हैदराबाद. आंध्र प्रदेश में चर्च के एक पादरी पर अपनी नौकरानी से रेप और उसकी हत्या करने का आरोप लगा है। पादरी ने हैवानियत की सारी हदें पार कर नौकरानी को पीटा और उसे आग के हवाले कर दिया। बुरी तरह झुलस चुकी 16 साल की नौकरानी ने गुंटूर के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया है।
पुलिस के मुताबिक आंध्र इवेंजेलिकल लुथरन चर्च से जुड़े अजय बाबू पर आरोप है कि उसने अपने घर काम करने वाली लड़की से शादी का वादा कर उसका यौन शोषण किया। जब लड़की ने शादी करने का दबाव डाला, तो पादरी ने कहा कि वह शादी नहीं कर सकता, क्योंकि वह शादीशुदा है।
पुलिस के मुताबिक इस बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई और बाद में पादरी ने लड़की को आग लगा दी। इस काम में उसकी पत्नी ने भी उसका साथ दिया, जबकि अजय बाबू का कहना है कि लड़की ने खुद ही आग लगा लगाई.
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नई दिल्ली। क्या एक्साइटमेंट या पछतावा दिखाने के लिए कोई ऐसा भी तरीका अपना सकता है या फिर ट्विटर जैसी सोशल साइट पर किसी का इस तरह भड़ास निकालना सही है? हैदराबाद में अमिताभ बच्च्न की नई फिल्म बुड्ढा होगा तेरा बाप का प्रीमियर देखने के बाद रामगोपाल वर्मा ने बिग बी को लेकर कुछ ऐसा ट्वीट कर डाला जो उनके चाहने वालों के न तो निगलते बन रहा है और न ही उगलते।
रामगोपाल वर्मा ने प्रीमियर देखने के बाद ट्विटर पर इंग्लिश में ट्वीट किया, हाल ही में मैंने ‘बुड्ढा होगा ...’ देखी। फिल्म देखने के बाच बच्चन पर गुस्सा आया कि वह इतने बड़े C****** हो सकते हैं और मैं इतना बड़ा L*** हो सकता हूं।

जब उनसे इस बार में बात की गई तो उन का कहना था कि ये मेरा अपना तरीका है। मैंने अमिताभ के साथ पहले भी कई फिल्मों में काम किया है लेकिन इस तरह से (बुड्ढा..) काम न कर पाने के अफसोस ने मुझे ऐसा ट्वीट करने के लिए मजबूर किया।
मालूम हो कि हाल ही में जब अमिताभ ने ऐश्वर्या के प्रेगनेंट होने की खबर को ट्वीट किया था तब भी रामगोपाल वर्मा ने एक अलग ही अंदाज में उन्हें बधाई दी थी। रामू ने बधाई संदेश में ये तक कहा डाला था कि उन्हें प्रेगनेंट अभिनेत्रियों से सख्त नफरत है।
बहरहाल जो भी हो लेकिन रामू के इस कदम की जमकर आलोचना हो रही है। ट्विटर पर कोई उन्हें पियक्कड़ बता रहा है तो कोई पागल। देखतें हैं इस पूरे मुद्दे का केंद्र बिंदु खुद अमिताभ बच्चन इसपर क्या कहते हैं.
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मुंबई।टीवी प्रोड्यूसर नीरज ग्रोवर की हत्याकांड मामले में सत्र अदालत ने कन्नड़ फिल्मों की अभिनेत्री मारिया सुसाइराज को तीन साल की सजा और उसके मंगेतर एमिले जेरोम मैथ्यू को दस साल की सजा सुनाई है। प्रेम त्रिकोण के कारण हुए इस हत्या काण्ड में अदालत ने जेरोम को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है जबकि मारिया को सिर्फ सुबूत मिटाने का आरोपी पाया है।
गौरतलब है कि करीब तीन साल पहले हुई घटना में मारिया व जेरोम ने मूल रूप से कानपुर निवासी नीरज का कत्ल करने के बाद उसके शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर निकट के जंगल में उन्हें पेट्रोल डालकर जला दिया था। मुंबई पुलिस ने 7 मई, 2008 के इस हत्याकांड में मारिया और जेरोम पर आइपीसी की धारा 302 और 120-बी के अलावा हत्या के सुबूत मिटाने के लिए धारा 201 के तहत भी मुकदमा दर्ज किया था।
लेकिन, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष दोनों को हत्या का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त सुबूत नहीं दे सका। अदालत ने जेरोम को धारा 302 के बजाय 304 [1] यानी गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। मारिया सुसाइराज को तो सिर्फ आइपीसी की धारा 201 के तहत सुबूत मिटाने का ही दोषी माना गया। लिहाजा मारिया को शुक्रवार को जेल से रिहा कर दिया जाएगा क्योंकि इस धारा के तहत सिर्फ तीन साल की सजा का प्रावधान है और मारिया इससे अधिक समय जेल में गुजार चुकी है।
अदालत के फैसले से नाखुश नीरज के पिता अमरनाथ ग्रोवर ने कहा कि आरोपियों को फांसी की सजा होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि पुलिस ने ठीक तरह से मामले की जांच नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले के विरुद्ध हाई कोर्ट में अपील करेगी।
आज क्या कहा मुंबई सत्र न्यायालय ने
न्यायमूर्ति चांदवानी ने नीरज ग्रोवर हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए कहा कि मैथ्यू ने गुस्से में आकर हत्या की। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा की नीरज की हत्या पूर्वनियोजित नहीं थी। अदालत ने कहा, ‘ मैथ्यू ने जिस वक्त मारिया के फ्लैट में प्रवेश किया था। उस समय वह शांत था। इससे साफ होता है कि मैथ्यू का इरादा नीरज की हत्या करना नहीं था।
न्यायमूर्ति चांदवानी ने आईपीसी की हल्की धारा के तहत मैथ्यू और मारिया को दोषी व सजा सुनाने के पक्ष में तर्क दिया है कि यह जाहिर सी बात है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मंगेतर को किसी अजनबी के साथ देखता है, तो वह गुस्से में आकर अपना आपा खो बैठता है।
ध्यान रहे कि अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि 7 मई 2008 को मारिया के मालाड स्थित फ्लैट में पहले मैथ्यू और नीरज के पीट मारपीट हुई और इस दौरान नीरज की हत्या कर दी गई। जिसके बाद मैथ्यू और मारिया ने नीरज की लाश के कई टुकड़े कर सबूत मिटाने के इरादे से मनोर (ठाणे) के जंगल में ले जाकर उसे जला डाला।
महत्वपूर्ण है कि मुंबई सत्र न्यायालय के फैसले को सरकारी वकील आर.वी. केणी और मृतक नीरज ग्रोवर के पिता अमरनाथ ग्रोवर ने निराशाजनक बताया है। वे इस फैसले को ऊपरी अदालत (मुंबई हाईकोर्ट) में चुनौती देने वाले हैं। दरअसल नीरज ग्रोवर हत्याकांड में वे दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा दिलाना चाहते हैं। क्योंकि हत्या के बाद लाश को बेहद क्रूरता से टुकड़े-टुकड़े कर सबूत को मिटाने का प्रयास किया गया था
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