Sunday, July 31, 2011



नई दिल्ली।। टोरंटो, लंदन समते कई शहरों के बाद दिल्ली में भी महिलाओं के प्रति पुरुषों को संवेदनशील बनाने के लिए स्लटवॉक निकाला गया। इसके लिए रविवार सुबह 10:30 बजे से जंतर मंतर पर महिलाओं और पुरुषों का जमावड़ा लगने लगा, जो करीब 12 बजे तक अपने चरम पर था।

दिल्ली में होने वाले स्लटवॉक को नाम दिया गया-बेशर्मी मोर्चा। इस वॉक का मुख्य उद्देश्य समाज को महिलाओं के प्रति संवेदशनशील बनाना और महिलाओं की स्वतंत्रता का सम्मान करना सिखाना है। स्लटवॉक जंतर-मंतर से शुरू हुआ और संसद मार्ग का चक्कर लगाकर वापस जंतर-मंतर पर पहुंचा।

इसमें शामिल महिलाओं और पुरुषों का कहना था कि रेप के लिए महिला के पहनावे को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, जबकि रेप 5 साल की बच्ची से लेकर 60 तक की बुजुर्ग महिलाओं के साथ होते हैं।

अपनी ढाई साल की बेटी के साथ वॉक में शामिल हुईं निष्ठा ने कहा , ' मैं इस वॉक में इसलिए शामिल हुई हूं ताकि मेरी बेटी जब बड़ी हो तब उसे ऐसे स्लटवॉक को न निकालना पड़े। ' मूल रूप से बिहार की रहने वाली रेणु यहां अपने पति के साथ आई हुईं थीं। उनके हाथ में तख्ती थी- महिलाओं के कपड़े नहीं , अपनी सोच बदलो। उन्होंने कहा , ' मैं हाउस वाइफ हूं और मुझे बड़ी हैरानी होती है कि दिल्ली जैसे शहर में भी महिलाएं अपनी मर्जी से बेखौफ हो कर कपड़े नहीं पहन सकती हैं। सरकार को कानूनों को सख्ती से लागू करवाना चाहिए। '


वॉक में महिलाओं के अलावा भारी संख्या में पुरुष भी थे। डीयू में स्टूडेंट गगनदीप ने स्लटवॉक की जरूरत पर बल देते हुए कहा , ' आदमियों को कैसे कुछ भी करने भर दिया जाए। अगर इंडिया विकसित देश है तो उसे मानसिक रूप से भी विकसित होना होगा। ' वहीं ग्रैजुएशन कर रहे अंकुर ने कहा , ' महिलाओं के प्रति लोगों के नजरिए में और व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि ऐजुकेशन सिस्टम में सुधार किया जाए। '

वैसे, वॉक के दौरान कई लोग ऐसे भी मिले जिनका कहना था कि यह सब फिजूल है और लड़कियों को चाहिए कि वे ढंग के कपड़े पहने। एक बुजुर्ग दंपती ने कहा , ' कम कपड़े पहनेंगी तो लोग पीछे से देखेंगे ही। फब्तियां कसेंगे ही। पुलिस भी कहां तक संभालेगी। '

अमेरिका से आई मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली शोभना ने कहा , ' पिछले दिनों अमृतसर में जब मेरी सहेलियों पर फब्तियां कसी गईं तो उनमें से एक ने लड़के को जोरदार थप्पड़ रसीद दिया। मुझे लगता है कि लोग खुद नहीं सुधरेंगे। उन्हें सबक सिखाना पड़ेगा। दिल्ली में रात 12 बजे बेफिक्र हो कर नहीं घूम सकते जबकि यूएस में मैं आराम से 12 बजे घूमने निकल सकती थी। '

दिल्ली में स्लटवॉक के आयोजकों ने साफ कहा कि स्लटवॉक उस मानसिकता के खिलाफ जंग का ऐलान है जो समझते हैं कि लड़कियां अगर मॉडर्न या छोटे कपड़े पहन रही हैं तो वे छेड़खानी के लिए आमंत्रित कर रही हैं।

पीड़ित पर ही आरोप लगाने और दोषी को कसूरवार ठहराने की मानसिकता बदलने की लड़ाई है यह। यह वॉक लोगों को अहसास दिलाने के लिए है कि लड़कियों के साथ अत्याचार और भेदभाव हो रहा है और इसे खत्म करने की जरूरत है। सोमवार से शुरू हो रहे संसद सत्र की वजह से आयोजकों को जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक करीब 700 मीटर तक जाने की इजाजत दी गई है.

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