कुंवारी सुहागिन , भाग--13
तुम्हारा भी मन कर रहा है मगर औरत होने की कारण अपने मुझ से कह नहीं सकतीं, सोचो , अगर तुम्हारा पाँव गलत जगह फिसल गया तो क्या होगा ?
मैं तो जों भी करूँगा वह तुम्हारी खुशी के लिए करूँगा. इससे तुम्हारे तन या मन पर किसी भी तारह का गलत प्रभाव नहीं पडेगा. इसके विपरीत तुम्हारा मन खिल उठेगा . तुम्हारा चेहरा भी निखर उठेगा .
तुम जीवन को पोजीटिव नजरिये से देखने लगोगी .
अमृता- ऐसा करना पाप नहीं होता क्या ?
पूजन- कौन कहता है ? तुम अपनी इच्छा से अगर इस शरीर को थोड़ा सा आराम देना चाहती , थोड़ा सा सुख पाना चाहती हो तो बुराई क्या है ? हाँ , अगर तुम्हारा मन तुमसे बगावत करता है तो अलग बात है.
अगर ज़रा भी ऐसी इच्छा है की प्यार करना बुरी बात है, जिस्मानी खेल खेलना बुरी बात है तब तुम आजाद हो. खुशी से इनकार कर सकती हो. अपने दिल में पल रही इच्छाओं को खत्म कर सकती , उनका गला
घोंट सकती हो , लेकिन इतना याद रहे की ऐसा करना उचित नहीं है. यह अपने साथ हिंसा है, दुराचार है. घोर अत्याचार है, सख्त पाप है . जों इंसान अपने साथ दगा कर सकता है. अपने अरमानों का गला घोंट
सकता है वह कुछ भी कर सकता है. उसे दूसरे के साथ जुल्म करने में क्या दुःख होगा ?
अमृता- मैं तर्क में तुमसे नहीं जीत सकती, तुम बड़े वक्ता हो. प्रसिद्ध कवी जों ठहरे.
पूजन- ओहो, तुम भी न जाने क्या लेकर बैठ जाती हो, मैं ये कहता हूँ की एक बार मेरे साथ जिस्मानी सम्बन्ध बानाकर तो देखो, एक बार मेरी बांहों में चली आओ. अपने आपको समर्पित करदो. उसके बाद देखो क्या होता
है, तुम एक अलग ही खुशी का अनुभव करोगी, विद्वता की रोशनी अपने आप चली आयेगी . और इस सबको तुम खुद महसूस करोगी . इसमें कोई बनावटीपन नहीं है.
अमृता- तुम्हारे शब्दों से सच्चाई का एहसास होता है, तुम्हारी आँखों से वफ़ा की चमक दिखाई देती है. मगर ....
पूजन- मगर क्या अमृता, उसके बाद क्या संदेह बचता है ?
अमृता- लड़कियों के पास सबसे अहम चीज उसकी आबरू होती है. अगर उसकी आबरू के मोती चकनाचूर हो गया तो फिर बचता ही क्या है ? वह बर्बाद हो जाती है, उसके पास कुछ रह ही नहीं जाता .
पूजन- मैं मानता हूँ, यह बहुत बात है, लेकिन हम इस मोती को लुटने ही क्यों देंगे ? हम तो इस मोती का इस्तेमाल चमक बिखेरने के लिए करेंगे . मैं तुम्हारे साथ न तो जबरदस्ती कर रहा हू , ना
ही तुम्हारी इच्छा के विपरीत कोई कार्य कर रहा हूँ. इस काम क्रीडा में जितना सुख मुझे मिलेगा उससे कहीं ज्यादा तुम्हें भी मिलेगा. यह बराबर का लेखा-जोखा है. गिव एंड टेक का मामला है. इसमें तुम पूरा सम्मान
पाओगी , आदर के साथ -साथ तुम्हें प्रेम भी मिलेगा. इसलिए बदनामी होने की कोई गुंजाइश नहीं है. मैं इस तरह का व्यक्ति नहीं हूँ की तुम्हारे साथ अन्तरंग सम्बन्ध बानाते समय की तस्बीर खीच लूं या फिर फिल्म बना लूं
और उन सबका इस्तेमाल तुम्हें ब्लेकमेल करने के लिए करूं. चूकी मैं खुद भी एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हूँ इसलिए पूरी कोशिश करूँगा की हम दोनों के बीच जों सम्बन्ध स्थापित हों वे पाक साफ़ हों, मजबूत हों और उनमे प्रेम
की गहराई के साथ-साथ त्याग की भावना भी शामिल हो.
अमृता- और अगर मेरे शरीर से तुम्हारे शरीर में या तुम्हारे जिस्म से मेरे जिस्म में कोई बीमारी हो गयी तो क्या होगा ?
पूजन- तुम एड्स या अन्य रोगों की बात कर आरही हो, उसके लिए हम सुरक्षा का इस्तेमाल करेंगे, अच्छी कंपनी का कंडोम इस्तेमाल किया जाएगा और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा की वह बीच राह में ही कट न
जाए, साथ ही व बेहतरीन तरीके से लगाया जा सके.
अमृता- तो क्या इस बीच हम लोग एक दूसरे का चुम्बन नहीं लेंगे ?
पूजन- बिना चुम्बन के प्यार करना कैसे सम्भव है ? मगर चुमबन लेने से एड्स का दूर- दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं होता.
अमृता- एड्स के अलावा कोई और बीमारी तो हो सकती है ?
पूजन - प्यार या शादी से पहले पूरी बोडी की स्केनिंग कराना तो संभव नहीं होता. शरीर है इसके नादर थोड़ा बहुत कुछ हो भी सकता है मगर जाहिर तौर पर
मैं सम्पूर्ण स्वस्थ नजर आता हूँ, तुम भी तंदुरुस्त हो. आगे रब की मर्जी.
पूजन- क्या तुमने वकालत भी की है , मेरा मतलब एल एल बी भी की है क्या ?
अमृता- सिर्फ एल एल बी नहीं एल एल एम भी क्या है . आज तुम्हें भी प्यार की डाक्टरेट डिग्री दिलानी है.
Monday, March 14, 2011
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