Sunday, March 6, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग--5
अमृता - मेरी भाभी कल रात उस अधेड के साथ जिस्मानी सम्बन्ध क्यों बना रही थी ?
पूजन- इसमें दो बातें हो सकती हैं, एक तो ये की तुम्हारी भाभी तुम्हारे भाई से संतुष्ट नहीं हो रही होगी . जिस जोश और सुख की चाहत भाभी को होगी, उस पर तुम्हारे भाई खरे नहीं उतर रहे होंगे .
या फिर दूसरा एक कारण ये भी हो सकता है की तुम्हारे भाई भद्र पुरुष होंगे मगर भाभी को बिस्तर पर ज्यादा रंगीनियाँ पसंद होंगी , ज्यादा से मतलब ये है की जिस प्रकार से तुमने उस व्यक्ति को भाभी के यौवन
द्वार को चाटते हुए देखा, उसी साफ़ होता है की तुम्हारे भाई से भी वह इसी तरह की उम्मीद रखती होगी, उम्मीद पूरी न होने पर उसने अपने पूर्व प्रेमी को बुला लिया होगा.
अमृता- तुम लव गुरु हो या सेक्स गुरु ? या फिर किसी और तरह के गुरु हो ? हम यहाँ पर कामसूत्र का ज्ञान लेने नहीं आये हैं बल्कि कविता कैसे लिखी जाती है यह सीखने के वास्ते आये हैं .
पूजन- गुरु का काम होता है ज्ञान बांटना , मैं भी वही कर रहा हूँ. अगर तुम्हें कविता , गीत या गज़ल सीखना था तो फिर उसकी ही चर्चा करना चाहिए थी. मगर ऐसा नहीं है. तुम कुछ और ही पूछ रही हो .
तुम कुछ और ही बता रही हो. इस वक्त तुम्हें अपनी नई कविता सुनानी चाहिए तो उसकी जगह पर तुम अपनी भाभी की रंगीन रातों का जिक्र कर रही हो. तुम खुद स्वीकार करती हो की जब तुम्हारी भाभी
अपने आशिक के साथ रंगरेलियां मना सकती है और ऐसे समय तुम भी गर्म हो सकती हो तो मैं गर्म क्यों नहीं हो सकता ? और मै इस तरह से क्यों नहीं सोच सकता की अब भी तुम गर्म हो रही होंगी .
अगर मेरी बात सच है तो आओ मेरी बांहों में समा जाओ और अपने जिस्म की प्यास बुझालो.
अमृता- यह फिल्म नहीं असली जिनदगी है, अभी -अभी हम मिले हैं. बातचीत हुई है और आप अभी से चाहती हैं की हम दो जिस्म एक जान हो जाएँ .
पूजन- मैं अपने लिए नहीं बल्कि तुम्हारी इच्छा पूरी करने के लिए ऐसा चाहता हूँ, मेरी कोशिश है की तुम्हें परेशानी न उठानी पड़े. तुम्हारी बातों से लगता है की तुम्हें जिस्मानी भूख सता रही है.
अमृता- बात बनाना तो कोई आपसे सीखे . अगर आप उस वक्त वहाँ पर मौजूद होते तब पता चलता की अपने आप पर संयम कैसे रखा जाता है ?
पूजन- वो कैसे भला , अब बीच में टोकूंगा नहीं , बता दीजिए. पूरी कहानी बतलाइये . जब तुमने देखा की वह व्यक्ति भाभी के यौवन द्वार को चूम रहा है तो तुम्हें कैसा महसूस हुआ ?
अमृता- थोड़ी देर के बाद उसने अपना मुंह वहाँ से हटाया तो भाभी ने उसके होठों से अपने होठ सटा दिए और अपनी जीभ उसकी जीभ के अंदर डाल दी. मैंने एक बार फिर ऐसा महसूस किया जैसे किसीने मेरे
शरीर के अन्द्रूने हिस्से में बम फिट कर दिए हों और कोई उसमे विस्फोट करना चाह रहा हो.
पूजन- वाकई , बेहद कामोत्तेजक सीन था.उन लोगों को किसीका डर नहीं था ?
अमृता- वह व्यक्ति बोल तो रहा था की दरवाजा बंद कर डालो , वरना कोई देख सकता है मगर वह नहीं मानी , बोली-
-छोडो मेरी जान , ऐसी कोई बात नहीं है. लड़की सो रही है. जब वह सोती है तो घोड़े बेचकर सोती है.
आशिक- उसे लड़की कहती हो, मैंने नजर मारकर देखा तो उसके सीने पर भी पहाडियां दिखने लगी हैं. आराम से सुहागरात मनाने लायक हो गयी अहि.
भाभी- चुप करो यार, पहले मेरी ही पूर्ती डाल दो, उसके बाद किसी और का ख्याल करना.
आशिक- एक अबर अपनी नांद के साथ भी मौज मस्ती कारों न, अभी तक नया माल नजर आता है, क्या अनछुआ है >_?
भाभी- हाँ, अनछुई भी है और नक् चिढी भी, तुम उसकी नाद में मत लगो. जों करना है मेरे साथ करो और सुबह होने से पहले ही चलते-फिरते नजर आओ .
आशिक - दरअसल, उसे देखकर मन बहक गया है, अगर तुम उसे मना लाओ तो मजा आ जाए . जों चाहोगी वही दूंगा . मुंह मागा इनाम .
भाभी- मैं उसे कैसे मना सकती हूँ, मानाने के चक्कर में ऐसा होगा की हामारा भी भांडा फूट जाएगा और हम दोनों कहीं के भी नहीं रहेंगे. घरवालों को पता चला तो मेरी खाल में भूसा भर देंगे .
आशिक- कुछ नहीं होगा, तुम डरती बहुत हो. आज तक कुछ हुआ क्या जों अब हो जाएगा.
अमृता- तो फिर कोई रास्ता तो बताओ, चलो मैं तुम्हारी ही बात मान लेती हूँ, अगर मुझे तुम्हारी योजना पसंद आई तो उस पर अमल करने का प्रयास करूंगी .
आशिक- उसे थोड़ी सी शराब पिलादों, उसके विचार बहकने लगेंगे , फिर उसे अपने पास सुलालो और जी भरके शराब पिलादों, इसके बाद तुम कोई अश्लील फिल्म चला देना. जब उसकी भावनाएं भडकने
लगें तो उसकी सहमति से मुझे बुला लेना. मैं थोड़ी ही देर के बाद इस कमरे में आ जाउंगा. इस तारह मजा आ सकता है.
अमृता- रहने दो एयर, कच्चा प्लान है, बात बनेगी नहीं. ऐसा करो, मेरे साथ ही एक बार ज्यादा आनंद ले लों

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