नई दिल्ली. नई दिल्ली/बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपनी कुर्सी छोड़ दी है। मीडिया में आ रही अपुष्ट खबरों के मुताबिक येदियुरप्पा ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। गडकरी इस समय रायपुर में हैं। गडकरी के देर शाम दिल्ली लौटने पर ही इस खबर की पुष्टि होने की उम्मीद है।
इस खबर से अंदाजा लगाया जा रहा है कि येदियुरप्पा ने आला कमान की उस बात को मान लिया है, जिसमें पार्टी की तरफ से कहा गया था कि पहले वह इस्तीफा दें और फिर उनसे बात होगी। वहीं, मीडिया में इस तरह की खबरें भी आई थीं कि येदियुरप्पा ने अपने इस्तीफे के लिए यह शर्त रख दी थी कि पार्टी उनकी जगह बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद डीवी सदानंद गौड़ा को राज्य की कमान सौंपी जाए। येदियुरप्पा के इस्तीफे के साथ ही बीजेपी के भीतर कर्नाटक में अगले मुख्यमंत्री को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। कर्नाटक में हालात का जायजा लेने शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह और अरुण जेटली बेंगलुरु जाएंगे।
इससे पहले बुधवार को कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े ने दक्षिण भारत में भाजपा की पहली और एक मात्र सरकार के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (बीएसवाई) पर खनन घोटाले में शामिल होने के आरोप अपनी रिपोर्ट में लगाए थे। इसके बाद पार्टी उन्हें हटाना चाह रही है, ताकि कांग्रेस का मुंह बंद किया जा सके और उस पर हमला जारी रखा जा सके। लेकिन गुरुवार दोपहर तक बीएसवाई का बगावती तेवर बरकरार रहा। उन्होंने आलाकमान को दो टूक कह दिया था कि विधायक उनके साथ हैं तो वह पद क्यों छोड़ें। हालांकि पार्टी ने अपना रुख कड़ा करते हुए उन्हें हटने के लिए कहकर शुक्रवार को नए नेता का चुनाव कर कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदलने का ऐलान कर दिया था।
कांग्रेस ने येदियुरप्पा को हटाए जाने के बीजेपी के फैसले को देर से मजबूरी में उठाया गया कदम बताया है। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि यह फैसला ६ महीने पहले ही लिया जाना चाहिए था। यह देर से आया फैसला है। इतने गंभीर आरोप होने के बाद भी वो सिर्फ इस्तीफा ही मांग रहे है। लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद येदियुरप्पा पर मुकदमा चलना चाहिए। ये भाजपा की दोहरी नीति दिखाता है।
बीएसवाई पर लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में खनन घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने चार साल में सरकारी खजाने को 16000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की चपत लगवाई और करोड़ों रुपये का फायदा अपने सगे-संबंधियों को दिलवाया।
कर्नाटक दक्षिण भारत का पहला राज्य है, जहां भाजपा की सरकार बनी है। इसलिए बीएसवाई को जबरन हटाने से पार्टी की मुश्किल और बढ़ सकती है। लेकिन चार दिन बाद ही संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में भाजपा येदियुरप्पा को हटाए बिना भ्रष्टाचार पर बोलने या कांग्रेस को घेरने का नैतिक अधिकार खो देगी। इसलिए पार्टी में येदियुरप्पा के विकल्प की तलाश पहली प्राथमिकता है।
बीएसवाई के विकल्प के तौर पर कर्नाटक के ग्रामीण विकास मंत्री जगदीश शेट्टार, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष ईश्वरप्पा, राज्य के पूर्व भाजपा अध्यक्ष सदानंद गौड़ा, येदियुरप्पा के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले अनंत कुमार, राज्य के पूर्व गृह मंत्री वीएस आचार्य, कानून मंत्री सुरेश कुमार, शोभा करांडलाजे जैसे नाम विचार करने लायक हैं।
Thursday, July 28, 2011
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