Monday, February 28, 2011

बेवफा -६६
किरण- मुझे बोलने दो सूरज. तुम अदभुत हो . तुम्हारी शक्ति अदभुत है. जी चाहता है की सदा तुम्हारे क़दमों में पडी रहूँ.
सूरज- तुम्हारी जगह मेरे दिल में है. कहो, मजा आ रहा है की नहीं ?
किरण- हाँ, बहुत आनंद आ रहा है. ऐसा लगता है जैसे खिचड़ी में घी डाल दिया हो.
सूरज- अच्छा ... तुमने तो इस सुख को मापने का हथियार भी ढूंढ लिया.
किरण- तुम्हारे इस हथियार के सामने हर हथियार फेल है. यह गज़ब का है. इसे मै खूब प्यार दूंगी. इन पलों को सुहागरात की तरह से मनाने का इरादा है.
सूरज- माना कि सुहागरात मिलन की रात और ज़िंदगी में एक बार आती है। लेकिन अपने पार्टनर के साथ सेक्स करने का सुहागरात एक मात्र मौका नहीं है .सुहागरात तो सेक्सुअल संबंधों की शुरुआत की रात है.
जैसे-जैसे वक्त बितेगा आप अपने पार्टनर को बेहतर तरीके से जान सकेंगे और उसकी सेक्सुअल नीड को समझ सकेंगे। इसलिए हर रात सुहागरात की तरह खास है. आपके मन में सेक्स के बारे में जो टेंशन है,
उसे निकाल दीजिए और तनावमुक्त होकर अपने पार्टनर के साथ सेक्स कीजिए. मै तो बेफिक्र होकर इसका आनंद उठा रहा हूँ. मुझे किसी तरह की कोई प्रोब्लम नहीं है.
किरण- पुराने जमाने में सुहागरात के मौके पर दुल्हन ट्रडिशनल ड्रेस पहनती थी और पति घूघंट उठाकर संबंधों की शुरुआत करता था. लेकिन आज के दौर में दुल्हन सुहागरात में सेक्सी परिधान पहनना पसंद करती हैं.
पर पारंपरिक परिधान में जो चार्म है, वह सेक्सी गाउन या लॉन्जरी में नहीं है .इसलिए इस मौके पर ट्रडिशनल परिधान ही सही रहेगा, इसलिए मैंने पहले इस तरह के कपडे पहने थे. और अब तो वो भी नहीं हैं.
अब तो इस गर्म बदन को तुम्हारे लिए पेश कर दिया है.
सूरज- आपने जों प्यार दिया है, मेरे लिए यही महत्वपूर्ण है. मैंने आज तक इतना प्यार नहीं पाया. सेक्स से ज्यादा मुझे तुम्हारा प्यार लुभाता है.
किरण- अगर ऐसी बात है तो आज से मैं तुम पर प्यार लुटना शुरू कर दूंगी और इतनी मोहब्बत करूंगी की अपने दामन में संभाल भी नहीं पाओगे .
सूरज- मोहब्बत में धोखे भी तो मिल जाते हैं.
किरण- वो लोग और होंगे , हम तो इश्क में जान देने वालों में से हैं . जब कहोगे तब हम जान न्यौछावर कर देंगे .
समझिए की आपके कदमों में जान है, ईमान है. कभी आजमाकर देख लेना , अगर अपनी बात पर खरे न उतरें तब कहना . हमने आज तक किसी भी लड़की से ऐसा वादा नहीं किया. हम ये भी नहीं कहते
की तुम इतना प्यार दोगी , तभी हम बदले में प्यार देंगे. हम तो ये कहते हैं की जब भी कहोगी , हमें अपने करीब पाओगी , जों लोग महिलाओं को प्यार के जाल में फंसाकर उसके जिस्म का शोषण करते हैं
या फिर उन्हें अपने दिल में बसाने के बजाय कोठे पर पहुंचा देते हैं, हम उनसे बिलकुल अलग हैं. हर इंसान अभिप्रिय जैसा नहीं होता , जों आशिक बनकर आपका पीछा करता है, आपसे प्यार का इजहार करता
है, आपको भावनात्मक रूप से ब्लेकमेल करता है और जब आप उसे अपना दिल दे बैठती हैं तो आशिक सेदलाल बनकर आपके जिस्म का सौदा करता है. हम लोग औरत की इज्जत के लुटेरे नहीं हैं, बल्कि
उसकी लाज बचाने वाले हैं .
किरण- वो तो दिख ही रहे हो, किस तरह से लाज बचा रहे हो.
सूरज- अच्छा , इसका मतलब आप मेरा मजाक उड़ा रही हैं. ?
किरण- मजाक तो मेरा किस्मत ने उडाया है सूरज . मैं तुम्हारा मजाक कैसे बना सकती हूँ ? जबकि मेरा तो अस्तित्व ही नहीं है. मै तो अस्तित्वहीन हूँ.
सूरज- मतलब ? क्या अब आपने ज्यादा पी ली है ?
किरण- नहीं सूरज- यह सच्चाई है ?जानते हो न सच्चाई कड़वी होती है और यह कड़वा सच है की.... खैर जाने दो....
सूरज- कहते-कहते रुक क्यों रहे हो ? बताओ न ... क्या कोई दिक्कत है ?
किरण- बताने में भी मुश्किल है और छिपाने में भी...
सूरज- प्यार में न कुछ बताने के लिए होता है , और न कुछ छिपाने के लिए ... ऐसी क्या बात है जिसे अपने महबूब से छिपाना चाहती हो ?
किरण- मैं ज़िंदा नहीं हूँ सूरज , मैं मर चुकी हूँ. मुझे मरे हुए भी काफी समय हो चुका है, कहिये की एक जमाना बीत चुका है. यह सुनकर आप चौंक सकते हैं. मगर............

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