानी हैं ?
शालिनी- अगर तुम सिर्फ रानी कहो वो भी अपने दिल की , तब भी चलेगा, यह सब अब आपका है सलीम...
Saturday, December 11, 2010
तन्हाई -8
वह कह ही रही थी कि सलीम ने अपने पाँव के पंजों को थोड़ा सा ऊपर करके शालिनी के यौवन द्वार पर अपना अंग रख दिया और उस जगह को रगड़ने लगा . शालिनी के बदन की आग अब और भी खतरनाक रूप धारण कर रही थी.
वह उत्तेजक आह भरते हुए उसका सहयोग कर रही थी. उसका शरीर ऐसे काँप रहा था जैसे उसको जूडी आ गयी हो, इसके बावजूद वह मैदान में डटी थी, कुछ देर बाद ही सलीन ने अपने खास अंग को उस सुरंग में प्रवेश कर दिया
जहां हमेशा चाहत का उजाला जगमगाता रहता है. शालिनी के मुख से चीख निकलते-निकलते बची . उसने सलीम को बहुत जोर से अपनी तरफ खींच लिया था. दोनों आनंद के सागर में गोते लगाने लगे. कामोत्तेजक
आहों के कारण सर्द माहौल भी गर्मी में तब्दील हो रहा था. वह उसका जोरदार साथ दे रही थी. सलीम ने पूछा-
-अब तो निकल गया न डर ? बेवजह खौफ खा रही थीं .
शालिनी- मेरी जान पर बनी है और तुम्हें न जाने क्या -क्या सूझ रहा है . ऐसा होता है क्या ?अब मुझे छोड़ दीजिए. अपने मन की तमन्ना पूरी कर ली न अब तो .
सलीम- मन प्रसन्न हो गया कि नहीं ? एक बार अगर तकलीफ उठाली तो समझो कि कल्याण हो गया. इस खेल का यही नियम है. आज के बाद तुम्हें कभी इतना दर्द नहीं सहना होगा. जीवन में एक बार ही यह मीठा दर्द नसीब होता है
इसके बाद तो सुख ही सुख हैं, मजे ही मजे हैं. भले ही तुम मुझ पर उजागर नहीं करना चाहतीं लेकिन देखने से ही लगता है कि तुम्हें बहुत आनंद मिल रहा है. खुशी के अतिरेक में तुम फूली नहीं समा रही हो .
शालिनी- हाँ, तुमने दिल की गहराइयों में जहाँ लिया सलीम, यह भी सच है कि दर्द हो रहा है. ऐसा लगत है जैसे किसीने जिस्म को कूट दिया है.
सलीम -ऐसा ज्यादा समय तक होने वाला नहीं है. बस कुछ ही पलों की बात है ... सेक्स का यह सुख बड़ा नशीला होता है. एक बार जों इस नशे की गिरफ्त में आ गया तो समझो गया काम से , फिर उसे ऐसा आनंद बार-बार और हर
बार चाहिए. दीवाना हो जाता है इंसान . तुम भी मेरी दीवानी बनकर रह जाओगी , यकीन के साथ कहता हूँ.
शालिनी- ठीक कहते हो सलीम, मुझे भी ऐसा ही महसूस हो रहा है. तुम्हारा प्रभाव मेरे पर हर पल गहरा होता जा रहा है. ऐसा लगता है जैसे कि भगवान कृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं और राधा बनी मैं नृत्य कर रही हूँ.
सलीम- क्या तुम सच कह रही हो ? तब तो तुम्हें प्यार हो गया है मुझसे . सूना है कि जब महबूब को आशिक की परछाई में रब का प्रतिबिम्ब नजर आने लगे तो समझो कि प्यार अब गहरा गया है .
शालिनी- हाँ सल्लू , तुम मेरी रूह में बस्ते जा रहे हो .
सलीम- मैं कितना सौभाग्यशाली हूँ जों तुमसे बात हुई, मुलाक़ात हुई, प्यार और हुआ और यह कभी न भूलने वाला संगम भी हुआ. अच्छा ये तो कहो कि तुम रहती कहाँ हो ?
शालिनी- हा हा हा , मजा आ गया . आप नहीं जानते ? और प्यार कर बैठे ? तुम मर्द लोगों का भी कमाल है. बस कमाल. अरे आपके दिल में रहती हूँ, अब इस आत्मा में बसने आई हूँ , मुझे जगह तो मिलेगी न ?
सलीम- हाँ, हाँ. जानता हूँ,. आपके लिए तो जान भी हाजिर है . बसने की इजाजत तो पहले माँगी जाती है. आप मेरे मन में पहले से ही बस चुकी हो और अब इजाजत मांगती हो ?
शालिनी- मन में तो बस चुकी हूँ मगर अब आत्मा में बसना चाहती हूँ, वहीं पर बसेरा करना चाहती हूँ. बसने दोगे न मुझे ?
शालिनी की आवाज अचानक सर्द हो चली थी, मौसम तो सर्द था ही मगर शालिनी की बर्फ जैसी आवाज ने उसे और भी ठंडा बना दिया था. वे दोनों चरम सुख को प्राप्त करने की कोशिशों में जुटे थे. शालिनी का व्यवहार
अब सलीम को रहस्यमयी लगने लगा था. वह चाहता था कि जल्दी से काम खत्म करके चलता बने मगर शालिनी ने उसको अपनी बांहों में इस तरह से कैद कर रखा था कि वह टस से मस भी नहीं हो सकता था, वह शालिनी
की आवाज सुनकर चौंका. इस बार उसकी आवाज में पहले से ज्यादा सर्दी थी.
- तुम चुप हो गए, कुछ बताया नहीं . क्या फैसला किया है. आपकी आत्मा में मुझे कुछ स्थान मिलेगा कि नहीं ?
सलीम- मेरे जों कुछ भी है, वह त त तुम्हारा है, तुम्हारा ही तो है. इसमें पूछने की क्या बात है ?
शालिनी- हा हा हा ... डर रहे हो क्या ? मैं कोई भूत प्रेत हूँ, जों इस तारह हकला रहे हो . काम क्रीडा के समय तो कम से कम खुश मिजाज रहना चाहिए .
सलीम- मैं क्यों डरूंगा , मैं तो यही सोच रहा था कि समय बहुत हो गया है. लोग हमें ढूंढ रहे होंगे , क्यों न हम बरात स्थल पर चलें.?
शालिनी- बरात स्थल ? हा हा हा ... शुद्ध साहित्यिक हिन्दी में बात कर रहे हो. कहाँ से सीखी ऐसी हिंदी ?
सलीम- मेरा मतलब है कि जनमासा. आजकल कोई इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करता न , इसलिए बरात स्थल बोल दिया .
शालिनी- जानते हो मैं तुम्हारा कबसे इन्तजार कर रही थी ?
सलीम- जी नहीं, बिलकुल नहीं जानता. हमारी और आपकी मुलाक़ात तो थोड़ी देर पहले ही हुई है, फिर आप मेरा इन्तजार कैसे कर रही थी, ज़रा बताइये तो सही , मैं भी जानना चाहता हूँ.
शालिनी- क्योंकि हम सिर्फ इस जन्म के चाहने वाले नहीं हैं, हमारी मोहब्बत वर्षों से है.
सलीम- अच्छा, लेकिन थोड़ी देर पहले ही आप मेरे प्यार से ही इनकार कर रही थीं .
Friday, December 10, 2010
तन्हाई -7
इससे अच्छा अवसर हमें और कभी नहीं मिल सकता.
शालिनी- शब्दों में समय मत बर्बाद करो, जितनी जल्दी हो सके यहाँ से निकल लों. अगर किसीने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगा .
सलीम- अगर तुम मेरे साथ हो दुनिया की कोई भी ताकत हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकती. दो प्यार करने वालों को आज तक मौत भीनहीं झुका पाई है .
शालिनी- शायद तुम भूल रहे हो, यह प्यार करने का वक्त है, भाषण देने का नहीं.
सलीम- प्यार जब सच्चा हो तो वक्त भी ठहर जाता है, हर पासा पलट जाता है. मोहब्बत अमर है और हमेशा रहेगी. डर -डर के प्यार करना कोई प्यार करना है . बेफिक्र होकर रहो .
शालिनी धैर्य से उसकी बात नहीं सुन सकी, और ज्यादा देर तक रुकना उसके वश में नहीं था, सच्चाई यह थी कि सलीम का भी अंदर से बुरा हाल था. डर के कारण उसके संवेदनशील अंग ठीक ढंग से सख्त नहीं हो प् रहा था .
इसी कारण वह भी थोड़ा समय लेना चाहता था ताकि तब तक उसका खास अंग सख्त हो जाए और वह शालिनी के साथ सुहागरात मना सके. मगर जब शालिनी ने महसूस किया कि वह कुछ ढीला पडा रहा है तो
वह खुद आगे बढ़कर सलीम के सीने से लिपट गयी . सलीम के गुप्त अंग में थोड़ी सी ताकत का संचार हुआ , वह उसके सीने को सहलाने लगा . आह-ऊह की ध्वनियाँ आने लगी. शालिनी तडपकर बोली-
-यह तुम क्या कर रहे हो ? कुछ गलत मत करना .
सलीम- प्यार करना गलत नहीं होता मेरी जान, तुम मेरी रग -रग में बस चुकी हो. देखो मेरा यह हथियार कैसा तड़प रहा है.
शालिनी- इससे तो मेरी जान ही निकल जायेगी , इसको दूर ही रखो. मैं चली ... प्ररोग्राम में मजा आ रहा होगा . सब लोग डांस कर रहे होंगे. ओके , बाय ... बाय ...
सलीम - अरे जाती कहाँ हो मेरी जान. आओ न करीब आओ. इसका आकार देखकर बेवजह डर रही हो. यह तो दोस्त है तुम्हारा. अगर तुम्हारी जगह पर कोई और लड़की होती तो खुशी से उछल पड़ती , क्योंकि इतना अच्छा दोस्त आसानी से
नहीं मिल पाता. तरसती हैं महिलायें इसके लिए .
शालिनी- अच्छा जी, आपको महिलाओं के बारे में बड़ी जानकारी है. कौन तरसती है बताइये , ज़रा मैं भी तो जानूं ?
सलीम - बहुत हैं मेरी जान, इसको सहलाकर तो देखो. प्यार से सहलाओ . आह....... हाँ , अब कुछ मजा आ रहा है. डांस -वांस सब भूल जाओगी , तुम्हें इतना मजा दूंगा . सुख की पराकाष्ठा तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मेरी है .
शालिनी- देखो, मैं थर -थर काँप रही हूँ, जब अभी से यह हाल है तो आगे चलकर क्या होगा , इसकी सहज कल्पना की जा सकती है. मुझे माफ करो बाबा... जाने दो.
सलीम ने देर करना उचित नहीं समझा. शालिनी को अपनी बांहों में भरकर उसकी [पेंट की जीप ढीली करदी और एक हाथ उसके तोप के अंदर डालकर गोलाइयों को दबाने लगा. उसने अंदाजा लगा लिया कि अगर वह इन्तजार करता
तो करता ही रहेगा, शालिनी कपडे उतारने के मूड में नहीं थी. वहाँ कपड़ा उतारना उचित भी नहीं था. क्योंकि कभी भी किसीके आने की आशंका थी. आखिरकार उसने झटपट काम करने का प्लान बनाया . उसकी बातों से शालीनी की भावनाएं
भी भड़क चुकी थीं, वह चाहती थी कि जों भी हो जल्दी से खत्म हो जाए. सलीम ने कामुकता भरी इतनी बातें की थीं कि उसके मन में भी सेक्स करने की इच्छा प्रबल हो चुकी थी. सलीम ने उसके होठों का रसपान किया तो शालिनी
और भी ज्यादा गर्म हो गयी . उसके जिस्म से गर्म लावा निकलने लगा . वह बोली-
-अब कब तक तडपाओगे , इस ज्वाला को जल्दी से शांत करदो और अपने घर जाओ.
सलीम- ये क्या बार- बार जाने की बातें करती हो . अब तो हमको जीवन भर साथ -साथ रहना होगा .
शालिनी- हाँ , यार तन की तब देखेंगे, फिलहाल जिसके लिए मुझे यहाँ पर रोक रखा है उस काम को तो पूरा करो वरना कोई आ जाएगा. किसीने देख लिया तो जीना हराम हो जाएगा हामारा .
वह कह ही रही थी कि सलीम ने अपने पाँव के पंजों को थोड़ा सा ऊपर करके शालिनी के यौवन द्वार पर अपना अंग रख दिया और उस जगह को रगड़ने लगा . शालिनी के बदन की आग अब और भी खतरनाक रूप धारण कर रही थी.
वह उत्तेजक आह भरते हुए उसका सहयोग कर रही थी. उसका शरीर ऐसे काँप रहा था जैसे उसको जूडी आ गयी हो, इसके बावजूद वह मैदान में डटी थी, कुछ देर बाद ही सलीन ने अपने खास अंग को उस सुरंग में प्रवेश कर दिया
जहां हमेशा चाहत का उजाला जगमगाता रहता है. शालिनी के मुख से चीख निकलते-निकलते बची . उसने सलीम को बहुत जोर से अपनी तरफ खींच लिया था. दोनों आनंद के सागर में गोते लगाने लगे. कामोत्तेजक
आहों के कारण सर्द माहौल भी गर्मी में तब्दील हो रहा था. वह उसका जोरदार साथ दे रही थी. सलीम ने पूछा-
-अब तो निकल गया न डर ? बेवजह खौफ खा रही थीं .
शालिनी- मेरी जान पर बनी है और तुम्हें न जाने क्या -क्या सूझ रहा है . ऐसा होता है क्या ?
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