हुक्का ही तो पीया , डाका तो नहीं डाला ..........गिरफ्तार युवाओं का सवाल
मुंबई। मुंबई में एक बार में हुक्का पीना कुछ नौजवानों को भारी पड़ गया। हुक्का पीने की वजह से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के इशारे पर पुलिस की छापेमारी हुई और कई युवक-युवतियों को हिरासत में ले लिया गया। हुक्का पीना सेहत के लिए नुकसानदायक है इसमें कोई शक नहीं लेकिन हुक्का पीना कोई जुर्म नहीं है बशर्ते उसे सार्वजनिक जगह पर या वहां पिया जाए जहां पीने की इजाजत नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि गलत तरीके से बार चलाने वाले पर कार्रवाई हो या फिर बार में उसकी सेवा लेने वालों पर।
ये मामला मुंबई के मुलुंड इलाके का है। बार का नाम है शीतल-समुद्र। भारतीय युवा मोर्चा की शिकायत के बाद पुलिस ने इस बार में अचानक छापा मारा और यहां से 11 लड़कों और 19 लड़कियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने के बाद इन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए भेज दिया गया। फुर्सत के लम्हों में बेफिक्री के कुछ पल बिताने वाले नौजवानों को हिरासत में लिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं:-
हुक्का ही तो पिया है, डाका तो नहीं डाला-चोरी तो नहीं की है!
-क्या हुक्का पीना कानून का उल्लंघन है?
-अगर नहीं तो इन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?
-अगर रेस्तरां में गैरकानूनी तरीके से हुक्का रखा गया था तो ये किसकी गलती है?
-रेस्तरां मालिक और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नौजवानों पर कार्रवाई क्यों की गई?
-क्या अब पुलिस नैतिकता के ठेकेदारों के इशारे पर काम करेगी?
बीजेपी कार्यकर्ताओं का दावा है कि गैरकानूनी तरीके से यहां हुक्का पिलाया जा रहा था। यही नहीं, हुक्का पीने वालों में नाबालिग तक थे। अपनी बात साबित करने के लिए उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन का भी दावा किया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हुक्के से सेहत को नुकसान को देखते हुए सार्वजनिक जगहों पर हुक्का पिलाने पर पाबंदी लगा रखी है। इसके बाद से होटल और रेस्तरां में हुक्का बार पर रोक लगी है। कोर्ट के आदेश के बाद केवल हुक्का बार के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत है।
सवाल उठता है कि अगर इस रेस्तरां के पास हुक्का बार चलाने का लाइसेंस नहीं था तो ये रेस्तरां चलाने वालों की गलती है फिर इसकी सजा हुक्का पीने वालों को क्यों दी गई? गलत तरीके से हुक्का बार चलाने वालों पर पुलिस ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की? पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं के हंगामे का इंतजार क्यों करती रही?
सिगरेट से ज्यादा नुकसानदायक है हुक्का
हुक्का पीने वाले तर्क देते हैं कि इसमें धुआं पानी से फिल्टर होकर आता है, इसलिए सारे नुकसानदायक तत्व पानी में घुलकर छन जाते हैं। इसलिए उन्हें ये सिगरेट की तुलना में कम खतरनाक लगता है लेकिन जानकारों के मुताबिक हुक्के में पानी होता है, इसलिए इसे ज्यादा जोर लगाकर खींचना पड़ता है और उतनी ही जोर से धुआं भी अंदर जाता है इसीलिए नुकसान भी ज्यादा होता है। इससे ज्यादा निकोटिन और कार्सिनोजेंस फेफड़े में जाती है।
सिगरेट की तुलना में हुक्का के धुएं में आर्सेनिक, लेड और निकेल जैसी जहरीली धातुओं का स्तर ज्यादा होता है। चूंकि हुक्का लंबे समय तक और ज्यादा दम लगाकर पिया जाता है, इसलिए ये खतरे बढ़ जाते हैं। हुक्का पीने से मुंह, फेफड़े और पेट का कैंसर, दिल के रोग और दांतों की बीमारियों का खतरा रहता है।
एक घंटे तक हुक्का गुड़गुड़ाने पर 100 से 200 सिगरेट के बराबर धुआं फेफड़ों तक पहुंच जाता है यानी सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाली तमाम बीमारियां हुक्के से भी होती हैं। इतना ही नहीं एक ही माउथपीस के इस्तेमाल से कई संक्रामक रोग फैल सकते हैं।
Friday, July 22, 2011
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