Thursday, September 30, 2010
lavguru-54
Tuesday, September 28, 2010
लवगुरु-५३
लवगुरु -५२
Monday, September 27, 2010
लवगुरु-५१
लवगुरु -५०
Sunday, September 26, 2010
लवगुरु -४९
Saturday, September 25, 2010
लवगुरु, भाग-४8
Friday, September 24, 2010
लवगुरु-४७
Thursday, September 23, 2010
lavguru-46
Tuesday, September 21, 2010
lav guru bhag-45
Monday, September 20, 2010
lavguru-44
Sunday, September 19, 2010
लवगुरु -४३
मुंशीजी अब गर्म होने लगे थे, उन्हें याद आ रही थीं वे बातें जों लवगुरु ने कही थी, कि सेक्स से पहले भरपूर फोरप्ले आपकी सुबह को काफी रोमांचक बना सकता है. इस दिन सह स्नान का आनंद लें. आप एक दूसरे की मसाज भी कर सकते हैं और आपको इसके लिए किसी स्पा में जाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी. घर पर ही स्पा की सुविधा तैयार करें और फिर हल्के गर्म पानी या शावर का आनंद उठाएँ.रसोई में एक दूसरे की मदद करें. जरूरी नहीं कि पुरूषों को खाना बनाना आए ही पर वे अपने तरीके से अपनी पत्नी की मदद भी कर सकते हैं, और फिर उन रोमांटिक पलों के दौरान यदि आपसे कुछ गडबड हो भी गई तो आपकी पत्नी इसका बुरा नहीं मानेंगी.अगर पत्नी के स्थान पर खास महिला दोस्त भी है तो कोई बात नहीं .
दोपहर का समय किसी रोमांटिक फिल्म को देखते हुए गुजारें. अपने बीते पलों को याद करें. आप पुरानी तस्वीरों को भी खंगाल कर यादों को ताज़ा कर सकते हैं. दोपहर को के समय तनाव को दूर रखें. यदि आप दोनों को पढने का शौख हो तो कोई किताब साथ में पढ सकते हैं. कोई रोमांटिक उपन्यास हो तो क्या कहने.
शाम को आप शोपिंग के लिए जा सकते हैं. जरूरी नहीं की खरीददारी की ही जाए. विंडो शोपिंग का आनंद भी उठाया जा सकता है. शोपिंग महिलाओं की पसंदीदा प्रवृतियों मे से एक है, आपकी पत्नी या महिला मित्र इसे जरूर पसंद करेंगी.
अपने घर पर हल्का संगीत सुनें. साथ में मिलकर हल्का फुल्का नृत्य भी किया जा सकता है. मूल बात यह है कि आप दोनों एक दूसरे को करीब पाएँ और संकोच से दूर रहें. एक दूसरे के साथ खुलकर पेश आएँ
रात को टीवी से हो सके दूर रहें और एक दूसरे के साथ समय बिताएँ. बाल्कनी में बैठकर ठंडी हवा के झोंको के बीच बातचीत आपको अधिक आनंद प्रदान करेगी. आप अपनी पत्नी के लिए कॉफी बना सकते हैं जो उन्हें पसंद आएगा या फिर डार्क चॉकलेट खाई जा सकती है. डार्क चॉकलेट, स्ट्राबेरी आदि कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिससे टेस्टोस्टेरोन प्रभावित होता है और आप रोमांटिक महसूस करते हैं. इन रोमांटिक पलों के दौरान हल्के फोरप्ले का आनंद भी उठाया जा सकता है.
कैंडल लाइट डिनर लीजिए और इसके लिए चाहें तो बाहर जाएँ चाहे तो घर पर ही इसका माहौल बनाएँ. वैसे घर पर ही कैंडल लाइट डिनर का आनंद लेना सही रहेगा क्योंकि इससे आप अपने अंतरंग पलों के लिए समय बचा पाएंगे. खाना आप बाहर से ऑर्डर कर सकते हैं.
इसके बाद साथ में स्नान का आनंद लें और कुछ रोमांटिक खेल खेलें. आप स्ट्रीपर क्लब का माहौल बना सकते हैं जहाँ के सदस्य केवल दो होंगे, आप दोनों. या फिर ब्लाइंड गेम का आनंद भी उठाया जा सकता है. आप दोनों में से किसी एक की आँखों पर पट्टी बंधी होगी और दूसरे को स्वतंत्रता होगी कि वह अपने साथी के साथ क्या कर सकता है!. वैसे यह भी सच है कि उपरोक्त बातें तयशुदा नहीं है और जरूरी भी नहीं है कि आप पढ पढ कर केवल इन बातों को ही अमल में लाएँ. मेरा आशय यह बताना है कि आप अपनी व्यस्त जिंदगी से एक दिन केवल आप दोनों के लिए जरूर निकाल सकते हैं और उस दिन को आपके विशेष "सेक्स हॉलीडे" में बदल सकते हैं. दूसरे दिन आप दोनों अपने आपको काफी तरोताजा पाएंगे, और आपके रिश्तों को भी नया आयाम मिलेगा.
सेक्स के दौरान दिमाग के कुछ हिस्से काम करना बंद कर देते हैं और निष्क्रीय हो जाते हैं. यह एक विचार था, लेकिन अब इसकी एक ब्रैन स्केनिंग शोध के अनुसार महिलाएँ सेक्स के दौरान भावनात्मक बातें नहीं सोच पाती. उनके दिमाग का वह हिस्सा बंद हो जाता है
कई महिलाएँ चरम-आनंद का अनुभव नहीं कर पाती. यह बात अब तक भ्रांति के रूप में ली जाती थी,
अनुवांशिक लक्षणों और चरम-आनंद की अनुभुति के बीच सबंध होता है. एक अभ्यास के अनुसार महिलाओं द्वारा चरमआनंद का अनुभव करना उनकी अनुवांशिक सरंचना पर भी निर्भर करता है.
इस सवाल का जवाब खोजा जाना बाकी है. कई वैज्ञानिक मानते हैं कि महिलाओं के लिए पुरूषों की तरह चरम-आनंद की अनुभूति होना आवश्यक नहीं है. महिलाओं को चरम-आनंद का अनुभव होना उत्क्रांति के दौरान हुआ एक सयोंग है. अन्यथा यह कुछ कुछ वैसा ही है जैसा पुरूषों के शरीर में स्तनाग्र होना, जबकि उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं होती.
डोली को अब मुंशीजी की चुप्पी खलने लगी थे. बोली-
-क्या आप अकेले -अकेले ही मौज लेते रहते हैं , हमें कुछ नहीं बताओगे ?
Saturday, September 18, 2010
लवगुरु -४२
डोली- अछा जी, क्या नुक्सान और मुनाफे बतलाये थे, ज़रा हम भी तो सुनें।
मुंशीजी- कहा था कि सेक्स के नाम पर आह, उह, आउच, कमर दर्द, पीठ दर्द, गर्दन दर्द से परेशान युवतियाँ 'आज नहीं, अभी नहीं' करती है, लेकिन यदि वह बिना किसी भय के पार्टनर के साथ सेक्स में शामिल हो जाए तो उसके दर्द को उड़न-छू होने में देर नहीं लगती। सिरदर्द, माइग्रेन, दिमाग की नसों में सिकुड़न, उन्माद, हिस्टीरिया आदि का सेक्स एक सफल इलाज है।अनिद्रा की बीमारी में बिस्तर पर करवट बदलने या बालकनी में रातभर टहलने के बजाय बेड पर बगल में लेटे साथी से सेक्स की पहल करें, फिर देखें कि खर्राटे आने में ज्यादा देर नहीं लगती। नियमित रूप से संभोग क्रिया में पति को सहयोग देने वाली पत्नी माहवारी के विकारों से दूर रहती है। रात्रि के अंतिम पहर में किया गया सेक्स दिनभर के लिए तरोताजा कर देता है।सेक्स को सिर्फ यौन संबंध बनाने तक ही सीमित न रखें। इसमें अपनी दिनचर्या की छोटी-छोटी बातें, हँसी-मजाक, स्पर्श, आलिंगन, चुंबन आदि को शामिल करें, संभोग क्रिया तभी पूर्ण मानी जाएगी।सेक्स के बारे में यह बात ध्यान रखें कि अपनी पत्नी के साथ या अपने पति के साथ किया गया सेक्स स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखता है।इस प्रसंग में यह बात विशेष ध्यान देने योग्य है कि जहाँ विवाहित जीवन में पत्नी के साथ संभोग क्रिया अनेक तरह से लाभप्रद है, वहीं अवैध और असुरक्षित रूप से बनाए गए सेक्स संबंधों से अनिद्रा, हृदय रोग, मानसिक विकार, ठंडापन, सिफलिस, सूजाक, गनोरिया, एड्स जैसी अनेक प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
डोली- मुझे हंसी आ रही है, कितनी भयानक बातें हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता। सवाल ही नहीं पैदा होता। ये बातें अगर किसी डॉक्टर न कही हैं तो वह निश्चित रूप से पुरुष होगा और बेहद कामुक होगा, तभी तो काम वासना शांत करने के लिए उसने इस तरह के तर्क दिए हैं,। अगर सिर्फ सेक्स करने से बीमारियाँ दूर हो जाएँ तो लोग यही करना शुरू कर दे और इस तरह अस्पतालों पर ताले लग जाएँ।
मुंशजी- तुम हंस रही हो , हंस सकती हो मगर गौर करो , मैंने कहा है कि उन्होंने समझाया था कि सिर्फ अपनी पत्नी के साथ सेक्स करने से ही ये फायदे होंगे और अगर किसी गैर के साथ कोई ताल्लुकात बनाता है तो उससे बीमारियाँ ही फैलेंगी , तुमने शायद उस पर ध्यान नहीं दिया। और फिर यह कहना मेरा भी नहीं है । यह तो मैं तुम्हें वो सब बतला रहा हूँ जो मुझे लवगुरु न सिखाया है। जाहिर सी बात है कि गलत भी हो सकता है । मैं तुम्हारी बात को काट तो नहीं रहा ।
इस बात से डोली को थोड़ी सी राहत मिली, वह जान गयी कि मुंशीजी न समझौते करने शुरू दिए हैं।, यानी कि उसनके अन्दर एक अच्छा पति बन्ने के गुण मौजूद हैं।
वह मुंशीजी को उकसाने के भरसक प्रयास कर रही थी। मुंशीजी भी अपनी तरफ से कोई कसार नहीं छोड़ रहे थे मगर उनके जिस्म के अन्दर जितनी कामोत्तेजना होनी चाहिए उतनी हो नहीं रही थी, उनका बदन सुलग रहा था मगर मुख्य हथियार साथ ही नहीं दे रहा था। वे नहीं चाहते थे कि उनकी चाहने वाली डोली के सामने वे कम ताकतवर दिखें , इसलिए हर तरीका इस्तेमाल कर रहे थे। गुरूजी न कहा था कि जब कामवासना भाद्कानी हो तो अश्लील बातें कहनी चाहिए , वह ऐसा भी कर रहा था , मगर इसका असर होता था डोली पर। वह उनकी बातों से और भी ज्यादा कामुक हो जाया करती थी। आखिरकार डोली को ही आगे आना पडा, उसने मुंशीजी के विशेष अंग की मालिश करनी शुरू करदी , इसका तुरंत असर देखा गया।
Friday, September 17, 2010
लवगुरु -४१
डोली ने महसूस किया कि काफी देर से मुंशीजी ही बोलते जा रहे थे , वह सिर्फ हाँ, या हूँ या सही बात है बोलकर रह जाती थी उसने सोचा कि कहीं मुंशीजी उसे बिलकुल नादाँ न समझ बैठें, इसलिए उसने भी बोलना शुरू किया -
-हर कहीं सेक्स प्रतिबंधित है। सेक्स का जिक्र आते ही क्षणभर में हमारी सभ्यता-संस्कृति ख़तरे में पड़ जाती है। मुंह पर हाथ रखकर सेक्स की बात पर शर्म और गंदगी व्यक्त की जाती है। सेक्स को इस कदर घृणा की दृष्टि से देखा जाता है, मानो वो दुनिया की सबसे तुच्छ चीज हो।
मुंशीजी- हाँ, बहुत सही बात है .सेक्स को हमारे यहां हमेशा से ही टैबू माना गया है। सेक्स पर बात करना। उसे जग-ज़ाहिर करना या आपस में शेयर करना। हर कहीं सेक्स प्रतिबंधित है। सेक्स का जिक्र आते ही क्षणभर में हमारी सभ्यता-संस्कृति ख़तरे में पड़ जाती है। मुंह पर हाथ रखकर सेक्स की बात पर शर्म और गंदगी व्यक्त की जाती है। सेक्स को इस कदर घृणा की दृष्टि से देखा जाता है, मानो वो दुनिया की सबसे तुच्छ चीज हो।
डोली-खुलकर सेक्स का विरोध करते हुए मैंने उन सभ्यता-संस्कृति रक्षकों को भी देखा है जिन्हें सड़क चलती हर लड़की में 'गज़ब का माल' दिखाई देता है। जिन्हें देखकर उनके हाथ और दिमाग न जाने कहां-कहां स्वतः ही विचरण करने लगते हैं। जिन्हें रात के अंधेरे में नीली-फिल्में देखने में कतई शर्म नहीं आती और नीली-फिल्मों के साथ रंगीन-माल भी हर वक्त जिनकी प्राथमिकता में बना रहता है। परंतु रात से सुबह होते-होते उनका सेक्स-मोह 'सेक्स-टैबू' में बदल जाता है।
मुंशीजी- इस सब्जेक्ट पर मैं तुम्हारे साथ हूँ, हमारे पुराणों तक में लिखा है कि यौन-सुख स्त्री के लिए वर्जित, पुरुष के लिए हर वक्त खुला है। पुरुष आजाद है हर कहीं 'मुंह मारने' के लिए। यही कारण है स्त्री को अपना सेक्स चुनने की आजादी हमारे यहां नहीं है।
यह सही है कि हम परिवर्तन के दौर से गुज़र रहे हैं। हर दिन, हर पल हमारे आस-पास कुछ न कुछ बदल रहा है। हम आधुनिक हो रहे हैं। यहां तक कि टीवी पर दिखाए जाने वाले कंडोम, केयरफ्री, ब्रा-पेंटी के विज्ञापनों को भी हम खुलकर देख रहे हैं। एक-दूसरे को बता भी रहे हैं। मगर सेक्स को स्वीकारने और इस पर अधिकार जताने को अभी-भी हमने अपनी सभ्यता-संस्कृति के ताबूतों में कैद कर रखा है। हमें हर पल डर सताता रहता है कि सेक्स का प्रेत अगर कहीं बाहर आ गया तो हमारी तमाम पौराणिक मान्यताएं-स्थापनाएं पलभर में ध्वस्त हो जाएंगीं। हम पश्चिमी भोगवाद के शिकार हो जाएंगें। इसलिए जितना हो सके कोशिश करो अपनी मां-बहनों, पत्नियों को सेक्स से दूर रखने और उन्हें अपनी इच्छाओं से अपाहिज बनाने की।
गज़ब की बात यह है स्त्री-सेक्स पर प्रायः वे लोग भी अपना मुंह सींये रहते हैं जो स्त्री-विमर्श के बहाने 'स्त्री-देह' के सबसे बड़े समर्थक बने फिरते हैं। स्त्री जब अपने सुख के लिए सेक्स की मांग करने लगती है तो परंपरावादियों की तरह उनके तन-बदन में भी आग-सी लग जाती है। इन स्त्री-विमर्शवादियों को सेक्स के मामले में वही दबी-सिमटी स्त्री ही चाहिए जो मांग या प्रतिकार न कर सके।
पता नहीं लोग यह कैसे मान बैठे हैं कि हम और हमारा समाज निरंतर बदल या विकसित हो रहा है। आज भी जब मैं किसी स्त्री को दहेज या यौन शोषण के मामलों में मरते हुए देखती हूं तो मुझे लगता है हम अभी भी सदियों पुरानी दुनिया में जी रहे हैं।
डोली-मुझे एक बात का जवाब आपसे चाहिए आखिर जब पुरुष अपने बल पर अंदरूनी और बाहरी सारे सुख भोगने को स्वतंत्र है तो यह आजादी स्त्रियों को क्यों और किसलिए नहीं दी जाती?
क्या इच्छाएं सिर्फ पुरुषों की ही गुलाम होती हैं, स्त्रियों की नहीं?
Thursday, September 16, 2010
लवगुरु -४०
Wednesday, September 15, 2010
lavguru, bhaag-39
Tuesday, September 14, 2010
लवगुरु, भाग-३८
Monday, September 13, 2010
Sunday, September 12, 2010
लवगुरु -३६
Thursday, September 9, 2010
लवगुरु , ३४
सेक्स को हम महज यौन क्रिया से नहीं जोड़ सके। यह दोनों लोगों के बीच गहरी आत्मीयता से पैदा होता है। जब दो लोग एक-दूसरे की परवाह करते हैं। जब हमारा शरीर, मन और आत्मा एक हो जाते हैं। यह तभी संभव होता है जब हम सामने वाले की भावनाओं की कद्र करना सीखते हैं।
सेक्स में प्यार की अहम भूमिका है। सबसे पहले एक शारीरिक क्रिया होने के नाते इसका हमारे शरीर से गहरा नाता है। महिलाओं में यौन क्रिया आक्सीटॉनिक को शरीर में प्रवाहित करती है। यह आक्सीटॉनिक उनके भीतर स्नेह और सेवा की भावना को मजबूत करता है। इतना ही नहीं यौन क्रिया हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है
सिर्फ शरीर नहीं मन से भी सेक्स का गहरा रिश्ता है। एक स्वस्थ सेक्स जीवन किसी भी स्त्री अथवा पुरुष के भीतर शांति और प्रसन्नता की भावना पैदा करता है। यह उनके आपसी रिश्तों को मजबूत करता है। यह प्रसन्नता की भावना उनके लिए लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का सबब भी बनती है।
प्यार किसी भी दंपति के लिए आनंद का सबब बनते हैं। मगर दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं जोड़ना चाहिए। कई बार विभिन्न वजहों से आपके साथी में सेक्स के प्रति अनिच्छा भी पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में हमें उसकी वजह को जानने और उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए। यदि पार्टनर की इच्छा न हो तो सेक्स को कभी उस पर थोपने की कोशिश नहीं करनी चाहिए बल्कि उसकी दिक्कतों को शेयर करते हुए उससे सहानुभूति का बर्ताव करना चाहिए।
तो डोली डार्लिंग , याद रखिए... सेक्स आपके जीवन का एक अहम हिस्सा तभी बनेगा जब आप उसे प्यार की ऊर्जा से सराबोर रखेंगे। तभी आप एक स्वस्थ सेक्स जीवन, बेहतर संबंधों और मजबूत होते रिश्तों की तरफ बढ़ सकेंगे।