राजा ने पीएम, चिदम्बरम को भी लपेटा
नई दिल्ली। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेल में बंद पूर्व संचार मंत्री ए राजा ने प्रधानमंत्री सहित कई और मंत्रियों -नेताओं को भी लपेट में ले लिया है। राजा के बयान के बाद राजनीतिक गलियारे में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने पीएम और चिदम्बरम के इस्तीफे की मांग कर डाली है वहीं, केन्द्र सरकार के कई बड़े मंत्रियों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इस्तीफे की मांग को अनुचित करार दिया है। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ए राजा के बयान पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
इससे पहले, सोमवार को सीबीआई अदालत में सुनवाई के दौरान राजा ने दोहराया है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। राजा ने कहा कि उन्होंने केवल एनडीए सरकार की नीति का पालन किया। नीलामी करने की बजाए "पहले आओ पहले पाओ"की नीति एनडीए सरकार की थी जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में भी जारी रखा।
पीएम को थी जानकारी
राजा ने कहा स्पेक्ट्रम आवंटन में ऎसा कुछ भी नहीं हुआ जिसके बारे में पीएम की जानकारी नहीं था। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में सारे फैसले लिए गए। गृह मंत्री पी चिदम्बरम को भी आरोपों के घेरे में लेते हुए राजा ने कहा कि डी बी रियल्टी के आवंटन को चिदम्बरम ने ही मंजूरी दी थी।
राजा की ओर से उनके वकील ने कहा कि जब चिदम्बरम वित्त मंत्री थे तब उन्होंने प्रधानमंत्री को इस बात से अवगत करवा दिया था कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए किया गया। यह लाइसेंस बेचने की कोई बात नहीं थी।
पहले इस मसले पर पीएम से और बाद में चिदम्बरम से चर्चा हुई। खुद चिदम्बरम ने कहा था कि कार्पोरेट नियमों के मुताबिक शेयर में डायल्यूशन का मतलब 2 जी लाइसेंस की बिक्री नहीं है। जब इक्विटी बेचने का मतलब लाइसेंस बेचना नहीं है तो लाभ कमाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।
राजा ने कहा कि अरूण शौरी ने 26 लाइसेंस बांटे, दयानिधि ने 25 लाइसेंस बांटे और मैंने 122 लाइसेंस बांटे। इस संख्या से कोई फर्क नहीं पड़ता है। किसी भी मंत्री ने नीलामी नहीं की। तो केवल मुझ अकेले से पूछताछ क्यों की जा रही है।
1993 के बाद सभी पूर्व संचार मंत्री जाएं जेल
राजा ने कहा कि यदि पहले आओ पहले पाओ की नीति गलत थी तो 1993 के बाद अब तक के सभी पूर्व संचार मंत्रियों को मेरे साथ जेल में होना चाहिए। विशेष अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान राजा ने यह बात कही। सीबीआई राजा सहित 16 आरोपियों पर आरोप तय कर बहस पहले ही पूरी कर चुकी है।
सीबीआई ने केस की पहली चार्जशीट में राजा और आठ अन्य लोगों को 30 हजार 984 करोड़ के राजस्व नुकसान में आरोपी बनाया था। इसके बाद दूसरी चार्जशीट में डीएमके सांसद कनिमोझी और केलाइग्नर टीवी के सीईओ शरद कुमार का नाम आया। बाद में उन्हें भी जेल भेज दिया गया। ये सभी लोग अदालत के फैसले के इंतजार में तिहाड़ जेल में बंद है।
भाजपा ने साधा पीएम पर निशाना
उधर, राजा के इस बयान के बाद भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जो कुछ राजा ने कहा है भाजपा वो पहले ही कह चुकी है। भाजपा के अनुसार बिना प्रधानमंत्री की जानकारी के इस तरह के फैसले लिए जाना संभव नहीं है।
हालांकि, राजा द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन में एनडीए की नीतियों का पालन किए जाने की बात पर शाहनवाज ने साफ पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अब सच सामने आ रहा है।
चिदम्बरम का आरोपों का इनकार
चिदम्बरम का राजा के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय टूजी स्पैक्ट्रम की नीलामी के पक्ष में था। जबकि राजा के मंत्रालय ने 2001 के रेट के आधार पर ही आवंटन किया। चिदम्बरम ने माना कि पीएम की मौजूदगी में टूजी पर चर्चा जरूर हुई थी लेकिन वह नहीं जो राजा कह रहे हैं। चर्चा विदेशी पार्टनर हासिल करने वाले मामले पर हुई थी बात। स्वान यूनिटेक ने स्पैक्ट्रम नहीं बल्कि नए शेयर बेच कर बनाए नए पार्टनर बनाए। वित्त मंत्रालय ने स्वान यूनिटेक के शेयर इधर-से उधर होने की जांच की थी
Monday, July 25, 2011
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