Tuesday, August 31, 2010

लवगुरु -२५

मुंशीजी- वैरी गुड . मैं भी बताना चाहूँगा कि यहाँ पर मेरा आने का जों मकसद है, वह सेक्स ज्ञान ही है . यहाँ के लवगुरु तो देश भर में प्रसिद्द हैं, उन्हीके पास आया हूँ. आपको भी कुछ सिखा सकता हूँ .
डोली- स्वागत है , कहिये न , मुझे रोमांस और सेक्स की बातें अच्छी बातें लगती हैं.
मुंशीजी - उन्होंने कहा था कि अगर आपको अपने पार्टनर के साथ सेक्‍स करने की भूख का अहसास नहीं होता है,या फिर क्‍या आपकी तमाम कोशिशों के बावजूद आपकी पार्टनर में सेक्‍स के प्रति भूख जागृत नहीं होती? इन सवालों का उत्‍तर आप स्‍वयं बेहतर समझ सकते हैं। और यदि आपको लगता है कि ऐसा ही आपके साथ हो रहा है तो सही समय है जब आप चेत जाएं और इसके प्रति नजरिया बदलें। आप कुछ कदम उठाकर इससे बच सकते हैं और अपनी सेक्‍स लाइफ को बेहतर बना सकते हैं।
दरअसल ऐसी स्थिति कई कारणों से आती है। इसमें बच्‍चा पैदा होना, गहरा तनाव होना, लड़ाई-झगड़े, किसी प्रिय की मृत्‍यु हो जाना, आदि के कारण सेक्‍स के प्रति रुझान घट जाता है। ऐसे में सेक्‍स के प्रति भूख मर जाती है। यही नहीं संभोग करने पर भी चरम आनंद नहीं मिल पाता है। ऐसे में आप अपनी पार्टनर को सेक्‍स के लिए प्रेरित करने के अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं।
सबसे पहला आकर्षण करीब आने से बढ़ता है। ऐसे में अपनी पार्टनर के करीब जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप पूरी तरह साफ और सुंदर दिख रहे हैं। क्‍योंकि आपके चेहरे के एक्‍सप्रेशन ही उसे आपकी ओर आकर्षित करेंगे, जिससे उसके अंदर सेक्‍स की भूख जागेगी।
पुरुषों और महिलाओं दोनों के साथ अलग-अलग स्थितियां होती हैं। पुरुष अपनी स्‍त्री पार्टनर के आकर्षण से आकर्षित हो जाता है, जबकि महिलाओं के लिए सेक्‍स से पहले भावनात्‍मक रूप से करीब आना जरूरी होता है। जबतक आप भावनात्‍मक रूप से करीब नहीं जाएगे, तब तक वो आपके करीब नहीं आएगी। हालांकि दोनों के लिए प्रेम भरी बातें काफी महत्‍व रखती हैं।
तनाव की स्थिति में भी यदि आपकी पार्टनर आपके करीब आ जाती है, तो ऐसी बातें करें, जिससे उसका तनाव कम हो सके। यदि वो दु:खी है तो उसका दु:ख कम करने की कोशिश करें। यहां पर आपके मुंह से निकले शब्‍द काफी अहम होते हैं, क्‍योंकि बातों ही बातों में आपको अपने पार्टनर का रुख सेक्‍स की ओर करना है।
अच्‍छा होगा यदि आप ऐसे समय में अपने पिछली रातों के अनुभवों को रखते हुए अपनी पार्टनर को बाहों में भर लें। फिर धीरे-धीरे उसके सौम्‍य व कोमल शरीर के अंगों की तारीफ करें। धीरे-धीरे उन अंगों को भी स्‍पर्श करें, जिनकी आप तारीफ कर रहे हैं। यहां पर आप किसी फिल्‍म के सेक्‍सी सीन की बात भी कर सकते हैं।
ऐसी बातें बिलकुल न करें, जिससे आपकी पार्टनर दोबारा अपनी पिछली बातों को याद कर दु:खी या तनाव में आ जाए। आमतौर पर संभोग के दौरान स्त्रियों को चरम आनंद तक पहुंचने में काफी समय लगता है। पुरुषों के लिए अच्‍छा होगा, यदि उन्‍हें चरम
इन बातों से आपको यह अहसास हो ही गया होगा कि सेक्‍स का अंतिम चरण संभोग ही नहीं होता। एक दूसरे को पूरी तरह संतुष्‍ट रखने से ही आपसी प्‍यार बढ़ता है। संयम रखने या फिर एक लंबे अंतराल के बाद संबंध बनाने की सलाह देना उस हद तक कारगर सिद्ध नहीं हुई है जितनी की इससे अपेक्षा की जा रही थी।

किशोरों को अगर सिर्फ संयम के बजाय गर्भनिरोधक उपायों या अनचाहे गर्भ को रोकने के संबंध में जानकारी दी जाए तो वह ज्यादा लाभदायक होगा।

यौन शिक्षा कम उम्र में गर्भधारण करने की प्रक्रिया को काफी हद तक कम कर सकती है। उपायों के बारे में जानकारी देने से किशोरों में यौन क्रियाओं या फिर यौन संक्रामक बीमारियों से भी बचा जा सकता है।
डोली- अब सिर्फ बातें ही करते रहोगे या कुछ करके भी दिखाना है. आपके दिल में जों अरमान हैं उन सबको पूरा कर डालो . मैं भी तो तरस रही हूँ.
मुंशीजी- इसी आमंत्रण का इन्तजार था मुझे .
डोली आप भी न, बिलकुल वो हैं.

Monday, August 30, 2010

मुंशीजी - वाह , तुरंत दान और महा कल्याण वाला फार्मूला अपना . कभी हमें भी मिलवाइए अपनी उस गुरु से जों इतने अच्छे आइडिया सुनाती है.
डोली- आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे आपका कोई गुरु न हो , मेरा मतलब काम गुरु से है . अगर नहीं भी हो तो अपना कुछ अनुभव सुनाइये न. आज की रात तो हमको कामुक बातों में ही गुजारनी है.
मुंशीजी -मेरे पास कुछ कहास बातें नहीं है सूना है कि आज की इस तेज रफ्तार जिंदगी में अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हों तो एक-दूसरे के साथ बैठने और बातचीत के लिए भी समय निकालना मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर पड़ता है उनकी सेक्स लाइफ पर। लंबे समय तक सेक्स के प्रति उदासीनता धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन पर असर डालने लगती है। नतीजा होता है आपसी कड़वाहट और रिश्तों में तनाव।
कॉरपोरेट कल्चर के बीच काम करने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी में इतनी जिम्मेदारियां और तनाव होते हैं कि बेडरूम तक पहुंचते-पहुंचते वे बिल्कुल निचुड़ चुके होते हैं। एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले विनय और उनकी साफ्टवेयर इंजीनियर पत्नी गौरी भी इसे स्वीकार करते हैं। गौरी कहती हैं: मैं महसूस करती हूं कि पहले की तरह अब हम सेक्स के लिए समय नहीं निकाल पाते। अक्सर युवा सोचते हैं कि थोड़ा सेटल हो जाएं उसके बाद से इस भागदौड़ भरी जिंदगी को थोड़ा कंट्रोल में लाएंगे।
हालांकि जानकारों का मानना है कि अक्सर लेट थर्टीज़ में स्थितियां सुधरने लगती हैं। दंपति शुरुआती जिंदगी के मुकाबले थोड़ा निश्चिंत हो जाते हैं। इसका उनकी सेक्स लाइफ पर सकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा महानगरों में रहने वाले दंपति अब पहले के मुकाबले ज्यादा जागरुक हो गए हैं। इंटरनेट, सेटेलाइट चैनल और समाज में सेक्स को लेकर आए खुलेपन ने उनकी सोच बदली है। खास तौर पर स्त्रियां यह स्वीकारने लगी हैं कि सेक्स जीवन का एक अहम हिस्सा है।
यह सच है कि तनाव और थकान का पति-पत्नी के यौन जीवन पर बुरा असर पड़ता है, मगर वहीं यह भी सच है कि सेक्स ही आपके जीवन में पैदा होने वाले दबावों और परेशानियों से जूझने का टॉनिक भी बनता है। हाल ही में हुए शोध तो यहां तक बताते हैं कि नियमित सेक्स रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाता है। जो पति-पत्नी सप्ताह में तीन बार तक सेक्स संबंध बनाते हैं वे अपनी उम्र से कम दिखते हैं। यह सिरदर्द, संधिवात और संक्रामक रोगों से भी बचाता है।
सेक्सोलॉजिस्ट कहते हैं कि सेक्स करना जॉगिंग से कहीं बेहतर व्यायाम है। सेक्स के दौरान मस्तिष्क के कुछ बेहद खास हिस्सों में रक्त का संचार बढ़ता है। इससे मस्तिष्क शांत होता है और यह थकान और तनाव को खत्म करता है। इससे बदन में हाइड़्रोलिक्स केमिकल का संचार होता है और आपकी त्वचा में स्निग्धता आती है।
सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं सेक्स का असर आपसी रिश्तों पर भी पड़ता है। यह पति-पत्नी को एक-दूसरे के करीब लाने में भी मदद करता है। उनके पास आपस में एक-दूसरे से कहने लिए बहुत कुछ होता है। वे अपने-आप पर ध्यान देने लगते हैं। पहले के मुकाबले वे ज्यादा चुस्त और स्मार्ट नजर आते हैं। पति-पत्नी के बीच आपसी मधुरता का असर उनके सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ता है। उनका चमकता चेहरा उनके जीवन की खुशहाली को दर्शाता है।
डोली- मेरे ख़याल से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए ऐसा सेक्स जरूरी है जिसे दोनों पार्टनर एंज्वाय करें। इसके लिए जरूरी है कि इसे एक मशीनी क्रिया में बदलने की बजाय दिलचस्प बनाने पर जोर दिया जाए। इसमें फोरप्ले और कल्पनाशीलता की अहम भूमिका होती है। दरअसल यही आपको तनाव से मुक्त करता है और एक-दूसरे के करीब लाता है। सेक्स के दौरान सिर्फ एक-दूसरे के अंगों को सहलाकर और चूमकर शिथिलता दूर की जा सकती है। आपस में मधुर बातें, ओरल सेक्स या हस्तमैथुन के जरिए रुटीन की सेक्स लाइफ को ज्यादा स्पाइसी बनाया जा सकता है। इसलिए व्यस्तता भरी जिंदगी में भी सेक्स से मुंह न मोड़ें यह आपके जीवन को ज्यादा ऊर्जा से भरा और स्वस्थ बनाता है. अब आप समझ गए होंगे कि मैं क्यों आपसे आपका अनुभव सुनाने की जिद कर रही थी. कुछ लोग शराब के नशे में आते हैं और कमरे में अपनी अकेली पत्नी या महिला पार्टनर को देखते ही उस पर भूखे भेडिये की तरह टूट पड़ते हैं. बेचारी पार्टनर विरोध नहीं कर पाती . मगर जब तक वह तैयार होती है तब तक तो उसका मर्द पुरुष अपना कम निकालने के बाद खर्राटे भर रहा होता है. वह बेचारी खून के आंसू रो रही होती है. उसके अरमान छलनी हो जाते हैं . जज्बात तड़प उठते हैं . वह अपने आपको छली हुई महसूस करती है . उसे लगता है जैसे वह मात्र एक उपभोग की वस्तु है . उसे सिर्फ भोग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है . धीरे -धीरे उसका मन सेक्स से विमुख होने लगता है . अब आप पूछेंगे कि मुझे यह सब कैसे मालूम हैं , तो मेरा जवाब होगा कि सब कुछ गुरु से सीखा है .

Sunday, August 29, 2010

लवगुरु, भाग-23 ,

मुंशीजी - तुम उस सबकी टेंशन मत लों. मेरे रहते हुए तुम्हारे जिस्म को कोई हाथ भी नहीं लगा सकता. अच्छा एक बात बताओ , यह तो तय हो गया कि तुमने अब तक किसी मर्द के साथ जिस्मानी सम्बन्ध नहीं बनाए , मगर अपनी सहेलियों या [पड़ोसन को देखकर कभी मन में इच्छाएं जाग्रत नहीं हुईं ? क्या कभी नहीं लगा कि तुम भी उस तरह का आनंद लूटो . और क्या कभी मन में उत्तेजना नहीं आई ? क्या कभी कामोत्तेजित अवस्था में हस्तमैथुन का सहारा नहीं लिया ?
डोली-मैं झूठ नहीं बोल सकती. एक बार नहीं कई बार हस्तमैथुन का सहारा लिया है . कई बार सुख लिया है . मुझे एक खास महिला ने इसकी शिक्षा दी थी. उसीने कहा था कि मर्दों के सामने तन समर्पित करने से बेहतर है कि इस तरह से सुख प्राप्त कर लिया जाए उसने कहा था कि यदि आप हस्तमैथुन के लिये नई हैं तो अपना समय और स्थान सावधानी पूर्वक चयन करें और एक दृश्य निर्मित करें. इसके लिये बेहतर आइडिया है कि यह तब किया जाय जब आपके घर के सभी लोग बाहर हों . इससे आपमें एक आत्मबोध तो होगा ही साथ ही आपको किसी तरह का डर भी नहीं होगा. इसकी शुरुआत के लिये अपना फोन बंद कर दें, साथ ही यह सुनिश्चित कर लें की आपको किसी तरह की जल्दबाजी नहीं हो. यदि आप दबाव में हैं तो इस दौरान नहाना लाभदायक होगा. धीमा और शांत संगीत बजाएं और अपनी उधेड़बुन से दूर हों. अब आप सेक्सी सोचने और अनुभव करने में सक्षम हैं वह भी बिना रुकावट या बिना दोषी होने की अनुभूति के साथ और यह अनुभूति प्रतिदिन की हस्तमैथुन बिना सोच से बेहतर होगी. ज्यादातर महिलाएं इस वक्त हाथ में लिये जा सकने वाले आइने से अपने गुप्तांगों और जननागों को देखना पसंद करती हैं. यह महत्वपूर्ण भी है कि आप अपने शरीर के बारे में अच्छा और बेहतर ज्ञान रखें, अन्यथा सुना सुनाया फूहड़पन आपको दिमागी अंधेरे की ओर ले जाएगा.
इसलिये अब आइना देखना शुरू कीजिए . अब जब संतुष्ट हो जाएं और उत्तेजना का एहसास होने लगे तो शीशे को एक किनारे रख दो और अपने शरीर को छूना शुरू करें. सीना , पेट और जांघों को थपथपाते हुए सहलाएं और हर उस जगह अपना हाथ फेरे जहां आपको आनंद की अनुभूति मिलती है. आनंद की प्राप्ति में बाधक बन रही हर सोच व डर को बाहर निकाल दें. आप चाहें तो सहलाने के दौरान मसाज आयल का प्रयोग कर सकते हैं. इसके साथ ही कोई अच्छे परफ्यूम का प्रयोग करें जब आप अपने खास अंग को उत्तेजित कर रहीं हों.
अपनी कल्पनाशीलता का प्रयोग करें. यह हस्तमैथुन के तरीकों की वह चाभी है जिसकी ओर लोग अक्सर ध्यान नहीं देते हैं. जबकि हमारे सेक्सुअल आनंद का ज्यादातर जिम्मेदार हमारा दिमाग ही होता है. किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचे जिसके साथ सेक्स करने की इच्छा रखती हों या अपने पार्टनर को कल्पनाओं में लाएं. अब उस तरीके के बारे में सोचे कि किस तरह से उसके साथ सेक्स करने की इच्छा है साथ ही उस जगह की कल्पना करें जहां सेक्स करना आपको सबसे आनंददायी लगता है. इस तरह आप अन्य कामुक दृश्यों की कल्पना कर उत्तेजना को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. जैसे-जैसे आपकी कल्पनाशीलता बढ़ती जाएगी आप तीव्र उत्तेजना का अनुभव करने लगेंगी.
अब जब सनसनी सी महसूस होने लगे तो बड़े ही सौम्य तरीके से अपने विशेष अंगों को छुएं. थपथपाते हुए सहलाएं, दबाएं और रगड़े वह भी तब तक की जब तक की आप को यह न पता चल जाए कि किस तरीके से ज्यादा आनंद की प्राप्ति होती है. अब अपनी उंगलियों को थूक से गीला करें या फिर कोई खास क्रीम लगाएं. अब सहलाने की क्रिया फोकस करें.
अपनी उंगलियां सीने पर फिराएं, सहलाने के दौरान दबाव और दिशा बदलने का प्रयास करें. कभी किनारे-किनारे तो कभी वृत्ताकार घुमाएं और देखें कि किसमें ज्यादा मजा आता है. अब जब आप तीव्र उत्तेजित हो जाते हैं तो आप देखेंगे कि एक टोपी पीछे खिंच गई है. अब आप खुले सिरे को सहलाकर ज्यादा आनंद की प्राप्ति कर सकतीं है. कई महिलाएं इस प्वाइंट को लेकर काफी संवेदनशील होती हैं.
यहां हम आपको यह बता देना चाहते हैं कि उत्तेजना के लिये कोई भी तरीका चुना जाए लेकिन जरूरी यह है कि उसे सतत् और दृढ़ लय के साथ बनाए रखे . कई बार जब कोई दूसरा महिला में उत्तेजना नहीं पा रहा होता है तब भी ज्यादातर महिलाएं अपने यौन अंगों को स्वयं उत्तेजित कर सकती हैं.
मुंशीजी- फिर तुमने इस शिक्षा को कब अमल में लाया ?
डोली- तुरंत . उसी शाम मुझे मौक़ा मिल गया था. घर में कोई मौजूद नहीं . मैंने मौक़ा देखकर काम करना शुरू कर दिया .

Saturday, August 28, 2010

लवगुरु, भाग-२२
और अब वह उनको इतना काम सुख देने का मन बना चुकी थी , जिससे वे उस पर लाखों रुपये आसानी से उड़ा सकें। इसलिए वह उनको खास ट्रीटमेंट देना चाहती थी। तभी तो वह लवगुरु द्वारा सिखाई गयी हर बात को ठीक तरह से याद कर रही थी। उसे बताया गया था कि जब पार्टनर के साथ बेड पर रहो और सामने ज्यादा उम्र का व्यक्ति हो तो उसे पटाने के लिए हुए उसके कानों को हौले से कुतरते हुए एक आग पैदा करने की कोशिश करिये । ध्यान रखें की हल्के से दांत गड़ाएं साथ ही कान के चारों ओर ओंठों से दबाते हुए चूसे तथा बीच में फूंक मारकर एक अलग सा अहसास पैदा करें। लेकिन इस दौरान जीभ से धक्का तब तक न दें जब तक कि आप यह निश्चित न कर लें कि यह उसे पसंद है
हर पुरुष चूमना पसंद करता है. अपनी जीभ उसके निचले ओंठ पर फिराएं. इसके साथ ही उसपर चूमना शुऱू करते हुए उसके ओंठों को अपने ओंठों मे भरने का प्रयास करें इस दौरान उससे चिपकते हुए उसके नितम्बों को ग्रिप में लें, इसके साथ ही अपने नाभि क्षेत्र को उससे रगड़ते भी जाएं जो उसे एक सुखद अहसास दिलाएगा.
प्यार भरी चुभन को लेकर अपना सीमा क्षेत्र न बनाएं और वहीं के होकर न रह जाएं। अपने ओंठ और जीभ उसकी गर्दन पर फिराते हुए उसे बहकाएं, लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता । और फिर उसे कंधों पर दबाव देते हुए सहलाएं इससे उससे आराम की अनुभूति होगी. फिर अपने बालों से उसके कंधों पर ब्रश करें जो उसमें सनसनी भरेगा फिर
उंगलियां भी उत्तेजना का एक महत्वपूर्ण अंग बन सकती हैं. उसकी उंगलियों को ठीक उसी तरह चूसे जैसे मुख मैथुन कर रहीं हों. इस दौरान उसकी आंखों में देखते हुए उसे यह अहसास कराएं कि आप ऐसी महिला है जो उस चीज को चूसने पर वास्तव में आनंद का अनुभव करती है.
पुरूषों का सीना महिलाओं की गोलाइयों की तरह संवेदनशील नहीं है लेकिन उससे कम भी नहीं है. कई पुरुष यहाँ पर चुटकी काटना और खींचना पसंद करते है. इसलिये यहां दबाव देकर देखें उसे क्या पसंद है साथ ही उसके सीने में रुकने को नजरअंदाज न करें. यहां निश्चित समय देना जरूरी है. इस दौरान उसके सीने में अंगुलियां फिरा कर उसमें उत्तेजना भरने का प्रयास करें यदि सीने में बाल हैं तो उनमें उंगलियों की सहायता कंघी करने का उपक्रम करें इससे उसमें उत्तेजना का संचार होगा.
कुछ पुरुष यहां मसाज करना पसंद नहीं करते हैं लेकिन कई लोग इसे उत्तेजक मानते हैं. यहां अपने हाथ फिराएं, थपथपाएं तथा गूंथने का उपक्रम करें . इस दौरान चिकने द्रव्य या टेलकम पावडर का भी प्रयोग करके इस खेल को और रोमांचक व सनसनी युक्त बना सकते हैं. इस दौरान उसके कूल्हों पर उंगलियों से गड्ढे बनाना काफी उत्तेजक होता है.
कूल्हों पर केन्द्रित होकर समय का दबाव यहां खर्च कर सकते हैं. ज्यादातर पुरुष यहां हाथों से टटोलना पसंद करते हैं तथा यहां मसाज के साथ ग्रिप में लेकर दबाव देना भी उनमें उत्तेजना भरता है. इस समय उनके कूल्हों को उंगलियों में दबाते हुए खींचना अच्छा लगता है तो कुछ को हाथ फिराते हुए नाखूनों का हल्का दबाव भी उत्तेजित करता है.
पुरुष का विशेष अंग सबसे ज्यादा संवेदनशील अंग होता है. इसका अग्र सिरा तो सबसे ज्यादा उत्तेजक होता है. अपनी हथेलियों को इसपर फिराते हुए उसे उत्तेजित कर सकती हैं या फिर आपको और उसे पसंद हो तो चूस कर भी उत्तेजित किया जा सकता है. कुल मिला कर यही उत्तेजना का पूरा सामान है इसे आप अपनी और उसकी पसंद के हिसाब से जैसा चाहे वैसा करते हुए सनसनाहट का ज्वार पैदा कर सकती हैं. इसका हर हिस्सा उत्तेजना की नसों से भरा होता है जो छूने मात्र से कामोद्दीप हो जाता है.
अब डोली ने वही सब करने का प्रोग्राम बना लिया। वह मुंशीजी के प्रत्येक अंग को चूम रही थी, सहला रही थी । साथ ही उन बातों को याद करती जा रही थी जों लवगुरु ने उसे खास रूप से बताई थीं।
डोली ने वैश्या व्यवसाय को ऊंचाई देने के लिए कोई कसार नहीं छोड़ी थी. वह इस बदनाम व्यापार को भी कोरोपरेट का टच देने की कोशिश कर रही थी . वह चाहती थी कि रोजाना नए -नए प्रयोग करे, अपने ग्राहकों को खास मजा दे और उसका यह धंधा हमेशा फलता-फूलता रहे. उसने हर उम्र के पुरुषों को आनंद देने के तरीके ईजाद कर रखे थे .
उसे काफी देर तक खामोश देखकर मुंशीजी बोले-
-कहाँ खो गयी मेरी जान ? क्या तुम मेरे साथ खुशी का अनुभव नहीं कर रहीं ?
डोली- ये आप क्या कह रहे हैं ? मैं सोच रही थी कि आप तो इतने प्यारे मिल गए , मेरे पहले ग्राहक हैं . मगर अब आगे क्या होगा ? न जाने कैसे -कैसे ग्राहकों को संतुष्ट करना होगा ?

Friday, August 27, 2010

लवगुरु, भाग-२१

खास अंग के स्पर्श से मुंशीजी बिलबिला उठे , लगा जैसे किसीने भूख शेर के सामने बकरी खड़ी कर दी हो . वह उनके अंग को ऐसे दिलार -पुचकार
रही थी जैसे कोई अपनी जीवन भर की संपत्ति को निहार रहा हो. वह बड़ी हसरत भरी निगाह से निहार रही थी . मुंशीजी पागल हुए जा रहे थे. पहले तो डोली ने उनको दीवाना
बनाया था , अब वह उन्हें पागल भी कर रही थी. ये बात खुद मुंशीजी ने भी कही-
- हाय .... क्या मार डालने का इरादा है ? पहले तो अपने रूप जाल में उलझा लिया, इसके बाद हुस्न के जलवों
से घायल कर दिया , और अब दीवाना बना डाला है .
डोली सोच के भंवर में डूब गयी . उसे कहीं पढ़ी हुई बातें याद आने लगीं. बाद में जब वह लवगुरु के पास टिप्स लेने गयी तब उन्होंने भी तो कहा था कि अपने पार्टनर को बहकाने के कई अनूठे तरीके हैं, लेकिन यह निर्भर करता है कि आपकी अपने पार्टनर से कैसी रिलेशनशिप है और आप अपनी सेक्स लाइफ के लिये कितना अतिरिक्त स्पेशल जोड़ सकती हैं.किसी लंबी अवधि के संबंध के दौरान, एक पुरुष ठीक महिला की ही तरह अनुभव करता है कि वह सिर्फ औपचारिक चीजें ही कर रहा है. इसके साथ ही संभोग क्रिया उसे सिर्फ एक ड्यूटी की तरह लगने लगती है जिसे सिर्फ वह निभा रहा होता है. इसलिये ऐसे में महिलाओं के लिये जरूरी हो जाता है कि वे अपने पुरुष पार्टनर को कुछ नया दें अर्थात उसे बहकाएं. यहां यह महत्वपूर्ण है कि किसी पुरुष को किसी महिला की अपेक्षा बहकाना काफी आसान होता है. लेकिन एक प्लानिंग के तहत यदि इसे किया जाय तो यह दोनों पार्टनरों के आनंद में बढ़ोत्तरी करने वाला होगा बेहतर संबंधों के लिये - नियमित ‘नये’ तरीकों से अपने पार्टनर को आनंद देते हुए बिस्तर पर उसे संतुष्ट करना जरूरी हो गया है. क्योंकि सेक्स हमेशा से उत्तेजक और परिवर्तनशील रहा है. यह भागों में बंटा होता है क्योंकि जोड़े सामान्य तौर पर एक दूसरे से अपरिचित होते हैं. लेकिन जब इन्हीं जोड़ों के बीच पहली बार प्यार पनपता है तो ये एक दूसरे की प्रतीक्षा करते हैं और एक दूसरे को समझने का प्रयास करते हैं. यह सिर्फ शारीरिक रिश्ते कायम करने के लिये नहीं बल्कि एक दूसरे को चूमने के लिये, छूने के लिये और बातें करने के लिये. इस दौरान की इनकी जिंदगी आशाओं से भरी होती है.लेकिन जब इनके बीच कुछ समय गुजर जाता है तो इनका आंतरिक अनुभव कम उत्तेजना को महसूस करने लगता है. सेक्स ज्यादा समय तक नयापन नहीं दे सकता. लेकिन मेलजोल किसी पुरुष को बहकाने का सबसे बड़ा हथियार है. और इसका प्रयोग कर जो महिला यह जानती है कि उसके पार्टनर के अंग ही उसे अधिकतम आनंद दे सकते है वह आसानी से सफल हो सकती है.
यह जरूरी है कि सेक्स बहकाने की क्रिया का महज एक हिस्सा मात्र है. किसी अवसर विशेष के लिये काफी लंबी उत्तेजना को पाना है तो इसके लिये तैयारी करनी पड़ती है. आप चाहें तो उस अवसर विशेष के लिये कहीं से सेक्सी फिल्म की भी व्यवस्था कर सकती हैं. इसके अलावा यह भी किया जा सकता है अपने पार्टनर के साथ खूबसूरत शाम को टहलने और डिनर के लिये बाहर भी जाया जा सकता है.यह प्रक्रिया भी अवसर को भुनाने का बेहतरीन माध्यम बन सकती है.
यह उसके लिये विशेष शाम है इसलिये आप कुछ ऐसा पहने जो उसे जागृत कर दे. हो सके तो कोशिश करें कि कपड़े जब आप चेंज कर रहीं हो तो आपका पार्टनर आपके साथ ही हो. यह ध्यान जरूर रखे अभी पहनी गई ड्रेस का रात में असर होगा. इसलिये पोशाक ऐसी भी हो जो रात को भी आसान हो. जैसे कुछ पुरुष जल्दी ही कंट्रोल खोने वाले होते हैं. इस लिये इनकी पसंद हमेशा जल्दी खुलने वाली टिनी बटनें होती है. कुछ इस तरह अपने पार्टनर की रुचि और अवसर के हिसाब से ड्रेस का पहनावा भी माहौल बनाने में सहायक होता है.

अवसर विशेष के लिये यह जरूरी है कि दिन के वक्त ही माहौल बनाया जाय. यदि आप काम करती हैं तो प्रयास करें कि उस दिन आप जल्दी घर पहुंचे और ऐसा करके आप उन्हें या अपने पार्टनर को भी तैयार होने का मौका दें. कुल मिलाकर एक शांत पानी में हलचल पैदा करने के लिये दिन के वक्त ही पत्थर फेंकना होगा. जिसका असर रात में तूफान के रूप में दिखेगा.
अन्ततः अपना मूड प्यार के लिये तैयार करें. जब खाना तैयार हो जाये तो शरीर पर गर्मी की वजह से छलके पसीने और थकावट को दूर कर तरावट लाने के लिये स्नान कर लें. . इस प्रक्रिया से आप का मूड रात के लिये और बेहतर बन जायेगा और आप एक हल्कापन महसूस करेंगी.
अब आप ड्रेसअप होने में समय दें.
जब वह बाथरूम से वापस आए तो आप भी अपने हल्के गीले कपड़ों को बदलें. इस दौरान कपड़े बदलने की क्रिया ऐसी हो कि वह आपको नजर भर कर देख सके. इससे उसे आगामी समय में होने वाली स्थितियों का सहज अंदाजा हो जाएगा जो उसके लिये एक सहज संकेत होगा.
आप अपने पार्टनर की सेक्सुअल क्षमताओं के बारे में बेहतर जानते हैं. अक्सर यह पाया जाता है शुरुआती दौर में ज्यादातर पुरुष प्यार के दौरान कम से कम दो चरमोत्कर्ष मे सक्षम होते हैं.
डोली ये सब इसलिए सोच रही थी क्योंकि मुंशीजी उसे एक साल तक के लिए बुक करने का मन बना चुके थे .

Thursday, August 26, 2010

लवगुरु , भाग-२० , आपने तो बताया कि आप बिजनैसमैन हैं, फिर पैसों की चिंता क्यों करते हो ? जीवन भर कमाते रहे हो . उस दौलत का क्या करोगे ? कभी कभी ऐसा
होता है कि लोग धन संग्रह करते-करते अपनी सारी उम्र गुजार देते हैं . उन्हें धन तो मिल जाता है मगर कभी शान्ति नहीं मिल पाती. सुख और संतुष्टि नहीं मिल पाती.
मैं ये बातें आपके बारे में नहीं कह रही हूँ. मगर अक्सर देखा और सुना गया है कि दौलत पर मरने वाले और सिर्फ दौलत के दीवाने लोग कभी हसीनों का प्यार नहीं प्राप्त
कर पाते, वे प्यासे आते हैं और दुनिया से प्यासे ही चले जाते हैं. अगर हो सके तो आप ऐसी स्थिति से बचियेगा क्योंकि ये जन्म बार -बार नहीं मिलता. अनमोल है ये जीवन .
मुंशीजी- मैं समझ गया , तुम्हारा इशारा मेरी तरफ है और मैंने बुरा नहीं मना. बात में दम है . मैंने जीवन भर सिर्फ धन संग्रह ही तो किया . मैंने रिश्तों -नातों और प्यार -
मोहब्बत को कभी तरजीह नहीं दी . मैंने अपनी जवानी के महत्वपूर्ण पल ऐसे ही बेकार कर दिए . जीने के लिए सांस लेना जितना जरूरी है, दौलत जरूरी है , इश्क भी इससे
कुछ कम अहमियत नहीं रखता. अब याद आते हैं वे पल जब कई लड़कियों ने मेरे समक्ष प्रेम प्रस्ताव रखे मगर उस समय मैंने उनको रिजेक्ट कर दिया , क्योंकि उस वक्त
मैं पढ़ना चाहता था, मेरा ख्याल था कि पढ़ने-लिखने की उम्र में प्यार -मोहब्बत की बातें करना गुनाह है. इससे ध्यान भटक जाएगा . पढाई पूरी करने के बाद कैरियर के बारे
में सोचने लगा, प्यार मोहब्बत को मैंने उस वक्त भी वर्जित समझा , क्योंकि मुझे अपना ध्यान भटकने का डर था. एक जगह सरकारी महकमे में नौकरी भी मिल गयी , मगर जल्दी
ही उससे दिल ऊब गया, ज्यादा दौलत कमाने के लिए व्यापार शुरू किया . फ्री उसमे रम गया. किसी और चीज के लिए समय ही नहीं बचा . और जब होश आया को सब कुछ लुट चूका था
मेरी उम्र ५० को छूने लगी है. लड़किया इस उम्र को ढली हुई मानती हैं और सोचती हैं कि इस उम्र का व्यक्ति जिस्म को सुख संतुष्टि नहीं दे सकता .
डोली- ओह सोरी . मेरा मतलब आपका दिल दुखाना नहीं था . मैं तो बस ऐसे ही कह रही थी. लोगों से सुनी हुई बातें. काहिर, उनकी छोडिये , मैं नहीं मानती कि आपकी उम्र का व्यक्ति
मुझे सुख संतुष्टि नहीं दे पायेगा. मेरी मा कहती है कि अगर खाने को मिले तो मर्द और बर्ध कभी बूढ़े नहीं होते. बर्ध समझती हो ? बैल को कहते हैं .
मुंशीजी- अब मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता. एक बार बड़ी मुश्किल से मिली हो , मैं नहीं चाहता कि अब देर हो जाए . अगर सचमुच तुम्हें ऐतराज नहीं है तो यहाँ के जिम्मेदार
प्रतिनिधि से बात कराइए , मैं तुम्हें प्पूरे साल भर के लिए बुक करके अपने साथ ले जाना चाहता हूँ . इस शर्त के साथ कि आगे से वे लोग तुम्हें परेशान नहीं करेंगे .
आजाद हो जाओगी तुम . अपनी मर्जी की मालिक . जों जी में आये करना. मैं अगर अच्छा नहीं लागूं तो तुम अपना रास्ता चुनने के लिए स्वतंत्र रहोगी .
मुंशीजी भावुकता में न जाने क्या-क्या कहते चले जा रहे थे और डोली सोच रही थी कि उसका बड़े खतरनाक आशिक से पाला पड़ा है . फिर भी हालात उसके ही
पक्ष में थे वह प्लान बनाने लगी कि अगर मुंशीजी उसे एक साल के लिए बुक कर लेते हैं तो उनकी करोड़ों की प्रोपर्टी को हड़पने के लिए उसे इससे ज्यादा वक्त नहीं मिलेगा
इस दौरान वह अपने मंहगे और पक्के कस्टमर्स का इंटरटेन भी कर सकती है . उसकी सोच का सिलसिला उस समय टूटा जब मुंशीजी ने उसे झकझोर कर कहा-
-अचानक कहाँ गुम हो गयीं मेरी जान ?
डोली- जस्ट आपके बारे में ही सोच रही थी. कितने बहले इंसान हैं आप . कितना चाहने लगे हैं मुझे मैं इस प्यार को संभाल पाउंगी कि नहीं.
मुंशीजी- ओह , डोली . तुम्हारी ये गोलाईयां कितनी मनमोहक हैं. ये चिकनी जांघें आज रात भर सोने नहीं देंगी. थोड़ा और करीब आओ न.
डोली- इस बदन के हर हिस्से पर तुम्हारा अधिकार है और हमेशा तुम्हारा ही रहेगा . जब तक जान रहेगी , तब तक .
मुंशीजी- मेरे तो जैसे नसीब खुल गए हैं . यह मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ. आज मैं लवगुरु से मिला था. उन्होंने प्यार करने , किस करने और सेक्स करने के कई टिप्स सिखाये हैं
आज मैं इन सबको तुम पर प्रयोग करने वाला हूँ.
डोली- आप मिले उनसे ? मेरी भी बड़ी इच्छा है दर्शन करने की. क्या उन्होंने कंदम के बारे में नहीं बताया , मैंने सुना है वे हर व्यक्ति को सलाह देते हैं कि सेक्स करते समय
कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें. कंडोम भी अच्छी कंपनी का हो, क्योंकि उसके फटने का डर रहता है.
मुंशीजी- अरे वाह, तुम्हें कैसे मालूम ?
डोली- आपने यहाँ की हर दीवार पर उनके पोस्टर नहीं देखे . सब पर यह सलाह लिखी होती है .
मुंशीजी मुस्कराते हुए डोली की चिकनी जाँघों को चूमने लगे. डोली भी गर्म हो चुकी थी. वह अपने प्यासे होठों से मुंशीजी के खास अंग को चूमने लगी.

Wednesday, August 25, 2010

लवगुरु , भाग-१९ , डोली ने मुंशीजी के होठों पर अपने दहकते हुए होठ रख दिए , यह एहसास बहुत ही अपनत्व भरा और सुखद था. मुंशीजी को लगा जैसे सारा जमाना रुक गया हो. हर तरफ फूल खिल
गए हों, पेड़ों पर पंछी चहकने लगे हों. दुनिया से जैसे अँधेरा मिट गया हो. बस उजाला ही उजाला फ़ैल गया हो, कि जैसे जग से दुःख दर्द का नामोनिशान ही मिट गया हो ,
वे खुशियों के समुन्दर मेंडुबकी लगाने लगे. डोली उस्ताद थी, उसने इतना दीर्घ चुम्बन लिया कि मुंशीजी बड़ी मुश्किल से आउट होते-होते बचे. वे काम वासना की आग में झुलस रहे
थे, बहुत सालों से वे स्त्री के संसर्ग में नहीं आये थे. जब कभी किसी महिला को देखकर उत्तेजित होते तो बस बाथरूम का ही सहारा था, मगर उसमे वो सुख कहाँ ? उसे तो
ऐसा समझिए जैसे कि इंसान खुद पर जुल्म कर रहा हो. वह करते तो खुद का शोषण करने जैसा होता है. मजबूरी में मुंशीजी को भी अपने हाथ जगन्नाथ बनाने पड़ते थे.
डोली के होठों के साथ-साथ उसके हाथ भी हरकत कर रहे थे. वह उनकी सोयी हुई ताकत को जगाने का प्रयास कर रही थी. वह सोच रही थी कि जल्दी से जल्दी उसे जिस्मानी
सुख दे दिया जाए, उम्र तो है ही ज्यादा , थोड़ी देर में ही आउट हो जायेंगे , इसके बाद वे तो सोयेंगे हे , साथ ही उसको भी जल्दी सोने के मौक़ा मिल जाएगा. डोली ने मुंशीजी
को जों कहानी सुनाई थी, वह पूरी फ़िल्मी थी. वह अपनी मर्जी से जिस्म फरोशी के बाजार में आई थी. यह ठीक है कि उसके घर की हालत कुछ खास नहीं थी, मगर इतनी भी खराब नहीं थी
कि उसे खाने तक से महरूम होना पड़े. उसने तो बहुत ऊंचे -ऊंचे खाब देखे थे, उन्हीकी पूर्ती के लिए उसने अपने खूबसूरत जिस्म को बेचकर दौलत कमाने की शुरुआत की थी.
वह अथाह दौलत की मलिका बन्ना चाहती थी, चमचमाती कारें, लंबे=चौड़े बंगले , गहने और हाई फाई जीवन शैली उसकी खास कमजोरियां थीं. वह सिर्फ दौलत की गुलाम थी .
दौलत के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती थी. वह प्रख्यात कॉल गर्ल थी. वह जिस -जिस ग्राहक को अटेंड करती थी, उसे अपनी अदाओं का ऐसा दीवाना बनाती थी
कि वह ताउम्र के लिए उसका गुलाम बन जाता था. उसके ऊपर अपना सारा धन खर्च कर डालता था. उस शहर में अक्सर यह चर्चा छोड़ी रहती थी कि डोली हर साल उसने कितने करोरपतियों
को खाकपति बनाया . वह जितनी ज्यादा खूबसूरत थी, उसकी अदाएं उससे भी ज्यादा मनमोहक थी. जब मुंशीजी गर्म होने लगे तो बोले-
-तुम्हारे हाथों में जादू है डोली. मैं आज बहुत खुश हूँ.
डोली- मेरी तपस्या तो तब पूरी होगी जब आप सुबह मेरे काम की तारीफ़ करेंगे.
मुंशीजी- तारीफ़ छोडिये, मैंने तो तुमको हमेशा के लिए अपने दिल में बसा लिया है. इससे बढ़कर क्या तारीफ होगी कि मैं हमेशा के लिए तुम्हें अपनी बनाने के लिए राजी
हो गया हूँ, एक बार अगर हाँ, कहदो तो मैं तुम्हारे माता -पिता से भी बातचीत कर लूंगा .
डोली- ओह , सिर्फ एक साल की ही तो बात है . जब यहाँ से इनका एग्रीमेंट पूरा हो जाएगा . तब मैं खाली हो जाउंगी .
मुंशीजी- लेकिन तब तक तो हजारों भेडिये तुम्हारे जिस्म को रौंद चुके होंगे. कैसे चलेगा ये सब ? मैं चाहता हूँ कि तुम्हारा यह सोने सा शरीर हमेशा पवित्र रहे.
डोली- तन तो सिर्फ मिट्टी है, इसका आत्मा से क्या सम्बन्ध है ? मेरा दिल तुम्हारा है , यह जीवन तुम्हारा है और क्या चाहिए ?
मुंशीजी- मेरा मतलब ये नहीं था . मैं ये कैसे गवारा कर सकता हूँ कि मेरी महबूबा के जिस्म को कोई दूसरा स्पर्श करे ?
डोली- आप अगर सिर्फ मेरे बदन से ही मोहब्बत करेंगे तो तकलीफ में रहेंगे . शरीर तो नश्वर है . इसको तो एक दिन मिट्टी में मिलना ही है. फर्ज करो कि कोई दुर्घटना हो
जाती है और उसमे मैं कुरूप हो जाती हूँ तो क्या छोड़ दोगे मुझे ?
मुंशीजी- हरगिज नहीं, तब की बात अलग होगी , मगर फिलहाल तो यही है कि हम पोजीटिव सोचेंगे .
डोली- मुझे प्यार हो गया है आपसे. आपऐसा क्यों सोचते हैं कि मेरे यौवन का रस आप नहीं चख सकते . आप मुझे किसी गैर के हाथों में पड़ने ही क्यों देते हैं ? मेरे पास
एक रास्ता है, आप चाहें तो साल भर के लिए मेरी बुकिंग करा सकते हैं. आपकी रकम भी कम हो जायेगी. ये लोग आपको कंशेसन दे देंगे . अगर इकठ्ठा साल भर के लिए बुक नहीं करना चाहें तो महीने भर की बुकिंग करा
सकते हैं, इस तरह मैं महीने भर तो आपके साथ ही रहूंगी . आपको ही आनंद देती रहूंगी. आपको ही सुख संतुष्टि देती रहूंगी .
मुन्शीजी -ऐसे तो बजट बहुत बढ़ जाएगा यार . कई लाख रुपये हो जायेंगे महीन भर में .
डोली- आपको दौलत और मोहब्बत से किसी एक को ही चुनना होगा.
मुंशीजी- ठीक है, मैं बात करूँगा. कौन है जिम्मेदार व्यक्ति ? आप मैनेजर से सुबह मेरी बात करवाना.

Tuesday, August 24, 2010

लवगुरु, भाग-१७ , क्या इस तरह की कोई ट्रेनिंग भी आपकी दुनिया में डी जाती है कि पहले तो ऐसी कथा सुनाओ कि मर्द अपने आपको भूल जाएँ, आपकी अदाओं के सागर
में डूब जाएँ और इसके बाद जब चाहो आप उन्हें उनके औकात बतादो . मेरे साथ भी तो यही हुआ. पहले तो ऐसी बातें बतलाईं कि दिल दीवाना हो गया. तुम्हार यह हसीन
चेहरा हमेशा के लिए मेरी आँखों की गहराइयों में समा गया, तुम दिल की रानी बन बैठीं और जब मेरा दिल तुम्हारे लिए धड़कने लगा तो तुम्हारे भी नखरे बढ़ने लगे हैं. जब मैं
कहता हूँ कि बात अगर पैसों की है तो दोगुने ले लों, अगर भरोसा नहीं है स्टेम्प पेपर पर लिख्वालो मगर हमारे साथ चलो तो चुप हो जाती हो .
डोली- मुझे वादे तोड़ने के आदत नहीं है, झूठ बोलना मेरे लिए विष पीने के सामान है . जब मैं इस ऑर्गनाइजेशन से एडवांस ले चुकी हूँ, यह वादा कर चुकी हूँ कि साल भर
तक मैं उनके आदेश का पालन करूंगी , वे मुझे जिस भी इंसान के पास भेजंगे , मैं खुशी-खुश अपना जिस्म सौंप दूंगी . अब अगर मैं आपको हाँ करती हूँ तो उनको बुरा लगेगा .
यह मेरी वादाखिलाफी है. मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ ? मैंने मुकर जाना नहीं सीखा. माफ कीजियेगा आपसे पहले मुझे इन लोगों ने ऑफर कर दिया है .
मुंशीजी- जों बुरे लोग हैं, जिनकी नीयत में खोट है आखिरकार उनसे वादाखिलाफी करना क्या बुरा है . गलत को गलत काम से ही काटा जा सकता है. जैसे कि लोहा लोहे को काटता
है . अगर इन जिस्म बेचने वालों को तुम इनकार कर देती हो तो यकीन मानो ये तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते. ये कुछ भी करने लायक नहीं है . झूठ के पैर नहीं होते .
डोली- ओके मेरे राजा. आओ तो सही.नाराज मत होना. कल क्या होगा, कौन जानता है . हम आज के बारे में बात क्यों नहीं कर सकते ? जों खुशियाँ हम आज लूट सकते हैं ,
उनको कल की किसी बात के लिए हम क्यों गंवाएं ? यह ठीक नहीं है . ऐसा नहीं होता कि कल के लिए हम अपने आज को भूल जाएँ . ज़रा मुस्कराओ तो सही .
डोली रूठे हुए मुंशीजी को मना रही थी . उसके दिल के तार झनझना उठे. प्यार की लहरें उसे अपने आगोश में लेने लगीं. वे सोचने लगे कि अगर उनकी प्रेमिका छबीली ने
इनकार भी कर दिया तो वे डोली के सहारे अपना जीवन स्वर्ग से भी बेहतर बना सकते हैं. डोली भी सुन्दर है, पढ़ी-लिखी समझदार लड़की है. उसके सामने तो छबीली भी कुछ
नहीं ठहरती है . छबीली की चढी हुई जवानी ने मुंशीजी को ऐसा दीवाना बनाया कि अब उनके ऊपर से छबीली का प्रभाव धीरे -धीरे कम हो रहा था और डोली के यौवन और कातिल
अदाओं का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा था. अब मुंशीजी कि समझ में ये बात आयी कि जिस छबीली के बिना वे एक पल भी जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे, जिसे पाने के
लिए वे अपना सब कुछ दांव पर लगा सकते थे , उससे सुन्दर लड़किया भी दुनिया में माजूद हैं. फिर उसे वेटर के शब्द याद आने लगे , उसने कहा था कि छबीली से भी ज्यादा सुन्दर
माल चाहिए तो मिल जाएगा . तो क्या डोली से सुन्दर लड़कियां भी हैं ? तब तो उससे भी सुन्दर ही होंगी . इस तरह संसार में हर तरह के लोग मौजूद हैं. एक से बढ़कर एक. फिर
उन्हें ख़याल आया कि व्यर्थ ही वे एक दायरे में कैद हो रहे थे. बेकार ही रोजाना घुट-घुटकर मर रहे थे. अब उनके जीवन से अँधेरा छंटने लगा. आशा के दीप टिमटिमाने लगे. उनको
यह पक्का यकीन हो गया कि उन्हें उनका प्यार जरूर मिलेगा . वे चाहें तो बेहतरीन से बेहतरीन हसीना से वि९वाह रचा सकते हैं. पैसे के लिए कुछ लड़कियां अपना जिस्म तक
समर्पित करने के लिए तैयार हो जाती हैं, जैसे कि डोली ने वैश्या बन्ना स्वीकार कर लिया है, ऐसी न जाने कितनी ही मजबूर लड़कियां होंगी , जों सुन्दर होने के साथ-साथ सुशील
और समझदार भी होंगी . तब वे उनके साथ घर बसाने के लिए राजी क्यों नहीं हो सकतीं. उसको सोच में गुम देखकर डोली परेशान हो गयी , बोली-
-क्या बात है जान , क्या मेरी बातों का बुरा मान गए ?
मुंशीजी- अगर तुम्हारी बातों का बुरा मानेंगे तो जियेंगे कैसे ?
डोली- बहुत कम समय में आपने मेरे दिल को छू लिया है . आपके जाने के बाद कई दिनों तक अच्छा नहीं लगेगा .
मुंशीजी- मैं भी बहुत प्रेम करने लगा हूँ तुमसे . अभी तक कुंवारा हूँ और हमेशा के लिए इन जुल्फों के साये में क्षण गुजारना चाहता हूँ .
डोली- अगर मेरी मजबूरी नहीं होती तो निश्चित मानिए कि मैं हरगिज इनकार नहीं करती .
मुंशीजी- प्यार में पहले इनकार और फिर इकरार होता है .
डोली- मैं तो पहले आपको दिल से अपना मान चुकी हूँ.
मुन्शीजी- तो फिर क्या समझूं ?
डोली- आइये आपके होठों को चूम लेती हूँ.
लवगुरु, भाग-१७ , क्या इस तरह की कोई ट्रेनिंग भी आपकी दुनिया में डी जाती है कि पहले तो ऐसी कथा सुनाओ कि मर्द अपने आपको भूल जाएँ, आपकी अदाओं के सागर
में डूब जाएँ और इसके बाद जब चाहो आप उन्हें उनके औकात बतादो . मेरे साथ भी तो यही हुआ. पहले तो ऐसी बातें बतलाईं कि दिल दीवाना हो गया. तुम्हार यह हसीन
चेहरा हमेशा के लिए मेरी आँखों की गहराइयों में समा गया, तुम दिल की रानी बन बैठीं और जब मेरा दिल तुम्हारे लिए धड़कने लगा तो तुम्हारे भी नखरे बढ़ने लगे हैं. जब मैं
कहता हूँ कि बात अगर पैसों की है तो दोगुने ले लों, अगर भरोसा नहीं है स्टेम्प पेपर पर लिख्वालो मगर हमारे साथ चलो तो चुप हो जाती हो .
डोली- मुझे वादे तोड़ने के आदत नहीं है, झूठ बोलना मेरे लिए विष पीने के सामान है . जब मैं इस ऑर्गनाइजेशन से एडवांस ले चुकी हूँ, यह वादा कर चुकी हूँ कि साल भर
तक मैं उनके आदेश का पालन करूंगी , वे मुझे जिस भी इंसान के पास भेजंगे , मैं खुशी-खुश अपना जिस्म सौंप दूंगी . अब अगर मैं आपको हाँ करती हूँ तो उनको बुरा लगेगा .
यह मेरी वादाखिलाफी है. मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ ? मैंने मुकर जाना नहीं सीखा. माफ कीजियेगा आपसे पहले मुझे इन लोगों ने ऑफर कर दिया है .
मुंशीजी- जों बुरे लोग हैं, जिनकी नीयत में खोट है आखिरकार उनसे वादाखिलाफी करना क्या बुरा है . गलत को गलत काम से ही काटा जा सकता है. जैसे कि लोहा लोहे को काटता
है . अगर इन जिस्म बेचने वालों को तुम इनकार कर देती हो तो यकीन मानो ये तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते. ये कुछ भी करने लायक नहीं है . झूठ के पैर नहीं होते .
डोली- ओके मेरे राजा. आओ तो सही.नाराज मत होना. कल क्या होगा, कौन जानता है . हम आज के बारे में बात क्यों नहीं कर सकते ? जों खुशियाँ हम आज लूट सकते हैं ,
उनको कल की किसी बात के लिए हम क्यों गंवाएं ? यह ठीक नहीं है . ऐसा नहीं होता कि कल के लिए हम अपने आज को भूल जाएँ . ज़रा मुस्कराओ तो सही .
डोली रूठे हुए मुंशीजी को मना रही थी . उसके दिल के तार झनझना उठे. प्यार की लहरें उसे अपने आगोश में लेने लगीं. वे सोचने लगे कि अगर उनकी प्रेमिका छबीली ने
इनकार भी कर दिया तो वे डोली के सहारे अपना जीवन स्वर्ग से भी बेहतर बना सकते हैं. डोली भी सुन्दर है, पढ़ी-लिखी समझदार लड़की है. उसके सामने तो छबीली भी कुछ
नहीं ठहरती है . छबीली की चढी हुई जवानी ने मुंशीजी को ऐसा दीवाना बनाया कि अब उनके ऊपर से छबीली का प्रभाव धीरे -धीरे कम हो रहा था और डोली के यौवन और कातिल
अदाओं का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा था. अब मुंशीजी कि समझ में ये बात आयी कि जिस छबीली के बिना वे एक पल भी जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे, जिसे पाने के
लिए वे अपना सब कुछ दांव पर लगा सकते थे , उससे सुन्दर लड़किया भी दुनिया में माजूद हैं. फिर उसे वेटर के शब्द याद आने लगे , उसने कहा था कि छबीली से भी ज्यादा सुन्दर
माल चाहिए तो मिल जाएगा . तो क्या डोली से सुन्दर लड़कियां भी हैं ? तब तो उससे भी सुन्दर ही होंगी . इस तरह संसार में हर तरह के लोग मौजूद हैं. एक से बढ़कर एक. फिर
उन्हें ख़याल आया कि व्यर्थ ही वे एक दायरे में कैद हो रहे थे. बेकार ही रोजाना घुट-घुटकर मर रहे थे. अब उनके जीवन से अँधेरा छंटने लगा. आशा के दीप टिमटिमाने लगे. उनको
यह पक्का यकीन हो गया कि उन्हें उनका प्यार जरूर मिलेगा . वे चाहें तो बेहतरीन से बेहतरीन हसीना से वि९वाह रचा सकते हैं. पैसे के लिए कुछ लड़कियां अपना जिस्म तक
समर्पित करने के लिए तैयार हो जाती हैं, जैसे कि डोली ने वैश्या बन्ना स्वीकार कर लिया है, ऐसी न जाने कितनी ही मजबूर लड़कियां होंगी , जों सुन्दर होने के साथ-साथ सुशील
और समझदार भी होंगी . तब वे उनके साथ घर बसाने के लिए राजी क्यों नहीं हो सकतीं. उसको सोच में गुम देखकर डोली परेशान हो गयी , बोली-
-क्या बात है जान , क्या मेरी बातों का बुरा मान गए ?
मुंशीजी- अगर तुम्हारी बातों का बुरा मानेंगे तो जियेंगे कैसे ?
डोली- बहुत कम समय में आपने मेरे दिल को छू लिया है . आपके जाने के बाद कई दिनों तक अच्छा नहीं लगेगा .
मुंशीजी- मैं भी बहुत प्रेम करने लगा हूँ तुमसे . अभी तक कुंवारा हूँ और हमेशा के लिए इन जुल्फों के साये में क्षण गुजारना चाहता हूँ .
डोली- अगर मेरी मजबूरी नहीं होती तो निश्चित मानिए कि मैं हरगिज इनकार नहीं करती .
मुंशीजी- प्यार में पहले इनकार और फिर इकरार होता है .
डोली- मैं तो पहले आपको दिल से अपना मान चुकी हूँ.
मुन्शीजी- तो फिर क्या समझूं ?
डोली- आइये आपके होठों को चूम लेती हूँ.

Monday, August 23, 2010

lavguru , bhaag-17

लवगुरु , भाग-१७ मेरी तरफ से हर पल यही कोशिश रहेगी कि आपको पूरा सुख मिले, संतुष्टि मिले और मेरा ऐसा साथ मिले जों जीवन भर तुम्हें किसी और लड़की के
साथ न मिल पाए . इसी बहाने आप जीवन भर मुझे याद करते रहें, मेरा चेहरा आपकी खूबसूरत आँखों के सामने टिका रहे. यही मेरा इनाम होगा. मेरे लिए इससे बढ़कर कोई
पुरस्कार नहीं हो सकता कि आप मुझे सुकून देने वाली, मस्ती देने वाली लड़की के रूप में याद करें, मैं आपको इस रात बहुत ही यादगार प्यार देने वाली हूँ.
मुंशीजी- सच ? तुम्हें देखकर लगता है जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूँ . या किसी ऐसे लोक में आ गया हूँ , जहाँ सिर्फ सुख ही सुख हैं . दर्द का कोई नामोनिशान नहीं है .
एक ऐसे लोक में, जहाँ पर परियां निवास करती हैं . जों फूलों की तरह खिलती हैं, चिड़ियों की तरह चहचहाती हैं और अपनों की तरह. बिलकुल अपनों की तरह बतियाती हैं.
मैं लगभग जीवन के ५० बसंत देख चुका हूँ मगर मैंने कभी भी जीवन में धरती का ऐसा आदर्श रूप नहीं देखा. आज देखा तो प्रसन्नचित हूँ. मुझे तुम्हारी इस भोली मुस्कान
ने दीवाना बना दिया है . अगर तुम चाहो और तुम्हारे स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुन्शे तो एक बात कहने की इजाजत चाहता हूँ .
डोली- ये क्या कह रहे हैं आप ? आप और मुझसे इजाजत चाहते हैं . अरे आप तो मालिक हैं मेरे. आज की रात के स्वामी . आज मैं अपनी लाइफ में इतना बड़ा काम करने जा
रही हूँ, अपना तन आपको सौंपकर अपने पारिवारिक दायित्व पूरे करने जा रही हूँ . और इसमें मेरे हमसफ़र आप है . सच क्लाहूँ तो यहाँ आने से पहले मैं बहुत डरी हुई थी.
सोचती थी ना जाने पहली रात को कैसा ग्राहक मिलेगा. शायद कोई शराबी , जिसके मुंह से बदबू आ रही होगी . जों सिगरेट के काश पर काश लगा रहा होगा और मुझे मिलते
ही मुझ पर भूखे भेडिये की तरह टूट पड़ेगा , मुझे गाली देगा , मारपीट भी क्र सकता है . और मैं सिर्फ सेवा करने के लिए चुनी गयी हूँ. इस रात मुझे किसी भी सूरत में , किसी
भी हालत में , किसी भी शर्त पर बस ग्राहक को सम्पूर्ण संतुष्टि देने के लिए चुना गया है . मुझे सब कुछ सहना है, सुनना है . मगर ग्राहक को कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए ,
चाहे वो मेरी जान ही क्यों न लेले. और इन भयानक कल्पनाओं के बीच आप मुझे ऐसे ग्राहक मिले जिससे बात करने को जी चाहता है, प्यार करने को जी चाहता है . अपना सब कुछ हंसी-हंसी
समर्पित करने को जी चाहता है . और आप है कि कुछ कहने के लिए मेरी इजाजत चाहते हैं. प्लीज कहिये आप .
मुंशीजी- ओके सबसे पहले तो शुक्रिया . मैं इतनी तारीफ़ के लायक तो हूँ नहीं , खैर, मैं ये कहना चाहता था कि अगर महीनेके दस हजार के बदले आपको हर महीन खाने -खर्चे से
अलग बीस हजार रुपये महीने मिल जाएँ और रोजाना नए- नए ग्राहक बदलने से भी मुक्ति मिल जाए तो क्या तुम इस नौकरी को छोड़ सकती हो ? मैं जस्ट पूछ रहा हूँ .
डोली- शायद नहीं , क्योंकि पता नहीं वह नया व्यक्ति कैसा होगा ? वह मेरा क्या इस्तेमाल करेगा , मुझे किस हाल में रहेगा यह कुछ भी स्पष्ट नहीं है . जबकि यहाँ की तस्बीर
मेरे सामने है, मैं जानता हूँ कि हर रात मुझे काम वासना के भूखे भेडियो के सामने बिछना है . उन्हें खुश करना है .
मुंशीजी- मैं अपनी बात कर रहा हूँ. अगर मैं तुम्हें अपने साथ लेकर चलता हूँ और सिर्फ अपने लिए रखूंगा . अपनी महबूबा बनाकर , अपनी जान बनाकर . अभी तक मैं
कुंवारा हूँ , हो सकता है विधाता ने अभी तक मुझे इसलिए कोई दुल्हन नहीं डी, क्योंकि तुम जों मिलने वाली थीं. और तुमसे हसीन कौन होगी इस दुनिया में ?
डोली- ओह . अभी तक कुंवारे हो . आप भी कोरे हैं, कुंवारे हैं और मैं भी कोरी, करारी और कुंवारी हूँ. खूब जोड़ी जमेगी. फिलहाल आपको दस हजार देकर काउंटर से
एक रसीद बनवानी होगी , उसी रसीद के जरिये हमको लोज में एंट्री मिल पायेगी.
मुंशीजी- लोज में क्यों ? जब हमारा कमरा बुक है तो ?
डोली- ये सवाल मैंने भी किया तो मुझे बताया गया है कि सुरक्षा के नजरिये से ऐसा किया जाता है. लोज ऐसे स्थान पर है जहां कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता .
मुंशीजी- ओह, हां, ये भी जरूरी है.लीजिए दस हजार रुपये , तुम काउंटर से रसीद बनवा लाओ , तब तक मैं तैयार होता हूँ .
डोली- ठीक है अपना ऑर्डर भी अभी लिखवा दीजिए ताकि हमारे वहाँ पहुँचते-पहुँचते ऑर्डर भी तैयार होकर पहुँच जाए.
कुछ ही देर में सब फोर्मेलिटी पूरी की जा चुकी थीं, जब डोली और मुंशीजी लोज में पहुंचे तो काफी खुश थे . वास्तव में होटल मैनेजमेंट ने खूब सुरक्षा
का ध्यान रखा था , डोली सजधजकर आयी थी, जब उसने अपने कपडे बदले और सिर्फ नाइटी पहनकर मुंशीजी के सामने आई तो उनका कलेजा धक् धक्धक्
करने लगा. झीनी-झीनी नाइटी से उसका अंग -प्रत्यंग साफ़-साफ़ झलक रहे थे. उसके यौवन के उभार देखकर मुंशीजी के मुंह में पानी आने लगा. बोले-
-वाह , सचमुच क़यामत नजर आती हो, मगर मेरे प्रस्ताव को हंसी में उडा चुकी हो

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Sunday, August 22, 2010

lav guru bhag-16

लवगुरु , भाग-१६ , और अगर शोर्ट टाइम का मजा लेना हो तो सिर्फ पांच हजार में ही काम बन जाएगा .ये फीस मेरी अपनी नहीं है. हम तो हुक्म के गुलाम
हैं, हमें जों बताया जाता है , हम् वही करते हैं. वैसे भी आज मेरा यह पहला दिन है. इससे पहले मैंने ऐसा माहोल कभी देखा नहीं है . अगर आप सहयोग करेंगे
तो मुझे भी औरों की तरह यहाँ पर जॉब मिल जायेंगी. मुझे भी अपने परिवार के भरण-पोषण का सहारा मिल जाएगा . वैसे आप चाहें तो आपको इससे कम या
ज्यादा रेट पर मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत लड़कियां मिल जायेंगी. मगर मुझे आपने नापसंद किया तो मेरी तनख्वाह घटाने का उन लोगों को पूरा बहाना मिल जाएगा
मुंशीजी- कौन हैं वे लोग ? क्या तुम यहाँ पेमेंट पर काम करती हो ? कितना मिलेगा महीने का ?
डोली- रहना -खाना और महीने के दस हजार मिलेंगे, यानि कि मैं पूरे दस के दस हर महीने अपने घर भेज सकती हूँ ,लेकिन यह सब आप जैसे लोगों पर भी निर्भर
है , क्या करें , पढ़-लिखकर भी कहीं नौकरी नहीं मिलती. कहीं मेहनत -मजदूरी करने जाओ तो वे पहले इज्जत ही लूटना चाहते हैं. अब अगर इज्जत ही लुटवा नी
है तो उसकी कीमत भी क्यों न वसूली जाए. ये लोग कौन हैं, कहाँ रहते हैं , कुछ पता नहीं . वे अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं . मैं नहीं जानती उनके बारे में .
मुंशीजी- अगर ऐसी बात है तो तुम यहाँ पर आयीं कैसे ?
डोली- मैंने अखबार में मोडलिंग का एक विज्ञापन पढ़ा था , उसमे ईमेल एड्रेस दिया गया था. मैंने उस पर अपना बायोडाटा भेज दिया तो किसी ने मुझे फोन कर कहा -
- अपने मोडल बनने के लिए जों विज्ञापन दिया था , मैं वहीं से बात कर रहा हूँ , क्या तुम सचमुच मोडल बनना चाहती हो ?
डोली- जी, मैं खूब मेहनत करूंगी . बस एक बार चांस मिल जाए . फिर आपको कभी शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगी , आप जैसा बोलोगे करूंगी .
- पक्का ? वैसा ही करोगी ?
डोली- हाँ, कसम से. क्या मुझे चुन लिया गया है ?
-हाँ , मगर उससे पहले आपको स्क्रीनिंग टेस्ट से होकर गुजरना पडेगा. अगर तुम पास हो गईं तो निश्चित ही तुम्हें काम दिया जाएगा.
डोली- मुझे करना क्या होगा ? और उसके बदले क्या मिलेगा ?
-गुड. सही सवाल किया है तुमने , इससे पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो , तुम मोडल क्यों बनना चाहती हो ?
डोली- पैसे के लिए मुझे रुपयों की सख्त जरूरत है .
- ठीक है . अब मैं तुम्हारे सवाल का जवाब देता हूँ,. तुमने पूछा कि तुम्हें करना क्या होगा ? कुछ खास नहीं. बस रात भर मजे लूटने होंगे . हर रात तुम्हारा एक नया दुल्हा
तुमसे सुहागरात मनाने आया करेगा. तुम्हें उसको संतुष्ट करना है . अगर इस तरह तुम उसे खुश करती रहीं, तो खाना खर्चा काटकर हर महीने तुम्हें दस हजार मिल जायेंगे , यहसौदा पूरी तरह
तुम्हारी इच्छा पर निर्भर है . अगर मेरा प्रस्ताव पसंद हो तो मुझे इसी नुम्बर पर ठीक एक घंटे बाद फोन कर लेना.
मुंशीजी- ओह , फिर क्या हुआ ? तुमने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया ?
डोली- हाँ , मैंने बहुत सोच विचार किया. गाँव के लड़के रोजाना मुझ पर फब्तियां कसते रहते थे , मुझे अकेले में पकड़ने के चांस ढूंढते रहते थे. मैं जान गयी कि गरीब कि लुगाई सबकी
भाभी होती है. मैं जिस माहौल में थी, वहाँ भी मेरी इज्जत तार-तार होनी ही थी सो मैंने फोन करने वालेको हाँ कहदी. कोई व्यक्ति मेरे पिता से मिला था , उसने एक साल का एडवांस मेरे
घरवालों को दे दिया है. अब हम एक कमरे में कई लड़कियां साथ -साथ रहती हैं,. आज मुझे आपके साथ भेजा गया है. मुझे कहा गया है कि आपको खुश करने में कोई कसार नहीं छोडूं
मुंशीजी- ओह. तुम्हें जानकार हैरत होगी कि मैंने भी आज तक किसी लड़की के साथ रात नहीं बिताई है , मैं नहीं जानता कि सेक्स का सुख क्या होता है. इस तरह हम दोनों ही अनाडी
हैं. यहाँ के वेटर ने मुझे बहुत कन्वेंस किया , और जब वह मुझे तुम्हारे पास लेकर आया तो तुम्हें देखते ही मेरा ईमान डोल गया, तुम बुत सुन्दर हो . मेरी इच्छा जाग्रत होने लगी ....
डोली- क्या ? बोलो न . थम क्यों गए ?
मुंशीजी- तुम्हारे यौवन का रस पीने की इच्छा . मैं तुम्हारे इन उभारों से खेलना चाहताहूँ.
डोली- आज की रात तुम मेरे पति हो, प्रेमी हो, मेरा जीवाण हो , मेरे सब कुछ हो. मेरे अंग-अंग पर आपका अधिकार है , चाहे जों करो , मुझे इनकार नहीं .

lav guru bhag-16

लवगुरु , भाग-१६ , और अगर शोर्ट टाइम का मजा लेना हो तो सिर्फ पांच हजार में ही काम बन जाएगा .ये फीस मेरी अपनी नहीं है. हम तो हुक्म के गुलाम
हैं, हमें जों बताया जाता है , हम् वही करते हैं. वैसे भी आज मेरा यह पहला दिन है. इससे पहले मैंने ऐसा माहोल कभी देखा नहीं है . अगर आप सहयोग करेंगे
तो मुझे भी औरों की तरह यहाँ पर जॉब मिल जायेंगी. मुझे भी अपने परिवार के भरण-पोषण का सहारा मिल जाएगा . वैसे आप चाहें तो आपको इससे कम या
ज्यादा रेट पर मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत लड़कियां मिल जायेंगी. मगर मुझे आपने नापसंद किया तो मेरी तनख्वाह घटाने का उन लोगों को पूरा बहाना मिल जाएगा
मुंशीजी- कौन हैं वे लोग ? क्या तुम यहाँ पेमेंट पर काम करती हो ? कितना मिलेगा महीने का ?
डोली- रहना -खाना और महीने के दस हजार मिलेंगे, यानि कि मैं पूरे दस के दस हर महीने अपने घर भेज सकती हूँ ,लेकिन यह सब आप जैसे लोगों पर भी निर्भर
है , क्या करें , पढ़-लिखकर भी कहीं नौकरी नहीं मिलती. कहीं मेहनत -मजदूरी करने जाओ तो वे पहले इज्जत ही लूटना चाहते हैं. अब अगर इज्जत ही लुटवा नी
है तो उसकी कीमत भी क्यों न वसूली जाए. ये लोग कौन हैं, कहाँ रहते हैं , कुछ पता नहीं . वे अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं . मैं नहीं जानती उनके बारे में .
मुंशीजी- अगर ऐसी बात है तो तुम यहाँ पर आयीं कैसे ?
डोली- मैंने अखबार में मोडलिंग का एक विज्ञापन पढ़ा था , उसमे ईमेल एड्रेस दिया गया था. मैंने उस पर अपना बायोडाटा भेज दिया तो किसी ने मुझे फोन कर कहा -
- अपने मोडल बनने के लिए जों विज्ञापन दिया था , मैं वहीं से बात कर रहा हूँ , क्या तुम सचमुच मोडल बनना चाहती हो ?
डोली- जी, मैं खूब मेहनत करूंगी . बस एक बार चांस मिल जाए . फिर आपको कभी शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगी , आप जैसा बोलोगे करूंगी .
- पक्का ? वैसा ही करोगी ?
डोली- हाँ, कसम से. क्या मुझे चुन लिया गया है ?
-हाँ , मगर उससे पहले आपको स्क्रीनिंग टेस्ट से होकर गुजरना पडेगा. अगर तुम पास हो गईं तो निश्चित ही तुम्हें काम दिया जाएगा.
डोली- मुझे करना क्या होगा ? और उसके बदले क्या मिलेगा ?
-गुड. सही सवाल किया है तुमने , इससे पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो , तुम मोडल क्यों बनना चाहती हो ?
डोली- पैसे के लिए मुझे रुपयों की सख्त जरूरत है .
- ठीक है . अब मैं तुम्हारे सवाल का जवाब देता हूँ,. तुमने पूछा कि तुम्हें करना क्या होगा ? कुछ खास नहीं. बस रात भर मजे लूटने होंगे . हर रात तुम्हारा एक नया दुल्हा
तुमसे सुहागरात मनाने आया करेगा. तुम्हें उसको संतुष्ट करना है . अगर इस तरह तुम उसे खुश करती रहीं, तो खाना खर्चा काटकर हर महीने तुम्हें दस हजार मिल जायेंगे , यहसौदा पूरी तरह
तुम्हारी इच्छा पर निर्भर है . अगर मेरा प्रस्ताव पसंद हो तो मुझे इसी नुम्बर पर ठीक एक घंटे बाद फोन कर लेना.
मुंशीजी- ओह , फिर क्या हुआ ? तुमने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया ?
डोली- हाँ , मैंने बहुत सोच विचार किया. गाँव के लड़के रोजाना मुझ पर फब्तियां कसते रहते थे , मुझे अकेले में पकड़ने के चांस ढूंढते रहते थे. मैं जान गयी कि गरीब कि लुगाई सबकी
भाभी होती है. मैं जिस माहौल में थी, वहाँ भी मेरी इज्जत तार-तार होनी ही थी सो मैंने फोन करने वालेको हाँ कहदी. कोई व्यक्ति मेरे पिता से मिला था , उसने एक साल का एडवांस मेरे
घरवालों को दे दिया है. अब हम एक कमरे में कई लड़कियां साथ -साथ रहती हैं,. आज मुझे आपके साथ भेजा गया है. मुझे कहा गया है कि आपको खुश करने में कोई कसार नहीं छोडूं
मुंशीजी- ओह. तुम्हें जानकार हैरत होगी कि मैंने भी आज तक किसी लड़की के साथ रात नहीं बिताई है , मैं नहीं जानता कि सेक्स का सुख क्या होता है. इस तरह हम दोनों ही अनाडी
हैं. यहाँ के वेटर ने मुझे बहुत कन्वेंस किया , और जब वह मुझे तुम्हारे पास लेकर आया तो तुम्हें देखते ही मेरा ईमान डोल गया, तुम बुत सुन्दर हो . मेरी इच्छा जाग्रत होने लगी ....
डोली- क्या ? बोलो न . थम क्यों गए ?
मुंशीजी- तुम्हारे यौवन का रस पीने की इच्छा . मैं तुम्हारे इन उभारों से खेलना चाहताहूँ.
डोली- आज की रात तुम मेरे पति हो, प्रेमी हो, मेरा जीवाण हो , मेरे सब कुछ हो. मेरे अंग-अंग पर आपका अधिकार है , चाहे जों करो , मुझे इनकार नहीं .

lav guru bhag-16

लवगुरु , भाग-१६ , और अगर शोर्ट टाइम का मजा लेना हो तो सिर्फ पांच हजार में ही काम बन जाएगा .ये फीस मेरी अपनी नहीं है. हम तो हुक्म के गुलाम
हैं, हमें जों बताया जाता है , हम् वही करते हैं. वैसे भी आज मेरा यह पहला दिन है. इससे पहले मैंने ऐसा माहोल कभी देखा नहीं है . अगर आप सहयोग करेंगे
तो मुझे भी औरों की तरह यहाँ पर जॉब मिल जायेंगी. मुझे भी अपने परिवार के भरण-पोषण का सहारा मिल जाएगा . वैसे आप चाहें तो आपको इससे कम या
ज्यादा रेट पर मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत लड़कियां मिल जायेंगी. मगर मुझे आपने नापसंद किया तो मेरी तनख्वाह घटाने का उन लोगों को पूरा बहाना मिल जाएगा
मुंशीजी- कौन हैं वे लोग ? क्या तुम यहाँ पेमेंट पर काम करती हो ? कितना मिलेगा महीने का ?
डोली- रहना -खाना और महीने के दस हजार मिलेंगे, यानि कि मैं पूरे दस के दस हर महीने अपने घर भेज सकती हूँ ,लेकिन यह सब आप जैसे लोगों पर भी निर्भर
है , क्या करें , पढ़-लिखकर भी कहीं नौकरी नहीं मिलती. कहीं मेहनत -मजदूरी करने जाओ तो वे पहले इज्जत ही लूटना चाहते हैं. अब अगर इज्जत ही लुटवा नी
है तो उसकी कीमत भी क्यों न वसूली जाए. ये लोग कौन हैं, कहाँ रहते हैं , कुछ पता नहीं . वे अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं . मैं नहीं जानती उनके बारे में .
मुंशीजी- अगर ऐसी बात है तो तुम यहाँ पर आयीं कैसे ?
डोली- मैंने अखबार में मोडलिंग का एक विज्ञापन पढ़ा था , उसमे ईमेल एड्रेस दिया गया था. मैंने उस पर अपना बायोडाटा भेज दिया तो किसी ने मुझे फोन कर कहा -
- अपने मोडल बनने के लिए जों विज्ञापन दिया था , मैं वहीं से बात कर रहा हूँ , क्या तुम सचमुच मोडल बनना चाहती हो ?
डोली- जी, मैं खूब मेहनत करूंगी . बस एक बार चांस मिल जाए . फिर आपको कभी शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगी , आप जैसा बोलोगे करूंगी .
- पक्का ? वैसा ही करोगी ?
डोली- हाँ, कसम से. क्या मुझे चुन लिया गया है ?
-हाँ , मगर उससे पहले आपको स्क्रीनिंग टेस्ट से होकर गुजरना पडेगा. अगर तुम पास हो गईं तो निश्चित ही तुम्हें काम दिया जाएगा.
डोली- मुझे करना क्या होगा ? और उसके बदले क्या मिलेगा ?
-गुड. सही सवाल किया है तुमने , इससे पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो , तुम मोडल क्यों बनना चाहती हो ?
डोली- पैसे के लिए मुझे रुपयों की सख्त जरूरत है .
- ठीक है . अब मैं तुम्हारे सवाल का जवाब देता हूँ,. तुमने पूछा कि तुम्हें करना क्या होगा ? कुछ खास नहीं. बस रात भर मजे लूटने होंगे . हर रात तुम्हारा एक नया दुल्हा
तुमसे सुहागरात मनाने आया करेगा. तुम्हें उसको संतुष्ट करना है . अगर इस तरह तुम उसे खुश करती रहीं, तो खाना खर्चा काटकर हर महीने तुम्हें दस हजार मिल जायेंगे , यहसौदा पूरी तरह
तुम्हारी इच्छा पर निर्भर है . अगर मेरा प्रस्ताव पसंद हो तो मुझे इसी नुम्बर पर ठीक एक घंटे बाद फोन कर लेना.
मुंशीजी- ओह , फिर क्या हुआ ? तुमने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया ?
डोली- हाँ , मैंने बहुत सोच विचार किया. गाँव के लड़के रोजाना मुझ पर फब्तियां कसते रहते थे , मुझे अकेले में पकड़ने के चांस ढूंढते रहते थे. मैं जान गयी कि गरीब कि लुगाई सबकी
भाभी होती है. मैं जिस माहौल में थी, वहाँ भी मेरी इज्जत तार-तार होनी ही थी सो मैंने फोन करने वालेको हाँ कहदी. कोई व्यक्ति मेरे पिता से मिला था , उसने एक साल का एडवांस मेरे
घरवालों को दे दिया है. अब हम एक कमरे में कई लड़कियां साथ -साथ रहती हैं,. आज मुझे आपके साथ भेजा गया है. मुझे कहा गया है कि आपको खुश करने में कोई कसार नहीं छोडूं
मुंशीजी- ओह. तुम्हें जानकार हैरत होगी कि मैंने भी आज तक किसी लड़की के साथ रात नहीं बिताई है , मैं नहीं जानता कि सेक्स का सुख क्या होता है. इस तरह हम दोनों ही अनाडी
हैं. यहाँ के वेटर ने मुझे बहुत कन्वेंस किया , और जब वह मुझे तुम्हारे पास लेकर आया तो तुम्हें देखते ही मेरा ईमान डोल गया, तुम बुत सुन्दर हो . मेरी इच्छा जाग्रत होने लगी ....
डोली- क्या ? बोलो न . थम क्यों गए ?
मुंशीजी- तुम्हारे यौवन का रस पीने की इच्छा . मैं तुम्हारे इन उभारों से खेलना चाहताहूँ.
डोली- आज की रात तुम मेरे पति हो, प्रेमी हो, मेरा जीवाण हो , मेरे सब कुछ हो. मेरे अंग-अंग पर आपका अधिकार है , चाहे जों करो , मुझे इनकार नहीं .

Saturday, August 21, 2010

लवगुरु , भाग-१५

हम जैसे गरीबों के पास कुछ खास नहीं होता, सेवा भावना ही तो होती है. अगर हम उससे भी जी चुराएं तो कोई मतलब नहीं निकलता है . हमारी कोई डिमांड भी नहीं होती, ना ही कमीशन होता है. डायरेक्ट हम लोग ग्राहक के साथ लड़की की मीटिंग कराते हैं, वही पैसे तय करती है. इधर आपने माल पसंद किया और उधर आप दाम तय कर रहे होते हैं. अगर सौदा नहीं पटता तब भी किसको कोई ऐतराज नहीं होता. उस स्थिति में आपको दूसरी -तीसरी या फिर जों चाहो वो लड़की दिखाई जायेगी. अगर तब भी आपकी बात नहीं बन पाती तो मैं हूँ न . मैं मुफ्त में सेवा दने के लिए तैयार हूँ. मेरी कोई फीस नहीं होती. नवाबी शौक रखने वाले लोग मुझे बहुत पसंद करते हैं. खूब मजा देता हूँ.
उसकी बात सुनकर मुंशीजी को आश्चर्य हुआ, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कोई लड़का इस तरह ऑफर कर सकता है. उसने सुना जरूर था कि बड़े-बड़े शहरों में या बड़े- बड़े होटलों में पुरुस्भ भी अपने जिस्म को बेचने का कारोबार करते हैं, मगर उसने पहली किसी को प्रस्ताव रखते हुए देखा था. कन्फर्म करने के लिए उन्होंने पूछा-
-तुम ? तुम कैसे सेवा करोगी ? मैं समजह नहीं, थोडा स्पष्ट करो.
वेटर- क्या साहब , इतने नादाँ भी नहीं लगते आप , जों इतनी सी बात को नहीं समझ पायें. मैं जानता हूँ कि आप सब कुछ जान गए हैं, मैं संतुष्टि की बात कर रहा हूँ, परम सुख की बात कर रहा हूँ. कोई अच्छी मोडल भी इतना सुख नहीं दे पायेगी जितना कि मैं दे सकता हूँ.आपको इसके लिए कोई कीमत भी चुकानी नहीं होती, हाँ, अगर दिल भर जाए , आपको ये लगे कि आप पूरी तरह से खुश हो गए हैं तो इच्छानुसार कुछ भी टिप्स दे देना .
मुंशीजी- मैंने कभी नहीं सुना कि इस तरह भी मजा आ सकता है . जों काम लड़कियों का है, उसे वही अंजाम दे सकती हैं. तुम उनकी पूर्ती कैसे कर पाओगे ?
वेटर - कुछ बातें ऐसी होती हैं साहब , कि बताने से मजा नहीं आता . इस्तेमाल करने में ही आनंद मिलता है.
मुंशीजी- अगर ऐसी बात है तो आज कोई हसीना को बुलवाओ , कल आपकी सेवायें स्वीकार की जायेंगी .
वेटर- मैंने एस एम् एस कर दिया है , आप मेरे साथ पांचवी मंजिल पर चलिए, वहाँ कोंफ्रेंस होल में हुस्न का बाजार सजा हुआ है. जिस पर आपकी उंगली रख जायेगी , समझो इस रात की रानी आपकी वही हो जायेगी.
मुंशीजी उसके साथ चलने के लिए राजी हो गए. उनके मन में गुदगुदी सी होने लगी. दिल में काम वासना की आग सी भडकने लगी. ऐसा एहसास होने लगा जैसे कि उनके सामने सैकड़ों हूर परी अपने-अपने वस्त्र उतारकर खड़ी हुयी हैं. वे उन हसीनों के उभारों को चूम रहे हैं. लड़कियां मुस्करा रही हैं . वे खुद को शहंशाह समझ रहे हैं. एक ऐसा शहंशाह जिसके स्वागत के लिए हुस्न का बाजार सजाया गया है. जों भी हसीना उनके मन को अच्छी लगती है वे उसके गालों पर हाथ फिरा देते हैं, किसी को चूम भी लेते हैं. सब कुछ ठीक चल रहा है . उनका गुप्त अंग कडककर तबाही मचाने के लिए तैयार हो रहा है . तभी वेटर की आवाज सुनकर उनकी तंद्रा भंग होती है, वेटर उन्हें सूचित करता है कि उनकी मंजिल आ चुकी है. वे एक विशाल होल में पोरावेश करते हैं. वहां पर करीं ३० लड़कियां मौजूद थीं. सभी उम्र की लड़कियां थीं. सचमुच उनके सामने फिल्म की हीरोइन भी कुछ नहीं . हैरत की बात ये थी कि मुंशीजी उनमे से किसी भी लड़की को फेल नहीं कर पाए. वेटर ने उनका परिचय कराया , सभी लड़कियों ने बारी -बारी से उनसे हाथ मिलाया . मुंशीजी ने एक लड़की की तरफ इशारा कर दिया तो वेटर उस लड़की के साथ उनके पीछे -पीछे हो लिया. मुंशीजी लड़की पसंद कर चुके थे . हैरत की बात ये थी कि उन्होंने अपने दिल से भी डोली को ही पसंद किया था . वही डोली जिसकी सुंदरता की तारीफ़ उनसे वेटर ने की थी.
वेटर अब डोली को छोड़कर वापस अज चुका था. उसे कंडोम सहित और भी कई चीजें लेनी थीं. डोली का ओरादर भी लेना था. उसके जाने के बाद मुंशीजी ने लड़की के हुस्न की तारीफ़ करने के बाद कहा -
- आपका शुभ नाम जान सकता हूँ.
डोली- मैं डोली हूँ. आज रात मुझे आपकी सेवा करने का सौभाग्य मिलेगा, यही सोचकर रोमांचित हो रही हूँ .
मुंशीजी- ओह, शुक्रिया . सच मानो तो इसकी ज्यादा खुशी मुझे हो रही है.
डोली- तब तो यह मेरा सौभाग्य ही है. आपको शायद रेट बताने की जरूरत होगी ?
वेटर- कितना होता एक रात का ?
डोली- सिर्फ दस हजार रुपये.










Friday, August 20, 2010

लवगुरु, भाग-१४

मुंशीजी- अरे भाई आप जाइए , अपना काम देखिये . मैं इस तारक इंसान नहीं हूँ. तुम गलत जगह पर निशाना लगा रहे हो. तुम्हारा अपना ही समय बेकार हो रहा है . मैं तो इसे इंजॉय कर रहा हूँ.
वेटर- तब तो ठीक है सर . इसका मतलब ये हुआ कि आप भी अब इसमें इंटरेस्ट लेने लगे हैं . मैं आपको एक पटाखा आइटम दिखाता हूँ. उसका सीना देखोगे तो आपकी जीभ लार डालने लगेगी. अगर उसकी आँख देख लोगे तो शराब पीने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. वैसे ही नशा हो जाएगा . रात भर होश आ जाए तो गारंटी है . जों बोलें हार जाउंगा , और फिर टाइम भी ठीक -ठाक तरह से पास हो जायेगा. फ़ोकट में तमाशा देख सकते हो . अगर कोई माल जमे तो ठीक वरना कोई पैसा नहीं . अपने कमरे में आकर आराम कर सकते हैं. आप एक बार देखेंगे तो अपने शहर की हसीनों को भी भूल जायेंगे. हमारा होटल स्पेशल है इस मामले में. ये बात मैं नहीं कह रहा हूँ , सारी दुनिया कहती है. जों एक बार हमारे यहाँ की मेहमान नवाजी का लुत्फ़ उठा लेते हैं, वे अगली बार न चाहते हुए भी यहाँ आते हैं और हमारे यहाँ ही ठहरते हैं. तो मैं एल्बम दिखाऊँ ?
मुंशीजी- अच्छा , इसका मतलब आप जों हैं वो वेटर कम हैं , दलाल ज्यादा है . अब समझ गया. ये मामला है .
वेटर- जी नहीं, दलाल नहीं सेवक हैं. सेवा करते हैं , और आपकी इच्छा में जों आये वही लेकर संतुष्ट रहते हैं. हम अपनी अतिरिक्त सेवा का आपके साथ कोई मोलभाव नहीं करते. यह हमारी ड्यूटी का हिस्सा भी नहीं है . इसके बावजूद हम आगे बढ़कर आप जैसे मेहमानों को सेवा करने का ऑफर करते हैं . मर्जी आपकी है सर .
मुंशीजी- तो क्या आपको होटल से भी इसका अलग से कमीशन नहीं मिलता होगा ?
वेटर- अगर ऐसा होता तो हम अब तक वेटर नहीं होते बल्कि अपना होटल खोलकर बैठे होते. या आपकी तरह आराम से देश -परदेश घूम -घूमकर ऐश फरमा रहे होते. सर हम लोगों को सिर्फ पगार मिलती है . अगर हम अपने ग्राहक को ज्यादा खुश कर देते हैं, हाथ पाँव की मेहनत से उनका दिल जीत लेते हैं तो वे खुश होकर हमें कुछ रुपये दे देते हैं. जैसे किसी ने १०० रुपये दे दिए. कोई ज्यादा खुश हुआ तो दो सौ -पांच सौ दे दिए . और क्या ? बस यही सब मिलता है . यहाँ रहकर लखपति थोड़े ही बना जा सकता है . तो दिखाऊँ साहब ?
मुंशीजी जान गए कि वेटर भी पहुंचा हुआ है , ऐसे ही मानने वाला नहीं है . तो उन्होंने मन ही मन एल्बम देखने का निश्चय कर लिया , यह सोचकर कि आखिर देखने में बुराई भी क्या है . कुछ फीस तो देनी नहीं है .यानि बिना कुछ खर्चा किये अच्छा खासा होने की उम्मीद थी. उसने वेटर से पूछ भी लिया-
- चलो ठीक है , अगर ऐसा है तो दिखा ही दीजिए. मगर ये न समझना कि मैं पसंद कर ही लूंगा .
वेटर खुश हो गया . आखिर उसकी मेहनत ने रंग दिखाना जों शुरू कर दिया था. काफी देर की मशक्कत के बाद मुंशीजी मान पाए थे. उसने डोली नामक लड़की की एक एल्बम उनके सामने तुरंत सरकादी. मुंशीजी उस तस्बीर को निहारते ही रह गए, वेटर मुस्करा रहा था और मुंशीजी पलक झपकाना भी भूल गए. दुनिया की सबसे सुन्दर हसीना की तस्बीर उनके सामने थी . उन्होंने अगला फोटो देखा , यह पहले वाले से भी कातिल था. डोली की गोलाइयां थोड़ी सी बाहर दिखाई दे रही थीं. उसे देखते ही मुंशीजी के दिल धड़लने लगा , अपने होठों को काटने लगा , वेटर ने दूसरी तरफ मुंह फेर रखा था , मुंशीजी बोले-
- क्या इस तरह की कोई लड़की सचमुच मौजूद है , या किसी मोडल का फोटो दिखा रहे हो ?
वेटर- साहब , फोटो तो कुछ भी नहीं , अगर प्रत्यक्ष देखोगे तो जाओगे कि असलियत में यह और भी ज्यादा सुन्दर है . रात भर मजा देगी. सिर्फ दस हजार का खर्चा आएगा. और देखने , मिलने की कोई कीमत नहीं . मेरा मानिए तो मिल लीजिए एक बार . और खूबसूरत चाहिए तो उसका भी इंतजाम किया जाएगा , मगर यह ठीक तरह से सर्विस करती है. आपको शिकायत का कोई मौक़ा नहीं देगी. जैसे बोलोगे वैसे करेगी .मस्त चिकना माल है . उसके गाल देख लोगे तो सोचोगे कि खाना खाने की क्या जरूरत है ?और अगर उसका बदन देखोगे तो सदा के लिए दीवाने हो जाओगे , उसकी प्रोफाइल में यही लिखा है , पढ़ लीजिए . मुलाक़ात फिक्स करवाऊं ?
मुंशीजी- मगर ?
वेटर- अगर -मगर कुछ नहीं, मैं कोंल कर रहा हूँ . दुनाएं देंगे आप .














Thursday, August 19, 2010

लवगुरु , भाग-१३

मुंशीजी- आप बहुत अच्छे हैं, आपकी बातों में मिठास है . मेरे लिए आप खास हैं. आप गुरु भी हैं, दोस्त भी हैं और मार्गदर्शक भी .आज बहुत दिनों के बाद मुझे थोडा सा चैन नसीब हुआ है , वरना अब तक दिल बेकरार रहा करता था. सोचता रहता था कि इस जन्म में छबीली से मुलाक़ात हो भी पाएगी कि नहीं, मगर अब आशा बंधने लगी है.
लवगुरु- एक मन्त्र गाँठ बांध् लों . यहाँ पर कुछ भी असंभव नहीं है. कुछ भी . बस इंसान को ठीक तरह से काम करना आना चाहिए. कोशिश करनी चाहिए, शुरुआत होनी चाहिए . उसके बाद सफलता आपकी है. कुदरती तौर पर इंसान को इस तारक बनाया गया है कि वह सब कुछ हासिल कर सकता है. आसमां को झुका सकता है, जमीं को उठा सकता है . सच्चा प्रेमी चाहे तो अपने मिशन को हासिल कर सकता है . सिर्फ छबीली के प्रति प्रेम ही तुम्हारा आख़िरी और इकलौता प्रेम नहीं है . अगर तुम अपने बिजनेस को ऊंचाई तक पहुंचाना चाहते हो तो यह भी बहुत बड़ा प्यार है. मैं चाहता हूँ कि जितना प्रेम तुम छबीली से करते हो उतना ही खुद अपने आप से और ईश्वर भी करना.
मुंशीजी- मैं इस नसीहत को हमेशा याद रखूंगा. आज आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला है . भागदौड भरी जिंदगी में न तो किसीको ऐसे समझने का मौका मिलता है और न ही किसी को समझाने का. जों कुछ हम सीखते हैं बस अपने-अपने प्रैक्टीकल से ही सीख लेते हैं , उसके अलावा सारा समय अपने काम में ही बीत जाता है . सच तो ये भी है कि आजकल आप जैसे दिव्य पुरुष भी कम ही हैं. विचारक रहे ही कहाँ है. जों हैं भी उन्होंने दूकान खोल ली है. इसको बिजनेस का रूप दे दिया है . अब विद्वान ब्रांड बनकर रह गए हैं. एक ऐसा ब्रांड जिसे सिर्फ दौलत से भुनाया जा सकता है . अगर वे लोग दवा निकालते हैं तो अपने स्वार्थ से, कैसेट बेचते हैं, अखबार, मैग्जीन भी बेचते हैं तो सबसे पहले आर्थिक फायदा देखते हैं . पटा नहीं क्या हो गया है ? कहाँ जा रहा है मेरा देश ? मेरे धन्य भाग्य जों आपसे भेंट हो गयी. अगर दर्शन नहीं होते तो पटा नहीं मैं क्या अनर्थ कर बैठता .
ये सब कहने के बाद रुके नहीं मुंशीजी , सीधे निकल गए . उन्होंने एक होटल में शानदार कमरा बुक करवा रखा था , पहले यह स्थान इतना मशहूर नहीं था , मगर जबसे लवगुरु का उदय हुआ , तबसे देश -विदेश के लोगों की भीड़ लगने लगी. इसी कारण होटल वालों ने भी मौके का फायदा उठाया और शानदार होटल बनते चले गए. अब तो होटल वालों ने दिल्ली और मुंबई की तरह कई सुविधाएँ भी देनी शुरू कर दी हैं. अब ग्राह्को के लिए हर तरह के इंतजाम किये जाते हैं . रातें रंगीन करने के लिए नई- नई लड़कियां रखी जाती हैं.जब मुंशीजी होटल पंहुचे तो उनसे भी लड़की के बारे में पूछा गया. वेटर ने बड़े अदब से कहा-
-साहब , हमारे यहाँ सब सुविधाएँ मौजूद हैं. कहिये हम आपकी क्या खास खिदमत कर सकते हैं ?
मुंशीजी- शुक्रिया. कुछ रहेगा तो बोलूंगा. आपके यहाँ बार कितने बजे तक खुलता है ?
वेटर - कोई चिंता नहीं साहब , जब तक चाहोगे , तब तक खुलेगा. हम किस काम आयेंगे ? पूरे सेवा की जायेगी . आप जैसे बड़े लोग यहाँ आकार रुकते हैं. कोई १६ साल की लड़की माँगता है तो कोई १८ सल की.हम सब इन्त्क्जाम करते हैं. टनाटन माल रखता हूँ साहब. कोलेज गर्ल, हाउस वाइफ से लेकर एअर होस्टेस , हीरोइन , मोडल सब मिलेंगी, और अगर देसी माल चाहिए तो क्या कहने ? आपके लिए भी यह सब हो सकता है साहब. हम ग्राहक को देवता समझते हैं . सिर्फ समझते ही नहीं, देवता समझकर उनकी सेवा भी करते हैं . कहिये तो कुछ फोटोग्राफ दिख्लादूं ? एक से एक मलूक है .
मुंशीजी- नहीं यार . शुक्रिया . मुझे लड़कियों के साथ रातें रंगीन करने का शौक नहीं है.
वेटर- क्या मजाक करते हैं साहब . लवगुरु से मिलने कोई आये और कहे कि रंगीन तबियत का नहीं है , कोई मान ही नहीं सकता. किसीको यकीं नहीं आएगा. क्सिको कुछ पटा नहीं चलता . सब कुछ सीक्रेट होता है . पुलिस के साथ पक्की सेटिंग होती है . सब कुछ ठीक ठाक हो तब आप फीस दीजिए , कोई दीकत नहीं है. मैं तो इसलिए कह रहा था कि आप न जाने कितनी दूर से यहाँ अकेले आए हैं. सोचिये ये तन्हाई आपको रात भर सोने नहीं देगी.












Wednesday, August 18, 2010

लवगुरु , भाग-१२

मुंशीजी - बहुत बहुत शुक्रिया गुरुदेव. आपने तो ऐसा सजीव वर्णन कर दिया कि तब की बजात मुझे आज ही सुहागरात मनाने का मन कर रहा है. जी चाहता है कि वह अभी यहीं पर आ जाए और मैं उसे प्रेम के बारेमेंउसके समक्ष प्यार का प्रस्ताव रखूँ और कहूँ कि उसे एक बार लवगुरु से अवश्य मिलना चाहिए. छबीलीमेरा पहला प्यार है, और उसे भूल पाना मेरे लिए नामुमकिन है. किसी हालत में उसे भुला नहींसकता .एक बात और कहता हूँ गुरूजी .
लवगुरु- तुम स्वतंत्र हो, जों जी में आये कहो.
लवगुरु- एक दिन वो आएगा जब लोग दूर -दूर से आपसे प्रेम का सबक सीखने आयेंगे. आपका यह स्थान तीर्थ स्थल बन जाएगा, यहाँ लाइन लगेगी दीं दुखियारों की.
लवगुरु- ठीक है. ठीक है . अब अपने मन की भड़ास को निकाल फेंको , आपके गले में कुछ अटक रहा है मुंशीजी- किसी ने कहा था कि प्यार को भूल पाना मुमकिन नही । उम्र के उस मोड़ पर जब जिन्दगी बचपन का हाथ छोड़कर जवानी की दहलीज पर पाँव रखती है उन नाज़ुक हालातों मे दिल का बहक जाना लाजमी है ।
कैसे भूल सकता है कोई पहली बार उन नज़रों का मिलना , दिल में उमंगों का खिलना , उन कोरे कुंवारे ख़्वाबों की नर्म दस्तक , वो रात और दिन के बैचैन लम्हात , उफ़, किस क़दर मासूम होती है वो पहली पहली चाहत, ऎसी मासूमियत फिर लौटकर कभी नही आती ।
पहले
प्यार की यादें हमेशा तारो ताज़ा रहती है , ऐसे जैसे बस कल की ही बात हो, अक्सर ये एकतरफा ही रह जाता है , दोतरफा हो भी जाये तो लंबे समय तक नही निभ पाता क्योंकी इस नाज़ुक धागे से बंधे रिश्ते के पीछे सोच विचार या समझ का हिसाब किताब बिल्कुल भी नही होता , यहाँ मन लेन देन का गणित नही बिठाता , बस यूँही बिन मोल किसी का हो जाता है या किसी को अपना मान लेता है ।
पहला प्यार एक प्रेरणा है जो किसी को कवि बना देती है किसी को चित्रकार , ह्रदय में जब झंकार उठती है तो कोई आशिक बन जाता है तो कोई दीवाना । पहला प्यार वो नशा है जिसका सूरूर सारी उम्र नही उतरता .... क्योंकि पहले प्यार को भूल मुश्किल ही नही नामुमकिन होता है ।सच कहूँ तो मैं कुछ नहीं बन पाया. अच्छी तरह से दीवाना भी नहीं . मैंने छबीली को जिस दिन पहली बार देखा , तभी से उसे मन में बसा लिया था. आप कहेंगे जान बूझकर ? बिलकुल नहीं. मैंने तो उसे दिल से निकालने की बड़ी कोशिशें की मगर क्या करून, कुछ फायदा ही नहीं हुआ. दर्द बढ़ता ही गया.
मुंशीजी- दर्द बढ़ता गया कि चाहत बढ़ती गयी ? ज़रा ठीक से बताओ मेरे भाई ?
लवगुरु- पहले चाहत बड़ी और फिर दर्द . इस तरह मेरा हाल दिनों दिन खराब होता गया. रात को सपने में भी छबीली दिखाई देती है . कई बार कपडे खराब हो जाते हैं. उसकी याद आते ही मेरा यह सख्त अंग और भी ज्यादा सख्त होकर नाचने कूदने लगता है. अब मैं आपको अपने दिल की हर बात बता रहा हूँ तो इसका अर्थ ये न निकालना कि मैं काम वासना का पुजारी हूँ. मौज मस्ती के साथ-साथ मैं उसको अपना जीवन साथी भी बनाना चाहता हूँ.
लवगुरु- ये अच्छा है कि कोई बात छिपा नहीं रहे हो, अगर छिपाते तो मैं आपकी सही मदद नहीं कर पाटा. कोई बात नहीं. आज तुम जाओ . अपने होटल पहुँचो और कल आकार मुझे फिर रिपोर्ट करो. उस तरीके से फिर टिप्स देता हूँ. ओके ?और सुनो उसमे भी कुछ छिपाना नहीं है . अगर तुमको लगता है कि तुम मुझे बता नहीं सकते तो कोई बात नहीं, उन शब्दों को कागज़ पर भी लिख सकते हो.
मुंशीजी- ऐसी कोई बात नहीं है . आप गुरु तो है ही, साथ ही मरे दोस्त भी बन चुके हो. अब जीवन भर मैं इस दोस्ती को निभाउंगा. मैं अगर सपने में छबीली का चुम्मा लेता हूँ तो चुम्मा बताऊंगा और अगर उसके उसकी गोलाइयों को चूमता हूँ तो यह भी बताउंगा. आपसे कैसा पर्दा ? आप तो मेरे हमराज हैं. आप तो मुझे नई जिंदगी देने वाले हो .
लवगुरु- आप बहुत भावुक हैं मुंशीजी. ठीक है मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं . स्वीट ड्रीम्स .










Tuesday, August 17, 2010

लवगुरु, भाग-११

मुंशीजी- कमाल हो गया, बात बच्चों तक जा पहुँची है और अभी तक हमारी शादी भी नहीं हो पाई है . मैं तो उस इन्तजार में हूँ जब छबीली मेरा प्रेम प्रस्ताव स्वीकारेगी , मुझे अपने सीने से लगायेगी और शादी के लिए भी राजी हो जाएगा, उसके घर के लोग खुशी-खुश उसका हाथ मेरे हाथ में दे देंगे. तब हम दोनों सुहागरात मनाने जायेंगे. मतलब हनीमून के लिए . उसकी प्लानिंग भी कर ही ली जाये तो बेहतर होगा. कैसे करूँगा, कैसे हाथ पकडूँगा, कैसे घूंघट उठाउंगा, इस सबका हिसाब-कितान पहले ही लगा लेता हूँ. खूब मजा आएगा जब हम दोनों के जिस्म भी दिलों की तरह मिल जायेंगे. वह मुस्कराते हुए मेरे पैरों की तरफ बढ़ेगी और मैं फिल्मों का कोई घिसा पिटा डायलोग सुनाकर उसे अपने सीने से लगा लूंगा . वह डायलोग ये भी हो सकता है-
-अरे रे ये क्या कर रही हो , आपकी जगह क़दमों में नहीं, हमारे दिल में है. आ जाओ इस धड़कते हुए बेताब दिल से लग जाओ . आओ आज हम दोनों एक जिस्म दो जान हो जाएँ, तुम्हें छूने के लिए , देखने के लिए बहुत तरसा हूँ मैं. आज दिल की सारी कसार निकाल लेने दो. आज हमें मोहब्बत के समुन डर में गोते लगाने हैं. सदियों की प्यास बुझा नी है . आओ. मेरे दिल की गहराइयों में समा जाओ ताकि ह्जमेशा यहीं बसी रहो .
लवगुरु- अरे वाह, तुम तो सचमुच खुली आँखों से सपने देखने की कला जानते हो . बहुत बढ़िया तरीके से ये सब कर लेते हो , ये भी एक हुनर है यार, जों हमें कभी नहीं आया. खैर , चलो आपको सुहागरात मनाने के कुछ टिप्स देते हैं
सुहागरात जीवन का अहम पल है। हर कोई इसे यादगार बनाना चाहता है। कपल को जहां इस पल का बेसब्री से इंतजार रहता है, वहीं वे कुछ टेंशन में भी रहते हैं। उन्हें चिंता सताते रहती है कि वह अपने पार्टनर को सेक्सुअली संतुष्ट कर पाएंगे या नहीं। इस रात जल्दीबाजी में की गई कोई भी गलती आपको अपने पार्टनर के सामने झेंपने के लिए मजबूर कर सकती है।
अक्सर ऐसा होता है कि नये कपल को सेक्स
के बारे में ज्यादा नॉलिज नहीं होती। पुरुषों को प्रेमचर इजैक्युलेशन की चिंता सताती रहती है, तो महिलाएं सेक्स के वक्त होनेवाले दर्द के चलते परेशान रहती हैं। इसी डर की वजह से दोनों ठीक से शारीरिक संबंध नहीं बना पाते हैं और सुहागरात के उनके हसीन सपनों पर पानी फिर जाता है। इसलिए आप टेंशन और डर छोड़िए और एक-दूसरे में पूरी तरह डूबने की कोशिश कीजिए।
एक बात गांठ बांध लीजिए कि कोई भी आदमी मास्टर सेक्स परफॉर्मर नहीं होता। इसलिए आप पहले एक दूसरे को जानने की कोशिश करें और फोरप्ले पर ज़्यादा ध्यान लगाएं। अगर आप किसी वजह से पहली बार में अपने पार्टनर को सेक्सुअली खुश नहीं कर पाते हैं, तो घबराइए नहीं। फिर से ट्राई कीजिए इस बार फोरप्ले पर और अधिक माइंड कॉन्सनट्रेट करें।
अपने पार्टनर
के साथ आप पहली बार सेक्स कर रहे हैं, इसलिए आप ओवरएक्साइट होने से बचें। आप सेक्स के लिए वही आसन
अपनाएं जो दोनों के लिए सुविधाजनक हो। बाद में आप नए-नए एक्सपेरिमंट कर सकते हैं और सेक्स केलिए अलग-अलग आसन अपना सकते हैं।
माना कि सुहागरात मिलन की रात और ज़िंदगी में एक बार आती है। लेकिन अपने पार्टनर के साथ सेक्स करने का सुहागरात एक मात्र मौका नहीं है। सुहागरात तो सेक्सुअल संबंधों की शुरुआत की रात है। जैसे-जैसे वक्त बितेगा आप अपने पार्टनर को बेहतर तरीके से जान सकेंगे और उसकी सेक्सुअल नीड को समझ सकेंगे। इसलिए हर रात सुहागरात की तरह खास है। आपके मन में सेक्स के बारे में जो टेंशन है, उसे निकाल दीजिए और तनावमुक्त होकर अपने पार्टनर के साथ सेक्स कीजिए।
पुराने जमाने में
सुहागरात के मौके पर दुल्हन ट्रडिशनल ड्रेस पहनती थी और पति घूघंट उठाकर संबंधों की शुरुआत करता था। लेकिन आज के दौर में दुल्हन सुहागरात में सेक्सी परिधान पहनना पसंद करती हैं। पर पारंपरिक परिधान में जो चार्म है, वह सेक्सी गाउन या लॉन्जरी में नहीं है। इसलिए इस मौके पर ट्रडिशनल परिधान ही सही रहेगा, लेकिन खयाल रखें कि यह सेक्सी हो।
गिफ्ट भी
सुहागरात को यादगार बनाते हैं। घूंघट उठाने के वक्त गिफ्ट देने की रवायत रही है। इसलिए आप भी गिफ्ट दें, लेकिन यह थोड़ा हटकर होना चाहिए। आप रोमैंटिक हनीमून पैकिज़, सेक्सी ड्रेस और ग्लैमरस परिधान जैसे गिफ्ट दे सकते हैं।










Monday, August 16, 2010

लवगुरु भाग-१०

लवगुरु- हाँ, हाँ क्यों नहीं आपके गाँव भी आना है . पहले छबीली को शादी के लिए तो मना तो लों . देखो एक बात और ध्यान रखना ,डिप्रेशन जब किसी व्‍यक्ति के दिल और दिमाग में घर कर जाता है, तो उसके जीवन पर जबरदस्‍त प्रभाव डालता है। आपके रोजमर्रा के काम-काज, बात-चीत और सेक्‍स लाइफ सभी पर डिप्रेशन का बुरा असर ही पड़ता है। आप सोचेंगे सेक्‍स लाइफ का डिप्रेशन से क्‍या ताल्‍लुक, लेकिन यह सत्‍य है। मानसिक तनाव से घिरा हुआ व्‍यक्ति अपने पार्टनर के साथ स्‍वस्‍थ्‍य सेक्‍स नहीं कर सकता। विज्ञान भी इसे सिद्ध कर चुका है।
तनावग्रस्‍त व्‍यक्ति यदि अपने पार्टनर को अपने करीब आने से मना कर देता है, तो वो सिर्फ सामने वाले की भावनाओं को ही ठेस नहीं पहुंचाता, बल्कि अपने तनाव को और बढ़ाता है। इसलिए याद रहे, यदि आप किसी बात को लेकर तनावग्रस्‍त हों तो अपने साथी के साथ सेक्‍स करने से इंकार मत करें। बल्कि ऐसे समय में आपको प्‍यार, करीबी, विश्‍वास और सपोर्ट की जरूरत होती है, जिनका अनुभाव सेक्‍स करने पर आसानी से प्राप्‍त किया जा सकता है। बात सिर्फ सेक्स की ही नहीं है रोमांस की भी है .

आमतौर पर डिप्रेशन होने पर लोग सेक्‍स में रुचि दिखाना बंद कर देते हैं। वो सोचते हैं, सेक्‍स केवल मौज मस्‍ती की चीज है, बल्कि सच तो यह है कि सेक्‍स न केवल आपके विश्‍वास को बढ़ाता है, बल्कि व्‍यक्ति को नॉर्मल लाइफ में वापस लाने में सक्रिय भूमिका निभाता है।
डिप्रेशन में चले जाने के बाद ज्‍यादातर लोग सोचते हैं कि अपनी नॉर्मल लाइफ में वापस आने के लिए उन्‍हें काफी वक्‍त लगेगा। यही कारण है कि उनके अंदर अपने साथी के प्रति प्रेम या करीब आने के भाव भी खत्‍म हो जाते हैं। ऐसे में यदि पार्टनर जबरदस्‍ती सेक्‍स के लिए उकसाता है, तो व्‍यक्ति चिड़चिड़ापन दिखाने लगता है। या फिर पार्टनर की इच्‍छा रखने के लिए वो संभोग करता भी है तो बिना किसी भाव के।

किसी भी व्‍यक्ति के डिप्रेशन में चले जाने पर उसके पार्टनर की भूमिका काफी महत्‍वपूर्ण होती है। पति के लिए पत्‍नी और पत्‍नी के लिए पति ही है जो डिप्रेशन से उबरने में मदद कर सकता है। यदि आपका पार्टनर काफी डिप्रेस हो तो उसे एक दम से सेक्‍स के लिए प्रेरित नहीं करें, वरना वो चिड़चिड़ा हो सकता है। लेकिन एक बात ध्‍यान रहे यदि आप अपने पार्टनर को अपने करीब लाने में सफल हो जाते हैं, तो वो उसके लिए सबसे बड़ी दवा होगी, क्‍योंकि कामक्रीड़ा के दौरान उत्‍सर्जित होने वाले हारमोन मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

ऐसे में सबसे पहले आप अपने डिप्रेस्‍ड पार्टनर से एकांत में बैठकर बात करें। उसे यह अहसास दिलाएं कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। उसे यथार्थ से लड़ने की शक्ति दें। उससे उसके बीते हुए खुशी के पलों को याद दिलाएं। बात करते-करते उसे अपनी बाहों में भर लें। यहां पर आपका स्‍पर्श आपके डिप्रेस्‍ड पार्टनर को बल देगा। धीरे-धीरे चुंबन और फोरप्‍ले। और फिर मंजिल तक का सफर निश्चित तौर पर आपके पार्टनर को मानसिक राहत देगा।ये बातें आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि आप बहुत भोले मालूम होते हैं.
मुंशीजी- आभारी हूँ आपका. और हमेशा आपके आदेशों का पालन करूँगा.
लवगुरु- एक बात और कहता हूँ, कभी भी बिना कंडोम के कामक्रीड़ा मत करना. ऐसा करना जीवन के लिए बहुत घातक होगा. जानते हो क्यों, क्योंकि इससे यौन रोग तो होंगे ही, साथ ही गर्भ ठहरने का भी ख़तरा रहता है . इसलिए जब भी बच्चा चाहो तभी कंडोम से दूर रहना , और सुनो -बच्चे दो ही अच्छे होते हैं.



Sunday, August 15, 2010

लवगुरु, भाग-९

मुंशीजी - मैं गर्म होने लगा हूँ. जी करता है कि किसी तर्ज छबीली यहाँ आ जाए तो ये सब प्रयोग करने का मौका मिले. अब रहा नहीं जाता.
लवगुरु- अगर ज्यादा उत्तेजक हो रहे हो तो रहने दो.
मुंशीजी- ये क्या गज़ब ढा रहे हैं. मार डालने का इरादा तो नहीं न. जब आपने मुझे शिष्य बना ही लिया है तो फिर आधा -अधूरा ज्ञान मत दीजिए , बताइये मैं शादी के बाद कैसे अपनी रातें रंगीन बनाऊं ?
लवगुरु- पहले तो मैं ये क्लियर कर दूं कि मुझे लोग लवगुरु कहते हैं, मैं वही हूँ. तुम मुझे सेक्स्गुरु बनने पर आमादा हो , तुम्हारे आग्रह पर बताता हूँ, सुनो-
-पति-पत्‍नी के बीच गहरे संबंधों में सेक्‍स की काफी अधिक भूमिका होती है। सेक्‍स का सही अनुभव तभी हो पाता है जब दोनों प्रेम के आलिंगन में सम्बन्ध बनाएँ । कई बार ऐसा नहीं होता। दोनों में से कोई एक या फिर दोनों सेक्‍स की शुरुआत तक करना पसंद नहीं करते। ऐसा होने पर दोनों की रातें खराब होने लगती हैं। या फिर चाह कर भी आपको संबंधों में वो मज़ा नहीं आ रहा, जो शुरुआती दिनों में आता था।
सेक्‍स प्रेम का अंतिम पड़ाव है और साथ खाने से प्रेम बढ़ता है यह सभी जानते हैं। लिहाजा यदि आप सेक्‍स करने के मूड में हैं, और अपनी रातों को गर्म बनाना चाहते हैं ता शुरुआत रात के खाने से करनी होगी। यानी साथ बैठकर डिनर करें उसके बाद फल, बेड पर खाएं। वो भी एक ही प्‍लेट में। असल में आपके प्‍यार की यहीं से शुरुआत होती है। फोरप्‍ले भी एक कला है। इस कला के माध्‍यम से आप अपने पार्टनर को सेक्‍स के प्रति उकसाते हैं। यह एक तरह से मस्ती करने का मूड बनाने के लिए किया जाता है। अधिकांश पुरुष व महिलाएं दिन भर की थकान के बाद सेक्‍स के प्रति उत्‍साह नहीं दिखाते। यहां पर आपका दायित्‍व बनता है कि अपने पार्टनर को सेक्‍स की ओर आकर्षित करें। फोरप्‍ले की शुरुआत अपने पार्टनर को बाहों में भरते हुए करें। उसे पूरी तरह प्‍यार में डूब जाने दें। जब आपको लगे कि वो तन और मन दोनों रूप से आपके पूरी तरह करीब आ चुकी है.
आम तौर पर जब पुरुष को यह लगने लगता है कि उसकी पार्टनर सेक्‍स के लिए तैयार है, वो काम क्रीडा शुरू कर देता है। सही मायने में यह सही तरीका नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपने पार्टनर के साथ ओरल सेक्‍स करें। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण महिलाओं का सेक्‍स की चरमसीमा तक पहुंचने में देरी है। , लिहाजा उन्‍हें समय देने के लिए ओरल सेक्‍स एक बेहतरीन उपाए है। ओरल सेक्‍स उस चुंबन के माध्‍यम से किया जाता है, जो होठ से होठ लगाकर किया जाए। चुंबन के दौरान विभिन्‍न अंगों पर धीरे-धीरे मसाज करने से दोनों ओर सेक्‍स की आग तेजी से भड़क उठती है। आम तौर पर इन तीन पड़ावों के बाद संभोग की प्रक्रिया शुरू होने में समय नहीं लगता, लेकिन फिर भी अगर आपको लगे कि आपका पार्टनर मंजिल पर नहीं पहुचना चाहती है तो उसे यह जता दें, कि आप क्‍या चाहते हैं। अपने इस सीक्रेट का खुलासा बेड पर ही करें, खास तौर से पुरुष, क्‍योंकि बिस्‍तर पर जाने से पहले ही अपनी मंशा जता देने पर महिला पार्टनर के रुष्‍ट होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए बेहतरीन आलिंगन के बाद ही अपनी मंशा जाहिर करें।
सेक्‍स का अंतिम पड़ाव काम क्रीडा होता है। पुरुषों के लिए सबसे अहम बात यह है कि वो सेक्‍स ड्राइव को रुकने नहीं दे, क्‍योंकि यदि बीच में रुक गए, तो आपकी पार्टनर को चरमसीमा तक पहुंचने में और ज्‍यादा समय लग सकता है। हो सकता है कि वो चरम सीमा तक पहुंचे ही नहीं। वहीं स्त्रियों को इस दौरान सेक्‍स व प्रेम के अलावा कुछ नहीं सोचना चाहिए। क्‍योंकि दोनों से अलग हटकर एक भी बात आपकी रात को खराब कर सकती है। ऐसी कोई बात मत करें, जिससे आप दोनों के बीच तनाव हो सकता है। पूरी तरह सकारात्‍मक रहने से ही रात बेहतरीन बनती है, अगर वह किसी तरह के बार सोचने लगती भी है तो उसे फ़ौरन सही लाइन पर ले आइये.
मुंशीजी- गुरु जी एक बार चलो न हमारे साथ ........

रुद्रपुर(ऊधमसिंह नगर): बेटी के रिश्ते से नाखुश हेड कांस्टेबल ने कारबाइन से पहले उसे और बाद में खुद को गोली मार ली। दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी। बेटी की शनिवार को सगाई होनी थी। गोली की आवाज सुनकर परिजन हड़बड़ाकर जाग गये। भीतर का दृश्य देखकर उनमें कोहराम मच गया। शोर सुनकर कालोनीवासी इकट्ठा हो गये। पुलिस को सूचना दी गयी। इस पर एसएसपी समेत अन्य अफसरों ने घटना स्थल का मुआयना कर जानकारी प्राप्त की। इस सनसनीखेज वारदात से शहरवासी स्तब्ध है।

फौजी मटकोटा गांव के विजेंद्र गिरी (48) पुत्र ब्रह्मा गिरी का शहर की सिंह कालोनी गली नंबर छह में मकान है। जहां वह अपने परिवार के साथ रहता था। वर्तमान में वह नैनीताल जिले में तैनात था और कुछ माह से हल्द्वानी के जयगुरु ज्वैलर्स की मालकिन रीता की सुरक्षा में गनर के रूप में तैनात था। शुक्रवार की रात वह पुत्री दीपिका की सगाई के लिए यहां पहुंचा लेकिन वह हो रहे रिश्ते से खुश नहीं था। परिजनों के मुताबिक घर पहुंचकर विजेंद्र ने अपनी सरकारी कारबाइन अलमारी में रख शराब पीना शुरू कर दिया। नशा चढ़ा तो वह परिजनों से झगड़ने लगा। बाद में विजेंद्र पुत्र सुमित व दीपिका के साथ सो गया जबकि दूसरे कमरे में उसकी पत्‍‌नी शोभा व बड़ा पुत्र अमित सोने चले गये। अचानक मध्यरात्रि उठकर विजेंद्र फिर बवाल करने लगा। इस पर कमरे में सो रहा सुमित भी बगल वाले कमरे में जाकर मां के साथ सो गया। आधा घंटा बीता था कि विजेंद्र वाले कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इस पर उसकी पत्‍‌नी व पुत्र हड़बड़ाकर उठ गये और बगल वाले कमरे का नजारा देख उनके होश उड़ गये। घर पर कोहराम मच गया। दीपिका खून से लथपथ बैड पर जबकि विजेंद्र फर्श पर पड़ा हुआ था। बगल में सरकारी कारबाइन भी पड़ी हुई थी। चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोसी जाग गये। वे मौके पर पहुंचे तो स्तब्ध रह गये। इस दौरान उन्होंने शोभा व उसके पुत्रों को संभालते हुए पुलिस को सूचना दी। इस पर पुलिस में हड़कंप मच गया। सबसे पहले कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में एसएसपी अजय रौतेला, एएसपी अशोक भट्ट व सीओ सैंथिल अबुदेई ने घटनास्थल पर पहुंच जानकारी ली तथा नैनीताल पुलिस को सूचित किया। इधर पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भर पोस्टमार्टम कराया और कारबाइन कब्जे में ली। मृतक विजेंद्र के पुत्र सुमित ने बताया कि उसकी बहन दीपिका की शनिवार को लखीमपुरीखीरी निवासी युवक के साथ सगाई होनी थी। मगर उसके पिता इस रिश्ते से खुश नहीं थे और अक्सर इसका विरोध करते थे। इसके बावजूद मां व अन्य परिजन पिता को इस रिश्ते के लिए मनाते थे। बीती रात यह अनहोनी हो गयी। इधर एसडीएम पीसी दुम्का के बाद एसपी सिटी हल्द्वानी जेएस भंडारी ने भी यहां पहुंचकर घटना की जानकारी ली