Wednesday, July 20, 2011


छपरा। बिहार के छपरा जिले में आरजेडी सांसद उमाशंकर सिंह के घर पर गोलीबारी की खबर है। हमले में तीन लोगों की मौत हो गई है हालांकि सांसद उमाशंकर सिंह सुरक्षित हैं। सिंह बिहार के महाराजगंज से सांसद हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैँ।घटना की सूचना पाकर एसपी समेत पुलिस बड़ी संख्या में कैम्प कर रही है। हमलावरों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
बताया जा रहा है कि हमला दोपहर 3.40 के आसपास हुआ है। मारे गए लोगों की पहचान कर ली गई है।
मरने वालों का नाम मणिभूषण सिंह, देवेंद्र सिंह और दिनेश राय के नाम शामिल हैं। मणिभूषण सिंह जेडीयू नेता थे। देवेंद्र सिंह बानापुर पंचायत के मुखिया थे जबकि दिनेश राय मणिभूषण सिंह का ड्राइवर था। 70 वर्षीय उमाशंकर सिंह ने पहले से प्रशासन को शिकायत की थी कि उनपर हमला हो सकता है उसके बावजूद हमले को अंजाम दिया गया।
दूसरी तरफ, बिहार इंडिस्ट्रियल डिवलेपमेंट अथॉरिटी (बियाडा) जमीन बंदरबांट मामले पर विपक्ष ने आज दूसरे दिन भी विधानसभा को चलने नहीं दिया। सदन में विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग की और सीबीआई जांच की मांग की।

जमीन की इस बंदरबांट पर आरजेडी नीतीश सरकार के खिलाफ पूरे राज्य में धरना-प्रदर्शन करेगी। आरजेडी नेता रामकृपाल यादव ने कहा कि इस घोटाले में मुख्यमंत्री के करीबी मंत्री और अधिकारी शामिल हैं। इस मामले की जांच मुख्यमंत्री को सीबीआई से करानी चाहिए। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने कहा है कि इस बंदरबांट के खिलाफ 27 जुलाई से वो रथयात्रा निकालेंगे।

मालूम हो कि सूबे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में मुख्य सचिव से बिहार इंडस्ट्रियल डिवलपमेंट अथॉरिटी की जमीन के बंदरबांट पर जानकारी मांगी और इस बंदरबांट की जांच का जिम्मा मुख्य सचिव बिहार को सौंप दिया।

गौरतलब है कि बिहार सरकार पर औद्योगिक विकास के लिए दी जाने वाली बियाडा की जमीन मंत्रियों के बेटी, बेटों को रेवड़ी की तरह बांटने का आरोप लगा है। आईबीएन7 द्वारा इस खबर के खुलासे के बाद विपक्ष ने नीतीश से इस्तीफा देने की मांग की।

कल यानी मंगलवार को बिहार विधानसभा सत्र के पहले दिन इसे लेकर हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष इस मामले में कार्यस्थगन प्रस्ताव लेकर लाया, जिसपर विधानसभा में हंगामा हुआ। गौरतलब है कि ये वो भूमि हैं जो बिहार के औद्योगिक विकास के लिए कारोबारियों को दी जानी थी, लेकिन बिहार सरकार के मंत्रियों के करीबियों को भी ये जमीन दे दी गई। वहीं, मंत्रियों का कहना है कि जमीन देना कोई अपराध नहीं है।

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