Saturday, July 23, 2011


नगीना बिजनौर। नगीना क्षेत्र के ग्राम काजीवाला निवासी एक विवाहित व्यक्ति की लगभग 12 वर्ष पहले जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। परिजन उसे खो नदी के समीप दफना आये थे। पर शुक्रवार को बारह साल बाद वह अपने घर आ पहुंचा। उसके घर आने से जहां घर में खुशी है वहीं परिजन इस बात पर विश्वास भी नहीं कर पा रहे हैं।

ग्राम काजीवाला निवासी तुलाराम हरिजन के पांच पुत्रों व तीन पुत्रियों में सबसे बडे़ पुत्र डालचंद (पप्पू) को 9 जून 1999 की रात घर में ही सोते समय जहरीले सांप ने डस लिया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने उसे हजारों ग्रामीणों के साथ समीप खो नदी के निकट दफना दिया था। शुक्रवार की देर शाम डालचंद उर्फ पप्पू अपने गुरु के साथ घर पहुंचा तो परिजन भौचक्के रह गये। सभी ने डालचंद को पहचानते हुए गले से लगा लिया। खबर आसपास के क्षेत्रों में फैली तो हजारों की तादात में लोग उसके घर जा पहुंचे।

डालचंद उर्फ पप्पू के साथ आए उसके गुरु रमेशनाथ निवासी ग्राम गढवासा जिला बुलंदशहर ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व वह खो नदी के किनारे सांप व जड़ी-बूटियों की तलाश कर रहे थे। तभी उन्होंने पानी के किनारे झाड़ियों में एक लाश फंसी देखी, जिसे देखकर उन्हें लगा कि इसकी मौत सांप के काटने से हुई है। वह उसे उठाकर अपने डेरे पर ले गये, जहां मंत्रों व जड़ी-बूटियों से उपचार के बाद वह जीवित हो गया। तीन दिन पूर्व वह ग्राम गुनियाखेड़ा थाना नूरपुर में भिक्षा मांग रहे थे तभी वहां खड़ी एक महिला ने पप्पू को पहचान लिया। पप्पू ने भी उसे पहचान लिया तथा वहां इकट्ठा हुए ग्रामीणों को बताया कि यह मेरी ममेरी बहन है।

डालचंद पप्पू की बड़ी पुत्री मोनी की शादी भी गुनियाखेड़ी ग्राम में ही हुई थी। मोनी को जब बुलाया गया तो उसने भी पहचान लिया। तभी रानी ने ग्राम काजीवाला खबर दी। खबर सुनते ही पप्पू की माता मुन्नी, पत्नी निर्मला, भाई दीपचंद व अतर सिंह ग्राम गुनियाखेड़ी पहुंचे जहां सभी ने पप्पू को पहचान लिया।

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