नई दिल्ली. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) मुम्बई के आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले में केद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे से पूछताछ कर रही है। यह जानकारी सूत्रों ने रविवार को दी।सूत्रों के अनुसार उनसे यान पूछताछ की गयी की क्या उन्हें आदर्श घोटा ले के बारे में पहले से जानकारी थी.
जिस समय इस गगनचुम्बी इमारत की फाइल सरकारी प्रक्रिया से गुजर रही थी,उस समय शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे।
रिपोर्ट के अनुसार, शिंदे ने तत्कालीन राजस्व मंत्री अशोक चव्हाण द्वारा भेजे गए एक प्रस्ताव को स्वीकार किया था। प्रस्ताव में इस बात की सिफारिश की गई थी कि इमारत में 40 प्रतिशत फ्लैट असैन्य लोगों को दिए जाने चाहिए। जबकि यह इमारत मूलरूप से 1999 के कारगिल युद्ध के शहीदों के लिए थी।
शिंदे से पूछताछ करने सीबीआई का एक दल शनिवार रात मुम्बई से दिल्ली आया। सीबीआई, केंद्रीय मंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख से भी पूछताछ कर सकती है।
Sunday, July 31, 2011
सेना बनाने में जुटे बाबा
हरिद्वार. नई दिल्ली/हरिद्वार. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के मामले में आचार्य बालकृष्ण तीन अगस्त को सीबीआई के सामने पेश होंगे। यह जानकारी मीडिया में उनके प्रवक्ता हरिशंकर मिश्रा ने दी है। उन्होंने यह भी बताया कि पतंजलि योगपीठ के कोषाध्यक्ष स्वामी मुक्तानंद को पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के बैंक खातों के संचालन का प्रभार दिया गया है जिन्हें अब तक बालकृष्ण देखा करते थे। दूसरी ओर, चार अगस्त को जड़ी बूटी दिवस के रूप में मनाए जाने वाले आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिन की यहां पतंजलि योगपीठ में व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 29 अगस्त तक बालकृष्ण की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और उनसे तीन अगस्त को सीबीआई के सामने पेश होने को कहा था। सीबीआई ने उन्हें पेश होने के लिए चार अगस्त तक की मोहलत दी थी। कई दिनों तक 'लापता' रहे बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य रोजमर्रा के कामकाज में सक्रिय हो गए हैं। बाबा खुद भी अपने लोगों को खास प्रशिक्षण देने की तैयारी में हैं। अगस्त में लगभग पूरे महीने पतंजलि आश्रम में शिविर चलेंगे। शुरुआत एक अगस्त से होगी। नौ अगस्त से पतंजलि से जुड़े वरिष्ठ लोगों का मंथन शिविर चलेगा। पंद्रह अगस्त से बाबा की सेना का प्रशिक्षण शुरू होगा। बाबा अब अपने लोगों को योग सिखाएंगे।
1 अगस्त से पतंजलि फेज-टू में शुरू होने वाले योग शिविर में पतंजलि की देश भर में फैली शाखाओं से करीब 5000 लोग आएंगे। यह शिविर 4 अगस्त तक चलेगा। नौ अगस्त से पतंजलि से जुड़े वरिष्ठ लोगों का मंथन शिविर शुरू होगा। इसमें काला धन विदेश से भारत लाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। मंथन शिविर में कई रिटायर्ड जज-आईएएस-आईपीएस व समाज के प्रबुद्ध तबकों से जुड़े लोग शामिल होंगे। यह शिविर भी चार दिन चलेगा। फिर 15 अगस्त से बाबा अपनी 'सेना' को विशेष प्रशिक्षण देंगे। यह प्रशिक्षण शिविर युवा भारत संगठन अभियान के तहत चलेगा। इसमें देश भर के युवाओं को जुटा कर एक हफ्ते तक खास ट्रेनिंग दिए जाने की योजना है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 29 अगस्त तक बालकृष्ण की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और उनसे तीन अगस्त को सीबीआई के सामने पेश होने को कहा था। सीबीआई ने उन्हें पेश होने के लिए चार अगस्त तक की मोहलत दी थी। कई दिनों तक 'लापता' रहे बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य रोजमर्रा के कामकाज में सक्रिय हो गए हैं। बाबा खुद भी अपने लोगों को खास प्रशिक्षण देने की तैयारी में हैं। अगस्त में लगभग पूरे महीने पतंजलि आश्रम में शिविर चलेंगे। शुरुआत एक अगस्त से होगी। नौ अगस्त से पतंजलि से जुड़े वरिष्ठ लोगों का मंथन शिविर चलेगा। पंद्रह अगस्त से बाबा की सेना का प्रशिक्षण शुरू होगा। बाबा अब अपने लोगों को योग सिखाएंगे।
1 अगस्त से पतंजलि फेज-टू में शुरू होने वाले योग शिविर में पतंजलि की देश भर में फैली शाखाओं से करीब 5000 लोग आएंगे। यह शिविर 4 अगस्त तक चलेगा। नौ अगस्त से पतंजलि से जुड़े वरिष्ठ लोगों का मंथन शिविर शुरू होगा। इसमें काला धन विदेश से भारत लाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। मंथन शिविर में कई रिटायर्ड जज-आईएएस-आईपीएस व समाज के प्रबुद्ध तबकों से जुड़े लोग शामिल होंगे। यह शिविर भी चार दिन चलेगा। फिर 15 अगस्त से बाबा अपनी 'सेना' को विशेष प्रशिक्षण देंगे। यह प्रशिक्षण शिविर युवा भारत संगठन अभियान के तहत चलेगा। इसमें देश भर के युवाओं को जुटा कर एक हफ्ते तक खास ट्रेनिंग दिए जाने की योजना है।
नई दिल्ली।। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि रिश्ते में भाई-बहन लगने वाले हिंदू युवक-युवती ईसाई धर्म अपनाकर आपस में शादी कर सकते हैं।
अदालत ने यह फैसला देते हुए एक रिटायर्ड जज की याचिका खारिज कर दी। रिटायर्ड जज ने अपने मैजिस्ट्रेट बेटे के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसने धर्म बदलने के बाद अपने मामा की बेटी से शादी कर ली थी।
जस्टिस सुरेश कैत ने शादी की वैधता को कायम रखते हुए कहा, 'प्रतिवादियों (दंपती) का धर्म परिवर्तन भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम की धारा तीन के तहत उचित है। इसलिए इनकी शादी ऐसे संबंध के तहत नहीं आती, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है।'
अपने बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराने पर पिता को फटकार लगाते हुए अदालत ने कहा, 'इस तरह की सोच नई पीढ़ी की व्यापक सोच को खत्म करती है और कई बार इसका नतीजा झूठी शान के लिए की जाने वाली हत्याओं के रूप में दिखता है।'
अदालत ने याचिकाकर्ता ओ पी गोगने पर 'विचार न करने योग्य मामला' दर्ज करने पर 10,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने यह फैसला देते हुए एक रिटायर्ड जज की याचिका खारिज कर दी। रिटायर्ड जज ने अपने मैजिस्ट्रेट बेटे के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसने धर्म बदलने के बाद अपने मामा की बेटी से शादी कर ली थी।
जस्टिस सुरेश कैत ने शादी की वैधता को कायम रखते हुए कहा, 'प्रतिवादियों (दंपती) का धर्म परिवर्तन भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम की धारा तीन के तहत उचित है। इसलिए इनकी शादी ऐसे संबंध के तहत नहीं आती, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है।'
अपने बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराने पर पिता को फटकार लगाते हुए अदालत ने कहा, 'इस तरह की सोच नई पीढ़ी की व्यापक सोच को खत्म करती है और कई बार इसका नतीजा झूठी शान के लिए की जाने वाली हत्याओं के रूप में दिखता है।'
अदालत ने याचिकाकर्ता ओ पी गोगने पर 'विचार न करने योग्य मामला' दर्ज करने पर 10,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

नई दिल्ली।। टोरंटो, लंदन समते कई शहरों के बाद दिल्ली में भी महिलाओं के प्रति पुरुषों को संवेदनशील बनाने के लिए स्लटवॉक निकाला गया। इसके लिए रविवार सुबह 10:30 बजे से जंतर मंतर पर महिलाओं और पुरुषों का जमावड़ा लगने लगा, जो करीब 12 बजे तक अपने चरम पर था।
दिल्ली में होने वाले स्लटवॉक को नाम दिया गया-बेशर्मी मोर्चा। इस वॉक का मुख्य उद्देश्य समाज को महिलाओं के प्रति संवेदशनशील बनाना और महिलाओं की स्वतंत्रता का सम्मान करना सिखाना है। स्लटवॉक जंतर-मंतर से शुरू हुआ और संसद मार्ग का चक्कर लगाकर वापस जंतर-मंतर पर पहुंचा।
इसमें शामिल महिलाओं और पुरुषों का कहना था कि रेप के लिए महिला के पहनावे को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, जबकि रेप 5 साल की बच्ची से लेकर 60 तक की बुजुर्ग महिलाओं के साथ होते हैं।
अपनी ढाई साल की बेटी के साथ वॉक में शामिल हुईं निष्ठा ने कहा , ' मैं इस वॉक में इसलिए शामिल हुई हूं ताकि मेरी बेटी जब बड़ी हो तब उसे ऐसे स्लटवॉक को न निकालना पड़े। ' मूल रूप से बिहार की रहने वाली रेणु यहां अपने पति के साथ आई हुईं थीं। उनके हाथ में तख्ती थी- महिलाओं के कपड़े नहीं , अपनी सोच बदलो। उन्होंने कहा , ' मैं हाउस वाइफ हूं और मुझे बड़ी हैरानी होती है कि दिल्ली जैसे शहर में भी महिलाएं अपनी मर्जी से बेखौफ हो कर कपड़े नहीं पहन सकती हैं। सरकार को कानूनों को सख्ती से लागू करवाना चाहिए। '
वॉक में महिलाओं के अलावा भारी संख्या में पुरुष भी थे। डीयू में स्टूडेंट गगनदीप ने स्लटवॉक की जरूरत पर बल देते हुए कहा , ' आदमियों को कैसे कुछ भी करने भर दिया जाए। अगर इंडिया विकसित देश है तो उसे मानसिक रूप से भी विकसित होना होगा। ' वहीं ग्रैजुएशन कर रहे अंकुर ने कहा , ' महिलाओं के प्रति लोगों के नजरिए में और व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि ऐजुकेशन सिस्टम में सुधार किया जाए। '
वैसे, वॉक के दौरान कई लोग ऐसे भी मिले जिनका कहना था कि यह सब फिजूल है और लड़कियों को चाहिए कि वे ढंग के कपड़े पहने। एक बुजुर्ग दंपती ने कहा , ' कम कपड़े पहनेंगी तो लोग पीछे से देखेंगे ही। फब्तियां कसेंगे ही। पुलिस भी कहां तक संभालेगी। '
अमेरिका से आई मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली शोभना ने कहा , ' पिछले दिनों अमृतसर में जब मेरी सहेलियों पर फब्तियां कसी गईं तो उनमें से एक ने लड़के को जोरदार थप्पड़ रसीद दिया। मुझे लगता है कि लोग खुद नहीं सुधरेंगे। उन्हें सबक सिखाना पड़ेगा। दिल्ली में रात 12 बजे बेफिक्र हो कर नहीं घूम सकते जबकि यूएस में मैं आराम से 12 बजे घूमने निकल सकती थी। '
दिल्ली में स्लटवॉक के आयोजकों ने साफ कहा कि स्लटवॉक उस मानसिकता के खिलाफ जंग का ऐलान है जो समझते हैं कि लड़कियां अगर मॉडर्न या छोटे कपड़े पहन रही हैं तो वे छेड़खानी के लिए आमंत्रित कर रही हैं।
पीड़ित पर ही आरोप लगाने और दोषी को कसूरवार ठहराने की मानसिकता बदलने की लड़ाई है यह। यह वॉक लोगों को अहसास दिलाने के लिए है कि लड़कियों के साथ अत्याचार और भेदभाव हो रहा है और इसे खत्म करने की जरूरत है। सोमवार से शुरू हो रहे संसद सत्र की वजह से आयोजकों को जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक करीब 700 मीटर तक जाने की इजाजत दी गई है.
Saturday, July 30, 2011
मुंबई धमाका : एक और मौत, संख्या 26 पहुंची
मुंबई में 13 जुलाई को हुए विस्फोटों में घायल एक और व्यक्ति ने शनिवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसके साथ ही मरने वालों की संख्या 26 हो गई है। पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम चन्द्रकांत वानकर (42) है। उनका हरकिशनदास अस्पताल में इलाज चल रहा था।
ओपेरा हाउस में हुए धमाके में उनका शरीर बुरी तरह जल गया था। इस सप्ताह के शुरुआत में ओपेरा हाउस धमाके में ही घायल 48 वर्षीय वल्लभ गाडिया की मौत हो गई थी। उनका इलाज सैफी अस्पताल में चल रहा था। पिछले सोमवार को दादर स्थित कबूतर खाना धमाके में घायल हुए मानकेश्वर विश्वकर्मा की मौत हो गई थी।
सूत्रों ने बताया कि जेजे अस्पताल में फिलहाल 22 लोगों का इलाज हो रहा है। उनमें छह अभी भी गंभीर अवस्था में हैं। हरकिशन अस्पताल में भर्ती 12 लोगों में से भी कुछ लोगों की हालत गंभीर है
मुंबई में 13 जुलाई को हुए विस्फोटों में घायल एक और व्यक्ति ने शनिवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसके साथ ही मरने वालों की संख्या 26 हो गई है। पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम चन्द्रकांत वानकर (42) है। उनका हरकिशनदास अस्पताल में इलाज चल रहा था।
ओपेरा हाउस में हुए धमाके में उनका शरीर बुरी तरह जल गया था। इस सप्ताह के शुरुआत में ओपेरा हाउस धमाके में ही घायल 48 वर्षीय वल्लभ गाडिया की मौत हो गई थी। उनका इलाज सैफी अस्पताल में चल रहा था। पिछले सोमवार को दादर स्थित कबूतर खाना धमाके में घायल हुए मानकेश्वर विश्वकर्मा की मौत हो गई थी।
सूत्रों ने बताया कि जेजे अस्पताल में फिलहाल 22 लोगों का इलाज हो रहा है। उनमें छह अभी भी गंभीर अवस्था में हैं। हरकिशन अस्पताल में भर्ती 12 लोगों में से भी कुछ लोगों की हालत गंभीर है
अन्ना की राह में अडंगा
९ अगस्त को जलाएंगे सरकारी बिल की प्रतियाँ
नई दिल्ली. अन्ना हजारे के अनशन की राह में एक और अड़ंगा सामने आ गया है। टीम अन्ना से कहा गया है कि वो जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन के लिए पहले नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लें। जंतर मंतर पर अनशन के लिए अटल अन्ना हजारे ने सरकार को चुनौती दी है कि वो हर कीमत पर आंदोलन के लिए तैयार हैं। वहीं अनशन की इजाजत देने से मना कर मुसीबत मोल लेने वाली दिल्ली पुलिस बचाव की मुद्रा में आ गई है। पुलिस ने टीम अन्ना को चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि उनका अनशन सिर्फ एक दिन का हो और इस दौरान 2000 से अधिक लोग जमा नहीं हों तो उन्हें प्रदर्शन की इजाजत दी जा सकती है।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा है, ‘अभी तक हमने न तो अनशन की इजाजत दी है और न ही इनकार किया है। हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं जिसके लिए 10 दिन पहले चिट्ठी लिखी गई थी। उनसे कुछ बिंदुओं पर सफाई मांगी गई है।‘
मजबूत लोकपाल की मांग को लेकर 16 अगस्त से जंतर-मंतर पर अनशन की तैयारियों में जुटे अन्ना हजारे को दिल्ली पुलिस ने इससे पहले साफ कह दिया था कि वह जंतर-मंतर पर बेमियादी अनशन नहीं कर सकते। पुलिस ने उनसे कहा कि या तो वह अपने आंदोलन के लिए दिल्ली के बाहर कोई जगह चुन लें या फिर पहले से कार्यक्रम बता कर आंदोलन के लिए इजाजत मांगें। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सदन के आसपास अन्ना धरना-प्रदर्शन नहीं कर सकें, इसके लिए धारा 144 लागू करने के आदेश भी दिए गए हैं। लेकिन अन्ना का कहना है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना उनका हक है और वह मनाही के बावजूद अनशन करेंगे।
टीम अन्ना ने जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं मिलने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि निषेधाज्ञा के बावजूद अन्ना हजारे का शांतिपूर्वक अनशन होगा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि संविधान के तहत देश के नागरिकों को हासिल मूल अधिकारों में भी शांतिपूर्वक सभा करने का प्रावधान है। यदि सरकार हमें अनशन पर बैठने से रोकती है तो यह संविधान की हत्या है।
बीजेपी ने भी टीम अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं देने पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस हर उस शख्स को कुचलने में जुटी है जो भ्रष्टाचार का विरोध करता है। लेकिन कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने टीम अन्ना को एक तरह से चुनौती देते हुए कहा है कि सरकार किसी के अनशन से नहीं डरती है।
दिल्ली पुलिस ने अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 2009 में दिए गए एक आदेश का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिल्ली में किसी भी स्थान पर बेमियादी धरना की इजाजत नहीं दे सकती। पुलिस का कहना है कि चूंकि उस वक्त संसद का सत्र चल रहा होगा, ऐसे में किसी को जंतर-मंतर पर पूरा जगह घेरने की इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि उस वक्त कई अन्य संगठन भी विरोध प्रदर्शन के लिए वहां जुट सकते हैं।
जंतर-मंतर पर धरने की इजाजत के लिए टीम अन्ना की ओर से लिखे खत के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि टीम अन्ना चाहे तो अनशन स्थल दिल्ली के बाहरी इलाकों में शिफ्ट कर सकती है या फिर एक निश्चित समय-सीमा दे जिस दौरान उन्हें धरना-प्रदर्शन की इजाजत दी जा सके।
इससे पहले सरकार ने लोकपाल बिल के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट को मंजूरी देकर टीम अन्ना को झटका दिया। सरकार के मसौदे में मौजूदा पीएम और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है जबकि टीम अन्ना मौजूदा पीएम को भी लोकपाल के दायरे में रखना चाहती थी।
केंद्रीय कैबिनेट ने सरकार के प्रतिनिधियों की तरफ से पेश किए गए ड्राफ्ट को कुछ बदलावों के साथ गुरूवार को हरी झंडी दिखा दी, लेकिन गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना के ड्राफ्ट को दरकिनार कर दिया। कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए बिल को संसद की मंजूरी के लिए 1 अगस्त से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार के एकतरफा फैसले से नाराज अन्ना और उनके समर्थकों ने 9 अगस्त को सरकारी बिल की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।
९ अगस्त को जलाएंगे सरकारी बिल की प्रतियाँ
नई दिल्ली. अन्ना हजारे के अनशन की राह में एक और अड़ंगा सामने आ गया है। टीम अन्ना से कहा गया है कि वो जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन के लिए पहले नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लें। जंतर मंतर पर अनशन के लिए अटल अन्ना हजारे ने सरकार को चुनौती दी है कि वो हर कीमत पर आंदोलन के लिए तैयार हैं। वहीं अनशन की इजाजत देने से मना कर मुसीबत मोल लेने वाली दिल्ली पुलिस बचाव की मुद्रा में आ गई है। पुलिस ने टीम अन्ना को चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि उनका अनशन सिर्फ एक दिन का हो और इस दौरान 2000 से अधिक लोग जमा नहीं हों तो उन्हें प्रदर्शन की इजाजत दी जा सकती है।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा है, ‘अभी तक हमने न तो अनशन की इजाजत दी है और न ही इनकार किया है। हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं जिसके लिए 10 दिन पहले चिट्ठी लिखी गई थी। उनसे कुछ बिंदुओं पर सफाई मांगी गई है।‘
मजबूत लोकपाल की मांग को लेकर 16 अगस्त से जंतर-मंतर पर अनशन की तैयारियों में जुटे अन्ना हजारे को दिल्ली पुलिस ने इससे पहले साफ कह दिया था कि वह जंतर-मंतर पर बेमियादी अनशन नहीं कर सकते। पुलिस ने उनसे कहा कि या तो वह अपने आंदोलन के लिए दिल्ली के बाहर कोई जगह चुन लें या फिर पहले से कार्यक्रम बता कर आंदोलन के लिए इजाजत मांगें। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सदन के आसपास अन्ना धरना-प्रदर्शन नहीं कर सकें, इसके लिए धारा 144 लागू करने के आदेश भी दिए गए हैं। लेकिन अन्ना का कहना है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना उनका हक है और वह मनाही के बावजूद अनशन करेंगे।
टीम अन्ना ने जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं मिलने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि निषेधाज्ञा के बावजूद अन्ना हजारे का शांतिपूर्वक अनशन होगा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि संविधान के तहत देश के नागरिकों को हासिल मूल अधिकारों में भी शांतिपूर्वक सभा करने का प्रावधान है। यदि सरकार हमें अनशन पर बैठने से रोकती है तो यह संविधान की हत्या है।
बीजेपी ने भी टीम अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं देने पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस हर उस शख्स को कुचलने में जुटी है जो भ्रष्टाचार का विरोध करता है। लेकिन कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने टीम अन्ना को एक तरह से चुनौती देते हुए कहा है कि सरकार किसी के अनशन से नहीं डरती है।
दिल्ली पुलिस ने अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 2009 में दिए गए एक आदेश का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिल्ली में किसी भी स्थान पर बेमियादी धरना की इजाजत नहीं दे सकती। पुलिस का कहना है कि चूंकि उस वक्त संसद का सत्र चल रहा होगा, ऐसे में किसी को जंतर-मंतर पर पूरा जगह घेरने की इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि उस वक्त कई अन्य संगठन भी विरोध प्रदर्शन के लिए वहां जुट सकते हैं।
जंतर-मंतर पर धरने की इजाजत के लिए टीम अन्ना की ओर से लिखे खत के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि टीम अन्ना चाहे तो अनशन स्थल दिल्ली के बाहरी इलाकों में शिफ्ट कर सकती है या फिर एक निश्चित समय-सीमा दे जिस दौरान उन्हें धरना-प्रदर्शन की इजाजत दी जा सके।
इससे पहले सरकार ने लोकपाल बिल के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट को मंजूरी देकर टीम अन्ना को झटका दिया। सरकार के मसौदे में मौजूदा पीएम और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है जबकि टीम अन्ना मौजूदा पीएम को भी लोकपाल के दायरे में रखना चाहती थी।
केंद्रीय कैबिनेट ने सरकार के प्रतिनिधियों की तरफ से पेश किए गए ड्राफ्ट को कुछ बदलावों के साथ गुरूवार को हरी झंडी दिखा दी, लेकिन गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना के ड्राफ्ट को दरकिनार कर दिया। कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए बिल को संसद की मंजूरी के लिए 1 अगस्त से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार के एकतरफा फैसले से नाराज अन्ना और उनके समर्थकों ने 9 अगस्त को सरकारी बिल की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।
एकता तिवारी से छेड़छाड़ , ड्राइवर गिरफ्तार
मुंबई। मुंबई में टीवी कलाकार एकता तिवारी ने अपने पूर्व ड्राइवर के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज करवाया है। एकता का आरोप है कि साजिद नाम के आरोपी ने उसके घर में जबरन घुसकर उसे धमकाया और छेड़छाड़ की।
स्टार प्लस के सीरियल तेरे मेरे सपने में काम करने वाली एकता को नहीं पता था कि उसी का ड्राइवर साजिद उसकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेगा। एकता का आरोप है कि साजिद पिछले कई दिनों से उसे परेशान कर रहा था। अपने ड्राइवर की हरकतें देख एकता ने उसे 15 दिन पहले निकाल भी दिया था लेकिन हद तो तब हो गई जब साजिद अचानक गुरुवार को एकता के घर पहुंच गया और जबरन घर में घुसकर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा।
एकता तिवारी ने बताया कि ड्राइवर बदतमीजी करने लगा और धमकाने लगा कि अगर मैंने उसको छोड़ कर किसी और को काम पर रखा तो ठीक नहीं होगा। वो और किसी को उसके साथ काम करने नहीं देगा क्योंकि वो उस को दिलोजान से चाहता है। एकता ने नवघर पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपी साजिद के खिलाफ छेड़छाड़, गालीगलौज और जबरन घर में घुसकर हमला करने का मामला दर्ज कर लिया है।
स्टार प्लस के सीरियल तेरे मेरे सपने में काम करने वाली एकता को नहीं पता था कि उसी का ड्राइवर साजिद उसकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेगा। एकता का आरोप है कि साजिद पिछले कई दिनों से उसे परेशान कर रहा था। अपने ड्राइवर की हरकतें देख एकता ने उसे 15 दिन पहले निकाल भी दिया था लेकिन हद तो तब हो गई जब साजिद अचानक गुरुवार को एकता के घर पहुंच गया और जबरन घर में घुसकर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा।
एकता तिवारी ने बताया कि ड्राइवर बदतमीजी करने लगा और धमकाने लगा कि अगर मैंने उसको छोड़ कर किसी और को काम पर रखा तो ठीक नहीं होगा। वो और किसी को उसके साथ काम करने नहीं देगा क्योंकि वो उस को दिलोजान से चाहता है। एकता ने नवघर पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपी साजिद के खिलाफ छेड़छाड़, गालीगलौज और जबरन घर में घुसकर हमला करने का मामला दर्ज कर लिया है।
बहू के साथ बलात्कार , पुलिसकर्मी गिरफ्तार
भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के निवासी तथा झारखण्ड में विशेष सहायक बल के रूप में तैनात एक पुलिसकर्मी को बहू के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार झारखण्ड के चतरा जिले में तैनात पुलिसकर्मी द्वारिकानाथ ओझा को अपनी बहू के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में शुक्रवार की रात नवादा थाना के एक होटल से गिरफ्तार किया गया।
नवादा थाना के प्रभारी आऱ क़े दूबे ने शनिवार को बताया कि ओझा ने पीड़िता को इलाज के बहाने होटल में ले आया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के बयान पर पुलिस ने थाने में एक मामला दर्ज किया है।
पीड़ित महिला को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया गया है तथा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार झारखण्ड के चतरा जिले में तैनात पुलिसकर्मी द्वारिकानाथ ओझा को अपनी बहू के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में शुक्रवार की रात नवादा थाना के एक होटल से गिरफ्तार किया गया।
नवादा थाना के प्रभारी आऱ क़े दूबे ने शनिवार को बताया कि ओझा ने पीड़िता को इलाज के बहाने होटल में ले आया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के बयान पर पुलिस ने थाने में एक मामला दर्ज किया है।
पीड़ित महिला को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया गया है तथा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
Friday, July 29, 2011
मुंबई। 26/11 मुंबई आतंकी हमले में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकवाद मोहम्मद अजमल आमिर कसाब ने बॉम्बे हॉईकोर्ट के उस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है जिसमें उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। कसाब ने जेल अधिकारियों के माध्यम से यह याचिका सुप्रीम में दाखिल की है। इस याचिका में कसाब ने फांसी की सजा को माफ किए जाने की अपील की है। 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमलों में कसाब ऐसा इकलौता हमलावर था जिसे मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
अगर सुप्रीम कोर्ट भी कसाब की फांसी की सजा को बरकरार रखती है तो वह राष्ट्रपति से माफी की अपील कर सकता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी साल 21 फरवरी को कसाब को फांसी की सजा सुनाई थी। 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में कसाब शामिल था उसमें 166 लोगों की जान गई थी। इस हमले में कसाब के साथ शामिल बाकी 9 आतंकी मारे गए थे। इसके बाद कसाब को 80 मामलों में दोषी पाया गया था।
इस आतंकी हमले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के कई सीनियर पुलिस अधिकारी भी मारे गए थे। कसाब ने अन्य आतंकियों के साथ मिलकर यहां के 3 बड़े होटलों पर भी हमला किया था। यहां होटलों के अंदर घुसकर इन लोगों ने मौत का तांडव खेला था। इन आतंकियों ने इससे पहले छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर भी अंधाधुंध फायरिंग की थी। जिसमें कई लोगों की जान गई थी।
शुरुआत में पाकिस्तान की सरकार कसाब के वहां के नागरिक होने से इंकार कर रही थी। लेकिन जनवरी 2009 में पाकिस्तान ने कसाब के पाकिस्तानी नागरिक होने की बात मान ली थी। इसके बाद से लगातार भारत पाकिस्तान से इन हमलों की जानकारी मांगता रहा था। दोनों देशों के संबंधों में भी इसके बाद खटास आ गई थी। दोनों देशों के बीच कसाब को लेकर एक बार राजनीति फिर तेज हो गई है। पाकिस्तान में भी कसाब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है।
अगर सुप्रीम कोर्ट भी कसाब की फांसी की सजा को बरकरार रखती है तो वह राष्ट्रपति से माफी की अपील कर सकता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी साल 21 फरवरी को कसाब को फांसी की सजा सुनाई थी। 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में कसाब शामिल था उसमें 166 लोगों की जान गई थी। इस हमले में कसाब के साथ शामिल बाकी 9 आतंकी मारे गए थे। इसके बाद कसाब को 80 मामलों में दोषी पाया गया था।
इस आतंकी हमले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के कई सीनियर पुलिस अधिकारी भी मारे गए थे। कसाब ने अन्य आतंकियों के साथ मिलकर यहां के 3 बड़े होटलों पर भी हमला किया था। यहां होटलों के अंदर घुसकर इन लोगों ने मौत का तांडव खेला था। इन आतंकियों ने इससे पहले छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर भी अंधाधुंध फायरिंग की थी। जिसमें कई लोगों की जान गई थी।
शुरुआत में पाकिस्तान की सरकार कसाब के वहां के नागरिक होने से इंकार कर रही थी। लेकिन जनवरी 2009 में पाकिस्तान ने कसाब के पाकिस्तानी नागरिक होने की बात मान ली थी। इसके बाद से लगातार भारत पाकिस्तान से इन हमलों की जानकारी मांगता रहा था। दोनों देशों के संबंधों में भी इसके बाद खटास आ गई थी। दोनों देशों के बीच कसाब को लेकर एक बार राजनीति फिर तेज हो गई है। पाकिस्तान में भी कसाब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है।
नई दिल्ली. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का जंतर-मंतर पर प्रस्तावित अनशन टल जाने की उम्मीद है। मजबूत लोकपाल की मांग को लेकर 16 अगस्त से जंतर-मंतर पर अनशन की तैयारियों में जुटे अन्ना को दिल्ली पुलिस ने तगड़ा झटका दिया है। दिल्ली पुलिस ने अन्ना को जंतर-मंतर पर बेमियादी अनशन के लिए हरी झंडी देने से इनकार कर दिया है। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सदन के आसपास धारा 144 लागू करने के आदेश दिए गए हैं। अन्ना ने बीते अप्रैल में इसी जगह से जन लोकपाल की लड़ाई का शंखनाद किया था। उम्मीद है कि हजारे अनशन की इजाजत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इस बीच, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने टीम अन्ना को चुनौती देते हुए कहा है कि सरकार किसी के अनशन से नहीं डरती है।
टीम अन्ना ने जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं मिलने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि निषेधाज्ञा के बावजूद अन्ना हजारे का शांतिपूर्वक अनशन होगा। उन्होंने आज पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शांतिपूर्वक अनशन के लिए रोकना संविधान की 'हत्या' है। संविधान के तहत देश के नागरिकों को हासिल मूल अधिकारों में भी शांतिपूर्वक सभा करने का प्रावधान है। केजरीवाल ने कहा है, 'यदि सरकार हमें अनशन पर बैठने से रोकती है तो यह संविधान की हत्या है। हम इसकी कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं।' बीजेपी ने भी टीम अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं देने पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस हर उस शख्स को कुचलने में जुटी है जो भ्रष्टाचार का विरोध करता है।
दिल्ली पुलिस ने अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 2009 में दिए गए एक आदेश का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिल्ली में किसी भी स्थान पर बेमियादी धरना की इजाजत नहीं दे सकती। पुलिस का कहना है कि चूंकि उस वक्त संसद का सत्र चल रहा होगा, ऐसे में किसी को जंतर-मंतर पर पूरा जगह घेरने की इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि उस वक्त कई अन्य संगठन भी विरोध प्रदर्शन के लिए वहां जुट सकते हैं।
जंतर-मंतर पर धरने की इजाजत के लिए टीम अन्ना की ओर से लिखे खत के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि टीम अन्ना चाहे तो अनशन स्थल दिल्ली के बाहरी इलाकों में शिफ्ट कर सकती है या फिर एक निश्चित समय-सीमा दे जिस दौरान उन्हें धरना-प्रदर्शन की इजाजत दी जा सके।
इससे पहले सरकार ने लोकपाल बिल के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट को मंजूरी देकर टीम अन्ना को झटका दिया। सरकार के मसौदे में मौजूदा पीएम और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है जबकि टीम अन्ना मौजूदा पीएम को भी लोकपाल के दायरे में रखना चाहती थी। (पूरी खबर पढ़ने के लिए पहली रिलेटेड खबर पर क्लिक करें)
केंद्रीय कैबिनेट ने सरकार के प्रतिनिधियों की तरफ से पेश किए गए ड्राफ्ट को कुछ बदलावों के साथ गुरूवार को हरी झंडी दिखा दी, लेकिन गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना के ड्राफ्ट को दरकिनार कर दिया। कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए बिल को संसद की मंजूरी के लिए 1 अगस्त से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार के एकतरफा फैसले से नाराज अन्ना और उनके समर्थकों ने 9 अगस्त को सरकारी बिल की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।
आपकी बात
पहले टीम अन्ना के ड्राफ्ट की अनदेखी और अब जंतर-मंतर पर धरने की राह में रोड़ा। सरकार के इस कदम को आप किस रूप में देखते हैं? क्या सरकार अन्ना के साथ भी वही हश्र करने की फिराक में है, जैसा रामदेव के साथ हुआ था? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर करें।
टीम अन्ना ने जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं मिलने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि निषेधाज्ञा के बावजूद अन्ना हजारे का शांतिपूर्वक अनशन होगा। उन्होंने आज पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शांतिपूर्वक अनशन के लिए रोकना संविधान की 'हत्या' है। संविधान के तहत देश के नागरिकों को हासिल मूल अधिकारों में भी शांतिपूर्वक सभा करने का प्रावधान है। केजरीवाल ने कहा है, 'यदि सरकार हमें अनशन पर बैठने से रोकती है तो यह संविधान की हत्या है। हम इसकी कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं।' बीजेपी ने भी टीम अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं देने पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस हर उस शख्स को कुचलने में जुटी है जो भ्रष्टाचार का विरोध करता है।
दिल्ली पुलिस ने अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 2009 में दिए गए एक आदेश का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिल्ली में किसी भी स्थान पर बेमियादी धरना की इजाजत नहीं दे सकती। पुलिस का कहना है कि चूंकि उस वक्त संसद का सत्र चल रहा होगा, ऐसे में किसी को जंतर-मंतर पर पूरा जगह घेरने की इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि उस वक्त कई अन्य संगठन भी विरोध प्रदर्शन के लिए वहां जुट सकते हैं।
जंतर-मंतर पर धरने की इजाजत के लिए टीम अन्ना की ओर से लिखे खत के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि टीम अन्ना चाहे तो अनशन स्थल दिल्ली के बाहरी इलाकों में शिफ्ट कर सकती है या फिर एक निश्चित समय-सीमा दे जिस दौरान उन्हें धरना-प्रदर्शन की इजाजत दी जा सके।
इससे पहले सरकार ने लोकपाल बिल के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट को मंजूरी देकर टीम अन्ना को झटका दिया। सरकार के मसौदे में मौजूदा पीएम और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है जबकि टीम अन्ना मौजूदा पीएम को भी लोकपाल के दायरे में रखना चाहती थी। (पूरी खबर पढ़ने के लिए पहली रिलेटेड खबर पर क्लिक करें)
केंद्रीय कैबिनेट ने सरकार के प्रतिनिधियों की तरफ से पेश किए गए ड्राफ्ट को कुछ बदलावों के साथ गुरूवार को हरी झंडी दिखा दी, लेकिन गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना के ड्राफ्ट को दरकिनार कर दिया। कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए बिल को संसद की मंजूरी के लिए 1 अगस्त से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार के एकतरफा फैसले से नाराज अन्ना और उनके समर्थकों ने 9 अगस्त को सरकारी बिल की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।
आपकी बात
पहले टीम अन्ना के ड्राफ्ट की अनदेखी और अब जंतर-मंतर पर धरने की राह में रोड़ा। सरकार के इस कदम को आप किस रूप में देखते हैं? क्या सरकार अन्ना के साथ भी वही हश्र करने की फिराक में है, जैसा रामदेव के साथ हुआ था? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर करें।
50 करोड़ हुई सल्लू की फीस !
मुंबई। बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक "दबंग" और "रेडी" जैसी सुपरहिट फिल्म से तहलका मचाने वाले बॉलीवुड स्टार सलमान खान ने अब अपनी रेट बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार अब सल्लू सिर्फउन्हीं निर्माताओं के लिए अपना दम दिखाएंगे, जिनकी जेब में सलमान भाई को देने के लिए 50 करोड़ रूपए की तगड़ी रकम होगी।
सूत्रों की मानें तो कमाई के मामले में बॉलीवुड के दूसरे "खानों" आमिर, शाहरूख के मुकाबले सलमान काफी आगे निकल चुके हैं। पिछले साल "दबंग" और उसके बाद इस साल रिलीज हुई सलमान की फिल्म "रेडी" ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के लगभग सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इन दोनों फिल्मों की जबरदस्त कामयाबी के बाद बॉलीवुड के "वीर" अब हर प्रोड़यूसर की पहली पसंद बन गए हैं। लेकिन सलमान को अपनी फिल्मों में साइन करने की उम्मीद लगाए निर्माताओं को सल्लू मियां ने करारा झटका दिया है।
बताया जा रहा है कि सलमान ने अब अगले प्रोजेक्ट के लिए 50 करोड़ रूपए मेहनताने के रूप में लेने का फैसला किया है। सलमान के बिजनेस मैनेजर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अभिनेता ने अपनी फीस बढ़ा दी है। वहीं, हाल ही में अपनी फिल्मों के लिए सल्लू को साइन करने वाले दो निर्माताओं का भी कहना है कि सलमान ने अचानक ही अपना रेट बढ़ा दिया है। सूत्रों की मानें तो सलमान ने सिर्फ अपनी फीस ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि फिल्म की हीरोइन और शूटिंग स्पॉट के मामले में भी अपनी पसंद प्रोड्यूसर्स पर थोप रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि रेडी के लिए जहां सलमान ने गजनी गर्ल असीन को लेने का सुझाव दिया था। वहीं, अब वो निर्माताओं पर जरीन खान को उनकी हीरोइन बनाने का दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, फिल्मकार भूषण कुमार का कहना है कि - "सलमान ने भले ही अपनी फीस बढ़ा दी हो, पर वो फिक्स नहीं है।" उन्होंने बताया कि "फिल्म रेडी के समय सलमान ने 40 करोड़ रूपए की डिमांड की थी। लेकिन उस समय फिल्म इंडस्ट्री की स्थिति को देखते व समझते हुए सल्लू ने अपनी फीस 17 करोड़ रूपए तक घटा दी है।"
मुंबई। बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक "दबंग" और "रेडी" जैसी सुपरहिट फिल्म से तहलका मचाने वाले बॉलीवुड स्टार सलमान खान ने अब अपनी रेट बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार अब सल्लू सिर्फउन्हीं निर्माताओं के लिए अपना दम दिखाएंगे, जिनकी जेब में सलमान भाई को देने के लिए 50 करोड़ रूपए की तगड़ी रकम होगी।
सूत्रों की मानें तो कमाई के मामले में बॉलीवुड के दूसरे "खानों" आमिर, शाहरूख के मुकाबले सलमान काफी आगे निकल चुके हैं। पिछले साल "दबंग" और उसके बाद इस साल रिलीज हुई सलमान की फिल्म "रेडी" ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के लगभग सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इन दोनों फिल्मों की जबरदस्त कामयाबी के बाद बॉलीवुड के "वीर" अब हर प्रोड़यूसर की पहली पसंद बन गए हैं। लेकिन सलमान को अपनी फिल्मों में साइन करने की उम्मीद लगाए निर्माताओं को सल्लू मियां ने करारा झटका दिया है।
बताया जा रहा है कि सलमान ने अब अगले प्रोजेक्ट के लिए 50 करोड़ रूपए मेहनताने के रूप में लेने का फैसला किया है। सलमान के बिजनेस मैनेजर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अभिनेता ने अपनी फीस बढ़ा दी है। वहीं, हाल ही में अपनी फिल्मों के लिए सल्लू को साइन करने वाले दो निर्माताओं का भी कहना है कि सलमान ने अचानक ही अपना रेट बढ़ा दिया है। सूत्रों की मानें तो सलमान ने सिर्फ अपनी फीस ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि फिल्म की हीरोइन और शूटिंग स्पॉट के मामले में भी अपनी पसंद प्रोड्यूसर्स पर थोप रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि रेडी के लिए जहां सलमान ने गजनी गर्ल असीन को लेने का सुझाव दिया था। वहीं, अब वो निर्माताओं पर जरीन खान को उनकी हीरोइन बनाने का दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, फिल्मकार भूषण कुमार का कहना है कि - "सलमान ने भले ही अपनी फीस बढ़ा दी हो, पर वो फिक्स नहीं है।" उन्होंने बताया कि "फिल्म रेडी के समय सलमान ने 40 करोड़ रूपए की डिमांड की थी। लेकिन उस समय फिल्म इंडस्ट्री की स्थिति को देखते व समझते हुए सल्लू ने अपनी फीस 17 करोड़ रूपए तक घटा दी है।"
जमशेदपुर। बेतहाशा बढ़ती महंगाई में भले ही दस रुपये का अब कोई मोल नहीं समझा जाता हो पर इतनी मामूली सी रकम के लिए ही झारखंड में एक युवक द्वारा अपने दोस्त की पीट-पीट कर हत्या करने का मामला प्रकाश में आया है।
पुलिस ने आज बताया कि इस संबंध में मृतक की पत्नी ने कल प्राथमिकी दर्ज कराई। उड़ीसा की सीमा से लगे पश्चिम सिंहभूम जिले के बड़ाजामदा में हाल में हुए एक फुटबॉल मैच के दौरान स्थानीय निवासी मुकुन हेस्सा और उसके दोस्त सूरज बहादुर के बीच खेल के परिणाम को लेकर दस-दस रुपये की बाजी लगी थी। सूरज ने बाजी जीतने पर मुकुन से पैसे मांगे और आनाकानी करने पर उसकी लात घूसों से बुरी तरह पिटाई कर दी।
मुकुन घर चला गया लेकिन बाद में उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे गुवा के टाटा स्टील अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां 27 जुलाई की रात उसने दम तोड़ दिया। मुकुन की पत्नी राधा ने प्राथमिकी में कहा है कि उसके पति ने और पिटाई के डर से यह बात पहले पुलिस को नहीं बताई थी। पुलिस हत्या का मामला दर्ज करके आरोपी की तलाश कर रही है।
पुलिस ने आज बताया कि इस संबंध में मृतक की पत्नी ने कल प्राथमिकी दर्ज कराई। उड़ीसा की सीमा से लगे पश्चिम सिंहभूम जिले के बड़ाजामदा में हाल में हुए एक फुटबॉल मैच के दौरान स्थानीय निवासी मुकुन हेस्सा और उसके दोस्त सूरज बहादुर के बीच खेल के परिणाम को लेकर दस-दस रुपये की बाजी लगी थी। सूरज ने बाजी जीतने पर मुकुन से पैसे मांगे और आनाकानी करने पर उसकी लात घूसों से बुरी तरह पिटाई कर दी।
मुकुन घर चला गया लेकिन बाद में उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे गुवा के टाटा स्टील अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां 27 जुलाई की रात उसने दम तोड़ दिया। मुकुन की पत्नी राधा ने प्राथमिकी में कहा है कि उसके पति ने और पिटाई के डर से यह बात पहले पुलिस को नहीं बताई थी। पुलिस हत्या का मामला दर्ज करके आरोपी की तलाश कर रही है।
नई दिल्ली।। पति से अनबन के चलते अलग रह रही 32 साल की एक महिला के साथ गैंग रेप का मामला सामने आया है। महिला अपनी बहन से मिलने गई थी, जहां से लौटते हुए दो सगे भाइयों ने उसे जबरन रोक कर रेप किया।
बाड़ा हिंदू राव इलाके में यह महिला अपनी 13 साल की बेटी के साथ रहती है। पति के साथ मतभेद होने के चलते यह अलग रहने लगी थी। बेटी को घर पर ही छोड़ कर मंगलवार को वह अपनी बहन से मिलने तिमारपुर इलाके में गई हुई थी। लौटते समय वजीराबाद पुल पर दो लोगों ने उसे पकड़ लिया और जोर जबरदस्ती करने की कोशिश की। विरोध करने पर उसे डरा धमकाकर दोनों शख्स उसे सुनसान इलाके में ले गए और रेप किया।
महिला ने इसकी तिमारपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत की। पुलिस ने बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में उसका मेडिकल करवाया। मेडिकल में रेप की पुष्टि के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर दोनों आरोपियों की खोजबीन शुरू की। दोनों आरोपियों को पहचानने में तिमारपुर पुलिस कामयाब हो गई। इनकी पहचान 35 साल के आरिफ और 40 साल के वसीम के रूप में हुई है। दोनों सगे भाई हैं।
बाड़ा हिंदू राव इलाके में यह महिला अपनी 13 साल की बेटी के साथ रहती है। पति के साथ मतभेद होने के चलते यह अलग रहने लगी थी। बेटी को घर पर ही छोड़ कर मंगलवार को वह अपनी बहन से मिलने तिमारपुर इलाके में गई हुई थी। लौटते समय वजीराबाद पुल पर दो लोगों ने उसे पकड़ लिया और जोर जबरदस्ती करने की कोशिश की। विरोध करने पर उसे डरा धमकाकर दोनों शख्स उसे सुनसान इलाके में ले गए और रेप किया।
महिला ने इसकी तिमारपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत की। पुलिस ने बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में उसका मेडिकल करवाया। मेडिकल में रेप की पुष्टि के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर दोनों आरोपियों की खोजबीन शुरू की। दोनों आरोपियों को पहचानने में तिमारपुर पुलिस कामयाब हो गई। इनकी पहचान 35 साल के आरिफ और 40 साल के वसीम के रूप में हुई है। दोनों सगे भाई हैं।
इंदौर में तीन हत्या करने वाले सतना पुलिस के रिमांड पर
इंदौर । सतना में एक सराफा व्यापारी और उसकी पत्नी पर गोली चलाने वाले दो आरोपियों को सतना पुलिस ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपियों को पांच दिन के रिमांड पर सौंपा है। इंदौर पुलिस की टीम आरोपियों से पूछताछ करने सतना पहुंच गई है।
सतना में चार बदमाशों ने सोमवार को सराफा व्यापारी व उसकी पत्नी पर फायरिंग की थी। इसमें पत्नी की मौत हो गई और पति घायल हो गया। पुलिस ने सरवन शिवहरे व इंद्र सेन को गिरफ्तार कर लिया। राजकुमार शर्मा और वकील उर्फ रफीक फरार हो गए। उनकी पुलिस तलाश कर रही है।
पाटनीपुरा पर फायर
सतना प्रतिनिधि के अनुसार आरोपियों द्वारा प्रदेश के कई शहरों में लूट के लिए 16 हत्याएं कबूल करने की खबर के बाद जबलपुर, पन्ना, ग्वालियर व इंदौर से सीएसपी अमरेंद्रसिंह की टीम वहां पहुंच गई। इसके अलावा एटीएस और एसटीएफ की टीम के भी वहां पहुंचने की खबर है। आरोपियों ने पूछताछ में डॉक्टर वर्षा वर्मा व कम्पाउंडर राम की हत्या के अलावा ज्वेलर्स के सेल्समैन कुलदीप जैन की हत्या करना भी कबूल किया है। इसके अलावा उन्होंने पाटनीपुरा क्षेत्र में एक व्यक्ति को गोली मारने की बात कबूली है।
परदेशीपुरा पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था और बाइक नंबर के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की थी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। यहां बाइक सवार ने गले में टंगे बैग से रिवाल्वर निकालकर चलाई थी। सरवन सिंह के बारे में यह कहा जा रहा है कि वह लूट के लिए सबसे पहले सामने वाले पर गोली चलाता है। वर्षा वर्मा और कुलदीप हत्याकांड में भी आरोपियों ने सीधे गोली चलाई थी।
हत्याएं अकेले ने की
तीन माह इंदौर में रहा और तीन हत्या व एक हत्या के प्रयास को अकेले ने ही अंजाम दिया। यह कहना है गिरोह के सरगना का। सतना एसपी हरिसिंह यादव ने बताया कि सरवन सिंह ने खुलासा किया कि 18 वारदात में से तीन में केवल उसने अन्य सदस्यों को साथ रखा, बाकी की वारदात अकेले ही की। पहली बार ही वह पकड़ा गया। उसने इंदौर में डॉ. वर्षा वर्मा, सहायक राम और ज्वेलर्स के सेल्समैन कुलदीप जैन की हत्या के अलावा पाटनीपुरा क्षेत्र में एक साइकल सवार को गोली मारना भी कबूल किया है।
सरवन तीन माह तक इंदौर में किराए का मकान लेकर रहा। इसके अलावा अय्याशी करने मुंबई ओर गोवा भी जाता था।
इंदौर । सतना में एक सराफा व्यापारी और उसकी पत्नी पर गोली चलाने वाले दो आरोपियों को सतना पुलिस ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपियों को पांच दिन के रिमांड पर सौंपा है। इंदौर पुलिस की टीम आरोपियों से पूछताछ करने सतना पहुंच गई है।
सतना में चार बदमाशों ने सोमवार को सराफा व्यापारी व उसकी पत्नी पर फायरिंग की थी। इसमें पत्नी की मौत हो गई और पति घायल हो गया। पुलिस ने सरवन शिवहरे व इंद्र सेन को गिरफ्तार कर लिया। राजकुमार शर्मा और वकील उर्फ रफीक फरार हो गए। उनकी पुलिस तलाश कर रही है।
पाटनीपुरा पर फायर
सतना प्रतिनिधि के अनुसार आरोपियों द्वारा प्रदेश के कई शहरों में लूट के लिए 16 हत्याएं कबूल करने की खबर के बाद जबलपुर, पन्ना, ग्वालियर व इंदौर से सीएसपी अमरेंद्रसिंह की टीम वहां पहुंच गई। इसके अलावा एटीएस और एसटीएफ की टीम के भी वहां पहुंचने की खबर है। आरोपियों ने पूछताछ में डॉक्टर वर्षा वर्मा व कम्पाउंडर राम की हत्या के अलावा ज्वेलर्स के सेल्समैन कुलदीप जैन की हत्या करना भी कबूल किया है। इसके अलावा उन्होंने पाटनीपुरा क्षेत्र में एक व्यक्ति को गोली मारने की बात कबूली है।
परदेशीपुरा पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था और बाइक नंबर के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की थी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। यहां बाइक सवार ने गले में टंगे बैग से रिवाल्वर निकालकर चलाई थी। सरवन सिंह के बारे में यह कहा जा रहा है कि वह लूट के लिए सबसे पहले सामने वाले पर गोली चलाता है। वर्षा वर्मा और कुलदीप हत्याकांड में भी आरोपियों ने सीधे गोली चलाई थी।
हत्याएं अकेले ने की
तीन माह इंदौर में रहा और तीन हत्या व एक हत्या के प्रयास को अकेले ने ही अंजाम दिया। यह कहना है गिरोह के सरगना का। सतना एसपी हरिसिंह यादव ने बताया कि सरवन सिंह ने खुलासा किया कि 18 वारदात में से तीन में केवल उसने अन्य सदस्यों को साथ रखा, बाकी की वारदात अकेले ही की। पहली बार ही वह पकड़ा गया। उसने इंदौर में डॉ. वर्षा वर्मा, सहायक राम और ज्वेलर्स के सेल्समैन कुलदीप जैन की हत्या के अलावा पाटनीपुरा क्षेत्र में एक साइकल सवार को गोली मारना भी कबूल किया है।
सरवन तीन माह तक इंदौर में किराए का मकान लेकर रहा। इसके अलावा अय्याशी करने मुंबई ओर गोवा भी जाता था।
Thursday, July 28, 2011
नई दिल्ली. नई दिल्ली/बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपनी कुर्सी छोड़ दी है। मीडिया में आ रही अपुष्ट खबरों के मुताबिक येदियुरप्पा ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। गडकरी इस समय रायपुर में हैं। गडकरी के देर शाम दिल्ली लौटने पर ही इस खबर की पुष्टि होने की उम्मीद है।
इस खबर से अंदाजा लगाया जा रहा है कि येदियुरप्पा ने आला कमान की उस बात को मान लिया है, जिसमें पार्टी की तरफ से कहा गया था कि पहले वह इस्तीफा दें और फिर उनसे बात होगी। वहीं, मीडिया में इस तरह की खबरें भी आई थीं कि येदियुरप्पा ने अपने इस्तीफे के लिए यह शर्त रख दी थी कि पार्टी उनकी जगह बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद डीवी सदानंद गौड़ा को राज्य की कमान सौंपी जाए। येदियुरप्पा के इस्तीफे के साथ ही बीजेपी के भीतर कर्नाटक में अगले मुख्यमंत्री को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। कर्नाटक में हालात का जायजा लेने शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह और अरुण जेटली बेंगलुरु जाएंगे।
इससे पहले बुधवार को कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े ने दक्षिण भारत में भाजपा की पहली और एक मात्र सरकार के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (बीएसवाई) पर खनन घोटाले में शामिल होने के आरोप अपनी रिपोर्ट में लगाए थे। इसके बाद पार्टी उन्हें हटाना चाह रही है, ताकि कांग्रेस का मुंह बंद किया जा सके और उस पर हमला जारी रखा जा सके। लेकिन गुरुवार दोपहर तक बीएसवाई का बगावती तेवर बरकरार रहा। उन्होंने आलाकमान को दो टूक कह दिया था कि विधायक उनके साथ हैं तो वह पद क्यों छोड़ें। हालांकि पार्टी ने अपना रुख कड़ा करते हुए उन्हें हटने के लिए कहकर शुक्रवार को नए नेता का चुनाव कर कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदलने का ऐलान कर दिया था।
कांग्रेस ने येदियुरप्पा को हटाए जाने के बीजेपी के फैसले को देर से मजबूरी में उठाया गया कदम बताया है। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि यह फैसला ६ महीने पहले ही लिया जाना चाहिए था। यह देर से आया फैसला है। इतने गंभीर आरोप होने के बाद भी वो सिर्फ इस्तीफा ही मांग रहे है। लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद येदियुरप्पा पर मुकदमा चलना चाहिए। ये भाजपा की दोहरी नीति दिखाता है।
बीएसवाई पर लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में खनन घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने चार साल में सरकारी खजाने को 16000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की चपत लगवाई और करोड़ों रुपये का फायदा अपने सगे-संबंधियों को दिलवाया।
कर्नाटक दक्षिण भारत का पहला राज्य है, जहां भाजपा की सरकार बनी है। इसलिए बीएसवाई को जबरन हटाने से पार्टी की मुश्किल और बढ़ सकती है। लेकिन चार दिन बाद ही संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में भाजपा येदियुरप्पा को हटाए बिना भ्रष्टाचार पर बोलने या कांग्रेस को घेरने का नैतिक अधिकार खो देगी। इसलिए पार्टी में येदियुरप्पा के विकल्प की तलाश पहली प्राथमिकता है।
बीएसवाई के विकल्प के तौर पर कर्नाटक के ग्रामीण विकास मंत्री जगदीश शेट्टार, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष ईश्वरप्पा, राज्य के पूर्व भाजपा अध्यक्ष सदानंद गौड़ा, येदियुरप्पा के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले अनंत कुमार, राज्य के पूर्व गृह मंत्री वीएस आचार्य, कानून मंत्री सुरेश कुमार, शोभा करांडलाजे जैसे नाम विचार करने लायक हैं।
इस खबर से अंदाजा लगाया जा रहा है कि येदियुरप्पा ने आला कमान की उस बात को मान लिया है, जिसमें पार्टी की तरफ से कहा गया था कि पहले वह इस्तीफा दें और फिर उनसे बात होगी। वहीं, मीडिया में इस तरह की खबरें भी आई थीं कि येदियुरप्पा ने अपने इस्तीफे के लिए यह शर्त रख दी थी कि पार्टी उनकी जगह बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद डीवी सदानंद गौड़ा को राज्य की कमान सौंपी जाए। येदियुरप्पा के इस्तीफे के साथ ही बीजेपी के भीतर कर्नाटक में अगले मुख्यमंत्री को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। कर्नाटक में हालात का जायजा लेने शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह और अरुण जेटली बेंगलुरु जाएंगे।
इससे पहले बुधवार को कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े ने दक्षिण भारत में भाजपा की पहली और एक मात्र सरकार के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (बीएसवाई) पर खनन घोटाले में शामिल होने के आरोप अपनी रिपोर्ट में लगाए थे। इसके बाद पार्टी उन्हें हटाना चाह रही है, ताकि कांग्रेस का मुंह बंद किया जा सके और उस पर हमला जारी रखा जा सके। लेकिन गुरुवार दोपहर तक बीएसवाई का बगावती तेवर बरकरार रहा। उन्होंने आलाकमान को दो टूक कह दिया था कि विधायक उनके साथ हैं तो वह पद क्यों छोड़ें। हालांकि पार्टी ने अपना रुख कड़ा करते हुए उन्हें हटने के लिए कहकर शुक्रवार को नए नेता का चुनाव कर कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदलने का ऐलान कर दिया था।
कांग्रेस ने येदियुरप्पा को हटाए जाने के बीजेपी के फैसले को देर से मजबूरी में उठाया गया कदम बताया है। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि यह फैसला ६ महीने पहले ही लिया जाना चाहिए था। यह देर से आया फैसला है। इतने गंभीर आरोप होने के बाद भी वो सिर्फ इस्तीफा ही मांग रहे है। लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद येदियुरप्पा पर मुकदमा चलना चाहिए। ये भाजपा की दोहरी नीति दिखाता है।
बीएसवाई पर लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में खनन घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने चार साल में सरकारी खजाने को 16000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की चपत लगवाई और करोड़ों रुपये का फायदा अपने सगे-संबंधियों को दिलवाया।
कर्नाटक दक्षिण भारत का पहला राज्य है, जहां भाजपा की सरकार बनी है। इसलिए बीएसवाई को जबरन हटाने से पार्टी की मुश्किल और बढ़ सकती है। लेकिन चार दिन बाद ही संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में भाजपा येदियुरप्पा को हटाए बिना भ्रष्टाचार पर बोलने या कांग्रेस को घेरने का नैतिक अधिकार खो देगी। इसलिए पार्टी में येदियुरप्पा के विकल्प की तलाश पहली प्राथमिकता है।
बीएसवाई के विकल्प के तौर पर कर्नाटक के ग्रामीण विकास मंत्री जगदीश शेट्टार, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष ईश्वरप्पा, राज्य के पूर्व भाजपा अध्यक्ष सदानंद गौड़ा, येदियुरप्पा के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले अनंत कुमार, राज्य के पूर्व गृह मंत्री वीएस आचार्य, कानून मंत्री सुरेश कुमार, शोभा करांडलाजे जैसे नाम विचार करने लायक हैं।
दलित की जीप से कुचलकर ह्त्या
सतना। मध्य प्रदेश में बुधवार रात एक रसूखदार व्यक्ति ने जीप से एक दलित को कुचल दिया जिससे उसकी मौत हो गई। घटना से गुस्साए लोगों ने सड़क पर यातायात जाम कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शकारियों से बातचीत कर जाम को समाप्त कराया। पुलिस के अनुसार जसो थाना क्षेत्र के दुरेहा गांव में बबलू चौधरी का भेरू सिंह से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। विवाद के चलते ही भेरू सिंह ने बुधवार रात बबलू को जीप से रौंद दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार को सड़क जाम कर दिया। जसो थाने के प्रभारी पी सिंह ने बताया कि जीप की टक्कर से बबलू की मौत हुई है। पुलिस इस मामले में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करेगी। ज्ञात हो कि दो दिन पहले एक जनजातीय वर्ग की बुजुर्ग महिला को शिवपुरी जिले में एक दबंग व्यक्ति ने अपनी ट्रैक्टर से बांधकर घसीटा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार को सड़क जाम कर दिया। जसो थाने के प्रभारी पी सिंह ने बताया कि जीप की टक्कर से बबलू की मौत हुई है। पुलिस इस मामले में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करेगी। ज्ञात हो कि दो दिन पहले एक जनजातीय वर्ग की बुजुर्ग महिला को शिवपुरी जिले में एक दबंग व्यक्ति ने अपनी ट्रैक्टर से बांधकर घसीटा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
कैबिनेट ने लोकपाल बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। अब इसे संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। ड्राफ्टिंग कमेटी में शामिल सरकारी पक्ष की ओर से तैयार मसौदे के आधार पर ही बिल को तैयार किया गया है। इसमें प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय और सभी केन्द्रीय मंत्रियों को इसके दायरे में रखा गया है। लोकपाल कमेटी का चेयरमैन न्यायपालिका से ही होगा।
चेयरमैन के अलावा कमेटी में 8 सदस्य होंगे जिनमें से 4 न्यायपालिका से होंगे। ड्राफ्ट के मुताबिक शिकायत के सात साल के भीतर मामले का निपटारा करना जरूरी होगा अगर सात साल के भीतर निपटारा नहीं हुआ तो आरोपी खुद-ब-खुद बरी हो जाएगा। किसी भी आरोप की शिकायत घटना के सात साल के भीतर ही करनी होगी.
सरकार द्वारा लोकपाल ड्राफ्ट को मंजूरी दिए जाने के बाद अन्ना हजारे ने कहा है कि यह देश के साथ धोखा है। दरअसल, सरकारी लोकपाल ड्राफ्ट में न्यायपालिका और पीएम को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। अन्ना का कहना है कि दोनों को ही लोकपाल में शामिल करना चाहिए था। अन्ना ने इससे नाराज होकर कहा है कि अब आर-पार की लड़ाई होगी। इससे पूर्व सरकार ने लोकपाल ड्राफ्ट को मंजूरी देते हुए कहा है कि इसे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
हजारे की साथी कार्यकर्ता किरण बेदी ने बताया, यह देश के साथ छल है।’’ उन्होंने कहा कि यह मसौदा विधेयक अगर एक बार पारित हो जाता है तो इससे उन अन्य राज्यों पर भी असर पड़ेगा जिनकी लोकायुक्त का गठन करने की योजना है। ऐसे राज्य अब मुख्यमंत्री पद को लोकायुक्त के दायरे से बाहर रखना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के दूरगामी परिणाम होंगे।
कर्नाटक के लोकायुक्त और संयुक्त मसौदा समिति के सदस्य न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े ने कहा कि इस विधेयक में उन प्रावधानों को शामिल नहीं किया है जिनकी समाज के सदस्य मांग कर रहे थे। हेगड़े ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह काफी मजबूत विधेयक होगा। 44 वर्ष से लोकपाल विधेयक पारित नहीं हुआ और अब वे ऐसा विधेयक पारित कराना चाहते हैं तो बिल्कुल भी मजबूत नहीं होगा।’’ किरण ने कहा कि सरकार ने सुनहरा मौका खो दिया है।
हजारे ने कल सरकार से अपील की थी कि उसके पास देश का इतिहास बदलने का दुर्लभ मौका है और उसे मजबूत विधेयक संसद में पेश करना चाहिए। इससे पहले, मसौद समिति के सह-अध्यक्ष शांति भूषण ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर उनसे अपील की थी कि कैबिनेट के समक्ष लोकपाल मसौदा विधेयक के दोनों संस्करण पेश किए जाएं।
चेयरमैन के अलावा कमेटी में 8 सदस्य होंगे जिनमें से 4 न्यायपालिका से होंगे। ड्राफ्ट के मुताबिक शिकायत के सात साल के भीतर मामले का निपटारा करना जरूरी होगा अगर सात साल के भीतर निपटारा नहीं हुआ तो आरोपी खुद-ब-खुद बरी हो जाएगा। किसी भी आरोप की शिकायत घटना के सात साल के भीतर ही करनी होगी.
सरकार द्वारा लोकपाल ड्राफ्ट को मंजूरी दिए जाने के बाद अन्ना हजारे ने कहा है कि यह देश के साथ धोखा है। दरअसल, सरकारी लोकपाल ड्राफ्ट में न्यायपालिका और पीएम को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। अन्ना का कहना है कि दोनों को ही लोकपाल में शामिल करना चाहिए था। अन्ना ने इससे नाराज होकर कहा है कि अब आर-पार की लड़ाई होगी। इससे पूर्व सरकार ने लोकपाल ड्राफ्ट को मंजूरी देते हुए कहा है कि इसे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
हजारे की साथी कार्यकर्ता किरण बेदी ने बताया, यह देश के साथ छल है।’’ उन्होंने कहा कि यह मसौदा विधेयक अगर एक बार पारित हो जाता है तो इससे उन अन्य राज्यों पर भी असर पड़ेगा जिनकी लोकायुक्त का गठन करने की योजना है। ऐसे राज्य अब मुख्यमंत्री पद को लोकायुक्त के दायरे से बाहर रखना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के दूरगामी परिणाम होंगे।
कर्नाटक के लोकायुक्त और संयुक्त मसौदा समिति के सदस्य न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े ने कहा कि इस विधेयक में उन प्रावधानों को शामिल नहीं किया है जिनकी समाज के सदस्य मांग कर रहे थे। हेगड़े ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह काफी मजबूत विधेयक होगा। 44 वर्ष से लोकपाल विधेयक पारित नहीं हुआ और अब वे ऐसा विधेयक पारित कराना चाहते हैं तो बिल्कुल भी मजबूत नहीं होगा।’’ किरण ने कहा कि सरकार ने सुनहरा मौका खो दिया है।
हजारे ने कल सरकार से अपील की थी कि उसके पास देश का इतिहास बदलने का दुर्लभ मौका है और उसे मजबूत विधेयक संसद में पेश करना चाहिए। इससे पहले, मसौद समिति के सह-अध्यक्ष शांति भूषण ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर उनसे अपील की थी कि कैबिनेट के समक्ष लोकपाल मसौदा विधेयक के दोनों संस्करण पेश किए जाएं।
Wednesday, July 27, 2011

आजमगढ़/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हेड कॉन्सटेबल से दारोगा पद पर प्रोन्नति के लिये आयोजित की जा रही दौड़ प्रतियोगिता में आज आजमगढ़ में एक और हेड कॉन्सटेबल की मौत ने राजनीतिक रंग ले लिया है। पूरे विपक्ष ने प्रोन्नति के इस तरीके पर सवाल उठाया है।
शारीरिक क्षमता के लिये आयोजित की जा रही दौड़ में अब तक दो हेड कॉन्सटेबल की मौत हो चुकी है व 60 से ज्यादा बेहोश हो चुके हैं। आजमगढ़ में आज शारीरिक दक्षता परीक्षा दौड़ में 11 हेड कॉन्सटेबल बेहोश हो गये। सभी को जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया जिसमें एक की मौत हो गई।
शारीरिक दक्षता परीक्षा पिछले कई दिन से चल रही है। आज सुबह पुलिस लाइन में इसके लिये दौड़ थी। प्रोन्नति के लिये आये लोगों को 75 मिनट में पुलिस लाइन के 25 चक्कर लगाने थे। दौड़ में 11 लोग बेहोश हो गये। इसमें अनिसुजमा की मौत हो गई। वह वाराणसी के रामनगर में तैनात था।

हिज्बुल का हिंदू कमांडर सेना के साथ मुठभेड़ में ढेर
जम्मू। जम्मू एवं कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में मंगलवार को मारे गए हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी की पहचान संगठन के शीर्ष कमांडर सुभाष उर्फ वासिफ के रूप में की गई है, सुभाष हिन्दू था। सेना के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।
इससे पहले पुलिस ने मंगलवार को कहा था कि जम्मू से लगभग 210 किलोमीटर दूर जिले के वन क्षेत्र में जो हिजबुल कमांडर मारा गया वह संगठन का जिला कमांडर सज्जाद अहमद उर्फ मोहम्मद रिजवान था।
हिज्बुल का हिंदू कमांडर सेना के साथ मुठभेड़ में ढेर
प्रवक्ता ने कहा कि उसका शव किश्तवाड़ लाए जाने के बाद उसकी पहचान जारी की गई। उन्होंने कहा कि सुभाष 10 साल पहले ही आतंकवादी संगठन में शामिल हुआ था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जम्मू क्षेत्र के पर्वतीय जिलों डोडा, किश्तवाड़, राजौरी और पुंछ में रह रहे हिन्दुओं ने भी दशकों पहले आतंकवादियों के हमलों से खुद को बचाने के लिए इस तरह की गतिविधियों में शामिल होना शुरू कर दिया था।
-मुकेश कुमार मासूम
mumbaisandhya@gmail.com
मुंबई।बोलीवुड में इस समय खुशी का माहौल है. निर्माताओं को जोश और उत्साह दिलाने के लिए यही बात काफी है की इस साल जुलाई में बॉलीवुड फिल्मों ने कमाई के नए रिकॉर्ड कायम किए । एक रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में ही बॉलीवुड ने 201 करोड़ रूपए की कमाई की है। शायद बॉलीवुड के इतिहास में पहली बार है जब एक महीने में इतनी कमाई हुई है। इस रिकॉर्ड कमाई का श्रेय आमिर खान की देल्ही बेली, मोहित सूरी की मर्डर 2, रोहित शेट्टी की सिंघम और जिंदगी ना मिलेगी दोबारा को दिया जा रहा है। ये सभी फ़िल्में बड़े स्टारों की हैं.देल्ही बेली में इमरान खान, पूर्णा जगन्नाथन, वीर दास , कुणाल रॉय कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं . इसके निर्देशक अभिनय देव निर्माता आमिर खान, रोनी स्क्रूवाला, किरण राव हैं . मर्डर २ में इमरान हाशमी, जैकलीन फर्नांडिस, प्रशांत नारायणन, सुलग्ना पाणिग्रही, सुधांशु पांडे, याना गुप्ता (मेहमान कलाकार)ने अभिनय का जलवा दिखाया है. सिंघम में अजय देवगन, काजल अग्रवाल, प्रकाश राज ने अभिनय के जौहर दिखाए हैं . निर्देशक रोहित शेट्टी संगीत अजय-अतुल का और गीत लिखे हैं स्वानंद किरकिरे ने . इसी प्रकार जिंदगी न मिलेगी दोबारा में हृतिक रोशन, .फरहान अख्तर, अभय देओल, कैटरीना, कल्कि ने काम किया है . फिल्म समीक्षकों के मुताबिक़ ऐसे धुरंधरों के चलते बॉक्स ऑफिस की कमाई होनी स्वभाविक ही थी .
बॉक्स ऑफिस के विशेषज्ञ और स्वतंत्र डिस्ट्रीब्यूटर सुनील वाधवा का भी मानना है की जून में रेडी की सफलता के बाद जुलाई में भी आई फिल्में सफल रही। वाधवा के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस बार कमाई में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है। जनवरी से जून तक की बॉक्स ऑफिस की कमाई में औसतन 105 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2011 के पहले हॉफ में कमाई में सलमान खान की रेडी का योगदान 40 फीसदी रहा।
साल 2011 के पहले हॉफ में जुलाई महीने में कुल कलेक्शन 26 फीसदी रहा। विशषज्ञों के मुताबिक देल्ही बेली को मिला ए सर्टिफिकेट भी लोगों को सिनेमा हॉल तक आने से नहीं रोक सका। मुंबई में हुए हमलों के बाद निर्माता इस बात से आशंकित थे कि शायद जिंदगी ना मिलेगी दोबारा और हेरी पॉटर जैसी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी लेकिन दोनों फिल्मों ने पिछले फिल्मों की कमाई के रिकॉर्ड तोड़ दिए। जिंदगी ना मिलेगी दोबारा ने मर्डर 2 के कमाई के रिकॉर्ड को तोड़ा, वहीं हैरी पॉटर ने 80 फीसदी कमाई की।
mumbaisandhya@gmail.com
मुंबई।बोलीवुड में इस समय खुशी का माहौल है. निर्माताओं को जोश और उत्साह दिलाने के लिए यही बात काफी है की इस साल जुलाई में बॉलीवुड फिल्मों ने कमाई के नए रिकॉर्ड कायम किए । एक रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में ही बॉलीवुड ने 201 करोड़ रूपए की कमाई की है। शायद बॉलीवुड के इतिहास में पहली बार है जब एक महीने में इतनी कमाई हुई है। इस रिकॉर्ड कमाई का श्रेय आमिर खान की देल्ही बेली, मोहित सूरी की मर्डर 2, रोहित शेट्टी की सिंघम और जिंदगी ना मिलेगी दोबारा को दिया जा रहा है। ये सभी फ़िल्में बड़े स्टारों की हैं.देल्ही बेली में इमरान खान, पूर्णा जगन्नाथन, वीर दास , कुणाल रॉय कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं . इसके निर्देशक अभिनय देव निर्माता आमिर खान, रोनी स्क्रूवाला, किरण राव हैं . मर्डर २ में इमरान हाशमी, जैकलीन फर्नांडिस, प्रशांत नारायणन, सुलग्ना पाणिग्रही, सुधांशु पांडे, याना गुप्ता (मेहमान कलाकार)ने अभिनय का जलवा दिखाया है. सिंघम में अजय देवगन, काजल अग्रवाल, प्रकाश राज ने अभिनय के जौहर दिखाए हैं . निर्देशक रोहित शेट्टी संगीत अजय-अतुल का और गीत लिखे हैं स्वानंद किरकिरे ने . इसी प्रकार जिंदगी न मिलेगी दोबारा में हृतिक रोशन, .फरहान अख्तर, अभय देओल, कैटरीना, कल्कि ने काम किया है . फिल्म समीक्षकों के मुताबिक़ ऐसे धुरंधरों के चलते बॉक्स ऑफिस की कमाई होनी स्वभाविक ही थी .
बॉक्स ऑफिस के विशेषज्ञ और स्वतंत्र डिस्ट्रीब्यूटर सुनील वाधवा का भी मानना है की जून में रेडी की सफलता के बाद जुलाई में भी आई फिल्में सफल रही। वाधवा के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस बार कमाई में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है। जनवरी से जून तक की बॉक्स ऑफिस की कमाई में औसतन 105 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2011 के पहले हॉफ में कमाई में सलमान खान की रेडी का योगदान 40 फीसदी रहा।
साल 2011 के पहले हॉफ में जुलाई महीने में कुल कलेक्शन 26 फीसदी रहा। विशषज्ञों के मुताबिक देल्ही बेली को मिला ए सर्टिफिकेट भी लोगों को सिनेमा हॉल तक आने से नहीं रोक सका। मुंबई में हुए हमलों के बाद निर्माता इस बात से आशंकित थे कि शायद जिंदगी ना मिलेगी दोबारा और हेरी पॉटर जैसी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी लेकिन दोनों फिल्मों ने पिछले फिल्मों की कमाई के रिकॉर्ड तोड़ दिए। जिंदगी ना मिलेगी दोबारा ने मर्डर 2 के कमाई के रिकॉर्ड को तोड़ा, वहीं हैरी पॉटर ने 80 फीसदी कमाई की।
बहन -भाई के बीच अवैध सम्बन्ध ,,,, समाज के दर से की आत्महत्या
रांची। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। एक लड़के और एक लड़की के कीटनाश्शक दवाई खाकर खुदकुशी कर ली। खुदकुशी करने वाले दोनों रिश्ते में भाई बहन है और खुदकुशी का कारण उनके बीच प्रेम संबंध है। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुवा थाना के बेतरकिया गांव के अर्जुन पूर्ति (19) और उसकी चचेरी बहन (18) के बीच प्रेम संबंध था। इस बात की भनक घर वालों सहित पूरे गांव वालों को लग गई। गांव वालों ने इस बात को लेकर दोनों को जमकर लताड़ा और इस मामले में गांव के सरपंच की तरफ से बैठक बुलाई गई। बैठक मंगलवार को होनी थी मगर दोनों ने इससे पहले ही कीटनाशक दवाई खाकर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली। दोनो ने उस समय कीटनाशक खा लिया जब उनके परिजन पास के एक गांव में किसी सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गये थे।
मामला सोमवार को प्रकाश में आया। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने बताया के छानबीन के बाद मौके से कोई ऐसी चीज बरामद नहीं हुई है जिससे खुदकुशी के पीछे सही कारणों का पता लगाया जा सके। परिजनों और गांव वालों का कहना है कि बदनामी और बैइक में आने के डर से दोनों ने मौत को गले लगाया है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है।
सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुवा थाना के बेतरकिया गांव के अर्जुन पूर्ति (19) और उसकी चचेरी बहन (18) के बीच प्रेम संबंध था। इस बात की भनक घर वालों सहित पूरे गांव वालों को लग गई। गांव वालों ने इस बात को लेकर दोनों को जमकर लताड़ा और इस मामले में गांव के सरपंच की तरफ से बैठक बुलाई गई। बैठक मंगलवार को होनी थी मगर दोनों ने इससे पहले ही कीटनाशक दवाई खाकर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली। दोनो ने उस समय कीटनाशक खा लिया जब उनके परिजन पास के एक गांव में किसी सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गये थे।
मामला सोमवार को प्रकाश में आया। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने बताया के छानबीन के बाद मौके से कोई ऐसी चीज बरामद नहीं हुई है जिससे खुदकुशी के पीछे सही कारणों का पता लगाया जा सके। परिजनों और गांव वालों का कहना है कि बदनामी और बैइक में आने के डर से दोनों ने मौत को गले लगाया है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है।
Tuesday, July 26, 2011
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9355880.jpg
पंकज त्यागी
ग्रेटर कैलाश।। इन दिनों सेक्स रैकेटों की लगातार धरपकड़ कर रहे क्राइम ब्रांच को ग्रेटर कैलाश में पकड़ी गई छह उजबेक लड़कियों की सरगना जुलेखा उर्फ जूली (40) की तलाश है। गिरफ्तार लड़कियों ने पुलिस को बताया है कि उजबेकिस्तान की जुलेखा के पास मल्टीपल वीजा है।
क्राइम ब्रांच के सीनियर अफसर ने बताया कि गिरफ्तार की गई छह लड़कियों में से सिर्फ एक से पासपोर्ट बरामद हो सका है। उसके पास वैलिड टूरिस्ट वीजा मिला। बाकी पांच लड़कियों ने पुलिस को पासपोर्ट नहीं दिए। इसकी वजह यह है कि केस के दौरान पासपोर्ट सीज हो जाते हैं, जिस कारण ये लड़कियां भारत से बाहर नहीं जा पातीं। इन पांच लड़कियों के खिलाफ देह व्यापार निरोधक कानून के साथ फॉरनर्स एक्ट के तहत भी एफआईआर दर्ज की गई है।
ग्रेटर कैलाश पार्ट-2 के फ्लैट से पुलिस को बरामद हुए जुलेखा के दो रजिस्टरों से जानकारी मिली है कि ये लड़कियां हर दिन 75,000 से एक लाख रुपये तक कमा रही थीं। इन लड़कियों ने इस तरह के इंटरनैशनल सेक्स रैकेटों के बारे में क्राइम ब्रांच को जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पूर्व सोवियत संघ से अलग हुए देशों उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान आदि में बेरोजगारी की वजह से बहुत सी लड़कियां इन रैकेटों कंे चंगुल में फंस जाती हैं। बहुत सी लड़कियां ईजी मनी कमाने के मकसद से इन रैकेटों से कॉन्ट्रैक्ट करती हैं।
1 लाख डेली
ग्रेटर कैलाश पार्ट-2 में फ्लैट से बरामद जुलेखा के दो रजिस्टरों से पता चला है कि ये लड़कियां हर दिन 75,000 से 1 लाख रुपये तक कमाकर देती थीं।
15 दिन के एक लाख
कॉलगर्ल और रैकेट में कॉन्ट्रैक्ट अमूमन 15 दिन से दो महीने का होता है। कॉलगर्ल रैकेटियर को अपने बैंक अकाउंट का नंबर देती है , जिसमें तय रकम जमा करा दी जाती है। 15 दिन के लिए एक लाख से लेकर तीन महीनों के लिए पांच - छह लाख रुपये में कॉन्ट्रैक्ट होता है।
हर दिन 4-5 कस्टमर
दिल्ली आने के बाद लड़कियों की रिहाइश , खाने और ट्रांसपोर्टेशन का इंतजाम रैकेट की जिम्मेदारी होती है। हर लड़की को एक दिन में कम से कम चार - पांच कस्टमर के पास जाना होता है। इससे ज्यादा जगह जाने के लिए कोई लड़की तैयार नहीं होती।
10-15 दिन जेल
कस्टमर से पैसा पिम्प लेता है , लड़की नहीं। कॉन्ट्रैक्ट के दौरान अगर पुलिस की रेड पड़ गई तो 10-15 दिन तक जेल में रहना तय है , नहीं तो लड़कियां वापस अपने मुल्क चली जाती हैं।
कॉम्पिटिशन से भंडाफोड़
इन दिनों सेक्स रैकेटों की ज्यादा धरपकड़ की वजह इन रैकेटों में आपसी कॉम्पिटिशन बताया जा रहा है। एक गिरोह के पिंप पुलिस वालों से गठजोड़ कर दूसरे रैकेट की लड़कियों को गिरफ्तार करवा रहे हैं। पिछले दिनों महरौली से गिरफ्तार नगमा खान ने आरोप लगाया था कि उसे पुलिस वालों से मिलकर सोनू पंजाबन ने गिरफ्तार कराया था ।
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पंकज त्यागी
ग्रेटर कैलाश।। इन दिनों सेक्स रैकेटों की लगातार धरपकड़ कर रहे क्राइम ब्रांच को ग्रेटर कैलाश में पकड़ी गई छह उजबेक लड़कियों की सरगना जुलेखा उर्फ जूली (40) की तलाश है। गिरफ्तार लड़कियों ने पुलिस को बताया है कि उजबेकिस्तान की जुलेखा के पास मल्टीपल वीजा है।
क्राइम ब्रांच के सीनियर अफसर ने बताया कि गिरफ्तार की गई छह लड़कियों में से सिर्फ एक से पासपोर्ट बरामद हो सका है। उसके पास वैलिड टूरिस्ट वीजा मिला। बाकी पांच लड़कियों ने पुलिस को पासपोर्ट नहीं दिए। इसकी वजह यह है कि केस के दौरान पासपोर्ट सीज हो जाते हैं, जिस कारण ये लड़कियां भारत से बाहर नहीं जा पातीं। इन पांच लड़कियों के खिलाफ देह व्यापार निरोधक कानून के साथ फॉरनर्स एक्ट के तहत भी एफआईआर दर्ज की गई है।
ग्रेटर कैलाश पार्ट-2 के फ्लैट से पुलिस को बरामद हुए जुलेखा के दो रजिस्टरों से जानकारी मिली है कि ये लड़कियां हर दिन 75,000 से एक लाख रुपये तक कमा रही थीं। इन लड़कियों ने इस तरह के इंटरनैशनल सेक्स रैकेटों के बारे में क्राइम ब्रांच को जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पूर्व सोवियत संघ से अलग हुए देशों उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान आदि में बेरोजगारी की वजह से बहुत सी लड़कियां इन रैकेटों कंे चंगुल में फंस जाती हैं। बहुत सी लड़कियां ईजी मनी कमाने के मकसद से इन रैकेटों से कॉन्ट्रैक्ट करती हैं।
1 लाख डेली
ग्रेटर कैलाश पार्ट-2 में फ्लैट से बरामद जुलेखा के दो रजिस्टरों से पता चला है कि ये लड़कियां हर दिन 75,000 से 1 लाख रुपये तक कमाकर देती थीं।
15 दिन के एक लाख
कॉलगर्ल और रैकेट में कॉन्ट्रैक्ट अमूमन 15 दिन से दो महीने का होता है। कॉलगर्ल रैकेटियर को अपने बैंक अकाउंट का नंबर देती है , जिसमें तय रकम जमा करा दी जाती है। 15 दिन के लिए एक लाख से लेकर तीन महीनों के लिए पांच - छह लाख रुपये में कॉन्ट्रैक्ट होता है।
हर दिन 4-5 कस्टमर
दिल्ली आने के बाद लड़कियों की रिहाइश , खाने और ट्रांसपोर्टेशन का इंतजाम रैकेट की जिम्मेदारी होती है। हर लड़की को एक दिन में कम से कम चार - पांच कस्टमर के पास जाना होता है। इससे ज्यादा जगह जाने के लिए कोई लड़की तैयार नहीं होती।
10-15 दिन जेल
कस्टमर से पैसा पिम्प लेता है , लड़की नहीं। कॉन्ट्रैक्ट के दौरान अगर पुलिस की रेड पड़ गई तो 10-15 दिन तक जेल में रहना तय है , नहीं तो लड़कियां वापस अपने मुल्क चली जाती हैं।
कॉम्पिटिशन से भंडाफोड़
इन दिनों सेक्स रैकेटों की ज्यादा धरपकड़ की वजह इन रैकेटों में आपसी कॉम्पिटिशन बताया जा रहा है। एक गिरोह के पिंप पुलिस वालों से गठजोड़ कर दूसरे रैकेट की लड़कियों को गिरफ्तार करवा रहे हैं। पिछले दिनों महरौली से गिरफ्तार नगमा खान ने आरोप लगाया था कि उसे पुलिस वालों से मिलकर सोनू पंजाबन ने गिरफ्तार कराया था ।
काठमांडू. मुंबई में 13 जुलाई को हुए सीरियल ब्लास्ट के सिलसिले में नेपाल की राजधानी काठमांडू से एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। भारत की सीमा से सटे नेपाल के तराई में मौजूद सरलाही जिले के रहने वाले मोहम्मद जहीर पर शक है कि मुंबई में हुए बम धमाकों में उसकी भूमिका है।
मुंबई बम ब्लास्ट में 24 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 150 लोग ज़ख़्मी हुए थे। नेपाली मीडिया के मुताबिक खुफिया जानकारी मिलने पर नेपाल पुलिस की आतंकवाद निरोधी ईकाई ने उसे गिरफ्तार किया है। जहीर के बारे में कहा जा रहा है कि वह बालूवाटर इलाके में किराए की रिहाइश से संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देता था। इसी इलाके में नेपाली प्रधानमंत्री का निवास है।
नेपाल के अखबार गोरखपत्र डेली के मुताबिक नेपाली जांच एजेंसियों ने यह पाया है कि जहीर ने फोन पर मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में बातचीत की है और एसएमएस भी किए हैं। अखबार का दावा है कि जहीर को पिछले हफ्ते ही गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन इसका खुलासा अब किया गया है। इस समय जहीर पुलिस की हिरासत में है।
इस साल 13 जुलाई को जावेरी बाज़ार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए बम धमाकों ने मुंबई को हिला कर दिया था। इस घटना के पीछे आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने का शक है। भारतीय जांच एजेंसियों ने इस सिलसिले में कई जगह छापे मारे हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी हाथ नहीं लगी है।
आपकी राय
क्या मुंबई बम धमाके की जांच का अंजाम दूसरे मामलों जैसा ही होगा? या फिर इस घटना के असली गुनहगारों तक पुलिस पहुंच पाएगी और उन्हें सज़ा दी जा सकेगी? इन मुद्दों पर अपनी राय जाहिर करें।
मुंबई बम ब्लास्ट में 24 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 150 लोग ज़ख़्मी हुए थे। नेपाली मीडिया के मुताबिक खुफिया जानकारी मिलने पर नेपाल पुलिस की आतंकवाद निरोधी ईकाई ने उसे गिरफ्तार किया है। जहीर के बारे में कहा जा रहा है कि वह बालूवाटर इलाके में किराए की रिहाइश से संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देता था। इसी इलाके में नेपाली प्रधानमंत्री का निवास है।
नेपाल के अखबार गोरखपत्र डेली के मुताबिक नेपाली जांच एजेंसियों ने यह पाया है कि जहीर ने फोन पर मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में बातचीत की है और एसएमएस भी किए हैं। अखबार का दावा है कि जहीर को पिछले हफ्ते ही गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन इसका खुलासा अब किया गया है। इस समय जहीर पुलिस की हिरासत में है।
इस साल 13 जुलाई को जावेरी बाज़ार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए बम धमाकों ने मुंबई को हिला कर दिया था। इस घटना के पीछे आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने का शक है। भारतीय जांच एजेंसियों ने इस सिलसिले में कई जगह छापे मारे हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी हाथ नहीं लगी है।
आपकी राय
क्या मुंबई बम धमाके की जांच का अंजाम दूसरे मामलों जैसा ही होगा? या फिर इस घटना के असली गुनहगारों तक पुलिस पहुंच पाएगी और उन्हें सज़ा दी जा सकेगी? इन मुद्दों पर अपनी राय जाहिर करें।
एडा। बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण का कोई अता-पता नहीं है। सीबीआई द्वारा फर्जी तरीके से पासपोर्ट हासिल करने के मामले में बालकृष्ण के खिलाफ लुक ऑउट नोटिस जारी किया गया है। शक जताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वो भूमिगत हो गये हैं।
गौरतलब है कि सीबीआई ने बालकृष्ण पर फर्जी कागजात के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। सीबीआई ने उनके खिलाफ एक लुकआउट नोटिस भी जारी किया है। जिसके बाद से बालकृष्ण गायब हैं।
मालूम हो कि सोमवार सुबह बालकृष्ण ने अपनी सुरक्षा में तैनात उत्तराखंड पुलिस के जवान जयेंद्र को साथ ले जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने जयेंद्र को दूसरी गाड़ी से पतंजलि आश्रम पहुंचने को कहा। सुरक्षाकर्मी जयेंद्र पतंजलि आश्रम पहुंचा तो पता चला कि बालकृष्ण वहां नहीं आए। जब शाम तक बालकृष्ण का कुछ पता नहीं चला तो जयेंद्र ने उनके गुम होने की जानकारी पुलिस को दी।
रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण लापता, लुक आउट नोटिस जारी
फुलकवरेज
बालकृष्ण के अलावा सरकारी एजेंसियों ने रामदेव पर भी शिकंजा कस दिया है। हरिद्वार पुलिस रामदेव के गुरू शंकर देव के लापता होने की फाइल एक बार फिर से खोलने जा रही है। मामले की जांच एसआईएस यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन स्क्वॉड से भी करवाई जा सकती है।
गौरतलब है कि सीबीआई ने बालकृष्ण पर फर्जी कागजात के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। सीबीआई ने उनके खिलाफ एक लुकआउट नोटिस भी जारी किया है। जिसके बाद से बालकृष्ण गायब हैं।
मालूम हो कि सोमवार सुबह बालकृष्ण ने अपनी सुरक्षा में तैनात उत्तराखंड पुलिस के जवान जयेंद्र को साथ ले जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने जयेंद्र को दूसरी गाड़ी से पतंजलि आश्रम पहुंचने को कहा। सुरक्षाकर्मी जयेंद्र पतंजलि आश्रम पहुंचा तो पता चला कि बालकृष्ण वहां नहीं आए। जब शाम तक बालकृष्ण का कुछ पता नहीं चला तो जयेंद्र ने उनके गुम होने की जानकारी पुलिस को दी।
रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण लापता, लुक आउट नोटिस जारी
फुलकवरेज
बालकृष्ण के अलावा सरकारी एजेंसियों ने रामदेव पर भी शिकंजा कस दिया है। हरिद्वार पुलिस रामदेव के गुरू शंकर देव के लापता होने की फाइल एक बार फिर से खोलने जा रही है। मामले की जांच एसआईएस यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन स्क्वॉड से भी करवाई जा सकती है।
IBN7 IBN7 आपका शहर [+] 180 और खबरें पहले किया मां से बलात्कार, अब बेटी के साथ गैंगरेप
हरदोई। उत्तर प्रदेश में हरदोई जिले के संडीला कोतवाली क्षेत्र में लड़की का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किये जाने के बाद उसकी हत्या कर दिये जाने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि संडीला कोतवाली इलाके के बेहसरिया गांव निवासी संतोष ने कल शाम थाने पर तहरीर दी कि उसकी 12 साल की लड़की का संदीप, चन्द्र कुमार और विनोद कुमार ने 24 जुलाई की रात अपहरण कर लिया।
उन्होंने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने संडीला के जंगल में लड़की के साथ बलात्कार किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। लड़की का शव नग्न अवस्था में बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमार्टम में बलात्कार की पुष्टि हो गई है।
आरोपी लड़की की मां के साथ भी बलात्कार कर चुके हैं और हाल ही में जेल से छूटकर आये थे। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
उन्होंने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने संडीला के जंगल में लड़की के साथ बलात्कार किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। लड़की का शव नग्न अवस्था में बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमार्टम में बलात्कार की पुष्टि हो गई है।
आरोपी लड़की की मां के साथ भी बलात्कार कर चुके हैं और हाल ही में जेल से छूटकर आये थे। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
Monday, July 25, 2011
राजा ने पीएम, चिदम्बरम को भी लपेटा
नई दिल्ली। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेल में बंद पूर्व संचार मंत्री ए राजा ने प्रधानमंत्री सहित कई और मंत्रियों -नेताओं को भी लपेट में ले लिया है। राजा के बयान के बाद राजनीतिक गलियारे में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने पीएम और चिदम्बरम के इस्तीफे की मांग कर डाली है वहीं, केन्द्र सरकार के कई बड़े मंत्रियों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इस्तीफे की मांग को अनुचित करार दिया है। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ए राजा के बयान पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
इससे पहले, सोमवार को सीबीआई अदालत में सुनवाई के दौरान राजा ने दोहराया है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। राजा ने कहा कि उन्होंने केवल एनडीए सरकार की नीति का पालन किया। नीलामी करने की बजाए "पहले आओ पहले पाओ"की नीति एनडीए सरकार की थी जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में भी जारी रखा।
पीएम को थी जानकारी
राजा ने कहा स्पेक्ट्रम आवंटन में ऎसा कुछ भी नहीं हुआ जिसके बारे में पीएम की जानकारी नहीं था। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में सारे फैसले लिए गए। गृह मंत्री पी चिदम्बरम को भी आरोपों के घेरे में लेते हुए राजा ने कहा कि डी बी रियल्टी के आवंटन को चिदम्बरम ने ही मंजूरी दी थी।
राजा की ओर से उनके वकील ने कहा कि जब चिदम्बरम वित्त मंत्री थे तब उन्होंने प्रधानमंत्री को इस बात से अवगत करवा दिया था कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए किया गया। यह लाइसेंस बेचने की कोई बात नहीं थी।
पहले इस मसले पर पीएम से और बाद में चिदम्बरम से चर्चा हुई। खुद चिदम्बरम ने कहा था कि कार्पोरेट नियमों के मुताबिक शेयर में डायल्यूशन का मतलब 2 जी लाइसेंस की बिक्री नहीं है। जब इक्विटी बेचने का मतलब लाइसेंस बेचना नहीं है तो लाभ कमाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।
राजा ने कहा कि अरूण शौरी ने 26 लाइसेंस बांटे, दयानिधि ने 25 लाइसेंस बांटे और मैंने 122 लाइसेंस बांटे। इस संख्या से कोई फर्क नहीं पड़ता है। किसी भी मंत्री ने नीलामी नहीं की। तो केवल मुझ अकेले से पूछताछ क्यों की जा रही है।
1993 के बाद सभी पूर्व संचार मंत्री जाएं जेल
राजा ने कहा कि यदि पहले आओ पहले पाओ की नीति गलत थी तो 1993 के बाद अब तक के सभी पूर्व संचार मंत्रियों को मेरे साथ जेल में होना चाहिए। विशेष अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान राजा ने यह बात कही। सीबीआई राजा सहित 16 आरोपियों पर आरोप तय कर बहस पहले ही पूरी कर चुकी है।
सीबीआई ने केस की पहली चार्जशीट में राजा और आठ अन्य लोगों को 30 हजार 984 करोड़ के राजस्व नुकसान में आरोपी बनाया था। इसके बाद दूसरी चार्जशीट में डीएमके सांसद कनिमोझी और केलाइग्नर टीवी के सीईओ शरद कुमार का नाम आया। बाद में उन्हें भी जेल भेज दिया गया। ये सभी लोग अदालत के फैसले के इंतजार में तिहाड़ जेल में बंद है।
भाजपा ने साधा पीएम पर निशाना
उधर, राजा के इस बयान के बाद भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जो कुछ राजा ने कहा है भाजपा वो पहले ही कह चुकी है। भाजपा के अनुसार बिना प्रधानमंत्री की जानकारी के इस तरह के फैसले लिए जाना संभव नहीं है।
हालांकि, राजा द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन में एनडीए की नीतियों का पालन किए जाने की बात पर शाहनवाज ने साफ पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अब सच सामने आ रहा है।
चिदम्बरम का आरोपों का इनकार
चिदम्बरम का राजा के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय टूजी स्पैक्ट्रम की नीलामी के पक्ष में था। जबकि राजा के मंत्रालय ने 2001 के रेट के आधार पर ही आवंटन किया। चिदम्बरम ने माना कि पीएम की मौजूदगी में टूजी पर चर्चा जरूर हुई थी लेकिन वह नहीं जो राजा कह रहे हैं। चर्चा विदेशी पार्टनर हासिल करने वाले मामले पर हुई थी बात। स्वान यूनिटेक ने स्पैक्ट्रम नहीं बल्कि नए शेयर बेच कर बनाए नए पार्टनर बनाए। वित्त मंत्रालय ने स्वान यूनिटेक के शेयर इधर-से उधर होने की जांच की थी
नई दिल्ली। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेल में बंद पूर्व संचार मंत्री ए राजा ने प्रधानमंत्री सहित कई और मंत्रियों -नेताओं को भी लपेट में ले लिया है। राजा के बयान के बाद राजनीतिक गलियारे में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने पीएम और चिदम्बरम के इस्तीफे की मांग कर डाली है वहीं, केन्द्र सरकार के कई बड़े मंत्रियों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इस्तीफे की मांग को अनुचित करार दिया है। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ए राजा के बयान पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
इससे पहले, सोमवार को सीबीआई अदालत में सुनवाई के दौरान राजा ने दोहराया है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। राजा ने कहा कि उन्होंने केवल एनडीए सरकार की नीति का पालन किया। नीलामी करने की बजाए "पहले आओ पहले पाओ"की नीति एनडीए सरकार की थी जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में भी जारी रखा।
पीएम को थी जानकारी
राजा ने कहा स्पेक्ट्रम आवंटन में ऎसा कुछ भी नहीं हुआ जिसके बारे में पीएम की जानकारी नहीं था। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में सारे फैसले लिए गए। गृह मंत्री पी चिदम्बरम को भी आरोपों के घेरे में लेते हुए राजा ने कहा कि डी बी रियल्टी के आवंटन को चिदम्बरम ने ही मंजूरी दी थी।
राजा की ओर से उनके वकील ने कहा कि जब चिदम्बरम वित्त मंत्री थे तब उन्होंने प्रधानमंत्री को इस बात से अवगत करवा दिया था कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए किया गया। यह लाइसेंस बेचने की कोई बात नहीं थी।
पहले इस मसले पर पीएम से और बाद में चिदम्बरम से चर्चा हुई। खुद चिदम्बरम ने कहा था कि कार्पोरेट नियमों के मुताबिक शेयर में डायल्यूशन का मतलब 2 जी लाइसेंस की बिक्री नहीं है। जब इक्विटी बेचने का मतलब लाइसेंस बेचना नहीं है तो लाभ कमाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।
राजा ने कहा कि अरूण शौरी ने 26 लाइसेंस बांटे, दयानिधि ने 25 लाइसेंस बांटे और मैंने 122 लाइसेंस बांटे। इस संख्या से कोई फर्क नहीं पड़ता है। किसी भी मंत्री ने नीलामी नहीं की। तो केवल मुझ अकेले से पूछताछ क्यों की जा रही है।
1993 के बाद सभी पूर्व संचार मंत्री जाएं जेल
राजा ने कहा कि यदि पहले आओ पहले पाओ की नीति गलत थी तो 1993 के बाद अब तक के सभी पूर्व संचार मंत्रियों को मेरे साथ जेल में होना चाहिए। विशेष अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान राजा ने यह बात कही। सीबीआई राजा सहित 16 आरोपियों पर आरोप तय कर बहस पहले ही पूरी कर चुकी है।
सीबीआई ने केस की पहली चार्जशीट में राजा और आठ अन्य लोगों को 30 हजार 984 करोड़ के राजस्व नुकसान में आरोपी बनाया था। इसके बाद दूसरी चार्जशीट में डीएमके सांसद कनिमोझी और केलाइग्नर टीवी के सीईओ शरद कुमार का नाम आया। बाद में उन्हें भी जेल भेज दिया गया। ये सभी लोग अदालत के फैसले के इंतजार में तिहाड़ जेल में बंद है।
भाजपा ने साधा पीएम पर निशाना
उधर, राजा के इस बयान के बाद भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जो कुछ राजा ने कहा है भाजपा वो पहले ही कह चुकी है। भाजपा के अनुसार बिना प्रधानमंत्री की जानकारी के इस तरह के फैसले लिए जाना संभव नहीं है।
हालांकि, राजा द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन में एनडीए की नीतियों का पालन किए जाने की बात पर शाहनवाज ने साफ पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अब सच सामने आ रहा है।
चिदम्बरम का आरोपों का इनकार
चिदम्बरम का राजा के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय टूजी स्पैक्ट्रम की नीलामी के पक्ष में था। जबकि राजा के मंत्रालय ने 2001 के रेट के आधार पर ही आवंटन किया। चिदम्बरम ने माना कि पीएम की मौजूदगी में टूजी पर चर्चा जरूर हुई थी लेकिन वह नहीं जो राजा कह रहे हैं। चर्चा विदेशी पार्टनर हासिल करने वाले मामले पर हुई थी बात। स्वान यूनिटेक ने स्पैक्ट्रम नहीं बल्कि नए शेयर बेच कर बनाए नए पार्टनर बनाए। वित्त मंत्रालय ने स्वान यूनिटेक के शेयर इधर-से उधर होने की जांच की थी
मुम्बई । मुम्बई में गत 13 जुलाई को हुए तीन बम विस्फोटों में घायल एक और व्यक्ति ने सोमवार को यहां एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इन विस्फोटों में मरने वालों की संख्या 24 हो गई।
बृहनमुम्बई नगर निगम (बीएमसी) के आपदा नियंत्रण केंद्र ने बताया कि मानकेश्वर विश्वकर्मा (48) की मौत शनिवार को केईएम अस्पताल में हो गई। विश्वकर्मा कारीगर थे और 13 जुलाई की शाम को वह दादर के कबूतरखाना बाजार में प्लाइवुड खरीदने गए थे। इसी दौरान वहां हुए विस्फोट में वह घायल हो गए थे। अस्पातल के एक अधिकारी ने बताया कि विश्वकर्मा को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गौरतलब है कि मुम्बई के झावेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए बम विस्फोटों में 131 लोग घायल हो गए थे। कुछ लोगों का इलाज अभी भी शहर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है, तथा कुछ को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
बृहनमुम्बई नगर निगम (बीएमसी) के आपदा नियंत्रण केंद्र ने बताया कि मानकेश्वर विश्वकर्मा (48) की मौत शनिवार को केईएम अस्पताल में हो गई। विश्वकर्मा कारीगर थे और 13 जुलाई की शाम को वह दादर के कबूतरखाना बाजार में प्लाइवुड खरीदने गए थे। इसी दौरान वहां हुए विस्फोट में वह घायल हो गए थे। अस्पातल के एक अधिकारी ने बताया कि विश्वकर्मा को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गौरतलब है कि मुम्बई के झावेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए बम विस्फोटों में 131 लोग घायल हो गए थे। कुछ लोगों का इलाज अभी भी शहर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है, तथा कुछ को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
मुंबई।। बॉलिवुड ऐक्ट्रेस कटरीना कैफ का राहुल गांधी का आधा भारतीय कहना बीजेपी को खूब भा रहा है। बीजेपी ने कटरीन के इस बयान को हाथोंहाथ लेते हुए अब उन पर यूपी विधानसभा चुनाव और मुंबई नगरपालिका चुनाव में पार्टी के प्रचार के लिए डोरे डालने शुरू कर दिए हैं।
टैब्लॉइड ' मिड डे ' की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के बीजेपी अध्यक्ष राज के. पुरोहित ने कहा कि पार्टी कोशिश कर रही है कि कटरीना उसके लिए प्रचार करे। उन्होंने कहा कि हम कटरीना का स्वागत करते हैं और हम कोशिश करेंगे कि वह हमारी रैलियों और सभाओं का हिस्सा बन सकें।
पुरोहित ने कहा कि राहुल गांधी पर कटरीना के बयान में कुछ भी गलत नहीं था। वह पहली शख्स हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसा कहा है। इसलिए हम उनका समर्थन करते हैं।
दरअसल बीजेपी को लगता है कि कटरीना ने अपने बयान के जरिए करोडों भारतीयों की भावना को आवाज दी है।
बीजेपी की उत्तर प्रदेश यूनिट के अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कटरीना ने जो भी कहा वह बिल्कुल सही था। उन्होंने करोड़ों हिंदुस्तानियों की भावना को आवाज दी है। शाही ने कहा कि कटरीना ने अपना बयान वापस नहीं लिया था, बल्कि सिर्फ यह कहा था कि उनकी बात से किसी को दुख पहुंचा है तो उन्हें खेद है।
अगर कटरीना बीजेपी का प्रचार करने से मना कर देती हैं तो भी पार्टी ने दूसरा प्लान तैयार रखा है। पार्टी की योजना है कि कटरीना के फोटो के साथ उनके बयान का इस्तेमाल प्रचार में करेगी।
इस बारे में जब कटरीना के प्रवक्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह इन विवादों से दूर रहना चाहती हैं और इससे जुड़े किसी भी मुद्दे पर वह टिप्पणी नहीं देंगी।
टैब्लॉइड ' मिड डे ' की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के बीजेपी अध्यक्ष राज के. पुरोहित ने कहा कि पार्टी कोशिश कर रही है कि कटरीना उसके लिए प्रचार करे। उन्होंने कहा कि हम कटरीना का स्वागत करते हैं और हम कोशिश करेंगे कि वह हमारी रैलियों और सभाओं का हिस्सा बन सकें।
पुरोहित ने कहा कि राहुल गांधी पर कटरीना के बयान में कुछ भी गलत नहीं था। वह पहली शख्स हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसा कहा है। इसलिए हम उनका समर्थन करते हैं।
दरअसल बीजेपी को लगता है कि कटरीना ने अपने बयान के जरिए करोडों भारतीयों की भावना को आवाज दी है।
बीजेपी की उत्तर प्रदेश यूनिट के अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कटरीना ने जो भी कहा वह बिल्कुल सही था। उन्होंने करोड़ों हिंदुस्तानियों की भावना को आवाज दी है। शाही ने कहा कि कटरीना ने अपना बयान वापस नहीं लिया था, बल्कि सिर्फ यह कहा था कि उनकी बात से किसी को दुख पहुंचा है तो उन्हें खेद है।
अगर कटरीना बीजेपी का प्रचार करने से मना कर देती हैं तो भी पार्टी ने दूसरा प्लान तैयार रखा है। पार्टी की योजना है कि कटरीना के फोटो के साथ उनके बयान का इस्तेमाल प्रचार में करेगी।
इस बारे में जब कटरीना के प्रवक्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह इन विवादों से दूर रहना चाहती हैं और इससे जुड़े किसी भी मुद्दे पर वह टिप्पणी नहीं देंगी।
आरक्षण" की राह में रोड़ा बनी माया सरकार
लखनऊ। प्रकाश झा को अपनी आगामी मल्टी स्टारर फिल्म आरक्षण के प्रमोशन के लिए उत्तरप्रदेश में सेमीनार आयोजित करने की अनुमति नहीं मिल सकी।
इस फिल्म में आरक्षण को उखाड़ फेंकने के लिए कॉलेज के प्रिंसीपल सेमीनारों का सहारा लेते दिखाया गया है और इसी तर्ज पर फिल्म का प्रमोशन करने की योजना थी।
इस बारे में प्रकाश झा ने बताया कि पहले तो उन्हें लखनऊ यूनिवर्सिटी में सेमीनार करने की अनुमति से इनकार कर दिया गया।
इसके बाद जब उन्होंने सेमीनार के लिए इंदिरा गांधी ऑडीटोरियम को किराए पर लिया तो लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि झा ने खुद सीएम मायावती के लिए एक संदेश भी छोड़ा था कि वे मायावती के लिए फिल्म को देखने के लिए विशेष स्क्रीनिंग की व्यवस्था रख सकते हैं।
लखनऊ। प्रकाश झा को अपनी आगामी मल्टी स्टारर फिल्म आरक्षण के प्रमोशन के लिए उत्तरप्रदेश में सेमीनार आयोजित करने की अनुमति नहीं मिल सकी।
इस फिल्म में आरक्षण को उखाड़ फेंकने के लिए कॉलेज के प्रिंसीपल सेमीनारों का सहारा लेते दिखाया गया है और इसी तर्ज पर फिल्म का प्रमोशन करने की योजना थी।
इस बारे में प्रकाश झा ने बताया कि पहले तो उन्हें लखनऊ यूनिवर्सिटी में सेमीनार करने की अनुमति से इनकार कर दिया गया।
इसके बाद जब उन्होंने सेमीनार के लिए इंदिरा गांधी ऑडीटोरियम को किराए पर लिया तो लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि झा ने खुद सीएम मायावती के लिए एक संदेश भी छोड़ा था कि वे मायावती के लिए फिल्म को देखने के लिए विशेष स्क्रीनिंग की व्यवस्था रख सकते हैं।
"आरक्षण" की राह में रोड़ा बनी माया सरकार
लखनऊ। प्रकाश झा को अपनी आगामी मल्टी स्टारर फिल्म आरक्षण के प्रमोशन के लिए उत्तरप्रदेश में सेमीनार आयोजित करने की अनुमति नहीं मिल सकी।
इस फिल्म में आरक्षण को उखाड़ फेंकने के लिए कॉलेज के प्रिंसीपल सेमीनारों का सहारा लेते दिखाया गया है और इसी तर्ज पर फिल्म का प्रमोशन करने की योजना थी।
इस बारे में प्रकाश झा ने बताया कि पहले तो उन्हें लखनऊ यूनिवर्सिटी में सेमीनार करने की अनुमति से इनकार कर दिया गया।
इसके बाद जब उन्होंने सेमीनार के लिए इंदिरा गांधी ऑडीटोरियम को किराए पर लिया तो लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि झा ने खुद सीएम मायावती के लिए एक संदेश भी छोड़ा था कि वे मायावती के लिए फिल्म को देखने के लिए विशेष स्क्रीनिंग की व्यवस्था रख सकते हैं
लखनऊ। प्रकाश झा को अपनी आगामी मल्टी स्टारर फिल्म आरक्षण के प्रमोशन के लिए उत्तरप्रदेश में सेमीनार आयोजित करने की अनुमति नहीं मिल सकी।
इस फिल्म में आरक्षण को उखाड़ फेंकने के लिए कॉलेज के प्रिंसीपल सेमीनारों का सहारा लेते दिखाया गया है और इसी तर्ज पर फिल्म का प्रमोशन करने की योजना थी।
इस बारे में प्रकाश झा ने बताया कि पहले तो उन्हें लखनऊ यूनिवर्सिटी में सेमीनार करने की अनुमति से इनकार कर दिया गया।
इसके बाद जब उन्होंने सेमीनार के लिए इंदिरा गांधी ऑडीटोरियम को किराए पर लिया तो लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि झा ने खुद सीएम मायावती के लिए एक संदेश भी छोड़ा था कि वे मायावती के लिए फिल्म को देखने के लिए विशेष स्क्रीनिंग की व्यवस्था रख सकते हैं

मुजफ्फरनगर: एसडीएम के ड्राईवर ने अपनी भाभी सहित दो मासूम भतीजों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया. पुलिस के मुताबिक मामला प्रॉपर्टी विवाद का है.
मुजफ्फरनगर के एसएसपी प्रवीण कुमार ने बताया कि आरोपी दानपाल राठी को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि दानपाल एसडीएम की जीप पर ड्राईवर बतौर काम करता है.
दानपाल ने रविवार रात अपनी भाभी बबीता और उसके दो मासूम बेटों सीटू उर्फ़ विक्रांत और विपुल को गोली मारकर हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया.
वारदात में दानपाल उर्फ पप्पू राठी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल का प्रयोग किया, मगर वारदात को आत्महत्या में बदलने के लिए पप्पू ने बबीता के हाथ में तमंचा पकड़ा दिया ताकि पुलिस को ये लगे कि बबीता ने अपने दोनों बेटों की हत्या करने के बाद अपने आप को गोली मार कर आत्महत्या कर ली.
दरअसल पप्पू राठी के भाई चंचल की करीब तीन साल पूर्व बीमारी के चलते मौत हो चुकी है. चंचल की मौत के बाद उसकी पत्नी बबीता अपने दो बच्चों सीटू और विपुल के साथ पप्पू के पास ही रहती थी.
मौके पर पहुंचे पुलिस के आलाधिकारियों ने घटना स्थल का जायजा लिया और मृतक महिला के देवर से पूछताछ की तो उसने ह्त्या करने का जुल्म कबूला मगर हत्यारोपी को अपने किए पर बिलकुल भी पछतावा नहीं है.
पुलिस के अनुसार ये ह्त्या आपसी लेनदेन और जमीन जायदाद को लेकर की गई है
Sunday, July 24, 2011

उदयपुर। क्या आपने कभी पुरुषों द्वारा संतान उत्पन्न करने की घटना के बारे में सुना है? शायद नहीं। राजस्थान के स्वास्थ्य केंद्र पर ऐसी एक नहीं 32 घटनाएं दर्ज हैं। यहीं नहीं यहां एक महिला ने एक साल में 24 बार संतान उत्पन्न किया है।
गिनीज बुक के विश्व रिकार्ड को तोड़ देने वाले इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि यह हकीकत नहीं बल्कि एक नया घोटाला है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि कोटड़ा कस्बे के गोगुंडा सामुदायिक केंद्र में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को इस घोटाले का पता लगाया।
इस केंद्र की गर्भावस्था सहायिकाओं ने केंद्र सरकार की जननी सुरक्षा योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे की गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित सहायता राशि को हड़पने के लिए गलत रिपोर्ट पेश की।
जननी सुरक्षा योजना के तहत पहले दो बच्चों के जन्म के लिए गरीबी रेखा से नीचे की महिला को 1700 रुपये और प्रत्येक प्रसव पर मिडवाइफ को इसके लिए 200 रुपये मिलते हैं। योजना का मकसद प्रसव के दौरान जच्चे और बच्चे की होने वाली मृत्यु को रोकना है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले कई तरह की सेवाएं और सुविधाएं दी जाती हैं।
अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के रिकार्ड में ऐसे 32 पुरुषों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने संतान को जन्म दिया। इनमें से कुछ के नाम कई बार दर्ज हैं।
रिकार्ड के अनुसार 60 साल की महिला ने साल में दो बार संतान उत्पन्न किया और सीता नाम की महिला ने तो साल में 24 संतान उत्पन्न किए।
अधिकारी ने बताया कि गर्भवास्था वार्ड की प्रमुख ने खुद भी एक साल में 11 बार संतान उत्पन्न किये।
अधिकारी ने बताया कि घोटालों के उजागर होने के बाद वार्ड प्रमुख को पद से हटा दिया गया है और वह इस समय फरार है।
उसने बताया कि विभागीय जांच के बाद शिकायत दर्ज कराई जाएगी। जांच के लिए तीन वरिष्ठ चिकित्सकों का दल गठित कर दिया गया है।
दानिश के मेल का राज खंगालने में जुटी पुलिस , 'इम्तिहान कब देना है '
अहमदाबाद। ट्यूशन में दो लड़के हैं ..इम्तिहान कब देना है’ यह किसी अध्यापक-प्रधान अध्यापक के किसी संवाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि आतंकियों के ई-मेल संदेश है।
गुजरात पुलिस इसमें हालिया मुंबई धमाके की तिथि का राज तलाश रही है। सूत्रों के अनुसार गुजरात पुलिस की जांच एजेंसी क्राइम ब्रांच कुख्यात आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के आतंकी दानिश रियाज ऊर्फ साफी के कोडेड ई-मेल संदेश को डिकोड करने में सफल हो गई है।
पुलिस के हत्थे चढ़ने से पहले दानिश ने रांची के मंजर इमाम, डॉ. अबु फैजल तथा कोलकाता के हारून नामक व्यक्ति को भेजे ई-मेल में कहा था ‘ट्यूशन में दो लड़के हैं ..इम्तिहान कब देना है।’ इसे पुलिस कोडवर्ड मानते हुए 13/7 के हालिया मुंबई बम धमाकों की तारीख से जोड़ कर देख रही है। इसी साल 21 जून को गुजरात पुलिस ने दानिश को हैदराबाद से वडोदरा पहुंचने पर दबोच लिया था। इससे पूछताछ जारी है। पूछताछ में आतंकी गोलमोल जवाब दे रहा है।
‘शादी रखी है’:
छानबीन में आईएम के इस आतंकी के एक से अधिक ई-मेल एड्रेस मिले हैं। इसने एक ई-मेल में लिखा था ‘शादी रखी है’। क्राइम ब्रांच के सूत्रों का कहना है कि संभवत: इस वाक्य का प्रयोग आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप अथवा आतंकवादी हमले की प्लानिंग के संदर्भ में किया गया होगा। इस तरह पुलिस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि दानिश, मंजर इमाम एवं हारून आईएम के सक्रिय आतंकी सदस्य हैं। हालिया मुंबई धमाकों में इनकी प्रत्यक्ष-अथवा अप्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है।
अधिकांश कोडेड ई-मेल साल 2010 के अंत में किए गए थे। इसलिए इन ई-मेल का मुंबई धमाकों से तालमेल देखा जा रहा है। मंजर-फैजल व हारून संबंधी सवालों पर उसका जवाब होता है कि साहब वो तो हम दुआ, सलाम के लिए किया करते थे। फैजल मध्य प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में हैं। गुजरात पुलिस फैजल-दानिश को आमने-सामने रख कर पूछताछ करने की इच्छुक है।
गुजरात पुलिस इसमें हालिया मुंबई धमाके की तिथि का राज तलाश रही है। सूत्रों के अनुसार गुजरात पुलिस की जांच एजेंसी क्राइम ब्रांच कुख्यात आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के आतंकी दानिश रियाज ऊर्फ साफी के कोडेड ई-मेल संदेश को डिकोड करने में सफल हो गई है।
पुलिस के हत्थे चढ़ने से पहले दानिश ने रांची के मंजर इमाम, डॉ. अबु फैजल तथा कोलकाता के हारून नामक व्यक्ति को भेजे ई-मेल में कहा था ‘ट्यूशन में दो लड़के हैं ..इम्तिहान कब देना है।’ इसे पुलिस कोडवर्ड मानते हुए 13/7 के हालिया मुंबई बम धमाकों की तारीख से जोड़ कर देख रही है। इसी साल 21 जून को गुजरात पुलिस ने दानिश को हैदराबाद से वडोदरा पहुंचने पर दबोच लिया था। इससे पूछताछ जारी है। पूछताछ में आतंकी गोलमोल जवाब दे रहा है।
‘शादी रखी है’:
छानबीन में आईएम के इस आतंकी के एक से अधिक ई-मेल एड्रेस मिले हैं। इसने एक ई-मेल में लिखा था ‘शादी रखी है’। क्राइम ब्रांच के सूत्रों का कहना है कि संभवत: इस वाक्य का प्रयोग आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप अथवा आतंकवादी हमले की प्लानिंग के संदर्भ में किया गया होगा। इस तरह पुलिस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि दानिश, मंजर इमाम एवं हारून आईएम के सक्रिय आतंकी सदस्य हैं। हालिया मुंबई धमाकों में इनकी प्रत्यक्ष-अथवा अप्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है।
अधिकांश कोडेड ई-मेल साल 2010 के अंत में किए गए थे। इसलिए इन ई-मेल का मुंबई धमाकों से तालमेल देखा जा रहा है। मंजर-फैजल व हारून संबंधी सवालों पर उसका जवाब होता है कि साहब वो तो हम दुआ, सलाम के लिए किया करते थे। फैजल मध्य प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में हैं। गुजरात पुलिस फैजल-दानिश को आमने-सामने रख कर पूछताछ करने की इच्छुक है।

चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सेक्टर-43 में एक महीने से गैंगरेप का दंश झेल रही लड़की हैवानों के चंगुल से बच निकली। लड़की के परिवार वालों की सूचना पर पुलिस ने लड़की को सुरक्षित बरामद कर लिया है। पुलिस आरोपियों की धर पकड़ के लिए छापेमारी कर रही है।
पुलिस के मुताबिक इस लड़की का दोस्त काफी समय से अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल कर रहा था। महीने भर पहले इस लड़के ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर लड़की को अगवा कर लिया और एक महीने तक लड़की के साथ बलात्कार किया गया।
मालूम हो कि कल जब औरोपी लड़के उसे मोहाली के एक होटल में लेकर पहुंचे तो मौका पाकर लड़की वहां से भाग निकली और अपने घरवालों को इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने पहुंचकर लड़की को बचाया।
चंडीगढ़: एक महीने तक होता रहा महिला से गैंगरेप
पुलिस के मुताबिक जांच में सामने आया है कि लड़की के साथ गैंगरेप किया गया है। वहीं, पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है।

नई दिल्ली। बागपत में साथ पढ़ने वाली दो युवतियां के रिश्ते दोस्ती से और आगे बढ़ गए और वे लेस्बियन बन गईं। दोनों लड़कियां बचपन की दोस्त हैं। हालांकि गुड़गांव की अदालत में इन दोनों ने लिव इन रिलेशनशिप के तहत रहने का शपथ पत्र दिया है। साथ ही दावा किया कि वे शादी भी कर चुकी हैं। अदालत में सविता दुल्हन के वेश में थी तो बीना ने मर्दाना पोशाक पहन रखी थी। दोनों युवतियों ने कोर्ट में सुरक्षा की गुहार लगाई है।
पिछले दो महीने से दोनों गुड़गांव में लिव-इन- रिलेशनशिप में रह रही थीं। कोर्ट में सुनवाई सोमवार को होगी। भनोट बागपत की रहने वाली 25 वर्षीय सविता बीए की छात्रा है। उसके पास के गांव खेखड़ा की रहने वाली 22 वर्षीय वीना 12वीं की छात्रा है। दोनों एक दूसरे को 15 वर्षों से जानती हैं। सविता के परिवार वालों ने पांच साल पहले उसका विवाह कराया था।
शादी से पहले उसे कोई लड़का दिखाया गया था, लेकिन शादी किसी और से कराई गई थी। सविता का तलाक हो चुका है। इसके बाद उसने अपनी सहेली वीना से सारी बात बताई। दोनों एक दूसरे के संपर्क में रहने लगे। इसके बाद सविता घर से भागकर खेखड़ा गांव में वीना के घर रहने लगी।
सात समुन्दर पार न्यूयार्क में भी इस तरह की घटनाएं घाट रही हैं . अमरीका के न्यूयार्क में रविवार को पहली बार दो ऎसी महिलाएं कानूनी रूप से शादी के बंधन में बंधीं जिनकी उम्र 50 वर्ष से भी अधिक है ओर वे दादी बन चुकी हैं। न्यूयार्क की परंपरागत "हनीमून कैपिटल" माना जाने वाला नियाग्रा फाल्स इस अनूठे विवाह का साक्षी बना जब किट्टी लैम्बर्ट (54) और चार्ले रूड (53) ने अपने परिजनों,दोस्तों,समर्थकों,पर्यटकों और मीडिया के सामने एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाई।
लैम्बर्ट और रूड के पिछली शादियों से पांच बच्चे हैं और ये दोनों ही महिलाएं दादी बनने का सुख प्राप्त कर चुकी हैं। उनके विवाह करने से यह मान्यता टूट गई है कि समलिंगी विवाह केवल युवा ही करते हैं। लैम्बर्ट और रूड़ पिछले एक दशक से एक दूसरे के साथ हैं। समलिंगी विवाह को समाज में समान दर्जा दिलाने के लिए काफी लंबे समय से संघर्ष कर रहीं इन दोनों महिलाओं ने नियाग्रा फाल्स के पार्कस लूना आईलैंड में शादी कर इतिहास रचने का फैसला किया। विवाह की रस्म पूरी होने के बाद इस युगल ने लेडी गागा के गीत "द एज्ज आफ ग्लोरी" पर डांस कर अपनी खुशी का इजहार किया।
विवाह से पूर्व लैम्बर्ट और रूड़ ने कहा कि उनकी शादी अमेरिका में समलिंगिंयों के अधिकारों की दिशा में एक बडा सकारात्मक कदम है। लैम्बर्ट ने कहा मेरे लिए यह एक अjुत पल है। हमारे साथ भी सबके समान ही व्यवहार किया जाएगा। हमारा एक बहुत बडा सपना पूरा हो रहा है। उल्लेखनीय है कि न्यूयार्क समलिंगी विवाहों को कानूनी रूप से मान्यता देने वाला अमेरिका का छठा और सबसे बडा राज्य है।
इसका सविता के परिवार वाले विरोध करते थे। मामला गंभीर होने के कारण पंचायत ने दोनों को अलग रहने का हुक्म दे दिया। पंचायत का हुक्म नहीं मानने पर दोनों को जान से मारने की चेतावनी भी मिल चुकी है। इससे डरकर दो माह पहले वीना सविता को लेकर गुड़गांव भाग आई। उसके मामा मानेसर में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। दोनों उनके पास हैं।
अदालत में शपथ पत्र दायर कर दोनों ने कहा है कि समाज भले ही उनके रिश्ते को न माने पर वे पति-पत्नी की तरह रहेंगी। दूसरी ओर, बीना ने कहा है कि उसके तथा सविता के रिश्ते पर उसके घर वालों को कोई एतराज नहीं है। कोर्ट में सुनवाई सोमवार को होगी।
मोदी की तारीफ़ मंहगी पडी , वस्तान्वी को कुलपति पद से हटाया

देवबंद की मजलिस-ए-शूरा की एक अहम बैठक में गुलाम मोहम्मद वस्तानवी को संस्था के कुलपति पद से हटा दिया गया है.
बैठक में हुए वोटों के बंटवारे में आठ वोट वस्तानवी के विरोध में पड़े और पाँच उनके पक्ष में.
लेकिन बीबीसी से बात करते हुए वस्तानवी ने कहा कि वो इस फ़ैसले से बिल्कुल मायूस नहीं हैं और उन्हें कोई तक़लीफ़ नहीं है, हालाँकि उन्होंने कहा कि वो देवबंद के काउंसिल के सदस्य बने रहेंगे.
उन्होंने कहा, "ऐसी जगह पर जहाँ हंगामें होते हों, जहाँ लोगों की टांगें खींची जा रही हों, मैं वहाँ काम कर ही नहीं सकता था. काम तो वहाँ किया जाता है जहाँ सुकून हो. देवबंद में कुछ लोग हैं जो दारुल-उलूम अपनी जागीर समझते हैं कि एक गुजराती आदमी यहाँ आकर कैसे बैठ गया. ऐसे लोगों को जलन है."
वस्तानवी के मुताबिक उनके छात्रों में से मात्र कुछ ही उनके खिलाफ़ थे, लेकिन उन्हें भी भड़काया गया था.
मजलिस-ए-शूरा की रविवार को हुई वोटिंग के बारे में वस्तानवी ने कहा कि बैठक में कुछ लोग उनसे इस्तीफ़ा लेने का मन बनाकर आए थे.
वस्तानवी ने कहा, "वोटिंग नहीं होनी थी. रिपोर्ट में मोदी के मामले में मुझपर कोई आरोप नहीं लगाए गए थे. लेकिन रिपोर्ट के बाद मुझसे इस्तीफ़ा देने को कहा गया. मैंने कहा मैं कैसे इस्तीफ़ा दूँ. संस्था में हंगामा किसने किया और कराया, इसका तो रिपोर्ट में ज़िक्र नहीं है, इसलिए ये रिपोर्ट अधूरी है. इस पर कमेटी ने कहा कि आपको इस्तीफ़ा देना पड़ेगा. मैने कहा कि मैं पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही इस्तीफ़ा दूंगा."
वस्तानवी ने कहा कि बैठक में कुछ लोग ये सोचकर आए थे कि अगर वो इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो उनकी छुट्टी करनी है.
'काम का मौका नहीं'
ऐसी जगह पर जहाँ हंगामें होते हों, जहाँ लोगों की टांगें खींची जा रही हों, मैं वहाँ काम कर ही नहीं सकता था. काम तो वहाँ किया जाए जहाँ सुकून हो. मेरे छात्रों में बहुत कम लोग मेरे खिलाफ़ थे, लेकिन जिन्होंने उन्हें भड़काया, उन्हें सभी जानते हैं. देवबंद में कुछ लोग हैं जो उसे अपनी संपत्ति समझते हैं कि एक गुजराती आदमी यहाँ आकर कैसे बैठ गया. ऐसे लोगों को जलन है.
ग़ुलाम वस्तानवी
पूर्व कुलपति के मुताबिक उन्हें देवबंद में अपने कार्यकाल के दौरान काम करने का मौका नहीं दिया गया.
वस्तानवी ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट तो उनके पक्ष में थी लेकिन उन्होंने पहले ही कहा था कि तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट चाहे उनके पक्ष में हो या नहीं, वो अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.
ग़ौरतलब है कि वस्तानवी को इसी वर्ष जनवरी में मजलिस-ए-शूरा ने ही दारुल उलूम का कुलपति नियुक्त किया था, लेकिन उनकी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कुछ टिप्पणियों की दारुल उलूम में और उसके बाहर कड़ी आलोचना हुई थी. उसके बाद से ही उनके इस्तीफ़े की मांग की जाने लगी थी.
ग़ुलाम मोहम्मद वस्तानवी ने कहा था कि गुजरात में मुसलमानों की स्थिति काफ़ी बेहतर है और अब समय आ गया है कि मुसलमान अतीत को भुलाकर आगे बढ़ें.
इस बात पर कई मुस्लिम संस्थाओं ने आपत्ति जताई थी.
मोदी विवाद
लेकिन बीबीसी से बातचीत में वस्तानवी ने कहा कि नरेंद्र मोदी पर उनकी टिप्पणी का दारुल-उलूम से कोई लेना-देना नहीं था.
नरेंद्र मोदी मामले का दारुल-उलूम से कोई लेना-देना नहीं था. मेरे साक्षत्कार का ताल्लुक गुजरात से था, वहाँ के विकास से था. मैने इस बारे में सफ़ाई भी दी थी कि गुजरात में विकास मात्र मोदी ने नहीं किया है, विकास तो केंद्र ने मिलकर किया है. मीडिया ने लोगों को गुमराह किया.
ग़ुलाम वस्तानवी
उन्होंने कहा, "मेरे साक्षत्कार का ताल्लुक गुजरात से था, वहाँ के विकास से था. मैने इस बारे में सफ़ाई भी दी थी कि गुजरात में विकास मात्र मोदी ने नहीं किया है, विकास तो केंद्र ने मिलकर किया है. लेकिन मीडिया ने लोगों को गुमराह किया."
हैदराबाद के लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि वस्तानवी के बयान को मुस्लिम समुदाय कभी स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि उनकी नज़र में मोदी सैंकड़ों मुसलमानों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार हैं.
वस्तानवी के बयान के बाद मजलिस-ए-शुरा ने एक कार्यवाहक कुलपति नियुक्त करने के अलावा वस्तानवी पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई थी जिसे सभी मुद्दों की जांच करके अपनी रिपोर्ट देनी थी.
वस्तानवी दारुल उलूम के सौ वर्ष के इतिहास में वहां के कुलपति बनने वाले पहले गुजराती कुलपति थे.
ग़ुलाम मोहम्मद वस्तानवी गुजरात से आते हैं और उन्होंने एमबीए की भी पढ़ाई की है. वस्तानवी सूरत के रहने वाले हैं और गुजरात और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में कई शिक्षा केंद्र भी चलाते हैं
Saturday, July 23, 2011
विगोरा हाई पावर का कमाल
विवाहित जीवन बने खुशहाल http://replpharma.com/images/Vigoura_Hy_Power.jpg
आर ई पी एल की प्रसिद्द होम्योपैथिक दवा विगोरा हाई पावर के सेवन से लोगों के विवाहित जीवन में खुशहाली आ गयी है. जो लोग बिस्तर पर अपनी पत्नी को सम्पूर्ण संतुष्टि नहीं दे सकते ऐसे लोगों के लिए विगोरा हाई पावर आशा की नई किरण बनकर उभरी है. सबसे भरोसेमंद और असरकारक दवा के रूप में विगोरा हाई पावर का शुमार होता है. कुछ लोग सिर्फ वादे करते हैं , मगर विगोरा हाई पावर सच्चा काम करता है. इसके सेवन से ७० साल का बूढा भी अपने आपको २१ साल का ताकतवर नौजवान समझने लगते हैं. इसका इस्तेमाल वे लोग भी करते हैं जो शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं . ऐसे लोगों का सोचना है की हमेशा के लिए अगर यौवन को सभालना है तो अभी से उपाय करना ही बुद्धिमता है. कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनका वैवाहिक जीवन सिर्फ इसलिए उजड गया क्योंकि वे पत्नी को उस तरह का जिस्मानी सुख नहीं दे सकते थे, जिसकी वाह ख्वाहिश रखती थी. अब वे लोग विगोरा हाई पावर का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलते. विगोरा हाई पावर की सबसे बड़ी खासियत ये है की जो कोई इसका सेवन करता है उसे खाने की आदत नहीं पड़ती . सिर्फ तीन बोतल का कोर्स ही हमेशा के लिए काफी होता है. इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता. आज हजारों लोग विगोरा हाई पावर की वजह से सुखी, संतुष्ट और खुशहाल जीवन बिता रहे हैं. अगर आप भी अपने क़दमों में खुशिया चाहते हैं. मौज , मस्ती, शक्ति चाहते हैं तो विगोरा हाई पावर से बेहतर और क्या विकल्प हो सकता है
विवाहित जीवन बने खुशहाल http://replpharma.com/images/Vigoura_Hy_Power.jpg
आर ई पी एल की प्रसिद्द होम्योपैथिक दवा विगोरा हाई पावर के सेवन से लोगों के विवाहित जीवन में खुशहाली आ गयी है. जो लोग बिस्तर पर अपनी पत्नी को सम्पूर्ण संतुष्टि नहीं दे सकते ऐसे लोगों के लिए विगोरा हाई पावर आशा की नई किरण बनकर उभरी है. सबसे भरोसेमंद और असरकारक दवा के रूप में विगोरा हाई पावर का शुमार होता है. कुछ लोग सिर्फ वादे करते हैं , मगर विगोरा हाई पावर सच्चा काम करता है. इसके सेवन से ७० साल का बूढा भी अपने आपको २१ साल का ताकतवर नौजवान समझने लगते हैं. इसका इस्तेमाल वे लोग भी करते हैं जो शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं . ऐसे लोगों का सोचना है की हमेशा के लिए अगर यौवन को सभालना है तो अभी से उपाय करना ही बुद्धिमता है. कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनका वैवाहिक जीवन सिर्फ इसलिए उजड गया क्योंकि वे पत्नी को उस तरह का जिस्मानी सुख नहीं दे सकते थे, जिसकी वाह ख्वाहिश रखती थी. अब वे लोग विगोरा हाई पावर का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलते. विगोरा हाई पावर की सबसे बड़ी खासियत ये है की जो कोई इसका सेवन करता है उसे खाने की आदत नहीं पड़ती . सिर्फ तीन बोतल का कोर्स ही हमेशा के लिए काफी होता है. इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता. आज हजारों लोग विगोरा हाई पावर की वजह से सुखी, संतुष्ट और खुशहाल जीवन बिता रहे हैं. अगर आप भी अपने क़दमों में खुशिया चाहते हैं. मौज , मस्ती, शक्ति चाहते हैं तो विगोरा हाई पावर से बेहतर और क्या विकल्प हो सकता है
गया के समाजसेवक मुंबई में
मुंबई, रानी आयुर्वेद कंपनी के मालिक और सुप्रसिद्ध समाजसेवक श्री सूर्यप्रकाश आजकल मुंबई के दौरे पर हैं. समाजसेवा के कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले सूर्यप्रकाश जी कई वर्षों से आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, उनके मुंबई आगमन पर मल्टी प्लस इण्डिया के राजीव चौधरी , राष्ट्रीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष और मुंबई संध्या के कार्यकारी संपादक मुकेश कुमार मासूम , साहित्यकार शिवपूजन पाण्डेय, डॉक्टर डी जे सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने सूर्या प्रकाश जी का स्वागत किया. आयुर्वेद जगत से जुडी हस्तियों से मुलाक़ात के बाद सूर्या प्रकाश जी गया के लिए रवाना होंगे
मुंबई, रानी आयुर्वेद कंपनी के मालिक और सुप्रसिद्ध समाजसेवक श्री सूर्यप्रकाश आजकल मुंबई के दौरे पर हैं. समाजसेवा के कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले सूर्यप्रकाश जी कई वर्षों से आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, उनके मुंबई आगमन पर मल्टी प्लस इण्डिया के राजीव चौधरी , राष्ट्रीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष और मुंबई संध्या के कार्यकारी संपादक मुकेश कुमार मासूम , साहित्यकार शिवपूजन पाण्डेय, डॉक्टर डी जे सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने सूर्या प्रकाश जी का स्वागत किया. आयुर्वेद जगत से जुडी हस्तियों से मुलाक़ात के बाद सूर्या प्रकाश जी गया के लिए रवाना होंगे
बाबा का चेला निकला चीटर

वाराणसी। योग गुरु बाबा रामदेव के निकट सहयोगी आचार्य बालकृष्ण फर्जी पासपोर्ट मामले में और फंसते जा रहे हैं। उन्होंने पासपोर्ट के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के जिन प्रमाण पत्रों का सहारा लिया वे फर्जी हैं।
गायब दस्तावेजों के बारे में पड़ताल
सीबीआई द्वारा कराए गए सत्यापन में स्पष्ट हो गया कि जिन अनुक्रमांकों से पूर्व मध्यमा और शास्त्री के प्रमाण पत्र जारी कराए गए हैं वे बुलंदशहर के एक संस्कृत महाविद्यालय के दो छात्रों के नाम के हैं। उधर, आचार्य बालकृष्ण के पासपोर्ट संबंधी मामले की जांच कर रही हरिद्वार पुलिस ने निगम पहुंचकर कार्यालय से गायब दस्तावेजों के बारे में पड़ताल शुरू की। जिन कर्मियों के पास जन्म और मृत्यु कार्यालय का दायित्व रहा है उनसे भी पूछताछ की गई।
फर्जी करार दी गई शास्त्री की डिग्री
बालकृष्ण के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच के सिलसिले में दिल्ली से सीबीआई इंस्पेक्टर योगेंद्र सिंह शुक्रवार की सुबह विवि पहुंचे। उन्होंने कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र से मुलाकात की। कुलपति ने कुल सचिव डा. रजनीश कुमार शुक्ल और जांच समिति के सदस्य डा. सूर्यकांत यादव को प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए निर्देशित किया। करीब डेढ़ घंटे तक विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद बालकृष्ण के नाम से वर्ष 1991 में पूर्व मध्यमा और वर्ष 1996 में जारी शास्त्री की डिग्री फर्जी करार दी गई।
पासपोर्ट बनवाने में किया उपयोग
जिन अनुक्रमांकों से बालकृष्ण की पूर्व मध्यमा और शास्त्री की डिग्रियां हैं वे बुलंदशहर के राधाकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से बनवाई गई हैं। इन अनुक्रमांकों के आगे दो अलग-अलग छात्रों के नाम विश्वविद्यालय के अभिलेख में दर्ज हैं। सीबीआई इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन के लिए उपलब्ध कराई गई डिग्रियों पर बरेली के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की मुहर भी लगी है। इससे साफ है कि इन प्रमाण पत्रों का उपयोग पासपोर्ट बनवाने में किया गया। कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया कि दोनों ही डिग्रियां विश्वविद्यालय द्वारा निर्गत नहीं हैं
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ और अभिनेता ऋतिक रौशन को अपनी फिल्म "जिंदगी ना मिलेगी दोबारा" के प्रमोशन के लिए मुंबई की सड़कों पर खुलेआम बाइकिंग का आनंद लेना महंगा पड़ सकता है। फिल्मसिटी में शुक्रवार को बॉलीवुड की बॉर्बी डॉल कैटरीना ने फिल्म के प्रमोशन के लिए बाइक पर ऋतिक को बिठाकर घुमाया था। इस घटना को लेकर कैट और ऋतिक पर ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया जा रहा है।
कैट ने रॉयल इनफिल्ड मोटरसाइकिल पर ऋतिक को मुंबई की सड़कों के चक्कर लगवाए थे। सूत्रों की मानें तो कैट के पास बाइक चलाने का लाइसेंस नहीं है। इतना ही नहीं, बाइक राइडिंग के दौरान न तो कैटरीना ने और न ही ऋतिक ने ही हैलमेट पहन रखा था, जबकि ट्रैफिक नियमों केेेे अनुसार मुंबई में बाइक चलाने वालेेे और उसके साथ बैठे यात्री दोनों के लिए ही हैलमेट जरूरी है। हालांकि, कैट के एक करीबी दोस्त का कहना है कि कैटरीना के पास बाइक चलाने का इंटरनेशनल और नेशनल दोनों लाइसेंस मौजूद है। इसलिए कैट ने फिल्म में भी बाइक चलाई थी।
एक ट्रैफिक अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर कहा है कि - सेलिब्रिटीज आम इंसान के रोल मॉडल होते हैं। यदि वो ही इस तरह कानून तोड़ेंगे, तो आम लोगों को कानून न तोड़ने के लिए कौन प्रेरित करेगा। इसलिया ऎसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुल पनाग ने दिल्ली में बिना हैलमेट पहने बाइक चलाई थी। हालांकि, कानून तोड़ने पर उन्हें जुर्माना भरना पड़ा था।

ओस्लो. यूरोपीय देश नॉर्वे में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले में 91 जानें चली गई हैं। शुक्रवार की रात हुई दो वारदात ने नॉर्वे को दहला दिया।
शुक्रवार की रात (भारतीय समयानुसार) सबसे पहले धमाका ओस्लो के सिटी सेंटर में मौजूद एक 17 मंजिली इमारत के पास हुआ। इस इमारत में नॉर्वे के प्रधानमंत्री का दफ्तर है। धमाके में 7 लोग मारे गए। धमाका इतना जबर्दस्त था कि इमारत की सब खि़ड़कियां टूट गईं। सेना ने सिटी सेंटर को अपने कब्जे में ले लिया।
इस धमाके के करीब दो घंटे बाद ओस्लो से करीब 40 किलोमीटर दूर उटोया द्वीप में चल रहे युवा राजनीतिक कॉन्फ्रेंस को निशाना बनाया गया। एक बंदूकधारी पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचा और उसने अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हमलावर के हाथ में पिस्तौल और टेलीस्कोप लगी राइफल देखी गई। गोलीबारी में 84 लोगों की मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक हमलों के सिलसिले में नॉर्वे के ही एक 32 साल के शख्स को गोलीबारी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसकी पहचान एंडर्स बेहरिंग ब्रीवीक के तौर पर की गई है। पुलिस का कहना है कि धमाके की जगह और जहां गोलीबारी हुई, दोनों जगहों पर इस शख्स को देखा गया। हालांकि, पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि ब्रीवीक का किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन से संबंध हो सकता है।
नॉर्वे में ये हमले किसने किए, इसे लेकर अभी तक कुछ ठोस पता नहीं चला है। हमले को विदेश में नॉर्वे की सेना की सक्रियता के बदले की कार्रवाई के रूप में भी देखा जा रहा है। नॉर्वे की वायुसेना के 6 एफ16 लड़ाकू विमान पिछले महीने तक भी लीबियामें सरकार विरोधी कार्रवाई में लगे थे। हालांकि इसकी संभावना कम ही है कि कर्नल गद्दाफी या उनके समर्थक नॉर्वे में इतना बड़ा हमला करवा सकते हैं।
नॉर्वे ने अफगानिस्तान में 500 सैनिक लगा रखे हैं। नॉर्वे के तीन अखबारों ने 2005-06 में मुहम्मद साहब का काटूर्न छाप कर मुस्लिम कट्टरपंथियों को खासा नाराज किया था। हमलों के कारण को इन बातों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है।
हमले में अल कायदा का भी हाथ देखा जा रहा है, क्योंकि इस आतंकी संगठन ने पहले नॉर्वे में हमलों को लेकर सक्रियता दिखाई है। 2010 में नॉर्वे के तीन नागरिकों को आतंकी हमलों की साजिश रचने के सिलसिले में पकड़ा गया था। इनमें से एक को अल कायदा से विस्फोट करने की ट्रेनिंग मिली हुई थी। इन तीन में से एक शख्स ने तो वैसे ही बम तैयार करने की कोशिश की थी, जैसे बम का इस्तेमाल 2009 में न्यूयार्क सबवे को दहलाने की कोशिश और लंदन के 7/7 धमाकों के लिए इस्तेमाल किए गए थे।
हमले का पाकिस्तान से अभी तक कोई सीधा संबंध तो नहीं जुड़ा है, लेकिन एक पाकिस्तानपरस्त वेबसाइट ने हमले के तत्काल बाद यह मुद्दा उठा दिया। इसमें वेबसाइट ने कहा कि पाकिस्तान नॉर्वे में हुए जनसंहार को उससे जोड़ने की किसी भी अमेरिकी मुहिम का विरोध करेगा। पाकिस्तानकाखुदाहाफिज.कॉम नाम के वेबसाइट पर कहा गया है कि ओस्लो में आतंकी हमला अफगान युद्ध जारी रखने के समर्थक अमेरिकियों के लिए वरदान के रूप में है। जुलाई, 2010 में सीआईए पर ओस्लो में चीनी ठिकाने उड़ाने की साजिश रचने का शक है। वेबसाइट पर लेख के मुताबिक जर्मनी में सीआईए दफ्तर की ओर से इस हमले की योजना बनाई गई थी और चीनी मुसलमानों की भर्ती कर इसे अंजाम दिया जाना था, लेकिन नॉर्वे के कड़े आतंकविरोधी उपायों के चलते यह नाकाम हो गया।
पाकिस्तान को दुनिया में मौजूद खतरों से आगाह कराने वाले, नीति निर्धारक समाचार वेबसाइट होने का दावा करने वाले पाकिस्तानकाखुदाहाफिज.कॉम ने तो यहां तक कहा है कि अमेरिका, भारत के साथ मिल कर पाकिस्तान के हितों पर चोट करने की योजना बनाता रहा है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका में कुछ लीक हुए दस्तावेज या सूत्र के हवाले से नॉर्वे में हुए आतंकी हमले को पाकिस्तान के अल कायदा आतंकियों से जोड़ेगा, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित होगा।
क्यों हुए हमले
यूरोपीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक नॉर्वे में हुए दो हमलों के पीछे तीन संभावित वजहें हो सकती हैं। अफगानिस्तान में अमेरिका की अगुवाई में नाटो सेनाएं तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में जंग लड़ रही हैं। नाटो सेना में नॉर्वे के सैनिक भी शामिल हैं जो अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ रहे हैं। नॉर्वे नाटो के संस्थापक देशों में से एक है। तालिबान और अल कायदा का गठजोड़ जगजाहिर है। यही वजह है कि जानकार मानते हैं कि मई में ओसामा की हत्या के बाद बदला लेने की ताक में अल कायदा नॉर्वे पर हुए हमले के पीछे हो सकता है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों को यह शक भी है कि पिछले साल नॉर्वे के एक अखबार ने कुछ कार्टून छापे थे, जिन्हें इस्लाम के खिलाफ माना गया था। इससे कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क गए थे। वहीं, कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि नॉर्वे पर हुए हमले वहां के प्रधानमंत्री जेन्स स्टॉल्टेनबर्ग की अगुवाई वाली उदार सरकार को गिराने की साजिश भी हो सकती है।

नगीना बिजनौर। नगीना क्षेत्र के ग्राम काजीवाला निवासी एक विवाहित व्यक्ति की लगभग 12 वर्ष पहले जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। परिजन उसे खो नदी के समीप दफना आये थे। पर शुक्रवार को बारह साल बाद वह अपने घर आ पहुंचा। उसके घर आने से जहां घर में खुशी है वहीं परिजन इस बात पर विश्वास भी नहीं कर पा रहे हैं।
ग्राम काजीवाला निवासी तुलाराम हरिजन के पांच पुत्रों व तीन पुत्रियों में सबसे बडे़ पुत्र डालचंद (पप्पू) को 9 जून 1999 की रात घर में ही सोते समय जहरीले सांप ने डस लिया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने उसे हजारों ग्रामीणों के साथ समीप खो नदी के निकट दफना दिया था। शुक्रवार की देर शाम डालचंद उर्फ पप्पू अपने गुरु के साथ घर पहुंचा तो परिजन भौचक्के रह गये। सभी ने डालचंद को पहचानते हुए गले से लगा लिया। खबर आसपास के क्षेत्रों में फैली तो हजारों की तादात में लोग उसके घर जा पहुंचे।
डालचंद उर्फ पप्पू के साथ आए उसके गुरु रमेशनाथ निवासी ग्राम गढवासा जिला बुलंदशहर ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व वह खो नदी के किनारे सांप व जड़ी-बूटियों की तलाश कर रहे थे। तभी उन्होंने पानी के किनारे झाड़ियों में एक लाश फंसी देखी, जिसे देखकर उन्हें लगा कि इसकी मौत सांप के काटने से हुई है। वह उसे उठाकर अपने डेरे पर ले गये, जहां मंत्रों व जड़ी-बूटियों से उपचार के बाद वह जीवित हो गया। तीन दिन पूर्व वह ग्राम गुनियाखेड़ा थाना नूरपुर में भिक्षा मांग रहे थे तभी वहां खड़ी एक महिला ने पप्पू को पहचान लिया। पप्पू ने भी उसे पहचान लिया तथा वहां इकट्ठा हुए ग्रामीणों को बताया कि यह मेरी ममेरी बहन है।
डालचंद पप्पू की बड़ी पुत्री मोनी की शादी भी गुनियाखेड़ी ग्राम में ही हुई थी। मोनी को जब बुलाया गया तो उसने भी पहचान लिया। तभी रानी ने ग्राम काजीवाला खबर दी। खबर सुनते ही पप्पू की माता मुन्नी, पत्नी निर्मला, भाई दीपचंद व अतर सिंह ग्राम गुनियाखेड़ी पहुंचे जहां सभी ने पप्पू को पहचान लिया।
भारत से
मुंबई विस्फोट : मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हुई
मुंबई में 13 जुलाई को हुए तीन सिलसिलेवार विस्फोटों के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। विस्फोट में घायल एक व्यक्ति ने यहां जे जे अस्पताल में दम तोड़ दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, जवेरी बाजार में हुए विस्फोट के कारण सुरेंद्र सिंह (30) का शरीर काफी जल गया था। उनकी सुबह मौत हो गई।
सूत्रों के मुताबिक, जेजे अस्पताल में विस्फोटों के बाद भर्ती जिन 22 अन्य लोगों का इलाज किया जा रहा है, उनमें से आठ की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। ओपरा हाउस में हुए विस्फोट के बाद सिर में चोट लगने से गंभीर रूप से घायल हुए श्रीपाल मुझापुरा (35) की हरकिशनदास अस्पताल में शुक्रवार को मौत हो गई। इस अस्पताल में भर्ती 12 घायलों में से पांच की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। इन विस्फोटों में कुल 129 लोग घायल हुए थे जबकि अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है।
मुंबई विस्फोट : मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हुई
मुंबई में 13 जुलाई को हुए तीन सिलसिलेवार विस्फोटों के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। विस्फोट में घायल एक व्यक्ति ने यहां जे जे अस्पताल में दम तोड़ दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, जवेरी बाजार में हुए विस्फोट के कारण सुरेंद्र सिंह (30) का शरीर काफी जल गया था। उनकी सुबह मौत हो गई।
सूत्रों के मुताबिक, जेजे अस्पताल में विस्फोटों के बाद भर्ती जिन 22 अन्य लोगों का इलाज किया जा रहा है, उनमें से आठ की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। ओपरा हाउस में हुए विस्फोट के बाद सिर में चोट लगने से गंभीर रूप से घायल हुए श्रीपाल मुझापुरा (35) की हरकिशनदास अस्पताल में शुक्रवार को मौत हो गई। इस अस्पताल में भर्ती 12 घायलों में से पांच की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। इन विस्फोटों में कुल 129 लोग घायल हुए थे जबकि अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है।
Friday, July 22, 2011
हुक्का ही तो पीया , डाका तो नहीं डाला ..........गिरफ्तार युवाओं का सवाल
हुक्का ही तो पीया , डाका तो नहीं डाला ..........गिरफ्तार युवाओं का सवाल
मुंबई। मुंबई में एक बार में हुक्का पीना कुछ नौजवानों को भारी पड़ गया। हुक्का पीने की वजह से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के इशारे पर पुलिस की छापेमारी हुई और कई युवक-युवतियों को हिरासत में ले लिया गया। हुक्का पीना सेहत के लिए नुकसानदायक है इसमें कोई शक नहीं लेकिन हुक्का पीना कोई जुर्म नहीं है बशर्ते उसे सार्वजनिक जगह पर या वहां पिया जाए जहां पीने की इजाजत नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि गलत तरीके से बार चलाने वाले पर कार्रवाई हो या फिर बार में उसकी सेवा लेने वालों पर।
ये मामला मुंबई के मुलुंड इलाके का है। बार का नाम है शीतल-समुद्र। भारतीय युवा मोर्चा की शिकायत के बाद पुलिस ने इस बार में अचानक छापा मारा और यहां से 11 लड़कों और 19 लड़कियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने के बाद इन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए भेज दिया गया। फुर्सत के लम्हों में बेफिक्री के कुछ पल बिताने वाले नौजवानों को हिरासत में लिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं:-
हुक्का ही तो पिया है, डाका तो नहीं डाला-चोरी तो नहीं की है!
-क्या हुक्का पीना कानून का उल्लंघन है?
-अगर नहीं तो इन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?
-अगर रेस्तरां में गैरकानूनी तरीके से हुक्का रखा गया था तो ये किसकी गलती है?
-रेस्तरां मालिक और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नौजवानों पर कार्रवाई क्यों की गई?
-क्या अब पुलिस नैतिकता के ठेकेदारों के इशारे पर काम करेगी?
बीजेपी कार्यकर्ताओं का दावा है कि गैरकानूनी तरीके से यहां हुक्का पिलाया जा रहा था। यही नहीं, हुक्का पीने वालों में नाबालिग तक थे। अपनी बात साबित करने के लिए उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन का भी दावा किया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हुक्के से सेहत को नुकसान को देखते हुए सार्वजनिक जगहों पर हुक्का पिलाने पर पाबंदी लगा रखी है। इसके बाद से होटल और रेस्तरां में हुक्का बार पर रोक लगी है। कोर्ट के आदेश के बाद केवल हुक्का बार के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत है।
सवाल उठता है कि अगर इस रेस्तरां के पास हुक्का बार चलाने का लाइसेंस नहीं था तो ये रेस्तरां चलाने वालों की गलती है फिर इसकी सजा हुक्का पीने वालों को क्यों दी गई? गलत तरीके से हुक्का बार चलाने वालों पर पुलिस ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की? पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं के हंगामे का इंतजार क्यों करती रही?
सिगरेट से ज्यादा नुकसानदायक है हुक्का
हुक्का पीने वाले तर्क देते हैं कि इसमें धुआं पानी से फिल्टर होकर आता है, इसलिए सारे नुकसानदायक तत्व पानी में घुलकर छन जाते हैं। इसलिए उन्हें ये सिगरेट की तुलना में कम खतरनाक लगता है लेकिन जानकारों के मुताबिक हुक्के में पानी होता है, इसलिए इसे ज्यादा जोर लगाकर खींचना पड़ता है और उतनी ही जोर से धुआं भी अंदर जाता है इसीलिए नुकसान भी ज्यादा होता है। इससे ज्यादा निकोटिन और कार्सिनोजेंस फेफड़े में जाती है।
सिगरेट की तुलना में हुक्का के धुएं में आर्सेनिक, लेड और निकेल जैसी जहरीली धातुओं का स्तर ज्यादा होता है। चूंकि हुक्का लंबे समय तक और ज्यादा दम लगाकर पिया जाता है, इसलिए ये खतरे बढ़ जाते हैं। हुक्का पीने से मुंह, फेफड़े और पेट का कैंसर, दिल के रोग और दांतों की बीमारियों का खतरा रहता है।
एक घंटे तक हुक्का गुड़गुड़ाने पर 100 से 200 सिगरेट के बराबर धुआं फेफड़ों तक पहुंच जाता है यानी सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाली तमाम बीमारियां हुक्के से भी होती हैं। इतना ही नहीं एक ही माउथपीस के इस्तेमाल से कई संक्रामक रोग फैल सकते हैं।
मुंबई। मुंबई में एक बार में हुक्का पीना कुछ नौजवानों को भारी पड़ गया। हुक्का पीने की वजह से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के इशारे पर पुलिस की छापेमारी हुई और कई युवक-युवतियों को हिरासत में ले लिया गया। हुक्का पीना सेहत के लिए नुकसानदायक है इसमें कोई शक नहीं लेकिन हुक्का पीना कोई जुर्म नहीं है बशर्ते उसे सार्वजनिक जगह पर या वहां पिया जाए जहां पीने की इजाजत नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि गलत तरीके से बार चलाने वाले पर कार्रवाई हो या फिर बार में उसकी सेवा लेने वालों पर।
ये मामला मुंबई के मुलुंड इलाके का है। बार का नाम है शीतल-समुद्र। भारतीय युवा मोर्चा की शिकायत के बाद पुलिस ने इस बार में अचानक छापा मारा और यहां से 11 लड़कों और 19 लड़कियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने के बाद इन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए भेज दिया गया। फुर्सत के लम्हों में बेफिक्री के कुछ पल बिताने वाले नौजवानों को हिरासत में लिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं:-
हुक्का ही तो पिया है, डाका तो नहीं डाला-चोरी तो नहीं की है!
-क्या हुक्का पीना कानून का उल्लंघन है?
-अगर नहीं तो इन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?
-अगर रेस्तरां में गैरकानूनी तरीके से हुक्का रखा गया था तो ये किसकी गलती है?
-रेस्तरां मालिक और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नौजवानों पर कार्रवाई क्यों की गई?
-क्या अब पुलिस नैतिकता के ठेकेदारों के इशारे पर काम करेगी?
बीजेपी कार्यकर्ताओं का दावा है कि गैरकानूनी तरीके से यहां हुक्का पिलाया जा रहा था। यही नहीं, हुक्का पीने वालों में नाबालिग तक थे। अपनी बात साबित करने के लिए उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन का भी दावा किया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हुक्के से सेहत को नुकसान को देखते हुए सार्वजनिक जगहों पर हुक्का पिलाने पर पाबंदी लगा रखी है। इसके बाद से होटल और रेस्तरां में हुक्का बार पर रोक लगी है। कोर्ट के आदेश के बाद केवल हुक्का बार के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत है।
सवाल उठता है कि अगर इस रेस्तरां के पास हुक्का बार चलाने का लाइसेंस नहीं था तो ये रेस्तरां चलाने वालों की गलती है फिर इसकी सजा हुक्का पीने वालों को क्यों दी गई? गलत तरीके से हुक्का बार चलाने वालों पर पुलिस ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की? पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं के हंगामे का इंतजार क्यों करती रही?
सिगरेट से ज्यादा नुकसानदायक है हुक्का
हुक्का पीने वाले तर्क देते हैं कि इसमें धुआं पानी से फिल्टर होकर आता है, इसलिए सारे नुकसानदायक तत्व पानी में घुलकर छन जाते हैं। इसलिए उन्हें ये सिगरेट की तुलना में कम खतरनाक लगता है लेकिन जानकारों के मुताबिक हुक्के में पानी होता है, इसलिए इसे ज्यादा जोर लगाकर खींचना पड़ता है और उतनी ही जोर से धुआं भी अंदर जाता है इसीलिए नुकसान भी ज्यादा होता है। इससे ज्यादा निकोटिन और कार्सिनोजेंस फेफड़े में जाती है।
सिगरेट की तुलना में हुक्का के धुएं में आर्सेनिक, लेड और निकेल जैसी जहरीली धातुओं का स्तर ज्यादा होता है। चूंकि हुक्का लंबे समय तक और ज्यादा दम लगाकर पिया जाता है, इसलिए ये खतरे बढ़ जाते हैं। हुक्का पीने से मुंह, फेफड़े और पेट का कैंसर, दिल के रोग और दांतों की बीमारियों का खतरा रहता है।
एक घंटे तक हुक्का गुड़गुड़ाने पर 100 से 200 सिगरेट के बराबर धुआं फेफड़ों तक पहुंच जाता है यानी सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाली तमाम बीमारियां हुक्के से भी होती हैं। इतना ही नहीं एक ही माउथपीस के इस्तेमाल से कई संक्रामक रोग फैल सकते हैं।

तेलंगाना संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) द्वारा दिनभर के बंद से हैदराबाद सहित राज्य के अन्य नौ जिलों में जन-जीवन प्रभावित रहा। आंध्र प्रदेश सड़क परिवहन निगम की बसें नहीं चलीं। दुकानें व शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। जेएसी ने बंद का आयोजन सरकार के उस निर्णय के विरोध में किया है, जिसके तहत उसने तेलंगाना नेताओं को एम. यदी रेड्डी को श्रद्धांजलि देने की अनुमति नही दी। रेड्डी ने बुधवार को नई दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी।
रेड्डी का शव गुरुवार रात दिल्ली से यहां लाया गया था। शव को एम्बुलेंस से उनके पैतृक गांव पेडामंगलम ले जाया गया। पुलिस ने रेड्डी के शव की अगवानी करने हवाईअड्डे जा रहे तमाम तेलंगाना समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया था। जेएसी, राज्य कर्मचारियों के हड़ताल करने के अधिकार का हनन करने की सरकार की कोशिशों का भी विरोध कर रही है।
शैक्षणिक संस्थान, दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान शुक्रवार को बंद हैं। राजधानी में बंद की हिंसक शुरुआत हुई, और प्रदर्शनकारियों ने तड़के शहर के बाहरी हिस्सों में लगभग 20 बसों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप निगम ने अपनी सभी सेवाएं स्थगित कर दी।
पुलिस ने कहा कि गुंटूर से यहां आ रही बसों के चालकों व परिचालकों को प्रदर्शनकारियों द्वारा एल.बी. नगर में किए गए पथराव से चोटें आई हैं। सिकंदराबाद के बावनपल्ली में आठ बसें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि जीदिमेटला में प्रदर्शनकारियों ने एक निजी वाहन को निशाना बनाया। बंद के कारण बसों की शहरी सेवाएं भी स्थगित कर दी गई हैं, जिसके कारण नागरिकों को भारी असुविधा हो रही है।
बसें डिपो से बाहर नहीं निकलीं, क्योंकि परिवहन निगम के कर्मचारी भी बंद में शामिल हो गए हैं। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं व विद्यार्थियों के साथ डिपो के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
एहतियात के तौर पर शुक्रवार को सभी स्कूलों व कॉलेजों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया गया है। पेट्रोल पंप और दुकानें भी बंद हैं। तेलंगाना में इस महीने यह दूसरा बंद है। इसके पहले पांच-छह जुलाई को दो दिनों का बंद आयोजित किया गया था।
भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब डेढ़ करोड मतदाताओं के नाम सूची से गायब है. मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने राज्य में आगामी विधान सभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी.
उन्होंने कहा, ‘‘इन डेढ़ करोड़ मतदाताओं को खोज कर उनके नाम मतदाता सूची में डालना आयोग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. भारत में औसतन 61 फ़ीसदी आबादी 18 वर्ष की उम्र से ऊपर है. उत्तर प्रदेश में यह औसत केवल 54 फ़ीसदी पाया गया है. ’’
अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया है कि अधिकारियों के राजनीतिकरण की शिकायत खत्म हो जानी चाहिए और निष्पक्षता के साथ समझौता नहीं हो सकता.
एसवाई क़ुरैशी
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि मतदाताओं को जागरुक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. इसके अंतर्गत मोबाइल गाडियां चलाई जाएँगी जिनमें वोटर बनने के फ़ॉर्म भी होंगे.
इसी तरह लोगों को अधिक से अधिक संख्या में वोट डालने के लिए प्रेरित करने वाले अभियान टीवी चैनलों के माध्यम से चलाए जाएँगे.
इस तरह का पहला टीवी प्रचार अभियान क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी से शुरू कराया गया है. आयोग धोनी के अलावा स्थानीय लोकप्रिय कलाकारों को भी चुनाव आयोग का ब्रांड अम्बेसडर बनाएगा.
कब होंगे चुनाव
एसवाई कुरैशी और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारी विधान सभा चुनाव की तैयारियों के लिए दो दिन के लिए लखनऊ के दौरे पर आए थे.
इस दरम्यान आयोग ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश के सभी आठ प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की. इसके बाद आयोग ने ज़िला मजिस्ट्रेटों और मंडलायुक्तों के साथ बैठक की.
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि राज्य में नौकरशाही का राजनीतिकरण हो गया है. कुरैशी के अनुसार आयोग ने राजनीतिक दलों की इस चिंता को नोट किया है.
उन्होंने बताया कि अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया है कि अधिकारियों के राजनीतिकरण की शिकायत खत्म हो जानी चाहिए और निष्पक्षता के साथ समझौता नहीं हो सकता.
लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त इस सवाल का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके कि राज्य में चुनाव होंगे कब.
विधान सभा का कार्यकाल मई 2012 में खत्म हो रहा है. एसवाई कुरैशी ने बताया कि दो राजनीतिक दलों ने जनवरी - फ़रवरी में चुनाव कराने का सुझाव दिया है. इन दलों का कहना है कि अप्रैल मई में गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है और कई तरह की परीक्षाएं होती हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि चुनाव का समय तय करने से पहले आयोग उन सभी पांच राज्यों का दौरा करेगा जहाँ अगले साल चुनाव होने हैं. उसके बाद ही तारीखें तय होंगी
उन्होंने कहा, ‘‘इन डेढ़ करोड़ मतदाताओं को खोज कर उनके नाम मतदाता सूची में डालना आयोग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. भारत में औसतन 61 फ़ीसदी आबादी 18 वर्ष की उम्र से ऊपर है. उत्तर प्रदेश में यह औसत केवल 54 फ़ीसदी पाया गया है. ’’
अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया है कि अधिकारियों के राजनीतिकरण की शिकायत खत्म हो जानी चाहिए और निष्पक्षता के साथ समझौता नहीं हो सकता.
एसवाई क़ुरैशी
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि मतदाताओं को जागरुक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. इसके अंतर्गत मोबाइल गाडियां चलाई जाएँगी जिनमें वोटर बनने के फ़ॉर्म भी होंगे.
इसी तरह लोगों को अधिक से अधिक संख्या में वोट डालने के लिए प्रेरित करने वाले अभियान टीवी चैनलों के माध्यम से चलाए जाएँगे.
इस तरह का पहला टीवी प्रचार अभियान क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी से शुरू कराया गया है. आयोग धोनी के अलावा स्थानीय लोकप्रिय कलाकारों को भी चुनाव आयोग का ब्रांड अम्बेसडर बनाएगा.
कब होंगे चुनाव
एसवाई कुरैशी और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारी विधान सभा चुनाव की तैयारियों के लिए दो दिन के लिए लखनऊ के दौरे पर आए थे.
इस दरम्यान आयोग ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश के सभी आठ प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की. इसके बाद आयोग ने ज़िला मजिस्ट्रेटों और मंडलायुक्तों के साथ बैठक की.
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि राज्य में नौकरशाही का राजनीतिकरण हो गया है. कुरैशी के अनुसार आयोग ने राजनीतिक दलों की इस चिंता को नोट किया है.
उन्होंने बताया कि अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया है कि अधिकारियों के राजनीतिकरण की शिकायत खत्म हो जानी चाहिए और निष्पक्षता के साथ समझौता नहीं हो सकता.
लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त इस सवाल का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके कि राज्य में चुनाव होंगे कब.
विधान सभा का कार्यकाल मई 2012 में खत्म हो रहा है. एसवाई कुरैशी ने बताया कि दो राजनीतिक दलों ने जनवरी - फ़रवरी में चुनाव कराने का सुझाव दिया है. इन दलों का कहना है कि अप्रैल मई में गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है और कई तरह की परीक्षाएं होती हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि चुनाव का समय तय करने से पहले आयोग उन सभी पांच राज्यों का दौरा करेगा जहाँ अगले साल चुनाव होने हैं. उसके बाद ही तारीखें तय होंगी
मुंबई. बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम और बिपाशा बसु के बीच १० साल पुराने संबंध टूटने का अहम कारण अब सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार बिपाशा ने इस बार जॉन को शादी करने का अल्टिमेटम दिया था और उनके नकारने पर बिपाशा ने संबंध तोड़ लिए। हालांकि जॉन को अभी भी बिपाशा के लौटने का इंतजार है। जॉन अपनी तरफ से सुलह सफाई की पूरी कोशिश कर रहे हैं और हाल ही में सिमी ग्रेवाल के एक टीवी शो में उन्होंने विस्तार से बताया था कि बिपाशा का उनके जीवन में कितना महत्व है। जॉन मान रहे थे कि इससे बिपाशा प्रभावित होंगीं, लेकिन शो की एडिटिंग में पूरा विवरण कट गया। इससे वे काफी दुखी हैं।
जॉन को उम्मीद नहीं थी कि शादी का इंकार इस बार उनको इतना भारी पड़ने वाला है। वे पहले भी बिपाशा की शादी करने की मांग को ठुकरा चुके थे और इस बार भी उन्होंने इससे इंकार किया। लेकिन इस बार बिपाशा काफी गंभीर थीं और इंकार के बाद उन्होंने जॉन का घर छोड़ना उचित समझा। जॉन ने सिमी ग्रेवाल शो को शूट होने के बाद कहा कि वे बिपाशा के बारे में कहे गए एपिसोड को फिर से शूट करवाना चाहते हैं।
जॉन के करीबी लोगों ने कहा कि पहले जान ने दोनों के बीच में संबंध टूटने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने फिर किए गए शूट में बताया कि कैसे बिपाशा उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। कैसे, जब वे कुछ नहीं थे, बिपाशा ने उनका साथ दिया था। जॉन मान रहे थे कि इससे बिपाशा का मन बदलेगा और वे वापस लौटने के बारे में सोचेंगीं, लेकिन शो में इस पर बुरी तरह से कैंची चलाई गई।
सिमी ग्रेवाल ने कहा कि तकनीकी रूप से यह काफी मुश्किल है कि एक हिस्से को फिर शूट कर उसे मूल शूट में जोड़ा जाए। लेकिन जॉन उनके अच्छे दोस्त हैं और इसीलिए उन्होंने ऐसा करना स्वीकार कर लिया। लेकिन समय की कमी के कारण जॉन ने जो भी कहा था, उसे एडिट करना पड़ा।
जॉन को उम्मीद नहीं थी कि शादी का इंकार इस बार उनको इतना भारी पड़ने वाला है। वे पहले भी बिपाशा की शादी करने की मांग को ठुकरा चुके थे और इस बार भी उन्होंने इससे इंकार किया। लेकिन इस बार बिपाशा काफी गंभीर थीं और इंकार के बाद उन्होंने जॉन का घर छोड़ना उचित समझा। जॉन ने सिमी ग्रेवाल शो को शूट होने के बाद कहा कि वे बिपाशा के बारे में कहे गए एपिसोड को फिर से शूट करवाना चाहते हैं।
जॉन के करीबी लोगों ने कहा कि पहले जान ने दोनों के बीच में संबंध टूटने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने फिर किए गए शूट में बताया कि कैसे बिपाशा उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। कैसे, जब वे कुछ नहीं थे, बिपाशा ने उनका साथ दिया था। जॉन मान रहे थे कि इससे बिपाशा का मन बदलेगा और वे वापस लौटने के बारे में सोचेंगीं, लेकिन शो में इस पर बुरी तरह से कैंची चलाई गई।
सिमी ग्रेवाल ने कहा कि तकनीकी रूप से यह काफी मुश्किल है कि एक हिस्से को फिर शूट कर उसे मूल शूट में जोड़ा जाए। लेकिन जॉन उनके अच्छे दोस्त हैं और इसीलिए उन्होंने ऐसा करना स्वीकार कर लिया। लेकिन समय की कमी के कारण जॉन ने जो भी कहा था, उसे एडिट करना पड़ा।

नई दिल्ली. नोट के बदले वोट कांड में आज दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पूर्व सपा नेता अमर सिंह से पूछताछ की। पूछताछ करीब सवा तीन घंटे तक चली जिसमें अमर सिंह से पुलिस ने करीब 12 सवालों के जवाब मांगे। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक पूछताछ के दौरान अमर सिंह ने संजीव सक्सेना और सुहेल हिंदुस्तानी द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी इस पूरे मामले में कोई भूमिका नहीं है।
क्राइम ब्रांच के अफसरों ने पूछा कि 'संजीव सक्सेना के साथ आपके क्या संबंध हैं? क्या सक्सेना को सांसदों के यहां आपका ड्राइवर लेकर गया था। पुलिस ने यह भी जानना चाहा कि क्या संजीव सक्सेना को आपने ही सांसदों से मिलवाया था? अमर सिंह ने क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से कहा कि वह संजीव को जानते हैं। वह उनकी किसी एक कंपनी में शायद काम करता है। लेकिन अमर सिंह ने कहा कि वह कभी भी मेरे खास लोगों में शामिल नहीं रहा है और न ही वह संजीव से कभी मिले हैं।
अमर सिंह से एक फोन नंबर को लेकर सवाल पूछा गया। इस नंबर से 22 जुलाई, 2008 को पैसे के लेन-देन को लेकर बात हुई थी। पुलिस यह जानना चाहती थी कि यह फोन नंबर किसका है और किसने इस नंबर से बात की थी। पुलिस ने अमर सिंह से यह भी जानना चाहा है कि क्या पैसों को लेनदेन में इस नंबर का प्रयोग हुआ या इस नंबर का पैसों के लेनदेन में क्या संबंध है?
इसके अलावा अमर सिंह से 10 बैंक खातों के नंबर के बारे में सवाल पूछे गए, जिनसे पैसे निकाले गए थे। अमर सिंह से संसद में लहराए गए नोटों के बारे में पूछा गया कि उनके अकाउंट नंबर क्या थे और वे किस बैंक से निकाले गए थे? इसके जवाब में अमर सिंह ने यही कहा कि उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं मालूम है। अमर सिंह ने यह भी कहा कि यह मामला तीन साल पुराना है, ऐसे में उन्हें बहुत सारी चीजें याद भी नहीं हैं।
सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह से एक प्रश्न सांसदों के संबंधों को लेकर था। उनसे पूछा गया कि नोट कांड से सांसदों के क्या संबंध थे? अमर सिंह से उनके ड्राइवर संजय के बारे में भी पूछताछ की गई। सूत्रों के मुताबिक अमर सिंह ने इस पूरे मामले में अपने को पाक साफ बताया है। अमर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने 2008 में विश्वासमत के दौरान बीजेपी के तीन सांसदों का वोट पाने के लिए उन्हें रिश्वत की राशि भेजी थी। सुहेल हिंदुस्तानी ने इससे पहले कहा था कि इस पूरे मामले में अमर सिंह मास्टर माइंड हैं।
सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच के अफसरों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अमर सिंह को पूछताछ के लिए दोबारा बुलाएंगे। तय कार्यक्रम के मुताबिक अमर सिंह करीब 11 बजे चाणक्यपुरी स्थित क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मीडियाकर्मियों ने कोई बात नहीं की।
इस बीच, इसी मामले में गिरफ्तार हो चुके सुहेल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना को पांच अगस्त तक न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। इससे पहले पुलिस ने इन दोनों को अदालत में पेश किया। अदालत जाते समय सुहेल ने मीडिया से बात करते हुए 'सत्य मेव जयते' के नारे लगाए और कहा कि उन्हें फंसाया जा रहा है।
अमर सिंह के खिलाफ सबूत!
उधर, एक टीवी चैनल की खबर के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने संजीव सक्सेना से अमर सिंह के रिश्ते साबित करने के लिए पुख्ता सुबूत जुटा लिए हैं। अमर सिंह यह कहते रहे हैं कि वह संजीव सक्सेना को नहीं जानते हैं। दिल्ली पुलिस ने विश्वास मत के दिन 22 जुलाई, 2008 को संजीव सक्सेना की तरफ से अमर सिंह के घर पर की गई छह टेलीफोन कॉल का ब्योरा निकलवाया है। गौर करने वाली बात है कि 22 जुलाई 2008 को यूपीए 1 की सरकार को संसद में विश्वास मत का सामना करना था।
इसके अलावा पुलिस के हाथ एक चिट्ठी भी लगी है जो अमर सिंह ने अपने आधिकारिक लेटर हेड पर दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े एक कॉलेज के प्रिंसिपल को लिखी थी। इस चिट्ठी में अमर सिंह ने साफ-साफ लिखा है कि संजीव सक्सेना उनके सचिव हैं। पुलिस कॉलेज में पढ़ने वाले संजीव सक्सेना के बेटे से जुड़े अन्य दस्तावेज भी खंगाल रही है ताकि अमर सिंह और संजीव सक्सेना के संबंधों पर और सुबूत इकट्ठा किए जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नोट के बदले वोट मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने सुहैल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना को गिरफ्तार कर उन्हें रिमांड पर लिया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता रह चुके सुहैल हिंदुस्तानी की इस डील में भूमिका बताई जा रही है। संजीव सक्सेना के पूर्व में अमर सिंह से रिश्ते रहे हैं और उसने ही एक करोड़ की रकम बीजेपी सांसद अशोक अर्गल के आवास 4 फिरोजशाह रोड पर पहुंचाई थी। सक्सेना जिस सफेद जिप्सी से बीजेपी सांसद अशोक अर्गल के घर पहुंचा था, वो कार मेसर्स पंकजा आर्ट एंड क्रेडिट के नाम रजिस्टर्ड है जो अमर सिंह की पारिवारिक कंपनी है। इस कंपनी का पता ग्रेटर कैलाश-2, ई-593 है जो अमर सिंह के निजी आवास का पता है। ये वे सारे सबूत हैं जो इस डील में अमर सिंह के रोल को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
गाजियाबाद।। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में एक नगर निगम पार्षद व बीएसपी नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनका शव यहां एक कार में मिला।
एसपी ( सिटी ) जे.के. शाही ने बताया कि सचिन चौधरी (35) का शव गुरुवार रात एक कार में मिला। शव पर पर गोलियों के निशान थे। गाड़ियों से इस्तेमाल की गईं दो गोलि यांबरामद हुईं।
मृतक के परिजनों ने कहा कि चौधरी को गुरुवार शाम करीब सात बजे किसी का फोन आया था। इसके बाद वह किसी से मिलने के लिए घर से निकल गए। एसपी सिटी ने बताया कि रात करीब नौ बजे पुलिस को एक कार में शव पड़े होने की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि चौधरी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। यह मामला रंजिश का लगता है लेकिन विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही मिल पाएगी।
इस बीच, एक अन्य घटना में कल मुरादनगर क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में भूपेंद्र कुमार नाम के एक विकलांग व्यक्ति की हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि उसका शव जंगल क्षेत्र से मिला। हत्या का मामला दर्ज कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
एसपी ( सिटी ) जे.के. शाही ने बताया कि सचिन चौधरी (35) का शव गुरुवार रात एक कार में मिला। शव पर पर गोलियों के निशान थे। गाड़ियों से इस्तेमाल की गईं दो गोलि यांबरामद हुईं।
मृतक के परिजनों ने कहा कि चौधरी को गुरुवार शाम करीब सात बजे किसी का फोन आया था। इसके बाद वह किसी से मिलने के लिए घर से निकल गए। एसपी सिटी ने बताया कि रात करीब नौ बजे पुलिस को एक कार में शव पड़े होने की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि चौधरी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। यह मामला रंजिश का लगता है लेकिन विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही मिल पाएगी।
इस बीच, एक अन्य घटना में कल मुरादनगर क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में भूपेंद्र कुमार नाम के एक विकलांग व्यक्ति की हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि उसका शव जंगल क्षेत्र से मिला। हत्या का मामला दर्ज कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

आगरा, जागरण संवाददाता: अपने अजब फैसलों के लिए कुख्यात पंचायतों की फेहरिस्त में एक और मामला जुड़ गया। पंचायत में शादीशुदा एक बच्चे के पिता का हाथ पंचों ने उसकी प्रेमिका को थमा दिया। दोनों से बस्ती से बाहर जाकर अपना घर बसाने को कह दिया। पंचों के फैसले के खिलाफ पत्नी ने सवा माह की अबोध बच्ची के साथ पुलिस की शरण ली, तब कहीं जाकर प्रेमिका के परिजन उसे साथ ले गए।
नगला महादेव फ्रीगंज निवासी राशि पत्नी धनंजय (बदला नाम) गुरुवार सुबह थाने पहुंची। उसने बताया उसकी शादी दो साल पूर्व हुई। अब सवा माह की बेटी है। पति के बस्ती की अनीता (बदला नाम) से प्रेम संबंध हैं। प्रेमिका के दबाव बनाने पर बस्ती के कुछ लोगों ने मंगलवार सुबह पंचायत बैठाई और पति को बुलाया। वहां अनीता ने धनंजय से प्यार का इकरार किया। इसके बाद उनका हाथ एक दूसरे को देकर बस्ती से बाहर जाकर नई जिंदगी जीने का फरमान सुना दिया। वहां मौजूद ससुराल वालों ने निर्णय का विरोध किया, लेकिन पंचों ने उनकी एक न सुनी।
बीवी के परिजनों ने पकड़ा पति
प्रेमिका को लेकर गायब पति को गुरुवार तड़के पत्नी के परिजन पालीवाल पार्क से पकड़ने के बाद थाने ले आए। पुलिस ने मामला सुलझाने को प्रेमिका के परिजनों को बुलाया, लेकिन उन्होंने उससे किसी भी तरह का संबंध रखने से मना कर दिया। काफी समझाने पर उसे माफ करने को राजी हुए। इंस्पेक्टर हरीपर्वत अवधेश मिश्रा का कहना है दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद युवती को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
इनका कहना है
पति: प्रेमिका पिंड नहीं छोड़ रही। उसे कई बार समझाया। प्रेमिका ने पंचायत बुलाकर जबरन अपने पक्ष में फैसला करा लिया।
प्रेमिका: प्रेमी का हाथ पंचों ने थमाया है। फैसला करने से पहले उनको सोचना चाहिए था। उसकी जिंदगी बर्बाद होती है तो इसके जिम्मेदार पंच होंगे।
पत्नी: पत्नी और बच्चे के होने के बावजूद इस तरह का तुगलकी फैसला देने वाले पंच कौन होते हैं?
Thursday, July 21, 2011
26/11 के शहीद के साथ सरकार ने किया इंसाफ, बेटी को बनाया असिस्टेंट कमिश्नर
मुंबई. मुंबई पर हुए 26/11 के हमले में शहीद पुलिस अफसर विजय सलास्कार की बेटी दिव्या सलास्कार को सरकार ने आखिरकार नौकरी दे दी है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम के दखल देने के बाद सरकार ने दिव्या को असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ सेल्स टैक्स का पद दिया है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि उन्होंने दिव्या से वादा किया था कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को मुंबई पब्लिक सर्विस कमिशन से बात करने को कहेंगे ताकि दिव्या को जल्द से जल्द नौकरी दी जा सके।
चिदंबरम ने इस मामले में तब दखल दी जब उन्हें पता चला कि मुंबई हमले में शहीद हुए विजय सलास्कार की बेटी को नौकरी देने का मामला दो सालों से लटका पड़ा है। चिदंबरम ने बताया कि आज सुबह ही उनके पास महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चव्हाण का फोन आया कि दिव्या को नौकरी दे दी गई है। गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर विजय सलास्कार के अलावा आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे और अशोक कामटे भी इस हमले में शहीद हुए थे।
मुंबई. मुंबई पर हुए 26/11 के हमले में शहीद पुलिस अफसर विजय सलास्कार की बेटी दिव्या सलास्कार को सरकार ने आखिरकार नौकरी दे दी है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम के दखल देने के बाद सरकार ने दिव्या को असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ सेल्स टैक्स का पद दिया है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि उन्होंने दिव्या से वादा किया था कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को मुंबई पब्लिक सर्विस कमिशन से बात करने को कहेंगे ताकि दिव्या को जल्द से जल्द नौकरी दी जा सके।
चिदंबरम ने इस मामले में तब दखल दी जब उन्हें पता चला कि मुंबई हमले में शहीद हुए विजय सलास्कार की बेटी को नौकरी देने का मामला दो सालों से लटका पड़ा है। चिदंबरम ने बताया कि आज सुबह ही उनके पास महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चव्हाण का फोन आया कि दिव्या को नौकरी दे दी गई है। गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर विजय सलास्कार के अलावा आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे और अशोक कामटे भी इस हमले में शहीद हुए थे।
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