Monday, January 31, 2011

बेवफा खँडहर - 38
सकिरण- अच्छा ठीक है, जब कभी इच्छा होगी तो तुम्हारे साथ ही जाउंगी, तब तो मुझे किसीकी दहशत नहीं होनी चाहिए , आखिर तुम जों मेरे साथ रहोगे .
सूरज का दिमाग भन्ना चुका था. उसकी कोई ज्ञान्द्रीय उसे फिर से यह आभास करा रही थी की उसके साथ या तो कुछ गलत होने वाला है या फिर हो चूका है. मगर उसने अपने सिर को एक तारफ झटक दिया
और प्यार के समुन्दर में गोते लगाना लगा, वे दोनों अब चरम अवस्था में पहुँचने वाले थे. सूरज पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहा था ताकि वह उसे सम्पूर्ण सुख
डे सके, उसने सुन रखा था की औरतें ऐसे समय जोर -जोर के प्रहार पसंद करती हैं इसलिए वह जोर -जोर से प्रहार करने लगा. किरण भी खामोश होकर रतिक्रिया का सुख ले रही थी, उसके मुख से अजीब तरह की
आवाजें निकल रही थी. उससे माहौल और भी ज्यादा उत्तेजक होने लगा .इतना ज्यादा उत्तेजक की सूरज काफी देर तक उसके सीने की गोलाइयों को सहलाता रहा , किरण ने अपनी आंखें मूँद लीं . वह चाहती थी की
सूरज इसी तरह से उसे मसलता रहे, उसके होठों का रस चूसता रहे. सूरज ने उसकी ये हसरत जल्दी ही पूरी भी करदी. वह उसके पंखुड़ी जैसे होठों को ऐसे चूसता था जैसे की कोई रेगिस्तान के तपती दोपहरी में
प्यास से व्याकुल पथिक पानी मिल जाने पर उस पर टूट पड़ता हो. किरण उसकी उत्तेजना को महसूस कर रही थी, उसकी कामशक्ति को सलाम कर रही थी. उसने महसूस किया की अब तक अगर सूरज की जगह पर
कोई दूसरा मर्द रहा होता तो कबका हथियार डाल चु़का होता , लेकिन सूरज बिंदास था. उसका खास अंग भी बहादुरों की तरह मोर्चे पर मुस्तैदी के साथ डटा हुआ था. सूरज को और भी ज्यादा उकसाने के इरादे से वह तारीफ़ करते
हुए सूरज से कहने लगी-
-तुम कमाल हो, बेमिसाल हो सूरज. तुम आम इंसान जैसे नहीं हो. अगर तुम्हारे स्थान पर कोई दूसरा होता तो कब का फिनिश हो चूका होता, मगर तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं है.
सूरज- मैन तो एक जर्रा भर हूँ, मैन तारीफ़ के काबिल नहीं हूँ.
किरण- ऐसा कहकर मेरा दिल क्यों दुखाते हो. तुम साक्षात कामदेव हो. तुम मुझ जैसी औरत को भी सम्पूर्ण सुख और संतुष्टि डे सकती हो. यह बहुत बड़ी बात है वरना आजकल हो ये रहा है की मर्दों का ध्यान सिर्फ जुल्फों
पर होता है, अपने शरीर की मजबूती पर वे ध्यान ही नहीं दे पाते. जानते हो इसका नतीजा क्या होता ?
सूरज- क्या होता होता है ?
किरण- नतीजा ये होता की ऐसे पुरुष बिस्तर से बाहर तो बड़े मर्द बने फिरते हैं, ऐसा दर्शाते हैं जैसे की औरत को मिलते ही घोलकर पी जायेंगे . और जब बिस्तर पर आते हैं, जंग का एलान होता है तो थोड़ी सी देर
में ही धुप में दौड़ते कुत्ते की तरह कांपने लगते हैं.
सूरज- तो सामने वाली औरत कुछ नहीं कहती होगी ?
किरण- कहती होगी ? की करती भी है. मैन तो अपने ऐसे नामर्द ग्राहक को सीधा लात मारकर बाहर भगा दिया करती थी.
सूरज- इसका मतलब आज मैन बच गया , वरना मुझे भी लात मिलने वाली थी.
किरण- नहीं यार, तुम तो जान हो अपनी , अपने जीने का मकसद हो भला तुम्हें लात कैसे मार सकती हूँ. मै तो गुलाम हो गयी हूँ तुम्हारी.
सूरज- ये क्या कह रही हो मेरी जान. तुम तो दिल हो , मेरी धडकन हो. खून बनकर रग रग में समा चुकी हो.
किरण- सच कह रहे हो सूरज ?
सूरज- हाँ, किरण , यह मेरा क्षणिक प्रेम नहीं है. इसमें वासना भी नहीं है बल्कि यह तो मेरा अमर प्यार है.
किरण- इस प्यार के बदले अगर मै हजार जन्मों तक अपनी जान भी कुर्बान करती रहूँ तो भी एहसान नहीं चूका सकती .
सूरज- एक बार प्यार से मुस्करा दो , यकीन मानो मैन खुद ही उलटा कर्जदार हो जाउंगा, इतनी तासीर है इस प्यारी सी मुस्कान में .
किरण- तुम्हारी बातें दिल से निकली हुई और सटीक लगती हैं, कहीं से भी बनावट नजर नहीं आती.
सूरज- और आप भी तो दिल की गहराइयों से कहती हो.
किरण - ये प्यार कभी कम तो नहीं होने दोगे ?
सूरज - मैंने दिल से मोहबब्त की है, चाहे जों हो जाए मगर दगा नहीं नहीं दूंगा, और हाँ, एक बात और ... मै कुछ भी बर्दाश्त कर सकता हूँ लेकिन प्यार में बेवफाई बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा, इसका ध्यान रखना .


Story Update : Monday, January 31, 2011 12:37 PM

उत्तर प्रदेश में मुजफ्फ्रनगर जिले के भोपा क्षेत्र में आज तड़के एक मकान में आग लगने से परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई। हादसे में तीन अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रवीन कुमार ने बताया कि भोपा इलाके के नंगला बुजुर्ग गांव में आग लगने से एक बालिका समेत परिवार के पांच सदस्यों की मृत्यु हो गई। गंभीर रूप से झुलसे तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।

पशु व्यापारी महबूब कुरैशी के परिवार के नौ सदस्य कमरे में आग जलाकर ताप रहे थे। इस दौरान कमरे में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने मकान को अपनी चपेट में ले लिया। कमरा बंद होने की वजह से लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला और चार लोगों की दम घुटने तथा झुलसने से मौके पर ही मृत्यु हो गई। एक ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। जख्मी सदस्यों को मेरठ तथा दिल्ली भेजा गया है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गएग ह

Sunday, January 30, 2011

बेवफा खँडहर - ३७
सूरज- ठीक है, सपेरा समझती हो ? जों बीन बजाकर साँपों को नचाते हैं ?
किरण- हाँ अच्छी तरह जानती हूँ, मैंने बहुत से साँपों का नृत्य देखा भी है. आगे बोलिए.
सूरज- एक सपेरे ने मेरे दादाजी से बहस करली थी की मन्त्र वगैरह की कोई शक्ति होती ही नहीं है. तब उन्होंने एक मन्त्र पढ़ा तो सपेरे का बीन उसके मुंह से ही अटककर रह गया. जानती हो तब उन्होंने
कौन से शब्दों का सहारा लिया था. सुनिए .अंजन बांधू , कंचन बांधू , बांधू सोरन काया, मैंने ज्ञान गुरु का पाया. मारू मन्त्र लगे ततैया , दुहाई हनुमन्त वीर की. शब्द साँचा, पिंड कांचा , फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा
किरण- ये क्या बड -बड कर रहे हो ? क्या मन्त्र ऐसे होते हैं. कुछ समझ में तो आने चाहिए .
सूरज- तुम्हारी समझ में में आये न आये मगर आत्मा तो सब समझ लेती है न, भूत -प्रेत की सब समझ में आ जाता है . आप क्या मानती हैं, इन मत्रों को हर कोई उच्च्चारण नहीं कर सकता .
किरण- क्यों ? इनमे ऐसी क्या खास बात होती है ?
सूरज- इनको सिद्ध करना पड़ता है. इन्हें पढ़ लेना या याद कर लेना तो बड़ा आसान है मगर सिद्ध करना बड़ा ही कठिन है. साथ में जों इन मत्रों का प्रयोग करता है उसकी नीयत भी साफ़ होनी चाहिए . उसमे
साफ़ लिखा है की जों बदनीयती से यानि की किसीका नुक्सान करने के उद्देश्य से मन्त्रों का सहारा लेगा तो मन्त्र उसका साथ नहीं देंगे , जबकि किसीके के सहायतार्थ यह यूज करोगे तो जरूर सफलता मिलेगी .
किरण- क्या तुमने कभी इन मन्त्रों का इस्तेमाल किया भी है या ऐसे ही धपंग मचा रहे हो ?
सूरज- जी नहीं, मैंने खुद आजमाया है , मै सुनी सुनाई बातें नहीं करता , भूत प्रेतों की बात तो नहीं मालूम मगर मैंने मन्त्रों की शक्ति से कई बच्चों की आँख से फूली जरूर खत्म करदी है. आप अगर आजमाना
चाहती हैं तो कोई ऐसा व्यक्ति बताएं जिसके आँख में फूली हो, मै एक मन्त्र पढूंगा सात बार , हफ्ते में सिर्फ दो बार पढूंगा और काम हो जाएगा
किरण- हा हा हा , अगर ऐसे मन्त्रों से आँख ठीक होने लगें तब तो सब लोग अस्पताल जाना बंद कर देंगे और तुम जैसे सयानों के पास लाइन लगाने लगेंगे .
सूरज- हंसिये मत मेमसाब. हहमारे यहाँ पर तो कम से कम ऐसा ही होता है. आसपास के गाँव में अगर किसीकी आँख में इस तारह की समस्या आई तो अस्पताल जाने की बजाय वे लोग मेरे पास आते हैं.
किरण- मुझे भी कोई मन्त्र सिखाओ न .
सूरज- सिकह तो दूंगा लेकिन उसे सिद्ध भी कर पाओगी क्या ? उसके लिए कलेजा मजबूत होना चाहिए . वैसे तो अलग -अलग मन्त्र को सिद्ध करने का अलग-अलग तरीका होता है मगर ज्यादातर मामलों
में रात के दरमियान शम्धान भूमि में मन्त्रों को सिद्ध करना होता है.
किरण- मुझे शमशान से डर नहीं लगता .
सूरज- क्या बात करती हैं , मेरा मतलब है की डर क्यों नहीं लगता ? कभी रात के दरमियान आप वहां गयी हैं?
किरण- हाँ , कई बार जाना हुआ है. मुझे भी शौक है कुछ शोध करने का , नया कुछ जानने का इसीलिए भटकती रहती हूँ. तुम चलोगे मेरे साथ ? यहीं पास में ही शमशान है. जब वहां पर कोई चिता जलती है
तब मैन जरूर जाने की सोचती हूँ, मेरी इच्छा होती है की उस चिता के पास बैठकर अलाप तापूँ .
सूरज- ये क्या कह रही हैं आप ? भला कोई आम आदमी ऐसी तमन्ना भी पालता है क्या ?
किरण- हाँ हाँ , क्यों नहीं ? तुम भी तो आम आदमी हो मगर मन्त्रों का पूरा ज्ञान रखते हो, उन्हें सिद्ध करने के लिए कभी न कभी शमशान भी जाते होंगे .
सूरज- मेरी बात अलग है. मैन तो मर्द हूँ .
किरण- अच्छा ठीक है, जब कभी इच्छा होगी तो तुम्हारे साथ ही जाउंगी, तब तो मुझे किसीकी दहशत नहीं होनी चाहिए , आखिर तुम जों मेरे साथ रहोगे .
सूरज का दिमाग भन्ना चुका था. उसकी कोई ज्ञान्द्रीय उसे फिर से यह आभास करा रही थी की उसके साथ या तो कुछ गलत होने वाला है या फिर हो चूका है. मगर उसने अपने सिर को एक तारफ झटक दिया
और प्यार के समुन्दर में गोते लगाना लगा, वे दोनों अब चरम अवस्था में पहुँचने वाले थे. सूरज पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहा था ताकि वह उसे सम्पूर्ण सुख
डे सके, उसने सुन रखा था की औरतें ऐसे समय जोर -जोर के प्रहार पसंद करती हैं इसलिए वह जोर -जोर से प्रहार करने लगा. किरण भी खामोश होकर रतिक्रिया का सुख ले रही थी, उसके मुख से अजीब तरह की
आवाजें निकल रही थी. उससे माहौल और भी ज्यादा उत्तेजक होने लगा .


ऐ आर रहमान के साथ गाने की आरजू है - रेखा राव
व्यवहार में नम्रता , व्यक्तित्व में आकर्षण और कंठ में कोयल जैसी खनक , अगर इन सबका मिश्रण कर दिया जाए तो जों तस्बीर उभरती है उसका नाम है -रेखा राव . जी हाँ, हम बात कर रहे हैं राजस्थानी गीतों की सुपर सिंगर ,
मखमली आवाज से हिन्दी और भोजपुरी सहित कई भाषाओं को समृद्ध करने वाली गायिका रेखा राव की. रेखा राव अब तक हजारों गीतों को अपना स्वर डे चुकी हैं. हिन्दुस्तान की जानी मानी कंपनी टी सीरीज से ही उनके १५००
से ज्यादा गीत रिलीज हो चुके हैं. संगीतकार कार्तिक राजा की फिल्म मुखबिर का गीत -' पिया मोरा बंजारा ' जबरदस्त हिट हुआ था , यह भी रेखा राव ने ही गाया है. इसी तरह संगीतकार मोंटी शर्मा ने सन्नी देवल अभिनीत
फिल्म ' हीरोज ' में भी उनसे एक आइटम सॉंग गंवाया था.फिल्म ' ना जाने क्यू ' में संगीतकार निखिल ने ' आजा रे आजा रे अटरिया पे ' गंवाया जों काफी मशहूर हुआ. मेमसाब फिल्म में भी संगीतकार सुनील सिंह के निर्देशन
में रेखा राव की ठुमरी को संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा. इतना ही नहीं अब वे टीवी पर भी अपनी आवाज का जादू बिखेरने में लगी हैं. प्रसिद्ध सीरियल ' बालिका वधु ' का विदाई सॉंग जन जन के कानों में गूँज रहा है .
एक और सीरियल ' केसरिया बालम आवो म्हारे देस ' में भी उन्हें सूना जा सकता है. इस प्रतिभाशाली सिंगर का पहला एल्बम वीनस कंपनी ने रिलीज किया था. नखराली बंजारन, रंगीलौ राजस्थान , म्हारी तीतरी , पीली लूब्डी ,
औसिया तीरथ प्यारा है, गुर्बंद, बोलो हर हर गंगे , बन्ना -बन्नी राजस्थानी , अमृत है माँ का नाम , आई कवार की बहार , अलगोजा, गोरिया करंट मारेले , अब तो छोड़ दयो बलमाजी , मैया के गोहार , चिट्ठी श्याम प्यारे की,
गोरी नख्रावाली , गोरी नाचे घूमर घाले , आदि उनके हिट एल्बम हैं. इसी प्रकार भोजपुरी फिल्म राजा भोजपुरिया का गीत -' दैया रे दैया खटमल चोलिया में सुपर हिट हो चूका है. राम बलराम, गठबंधन प्यार का , हमरा ब्याह
तोहरा से होई, कब होई गवना हमार , जवानी अंगूर हो गईल, भोजपुरिया बिल्लो रानी चर्चित एल्बम हैं . रेखा बताती हैं की उन्होंने पहला गीत हिन्दी फिल्म जांबाज के लिए गाया था. महान संगीतकार रविन्द्र जैन ने उन्हें चांस दिया
था. रेखा राव एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित रामायण में भी अपने स्वर के जलवे बिखेर चुकी हैं. रेखा राव कहती हैं की वे राजस्थान के कोटा की रहने वाली हैं. रेखा राव ' मेरी आवाज सुनो ' में भी अपना जलवा बिखेर चुकी हैं
इस शो के जज थे मजरूह सुल्तानपुरी, कविता कृष्णा मूर्ती और पामेला चौपडा. होस्ट थे अन्नू कपूर . रेखा राव की आवाज इतनी मार्मिक है की उसे सुनकर पामेला चौपडा रों पडी थी., रेखा राव के पिता जान माने सिंगर और संगीतकार
थे, रेखा राव ने भी उनसे ही गायिकी की तालीम ली. उनके पिता तेजकरण राव सुर सिंगर संसद से सुरमणि पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं . रेखा राव बचपन से ही आशाजी, लता जी, मदन मोहन जी और रविन्द्र जैन की फैन हैं .
उन्होंने उडिया भाषा में सोनू निगम के साथ गीत गाया है लेकिन हिन्दी फिल्मों में उनके साथ गाने की तमन्ना है. वैसे तो वे सभी संगीतकारों का सम्मान करती हैं मगर ऐ आर रहमान और राहत फतेह अली खां के संगीत निर्देशन में गाने
की आरजू रखती हैं. रेखा राव संगीतकार रविन्द्र जैन को अपना आदर्श मानती हैं. आजकल हाल ही में रेखा राव ने उदय नारायण के साथ म्यूजिक एल्बम 'तड़प' की रिकोर्डिंग की है. यह एल्बम समाज को एक नई दिशा देने वाला
है, इसमें सभी ८ गीत उदय नारायण और रेखा राव ने गाये हैं.

Saturday, January 29, 2011

बेवफा खंडहर वाली -३६
किरण- क्यों ? क्या परेशानी हुई ?
सूरज- असल में जब मै ससुराल पहुंचा तो पता चला की घर के अधिकाँश लोग किसी रिश्तेदारी में गए हुए थे. वहां पर किसीकी शादी थी, गाँव में भी शादी -ब्याह का माहोल था. मुझे लगा की वहाँ का मौसम अपने लिए
अनुकूल नहीं है. इसलिए मै देर शाम को वहाँ से चलपड़ा , वैसे मैंने इन्तजार भी खूब किया था.
किरण- अगर आना ही था तो फोन करके आना चाहिए था, दिक्कत नहीं होती.
सूरज- तब तो भेद खुल जाता की मै जानबूझकर आ रहा हूँ, मुझे यह दिखाना था की पास के गाँव में किसी काम से आया था , तो राजी खुशी लेने चला आया. अगर मै फोन करता तो लोग मेरी नीयत
पर शक करने लगते और सारा मामला गडबड हो जाता. कर गाँव में लोग इसी तरह के होते हैं.
किरण- हाँ , बात तो सही है, गाँव में लोग बात का बतंगड बना डालते हैं. रस्सी को भी सांप बना देते हैं. खैर , इसका मतलब ये हुआ की आप खाली हाथ ही लौट रहे थे और अचानक यहाँ पर आपका और मेरा मेल हो
गया. अगर आपकी बाइक खराब नहीं होती तो शायद हमारी मुलाक़ात नहीं हो पाती.
सूरज- बिलकुल सही , क्योंकि रात के समय बाइक चलाने में मुझे बेहद आनंद आता है .
किरण- क्या बात कर रहे हो ? ऐसा कैसे हो सकता है ? आप पहले इंसान हैं जों इस तरह की बात कह रहे हैं वरना अब तक तो मैंने यही सुना था की रात को सफर करने में लोगों को दहशत होती है. कुछ लोग चोर
उचक्कों से डरते हैं, कुछ गलत रास्ते से तो कुछ भूत प्रेतों से.
सूरज- जी, लेकिन मै भगवान के सिवाय और किसीसे नहीं डरता . डरने की छोडिये , मेरा तो शौक ही ये है. मै घर से हमेशा रात को ही सफर पर निकलता हूँ.
किरण- इसकी कोई खास वजह , रात को सफर करने की और किसीसे नहीं डरने की ?
सूरज- आप हँसेंगी तो नहीं ? पहले वादा करो तो बत्ताता हूँ.
किरण- अच्छा बाबा, वादा करती हूँ, मै ज़रा भी नहीं हसूंगी, अब तो बोलो. मैन भी तो जानू ऐसी आखिर क्या बात है ?
सूरज- दरअसल , मै जब रात को घर से शहर की तरफ जाता हूँ तो लौटते समय देरी से आता हूँ, उस समय जब सारे घोड़ा तांगे बंद हो जाते हैं तो बची हुई सवारियों को बड़ी मुश्किल हो जाती है. मैन ऐसे ही समय
घर की तरफ निकलता था और जब कोई महिला सवारी मुझसे लिफ्ट मांगती तो मै उसे बिठा लेता. इस बहाने मुझे उस महिला के शरीर से लिपटने का अवसर मिल जाया करता था.
किरण- हा हा हा, लिपटने से तुम्हें क्या मिलता होगा ? थोड़ी देर बाद तो वह महिला आपकी बाइक से उतरकर अपने घर पहुँच जाती होगी ?
सूरज- देखो, हंसना नहीं, तुम वादा कर चुकी हो. हंसोगी तो आगे नहीं बताउंगा .
किरण- अच्छा ठीक है बताओ , आगे क्या बोल रहे थे. तुम भी न सूरज, सचमुच बहुत भोले आदमी हो. ये बताओ तुम भूतों से क्यों नहीं डरते ?
सूरज- क्योंकि मेरे दादा बहुत बड़े तांत्रिक थे, वे भूतों को वश में करना जानते थे. सौ -सौ किलोमीटर दूर के लोग भी भूत व्याधा होने पर उनके पास उपचार के लिए आते थे. उनके पास एक प्राचीन असली इंद्रजाल
था , जिसमे सैकड़ों मंत्र लिखे हुए थे, मरने से पहले वह पुस्तक उन्होंने मुझे डे दी है. वह पुस्तक मैंने मुंह जबानी याद भी करली है.
किरण- क्या बात कर रहे हो ? क्या दुनिया में सचमुच मन्त्रों का कोई अस्तित्व है ?
सूरज- हाँ , हाँ क्यों नहीं ? जब भूतों का अस्तित्व हो सकता है तो मन्त्रों का भी है , और अगर भूत-प्रेत झूठे हैं, ये सब काल्पनिक कथा है तो मन्त्रों के बारे में भी ऐसा ही सोच सकते हैं.
किरण- वाह , आपके तर्क में तो सचमुच दम है , अच्छा कोई मन्त्र सुनाइये , मैन तो जानू ये कैसे होते हैं.
सूरज- ठीक है, सपेरा समझती हो ? जों बीन बजाकर साँपों को नचाते हैं ?
किरण- हाँ अच्छी तरह जानती हूँ, मैंने बहुत से साँपों का नृत्य देखा भी है. आगे बोलिए.
सूरज- एक सपेरे ने मेरे दादाजी से बहस करली थी की मन्त्र वगैरह की कोई शक्ति होती ही नहीं है. तब उन्होंने एक मन्त्र पढ़ा तो सपेरे का बीन उसके मुंह से ही अटककर रह गया. जानती हो तब उन्होंने
कौन से शब्दों का सहारा लिया था. सुनिए .अंजन बांधू , कंचन बांधू , बांधू सोरन काया, मैंने ज्ञान गुरु का पाया. मारू मन्त्र लगे ततैया , दुहाई हनुमन्त वीर की. शब्द साँचा, पिंड कांचा , फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा .
Last updated - Sat, Jan 29, 2011
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हरदोई में गैस रिसाव से तीन लोगों की मौत

लखनऊ/ फरीदाबाद। हरदोई के संडीला इलाके में एक निजी केमिकल फैक्ट्री में जहरीली गैस के रिसाव में तीन लोगों की मौत हो गई और दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक हरदोई की अमित केमिकल नामक फैक्ट्री में देर रात गैस का रिसाव हुआ। इससे तीन लोगों की मौत हो गई। दो लोगों की हालत गंभीर है जिनका लखनउ के मेडीकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।

प्रशासन ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। हरदोई के एसपी लव कुमार का कहना है कि फिलहाल यहां किसी तरह की गैस लीक नहीं हो रही है। सूत्रों का कहना है कि पहले भी इस फैक्ट्री में कई बार गैस रिसाव की खबरें आई है।


फरीदाबाद की केमिकल फैक्ट्री में भी रिसाव

जिले के हीरापुर गांव में एक केमिकल फैक्ट्री में क्लोरीन गैस के रिसाव के बाद 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह से एक केमिकल फैक्ट्री में रखे क्लोरीन गैस के दो सिलेण्डरों में से एक रिसाव हो रहा था।

यह फैक्ट्री गांव के बेहद नजदीक स्थित है। गांव वालों ने दम घुटने और चक्कर आने की शिकायत के बाद 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जिला उपायुक्त प्रवीण कुमार ने बताया कि 75 फीसदी स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया। खतरे की बात नहीं है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। ऎहतियात के तौर पर गांव को खाली करवा लिया गया ह

Friday, January 28, 2011

बेवफा खंडहर , भाग-३५
अब सूरज से रहा नहीं गया. उसने किरण के होठों पर अपने होठ सटा दिए , उन दोनों के शरीर में चिंगारी सी भड़क उठी. कामवासना की आंधी चलने लगी . सूरज ने किरण के यौवन उभारों को को दबाना शुरू कर
दिया, किरण के जिस्म में आग लगी थी, सूरज उस आग को अपनी जीभ से बुझाने का प्रयास कर रहा था. किरण बोली-
- यह आग ऐसी नहीं है की इसे आसानी से बुझाया जा सके. यह इश्क की आग है मेरी जान.
सूरज- हाँ, मगर कोशिश पूरी करूँगा. अपने प्यार की छाप आपके जिस्म के हर कोने पर छोडना चाहता हूँ .
किरण- और मै तुम्हें आमंत्रित करती हूँ, आओ और मेरे तमाम दुखों पर अपने प्यार का मरहम लगादो. इस बेचैनी को मिटादो जों मुझे ज़िंदा भस्म किये जा रही है. इस बेकरारी की दवा करदो . अब अगर ज़रा भी देर
करदी तो सम्भव है की मेरे प्राण ही निकल जायेंगे .
सूरज- सूरज के रहते भी अगर किरण बेचैन रहती है तो यह हमारे लिए मर मिटने की बात है. मेरी बेचैनियों की दवा आपके पास और आपकी बेचैनियों की दवा मेरे पास है. और हम दोनों एक दूसरे के पूरक हैं.
किरण की साँसें जोर-जोर से चलने लगी. यह वासना का तूफ़ान था, सूरज ने अपने आपको एडजस्ट किया और किरण पर छाने की कोशिश करने लगा . किरण भी इन्वोल्व हो गयी. वह उस हसीन वक्त
को बर्बाद करने के मूड में नहीं थी. अगले ही पल वे दोनों दो जिस्म एक जन बन चुके थे. गाँव का गबरू जवान सूरज पहलवानी अंदाज में जोर अजमाइश करने लगा. उसके प्रहार सख्त होते थे, मगर किरण
को कोई ऐतराज नहीं था , बल्कि वह तो उसे और प्रोत्साहित कर रही थी, साथ ही वह यह भी दिखाने की कोशिश कर रही थी जैसे उसे इस क्रिया में बड़ा आनंद आ रहा हो. तथा दुःख महसूस भी महसूस हो रहा हो .
दुःख दर्शाने का सिर्फ एक यही कारण था की सूरज को ऐसा लगना चाहिए जैसे उसने कम लोगों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाए हैं और उसे तकलीफ हो रही है. सूरज ने पूछ भी लिया-
-मै नया खिलाड़ी हूँ, मुझ कुछ करना नहीं आता. प्लीज बता देना, और हाँ, कैसा महसूस कर रही है मेरी जान. ?
किरण- जैसे धरती पर साक्षात स्वर्ग उतर आया हो . जन्नत जैसा आनंद आ रहा है .
सूरज- अगर ऐसा है तो फिर आह, ऊह क्यों कर रही हो ?
किरण- तुम नहीं समझोगे, जब औरत को चरम सुख और परम सुख की प्राप्ति होती है तब उसके मुख से इस तरह की आवाजें आती हैं.
सूरज- ओह, ये बात है क्या ? मै ठहरा अनाड़ी, मुझे कुछ ज्ञान ही नहीं है. यह तो मैन पहले ही बता चुका हूँ.
किरण- कहलो सूरज भले ही, लेकिन असली बात कुछ और ही नजर आती है. मुझे नहीं लगता की तुम बिलकुल कुंवारे हो.
सूरज- शक की वजह ?
किरण- जमाने की हवा. मैंने एक फिल्म देखी थी, फिल्म में एक सत्य कथा को दर्शाया गया था. उसमे साफ़ था की ज्यादातर लड़के १५ वर्ष के होते ही सेक्स का आनंद चखना शुरू कर देते हैं . तुम्हारी उम्र क्या है ?
सूरज- २५ के आसपास , मगर मैंने अब तक कभी किसी लड़की के साथ रतिक्रिया नहीं की है. सच तो ये है की मौक़ा ही नहीं मिला.
किरण- कभी कोशिश भी नहीं की क्या ?
सूरज- कोशिश के तहत ही तो यहाँ तक आ पहुंचा हूँ, दरअसल मेरे एक ममेरेभाई की ससुराल पास के ही इलाके में हैं. उसकी कई सालियाँ हैं. आसपास के घरों में भी जवान लड़कियां हैं. मैंने सोचा था की वहाँ जाकर
रात को रुकुंगा , किसी साली को पटाऊंगा और उसके साथ मौज मस्ती करके वापस आउंगा मगर ये हो न सका.
किरण- क्यों ? क्या परेशानी हुई ?
सूरज- असल में जब मैन ससुराल पहुंचा तो पता चला की घर के अधिकाँश लोग किसी रिश्तेदारी में गए हुए थे. वहां पर किसीकी शादी थी, गाँव में भी शादी -ब्याह का माहोल था. मुझे लगा की वहाँ का मौसम अपने लिए
अनुकूल नहीं है. इसलिए मै देर शाम को वहाँ से चलपड़ा , वैसे मैंने इन्तजार भी खूब किया था.
किरण- अगर आना ही था तो फोन करके आना चाहिए था, दिक्कत नहीं होती.
सूरज- तब तो भेद खुल जाता की मैन जानबूझकर आ रहा हूँ, मुझे यह दिखाना था की पास के गाँव में किसी काम से आया था , तो राजी खुशी लेने चला आया. अगर मै फोन करता तो लोग मेरी नीयत
पर शक करने लगते और सारा मामला गडबड हो जाता.

Thursday, January 27, 2011

भाग-34
किरण- सबका तो नहीं पता, मगर मैं अपने भगवान को जान गयी हूँ, वह इस वक्त मेरे सामने है और मेरी बांहों में हैं.
सूरज- ऐसा नहीं कहते किरण, यह गलत है. पाप है, घमंड है. भगवान सिर्फ एक है और दूसरा कोई भी उसकी जगह नहीं ले सकता .
किरण- मैंने अपनी आँखों से कभी उस भगवान को नहीं देखा, अगर सारी दुनिया उसी भगवान की बनी हुई है तो आप भी तो उसीने बनाए होंगे, भगवान की रचना को अगर मैन देख सकती हूँ, उसे सुन सकती
हूँ, उसको समझ सकती हूँ तो उसे ही भगवान कहने में क्या हर्ज है ? मेरे अकेले के कहने से हो भी क्या जाएगा ? सारी दुनिया है न , उसे भगवान कहने के लिए .
सूरज- हमें अपने शब्द वापस लेने चाहिए किरण. हम लोग इंसान हैं और अगर इसके आगे एक शब्द 'अच्छा ' भी लग जाए तो बहुत बड़ी बात हो जाती है. इंसान हमेशा इंसान ही रहता है वह भगवान का दरजा प्राप्त नहीं कर सकता .
किरण- अच्छा ठीक है, तुम्हारा भी मन रख देती हूँ, मै अपने शब्दों में करेक्शन कर लेती हूँ, तुम बहुत अच्छे इंसान हो और भगवान तो नहीं मगर भगवान जैसे लगते हो. अब तो ठीक है ?
सूरज- आपकी कोई भी बात गलत तो हो ही नहीं सकती, इतना तो मैन भी समझता हूँ, क्योंकि आप मुझसे ज्यादा सुलझी हुई हैं, समझदार और अनुभवी हैं.
किरण- अब तारीफ़ करना बंद कीजिये, और साथ में शराब पीना भी . क्योंकि शराब के जाम तभी तक हलक में उतारने चाहिए जब तक की अपने आप पर नियंत्रण रखा जा सके. अगर शराब ही इंसान को पीना शुरू करदे तो स्थिति
बड़ी विचित्र हो जाती है. फिर पीने वाला मानव नहीं रह पाता. वह अमानवीय हरकतें करनी शुरू कर देता है.
सूरज- यह मजा भी खूब देती है और सजा भी. जब शराब हलक के अंदर होती है तो सारी दुनिया हसीन लगने लगती है. ऐसा महसूस होता है जैसे की सब कुछ कंट्रोल में है, हम सारे जग को कब्जे में कर सकते हैं.
किरण- मगर असलियत और एहसास में फर्क भी तो होता है. यह फर्क महसूस करना बड़ी बात है. जों इसे समझ ले वही समझदार कहलाता है.
सूरज- मुझे शराब की लत नहीं है. कभी-कभार पी लिया करता हूँ, आज सर्दी है न इसके लिए आज तो सचमुच पीने का मूड था.
किरण- इसे इतना ही पीना चाहिए जिससे की होश में रह सको और अपना उद्देश्य ठीक तरह से याद रख सको.
सूरज- तुम्हारे इस हसीन जिस्म का जादू ही इतना खतरनाक है की पीने की इच्छा ही नहीं होती, अब मै कम पीने की कोशिश करता हूँ.पिऊँगा तो इन नशीली आँखों के मयखाने से पी लूँगा.
किरण इस वक्त पूरी तरह से नग्न अवस्था में थी, हया दर्शाने के लिए उसने एक बेहद पतली चादर अपने ऊपर ओढ़ ली थी. उस लिबास में भी वह बेहद खूबसूरत दिख रही थी, सूरज की काम भावनाएं बहुत पहले ही जाग्रत
हो चुकी थी, किरण जब उसके अंतरंग अंग को आहिस्ता सेस्पर्श करती तो जली हुई रस्सी काले नाग की तरह फुँकारने लगती थी. सूरज उसके अप्रितम सौंदर्य को निहारता ही रह गया. वह अपने एक हाथ से उसके जिस्म से
उस वस्त्र को उतर रहा था जिसने किरण के सुन्दर जिस्म को ढँक रखा था. किरण की मुस्कान इस वक्त ऐसी लग रही थी मानो कोई मस्त कली अभी-अभी खिलने की तैयारी कर रहा हो. उसके मुख से सहसा निकला-
- वाव, मेरे तो हाथ थरथरा रहे हीं. मेरे ख़याल से इस दुनिया में तो आपके जैसी मदमस्त हसीना कोई दूसरे नहीं होगी.
किरण- यह बदन सुलग रहा है, अरमान मचल रहे हैं.
सूरज- हाँ, मेरा भी यही हाल है. जज्बात अब काबू में नहीं हैं, इन पलों को अपने दिल में कैद कर लेना चाहता हूँ, सोचता हूँ की इसे इस नज़ारे को देखने के बाद अब कुछ और न देखूं. मेरी आँखें हमेशा के लिए
यहीं पर बंद हो जाएँ, ताकि मै हमेशा इस नज़ारे को याद रख सकूं.
किरण- नहीं बावले सूरज, किरण पर इतने फ़िदा भी मत हो जाना , तुम्हारी आँखें तो मेरा आइना हैं.
सूरज- ]और तुम हो मेरे जीने का मकसद . इस जिदगी में क्या अगले कुछ जन्मों में भी तुम्हें नहीं भुला पाऊंगा.
किरण- मुझे अपनी बाहों में इतना कसकर पकड़ो की फिर दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर पाए.
अब सूरज से रहा नहीं गया. उसने किरण के होठों पर अपने होठ सटा दिए , उन दोनों के शरीर में चिंगारी सी भड़क उठी. कामवासना की आंधी चलने लगी . सूरज ने किरण के यौवन उभारों को को दबाना शुरू कर
दिया, किरण के जिस्म में आग लगी थी, सूरज उस आग को अपनी जीभ से बुझाने का प्रयास कर रहा था. किरण बोली-
- यह आग ऐसी नहीं है की इसे आसानी से बुझाया जा सके. यह इश्क की आग है मेरी जान.
सूरज- हाँ, मगर कोशिश पूरी करूँगा. अपने प्यार की छाप आपके जिस्म के हर कोने पर छोडना चाहता हूँ .
किरण- और मै तुम्हें आमंत्रित करती हूँ, आओ और मेरे तमाम दुखों पर अपने प्यार का मरहम लगादो.

Tuesday, January 25, 2011

भाग-33
किरण- क्यों ? क्या हुआ ? क्या वह जिस्मानी रिश्ते बनाने से इनकार कर रही थी ?
सूरज- नहीं, ये बात नहीं है ।
किरण- तो और क्या बात हूई ? क्या वह किसी और से प्रेम करती थी ? और इस कारण तुम्हें उससे चिढ हो गयी ?
सूरज - ऐसी भी कोई बात नहीं थी, मैंने खुद भी कभी उसके साथ सेक्स करने की बात अपने मन में नहीं लाई थी। हम दोनों मिलते थे, बातचीत करते थे, कभी -कभी किसी विषय पर बहस भी करते थे ,
मगर मेरे मन में कभी कोई गलत ख़याल नहीं आया,। एक शाम हम दोनों जब टहलने निकले तो अकेलेपन में उसने मेरा हाथ पकड़ लिया था। मेरे जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गयी और कांपते होठों से मैंने उसके होठों को चूम लिया। किसी महिला को यह मेरा पहला चुम्बन था . वह मुझसे लिपट गयी .
किरण- वाह , कितना हसीन नजारा था, उस वक्त आपके दिल में हजारों घंटियाँ बज चुकी होंगी, रोशनी से सारा वातावरण सराबोर हो गया होगा . जब प्रेम का दीदार होता है तो ऐसा ही नजारा उत्पन्न होता है.
सूरज- ओह, इसका मतलब आप भी मोहब्बत का मजा चख चुकी हैं. आप भी इस तरह का खास अनुभव कर चुकी हैं ?
किरण- हाँ, बिलकुल. इस वक्त प्रत्यक्ष अनुभव कर रही हूँ. इससे पहले तो जिसने भी मुझे चाहा उसने सिर्फ मेरे जिस्म को प्राप्त किया , लेकिन तुम तो मेरे दिल को पा चुके हो. मेरी आत्मा पर अधिकार जमा चुके हो. मुझे तुमसे प्यार हो गया है
सूरज-सच ? क्या तुम सच कह रही हो ?
किरण- मैन दिल से कहती हूँ, जिसकी चाहो कसम ले सकते हो. मैन कभी भी तुम्हारे साथ बेवफाई नहीं कर सकती. मैंने तुमने प्यार किया है, इसे हमशा निभाऊंगी .
सूरज- प्यार के नाम से ये नादाँ दिल ही धड़क उठता है. सूना है की प्यार में बहुत तकलीफें उठानी पड़ती हैं.
किरण- अगर मेरे महबूब को ज़रा भी खरोंच भी आई तो ये किरण अपनी जान कुर्बान कर देगी.
सूरज- सूना है अक्सर हसीनाएं बेवफा हो जाती हैं, पहले आशिक को ठुकराकर दूसरे से दिल लगा लेती हैं.
किरण - मेरा अनुभव इससे अलग है, मैंने तो यही जाना है की अक्सर आशिक ही जिस्म की ब्भूख शांत करने के बाद अपनी प्रेमिका को ठुकरा देते हैं, वे लंबे रिश्तों में यकीन नहीं रखते , बल्कि क्षणिक सुख भोगने में
उनकी ज्यादा रूचि होती है. मतलब निकल गया तो पहचानते भी नहीं हैं.
सूरज- अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो बहुत बुरा हुआ है. मेरे साथ तो किसी लड़की ने न वफ़ा की और न बेवफाई , सिर्फ सूनी सुनाई बातें कह रहा हूँ.
किरण-बीती हुई बातें भी सुनाइये न , अभी तो बता रहे थे की आपने उस लड़की का चुमबन ले लिया , उसके बाद क्या हुआ ?
सूरज- चुम्बन के बाद वह लड़की भी सहम गयी और मैन भी सहमा सा हो गया क्योंकि चुम्बन के बाद के हालत बदल चुके थे, मेरा संवेदनशील अंग हरकत में आ गया था .
किरण- बिलकुल ऐसे ही न , जैसे अब हरकत में आ रहा है. यह बहुत स्ट्रोंग है.
सूरज- आप मुझे ऐसे ही बना रही हैं, मैन तो गाँव का एक सामान्य आदमी हूँ. आपकी तारीफों के काबिल तो बिलकुल भी नहीं हूँ.
किरण- तुम क्या हो यह मेरी नजरों से देखो तो जानो. एक बार लोगों ने मजनू से कहा था की लैला तो काली है, उससे इतना प्रेम क्यों करते हो ? जानते हो इस पर उसने क्या जवाब दिया था ?
सूरज- जी नहीं, बताइये न .
किरण- मजनू का जवाब था की लैला क्या है यह कोई उसकी निगाहों से देखे तब पता चलेगा, कोई और इसका नुमान नहीं लगा सकता. यही बात तुम पर लागू होती हो. तुम मेरे लिए कितनी अहमियत रखते हो
यह सिर्फ मैन जानती हूँ, मेरा दिल जानता है या मेरा भगवान जानता है.
सूरज- मेरे भगवान से क्या मतलब है ? क्या सबके भगवान अलग-अलग होते हैं ?
किरण- सबके तो नहीं पता, मगर मैन अपने भगवान को जान गयी हूँ, वह इस वक्त मेरे सामने है और मेरी बांहों में हैं.
सूरज- ऐसा नहीं कहते किरण, यह गलत है. पाप है, घमंड है. भगवान सिर्फ एक है और दूसरा कोई भी उसकी जगह नहीं ले सकता .
किरण- मैंने अपनी आँखों से कभी उस भगवान को नहीं देखा, अगर सारी दुनिया उसी भगवान की बनी हुई है तो आप भी तो उसीने बनाए होंगे, भगवान की रचना को अगर मैन देख सकती हूँ, उसे सुन सकती
हूँ, उसको समजह सकती हूँ तो उसे ही भगवान कहने में क्या हर्ज है ? मेरे अकेले के कहने से हो भी क्या जाएगा ? सारी दुनिया है न , उसे भगवान कहने के लिए .
सूरज- हमें अपने शब्द वापस लेने चाहिए किरण.

Monday, January 24, 2011

भाग -३२
सूरज का दिमाग झन्ना गया, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे ? भ्रमित होकर वह अपने शरीर पर हाथ फिराने लगा, इसके बाद उसने किरण के सुन्दर जिस्म को स्पर्श किया। फिर वह आईने के सामने खडा हो गया. वह नग्न अवस्था में था. उसका चेहरा बिलकुल वैसा ही था , जैसा कथित मौत से पहले था. वह अपनी पुरानी लाइफ को याद करने लगा. तभी किरण बोली-- तुमने मेरी बात को सच मान लिया क्या ? हा हा हा ..........मजाक कर रही थी यार ... क्या तुमने इसे सच मान लिया ? तुम भी कमाल करते हो भले आदमी.अच्छी खासी खूबसूरत हसीना के हुस्न की तारीफ करने के बजाय , उसके भूत -प्रेत होने पर शक जाहिर कर रहे हो। मुझे हैरत हो रही है। तुम लड़कियों को कैसे पटाते होंगे ? लड़कियां उसी पर मरती हैं, जो रोमांटिक बात कर सकते हैं, जो लड़कियों की आँखों में डूब सकते हैं और अपने साथ उन्हें भी सुनहरे सपनों की सैर करा सकते हैं। मेरे ख़याल से तुम इन सबमे से कुछ नहीं कर सकते।
सूरज- हाँ , शायद यही वजह है कि मुझसे कोई लड़की नहीं पट पाई जबकि ज़रा -ज़रा से लड़के कई-कई प्रेमिकाएं रखते हैं। हर दिन वे अलग-अलग लड़कियों के साथ घुमते-फिरते नजर आते हैं।
किरण- मैं मानती हूँ, लेकिन यह बात मानने में थोड़ी सी तकलीफ हो टी है कि तुम जैसे हेंडसम के साथ ऐसा कुछ हुआ होगा। गबरू जवान हो, तुम्हारे साथ रात बिताने की हसरत न जाने कितनी हसीनों को हो सकती है। इस दुनिया में यह कैसे संभव है कि २५ साल का मर्द और कुंवारा ही रह जाये। कभी न कभी और किसी न किसी लड़की के साथ कुछ न कुछ जरूर हुआ होगा। मुझे याद आता है एक कस्टमर जो इसी तरह का दावा करता था और जब पीकर टट्टू हो गया तो उसने जो राज खोला वह अविश्वसनीय था। वह दो दर्जन से ज्यादा लड़कियों के साथ सैकड़ों बार हमबिस्तर हो चूका था । उसकी कुछ तस्बीरें भी उसने दिखाईथीं, और तो और उसे रात के दौरान हर दस मिनिट के बाद सेक्स करने की आदत थी। इसके लिए वह एक ही रात में दो वेश्याओं की सेवा लिया करता था। जब वह मेरे पास आया तो पञ्च लाख में एक रात के लिए उसने मुझे बुक किया था और दस हजार की एक लड़की अलग से बुलवाई गयी थी और उस रात उसने एक दो बार नहीं बल्कि पूरे ६ टाइम सेक्स किया था ।
सूरज- क्या ऐसा संभव है ? क्या कोई इंसान इतना पावरफुल हो सकता है ?
किरण- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? पर्फेक्स जैसी आयुर्वेदिक दवाओं के चलते कुछ भी संभव है। ये दवाएं आम इंसान को भी फौलाद की तरह बना देती हैं। वह व्यक्ति अगर ज्यादा समय तक रति क्रिया का आनन्द भोगता था तो इसके पीछे यही वजह थी। तुम आज की रात मुझे कितनी बार सुख दे सकते हो ?
सूरज- मैं एकाध बार की बात नहीं करता, मैं तो जीवन भर तूम्हें सुख और संतुष्टि देने का इरादा रखता हूँ।
किरण- मैं कैसे मानु मानूं कि तुम अभी तक कुंवारे हो ?
सूरज-० मेरा मेडीकल चेकअप भी कराना चाहो तो स्वागत है ।
किरण- इतना समय कहाँ हैं ? इसके लिए तुम्हें आज की रात भी कुंवारा ही रहना पडेगा ।
सूरज- यह शायद संभव न हो पाए। क्योंकि अब तो न दिल अपने कब्जे में है और ना ही दिमाग । अब तो प्यास बढ़ती ही जा रही है, जब तक इसे बुझा नहीं लेता , चैन नहीं मिलेगा।
किरण- अच्छा , चलो सेक्स छोडो , क्या कभी किसीसे प्रेम भी नहीं किया ।
सूरज- प्रेम ? उसे प्रेम तो नहीं कह सकते , मगर हाँ , एक लड़की के साथ मित्रता जरूर थी।

मगर उसके साथ रिश्ता ज्यादा नहीं टिक पाया ।

किरण- क्यों ? क्या हुआ ? क्या वह जिस्मानी रिश्ते बनाने से इनकार कर रही थी ?

सूरज- नहीं, ये बात नहीं है ।

किरण- तो और क्या बात हूई ? क्या वह किसी और से प्रेम करती थी ? और इस कारण तुम्हें उससे चिढ हो गयी ?

सूरज - ऐसी भी कोई बात नहीं थी, मैंने खुद भी कभी उसके साथ सेक्स करने की बात अपने मन में नहीं लाई थी। हम दोनों मिलते थे, बातचीत करते थे, कभी -कभी किसी विषय पर बहस भी करते थे , मगर मेरे मन में कभी कोई गलत ख़याल नहीं आया,। एक शाम हम दोनों जब टहलने निकले तो अकेलेपन में उसने मेरा हाथ पकड़ लिया था। मेरे जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गयी और कांपते होठों से मैंने उसके होठों को चूम लिया। किसी महिला को यह मेरा पहला चुम्बन thaa। वह mujhse lipat गयी

Sunday, January 23, 2011

भाग-31
किरण- दुनिया में अभी तक कोई ऐसा फांसी का फंदा नहीं बना है जों किसी रूह को मौत के घाट उतार सके. जिस्म को मौत आ सकती है मगर रूह को कभी नहीं.
सूरज- रूह , कैसी रूह ? मैन समझा नहीं. तुम्हारा रूह से क्या लेना देना ?
किरण- मेरा मतलब ये है की तुम अब मेरे जिस्म तक सीमित नहीं रहे बल्कि मेरी रूह की गहराइयों में समा चुके हो,
सूरज- जबसे तुम्हें मिला हूँ , मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है. तुम भी मेरी रूह में समा चुकी हो. मेरे दिल की गहराइयों में बस चुकी हो
किरण- आज सूरज और किरण का मेल हो रहा है. जबकि किरण तो सूरज का ही एक छोटा सा हिस्सा है. इसलिए इस मिलन को तो कोई रोक ही नहीं सकता. अगर कोई रुकावट आ भी गयी तो उसे हर हाल में दूर
कर लिया जाएगा. मैंने यह तय किया है की तुम्हें किसी भी कीमत पर अपने आप से जुदा नहीं होने दूंगी.
सूरज- हाँ, मेरा अपना भी कुछ ऐसा ही ख़याल है. मै भी चाहता हूँ की मोहब्बत का ऐसा ही तूफ़ान मेरे अंदर भी समाहित हो जाए ताकि मै भी मजनूँ, रांझा आदि की तरह दीवाना बन सकू और मशहूर हो सकूँ.
किरण- बहुत दीवानगी याद आ रही है. जानते भी हो की इश्क में क्या -क्या खोना पड़ता है ? अरे जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है. कर पाओगे इतना ?
सूरज- हाँ, निश्चित रूप से ये कर पाऊंगा. तुम्हारे लिए तो अपने चमड़े की जूतियाँ बनाकर भी पहना सकता हूँ. सचमुच .
किरण- हाँ, अब यकीन आने लगा है. क्योंकि तुम्हारे शब्दों से जों सच्चाई झलक रही है, उससे यही साफ़ होता है की तुम्हें प्रेम का रोग लग गया है. अब मौक़ा भी है, मौसम भी है और आगे क्या कहते हैं ?
सूरज- शायद दस्तूर भी है. और वो हो या ना हो मगर मैन तो हूँ ही, मै हाजिर हूँ, हर तरह से . जों कहोगी करूँगा. मगर दिल में एक सवाल आ रहा है , इजाजत हो तो सवाल करूं ?
किरण- यह मोहबात का समय है, इश्क की इन्तिहाँ का समय है. इश्क का आनंद लूटिये. अब वक्त ज्यादा नहीं है.
सूरज- हाँ, मगर रुका नहीं जाता. सोचता हूँ की कह ही दूं, मैन यह जानना चाहता था की यहाँ पर इतना सन्नाटा क्यूँ है भाई ? यह होटल भुतहा जैसा क्यूँ लगता है. अगर कोई वेटर यहाँ पर आता भी है तो कुछ बोलता
क्यूँ नहीं है ? चुपचाप क्यूँ रहता है ? यह दीवारें भयानक क्यूँ लगती हैं ? माहौल ऐसा क्यूँ लगता है जैसे की जिस्म में सिहरन हो रही हो ?
किरण- करूर, मै तुम्हें ये बताउंगी. मगर इसके लिए कलेजा टाईट करना होगा . बताना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि तुम ये सवाल दूसरे बार पूछ रहे हो .
सूरज- हाँ, दिल को थाम लेता हूँ. अब बोलिए.
किरण- यहाँ जितने भी वेटर हैं, वे इंसान नहीं हैं. सब के सब भूत हैं. यानि की मर चुके हैं. मैन भी जीवित इंसान नहीं हूँ .
सूरज- यह क्या मजाक है ? आप तो बोल सकती हैं, सुन सकती हैं, समझ सकती हैं और आराम से चल -फिर भी सकती हैं. आपके पैर के पंजे भी पीछे की तरफ नहीं , आगे की तरफ हैं . मैंने सुना है की जों भूत होते हैं
उनके पैरों के पंजे आगे की तरफ नहीं बल्कि पीछे की तरफ होते हैं. आप अप्रैल फूल तो नहीं बना रही हैं ? मगर यह तो अप्रैल का महीना भी नहीं है.
किरण- मेरे बारे में तुम जों सोच रहे हो, वो सोच सकते हो क्योंकि तुम भी तो मृत हो. मौत हो चुकी है तुम्हारी.
सूरज- ये आप क्या कह रही हैं, सेक्स करने के समय इस तरह डराना क्या ठीक रहेगा ?
किरण-सच कहती हूँ मेरी जान, तुम्हारी मोटर साइकिल एक खम्भे से टकराई और तुम्हारा सिर फट गया, खून ज्यादा बहने के कारण तुम मर गए और तुम्हारी आत्मा भटककर इस तरफ आ गयी .
सूरज- मैन पागाक्ल हो जाउंगा, प्लीज इस तरह की वाहियात बातें मत करो.
किरण- जों सच है उसे स्वीकार करना होगा सूरज, सच्चाई यही है, ये जी शरीर तुम देख रहे हो, यह मायावी शरीर है, यानि की तुम सिर्फ महसूस कर रहे हो की यह है, मगर सच इसके विपरीत है. इस जिस्म का कोई अस्तित्व नहीं है.
सूरज- तो क्या हम जी रहे हैं वो मरने के बाद की लाइफ है ?
किरण- जी नहीं, यह सजा है. लाइफ तो एक बार ही मिलती है. उसके बाद जों लाइफ होती है , वह किसी को याद नहीं रहती.
सूरज का दिमाग झन्ना गया, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे ? भ्रमित होकर वह अपने शरीर पर हाथ फिराने लगा, इसके बाद उसने किरण के सुन्दर जिस्म को स्पर्श किया. फिर वह आईने के सामने
खडा हो गया. वह नग्न अवस्था में था. उसका चेहरा बिलकुल वैसा ही था , जैसा कथित मौत से पहले था. वह अपनी पुरानी लाइफ को याद करने लगा. तभी किरण बोली-
- तुमने मेरी बात को सच मान लिया क्या ? हा हा हा ..........मजाक कर रही थी यार

Saturday, January 22, 2011

भाग-30
प्सूरज- आभार तो मुझे व्यक्त करना चाहिए, आपने इस अंधेरी रात में मुझे अपने होटल में रुकने का ऑफर दिया, इसके बाद सर्दी में ब्रांडी पीने और फिर अपने साथ प्रेम करने का प्रस्ताव दिया . यह मेरे लिए बहुत मायने
रखता है. सबके साथ ऐसा सुखद संयोग नहीं होता, उस स्थिति में जब आपके पास पैसे भी न हों. एक आप हैं जों दौलत को इतनी अहमियत नहीं देती, वरना देखते हैं की दुनिया इसीके पीछे पडी है.
किरण- मोहब्बत के लिए दौलत कोई मायने नहीं रखती.
सूरज- और आपने यह सिद्ध करके दिकाह दिया है.
किरण- ये पैग लीजिए, यह अमृत प्याला है, इसे पीकर मस्त हो जाओगे.
सूरज- इसे भी दीजिए, मगर हम तो आपके आँखों के मयखाने में ही मस्त होकर रह गए हैं, आपका खूबसूरत बदन ही जीती -जागती मधुशाला है. तुम्हारे ये होठ पैमाना बने हैं और तुम्हारी आँखों से मस्ती के जाम छलक
रहे हैं और सदियों से प्यासा ये दिल अमृतरस चख रहा है.
किरण- वह , वाह क्या बात है . कितना अच्छा वर्णन किया है . मजा आ गया. लगता है तुम्हारे अंदर भी किसी शायर की आत्मा समाई हुई है.
सूरज- मै भी थोडा बहुत लिख -पढ़ लेता हूँ. ज्यादा तो नहीं मगर दो चार लाइनों की तुकबंदी जरूर कर लेता हूँ. सुनिए , एक शेर उछाल रहा हूँ. ' फूलों की महक, कलियों का शबाब हो तुम , मेरे लिए तो गुलाब ही गुलाब हो तुम'
किरण- वाह, वाह . सचमुच मजा आ गया. अगर ये आपने नहीं लिखा है तब भी खूबसूरत है और अगर लिखा है तो दुनिया में इससे खूबसूरत शेर कोई हो ही नहीं सकता.
सूरज-अब आज की रात क्या तारीफ़ में ही बिता दोगे या कुछ प्यार -व्यार भी करोगे ?
किरण- आप मालिक हैं, इस जिस्म के , इस जान के, मेरे दीं और ईमान के. तुम्हें किस्से परमीशन लेने की जरूरत है ? जों चाहो करो . मैन अपना तन और मन तुमको समर्पित करती हूँ.
सूरज को गर्मी आ गयी, किरण का अंदाज इस तरह का था की सूरज की कामवासना जोरों से भडकने लगी, जब रात के काले अँधेरे में बिस्तर पर बैठी महिला पार्टनर अपने पुरुष साथी को रति क्रिया के लिए आमंत्रित करती है
तो उस समय सारा आलम मादक हो उठता है. ऐसा लगता है जैसे दुनिया का तमाम संगीत बज चूका हो. सारे तार झनझना उठे हों. सूरज ने किरण की पुकार पर उसके होठों को चूम लिया . कभी कभी वह अपनी जीभ उसकी जीभ से
रगड दिया करता था, इससे उन दोनों के बदन सुलगने लगते. सूरज का संवेदनशील अंग भी शेर की तरह दहाड़ने लगता था. वह कुछ बोल ही नहीं पाता था. किरण ने उससे कहा-
-कहाँ खो गए मेरे कामदेव, तुमने मेरे जिस्म के अंदर जों प्यार की ज्योति जलाई है उसकी आंच में मेरा समूचा अस्तित्व जल रहा है.
सूरज- इस अगन को और भी दहकने दो. मैन भी अपने अंदर के ज्वालामुखी का उफान देखना चाहता हूँ.
किरण- मैन प्यासी हूँ सूरज, इस प्यासी को अब और न तड़पाओ. मेरे करीब आ जाओ. मुझे अपनी बांहों में समेटे उस दुनिया की सैर कराओ , जहाँ पहुंचकर सब लोग अपनी सुध-बुध खो देते हैं.
सूरज- आह, ये आप क्या कर रही हैं ?
किरण- तुम्हारे इस कठोर अंग की औकात देखना चाहती हूँ, यह बहुत विशाल है. मै तो मर ही जाउंगी .
सूरज- कोई बात नहीं. चिंता मत करो , मेरे रहते कुछ नहीं होगा. कुछ भी नहीं होगा. मै प्यार करने के लिए हूँ, तकलीफ देने के लिए बिलकुल नहीं.
किरण- तो क्या इसे आधा उड़ा डालोगे ? जैसा है वैसा ही रहेगा न. अच्छा छोडो , जों होगा सो होगा . अब कर ही क्या सकते हैं ?
सूरज- तुम्हारे लिए तो मैन अपना भी सर कलम करवा सकता हूँ, इसकी तो खैर बात ही क्या है . लेकिन अगर ऐसा हो गया तो नेक्स्ट टाइम असली सुख कैसे भोग पाउंगी.]
किरण- तुम तो जान बन गए हो, मेरे अस्तित्व की असली नीव बन गए हो. अगर तुम्हें कोई स्पर्श भी करेगा तो मैन उसकी जान ले लूंगी.
सूरज- अरे ये क्या कह दिया. किसीकी जान-वां मत लेना भाई, वरना लफडा हो जाएगा . फांसी हो जायेगी तुम्हें .
किरण- दुनिया में अभी तक कोई ऐसा फांसी का फंदा नहीं बना है जों किसी रूह को मौत के घाट उतार सके. जिस्म को मौत आ सकती है मगर रूह को कभी नहीं.
सूरज- रूह , कैसी रूह ? मैन समझा नहीं. तुम्हारा रूह से क्या लेना देना ?
किरण- मेरा मतलब ये है की तुम अब मेरे जिस्म तक सीमित नहीं रहे बल्कि मेरी रूह की गहराइयों में समा चुके हो,
सूरज- जबसे तुम्हें मिला हूँ , मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है. तुम भी मेरी रूह में समा चुकी हो. मेरे दिल की गहराइयों में बस चुकी हो
किरण- आज सूरज और किरण का मेल हो रहा है. जबकि किरण तो सूरज का ही एक छोटा सा हिस्सा है. इसलिए इस मिलन को तो कोई रोक ही नहीं सकता.

Friday, January 21, 2011

भाग-29
प्रिंस- अब तारीफ़ करना छोडिये और कुछ फैसला लीजिए, बोलो क्या बोलती हो ? दुबई में सैटल होने का इरादा है ?
किरण- आपका हर वाक्य मेरे लिए आदेश की तरह है ,मगर कुछ अंदेशे हैं. मैंने सुन रखा है कि दुबई में लोग पहले तो प्यार से रखते हैं बाद में महिलाओं को जिस्मफरोशी करने के लिए मजबूर किया जाता है .
प्रिंस- सब लोग एक जैसे नहीं होते मेरी जान . अच्छे लोग यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं और बुरे लोग भी हर जगह पर हैं.
किरण- और अगर मुझे भी वही करना पड़ा , जों यहाँ से काम की तलाश में गयी महिलाओं के साथ किया गया तो ?
प्रिंस- तो क्या फर्क पड़ जाएगा ? यहाँ क्या करने वाली हो. वैश्या तो आखिर वैश्या ही होती हैं, वह जहां भी रहेगी , यही काम करेगी , भजन -कीर्तन तो करने से रही. इसमें डरने जैसी क्या बात है ?
किरण- बात तो आपकी जायज है , मगर एक सवाल उठता है. क्या वेश्याएं इंसान नहीं होती ? क्या उनकी कुछ फीलिंग्स नहीं होतीं ? क्या उनका जिस्म , जिस्म नहीं होता ? क्या उन्हें अपना बेड पार्टनर चुनने
की आजादी नहीं होनी चाहिए ? उनके साथ जों जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाता है तो उसके विरुद्ध बलात्कार का केस नहीं चलेगा क्या ?
प्रिंस- वे सब बेकार की बहस हैं, इनसे किसीका कोई फायदा नहीं होता. कोर्ट कचहरी में इंसान तभी जाता है जब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता , और यहाँ तो मामला ऐसा है की आपका व्यवसाय ही लोगों का मनोरंजन
करना है, अपने जिस्म की खुशबु से लोगों के मन को महकाना है. अब इसमें छोटा क्या और बड़ा क्या ? नाटा क्या और लंबा क्या ?
किरण- बहुत सही बोल रहे हो, ऐसा ही होता है. हम भी बड़े पागल हैं. ज़रा सी देर में भड़क जाते हैं. हो सकता है यह इस कारण से हो की अभी इस लाइन में मैन नई -नई हूँ.
सूरज- अच्छा आपने काफी धैर्य से काम लिया . अगर कोई दूसरे होती तो गरम हो जाती.
किरण- हाँ ठीक कहते हो. मैंने बहुत सब्र से काम लिया क्योंकि एक तो हम लोग कैमरे के दायरे में थे , और दूसरे मैन प्रिंस से उलझना नहीं चाहती थी बल्कि उसकी मदद से मैन वहां से निकलना चाहती थी. यही वजह थी की
मैंने उसे बातों में उलझाए रखा, ताकि अगर कोई हमें सीसी टी वी कैमरे से देख भी रहा हो तो यह जान जाए की मै पूरी तरह से उनके रंग में रंग गयी हूँ.
सूरज- तो क्या उसने तुम्हें अपने साथ ली जाने की हामी भरी ?
किरण- वो सब बाद में बताउंगी, पहले एक जाम और तैयार करती हूँ ताकि उसे आराम से पी सकूं, सुकून से प्यार कर सकूं, तुम न जाने कैसे इतना इंटरेस्ट ले रहे हो , कोई दूसरा होता तो अपना काम करके निकल लेता .
आखिर मेरी जिंदगी में तुम इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहे हो ?
सूरज- शायद इसलिए क्योंकि मैन आपके प्यार का मोहताज हो गया हूँ. आपसे प्यार करने लगा हूँ.
किरण- ये प्यार है या सहानुभूति ?
सूरज- तुम ये सब क्यों सूना रही हो ? प्यार के लिए या सहानुभूति के लिए ? जों तुम्हारा जवाब है वही मेरा जवाब होगा.
किरण- तुमने तो मुझे उलझाकर रख दिया है . मैन तुम्हारे प्यार के काबिल कैसे हो सकती हूँ जबकि किसी मर्द ने मुझे अभी तक प्यार करने का दावा नहीं किया. हाँ, सब लोग मेरे जिस्म से खेलने की हसरत जरूर रखते हैं.
सूरज- मुझे सिर्फ चेहरे से नहीं आत्मा से भी प्यार है. मैन तुम्हारी अच्छाई से प्रेम करता हूँ, तुम्हारे सच बोलने की आदत से प्रेम करता हूँ और इस बात से मुझे एलर्जी नहीं की तुमने किन लोगों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बांये हैं ?
वो तुम्हारा बीता हुआ कल था जों अब बीत गया. तुमने जों कुछ किया वह मजबूरी की हालत में किया .
किरण- किन शब्दों से आपका आभार व्यक्त किया ? अब तसल्ली हुई की किसीने तो मेरी भावनाओं को समझने का प्रयास किया .
सूरज- आभार तो मुझे व्यक्त करना चाहिए, आपने इस अंधेरी रात में मुझे अपने होटल में रुकने का ऑफर दिया, इसके बाद सर्दी में ब्रांडी पीने और फिर अपने साथ प्रेम करने का प्रस्ताव दिया . यह मेरे लिए बहुत मायने
रखता है. सबके साथ ऐसा सुखद संयोग नहीं होता, उस स्थिति में जब आपके पास पैसे भी न हों. एक आप हैं जों दौलत को इतनी अहमियत नहीं देती, वरना देखते हैं की दुनिया इसीके पीछे पडी है.
किरण- मोहब्बत के लिए दौलत कोई मायने नहीं रखती.
सूरज- और आपने यह सिद्ध करके दिकाह दिया है.
किरण- ये पैग लीजिए, यह अमृत प्याला है, इसे पीकर मस्त हो जाओगे.
सूरज- इसे भी दीजिए, मगर हम तो आपके आँखों के मयखाने में ही मस्त होकर रह गए हैं, आपका खूबसूरत बदन ही जीती -जागती मधुशाला है.

Thursday, January 20, 2011

भाग-28
प्रिंस- वेलकम, हमें भी नई-नई कलियाँ पसंद हैं. हमारा दुबई में मसाले का सबसे बड़ा बिजनेस है. वर्ड का शायद ऐसा कोई ही देश होगा जहाँ पर हमारा माल उपलब्ध न हो.
किरण- बहुत खुशी की बात है. आपके साथ ही चलती हूँ, यहाँ से मेरी बुकिंग करा लीजिए. आपको यहाँ पर अपना वक्त बर्बाद करने की क्या जरूरत है. जब सेवा वहाँ पर भी मिल सकती है .
प्रिंस- हाँ, ये भी बात है. मैन अभिप्रिय से बात कर लेता हूँ.
किरण- मेरी वहाँ घूमने की इच्छा है, ऐसा मत कहना. वरना वे आपसे हाई रेट मांगेंगे .
प्रिंस- वो सब तुम हम पर छोड़ दो. हम अपने तरीके से बात कर लेंगे. तुम्हारा पासपोर्ट चाहिए. वीजा वगैरह की औपचारिकताएं पूरी करवा देता हूँ. सब कुछ आसान है. अगर आपके पास दौलत है तो अच्छों-अच्छों का ईमान
बिकने के लिए उपलब्ध हो जाता है. ना बिकने वालों की संख्या बहुत है. जों नहीं बिकते उन्हें ज्यादा संख्या में बिकने वालों के ताने मिलते हैं. उन्हें असफल कहा जाता है. बताया जाता है कि उनकी कीमत लगाने वाला
कोई नहीं था , इसलिए वे नहीं बिक पाए.
किरण-बहुत ऊंची और व्यवहारिक बात कही है. आपकी बातों में बड़ा दम होता है. मैंने महसूस किया है कि आपकी बात सीधी दिल से निकलती है और दिल की गहराइयों में बसकर रह जाती है.
प्रिंस- वो देखो हमारी पुरानी डार्लिंग हमारी पसंद का पेय पदार्थ लेकर आ रही है. जब देसी दारु अंदर जाती है तो सारे खयालात बाहर आने लगते हैं. मुझे जोशो जवानी का असली आनंद इसीके साथ आता है. और अगर चांदनी
अपने हाथों से जाम बनाकर पिलाए तो बात ही क्या है ? मैने तुम्हें एक बात नहीं बतलाई, ये जों चांदनी है न , इसके साथ पहली सुहागरात मैंने ही मनाई थी. यहाँ पर जों ये पलंगपड़ा हुआ है न , इस पर मैंने अनगिनत हसीनों
के साथ सुहागरात मनाई है. यह पलंग गवाह है उन कमसिन हसीनों और मेरे साथ बिठाये रंगीन पलों का. न जाने कितनी कलियों को खिलाकर मैंने फूल बनाया है. और सुखद संयोग देखिये कि आप जैसी कली भी अब मेरे हाथों
खिलकर फूल बनने के लिए तैयार है. इन हसीन क्षणों में रोना -धोना मुझे बिलकुल पसंद नहीं है. जों लड़कियां अपने दिल से तैयार होती हैं, मुझे वही अच्छी लगती हैं.
किरण- मै आपको निराश नहीं करूंगी.
प्रिंस- मुझे आपसे यही उम्मीद थी, ज्यादा देर तक मैन आपको कामसुख तो नहीं डे पाउँगा , मगर प्यार करने में कोई कसर भी नहीं छोडूंगा.
किरण- हम भी प्यार के भूखे हैं, वासना के नहीं. आपकी स्वप्निल आँखों से जों प्यार टपकता है , हमारे लिए वह संजीवनी बूटी की तरह है.
प्रिंस-बहुत सी लड़कियों के साथ मैंने अंतरंग पल बिताए हैं, बहुतों से बातें भी की हैं ,मगर तुम उन सबसे अलग हो. तुम्हारा कोई जवाब नहीं है. तुम सबसे लाजवाब हो.
किरण- कुछ अनुमान है कि अब तक कितनी कलियों को आपने फूल बना दिया है ?
प्रिंस - कोई अंदाजा नहीं है, लेकिन हाँ, यह संख्या १०० से बहुत ज्यादा है. मगर उनमे से मुझे कोई भी उतनी नहीं जमी, जितनी कि चांदनी और तुम. चांदनी इतनी समझदार और सुलझी हुई लड़की है कि बिस्तर पर तबियत
खुश हो जाती है. जी चाहता है , इसीके आगोश में लिपटा रहूँ.
किरण- हाँ, वो तो है. ये तन से जितनी खूबसूरत हैं, मन से भी उतनी ही सुन्दर हैं.
प्रिंस- और अब तुम भी इसीकी तरह ही मिल गयी हो. अब मजा आएगा जीने का. जिंदगी में रंग -बिरंगे फूल बिखर जायेंगे.
किरण- मैन सौभाग्यशाली हूँ जों आप जैसा सच्चा इंसान मुझे मिला और आपने मुझे एक रात की दुल्हन बानाने के प्रस्ताव स्वीकार किया.
प्रिंस - कहो तो तुम्हें हमेशा के लिए दुबई में ही शिफ्ट कर दूं. तुम्हारी कंपनी से बात करना मेरी जिम्मेदारी है. जों कीमत होगी , चुका दी जायेगी, तुम जों मांगोगी वह तुम्हें मिल जाएगा .
किरण- अब भी मैन तुम्हारे दिल के ही करीब हूँ. मेरे मन में अब तक किसी भी मर्द की छवि अंकित नहीं हो पाई है. वो तुम हो जों मुझे इतने अच्छे लगे.
प्रिंस- अब तारीफ़ करना छोडिये और कुछ फैसला लीजिए, बोलो क्या बोलती हो ? दुबई में सैटल होने का इरादा है ?
किरण- आपका हर वाक्य मेरे लिए आदेश की तरह है ,मगर कुछ अंदेशे हैं. मैंने सुन रखा है कि दुबई में लोग पहले तो प्यार से रखते हैं बाद में महिलाओं को जिस्मफरोशी करने के लिए मजबूर किया जाता है .
प्रिंस- सब लोग एक जैसे नहीं होते मेरी जान . अच्छे लोग यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं और बुरे लोग भी हर जगह पर हैं.
किरण- और अगर मुझे भी वही करना पड़ा , जों यहाँ से काम की तलाश में गयी महिलाओं के साथ किया गया तो ?
प्रिंस- तो क्या फर्क पड़ जाएगा ? यहाँ क्या करने वाली हो. वैश्या तो आखिर वैश्या ही होती हैं, वह जहां भी रहेगी , यही कम करेगी , भजन -कीर्तन तो करने से रही.

Wednesday, January 19, 2011

भाग-27
चांदनी- एक लड़की की इज्जत लूटने का षड्यंत्र रचकर आप भी क्या साबित करने पर तुले हैं ? क्या इससे मर्दानगी झलकती है ?
चंद्र- मैं तुम सबकी पोल खोल दूंगा. जिस्मफरोशी के गिरोह का भंडाफोड कर , तुम्हारी टीम को नेस्तनाबूद कर दूंगा.
चांदनी- उससे पहले तुम कहींके नहीं रहोगे, तुम यहाँ से निकल भी नहीं पाओगे , तब तक तुम्हारी नई नवेली बीवी के पास यह फिल्म पहुँच चुकी होगी. तुम्हारे सीनियर के पास और यहाँ तक कि मालिक के पास भी सबूतों के साथ
यह सूचना पहुँच जायेगी. तुम्हारे कईसाथी चाहते हैं कि तुम्हें चैनल में नहीं बल्कि जेल में होना चाहिए. उसका भी इंतजाम कर लिया गया है. कच्चा नहीं बड़ा पक्का इंतजाम है . जहां तक मेरा अपना ख़याल है , ६ माह से
पहले तो जमानत भी नहीं हो पायेगी. फिर कहीं पत्रकारिता करने लायक भी नहीं रहोगे.
चांदनी यह कहानी अब किरण को ऐसे स्थान पर सुना रही थीं जहाँ पर कैमरा नहीं लगा था. वैसे तो चांदनी जिस्म्फरोसी का गिरोह चलाने वाले ब्रिज और अभिप्रिय की खास और भरोसेमंद सदस्य थी मगर इसके बावजूद भी वे उस पर नजर रखने
से बाज नहीं आते थे. लेकिन चांदनी भी होशियार थी, वह अपने लिए ऐसी खास जगह तलाश कर ही लेती थी , जहाँ तक उनके कैमरे की पहुँच न हो. चांदनी वैश्यावृति के धंधे में धोखे से लाई गयी थी, उसे यह काम पसंद
नहीं था मगर यह करने के अलावा और कोई चारा भी नहीं था. जब कोई ऐसी लड़की उसकी निगरानी में लाई जाती तो वह यथासंभव उसे समझाने का प्रयास करती थी. उसके बस में ज्यादा कुछ तो नहीं था. मगर जितना करती
थी उसीसे लोगों का भला हो जाया करता था. अगर वह किरण को नहीं संभालती तो उसके साथ भी लफडा हो जाता . शायद वह जीवित ही नहीं बच पाती. किरण यह बातें सूरज को सूना रही थी. सूरज मदहोश होने लगा .
एक तो शराब का नशा और ऊपर से कातिल जिस्म का नशा. वह बोला-
- वाह, मान गए. भगवान भी बचाने वाला पहले भेज देता है. अच्छा हुआ जों तुम्हें चांदनी जैसी मददगार वहां पर मिल गयी वरना गज़ब हो जाता .
किरण- हाँ, सूरज. मगर गज़ब तो तब भी हो ही चूका था. मेरी इज्जत लुट चुकी थी और वह कमबख्त ग्राहक भी वहां आ पहुंचा था जिसे मेरे लिए बुक किया गया था.
सूरज- ओह, फिर क्या हुआ ?
किरण- वह ग्राहक आया तब तक मैं एक पैग पी चुकी थी , मेरी झिझक खत्म हो चुकी थी. उसने आते ही गर्मजोशी से मुझसे हाथ मिलाया और मेरे गाल पर हल्का सा चुम्बन लिया. मैंने मुस्कराते हुए अपना परिचय दिया . वह बोला-
-यहाँ के लोग आपकी बहुत तारीफ़ कर रहे थे , मगर मिलकर लगा जैसे वह कम कर रहे थे. तुम तो हुस्न की परी हो.
किरण- शुक्रिया- आप भी कुछ कम नहीं हैं. आपका व्यक्तित्व एक कम्प्लीट मैन जैसा है. आपका शुभ नाम जान सकती हूँ ?
-सुनिया के लिए प्रिंस हूँ. आबेदीन शेख उर्फ प्रिंस , तुम तो अब अपनी जान हो चुकी हो. जों चाहो कहो.
किरण- आइये, आपका स्वागत है. मैन आपकी खिदमत में क्या पेश करूं, व्हिस्की, वोदका या कुछ और ?
प्रिंस- हम जों पीते हैं, उसे चांदनी जानती है. उसको हम पहले ही बता चुके हैं. जरूर ला रही होगी.
किरण- जी हाँ, बताया तो मुझे भी था, मगर मैंने सोचा कि मजाक कर रही है. वह कह रही थीं कि आपको यहाँ की देसी दारु पसंद है ?
प्रिंस- यहाँ मजाक नहीं , बिलकुल सच है. हमें यहाँ की दो चीजें बहुत पसंद हैं , एक तो हसीना और दूसरे देसी दारु. ऐसी चीजें हमारी दुबई में नहीं मिलती.
किरण- वाव, इसका मतलब आप दुबई में रहते हैं ? कितनी प्यारी जगह है. मेरे सपनों का शहर . अगर लाइफ में कभी विदेश जाने का मौक़ा मिला तो दुबई ही जाना चाहूंगी.
प्रिंस- यह इच्छा तो आपकी अभी पूरी हो सकती है. कहो तो टिकट बुक करा दूं ? क्या तुम इस देश से बाहर कहीं नहीं गयी ?
किरण- गयी तो कई देशों में हूँ , लेकिन घूमने का मौक़ा कभी नहीं मिला. हम तो फ्लाईट के साथ जाते-आते हैं. मै एअर होस्टेस हूँ. और जिस दुनिया के आप पुराने खिलाड़ी हैं, मैने उस दुनिया में आज ही दस्तक दी है.
प्रिंस- वेलकम, हमें भी नई-नई कलियाँ पसंद हैं. हमारा दुबई में मसाले का सबसे बड़ा बिजनेस है. वर्ड का शायद ऐसा कोई ही देश होगा जहाँ पर हमारा माल उपलब्ध न हो.
किरण- बहुत खुशी की बात है. आपके साथ ही चलती हूँ, यहाँ से मेरी बुकिंग करा लीजिए. आपको यहाँ पर अपना वक्त बर्बाद करने की क्या जरूरत है. जब सेवा वहाँ पर भी मिल सकती है .
प्रिंस- हाँ, ये भी बात है. मैन अभिप्रिय से बात कर लेता हूँ.
किरण- मेरी वहाँ घूमने की इच्छा है, ऐसा मत कहना. वरना वे आपसे हाई रेट मांगेंगे .
प्रिंस- वो सब तुम हम पर छोड़ दो. हम अपने तरीके से बात कर लेंगे. तुम्हारा पासपोर्ट चाहिए. वीजा वगैरह की औपचारिकताएं पूरी करवा देता हूँ.

http://cache.daylife.com/imageserve/00PA1gmeFgb4M/180x180.jpg
लंदन। ट्यूनिशिया के अपदस्थ राष्ट्रपति जिने अल आबदीन अली की पत्नी 4.5 करोड़ यूरो से अधिक मूल्य का 1.5 टन सोना लेकर दंगाग्रस्त देश से भाग गई हैं। फ्रांसीसी अखबार "ली मोंडे" ने फ्रांस के खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा है कि फिलहाल सऊदी अरब में निर्वासन में रह रहे 74 वर्षीय राष्ट्रपति की पत्नी लीला त्राबेल्सी सोने की छड़े लेने सेंट्रल बैंक ऑफ ट्यूनिशिया पहुंचीं। बैंक के गर्वनर ने उन्हें सोने की छड़े देने से मना कर दिया।

इसपर त्राबेल्सी ने पति को फोन किया। पति के हस्तक्षेप के बाद उन्हें सोना मिल गया जिसे लेकर वह भाग गई। सऊदी अरब में वह अपने पति के पास पहुंच गईं हैं। ब्रिटिश मीडिया ने अखबार को फ्रांसीसी राजनेता द्वारा दिए गए बयान का हवाले देते हुए लिखा है कि बेन अली की पत्नी 1.5 टन सोना या 4.5 यूरो मूल्य का सोना लेकर चली गईं।

हालांकि सेंट्रल बैंक के एक अधिकारी ने सोने निकालने के लिए कोई मौखिक या लिखित आदेश मिलने से इनकार किया है। अधिकारी ने कहा कि देश के सोने के भंडार में कोई तब्दीली नहीं हुई है। तेईस साल की तानाशाही के बाद बेन अली छात्रों के विरोधों के सामने झुकते हुए देश छोड़कर सऊदी अरब चले गए। इसके बाद देश में अराजक स्थिति ह

Tuesday, January 18, 2011

भाग-26
चांदनी- लेकिन आप इतने पर्सनल क्यों हो रहे हैं ? क्या आप भी पत्रकार हैं ? आप तो ऐसे दलील दे रहे हैं जैसे कि आप मेरा स्टिंग करने आये हुए हैं ?
चंद्र- जी नहीं, मैं इसलिए यहाँ नहीं आया हूँ.
चांदनी- तो किस काम के लिए आये हैं ? रात रंगीन करने के लिए ?
चंद्र- जी नहीं, इसलिए भी नहीं. बल्कि इसलिए क्योंकि आप लोगों के लिए मेरे दिल में सोफ्ट कोर्नर है. मैं आपसे मिलकर आपके कुछ दुःख कुछ सुख शेयर करना चाहता था.
चांदनी- तो करिये न , कौन इनकार करता है . मेरे गले में बहुत दुःख हो रहा है. अगर एक हीरों का हर इसमें डाल दोगे तो यह दुःख भी दूर हो जाएगा , करोगे ऐसा ?आप तो कर भी सकते हैं. मेरे गले का दुःख भला कैसे देख पाओगे ?
चन्द्र- मैं नहीं समझता कि तुम मेरे हार के लिए मोहताज हो सकती हो, मेरे जैसे न जाने कितने लोग यहाँ पर आते होंगे और इस तरह की पेशकश करते होंगे.
चांदनी- हाँ , मगर आप सबसे स्पेशल हैं. हम लोग यहाँ हैं, इसके लिए हम अकेले नहीं बल्कि आप जैसे लोग ही जिम्मेदार हैं. अगर खरीदार न हों तो बाजार का अपना कोई महत्त्व नहीं होता. बाजार का अस्तित्व ही नहीं होता . आप जैसे
कद्रदान यहाँ आते हैं, बाजार को रौनक देते हैं. अपनी अलग-अलग तरह की डिमांड रखते हैं और फिर मजबूरन दलालों को भी दायरा बढ़ाना पड़ता है. अगर ग्राहक को माल पसंद नहीं आता तो वह नए माल की चाहत रखता है. उसके पास में
दौलत होती है, वह दौलत फेंककर तमाशा देखने की कोशिश करता है . और इसी प्रक्रिया में एक कली फूल बना दी जाती है/ किसी बेबस की अस्मत लूट ली जाती है. वे लोग आप जैसे ही होते हैं. आपने अब तक कितनी मजबूर कलियों
को अपने पैरों तले कुचला है, लहूलुहान किया है. खुद आपको भी मालूम नहीं होगा, क्योंकि आप जैसे लोगों को नशा करने के बाद कुछ पता ही नहीं चल पाता है कि किसकी आबरू से खेल रहे हो. फिर चाहे वो कोई भी क्यों न हो
चंद्र- ये क्या कह रही हो चांदनी, तुम आरोप लगा रही हो मुझ पर , मेरे चरित्र पर.
चांदनी- चरित्र ? कैसा चरित्र ? जों इंसान किसी मजबूर लड़की को पैसों का लालच देकर होटल में लेकर आता है, उसकी इज्जत का सौदा करता है. हर कोई उसकी औकात समझता है. जिस तरह कोई बेवड़ा शराब की बोतल हाथ में लहराकर
लोगों को उपदेश देता फिरता है और लोग उसकी हंसी उड़ाते हैं , वही हाल हो जाता है .
चंद्र- आप हद से आगे बढ़ रही हैं.
चांदनी- और आप क्या कर रहे हैं ? आपने उस दिन क्या किया था, जब जबरदस्ती मेरी इज्जत लूट ली थी.
चंद्र- मैं कहता हूँ, सोच -समझकर आरोप लगाओ. तुम नहीं जानती , किस्से बात कर रही हो.
चांदनी- कौन हो. बराक ओबामा तो नहीं न .
चंद्र- मैं तुम्हारे अड्डे को तहस-नहस करवा दूंगा, तुम्हारे पूरे गिरोह को जेल की चक्की पिसवा दूंगा, जानती नहीं हो मेरे को.
चांदनी- अच्छी तरह से जानती हूँ. तुम्हारा असली धंधा क्या है, वह भी पहचानती हूँ, तुम लड़कियों को फंसाकर उन्हें गलत रास्ते पर डालते हो, फिर चोरी से उसकी उल्टी-सीधी फिल्म तैयार करते हो और मनगढंत कहानी तैयार करके फिर
उसे टी वी चैनल पर दिखा देते हो. तुम्हारे सीनियर और टीवी के मालिक समझते होंगे कि बहुत बढ़िया कहानी दी है. वाह -वाह हो जाती है तुम्हारी . मगर ....
चंद्र- और क्या अगर , मगर ?
चादंनी -मगर आपकी असलियत तो हम समझते हैं न .
चंद्र- अब अगर एक शब्द भी बोला तो मैं ये भूल जाउंगा कि एक लड़की से बात कर रहा हूँ. तुम्हारा जों गिरोह चलाता है , वह भी सलाम मारता है हमें.
चांदनी- सलाम क्यों नहीं मारेगा, जब वह आपको हर महीने हफ्ता भी पहुंचाता है तो सलाम कौन सी बड़ी बात है ?
चंद्र- एक पत्रकार के साथ तुम इस तरह की वाहियात बातें करके आखिर सिद्ध क्या करना चाहती हो ? सती सावित्री बनने की आखिर कौन सी वजह है ? तुम्हें डर नहीं लगता ?
चांदनी- एक लड़की की इज्जत लूटने का षड्यंत्र रचकर आप भी क्या साबित करने पर तुले हैं ? क्या इससे मर्दानगी झलकती है ?
चंद्र- मैं तुम सबकी पोल खोल दूंगा. जिस्मफरोशी के गिरोह का भंडाफोड कर , तुम्हारी टीम को नेस्तनाबूद कर दूंगा.
चांदनी- उससे पहले तुम कहींके नहीं रहोगे, तुम यहाँ से निकल भी नहीं पाओगे , तब तक तुम्हारी नई नवेली बीवी के पास यह फिल्म पहुँच चुकी होगी. तुम्हारे सीनियर के पास और यहाँ तक कि मालिक के पास भी सबूतों के साथ
यह सूचना पहुँच जायेगी. तुम्हारे कईसाथी चाहते हैं कि तुम्हें चैनल में नहीं बल्कि जेल में होना चाहिए. उसका भी इंतजाम कर लिया गया है. कच्चा नहीं बड़ा पक्का इंतजाम है . जहां तक मेरा अपना ख़याल है , ६ माह से
पहले तो जमानत भी नहीं हो पायेगी. फिर कहीं पत्रकारिता करने लायक भी नहीं रहोगे.

Monday, January 17, 2011

भाग-25
चांदनी - इस सवाल से आपको भला क्या दिलचस्पी हो सकती है ? जहां तक मैं समझती हूँ , आप अपना धंधा तो शुरू करने वाले दीखते नहीं ?
चन्द्र- मैं जानना चाहता हूँ कि आप इस धंधे में कैसे आयीं ? किसी ने मजबूर किया या आर्थिक तंगी के कारण या फिर शौक से आ गयी ? मेरी जानकारी के लिए पूछ रहा था .
चांदनी - मेरे ख़याल से आप सब्जेक्ट से भटक रहे हैं. जिस काम के लिए आप आये हैं, उसे शुरू करें और खत्म करके चलते बनें.
चंद्र- तुम तो बड़ी बेरुखी से पेश आ रही हो . मैं कितने प्रेम से बात कर रहा हूँ और आप हैं कि ......
चांदनी - मैं भी तो प्रेम करने की बात कह रही हूँ. प्रेम कीजिये न. आप हमारे मेहमान हैं. आपने मुझे यहाँ पर बुलवाया है. इतना खर्चा किया है. मैं भला बेरुखी से बात क्यों करने लगी ?
आप जैसा सवाल करेंगे , मैं उस तरह का जवाब दूंगा. अब अगर आपका सवाल ही रूखा रहा तो मैं क्या कर सकती हूँ ?
चन्द्र- ठीक है , चलो अब दूसरे तरह की बात करते हैं ? एक दिन में आप कितने ग्राहकों को हैंडल करती हैं ?
चांदनी -मैं आपने किसलिए बुक की हूँ ? सिर्फ बातचीत करने के लिए या फिर किसी और काम के लिए ? सवाल इसलिए उठता है क्योंकि आप मेरी पर्सनल लाइफ के बारे में ज्यादा इंटरेस्ट ले रहे हैं .
चंद्र- ओह, शायद आप मुझे गलत समझ रही हैं. मैं तो दोस्ती करने का प्रयास कर रहा था. अगर हम लोग बातचीत नहीं करेंगे तो एक दूसरे को कैसे समझ पायेंगे ?
चांदनी- हम लोग यहाँ पर एक रात के लिए मिल रहे हैं. रात भर में अगर सिर्फ जान पहचान ही बनाते रहोगे तो पैसे वसूल कैसे करोगे ? अगर आप चाहते हैं कि मैं आपके साथ सहयोग करूं तो आपको वही काम शुरू
करना होगा जिसके लिए आप यहाँ पर आये हो. मुझे ही देखो , ,मैं तो आपको कुछ नहीं बोल रही हूँ. और आप हैं कि मुझे आपरेशान किये जा रहे हैं. मेरे कहने का मतलब ये है कि अगर सिर्फ बातचीत ही करनी है तो
कभी दिन में मिलिए, आराम से बैठकर चर्चा करेंगे . देश की गरीबी पर, मंहगाई पर और यहाँ तक की कश्मीर की समस्या पर भी. आप चाहोगे तो शोपिंग -ओपिंग भी की जायेगी .
चंद्र- बहुत तेज हो चन्द्र , बेमतलब की बातें खूब बना रही हो . मगर जों हम जानना चाहते हैं, उस पर चर्चा नहीं कर रहे.
चांदनी- आप लोगों को कम से कम हम जैसे गरीबों और असहायों पर तो रहम आना चाहिए. हमें तो बख्श देना चाहिए. लोग आते हैं,, जाते हैं. और एक तबके के नहीं बल्कि हर तबके के और हर तरह के लोग आते हैं.
उनमे डॉक्टर भी होते हैं, इंजीनीयर भी, मजदूर भी , बिजनेसमैन भी और पत्रकार भी. मगर सब के सब यहाँ प्यासे बनकर आते हैं और अपनी प्यास बुझाकर चले जाते हैं. वे लोग नदी में स्नान करने से मतलब रखते हैं ,
नदी की लम्बाई -चौड़ाई मापने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते. बस मीडिया से जुड़े लोग ही ज्यादा खुजाते हैं. कोई कहानी नहीं मिलती तो हम पर ही कहानी बना डालते हैं. हम लोग आसान शिकार जों हैं. कुछ तो ऐसे भी महापुरुष
आते हैं कि टी.वी. चैनल से खर्चा लेकर आते हैं, हमारे साथ ऐश भी करते हैं और फिर छिपे कैमरे से कुछ द्रश्य लेकर हमें बदनाम भी करते हैं.
चन्द्र- लेकिन यह सब आप कुछ आप मुझे क्यों बता रही हैं ?
चांदनी- इसलिए क्योंकि आप भी उसी तरह के सवाल-जवाब कर रहे हैं. हम लोग अपने धंधे में साफ़ रहते हैं. अगर पैसे लेते हैं तो सेवा भी देते हैं . सोचो अगर हमने भी यहाँ पहले से छिपा कैमरा लगाया हो और आपसे पहले
यदि हम लोग उस वीडियो को आपके प्रतिस्पर्धी चैनल पर प्रसारित कर दें या फिर नेट पर अपलोड करदें तब क्या होगा ? क्लोग यही कहेंगे कि अच्छा नहीं किया.
चंद्र- अगर इतनी अच्छी बात कर लेती हो तो ऐसा घृणित काम ही क्यों करती हो ?
चांदनी- हम किसीके घर नहीं जाते बुलाने, लोग अपनी मर्जी से हमें ढूंढते हुए हमारे पास तक आते हैं. हम दिल को सुकून पहुंचाते हैं. रूह को सुकून पहुंचाते हैं.
चंद्र- और मीडिया के लोग क्या करते हैं ? उनका कर्तव्य है है जों हो रहा है उसको ज्यों का त्यों दिखाना. वे अगर अपने फर्ज को नहीं निभाएं तो क्या हो . पत्रकार समाज का आइना होते हैं.
चांदनी- लेकिन उनकी कुद्रष्टि हम जैसे निरीह लोगों पर ही क्यों होती हैं ?
चंद्र- आपको अगर ऐसा महसूस होता है तो कोई क्या करे ?
चांदनी- लेकिन आप इतने पर्सनल क्यों हो रहे हैं ? क्या आप भी पत्रकार हैं ? आप तो ऐसे दलील दे रहे हैं जैसे कि आप मेरा स्टिंग करने आये हुए हैं ?
चंद्र- जी नहीं, मैं इसलिए यहाँ नहीं आया हूँ.
चांदनी- तो किस काम के लिए आये हैं ? रात रंगीन करने के लिए ?
चंद्र- जी नहीं, इसलिए भी नहीं. बल्कि इसलिए क्योंकि आप लोगों के लिए मेरे दिल में सोफ्ट कोर्नर है. मैं आपसे मिलकर आपके कुछ दुःख कुछ सुख शेयर करना चाहता था.
चांदनी- तो करिये न , कौन इनकार करता है . मेरे गले में बहुत दुःख हो रहा है. अगर एक हीरों का हर इसमें डाल दोगे तो यह दुःख भी दूर हो जाएगा , करोगे ऐसा ?

Sunday, January 16, 2011

भाग-24
हीरो बन गयी थी, मैंने भी उस पर्चे को बड़ी एहतियात के साथ पढ़ा और नष्ट कर दिया. अबी मैं इतना तो जान गयी कि मैं अकेली नहीं हूँ , मेरे साथ वह महिला भी है. उसने पूछा -
- क्या सोच रही हो ?
किरण- यही कि वह ग्राहक कब तक आएगा. मुझे भूख लगी है. खाना भी इतना स्वाद है कि बस उँगलियाँ चाटते रहने को जी चाहता है.
महिला- बात तो कोई और है ?
किरण- सोचती हूँ कि पता नहीं कैसा आदमी होगा. प्यार से पेश आएगा या नफरत से. पता नहीं उसका अंग कितना खतरनाक होगा.
महिला- उसकी चिंता मत करो. कितना भी बड़ा क्यों न हो अपने आप सब कुछ एडजस्ट हो जाता है कुदरती तौर पर. मुझे ही देखलो मैं दिखती भले ही दुबली -पतली हूँ मगर सात फुट के हट्टे-कट्टे हव्सियों को भी
पानी पिलवा देती हूँ. थक जाते हैं मगर मैं नहीं थक पाती. दरअसल ये तो समुन्दर की तरह होती है. इसमें कुछ खास फर्क नहीं पड़ता.
किरण- इसका मतलब ये हुआ कि तुम खेली खाई खिलाड़ी हो. पूरा अनुभव हो गया है.
महिला- हाँ, और तुम भी इससे अछूती नहीं रहोगी, बहुत जल्द तुम भी मुझसे भी ज्यादा बड़ी खिलाड़ी बन जाओगी. तब तुम देख लेना , मुझे भी सिखाती नजर आयोगी. अब तैयार हो जाओ , तुम्हारा ग्राहक आने वाला है. मैसेज
आ गया. एक बार इस दवा से मुंह में कुल्ला करलो , शराब की बदबू निकल जायेगी. वरना ग्राहक को अच्छा नहीं लगेगा. कोशिश यही रहे कि ग्राहक खुश होकर जाना चाहिए.
किरण- ठीक है, ऐसा ही होगा. आपका ग्राहक यहाँ से खुश होकर जाएगा, और बार-बार मेरी सेवा लेना चाहेगा.
महिला- शाबाश, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी. और हाँ, अगर वह कोई सवाल करता है तो ज्यादा जवाब मत देना. पर्सनल जवाब तो बिलकुल नहीं. ध्यान रहे, तुम हर पल सी.सी. टी.वी. कैमरे की नजर में रहोगी .
किरण- मैं भला ज्यादा बात क्यों करने लगी. काम भर के लिए तो बोलना ही पडेगा. बाकी मुझे क्या लेना -देना ?
महिला- मैं इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि आजकल टी.वी. चैनल वाले रिपोर्टर भी स्टिंग के चक्कर में आ जाते हैं. वे लोग बवाल खड़ा कर देते हैं. इससे होता तो कुछ नहीं है, लेकिन डिस्टर्ब तो होता ही है.
एक बार एक रिपोर्टर ग्राहक बनकर मेरे कमरे में ही आ गया था. लगा उलटे सीधे सवाल करने. मैं तो जान गयी कि वह कोई बहुरुपिया ही है. मैं भी एलर्ट हो गयी.
किरण- ओह, फिर क्या हुआ ? वह आपसे क्या जानना चाहता था ?
महिला- तुमने अभी तक मेरा नाम तक भी नहीं पूछा है, मैं खुद ही बता देती हूँ. मैं चांदनी हूँ. और उस लड़के ने अपना नाम चन्द्र बताया था. वह एक दलाल के जरिये यहाँ तक पहुंचा था. उसने एक फाइव स्टार होटल बुक
करके रखा था. मैं उससे पहले होटल पहुंचना चाहती थी लेकिन वह मुझे पहले से ही कमरे में मौजूद मिला. उसका हुलिया देखकर मुझे उसके रईस होने पर शक हुआ. ये तो मैं देखते ही पहचान गयी कि फाइव स्टार होटल
बुक करने की उसकी हैसियत नहीं है,
किरण- क्यों ? क्या हैसियत किसीके माथे पर लिखी होती है ?
चांदनी- जी नहीं, मैं बताती हूँ. उसकी उम्र २५ से ज्यादा नहीं होगी. अगर उम्र ज्यादा होती तो मैं समझ भी सकती थी. उसके कपडे भी सामान्य थी. उसके जुर्राब से भी बू आ रही थी. जिसका मतलब था कि वह एक या
दो दिन से धुले नहीं थे. इसके अलावा इस उम्र में भी वह झिझक नहीं रहा था. जबकि इस उम्र का सामान्य ग्राहक थोड़ा सा डरता है. यह ऐसी उम्र होती है कि ज्यादातर युवाओं को बाजारू औरतों के पास जाने की जरूरत
ही नहीं होती, वे कोई न कोई लड़की पटा ही लेते हैं. और पटाकर वे कहीं भी अपने तन की प्यास बुझा लेते हैं. इस उम्र में एक ही रात में अगर कोई युवा हजारों या लाख तक खर्च कर रहा है तो वह संदेह के घेरे में आ ही जाता
है. उसने मुझसे पहले सवाल में मेरा नाम पूछा, इसके बाद बोला-
- इस धंधे में कबसे हो ? और एक रात में कितना कमा लेती हो ?
किरण- इस सवाल से आपको भला क्या दिलचस्पी हो सकती है ? जहां तक मैं समझती हूँ , आप अपना धंधा तो शुरू करने वाले दीखते नहीं ?
चन्द्र- मैं जानना चाहता हूँ कि आप इस धंधे में कैसे आयीं ? किसी ने मजबूर किया या आर्थिक तंगी के कारण या फिर शौक से आ गयी ? मेरी जानकारी के लिए पूछ रहा था .
किरण- मेरे ख़याल से आप सब्जेक्ट से भटक रहे हैं. जिस काम के लिए आप आये हैं, उसे शुरू करें और खत्म करके चलते बनें.
चंद्र- तुम तो बड़ी बेरुखी से पेश आ रही हो . मैं कितने प्रेम से बात कर रहा हूँ और आप हैं कि ......
किरण- मैं भी तो प्रेम करने की बात कह रही हूँ. प्रेम कीजिये न. आप हमारे मेहमान हैं. आपने मुझे यहाँ पर बुलवाया है. इतना खर्चा किया है. मैं भला बेरुखी से बात क्यों करने लगी ?

Saturday, January 15, 2011

भाग-23
किरण- मैं तो पूरे संसार में बदनाम हो जाउंगी , इस तरह का काम आपलोग क्यों कर आरहे हैं ?
महिला- जब तक तुम हमारी कंपनी की हाँ में हाँ मिलाओगी तब तक तुम्हें कोई तकलीफ होने वाली नहीं है. हमें जिसका फोटो दिखाना होता है उसे साईट ओपन करके दिकाह दिया जाता है. उस पर किसी भी लड़की
का ओरीजनल नाम नहीं लिखा होता बल्कि पेट नेम होता है. हम उसे वेबसाईट का एड्रेस भी नहीं बताते, तब तुम बदनाम कैसे हो जाओगी ,
किरण- और जों लड़की तुम्हारी बात नहीं मानती, उसके साथ क्या सलूक किया जाता है ?
महिला- उसे जग भर में बदनाम कर दिया जाता है. इतना ज्यादा बदनाम कि आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचता. जान जाने से तो यही बेहतर है कि चुप रहा जाए. अगर कोई लड़की इस सिद्धांत
को नहीं मानती तो भगवान को प्यारी हो जाती हैं, मैं तो दाद देना चाहूंगी तुम्हारी बुद्धिमानी को कि समय रहते तुमने अपने विचार बदल लिए वरना तुम्हें भी तकलीफ होती , वैसे भी देखिये न प्रकृति भी तो हमें यही सिखाती
है. कभी सर्दी, कभी गर्मी और कभी बरसात क्यों होती है, ? कभी विचार किया है ?
किरण- नहीं , मैं कभी इतनी बात नहीं सोच पाई, कभी टाइम भी नहीं मिला और इस बाबत विचार भी नहीं हो पाया.
महिला- मैं बताती हूँ, प्रकृति इन मौसमों के जरिये हमें यह सिखाती है कि समय -समय पर हमें अपनी आदतें और सोचने का जरिया भी बदलना चाहिए. अगर एक जैसे रहेंगे तो सफल नहीं हो पायेंगे , जैसे अगर दुनिया में
एक जैसा ही मौसम रहे तो कुछ होने वाला नहीं है. अगर गरमी ही गर्मी रहेगी तो लोग भूखे -प्यासे मर जायेंगे . ना तो पीने योग्य जल की पूर्ती हो पायेगी और ना ही कोई फसल ही हो पायेगी. संतुलन के लिए गर्मी, सर्दी
और वर्षा सभी की जरूरत पड़ती हैं. अब मैं अपना भाषण समाप्त करती हूँ, साथ ही तुम्हारे लिए स्पेशल सकोच का एक लार्ज पैग भी तैयार करके लाती हूँ.
किरण- हाँ, रात कजो पीई थी वह अभी तक उतर नहीं पाई है. उसके लिए उतारा चाहिए . मैं तो सखी थी कि तुम भूल ही गयी होंगी.
सूरज- अच्छा, इसका मतलब तुमने उन लोगों को बहकाने के लिए उन लोगों के सामने इस तरह का प्रदर्शन किया था ?
किरण- हाँ, उस महिला ने इशारों-इशारों में ही मुझे यह समझा दिया था कि मैं गलत जगह फंस गयी हूँ और होशियारी करने का मत्ल्बा है जान से हाह धोना. इसलिए मैं सावधान हो गयी. मुझे सोचने के लिए वक्त की जरूरत थी ,
मैंने अभिप्रिय की आँखों में अपने लिए एक विशेष चमक देखी थी, यही वजह थी कि मैं उससे एक बार मिलना चाहती थी . वही इस कंपनी का सरगना था और मैं उससे मिलकर प्यार से अपने साथ हुई घटना का इंतकाम लेना चाहती
थी, इसीलिए मैंने मन मसोसकर उस कंपनी में वैश्यावृत्ति का काम करना स्वीकार कर लिया. महिला की बातों से इतनी बात तो मैं भी समझ गयी थी कि दुश्मनी करके उन लोगों से जीतना संभव नहीं है , क्योंकि वे ताकतवर लोग
थे. उनकी पहुँच हर जगह तक थी. वे लोग मीडिया से लेकर हर जगह तक अपना वर्चस्व रखते थे.
सूरज- तब क्या हुआ ? वह महिला स्कोच का लार्ज पैग लेकर आई कि नहीं ?
किरण- हाँ, उसने अपना वादा पूरा किया . एक सावली सी सेविका के साथ वह फिर से मेरे सम्मुख हाजर हुई. सेविका जिस ट्रोली को धकेलकर लाई उसमे सब सामान मौजूद था. सेविका नजर झुकाकर चली गयी तो उसी ट्रोली
से फोल्डिंग टेबल निकालकर हमने अपने लिए चखने का सामन निकालना शुरू किया. कुछ अबदाम, कुछ नमकीन काजू , डाल सेव और चिकन के पकौड़े थे. मैंने चीअर्स बोलकर पैग होठों से लागा लिया . एक ही सांस में हम दोनों अपना- अपना
गिलास खत्म कर चुके थे. तभी उस महिला का मोबाइल घन घनाने लगा. उसने फोन रिसीव किया, थोड़ी देर बात हुई और फिर उसने एक पर्ची पर मुझे कुछ लिखकर दे दिया .
सूरज- वह पर्चा भी उसने गुप्त रूप से दिया होगा , क्या लिखा था उसमे ?
किरण- हाँ, एकदम कोने में जाकर लिखा था. वह जानती थी कि कौन सा क्षेत्र कैमरे की निगरानी से बचा हुआ है. उसमे लिखा था कि उसे आने वाला फोन बोस का था. वह खुश था . महिला को शाबाशी दे रहा था. उसकी नजर में महिला
हीरो बन गयी थी, मैंने भी उस पर्चे को बड़ी एहतियात के साथ पढ़ा और नष्ट कर दिया. अबी मैं इतना तो जान गयी कि मैं अकेली नहीं हूँ , मेरे साथ वह महिला भी है. उसने पूछा -
- क्या सोच रही हो ?
किरण- यही कि वह ग्राहक कब तक आएगा. मुझे भूख लगी है. खाना भी इतना स्वाद है कि बस उँगलियाँ चाटते रहने को जी चाहता है.
महिला- बात तो कोई और है ?
किरण- सोचती हूँ कि पता नहीं कैसा आदमी होगा. प्यार से पेश आएगा या नफरत से. पता नहीं उसका अंग कितना खतरनाक होगा.
महिला- उसकी चिंता मत करो. कितना भी बड़ा क्यों न हो अपने आप सब कुछ एडजस्ट हो जाता है कुदरती तौर पर.
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ग्वालियर। एक युवक ने बाइक खरीदने की खातिर अपनी प्रेमिका को ही बेच डाला। युवती को पुलिस ने नागपुर के रेड लाइट एरिया से कुछ दिन पहले मुक्त करा लिया था लेकिन आरोपी युवक चोरी के एक मामले में पुलिस के हाथ लगा। इस मामले में स्थानीय बदनापुरा रेड लाइट एरिया के दो दलालों की पुलिस को तलाश है।

पुलिस के मुताबिक शंकरपुर निवासी 19 वर्षीय जब्बीर खान लक्ष्मण तलैया निवासी 15 वर्षीय युवती से इश्क करता था। उसे वह अक्सर इधर-उधर घुमाने ले जाता था। गत जून में जब्बीर ने इस युवती को बदनापुरा निवासी शिशुपाल और कश्मीरी नामक युवकों को 50 हजार रुपए में बेच दिया था। इस रकम से जब्बीर ने पल्सर मोटरसाइकल खरीद ली थी। पुलिस के अनुसार ये दोनों युवक रेड लाइट एरिया के दलाल हैं। इन दोनों ने बाद में इस युवती को नागपुर के रेड लाइट एरिया में बेच दिया था।

युवती के गायब होने पर उसके पिता ने बहोड़ापुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि युवती नागपुर में रेडलाइट एरिया में है। पुलिस ने 29 नवंबर को दबिश देकर युवती को वहां से मुक्त करा लिया। उसने पुलिस को बताया कि जब्बीर खान ने उसे 50 हजार रुपए में शिशुपाल और कश्मीरी को बेच दिया था। इधर पुलिस जब्बीर की तलाश कर रही थी। गुरुवार रात वह चोरी के एक मामले में पकड़ा गया।

दो दिन पुरानी चोरी भी कुबूली

पुलिस ने जब अपने तरीके से पूछताछ की तो जब्बीर ने दो दिन पूर्व अपने चार साथियों के साथ यातायात नगर से नीलकमल फर्नीचर स्टोर से चोरी की वारदात भी स्वीकार की। पुलिस ने उसके साथियों छोटू खान, अमजद खान, शरीफ खान, व सगीर अहमद को पकड़ लिया। इनके पास से एक लाख रुपए का सामान भी बरामद कर लिया। थाना प्रभारी नवाब सिंह ने बताया कि पकड़े गए नकबजनों से पूछताछ की जा रही है जिसमें यातायात नगर में हुई पुरानी चोरियों का सुराग लग सकता ह

Friday, January 14, 2011

भाग-22
िरण- हाँ, वह मेरी मजबूरी को समझ रही थी, मगर मेरे सामने वही थी इसलिए मैं उसको अपनी दुश्मन समझ बैठी थी. वह अगर कठोरता से बात नहीं करती तो उसे भी संदेह के गहरे में लिया जा सकता था . उसने
मुझे इशारों में थोड़ा सा समझाया और मैं ज्यादा समझ गयी. मैंने सबसे पहले वहां से निकलने की योजना बनाई. मै उससे बोली-
-अच्छा, ये बताओ कि अगर मैं अपना प्लान बदलती भी हूँ और तुम्हारी कंपनी ज्वाइन करती हूँ तो मुझे क्या मिलेगा ? महीने प् पगार बोलो ?
महिला- हर कस्टमर पर दस हजार मिलेंगे. ये पचास तो नथ उतराई थी और यह रस्म जीवन में एक बार ही अदा की जा सकती है.
किरण- दस बहुत कम हैं. २० हजार लूंगी और महीने में दस दिन से ज्यादा काम नहीं करूंगी , यानि कि दस रातों की रकम मुझे हर माह दो लाख चाहिए. सेवा भी उसी तरह करूंगी . ग्राहक को किसी तरह कि निराशा नहीं
होने दूंगी. जों वह चाहेगा, वही देने की कोशिश करूंगी. जब तक ग्राहक संतुष्ट नहीं हो जाता तब तक नहीं छोडूंगी . अब सोचलो, क्या फैसला करना है. अगर मैं बर्बाद होती हूँ तो आबाद किसीको नहीं होने दूंगी , और अगर मैं
संतुष्ट रहूंगी तो असंतुष्ट किसीको नहीं रहने दूंगी . मेरा यकीन है कि यह सौदा आपके लिए घाटे का नहीं रहेगा.
महिला- हमारे यहाँ एअर होस्टेस का जों रेट है वह आपको बता दिया गया है. इससे ज्यादा अगर कुछ लेना-देना है तो हमें मैनेजमेंट से बात करनी होगी.
किरण- मुझे भूख भी लगी है. अगर चिकन पककर तैयार हुआ हो तो बात कर लीजिए. आपके साथ खाने में मुझे खुशी होगी. और हाँ रात के उतारे का कुछ इंतजाम है कि नहीं ?
महिला- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? इस चीज की तो यहाँ नदियाँ बहती हैं. अगर शराब नहीं तो जीवन जीने का मजा नहीं आता.
किरण- सच कहती हो. हम लोग भी ड्यूटी के दौरान इतने थक जाते हैं कि बिना दवा लिए दर्द ठीक ही नहीं हो पाता , हर हाल में इसका सहारा लेना ही पड़ता है.
महिला- लगता है अब तुम पूरी तरह तैयार हो चुकी हो. अगर चाहो तो दिन की भी एक बुकिंग आई है. फोरेन की पार्टी है. शाम को उसकी फ्लाईट है. जाने से पहले उसे नया माल चाहिए. अच्छा खासा माल देगा. मंजूर हो तो उसे
भेज देती हूँ, फिर आराम से तुम उसके साथ लंच और डिनर कर सकती हो. मौज की मौज और माल का माल.
किरण- उसके लिए जाना कहाँ होगा ? इसी फ़ार्म हाउस में काम हो जाएगा या ?
महिला- पार्टी तो अपने होटल की डिमांड करती ही है मगर कन्वेंस करने पर मान जाते हैं लोग. यानि कि इसे भी यहीं पर बुलाया जा सकता है. जब तक तुम नहा धोकर तैयार होती हो, मेकअप वगैरह करती हो तब तक मैं तुम्हारे
लिए दूसरे कपडे मंगवा देती हूँ और उसे भी यहीं बुला लेती हूँ. ५० साल से ऊपर का बुड्ढा है. एक मिनिट में फिनिश हो जाएगा. ज्यादा टाइम नहीं लगेगा. कभी -कभी तो ऐसे मर्द सिर्फ खाली फायरिंग करके ही रह आजाते हैं.
किरण- ठीक है , मुझे मंजूर है. फिर मैं खाने का ऑर्डर मेरे तरीके से दे दूंगी. पास वाले किसी फाइव स्टार से खाना मंगवा देना.
महिला- उसकी चिंता मत करो, वो सारी सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी, खुद मैं भी उपलब्ध रहूंगी. अपनी दुल्हन को मैं अकली थोड़े ही छोड़ सकती हूँ. जब चरम सुख का समय होगा, मैं तभी वहां से हटूंगी, थोड़ी देर के बाद मौज -मस्ती
के लिए मैं भी हाजिर हो जाउंगी. वैसे भी वह अजीब किस्म का इंसान है, उसने एक साथ दो लड़कियों की डिमांड की है. एक उसने आपका फोटो पसंद किया है और एक मेरा. तो हम दोनों उसे जल्दी ही निबटा देंगे.
बस इतना ख़याल रहे कि हमारे मेहमान का दिल नहीं टूटना चाहिए, वह जिस तरह भी और जैसे भी सुख वसूलना चाहता है, हमें उसका साथ देना होगा.
किरण- मैं शिकायत को कोई मौक़ा नहीं दूंगी, मगर ये बताओ कि मेरा फोटो उसने आखिर कहाँ देख लिया.
महिला- हमारी वेबसाईट पर भी उपलब्ध है.
किरण- इसका मतलब तुम लोगों ने हमें पक्की धंधेबाज औरत बना दिया है. जय हो.........
महिला- क्या करें , पापी पेट का सवाल हाई. मंहगाई इतनी हो गयी है कि जीने के लिए यह रास्ता भी चुनना पड़ता है. मजबूरी है. और देखा जाए तो मजा भी है. जों जिस तरीके से लेता है , ले सकता है.
किरण- मैं तो पूरे संसार में बदनाम हो जाउंगी , इस तरह का काम आपलोग क्यों कर आरहे हैं ?
महिला- जब तक तुम हमारी कंपनी की हाँ में हाँ मिलाओगी तब तक तुम्हें कोई तकलीफ होने वाली नहीं है. हमें जिसका फोटो दिखाना होता है उसे साईट ओपन करके दिकाह दिया जाता है. उस पर किसी भी लड़की
का ओरीजनल नाम नहीं लिखा होता बल्कि पेट नेम होता है. हम उसे वेबसाईट का एड्रेस भी नहीं बताते, तब तुम बदनाम कैसे हो जाओगी ,
किरण- और जों लड़की तुम्हारी बात नहीं मानती, उसके साथ क्या सलूक किया जाता है ?
महिला- उसे जग भर में बदनाम कर दिया जाता है. इतना ज्यादा बदनाम कि आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचता.

Thursday, January 13, 2011

भाग-२१
महिला- इस बात का पूरा ख़याल रखा जाता है. जिस व्यक्ति ने तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाए हैं उसने कंडोंम का इस्तेमाल किया था. मैं इसी कमरे मैं मौजूद थी.
किरण- मैं छोडूंगी नहीं तुम लोगों को , सबके खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊंगी .
महिला- कहाँ करोगी शिकायत ? करके देखलो. उलटे तुम बदनाम हो जाओगी .
किरण- अभी इन्साफ ज़िंदा है, ऐसा नहीं है कि सब लोग करप्ट हो गए हों .
महिला- जिसने भी इस तरह की कोशिश की है वह कहीं की नहीं रही.
किरण- मैं तुम्हारी इस पाप की लंका को खाक में मिलाकर छोडूंगी.मैं ज़रा अलग किस्म की लड़की हूँ, अपने साथ हुए इस धोखे को इतनी आसानी से नहीं भूल पाउंगी .
महिला- अगर ऐसा करना भी चाहोगी तो नहीं कर पाओगी. मतलब, भूल नहीं पाओगी. मैं बड़े प्यार से तुम्हारा अश्लील वीडियो यू ट्यूब .कॉम पर डाल सकती हूँ. और भी इसी तरह की कई साइटें हैं जिन्हें दिन में करोड़ों
लोग देखते हैं. तब तुम तो क्या पूरी दुनिया भी नहीं भूल पायेगी. याद रखेगी तुम्हें सदा-सदा के लिए. ब्लू फिल्म के खरीदार भी कम नहीं है. हमारे पास सैकड़ों के डीलर की इन्क्वारी आती रहती है. आम के आम और
गुठलियों के दाम वाली बात हो जाती है. एक बार हमारे ग्राहक का दिल तुम पर आया , हमने उसे सेवा दी , बदले में तुम्हें कीमत भी दे रहे हैं. अब आगे तुम्हारी मर्जी है, अगर अच्छा लगे तो काम करो और नहीं अच्छा
लगे तो बिलकुल मत करो यार . इसमें गुस्सा होने जैसी क्या बात है / तुम्हें थकान हो रही है इसलिए खराब लग रहा है. थोड़ी बहुत देर में सब ठीक हो जाएगा . अगर तुम किसी और के साथ भी पहली बार सुहागरात
मानती तो पहली -पहली बार इतना दुःख तो होता ही, अब रास्ता बिलकुल आसान और साफ़ हो गया है. अब तुम्हें किसी तरह के कोई परेशानी नहीं हो पायेगी .
किरण- मैंने बताया न , मैं अलग किस्म की हूँ. अगर हर गली, हर चौराहे पर भी मेरे अश्लील फोटो लगवा देते हो तब भी मुझे फर्क नहीं पडेगा, क्योंकि मेरी आबरू ला असली मोती तो तुम लोगों ने पहले ही चूर-चूर
कर दिया है. अब मैं तुम लोगों से इंतकाम लूंगी , और असी-वैसे नहीं. ब्याज के साथ लूंगी. तुम्हारा पूरा गिरोह नेस्तनाबूद हो जाएगा .
महिला- ऐ , कोई उपन्यास पढ़ लिया है या एक्शन वाली कोई फिल्म देख ली है. बड़े धांसू डायलोग बोल लेती हो. हीरोइन बनना चाहती हो क्या है. अपना सेठ है न , उसका बड़ा प्रोडक्शन हाउस है. बात करती हूँ ,
अगर वहाँ भी कैरियर बनाना चाहे तो बुरा नहीं है . लेकिन वहाँ भी कम्प्रोमाइज तो करना ही पड़ता है. करना पड़ेगा. हर डायरेक्टर सेक्सुअल फेवर चाहता है. नहीं करोगी तो फेल . कोई भी बहाना बना सकता है.
किरण- फिल्म तो अब मैं बनाऊँगी , तुम सब लोगों की. ती.वी. चेनल के ऑफिस में जाकर बैठती हूँ और अपनी आपबीती सुनाती हूँ. सभी सफेदपोशों के चेहरे से नकाब उतर जाएगा .
महिला- ऐसी गलती भी करके देख लों. देखती हूँ तुम यहाँ से बाहर कैसे निकलती हो. अरे बावली अपनी जान की दुशमन क्यों बनती है. जों हुआ है उसे भूल जा. नाश्ता कर ही लिया है. खाना खाने का मूड है तो बोल चिकन
तैयार हो रहा है. देसी चिकन है. सब थकान उतर जायेगी. दो पैग के साथ खाना खाना खायेंगे तो बात ही क्या है,. बाद में तेरी इच्छा है. ये काम करना है तो कर . नहीं करना है मत कर. ऐसी भी मैं कई लड़कियों को जानती
हूँ जिन्हें यहाँ पर जबरदस्ती लाया गया. ग्राहक ने रात भर मस्ती की, सुबह उसे पेमेंट किया और वह चुपचाप लेकर चली गयी. दोबारा आयी ही नहीं. वो भी खुश, कस्टमर भी खुश और कंपनी भी खुश.
किरण- तुम औरत नहीं हो,औरत के नाम पर कलंक हो. मुझ असहाय लड़की की मदद करने के बजाय उलटा धमका रही हो .
महिला- यही तो नादानी कर रही है, समझने की कोशिश नहीं कर रही. इधर आ. साइड में. अरे पगली उस जगह पर हम कैमरे की नजर में थे. यहाँ चप्पे-चप्पे पर सी.सी.ती.वी . कैमरे लगे हुए हैं. यहाँ पर होने वाली
हर हरकत पर कंपनी की नजर है. तू बात को समझने की कोशिश क्यों नहीं करती है. ये बहुत डेंजर लोग हैं. इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता . बड़े खतरनाक हैं, ऊंचे रसूख वाले हैं. पहले तू यहाँ से चुपचाप हंसकर बाहर
निकल जा. उसके बाद तुझे जों कहना है, या जों करना है वो कर लेना. समझी. और उस सामने वाले एरिया में मुझे थेंक्स मत बोलना.
सूरज- ओह, इसका मतलब वह महिला तुम्हारी हमदर्द थी ?
किरण- हाँ, वह मेरी मजबूरी को समझ रही थी, मगर मेरे सामने वही थी इसलिए मैं उसको अपनी दुश्मन समझ बैठी थी. वह अगर कठोरता से बात नहीं करती तो उसे भी संदेह के गहरे में लिया जा सकता था . उसने
मुझे इशारों में थोड़ा सा समझाया और मैं ज्यादा समझ गयी. मैंने सबसे पहले वहां से निकलने की योजना बनाई. मै उससे बोली-
-अच्छा, ये बताओ कि अगर मैं अपना प्लान बदलती भी हूँ और तुम्हारी कंपनी ज्वाइन करती हूँ तो मुझे क्या मिलेगा ? महीने प् पगार बोलो ?
महिला- हर कस्टमर पर दस हजार मिलेंगे. ये पचास तो नथ उतराई थी और यह रस्म जीवन में एक बार ही अदा की जा सकती है.
किरण- दस बहुत कम हैं. २० हजार लूंगी और महीने में दस दिन से ज्यादा काम नहीं करूंगी , यानि कि दस रातों की रकम मुझे हर माह दो लाख चाहिए.

Wednesday, January 12, 2011

भाग- 20
- ये तुम्हारा मेहनताना है. अगर नौकरी करोगी तो महीने भर में इतना कमा पाओगी , और अगर यहाँ पर सेवा देना चाहोगी तो हर रात की तुम्हें इतनी रकम मिला करेगी .
किरण- अभिप्रिय और ब्रिज कहाँ हैं ?
- वे चले गए. यह रकम उन्होंने ही दी हैं. अब तुम मुझसे संपर्क कर सकती हो. रात तुम्हारे साथ सुहागरातमनाने वाले ब्रिज ने यह कीमती हार भी तुम्हें तोहफे में दिया है. अब अगला कस्टमर ब्रिज के अलावा कोई दूसरा भी हो सकता है.
किरण- कस्टमर . क्या आपको मैं धंधेबाज लगती हूँ ? क्या कल रात मेरा सौदा किया गया था ?
-तो क्या इतनी रकम कोई ऐसे ही दे देता है ? तुम अकेली नहीं हो. हमारे साथ फिल्मों की नामचीन एक्ट्रेस, होस्टेस, कोलेज गर्ल सब जुडी हुई हैं. ग्राहकों की डिमांड के अनुसार लड़कियां दी जाती हैं. तुम पर किसी मनचले
का दिल आ गया था. वह रईस उस प्लेन में सफर कर रहा था जिसमे तुम्हारी ड्यूटी लगी हुई थी. उसने हमारी कंपनी से संपर्क कर तुम्हें पाने की हसरत जाहिर की. पुराना ग्राहक था इसलिए उसे मना नहीं किया जा सकता था.
किरण- ओह , तो अभिप्रिय नेता का बेटा नहीं है ? और बरिह उसका दोस्त नहीं है ?
महिला- है न. सब सही है. तुमने जों सूना उसमे गलत कुछ भी नहीं है. ब्रिज बहुत फेमस व्यापारी का बेटा है और अभी. एक ख्यातिप्राप्त नेता का बेटा है. ये दोनों एक एस्कोर्ट कंपनी चलाते हैं. भूले -बिसरे और परेशान प्यासे लोगों
की प्यास बुझाते हैं. जरूरत मंदों की आर्थिक मदद करते हैं. मुझ जैसी असहाय महिलाओं को ऊंची पगार पर नौकरी देते हैं. यहाँ से पहले मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी. पूरे १२ घंटे काम करने के बदले मुझे कितनी
पगार मिलती थी ? अंदाजा लगाओ . अरे सिर्फ अढाई हजार महीना. और ऊपर से कंपनी का मैनेजर रोजाना इस शरीर के साथ खिलवाड करता था , बिलकुल मुफ्त में. वहाँ काम करने वाली ज्यादातर लड़कियां स्वेच्छानुसार
उसके साथ सम्बन्ध बनाती थी, जिसे काम नहीं करना हो वह इनकार करे. और यहाँ पर मुझे महीने के पूरे बीस हजार ररुपये मिलते हैं. इन पैसों से मैं अपने घर का खर्च चला सकती हूँ, अपने भाई को अच्छी शिक्षा दिला रही
हूँ. ओवर टाइम करके ही बीस से पच्व्चीस हजार महीना निकल आते हैं. जानना चाहोगे ओवर टाइम कैसा ? अरे यही जों तुमने किया है. अगर कोई ग्राहक अर्जेंट लड़की का इंतजाम करने को कहता है और कोई उस समय
उपलब्ध नहीं होती तो मैं चली जाती हूँ, मुझे महीने में कुछ दिन ही यह करना होता है और अच्छी खासी रकम मिल जाती है.
किरण- इसका मतलब ये लोग जिस्म के दलाल है. भडवे हैं.
महिला- इस अबरे में फैसला तुमको करना है. मैं तो इतना जानती हूँ कि अढाई हजार में भी मेरी अस्मत लुटती थी और अब भी लुटती है तो मुझे मनमाफिक कीमत भी मिलती है. मेरी इच्छानुसार होता है जों होता है.
किरण- लेकिन मेरे साथ तो गद्दारी की गयी है. मुझे पहले नहीं बताया गया था कि मेरे साथ क्या होने वाला है. मुझे दोस्ती और प्रेम के जाल में फंसाकर मेरे साथ धोखा किया गया है.
महिला- अगर तुम्हें यह सब बताया जाया तो क्या तुम राजी-राजी हाँ कर देती. दोस्ती में तो तुम मुफ्त में ही अपनी आबरू लुटाने के लिए तैयार थीं , अब तो उसकी कीमत भी मिल रही है. धोखेबाज तो वे होते हैं जों आपकी कीमत दिए
बिना ही आपको प्राप्त कर लेते हैं.
किरण- न जाने किस -किसने मेरे साथ मुंह काला किया होगा ? मेरी इज्जत के परखच्चे उडाये होंगे. ?
महिला- ऐसा बिलकुल नहीं है. सिर्फ एक आदमी ने ही आपके साथ सम्बन्ध बनाए हैं,. उस समय आप बेहोश भी नहीं थीं, बस सोच समझ नहीं पा रही थीं. मैं सब कुछ देख रही थी. मुझे आप दोनों के संबंधों की फिल्म जों बनानी थी.
किरण- तो क्या मुझे ब्लेकमेल करने का इरादा है ? मेरी अश्लील वीडियो फिल्म भी तैयार कर ली गयी है ?
महिला- डर मत मेरी मैना. यह सिर्फ उस समय के लिए है, जब मैना उड़ने की कोशिश करे. समझी ?
किरण- इसका मतलब मैं गर्भवती भी हो सकती हूँ और अगर किसी रोगी ने मेरे साथ सम्बन्ध बनाया होगा तो क्या होगा ?
महिला- इस बात का पूरा ख़याल रखा जाता है. जिस व्यक्ति ने तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाए हैं उसने कंडोंम का इस्तेमाल किया था. मैं इसी कमरे मैं मौजूद थी.
किरण- मैं छोडूंगी नहीं तुम लोगों को , सबके खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊंगी .
महिला- कहाँ करोगी शिकायत ? करके देखलो. उलटे तुम बदनाम हो जाओगी .
किरण- अभी इन्साफ ज़िंदा है, ऐसा नहीं है कि सब लोग करप्ट हो गए हों .
महिला- जिसने भी इस तरह की कोशिश की है वह कहीं की नहीं रही.
किरण- मैं तुम्हारी इस पाप्म की लंका को खाक में मिलाकर छोडूंगी.