Monday, March 28, 2011

कुंवारी सुहागिन - 26
उसकी समझ में यह बात तो आ गयी की वह किसी ब्लेकमेलर की निगाह में चढ चुका है . वह बार-बार घड़ी की तरफ देख रहा था. जैसे ही सुइयों ने दस बजने का
संकेत दिया , उसके फोन की घंटी घनघना उठी. उसने फोन उठाया तो सामने पर उसी महिला की सेक्सी आवाज सुनाई दी. वह कह रही थी-
- क्या कर रहे हो कवी महोदय ? अमृता के बारे में सोच रहे हो ?
पूजन- मुझे ये बताओ की तुम मुझसे चाहती क्या हो ?
महिला- जों कुछ तुमने अमृता के साथ किया है, मेरे साथ भी अगर वही करते हो तो तुम्हें माफी मिल सकती है. मेरे तन में भी आग लगी है, इसे बुझाना है. तुम ये काम कर सकते हो .
पूजन- इस काम के लिए आपने मुझे ही क्यों चुना ? ऐसा तो तुम किसी और से भी करवा सकती हो , यहाँ तक की कोई खुद ही तुम्हें संतुष्ट करने के लिए तैयार हो जाएगा .
महिला- जिस तरह तुमने अमृता के यौवन अंग पर प्रहार किये हैं उससे लगता है की तुम्हारा हथियार बहुत स्ट्रोंग है, मेरा जी मचल उठा है तुमसे मिलने के लिए . मैं तुम्हारी बांहों की
कैद में छटपटाना चाहती हूँ, बचाओ-बचाओ की आवाज लगाना चाहता हूँ, सच तो ये है की मैं दीवानी हो गयी हूँ तुम्हारी मर्दानगी की. तुम्हारे साथ कुछ रातें बिताना चाहती हूँ.
पूजन- दीवानी अगर होतीं तो आप मुझे इस तरह ब्लेकमेल नहीं करतीं ?
महिला- ओह, ये क्या कहते हो कवी महोदय, ब्लेकमेलिंग शब्द का प्रयोग न कीजिये. ये तो दीवानगी है, तुम्हारे साथ बिस्तर पर काम क्रीडा करने की दीवानगी. तुम्हारे साथ जिस्मानी
रिश्तों को नया आयाम देने की दीवानगी, मैं देखना चाहती हूँ की बिस्तर पर तुम किस तारह के शोट लगाते होंगे .
पूजन- क्या मैं अपनी दीवानी का नाम जान सकता हूँ ? क्या इतना भी हक नहीं दोगी मुझे ?
महिला- अपना सब कुछ न्यौछाबर करने को तैयार हूँ, जान भी मांगलो न , लेकिन मुझे संतुष्ट कर दो. तुम्हें क्या बताऊँ , मेरे मन में जों उथल -पुथल मची है उसने मेरा जीना हराम कर दिया
है, मुझे बेकरार कर दिया है. अब मैं कैसे जीउ ? सिर्फ एक ही रास्ता है जों बेड तक जाता है. और हाँ, ये क्या मेरे नाम के पीछे पड़े हो ,नाम में क्या रखा है ? काम से मतलब रखो. मैं
तुम पर अपनी जवानी कुर्बान करना चाहती हूँ, इसके बदले मैं इस राज को अपने सीने में ही दफ़न कर दूंगी की तुमने एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया और जब उसने अपने
आपको तुम्हारे चंगुल से बचाना चाहा तो तुमने उसे मारा पीटा, वैसे यह बतादूं की मैंने डॉक्टरी मुआयना भी करा लिया है. यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट तुम्हें सालों की कैद दिला सकती है. अब सोचिये
की आपको क्या पसंद है ? जेल में चक्की पीसना या फिर हुस्न का मजा लूटना, यौवन का रस लूटना. ?
पूजन- मुझे तुम्हारी हर बात मंजूर है, तुम जैसा चाहोगी मैं ठीक वैसा ही करूँगा. आप इतना ध्यान रखें की आप मुझे चाहती हैं और चाहने वाले कभी भी अहित नहीं करते.
महिला- यही ख़याल तो तुम्हें अब तक आराम से रहने दे रहा है वरना अब तक पुलिस की मार खा रहे होते.
पूजन- देखिये, मैं पहले भी कह चुका हूँ की मैंने किसीके साथ बलात्कार नहीं किया. अमृता खुद ही चलकर यहाँ तक आई थी और उसने ऐसे हालात पैदा कर दिए, मुझे इतना उकसाया की
शारीरिक सम्बन्ध बन गए, वैसे इस तारह की न तो कोई प्लानिंग थी ही नहीं.
महिला- लेकिन मैं पूरी प्लानिंग के साथ कर रही हूँ. जब तुम उस लड़की के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बना सकते हैं तो मेरे साथ भी बनाइये. मैं भी जवां हूँ, हसीन हूँ , सेक्सी हूँ.
पूजन- आपके दर्शन कहाँ और कब हो सकते हैं ? मैं किसीसे यह बात नहीं कहूँगा. आप मुझ पर भरोसा कर सकती हैं.
महिला- ठीक है. अब तुम घर से निकलो ओर शहर के चोराहे की तरफ चलो. वहां से आगे चलने पर एक थियेटर आता है.
पूजन- हाँ, सिद्धार्थ थियेटर है उधर. उससे आगे एक होटल है.
महिला- बिलकुल सही पहुँच गए, लेकिन आपको उस होटल में नहीं उससे अगले वाले होटल में आना है. उसकी दूसरी मंजिल पर २०३ नंबर का कमरा है. अपने साथ कंडोम मत लाना . यह
वहाँ पर मिल जायेंगे. वहाँ तुम्हें एक निहायत खूबसूरत महिला मिलेगी. वह महिला नकाब पहने हुए होगी . उसके हाथ में गुलाब का फूल होगा. उसका नाम रोशनी है.
पूजन- उस महिला का मैं क्या करूँगा ?
महिला- उसीके साथ तुम्हें सेक्स करना है, जब तक वह सन्तुष नहीं हो जाती तब तक तुम्हें छुट्टी नहीं मिलेगी .

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