
ओस्लो. यूरोपीय देश नॉर्वे में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले में 91 जानें चली गई हैं। शुक्रवार की रात हुई दो वारदात ने नॉर्वे को दहला दिया।
शुक्रवार की रात (भारतीय समयानुसार) सबसे पहले धमाका ओस्लो के सिटी सेंटर में मौजूद एक 17 मंजिली इमारत के पास हुआ। इस इमारत में नॉर्वे के प्रधानमंत्री का दफ्तर है। धमाके में 7 लोग मारे गए। धमाका इतना जबर्दस्त था कि इमारत की सब खि़ड़कियां टूट गईं। सेना ने सिटी सेंटर को अपने कब्जे में ले लिया।
इस धमाके के करीब दो घंटे बाद ओस्लो से करीब 40 किलोमीटर दूर उटोया द्वीप में चल रहे युवा राजनीतिक कॉन्फ्रेंस को निशाना बनाया गया। एक बंदूकधारी पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचा और उसने अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हमलावर के हाथ में पिस्तौल और टेलीस्कोप लगी राइफल देखी गई। गोलीबारी में 84 लोगों की मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक हमलों के सिलसिले में नॉर्वे के ही एक 32 साल के शख्स को गोलीबारी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसकी पहचान एंडर्स बेहरिंग ब्रीवीक के तौर पर की गई है। पुलिस का कहना है कि धमाके की जगह और जहां गोलीबारी हुई, दोनों जगहों पर इस शख्स को देखा गया। हालांकि, पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि ब्रीवीक का किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन से संबंध हो सकता है।
नॉर्वे में ये हमले किसने किए, इसे लेकर अभी तक कुछ ठोस पता नहीं चला है। हमले को विदेश में नॉर्वे की सेना की सक्रियता के बदले की कार्रवाई के रूप में भी देखा जा रहा है। नॉर्वे की वायुसेना के 6 एफ16 लड़ाकू विमान पिछले महीने तक भी लीबियामें सरकार विरोधी कार्रवाई में लगे थे। हालांकि इसकी संभावना कम ही है कि कर्नल गद्दाफी या उनके समर्थक नॉर्वे में इतना बड़ा हमला करवा सकते हैं।
नॉर्वे ने अफगानिस्तान में 500 सैनिक लगा रखे हैं। नॉर्वे के तीन अखबारों ने 2005-06 में मुहम्मद साहब का काटूर्न छाप कर मुस्लिम कट्टरपंथियों को खासा नाराज किया था। हमलों के कारण को इन बातों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है।
हमले में अल कायदा का भी हाथ देखा जा रहा है, क्योंकि इस आतंकी संगठन ने पहले नॉर्वे में हमलों को लेकर सक्रियता दिखाई है। 2010 में नॉर्वे के तीन नागरिकों को आतंकी हमलों की साजिश रचने के सिलसिले में पकड़ा गया था। इनमें से एक को अल कायदा से विस्फोट करने की ट्रेनिंग मिली हुई थी। इन तीन में से एक शख्स ने तो वैसे ही बम तैयार करने की कोशिश की थी, जैसे बम का इस्तेमाल 2009 में न्यूयार्क सबवे को दहलाने की कोशिश और लंदन के 7/7 धमाकों के लिए इस्तेमाल किए गए थे।
हमले का पाकिस्तान से अभी तक कोई सीधा संबंध तो नहीं जुड़ा है, लेकिन एक पाकिस्तानपरस्त वेबसाइट ने हमले के तत्काल बाद यह मुद्दा उठा दिया। इसमें वेबसाइट ने कहा कि पाकिस्तान नॉर्वे में हुए जनसंहार को उससे जोड़ने की किसी भी अमेरिकी मुहिम का विरोध करेगा। पाकिस्तानकाखुदाहाफिज.कॉम नाम के वेबसाइट पर कहा गया है कि ओस्लो में आतंकी हमला अफगान युद्ध जारी रखने के समर्थक अमेरिकियों के लिए वरदान के रूप में है। जुलाई, 2010 में सीआईए पर ओस्लो में चीनी ठिकाने उड़ाने की साजिश रचने का शक है। वेबसाइट पर लेख के मुताबिक जर्मनी में सीआईए दफ्तर की ओर से इस हमले की योजना बनाई गई थी और चीनी मुसलमानों की भर्ती कर इसे अंजाम दिया जाना था, लेकिन नॉर्वे के कड़े आतंकविरोधी उपायों के चलते यह नाकाम हो गया।
पाकिस्तान को दुनिया में मौजूद खतरों से आगाह कराने वाले, नीति निर्धारक समाचार वेबसाइट होने का दावा करने वाले पाकिस्तानकाखुदाहाफिज.कॉम ने तो यहां तक कहा है कि अमेरिका, भारत के साथ मिल कर पाकिस्तान के हितों पर चोट करने की योजना बनाता रहा है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका में कुछ लीक हुए दस्तावेज या सूत्र के हवाले से नॉर्वे में हुए आतंकी हमले को पाकिस्तान के अल कायदा आतंकियों से जोड़ेगा, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित होगा।
क्यों हुए हमले
यूरोपीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक नॉर्वे में हुए दो हमलों के पीछे तीन संभावित वजहें हो सकती हैं। अफगानिस्तान में अमेरिका की अगुवाई में नाटो सेनाएं तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में जंग लड़ रही हैं। नाटो सेना में नॉर्वे के सैनिक भी शामिल हैं जो अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ रहे हैं। नॉर्वे नाटो के संस्थापक देशों में से एक है। तालिबान और अल कायदा का गठजोड़ जगजाहिर है। यही वजह है कि जानकार मानते हैं कि मई में ओसामा की हत्या के बाद बदला लेने की ताक में अल कायदा नॉर्वे पर हुए हमले के पीछे हो सकता है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों को यह शक भी है कि पिछले साल नॉर्वे के एक अखबार ने कुछ कार्टून छापे थे, जिन्हें इस्लाम के खिलाफ माना गया था। इससे कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क गए थे। वहीं, कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि नॉर्वे पर हुए हमले वहां के प्रधानमंत्री जेन्स स्टॉल्टेनबर्ग की अगुवाई वाली उदार सरकार को गिराने की साजिश भी हो सकती है।
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