विनीता- जीने भी तो नहीं दे रहे. कहाँ जीने दे रहे हो ? बस एक एहे धुन सवार हो गयी है. न न और सिर्फ न. अरे बाबा इस न को हाँ में बदलने के लिए मुझे क्या करना होगा ?चलो अब फैसला तुम्हें पर डालती हूँ., पहले ही कह चुकी हूँ, मुझे तुम्हारी हर बात मंजूर है. मैं उसमे कोई अडंगा अडाने वाली नहीं हूँ. कोई ऐसा रास्ता निकालो जिससे तुम्हारी नैतिकता भी बनी रहे, मेरे पति का स्वाभिमान भी बना रहे और मेरी प्यास भी बुझ जाए.
जुनैब- इसका फार्मूला है मेरे पास.लेकिन वह तभी संभव है जब धैर्य से काम लिया जाए , उस पर ठीक तरह से अमल किया जाए . बोलो तो ऐसा नहीं है कि अभी कि अभी कोई जादू हो जाए और सब के कष्ट दूर हो जाएँ. देखो मेरा दिल तो ये कहता है कि आप अपने पति को धोखा मत दो. कम से कम ऐसा दिखावा तो किअरना ही चाहिए. तुम उनसे कह सकती हो कि थोड़ी देर पहले तुमने जो एलान किया था, तुम उसी पर अडिग हो. यानी कि तुम मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए राजी नहीं हो. इस तरह वे समझेंगे कि हम दोनों ने बहुत बड़ा त्याग किया है. वे हमारी इज्जत करने लगेंगे . हम लोग को वे घूमने की इजाजत तो डे ही चुएक हैं. कल सुबह से ही हम दोनों घूमने का प्रोग्राम बनाएंगे , उसके बाद किसी अच्छे से होटल में पहुंचकर मौज मस्ती करेंगे, फिर तुमको जो भी करना हो करना. जितनी चाहो मस्ती करना. सुहागरात मनाना कि सुहाग दिन मनाना . मैं चाहता हूँ कि आप भी मुझसे निराश न हों, मैंने आज तक जानकार तो किसी नन्ही सी चीटी का दिल भी नहींज दुखाया इसलिए, यह तो हो ही नहीं सक्यता कि अपनी चाहने वाली को परेशान करू. जिस तरह तुमने कहा था कि तुम्हारी इच्छा है अपने गालों का चुम्बन देने की, अपने यौवन के उभारों को सहलवाने की, मैं उस सबके लिए तैयार हूँ. मैं खुद भी यह जानने और देखने का इच्छुक हूँ कि जब तुम ऊपर से इतनी खूबसूरत और कामुक लगती हो तो तुम्हारे अंदर के बदन के हिस्से कितने सुन्दर होंगे. हो सकता है कि उस समय मैं बेहोश होकर न गिर जाऊं .
विनीता - चलो, झूठे . झूठ बोलते हो. थोड़ी देर पहले किसका बदन देख रहे थे. मैं बिलकुल नग्न अवस्था में तुम्हारे ऊपर थी. तुमने मुझे कसकर पकड़ा हुआ था . हांलाकि मेरी भी बहुत कुछ इच्छा हो रही थी लेकिन पति का थोड़ा सा लिहाज कर रही थी. भले ही शरीर का अंग-अंग बगाबत कर रहा था मगर शर्मो हया तो कोई चीज होती ही है.
जुनैब- जब इतना सब जानती हो तो ये क्यों भूल गयीं कि उस समय अन्धेरा था और मैं तुम्हारे बदन को देख नहीं पाया था. अगर देख लेता तो हो सकता है वहीं कर कांड हो जाता. फिर सब नैतिकता धरी की धरी रह जाती.
विनीता- मुझे लग्फ्ता है तुम बहूत बड़े कलाकार हो, क्योंकि जब तुम ऊंचे आदर्शों की बात कर रहे थे तो उस समय भी ऐसा महसूस होता था जैसे तुम्हारे मुख से निकले सभी शब्द बिलकुल सत्य हैं. और अब इस बार भी ऐसा ही कुछ महसूस हो रहा है. बात में कहीं कुछ गडबड तो नहीं.
जुनैब- यह अदा भी सिर्फ आप रखती हैं, पल भर में देवता बना लेती हैं और पल भर में बेगाना बना देती हैं.
विनीता- माफ कीजिये , मेरा ये मतलब नहीं था, मैओं तो मजाक के मूड में थी. जब तुमने भरोसा दिलाया है तब जाकर सिर थोड़ा सा हल्का हुआ है. वरना ऐसा लगता था जैसे कि मैं मर ही जाउंगी .
न जाने ऐसा क्या कर दिया है मुझ पर , मैं अब दीवानी से भी ज्यादा दीवानी हो गयी हूँ. एहसास से भी ज्यादा एहसास करने लगी हूँ, दिल में इस तरह के खयालात उभरते हैं जैसे कि मैं इस दुनिया की नहीं बल्कि किसी दूसरी दुनिया की हो गयी हूँ. कभी लगता है जैसे कि हवा में उड़ रही हूँ. और अचानक किसी ने मुझे आकाश से नीचे गिरा दिया गया है. कभी लगता है जैसे मैं कोई सपना देख रही हूँ . सपने में तुम हो , मैं हूँ. हम दोनों की प्यारी सी एल दुनिया है और हम लोग मिलने ही वाले हैं कि फिर आँख खुल जाते हैं और सब कुछ खत्म हो जाता है. ना जाने क्यों ये सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है .
No comments:
Post a Comment