Wednesday, October 26, 2011

जलेबी -१८
तुम्हारी बांहों का सहारा तो है. . है न राजेश ? तुम मुझे दोगे न सहारा ?
राजेश- हाँ , जीवन भर . जब तक सांस चलती रहेंगी तब तक.
नेहा- आई लव यू मेरी जान. आई लव यू .
राजेश- लव यू टू नेहा.....दिलो जां से चाहता हूँ तुम्हें, समय आने पर अपनी जां देने से भी पीछे नहीं हटूंगा . मैंने मोहब्बत करली तो करली, मैंने तुम्हें चुन लिया तो बस चुन लिया. मेरी अपनी कोई विशेष विचारधारा नहीं है. मैन साधारण इंसान हूँ. जो विचार मुझे तुमसे सुनने को मिलेंगे मै उसीको अपनी विचारधारा में शामिल कर लूंगा . तुमसे जो सच्ची और हक की बातें सुनने को मिलेंगी , वही मेरी नीतियों में शामिल हो जायेंगी . अब तो बस तुम्हारे ही प्यार का सहारा है. देखो, अगर कभी भविष्य में मुझे जाने -जाने कोई गलती हो जाती है , या फिर तुम्हें कोई गलतफहमी हो जाती है तो वादा करो कि तुम्हें नाराज नहीं होना है बल्कि मुझसे मिलकर तुम्हें मामला साफ़ कर लेना है. अच्छे दोस्त कभी भी अपना फैसला दुसरे लोगों से नहीं कराते बल्कि वे खुद इतने सक्षम होते हैं कि अपनी बातें आपस में ही निपटा सकें.
नेहा- तुम भी एक वादा करो राजेश , मेरे सिर पर हाथ रखकर कहो कि जीवन में कभी उलीस की मुखबिरी नहीं करोगे, कभी न तो खुद पुलिस की नौकरी करोगे और न ही अपने करीबियों को करने दोगे .
राजेश- ऐसा ही होगा . मैं हमेशा वही करता रहूँगा , जो तुम कहोगी , मेरी नजर में तुम महज एक खूबसूरत लड़की नहीं हो बल्कि इससे कहीं बढ़कर हो. क्या मेरा यकीन मानोगी कि तुम अब मेरे जीने का मकसद बन चुकी हो. एक और अपनी कमजोरी बताए देता हूँ. अगर तुमने मुझे ठुकरा दिया तो जानती हो क्या ओगा, मेरे प्राण निकल जायेंगे और इसके लिए मुझे कोई प्रयास भी नै करना होगा . अपने आप यह सब कुछ हो जाएगा . तुम्हारी आँखों में झांककर देखता हूँ तो मयखाना दिखाई देता है. तुम्हारे साथ कितनी पी चुका हूँ लेकिन मजाल है जो नशा हो जाए.नशा नाम की कोई चीज नहीं है यहाँ .
नेहा- क्या ये सच नहीं कि तुमने मेरे जिस्म को हासिल करने के लिए मुझसे दोस्ती की है ?झूठ मत बोलना .
राजेश- हाँ, मगर सिर्फ जिस्म को पाने के लिए नहीं. बल्कि एक पवित्र रिश्ता कायम कर सदा के लिए तुम्हारे साथ रहने का इरादा है. कोशिश करूँगा कि अगले साथ जन्मों तक तुम्हारी परछाई बनकर रह सकूं.लोग शादियाँ क्यों करते हैं ? इसका जवाब ये नहीं कि सिर्फ जिस्मानी जरूरतों के लिए ही करते हैं. ये अलग बात है कि शादी की पहली रात ही वे सुहागरात मनाते हैं. एक दुसरे में डूब जाते हैं. एक जिस्म दो जां बनजाते हैं.
नेहा- मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ राजेश. जो तुम सोच रहे हो, बात ऐसी नहीं है. मैं किसीके लायक भी नहीं हूँ. मेरा मिशन बिलकुल अलग है. मैं उससे दूर नहीं हट पाती . कई सालों में आज ये पहला अवसर है जब मैंने तुम्हारे साथ फुर्सत में इतना वक्त बिताया है. वरना तो हर दम बस काम ही काम . हम एक अलग ही लोक के प्राणी हैं. हम किसीको कोई सुख नहीं दे सकते . अगर तुम मुझसे बहुत ज्यादा प्रेम करने लगे हो और मेरे शरीर से लगाव रखते हो तो आज मैं अपने आपको समर्पित करने के लिए तैयार हूँ. तुम अपने जिस्म की प्यास बुझा सकते हो , मगर मुझे हासिल नहीं कर सकते. क्योंकि मैं किसी और से कुछ और ही वादा कर चुकी हूँ.
राजेश- ओह, अगर ऐसी बात है तो मुझे पहले ही बता देना चाहिए था. कौन है वो खुश नसीब ?
नेहा- नहीं रे राजेश ... ऐसी भी कोई बात नहीं है. वह कोई इंसान नहीं है. बल्कि इंसानों की भलाई के लिए बनाई गयी एक विचारधारा है. हमने अपने आपसे ही यह वादा किया हुआ है कि अपना कीमती वक्त इस तरह के नाते -रिश्तों में बर्बाद नहीं होने देंगे.
राजेश -आपकी बातें उलझी हुई सी लगती हैं, मुझे जो भी बताओ, साफ़-साफ़ बताओ.
नेहा- उसके लिए यह जगह ठीक नहीं रहेगी , तुम्हें मेरे ऑफिस चलना होगा, तब तुम्हें बतलाऊंगी .

Monday, October 17, 2011

जलेबी -९
राजेश- अभी इतनी जल्दी, अभी तो कुछ खाया-पिया भी नहीं है,कुछ जाना भी नहीं तुम्हारे बारे में .
नेहा- इससे ज्यादा क्या जानना चाहते हो कि मेरा नाम नेहा है और मुझे प्यार-मोहब्बत जैसी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है. ये तो तुम खुद भी समझ गए होंगे.
राजेश- हाँ, साथ में ये भी समझा हूँ कि अगर ज़रा भी दिलचस्पी नहीं होती तो तुम मेरी गाड़ी में भी नहीं बैठती ,यहाँ मेरे साथ ड्रिंक भी नहीं करती. ये माना कई मै तुम्हें हद से ज्यादा चाहता हूँ, लेकिन झूठ ये भी नहीं कि प्यार के बीज तुम्हारे मन में भी अंकुरित हो रहे हैं. ज्यादा नहीं तो कम, लेकिन चाहती तुम भी हो मुझे . तुम जितनी हसीन हो, उसकी जितनी तारीफ़ की जाए , कम है लेकिन मेरी मर्दानगी के सामने भी कोई टिक नहीं सकता. एक बार जिस महिला की नजर मेरे चेहरे से टिकाती है, फिर वह जैसे नजर हटाना ही भूल जाती है. ये है मेरे आकर्षण का जादू. मैंने महसूस किया है कि कई बार आपने भी मुझे कनखियों से खूब देखा है. अगर गलत बोलता हूँ तो बता सकती हो. मै जो गलत निकला तो चाहे जो सज़ा देना.
नेहा- अच्छा, तो अब त७उम अप नी तारीफ़ अपने मुंह से करवाना चाहते हो, वैसे सच तो है , तुम गज़ब के मर्द लगते हो. तुम्हारे साथ जो महिला सुहागरात मनायेगी , वह वाकई बड़ी नसीब वाली होगी. बिस्तर पर तुम उसे भरपूर सुख दे सकते हो, ऐसा मेरा सोचना है. तुम्हारी फडकती हुई भुजाएं कईयों के ईमान डिगा सकती हैं. और तुम्हारे पेंट को फाड़ने के लिए जो यह काला नाग बेताब हो रहा है, मै इसको भी अच्छी तरह से जां गयी हूँ, यह जो बार -बार खडा होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है, उससे लगता है कि जरूर इसमें वजन है. मगर इस सबसे प्रभावित होने का समय मेरा जा चुका हूँ, अब तो मै पत्थर बन चुकी हूँ. हिमालय जैसा पत्थर . जिस पर बारिस, तूफ़ान , गर्मी या सर्दी का कोई असर नहीं होता, हाँ, मै तुम्हें कनखियों से देखती थी, एक अबर नहीं बार-बार. तो इसके पीछे कारण ये था कि तुम मुझे भोले नजर आये, मुझे लगा कि बहुत सीधे इंसान हो. अगर चालू किस्म के होते , या मन में सिर्फ काम वासना ही रखते तो इतना समय मेरे लिए नहीं गंवाते . इसीलिए मैंने दया करके तुमसे मिलने का वक्त दिया है. अब तुम दया और प्यार में फर्क तो आसानी से समझ ही सकते हो. और कुछ क्ल्यारीफिकेशन चाहिए , या काम चल जाएगा ?
राजेश -ठीक है, मै समझ गया. आप कहना चाहती हैं कि अआप्को मुझसे सहानुभूति है, प्यार नहीं है. कोई बात नहीं , मुझे इससे भी कोई ऐतराज नहीं है. आज मै तुमने दया के लायक समझा हूँ, तो कल प्रेम के काबिल भी जरूर समझोगी .
नेहा- बहुत स्मार्ट बंदे हो, प्यार के चककर में पड़े हो. क्या करोगे प्यार करके, समय बर्बाद करने से तो बेहतर है कि तुम किसी अबर में जाओ, लड़की पसंद करो और मन चाहे गेस्ट हाउस में ले जाओ. रात भर वह तुमसे इतना प्यार करेगी , कि दिन भर नहीं भूल पाओगे. प्यार -व्यार के बहाने आदमी और किसलिए करता है ? यही आवरण तो होता है. जब बिस्तर पर ले गया , मन भर गया, गर्मी निकल गयी तो प्यार का भूत भी उतर जाता है. सारे वादे हवा हो जाते हैं, तब कुछ नही दिखता .
राजेश- लगता है तुमने मोहब्बत में कोई चोट खाई है, जिससे ऐसी नेगेटिव बातें करने लगी हो, प्यार के नाम से ही चिढने लगी हो. मै पूछता हूँ कि इसमें अआखिर बुराई भी क्या है. अब तुम जवान हो, खूबसूरत हो, क्या ये जवानी और सुंदरता हमेशा रहने वाली है ? तुमसे पहले और भी न जाने कितनी हूर की परियां थीं, और अब भी तुम्हारे बाद न अजने कितनी आएंगी . फर्क ये है कि आफले उनका वक्त था, आज तुम्हारा वक्त है और कल किसी और का वक्त होगा . जिसने वक्त की कद्र नहीं की , वक्त कभी उसकी कद्र नहीं करता. आज तुम्हें लाखों चाहने वाले मिल जायेगे , मगर जब तुम्हारा हुस्न ढल जाएगा तब कोई पूछने वाला नहीं होगा .
नेहा- अपने दिल की भड़ास निकाल रहे हो या फिर मुझे बददुआ दे रहे हो ?
राजेश- एक सच्चे दोस्त का सलाह है, जो लाखो लोग तुम्हें चाहते हैं, उनमे से कोई एक चुन लो और उसे हमेशा के लिए अपना बनालो . उसकी भी जिंदगी बन जायेगी और तुम्हारे हुस्न का भी सही चाहने वाला , अच्छा कद्रदान मिल जायेगा. जिस हुस्न के सच्चे चाहने वाले न हों, वह भी किसी अकाम का नहीं होता . यह भी याद रखना .
नेहा - मैन कैसे पहचानूंगी कि कौन सच्चा चाहने वाला है और कौन झूठा ? एक काम करो न , इस काम में तुम ही मेरी मदद करो. खुद को छोड़कर मेरे लिए कोई अच्काहा साथ चुनिए न . इनमे से . ये देखिये .

Sunday, October 16, 2011

भाग-८
मद्धिम रोशनी में भी नेहा का चेहरा चाँद की तरह चमक रहा था. दोनों ने व्हिस्की का ऑर्डर दे दिया. एक पैग अंदर जाते ही राजेश के मन में वासना तूफ़ान उठने लगा . उसका गुतांग भी पूरे जोश में आकार काले नाग की तरफ भडकने लगा. जी तो चाहता था कि नेहा को अभी अपनी बांहों में भरले और उसे खूब प्यार करे, उसी बार में बैठा एक प्रेमी जोड़ा बहुत अच्छी तरह से आलिंगनबद्ध था. वे दोनों ही शराब के नशे में चूर थे, लड़की आगे बढ़कर अपने प्रेमी के होठों को चूम रही थी, कभी-कभी वह अपनी जीभ का इस्तेमाल भी कर लिया करती थी. यह बड़ा ही शानदार द्रश्य था, मगर इसने राजेश के दिल में तूफ़ान खड़ा कर दिया था. नेहा की बात अलग थी, वह तो उस तरफ से मुंह फेरकर बैठी थी. राजेश ने इसका भी बहाना बना लिया , वह बाथरूम करने के बहाने गया और जब वापस आया तो नेहा से अपनी सीट पर बैठने का आग्रह कर दिया, नेहा वहाँ बैठ गयी, अब आलम ये था कि नेहा को उस प्रेमी जोड़े की हरकतें साफ़ दिखने लगीं, नेहा ने कुछ दे तो ध्यान नहीं दिया. मगर जब दूसरा पैग भी गले के नीचे उतरा तो उसे अपने सामने के सीन साफ़ दिखने लगा . मुस्कराते हुए वह बोली-
अच्छा , अब समझ में आया , तुम मुझे यहाँ क्यों बिठाना चाहते थे , रासलीला दिखाने के लिए ही न ?
राजेश- ये बात नहीं है. असल में शर्म आ रही थी, मेरा ध्यान न भटके इसलिए मैन यहाँ बैठ गया और तुमको वहाँ पर बिठा दिया , अगर कोई परेशानी हो तो मैन भी उधर बैठ जाता हूँ, दोनों साथ-साथ बैठ जाते हैं.
नेहा - बहुत चालू पुर्जे हो यार , ये बताओ ये हुनर कहाँ से सीखा है. दिखने में भले भोले हो लेकिन हो बड़े कातिल.
राजेश- आप जो उचित समझें, वो कह सकती हैं मगर मै तो सिर्फ आपका चाहने वाला हूँ, इसके सिवाय और कुछ नहीं हूँ, अगर कोई मुझे किसी नाम से पुकारना चाहता है तो तुम्हारे आशिक के नाम से पुकारा जाना मुझे अच्छा लगेगा .
नेहा- बड़े मजनू बने फिरते हो, कभी इश्क किया भी है या ऐसे ही इसका शौक पाल लिया है . ?
राजेश- कहते हैं कि इशक किया नहीं जाता, बस हो जाता है. मुझे भी बस हो गया है समझो.
नेहा- तो क्या इससे पहले कभी किसी लड़की को नहीं घुमाया -फिराया ? अरे मौज तो खूब की होंगी , सेक्स का आनंद तो खूब लिया होगा ? अब इतने शरमाओ भी मत. सही-सही बात पर आ जाओ.
राजेश- बाबा रे बाबा ,, ये क्या कहती हो,.? डायरेक्ट सेक्स पर चर्चा करती हो ? मुझे तो अजीब सा लग रहा है.
नेहा- मुझे पागल मत बनाओ , इस अबर में मुझे लाकर क्या अनूप जलोटा के भजन सुनने आये हो, यहाँ कैसी बातें की जाती हैं, क्या तुम नहीं जानते ? या मै नहीं जानती ?
राजेश- आपकी बात अपनी जगह सही है , लेकिन मैंने कभी किसी लड़की के साथ सेक्स नहीं किया .
नेहा -तुम्हारा चेहरा तुम्हारी चुगली कर रहा है .साफ़ दीखता है कि जरूर दाल में कुछ काला है.
राजेश- नहीं, नहीं बात बिलकुल सच्ची है. मैंने कभी कुछ गडबड नहीं की . समय ही नहीं मिला. सच पूछो तो मैंने कभी इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया.
नेहा- सब लड़के लोग ऐसे ही बातें करते हैं, लड़की को पटाने के लिए बहाने करते रहते हैं, जब तक लड़की नहीं पटती तब तक तो तरह-तरह के बहाने करते हैं, खूब तारीफ़ करते हैं, घुमाते -फिअराते हैं. न अजाने काया-क्या खाब दिखाते हैं और जब लड़की कब्जे में आयी नहीं कि आँख दिखाने लगते हैं. मैन जानती हूँ तुम लोगों की सारी हकीकत .
राजेश- मैन मानता हूँ कि सब लोग ऐसे नहीं होते , जैसे कि मै नहीं हूँ.
नेहा- अच्छा, तो फिर दिल पर हाथ रखके कहो, मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो ?
राजेश- बस बात्चीत्कारने के लिए . तुम्हें देखने के लिए . अपने दिल की बात तुम तक पहुंचाने के लिए .
नेहा-अगर ऐसा है तो चलो , अब बात हो गयीं, चलते हैं. मुझे छोड़ दीजिए , जहाँ से बिठाया था वहीं पर.
राजेश- अभी इतनी जल्दी, अभी तो कुछ खाया-पिया भी नहीं है,उच्च जाना भी नहीं तुम्हारे बारे में .
नेहा- इससे ज्यादा क्या जानना चाहते हो कि मेरा नाम नेहा है और मुझे प्यार-मोहब्बत जैसी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है. ये तो तुम खुद भी समझ गए होंगे.
राजेश- हाँ, साथ में ये भी समझा हूँ कि अगर ज़रा भी दिलचस्पी नहीं होती तो तुम मेरी गाड़ी में भी नहीं बैठती ,यहाँ मेरे साथ ड्रिंक भी नहीं करती.