Thursday, March 10, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग--9
मैंने जब उसके साथ पहली बार सम्बन्ध बनाए मै तभी समजह गया था की मेरे पास आने से पहले ही उसका कुंवारापन उतर चुकाथा. यानि की मेरे साथ सम्बन्ध बनाने का
उसका कोई पहला अवसर नहीं था. किसी और से भी उसके सम्बन्ध थे.
अमृता- आपको ऐसा कैसे महसूस हुआ ?
पूजन- आखिर मैं भी कुछ कुवारी हसीनों की नथनी उतार चुका हूँ. मुझे लगता है अब तुम्हारी तरफ से भी प्रस्ताव मिलने ही वाला है.
अमृता- इतनी जल्दी इस खुशफहमी में मत रहिये. अगर मैं इतनी उतावली होती तो उसी दम भाभी के आशिक के साथ ही मौज मस्ती कर सकती थी, वह तो खुद ही यह सब करना चाहता था.
मुझे पाने के लिए बेताब था, वह मेरी नथ उतारने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार था. यहाँ तक की उसने भाभी से से मुझे शराब पिलाने और फिर कामोत्तेजक दवा खिलाने के लिए
भी मनाने की कोशिश की थी. अगर भाभी मान जाती या उससे पहले मैं ही मान जाती तो मैं भी रात को ही आनंद चख सकती थी.
पूजन- वो न जाने कितनी कुंवारियों को ब्याहता बना चुका है, पता नहीं उसके जिस्म से कितनी बीमारियाँ चिपकी हुई होंगी. अगर वह तुम्हारे साथ संपर्क करता तो तुम भी बीमार नहीं हो जातीं ?
अमृता- नहीं , ऐसी बात नहीं है. मैं किसी भी हालत में ऐसे किसी मर्द के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना सकती, जिसने मेरे सिवाय किसी अन्य महिला के साथ सम्बदंह बांये हों.
पूजन- मेरी तरफ ऐसे क्या देख रही हो, तुम प्राची की बात करना चाहती हो न, हाँ , मैंने उसके साथ मौज मस्ती की थी, लेकिन असुरक्षित तरीके से नहीं. बल्कि मैंने कंडोम का इस्तेमाल किया था .
अमृता- तब फिर वह गर्भवती कैसे हो गयी ?
पूजन- हाँ, यही सवाल मैंने उसी किया था ? वह अपने पाप को मेरे सर पर मढना चाहती थी, यह भूलकर की मै भी उस्तादों का उस्ताद हूँ, फिर भी वह अपनी बात पर अड़ी रही. ड्रामा करने लगी थी,
चीखने -चिल्लाने लगी थी, डी एन ऐ टेस्ट कराने पर जोर देने लगी. उसने तर्क दिया की हो सकता है संपर्क के दौरान कंडोम फट गया हो , या साइड से कोई कतरा निकल गया हो .
मैंने भी ज्यादा जिद नहीं की, वैसे भी अपने किसी साथी को परेशां करना मेरी आदत में नहीं है. मैं सहयोगी भावनाओं वाला व्यक्ति हूँ. इसलिए मैंने प्राची के अबोर्शन में उसकी मदद की.
तुम चाहो तो कन्फर्म भी कर सकती हो, मैंने उस पर भी भी इसके लिए दवाब नहीं बनाया. यह फैसला पूरी तरह से उसका अपना था.
अमृता- अपनी एनर्जी क्यों बर्बाद करते हो . मुझे सब मालूम है. अच्छाइसके, आपने मेरी कविता प्रकाशित कराई , इसके लिए शुक्रिया. मगर इतना बताइये की अब मुझे मंच पर कविता पाठ करने का मौक़ा
कब दे रहे हैं. मैं उसके लिए बहुत व्याकुल हूँ. मेरा सपना है की मैं एक दिन लालकिले पर होने वाले मुशायरे में भी शिरकत करूं.
पूजन- होने को तो कुछ भी हो सकता है लेकिन उसके लिए तुम्हें बहुत मेहनत करनी पड़ेगी. अपनी पर्सनैलिटी भी डवलप करनी होगी .
अमृता- अब भी पर्सनैलिटी में क्या कमी है. अच्छी खासी तो दिखती हूँ.
पूजन- यूं तो अच्छी खासी की भी अम्मा दिखती हो, समझो जैसा गदराया हुआ इलाहाबादी अमरुद हो , मगर मंच पर लोग इससे ज्यादा की उम्मीद रखते हैं. तुमने अमिताभ बच्चन की शराबी देखी है ?
अम्राता- अब इसमें शराबी फिल्म का जिक्र किसलिए आ गया ?
पूजन- उसमे अमिताभ बच्चन शायरी लिखते हैं, मगर शब्दों में वो असर नहीं होता जिसकी जरूरत होती है. बाद में किसीकी सलाह पर उन्हें अभिनेत्री से मोहब्बत हो जाती है. तब उनके शब्दों में वजन आता है.
अमृता- मतलब, अपने शब्दों में वजन लाने के लिए मुझे किसीसे मोहबब्त करनी होगी ?
पूजन- किसीसे क्यों ? मैं हूँ न, यह नेक काम तुम मेरे साथ भी कर सकती हो.
अमृता- तुम्हारी और मेरी जोड़ी किस एंगल से जमेगी ?
पूजन- जिस एंगल से तुम्हारी जवां भाभी और अधेड आशिक की जोड़ी जमती है. सिर्फ उम्र ही महात्वपूर्ण नहीं होती , और भी बहुत कुछ देखाजाता है.
अमृता- वो तो अपनी अतृप्त जिस्मानी जिज्ञासा को शांत करने के लिए ऐसा कर रही थीं,
पूजन- तुम कहीं भी देखना , फिल्मों में भी देख सकती हो . समझदार और कामयाब लडकियां अनुभवी व्यक्ति सेशादी करती हैं. मैं तुम्हारी भाभी के आशिक से भी ज्यादा बड़ा, सुन्दर और कड़क
मुन्ना रखता हूँ. एक बार देखलो, दीवानी हो जाओगी.
अमृता- छी, फिर से गंदी अबत शुरू करदी.

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