Tuesday, March 8, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग--7
आशिक- जाने दो यार , बहुत पुरानी बातें हैं, उस वक्त तुम्हें दवा तो खिलाई गयी थी, मगर वह मैंने नहीं उसी दुल्हन ने तुम्हें खिलाई थी जिसके शादी में शामिल होने के लिए तुम गयी थीं,
भाभी- मैं समझी नहीं, दुल्हन तो मेरे मामा की लड़की ही थी, वह मुझे दवा क्यों खिलाती ?
आशिक- क्यों नहीं खिला सकती ? वह भी तो मेरी महबूबा थी, उसे मैं बहुत दिनों से यूज कर रहा था, मेरे पास उसकी अश्लील फिल्म भी थी, मैंने उसके सामने तुम्हें पटाने की शर्त रखी , उसने तुम्हें सेट
कर दिया और बदले में मैंने उसे उसकी फिल्म लौटादी .मैं उसकी नकली फिल्मों का क्या करता ? जब तुम्हीं असली मिल गयीं. उसने मुझसे वादा किया था की मुझे वह बिलकुल कोरा माल दिलाएगी .
उसने अपना वादा पूरा भी किया. सच तो ये है की उसका कुंवारापन भी मैंने ही उतारा था. उसे कली से फूल मैंने ही बनाया था. वह भी मुझे कच्ची कली ही मिली थी, उसे तो मैंने सिर्फ १२ साल की उम्र
में ही कली से फूल बना दिया. था. उस वक्त वह बहुत रोई थी, चीखी थी, चिल्लाई थी, उसका यौवन द्वार बड़ा संवेदनशील था. तुम्हारी यह ननद तो फिर भी १७ से कम नहीं होगी .
भाभी- नहीं यार, खाते-पीते हो गयी है, दिखने में ऐसी लगती ही है, मगर वास्तव में है नहीं. मुश्किल से १६ साल की हुई है.
आशिक - अगर मेरे साथ खाना -पीना करेगी तो और भी जल्दी जवां हो जायेगी, मसल-मसलकर इसके उभारों को आम बना दूंगा . जब मेरे साथ दो चार बार सम्बन्ध बाना लेगी तो खुद ही इसका कूल्हा बड़ा होने लगेगा,
इसका रंग भी निखारने लगेगा और कुछ ही समय के बाद यह तुम्हारी तरह सुर्ख टमाटर की तारह हो जायेगी .
भाभी- तुम कुंवारी लड़कियों से ही सम्बन्ध बनाने के लिए क्यों परेशां रहते हो ? न जाने कितनी कलियों को फूल बना ही चुके हो, क्या अब तक मन नहीं भरा ?
आशिक- वो सुख भी क्या होता है ? इसकी कल्पना तो वही कर सकता है, जिसने उस सुख को भोगा हो.
भाभी- तो क्या अब मेरे साथ तुम्हें कम मजा आने लगा है ? इतने साल हो गए, जब भी इस तन को समर्पित करती हूँ, बस तुम्हीनको याद करती हूँ, मैं तो अब भी तुम्हारे लिए ही रिजर्व हूँ.
आशिक- झूठ बोलती हो, ससुराल में रहकर भी अगर इस तरह का दावा करोगी तो उस पर कौन यकीन करेगा ?
भाभी- यकीन तो कोई इस बात का भी नहीं करेगा की कोई विवाहिता शादी के कुछ दिनों बाद ही ससुराल में अपने आशिक के साथ रंग रेलियां मनायेगी ?
आशिक- अगर कोई यह सवाल करता भी है तो आपका क्या जवाब होगा ?
भाभी- यही की मैं ससुराल में आकर भी कुंवारी ही हूँ , इसलिए यार को याद करना पड़ा.
आशिक- क्या बात करती हो, क्या तुम्हारा पति नामर्द है ?
भाभी- पता नहीं, मगर मेरे पास आते ही वह स्खलित हो जाता है, मुझसे संपर्क बना ही नहीं पाता. मैं रात भर बिस्तर पर तडपती रहती हूँ और वो निर्मोही खर्राटे भरता रहता है. ऐसा कितने दिनों तक चलेगा ?
आशिक- तुम हमेशा मुझे डराती रहती हो, अगर इस हाल में तुम्हें और मुझे कोई देखले और मामला तुम्हारे पति तक पहुंचे तो क्या होगा ?
भाभी- कुछ नहीं होगा, मैं लोगों को असलियत बता दूंगी , तब क्या होगा ? क्या किसीके साथ ऐसा धोखा किया जाता है ?क्या किसीके अरमानों के साथ ऐसे खिलवाड किया जाता है ?
आशिक- बदनामी तो तुम्हारी और मेरी भी होगी ?
भाभी- अगर मजा लेने के लिए तुम हो तो सजा भुगतने के लिए क्या पड़ोसियों को बुलाऊंगी ?
आशिक- मैंने तुम जैसी सेक्सी महिला बहुत कम देखी हैं , मै तो हूँ ही खिलाड़ी, मगर तुम महा खिलाड़ी हो. कमाल की हो .
भाभी- तुम रात में चार बार सेक्स करते हो और दोष मुझे देते हो. तुमने मुझे कली से फूल बनाया वो भी धोखे से , अब मेरी ननद के साथ भी ऐश करना चाहते हो . वो भी धोखे से.
आशिक- तुम कहना क्या चाहती हो ?
भाभी- तुम भरोसे के आदमी नहीं लगते . तुमने तो मेरी भी अश्लील फिल्म बनाई ही होगी ?
आशिक- ये काम तो पहले ही हो जाता है, तुम हसीनाओं का भी कोई भरोसा नहीं किया जा सकता .
भाभी- उस्ताद हो, अब तो तुमने मेरी पूरी जवानी ही लूट ली है, अब तो रहम करो ,. मेरी फ़िल्में मुझे वापस दे दो.
आशिक- अब हम बराबर हो चुके हैं मेरी जान, तुमने मेरी फिल्म बनाई है.

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