Tuesday, March 15, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग--14
अमृता- एड्स के अलावा कोई और बीमारी तो हो सकती है ?
पूजन - प्यार या शादी से पहले पूरी बोडी की स्केनिंग कराना तो संभव नहीं होता. शरीर है इसके नादर थोड़ा बहुत कुछ हो भी सकता है मगर जाहिर तौर पर
मैं सम्पूर्ण स्वस्थ नजर आता हूँ, तुम भी तंदुरुस्त हो. आगे रब की मर्जी.
अमृता क्या तुमने वकालत भी की है , मेरा मतलब एल एल बी भी की है क्या ?
पूजन- सिर्फ एल एल बी नहीं एल एल एम भी क्या है . आज तुम्हें भी प्यार की डाक्टरेट डिग्री दिलानी है. और यकीन मानो ऐसा हो जाएगा , बहुत पुरानी बात बताता हूँ. पड़ोस में एक लड़के की शादी हुयी , अगले दिन
उसकी माँ उसे जगाने के लिए आई तो बोली-' जिस लड़के को मैं दस साल मेहनत करके भी डिग्री नहीं दिला पाई उसी लड़के को दुल्हन ने एक ही रात में बी ऐ पास करादी '.
अमृता- आपका भी जवाब नहीं है. ना जाने कहाँ-कहाँ से ढूंढकर ऐसे बी आतें लेकर आते हैं. अब अपने हथियार को ठंडा रहने के लिए बोल दो, मैं ऊपरवाला कमरा देखने के लिए चल रही हूँ मगर तुरंत लौट आउंगी . चलिए.
पूजन के चेहरे पर सुबह जैसी ताजगी दिखने लगी. कलेजा ठंडा हो गया. वह मुस्कराता हुआ आगे की तारफ बढ़ने लागा. वह समझ गया की शिअकर अब उसके जाल में फंस चुका है. अमृता एकअच्छी लड़की अठी और
इज्जतदार घराने से ताल्लुक रखती थी. वह डायरेक्ट तो सेक्स का आमंत्रण दे नहीं सकती थी, इतना ही काफी था की वह उसके साथ नेहाद निजी बातें शेयर कर रही थी. कुछ देर में ही दोनों ऊपर की मंजिल पर पहुँच गए .
पूजन ने वास्तब में उसे बहुत सुन्दर सजाया हुआ तह. सुहागरात वाले समय भी कोई सेज को इतना ज्यादा नहीं सजाता होगा जितना पूजन ने सजा रखा था. अमृता के मुझ से तारीफ़ भरे शब्द निकल पड़े-
- वाह, क्या यह सुहाग की सेज है, ऐसा लगता है मानो अभी-अभी यहाँ पर तुमने सुहागरात मनाई है ?
पूजन- शुक्रिया, मगर अभी-अभी सुहागरात नहीं मनाई, हाँ सुहागदिन मनाने के इरादा जरूर है , अगर सजनी साथ दे तो यह काम भी हो जाएगा .
अमृता- मगर सुहागरात ऐसे थोड़े ही मनाई जाती है, उसके लिए शादी का होना जरूरी है.
पूजन- तो फिर ठीक है, मैं सारे जग को साक्षी मानकर तुम्हें अपनी पत्नी स्वीकार करता हूँ, अब तो तुम्हें सुहागरात मनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी ?
अमृता- यह क्या कह रहे हो टीचर ? ऐसा कैसे हो सकता है . मैं अभी तक कुंवारी हूँ और कुंवारी लड़की सुहागिन कैसे हो सकती है ?
पूजन- मैंने जब तुमको सुहागिन मान लिया है तो बात खत्म हो जाती है. अब औपचारिताओं की बेड़ियों को काट डालो और मुझे अपने गले से लगा लों.
कुछ समय तक तो बिलकुल खामोशी का माहोल हो गया. उन दोनों में से कोई एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा था. अमृता इस समय पूजन की आँखों में झाँक रही थी, पता नहीं वह वहाँ पर लया तलाश करना चाहती थी.
पूजन भी अमृता की झील सी नीली आँखों की गहराई में डूब जाना चाहता था. आहिस्ता- आहिस्ता पूजन की बाँहें उसकी तारफ बढ़ने ;लगीं, अमृता उस आमंत्रण को अस्वीकार नहीं कर पाई और पूजन की मजबूत बांहों में समा गयी .
पूजन उसके बालों पर हाथ फेरने लगा. धीरे-धीरे अपना हाथों को उसके उभरे हुए सीने पर घुमाने लगा. अमृता ने एक बार तो उसके हाथों को हटा दिया मगर फिर जल्द ही उसका विरोध ढीला पड़ गया.
पूजन ने महसूस किया की अमृता की सांसें थोड़ी सी तेज चलने लगी थी. पूजन अब उसके शरीर में भी कंपन महसूस कर रहा था. वह इस तरह का आदमी नहीं था की शिकार को देखते ही झपट्टा मारे बल्कि वह उस तरह का
कसाई था जों बकरों को हलाल करने से पहले ठीक तरह से खिलाता-पिलाता है. उसने आहिस्ता से अमृता के होठों का चुम्बन लिया और इस तरह प्रदर्शित किया मानो ऐसा करना ही उसका एकमात्र उद्देश्य नहीं है. अमृता की
धडकनें तेज होने लगीं. पूजन ने उसे अपनी बांहों में कसकर पकड़ लिया था, वह अपने आपको मुक्त भी नहीं कर पा रही थी. पूजन पूछ रहा था-
-कुछ परिवर्तन महसूस कर रही हो की नहीं ?
अमृता- दिल धड़क रहा है, डर सा महसूस हो रहा हियो. तुम्हारा यह गुप्त अंग जों मेरी जाँघों से चुभ रहा है, इससे बड़ी तकलीफ हो रही है. पहले इसे छोटा कीजिये.
पूजन- अब यह बड़े से बड़ा तो हो सकता है मगर छोटा करना भूल जाइए.
अम्रात- मेरा इतना कहना भी नहीं मानोगे ?
पूजन- तुम्हारे लिए तो अपनी जन भी दे सकता हूँ मेरी जान, मगर समझने की कोशिश तो करिये . प्राकृतिक तौर पर ऐसा हो नहीं पाता है.
अमृता- तो इसे दूर ही रखिये, ऐसा तो हो सकता है ?
पूजन- कुछ देर के बाद तुम इससे एक पल के लिए दूर भी नहीं हो पाओगी .

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