Thursday, September 30, 2010

lavguru-54

जब भी मुंशीजी किसी उलझन में होते होते थे तभी उनको लवगुरु की बातें याद आने लगती थीं, उन्होंने ही तो कहा था कि सेक्स जीवन तभी आनंदमय बन सकता है जब आप या आपका साथी अधिक विचार ना करे. जब आप एक दूसरे के करीब हों तो विचार को त्याग कर एक दूसरे में खो जाएँ. यह ना सोचें कि यदि आपने ऐसा किया तो उन्हें कैसालगेगा. अपने आपको वैसा ही रखें जैसा कि आप खुद को महसूस करते हैं. ना तो बदलने की कोशिश करें ना ही कुछ ऐसा करने की जो आपको कृत्रिमता का अहसास दिलाए और आपके साथी को भी. महिलाएँ विशेष रूप से अपनी छवि को लेकर काफी आशंकित रहती हैं. सेक्स के दौरान यह सोचना कि क्या मैं ऐसा करते समय ठीक लगुंगा, उन खास पलों को बदरंग बना सकता ह
पोर्न फिल्मों और साहित्यों पर ना जाएँ. अच्छे सेक्स के लिए यह आवश्यक नहीं कि आप क�
��स मुद्रा का प्रयोग करते हैं और क्या नया आविष्कार करते हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि आप और आपकी साथी कितनी संतुष्टि प्राप्त कर रही है. अच्छा सेक्स प्राकृतिक और नैसर्गिक होता है, उसमें नयापन डालने का अत्यधिक प्रयास ना करें. बेहतर है सबकुछ समय पर छोड़ दें और एक दूसरे में खो जाएँ. यह बात पुरूषों पर अधिक लागू होती है. अधिकतर पुरूष सोचते हैं कि यदि उन्होनें सेक्स के दौरान कुछ नया नहीं किया तो यह उनकी साथी को पसंद नहीं आएगा, जो कि सच नहीं है.
पुरूष और महिला में उत्तेजना का स्तर और उत्तेजित होने में लगने वाले समय में अंतर पाया जाता है. सेक्स के दौरान अपने साथी की ईच्छा और उनकी मर्यादा का ध्यान रखें. अत्यधिक उत्तेजित होने से बचें और सयंम से काम लें. सेक्स के दौरान फोरप्ले का अधिक से अधिक आनंद लें. मात्र फोरप्ले से भी आनंद प्राप्त किया जा सकता है. अपने साथी से सीखें. अच्छा सेक्स तब और विकसित होता है जब दोनों व्यक्ति एकदूसरे की पसंद नापसंद को समझने लगते हैं और हर बार कुछ नया सीखते हैं.
मुंशीजी ठीक इसके विपरीत कर रहे थे, जहां उन्हें प्रेम की क्रीडा में मस्त हो जाना चाहिए और रासलीला मनानी चाहिए वहाँ पर वे सोच विचार में डूबे हुए थे. वे उस अनाड़ी
बच्चे की तरह थे , जिसको किसी खेल के बारे में कुछ नहीं आता ओ और उसने जों किताब से सीखा हो, उसे वह याद-याद कर-करके अंजाम डे रहा हो . मुंशीजी का यौवन
बिना प्रेम किये ही गुजर गया, उनके आसपास कितने ही फूल खिले, कितनी ही कलियाँ चटकीं, मगर मुंशीजी के मन का भंवरा कभी उन कलियों या फूलों पर नहीं मंडराया ,
उन्हें तो बस बिजनेस से लगाव था, जल्दी से जल्दी करोड़ों रु०पये कमाना चाहते थे, बड़ी- बड़ी गाड़ियों में चलने और बड़ी से बड़ी कोठी में रहने का ख़्वाब था, जिसे अपने परिश्रम और
सूझ-बूझ के कारण उन्होंने जल्दी ही हासिल कर लिया, दौलत तो उन्होंने अपनी उम्मीद से ज्यादा कमाली मगर किसी हसीन का दिल नहीं जीत पाए . बिजनेस के मामले में वे
होशियार थे मगर उतनी ही नीतिपरक भी थे, यह उनको मंजूर नहीं कि उनका कोई स्टाफ , चाहे वह सेक्रेटरी ही क्यों नहो वह उनकी तरफ हसरत भरी निगाह से देख भी पाए,
मजाल है कि कोई लड़की उनकी तरफ देखने का दुस्साहस भी कर सके. वे बस काम से काम रखते थे और लोगों से मतलब की बात करते थे. उनके पास जितना भी समय था ,
सबकी रूपरेखा बनी हुयी थी. हर समय फिक्स था. जैसे कि कितने बजे सोकर जागना है, कितने बजे नाश्ता करना है और फिर कितने बजे खाने के बाद पांच मिनिट के लिए
पुराने गीत सुनने हैं. उन्हें किशोर कुमार टाइप छेडछाड भरे गाने खूब पसंद थे. बाथरूम सिंब्गर भी कमाल के थे. किसी ने सलाह दी कि वे अपनी एक फिल्म प्रोड्यूस करें जिसमें
वे खुद गीत गायें तो यह सलाह उन्हें इतनी नागवार गुजरी कि उस स्टाफ को नौकरी से ही निकाल दिया. अब आगर वे कहीं फंसे तो जवानी के गुजर जाने के बाद फंसे, वो भि९ डोली के
चक्कर में , उस डोली के चक्कर में , जिसके चक्कर में हजारों लोग फंसे हुए थे. जिसकी अदाओं के दीवाने हर शहर में मौजूद थे और जों देश की नंबर वन मंहगी वैश्या थी.

Tuesday, September 28, 2010

लवगुरु-५३

मुंशीजी- लेकिन, मेरी तुम्हारी यह जोड़ी क्या बेमेल नहीं है ?
डोली- अक्सर ऐसी जोड़‍ियों को देखकर आपको आश्चर्य हो सकता है कि आखिर एक अच्छी-भली लड़की को शादीशुदा मर्द में क्या दिखाई दिया? लेकिन इसमें नया कुछ नहीं है। इसके पीछे दो कारण प्रमुख हैं। एक तो फिल्मों की अभिनेत्रियाँ जो शादीशुदा मर्द का, जबकि आप तो अभी तह शादीशुदा भी नहीं है , हाथ थाम रही है और दूसरा मानव मनोविज्ञान।
अभिनेत्रियों का इस तरह के मर्दों को अपनाना जायज नहीं तो स्वीकार्य इसलिए हो जाता है कि फिल्मों में काम करने वाली लड़कियों को अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता फलस्वरूप अच्छे घरों के लड़के उन्हें पत्नी नहीं बना सकते। फिल्म अभिनेत्रियाँ मनोरंजन के लिए उन्हें मंजूर है लेकिन जीवनसाथी के रूप में नहीं। ऐसे में किसी विवाहित मर्द को चुनना ही उनकी मजबूरी है। उस मजबूरी को नहीं देख पाती है और नकल के फेर में शादीशुदा मर्द से संबंध स्थापित कर यह दर्शाने की कोशिश करती है कि वह समय के साथ चल रही है। अपनी जिंदगी खुद दाँव पर लगाती है। जहाँ तक मनोविज्ञान का सवाल है, यह सर्वमान्य सत्य है कि एक ही व्यक्ति आपको हमेशा ही अच्छा नहीं लग सकता। यह बेहद स्वाभाविक है कि थोड़े समय में आपको कोई और बेहतर लगने लगे लेकिन भारतीय संस्कार जब आड़े आते हैं, जब एक पति-एक पत्नी व्रत जैसी धारणाएँ याद आती है तब चोरी-छुपे ऐसे रिश्ते पनपते हैं।
इसके पीछे छुपे कारणों पर नजर डाली जाए तो हमारे यहाँ शादियाँ पारंपरिक ढंग से होती है। इस तरह की शादियों में पति-पत्नी एक-दूसरे से जो पाते हैं, उसमें पाने का सुख तो होता है लेकिन विजय की अनुभूति नहीं। दोनों जानते हैं कि उनके बीच रिश्ते का जो बंधन है, वह जाति, खानदान, रीति रिवाज, हैसियत, कुंडली, खूबसूरती आदि कितने ही आधार पर खड़ा है। यानी पारंपरिक शादी में अक्सर रोमांच का अभाव रहता है। मियाँ-बीवी दोनों जानते हैं कि उन्हें एक-दूसरे से क्या, कितना और क्यों पाना है। उनके पास इसके अलावा कोई चारा नहीं रहता कि उन्हें एक-दूसरे से जो मिल रहा है, उसी में संतुष्ट रहें। अधिकांश लोग ऐसी ही बेरंग जिंदगी जी रहे हैं।
ऐसे में अगर कोई तीसरा जिंदगी में आ जाए तो यह तीसरा वह सबकुछ देता है जो पति को अपनी पत्नी से या पत्नी को अपने पति से नहीं मिल रहा है। ऐसी ही स्थिति में बीज पड़ता है उस अवैध प्रेम का - प्रेम जो समाज की निगाह में गुनाह है। लेकिन इस प्रेम का नशा ही कुछ और है क्योंकि इसमें जीत का एहसास है।
इस प्रेम संबंध में हमें तीसरे से जो ���िलता है, वह सात फेरे के रिश्ते की वजह से नहीं, किसी समझौते के कारण नहीं,किसी शारीरिक जरूरत के चलते नहीं, वह मिलता है क्योंकि उस तीसरे ने हममें कुछ खास पाया। इस प्रेम में एक उपलब्धि है क्योंकि उस तीसरे ने लाखों लोगों में हमें चुना है। हालाँकि अब जो रिश्ते सामने आ रहे हैं उनमें शारीरिक आकर्षण अधिक और प्यार जैसा मामला कम होता है शायद ऐसा वहीं होता है जहाँ पति-पत्नी में प्यार न हो। लेकिन ऐसा नहीं है, ऐसे कपल्स की ज़िंदगी में भी कोई आ सकता है जहाँ दोनों में पूरा प्यार और विश्वास हो। शायद आपको भरोसा न हो लेकिन ऐसा भी हो रहा है।
क्यों होता है ऐसा? क्योंकि संसार में कोई भी परफेक्ट नहीं होता। लव मैरिज में भी दो व्यक्ति एक-दूसरे को इसलिए नहीं अपनाते कि दोनों दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्त्री-पुरुष हैं। दोनों एक-दूसरे को इसलिए चुनते हैं क्योंकि जीवन के किसी मोड़ पर दोनों ने एक-दूसरे को अपने अनुकूल पाया। ऐसा बिल्कुल मुमकिन है कि आज कोई लड़की आपको बहुत अच्छी लगी और आपने उससे शादी कर ली लेकिन साल, दो साल बाद कोई और लड़की मिली जिसमें कुछ और खासियतें हैं जो आपकी खुद की चुनी पत्नी में नहीं, और आपको वह भी अच्छी लगने लगे। यही हाल किसी लड़की का भी हो सकता है जिसने किसी लड़के को खुद चुना हो, कुछ सालों बाद कोई और लड़का उसे अच्छा लगने लगे क्योंकि उसमें कुछ और खूबियाँ हैं।
कहने का मतलब यह कि पारंपरिक शादी हो या लव मैरिज, ज़िंदगी में किसी तीसरे के आने के चाँसेस हर जगह हैं। कहीं बात बढ़ती है, कहीं दबकर रह जाती है। क्योंकि प्रेमी या प्रेमिका के लिए परिवार तोड़ना बहुत कम लोग चाहेंगे। ऐसे में अधिकतर रिश्ते गुपचुप ही चलते हैं। कुछ हिम्मतवाले समाज की परवाह किए बिना आगे भी बढ़ जाते हैं।
समाज में ऐसे रिश्ते तेजी से फैल रहे हैं जो इन्हें नहीं मानता वह पिछड़ा हुआ है और जो जमाने की परवाह किए बगैर बेखटके रिश्तों में रोमांस की पींगें बढ़ा रहा है वह लाइफ के भी मजे लूट रहा है। दबे-छुपे उनकी चर्चा सब करते हैं लेकिन सामने आकर कुछ कहने का साहस किसी में नहीं क्योंकि आखिरकार वह उन दोनों या कहें तीनों का पर्सनल मामला है।
इन रिश्तों में शादीशुदा मर्द नुकसान में नहीं है लेकिन कुँवारी लड़की की नैया डुबना तय है। उधर अगर शादीशुदा महिला है तो उसकी बदनामी निश्चित है और यहाँ कुँवारा कोरा बच जाएगा।

लवगुरु -५२

फिल्म के संवाद आनंद प्रदान कर रहे थे , तभी डोली ने मुंशीजी को टोक दिया , बोली-
-इस फिल्म में सिर्फ मर्दों के बारे में ही ज्यादा जानकारियाँ दी जा रही हैं, क्या कोई ऐसी फिल्म नहीं है जों हमारे बारे में भी जानकारी देती हो , जैसे की महिलायें सेक्स क्यों करती हैं ? उन्हें किस तरह से ज्यादा सुख मिलता है वगैरह .वगैरह . ज़रा बात करके देखो न.
मुंशीजी- हाँ क्यों नहीं ? अभी नबात करता हूँ. होंगी तो जरूर .
मुंशीजी ने काउंटर पर फोन घुमाया और अपनी इच्छा जाहिर करदी , कुछ देर बाद ही एक वेटर सेवा में हाजिर हो गया, उसके पास बहुत सारी फ़िल्में थी. डोली के होठों पर मुस्कान उभर आई, बक्शीश लेकर वेटर चलता बना , मुंशीजी ने सेक्स शिक्षा पर आधारित एक फिल्म स्टार्ट करदी. यह हिन्दी फिल्म थी. नायिकाएं उतनी खूबसूरत नहीं थी, मगर उनकी डायलोग डिलीवरी गज़ब की थी.
-जानते हो ज्यादातर महिलाएं पुरुषों के साथ सेक्स सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उनकी शादीशुदा जिंदगी में शांति बनी रहे , या वह बिना वजह के सिरदर्द से बचना चाहती हैं। महिलाओं की लिस्ट में रोमैंस और पेशन की जगह काफी पीछे है।
रिसर्च के दौरान देखा गया कि ज्यादातर पुरुषों को महिलाएं सेक्सुअली अट्रैक्टिव लगती हैं , जबिक महिलाओं को पुरुषों में ऐसी कोई बात नज़र नहीं आती।
एक महिला ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि उसे आध्यात्मिक अहसास हो सके। उसने दावा किया कि यह ईश्वर को करीब से महसूस करने का जरिया है। लेकिन ज्यादातर महिलाओं ने सेक्स का जो विवरण दिया वह इससे कहीं ज्यादा दुनियावी था।

कुछ महिलाओं ने माना कि वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि उनकी जिंदगी में शांति बनी रहे या उनकी घर - संसार की जरूरतें पूरी होती रहें।एक महिला ने बताया - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि बोरियत दूर कर सके क्योंकि सेक्स करना लड़ने से कहीं आसान है। जबकि कुछ दूसरी महिलाओं के लिए यह माइग्रेन और सिरदर्द दूर भगाने का उपचार है। एक महिला ने कहा कि मैं कई पुरुषों के साथ सिर्फ इसलिए सोई क्योंकि मुझे उन पर दया आ रही थी। वहीं , कुछ महिलाएं अपने स्वार्थ के लिए सेक्स का इस्तेमाल करती हैं जैसे रुपये - पैसों के लिए , और
ज्यादातर महिलायों ने माना कि वह आमतौर पर ऐसे पुरुष के साथ सो चुकी हैं जो उनका बॉयफ्रेंड नहीं हैं। कुछ ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि अपनी सेक्सुअल परफॉर्मंस को इंप्रूव कर सकें। यही बताते हुए एक स्टूडंट ने कहा - मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ इसलिए सेक्स किया ताकि मैं अपने सेक्सुअल स्किल्स को और बेहतर बना सकूं।
इस रिसर्च में यह भी पता चला कि महिलाएं ऐसे पुरुषों पर ज्यादा आकर्षित होती हैं जो लंबे हों , जिनकी आवाज़ रौबदार हो और जिनके शरीर से मदहोश कर देने वाली महक आती हो।हांलाकि ऐसी महिलायें भी कम नहीं हैं जों कहती हैं कि परम सुख पाने के लिए वे कामक्रीड़ा करती हैं.
डोली- आपको क्या लगता है, क्या सेक्स के बिना नींद नहीं आने का भी कोई कारण हो सकता है ?
मुंशीजी- किसी और का तो पता नहीं , मगर यह तय है कि अब भविष्य में कभी भी मैं तुम्हारे बिना, तुमेहन देखे बिना, तुमसे प्यार किये बिना सो नहीं पाउँगा. यह बात सत्य है.
डोली- ओहोहो ... एक बात कहें मुंशीजी ? आप हैं न दीवाने हो गए हैं. सच बात तो ये है.
मुंशीजी- दीवाने नहीं पागल, तुम्हारे प्यार ने सचमुच पागल बाना दिया है, ये है सच्चाई . मैं कहाँ इससे इनकार करता हूँ, एक तरह से देखा जाए तो यह ठीक ही हुआ कि मेरे बिना बताए ही तुम जान गयी, अपनी जुबान से कुछ कहना ज़रा अच्छा नहीं लगता . जों सचमुच प्रेम करने वाले हैं, वे ऐसे ही होते हैं. दिल से आवाज निकलती है और पहचान ली जाती है.
डोली- दिल की कुछ मत कहो, इस दिल में जहां कर देखो , इसमें आपकी तस्बीर छाप गेई है हमेशा के लिए . जैसे हाथ पर टैटू गुदवाए जाते हैं और फिर कभी उनको मिटाया नहीं जा सकता , उसी तरह की ये तस्बीरें हैं, कितने भी मौसम आयें, कितने भी बरस हो जाएँ, भले ही यह जिस्म फना हो जाए मगर आपकी तस्बीर ज्यों की त्यों रहेगी.

Monday, September 27, 2010

लवगुरु-५१

अब डोली से रहा नहीं गया, फ़ौरन टोकते हुए बोली-
-रह-रहकर कहाँ गुम हो जाते हो सरकार ? क्या सोचने लगते हो ?
मुंशीजी- लवगुरु की सलाह रह-रहकर याद आती है, और तुम भी तो कुछ कम नहीं हो . बहुत उम्दा ख़याल रखती हो . थोड़ी देर पहले जों सेक्स पावर बढाने वाली दवा के बारे में कहा , वह सटीक है . अच्छी खान-पान से भी सेहत बनाई जा सकती है, कामशक्ति बढाई जा सकती है. बचपन से एक कहावत तो सुनी ही होगी, ‘जैसा खाए अन्‍न वैसा हो मन’. इसी का वास्‍ता देकर जाने कितनी ही बार मां ने सादा खाना खाने पर मजबूर किया होगा और आपने चुपचाप अच्‍छी सेहत के लिए खाया भी होगा. अब अगर कोई ये कहें कि यह कहवात महज सेहत और मानसिक शांति के लिए ही नहीं, ब‍ल्कि बिस्‍तर पर गुजारने वाले समय के लिए भी है, तो यकीनन तुम हैरान रह जाओगी .
डोली- ऐसी क्या खास थ्योरी है, ? सुनूं तो सही .
मुंशीजी-लवगुरु कहते हैं कि बिस्‍तर पर प्‍यार और साथी के साथ का जायका बढ़ाने में आपका मेन्‍यू काफी अरसदार होता है. बिस्‍तर पर आपके साथी के साथ आपके संबंधों पर इस बात का भी पूरा असर पड़ता है कि आपके मेन्‍यू में क्‍या-क्‍या शामिल है.
जान लीजिए कि ऐसे कौन से फल या सब्जियां हैं, जिन्‍हें अपनी लिस्‍ट में शामिल करने से बिस्‍तर पर आपका साथी आपका कायल हो जाएगा. खाने में इन चीजों का तड़का आपके मन में बिस्‍तर पर ज्‍यादा समय बिताने की इच्‍छा और क्षमता बढ़ाती है. �
केला, अंजीर, रुचिरा को अपने खाने में शामिल करें. क्योंकि यह आपके मन में प्‍यार करने की इच्‍छा पैदा कर आपके कामोत्तेजना को बढ़ाने में सबसे ज्यादा सहायक फल होते हैं.
इनके साथ ही अपने खाने में मीठी तुलसी, मिर्च और शहद भी शामिल करें. इन आहारों में ‘लव कैमिलक’ होता है. इनके अलावा स्‍ट्रॉबेरी और रास्पबेरी तो बेहद रोमांस पैदा करने वाली होती है.
महिलाएं ज्‍यादातर अच्‍छा और स्‍वादिष्‍ट भोजन लेना पसंद करती हैं. जबकि पुरुष अपने व्‍यवहार की ही तरह नई-नई चीजों को आजमाने के लिए तैयार रहते हैं. खानपान के शौकीन पुरुषों प्‍यार का जायका बढ़ाने के लिए चावल और हरी प‍त्‍तेदार सब्जियों के साथ ही साथ फल भी खाएं. तो आज से ही अपने मेन्‍यू में शामिल करें कुछ नई चीजें. और बिस्‍तर पर अपने साथी को कर दें हैरान.मैं भले ही उम्र में तुमसे बड़ा हूँ लेकिन फिर भी बिस्तर पर तुम्हें पूरी खुशियाँ डे रहा हूँ, इसका कारण यह डाईट ही है.
डोली- किसने सिखाया ये सब ?
मुंशीजी- ये सब पुराने टोटके हैं और यकीन मानिए कि एकदम सटीक हैं , कोई फेल नहीं होता. आज की काम क्रीडा के दौरान यह सिद्ध भी हो जाएगा.
डोली- ज्यादा कुछ मत कीजिये , मैं तो पहले से ही परेशान हूँ, आपकी ताकत संभालना मेरे वश में नहीं है.
मुंशीजी ने डोली के यौवन का रस चूसने के प्रयास शुरू कर दिए , जब खामोशी आई तो फिल्म की याद भी आई जों काफी देर से चल रही थी. फिल्म का हीरो कह रहा था -
-आप चाहें तो अपने पार्टनर को इतनी खुशी दे सकती हैं कि वह आपके सिवाय कहीं और जाने की सोच ही न पाए. इसके लिए आपको जरूरत है बस उनकी तारीफ करने की. पर हां, तारीफ बेसिर पैर की नहीं ऐसी बातों की जो वह सुनना चाहते हैं.
जब कभी उनके काम को सराहना मिले और वह इस बात को आपसे शेयर करें, तो अपनी खुश�
को दबाएं मत. झूम कर उन्‍हें इस बात का अहसास कराएं कि आपको पहले से ही इस बात की आशंका थी. उन्‍हें बताएं कि यह तो एक छोटी सी कामयाबी है वह इससे कहीं ज्‍यादा के लायक हैं.
ओह! मजेदार , जब कभी बिस्‍तर पर आप दोनों को प्‍यार के मीठे पल बिताने का अवसर मिले और वह आपको संतुष्‍ट कर दें, तो उन्‍हें इसके लिए शुक्रिया कहें. हां आप चाहें तो संबंधों दौराना भी उन्‍हें यह बात कह सकती हैं कि उनके साथ इस पल को आप खूब इंज्‍वाय कर रही हैं और बार बार आनंद की इस सीमा को पाना चाहती है.

लवगुरु -५०

समझ गयीं न , मेरे कहने का क्या मतलब है . और ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि हमारे इस शरीर में अगर कोई तकलीफ होती है, कोई खास हिस्सा काम करना बंद या कम कर देता है तो हमें साफ़ समझ लेना चाहिए कि जरूर इसके पीछे कोई खास कारण है. जब तक हम उस कारण को ढूंढकर उसका पुख्ता इंतजाम नहीं करेंगे तब तक कुछ हासिल होने वाला नहीं है. मेरा दिल तो यही कहता है कि दवा से बेहतर है कि काम शक्त बढाने के लिए कुछ घरेलू और प्राक्रतिक , मगर ठोस उपाय किये जाएँ.
डोली- मेरा भी यहीमानना है. अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है, ठीक तरह से काम क्रीडा नहीं कर पा रहा है तो डॉक्टर से उसकी जांच करवाई जानी चाहिए, बिना जांच के दवा खाना मतलब अपनी किडनियों को गंवाना भी हो सकता है .
मुंशीजी- वाह डोली , तुम तो यार डॉक्टर की भाषा में ही बात कर रही हो , लगता है तुम्हें अच्छा खासा ज्ञान है .
डोली- सिर्फ जनरल नोलेज है सरकार . बाकी कुछ खास नहीं . जैसा आम बोलचाल, अखबार , मैग्जीन या किसी टीवी पर देख सुन लेती हूँ उसी आधार पर अपनी एक सोच गढ़ लेती हूँ, जों कि गलत भी हो सकती है.
मु न्शीजी - बिलकुल नहीं और कभी नहीं. जब हम अपने दिल और दिमाग से पूरी इमानदारी और निष्ठा के साथ निष्पक्ष भाव से कुछ सोचते हैं तो वह ज्यादातर सही ही होते है. गलत की गुंजाइश बहुत कम होती है.
डोली- लोग ऐसी फिल्मों को ब्लू फिल्म क्यों कहते हैं , समझ से बाहर है. अरे इसमें तो पूरा ज्ञान भरा पड़ा है. यह फिल्म हमें सिखाती है कि किस तरह से अपने पार्टनर के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाएँ , कैसे उसे ज्यादा संतुष्ट रख सकते हैं, कैसे उसका दिल जीत सकते हैं और कैसे अपनी जीवन सुखी बना सकते हैं.
मुंशीजी- हाँ, मैं तुमसे सहमत हूँ, इसमें भले ही नग्न द्रश्य दिखाई डे रहे हैं मगर उसके बिना तो बतया नहीं जा सकता . यह फिल्म बहुत उपयोगी है और मेरे ख्याल से हर शादीशुदा जोड़े को इसे देखना चाहिए .
डोली उसका जबरदस्त समर्थन कर रही थी, मुंशीजी अपने मकसद में कामयाब होते दिख रहे थे. लवगुरु ने ही तो उन्हें सिखाया था कि अगर आपकी प्रेमिका सुंदर, प्‍यारी, हॉट होने के साथ ही बिस्‍तर के पलों के लिए उत्‍साह तो बहुत रखती हैं, लेकिन उनके भीतर की झिझक हमेशा आपके अरमानों पर पानी फेर देती है. इसी बात से आप परेशान हैं. आपको अपने साथी की बातें और सादगी बहुत भाती है, लेकिन वही सादगी उस समय बहुत खलती है, जब आप संबंधों के बारे में बातें शुरू करते हैं. उनकी झिझक आपके भीतर के उफान को बुरे तरीके से झकझोर देती है और आप रह जाते हैं मन मसोस कर.
तो उदास न हों. आप चाहें तो अपनी शालीन सी साथी को बदल सकते हैं एक बेहद शरारती लड़की में, जो अपनी हरकतों से रह रह कर आपको उत्‍साहित कर सके और आप दोनों के रिश्‍ते की गरमाहट को बढा सके. अपनी महिला साथी को उनकी सादगी के लिए कोसें नहीं, बल्कि उन्‍हें कहें कि उनकी सादगी पर ही आप फिदा हैं, ले‍किन उनकी सादगी से परे वह एक हॉट लडकी हैं. फिर देखिए किस तरह अपने माता पिता की प्‍यारी सी बच्‍ची आपकी हॉट गर्लफ्रेंड में तबदील हो जाती है.
अपनी साथी को मनमुताबिक बनाने के लिए पहले आपको उनके मन को परखना होगा. जब कभी वह अपने मोटे होने के भय की बात करें, तो आप �
��तुरंत किसी जिम का पता लगा कर उनकी मदद करें. या गर वह बंजी जंपिंग की बात करती हैं, तो उनकी खुशी को ध्‍यान में रखते हुए उनके लिए इसका इंतजाम करें या उन्‍हें एकदो दिन के भीतर ही बंजी जंपिंग के लिए ले जाएं. उनके डर से लड़ने में आप जितनी उनकी मदद करेंगे वह उतनी ही खुल कर आपसे बातें करेंगी. हां, इससे उनकी हिम्‍मत में इजाफा होगा और वह कोई भी ऐसा काम करने का साहज जुटा पांएगी, जो पहले करने से कतराती हों. बस फिर क्‍या है आप धीरे-धीरे अपनी राह पकडें और उन्‍हें एक दिन मौका देख कर मन की बात कह दें. शर्माते हुए ही सही वह आपकी बाहों में समा जाएंगी.
जब कभी आप अपने प्‍यार के साथ प‍ब्‍लिक प्‍लेस में हों, तो उनके कान में धीरे से कहें कि उनकी खूबसूरती आपको उत्‍तेजित कर रही है. साथ ही छोटी सी किस भी दे दें. इस तरह से भीड़ में आपकी यह बातें उनके भीतर उत्‍साह भर देंगी और इसका सारा फायदा आपको मिलेगा उस समय जब आप दोनों अकेले होंगे.
अपने खयालों में उनके बारे में कुछ गरमागरम सोचिए, कुछ ऐसा जो आप उन्‍हें करते हुए देखना चाहते हैं. यह ख्‍वाब उन्‍हें भी बताएं. ऐसा करने से उन्‍हें साहस मिलेगा. और यह विश्‍वास कि आपको उन पर विश्‍वास है

Sunday, September 26, 2010

लवगुरु -४९

मुंशीजी- अच्छा बदमाशी शुरू. मैं पहले ही कह चुका हूँ कि तुम्हारे सिवाय और किसी लड़की ने मेरी जिंदगी में प्रवेश ही नहीं किया.
डोली- ठीक है, चालू रहिये . आगे क्या खा था लवगुरु ने ?
मुंशीजी- बोले, यह सच है कि अंतरंग क्षणों के दौरान और उससे ठीक पहले वाले पल आपको एक दूसरे के बेहद करीब ला देते हैं और आप दोनों के अंदर एक दूसरे के प्रति प्रेम की भावना काफी बढ जाती है. परंतु यह भी उतना ही सच है कि उन खास अंतरंग क्षणों के बाद का समय भी उतना ही रोमांटिक हो सकता है बल्कि पहले से अधिक भी!
अंतरंग संबंध बनाने के बाद के क्षण काफी महत्वपूर्ण होते हैं और युगल इसका भरपूर लाभ उठा सकते हैं.
सेक्स के बाद क्या? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है परंतु जवाब सरल है. अधिकतर युगलों का जवाब होता है अच्छी नींद. या फिर रोजमर्रा के काम, ऑफिस, मित्रों के घर जाना या फिर टीवी देखना. परंतु यदि इससे थोड़ा हटकर सोचा जाए तो रोमांस के पलों को आगे बढाया जा सकता है और आपसी संबंधों को भी नई ऊँचाईयाँ दी जा सकती है.
यदि आपको संगीत पसंद है तो भी अथवा नहीं है तो भी. अंतरंग पलों के बाद आप दोनों साथ-साथ कोई रोमांटिक मधुर गाना सुन सकते हैं. इस तरह से बिना बात किए भी आप एक दूसरे को अपने करीब महसूस करेंगे.
सेक्स के बाद गर्दन और पीठ की हल्की मालिश करें. सेक्स के दौरान ऑक्सिटोसिन और प्रोलेक्टिन हार्मोन उत्सर्जित होते हैं जो आपके बीच के �
यार को बढाते हैं. वही हार्मोन हल्की मालिश से भी उत्सर्जित होते हैं. इसलिए सेक्स के बाद हल्की मालिश करने से आप अपने "प्रेम के क्षणों" को बढा सकते हैं.

यकीन मानिए यह भी काफी रोमांटिक लग सकता है. सेक्सोलोजिस्ट मार्क मोनसेन के अनुसार अंतरंग पलों के बाद एक दूसरे की सहायता करना रोमांस को बढा सकता है.

उन खास पलों का आनंद लेने के बाद एक दूसरे के साथ साथ थोड़ी देर बात अवश्य करें. सम्भव हो तो बाल्कनी में जाएँ और ठंडी हवा का आनंद लें. यह निर्भर करता है कि आपके घर के आसपास का पर्यावरण कैसा है परंतु इस नैसर्गिक क्रिया के बाद प्रकृति के समीप जाने का अहसास काफी सुखद होता है
एक दूसरे के साथ स्नान करना बेहतरीन फोरप्ले माना जाता है परंतु यह सेक्स के बाद के रोमांटिक पलों को बढाने में भी मददगार साबित हो सकता है. हल्के शावर के साथ पानी की बुंदों को और उनके स्पर्श को महसूस करें.लेकिन यह सब उन्ही मर्दों के लिए है जों बिस्तर पर पूरी तरह से फिट होते हैं, यानि पत्नी को बिस्तर पर सम्पूर्ण सुख संतुष्टि प्रदान कर सकते हैं . जों लोग कामशक्ति के मामले में कमजोर होते हैं और सेक्स पावर बढाने वाली दवाओं का सेवन करते हैं , उनको कई तरह के बीमारियाँ हो सकती हैं. एक दिन टीवी में बताया गया था कि हृदय की बीमारियों से पीडि़त वह लोग सचेत हो जाएं जो सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं भी लेते हैं। एक शोध से पता चला है कि इन दवाओं से आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाता है। यह खुलासा हुआ है कि जो व्यक्ति दिल के दौरे के शिकार हो चुके हैं और सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं लेते हैं उनकी आंखों की तंत्रिका के नष्ट होने का खतरा दस गुना बढ़ जाता है। कहा गया है कि सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली वियाग्रा और सियालिस जैसी दवाएं लेने वाले दिल का दौरे से पीडि़त लोगों में नान आर्टिरिटिक एंटीरियर इसचैमिक आप्टिक न्यूरोपैथी होने की आशंका होती है। ज्ञात हो पचास की उम्र वालों में एनएआईओएन की आशंका अधिक होती है क्योंकि इसमें आंख की तंत्रिका के नष्ट होने का खतरा अधिक होता है, जिस कारण हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है.
ज्ञात हो कि वियाग्रा के बाजार में आने के बाद एक करोड़ लोग इस दवा का उपयोग कर रहे हैं। अब तक एनएआईओएन से संक्रमित होने के चालीस ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं ली थीं। मैकग्विन और उनके सहयोगियों ने बताया कि हृदय की बीमारी और उच्च रक्त दाब से ग्रसित मरीजों में एनएआईओएन का खतरा होता है इसलिए लोगों को इस बारे में जानकारी होनी चाहिए। मैकग्विन ने बताया कि इतने बडे़ पैमाने पर लोग इस दवा का प्रयोग कर रहे हैं, अगर एनएआईओएन होने की बात की पुष्टि होती है तो आने वाले समय में इस प्रकार के मामले अपने आप सामने आएंगे.

Saturday, September 25, 2010

लवगुरु, भाग-४8


मुंशीजी- फिल्म तो अच्छी है ही, साथ ही तुम्हारा भी जवाब नहीं है. यह तुम्हारे शुद्ध विचारों का ही प्रताप है कि अब तक बची रहीं, वरना आजकल तुम जैसी सुन्दर कली को कुचलने के लिए चारों ओर भेडिये मौजूद हैं.
कई महिलाओं से संबंध रखना पुरुषों के बीच स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है। पहले जहां इस तरह के संबंधों को छिपाया जाता था, वहीं अब ये खुले आम स्वीकार किए जाने लगे हैं। यहां तक कि इनको मर्दानगी की निशानी के तौर पर भी देखा जाने लगा है। लवगुरु ने मुझसे कहा था कि अब ऐसे रंगीन मिजाज लोगों को सावधान होने की जरूरत है यह साबित हो चुका है कि कई महिलाओं से संबंध रखने वाले लोग कम उम्र में ही मौत के कगार पर पहुंच सकते हैं। कुछ लोग हमेशा महिलाओं के चक्कर में रहते हैं। महिलाओं को पटाने की कोशिश में वे अपने खाने- पीने पर खास ध्यान नहीं दे पाते। इस वजह से उनका फिजिकल डिवेलपमेंट रुक जाता है और वे कई तरह की बीमारियों के भी शिकार हो जाते हैं।� पुरुष के जितनी ज्यादा महिलाओं से संबंध होंगे, उसकी उम्र उतनी ही कम होती जाएगी। हालांकि इंडिया में कम ही पुरुषों को एक से ज्यादा महिलाओं के साथ संबंध रखने का 'सौभाग्य' मिल पाता है, इसलिए यहां पर इस तरह का खतरा कम रहेगा.
वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च की तह तक जाने के लिए मछलियों पर अध्ययन किया। रिसर्च में नर मछलियों के साथ लगातार नई- नई मादा मछलियों को रखा गया। इस दौरान उन्हें तरह- तरह का भोजन दिया गया। रिसर्च में पता चला कि नर मछलियों ने भोजन खाने से ज्यादा मादा मछलियों को निहारने में समय व्यतीत किया। इन नर मछलियों में सामान्य मछलियों की तुलना में धीमी वृद्धि देखी गई, जबकि उसके विपरीत केवल एक मादा मछली के साथ रहने वाली नर मछलियों का फिजिकल डेवलेपमेंट ज्यादा अच्छा पाया गया।
डोली- कौन करता है इस तरह के अध्ययन ? मुझे लगता है पत्रिकाएं भी मसाले के चक्कर में कुछ भी छाप देती हैं.
मुंशीजी - नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. पत्रिकाओं की भी जिमेदारी होती है. सामाजिक सरोकार होते हैं. उससे जुड़े लोग समाज के प्रतिष्टित लोग होते हैं. मैंने लवगुरु से उम्र और सेक्स के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा था कि सेक्सुअल घनिष्ठता को उम्र बढ़ने के साथ प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता क्योंकि आत्मीयता की चाहत का उम्र से कोई सम्बन्ध नहीं है। आज के दौर में जबकि ज्ञान की शक्ति और चिकित्सा विज्ञान की अभूतपूर्व प्रगति के कारण लोग अधिक लम्बाध, स्वस्थ और सक्रिय जीवन बिताते हैं ऐसे में सेक्सुअली सक्रिय रहना शारीरिक और मानसिक तंदुरूस्ती के लिए बेहतर साबित होता है।
व्यक्ति के सेक्सुअल पैटर्न में पूरी जिंदगी बदलाव होते हैं। जहां एक किशोर की प्रजनन क्षमता तेरह वर्ष की उम्र से शुरू हो सकती है वहीं उसकी सेक्सुअल क्षमताओं का चरम अठारह वर्ष की उम्र में हो सकता है। तीस से चालीस की उम्र के बाद पुरूष की सेक्सुअल प्रतिक्रियाओं में कुछ कमी आना शुरू हो जाती है और पचास की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते विशेष अंग में कठोरता और स्खलन की आवृत्तियों में स्पष्ट कमी आ जाती है। लेकिन ये केवल शारीरिक बदलाव हैं जो सेक्स के आनंद को कोई विशेष प्रभावित नहीं करते। कोई पुरूष यदि स्वास्थ्‍य सम्बन्धी किसी समस्या का सामना न कर रहा हो तो वह पूरे जीवन भर सेक्स लाईफ का आनंद ले सकता है।परफेक्स जैसी दवाओं से लोग साठ वर्ष तक की आयु में भी आनंद लेते हैं. सम्पूर्ण सुख भोगते हैं. और ऐसी दवाएं अब हर मेडीकल स्टोर में आसानी से मिल जाती हैं. अब विदेश जाने की भी जरूरत नहीं.
डोली- क्या यह बात लड़कियों पर भी लागू होती है ?
मुंशीजी- सच कहूँ तो यह सवाल मैंने पूछा ही नहीं था, हाँ, इतना कह सकता हूँ कि महिलायें कुछ अलग तो होती नहीं, तो जाहिर सी बात है उनका हाल भी ऐसा ही होता होगा. उम्र के साथ-साथ उनका मासिक चक्र भी बंद हो जाता है. सेक्स में अरुचि होने लगती है.
डोली - आप हर समय लवगुरु की चर्चा करते रहते हैं. अखबारों में भी उन्हीकी तस्बीरें छपती रहती हैं. टीवी में भी उनके प्रवचन रहते हैं , आखिर वे हैं क्या बला ? मैंने तो इस शहर में हर तरफ उन्हीके पोस्टर देखे हैं.
मुंशीजी- हाँ, हाँ ठीक कहती हो. बहुत पहुंचे हुए हैं, दो प्रेमियों को मिलाने की उनमे अदभुत क्षमता है. जब दो चाहने वाले बिछुड जाते हैं या फिर बेदर्द जमाना उन्हें मिलने नहीं देता तब लवगुरु का काम ह्शुरु होता है .
डोली- ओह, तो क्या आपकी भी कोई चाहने वाली बिछुड गयी है ?

Friday, September 24, 2010

लवगुरु-४७

मुंशीजी के दिमाग में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी जबकि डोली के खयालात बिलकुल जुदा थे. डोली चाहती थी कि मुंशीजी जल्दी से मंजिल पर पहुंचकर अपना काम निबटाएं और आराम से सो जाएँ . उसे बुड्ढे ग्राहकों में सिर्फ इतनी ही दिलचस्पी थी कि वे पैसे खर्च करें और चलते बनें. डोली ने उनकी भावनाओं को भड़काने के उद्देश्य से आखिरकार पूछ ही लिया-
-आपके गुरु ने किस के बारे में कुछ खास नहीं बताया , ऐसा लगता है ?
मुंशीजी -सेक्स के लिए जरूरी है कि पार्टनर को इसके लिये तैयार किया जाय. यह प्रक्रिया फोरप्ले कहलाती है. इसका सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है चुंबन. पूरे आवेग से लिया गया चुंबन एक खास किस्म के कांप्लेक्स केमिकल को दिमाग की तरफ भेजता है, जिससे व्यक्ति खुद को ज्यादा उत्तेजित, खुश अथवा आरामदायक स्थिति में महसूस करता है।
डोली- जानते हो, प्यार का इजहार करने के लिए चुंबन से बढ़कर शायद ही कोई दूसरा माध्यम हो। एक प्यार भरा चुंबन प्रेमी या प्रेमिका को दिन भर की तमाम उलझनों से मुक्त करके एक प्यार भरे संसार में ले जा सकता है।
मुंशीजी- लवगुरु ने कहा था , अपनी जीभ अपने चाहने वाली के मुख की कोमल त्वचा में डालकर उसे चारों ओर घुमाया जाता है। मुख से मुख मिलाकर फ्रेंच किस किया जाता है। जब चाहने वाली को कुछ उत्तेजना भरा संदेश देना चाहें तो यह किस अपनाया जाता है। इसमें चाकलेट, फल या बर्फ का टुकड़ा अपने होठों से दबाकर अपने प्रेमी के होठों का स्पर्श किया जाता है। स्पर्श के बाद अपनी जीभ के सहारे दबाया गया टुकड़ा अपने प्रेमी के मुख में डाल दिया जाता है।
यह किस पूरे नियंत्रण के साथ किया जाता है। इस किस में होठों से दबाकर चाटा जाता है। अ�
�ने होठों से अपने प्रेमी के होठों और त्वचा को सख्ती से दबाकर इसका आनंद लिया जाता है।
कहा जाता है कि इस प्रकार का किस मध्यकाल के नाइट्स अपनी प्रेमिका या पत्‍नी को करते थे, जब वह लो कट नेकलाइन्स पहनती थीं। इस किस में उनकी गर्दन को चारों तरफ से धीरे-धीरे चूमा जाता था। पुरूष और महिलाएं दोनों इस प्रकार के चुंबन का लुत्‍फ उठाते थे।
मैंने एक टीवी प्रोग्राम में सूना था कि इस चुंबन की उत्पत्ति लैटिन के प्रेमियों ने की थी। इस चुंबन का आनंद लेने के लिए लैटिन प्रेमी मिठाई के दानों को अपने प्रेमी के शरीर पर डालते थे। उसके बाद अपनी जीभ से उनके शरीर पर धीरे से हमला करते थे। अपने प्रेमी के शरीर की मनपसंद जगह में इन मिठाई के दानों को डाला जाता था। स्तन और पेट के आसपास के चुंबन से इसका विशेष रूप से आनंद लिया जाता है।
यह किस शरीर के सर्वाधिक संवेदनशील हिस्सों खासकर गर्दन, छाती, पेट और निचली जांघों में किया जाता है। अधखुला मुंह खोलकर इन हिस्सों का स्पर्श किया जाता है। छाती के निचले हिस्सों विशेषकर स्तन के निप्पलों को चूमने में विशेषरूप से आनंद आता है।
इस चुंबन में जीभ आगे पीछे गति करती है। जिस प्रकार क्रीम या सॉस को चाटा जाता है ठीक उसी प्रकार स्लाइडिंग किस किया जाता है। फोरप्ले में यह किस काफी उपयोगी होती है .
डोली- वाव. मगर आपने तो इस तरह का कोई खेल खेला ही नहीं , मैं नाराज हूँ आपसे .
मुंशीजी- ओहो. तुम भी कमाल करती हो जानेमन . अभी टाइम ही कहाँ मिला है जों इस तरह का किस किया जाए. और हाँ, पूरी बातें याद भी तो नहीं रहती हैं, अब आपने याद दिलाया तो याद आया.
डोली- अगर प्यार चाहते हो तो याददाश्त दुरुस्त करनी होगी ज़नाब. इसके बिना प्यार में उतना मजा नहीं आयेगा . जों कुछ भी अब तक आपके गुरु ने सिखाया है, वह सब इस्तेमाल कर डालिए. कुछ भी बचाकर मत रखिये.
मुंशीजी- तुम तो जान हो अपनी . एक दिन का प्यार नहीं है. हमारा यह मिलन अमर है . हम हमेशा के लिए मोहब्बत की डोर में बध चुके हैं. अब प्यार की इस दुनिया को और भी ज्यादा रंगीन बनना है. भले ही तुम्हारा सहयोग क्यों नालेना पड़े.
डोली- सेक्स ज्ञान के लिए यह जरूरी है कि हम इसी तरह की फिल्मे देखें. बहुत अच्छी है ये फिल्म.











Thursday, September 23, 2010

lavguru-46

मुंशीजी ने बात बदलने के लिए कहा -
-नई सदी की शुरुआत में सब कुछ बदल गया है। प्रेम की भाषा और परिभाषाएँ भी बदल गई हैं। शब्दों के रूप बदल गए हैं। इस बदलाव में भाषा को बेलगाम जबान मिली है। भाषा और जबान पर आ टिका है कामुकता का भाव जिसे अभिव्यक्त करता है एकमात्र 'सेक्सी' शब्द।
आधुनिक भाषा शास्त्र में सेक्सी शब्द ऐसा रूप ले चुका है, जो किसी की तारीफ में भी यह कहा जा सकता हैं कि ''आप कितनी सेक्सी लग रही हैं''। सेक्सी शब्द खास कर 'डाट कॉम' दौर की युवा पीढ़ी की शब्दावली का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो उनकी मनोभावनाओं को बेहद आसानी से व्यक्त करने में सहायक होता है। सेक्सी शब्द 'ढाई अक्षर प्रेम के' का नए ढाई अक्षरीय रूप में पुनर्जन्म है, जो हमेशा कामुकता की ओर इशारा नहीं करता बल्कि माहौल व उस में समाई चीजों को एक खास रूप से पेश करता है। आज पूरा का पूरा माहौल सेक्सी सुविधाओं व कृतियों से भरा हुआ है। कंप्यूटर सेक्सी है, टीवी पर न्यूजरीडर सेक्सी है, म्यूजिक सिस्टम सेक्सी है, बाथरूम सेक्सी है तो फ्रिज का लुक सेक्सी है। पोशाकें तो सेक्सी हैं ही। अब तो जूते, चप्पलें तक भी सेक्सी हो चले हैं।
मुद्दे की बात यह है कि सेक्सी शब्द ऐसा साफसुथरा किंतु शरारतपूर्ण शब्द बन चुका है, जो मन के किसी कोने में पैदा हुई यौन इच्छा से जुड़ी गुदगुदी को जगा देता है.

डोली- मैंने भी महसूस किया है कि देखने में सुंदर, साफसुथरे ऑफिस को 'सेक्सी ऑफिस' कह दिया जाता है। मेज के कोने पर रखा नए मॉडल का आकर्षक कंप्यूटर या लैपटॉप, कुर्सियों की नरम गुदगुदा देने वाली गद्दियाँ आदि सब कुछ सेक्सी होने में शुमार हो जाते हैं।
कामुकता पैसे की बैसाखियों पर सवार होकर ज्यादा इठलाती है। रईसों के लिए सफलता भी सेक्सी है और पैसा भी सेक्सी है। आज के परिवेश में पैसा और सफलता भी कामुकता पैदा करती है।हमारे पास पैसा नहीं है तो हम कुछ चोचला नहीं करते.
मुंशीजी -सच कहती हो . अब प्यार बाजार में मिलने लगा डब्बों में पैक हो कर रेडीमेड। प्रेम की भावना खुलेआम देशीविदेशी कार्ड कंपनियों द्वारा कभी कार्ड की शक्ल में, कभी गुब्बारों की शक्ल में। कभी छोटेबड़े टैडिबीयरों की शक्ल में दुकानें पर बिकने के लिए रखी जाने लगी है। मुँह से बोलने के लिए जबान ने सिर्फ एक ही शब्द चुना 'हाऊ सेक्सी'।
सौंदर्य अब फड़कता, दमकता रोकड़ा बन गया है जिसे कैश कार्ड की तरह भुनाया जा सकता है। सौंदर्य प्रतियोगिता में अब लोग अपनी बेटियों की नुमाइश शौक से करते हैं क्योंकि अगर इस से नोट कमाए जा सकते हैं तो क्या बुराई है। सौंदर्य को ताकत समझा जाने लगा है। हर छोटाबड़ा शहर अपनेअपने तंबू तान कर अपनी-अपनी नजरें सिंकाई का सामान इकट्ठा करता है और कहा जाता है 'काफी सेक्सी शो था।'
परफ्यूम की खुशबू में डूबा, महकता शरीर सेक्सी लगता है। आफ्टर शेव लोशन की महक पुरुष को ज्यादा सेक्सी बना देती है। विज्ञापन कंपनियां आलू के चिप्स से ले कर कमर के दर्द के मलहम तक सेक्सी अंदाज में पेश करने में पीछे नहीं रहती। ट्यूबलाइट हो या काफी का मग, चॉकलेट का डब्बा हो या पिज्जा का डब्बा, सब कुछ घूमफिर कर सेक्सी अंदाजों में डूब कर दर्शकों व ग्राहकों को अपनी ओर खींचता है।
सेक्स माहौल पर इतना हावी कब और कैसे हो गया, पता ही नहीं चला। ' हमारे रिक्शा, टेम्पो, ट्रक तक सेक्सी होने से अछूते नहीं रहते। इनका भी अपना एक अनोखा श्रृंगार रस है, जो हर राह चलते को उन्मादित कर ही देता है।
क्या सेक्सी शब्द को आकर्षण का पर्याय मानें? यह शब्द समाज के, व्यक्तित्व के खूबसूरत व शालीनरूप को प्रस्तुत करे तभी तक सुंदर लगता है अन्यथा जैसे ही वह अपना सम्मोहनकारी रूप त्याग कर उत्तेजकता व अश्लीलता के दायरे में कदम रखता है वैसे ही इसका गले से उतरना मुश्किल हो जाता है।
डोली - मेरे ख़याल से इस शब्द का इस्तेमाल सोच-समझकर करिये । वक्त का व आसपास इकट्ठे लोगों का विशेष तौर पर ध्यान रखें। हमउम्र लोगों के बीच इस शब्द का इस्तेमाल खप जाता है। ऐसा न हो कि कभी गलत समय पर इस शब्द का उपयोग आप का सेक्सी होने का खुमार एक ही झटके में उतार सकता है.
मुंशीजी को बताया गया था कि जब फोर प्ले का वक्त हो तो महिला साथी को बातों में लगाकर अपना ध्यान सेक्स से हटा लेना चाहिए , मगर कुछ देर के लिए ताकि महिला साथी अच्छी तरह से तैयार हो सके . मुंशीजी तो वैसे ही शारीरिक रूप से उतने ताकतवर नहीं थे, जितने कि आम तौर पर युवक होते हैं.

Tuesday, September 21, 2010

lav guru bhag-45

डोली ने फिल्म की आवाज पहले से तेज करदी . स्क्रीन पर सेक्सोलोजिस्ट कह रहा था -
-अगर आप दिल के रोगों से दूर रहना चाहते हैं तो सेक्स करें। नियमित रूप से सेक्स करने वालों को दिल के रोग होने की संभावना आधी होती है।

वैज्ञानिकों का भी मानना है कि सप्ताह में दो बार या इससे ज्यादा सेक्स करने वाले पुरुषों में दिल की बीमारी होने की संभावना 45 फीसदी तक कम होती है।

वहीं सप्ताह में एक बार या इससे कम सेक्स करने वाले लोगों को दिल का रोग होने की संभावना अधिक होती है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन पुरुषों की यौन जरूरतें समय से पूरी हो जाती हैं उनका स्वास्थ्य ऐसा न कर पाने वालों की तुलना में अच्छा होता है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने पाया कि अपने साथी के साथ बिताए गए प्यार भरे पल पुरुषों को भावनात्मक रूप से भी लाभ पहुँचाते हैं।
फिल्म के डायलोग इतने कामुक थे कि डोली के जिस्म में हलचल मचने लगी , मुंशीजी को भी खुजली हो रही थी. डोली कह रही थी-
-तब तो हम लोगों को कभी भी दिल से सम्बंधित बीमारी नहीं हो पायेगी , क्योंकि हम तो रोजाना आनंद उठाने वाले हैं, सप्ताह की बात छोडिये.
मुंशीजी- रोजाना को भी छोड़ दो जानेमन, हम लोग एक दिन में कई -कई बार मस्ती के प्याले छलकायेंगे .
डोली हँसने लगी. फिल्म का नायक बोल रहा था -
-सेक्स जीवन में आपसी समझ और प्रेम काफी महत्वपूर्ण होता है और उतनी ही महत्वपूर्ण होती है अंतरंग पलों की सही समझ. सेक्स जीवन आनंदमय बनाने के लिए किसी व्यापक किताबी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है. बस कुछ सामान्य सी लगती बातों पर ध्यान देने से भी बात बन सकती है.
सेक्स जीवन तभी आनंदमय बन सकता है जब आप या आपका साथी अधिक विचार ना करे. जब आप एक दूसरे के करीब हों तो विचार को त्याग कर एक दूसरे में खो जाएँ. यह ना सोचें कि यदि आपने "ऐसा" किया तो उन्हें "कैसा" लगेगा. अपने आपको वैसा ही रखें जैसा कि आप खुद को महसूस करते हैं. ना तो बदलने की कोशिश करें ना ही कुछ ऐसा करने की जो आपको कृत्रिमता का अहसास दिलाए और आपके साथी को भी. महिलाएँ विशेष रूप से अपनी छवि को लेकर काफी आशंकित रहती हैं. सेक्स के दौरान यह सोचना कि क्या मैं ऐसा करते समय ठीक लगुंगी, उन खास पलों को बदरंग बना सकता है.
अच्छे सेक्स के लिए यह आवश्यक नहीं कि आप किस मुद्रा का प्रयोग करते हैं और क्या नया आविष्कार करते हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि आप और आपकी साथी कितनी संतुष्टि प्राप्त कर रही है. अच्छा सेक्स प्राकृतिक और नैसर्गिक होता है, उसमें नयापन डालने का अत्यधिक प्रयास ना करें. बेहतर है सबकुछ समय पर छोड़ दें और एक दूसरे में खो जाएँ. यह बात पुरूषों पर अधिक लागू होती है. अधिकतर पुरूष सोचते हैं कि यदि उन्होनें सेक्स के दौरान कुछ नया नहीं किया तो यह उनकी साथी को पसंद नहीं आएगा, जो कि सच नहीं है.
पुरूष और महिला में उत्तेजना का स्तर और उत्तेजित होने में लगने वाले समय में अंतर पाया जाता है. सेक्स के दौरान अपने साथी की ईच्छा और उनकी मर्यादा का ध्यान रखें. अत्यधिक उत्तेजित होने से बचें और सयंम से काम लें. सेक्स के दौरान फोरप्ले का अधिक से अधिक आनंद लें. मात्र फोरप्ले से भी आनंद प्राप्त किया जा सकता है. अपने साथी से सीखें. अच्छा सेक्स तब और विकसित होता है जब दोनों व्यक्ति एकदूसरे की पसंद नापसंद को समझने लगते हैं और हर बार कुछ नया सीखते हैं.
डोली- बहुत गजब की फिल्म है. मैंने तो सोचा था कि कुछ अश्लील द्रश्य ही होंगे .मगर यह तो बिलकुल अलग तरह की फिल्म है . इसमें एजुकेशन है. हर विवाहित जोड़े को या जिनकी शादी होने वाली है, या जों लोग शारीरिक सम्बन्ध बनाने वाले हैं उन लोगों के लिए यह फिल्म बहुत बेहतरीन है.
मुंशीजी- बेशक, यह तो लवगुरु की नक़ल जैसा ही है. जव्गुरु भी जब व्याख्यान देते हैं तो इसी तरह के होते हैं. अगर चाहो तो तुम भी कल चल सकती हो.
इसके बाद फिल्म की भाषा उतीजक होती चली गयी, ऐसे -असी शब्द कि डोली और मुंशीजी के जिस्म को चीरते हुए निकल जाते थे . कामवासना की चिंगारी जोरों से भड़क रही थी. उन दोनों के मन में भी नदी की उफान की तरह भाव बहक रहे थे. कामोत्तेजना की आंधी में सब कुछ उड़ने के लिए तियार थे. मुंशीजी ने लवगुरु के बताने के अनुसार डोली के शरीर को चूमना शुरू कर दिया. डोली आह, ऊह करने लगी. उनका विशेष अंग काले नाग की तरह फुँकारने लगा.






Monday, September 20, 2010

lavguru-44

मुंशीजी - अब यह बताने का नहीं बल्कि मौज लेने का वक्त है. देखो, ब्लू फिल्म आ चुकी है . अब हम यह फिल्म देखेंगे . इससे तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जायेगी और आनंद भी आ जाएगा . मैंने बहुत पहले ऐसे फ़िल्में देखी थी, साथ के लड़के बड़े बदमाश होते हैं, वे ही फिल्म चलाते रहते थे.
डोली- अब सब्र नहीं होता , इच्छाएं बढ़ती ही जा रही हैं.
मुंशीजी मुस्करा उठे, उन्होंने फ़ौरन फिल्म चालू करदी, शुरुआत में तो हॉट द्रश्य थे मगर फिर सेक्स शिक्षा की चर्चा होने लगी. चर्चा मजेदार थी. एक महिला सेक्सोलोजिस्ट अपनी पेशेंट से कह रही थी-
-सेक्स संबंधी किसी भी प्रकार की परेशानी, हताशा, निराशा या कुंठा इत्यादि अपने साथी से छिपाने से पूर्व महिलाओं को जान लेना चाहिए कि ऐसा करना न केवल उनके परस्पर संबंधों के लिए घातक है बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी इसका दुप्रभाव पड़ता है। सीधी-सी बात है, अगर यौन क्रिया में संतुष्टि नहीं होगी, या फिर जैसा महिला चाहती है वैसा नहीं होगा, तो शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी महिला हताशा और कुंठा की शिकार होगी। अब अगर, इस परिस्थिति पर वह डर या शर्म, चाहे किसी भी कारण से, अपने साथी से खुलकर बात नहीं करती है और मौन साधे रहती है तो आगे चलकर स्थिति विस्फोटक हो सकती है, जिससे पारस्परिक संबंध बिगड़ेंगे और मानसिक दबाव के चलते स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ेगा। इसलिए बेहतर है कि समय रहते ही, अपने साथी से खुलकर सेक्स संबंधित बातचीत कर ली जाये, जिससे विवाद की नौबत हीं ना आये।
पेशेंट बड़ी तेजतर्रार थी, उसने फ़ौरन टोकते हुए कहा-
-क्या इससे ऐसा नहीं लगेगा कि मैं बदचलन हूँ. क्योंकि मर्द तो वैसे ही बड़े शंकालु प्रवृति के होते हैं .
- बिलकुल नहीं. यह भी एक सच है कि विवादों की जड़ में सबसे अधिक सेक्स की भूमिका ही रहती है, पैसे अथवा घर के कामकाज जैसे सामान्य कारणों की बनिस्पत। महिलाएँ अक्सर झगड़ा बढ़ जाने के डर से ऐसी स्थिति में चुप लगा जाती हैं। परिणामस्वरूप, शयनकक्ष में बोला गया झूठ या लगाई गई चुप्पी से शारीरिक रूप से एक साथ होते हुए भी महिला-पुरुष मानसिक तौर पर कोसों दूर होते हैं। बेहतर है कि ऐसे में महिलाएँ अपने साथी से समझदारी से काम लेते हुए खुलकर बात कर लें, अन्यथा सेक्स भावनाओं को दबाकर चुप्पी साध लेने पर तनाव और हताशा के साथ-साथ अनिष्ट की स्थिति भी हो सकती है। इसके विपरीत, अगर पलायनवाद के स्थान पर अपने पुरुष से खुलकर बात कर ली जाये तो स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ परस्पर रिश्तों में भी प्रगाढता आती है।
अब प्रश्न यह उठता है कि सेक्स इच्छाओं और संतुष्टि के बारे में महिला अपने साथी से किस वाक्-कौशल से बात करे कि पासा उल्टा ना पड़ जाये। क्यूंकि इस संबंध में बात करना इतना सहज नहीं है जितना नजर आता है। यौन संतुष्टि नहीं होती है या फिर आपके प्यार करने का तरीका ठीक नहीं है- तो पुरुष के अहम को निश्चय ही चोट लगेगी और विवाद ही उत्पन्न होगा। अपने साथी की प्रशंसा करते हुए किसी फिल्म के सीन या मैग्जीन में ऐसे विषय पर छपी कहानी या घटना का विस्तार से वर्णन करते हुए अपनी इच्छा ज़ाहिर की जा सकती है। ऐसे में आप उसे अपना हीरो होने का भी अहसास करवा सकती हैं। ऐसी बातें निश्चय ही उसे अच्छी लगेंगी और वह आपकी बातों में रस लेते हुए, जैसा आप चाहेंगी वैसा ही करेगा। परंतु अक्सर होता यह है कि ऐसे में आप कहना कुछ चाहती हैं और आपकी बातों का मतलब कुछ और ही निकलता है। आपको स्वयं ही लगता है कि जो बात आप कहना चाह रही हैं, वह कह नहीं पा रही हैं। नतीजतन- कहने के ढंग, शब्दों के गलत प्रयोग और निकाले गये मतलब के चलते, प्रेम-प्यार के विपरीत, विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अत इस बारे में अत्यंत सतर्कता से काम लेना चाहिए। बातचीत के वक्त अपना रुख सकारात्मक रखें, ना कि शिकायती लहजे में बात करें। उसे अपने सपनों का राजकुमार बताते हुए, किसी स्वप्निल घटना की तरह ही अपनी इच्छाओं को जाहिर करते हुए यौन-क्रिया का पूर्ण आनंद लें।
कहने का आशय है कि अपने स्वास्थ्य और रिश्ते में प्रगाढ़ता लाने के लिए सेक्स संबंधी अपनी इच्छाओं, कामनाओं तथा संतुष्टि के संबंध में चुप्पी ना साधें और ना ही अपनी सेक्स भावनाओं को दबाएँ, बल्कि अपने साथी से इस संबंध में खुलकर बातचीत करें, किंतु पूर्ण सावधानी के साथ। हाँ, पुरुषों की प्रवृत्ति को जानते हुए, मात्र बातचीत के स्तर पर ही इस प्रयास को समाप्त ना कर दें बल्कि इस इच्छापूर्ति के लिए उसे पूरा सहयोग और मार्गदर्शन दें, अन्यथा बात जस की तस रह जाएगी। अत इस संबंध में मन का गुबार मन में ही दबाकर अपने साथी के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने की अपेक्षा बेहतर होगा कि एक दोस्त और सहयोगी की तरह उसके सामने अपनी बात रखें और परस्पर विवादों को ताक पर रखते हुए, स्वस्थ जीवन जीयें।
गोल्डन नेस्ट सेवा समिति द्वारा क्वीन मैरी हाई स्कूल का छात्र संगीत पुरस्कृत


मुंबई, मीरा रोड स्थित गोल्डन नेस्ट में आयोजित एक कार्यक्रम में क्वीन मैरी हाई स्कूल के छात्र संगीत मासूम को गोल्डन नेस्ट सेवा समिति द्वारा पुरस्कृत किया गया. गोल्दत नेस्ट समिति के चेयरमैन डॉक्टर मिश्रा और सेक्रेटरी करुणाकर कामत ने संगीत को प्रशस्ति पत्र और गिफ्ट देकर समानित किया. संगीत ने म्यूजिकल चेयर नामक प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया था. संगीत मासूम क्वीन मैरी हाई स्कूल के सीनियर केजी का छात्र है. इस अवसर पर गोल्डन नेस्ट सेवा समिति के चेयरमैन डॉक्टर मिश्रा और सेक्रेटरी करुणाकर ने लगभग ४० प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित किया. संगीत मासूम को पुरस्कृत करने पर साहित्यकार शिवपूजन पाण्डेय, समाजसेवी परुस्राम यादव, राष्ट्रीय पत्रकार संघ -मुंबई के संस्थापक अध्यक्ष दीनानाथ तिवारी , पत्रकार शिवशंकर तिवारी , जटाशंकर सिंह आदि ने शुभकामनाएं दी हैं.

Sunday, September 19, 2010

लवगुरु -४३

मुंशीजी अब गर्म होने लगे थे, उन्हें याद आ रही थीं वे बातें जों लवगुरु ने कही थी, कि सेक्स से पहले भरपूर फोरप्ले आपकी सुबह को काफी रोमांचक बना सकता है. इस दिन सह स्नान का आनंद लें. आप एक दूसरे की मसाज भी कर सकते हैं और आपको इसके लिए किसी स्पा में जाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी. घर पर ही स्पा की सुविधा तैयार करें और फिर हल्के गर्म पानी या शावर का आनंद उठाएँ.रसोई में एक दूसरे की मदद करें. जरूरी नहीं कि पुरूषों को खाना बनाना आए ही पर वे अपने तरीके से अपनी पत्नी की मदद भी कर सकते हैं, और फिर उन रोमांटिक पलों के दौरान यदि आपसे कुछ गडबड हो भी गई तो आपकी पत्नी इसका बुरा नहीं मानेंगी.अगर पत्नी के स्थान पर खास महिला दोस्त भी है तो कोई बात नहीं .

दोपहर का समय किसी रोमांटिक फिल्म को देखते हुए गुजारें. अपने बीते पलों को याद करें. आप पुरानी तस्वीरों को भी खंगाल कर यादों को ताज़ा कर सकते हैं. दोपहर को के समय तनाव को दूर रखें. यदि आप दोनों को पढने का शौख हो तो कोई किताब साथ में पढ सकते हैं. कोई रोमांटिक उपन्यास हो तो क्या कहने.
शाम को आप शोपिंग के लिए जा सकते हैं. जरूरी नहीं की खरीददारी की ही जाए. विंडो शोपिंग का आनंद भी उठाया जा सकता है. शोपिंग महिलाओं की पसंदीदा प्रवृतियों मे से एक है, आपकी पत्नी या महिला मित्र इसे जरूर पसंद करेंगी.
अपने घर पर हल्का संगीत सुनें. साथ में मिलकर हल्का फुल्का नृत्य भी किया जा सकता है. मूल बात यह है कि आप दोनों एक दूसरे को करीब पाएँ और संकोच से दूर रहें. एक दूसरे के साथ खुलकर पेश आएँ
रात को टीवी से हो सके दूर रहें और एक दूसरे के साथ समय बिताएँ. बाल्कनी में बैठकर ठंडी हवा के झोंको के बीच बातचीत आपको अधिक आनंद प्रदान करेगी. आप अपनी पत्नी के लिए कॉफी बना सकते हैं जो उन्हें पसंद आएगा या फिर डार्क चॉकलेट खाई जा सकती है. डार्क चॉकलेट, स्ट्राबेरी आदि कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिससे टेस्टोस्टेरोन प्रभावित होता है और आप रोमांटिक महसूस करते हैं. इन रोमांटिक पलों के दौरान हल्के फोरप्ले का आनंद भी उठाया जा सकता है.
कैंडल लाइट डिनर लीजिए और इसके लिए चाहें तो बाहर जाएँ चाहे तो घर पर ही इसका माहौल बनाएँ. वैसे घर पर ही कैंडल लाइट डिनर का आनंद लेना सही रहेगा क्योंकि इससे आप अपने अंतरंग पलों के लिए समय बचा पाएंगे. खाना आप बाहर से ऑर्डर कर सकते हैं.
इसके बाद साथ में स्नान का आनंद लें और कुछ रोमांटिक खेल खेलें. आप स्ट्रीपर क्लब का माहौल बना सकते हैं जहाँ के सदस्य केवल दो होंगे, आप दोनों. या फिर ब्लाइंड गेम का आनंद भी उठाया जा सकता है. आप दोनों में से किसी एक की आँखों पर पट्टी बंधी होगी और दूसरे को स्वतंत्रता होगी कि वह अपने साथी के साथ क्या कर सकता है!. वैसे यह भी सच है कि उपरोक्त बातें तयशुदा नहीं है और जरूरी भी नहीं है कि आप पढ पढ कर केवल इन बातों को ही अमल में लाएँ. मेरा आशय यह बताना है कि आप अपनी व्यस्त जिंदगी से एक दिन केवल आप दोनों के लिए जरूर निकाल सकते हैं और उस दिन को आपके विशेष "सेक्स हॉलीडे" में बदल सकते हैं. दूसरे दिन आप दोनों अपने आपको काफी तरोताजा पाएंगे, और आपके रिश्तों को भी नया आयाम मिलेगा.

सेक्स के दौरान दिमाग के कुछ हिस्से काम करना बंद कर देते हैं और निष्क्रीय हो जाते हैं. यह एक विचार था, लेकिन अब इसकी एक ब्रैन स्केनिंग शोध के अनुसार महिलाएँ सेक्स के दौरान भावनात्मक बातें नहीं सोच पाती. उनके दिमाग का वह हिस्सा बंद हो जाता है

कई महिलाएँ चरम-आनंद का अनुभव नहीं कर पाती. यह बात अब तक भ्रांति के रूप में ली जाती थी,
अनुवांशिक लक्षणों और चरम-आनंद की अनुभुति के बीच सबंध होता है. एक अभ्यास के अनुसार महिलाओं द्वारा चरमआनंद का अनुभव करना उनकी अनुवांशिक सरंचना पर भी निर्भर करता है.
इस सवाल का जवाब खोजा जाना बाकी है. कई वैज्ञानिक मानते हैं कि महिलाओं के लिए पुरूषों की तरह चरम-आनंद की अनुभूति होना आवश्यक नहीं है. महिलाओं को चरम-आनंद का अनुभव होना उत्क्रांति के दौरान हुआ एक सयोंग है. अन्यथा यह कुछ कुछ वैसा ही है जैसा पुरूषों के शरीर में स्तनाग्र होना, जबकि उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं होती.

डोली को अब मुंशीजी की चुप्पी खलने लगी थे. बोली-

-क्या आप अकेले -अकेले ही मौज लेते रहते हैं , हमें कुछ नहीं बताओगे ?

Saturday, September 18, 2010

लवगुरु -४२

मुंशीजी- ये सब कहने सुनने की बातें लगती हैं। मैंने सुना है कि औरत कुछ भी मिल बांटकर खा सकती है मगर वह किसी भी हालत में अपने पति का प्यार नहीं बाँट सकती। अगर तुम मुझसे सच्चा प्रेम रखती हो और हमेशा मुझसे प्यार करना चाहती हो तो मुझे नहीं लगता कि तुम ऐसा कर पाओगी, चाहकर भी नहीं कर सकतीं, सवाल ही नहीं उठाता , वैसे मुझे गुरु जी न समझाया था कि अपनी पत्नी के साथ सेक्स करने के बहुत फायदे हैं जबकि , किसी गैर स्त्री के साथ सेक्स करने में नुक्सान ही नुक्सान हैं।
डोली- अछा जी, क्या नुक्सान और मुनाफे बतलाये थे, ज़रा हम भी तो सुनें।
मुंशीजी- कहा था कि सेक्स के नाम पर आह, उह, आउच, कमर दर्द, पीठ दर्द, गर्दन दर्द से परेशान युवतियाँ 'आज नहीं, अभी नहीं' करती है, लेकिन यदि वह बिना किसी भय के पार्टनर के साथ सेक्स में शामिल हो जाए तो उसके दर्द को उड़न-छू होने में देर नहीं लगती। सिरदर्द, माइग्रेन, दिमाग की नसों में सिकुड़न, उन्माद, हिस्टीरिया आदि का सेक्स एक सफल इलाज है।अनिद्रा की बीमारी में बिस्तर पर करवट बदलने या बालकनी में रातभर टहलने के बजाय बेड पर बगल में लेटे साथी से सेक्स की पहल करें, फिर देखें कि खर्राटे आने में ज्यादा देर नहीं लगती। नियमित रूप से संभोग क्रिया में पति को सहयोग देने वाली पत्नी माहवारी के विकारों से दूर रहती है। रात्रि के अंतिम पहर में किया गया सेक्स दिनभर के लिए तरोताजा कर देता है।सेक्स को सिर्फ यौन संबंध बनाने तक ही सीमित न रखें। इसमें अपनी दिनचर्या की छोटी-छोटी बातें, हँसी-मजाक, स्पर्श, आलिंगन, चुंबन आदि को शामिल करें, संभोग क्रिया तभी पूर्ण मानी जाएगी।सेक्स के बारे में यह बात ध्यान रखें कि अपनी पत्नी के साथ या अपने पति के साथ किया गया सेक्स स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखता है।इस प्रसंग में यह बात विशेष ध्यान देने योग्य है कि जहाँ विवाहित जीवन में पत्नी के साथ संभोग क्रिया अनेक तरह से लाभप्रद है, वहीं अवैध और असुरक्षित रूप से बनाए गए सेक्स संबंधों से अनिद्रा, हृदय रोग, मानसिक विकार, ठंडापन, सिफलिस, सूजाक, गनोरिया, एड्स जैसी अनेक प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
डोली- मुझे हंसी आ रही है, कितनी भयानक बातें हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता। सवाल ही नहीं पैदा होता। ये बातें अगर किसी डॉक्टर न कही हैं तो वह निश्चित रूप से पुरुष होगा और बेहद कामुक होगा, तभी तो काम वासना शांत करने के लिए उसने इस तरह के तर्क दिए हैं,। अगर सिर्फ सेक्स करने से बीमारियाँ दूर हो जाएँ तो लोग यही करना शुरू कर दे और इस तरह अस्पतालों पर ताले लग जाएँ।
मुंशजी- तुम हंस रही हो , हंस सकती हो मगर गौर करो , मैंने कहा है कि उन्होंने समझाया था कि सिर्फ अपनी पत्नी के साथ सेक्स करने से ही ये फायदे होंगे और अगर किसी गैर के साथ कोई ताल्लुकात बनाता है तो उससे बीमारियाँ ही फैलेंगी , तुमने शायद उस पर ध्यान नहीं दिया। और फिर यह कहना मेरा भी नहीं है । यह तो मैं तुम्हें वो सब बतला रहा हूँ जो मुझे लवगुरु न सिखाया है। जाहिर सी बात है कि गलत भी हो सकता है । मैं तुम्हारी बात को काट तो नहीं रहा ।
इस बात से डोली को थोड़ी सी राहत मिली, वह जान गयी कि मुंशीजी न समझौते करने शुरू दिए हैं।, यानी कि उसनके अन्दर एक अच्छा पति बन्ने के गुण मौजूद हैं।
वह मुंशीजी को उकसाने के भरसक प्रयास कर रही थी। मुंशीजी भी अपनी तरफ से कोई कसार नहीं छोड़ रहे थे मगर उनके जिस्म के अन्दर जितनी कामोत्तेजना होनी चाहिए उतनी हो नहीं रही थी, उनका बदन सुलग रहा था मगर मुख्य हथियार साथ ही नहीं दे रहा था। वे नहीं चाहते थे कि उनकी चाहने वाली डोली के सामने वे कम ताकतवर दिखें , इसलिए हर तरीका इस्तेमाल कर रहे थे। गुरूजी न कहा था कि जब कामवासना भाद्कानी हो तो अश्लील बातें कहनी चाहिए , वह ऐसा भी कर रहा था , मगर इसका असर होता था डोली पर। वह उनकी बातों से और भी ज्यादा कामुक हो जाया करती थी। आखिरकार डोली को ही आगे आना पडा, उसने मुंशीजी के विशेष अंग की मालिश करनी शुरू करदी , इसका तुरंत असर देखा गया।

Friday, September 17, 2010

लवगुरु -४१

डोली ने महसूस किया कि काफी देर से मुंशीजी ही बोलते जा रहे थे , वह सिर्फ हाँ, या हूँ या सही बात है बोलकर रह जाती थी उसने सोचा कि कहीं मुंशीजी उसे बिलकुल नादाँ न समझ बैठें, इसलिए उसने भी बोलना शुरू किया -

-हर कहीं सेक्स प्रतिबंधित है। सेक्स का जिक्र आते ही क्षणभर में हमारी सभ्यता-संस्कृति ख़तरे में पड़ जाती है। मुंह पर हाथ रखकर सेक्स की बात पर शर्म और गंदगी व्यक्त की जाती है। सेक्स को इस कदर घृणा की दृष्टि से देखा जाता है, मानो वो दुनिया की सबसे तुच्छ चीज हो।
मुंशीजी- हाँ, बहुत सही बात है .सेक्स को हमारे यहां हमेशा से ही टैबू माना गया है। सेक्स पर बात करना। उसे जग-ज़ाहिर करना या आपस में शेयर करना। हर कहीं सेक्स प्रतिबंधित है। सेक्स का जिक्र आते ही क्षणभर में हमारी सभ्यता-संस्कृति ख़तरे में पड़ जाती है। मुंह पर हाथ रखकर सेक्स की बात पर शर्म और गंदगी व्यक्त की जाती है। सेक्स को इस कदर घृणा की दृष्टि से देखा जाता है, मानो वो दुनिया की सबसे तुच्छ चीज हो।
डोली-खुलकर सेक्स का विरोध करते हुए मैंने उन सभ्यता-संस्कृति रक्षकों को भी देखा है जिन्हें सड़क चलती हर लड़की में 'गज़ब का माल' दिखाई देता है। जिन्हें देखकर उनके हाथ और दिमाग न जाने कहां-कहां स्वतः ही विचरण करने लगते हैं। जिन्हें रात के अंधेरे में नीली-फिल्में देखने में कतई शर्म नहीं आती और नीली-फिल्मों के साथ रंगीन-माल भी हर वक्त जिनकी प्राथमिकता में बना रहता है। परंतु रात से सुबह होते-होते उनका सेक्स-मोह 'सेक्स-टैबू' में बदल जाता है।
मुंशीजी- इस सब्जेक्ट पर मैं तुम्हारे साथ हूँ, हमारे पुराणों तक में लिखा है कि यौन-सुख स्त्री के लिए वर्जित, पुरुष के लिए हर वक्त खुला है। पुरुष आजाद है हर कहीं 'मुंह मारने' के लिए। यही कारण है स्त्री को अपना सेक्स चुनने की आजादी हमारे यहां नहीं है।
यह सही है कि हम परिवर्तन के दौर से गुज़र रहे हैं। हर दिन, हर पल हमारे आस-पास कुछ न कुछ बदल रहा है। हम आधुनिक हो रहे हैं। यहां तक कि टीवी पर दिखाए जाने वाले कंडोम, केयरफ्री, ब्रा-पेंटी के विज्ञापनों को भी हम खुलकर देख रहे हैं। एक-दूसरे को बता भी रहे हैं। मगर सेक्स को स्वीकारने और इस पर अधिकार जताने को अभी-भी हमने अपनी सभ्यता-संस्कृति के ताबूतों में कैद कर रखा है। हमें हर पल डर सताता रहता है कि सेक्स का प्रेत अगर कहीं बाहर आ गया तो हमारी तमाम पौराणिक मान्यताएं-स्थापनाएं पलभर में ध्वस्त हो जाएंगीं। हम पश्चिमी भोगवाद के शिकार हो जाएंगें। इसलिए जितना हो सके कोशिश करो अपनी मां-बहनों, पत्नियों को सेक्स से दूर रखने और उन्हें अपनी इच्छाओं से अपाहिज बनाने की।
गज़ब की बात यह है स्त्री-सेक्स पर प्रायः वे लोग भी अपना मुंह सींये रहते हैं जो स्त्री-विमर्श के बहाने 'स्त्री-देह' के सबसे बड़े समर्थक बने फिरते हैं। स्त्री जब अपने सुख के लिए सेक्स की मांग करने लगती है तो परंपरावादियों की तरह उनके तन-बदन में भी आग-सी लग जाती है। इन स्त्री-विमर्शवादियों को सेक्स के मामले में वही दबी-सिमटी स्त्री ही चाहिए जो मांग या प्रतिकार न कर सके।
पता नहीं लोग यह कैसे मान बैठे हैं कि हम और हमारा समाज निरंतर बदल या विकसित हो रहा है। आज भी जब मैं किसी स्त्री को दहेज या यौन शोषण के मामलों में मरते हुए देखती हूं तो मुझे लगता है हम अभी भी सदियों पुरानी दुनिया में जी रहे हैं।
डोली-मुझे एक बात का जवाब आपसे चाहिए आखिर जब पुरुष अपने बल पर अंदरूनी और बाहरी सारे सुख भोगने को स्वतंत्र है तो यह आजादी स्त्रियों को क्यों और किसलिए नहीं दी जाती?
क्या इच्छाएं सिर्फ पुरुषों की ही गुलाम होती हैं, स्त्रियों की नहीं?

मुंशीजी- मगर मैं इस मामले में तुम्हारे साथ हूँ, सत्य आखिर सत्य होता है.मैं स्त्री अधिकारों का विरोधी नहीं हूँ, और हाँ, मैं कभी भी तुम्हें बंधन में रखने वाला नहीं हूँ. अगर तुम हमेशा के लिए मेरी हो जाने का वादा करती हो तो तुम्हे सामान अवसर दिए जायेंगे . सामान आदर दिया जाएगा. भले ही वह कोई भी मामला कैसा भी हो.
डोली- रहने दीजिए . जब सेक्स का मामला आएगा तो आप भी अन्या मर्दों जैसे ही हो जायेंगे . सेक्स की बात तो दूर है , अगर कभी आपने मुझे किसी गैर लड़के के साथ देख भी लिया तो आग बबूला हो जाओगे . जबकि अगर आप किसी दूसरे लड़की को घर में लेकर आते हो और उसके हमबिस्तर भी होते हो तो मैं उसका विरोध नहीं कर पाउंगी .











Thursday, September 16, 2010

लवगुरु -४०

मुंशीजी जब भी कमजोर पड़ते तो उन्हें लवगुरु की याद आने लगती थी, उन्होंने ही तो कहा था कि अगर वह आपको पसंद करती है तो वह भी आपको बिस्तर पर प्रभावित करने के लिए उतनी ही बेचैन होगी जितने आप होते हैं। महिलाओं से संबंधित पत्रिकाएं उनके बारे में ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी देती है जो कहीं और से नहीं मिल सकती। वह महिलाओं
के दृष्टिकोण के बारे में अनेक बातें बताती हैं जिन्हें जानना पुरूषों के लिए दिलचस्प होगा। वह हमारे व्‍यवाहार से कैसे प्रभावित होती है? हमारे कामों को कैसे जानती है? वह किस चीज की उम्मीद करती है? इस प्रकार की बहुत सी बातों की जानकारियां
वह पत्रिका हमें देती है जिन्हें जानना पुरूषों के लिए काफी उपयोगी हो सकता है।
डेटिंग की दीवानी महिलाओं और पुरुषों में अनेक असमानताएं हो सकती हैं। लेकिन नए पार्टनर के साथ काम क्रीडा करने में वह सहज होते हैं। अगर वह आपको पसंद करती है तो वह भी आपको बिस्तर पर प्रभावित करने के लिए उतनी ही बेचैन होगी
जितने आप होते हैं। वह आपको खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ऐसा करके वह आपको दोबारा सेक्स के लिए बुलाना चाहेगी। एक जैसी रूचियां मिलने पर वह सोचती है कि उन्हें सही साथी मिल गया है। तब भावनात्मक रूप से वह आपसे जुड़ जाती
है और बिस्तर पर अपनी कामुक अदाओं का ऐसा असर छोड़ना चाहेगी जिसे आप लंबे समय तक याद रख सके। अपने पार्टनर को काम क्रीडा के लिए दोबारा प्रेरित करने के लिए महिलाएं मुख्यत: चार तरीके अपनाती हैं।
बहुत बार मजाक में वे एक दूसरे को तंग करने लगते हैं। ऐसा करने पर पुरुष अक्‍सर उतेजित हो जाता है। अगर महिला ऐसा करके भी पुरूष को खुश न कर पाई तो संभव है कि वह काम क्रीडा में रूचि न ले। यदि उम्मीदें एक बार जाग गईं तो बिना गंभीर प्रयत्‍न के उन्हें दूर करना बहुत कठिन होता है। कुछ पुरूष आलसी स्वभाव के कारण निश्‍िचत चीजों से प्रेम करते हैं। ऐसे में यदि महिलाएं सोचें कि सेक्स के लिए उनकी अनुमति की जरूरत
नहीं है तो पुरूषों को लगेगा कि उन्हें पाना कोई चुनौती भरा काम नहीं है। जबकि ज्यादातर पुरूष चुनौती पसंद करते हैं। यदि महिला हमेशा पुरूष को संतुष्‍ट करने के लिए तैयार रहती है तो पुरुष उसे घर की खेती मानेगा। इसलिए महिला साथी जब काम क्रीडा के
लिए तैयार न हो तो मना कर देना चाहिए ताकि पुरूष को ज्यादा कोशिश करनी पड़े।
पुरूषों को अपने पुरूषत्व पर गर्व होता है। वे सोचतें हैं कि वह हमेशा ठीक काम करतें हैं। इसलिए महिलाओं को सदा यह बताने की कोशिश करनी चाहिए कि वह सही कर कर रहे हैं या गलत। उनकी पॉवर, साइज, योग्यता आदि से संबंधित कोई प्रतिकूल
टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। संतुष्‍ट न होने पर भी ऐसी कोई बात न कहें जो उनको चोट करे या उन्हें बुरी लगे। जब पुरूष लगातार यह सोचता है कि वह महिला को संतुष्‍ट कर पाएगा या नहीं तब उसमें असुरक्षा की भावना आ जाती है। ऐसी स्थिति में वह
काम क्रीडा से परहेज करने लगता है। ऐसी स्थिति में महि‍लाएं उनकी प्रशंसा करके उसे बेहतर काम क्रीडा के लिए प्रेरित कर सकती है।
बिस्तर पर पुरूष से ऐसे वादे किसी कीमत पर नहीं करने चाहिए जो कि पूरे न हों। यदि आप उसकी रात को यादगार बना देने का वादा करके असफल रहती हैं तो संभव है कि वह सेक्स में रूचि न ले। उससे कम वादे करके उसे अधिक आनंद देकर आप
उसे आश्‍चर्यचकित कर सकती हैं। ऐसा करके पुरूष की जिज्ञासा को बनाए रखा जा सकता है। वह अगली बार भी आपसे नए आश्‍चर्य की उम्मीद करेगा।
अधिकतर महिलाएं कामक्रीड़ा की सम्पूर्ण विधियों के बारे में सोचती हैं। यदि आप सेक्स की किसी एक विधि में निपुण हैं तो उसे हर तरह से करने का प्रयास करें। वह विधि साथी को बताकर उसे सेक्स के लिए उत्‍तेजित किया जा सकता है। अपने साथी से बात
करके उसकी इच्छा जानकर महिलाएं इसे खबसूरती के साथ कर सकती हैं।
आपसी तालमेल से ऐसी तकनीक अपनाकर साथी को खुश करके उसे दोबारा सम्बन्ध बनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।. डोली और मुंशीजी दोनों ही मस्त हो चुके थे .

Wednesday, September 15, 2010

lavguru, bhaag-39



मुंशीजी और डोली एक बिस्तर पर पड़े हुए रोमांटिक दुनिया में मस्त थे. वे ऐसे -ऐसे खाब और ख़याल सजा रहे थे, जिन्हें कभी पूरा होना ही नहीं था. डोली माहिर थी. उसे इन सब बातों का अच्छा खासा ज्ञान था और वह अपनी अदाओं के ऐसे ज़लवे दिखाती थी, जिसे देखकर सामने वाला मर्द पहली ही बार में चारों खाने चित्त होकर गिर जाया करता था. मुंशीजी को भी उसने इसी तरह से बोतल में उतरा था . हाँ, मुंशीजी को यह जरूर एहसास हुआ था कि उम्र के इस ढलान पर उनकी कामशक्ति कम हो गयी थी. अब उन्हें समझ में आया कि डॉक्टर उनसे शराब न पीने की सलाह क्यों देते थे. अब उन्होंने समझा कि नशे के कारण काम क्षमता भी कम हो जाती है. हांलाकि लिराज के कारण उनकी लीवर की समस्या तो आसानी से खत्म हो गयी थी, मगर वे बिस्तर पर नवयौवना डोली को उस तरह की सुख -संतुष्टि नहीं दे पा रहे थे जिसकी इच्छा नई हसीनाओं को होती है. जब वे कमजोर पड़ते तो लवगुरु के सुझावों को याद कर लिया करते थे. लवगुरु ने ही तो कहा था कि यह आवश्यक है कि आप अपने अंदर सेक्स आकर्षण पैदा करें और अपने साथी को पूर्ण आनंद प्रदान करें। हालांकि इसका कोई बना-बनाया फार्मूला नहीं है। लेकिन अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेगें तो सेक्स का पूरा लुत्फ उठा सकते हैं।
सेक्स एक शाश्‍वत सत्य है। हमारे इतिहास में भी नारियों की सुंदरता का बराबर बखान किया गया है। शायद इसी आधार पर यह कहा जाता है कि नारी ईश्‍वर की सबसे सुंदर कृति है। विपरीत लिंगो के बीच सेक्स संबंधी झुकाव प्रकृति प्रदत्त है।
अच्छा चुम्बन अपने साथी को उत्‍तेजित करने का सबसे आसान तरीका है। लेकिन आमतौर पर लोग इसमें भी सफल नहीं हो पाते हैं। क्योंकि चुंबन भी एक प्रकार की कला है जिससे लोग वाकिफ नहीं होते हैं जिसके कारण असफलता हाथ लगती है। जब भी आप अपने साथी के साथ इस हेतु कहीं जाते है तो इस बात का बराबर ख्‍याल रखें कि वह जगह जहां आप जा रहे हैं अपेक्षाकृत शांत एवं मनोरम हो। बेहतर हो कि आप दोनों के अलावा वहां कोई न हो तो ज्यादा अच्छा हो। ध्यान रखें कि इस दौरान उससे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश न करें। नहीं तो इसका उल्टा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वह स्थान जहां पर आप हैं संभव है कि आम लोग वहां बराबर आते रहते हों। ऐसी परिस्थिति में यह सामाजिक रूप से सही नहीं होगा।

लेकिन इस दौरान आप उसके बाहरी अंगों को सहलाते हुए उत्‍तेजित करने का प्रयास कर सकते हैं। साथ ही आप उसके अंगों का भावनात्‍मक वर्णन भी कर सकते हैं। जैसे हाय! तुम्हारे ओंठ इतने सुर्ख लाल हैं कि जी करता है इसको चूम ही लूं, तुम्हारी आंखें झील सरीखी गहरी है, आदि। तात्पर्य यह कि इस हेतु उपयुक्‍त माहौल बनाएं ताकि आपका साथी भी इस क्रिया के लिए तैयार हो सके। उसके अंदर किसी प्रकार का झिझक न रहे।

घर जाने से पहले अपने साथी को एक बार फिर से चुंबंन के लिए उत्तेजित अवश्य करें। इस क्रम में अपने साथी पर अचानक से टूट न पड़ें। वरन इसके लिए उनको पूर्ण रूप से तैयार करें। आप जब भी इस स्तर पर पहुंचे तो अपने होंठ को उसके होंठ के पास ले जाएं। याद रखें एकदम से चूम ही न लें। उसके बाद धीरे-धीरे उसको अपनी बांहों में भर लें। अब धीरे-धीरे अपने को उससे अलग कर लें। तत्पश्‍चात साथी के आंखों में आंखें डालकर हल्की सी मुस्कान दें। उसके बाद एक बार फिर से यह प्रक्रिया दुहराएं। इस बार उसको जरूर चूमें। इस स्थिति में अपने-आप पर नियंत्रण बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। नहीं तो रंग में भंग पड़ सकता है।

जब आपको यह लगे कि वह आपको अपनी बांहों में भरना चाहती है तो अचानक से उसको हंसते हुए अपने से अलग करें। उसके तुरंत बाद उसको बांहों में भरकर बेतहाशा चूमें ताकि उसको ऐसा न लगे कि आप उसपर हंस रहे हैं। साथ ही आपको यह भी दिखाना है कि आपके जैसा साथी उसको नहीं मिल सकता। इसके बाद वह खुद ही सेक्स के लिए आपको प्रेरित करेगी।

आप सिर्फ चुंबन से ही उसको सेक्स के लिए उत्‍तेजित करने में सफल तो हैं, लेकिन आपके सहयोगी को आप से और भी अपेक्षाएं होंगी। ऐसे में आपको चुंबन के अलावा भी कुछ करना होगा। इससे आगे आप मुख मैथुन करके भी खुशियां प्राप्‍त कर सकते हैं। जब कभी आप इस प्रक्रिया के लिए जा रहे हों तो कई बातें ऐसी होती हैं जिनका ख्‍याल रखना बहुत जरूरी होता है। अगर आप पहले से इसके लिए तैयार नहीं होते हैं तो आप इसमें सफल नहीं हो सकते। अत: मुख मैथुन के पहले कुछ सावधानी बरतना जरूरी होता है। इस दौरान साथी के गुप्‍तागों को सहलाने के बाद उसको अचानक से कुछ सेकेंड के लिए अकेला छोड दें। उसके बाद उसके आकर्षक को अपने मुंह मे लेकर हल्‍के-हल्‍के सहलाएं। ध्यान रहे उसके अंगों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। ऐसे में सेक्स मजा किरकिरा हो सकता है।

इस पक्रिया के बाद आप पाएंगे कि आपकी सहयोगी आपसे संबंध बनाने के लिए आप से ज्यादा रूचि लेगी। जब कभी भी आपको ऐसा लगे तो आप यह मान लें कि यह संबंध बनाने का उपयुक्‍त समय है। लेकिन संभोग करते वक्‍त भी थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। बिस्तर पर जाने के तुरंत बाद ही मंजिल पर पहुचना प्रारंभ न करें। वरन साथी को इस हेतु उकसाएं।

पुन: जब दूसरे दिन बिस्तर पर जाएं तो तब तक इंतजार करें जब तक की वह खुद ही पहल न करे। लेकिन जनाब थोड़ा संभल के ! पहली बार जब आप काम क्रीडा की स्थिति में आएं तो थोड़ी देर बाद ही उससे अपने आपको अलग करें। हालांकि यह कठिन है, फिर भी आप कर सकते हैं। लेकिन अगर आपकी सहयोगी फिर से काम क्रीडा के लिए आग्रह करे तो इस बार उनको पूर्ण संतुष्‍िट प्रदान करें। अगर आप इस तरह से संबंध स्थापित करेंगे तो आपका सेक्स जीवन पूर्णत: सफल होगा। इससे आपका दांपत्य जीवन भी सुखमय रहेगा।
अगर बेड पार्टनर पत्नी नहीं होकर अच्छी मित्र हो तब भी यह फार्मूला लागू होता है. डोली तो उसकी होने वाली जीवन संगिनी थी.

Tuesday, September 14, 2010

लवगुरु, भाग-३८


डोली - आपकी नजर में इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?
मुंशीजी- पश्चिमी सभ्यता, जो खुलेपन और स्वतंत्रता की मांग को सर्वोपरि मानती है, जब यही स्वतंत्रता और खुलापन अपनी सीमा मे ज्यादा होती है तब अराजकता फैल जाती है और उसी अराजकता में यह बीमारी फैलने लगती है.
जब से टीवी और इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है तब से पुरुषों में वासना अपनी सीमा से कहीं अधिक बढ़ गई है.
हालांकि यह भी पश्चिमी सभ्यता की देन है.
मदिरा का नशा ऐसा होता है कि कई पुरुष इसके नशे में उत्तेजित होकर अपनी बच्ची,बहन या रिश्तेदार को ही वासना शांत करने का साधन समझ बैठते हैं.
बलात्कार क्यों होता है, कैसे होता है , किन परिस्थितियों में होता है यह सब उस महिला या लड़की के लिए कुछ मायने नहीं रखते जिसके साथ यह होता है. क्योंकि ऐसी स्थिति में उस पीड़िता के लिए जीवन कष्टों की गठरी बन जाती है. पहले तो उसका शारीरिक बलात्कार होता है और फिर हर डगर पर उसका मानसिक बलात्कार अपनों द्वारा होता ही रहता है.
चाहे हम कितने भी शब्द लिखें लेकिन सच्चाई यही है कि बलात्कार पीड़िता के दर्द को दर्शाना संभव नहीं है .
डोली- जी, बलात्कार के बाद यह सबसे पहली पीड़ा होती है. क्योंकि जब कोई जानवर अपनी पूरी ताकत से किसी की इज्जत लूटता है तो उस दर्द की पीड़ा मात्र से ही पीड़िता कई दिनों तक परेशान रहती है. और यह दर्द नाबालिग और कम आयु की लड़कियों में तो और भी ज्यादा होती है जिनके कोमल अंगों को यह जानवर नोच खाते हैं.
अक्सर सामूहिक बलात्कार के बाद पीड़िता को एड्स और गर्भ जैसी समस्या होने का खतरा बना रहता है. सामूहिक बलात्कार, जो आजकल कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं उसमें पीडिता का शरीर कभी-कभी तो इतना थक जाता है कि उससे मृत्यु भी हो जाती है. हालांकि ऐसे समय में पीड़िता को जल्द ही अगर चिकित्सकीय मदद मिल जाए तो हालात काबू में किए जा सकते हैं.
बलात्कार तो शरीर का होता है फिर मन को कैसी पीड़ा? लेकिन यह वह दर्द होता है जो हर दर्द से बढ़ कर होता है.
मानसिक अवसाद और अंधेरे में पीड़िता इस कदर गुम हो जाती है कि उसे अपने अस्तित्व का ख्याल ही नहीं रहता. हर समय मन उस डरावने समय को याद करता है और दिमाग पागलपन की तरफ खिंचता चला जाता है.
जिस चीज से मन सबसे ज्यादा दुखी होता है वह है इतना सब होने के बाद समाज का रवैया. एक ऐसी लड़की जिसकी इज्जत लुट चुकी हो उसे समाज अधिकतर बुरी निगाहों से देखता है खासकर निम्न और मध्यम वर्ग में तो अगर किसी के साथ बलात्कार या रेप हुआ हो तो उसे अछूत से कम नहीं माना जाता.

सबसे ज्यादा दोष तो समाज का है जो बार-बार पीड़िता के अहम और उसके सम्मान का बलात्कार करता है. समाज इस चीज में पीड़िता की ही गलती देखता है, उसे हर जगह नीच भावना से देखता है. ऐसी स्थिति में लड़की का स्कूल, दफ्तर आदि जाना तो मानो पाप हो जाता है जहां हर दूसरी नजर उन्हें रंडी, वेश्या या कलमुंही की नजर से देखती है.

ऐसे में मानसिक पीड़ा और अवसाद होना सामान्य है. इसका परिणाम यह होता है कि एक हंसती-खेलती लड़की गुमनामी के साए में या तो गुम हो जाती है या आत्म हत्या कर लेती है.

किसी पीड़िता को सबसे अधिक दुखद स्थिति का सामना तब करना पड़ता है जब कि उसे ऐसे लोग मिल जाते हैं जो उसे अपना सबसे आसान शिकार समझते हैं. इसी कड़ी में यह भी देखा गया है कि सहानुभूति की आड़ में उनका सबसे ज्यादा शोषण हुआ है.


अक्सर देखा जाता है कि इन मामलों में शिकारी या आरोपी कोई जान-पहचान का ही होता है तो ऐसे में माता-पिता को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि कहीं कोई उनकी बच्चियों पर गलत नजर तो नहीं रखता. इसके साथ लड़कियों को भी ज्यादा खुलेपन से परहेज करना चाहिए. साथ ही बचाव के लिए आप अपने साथ लाल मिर्च की पुड़ियां भी रख सकती हैं यह सबसे बेहतरीन उपाय होता है. बंद गलियों और अंधेरी-सुनसान रास्तों के इस्तेमाल से बचें. अगर जरुरी न हो तो रात को सफर करने से परहेज करें. ऑटो के स्थान पर रात के समय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग बेहतर होता है क्योंकि ऐसे अपराधों में इनकी भूमिका हमेशा से संदेह वाली रही हैं.

समाज का यह नजरिया की बलात्कार के बाद लडकी की इज्जत नहीं रहती गलत है. बल्कि इसे एक अपराध की तरह देखना चाहिए जैसे कि आप चोरी या दुर्घटना को देखते हैं. परिवार को भी इसे इसी रूप में देखना चाहिए. बलात्कारी को समाज के सामने लाना चाहिए और इंसाफ की आवाज को बुलंद करना चाहिए. समाज को पीड़िता के प्रति उदार रवैया अपनाना चाहिए क्योंकि भावनात्मक सहानुभूति किसी की जिंदगी बना सकती है.


मुंबई, मर्दानगी बढाने वाली दवा परफेक्स ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं, अपने असर के कारण यह दवा लोगों की फेवरिट बन गयी है. आजकल बाजार में मर्दानगी , जोश और सम्पूर्ण संतुष्टि दिलाने वाली बहुत सी दवाइयां हैं. दावा करने वाले कई नीम हकीम भी हैं आप अगर उनके चक्कर में पड़कर पैसा, वक्त और जवानी गँवा चुके हैं तो यह आपके लिए है . एक बार शुद्ध आयुर्वेदिक दवा परफेक्स कैप्सूल और तेल का एक कोर्स पूरा करें और पायें जोश का तूफ़ान , मर्दानगी का सच्चा और स्थायी एहसास. ताकि आपकी पत्नी हो सकें खुश. उसे प्राप्त हो सके सम्पूर्ण सुख और संतुष्टि .एक मरीज ने इस दवा के सिर्फ एक माह सेवन करके ठीक होने वाले अँधेरी निवासी रवीश ने बाते कि आज ही बदल डालिए अपनी पुरानी दवा. अपनाइए भारत भर में प्रसिद्द अच्छी और सच्ची दवा , जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता. कठिन परिश्रम और भारतीयों को ध्यान में रखकर , भारतीय जलवायु को ध्यान में रखकर बनाया गया खास फार्मूला . जों आपकी रग -रग में कामोत्तेजना का तूफ़ान उठादे . ताकि आप बिस्तर पर अपनी प्रिय पार्टनर को प्यार का विशेष तोहफा दे सकें,
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Monday, September 13, 2010

लवगुरु, भाग-३७ , इसलिए यौन रोगों के मामले में तो यही कहा जा सकता है कि बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है. वरना जीवन भर पछताने के अलावा कोई चारा
नहीं रह जाता. मैंने अखबारों में कई पढ़ा है कि एड्स पीड़ित व्यक्ति को किस तरह समाज में भी अपमान सहना पड़ता है . एक तरह से उनको बहिष्कृत कर दिया जाता है.
मुंशीजी- बिलकुल सही बात है , मगर भरोसा भी कोई चीज है, मुझे भरोसा है तुम पर. मेरा दिल कहता है कि किसी तरह की कोई यौन बीमारी न तो तुम्हें होगी और न ही मुझे .
डोली- भरोसा करना एक बात है और होना एक दूसरे बात. जरूरी नहीं कि हम जों सोचती हैं हमेशा वही सच हो.
मुंशीजी- हाँ , बात में दम तो है, इस बात को हम तुम समझ सकते हैं, बचाव भी कर सकते हैं मगर उन लोगों का क्या जिन बेकसूरों से जबरन बलात्कार किया जाता है. अगर
जबरदस्ती करने वाला किसी बीमारी का शिकार है, खासकर एड्स जैसी भयानक बीमारी का , तब क्या होगा ? बेचारी पीड़ित भी इसका शिकार हो जायेगी और उसका जीवन हमेशा के लिए
अंधकारमय हो जाएगा.
डोली- हाँ, औरत का गहना होती है इज्जत. इज्जत महिला के अस्तित्व से भी ज्यादा मायने रखती है. इसकी कीमत सिर्फ एक महिला को ही पता होती है. इज्जत एक शब्द जिस पर महिलाओं का संसार टिका है. अब जरा सोचिए, आपके पुरुखों की सम्पति

या आपका सबसे कीमती सामान कोई चुरा कर ले जाए जिसकी वजह से आप समाज में तुच्छ निगाहों से देखे जाएं तो आप क्या करेंगे. इस पीड़ा का अनुभव तो मात्र एक प्रतिशत भी नहीं उस पीड़ा की जो उस लड़की को होती है जिसके साथ बलात्कार हुआ

हो. बलात्कार किसी भी लड़की के लिए मौत से पहले मौत होती है.हमारे गाँव में रहने वाली एक लड़की के साथ जो हुआ वह मौत से कम नहीं था. पहले तो रानी के साथ उसके शरीर का कुछ वासना के भोगियों ने बलात्कार किया, उसके बाद उस असहाय को

उसके खुद के माता-पिता ने कलंकिनी, कलमुंही जैसे अलंकारिक नाम दिए. कानून के रक्षकों ने उसे इंसाफ दिलाने की बजाय उसे ही दोषी माना और अंत में समाज की चुभती आखों से बचने के लिए उसने आत्महत्या को बेहतर माना.

मुंशीजी -ओह , बेहद दुखद है. बलात्कार जैसे शब्द से ही अनुमान लगता है बलपूर्वक किया गया काम. अक्सर बलात्कार का प्रयोग उस जगह किया जाता है जहां 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ जबरदस्ती उसकी इज्जत लूटी जाती है. हालांकि यही

शब्द 18 वर्ष से ऊपर की लडकियों के लिए भी लागू होता है. रेप या बलात्कार एक ऐसा अपराध है जो एक स्त्री के साथ जबरदस्ती या उसकी इजाजत के बिना या कभी इजाजत के बाद भी किया जाए.

भारत की आईपीसी की धारा 375 के अनुसार जब कोई पुरुष किसी स्त्री के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करता है तो उसे बलात्कार कहते हैं. साथ ही अगर किसी भी कारण से सम्भोग क्रिया पूरी हुई हो या नहीं वह बलात्कार ही कहलायेगा. 15 वर्ष से

कम उम्र की पत्नी के साथ पति द्वारा किया गया सम्भोग भी बलात्कार है.

इस संदर्भ में भारतीय सापेक्ष में एक बात सबसे गौर करने की है शादी के बाद जबरदस्ती शारीरिक संबंध, प्रेमिका के साथ डेट के बहाने शारीरिक संबंध बनाने को भी बलात्कार की श्रेणी में रखा जाता है.
हालांकि यह विषय कोई खास महत्व नहीं रखता लेकिन सामाजिक बीमारी की किसी भी श्रेणी को छोड़ना हमें गवारा नहीं.

बलात्कारी एक ऐसा वहशी बीमार होता है जिसे हर नारी में फिर चाहे वह उसकी मां हो या उसकी बहन, वह 6 माह की बच्ची हो या 60 वर्ष की वृद्धा उसे मात्र अपनी हवश पूरी करने का सामान लगती है. और इस जघन्य कुकर्म को करने के लिए कभी-कभी

तो वह समूह में स्त्री को अपने हवश का शिकार बनाते हैं जिसे कानून सामूहिक बलात्कार कहता है. अब आप ही सोचिए जब किसी को अपनी बहन, मां, बच्चे और वृद्धा में सिर्फ वासना नजर आए तो उसे क्या कहेंगे.

बाजारवाद और पश्चिमी सभ्यता के फैलाव के कारण आए बदलाव ने पुरुष की भोग और वासना को चरम पर पहुंचा दिया है. खुलेपन के इस दौर में जहां हर चीज बिकने के लिए तैयार है, पुरुष को इज्जत भी बिकाऊ चाहिए.

हालांकि ऐसा नहीं है कि बलात्कार आज ही हो रहे हैं, बल्कि हमारे समाज में यह बहुत पहले से विद्यमान थे. जिसकी सबसे बड़ी वजह है पुरुष का अपने पौरुष को दर्शाने के लिए वासना को दर्शाना कि वह कितना उत्तेजक है. अब पुरुष के दिमाग में यह बात

कहां से आई कहा नहीं जा सकता.लेकिन हैरत तो तब होती है जब मुंबई जैसे शहर में भी इस तरह की घटनाएं घटती हैं.

Sunday, September 12, 2010

लवगुरु -३६

मगर इस प्रयास में मुंशीजी खुद ही गर्म हो गए , डोली ने भी मौक़ा देखकर चौका लगाना उचित समझा , और ज्यादा गर्मी लाने के उद्देश्य से डोली ने मुद्दा छेड़ा -
-दुर्भाग्य है कि सेक्स को पाप, पति को परमेश्वर और नारी को नरक का द्वार कहा जाता है। अब सोचो, जब तीनों बातें एक साथ एकत्र होंगी, तो क्या होगा? युद्ध ही होगा और कुछ नहीं। कितनी हैरानी की बात है कि हम उसको युद्ध नहीं बल्कि सात जन्मों का पवित्र बंधन भी कहते हैं। अगर सेक्स पाप है, तो जन्म लेने वाली हर संतान पाप की देन है, अगर वो पाप की देन है तो वो पापमुक्त कैसे हो सकती है? हमने सेक्स को पहले पाप कहा, फिर शादी का बंधन बनाकर उसका परमिट भी बना दिया। हमारी सोच में कितना विरोधाभास है।

हमने कभी ध्यान ही नहीं दिया कि विवाह के बाद रिश्तों में खटास क्यों आ जाती है? विवाह के बाद रिश्ते कच्चे धागों की तरह टूटने को लगते हैं? हम ने सेक्स को पाप बना दिया, स्त्री को नरक का द्वार बता दिया और पति को परमेश्वर। बस इसमें उलझकर रह गया मनुष्य। पति को परमेश्वर बताकर हमने ईगो को जन्म दे दिया, मैं को जन्म दे दिया, तानाशाह को जन्म दे दिया। और मनुष्य इससे आगे नहीं निकल पाया। मनुष्य ने पुरुषवादी सोच रखते हुए औरत को सेक्स पूर्ति की मशीन समझा, और औरत ने सेक्स को दमन। सपनों का दमन, रीझों का दमन, उमंगों का दमन। उसको इस रिश्ते से घुटन होने लगी। जब पानी में कड़वाहट आने लगती है तो उसका मीठा स्वाद जाने लगता है। ऐसा ही होने लगता है विवाह के बाद। बस धीरे धीरे रिश्ते पतन की ओर जाने लगते हैं। सेक्स वो अवस्था है यहाँ पर मैं और तू का अर्थ खत्म हो जाता है, लेकिन हमने एक को बड़ा कहकर मैं को जन्म दे दिया। तू नारी है, मैं पुरुष हूँ, जब मैं तू का भेद खत्म हो जाए और जब सब शून्य हो जाए। वो ही सेक्स संपूर्ण है, वरना तो दोनों ही एक दूसरे के लिए सेक्स पूर्ति की मशीनें हैं। इस देश में सेक्स एजुकेशन की नहीं, बल्कि सेक्स के सही अर्थ समझाने की जरूरत है। सेक्स को पाप कहकर खुद को पाप की संतान घोषित करने से उभरना होगा। सेक्स को सही ढंग से परिभाषित करना होगा। सेक्स दो रूहों का वो मिलन है, जो समाधि पर जाकर खत्म होता है। समाधि ईश्वर की ओर लेकर जाती है।
मुंशीजी - क्या बात कही है यार , कहाँ से सीखी ?
डोली- किसी अखबार में पढ़ा था इस बारे में, उसे अपने शब्दों में बयान कर दिया .

मुन्शीजी -सेक्स को पर्दे में डाल दिया, हर कोई उसको देखने के लिए उतावला हो उठा। आपको याद होगा आज से कई साल पहले की फिल्मों में हीरोईनों का ड्रेस सेंस। उनकी नंगी टांगें और बाँहें देखकर कुछ दर्शक तालियाँ बजा उठते थे, और कहते थे थोड़ा सा और दिखाओ, लेकिन आजकल अभिनेत्रियाँ जिस्म की नुमाइश तक लगा देती हैं, कोई देखता नहीं बल्कि कहते हैं कि कुछ कहानी लाओ। कुछ ऐसा ही सेक्स के बारे में। जब सेक्स को हम अच्छी तरह से परिभाषित कर देंगे, तब सेक्स हम को एक शांति और सुकुन की तरफ लेकर जाएगा। जब हमारे जेहन से सेक्स का भूत निकल जाएगा, तब महिलाएं आराम से घूम पाएंगी, उनको कोई भय न होगा। हमने दिमागों में तो सेक्स भर रखा है, लेकिन विरोधी बने घूम रहें हैं सेक्स के। महिला को देखते ही सबसे पहले पुरुष की निगाह उसकी उभरी हुई छाती पर जाती है क्यों?
आखिर वासना इस कदर कूट-कूट कर समाज में फैल चुकी है कि हमें एड्स और अन्य यौन रोगो की रोकथाम का दूसरा रास्ता सूझता ही नहीं. हम यह क्यों नहीं सोचते कि यदि अनैतिक यौन संबंध बनेंगे ही नहीं और सेक्स पर मनुष्य काबू रखेगा तो कंडोम की जरुरत ही नहीं पड़ेगी. आज ज्यादातर लड़कों की दो या उससे ज्यादा प्रेमिका होती ही हैं. लडकियां भी आज सेक्स संबंध बनाने में लड़कों से किसी तरह पीछे नहीं हैं. ऐसे में रिजल्ट तो बुरा होना ही है.
लाइए , अब कंडोम निकालिए , फिर बात करते हैं ....
डोली- देती हूँ, मगर क्या कभी सोचा है कि कंडोम से कई बार रिसाव और फटने आदि की स्थिति में यौन रोगों से सुरक्षा नहीं मिलती और कई बार लोग दुकानों से कंडोम खरीदने में सकोच भी करते हैं.

लेकिन हर समस्या का समाधान होता है. सेल्फ-कंट्रोल और नैतिकता एक ऐसी दवा है जिससे आप सौ प्रतिशत यौन रोगों से बच सकते हैं. अपने साथी के प्रति विश्वास और वासना पर काबू रखना हर मनुष्य को बेहतर जिंदगी की तरफ ले जा सकता है.

यह चीज समझने वाली है कि सेक्स और वासना का आनंद एक तय उम्र सीमा तक ही आप उठा सकते हैं, उसके बाद आपका अंतर्मन आपसे कई सवाल करेगा. इन सवालों को आप आत्मविश्वास के सहारे ही झेल सकते हैं.

अपने साथी के प्रति ही वफादार रहें, जितना हो सके संयम अपनाएं और याद रखें एड्स से बचना है तो कंडोम ही एक मात्र साधन नहीं है. ऐसे हालात ही क्यों आने दें कि मन में डर या ग्लानि का छोटा सा भी भाव आए.

Thursday, September 9, 2010

लवगुरु , ३४

मुंशीजी जबसे डोली से मिले थे, तभी से सिर्फ रोमांस और सेक्स की दुनिया में खोये हुए थे. किसी ने सच ही कहा है कि जों जैसी संगत में रहता है , उस पर वैसा असर होना स्वभाविक है. हाँ, चन्दन जैसे उदाहरण जरूर अपवाद हो सकते हैं. उससे कितने ही सांप लटके रहते हैं , मगर चन्दन कभी अपनी शीतलता नहीं छोडता , मगर हर पद तो चन्दन नहीं हो सकता. उस दोपहर मुंशीजी और डोली ने एक बार जिस्मानी रिश्ता बनाया , और इसके बाद वे मार्केट घूमने गए, खूब जमकर खरीदारी की गयी. रात के समय डोली ने मुंशीजी को एक दो नहीं पूरे चार पैग पीला दिए. पीते ही मुंशीजी भाषण देने लगे-

-प्यार शायद दुनिया के सभी प्राणियों को कुदरत की तरफ से दिया गया सबसे बेहतरीन तोहफा है। यही जीवन में रंग भरता है और जीवन तथा इस सृष्टि की निरंतरता को बनाए रखता है। शायद इसी वजह से प्राचीन परंपराओं में इसे जीवन के चार अहम उद्देश्य धर्म, अर्थ और मोक्ष के साथ काम के रूप में अहमियत दी गई है। प्राचीन हिन्दू धर्म जीवन में आने वाले इस आनंद की अनुभूति को उतना ही अहम मानता है, जितना कि ज्ञान की तलाश को।

सेक्स को हम महज यौन क्रिया से नहीं जोड़ सके। यह दोनों लोगों के बीच गहरी आत्मीयता से पैदा होता है। जब दो लोग एक-दूसरे की परवाह करते हैं। जब हमारा शरीर, मन और आत्मा एक हो जाते हैं। यह तभी संभव होता है जब हम सामने वाले की भावनाओं की कद्र करना सीखते हैं।

सेक्स में प्यार की अहम भूमिका है। सबसे पहले एक शारीरिक क्रिया होने के नाते इसका हमारे शरीर से गहरा नाता है। महिलाओं में यौन क्रिया आक्सीटॉनिक को शरीर में प्रवाहित करती है। यह आक्सीटॉनिक उनके भीतर स्नेह और सेवा की भावना को मजबूत करता है। इतना ही नहीं यौन क्रिया हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है

सिर्फ शरीर नहीं मन से भी सेक्स का गहरा रिश्ता है। एक स्वस्थ सेक्स जीवन किसी भी स्त्री अथवा पुरुष के भीतर शांति और प्रसन्नता की भावना पैदा करता है। यह उनके आपसी रिश्तों को मजबूत करता है। यह प्रसन्नता की भावना उनके लिए लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का सबब भी बनती है।

प्यार किसी भी दंपति के लिए आनंद का सबब बनते हैं। मगर दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं जोड़ना चाहिए। कई बार विभिन्न वजहों से आपके साथी में सेक्स के प्रति अनिच्छा भी पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में हमें उसकी वजह को जानने और उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए। यदि पार्टनर की इच्छा न हो तो सेक्स को कभी उस पर थोपने की कोशिश नहीं करनी चाहिए बल्कि उसकी दिक्कतों को शेयर करते हुए उससे सहानुभूति का बर्ताव करना चाहिए।

तो डोली डार्लिंग , याद रखिए... सेक्स आपके जीवन का एक अहम हिस्सा तभी बनेगा जब आप उसे प्यार की ऊर्जा से सराबोर रखेंगे। तभी आप एक स्वस्थ सेक्स जीवन, बेहतर संबंधों और मजबूत होते रिश्तों की तरफ बढ़ सकेंगे।
डोली-वाह क्या स्पीच है , मजा आ गया . काफी कुछ जानते हैं प्यार के बारे में . तब तो किसी से किया जरूर होगा , बताओं न .
मुंशीजी- प्यार ? हाँ,. नहीं... अरे उसे क्या प्यार कहेंगे , वो तो इकतरफा प्यार था. उसे छोडिये , तुम कुछ सुनाइये
डोली- प्यार तो जीवन में हर कोई करता है, मैंने भी किया है , लेकिन अभी यह शुरुआत में है. जानना चाहते हो, वो कौन है , जिसे मैं जी जान से प्यार करती हूँ, उसकी एक अदा पर अपनी जान न्यौछावर कर सकती हूँ,
मुंशीजी- हाँ, हाँ ... बोलो न, अच्छा लगेगा मुझे ,मैं बुरा नहीं मानूंगा . बिंदास बोलो न. मैं जानना चाहूँगा उसका नाम
डोली- दिल थाम कर बैठिये, मैं जानती हूँ आपका दिल बहुत धड़क रहा होगा ., वो आप हैं मुंशीजी, और कौन हो सकता है ? आप ही वो हैं , जिन पर मेरा रोंया -रोंया मरता है.
मुंशीजी - ओह गोड .. मैं तो सचमुच डर गया था. कितना खुशनसीब हूँ मैं.
डोली- आअज आपने मुझे जितनी मंहगी साडियां दिलवाई हैं, उतनी तो शायद वो भी नहीं दिलवाता, जिससे घरवाले मेरी शादी करते. मेरे कहने से आज शराब भी पीली. मैंने एक फिल्म में देखा था , अरे हाँ, फिल्म से याद आया, आपने कभी ब्लू फिल्म देखी है ?
मुंशीजी -हाँ, कई बार देखी है, वेटर से पूछता हूँ, शायद यहाँ भी होगी, दिखाता हूँ तुम्हें , खूब मजा आएगा.










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लवगुरु , ३४

Tuesday, September 7, 2010

lav guru bhag-32

लवगुरु
मुंशीजी एक अजीब समस्या के शिकार हो गए, पहले तो उनको सिर्फ यही लगा था कि वे डोली के साथ एक रात मौज मस्ती करेंगे. इतनी खूबसूरत युवती के साथ
रंगरेलियां मनाने के एवज में अगर दस बीस हजार खर्च भी हो जाते हैं तो कौन सा फर्क पड़ता है. दौलत तो उन्होंने खूब कमाकर रखी थे, अब तो उन्हें शारीरिक तृप्ति
की जरूरत थी, वे जिस्मानी सुख संतुष्टि पाने के लिए ही तो अपने पडौस में रहने वाली छबीली पर फ़िदा हुए थे . मगर वह कोरी, कुंवारी कली थी, उसकी उम्र बहुत कम
थी और उनके यहाँ पर प्रचलन था कि कोई कितना गरीब क्यों न हो लेकिन वह अपनी बेटी की शादी बराबर की उम्र के लड़के के साथ करता था . चाहे कितने भी गरीब
घर में क्यों न करे, इसलिए राजी खुशी तो मुंशीजी को लगता नहीं था कि छबीली का पिता उनकी शादी उसके साथ करेगा. इसीलिए वे चाहते थे कि लवगुरु से मिलकर
छबीली को पटाने की कला सीख्लें. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर वे यहाँ आये थे, लवगुरु से मिले भी . लवगुरु का आदेश हुआ कि आज रात जों सपना वे देखते हैं वे अक्षरशः
वे अगले दिन लवगुरु को बताएं , तब वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और उसे टिप्स देंगे. होटल आने पर मुंशीजी को वेटर ने हसीनों के दर्शन कर लिए और एक रात के लिए
उन्होंने डोली को हायर कर लिया . डोली के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाने के बाद मुंशीजी उसके दीवाने हो गए, उनको छबीली का ध्यान भी नहीं रहा. वे डोली के मादक यौवन पर इतने
मोहित हुए कि उसे हमेशा के लिए अपना जीवन साथी बनाने का फैसला कर लिया. वे नहीं जानते थे कि डोली उस शहर की टॉप लेबल की वैश्या थी . उसकी अदाओं के जलवों
में अच्छे -अच्छे धनिक शिकार हो जाया करते थे. काम क्रीडा के दौरान वह इतनी ज्यादा कामुक बातें करती थी कि सामने वाला सब कुछ भूलकर उसका गुलाम हो जाता था
, मुन्शीजी को भी कुछ याद नहीं था, वे अपनी मेहनत की कमाई को खर्च कर डोली को पाना चाहते थे. सुहागरात मानाने के बाद लवगुरु ने पहला काम ये किया कि डोली को
अगले दिन रात के लिए बुक किया और फिर साथ-साथ खाना खाने के बाद वे आराम से सो गए . अगली दोपहर मुंशीजी ने डोली के साथ ही स्नान किया , उसके साथ ही नाश्ता किया
और फिर साथ -साथ टीवी देखा, इस समय डोली ने मुंशीजी की जाँघों पर अपना सिर रखा हुआ था . मुंशीजी ने अपने होठ डोली के नाजुक होठों पर रख दिया. डोली के शरीर में
गर्मी का संचार होने लगा. उसका जिस्म वासना की भट्टी में तपने लगा था. मुंशीजी का संवेदनशील अंग धीरे-धीरे जाग्रत हो रहा था. मुंशीजी अब सभी फार्मूले इस्तेमाल कर रहे थे .
लवगुरु ने उन्हें चुम्बन से पहले कोलगेट प्लाक्स से कुल्ला करने की नसीहतदी थी. लवगुरु ने उस पर अमल भी किया. अब उनकी साँसें महक रही थीं. डोली को भी खूब आनंद आ रहा
था. मुंशीजी ने लवगुरु की बातों को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था . डोली कह रही थी-
- ऐसा लगता है , जैसे कि हमारा यहसम्बन्ध आज का नहीं, बरसों बल्कि कहिये कि सदियों पुराना है. क्या फिल्मों की तरह हम किसी पुराने जन्म के बिछड़े हुए प्रेमी-प्रेमिका हैं ?
मुंशीजी- हाँ, मगर मुझे ऐसा एहसास होता है जैसे कि कभी हम बिछड़े ही नहीं, बल्कि हमेशा साथ-साथ रहे. तुम मेरी आत्मा में बसी रहीं और मैं न जाने कहाँ -कहाँ ढूँढता रहा ,
ठीक उसी तरह जैसे कस्तूरी मृग की नाभि में होती है , और वह उसकी महक पाकर उसे पाना चाहता है, इसलिए जंगल दर जंगल भटकता रहता है .
डोली- अगर आप ना आते तो मेरा जीवन बेकार चला जाता .
मुंशीजी- मैं ऐसा कैसे होने देता, जब हमारे मुकद्दर में मिलन लिखा है, मोहब्बत लिखी है तो कोई बुराई , कोई व्यवधान हमारा -तुम्हारा क्या बिगाड़ सकता है ?
डोली- आज की रात आपने मुझे बहुत सुख दिया है . आज से पहले मैं ऐसे किसी सुख से अनजान थी, कभी नहीं जान पाई कि जिस्मों का मिलन इतना सुन्दर भी हो सकता है .
हांलाकि मैं पहले तो डर रही थियो, सोचती थी कि पता नहीं आप किस तरह का वयवहार करेंगे , डरती थी कि ऐसा न हो कहीं दर्द के मारे मेरा दम ही निकल जाए , मगर आपसे मिलकर
मेरा सारा डर समाप्त हो गया. अब तो आनंद ही आनंद है . आपका यह काला नाग मुझे पहले जितना डरा रहा था , अब उतना ही रोमांचित कर रहा है .
मुंशीजी- यह मेरा पहला अनुभव था , इससे पहले मैंने कभी किसी महिला के साथ न तो रोमांस किया और न ही सेक्स किया .
डोली- हम दोनों का यह पहला ही अवसर था. दोनों ही खुश हुए .
मुंशीजी- मैंउस मीठी रात को कभी नहीं भूल पाउँगा , मरनेके बाद भी वह छवि मेरी आँखों में बसी रहेगी.
डोली- अब तो हर रात सुहागरात होगेई, मैं आज की रात आपको कल रात से भी ज्यादा सुख दूंगी .




lav guru bhag-32

लवगुरु
मुंशीजी एक अजीब समस्या के शिकार हो गए, पहले तो उनको सिर्फ यही लगा था कि वे डोली के साथ एक रात मौज मस्ती करेंगे. इतनी खूबसूरत युवती के साथ
रंगरेलियां मनाने के एवज में अगर दस बीस हजार खर्च भी हो जाते हैं तो कौन सा फर्क पड़ता है. दौलत तो उन्होंने खूब कमाकर रखी थे, अब तो उन्हें शारीरिक तृप्ति
की जरूरत थी, वे जिस्मानी सुख संतुष्टि पाने के लिए ही तो अपने पडौस में रहने वाली छबीली पर फ़िदा हुए थे . मगर वह कोरी, कुंवारी कली थी, उसकी उम्र बहुत कम
थी और उनके यहाँ पर प्रचलन था कि कोई कितना गरीब क्यों न हो लेकिन वह अपनी बेटी की शादी बराबर की उम्र के लड़के के साथ करता था . चाहे कितने भी गरीब
घर में क्यों न करे, इसलिए राजी खुशी तो मुंशीजी को लगता नहीं था कि छबीली का पिता उनकी शादी उसके साथ करेगा. इसीलिए वे चाहते थे कि लवगुरु से मिलकर
छबीली को पटाने की कला सीख्लें. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर वे यहाँ आये थे, लवगुरु से मिले भी . लवगुरु का आदेश हुआ कि आज रात जों सपना वे देखते हैं वे अक्षरशः
वे अगले दिन लवगुरु को बताएं , तब वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और उसे टिप्स देंगे. होटल आने पर मुंशीजी को वेटर ने हसीनों के दर्शन कर लिए और एक रात के लिए
उन्होंने डोली को हायर कर लिया . डोली के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाने के बाद मुंशीजी उसके दीवाने हो गए, उनको छबीली का ध्यान भी नहीं रहा. वे डोली के मादक यौवन पर इतने
मोहित हुए कि उसे हमेशा के लिए अपना जीवन साथी बनाने का फैसला कर लिया. वे नहीं जानते थे कि डोली उस शहर की टॉप लेबल की वैश्या थी . उसकी अदाओं के जलवों
में अच्छे -अच्छे धनिक शिकार हो जाया करते थे. काम क्रीडा के दौरान वह इतनी ज्यादा कामुक बातें करती थी कि सामने वाला सब कुछ भूलकर उसका गुलाम हो जाता था
, मुन्शीजी को भी कुछ याद नहीं था, वे अपनी मेहनत की कमाई को खर्च कर डोली को पाना चाहते थे. सुहागरात मानाने के बाद लवगुरु ने पहला काम ये किया कि डोली को
अगले दिन रात के लिए बुक किया और फिर साथ-साथ खाना खाने के बाद वे आराम से सो गए . अगली दोपहर मुंशीजी ने डोली के साथ ही स्नान किया , उसके साथ ही नाश्ता किया
और फिर साथ -साथ टीवी देखा, इस समय डोली ने मुंशीजी की जाँघों पर अपना सिर रखा हुआ था . मुंशीजी ने अपने होठ डोली के नाजुक होठों पर रख दिया. डोली के शरीर में
गर्मी का संचार होने लगा. उसका जिस्म वासना की भट्टी में तपने लगा था. मुंशीजी का संवेदनशील अंग धीरे-धीरे जाग्रत हो रहा था. मुंशीजी अब सभी फार्मूले इस्तेमाल कर रहे थे .
लवगुरु ने उन्हें चुम्बन से पहले कोलगेट प्लाक्स से कुल्ला करने की नसीहतदी थी. लवगुरु ने उस पर अमल भी किया. अब उनकी साँसें महक रही थीं. डोली को भी खूब आनंद आ रहा
था. मुंशीजी ने लवगुरु की बातों को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था . डोली कह रही थी-
- ऐसा लगता है , जैसे कि हमारा यहसम्बन्ध आज का नहीं, बरसों बल्कि कहिये कि सदियों पुराना है. क्या फिल्मों की तरह हम किसी पुराने जन्म के बिछड़े हुए प्रेमी-प्रेमिका हैं ?
मुंशीजी- हाँ, मगर मुझे ऐसा एहसास होता है जैसे कि कभी हम बिछड़े ही नहीं, बल्कि हमेशा साथ-साथ रहे. तुम मेरी आत्मा में बसी रहीं और मैं न जाने कहाँ -कहाँ ढूँढता रहा ,
ठीक उसी तरह जैसे कस्तूरी मृग की नाभि में होती है , और वह उसकी महक पाकर उसे पाना चाहता है, इसलिए जंगल दर जंगल भटकता रहता है .
डोली- अगर आप ना आते तो मेरा जीवन बेकार चला जाता .
मुंशीजी- मैं ऐसा कैसे होने देता, जब हमारे मुकद्दर में मिलन लिखा है, मोहब्बत लिखी है तो कोई बुराई , कोई व्यवधान हमारा -तुम्हारा क्या बिगाड़ सकता है ?
डोली- आज की रात आपने मुझे बहुत सुख दिया है . आज से पहले मैं ऐसे किसी सुख से अनजान थी, कभी नहीं जान पाई कि जिस्मों का मिलन इतना सुन्दर भी हो सकता है .
हांलाकि मैं पहले तो डर रही थियो, सोचती थी कि पता नहीं आप किस तरह का वयवहार करेंगे , डरती थी कि ऐसा न हो कहीं दर्द के मारे मेरा दम ही निकल जाए , मगर आपसे मिलकर
मेरा सारा डर समाप्त हो गया. अब तो आनंद ही आनंद है . आपका यह काला नाग मुझे पहले जितना डरा रहा था , अब उतना ही रोमांचित कर रहा है .
मुंशीजी- यह मेरा पहला अनुभव था , इससे पहले मैंने कभी किसी महिला के साथ न तो रोमांस किया और न ही सेक्स किया .
डोली- हम दोनों का यह पहला ही अवसर था. दोनों ही खुश हुए .
मुंशीजी- मैंउस मीठी रात को कभी नहीं भूल पाउँगा , मरनेके बाद भी वह छवि मेरी आँखों में बसी रहेगी.
डोली- अब तो हर रात सुहागरात होगेई, मैं आज की रात आपको कल रात से भी ज्यादा सुख दूंगी .




lav guru bhag-32

लवगुरु
मुंशीजी एक अजीब समस्या के शिकार हो गए, पहले तो उनको सिर्फ यही लगा था कि वे डोली के साथ एक रात मौज मस्ती करेंगे. इतनी खूबसूरत युवती के साथ
रंगरेलियां मनाने के एवज में अगर दस बीस हजार खर्च भी हो जाते हैं तो कौन सा फर्क पड़ता है. दौलत तो उन्होंने खूब कमाकर रखी थे, अब तो उन्हें शारीरिक तृप्ति
की जरूरत थी, वे जिस्मानी सुख संतुष्टि पाने के लिए ही तो अपने पडौस में रहने वाली छबीली पर फ़िदा हुए थे . मगर वह कोरी, कुंवारी कली थी, उसकी उम्र बहुत कम
थी और उनके यहाँ पर प्रचलन था कि कोई कितना गरीब क्यों न हो लेकिन वह अपनी बेटी की शादी बराबर की उम्र के लड़के के साथ करता था . चाहे कितने भी गरीब
घर में क्यों न करे, इसलिए राजी खुशी तो मुंशीजी को लगता नहीं था कि छबीली का पिता उनकी शादी उसके साथ करेगा. इसीलिए वे चाहते थे कि लवगुरु से मिलकर
छबीली को पटाने की कला सीख्लें. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर वे यहाँ आये थे, लवगुरु से मिले भी . लवगुरु का आदेश हुआ कि आज रात जों सपना वे देखते हैं वे अक्षरशः
वे अगले दिन लवगुरु को बताएं , तब वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और उसे टिप्स देंगे. होटल आने पर मुंशीजी को वेटर ने हसीनों के दर्शन कर लिए और एक रात के लिए
उन्होंने डोली को हायर कर लिया . डोली के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाने के बाद मुंशीजी उसके दीवाने हो गए, उनको छबीली का ध्यान भी नहीं रहा. वे डोली के मादक यौवन पर इतने
मोहित हुए कि उसे हमेशा के लिए अपना जीवन साथी बनाने का फैसला कर लिया. वे नहीं जानते थे कि डोली उस शहर की टॉप लेबल की वैश्या थी . उसकी अदाओं के जलवों
में अच्छे -अच्छे धनिक शिकार हो जाया करते थे. काम क्रीडा के दौरान वह इतनी ज्यादा कामुक बातें करती थी कि सामने वाला सब कुछ भूलकर उसका गुलाम हो जाता था
, मुन्शीजी को भी कुछ याद नहीं था, वे अपनी मेहनत की कमाई को खर्च कर डोली को पाना चाहते थे. सुहागरात मानाने के बाद लवगुरु ने पहला काम ये किया कि डोली को
अगले दिन रात के लिए बुक किया और फिर साथ-साथ खाना खाने के बाद वे आराम से सो गए . अगली दोपहर मुंशीजी ने डोली के साथ ही स्नान किया , उसके साथ ही नाश्ता किया
और फिर साथ -साथ टीवी देखा, इस समय डोली ने मुंशीजी की जाँघों पर अपना सिर रखा हुआ था . मुंशीजी ने अपने होठ डोली के नाजुक होठों पर रख दिया. डोली के शरीर में
गर्मी का संचार होने लगा. उसका जिस्म वासना की भट्टी में तपने लगा था. मुंशीजी का संवेदनशील अंग धीरे-धीरे जाग्रत हो रहा था. मुंशीजी अब सभी फार्मूले इस्तेमाल कर रहे थे .
लवगुरु ने उन्हें चुम्बन से पहले कोलगेट प्लाक्स से कुल्ला करने की नसीहतदी थी. लवगुरु ने उस पर अमल भी किया. अब उनकी साँसें महक रही थीं. डोली को भी खूब आनंद आ रहा
था. मुंशीजी ने लवगुरु की बातों को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था . डोली कह रही थी-
- ऐसा लगता है , जैसे कि हमारा यहसम्बन्ध आज का नहीं, बरसों बल्कि कहिये कि सदियों पुराना है. क्या फिल्मों की तरह हम किसी पुराने जन्म के बिछड़े हुए प्रेमी-प्रेमिका हैं ?
मुंशीजी- हाँ, मगर मुझे ऐसा एहसास होता है जैसे कि कभी हम बिछड़े ही नहीं, बल्कि हमेशा साथ-साथ रहे. तुम मेरी आत्मा में बसी रहीं और मैं न जाने कहाँ -कहाँ ढूँढता रहा ,
ठीक उसी तरह जैसे कस्तूरी मृग की नाभि में होती है , और वह उसकी महक पाकर उसे पाना चाहता है, इसलिए जंगल दर जंगल भटकता रहता है .
डोली- अगर आप ना आते तो मेरा जीवन बेकार चला जाता .
मुंशीजी- मैं ऐसा कैसे होने देता, जब हमारे मुकद्दर में मिलन लिखा है, मोहब्बत लिखी है तो कोई बुराई , कोई व्यवधान हमारा -तुम्हारा क्या बिगाड़ सकता है ?
डोली- आज की रात आपने मुझे बहुत सुख दिया है . आज से पहले मैं ऐसे किसी सुख से अनजान थी, कभी नहीं जान पाई कि जिस्मों का मिलन इतना सुन्दर भी हो सकता है .
हांलाकि मैं पहले तो डर रही थियो, सोचती थी कि पता नहीं आप किस तरह का वयवहार करेंगे , डरती थी कि ऐसा न हो कहीं दर्द के मारे मेरा दम ही निकल जाए , मगर आपसे मिलकर
मेरा सारा डर समाप्त हो गया. अब तो आनंद ही आनंद है . आपका यह काला नाग मुझे पहले जितना डरा रहा था , अब उतना ही रोमांचित कर रहा है .
मुंशीजी- यह मेरा पहला अनुभव था , इससे पहले मैंने कभी किसी महिला के साथ न तो रोमांस किया और न ही सेक्स किया .
डोली- हम दोनों का यह पहला ही अवसर था. दोनों ही खुश हुए .
मुंशीजी- मैंउस मीठी रात को कभी नहीं भूल पाउँगा , मरनेके बाद भी वह छवि मेरी आँखों में बसी रहेगी.
डोली- अब तो हर रात सुहागरात होगेई, मैं आज की रात आपको कल रात से भी ज्यादा सुख दूंगी .