Wednesday, July 6, 2011


बेंगलुरु. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद की मुश्किलें खत्म नहीं हो रही हैं। समलैंगिक समाज के बारे में दिए गए विवादास्पद बयान के बाद बेंगलुरु में समलैंगिक भड़क गए हैं। शहर के समलैंगिक समुदाय के करीब 20 हजार लोगों ने धमकी दी है कि अगर आज़ाद ने अपने बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी तो वे अनशन करेंगे। शहर के समलैंगिक समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं वे विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

बेंगलुरु में समलैंगिक समुदाय के लोगों ने केंद्रीय मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि आज़ाद को इस मामले में जानकारी नहीं है और उन्होंने कहा कि वे तब तक प्रदर्शन करते रहेंगे जब तक गुलाम नबी आज़ाद माफी नहीं मांगते।
सोमवार को आज़ाद ने समलैंगिकता को एक 'रोग' और 'अप्राकृतिक' क़रार दिया था। आज़ाद ने एचआईवी एड्स के मुद्दे पर ज़िला परिषद अध्यक्षों और मेयरों के एक सम्मेलन में ये बातें कही थीं। आज़ाद का कहना था, ‘पुरुषों का पुरुषों के साथ सेक्स अप्राकृतिक है और देश के लिए ठीक नहीं। यह एक रोग है। हम यह पता नहीं लगा पाए हैं कि ऐसा क्यों होता है क्योंकि इसके बारे में जानकारी कम है।’ इस बयान की जबर्दस्त आलोचना हो रही है। देश भर में समलैंगिक समुदाय के अलावा समाज के दूसरे हिस्सों से भी लोग आज़ाद के बयान को गैरजिम्मेदाराना बता रहे हैं।

हालांकि, आलोचना से घिरे आज़ाद ने मंगलवार को अपना बचाव करते हुए कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनके बयान की रिकॉर्डिंग सुनने से साफ हो जाता है कि उन्हें गे सेक्स के लिए बीमारी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था बल्कि उन्होंने एड्स के लिए इस शब्द का प्रयोग किया था। लेकिन उन्होंने गे सेक्स को अप्राकृतिक जरूर कहा था। आज़ाद ने अपनी सफाई में कहा था कि गे सेक्स के कानूनी पहलुओं को लेकर समाज में चर्चा हो रही है।

एड्स नियंत्रण के लिए काम करने वाली संस्था यूएनएड्स ने मंगलवार को कहा कि समलैंगिकता कोई बीमारी नहीं है और किसी व्यक्ति की सेक्स से जुड़ी इच्छा, जरूरत या आदत के आधार पर उसके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
यूएएड्स के कार्यकारी निदेशक माइकल सिडिबे ने एक बयान में कहा, 'भारत में सबको साथ लेकर चलने की एक शानदार परंपरा रही है। सामाजिक न्याय के दायरे में ऐसे लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो समलैंगिक हैं।'

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