Friday, July 22, 2011



आगरा, जागरण संवाददाता: अपने अजब फैसलों के लिए कुख्यात पंचायतों की फेहरिस्त में एक और मामला जुड़ गया। पंचायत में शादीशुदा एक बच्चे के पिता का हाथ पंचों ने उसकी प्रेमिका को थमा दिया। दोनों से बस्ती से बाहर जाकर अपना घर बसाने को कह दिया। पंचों के फैसले के खिलाफ पत्नी ने सवा माह की अबोध बच्ची के साथ पुलिस की शरण ली, तब कहीं जाकर प्रेमिका के परिजन उसे साथ ले गए।
नगला महादेव फ्रीगंज निवासी राशि पत्नी धनंजय (बदला नाम) गुरुवार सुबह थाने पहुंची। उसने बताया उसकी शादी दो साल पूर्व हुई। अब सवा माह की बेटी है। पति के बस्ती की अनीता (बदला नाम) से प्रेम संबंध हैं। प्रेमिका के दबाव बनाने पर बस्ती के कुछ लोगों ने मंगलवार सुबह पंचायत बैठाई और पति को बुलाया। वहां अनीता ने धनंजय से प्यार का इकरार किया। इसके बाद उनका हाथ एक दूसरे को देकर बस्ती से बाहर जाकर नई जिंदगी जीने का फरमान सुना दिया। वहां मौजूद ससुराल वालों ने निर्णय का विरोध किया, लेकिन पंचों ने उनकी एक न सुनी।
बीवी के परिजनों ने पकड़ा पति
प्रेमिका को लेकर गायब पति को गुरुवार तड़के पत्नी के परिजन पालीवाल पार्क से पकड़ने के बाद थाने ले आए। पुलिस ने मामला सुलझाने को प्रेमिका के परिजनों को बुलाया, लेकिन उन्होंने उससे किसी भी तरह का संबंध रखने से मना कर दिया। काफी समझाने पर उसे माफ करने को राजी हुए। इंस्पेक्टर हरीपर्वत अवधेश मिश्रा का कहना है दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद युवती को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
इनका कहना है
पति: प्रेमिका पिंड नहीं छोड़ रही। उसे कई बार समझाया। प्रेमिका ने पंचायत बुलाकर जबरन अपने पक्ष में फैसला करा लिया।
प्रेमिका: प्रेमी का हाथ पंचों ने थमाया है। फैसला करने से पहले उनको सोचना चाहिए था। उसकी जिंदगी बर्बाद होती है तो इसके जिम्मेदार पंच होंगे।
पत्नी: पत्नी और बच्चे के होने के बावजूद इस तरह का तुगलकी फैसला देने वाले पंच कौन होते हैं?

No comments: