भाग-३८
जुनैब- हाँ ठीक है. मैंने कंडोम मंगा लिया है. अब मैं इसका इस्तेमाल करूँगा. देखो,. मुझे ज्यादा कुछ अनुभव नहीं है, इसलिए आगे का जो भी काम है वो हम दोनों को ही मिलजुलकर करना है.
सलमा- अब जाने भी दो. अभी-अभी बता रहे थे कि विजय चोधरी और उसकी पत्नी दोनों के साथ खूब गुलछर्रे उड़ा चुके हो. जान बोऊझ्कर अब भोले बने हुए हो.
जुनैब- अरे यार , सच बताने का यही तो नुक्सान होता है. लड़कियां तो वैसे ही शकी होती हैं, ऊपर से अगर कोई किसी दुर्घटना के अबरे में सच्ची बात बताता है तो नुक्सान हो जाता है. बदले में ऐसे अतने मिलते हैं.
सलमा- अच्छा सोरी बाबा, नाराज मत होना . और हाँ वो मिसेज विजय चोधरी वाली कहानी मुझे भी बता देना . मैं भी जानना चाहती हूँ की आखिर दुनिया में ऐसे कैसे लोग होते हैं. मैंने तो देखा -सुना है की लोग अपनी पत्नी की तरफ किसीको आँख उठाकर भी नहीं देखने देते. अगर कोई देखले या कुछ कहदे तो जान लेने -देने पर आमादा हो९ जाते हैं और आप एक ऐसे शख्स की कहानी बता रहे हो जो अपनी पत्नी को अपने सामने तुम्हारे हवाले करना चाहता था. वह महिला भी बड़ी पक्की थी जो अपने पति के सामने ही तुम्हारे साथ सोने के लिए तैयार थी. वे कौन से कारण थे, कैसा माहौल रहा होगा ? क्या कोई राजी खुशी ऐसा निर्णय ले सकता है, या फिर किन परिस्थितियों में ऐसा हो सकता है, मैं उन बारीकियों को जानना समझना चाहती हूँ.
जुनैब- बहुत गहरी सोच रखती हो. इतनी दूर की कौड़ी मत लाया करो. मैं जानता हूँ तुम जीनियस हो, मगर अपनी विद्वता को ऐसे एहे जाया करना अच्छी बात नहीं है. फिर भी तुम्हारे इंटरेस्ट को देखते हुए मैं तुम्हें जरूर बतलाऊँगा . मैं हर वो चीज बताने की कोशिश करूंगी जो मैं की , कही या फिर महसूस की.
सलमा- मैं भी आपसे यही उम्मीद रखती हूँ. जो भी कहना सच कहना . मैं भी आज सुनने के मूड में हूँ. चाहे जो भी होगा मुझे सब मंजूर होगा. ये मत समझना की आपने अगर पहले किसी के साथ सेक्स किया होगा या रोमांटिक सम्बन्ध बनाए होंगे तो मैं ज़रा भी नाराज नहीं हो सकती. अब से पहले आपने जो भी किया या मैंने जो भी किया . उसका हिसाब -किताब हम लोग नहीं ले दे सकते. और अपने भविष्य के संबंधों की नीव हम गुजरे हुए लम्हों पर नहीं रख सकते.
जुनैब- मैं तुमसे सहमत हूँ. और देख ही रही हो, मैं भी कोशिश में हूँ की हर चीज को क्लियर करू. जो हुआ वह मेरे वश में नहीं था. मैंने कुछ भी जान बूझकर नहीं किया था. उस दिन ऐसा हुआ कली मैं और मिसेज चोधरी पास में बैठे बा कर ही रहे थे की तब तक इनकम तीस ऑफीसर विजय चोधरी कमरे में आ गये. मैं उनकी पत्नी के पास से थोड़ा सा अलग हटने की कोशिश की तो मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोले-
- तुम घबरा क्यों रहे हो ? इसे अपना ही घर समझिए. यह मेरी पत्नी विनीता है. तुम्हारी ही उम्र की है. तुम चाहो तो इसके साथ रोमांस कर सकते हो. घूमने -फिरने जा सकते हो. साथ में फिल्म देखने या मुंबई घूमने भी जा सकते हो. यह गाड़ी भी अच्छी चला लेती है, चाहो तो ड्राइवर को न लेजाकर तुम दोनों ही चले जाना. इससे फायदा ये होगा की तुम दोनों के प्राइवेसी बनी रहेगी . मुझे और इसको कोई ऐतराज नहीं होगा.
विनीता- अगर आप इन्हें खुश करते हैं तो इनके सामने भी मैं अपने आपको तुम्हारे सामने समर्पित करने के लिए तैयार हूँ.
विजय चोधरी- हाँ, तुम्हारी इच्छा है. जैसे चाहो करना . यहाँ कोई आ भी नहीं सकता. किसीको कुछ पा भी नहीं चलेगा. मुश्किल से दस मिनिट की बात है. उसके बाद तुम चाहे जो करना . और हाँ, मेरा दावा है, तुम्हें आनंद भी बहुत आएगा . जब मैं अपनी नाजुक जीभ से तुम्हें मजा देने की कोशिओश करुंगा तो तुम सब कुछ भूलकर मस्त हो जाओगे. इस अबत को मैं लिखकर दे सकता हूँ. इसके पहले मैं चाहता हूँ की विनीता के साथ तुम बाथरूम जाकर फ्रेश होकर आ जाओ.
सलमा- वाव, कोई मर्द इतना सेक्सी कैसे हो सकता है ?
जुनैब- मैंने उसे देखा है. बिनीता मुझे बहुत शानदार बाथरूम में ले गयी थी. वहाँ उसने मेरे साथ खूब मस्ती भी की और मुझे अच्छी तरह से नहलाया भी. मुझे अच्छा -खासा मजा आ चुका था. म८इन अब अपने आपको आगे की कार्रवाई के लिए मानसिक रूप से तैयार कर चुका था. बाथरूम से जब हम निकले तो मैंने सिर्फ एक तौलिया लपेट रखी थी. विनीता बेहद झीनी नाइटी में थी मैं यह देखकर दांग रह गया की सामने बिलकुल नग्न अवस्था में विजय चोधरी खडा था. वह अपने मुरझाए हुए अंग को एक्टिव करने की कोशिश कर रहा था. मेरा नाजुक अंग तो भीमकाय रूप धारण कर चुका था. विनीता ने मौके का फायदा उठाकर मेरी तौलिया शरीर से अलग कर दी. अब मेरा अनाग दहाड़ने लगा. विनीता मुझसे लिपट गयी. तभी वह आया और प्यार से उस पर हाथ फिराने लगा. उसका सहलाना पहले तो मुझे अजीब लगा मगर जब विनीता ने अपने होठ मेरे दहकते हुए होठों से सटाए तो मैं भी उत्तेजक हो गया.
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