कुंवारी सुहागिन - १७
पूजन- यह स्वभाविक है, जब हम एक जगह से संतुष्ट नहीं हो पाते, तो कमजोर हो जाते हैं. गलत फैसले लेने लगते हैं. जबकि सही और गलत में बहुत सूक्ष्म अंतर होता है. जिसने इस अंतर को पहचान लिया वह
सक्सेस हो जाता है , जों नहीं समझा वह गलत निर्णय ले लेता है.
अमृता- हाँ, ठीक कहते हो.
पूजन- अगर इस प्यार में हम थोड़ा सा अल्कोहल भी मिलादें तो मस्ती हजार गुना बढ़ जायेगी.
अमृता- वो कैसे होगा ?
पूजन- मैं अभी बोतल निकालकर लाता हूँ, थोड़ा-थोड़ा पीयेंगे , एकाध सिगरेट मारेंगे तब देखो, जोश और भी कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगा भले ही ये नशे की चीजें बुरी होती हैं मगर उतनी मजेदार भी होती हैं.
अमृता- अगर नशा इतना ही बुरा है तो सरकार इस पर रोक क्यों नहीं लगा देती ?
पूजन- क्योंकि इससे सरकार को भारी संख्या में टेक्स मिलता है. इसलिए सरकार इस पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध नहीं लगा पाती. दूसरा एक कारण यह भी होता है की सरकार से जुड़े लोग भी नशे के कारोबार से
जुड़े होते हैं, या फिर वही लोग नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए चन्दा उपलब्ध कराते हैं. इसलिए जब नशे के प्रोडक्शन पर रोक लगाने की बात आती है तो सब कुछ गुड गोबर हो जाता है.
अमृता- आपको बड़ी नोलेज है दुनिआदारी की.
पूजन- दुनिया का तो पता नहीं मगर हाँ, मुझे मोहब्बत के बारे में पूरी जानकारी है. प्यार कैसे किया जाता है, सेक्स को सरल , सफल और यादगार कैसे बनाया जाता है, इसकी मैं पूरी जानकारी रखता हूँ.
मैं वैसे भी सौंदर्य रस का कवी ज्यादा हूँ, मुझे सौंदर्य पर लिखना ज्यादा पसंद है. अब मैं प्रेम के गुण भी बताने लगूंगा. जब लोग पढेंगे की अब पूजन भी रोमांस और सेक्स पर कविता, गीत या गज़ल लिखने लगा
है तो कुछ लोग बड़ी आलोचना करेंगे , मगर उससे क्या होता है. हमें अपने काम से मतलब रखना है.
अमृता- हाँ, वो तो है. मगर अब मैं बेचैन होने लगी हूँ, तुम्हारा यह गुप्त अंग जब भी मेरे पेट से टकराता है, ऐसे आग भड़क उठती है जैसे की सूखी घास में पेट्रोल छिडककर आग लगा डी हो.
पूजन- जवानी अपने आप में ज्वालामुखी की तरह ही होती है, इसकी लपटों को रोकना आसान काम नहीं होता. बड़ी डेंजर होती है यह जिस्मानी आग.
अमृता- मुझे आग के खतरनाक होने के बारे में ही बताते रहोगे की अब इसके शांत होने का उपाय भी करोगे.
पूजन- अब इसके शांत करने का आसान उपाय यही है की इस हथियार को आहिस्ता-आहिस्ता अपने यौवन द्वार की तरफ ले जाओ. इसके दरवाजे पर रखकर अपने हाथ के सहारे से थोड़ा सा अंदर करिये , उसके बाद मेरा काम बचता
है, फिर देखिये मैं कैसे तुम्हारे जिस्म की गर्मी को शांत करता हूँ.
अमृता- मुझसे ये सब मत करवाओ प्लीज, मुझे डर लगता है, तुम तो रसिया ठहरे, मैंने तो मगर कभी भी किसी लड़के के साथ ऐसा काम नहीं किया.
पूजन- जानता हूँ मेरी जान, तुम बिलकुल कोरी , कुंवारी और करारी हो. मगर एक बार तो शुरुआत करनी ही पड़ती है.
अम्रात- जों कुछ करना है खुद ही करिये . हम कुछ नहीं कर पायेंगे.
पूजन- जों कुछ करना है वह हम दोनों मिलकर करेंगे. अकेला चना क्या भाड़ फोड़ेगा. जब हम दोनों के विचार आपस में मिलेंगे तब आनंद आएगा.
अमृता- तुम बोल रहे थे की सिगरेट पीने से जोश बढ़ जाता है ?
पूजन- उससे पहले ये जाम भी टकराओ , कोकटेल का अपना आनंद होता है.
नग्न अमृता के हाथ में पूजन ने एक गिलास थमा दिया . एक गिलास उसने खुद में होठों से लगा लिया . उन दोनों ने एक ही सांस में गिलास की शराब खत्म कर डाली . अब वे अपने आपको कुछ हल्का महसूस कर रहे
थे.अमृता के दिमाग से भी सेक्स का डर कम होने लगा. उसने महसूस किया कजी अब उसका सर हल्का हो गया था . इससे पहले वह डरी सहमी सी लग रही थी मगर अब वह पूजन के रोमांस का जवाब रोमांस के साथ दे रही
थी, जब पूजन उसके यौवन के उभारों को दबाने की कोशिश करता तो वह भी उसके गुप्त अंग से छेडछाड कर दिया करती थी, इस तरह अब वह ईंट का जवाब पत्थर से देने लगी थी. पूजन ने जब एक सिगरेट सुलगाकर उसके धुंए
उड़ाने शरू किये तो अमृता ने उसके हाथ से सिगरेट छीन ली और खुद धुनें उड़ाते हुए बोली-
-क्या तुम अकेले ही जोश और आनंद लेना चाहते हो ?
Friday, March 18, 2011
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