अन्ना की राह में अडंगा
९ अगस्त को जलाएंगे सरकारी बिल की प्रतियाँ
नई दिल्ली. अन्ना हजारे के अनशन की राह में एक और अड़ंगा सामने आ गया है। टीम अन्ना से कहा गया है कि वो जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन के लिए पहले नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लें। जंतर मंतर पर अनशन के लिए अटल अन्ना हजारे ने सरकार को चुनौती दी है कि वो हर कीमत पर आंदोलन के लिए तैयार हैं। वहीं अनशन की इजाजत देने से मना कर मुसीबत मोल लेने वाली दिल्ली पुलिस बचाव की मुद्रा में आ गई है। पुलिस ने टीम अन्ना को चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि उनका अनशन सिर्फ एक दिन का हो और इस दौरान 2000 से अधिक लोग जमा नहीं हों तो उन्हें प्रदर्शन की इजाजत दी जा सकती है।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा है, ‘अभी तक हमने न तो अनशन की इजाजत दी है और न ही इनकार किया है। हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं जिसके लिए 10 दिन पहले चिट्ठी लिखी गई थी। उनसे कुछ बिंदुओं पर सफाई मांगी गई है।‘
मजबूत लोकपाल की मांग को लेकर 16 अगस्त से जंतर-मंतर पर अनशन की तैयारियों में जुटे अन्ना हजारे को दिल्ली पुलिस ने इससे पहले साफ कह दिया था कि वह जंतर-मंतर पर बेमियादी अनशन नहीं कर सकते। पुलिस ने उनसे कहा कि या तो वह अपने आंदोलन के लिए दिल्ली के बाहर कोई जगह चुन लें या फिर पहले से कार्यक्रम बता कर आंदोलन के लिए इजाजत मांगें। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सदन के आसपास अन्ना धरना-प्रदर्शन नहीं कर सकें, इसके लिए धारा 144 लागू करने के आदेश भी दिए गए हैं। लेकिन अन्ना का कहना है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना उनका हक है और वह मनाही के बावजूद अनशन करेंगे।
टीम अन्ना ने जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं मिलने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि निषेधाज्ञा के बावजूद अन्ना हजारे का शांतिपूर्वक अनशन होगा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि संविधान के तहत देश के नागरिकों को हासिल मूल अधिकारों में भी शांतिपूर्वक सभा करने का प्रावधान है। यदि सरकार हमें अनशन पर बैठने से रोकती है तो यह संविधान की हत्या है।
बीजेपी ने भी टीम अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं देने पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस हर उस शख्स को कुचलने में जुटी है जो भ्रष्टाचार का विरोध करता है। लेकिन कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने टीम अन्ना को एक तरह से चुनौती देते हुए कहा है कि सरकार किसी के अनशन से नहीं डरती है।
दिल्ली पुलिस ने अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 2009 में दिए गए एक आदेश का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिल्ली में किसी भी स्थान पर बेमियादी धरना की इजाजत नहीं दे सकती। पुलिस का कहना है कि चूंकि उस वक्त संसद का सत्र चल रहा होगा, ऐसे में किसी को जंतर-मंतर पर पूरा जगह घेरने की इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि उस वक्त कई अन्य संगठन भी विरोध प्रदर्शन के लिए वहां जुट सकते हैं।
जंतर-मंतर पर धरने की इजाजत के लिए टीम अन्ना की ओर से लिखे खत के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि टीम अन्ना चाहे तो अनशन स्थल दिल्ली के बाहरी इलाकों में शिफ्ट कर सकती है या फिर एक निश्चित समय-सीमा दे जिस दौरान उन्हें धरना-प्रदर्शन की इजाजत दी जा सके।
इससे पहले सरकार ने लोकपाल बिल के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट को मंजूरी देकर टीम अन्ना को झटका दिया। सरकार के मसौदे में मौजूदा पीएम और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है जबकि टीम अन्ना मौजूदा पीएम को भी लोकपाल के दायरे में रखना चाहती थी।
केंद्रीय कैबिनेट ने सरकार के प्रतिनिधियों की तरफ से पेश किए गए ड्राफ्ट को कुछ बदलावों के साथ गुरूवार को हरी झंडी दिखा दी, लेकिन गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना के ड्राफ्ट को दरकिनार कर दिया। कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए बिल को संसद की मंजूरी के लिए 1 अगस्त से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार के एकतरफा फैसले से नाराज अन्ना और उनके समर्थकों ने 9 अगस्त को सरकारी बिल की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।
Saturday, July 30, 2011
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